Unscripted: Life, Liberty, and the Pursuit of Entre… M. J. DeMarco Book Summary

Unscripted: Life, Liberty,
and the Pursuit of Entre…
M. J. DeMarco
इंट्रोडक्शन
मान लो कि आपको अपना सपनों का घर यानि ड्रीम
हाउस मिल गया. आपके garage में एक एक
लक्ज़री गाड़ियाँ है, आपको सुबह अलार्म लगाकर
जल्दी उठने की ज़रुरत नहीं है, आपके ऊपर कोई बॉस
नहीं है और ना ही आपको कोई बिल्स पे करने की
चिंता है. आप अपना ब्रेकफास्ट ख़त्म करने से पहले
ही इतना कमा लेते हो जितना आप अपनी पिछली जॉब
में नहीं कमा पाते थे.
ये सब किस्से-कहानियों की बातें लगती है ना! एक
ऐसी रियेलिटी जो शायद कभी सच नहीं हो सकती.
लेकिन मैं आपको बता दूं कि इस समरी को जानने
के बाद आपकी सोच बदल जाएगी. क्यों? क्योंकि मैं
पिछले 20 सालों से कुछ ऐसे ही जी रहा हूँ और मुझे
पता है कि आप भी ऐसे जी सकते है. ऐसे बहुत से लोग
है जिनके माइंड को कुछ इस तरह से स्क्रिप्ट किया
गया है यानि उन्होंने ये मान लिया है कि वो इस तरह
की ज़िंदगी तो जी ही नहीं सकते. मेरे पास कंप्यूटर
साइंस की डिग्री नहीं थी और ना ही बड़े-बड़े पैसे
वाले लोगों के साथ contact थे तो भी मैंने वो कर

दिखाया जो मैंने सोचा था और मुझे यकीन है कि आप
भी ऐसा सकते हो. तो मेरा काम है कि मैं आपको
सिखाऊं कि अपनी लाइफ को अनस्क्रिप्टेड कैसे किया
जाए.
इमेजिन करो आप सुबह 5 बजे उठते हो. अलार्म
की बेसुरी रिंगटोन से आपकी नींद टूट जाती है. आप
हडबडा कर बिस्तर से उतरते हो और जल्दी-जल्दी
तैयार होने लगते हो. आपके पास इतना टाइम भी नहीं
है कि आप ब्रेकफ़ास्ट कर सको. आपके garage
में एक मर्सीडीज़ सी क्लास खड़ी है जिसकी सारी
installment अभी बाकि है. कार अब पुरानी
हो चुकी है. इसकी सारी शाईन ख़त्म हो गई है और
आपको इसे चलाने में अब उतना मज़ा नहीं आता.
लेकिन आपके पास कोई चॉइस नहीं है. आप अपनी
पुरानी कार लेकर काम पर चल देते हो लेकिन मन में
ये बात आती है जैसे कोई बकरी हलाल होने मर्सीडीज़
में बैठकर जा रही हो. आपको अपने वर्कप्लेस के बारे
में सोचकर ही फ्रस्ट्रेशन होने लगती है. आप दुआ करते
हो कि जल्दी से फ्राईडे आ जाए.
ऑफिस पहुँचते ही आपकी टेबल पर आपको एक
रिपोर्ट मिलती है. आप उसे खोलते हो. उसमें लिखा
है कि अब से आपको ऑफिस में एक घंटा एक्स्ट्रा
देना पड़ेगा और अगले तीन महीनों तक महीने में एक
ही सैटरडे ऑफ मिलेगा. सबसे बड़ी बात तो ये है कि

इतना सब कुछ करने के बाद भी आपकी सैलरी उतनी
ही रहेगी जितनी पहले थी. अब प्रॉब्लम ये है कि आप
ये जॉब छोड़ नहीं सकते क्योंकि आपने दुनिया भर के
लोन लिए हुए है, आपको हर महीने बिल्स भरने पड़ते
है. सारा दिन ऑफिस में खटने के बाद भी आपके सपने
पूरे नहीं हो पा रहे हैं. आपकी लाइफ में कोई ग्रोथ,
कोई ख़ुशी नहीं है. घर लौटते हुए आप ये सोचकर
एक्साईटेड होते हो कि घर जाकर आराम से फुटबॉल
मैंच देखोगे.
दिन भर में सिर्फ यही एक एक्साईटिंग बात थी
जिसका आप वेट कर रहे थे. लेकिन तभी रोड पर एक
एक्सीडेंट हो जाता है जिसकी वजह से आपके दो घंटे
और वेस्ट हो जाते है. यानि अब आप पूरा मैं च नहीं
देख पाओगे. घर पहुँचकर आपको पता चलता है अभी
मैं च खत्म होने में दस मिनट बचे है. आप थककर वहीं
काउच पर लेट जाते हो और कब आपकी आँख लग
जाती है आपको पता ही नहीं चलता. जो बचे-कुचे
घंटे आपको मिले थे वो मिनटों की तरह गुजर जाते है
और अगले दिन फिर से वही अलार्म और फिर से वही
रूटीन शुरू हो जाता है. तो देखा आपने! आपका दिन
कब खत्म हुआ आपको पता ही नहीं चला.
ये मेरी कहानी थी, आज से कुछ साल पहले और मुझे
लगता है कि दुनिया में बहुत सारे लोग आज भी सेम
यही लाइफ जी रहे है. खैर, ये कहानी उतनी इम्पोर्टेन्ट
नहीं है जितना कि आपका ये समझना कि हमारे साथ


