Why We Buy: The Science of Shopping Paco Underhill Books In Hindi Summary

Why We Buy: The Science
of Shopping
Paco Underhill
इंट्रोडक्शन

हम जैसे shoppers के लिए शॉपिंग करना बहुत ही मज़ेदार है, लेकिन ये रिटेलर और मार्केटर्स के लिए बेहद मुश्किल काम हो सकता है. एक बढ़िया सक्सेसफुल शॉप को चलाने के लिए, आपको शॉपिंग
के आर्ट में महारत हासिल करना ज़रूरी होता है. ये बुक आपको शॉपिंग के बेसिक फंडामेंटल को समझने में हेल्प करेगी और आप इसे अपने प्रॉफिट को बढ़ाने के लिए यूज़ कर सकते हैं. इस बुक में, आप सीखेंगे कि शॉपिंग के साइंस की शुरुवात कैसे हुई और इस नए साइंस की बेसिक बातें क्या हैं. इसके बाद, आप सीखेंगे कि शॉपिंग के साइंस से रिटेलर्स और मार्केटर, दोनों को कैसे फायदा हो सकता है. आप अपनी शॉप के ट्रांजीशन ज़ोन के बारे में भी जानेंगे और, ये भी जानेंगे कि कैसे लाइटिंग आपके शॉप को सक्सेसफुल बना सकती है. अगर आपके कस्टमर आपके कुछ प्रोडक्ट की ओर बिलकुल ध्यान नहीं देते, तो ये बुक आपको पहचानने में हेल्प करेगी कि आखिर ये प्रॉब्लम क्यों हैं और उसे कैसे ठीक किया जाए. साथ ही, आप जानेंगे कि दोनों हाथों को खाली रखकरशॉपिंग करना ज़रूरी क्यों है. एक शॉप के मालिक के तौर पर, आपको हमेशा ये याद रखना होगा कि आपके कस्टमर्स के सिर्फ दो हाथ हैं और कस्टमर्स को कम्फर्टेबल महसूस कराने में हेल्प के लिए आपको अपने शॉप को डिज़ाइन करने की ज़रूरत हैं.

आपके कस्टमर्स आपके शॉप में लगे साइन को कैसे पढ़ते हैं, आप इसके बारे में भी सीखेंगे. अगर आपने
सेल का साइन लगाया हैं, लेकिन कोई भी कस्टमर इस पर ध्यान नहीं देता, तो ये बुक आपको समझने में हेल्प करेगी कि ऐसा क्यों हो रहा हैं. शॉपिंग में आपके कस्टमर्स का आना-जाना लगा रहना भी ज़रूरी हैं. आप सीखेंगे कि अपनी शॉप को अपने कस्टमर्स के आने-जाने के हिसाब से कैसे बनाएं ताकि वे ज़्यादा सामान खरीदें. ये बुक उन स्ट्रैटेजिज़ से भरी हुई है जो आपके बिज़नेस को ज़्यादा सक्सेसफुल बनाने में हेल्प करेगी. तो आइये ज़्यादा से शुरू करते हैं. एक नए तरह के साइंस का जन्म चीजें खरीदने को शॉपिंग कहा जाता हैं. हम शॉपिंग उन चीजों की करते हैं जिनकी हमें ज़रूरत पड़ती हैं या फिर हमें अच्छा लगता हैं. शॉपिंग के साइंस को समझने का मतलब हमें ये समझना हैं कि कस्टमर्स किसी एक चीज़ को खरीदने का डिसिशन कैसे लेते हैं. इसे समझने से शॉप के मालिक अलग-अलग स्ट्रैटेजिज़ को यूज़ करके अपने सेल्स को बढ़ा सकते हैं और ये बुक हमें यही सीखने में मदद करेगी.

