YOUR MONEY OR YOUR LIFE Vicki Robin Books In Hindi Pdf Summary

YOUR MONEY OR YOUR LIFE Vicki Robin इंट्रोडक्शन इमेजिन करो आप सड़क पर पैदल चलते हुए घर की तरफ जा रहे हो कि तभी कोई आकर पीछे से आपके सिर पर गन रख देता है और कहता है” पैसा प्यारा है या जान प्यारी है”? ऐसे में आप क्या करोगे? ज़ाहिर है आप फौरन अपना वॉलेट निकालकर चोर के हाथ में दे दोगे क्योंकि जान बची रही तो पैसा फिर भी कमाया जा सकता है. लेकिन क्या यही सच है? जान क्या पैसे से बढ़कर होती है या ये सिर्फ़ एक कहावत है? वैसे logically तो यही सच है कि इन्सान की जान पैसे से ज्यादा कीमती है. लेकिन असल में क्या हम इसी फिलोसफ़ी पर जीते है? कुछ लोग ऐसा बोल सकते है कि उन्हें अपनी जॉब से प्यार है, या उन्हें अपना काम पसंद है पर ऐसा नहीं है कि हर कोई अपने काम से और अपनी सैलरी से सेटिसफाईड हो. लाइफ एक रेस की तरह है. हर रोज़ हर इन्सान किसी ना किसी गोल को अचीव करने के लिए भागता नज़र आता है, सबको लाइफ में ख़ुशी चाहिए, सुकून चाहिए, ऐशो-आराम चाहिए, सारे सुख चाहिए और सबसे बढ़कर तो ये कि आदमी एक ऐसी जिंदगी चाहता है जहाँ उसे कोई काम ना करना पड़े, बस वो आराम से बैठकर मज़े की लाइफ जिए. लेकिन इससे पहले कि ऐशो-आराम चाहिए, सारे सुख चाहिए और सबसे बढ़कर तो ये कि आदमी एक ऐसी जिंदगी चाहता है जहाँ उसे कोई काम ना करना पड़े, बस वो आराम से बैठकर मज़े की लाइफ जिए. लेकिन इससे पहले कि वो फिनिश लाइन तक पहुंचे, लोग दस-दस, बारह-बारह घंटे काम करते है और काफी हार्ड वर्क भी करते है इसके बावजूद उन्हें अपनी पूरी मेहनत का पैसा नहीं मिलता. हर इन्सान हमेशा इसी उम्मीद पर जीता है कि शायद एक दिन वो अपनी मनपसंद लाइफ जी सके, एक ऐसी लाइफ जो सेटिसफेक्शन से भरी हो, जहाँ हर किस्म का सुकून और आराम हो. ये बुक इसलिए लिखी गई है ताकि आपको तस्वीर का दूसरा पहलू दिखा सके. बजाये इसके कि हम अपनी बारी आने का वेट करे, क्यों नहीं हम आज ही अपने लिए कोई रास्ता बना ले और अपने हर सपने को सच करने की कोशिश करे! ये समरी आपको वो तरीका बताएगी कि आप अपने वर्क और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस कर पायेंगे. जिससे आपको अपने काम के साथ-साथ फेमिली लाइफ, फ्रेंड्स और सबसे बढ़कर खुद के लिए टाइम मिलेगा. यानी एक ऐसा रास्ता जहाँ आपको पैसे या लाइफ में से किसी को एक ना चूज़ करना पड़े. तो अब अगली बार कोई अगर आपसे पूछे” पैसा या लाइफ” तो कहिएगा” मैं दोनों को चूज़ करता हूँ, थैक्स”. YOUR MONEY OR YOUR LIFE Vicki Robin MONEY: THE TENDER TRAP फर्स्ट माइंडसेट जो हमको तोडना है, वो है ये बिलिफ कि ज्यादा पैसे वाले लोग बैटर लाइफ जीते है. कई लोग सिर्फ हार्ड वर्क पर फोकस करते है ताकि वो ऐशो-आराम की लाइफ जीने के लिए ज्यादा से ज्यादा कमा सके लेकिन ऐसे लोग ये भूल जाते है कि उनका ये माइंडसेट ही उन्हें मनी के जाल में फंसा रहा है. आप पैसे के पीछे भागते हो, पैसा आपसे और दूर भागता है. तो हुआ ना ये मनी ट्रैप. लोग अक्सर इस ट्रैप में जिंदगी भर फंसे रहते है, उन्हें ये तक पता नहीं होता कि इस ट्रैप से बाहर कैसे निकलना है. इसे जानने से पहले हम एक फुलफिलमेंट कर्व के श्रू आपके इनफ लेवल को जानने की कोशिश करेंगे. ये जानना आपके लिए इम्पोर्टेट होगा कि आपके लिए कितना इनफ यानि काफी है, अगर ये नहीं पता होगा तो आपको कभी सेटिसफेक्शन नहीं मिलेगी. इसके बिना आप पैसे के ट्रैप में फंसकर रह जाओगे. तो हम फुलफिलमेंट कर्व की बात कर लेते है जो सेटिसफेक्शन और मनी के बीच का कनेक्शन दिखाता है. फुलफिलमेंट