कुछ तो गलत हो रहा है. ज्यादातर लोग इस चीज़ को
समझने के बावजूद भी नज़रअंदाज़ कर देते है. उन्हें
लगता है अरे नहीं, ऐसा तो कुछ है ही नहीं कुछ ऐसे
भी लोग है जो सिर्फ वीकेंड का वेट करते है. उनके
लिए जीना मतलब वीकेंड एन्जॉय करना. वीकेंड आते
ही उनके दिमाग से मंडे की टेंशन निकल जाती है. अब
कुछ ऐसे लोग भी है, जिनमें मैं भी एक हूँ और शायद
आप भी, जो इस स्टम पर ही सवाल उठाते है. वो
बार-बार पूछते है “ये चल क्या रहा है भई?” तो मैंने खुद
से ये सवाल कैसे पूछा और कैसे डिसाइड किया कि
मुझे अपनी लाइफ अब अनस्क्रिप्टेड तरीके से जीनी है?
तो नॉलेज और realisation का मेरा ये सफ़र
उस वक्त शुरू हुआ जब मैं शिकागो में बतौर एक
लिमोज़ीन ड्राईवर की जॉब करता था. तो एक बार
मुझे टेस्ट क्वालिफिकेशन के लिए ड्राइव करना था. मैं
लोकेशन पर थोडा जल्दी पहुँच गया था तो टाइम पास
करने के लिए मैं एक कैफे में चला गया और कॉफ़ी
का ऑर्डर दे दिया. मैं बाहर देख रहा था कि मैंने कुछ
नोटिस किया. बाहर रोड पर हर कोई रोबोट की तरह
आ-जा रहा था. सुबह के 6 बज रहे थे और औरत,
मर्द, जवान, बूढ़े सब कहीं न कहीं पहुँचने की जल्दी में
थे. सब एक ही चाल से चले जा रहे थे जैसे पहले भी वो
हज़ारों बार इसी तरह चलते रहे हो. मुझे हैरानी हो रही
थी कि ये लोग ऐसे क्यों जी रहे हैं और अगले हफ्ते के
बाकी चार दिन इसी तरह कैसे गजारेंगे


मैं काफी देर तक उन लोगों के बारे में सोचता रहा
और मुझे एहसास हुआ कि मैं ऐसी ज़िंदगी हरगिज़
नहीं जी सकता. नहीं मैं इस कैटेगरी में कभी फिट
नहीं हो सकता और वो दिन था जिसने मेरे अंदर एक
फ्यूचर एंटप्रेन्योर की नींव रखी. उसी दिन मैंने डिसाइड
कर लिया था कि मैं अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर
जीऊंगा नाकि किसी स्क्रिप्ट के हिसाब से और ये
स्क्रिप्ट क्या है? ये एक मैन्युअल है जो किसी फिफ्थ
क्लास के बच्चे के हाथ में पकड़ा दी जाती है जो फिर
अपनी पूरी लाइफ इसी के हिसाब से जीता है. आप
इस स्क्रिप्ट को देख या छू नहीं सकते लेकिन फिर
भी ये आपकी लाइफ में मौजूद होती है, ठीक वैसे ही
जैसे आप हवा में सांस लेते हो पर उसे देख या छू नहीं
सकते.

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and the Pursuit of Entre…
M. J. DeMarco
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दिए गए एक स्पीच में स्टीव
जॉब्स ने कहा था “किसी बात या प्रिंसिप्ल पर बिना
सोचे विचारे, बिना सवाल उठाए आँखें बनकर विश्वास
नहीं करना चाहिए और दूसरे लोगों की सोच के हिसाब
से नहीं जीना चाहिए”. तो यहाँ स्टीव जॉब्स क्या बताना
चाह रहे है? जी हाँ, वो इसी स्क्रिप्ट की बात कर रहे
है! खुद से ही पूछ लीजिये. आपके कुछ गोल्स होंगे
लेकिन क्या ये आपकी थिंकिंग है या किसी और की ?
आप कॉलेज जाकर कोई ना कोई डिग्री पूरी करते हो.
आप स्टूडेंट लोन लेकर अपनी एजुकेशन पूरी करते
हो. उसके बाद आपको भी एक जॉब मिल जाएगी और
आप भी गुलामों वाली जिंदगी जीयोगे. आपको वही
सेम बोरिंग काम रोज़ करना पड़ेगा ताकि आप अपना
लोन चुका सको, कपड़े-लत्ते का खर्च उठा सको और
अपनी ली हुई गाड़ी की installment भर सको.
आप दोस्तों को इम्प्रेस करने के लिए जो पार्टी देते हो
उसके लिए भी पैसे चाहिए. उम्र बढ़ने के साथ ही आप
कॉर्पोरेट दुनिया की सीढ़िया चढ़ने लगते हो.
बॉस को इम्प्रेस करने की कोशिश करते हो कि आप
कितने हार्ड वर्किंग हो. आपके बोनस बढ़ते जाते है,

आप और बढ़िया गाड़ी लेते हो, वीकेंड पर जमकर
पार्टी करते हो. उम्र बढ़ने के साथ आपका स्टैण्डर्ड भी
बढ़ता है. प्राडा, श्लैल, लुई वितौन, अब आप एक से
एक ब्रांडेड कपड़े ख़रीदते हो. आपकी चॉइस भी पहले
से बदल जाती है. अब आप ब्रेकिंग bad, गेम ऑफ़
थ्रोसं, walking डेड जैसे पॉपुलर टीवी सीरीज देखने
लगते हो . और उम्र बढ़ने के साथ आपके शौक और
महंगे होते जाते है. अब आप साल में कम से कम दो
वेकेशन पर जाते हो और अब आप ऐसी उम्र में पहुँच
जाते हो जहां आप सेटल होना चाहते हो यानी शादी
करना चाहते हो. फिर अपनी पसंद का साथी मिलने
पर आप ऐसी आलिशान शादी करोगे कि छ घंटे की
शादी में उड़ाया गया पैसा आपको कमाने में छह
साल लग जायेंगे. फ़िर आपके बच्चे होंगे और आप
रिटायरमेंट प्लान करने की भी सोचोगे. फिर जब बच्चों
की कॉलेज एजुकेशन का टाइम आएगा तो आप और
ज्यादा मेहनत करके पैसा कमाओगे. इस चक्कर में
आप एक स्ट्रिक्ट बजट फॉलो करने लगोगे. आप महंगे
रेस्ट्रोरेन्ट में खाना-पीना कम कर दोगे.
आप मूवीज जाना छोड़ दोगे और महंगे कपड़े लेना
भी बंद कर दोगे. आपको यकीन है कि आप 65 की
उम्र तक रिटायर हो जाओगे और ये भी उम्मीद है कि
इन्फ्लेशन रेट आपके पोर्टफोलियो को ज्यादा अफेक्ट
नहीं करेगा. लेकिन सच तो ये है कि आप कहीं ना
कहीं एक पॉइंट पर आकर पछता रहे होगे. आपकी