शॉपिंग का साइंस हमेशा से नहीं था. सबसे पहले, एंथ्रोपोलॉजिस्ट्स (anthropologists) ने शॉपिंग करने वाले लोग यानि शॉपर्स की स्टडी की. एंथ्रोपोलॉजिस्ट्स ने स्टडी किया कि शॉपर्स दुकानों, वहां रखे सामानों और हर डिटेल जैसे कि शेल्फ, काउंटर, बैनर और यहां तक कि साइन के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं.
हालांकि, एंथ्रोपोलॉजी ने जिन तरीकों से शॉपिंग की स्टडी की थी, वो सही तरीका नहीं था. हाँ, उन्होंने डेटा
इकठ्ठा तो किया, लेकिन इसकी जांच या एनालाइज़ करके शॉपर्स के आदतों, उनके बिहैवियर समझने की
कोशिश नहीं की. उन्होंने बस इसे ओब्सर्व किया, देखा, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकाला. तो शॉपिंग का साइंस आखिर आया कैसे? इस सवाल का जवाब देने के लिए, हम आपको एक महान शख्स की कहानी बताएंगे और ये भी कि उनका चीजों को देखने का अंदाज़ कितना अनोखा था. पैको अंडरहिल इस बुक के ऑथर हैं, और उनको शॉपिंग और मार्केट- रिसर्च के साइंस की शुरुवात करने वाले फाउंडर माना जाता हैं. जब पैको ने पहली बार शॉपर्स को स्टडी करने के लिए अपने तरीकों का यूज़ करना शुरू किया, तो हर किसी को लगा कि वे पागल हैं. उनके पास एक ऑफिस और एक eauipment  रूम था जिसमें सौ से भी ज़्यादा कैमरे लगे थे. ये कैमरे पुराने और नए दोनों तरह के मॉडल के थे. ये काम सही ढंग से ऑर्गनाइज़ रहे, इसके लिए पैको ने सोचा कि हर कैमरे को एक नंबर देने से बेहतर होगा कि उन्हें एक-एक नाम दिया जाए.

इन कैमरों के साथ ही खाली वीडियो टेप के ढेर भी थे. हरेक टेप दो घंटे की शॉपिंग को रिकॉर्ड कर सकता था. इसके अलावा, equipment रूम में बहुत सारे कंप्यूटर भी लगे हुए थे, जहां पैको और उनकी
टीम अपना काम करते थे और ऑफ़ कोर्स, ये सब equipment किसी भी पल पैक होने के लिए तैयार
रहते थे क्योंकि ये रिसर्च टीम दुनिया भर में घूमती थी. इन सब टूल्स का यूज़ दुकानों में शॉपिंग के
एक्सपीरियंस को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता हैं. लेकिन सबसे ज़रूरी टूल हैं ट्रैक शीट, जो एक पेपर का टुकड़ा हैं जिसे ट्रैकर्स अपने साथ रखते हैं और, जो भी शॉपर शॉप के अंदर आते हैं , वे जो कुछ भी करते हैं,
उन्हें देखकर ट्रैकर्स पेपर पर लिखते हैं. ट्रैकर्स छोटी से छोटी डिटेल लिखते हैं, यहां तक कि एक शॉपर ने कहाँ देखा, क्या छुआ और किससे बात की, सब नोट किया जाता है। ये ट्रैकर आमतौर पर एक बार में, एक ही शॉपर पर अपनी नज़र रखते हैं. जब कोई शॉपर शॉप के अंदर आता हैं, तब से ट्रैकर उसके पीछे जाता हैं और तब तक नोट करता रहता हैं जब तक शॉपर शॉप से चला | ट्रैकर आमतौर पर एक बार में, एक ही शॉपर पर अपनी नज़र रखते हैं. जब कोई शॉपर शॉप के अंदर आता हैं, तब से ट्रैकर उसके पीछे जाता हैं और तब तक नोट करता रहता हैं जब तक शॉपर शॉप से चला नहीं जाता.

इन ट्रैकर्स को स्मार्ट और शांत होना चाहिए. उनका काम शॉपर्स के पीछे जाना हैं लेकिन बिना उनका ध्यान
खींचे. शॉपिंग का साइंस इन ट्रैकर्स के बिना इतना असरदार नहीं होता। पैको और उनकी टीम ने दुनिया भर के बड़ी कंपनियों के साथ काम किया हैं. वे शॉपर्स पर अपनी नज़र रखते हैं और ध्यान देते हैं कि शॉपर्स कैसे किसी एक प्रोडक्ट के साथ इंटरैक्ट करते हैं, फिर रिसर्च करने वाले इस डेटा से कुछ नतीज़े निकालते हैं और किसी भी प्रोडक्ट की सेल्स को बढ़ाने का सोल्यूशन बताते हैं. इस तरह से शॉपिंग के साइंस की शुरुवात हुई. जब- जब मार्केट, प्रोडक्ट्स और लोगों के सोच में बदलाव होगा, ये साइंस भी बदलता रहेगा.
वो बात जो रिटेलर्स और मार्केटर्स नहीं जानते पिछले चैप्टर में, हमने शॉपिंग के साइंस और इसकी
शुरुवात को समझने की कोशिश की. इस चैप्टर में, हम रिटेलर्स और मार्केटर्स के नज़रिए से इस साइंस के
इस्तेमाल को जानने की कोशिश करेंगे. शॉप का मालिक एक रिटेलर हैं, और ये समझना उसका काम हैं कि उसके प्रोडक्ट का सेल कैसे हो रहा हैं. दूसरी तरफ, एक मार्केटर को ये समझना हैं कि उसके प्रोडक्ट के साथ शॉपर्स का क्या रवैया हैं.