कर्व वो है जिससे आपको पता चलता है कि पैसा कैसे और कब आपके लिए ट्रैप बना रहा है. ਜੇ ਗਈ फुलफिलमेंट कर्व सर्वाईवल मोड को पार करने से स्टार्ट होता है, जिसका मतलब है लाइफ में बेसिक ज़रूरतों का होना. जैसे खाना-पीना, कपड़े-लत्ते और रहने के लिए घर, ये सारी चीज़े हर इन्सान की बेसिक ज़रूरतों में शामिल है. फुलफिलमेंट का नेक्स्ट लेवल है कम्फर्ट जोन. ये लेवल सिर्फ सरवाईविंग नहीं बल्कि एक कम्फर्टेबल लाइफ जीने के बारे में है. जैसे हमें तीनों वक़्त का पेट भरकर खाना मिल रहा है, हम बीच-बीच में स्नैक्स भी खाते है, रहने को एक कम्फर्टेबल घर भी है, चैन की नींद सोते है, स्टडी करते है, खेलते है, अपना एंटरटेनमेंट भी करते है यानि एक ऐसी लाइफ जीना जो एक आम इन्सान चाहता है. इसका अगला लेवल है एक luxurious लाइफ जीना, जहाँ हमारे पास सारे ऐशो-आराम की चीज़े होती है जैसे ज्वेलरी, फाईव स्टार होटल में खाना, कीमती कपड़े और जूते. कुल मिलाकर इस लेवल पर जीने वाले लोग लाइफ की हर लक्जरी एन्जॉय करते है. इसके बाद का लेवल है पीक, ग्राफ का एक एक्साईटिंग पार्ट जिसे”इनफ” कहा जाता है. ये वो लेवल है जो आपको समझना जरूरी है, यानि फुलफिलमेंट का वो हाएस्ट लेवल जो आप अचीव कर सकते हो. “इनफ” एक खूबसूरत जगह है जहाँ पीस और ट्रस्ट है. ये वो जगह है जहाँ आपके पास सरवाईंग की जरूरते मौजूद है, कम्फर्ट लिविंग भी है और लाइफ की लक्ज़रीज़ पर खर्च करने के लिए भरपूर पैसा भी है. 1 जरूरते मौजूद है, कम्फर्ट लिविंग भी है और लाइफ की लक्ज़रीज़ पर खर्च करने के लिए भरपूर पैसा भी है. ये वो लेवल है जहाँ आप समझते है कि पैसा आपकी लाइफ में क्या लेकर आया है, लेकिन आप फ़िजूल खर्च करके पैसे को खुद को कण्ट्रोल नहीं करने देते. नेक्स्ट लेवल है क्लटर. ये वो स्टेज है जहाँ आप इनफ से आगे चले जाते है और बेहिसाब पैसा खर्च करने के बावजूद भी आपको सेटिसफेक्शन नहीं मिलती. ये लाइफ की बेहद डेंजरस स्टेज है क्योंकि क्लटर का मतलब है एक ऐसी अंधी दौड़ जहाँ कभी सेटिसफेक्शन नहीं मिलती. इन्सान बस एक के बाद एक चीजों के पीछे भागता चला जाता है और अंत में ये क्लटर आपको बर्बादी की तरफ लेकर जाती है. क्लटर उन लोगों ने बनाया है जो सोचते है कि लाइफ में पैसे कमा कर वो सुकून और शान्ति से जी पाएंगे. ऐसे लोग”मोर इज़ बैटर” के कांसेप्ट पर यकीन रखते है, उन्हें लगता है ज्यादा से ज्यादा चीज़े जोड़कर उन्हें सेटिसफेक्शन मिलेगी. पर सच तो ये है कि ऐशो-आराम की ये चीज़े हमे सुखी और संतुष्ट नहीं बनाती बल्कि वो ईमोश्न्स बनाते है जो हमे पैसे खर्च करके फील होते लोगों को कार की जरूरत नहीं है. उन्हें रीस्पेक्ट चाहिए, उन्हें फैंसी कपड़े नहीं चाहिए, उन्हें कॉन्फिडेंस चाहिए. पैसे के पीछे भागना हमे गलत दिशा में ले जाता है. इसलिए आपको अपना “इनफ” खुद डिसाइड करना होगा ताकि आप हैप्पी लाइफ एन्जॉय कर सके. YOUR MONEY OR YOUR LIFE Vicki Robin MAKING PEACE WITH THE PAST अब जबकि आप अपना “इनफ” लेवल जान चुके है तो अब हम आपको मनी के साथ आपके पास्ट रिलेशनशिप याद दिलाएँगे. अपने पास्ट के बारे में जानना इसलिए भी हेल्पफुल है कि ये आपको अपनी पैसे खर्च करने की आदत और जो पैसा आपने अपने हार्ड वर्क से बचाया है, उसके बारे में अवेयर रखेगा. इस एक्सरसाईज़ का मकसद आपका ईगो बूस्ट करना या आपका कांफिडेंस कम करना नहीं है. जब आप जान लेंगे कि पैसे के साथ आपका क्या रिलेशनशिप है तो ये नॉलेज आपको अपनी फाईनेंशीयल स्टेबिलिटी एनालाईज़ करने में हेल्प करेगी और सबसे इम्पोर्टेट ये आपको अपनी नेट वर्थ जानने में भी हेल्प