बकेट लिस्ट में इतनी सारी चीज़े है जिनके बारे में
आपने सोचा भी नहीं होगा और अब आपके बैंक में
इतना पैसा भी नहीं है. 65 की उम्र में आकर आपको
एहसास होगा कि आपके पास रिटायर होने लायक
पैसे भी नहीं है यानि अभी आपको और काम करना
पड़ेगा. लेकिन क्या वक्त किसी के लिए रुका है? क्या
वक्त को इस बात की फ्रिक है कि आपने एक ऐसे
इंडेक्स फंड में इन्वेस्ट किया था जिससे आपको कुछ
नहीं मिला? नहीं, वक्त का इसमें कोई कुसूर नहीं
है. वक़्त कभी किसी के लिए नहीं रुकता.
सच तो ये है कि आपने स्क्रिप्ट पर आँख मूँदकर भरोसा
कर लिया था. लेकिन ये स्क्रिप्ट कोई भी प्रोडक्ट नहीं
बनाती है. स्क्रिप्ट सिर्फ एक प्रोडक्ट बनाती है और वो
है आप. लेकिन मैं आपको बताऊं कि मैं कैसे उसका
प्रोडक्ट बनने से बच पाया? मेरी लाइफ बचपन से कुछ
अलग थी. मेरे पिता हमें छोड़कर चले गए थे और
पीछे मेरी माँ तीन बच्चों के साथ अकेली रह गई थी.
मुझे बचपन में कभी नए कपड़े या नए खिलौने नहीं
मिले. मैं “लाइफ ऑफ़ द रिच एंड फेमस” जैसे टीवी
शो देखता था. इसमें भी स्क्रिप्टेड थीम थी. इस शो के
मुताबिक शानदार लाइफस्टाइल सिर्फ सेलिब्रेटीज़ और
रॉक स्टार्स के लिए ही है यानि मेरे जैसे लोग तो कभी
ऐसी लाइफ जी ही नहीं सकते. मेरे जैसा गरीब बच्चा
भला लक्ज़री कहाँ से अफोर्ड करता.

एक दिन मैं आईसक्रीम पार्लर में था तो मैंने बाहर
एक Lamborghini खड़ी देखी. ये मेरी ड्रीम कार
थी. कार देखकर मैं एकदम पागल हो गया, मैं उसके
यंग ओनर के पास गया और पूछा “तुम क्या जॉब
करते हो?” उसने वो जवाब दिया जिसकी मुझे जरूरत
थी. उसने बताया कि वो एक एंटप्रेन्योर है और तब
मुझे एहसास हुआ कि सिर्फ सिलेब्रीटीज़, रॉक स्टार्स
या होलीवुड स्टार्स ही आलिशान लाइफस्टाइल जीने
का हक
रखते बल्कि वो लोग भी रखते है जो
एंटप्रेन्योर होते है यानि मैं भी ऐसी लाइफस्टाइल जी
सकता हूँ और उसके लिए मुझे एंटप्रेन्योर बनना होगा.
कॉलेज खत्म होते-होते मेरी सोच बदल गई थी.
मैं पूरी तरह से उस चीज़ पर फ़ोकस कर रहा
था जो मुझे सिखाया ही नहीं गया था यानि
entrepreneurship क्योंकि एजुकेशन सिस्टम
तो हमें सिर्फ जॉब करना सिखाता है. लेकिन
entrepreneurship मैंने खुद से सीखी. मैंने
डिसाइड कर लिया था कि मैं हफ्ते में पांच दिन टाई
बांधकर जॉब पर जाने वाला तो हूँ नहीं और मुझे
पूरा यकीन था मेरे सपने पूरे होंगे लेकिन क्या आप भी
हमेशा से इतने पॉजिटिव रहे है ?
अच्छा, जरा इस scene को इमेजिन कीजिए.
एक पिता अपने बच्चे को लेगो खेलते हुए देख रहा है.
वो उससे कहता है “अरे वाह! तुम्हारा ये लेगो का महल
तो बहुत अच्छा है, क्या तुम बड़े होकर राजा बनोगे?”


तो बच्चा अपने पिता की तरफ देखता है और कहता
है “नहीं, मैं तो एक कोठरी में रहूँगा और महल के
टॉयलेट साफ़ करूंगा.”
अगर मेरे बच्चे ने ऐसा कहा होता तो मैं उससे पूछता
“क्या तुम्हें टॉयलेट साफ करना अच्छा लगता है”?
अगर वो हाँ कहता तो बात वहीँ खत्म हो जाती.
लेकिन मुझे नहीं लगता कि दुनिया का कोई भी बच्चा
टॉयलेट साफ़ करने का सपना देखता होगा. हर बच्चा
बड़े-बड़े सपने देखता है और एक अच्छे फ्यूचर के बारे
में सोचता है. बच्चों से अगर पूछे तो वो बड़े होकर या
तो माइकल जैक्सन बनना चाहेंगे या माइकल जॉर्डन.
कोई गेम हो या हैलोवीन की पार्टी तो भी बच्चे अपना
फेवरेट character प्ले करना चाहते है. लेकिन
फिर सब अलग हो जाता है. आप बड़े हो जाते हो.
आप एक ऐसे एजुकेशन सिस्टम का पार्ट बन जाते हो
जहाँ आपको हफ्ते में पांच दिन स्कूल जाना होता है
और इससे पहले कि आप समझ पाओ आप भी अपने
बड़ो जैसे बन जाते हो. यानि जो आपने सपने देखे थे
वो सपने ही रह जाते है. लेकिन ये सब क्यों होता है ?
ये सब इस “स्क्रिप्ट की वजह से होता है. हम अपनी
डिग्री लेने और 9-5 की जॉब में इतने बिज़ी हो जाते
है कि अपने सपनों के बारे में तो भूल ही जाते है. हम
भूल जाते है कि हम कुछ बनना चाहते थे. लेकिन कौन


जिम्मेदार है इस स्क्रिप्ट को फैलाने के लिए? हम उन्हें
सीडर्स बोल सकते है. सीडर्स लोग भी हो सकते है और
इंस्टीट्यूशन भी.
जैसे एक्जाम्पल के लिए अगर आप 10th सेंचुरी
चाइना में रह रहे होते तो सीडर्स आपको ये बात मानने
पर मज़बूर कर देते कि धरती गोल नहीं चपटी है. जैसे
मान लो आप पहाड़ों से घिरी किसी जगह में रहते हो.
लीडर्स जानते है कि धरती चपटी यानी फ्लैट नहीं है
लेकिन ये इन्फोर्मेशन वो बाकि लोगों से छुपाकर रखते
है. लोगों से 16-16 घंटे काम करवाया जाता है जबकि
लीडर्स मजे से ऐशो-आराम की लाइफ जीते है, लेकिन
कोई आकर पब्लिक को बताता है कि धरती फ्लैट
नहीं राउंड है और वो दुनिया घूमकर आया है और
कहता है कि इस छोटी सी जगह से बाहर निकलो,
बाहर की दुनिया में और भी बैटर अपोर्चूनिटी मिलेंगी.
ऐसे में जाहिर है लीडर्स उस आदमी को सच बोलने से
रोकेंगे. वो उसे पागल करार देंगे ताकि लोग उसकी बातों
पर विश्वास ना करने लगे. लोग शायद लीडर्स की बातों
में यकीन कर भी ले क्योंकि उन्हें नहीं पता कि उन
पहाड़ों के उस पार की दुनिया और भी खूबसूरत और
हरी-भरी है.