इससे पहले, मार्केटर्स या कंपनी सिर्फ अपने सेल्स की गिनती पर अपना फोकस रखती थी. उन्होंने कंस्यूमर यानि शॉपर को स्टडी ही नहीं किया. कोई भी प्रोडक्ट का सेल्स कैसा चल रहा हैं, उसके
परफॉरमेंस से पता चलता हैं और परफॉरमेंस को कन्वर्ज़न रेट से नापा जाता हैं.कन्वर्ज़न रेट होता हैं शॉप
में आने वाले कस्टमर्स जो इस प्रोडक्ट को खरीदता हैं, उनके पर्सेटेज की तुलना उन कस्टमर्स के पसेंटेज से
करना जो शॉप में आते तो हैं पर प्रोडक्ट नहीं खरीदते हैं. एग्जाम्पल के लिए, अगर आप एक शॉप के मालिक
हैं, तो आपको लगता हैं कि आपको अपने शॉप के कन्वर्ज़न रेट मालूम हैं लेकिन ये बिना हिसाब-किताब
वाले आपके अंदाज़े गलत हो सकते हैं. एक दिन, पैको ने एक मल्टीमिलियन-डॉलर कंपनी के एक स्मार्ट सीनियर एग्जेक्युटिव से एक सिंपल सवाल पूछा-” आपके शॉप में आने वाले कितने लोग कुछ
खरीदकर जाते हैं?” वे बहुत समझदार थे, इसलिए हम ये अंदाज़ा लगाते हैं कि उन्हें पता होगा कि उनके शॉप का परफॉरमेंस कैसा था. लेकिन उनका जवाब हैरान करने वाला था. उन्होंने कहा कि उनके शॉप में आने वाले सभी लोग कुछ न कुछ ज़रूर खरीदते हैं. ये सिर्फ उनका ही जवाब नहीं था बल्कि उनके कंपनी के सारे मेंबर्स का भी यही जवाब था. सभी ने उन्हीं नंबर्स को पढ़ा था. किसी वजह से वे सब मानते थे कि

इस कंपनी में कन्वर्ज़न रेट 100 परसेंट था. कोई भी कंपनी का मालिक ऐसी ही कन्वर्ज़न रेट चाहता हैं, और कुछ कम्पनियाँ तो वाकई में इस रेट को हासिल कर लेते हैं. आप कौन सा प्रोडक्ट बेच रहे हैं, आपने कौन सी मार्केटिंग स्ट्रैटेजीज़ अपनाया हैं, कन्वर्ज़न रेट इन सब बातों पर डिपेंड करता हैं. एग्जाम्पल के लिए, अगर आप सोना बेच रहे हैं, तो आपके ज्वूलरी शॉप में आने वाले सभी शॉपर कुछ खरीदेंगे क्योंकि अगर उनके पास खरीदने के लिए पैसे नहीं होता तो वे ज्वूलरी शॉप आते ही नहीं. इस सिचुएशन में, शॉप के मालिक के पास 100 परसेंट कन्वर्ज़न रेट हो सकता हैं. लेकिन ये कंपनी तो सोना नहीं बेच रही थी. क्योंकि उनका शॉप पॉपुलर था तो उन्हें लगता था कि कोई शॉपर तभी कुछ नहीं खरीदता जब उनका प्रोडक्ट स्टॉक से खत्म हो जाता हैं. पैको और उनकी टीम ने इस कंपनी को गहराई से स्टडी किया. उनके स्टडी ने उन्हीं तरीकों को अपनाया जिनकी हमने पिछले चैप्टर में बात की थी, और इस कंपनी की सही कन्वर्ज़न रेट निकालने में कई सौ घंटे लग गए थे. पैको ने उस स्मार्ट शख्स और उनकी टीम को बताया  कि उनके कन्वर्ज़न रेट 48 परसेंट थी, जो कि बुरी नहीं थी बल्कि ज़्यादा यकीन करने लायक था. इस हकीकत का एहसास होने पर, इस कंपनी ने अपने सेल्स को सुधारने के लिए बदलाव करना शुरू कर दिया.

