What Great Brands Do: The Seven Brand-Buildin… Denise Lee Yohn Books In Hindi Summary

What Great Brands Do: The Seven Brand-Buildin… Denise Lee Yohn Introduction क्या आप भी अपना खुद का बिज़नस शुरू करना चाहते हैं या फिर आप एक बिज़नसमैन हैं जो अपना एक ब्रैड बनाना चाहते हैं, ज़्यादा प्रॉफिट कमाना चाहते हैं और ज़्यादा कस्टमर पाना चाहते हैं? अगर हाँ, तो यह समरी आपके लिए है। यहां कई सक्सेसफुल और ग्रेट brands के 7principle और 7 कहानियां दी गई हैं जिनसे आप सीख सकते हैं। तो उम्मीद करते हैं कि इस समरी के ख़त्म होते-होते आप इन principles को अप्लाई करने और ग्रेट बनने के लिए inspire होंगे। IBM से आप सीखेंगे की अपनी कंपनी के अंदर से कैसे शुरुआत करनी है और कंपनी values को कैसे बनाए रखना है। Nike से आप सीखेंगे की आपको प्रोडक्टस नहीं बल्कि emotions बेचने हैं । ये इस बारे में नहीं है की आपका प्रोडक्ट या उसके features कैसे हैं बल्कि इस बारे में है की आपके प्रोडक्ट लोगों को कैसा महसूस कराते हैं। Oprah से आप ट्रेंड्स को नज़रंदाज करना सीखेंगे | अगर आप उसी चीज़ को फॉलो करेंगे जो मार्केट में चल रही है और वही बेचने को तैयार हो जाएंगे तो TA – Tीं होंगे ने मी WA < चल रही है और वही बेचने को तैयार हो जाएंगे तो आप कभी सक्सेसफुल नहीं होंगे. आपको अपनी खुद की अलग पहचान बनानी होगी। Lululemon से आप सीखेंगे की आपको कस्टमर्स के पीछे भागने की ज़रूरत नहीं है बल्कि अपने values को बनाए रखते हुए और आप जिस चीज़ में बेस्ट हैं उस पर फोकस करते हुए आप कस्टमर्स को attract कर सकते हैं। Proctor & Gamble से आप सीखेंगे की आपको हर छोटी से छोटी चीज़ का भी ध्यान रखना चाहिए । हर चीज़ मायने रखती है क्योंकि कस्टमर सब कुछ नोटिस करते हैं। Shake Shack से आप सीखेंगे की कैसे अपने काम को लेकर committed रहा जाए । जैसे जैसे आपका बिज़नस बढ़ता जाएगा अपनी main ideology को खुद को गाइड करने दीजिए । फाइनली , Patagonia से आप सीखेंगे की आपको कभी भी कुछ वापस नहीं देना या लौटाना है । अगर आपके कल्चर में पॉजिटिव सोशल इम्पैक्ट शामिल है तो बदले में कुछ लौटाने की भावना आपमें naturally आ जाएगी। चलिए अब और गहराई से जानते हैं की बड़े ब्रैंड्स क्या करते हैं। बड़े बैंड्स अंदर से शुरुआत करते हैं (Great Brands Start Inside) सैम पालमिसानो 2002 में IBM के CEO बने । बड़े ब्रैड्स अंदर से शुरुआत करते हैं (Great Brands Start Inside) सैम पालमिसानो 2002 में IBM के CEO बने । उन्होंने IBM में 29 साल काम किया और उनकी शुरुआत एक salesman के तौर पर हुई थी। सैम ने देखा की कैसे IBM धीरे- धीरे अपना असर खो रही थी । 1990 में IBM ने अपने आधे से ज़्यादा employees खो दिए थे । सैम ने बताया की ये बहुत आसान था की कैसे कंपनी की values उसके लिए दिक्कतें खड़ी कर रही हैं । IBM के फाउंडर excellence और हर इंसान की इज्ज़त करने में विश्वास रखते थे पर सैम के समय कल्चर काफी बदल गया था, वो रुक गया था और ordinary हो गया था । मैनेजर्स काफी अधिकार जमाने लगे थे और घमंडी हो गए थे। सैम बदलाव लाना चाहते थे। आमतौर पर कल्चर प्रॉब्लम को solve करने का सबसे कॉमन जवाब होता है नई एडवरटाइजिंग , नई मार्केटिंग और नए प्रोमोशन। इसका मतलब है कंपनी को एक नया चेहरा देना । इससे मतलब है कि लोगों की नज़रों में कंपनी की एक नई इमेज बनाना। ऐसा करने से कस्टमर और इन्वेस्टर का ध्यान कंपनी पर ज़रूर जाएगा ।