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and the Pursuit of Entre…
M. J. DeMarco
हमारी दुनिया के साथ भी सेम यही किस्सा है. आपको
यहाँ हर जगह सीडर्स मिल जायेंगे चाहे आपकी फेमिली
हो या फ्रेंड्स. आपकी फेमिली आपको फ़ोर्स करेगी कि
आप फाईनेंस की पढाई करो चाहे आपकी मर्ज़ी हो या
ना हो क्योंकि उन्हें लगता है कि फाईनेन्स की फील्ड
में पैसा बहुत है इसलिए आपको इसी लाइन में जाना
चाहिए. आप मन मारकर अपने चार साल फाईनेन्स
में बर्बाद कर देते हो. सिर्फ हमारी फेमिली या फ्रेंड्स ही
सीडर्स नहीं होते बल्कि हमारा एजुकेशन सिस्टम खुद
अपने आप में बड़ा सीडर है. आपको बचपन में क्या
सिखाया गया था? यही ना कि मंडे से फ्राईडे तक बस
पढ़ाई करनी है और खेल-कूद सिर्फ वीकेंड्स पर.
आपसे उम्मीद की जाती है कि एक पर्टीक्यूलर टाइम
पर आप कॉलेज में एडमिशन ले, एक पर्टीक्यूलर
टाइम पर लंच खाएँ, यहाँ तक कि लू जाने के लिए
भी परमिशन ले! एजुकेशन सीडर्स के बाद आपको
कॉर्पोरेट सीडर्स भी मिलते है. ये आपको बताते है कि
आपको स्क्रिप्ट क्यों फॉलो करनी चाहिए: ताकि आप
ऐशो-आराम की लाइफ जी सके. लेकिन सवाल ये है
कि क्या आप वीकेंड पर टीवी देखने के लिए अपनी
आत्मा बेच दोगे? क्या ये वाकई में इतना जरूरी है?
लगता है आपमें से ज्यादातर लोगटी बोलेंगे


तो सीडर्स ये कैसे कर लेते है ? कैसे वो आपको
स्क्रिप्ट फॉलो करने के लिए मना लेते है? वो आपको
आजमाते है और आपको एंटरटेन करते रहते है.
जिस वक्त हम अपना फेवरेट फ़ूड खाते-खाते अपनी
मनपसन्द मूवी देख रहे होते है, उस वक्त हमारा माइंड
स्क्रिप्ट का गुलाम बनाया जा रहा होता है. इंटरेस्ट रेट
नेगेटिव है? तो ये लो! बिल्ली का वीडियो देखो, ऊन
के गोले से खेलते हुए. क्या गवर्नमेंट क़र्ज़ में डूबी हुई
है? तो जरा ये चेक करो, ऑस्कर में आपके फेवरेट
सेलिब्रेटीज़ ने क्या पहना है. स्टॉक मार्केट कैश हो रही
है? होने दो, आप ये पेटीशन साईंन करो कि एचबीओ
एक फेमस शो को कैंसल ना करे. मिडल ईस्ट में मासूम
लोगों का कत्लेआम हो रहा है? तो क्या, ये लो कैटी
पेरी का नया एल्बम सुनो.
ये सब असली मुद्दे से आपका ध्यान हटाने के लिए है,
ये आपको एक रेगुलर लाइफ जीने के लिए मजबूर कर
देंगे. अपनी लाइफ और गोल्स डिस्कस करने के बजाये
आप बोल रहे हो कि इस साल लेकर्स कितना बुरा खेले
है. किसी पोपुलर शो का 23rd सीजन चल रहा हो तो
आपकी स्पिरिट खत्म हो रही है जबकि घड़ी की सुईयाँ
आगे बढ़ रही है और आप बूढ़े हो रहे हो. सच तो ये है
कि कोई भी अपनी मर्जी से इस बखेड़े में नहीं कूदा है.
हम सब अपने कम्फर्ट ज़ोन में खुश है. लेकिन कुछ ही

सालों बाद पानी जब सिर से गुजरने लगता है तब हम
चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते. हमारी सारी फाईटिंग
स्पिरिट खत्म हो चुकी होती है तो क्या यही हमारी
किस्मत में लिखा है? नहीं, अब टाइम आ गया है कि
आप अपनी किस्मत खुद लिखे. आँखों पर जो पट्टी
बंधी है उसे उतार फेंकने का टाइम आ गया है.
जादूगर कैसे ट्रिक करता है, अगर ये सीक्रेट आपने
जान लिया तो जादू का असर ही खत्म हो जाएगा.
ऐसा ही कुछ आपको स्क्रिप्ट के साथ भी करना
होगा. आपको ये पट्टी उतारनी ही होगी जो आपकी
आँखों पर बंधी है. लेकिन हम ये पट्टी उतारेंगे कैसे?
ये सवाल शायद आपके मन में भी होगा तो जवाब है
अनस्क्रिप्टेड से! चलिए यहाँ कुछ सिंपल एक्जाम्पल
लेते है ताकि आप समझ सके कि ये अनस्क्रिप्टेड
आखिर है क्या.
क्या आपके खून-पसीने की सारी कमाई लोन चुकाने
में जा रही है? तो कैश पे करो!
वीकेंड पर आपके बच्चे का गेम है और आपको काम
पर जाना है! तो ऐसी जॉब ही छोड़ दो !
जब तक परमिशन ना मिले आप वेकेशन पर नहीं जा
सकते? तो कल ही वेकेशन के लिए निकलो!
फ्राइडे को अपनी फेवरेट ड्रेस नहीं पहन सकते? तो
पूरा दिन अंडरवेयर में रहो!
आप अपने बच्चे की पढ़ाई से खुश
खुद ही घर पर पढ़ना शुरू कर दो !
नहीं हो? तो उसे


