Warren Buffett Biography In Hindi

Warren Buffett A look at the life of Warren Buffett वॉरेन बफेट दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक है जो कई दशकों से फोर्ब्स बिलेनियर्स की टॉप पोजीशन पर बने हुए है. आज की डेट में उन्हें दुनिया का छठा अमीर आदमी माना जाता है, जिनकी नेट वर्थ है $100 बिलियन. बफेट एक बेहद सम्मानित बिजनेस मेग्नेट और समाज सेवी है जो स्टॉक मार्केट के सबसे सक्सेसफुल इन्वेस्टर माने जाते रहे है. इन्वेस्टमेंट की फील्ड में उनकी बड़ी कामयाबी को देखते हुए बहुत से लोग बफेट की इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेज़ी को इन्वेस्टिंग के गोल्ड स्टैण्डर्ड के तौर पर लेते है. बिजनेस की दुनिया में वो कुछ ऐसे खास प्रिंसिपल और फिलोसफ़ी पर चलते रहे जो दुनिया भर में एक मिसाल बन गई. दुनिया के कई एंटप्रेन्योर उनकी बिजनेस स्ट्रेटेजी से काफी इम्प्रेस्ड रहे है. क्या आपके मन में भी वॉरेन बफेट की लाइफ कि जर्नी और बिजनेस कि दुनिया में उनकी इस कामयाबी का राज जानने की इच्छा है कि कैसे उन्होंने अपनी इन्वेस्टमेंट के बलबूते पर इतना बड़ा बिजनेस एम्पायर खड़ा किया? इस समरी में हम इन्वेस्टमेंट के इस गुरु की लाइफ के बारे में डिस्कस करेंगे, उनके बचपन से लेकर आज तक की जिंदगी को एक्सप्लोर करेंगे और उनकी लाइफ जर्नी के इन वैल्यूएबल लेसंस को सीखने की कोशिश करेंगे जिसकी वजह से वो आज दनिया के उनकी लाइफ जर्नी के इन वैल्यूएबल लेसंस को सीखने की कोशिश करेंगे जिसकी वजह से वो आज दुनिया के सबसे अमीर इन्वेस्ट बन पाए है. Early life ओरेकल ऑफ़ ओमाहा के नाम से फेमस, वॉरेन एडवर्ड बफेट 30 अगस्त, 1930 के दिन ओमाहा, नेब्रास्का में लीला स्थाल बफेट के घर पैदा हुए थे. उनके फादर, हॉवर्ड बफेट एक स्टॉक ब्रोकर थे जिन्होंने 1942 में US कांग्रेसमेन के रूप में काम किया था. बफेट को शुरू से ही फाइनेंश और बिजनेस रिलेटेड मैटर में बड़ा इंटरेस्ट था. उनकी मेंटल मैथ्स स्किल्स देखकर उनके फ्रेंड्स और फेमिली मेंबर्स ने उन्हें यंग मैथ्स जीनियस के नाम से बुलाना शुरू कर दिया था. जिस तरह से वो बड़े-बड़े फिगर और नंबर चुटकियों में सोल्व कर लेते थे उसे देखकर सब हैरान रह जाते, बाद में बड़े होने पर भी उनकी यही स्किल उनके बड़े काम आई. बफेट जब छोटे थे तो अक्सर अपने फादर के साथ उनके शॉप पर जाया करते थे और वहां रखे ब्लैक बोर्ड पर स्टॉक प्राइस लिखा करते थे. 17 साल की छोटी उम्र में जब बच्चो को मैथ्स के सवाल भी ठीक से नहीं आते, तब बफेट ने अपनी पहली इन्वेस्टमेंट की थी. उन्होंने Cities Service Preferred का एक शेयर $38 के हिसाब से तीन शेयर्स खरीदे. लेकिन तब वो बड़े निराश हुए जब स्टॉक वैल्यू गिरकर सिर्फ $27 तक रह गई थी. लेकिन बफेट बड़े सब्र लेकिन तब वो बड़े निराश हुए जब स्टॉक वैल्यू गिरकर सिर्फ $27 तक रह गई थी. लेकिन बफेट बड़े सब्र से तब तक वेट करते रहे जब तक कि स्टॉक प्राइस बढ़कर $40 नहीं हो गया, और तब जाकर उन्होंने अपने शेयर बेचकर छोटा सा प्रॉफिट कमाया. इसके कुछ समय बाद ही Cities Service Preferred के स्टॉक प्राइस में $200 per शेयर के हिसाब से भारी उछाल आया. ये एक्सपिरीएंस उनके लिए एक लेसन था जिसने उन्हें सिखाया कि इन्वेस्टिंग में पेशंस की बड़ी अहमियत है. First Entrepreneurial Venture सिर्फ छह साल की छोटी उम्र से ही बफेट के अंदर एक बिजनेसमेन के गुण नज़र आने लगे थे जब उन्होंने अपने ग्रैंडफादर के ग्रोसरी स्टोर से 25 सेंट में कोका-कोला के 6 पैक खरीदे और हर बोटल को एक निकल के हिसाब से बेचा जिससे उन्हें 5 सेंट का प्रॉफिट हुआ. इसके पांच साल बाद ही बफेट ने Cities Service Preferred में इन्वेस्ट करके फाइनेंश की दुनिया में अपना पहला कदम रखा, हालाँकि उन्होंने अपने शेयर कुछ ज़्यादा ही जल्दी बेच दिए थे जिससे उन्हें प्रॉफिट कम हुआ था. 