पर ये वो चीज़ नहीं है जो ग्रेट ब्रैंड्स करते हैं । नए ads और नए logo एक छोटा सा उपाय है। ग्रेट ब्रैंड्स कंपनी के अंदर से शुरुआत करते हैं। सैम ने इस बात को समझा की अपने कस्टमर को कमाल की सर्विस देने के लिा तरूरी है की पटले या ााने . ग्रेट ब्रैड्स कंपनी के अंदर से शुरुआत करते हैं। सैम ने इस बात को समझा की अपने कस्टमर को कमाल की सर्विस देने के लिए ज़रूरी है की पहले आप अपने employees को अच्छा एक्सपीरियंस दें। IBM को अपने कल्चर को और पावरफुल बनाने की ज़रूरत है ताकि employees कंपनी से किए हुए ‘excellence’ के वादे को अपने ब्रैड और कस्टमर एक्सपीरियंस के ज़रिए निभा सके। कंपनी के एक स्ट्राँग internal कल्चर ज़रूरी है जो की आपके brand के साथ-साथ चले । आप किस चीज़ में विश्वास करते हैं, क्या चीज़ ऑफर करते हैं, क्या अपनाते हैं और खुद के बारे में क्या बोलते हैं ये सब सेम होना चाहिए । इसी का मतलब है कंपनी में एक स्ट्रॉग कल्चर का होना। 2002 मे IBM का कल्चर बदलना काफी मुश्किल था क्योंकि इंडस्ट्री में और IBM की मार्केट position में काफी सारे बदलाव हो रहे थे । IBM पहले एक हार्डवेयर पावरहाउज़ हुआ करता था पर अब वो बिज़नस सर्विस ऑफर करने लगा था। अब IBM का ज़्यादातर प्रॉफ़िट बिज़नस सर्विस से आता था। अपने नए बिज़नस मॉडल को इफेक्टिव बनाने के लिए सैम को अब कंपनी को लीड करने की ज़रूरत थी। उन्हें अपने employees को गाइड करने की भी ज़रूरत थी की उन्हें कंपनी के अंदर और बाहर कैसे पेश आना है । अंत में वो सक्सेसफुल हुए । सैम ने कहा – “जब आपका बिज़नस knowledge पर बेस्ड हो तो प्रोडक्ट नहीं बल्कि लोग आपके बैंड बनते कहा – “जब आपका बिज़नस knowledge पर बेस्ड हो तो प्रोडक्ट नहीं बल्कि लोग आपके बैंड बनते हैं । अब हमारे लोगों को पहले से ज़्यादा ब्रैड प्रामिस डिलिवर करने की ज़रूरत है”। जुलाई 2003 में सैम ने एक collaboration software मतलब की एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया जो किसी data प्रोसेसिंग के लिए एक से ज़्यादा computer के साथ data शेयर कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने एक intranet communication network बनाया यानि की एक ऐसा सॉफ्टवेयर जिसे सिर्फ बनाई हुई कंपनी ही चला सकती है या आसान शब्दों में कहें तो एक private और secure नेटवर्क। इसका नाम उन्होंने “Valuesdam” रखा । ये 72 घंटे के लिए था , यहाँ पर दुनिया भर के ibm employees से पूछा गया की उन्हें कंपनी में क्या लगता है ? कौन सी ऐसी values हैं जो IBM में होनी चाहिए । इस बीच कुछ नेगटिव कमेंट्स और नज़रिए भी आए पर सैम इन्हें इग्नोर करके आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार थे । जब 72 घंटे बीत गए , तब 50,000 एम्प्लॉईस ने debate पढ़ने के लिए लॉगिन किया और उनमें से 10,000 ने कमेंट भी किए। सैम के पास 3 फुट लंबे कमेंट्स तैयार थे । सैम ने उनमें से हजारों कमेंट्स को पढ़ा। सबसे कॉमन idea का पता लगाने के लिए एक सॉफ्टवेयर और एक छोटी सी टीम बनाई गई। यह हैं वो 3 values जो emplovees को लगा कि IBM में होने ही T ही चला सकती है या आसान शब्दों में कहें तो एक private और secure नेटवर्क। इसका नाम उन्होंने “ValuesJam” रखा । ये 72 घंटे के लिए था , यहाँ पर दुनिया भर के ibmemployees से पूछा गया की उन्हें कंपनी में क्या लगता है ? कौन सी ऐसी values हैं जो IBM में होनी चाहिए । इस बीच कुछ नेगटिव कमेंट्स और नज़रिए भी आए पर सैम इन्हें इग्नोर करके आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार थे । जब 72 घंटे बीत गए, तब 50,000 एम्प्लॉईस ने debate पढ़ने के लिए लॉगिन किया और उनमें से 10,000 ने कमेंट भी किए। सैम के पास 3 फुट लंबे कमेंट्स तैयार थे । सैम ने उनमें से हजारों कमेंट्स को पढ़ा। सबसे कॉमन idea का पता लगाने के लिए एक सॉफ्टवेयर और एक छोटी सी टीम बनाई गई। यह हैं वो 3 values जो employees को लगा कि IBM में होने ही चाहिए पहला, हर क्लाइंट की सक्सेस के लिए जी जान से काम करना । दूसरा, innovation जो मायने रखता हो और तीसरा, हर रिश्ते पर विश्वास रखना । सैम ने इसे announce किया और इसे IBM कंपनी का मिशन कहा। Employees समझ गए की ये 3 values हैं जिसे उन्हें अपने अंदर उतारना है और फिर डिलिवर करना है। What Great Brands Do: The Seven Brand-Buildin… Denise Lee Yohn ग्रेट ब्रैंड्स आम तौर पर प्रोडक्ट बेचने से बचती हैं (Great Brands Avoid Selling Products) Nike का स्लोगन सभी जानते हैं- ‘just do it’| ये अभी तक के सभी फेमस slogans में से एक है । ग्रेट ब्रैंड्स क्या करते हैं ये उसका सबसे अच्छा example है। 