करेगी. दो तरीके है जिनसे आप अपने पास्ट को समझ सकते है और अपनी करंट फाईनेंशीयल स्टेट के बारे में जान सकते है. पहला तरीका है: ये पता करना कि आपने अपनी जिंदगी में कितना पैसा कमाया है. दूसरा: अपने एसेट्स और लाएबीलीटीज़ केलकुलेट करके अपनी एक बैलेंस शीट क्रिएट करना. ये केलकुलेट करना कि पूरी जिंदगी हमने कितना कमाया, सुनने में थोडा अजीब लगता है. कई लोग कमाया, सुनने में थोडा अजीब लगता है. कई लोग अपनी इनकम का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं रखते, इसलिए अगर उनसे अचानक ये सवाल किया जाए तो ये उन्हें थोडा मुश्किल भी लगेगा और बकार की बात भी, लेकिन ऐसा सोचना गलत है. वैसे अगर आप पैसे को लेकर अपना नज़रिया चेंज करना चाहते हो और लाइफ में एक सीरियस चेंज लाने के बारे में सोच रहे हो तो जितना जल्दी स्टार्ट कर सको, उतना अच्छा होगा. आपका गोल है, जो सच है उसे एक्सेप्ट करना और ये पता करना कि आज तक आपने एक्जेक्ट कितना पैसा कमा लिया होगा. शायद इसके बाद आपको ये जानकार हैरानी होगी कि आज तक आपने कितनी बड़ी रकम कमाई है. नेक्स्ट स्टेप है, अपनी नेट वर्थ जानना क्योंकि ये जानना जरूरी है कि इतने सालों तक लगातार हार्ड वर्क करने के बाद आपने जो कुछ कमाया, उस पैसे का आखिर हुआ क्या? जो आपने कमाया, क्या वो जादू से गायब हो गया या आपके पास अभी भी काफी कुछ बचा है? आपकी मेहनत का नतीजा आखिर क्या निकला? क्या आपके पास कुछ है जो बता सके कि आपने यहाँ-यहाँ अपना पैसा इन्वेस्ट किया है? अब जबकि आपको अपनी टोटल इनकम मालूम है तो अब टाइम आ गया कि अपनी लाएबिलिटीज़ भी पता कर ली जाए. अपना नेट वर्थ केलकुलेट करना उसी चीज़ का पार्ट हो जहाँ आपको रिजल्ट जानने के लिए तैयार रहना है. अब यहाँ दो चीज़े हो सकती है. पहली: अच्छा-खासा कमाने के बावजद आपके ऊपर काफी तैयार रहना है. अब यहाँ दो चीज़े हो सकती है. पहली: अच्छा-ख़ासा कमाने के बावजूद आपके ऊपर काफी लोन और उधार है और आपके खर्चे बहुत ज्यादा है. दूसरा: अपनी पास्ट और करंट इनकम की वजह से आप अभी भी एक स्टेबल पोजीशन में है. कई लोगों को ये बात इसी स्टेप के बाद मालूम पडती है, और ये डिस्कवरी उनकी पूरी लाइफ ही चेंज कर देती है. नीचे दी गई कैटेगरी से आप अपना नेट वर्थ केलकुलेट कर सकते हो. एसेट्स के लिए: आपके पास लिक्विड एसेट्स है या फिक्स्ड एसेट्स. लिक्विड एसेट्स कुछ भी हो सकता है जो तुरंत कैश में बदला जा सके जैसे ई-वालेट या डेबिट कार्ड. जबकि फिक्स्ड एसेट्स प्रॉपर्टी से जुड़ा होता है जैसे आपका घर और कार. हालाँकि आपको ये श्योर करना होगा कि आपका घर और कार वाकई में एसेट है. यानि इनसे आपका पैसा बच रहा हो नाकि आपको इन पर खर्च करना पड़े. नेक्स्ट है आपकी लाएबीलीटी जो हर उस चीज़ से जुड़ी है जो आपकी है या आपने ली है जैसे कि लोन, बिल्स या बाकि के पेमेंट और सर्विस. आपको हर चीज़ इसमें शामिल करनी है, कुछ भी छोड़ना नहीं है. नेट वर्थ पता करने के लिए सिंपली अपने सारे एसेट्स जोड़ दो और लाएबीलीटीज़ घटा दो. जो अमाउंट बचता है, वो आपकी नेट वर्थ है जो आप सालो के हार्ड वर्क के बाद शो कर सकते हो. एक बार एक औरत जिसका तलाक हो गया था, ने एक सेमीनार अटेंड किया जहाँ पर इसी स्टेप पर बात हो के बाद शो कर सकते हो. एक बार एक औरत जिसका तलाक हो गया था, ने एक सेमीनार अटेंड किया जहाँ पर इसी स्टेप पर बात हो रही थी. अपनी पूरी लाइफ वो खुद को एक नाकामयाब औरत समझती रही जिसे लगता था कि उसका अपनी मैरिड लाइफ में कभी कोई फाईनेंशीयल कोंट्रीब्यूशन नहीं रहा और शायद इसीलिए उसे सैटलमेंट मनी लेने में भी