13 साल की उम्र में बफेट दो बिजनेस मैनेज करने लगे थे- एक न्यूज़पेपर बेचने का और दूसरा हॉर्स रेसिंग टिप शीट का. ये वो साल था जब एक यंग टीनएजर के तौर पर उन्होंने अपना पहला टैक्स return फाईल किया था. बफेट वुड्रो विल्सन हाई स्कूल, वाशिंगटन, डी.सी. में पढ़ते थे और हमेशा ही पैसे अंदर एक बिजनेसमेन के गुण नज़र आने लगे थे जब उन्होंने अपने ग्रैंडफादर के ग्रोसरी स्टोर से 25 सेंट में कोका-कोला के 6 पैक खरीदे और हर बोटल को एक निकल के हिसाब से बेचा जिससे उन्हें 5 सेंट का प्रॉफिट हुआ. इसके पांच साल बाद ही बफेट ने Cities Service Preferred में इन्वेस्ट करके फाइनेंश की दुनिया में अपना पहला कदम रखा, हालाँकि उन्होंने अपने शेयर कुछ ज़्यादा ही जल्दी बेच दिए थे जिससे उन्हें प्रॉफिट कम हुआ था. 13 साल की उम्र में बफेट दो बिजनेस मैनेज करने लगे थे- एक न्यूज़पेपर बेचने का और दूसरा हॉर्स रेसिंग टिप शीट का. ये वो साल था जब एक यंग टीनएजर के तौर पर उन्होंने अपना पहला टैक्स return फाईल किया था. बफेट वुड्रो विल्सन हाई स्कूल, वाशिंगटन, डी.सी. में पढ़ते थे और हमेशा ही पैसे कमाने के नए-नये तरीके सोचा करते थे. बफेट जब हाई स्कूल में थे तो उन्होंने अपने एक फ्रेंड के साथ मिलकर 25$ में एक सेकंड हैण्ड पिनबॉल मशीन खरीद ली. उन्होंने इस मशीन को एक बाल काटने वाले salon में इंस्टाल किया. कुछ महीनों बाद उन्होंने इतना प्रॉफिट कमा लिया कि अब वो ऐसी और मशीनें खरीद सकते थे. फिर जल्द ही तीन अलग-अलग जगहों पर उनकी मशीनें लग गई और फिर उन्होंने अपना ये जमा-जमाया बिजनेस $7200 में बेच दिया. Warren Buffett GIGL Team Education 1947 में वॉरेन बफेट ने 17 साल की उम्र में हाई स्कूल ग्रेजुएशन पास कर ली थी. शुरू से ही उनका खुद का बिजनेस स्टार्ट करने का सपना था तो उन्होंने कॉलेज जाकर आगे की पढाई करने की जरूरत नहीं समझी क्योंकि उन्हें नौकरी नहीं करनी थी. पर फिर भी उनके फादर ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया के wharton बिजनेस स्कूल में उनका एडमिशन करा दिया जहाँ वॉरेन ने सिर्फ दो साल ही पढ़ाई कि. बफेट अपने कॉलेज के टीचर से खुश नहीं थे और उन्हें हमेशा यही लगता रहा कि उनके पास प्रोफेसर से ज़्यादा नॉलेज है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया छोड़कर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेब्रास्का-लिंकन में एडमिशन ले लिया. अपनी पढाई के दौरान वो फुल टाइम काम किया करते थे तो भी उन्होंने तीन साल में ही अपनी ग्रेजुएशन सक्सेसफूली कम्प्लीट की. बफेट पहले की तरह ही ग्रेजुएशन कि पढ़ाई के लिए भी मना करते रहे पर अपनी फेमिली के जोर देने पर उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडमिशन ले लिया पर उन्हें वहां से” टू यंग” होने का रिजेक्शन लैटर मिला. निराश होकर उन्होंने फिर कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया तो उन्हें एडमिशन मिल गया. जाने-माने इन्वेस्टर बेन ग्राहम और डेविड डॉड कोलंबिया में प्रोफेसर थे. बफेट बेन ग्राहम