यही कारण हैं कि शॉपिंग के साइंस की ज़रूरत रिटेलर्स और मार्केटर्स दोनों को ही हैं. ये उन्हें उनके प्रोडक्ट्स के परफॉरमेंस के बारे में सही नंबर दे सकता हैं और उनके प्रॉफिट के साथ-साथ उनके स्ट्रैटेजिज़ को बेहतर करने में हेल्प कर सकता हैं. रुक जाते हैं, चलना बंद कर देते हैं और फिर आपके प्रोडक्ट्स को देखना और चेक करना शुरू कर देते हैं. इसी जगह को ट्रांजीशन ज़ोन कहते हैं. अगर आप अपने शॉप के सामने कुछ इंटरेस्टिंग चीज़ रखते हैं, तो हो सकता हैं कि आपके कस्टमर्स इसे नोटिस ही न करें क्योंकि उनकी आँखें अभी तक आपके शॉप की लाइटिंग से एडजस्ट हो ही नहीं पाए हैं.

आइए एक एग्जाम्पल को देखें, 1980 में, बर्गर किंग नाम की एक बड़ी कंपनी अपने रेस्तरां में नया सैलड
बार आज़मा रही थी. अपने नए प्रोडक्ट को बढ़ावा देने के लिए, बर्गर किंग ने अपने कई रेस्तरां के एंट्री डोर को बदलने के बारे में सोचा. आमतौर पर, वहां पार्किंग लॉट रेस्तरां के एंट्री डोर से जुड़ा होता था. अब, उन्होंने उस दरवाजे को एग्ज़िट डोर बना दिया था और उसके ठीक साइड की खिड़की के पीछे सैलड बार लगा दिया.
अब, खुद को इस रेस्तरां में इमेजिन कीजिए. आप अपनी कार को पार्किंग में खड़ी करेंगे. नए दरवाज़े की
तरफ जाएंगे, जो अब रेस्तरां के दूसरी तरफ हैं, फिर जब आप अंदर जाते हैं, आप सीधे सैलड बार पर जाते
हैं – ये जानते हुए कि सैलड बार एग्ज़िट के पास हैं. ये सैलड के लिए एक लम्बा सफर लगता हैं.
लेकिन रेस्तरां में जो हुआ वो इससे बिलकुल अलग था. क्योंकि कस्टमर्स ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि एक नई एंट्री डोर बनी हैं, वे सीधे पार्किंग लॉट से पुराने एंटी डोर तक जाते थे, जो कि अब एक एग्जिट डोर बन गया था. वे यहीं से रेस्तरां में घुसने की कोशिश करते लेकिन इस डोर को बंद पाते थे.

अब, कस्टमर्स रुक जाते और चारों ओर देखकर ये ढूंढने की कोशिश करते हैं कि एंट्री डोर कहां हैं. उनमें
से किसी ने खिड़की के साइड में बनाए नए सैलड बार पर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि वे दरवाजा ढूंढ़ने की
कोशिश में ही बिज़ी थे. जैसे ही उन्हें नया एंट्री डोर का पता चलता, भूखे कस्टमर्स , खाने का ऑर्डर देने के लिए सीधे रेस्तरां में पहुँचते. सैलड बार गलत जगह बनाई गई थी, इसलिए कस्टमर्स को दिखाई ही नहीं देता था कि वहां बार भी हैं, इसलिए उन्होंने कभी वहाँ से कुछ नया ऑर्डर नहीं किया. ये किसी जगह का गलत इस्तेमाल का एक अच्छा एग्जाम्पल हैं. अगर आप अपने शॉप के किसी प्रोडक्ट को स्टार बनाना चाहते हैं, तो आपको अपने कस्टमर्स का ट्रांजीशन ज़ोन पर ध्यान रखना होगा. जो भी कस्टमर्स आते हैं, आप अपने शॉप के वर्कर्स से उनको वेलकम करवा सकते हैं और उन्हें शॉपिंग बास्केट थमा सकते हैं, जिससे कस्टमर्स के लिए खरीदारी करना आसान हो और वे ज़्यादा से ज़्यादा प्रोडक्ट्स खरीदें.