शर्म महूसस हो रही थी. उसे लग रहा था कि जो पैसा उसने कमाया नहीं है, उस पर उसका कोई हक नहीं है. शुरू में उस औरत को ये नहीं लगा कि ये स्टेप उसके लिए है. लेकिन जब उसने कोशिश की तो देखा कि वो अपनी पूरी लाइफ पैसे कमाती करती आ रही थी, बस उसे कभी एहसास ही नहीं हुआ. अपने सारे रिकार्ड देखने के बाद उसे पता चला कि उसने छोटी-मोटी जॉब करके $50,000 से भी ज्यादा कमाया था जब वो मैरिड लाइफ में थी. बस, फिर क्या था जैसे ही उसने इस फैक्ट के बारे में जाना, उसके अंदर इतना कॉन्फिडेंस आ गया कि उसने फिर से जॉब के लिए अप्लाई किया और उसे डबल सैलरी पर एक बढिया जॉब मिल भी गई. ये स्टोरी उन सबके लिए एक मोटिवेशन है जो इस स्टेप से डरते है. इसलिए ऐसे ही हवा में गेस मत करो कि आपकी नेट वर्थ नेगेटिव होगी. ये रिजल्ट आपकी लाइफ में किसी ना किसी तरीके से कोई ना कोई चेंज तो जरूर लायेंगे. अगर आपको पता लगे कि आपके ऊपर काफी उधार चल रहा है तो ये चीज आपको और उसे कभी एहसास ही नहीं हुआ. अपने सारे रिकार्ड देखने के बाद उसे पता चला कि उसने छोटी-मोटी जॉब करके $50,000 से भी ज्यादा कमाया था जब वो मैरिड लाइफ में थी. बस, फिर क्या था जैसे ही उसने इस फैक्ट के बारे में जाना, उसके अंदर इतना कॉन्फिडेंस आ गया कि उसने फिर से जॉब के लिए अप्लाई किया और उसे डबल सैलरी पर एक बढिया जॉब मिल भी गई. ये स्टोरी उन सबके लिए एक मोटिवेशन है जो इस स्टेप से डरते है. इसलिए ऐसे ही हवा में गेस मत करो कि आपकी नेट वर्थ नेगेटिव होगी. ये रिजल्ट आपकी लाइफ में किसी ना किसी तरीके से कोई ना कोई चेंज तो जरूर लायेंगे. अगर आपको पता लगे कि आपके ऊपर काफी उधार चल रहा है तो ये चीज़ आपको और ज्यादा मेहनत करने के लिए मोटिवेट करेगी. लेकिन अगर आप खुद को फाईनेंशीयली स्टेबल पाते हो तो अब आप रिलेक्स हो सकते हो. अब आपको फालतू में टेंशन लेना छोड़ देना चाहिए. जो चीज़े आपके कण्ट्रोल में नहीं है उन्हें लेकर स्ट्रेस्ड फील करने की जरूरत नहीं है. एक हज़ार मील चलने के लिए भी पहले एक कदम उठाना पड़ता है, इसलिए हम वही खड़े नहीं रहते बल्कि आगे बढ़ते है. तो शुरुवात आज से ही कर दो और एक स्टेप के बाद स्टेप लेते रहो. लगातार आगे बढ़कर ही आप अपनी मनपसंद लाइफ जीने का सपना पूरा कर सकते हो. YOUR MONEY OR YOUR LIFE Vicki Robin VALUING YOUR LIFE ENERGY ( काम क्या है) What is work? इस सवाल का लोग टिपिकल यही जवाब देते है: हम काम इसलिए करते है ताकि पैसे कमा सके और अपने खर्चे पूरे कर सके? Robert Theobald, जो एक इकोनॉमिस्ट है, उनका तो ये कहना है कि काम एक ऐसी चीज़ है जो लोग मन मारकर मजबूरी में पैसे कमाने के लिए करते है. जबकि फेमस पोएट खलील जिब्रान, का मानना था कि काम प्यार की तरह है जो करने वाले को धीरे-धीरे मारता है. पैसे को लेकर आपकी डेफिनेशन रॉबर्ट या खलील जिब्रान की तरह हो सकती है. लेकिन ये एक सवाल जरूर हमारे सामने खड़ा करता है: क्या काम एक स्ट्रगल है या सक्सेस? ये चैप्टर काम को लेकर आपके आईडिया को रीडीफाइन करेगा. इसमें काम को लेकर जो हमारी गलतफेमियाँ है, उन्हें डिस्कस किया जाएगा और लाइफ एनर्जी की इम्पोर्टेस के बारे में भी बताया जाएगा. तो इस चैप्टर का सबसे इम्पोर्टेट सवाल है: लाइफ एनर्जी टाइम के पर्पोशनल है (Life Energy is proportional to time) यानी अगर आपका ज्यादातर टाइम काम में गजरता है तो आपकी सारी लाइफ एनर्जी टाइम के पर्पोशनल है (Life Energy is proportional to time) यानी अगर आपका ज्यादातर टाइम काम में गुजरता है तो आपकी सारी लाइफ एनर्जी काम पर फोकस्ड है. हालाँकि