को गया. जाने-माने इन्वेस्टर बेन ग्राहम और डेविड डॉड कोलंबिया में प्रोफेसर थे. बफेट बेन ग्राहम को अपना मेंटोर मानने लगे थे जिन्होंने उन्हें इन्वेस्टिंग के अहम सबक सिखाये जिनकी बदौलत बहुत जल्द ही बफेट ने अपनी जिंदगी ही बदल डाली थी. Acquisition of Berkshire Hathaway – A multinational conglomerate holding company 1956 में बफेट ने अपने होमटाउन ओमाहा में अपनी पहली कंपनी बफेट पार्टनरशिप लिमिटेड की नींव रखी थी. जो टेक्नीक उन्होंने अपने प्रोफेसर ग्राहम से सीखी थी, उससे उन्हें बिजनेस चलाने में तो मदद मिली ही साथ ही उनकी ख़ुद कि बिजनेस स्किल्स उनके बड़े काम आई. उन्होंने बड़े आसानी से अंडर वैल्यूड कंपनीज़ को पहचान लिया था जो एक बड़े मार्जिन के साथ प्रॉफिट जेनरेट कर सके यानी उनके एक यंग मिलियनेयर बनने की शुरुवात हो चुकी थी. उन्होंने बर्कशायर हैथवे नाम से एक स्ट्रगलिंग टेक्सटाइल कंपनी को खरीद लिया था. 1960 के शुरुवाती दशक में उन्होंने इसके स्टॉक्स खरीद कर रखे और $70,000 की इन्वेस्टमेंट से शुरुवात की और पांच साल के अंदर-अंदर उन्होंने कंपनी को खरीद लिया था. हालाँकि बफेट पार्टनरशिप लिमिटेड एक बेहद सक्सेसफुल वेंचर रहा था पर 1969 में बफेट ने इसे बंद करके बर्कशायर हैथवे में फोकस करने का इरादा किया. उन्होंने टेक्स्टटाईल मेन्यूफेक्चरिंग डिविज़न किया. उन्होंने टेक्स्टटाईल मेन्यूफेक्चरिंग डिविज़न छोड़कर कंपनी को बढाने के लिए अलग-अलग इंश्योरेंस एसेट खरीदने शुरू कर दिए जैसे कि गवर्नमेंट एम्प्लोईज़ इंश्योरेंस कंपनी (CEICO), मीडिया (वाशिंगटन पोस्ट) और ऑइल इंडस्ट्री वगैरह. आज भी GEICO, कंपनी की इंश्योरेंस डिविज़न का सेंट्रल पार्ट है और कंपनी की बाकि इन्वेस्टमेंट में ये एक ये बड़ा सोर्स ऑफ़ कैपिटल रहा है. इस समय तक बफेट बेहद सस्केसफुल बिजनेसमेन बन चुके थे और उनके बारे में मशहूर हो चूका था कि वो किसी भी नॉर्मल इन्वेस्टमेंट को सोने के भाव में बदल देते है. जैसे कि बदनामी के कारण चर्चा में रहे सोलोमन ब्रदर्स जिसे बफेट ने 1987 में खरीद लिया था. 1989 में जब बर्कशायर हैथवे ने कोका-कोला में बहुत बड़ी इन्वेस्टमेंट की तो बफेट को कंपनी का डायरेक्टर बनाया गया. इससे पहले भी वो कई बिजनेस वेंचर और एंटरप्राईज़ के डायरेक्टर रह चुके थे जैसे ग्राहम होल्डिंग कंपनी, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स होल्डिंग्स और जिलेट कंपनी. बर्कशायर हैथवे टेक्सटाइल जो कभी घाटे में चल रही थी, आज एक ऐसा पॉवरफुल बिजनेस ग्रुप बन चुका था जिसकी मार्केट वैल्यू $640 बिलियन से भी ज़्यादा थी. बर्कशायर हैथवे का एक स्टॉक “The Class” जिसकी कीमत per शेयर $400,000 से भी ज़्यादा थी, पहले यही शेयर सिर्फ $72 का हुआ करता था जब बफ़ेट ने कंपनी खरीदी थी. बफ़ेट की स्टाऑर्टिनरी लिननेस स्किल्स और टन्तेस्मेंट सेंट्रल पार्ट है और कंपनी की बाकि इन्वेस्टमेंट में ये एक बड़ा सोर्स ऑफ़ कैपिटल रहा है. इस समय तक बफेट बेहद सस्केसफुल बिजनेसमेन बन चुके थे और उनके बारे में मशहूर हो चूका था कि वो किसी भी नॉर्मल इन्वेस्टमेंट को सोने के भाव में बदल देते है. जैसे कि बदनामी के कारण चर्चा में रहे सोलोमन ब्रदर्स जिसे बफेट ने 1987 में खरीद लिया था. 