1987 में, Nike के नए tv कमर्शियल के लिए एक ad agency को साइन किया गया था । उस नए कमर्शियल ने US में शुरू हुए जॉगिंग के क्रेज़ को दिखाया। इसे Oregeon University में शूट किया गया था जहां Nike के पहले shoes बनाए गए थे । इस ad में कई सेलिब्रिटी रनर्स को दिखाया गया था । उसमें एक voice – over था जिसने कहा – ‘शुरुआत यहाँ से हुई, एक फिटनेस revolution जिसने अमेरिका को बदल दिया। एजेंसी चाहती थी ad लोगों के दिलो-दिमाग में घर कर जाए पर जब उसे Nike के सेल्स representative के सामने दिखाया गया तो सभी बिल्कुल शांत हो गए । वो इस ad से inspired नहीं थे | Nike के फाउंडर फिल नाइट निराश हो गए क्योंकि उन्होंने ऐसे रिएक्शन की उम्मीद नहीं की थी। उन्होंने ad agency को ऑर्डर दिया की वो किसी I concent is ad IV I DIAn fra – । क्याकि उन्हान एस रिएक्शन का उन्माद नहा का था। उन्होंने ad agency को ऑर्डर दिया की वो किसी नए concept पर ad बनाएँ । मार्केटिंग चीफ, स्कॉट बेडबरी ने कहा की उस ad ने सिर्फ Nike के प्रोडक्ट और उनके brand की बड़ाई की है, ना की कस्टमर की। 2 हफ्तों बाद , Ad एजेंसी – विडेन+कैनेडी एक नए प्रपोज़ल के साथ आए । वो उन ads का सेट था जिसमें athletes वो कर रहे थे जो उनका काम है यानी वो प्रैक्टिस कर रहे थे, पसीना बहा रहे थे , कूद रहे थे, दौड़ रहे थे । उनमें से एक ad में एक फीमेल triathlete को भी दिखाया गया था । दूसरे ad में एक 80 साल के बूढ़े रनर को दिखाया गया था । फिर एक ad था जिसमें एक प्रोफेशनल बास्केटबाल प्लेयर को दिखाया गया था । सभी athletes ने emotions के साथ कहा कि वो क्या करते हैं और क्यों करते हैं । उसके बाद ही ये शब्द – ‘Just Do It’ स्क्रीन पर दिखाया गया । जैसा की स्कॉट ने कहा था “just do it” सिर्फ दौड़ने लायक जूतों को ही नहीं दिखाता बल्कि ये values को दिखाता है । ये प्रोडक्ट के बारे मे नहीं बल्कि उनके ब्रैंड के वैल्यू के बारे में है”। ये ad campaign just do it’ 10 साल तक चला । ये इस चीज़ का सबसे अच्छा example | है की कैसे प्रोडक्ट नहीं बल्कि emotions बेचने चाहिए । इस ad campaign ने ऑडियंस को ये नहीं बताया की Nike के प्रोडक्ट कैसे हैं बल्कि इसने A Nilo TRT IT Aathlotoci नहीं बताया की Nike के प्रोडक्ट कैसे हैं बल्कि इसने बिना Nike शब्द का इस्तेमाल किए athletes से उनकी कहानियाँ सुनवाईं की कैसे उन्हें Nike के ज़रिए ईमोशनल रिवॉर्ड मिले। जब नया ad लॉन्च हुआ तो Nike को बहुत सारे लोगों से फीडबैक मिले जो की “just do it” से inspire हुए थे । कंपनी को उन लोगों की चिट्ठियाँ आईं जो अपना वेट कम करना चाहते थे, बुरे रिश्ते ख़त्म करना चाहते थे या फिर अपनी खराब जॉब छोड़ना चाहते थे । बहुत लोग सिर्फ इस स्लोगन “just do it” से इतना inspired थे की वो अपनी ज़िंदगी में कई सारे बदलाव लाना चाहते थे । हम इंसान ईमोशनल होते हैं । सच्चाई ये है की हम कोई प्रोडक्ट उसकी अच्छाइयाँ देखकर नहीं बल्कि ये देखकर खरीदते हैं की वो प्रोडक्ट हमें कैसा महसूस करा रहा है । इसी वजह से वो ब्रैड्स जो अपने कस्टमर के साथ ईमोशनल connection बनाते हैं वो सक्सेसफुल होते हैं। ग्रेट ब्रैड्स प्रोडक्ट के बजाए emotions बेचते हैं । उन ब्रैड्स का मकसद