सवाल ये है कि इससे आपको अचीव क्या हुआ? पुराने वक्त में लोग दिन में मैक्सिमम तीन घंटे काम करते थे. बाकि टाइम वो खुद के लिए या दूसरो पर खर्च करते थे जैसे लर्निंग में, लोगों से मिलने जुलने में या चीज़े एक्सप्लोर करने में. लेकिन आज काम के प्रति हमारा नजरिया बदल चुका है. आज फुल एम्प्लॉयमेंट का ज़माना है जो हर कोई एडोप्ट करना चाहता है, हम ये नहीं कहते कि किसी दूसरे के गोल्स पर डिपेंडेंट रहना गलत है पर सिर्फ एक एइम्प्लोई बनकर अपनी पूरी लाइफ एनर्जी उसी में खर्च कर देना भी सही नहीं माना जाएगा. यानि आपका खुद के लिए कोई टाइम नहीं बचा, आप सिर्फ किसी दूसरे के लिए मेहनत करते रहे. यही कारण है कि आज के टाइम में फ्री टाइम की भी एक अलग ही डेफिनेशन हो गई है. ज्यादा फ्री टाइम होना कुछ लोगों की नजरों में अनएम्प्लॉयमेंट है जोकि एन्जॉयमेंट के बजाए एक बोझ बन जाता है. यानि सिंपल वर्ड्स में बोले तो जैसे-जैसे टाइम गुजरता है, फ्री टाइम की वैल्यू कम होती जाती है जबकि काम की वैल्यू तेज़ी से बढती जाती है. हमारे पास काम करने के कई कारण हो सकते है. जैसे कि – जैसे हम पैसा सेंस ऑफ़ सिक्योरिटी के लिए कमाते है, या इसलिए कमाते है क्योंकि काम करना – कि – जैसे हम पैसा सेंस ऑफ़ सिक्योरिटी के लिए कमाते है, या इसलिए कमाते है क्योंकि काम करना एक जरूरत है जो हर कोई करता है. हम इसलिए भी काम कर सकते है क्योंकि हमे नई-नई स्किल्स और चीज़े सीखने को मिलती है और हम दूसरो को सर्व करते है या अथॉरिटी बनकर दूसरो को इन्फ्लुएंस कर सकते है. एक और कारण भी है कि आपको सोशलाईजिंग करना यानी लोगों से मिलना-जुलना पसंद है. इसी तरह एक कारण है बैलेंस लाइफ जीने के लिए टाइम का सही इस्तेमाल करना. इन दिए गए रीजन्स में से आप देख सकते है कि इसके दो फंक्शन है. एक है फाईनेंशीयल और दूसरा है पर्सनल. अब काम करने के पर्सनल रीजन अलग-अलग हो सकते है लेकिन इस लिस्ट में इकॉनोमिक फंक्शन एक ही है और वो है पैसा कमाना. लेकिन इस सबका मतलब क्या है ? इसका मतलब है कि आप सिर्फ पैसे के लिए काम नहीं करते बल्कि अपने कुछ पर्सनल रीजन्स के लिए भी करते हैं. यही एक बड़ी वजह है कि बहुत से लोग खुद को अपने काम से डिफाइन करना पसंद करते है, उन्हें लगता है कि उनका काम ही उनकी असली पहचान है, और काम के बिना उनकी लाइफ का कोई वजूद नहीं है. यानि काम को पैसे से एक ही चीज़ जोडती है, जो है आपकी सैलरी या अर्निंग. आप अपने बाकि पर्सनल रीजन्स बिना पेमेंट लिए और बिना मेहनत किये भी पूरे कर सकते हो. यही वजह है कि हमे अपनी लाइफ पैसे रीजन्स बिना पेमेंट लिए और बिना मेहनत किये भी पूरे कर सकते हो. यही वजह है कि हमे अपनी लाइफ पैसे से डिफाइन नहीं करनी चाहिए बल्कि उसके पीछे एक स्ट्रोंग वजह होनी चाहिए. अपने काम से खुद को डिफाइन करना छोड़ दो, आप उससे कहीं बढ़कर हो. अपनी सारी लाइफ एनर्जी सिर्फ पैसे पर फोकस मत करो. लाइफ में पैसे के अलावा और भी चीज़े है जिन पर आपका फोकस होना चाहिए. आपका जॉब या बैंक अकाउंट आपकी लाइफ का पर्पज डिफाइन नहीं करता. हमारी पहचान सिर्फ एक एम्प्लोई नहीं है बल्कि हम किसी के पेरेंट है, किसी की औलाद, किसी के भाई-बहन और दोस्त है, हम अपने पैसे के अलावा भी बहुत कुछ है. अब टाइम है कि हम” वर्क” को रीडिफाइन कर ले. वर्क यानि कोई भी ऐसी एक्टिविटी करना जो आपको पर्पज और प्रोडक्टीविटी की फीलिंग दे. वर्क और मनी एक दूसरे के इक्वल कभी हो ही नहीं सकते. इसलिए अब वक्त आ गया है कि हम इन दोनों को दो अलग-अलग चीजों के तौर पर देखना शुरू कर दे जो एक दूसरे से एकदम अलग है. वर्क