1989 में जब बर्कशायर हैथवे ने कोका-कोला में बहुत बड़ी इन्वेस्टमेंट की तो बफेट को कंपनी का डायरेक्टर बनाया गया. इससे पहले भी वो कई बिजनेस वेंचर और एंटरप्राईज़ के डायरेक्टर रह चुके थे जैसे ग्राहम होल्डिंग कंपनी, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स होल्डिंग्स और जिलेट कंपनी. बर्कशायर हैथवे टेक्सटाइल जो कभी घाटे में चल रही थी, आज एक ऐसा पॉवरफुल बिजनेस ग्रुप बन चुका था जिसकी मार्केट वैल्यू $640 बिलियन से भी ज़्यादा थी. बर्कशायर हैथवे का एक स्टॉक “The Class” जिसकी कीमत per शेयर $400,000 से भी ज़्यादा थी, पहले यही शेयर सिर्फ $12 का हुआ करता था जब बफ़ेट ने कंपनी खरीदी थी. बफ़ेट की एक्स्ट्राऑर्डिनरी बिजनेस स्किल्स और इन्वेस्टमेंट फिलोसफ़ी के चलते आज यही कंपनी दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप बन चुका था जो दिन ब दिन नई ऊँचाईयां छू रहा था. Warren Buffett GIGL Team The investment philosophy of Warren Buffet बफ़ेट वैल्यू इन्वेस्टिंग की स्ट्रेटेज़ी फॉलो करते है जो बेंजमिन ग्राहम ने स्टार्ट की थी जिसे बफ़ेट अपना मेंटोर मानते थे. वैल्यू इन्वेस्टिंग का मेन गोल है कि वो किसी स्ट्रोंग मगर स्ट्रगलिंग और अंडरवैल्यू कंपनी के शेयर्स पर इन्वेस्ट करती है जब शेयर का मार्केट प्राइस सबसे कम होता है ताकि फ्यूचर में शेयर प्राइस बढ़ने पर इन्वेस्टमेंट फर्म को ज़्यादा से ज़्यादा प्रॉफिट हो सके. वैल्यू इन्वेस्टर्स ऐसी कंपनी ढूंढते है जिनके asset की अच्छी खासी वैल्यू होती है और जिनका पहले का ट्रैक रिकॉर्ड profitable रह चुका हो लेकिन जो फिलहाल स्ट्रगल कर रहे होते हैं. असल में ऐसा कोई सेट मेथड नहीं है जिससे किसी भी कंपनी की असली वर्थ का पता लगाया जा सके लेकिन कंपनी के फंडामेंटल के बेस पर एक एस्टीमेट कैलकुलेट किया जा सकता है. जैसे bargain hunter, वैल्यू इन्वेस्टर्स ऐसे वैल्यू के स्टॉक्स ढूंढते है जिन पर अक्सर ज्यादातर बायर्स का ध्यान नहीं जाता है. किसी कंपनी की वर्थ उसके स्टॉक प्राइस से तौलने के बजाए, बफ़ेट उस कंपनी की पोटेंशियल देखते थे कि वो फ्यूचर में कैसा परफोर्म करेगी. बाकि ट्रेडर्स से हटकर उनका गोल कभी भी शोर्ट टर्म प्रॉफिट में नहीं बजाए, बफ़ेट उस कंपनी की पोटेंशियल देखते थे कि वो फ्यूचर में कैसा परफोर्म करेगी. बाकि ट्रेडर्स से हटकर उनका गोल कभी भी शोर्ट टर्म प्रॉफिट में नहीं रहा बल्कि बफ़ेट लॉन्ग टर्म के लिए स्टॉक्स में इन्वेस्ट करते थे, क्योंकि उनका टारगेट ऐसी हाई क्वालिटी कंपनी की ओनरशिप पर रहता था जो फ्यूचर में ग्रो करके भारी-भरकम प्रॉफिट जेनरेट कर सके. किसी कंपनी में इन्वेस्ट करने के लिए बफ़ेट ने कभी उसकी मार्केट वर्थ की परवाह नहीं की क्योंकि वो जानते थे कि एक बार कंपनी ग्रो करना स्टार्ट करेगी तो मार्केट खुद ही उसके क्वालिटी स्टॉक्स में इंटरेस्ट लेना शुरू कर देगा. 1 ये वो फिलोसफ़ी थी जिस पर वॉरेन बफेट चलते थे और अपने पार्टरन को लिखे एक लैटर में उन्होंने इस बात को एक्सप्लेन भी किया था, “ये हमारी इन्वेस्टमेंट फिलोसफी में मील का पत्थर है: कभी भी अच्छी सेल के भरोसे मत बैठो बल्कि परचेज़ प्राइस इतने अट्रेक्टिव रखो कि एक नॉर्मल सेल से भी अच्छा रिजल्ट मिल जाए.” वॉरेन बफ़ेट किसी भी कंपनी में इन्वेस्ट करने से पहले जिन की-फीचर्स पर गौर करते थे, उन्हें नीचे समराईज़ किया गया है ताकि आपको भी कुछ टिप्स मिल सके: कंपनी कि ज़बरदस्त परफोर्मेस, कैश फ्लो और रेवेन्यू का ट्रैक रिकॉर्ड Low debt to equity ratio कंपनी में पिछले 10 सालों से इनक्रीजिंग प्रॉफिट 2. मिल सके: कंपनी कि ज़बरदस्त परफोर्मेंस, कैश फ्लो और रेवेन्यू का ट्रैक रिकॉर्ड Low debt to equity ratio कंपनी में पिछले 10 सालों से इनक्रीजिंग प्रॉफिट मार्जिन का ट्रेंड कंपनी जो भी प्रोडक्ट बनाए, उनके मार्केट में कॉम्पटीटिव एडवांटेज हो और उसमें किसी भी तरह का कॉम्पटीशन फेस करने की एबिलिटी हो. Buffet likes to invest in his “area of competence.” 