Why We Buy: The Science
of Shopping
Paco Underhill

आपको हाथों की ज़रूरत हैं ये तो सब जानते हैं कि आपके शॉप में आने वाले हर कस्टमर के सिर्फ दो हाथ होते हैं. आप सोच होंगे कि हम आपको ये क्यों बता रहे हैं, लेकिन अगर आप अपने शॉप को देखते हैं, तो आपको ये एहसास हो जाएगा कि आप भूल गए हैं कि लोगों के सिर्फ दो हाथ होते हैं. हम सभी वैसे शॉप में गए ही हैं जहां हमें एक शॉपिंग बास्केट भी नहीं मिलती हैं. हम एक चीज खरीदने जाते हैं, और अगर हम दस और चीज़े को पसंद भी करते हैं, तो हम उन्हें नहीं खरीद सकते क्योंकि हम अपने दो हाथों में कुछ ही सामान उठा सकते हैं. ज्यादातर देखा गया हैं कि शॉप्स में अगर बास्केट होते हैं तो वे उन्हें अपने शॉप के सामने रख देते हैं. याद हैं, हमने ट्रांजीशन ज़ोन के बारे में बात की थी और कैसे आपके कस्टमर्स को आपके प्रोडक्ट्स को देखने के लिए टाइम की ज़रूरत होती हैं. अगर आपके बास्केट ट्रांजीशन ज़ोन से पहले रखे होते हैं, तो आपके कस्टमर उन्हें नहीं देख पाएंगे. इस प्रॉब्लम से निकलने का सबसे अच्छा तरीका हैं अपने वर्कर्स को ट्रेनिंग देना कि जो कोई भी कस्टमर अपने हाथों से ज़्यादा चीजों को पकड़ रहा हैं, उन्हें एक बास्केट थमा दें.

एक बार, पैको अंडरहिल को न्यूयॉर्क के ग्रैंड सेंट्रल स्टेशन पर एक न्यूज़स्टैंड की स्टडी करने का काम दिया
गया. उन्होंने सुबह और शाम को न्यूज़स्टैंड पर नज़र रखने के लिए कैमरे लगाए, क्योंकि यही दो वक्त दिन
का सबसे बिज़ी वक्त होता हैं. न्यूज़स्टैंड पर सुबह और शाम को आने वाले ज़्यादातर कस्टमर्स जल्दबाज़ी में होते थे. वे या तो बस पकड़ने की कोशिश में होते, या जॉब पर वापस जा रहे होते, या फिर घर वापस जा रहे होते थे. इसलिए, प्रॉफिट कमाने के लिए इस न्यूज़स्टैंड को बहुत तेजी से अपने कस्टमर्स के ऑर्डर्स को हैंडल करना पड़ता था. पैको ने नोटिस किया कि कई सारे कस्टमर्स न्यूज़स्टैंड की तरफ देखते थे और वहाँ इंतज़ार कर रहे दूसरे कस्टमर्स की लगी लम्बी लाइन को देखकर वापस मुड़ जाते थे. इसका मतलब ये था कि ये न्यूज़स्टैंड पैसा खो रहा था क्योंकि अपने कस्टमर्स को संभालने के लिए जितनी तेज़ी से वो काम कर रहे थे, वो काफी नहीं था. ज्यादातर कस्टमर्स चाहते हैं कि वे न्यूज़स्टैंड में जाएं, जितनी जल्दी हो सके सिगरेट या न्यूज़पेपर खरीदें और फिर अपने रास्ते वापस जाए. दूसरी बात जो कि पैको ने देखा, वो था कि ज़्यादातर
कस्टमर्स के हाथ में एक सामान होता था. ये ब्रीफ़केस, एक बैग या एक लंचबॉक्स होता था. अगर
आप आजकल लोगों को देखते हैं तो किसी को खाली हाथ चलते हुए देखना नामुमकिन हैं. हमारे पास हमेशा कुछ ऐसा होता ही हैं जिसे हम अपने साथ ले जाते हैं, इस वजह से अगर ज़रूरत के वक्त हम कुछ खरीदना चाहें तो शॉपिंग के लिए सिर्फ एक ही हाथ खाली रह जाता हैं.

पैको ने आखिरी बात नोटिस की कि न्यूज़स्टैंड पुराने जमाने का था और बिलकुल प्रैक्टिकल नहीं था. वहाँ
तीन शेल्फ थे. नीचे का शेल्फ न्यूज़पेपर्स के लिए था, बीच वाला मैगज़ीन के लिए, और सबसे ऊपर वाला
टॉफ़ीस और दूसरे चीज़ों को रखने के लिए था. इन तीनों शेल्फ के ऊपर, आप एक खिड़की देख सकते थे
जहाँ केशियर बैठता था. वीडियो टेप देखने के बाद, पैको ने नतीज़ा निकाला कि कस्टमर वहाँ कैसे शॉपिंग कर रहे थे. एक कस्टमर न्यूज़स्टैंड के साइड में खड़ा होता हैं, उसके हाथ में पहले से ही कुछ सामान होता हैं, मान लीजिए एक ब्रीफ़केस हैं. फिर, वो अपने खाली हाथ से सबसे नीचे के शेल्फ पर झुकता हैं और एक न्यूज़पेपर उठाता हैं. फिर, वो खड़ा होता हैं और केशियर को दिखाता हैं कि उसे क्या खरीदना हैं. अब, अपनी जेब से पैसे निकालने के लिए, इस कस्टमर को अपने बगल के नीचे या तो न्यूज़पेपर रखना होगा
या फिर वो ब्रीफ़केस. फिर उसके बाद ही वो अपने फ्री हाथ से पैसे दे पाएगा. मान लीजिए कि आप इस न्यजस्टैंड से और भी  कुछ सामान खरीदना चाहते हैं. इसके लिए आपको अपना सारा सामान नीचे ज़मीन पर रखना होगा और तब जाकर आप केशियर को पैसे दे पाएंगे.