और पैसे के बीच का फर्क समझने के बाद ही हम अपनी लाइफ के बाकि एस्पेक्ट को भी उतना ही इम्पोर्टेस दे पायेंगे. लोग अक्सर कहते है कि वो अपनी लाइफ में अपनी जॉब की वजह से नाखुश है. लेकिन जब हम सारी चीजों को एक कम्प्लीट पिक्चर के तौर पर देखना शुरू करते है, जब हम अपनी लाइफ को अलग नजरिए से देखना शरू करते है. तभी वो पल को अलग नज़रिए से देखना शुरू करते है, तभी वो पल आता है जब हमे सच्ची ख़ुशी मिलती है. ख़ुशी कभी फ़ोर्स नहीं की जा सकती. ये हमारा अधिकार है कि ये हमे मिले. एक बार अगर आपने अपने काम और पैसे के बीच फर्क करना सीख लिया तो आप देखोगे कि आपका पैसा आपकी लाइफ एनर्जी के बदले में मिल रहा है और इसलिए आप आज जितना इसकी वैल्यू करते हो, उससे और ज्यादा करना स्टार्ट कर दो. सिम्पली बोले तो पैसा हमारी लाइफ एनर्जी है. हमारी लाइफ एनर्जी सिर्फ शब्दों से नहीं बल्कि एक्श्न से डीफाइन होती है. ये उन चीजों पर डिपेंड करता है जिनमे हम अपना टाइम इन्वेस्ट करते है. हमें कोई चीज़ सिर्फ इसलिए नहीं करनी कि हमे करनी है बल्कि वो चीज़ इसलिए करनी चाहिए क्योंकि वो हमारी पर्सनेलिटी का एक हिस्सा है. एक बार जब हम वर्क और मनी के बीच का लिंक तोड़ देंगे तो हम खुद को फिर से पहचान पायेंगे, अपने वैल्यूज़, बिलिफ्स और सेल्फ वर्थ के साथ, आप अपने लाइफ पर्पज के साथ फिर से शुरुवात कर सकते हो और अपनी लाइफ वापस ट्रैक पर ला सकते हो. जैसे एक्जाम्पल के लिए मान लो आपके अंदर एक टीचर बनने की स्किल्स है. पर आप कंप्यूटर प्रोग्रामर बनने की सोचते हो क्योंकि इसमें ज्यादा पैसा है. इसलिए जब कोई आपसे पूछेगा कि आप क्या करते हो और आप कहते हो कंप्यूटर प्रोग्रामर, तो ये चीज़ आपके ऊपर लॉन्ग टर्म में काफी ज्यादा इम्पैक्ट लाइफ पर्पज के साथ फिर से शुरुवात कर सकते हो और अपनी लाइफ वापस ट्रैक पर ला सकते हो. जैसे एक्जाम्पल के लिए मान लो आपके अंदर एक टीचर बनने की स्किल्स है. पर आप कंप्यूटर प्रोग्रामर बनने की सोचते हो क्योंकि इसमें ज्यादा पैसा है. इसलिए जब कोई आपसे पूछेगा कि आप क्या करते हो और आप कहते हो कंप्यूटर प्रोग्रामर, तो ये चीज़ आपके ऊपर लॉन्ग टर्म में काफी ज्यादा इम्पैक्ट डालेगी. वो इसलिए क्योंकि आपके इनर और आउटर सेल्फ के बीच हमेशा एक जंग छिड़ी रहेगी और ये मुसीबत तभी हल होगी जब आप अपने पैशन और अपने जॉब के बीच फर्क करना सीखोगे. तो अगली बार जब आपसे पूछा जाए तो आप गर्व से कहें कि आप टीचर हैं पर पैसे कमाने के लिए कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की जॉब करते हैं. इससे आपको अपने चुने गये करियर के साथ तालमेल बैठाने में आसानी होगी और आप इसे रीस्ट्रक्चर कर पाएंगे. हो सकता है आप अपनी सैलरी से पैसे बचाकर टीचर बनने की ट्रेनिंग लेने के बारे में सोचे या आप कुछ और चीज़े करना पसंद करे जैसे कि हाईकिंग, स्विमिंग, बेसबॉल वगैरह. एक बार आपने पैसे के लिए काम करने और खुद के लिए काम करने के बीच जो फर्क है, वो समझ लिया तो समझो आपकी लाइफ में खुद ही बदलाव आने में लगेंगे, ऐसे बदलाव जो आपको आज़ादी, ख़ुशी और फुलफिलमेंट से भर देगी . YOUR MONEY OR YOUR LIFE Vicki Robin THREE QUESTIONS पैसा आपकी लाइफ एनर्जी है. पहले चैप्टर में हमने डिस्कस किया था कि पैसा और काम हमेशा इक्वल नहीं होते. इस चैप्टर में हम सीखेंगे कि कैसे वापस ट्रैक पर जाकर हमे एक बार फिर से अपनी लाइफ का पर्पज ढूंढना है और इसके लिए हम उन तीन अहम् सवालों पर डिस्कस करेंगे जो आपकी लाइफ एनर्जी के बारे में है. तो पहला सवाल है: जहाँ और जिस काम में भी आप अपनी एनर्जी और टाइम लगाते है, क्या वो आपको ख़ुशी और फुलफिलमेंट का एहसास देती है? ये इसलिए पूछा जा रहा है कि ताकि आप अपनी स्पेंडिंग हैबिट पर एक नज़र डाल सको. हर कैटेगरी में आपको ये सवाल खुद से करना चाहिए कि क्या ये आपको सेटिसफेक्शन देता है या नहीं इससे आपको पता चल जाएगा कि आपके ऐसे कितने ऑटोमैटिक खर्चे है जो आपको सेटिसफाई नहीं कर रहे बल्कि सिर्फ आपके पैसे लूट रहे है. आप में से शायद कल लोग कारण देना चाहे कि वो सिर्फ आपके पैसे लूट रहे है. आप में से शायद कुछ लोग कारण देना चाहे कि वो चीज़े क्यों खरीदते है. जैसे कि आप कहोगे कि किताबें खरीदना एक अच्छी हैबिट है, इनसे हमे नॉलेज मिलती है या आप बोलोगे कि ज्यादा जूते खरीदने में कोई बुराई नहीं क्योंकि ये अलग-अलग ड्रेस के हिसाब से चल जाते है. आप चाहे जितना मर्जी ख़ुद का बचाव करने की कोशिश करो पर असलियत तो ये है कि कोई आपसे इन खर्चा के बारे में नहीं पूछेगा क्योंकि किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. ये स्टेप बेस्ट तब होगा जब हर इन्सान इसे ख़ुद और पूरी ईमानदारी से करे. जैसे कि एक फेमस कहावत है” नो ब्लेम, नो शेम” जोकि आपकी पर्सनल चीज़ है. इसमें डरने या शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं है. अगला सवाल जो आपको खुद से पूछना चाहिए, वो है: वो सारी चीज़े जिन पर आप अपना पैसा और एनेर्जी खर्च करते हो, क्या आपको आपके पर्पज और गोल्स के करीब लाती है जो आपने अपनी लाइफ में सेट किया है या आपकी करंट वैल्यूज़ के हिसाब से ये चीज़े मैच करती है? ये आपको वो बकेट लिस्ट रीमाइंड कराने के लिए है जो आप हर साल और अपने हर बर्थडे पर बनाते हो. ये वो पाली.. तोमर और माती पारा: ये आपको वो बकेट लिस्ट रीमाइंड कराने के लिए है जो आप हर साल और अपने हर बर्थडे पर बनाते हो. ये वो सारी चीज़े है जो आपने खुद को और अपनी फेमिली को देने का वादा किया था. तो आपने इसमें से अब तक कितना अचीव किया है? हम सबके अपने-अपने वैल्यूज़ और प्रिंसीप्लस होते है जो हमे हमारे पर्पज तक ले जाते है. इस सवाल का मकसद ही है आपको सेन्स ऑफ़ डायरेक्शन और टाइम देना क्योंकि जब आपको अपना पर्पज मालूम होगा तभी आप अपने लिए और अपने करीबी लोगों के लिए कुछ कर पाएंगे. यही है वो चीज़ जो आपको खुद को रीमाइंड करानी है. वो चीज़े जिन्हें आप सबसे ज्यादा प्रायोरीटी देते हो और उन पर अपनी लाइफ एनर्जी स्पेंड करते हो, आपके बारे में काफी कुछ बताती है कि आप कौन हो और आप कहाँ स्टैंड करते हो. ये हमें लास्ट सवाल की तरफ ले जाता है: अगर आप पैसे के लिए काम नहीं करते तो फिर क्या होता? यानि आपकी लाइफ तब कैसी होती? ये सवाल एक ऐसी लाइफस्टाइल की पोसिबिलिटी आपके सामने ओपन करता है जहाँ आपको एक कम्फर्टेबल लाइफ जीने के लिए काम करने की जरूरत नहीं पड़ती. जापक सामन जापन परताह जहा जापका एक कम्फर्टेबल लाइफ जीने के लिए काम करने की जरूरत नहीं पडती. ज़रा सोचो कैसा होता अगर आपको अपनी जरूरते पूरी करने के लिए किसी जॉब का मोहताज़ ना रहना पड़े, अगर आपको काम नहीं करना होता तो आप क्या करते? आप कैसे अपना टाइम स्पेंड करते? क्या आपके खर्चे कम होते या ऐसे ही बढ़ते रहते जैसे अभी है? क्या आप ज्यादा खाना खरीदते? ज्यादा कपड़े और जूते खरीदते या इन चीजों का खर्चा कम हो जाता? क्या आपको अपनी कार के लिए और ज्यादा गैस की जरूरत पडती या फिर आप इसे बेचना पसंद करते ? क्या आप तब भी खुद को महंगे पर्स, जूलरी गिफ्ट करते या फिर सारी चीज़े एवरेज़ कॉस्ट से कम खरीदते? नो शेम, नो ब्लेम. ये सवाल आपको अवेयर करने के लिए किया गया है