1985 में दिए गए एक इंटरव्यू में वॉरेन बफ़ेट ने एफिशिएंट वैल्यू इन्वेस्टिंग का सीक्रेट शेयर किया. यानी उनके मुताबिक़” एरिया ऑफ़ कॉम्पटीटेंस” किसी भी बिजनेस की एक्चुअल वैल्यू डिसाइड करता है. ये बेहद जरूरी है कि स्टॉक्स में इन्वेस्ट करते वक्त हमे अपनी एक्सपर्टीज़ का पूरा फायदा उठाना चाहिए और ये चीज़ उस वक्त ख़ासतौर पर जरूरी हो जाती है जब अपसाइड अपोरच्यूनिटी सामने आती है जैसे कि वॉल स्ट्रीट किसी बिजनेस की एक्चुअल वर्थ से सिक्योरिटी को अंडर वैल्यू कर देती है. अगर आपको बिजनेस की उतनी समझ नहीं है तो आप शायद इस तरह कि चीज़े समझ नहीं पायेंगे. यही वजह है कि बफ़ेट उसी बिजनेस तक सीमित रहते है जो उनकी समझ में आता है. ये उनका एक और बिजनेस मंत्र कहा जा सकता है. इतने बड़े बिजनेस टाइकून होने के बावजूद उन्होंने आज तक कभी फ़ास्ट गोर्टगा मॉलनीती सिल्ट में टलेट नहीं किया टाइकून होने के बावजूद उन्होंने आज तक कभी फ़ास्ट ग्रोईंग टेक्नॉलजी की फ़ील्ड में इन्वेस्टमेंट नहीं किया, वो इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि वो इसकी उतनी समझ नहीं रखते हैं. साथ ही ये और कारण भी है कि ये फील्ड ऐसी है जो हमेशा तेज़ी से बदलती रहती है और बफ़ेट ऐसे बिजनेस में इन्वेस्ट करना पसंद करते है जो कम से कम 10 साल पुराना हो, ताकि ईज़िली ये एनालाईज़ किया जा सके कि कंपनी पहले कैसा परफॉर्म कर चुकी है- historical analysis उनकी इन्वेस्टिंग स्ट्रेटेज़ी का एक की-फैक्टर रहा है. जैसा कि वो खुद कहते है “ऐसी कई चीजें हैं जिनको वैल्यू करने में मैं सक्षम नहीं हूँ…कई चीजें ऐसी है जिन्हें मैं बहुत अच्छे से वैल्यू कर सकता हूँ और कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनके बारे में मैं नहीं जानता, और यह बहुत खराब बात हो सकती है, लेकिन हर चीज़ के बारे में पता होना ज़रूरी तो नहीं है.” यानि बफ़ेट का मानना है कि हर चीज़ के बारे में जानना लेकिन किसी एक चीज़ में भी एक्सपर्ट ना होना अच्छी बात नहीं है, तो ज़ाहिर है कि वो हर किसी फील्ड में इन्वेस्ट नहीं करना चाहते बल्कि उन्ही में पैसा लगाते है जिसकी उन्हें जानकारी और समझ है. उनकी फिलोसफ़ी का झुकाव एक नॉर्मल इन्वेस्टर से ज़्यादा स्पेशलिस्ट बनने में है. वो एक ऐसे बिजनेस गुरु है जिन्हें कई दशकों का एक्सपीरिएंस है और अपने करियर में उन्होंने कई सारे सक्सेसफुल इन्वेस्टमेंट किये है. इसके बावजूद बफ़ेट आज भी सोच समझकर अपने फैसले लेते है और सिर्फ उसी बिजनेस में इन्वेस्ट यह बहुत खराब बात हो सकती है, लेकिन हर चीज़ के बारे में पता होना ज़रूरी तो नहीं है.” यानि बफ़ेट का मानना है कि हर चीज़ के बारे में जानना लेकिन किसी एक चीज़ में भी एक्सपर्ट ना होना अच्छी बात नहीं है, तो ज़ाहिर है कि वो हर किसी फील्ड में इन्वेस्ट नहीं करना चाहते बल्कि उन्ही में पैसा लगाते है जिसकी उन्हें जानकारी और समझ है. उनकी फिलोसफ़ी का झुकाव एक नॉर्मल इन्वेस्टर से ज़्यादा स्पेशलिस्ट बनने में है. वो एक ऐसे बिजनेस गुरु है जिन्हें कई दशकों का एक्सपीरिएंस है और अपने करियर में उन्होंने कई सारे सक्सेसफुल इन्वेस्टमेंट