अपने कस्टमर की emotional ज़रुरत को पूरा करना होता है जैसे की – “मैं खुश और सक्सेसफुल रहना चाहता हूँ” या फिर कुछ ऐसा बोलना जो एक इंसान की खुद की identity को दिखाए जैसे की – “मैं एक athlete हूँ” या “मैं एक आर्टिस्ट हूँ”। ग्रेट बँडस टेंडस को अनदेखा करते हैं (Great ग्रेट ब्रैंड्स ट्रेंड्स को अनदेखा करते हैं (Great Brands Ignore Trends) ओपरा विनफ्रे ने अपना फेमस टॉक शो 2017 में बंद कर दिया था। मीडिया में उनके अचीवमेंट और उनके billionaire बनने को लेकर काफी चर्चा हुई । ओपरा ने अपने टॉक शो के ज़रिए एक अलग ही छाप छोड़ी थी, उन्होंने टॉक शो को एक नया मतलब दे दिया था। उन्होंने ओपरा बुक क्लब के ज़रिए बुक्स खरीदना और पढ़ना भी काफी पोपुलर कर दिया था। उन्होंने एक अकैडमी अवॉर्ड भी जीता है । ओपरा अपने फैसलों के लिए भी जानी जाती हैं । उन्होंने बाकी टॉक शोज़ की देखा देखि ना करते हुए, अपना शो तब बंद कर दिया जब वो बहुत हिट चला रहा था और वो चाहती तो उसे आगे बढ़ा सकती थी। ओपरा आज तक के बनाए गए ब्रैन्डिंग प्लाटफॉर्म में से सबसे इफेक्टिव और दमदार रही हैं । ओपरा ने कभी भी मारथा स्टीवर्ट या दूसरी बड़ी हस्तियों की तरह अपना नाम प्रोडक्टस पर इस्तेमाल किए जाने के लिए नहीं दिया । उन्होंने कभी वो बिज़नस नहीं चुना जो उनकी काबिलीयत के दायरे में ना हो। वोग की एडिटर,Anna Wintour ने कहा था – “अगर आप कोई भँड बनाने जा रहे हैं, तो आपको पता होना चाहिए आपके लिए क्या सही और क्या असली है” और ओपरा ने बिल्कुल ऐसा ही किया | ओपरा हमेशा से ही रियल और कल ना रूपाने वाली – ओपरा हमेशा से ही रियल और कुछ ना छुपाने वाली रही हैं, उन्होंने अपने कस्टमर की सच्चे ब्रैंड रेफरल की ज़रूरत को तब पूरा किया जब सोशल मीडिया जैसे की ट्विटर और फेसबुक नहीं आए थे । उन्होंने अपनी फील्ड में सारे ट्रेंड्स को इग्नोर किया । नतीजे के तौर पर उन्होंने अपना एक खुद का मूवमेंट बनाया और चलाया । ट्रेंड को फॉलो करना एक रिस्की बिज़नस हो सकता है । जो हर कोई कर रहा है वो करना इंसानों को बड़ा अच्छा लगता है. इसके अलावा ये सोचे बिना की अगर हर कोई एक ही चीज़ कर रहा है तो ये कितना गलत भी हो सकता है? ज़ाहिर सी बात है आप कभी नहीं चाहेंगे की आपकी कंपनी पीछे छूट जाए या बड़ी सक्सेस से दूर रहे | ट्रेंड फॉलो करना बस शॉर्ट टर्म प्रॉफिट ही देता है। ट्रेंड following “-er positioning” की प्रॉब्लम को खड़ा करता है। इसका मतलब है आपके प्रोडक्ट का दूसरे brand के प्रोडक्ट से compare किया जाना । कस्टमर की आँखों में , आपका प्रोडक्ट दूसरे बैंड के प्रोडक्ट जैसा ही है पर उसमें जो भी फ़र्क है वो है की या तो वो bigg-er होगा, small-er होगा, fast-er होगा, thinner होगा या फिर bett-er ॥ होगा। Example के तौर पर Hyundai एक er ब्रैड है । ये Lexus जितनी ही अच्छी है पर बस उससे सस्ती यानी cheap-er है। बर्गर किंग भी एक er ब्रैंड Lucmoothin light or 22uch ट्रेंड following “-er positioning” की प्रॉब्लम को खड़ा करता है। इसका मतलब है आपके प्रोडक्ट का दूसरे brand के प्रोडक्ट से compare किया जाना । कस्टमर की आँखों में , आपका प्रोडक्ट दूसरे बैंड के प्रोडक्ट जैसा ही है पर उसमें जो भी फ़र्क है वो है की या तो वो bigg-er होगा, small-er होगा, fast-er होगा, thinner होगा या फिर bett-er होगा। Example के तौर पर Hyundai एक er ब्रैड है । ये Lexus जितनी ही अच्छी है पर बस उससे सस्ती यानी cheap-er है। बर्गर किंग भी एक er ब्रैंड है । उसके smoothie light-er होते हैं। उसके wrap मैक्डॉनाल्ड्स से healthi-er होते हैं। यहाँ तक की वॉलमार्ट भी एक er बैंड है । वॉलमार्ट के दाम Target ब्रैड से low-er यानी कम होते हैं । तो देखा आपने er position एक खतरनाक चीज़ है | आपके ब्रैंड को दूसरे