कि आपके ज्यादातर खर्चे आपके काम की वजह से है. क्योंकि आप ज्यादा वक्त अपने काम पर बिताते हो, आपको हमेशा लाइफ में हर चीज़ में पैसा खर्च करने की जरूरत होती है, जैसे कि एंटरटेनमेंट, घर का रेनोवेशन, खाना-पीना, होलीडे और आपके डेली के खर्चे. ये समरी आपको ये रियेलाईज़ कराती है कि फाईनेंशीयल इंडीपेंडेंस का मतलब सिर्फ यही नहीं है ये समरी आपको ये रियेलाईज़ कराती है कि फाईनेंशीयल इंडीपेंडेंस का मतलब सिर्फ यही नहीं है कि आपके पास खर्च करने को ढेर सारा पैसा हो जिनसे आप खूब सारी चीज़े खरीद सके. बल्कि फाईनेंशीयल इंडीपेंडेंस का मतलब है कि आप खुद डिसाइड कर सके कि आपको अपनी डेली लाइफ में कब क्या चाहिए और क्यों चाहिए और आप अपने बैंक अकाउंट पर डिपेंडेंट हुए बिना ही अपनी जरूरते आसानी से पूरी कर सके. CONCLUSION तो इस समरी ने आपको ऐसे तरीके सिखाये है कि आप अपनी लाइफ के हर फील्ड को बैलेंस कर सकते हो. आपको जिंदगी और पैसे में से किसी एक को चूज़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आप दोनों एन्जॉय कर सकते हो. सबसे पहली चीज़ जो आपने सीखी, वो ये है कि आपको अपना “इनफ” जानना है. ये वो जगह है जहाँ आपकी जरूरतें और आपके सपने पूरे होते है. ये एक स्ट्रेटेज़ी है जो आपको फालतू के खर्च करने से रोकती है. दूसरी चीज़ आपने सीखी कि अपनी नेट वर्थ जानना हम सबके लिए इम्पोर्टेट है. जब आप अपनी करंट फाईनेंशीयल सिचुएशन से अच्छी तरह वाकिफ होंगे दूसरी चीज़ आपने सीखी कि अपनी नेट वर्थ जानना हम सबके लिए इम्पोर्टेट है. जब आप अपनी करंट फाईनेंशीयल सिचुएशन से अच्छी तरह वाकिफ होंगे तभी तो आप वो सारे जरूरी बदलाव अपनी जिंदगी में ला सकोगे जो आपको अपनी चॉइस की लाइफ जीने में हेल्प करेगी. तीसरी चीज़, आपने सीखी कि आपका पैसा आपकी लाइफ एनर्जी है. इसलिए इसे सोच-समझ कर खर्च करे. पैसे और अपने काम के बीच लिंक तोड़ना जरूरी है ताकि आप अपने वैल्यूज़, केरेक्टर, बीलीफ्स और सपनों के बीच बैलेंस बनाकर चल सके. याद रखिये आपकी लाइफ चेंज करना सिर्फ आपके हाथ में है. कोई और इसका जिम्मेदार नहीं है. तो जैसी अभी आपकी करंट सिचुएशन है, उसमे क्या आप खुद को बचा सकते हो ? लाइफ का दूसरा नाम ही चॉइस है, और आप क्या डिसीजन लोगे ये सिर्फ आपके ऊपर है. तो आप लाइफ चूज़ करोगे या पैसा? क्या आपके अंदर इतनी हिम्मत और विलपॉवर है कि आप कह सको कि मैं दोनों चूज़ करता हूँ? इस समरी ने आपको सिखाएगी कि लाइफ में बैलेंस कैसे रखना है. जरूरी नहीं है कि कुछ पाने के लिए कछ खोया जाए. खश रहने के लिए दर्द सहना जरूरी है ताकि आप अपने वैल्यूज़, केरेक्टर, बीलीफ्स और सपनों के बीच बैलेंस बनाकर चल सके. याद रखिये आपकी लाइफ चेंज करना सिर्फ आपके हाथ में है. कोई और इसका जिम्मेदार नहीं है. तो जैसी अभी आपकी करंट सिचुएशन है, उसमे क्या आप खुद को बचा सकते हो ? लाइफ का दूसरा नाम ही चॉइस है, और आप क्या डिसीजन लोगे ये सिर्फ आपके ऊपर है. तो आप लाइफ चूज़ करोगे या पैसा? क्या आपके अंदर इतनी हिम्मत और विलपॉवर है कि आप कह सको कि मैं दोनों चूज़ करता हूँ? इस समरी ने आपको सिखाएगी कि लाइफ में बैलेंस कैसे रखना है. जरूरी नहीं है कि कुछ पाने के लिए कुछ खोया जाए. खुश रहने के लिए दर्द सहना जरूरी तो नहीं. खुद को पाने के लिए आपको कांटो पर चलने की भी जरूरत नहीं है. आप चाहे तो सब कुछ कर सकते हो. जो चाहे वो बन सकते हो, कोई आपको रोक नहीं सकता. इसलिए आज और अभी से चूज़ करना बंद करो और जीना शुरू करो. ये पूरी कायनात आपके साथ खड़ी है.

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