ये सिस्टम प्रैक्टिकल नहीं था, और हर कस्टमर को हैंडल करने में न्यूज़स्टैंड के स्टाफ को ज़्यादा वक्त भी
लग रहा था. ज़रा सोचिए कि अगर इस न्यूज़स्टैंड वालों ने एक खाली शेल्फ रखा होता जहां कस्टमर अपना ब्रीफ़केस या लंचबॉक्स रख सकता हैं, तो कस्टमर सब खरीद सकता हैं जो वो चाहता हैं और आसानी से दोनों हाथों का इस्तेमाल कर सकता हैं. वहाँ लेन-देन जल्दी होता, और लाइन में ज़्यादा कस्टमर्स को इंतजार नहीं करना पड़ता. यही कारण हैं कि आपको अपने शॉप के पफोर्मन्स को देखना चाहिए और सोचना चाहिए कि अपने कस्टमर्स के लिए दोनों हाथों से शॉपिंग करने देने के लिए क्या करें.

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Paco Underhill

किसी भी साइन को कैसे पढ़ें बहुत सारे शॉप में साइन लगे होते हैं. ये साइन आमतौर पर खूबसूरत डिज़ाइन के होते हैं जो कस्टमर को लुभा कर उन्हें नए डिस्काउंट, नए प्रोडक्ट या फिर आने वाले सेल की तरफ खींचते हैं. इन साइनों के साथ प्रॉब्लम ये हैं कि ये कितना असरदार हैं, इस बात को शॉप के मालिक,सिर्फ टेबल पर या डिज़ाइन रूम तक ही रखते हैं. वे कभी भी ये समझने की कोशिश नहीं करते हैं कि ये साइन उन चलते-फिरते कस्टमर्स के लिए कैसे काम करेगा जो पहले से ही अच्छे प्रोडक्ट्स ढूंढ़ने में बिज़ी होते हैं. उनका ध्यान तो पहले से ही बंटा होता हैं. आपको ये याद रखने की ज़रूरत हैं कि आप उन
लोगों के लिए एक साइन बना रहे हैं जो लगातार चल रहे होते हैं. आपका नया साइन कितना असरदार हैं,
उसे समझने का एक ही तरीका हैं कि आप अपने शॉप में इसके पकॊमन्स को देखें. अपने कस्टमर्स के
जगह खुद को रखकर देखने की कोशिश कीजिए और अपने साइन को अलग-अलग जगह पर रखकर और
अलग-अलग लाइटिंग का यूज़ करके एक्सपेरिमेंट कीजिए जिससे वो उभर कर दिखे. दूसरा तरीका ये देखना हैं कि आपके कस्टमर आपके शॉप के साइन पर कैसे रिएक्ट कर रहे हैं. कितने लोग इस साइन के तरफ अपना ध्यान देते हैं? उनमें से कितने लोग इसे वाकई में पढ़ते हैं?

एक बार, एक गार्डन मेन्टेन करने वाली कंपनी टोरो ने अपने एक नए प्रोडक्ट को बाजार में उतारा था.
उन्होंने एक नए ऑटोमैटिक घास काटने की मशीन का मैनुफैक्चर किया था और उसको प्रमोट करने के लिए एक वीडियो बनाया था. टोरो ने सोचा कि इन वीडियो को दिखने के लिए सही जगह घर और गार्डन सप्लाई का शॉप हैं. उन्होंने वीडियो को एक पैसेज के बीच में रखा जहां कस्टमर्स हर वक्त आते-जाते रहते थे.
अगर किसी कस्टमर ने इस नए घास काटने वाले मशीन के बारे में दस मिनट के वीडियो को रुककर देखने का फैसला किया भी, तो दूसरे आते-जाते कस्टमर उसे रास्ते से हटने के लिए कहते. इस वीडियो के लिए बेहतर जगह होती रिपेयर वेटिंग रूम. जब कस्टमर्स अपने एप्लायंस के रिपेयर होने का इंतजार करते थे, तो वे उस वीडियो को देखकर नए घास काटने वाले मशीन के बारे में सोचते. साइन लगाते समय, ये मत सोचिए कि ये साइन कितना अच्छा दिखता हैं, बल्कि इस बारे में सोचिए कि कस्टमर्स दूसरे कामों में बिज़ी होने के बावजूद आपके साइन को कैसे नोटिस कर सकते हैं.