ब्रैंड्स से काम आँका जा सकता है और आपकी कोई यूनीक वैल्यू भी नहीं होती है । आपकी तुलना हमेशा एक दूसरे बैंड से की ही जाएगी। आप ये गलती मत दोहराइए । ठीक ओपरा की ही तरह अपने कस्टमर के साथ अच्छे रिश्ते बनाइए और ट्रेंड्स को नज़रंदाज़ कीजिए । कस्टमर को अपनी बेस्ट वैल्यू डिलिवर कीजिए। What Great Brands Do: The Seven Brand-Buildin… Denise Lee Yohn ग्रेट ब्रैड्स कस्टमर के पीछे नहीं भागते (Great Brands Don’t Chase Customers) Lululemon Athletica che growing सक्सेसफुल clothing स्टोर है । उसके सेल्स स्टाफ बहुत अच्छे से ट्रेन किए गए हैं और उन्हें ‘educators’ कहा जाता है , वहीं कस्टमर को ‘guest’ कहा जाता है | Lululemon आमतौर पर अपने स्टोर में फ्री योग क्लास या रनिंग क्लब होस्ट करते रहते हैं । उनका स्टोर उन guests के लिए भी खुला रहता है जो उनके यहाँ से कुछ नहीं खरीदते । Lululemon अपने हर स्टोर में एक कम्यूनिटी बनाने पर काम करते हैं। ये सभी चीजें एक्सीलेंट कस्टमर सर्विस देने का काम करती हैं लेकिन उनके ब्रैंड की एक कमी है और वो है उनकी स्ट्रिक्ट रिटर्न पॉलिसी | Lululemon वो रिटर्न एक्सेप्ट नहीं करते जो 14 दिन से पहले खरीदे गए हों । साथ ही अगर कस्टमर ने कोई आइटम पहन लिया या उसे धो दिया हो तो वो उसे भी एक्सेप्ट नहीं करते हैं। आइटम को return करने के लिए ज़रूरी है की उसका ओरिजिनल टैग लगा हुआ हो । Lululemon के प्रोडक्ट बाकी ब्रैंड्स की तुलना मे थोड़े महंगे भी हैं । उसके main प्रोडक्ट पर sale गिट के दौरान भी दिनाांट नटी टिगा ताना है। Lululemon के प्रोडक्ट बाकी ब्रैड्स की तुलना मे थोड़े महंगे भी हैं । उसके main प्रोडक्ट पर sale पीरियड के दौरान भी डिस्काउंट नहीं दिया जाता है। कंपनी के सीनियर वाईस प्रेसीडेंट इस फैसले को सपोर्ट करते हैं । उनका मैसेज ये है की अगर आप सस्ते दाम में समान खरीदना चाहते हैं तो आप उसे आसानी से कहीं और से खरीद सकते हैं | Lululemon के प्रोडक्ट काफी हाई क्वालिटी और innovative होते हैं । ये उनके प्रोडक्टस, कपड़े की quality और design में देखा जा सकता है। हाई क्वालिटी को बनाए रखने में काफी कॉस्ट लगती है इसीलिए Lululemon एक महंगी ब्रैड है । जैसा की सीनियर वाईस प्रेसीडेंट कहते हैं कि वो हर किसी को खुश करने की कोशिश नहीं करते। Lululemon ने काभी भी कस्टमर के पीछे भागना सही नहीं समझा। जो ब्रैंड्स हाई क्वालिटी के प्रोडक्ट देती हैं और जिन्हें खुद पर भरोसा होता है वो loyal customers को अपनी ओर खींच ही लेते हैं। साथ ही वो एक हाई क्वालिटी और ईमानदार employees, supplier, investor और बिज़नस पार्टनर को भी attract करते हैं जो की अच्छी वैल्यू को बढ़ावा देते हों । ऐसे ब्रैंड्स ज़बरदस्त कस्टमर सर्विस देते हैं। इसलिए ज़रूरी है की आप अपने बिज़नस में कस्टमर के पीछे ना भागे बल्कि एक ऐसा वैल्यू का सेट बनाएँ जिससे की आपकी ब्रैड जानी जाए। ऐसा करने के बाद सक्सेस ख़ुद आप तक पहुँचने का रास्ता ढूंढ लेगी। ग्रेट ब्रैड्स छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखते हैं (Great Brands Sweat the Small Stuff) FMOT A dat concept u proctor & gamble 2005 से फॉलो कर रहे थे । FMOT को ef-mot कहा जाता है, और इसका मतलब “first moment of truth” है यानी कस्टमर और p&g के प्रोडक्ट के बीच जो पहला 3 से 7 सेकंड का आमना-सामना या मिलना होता है । P&G के मार्केटर और managers ने ये इम्पॉर्टन्ट मोमेंट इसलिए highlight किया है क्योंकि यही वो वक्त है जब कस्टमर decide करेगा की उसे P&G के प्रोडक्ट खरीदने हैं या नहीं। मान लीजिए आप एक ग्रोसरी स्टोर में हैं । आपके पास आपका शॉपिंग कार्ट है और आप शैम्पू खरीदने की तरह जा रहे हैं , यहीं पर FMOT मोमेंट होगा । P&G FMOT की इम्प्रूवमेंट को