किये है. इसके बावजूद बफ़ेट आज भी सोच समझकर अपने फैसले लेते है और सिर्फ उसी बिजनेस में इन्वेस्ट करते है जिसके बारे में उन्हें पता होता है. आज के वक़्त में जहाँ हर तरफ इन्फोर्मेशन की भरमार है, यंगस्टर्स को लगता है कि ज़्यादा से ज़्यादा इन्वेस्ट करेंगे तो उतना ही फायदा होगा पर ऐसा नहीं है. इन्वेस्टमेंट के भी अपने कुछ रूल्स है. हर फील्ड में घुसने के बजाए कुछ ख़ास एरिया पर फ़ोकस करो जिसमे आपकी पकड़ हो. ख़ासकर जब आप बड़ी रकम इन्वेस्ट करने की सोच रहे हो तो बेहतर होगा कि उसी फील्ड में करे जिसके बारे में थोड़ी-बहुत नॉलेज हो, बजाए इसके कि आप किसी ऐसी जगह पैसा फंसा दे जहाँ से return की जरा भी उम्मीद ना हो. Warren Buffett GIGL Team Personal life and philanthropy बफ़ेट ब्रिज गेम के बड़े शौकीन है और टाइम पास के लिए ब्रिज खेलना पसंद करते है. उन्हें अपने दोस्तों की पार्टी में गाना गाने और ukulele गिटार बजाने का भी बड़ा शौक है. बफ़ेट और उनकी वाइफ सुजन थॉम्पसन की शादी 1952 में हुई थी. उनके तीन बच्चे है, सूज़ी, हॉवर्ड और पीटर. 1977 में दोनों ने अलग-अलग रहने का फैसला किया था लेकिन आज भी दोनों मैरिड कपल है और एक-दूसरे के साथ उनके अच्छे रिलेशन है. जुलाई 2004 में मुहँ के कैंसर की लंबी बीमारी से जूझने के बाद सुज़न बफ़ेट ने दुनिया को अलविदा कहा. फिर 2006 में अपने 76th जन्मदिन पर बफ़ेट ने अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड और साथी, 60 साल की एस्ट्रिड मेंक्स से शादी की. बफ़ेट और एस्ट्रिड 1978 से साथ में रह रहे थे जब उनकी वाइफ उन्हें छोड़कर सैन फ्रांसिस्को रहने चली गई थी. दरअसल सुजन ने ही सैन फ्रांसिस्को में अपना सिंगिंग करियर स्टार्ट करने के लिए ओमाहा जाने से पहले उन दोनों की मुलाक़ात कराई थी. बफ़ेट और सुज़न की शादी एक ओपन मैरिज़ मानी जाती रही क्योंकि अलग रहने के बावजूद दोनों ने कभी तलाक नहीं लिया था और अपने दोस्तों को भेजे जाने वाले क्रिसमस कार्ड में वो हमेशा एक फेमिली तरह “वॉरेन. सजी और एस्टिड” लिखा करते फिर 2006 में अपने 76th जन्मदिन पर बफ़ेट ने अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड और साथी, 60 साल की एस्ट्रिड मेंक्स से शादी की. बफ़ेट और एस्ट्रिड 1978 से साथ में रह रहे थे जब उनकी वाइफ उन्हें छोड़कर सैन फ्रांसिस्को रहने चली गई थी. दरअसल सुजन ने ही सैन फ्रांसिस्को में अपना सिंगिंग करियर स्टार्ट करने के लिए ओमाहा जाने से पहले उन दोनों की मुलाक़ात कराई थी. बफ़ेट और सुज़न की शादी एक ओपन मैरिज़ मानी जाती रही क्योंकि अलग रहने के बावजूद दोनों ने कभी तलाक नहीं लिया था और अपने दोस्तों को भेजे जाने वाले क्रिसमस कार्ड में वो हमेशा एक फेमिली तरह “वॉरेन, सूजी और एस्ट्रिड” लिखा करते थे. 2006 में बफ़ेट ने अपनी 99% दौलत चैरिटी में देने का फ़ैसला लिया क्योंकि उनका मानना है कि हम जो कुछ कमाते है, सोसाईटी के उन लोगों को वापस देना चाहिए जो सबसे ज़्यादा जरूरतमंद है. खुद उनके शब्दों में “अगर हम अपने क्लेम चेक ( बर्कशायर हैथवे स्टॉक सर्टिफिकेट) का 1% हिस्सा खुद पर खर्च भी करें तो ना तो हमारी खुशियाँ और ना ही हमारे ऐशो-आराम में कोई बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि उल्टा अगर हम 99% हिस्सा चैरिटी में देते है तो कई लोगों का भला हो सकता है और ये पैसा उनकी एजुकेशन और सेहत के काम आ सकता है”. Warren Buffett GIGL Team Warren Buffett