अनस्क्रिप्टेड यानि कम्प्लीट आज़ादी. ये आपको मौका
देता है कि आप अपनी लाइफ का कण्ट्रोल अपने
पास रखें. ऐसे बहुत से लोग है जो अपनी लाइफ के
उस स्टेज पर पहुँच जाते है जहाँ उन्हें लगता है कि अब
स्क्रिप्ट से पीछा छुड़ाना चाहिए पर वो चाहकर भी कुछ
नहीं कर पाते.
एक बार एक आलसी कुत्ता गैस स्टेशन पर लेटा हुआ
रो रहा था. एक कस्टमर ने उसे देखा तो क्लर्क से पूछा
“इस कुत्ते को क्या हुआ है?” तो क्लर्क ने बताया कि वो
कील पर लेट गया है इसलिए दर्द से रो रहा है. कस्टमर
कन्फ्यूज़ हो गया, उसने क्लर्क से पूछा “तो वो वहां से
उठता क्यों नहीं?” इस पर क्लर्क ने कहा “उसे कील से
बहुत ज़्यादा तकलीफ नहीं हो रही है.” हमसे से कई
लोग भी ऐसे ही है. हम अपनी जॉब से नफरत करते
है, हम अपने रूटीन से नफरत करते है लेकिन फिर
भी हम इस बारे में कुछ नहीं करते. सेम जगह पर
रहते-रहते सेम लाइफ गुज़ार देते है. शायद अभी हम
उस स्टेज पर नहीं पहुंचे है कि हम पूरी तरह फेड अप
हो जाये.
बहुत से लोग शायद फील कर लेते है पर सिर्फ कुछ
घंटों या दिनों के लिए ही. लेकिन आप लगातार अगर
इस बात को फील कर रहे है तो समझ जाओ कि अब


आप अनस्क्रिप्टेड के लिए रेडी हो गए हो. हेनरी फोर्ड
ने एक बार अपने वर्कर्स का लोड कम करने लिए
6 के बजाए हफ्ते में 5 दिन और 48 घंटों के बजाए
40 घंटे की ड्यूटी कर दी थी जबकि उनकी सैलरी में
कोई कटौती नहीं की गई थी. उनसे जब पूछा गया तो
उन्होंने कहा कि जो लोग हमारे प्रोडक्ट यूज़ करते है,
ये वही लोग है जो इन्हें बनाते भी हैं. अगर इन्हें प्रोडक्ट
यूज़ करने के लिए सिर्फ एक दिन मिलेगा तो ये हमारे
प्रोडक्ट क्यों खरीदेंगे. जो लोग हफ्ते में पांच दिन नौकरी
करेंगे वो हफ्ते में छह दिन काम करने वालों से ज्यादा
हमारे प्रोडक्ट खरीदेंगे.
अगर किसी आदमी को मामूली जॉब दी जाए जिससे
उसकी सारी बेसिक ज़रूरतें पूरी हो रही है तो शायद
वो जिंदगी भर यही काम करता रहेगा और यही कम्फर्ट
तो अनस्क्रिप्टेड के लिए खतरा है. कुछ लोग अपनी
जिम्मेदारियों के चलते अनस्क्रिप्टेड चुन ही नहीं पाते.
जिसकी पहले से चार-चार बीवियां है, सत्रह बच्चे है
और नौकरी का कोई ठिकाना नहीं है, आज है तो कल
नहीं, ऐसे इंसान को आप भला क्या एडवाईस दोगे.
सच तो ये है कि ऐसे लोगों को पैसे की प्रॉब्लम नहीं
होती, इन्हें डिसीजन की प्रॉब्लम होती है और जब
तक ये डिसीजन की प्रॉब्लम ठीक नहीं कर लेते, वो
की मॉब्लम कभी गोल्न नहीं कर पायेंगे

40 घंटे की ड्यूटी कर दी थी जबकि उनकी सैलरी में
कोई कटौती नहीं की गई थी. उनसे जब पूछा गया तो
उन्होंने कहा कि जो लोग हमारे प्रोडक्ट यूज़ करते है,
ये वही लोग है जो इन्हें बनाते भी हैं. अगर इन्हें प्रोडक्ट
यूज़ करने के लिए सिर्फ एक दिन मिलेगा तो ये हमारे
प्रोडक्ट क्यों खरीदेंगे. जो लोग हफ्ते में पांच दिन नौकरी
करेंगे वो हफ्ते में छह दिन काम करने वालों ज्यादा
हमारे प्रोडक्ट खरीदेंगे.
अगर किसी आदमी को मामूली जॉब दी जाए जिससे
उसकी सारी बेसिक ज़रूरतें पूरी हो रही है तो शायद
वो जिंदगी भर यही काम करता रहेगा और यही कम्फर्ट
तो अनस्क्रिप्टेड के लिए खतरा है. कुछ लोग अपनी
जिम्मेदारियों के चलते अनस्क्रिप्टेड चुन ही नहीं पाते.
जिसकी पहले से चार-चार बीवियां है, सत्रह बच्चे है
और नौकरी का कोई ठिकाना नहीं है, आज है तो कल
नहीं, ऐसे इंसान को आप भला क्या एडवाईस दोगे.
सच तो ये है कि ऐसे लोगों को पैसे की प्रॉब्लम नहीं
होती, इन्हें डिसीजन की प्रॉब्लम होती है और जब
तक ये डिसीजन की प्रॉब्लम ठीक नहीं कर लेते, वो
अपनी पैसे की प्रॉब्लम कभी सोल्व नहीं कर पायेंगे.
अपनी जिम्मेदारियों के अलावा हमारा बिलिफ सिस्टम
भी इस अनस्क्रिप्टेड का दुश्मन है.

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जब मैं 3rd स्टैण्डर्ड में था तो एक बार क्लास में शो
एंड टेल हुआ था. मैंने अपनी रीमोट कंट्रोल वाली गाड़ी
क्लास के सामने दिखाई और सबको बताया कि ये
प्रेजेंट मुझे सैंटा क्लौज़ ने दिया है. सब लोग जोर-जोर
से हंसने लगे और मेरा शक यकीन में बदल गया कि:
सैंटा क्लौज़ तो होते ही नहीं है. उसके बाद मेरी लाइफ
में काफी स्ट्रगल भरा टाइम रहा. तो इस गलत बिलिफ
का अंजाम आगे चलकर काफी बुरा होता है, यहाँ तक
कि एक छोटे बच्चे के लिए भी कई बार हमारे दिमाग
में कुछ ऐसे गलत बिलिफ घर कर जाते है जो हमें
लगता है कि सही है. जबकि असल में ये बिलिफ
स्क्रिप्ट का ही नतीजा होते है जो हमारी लाइफ का एक
हिस्सा बन चुका है.
कम्फर्ट, गलत बिलिफ्स और क्या ? आलस हाँ!
अनस्क्रिप्टेड के लिए एक और खतरा है हमारा
आलस.
2015 में मैंने अपने फ्रेंड्स के साथ एक गेम डाउनलोड
किया था, वर्ड्स. ये एक स्क्रेब्ल गेम है जो लाखों
लोग खेलते है. वैसे मैं इसमें ज्यादा अच्छा नहीं
था. जबकि मेरे opponent मुझसे अच्छा खेल
रहे थे. उनकी वोकेबूलेरी मुझसे ज्यादा स्ट्रोंग थी. वो
लोगmitocac” “Livinc” और “7003” जैसे