लेकर इतने कमिटड हैं की उन्होंने कंपनी में डायरेक्टर ऑफ FMOT की भी पोस्ट बना रखी है । इस पोजीशन के नीचे 15 employees की टीम होती है और इस कंपनी के दुनियाभर में टोटल 50 लीडर्स हैं जो की FMOT को संभालने के लिए सिलेक्ट किए हैं । डीना हॉवेल P&G के FMOT की पहली डायरेक्टर रही हैं । उन्होंने कहा की P&G इस बात पर भरोसा करता है की उनके प्रोडक्ट की पैकेजिंग कस्टमर का ध्यान अपनी ओर खींचने के काबिल होनी चाहिए । P&G पैकेज डिजाइन के लिए गाइड question भी बनाते हैं जैसे की what am | ? who am I? P&G पकज डिजाइन क लए गाइड question भा बनाते हैं जैसे की what am | ? who am I? why am I right for you? एक सेकंड मोमेंट ऑफ टुथ भी होता है जब कस्टमर प्रोडक्ट खरीदकर उसे घर आकर इस्तेमाल करने वाला हो । P&G का मानना है की पैकेज डिजाइन कस्टमर को एक अलग एक्सपीरियंस देने के काबिल होना चाहिए I P&G दुनियाभर मे कई स्टडी कर रहा है जिसमें कई मिलियन consumers शामिल हैं और ऐसा इसलिए है क्योंकि वो अपने पैकेज डिजाइन को हाई क्वालिटी का बनाना चाहते हैं । Example के तौर पर P&G का ट्रैड्मार्क शैम्पू , पैंटीन अब दुनिया के कई शैम्पू ब्रैंड्स के मुकाबले लीड कर रहा है । जब पैंटीन की पैकेजिंग को redesign किया गया था तब स्टाफ ने FMOT और सेकंड मोमेंट ऑफ ट्रुथ के बारे में भी सोचा था । पैंटीन को पहले 3 category- नॉर्मल , ड्राइ और oily बालों के लिए अलग अलग नाम से जाना जाता था पर दिक्कत ये थी की consumers को ये नहीं पता था की उनके बाल किस तरह के हैं जिसकी वजह से वो गलत शैम्पू चुन लेते थे । नया कलेक्शन अब इस तरीके से डिजाइन किया गया था जिसमें यूजर के मनचाहे effect की बात की गई थी । पैंटीन अब ऐसे लेबल रखने लगा था जैसे की स्ट्रेट हेयर , कर्ली हेयर वगैरह। तो अब अगर आप स्ट्रेट बाल चाहते हैं तो आप वो शैम्पू चुन सकते हैं । पैंटीन के नए पैकेज में prov विटमिन कंटेन्ट का भी लेबल शामिल शा। रो तर्ट provmetalli और दार्ट लॉस शटों में . नया कलेक्शन अब इस तरीके से डिजाइन किया गया था जिसमें यूजर के मनचाहे effect की बात की गई थी । पैंटीन अब ऐसे लेबल रखने लगा था जैसे की स्ट्रेट हेयर , कर्ली हेयर वगैरह। तो अब अगर आप स्ट्रेट बाल चाहते हैं तो आप वो शैम्पू चुन सकते हैं । पैंटीन के नए पैकेज में prov विटमिन कंटेन्ट का भी लेबल शामिल था। ये वर्ड prov metallic और हाई ग्लॉस शब्दों में लिखा रहता है । डिज़ाइनर्स ने इस बात का भी ध्यान रखा की पैंटीन कन्डिशनर के bottle में ढक्कन नीचे की ओर होना चाहिए ताकि कन्डिशनर आसानी से फ़्लो हो सके । कुल मिलाकर पैंटीन के bottle को ज़्यादा से ज़्यादा attractive बनाने की कोशिश की गई ताकि वो किसी भी स्टोर में कस्टमर का ध्यान अपनी ओर खींच सके और घर में आसानी से इस्तेमाल भी किया जा सके। आपको अपने प्रोडक्ट की डिटेल का ऐसे ही ध्यान रखना होगा । छोटी सी भी बात मायने रखती है क्योंकि कस्टमर उसे भी नोटिस करते हैं । ग्रेट ब्रैड्स को पता होता है की छोटी से छोटी डीटेल भी कस्टमर तक कोई ना कोई मैसेज पहुंचाएगी । जब वो पहली बार आपका प्रोडक्ट देखे , उसे इस्तेमाल करने से लेकर फिर अनलाइन कमेन्ट करने तक आपको उन्हें हर लेवल पर हाई क्वालिटी एक्सपीरियंस देने की ज़रूरत है । What Great Brands Do: The Seven Brand-Buildin… Denise Lee Yohn ग्रेट ब्रैंड्स कमिट करती हैं और कमिटेड रहती (Great Brands Commit and Stay Committed) शेक शैक हमारे टाइम का एक बेहद सक्सेसफुल रेस्टोरेंट chain है । ये बर्गर और शेक फूड जॉइंट न्यू यॉर्क में 2001 में एक हॉट डॉग के कार्ट के रूप में शुरू की गई थी। अब उसकी दुनियाभर मे 30 branch हैं । कंपनी का ख़ुद से वादा था की वो बेस्ट बर्गर प्लेस बनें । यहाँ तक की ceo रैंडी गरुट्टी ने तो ग्रोथ opportunities तक को अपने बैंड की कमिटमन्ट को मेन्टेन करने के लिए रिजेक्ट कर दिया था । शेक शैक के पास हमेशा ही केटरिंग शुरू करने के ऑफर आए पर रैंडी ने उसे मना कर दिया। केटरिंग रेस्टोरेंट के लिए एक बहुत ही अच्छा साइड बिजनस होता है। ये शेक शैक के लिए भी एक hit साबित हो सकता था पर रैंडी ने कहा की शेक शैक सिर्फ़ लज़ीज़ खाने से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं की लोग शेक शैक में आएं क्योंकि हमारी सर्विस और माहौल कस्टमर के एक्सपीरियंस में चार चाँद लगा देता है और इसी वजह से शेक शैक कभी केटरिंग नहीं करेगा”। रात मॉग सैंट बनाने के लिा तरूरी है की था याने A A < रेस्टोरेंट के लिए एक बहुत ही अच्छा साइड बिजनस होता है। ये शेक शैक के लिए भी एक hit साबित हो सकता था पर रैंडी ने कहा की शेक शैक सिर्फ़ लज़ीज़ खाने से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं की लोग शेक शेक में आएं क्योंकि हमारी सर्विस और माहौल कस्टमर के एक्सपीरियंस में चार चाँद लगा देता है और इसी वजह से शेक शैक कभी केटरिंग नहीं करेगा”। एक स्ट्राँग बैंड बनाने के लिए जरूरी है की आप अपने ब्रैड पर फोकस करें और उसे लेकर कमिटेड रहें। भले ही दूसरे बिजनस नए ट्रेंड में सक्सेसफुल हो रहे हों पर आपको अपने कोर सर्विस पर से अपना ध्यान नहीं हटाना चाहिए । शॉर्ट टर्म फ़ायदे के लिए अंधा हो जाना सही नहीं है। प्रेशर और टेंशन से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है और वो है priorities सेट करना और उन पर खरे उतरना। पता लगाइए की आपकी main ideology क्या है । ये कुछ ऐसा होना चाहिए जिसके लिए आप कह सकें की “ये हमारी खासियत है”, ” ये हम हैं”। आपकी core ideology उस glue की तरह काम करती है जो आपके बिज़नस को साथ में पकड़े रहेगा और उसे बढ़ाने में आपकी मदद करेगा । हर उस फैसले को जिसे आप लेते हैं , ज़रूरी है की आप अपनी कोर ideology के लिए कमिटेड रहें। What Great Brands Do: The Seven Brand-Buildin… Denise Lee Yohn ग्रेट ब्रैंड्स को कभी कुछ लौटाना नहीं पड़ता (Great Brands Never Have to “Give Back”) Patagonia एक मशहूर आउटडोर clothing स्टोर है जो की US में है । 25 नवंबर 2012 में, जिस दिन ब्लैक फ्राइडे था, इन्होंने न्यू यॉर्क टाइम्स में बहुत से अजीबोगरीब ad छापे | ad में उन्होंने Patagonia के trademark jacket को दिखाया जिसके नीचे लिखा था “इस जैकेट को ना खरीदें” | उसके नीचे की लाइन ने ये समझाया की छुट्टियों के दौरान आपके पास एक अच्छी opportunity है की आप consumerism के environmental इम्पैक्ट का ध्यान रख सकें । इस ad ने बताया की Patagonia आने वाले सालों ने में एक बड़ा बिज़नस बनना चाहता है । वो एक ऐसी दुनिया बनाना चाहता है जो हमारे और हमारे बच्चों के लिए सेफ हो। Patagonia ने रीडर्स को ये कहा की आप कम खरीदिए और कोई भी प्रोडक्ट खरीदने से पहले ध्यान से सोचिए। All Done? Finished आप कम खरीदिए और कोई भी प्रोडक्ट खरीदने से पहले ध्यान से सोचिए। Patagonia a common threads ने initiative भी लॉन्च किया । इसके अंदर Patagonia ने वादा किया की वो damaged प्रोडक्ट को रिपेयर करने में और उन्हें ebay पर बेचने में कस्टमर की मदद करेंगे । इस पहल ने कस्टमर्स को भी एक वादा करने पर मजबूर किया कि आप सिर्फ लंबे समय तक टिकने वाले प्रोडक्ट ही खरीदें और उनके डैमेज हो जाने के बाद उन्हें रिपेयर करें, बेचें या recycle करें या उन्हें ऐसे लोगों को दें जिन्हें उसकी ज़रूरत है | Patagonia के मैकेटिंग हेड ने कहा की ये कोई मार्केटिंग नौटंकी नहीं है । ये ज़्यादा कस्टमर पाने के लिए या ज़्यादा प्रॉफिट कमाने के लिए नहीं है । ये Patagonia की सच्चाई है की employees यहाँ कैसे रहते हैं । कॉमन थ्रेड initiative उस चीज़ का फ़ैलाव यानि extension है जो वो कंपनी में करते हैं और वो सिर्फ कस्टमर को ये करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं । Patagonia या दूसरों ग्रेट brands को कभी सोसाइटी या कस्टमर को बदले में कुछ लौटाना नहीं पड़ेगा क्योंकि सोशल मूवमेंट उनके काम करने के कल्चर में पहले से ही काफी जुड़ा हुआ हैं । एक पड़गा क्याकि साशल मूवमट उनक काम करन क कल्चर में पहले से ही काफी जुड़ा हुआ हैं । एक पॉजिटिव सोशल चेंज खुद ही ग्रेट ब्रैड का मार्क है और उन्हें कोई चैरिटी इवेंट sponsor करने की भी ज़रूरत नहीं है । कंपनी और उसके employees हर दिन समाज में एक नया बदलाव लाने के लिए काम करते हैं। ग्रेट ब्रैड्स की कोई कॉर्पोरेट सोशल ज़िम्मेदारी नहीं होती बल्कि CSV यानि की creating shared value होती है जोकी वो अपने employees , customer और बिज़नस पार्टनर के साथ शेयर करते हैं । कुछ brands ने तो अपने प्रोडक्ट को redesign किया ताकि वो किसी सोशल प्रॉब्लम को ठीक कर सकें, वहीं कुछ ने अपने काम करने के तरीके और supply chain में बदलाव किए । गिविंग बैक यानी सोसाइटी को वापस कुछ लौटाना, उसके लिए कुछ करना कंपनी के कल्चर में ही शामिल होता है । इसीलिए उन्हें अलग से कोई चैरिटी इवेंट organize करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। ग्रेट भेंड्स हर दिन समाज के लिए कुछ अच्छा करने में अपना योगदान देते हैं। Conclusion तो चलिए एक बार फिर से 7 ब्रैंड बिल्डिंग फैक्टर पर नजर डालते हैं जो की ग्रेट भेंडस इस्तेमाल करते हैं । All Done? Finished योगदान दतह । Conclusion तो चलिए एक बार फिर से 7 ब्रैंड बिल्डिंग फैक्टर पर नजर डालते हैं जो की ग्रेट ब्रैंड्स इस्तेमाल करते हैं । ग्रेट ब्रैंड्स कंपनी के अंदर से शुरुआत करते हैं । वो प्रोडक्ट बेचने की जगह emotions बेचते हैं , वो ट्रेंड को इग्नोर करते हैं । वो कस्टमर के पीछे नहीं भागते। ग्रेट ड्स छोटी-छोटी बात का भी ध्यान रखते हैं, वो कमिटेड रहते हैं और उन्हें सोसाइटी को कभी अलग से कुछ लौटाना नहीं पड़ता। आपने IBM के बारे मे जाना कि ceo सैम ने कैसे फैसला किया की वो कंपनी के अंदर से शुरुआत करेंगे और अपने employees में वो वैल्यू डालेंगे जो उन्हें चाहिए । आपने Nike के बारे में जाना, “just do it” कैम्पैन ने सिर्फ प्रोडक्ट के फीचर्स पर ही फोकस नहीं किया बल्कि athletes के emotions को भी दिखाया जिसकी वजह से audience inspire और motivate हुई। आपने ओपरा के बारे में जाना कि आपको ट्रेंड फॉलो नहीं करना चाहिए । अपनी खुद की identity यानी पहचान बनाइए, अपने कस्टमर से जुड़ने की कोशिश करें और उन्हें ज़्यादा वैल्यू दें। आपने Lululemon के बारे में भी जाना। इस बैंड All Done? Finished करें और उन्हें ज़्यादा वैल्यू दें। आपने Lululemon के बारे में भी जाना। इस ब्रैंड की स्ट्रिक्ट return पॉलिसी है और ये काफ़ी महंगा ब्रैड है। ये बैंड उन्हीं को attract करता है जिनके सेम standard हों। आपने फिर शेक शैक के बारे में जाना. भले ही केटरिंग और फूड ट्रक उसे ज़्यादा कमाकर दे सकते थे पर फिर भी वो अपने ब्रैंड और उसकी वैल्यूस पर कमिटेड रही जो था कस्टमर को हाई क्वालिटी रेस्टोरेंट एक्सपीरियंस देना। अंत मे आपने pantagonia के बारे में जाना की पॉजिटिव सोशल चेंज हर ग्रेट ब्रैड के कल्चर में होता है और इसलिए वो हर दिन समाज में बदलाव लाने में मदद करती हैं और अपना योगदान देती हैं। कोई फ़र्क नहीं पड़ता की आपका बिज़नस छोटा है या बड़ा, इन principles को अपने दिल में बैठा लीजिए और पूरी कोशिश कीजिए की आप इसे अपने बिज़नस में अप्लाई कर सकें । अगर आपने ऐसा कर लिया तो हमें यकीन है कि एक दिन आप भी एक ग्रेट बँड ज़रूर बनेंगे।

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