lifestyle क्या आप एक सिंपल लाइफ से तंग आ चुके है क्योंकि आपकी इनकम कम है, आपको स्टूडेंट लोन भरना पड़ता है या दूसरी फाईनेंशियल दिक्कते है? लेकिन आप मल्टी billionaire इन्वेस्टर वॉरेन बफ़ेट की लाइफ से कुछ सीख सकते है, जिनके पास दुनिया भर की दौलत होने के बावजूद वो एक बेहद सिंपल लाइफ जीते है. ये बात बड़ी मशहूर है कि वॉरेन बफ़ेट ऐसी लाइफ बिल्कुल नहीं जीते जैसा कि लोग किसी billionaire की लाइफ के बारे में सोचते है. ऐसा नहीं है कि हर billionaire बड़े से महल में रहता होगा या लक्ज़री कार में घूमता होगा. आपको बता दे कि मिस्टर वॉरेन बफ़ेट अभी भी उसी घर में रहते है जो उन्होंने 1958 में ओमाहा, नेब्रास्का में $31,500 में खरीदा था. उन्हें इस घर से बड़ा लगाव है जहाँ उन्होंने अपनी वाइफ और बच्चो के साथ खुशहाल और यादगार लम्हे गुज़ारे है और इस घर के बारे में वो बेहद शौक से कहते है “मैं इसे किसी भी कीमत पर नहीं बेचूंगा”. आप शायद सोचते होंगे कि एक billionaire होने आप शायद सोचते होंगे कि एक billionaire होने के नाते वो आये दिन महंगे रेस्टोरेंट में खाते होंगे या उनके घर में कई सारे शेफ होंगे जो उनके लिए एक से एक एक्ज़ोटिक डिश बनाते होंगे. लेकिन बफ़ेट ऐसा कुछ भी पसंद नहीं करते बल्कि ऑफिस से जाते हुए वो McDonalds में ब्रेकफ़ास्ट करना पसंद करते है. उनके खास दोस्त और माइक्रोसॉफ्ट के ओनर बिल गेट्स ने अपने ब्लॉग में एक बार जिक्र किया था “वॉरेन के बारे में एक बात हैरान करने वाली है कि जो 6 साल की उम्र में खाते थे, आज भी वही खाना पसंद करते है”. गेट्स आगे लिखते है “वो अभी तक बेबी फूड से बाहर नहीं निकल पाए हैं क्योंकि आज भी वो ज़्यादातर हैमबर्गर, आईस-क्रीम और कोक पसंद करते है”. बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री में उनकी बेटी सूज़ी ने बताया कि बफ़ेट को कम प्राइस में ओल्ड कार खरीदना पंसद है और अगर कार थोड़ी बहुत डैमेज भी हो तो वो उसे ठीक करवाकर यूज़ कर लेते है. वो शो ऑफ करने में ज़रा भी यकीन नहीं रखते इसलिए कभी भी महंगी गाड़ियाँ खरीदना उनका शौक नहीं रहा, ये और बात है कि वो चाहे तो एक से एक महंगी गाडी खरीद सकते है. वैसे ये एक बड़ी इंटेलीजेंट सोच है क्योंकि कार की गाडी खरीद सकते है. वैसे ये एक बड़ी इंटेलीजेंट सोच है क्योंकि कार की रीसेल वैल्यू हमेशा कम होती जाती है. इसी तरह आज जबकि हमारी ज्यादातर पोपुलेशन डिज़ाइनर सूट और महंगे जूतों की दीवानी है, वही बफ़ेट आज भी सिंपल कपड़े पहनना पसंद करते है, उन्हें महंगे बैंड या लेबल का शौक नहीं है. उन्होंने एक बार बताया था कि उन्हें चाईनीज़ कपड़े बनाने वाली एंटप्रेन्योर मैडम ली के बनाए सूट पसंद है, क्योंकि उनकी फिटिंग बड़ी अच्छी होती है, क्योंकि यही एक ऐसी चीज़ है जो वो कपड़ो में देखते है. बफ़ेट की सिंपल लाइफस्टाइल बाद में बिल गेट्स ने भी कन्फर्म की थी कि कैसे एक बार बफ़ेट ने McDonalds में पेमेंट करने के लिए कूपन यूज़ किये थे. ये इस बात का सुबूत है कि billionaire लोग भी पैसे बचाने के मौके ढूंढते है बेशक चाहे वो कितनी भी महँगी लाइफ अफोर्ड कर सकते हो. आज की इस बैंड conscious सोसाईटी में बनेट जैसे billionaire हर उस इन्सान को सीख देते है जो महंगी चीजों के पीछे भागते है और इन्सान की हैसियत उसकी चीजों से तौलते है. लाइफ में महंगी चीज़े किसे अच्छी नहीं लगती लेकिन ब्रैड और लेब् इन्सान की असली पहचान नहीं है, ना गाडी खरीद सकते है. वैसे