वर्ड्स यूज़ करते थे जो मुझे नहीं आते थे. फिर मैंने
ऑनलाइन सर्च किया तो पता चला इस गेम में लोग
बहुत चीटिंग करते है! प्लेयर्स वर्ड्स पता करने के लिए
गेम को हैक करते थे ताकि पॉसिबल ऑप्शन में एंटर
कर सके. मुझे जब पता चला तो मैं बड़ा निराश हुआ.
आप सोचोगे, ये किस्सा मैं आपको क्यों सुना रहा हूँ?
ये बताने के लिए कि इंसान कितना आलसी है. मेंटल
और फिजिकल लेवल दोनों से मेरे कॉम्पटीटर्स अपनी
गेम स्किल या वोकेबूलेरी इम्प्रूव करने के बजाए चीटिंग
करके किसी तरह गेम जीतकर सबको दिखाने की
कोशिश कर रहे थे कि वो कितने इंटेलीजेंट है. लोग हर
जगह शोर्ट कट ढूंढते है.
वेट कम करना है तो भी शोर्ट कट तरीका चाहते है.
कुछ लोग तो ऐसे गुरु बना लेते है जो दावा करते है
कि उनके प्रोडक्ट में सीक्रेट इंग्रिडीएंट है. लोग शोर्ट
कट से पैसा कमाना चाहते है. यहाँ तक कि इस बुक
को पढ़ने का कुछ लोग शायद कोई शोर्ट कट तरीका
ढूंढ रहे होंगे. लेकिन मैं आपको बताऊं, असल में
कोई शोर्ट कट है ही नहीं ! सक्सेस आपको हार्ड वर्क
और काम करने के बाद ही मिलेगी, इसका कोई और
शोर्ट कट नहीं है. ऐसा कोई बटन नहीं है कि जिसे
दबाया और जादू हो गया. मुझे अपनी फर्स्ट बुक
लिखने में तीन साल लगे थे. दूसरी बुक भी तीन साल में
ही कम्प्लीट हुई थी कितनी ही बार ऐसा हुआ कि मैंने


कुछ लिखा और उसे फाड़ दिया. लेकिन फिर मैं खुद
से यही कहता था “अगर इस बुक को लिखना इतना ही
आसान होता तो ये किसी काम नहीं हो सकती.”
मैं अब आपको ऐसे 9 स्टेप्स बताता हूँ जिससे आप
भी मेरी तरह खुद को हार्ड वर्क करने के लिए कन्विंस
कर सकोगे :
1. इंटेलीजेंट अवेयरनेस: एक सच बताऊं आपको, ये
जो डाईट और वेट loss इंडस्ट्री है ना, $60 बिलियन
का बिजनेस है. लेकिन आपको लगता है कि कोई
ऐसा मैजिकल फ़ॉर्मूला होगा जिससे आपका वेट तुरंत
कम हो जायेगा. जी नहीं, ऐसा कोई तरीका नहीं है.
सेल्फ-इम्प्रूवमेंट $11 बिलियन का बिजनेस है. लेकिन
क्या रातों-रात खुद को इम्प्रूव किया जा सकता है? नहीं
ना! बड़े अफ़सोस की बात है कि लोग शोर्ट कट बेस्ड
रिजल्ट चाहते है, प्रोसेस नहीं .
चलिए लोगों की हेल्थ का ही एक एक्जाम्पल लेकर
देखते है. मान लो आप बीच पर एकदम फ्लैट स्टमक
और नपे-तुले बदन वाली किसी औरत को देखते हो.
क्या लगता है आपको, वो कोई मैजिक प्रोडक्ट यूज़
करती होगी? तो हम बता दे, कोई मैजिक नहीं है,
इसके पीछे एक प्रोसेस है – डेली एक्सरसाईंज़ और
डाईट के प्रति डिसिप्लिन. एक आदमी जो कैसिनो
जाता है और काफी मोटा है वो छह बार खाने की


लाइन में लगता है तो उसके पीछे भी एक प्रोसेस है-
सालों की अनहेल्दी लाइफस्टाइल और ख़राब डाईट.
तो अगली बार जब आप ग्रोसरी शॉपिंग पर जाएँ तो
जरा दूसरों के कार्ट पर एक नज़र डालना. एक मोटे
आदमी को देखना और एक फिट को दोनों के कार्ट
में पड़े फ़ूड आइटम्स को उनकी बॉडी से मैच करना.
मुझे यकीन है कि आपको कोई ना कोई कनेक्शन
जरूर नजर आएगा. हेल्थ ना तो खरीदी जा सकती,
ना चीटिंग करके, ना घूस देकर और ना ही चुराई जा
सकती है. ये तो आपको खुद बनानी पडती है.
अवेयरनेस के बाद अगला स्टेप आता है: अपनी
उम्मीदों को बदलें. इसके लिए हमें क्या करना होगा ?
सबसे पहले तो मानकर चलो कि कोई शोर्ट कट है ही
नहीं . ये गलतफहमी दिल से निकाल दो कि जिन्होंने
कुछ अचीव किया है, शोर्ट कट से किया होगा. अगर
आप किसी ऐसे इंसान को जानते है जो सालों से
जिम नहीं गया है और सही डाईट नहीं लेता है तो
पक्की बात है कि वो कभी पतला हो ही नहीं सकता!
तो शोर्ट कट ढूँढना छोड़ दो..
अब जबकि आपने अपनी उम्मीदें बदल दी है, अब
बारी आती है अपना टारगेट पहचानने की. आप लाइफ
से क्या चाहते है? आपके गोल्स क्या है? इमेजिन करो
एक साल बाद न्यू ईयर के मौके पर आप खुद को कैसे


देखना पसंद करोगे? तब आप कैसी लाइफ जी रहे
होंगे? खुद को वैसा इमेजिन करो जैसा आप बनना
चाहते हो. क्या आप फिटनेस कॉम्पटीशन जीतने का
सपना देख रहे हो या अपनी इनकम डबल करना चाहते
हो या फिर कोई और चीज़ है जो आप अचीव करना