अपने शॉप को सक्सेसफुल्ली चलाने के लिए, आपको शॉपिंग की सबसे बेसिक पहलू को समझने की ज़रूरत हैं. यानी आपको ये समझना हैं कि कस्टमर्स चलते कैसे लोग अपनी इच्छा के हिसाब से, आराम से आना जाना करते हैं. आपके कस्टमर्स आपकी शॉप में कैसे आते हैं, इसे समझने के लिए उन्हें ध्यान से देखने की कोशिश कीजिए. आप देखेंगे आपके शॉप में ऐसे कुछ भाग हैं जो बहुत पॉपुलर हैं, और कुछ ऐसे कोने हैं जहाँ कोई भी कस्टमर शायद ही कभी जाता हैं. एक स्मार्ट शॉप चलाने के लिए जहाँ ज़्यादा से ज़्यादा
कस्टमर्स को खिंच सके, आपको अपने शॉप को कस्टमर्स के चलने और देखने के तरीके के हिसाब से
डिजाइन करना चाहिए. अपने कस्टमर्स पर कोई भी नया शेल्फ मत थोपिए, उन्हें उस शेल्फ को देखने के
लिए मजबूर मत कीजिए जिस शेल्फ को देखना या उस ओर जाने का उन्हें मन ही नहीं करता हैं.
अपने कस्टमर्स को बदलने की कोशिश करने के बजाय अपने शॉप को बदलिए और एक आसान प्लान बनाइये जहाँ आपके सारे प्रोडक्ट्स को रख पाएं. पैको अंडरहिल और उनकी टीम ने एक बार एक
कपड़े की शॉप को स्टडी किया था. इस शॉप में दो भाग थे- बाईं ओर एक लेडीज़ सेक्शन और दाईं ओर जेन्ट्स सेक्शन था. शॉप के परफॉरमेंस को देखने के बाद, पैको ने देखा कि इस शॉप में आने वाली औरतों को जेंट्स के कपड़े खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं थी. वो सिर्फ अपने लिए कपड़े खरीदने आती थी.

इसलिए, अगर कोई लेडी गलती से मेन्स वेयर सेक्शन में चली भी जाती तो वो चारों तरफ देखती और फौरन
लेडीज़ सेक्शन के तरफ आ जाती. प्रॉब्लम ये थी कि शॉप के मेन्स वेयर सेक्शन के बाद बच्चों का सेक्शन था जहाँ वे बच्चों के कपड़े बेच रहे थे, और कोई भी उस सेक्शन में जाता ही नहीं था. इसके पीछे कारण ये था कि ज्यादातर लेडीज़ जब मेन्स वेयर सेक्शन में गलती से भी पहुँचती तो वे कभी भी बच्चों के सेक्शन में नहीं जाती थी क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि वहाँ वो सेक्शन मौजूद हैं. आमतौर पर, वे बस मेन्स वेयर से वापस घूम कर लेडीज़ सेक्शन की तरफ हो लेती थी. और, जब वे दोबारा शॉप पर आती तो सीधे लेडीज़ सेक्शन में ही जाती थी. और, क्योंकि कोई भी आदमी अपने बच्चों के लिए कपड़े नहीं खरीदते हैं, इसलिए वे उस चिल्ड्रेन्स’ सेक्शन की तरफ कभी नहीं गए, भले ही उन्हें पता था कि वो सेक्शन वहाँ मौजूद हैं. इस प्रॉब्लम का सबसे अच्छा सोल्यूशन होता बच्चों के सेक्शन के लिए जगह बदलना और इसे लेडीज़ सेक्शन
के आखिर में रखना. इस तरह, ज़्यादा लेडीज़ इसे नोटिस करेंगी और अपने बच्चों के लिए कपड़े खरीदेंगी.
ये एक ऐसा एग्जाम्पल हैं जो ये बताता हैं कि कैसे अपने कस्टमर्स के आने-जाने को अनदेखा करना इसलिए, अगर कोई लेडी गलती से मेन्स वेयर सेक्शन में चली भी जाती तो वो चारों तरफ देखती और फौरन लेडीज़ सेक्शन के तरफ आ जाती.