ये एक बड़ी इंटेलीजेंट सोच है क्योंकि कार की रीसेल वैल्यू हमेशा कम होती जाती है. इसी तरह आज जबकि हमारी ज्यादातर पोपुलेशन डिज़ाइनर सूट और महंगे जूतों की दीवानी है, वही बफ़ेट आज भी सिंपल कपड़े पहनना पसंद करते है, उन्हें महंगे बैंड या लेबल का शौक नहीं है. उन्होंने एक बार बताया था कि उन्हें चाईनीज़ कपड़े बनाने वाली एंटप्रेन्योर मैडम ली के बनाए सूट पसंद है, क्योंकि उनकी फिटिंग बड़ी अच्छी होती है, क्योंकि यही एक ऐसी चीज़ है जो वो कपड़ो में देखते है. बफ़ेट की सिंपल लाइफस्टाइल बाद में बिल गेट्स ने भी कन्फर्म की थी कि कैसे एक बार बफ़ेट ने McDonalds में पेमेंट करने के लिए कूपन यूज़ किये थे. ये इस बात का सुबूत है कि billionaire लोग भी पैसे बचाने के मौके ढूंढते है बेशक चाहे वो कितनी भी महँगी लाइफ अफोर्ड कर सकते हो. आज की इस बैंड conscious सोसाईटी में बनेट जैसे billionaire हर उस इन्सान को सीख देते है जो महंगी चीजों के पीछे भागते है और इन्सान की हैसियत उसकी चीजों से तौलते है. लाइफ में महंगी चीज़े किसे अच्छी नहीं लगती लेकिन ब्रैड और लेब् इन्सान की असली पहचान नहीं है, ना उसका चाजास तालत ह. लाइफ में महंगी चीज़े किसे अच्छी नहीं लगती लेकिन बैंड और लेब् इन्सान की असली पहचान नहीं है, ना ही महंगी चीजों पर खर्च करने से हमारे अंदर अच्छे वैल्यूज़ और संस्कार आते है. सिर्फ महंगी लाइफस्टाइल का मतबल अच्छी जिंदगी नहीं है और इस बात को बफ़ेट अपने शब्दों में कुछ इस तरह कहते है: “अक्सर ऐसा होता है कि इंसान जायदाद का मालिक नहीं बल्कि दौलत हावी होकर मालिक को गुलाम बना देता है. अच्छी सेहत के अलावा एक और चीज़ है जिसे मैं सबसे ज़्यादा अहमियत देता हूँ और वो हैं दिलचस्प और पुराने दोस्त”. Conclusion ऐसे लोग जो बिजनेस की दुनिया में नाम कमाना चाहते है, उनके लिए बफ़ेट के उनके पार्टनर को लिखे लैटर पढ़ना और उनकी इन्वेस्टमेंट कि रिच हिस्ट्री के बारे में जानना काफी वैल्यूएबल लेसन सिखा सकता है. जैसे कि हर फील्ड में इन्वेस्टमेंट करने से अच्छा है कि ऐसी फील्ड तक सीमित रहो जिसकी आपको पहले से नॉलेज है. किसी नई कंपनी की इंट्रीन्सिक वैल्यू यानी उसके asset कि असली वैल्यू क्या है, का पता करने के लिए उसके ऑफिशियल पेपर और डॉक्यूमेंट देखो ताकि कंपनी की फाइनेंशियल स्टेटस का पता चल Conclusion ऐसे लोग जो बिजनेस की दुनिया में नाम कमाना चाहते है, उनके लिए बफ़ेट के उनके पार्टनर को लिखे लैटर पढ़ना और उनकी इन्वेस्टमेंट कि रिच हिस्ट्री के बारे में जानना काफी वैल्यूएबल लेसन सिखा सकता है. जैसे कि हर फील्ड में इन्वेस्टमेंट करने से अच्छा है कि ऐसी फील्ड तक सीमित रहो जिसकी आपको पहले से नॉलेज है. किसी नई कंपनी की इंट्रीन्सिक वैल्यू यानी उसके asset कि असली वैल्यू क्या है, का पता करने के लिए उसके ऑफिशियल पेपर और डॉक्यूमेंट देखो ताकि कंपनी की फाइनेंशियल स्टेटस का पता चल जाए और स्टॉक्स उसी वक्त खरीदो जब वो मार्केट में सबसे लो प्राइस पर बिक रहे हो. फिर पूरे पेशन्स के साथ स्टॉक्स होल्ड कर के रखो जब तक कि प्राइस बढ़ नहीं जाती. बात जब इन्वेस्टमेट की हो तो हम दुनिया के सबसे अमीर इन्वेस्टर से काफी कुछ सीख सकते है जो इतने सक्सेसफुल होने के बावजूद आज भी सोच समझकर इन्वेस्ट करते है और उन्होंने ये फैसला किया है कि वो अपने टोटल प्रॉफिट का 99% हिस्सा चैरिटेबल ट्रस्ट को देंगे.

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