चाहते हो? जो आपको एक्जेक्टली चाहिए उसके बारे
में सोचो क्योंकि अगर आपको मंजिल का ही पता नहीं
होगा तो आप कभी रास्ता नहीं ढूंढ सकते.
अपने गोल को पहचानने के बाद, अब आपको इसमें
थोडा मैथ्स लगाना है. जैसे एक्जाम्पल के लिए आप
वेट कम करना चाहते हो तो कुछ ऐसे सोचो “मुझे 25
किलो कम करना है” या अगर आपका गोल बिजनेस
स्टार्ट करने का है तो सोचो “मेरा सेल्स 12% बढ़ना
चाहिए”.
अब टारगेट पहचानने के बाद बारी आती है इस बात
की कि उस गोल को अचीव करने के लिए आपको डेली
क्या करना है. जैसे एक्जाम्पल के लिए अगर आपका
गोल है एक नॉवेल लिखना तो आपका डेली टारगेट
होना चाहिए कि आप कम से कम 500 वर्ड्स तो डेली
लिखो. इसके अलावा आपको ये भी पहचानना होगा
कि आपको डेली क्या नहीं करना है. आपके टारगेट
के लिए क्या चीज़ ख़तरा हो सकती है यानि उसके
रास्ते में आ सकती है, ये जानना भी जरूरी है, जैसे
एक्जाम्पल के लिए आप पांच घंटे बेकार में फेसबुक
देखते रहोगे तो ये एक खतरा है आपके टारगेट के
लिए.

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and the Pursuit of Entre…
M. J. DeMarco
नेक्स्ट आता है, अपने बैटलफील्ड यानी उस जगह
को पहचानना जिससे आपको लड़ना है. ज्यादातर
लोग अपनी सारी लड़ाई गलत जगह से लड़ते है. जैसे
कि मान लो वेट कम करना आपका टारगेट है तो
लोग बोलेंगे आपका बैटलफील्ड आपका किचन होना
चाहिए. यही तो वो जगह है जहाँ से आपने डिसाइड
किया था कि आप आईसक्रीम नहीं लोगे. तो अगर
किचन ही आपका बैटलफील्ड है तो आप already
हार चुके हो.
आपका असली बैटलफील्ड किचन नहीं बल्कि
ग्रोसरी स्टोर है जहाँ से आप आईसक्रीम लेते हो
क्योंकि अगर आप आईसक्रीम खरीद ही चुके हो
तो कभी ना कभी उसे खाने के लिए किचन में पहुँच
जाओगे. अब एक और एक्जाम्पल लेते है. मान लो
आप ज्यादा टीवी देखने की आदत छोड़ना चाहते हो.
तो बैटलफील्ड असल में वो सोफे नहीं है जो टीवी के
सामने पड़ा है, बल्कि असली बैटलफील्ड है आपका
टेलीफोन! जी हाँ सही सुना आपने, अपने केबल
ऑपेरेटर को कॉल करके कनेक्शन कटवा दो. इस तरह
inconvenience यानी असुविधा का इस्तेमाल
करके आप आपनी बरी आदतों पर अटैक कर सकते

inconvenience यानी असुविधा का इस्तेमाल
करके आप अपनी बुरी आदतों पर अटैक कर सकते
हो. बेशक आईसक्रीम की क्रेविंग होने पर आप ग्रोसरी
स्टोरी जा सकते हो पर ये थोडा incovenient होगा
बजाए इसके कि आप किचन में जाकर आईसक्रीम
निकालो. जैसे मान लो आपने अपना एक्सबॉक्स किसी
ऊँची जगह पर रखा है तो आप बार-बार सीढ़ी चढ़कर
उसे निकालने से तो रहे और फाईनली अपने डेली
गोल्स पर काम करना जरूरी है ताकि वो आपकी
हैबिट बन सके. एक बार उन हैबिट्स का आपके ऊपर
पॉजिटिव चेंज पड़ेगा तो आपको कभी बुरी आदत
नहीं लगेंगी. इन छोटी-छोटी कोशिशों से आपको
भले ही छोटे रिजल्ट मिले पर आपकी इम्प्रूवमेंट होती
रहेगी.
27 की उम्र में जॉश वेट्ज़किन ने मार्शल आर्ट्स में
वर्ल्ड टाइटल और 13 नेशनल चैंपियनशिप जीत ली थी.
उन्हें ब्राज़ीलियन जूजीत्सू में ब्लैक बेल्ट भी मिली है.
वैसे बहुत से लोगों को लगता है कि जॉश बचपन से
ही टैलेंटेड थे और उन्होंने बचपन से ही मार्शल आर्ट्स
की प्रेक्टिस शुरू कर दी थी हालाँकि ये दोनों बातें
सच नहीं है. जॉश ने मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेनी
तब स्टार्ट की जब वो 23 के थे. उसके पहले वो कुछ
और ही कर रहे थे. जॉश इकलौते इंसान है जिन्होंने
अलग-अलग लेवल की chess चैंपियनशिप जीती

बचपन में जॉश को प्रोडीजी बोला जाता था यानि वो
लोग जिनमें अपनी उम्र से कहीं बढ़कर सीखने की
एबिलिटी होती है. वैसे जॉश के साथ बेस्ट चीज़ ये हुई
कि जब वो अपना पहलानेशनल chess चैंपियनशिप
हारे तो उन्हें अपने प्रोडीजी होने की असलियत पता
चल गई. वो समझ गए कि ये सब एक जाल है. इस
चीज़ ने उनके माइंड में एक झूठा इम्प्रेशन क्रिएट
में
कर रखा था क्योंकि उन्हें लगता था कि हार्ड वर्क तो
ज़रूरी नहीं है तो इस स्टोरी से एक सीख मिलती है
कि झूठे बिलिफ्स किसी के लिए भी बहुत खतरनाक
साबित हो सकते है चाहे फिर वो वर्ल्ड क्लास एथलीट
ही क्यों ना हो. लोग आपको कन्विंस करेंगे कि आप
ग्रेट हो, आप बेस्ट हो और आपको इम्प्रूवमेंट की कोई
जरूरत नहीं है. चलिए अपने अनस्क्रिप्टेड की इस
लंबी लिस्ट में एक और नाम जोड़ लेते है.
अगला है मनी स्कैम! यंग एंटप्रेन्योर्स के अंदर एक
ड्राइव, एक पैशन होता है, वो काफी मोटिवेटेड और
determined रहते है पर ये सब कुछ झूठ पर टिका
है. वो ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के लिए बेताब रहते
है नाकि कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी करने के लिए. इससे
पहले कि इस मनी स्कैम यानी पैसों के घोटाले को हम
समझ पाएँ, ये समझना जरूरी है कि पैसा आपके लिए
कितना मायने रखता है? पैसा वाकई में क्या रिप्रेजेंट
आपको एक एक्जाम्पल देता हूँ. मान
करता है ? मैं
लो मैंने आपको $50,000 पे किये और आपसे एक18th सेंचुरी की गोल्ड स्टेचू खरीदी. हमारे बीच