प्रॉब्लम ये थी कि शॉप के मेन्स वेयर सेक्शन के बाद बच्चों का सेक्शन था जहाँ वे बच्चों के कपड़े बेच रहे
थे, और कोई भी उस सेक्शन में जाता ही नहीं था. इसके पीछे कारण ये था कि ज्यादातर लेडीज़ जब मेन्स
वेयर सेक्शन में गलती से भी पहुँचती तो वे कभी भी बच्चों के सेक्शन में नहीं जाती थी क्योंकि उन्हें पता ही
नहीं था कि वहाँ वो सेक्शन मौजूद हैं. आमतौर पर, वे बस मेन्स वेयर से वापस घूम कर लेडीज़ सेक्शन की
तरफ हो लेती थी. और, जब वे दोबारा शॉप पर आती तो सीधे लेडीज़ सेक्शन में ही जाती थी. और, क्योंकि कोई भी आदमी अपने बच्चों के लिए कपड़े नहीं खरीदते हैं, इसलिए वे उस चिल्ड्रेन्स’ सेक्शन की तरफ कभी नहीं गए, भले ही उन्हें पता था कि वो सेक्शन वहाँ मौजूद हैं. इस प्रॉब्लम का सबसे अच्छा सोल्यूशन होता बच्चों के सेक्शन के लिए जगह बदलना और इसे लेडीज़ सेक्शन के आखिर में रखना. इस तरह, ज़्यादा लेडीज़ इसे नोटिस करेंगी और अपने बच्चों के लिए कपड़े खरीदेंगी. ये एक ऐसा एग्जाम्पल हैं जो ये बताता हैं कि कैसे अपने कस्टमर्स के आने-जाने को अनदेखा करना आपके पैसों का लॉस करवा सकता हैं.

Why We Buy: The Science
of Shopping
Paco Underhill
कन्क्लूज़न

शॉपिंग के साइंस के जन्म होने से पहले, एंथ्रोपोलॉजी ही वो साइंस थी जिसने स्टडी किया कि शॉपर शॉप
में जाकर कैसे बर्ताव करते हैं. एंथ्रोपोलॉजिस्ट्स डेटा जुटाते थे और उसे देखते थे लेकिन वे कभी भी उस
डेटा से कोई नतीज़ा निकालते नहीं थे. पैको अंडरहिल ही पहले वो शख्स थे जिन्होंने शॉपिंग और मार्केट रिसर्च के साइंस की शुरुवात की थी. उन्होंने कैमरों और वीडियोटैप से भरा एक रूम बनाया, फिर अलग-अलग शॉप पर नज़र रखनी शुरू कर दी और उनके प्रॉब्लम्स को ठीक करने की कोशिश की.
इस बुक में, आपने ये जाना कि शॉपिंग के साइंस को सीखने से कैसे रिटेलर्स और मार्केट रिसर्चर्स दोनों ही
फायदा उठा सकते हैं. वे सीख सकते हैं कि अपने शॉप के कन्वर्ज़न रेट को बेहतर बनाने के लिए स्ट्रैटेजीज़
और प्लान कैसे तैयार करना हैं. आपने ये भी सीखा कि आपके शॉप में लाइटिंग अरेंजमेंट बहुत ज़रूरी क्यों हैं. आपने जाना कि आप  हर समय एक ही तरह के लाइट का यूज़ नहीं कर सकते, और आप जहां चाहें वहां अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए नहीं रख सकते.

शेल्फों और साइनों को लगाने की जगह और यहां तक कि आपके शॉपिंग बास्केट को भी अच्छी तरह से स्टडी करना चाहिए. आपको अपने कस्टमर्स के ट्रांजीशन ज़ोन और इस बात पर ध्यान देना होगा कि उनके सिर्फ दो हाथ हैं. आपको अपने कस्टमर्स के आने-जाने और उनके मूवमेंट पर भी ध्यान देने की ज़रूरत हैं. अगर शॉप में कोई जगह ऐसी हैं जहाँ दूसरे जगहों के मुकाबले ज़्यादा कस्टमर्स जाते हैं, तो अपने साइनों और सामानों को वहां रखने की कोशिश कीजिए. ये बुक एक स्मार्ट शॉप को चलाने और अपने प्रोडक्ट्स
को बेचने में सक्सेसफुल होने के लिए सबसे कीमती गाइड हैं. अगर आप एक शॉप के मालिक हैं या एक
कंपनी, इस बुक से सीखी गई स्ट्रैटेजीज़ के प्रैक्टिस करने से आपके बिज़नेस का कायापलट हो सकता हैं.

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