आपसी लेन-देन हुआ है. किसी ने किसी को फ़ोर्स नहीं
किया है. मैंने स्टेचू खरीदा ये सोचकर कि उसकी वैल्यू
$50,000 है और आपको $50,000 मिल गए.
लेकिन जैसा हमने सोचा था वैसा नहीं हुआ.
मुझे बाद में पता चलता है कि जो स्टेचू मैंने आपसे
खरीदा था, असली गोल्ड का नहीं है बल्कि ब्रोंज का
बना है जिस पर सस्ती सी गोल्ड की पोलिश की गई है.
मुझे पता चला कि मेरे साथ चीटिंग हुई है क्योंकि मैंने
गोल्ड के पैसे दिए थे. आपने गोल्ड के प्राइस में मुझे
ब्रोंज बेचा. तो मैं आपसे $49,000 डॉलर्स रिफंड
करने को बोलता हूँ. आप मेरी बात पर हंसने लगते हो.
मैं आपको धमकी देता हूँ और एक पंच जड़ देता हूँ.
हमारी हाथापाई होती है और स्टेचू को धक्का लगता
है. वो जमीन पर गिरकर चूर-चूर हो जाता है. उसके
अंदर से एक पोटली निकलती है जो कई सालों से अंदर
छुपी थी. मैं पोटली खोलकर देखता हूँ. उसमें से एक
काँच का टुकड़ा निकलता है. मैं आपको कोसता हुआ
पोटली लेकर वहां से चला आता हूँ. अगले दिन जब मैं
जियोलॉजिस्ट के पास जाता हूँ तो मुझे पता चलता है
कि जिसे मैं पत्थर समझ रहा था वो असल में $4
million का हीरा है.

मुझे समझ नहीं आता कि क्या जवाब दूं. मैं ये खबर
आपको देता हूँ तो आप भी उतने ही हैरान हो जाते
हो. आपका मुंह खुला का खुला रह जाता है यानि जो
ठग था वो खुद ही ठगा गया. एक्चुअल पैसों का
जो हुआ सो हुआ पर ओरिजिनल ट्रांजक्शन कभी
चेंज नहीं हुआ. मुझे स्टेचू मिला और आपको आपके
$50,000 यानि मनी की वैल्यू वही है जो मानी गई
थी यानी perceived वैल्यू नाकि उसकी एक्चुअल
वैल्यू. आपने जब स्टेचू बेचा था तो $50,000 की
कीमत लगाकर बेचा था. लेकिन उसकी रियल वैल्यू
$1,000 से $4 मिलियन का उतार-चढ़ाव आया.
जब आपको किसी $50,000, सैलरी की जॉब से
निकाला जाता है तो आपका एम्प्लोयर डिसाइड करता
है कि आपकी एक्चुअल वैल्यू आपकी मानी गई वैल्यू
से मैच नहीं करती यानि आपकी सैलरी से मैच नहीं
करती. अब जब आप ये समझ गए है तो जरा इमेजिन
करो कोई बिना अपने शिकार के बारे में कुछ भी जाने

बिना शिकार कर रहा है? मनी chasers भी कैट
यानी बिल्ली को फॉलो करते-करते झाडियों और पेड़ो
से सिर टकराते है. जबकि अनस्क्रिप्टेड कैट को इग्नोर
करते हुए कुछ और attractive ढूंढते है. वो कैट को
लुभाने के लिए ट्यूना मछली ढूंढ लेंगे तो बिल्ली खुद
उनके पीछे आएगी. इस स्टोरी से आपने क्या सीखा?
पैसे के पीछे भागना बंद करो, वैल्यू के पीछे भागो!
अपनी वोकेबूलेरी से मनी नाम का शब्द ही मिटा दो
और क्या इस केस में लक इम्पोटेंट है? अपने मन में
एक सिक्का उछालो. विनर को एक स्माइल के साथ
शाबाशी मिलेगी. रेडी हो ?
टेल्स आया. क्या आपने सिक्का ठीक से उछाला था?
अगर आपका जवाब टेल्स था तो क्या आप लकी हुए ?
अगर जवाब हेड्स था तो क्या आप खुद को अनलकी
मानोगे? शायद कुछ भी नहीं क्योंकि एक सिक्का
उछाल देने से कुछ डिसाइड नहीं हो सकता. चलो एक
बार फिर से सिक्का उछालते है. लेकिन अगर इस बार
आप जीते तो आपको $10 मिलियन मिलेंगे. अब जो
भी रिजल्ट होगा, उसमे लक भी जुड़ जाएगा क्योंकि
अब इसमें काफी बड़ा अमाउंट दांव पर लगा है. लेकिन
फिर भी हेड्स या टेल्स की प्रोबेबिलिटी चेंज नहीं होने
वाली. इसमें हमेशा 50-50 का चांस था और 50-50
ही रहेगा. तो क्या बदला? बदली है सिर्फ़ आपकी सोच.

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अब मान लो आपको सिक्का उछालने के दस मौके
मिलते है. अब अगर आप एक बार भी सही साइड
बता देते हो तो आप $10 मिलियन जीत जाओगे. तो
क्या आप दस बार सिक्का उछालोगे या दो- तीन बार
ट्राई करने के बाद छोड़ दोगे क्योंकि “आपको लगता
है कि आप उतने लकी नहीं हो?” अब यहाँ टेल्स
आने का 50% चांस है लेकिन अगर दस बार मौका
मिले तो टेल्स आने का चांस 99.4% है. ये चीज़ हमें
क्या सिखाती है? अगर किसी ने आपका ब्लॉग नहीं
पढ़ा है या उस पर कमेन्ट नहीं किया है तो इसका ये
मतलब नहीं है कि आप दस और ब्लॉग नहीं लिख
सकते. कोई भी अनलकी नहीं होता: लोग बस चांस
नहीं लेना चाहते.
आपकी स्ट्रेटेज़ी होनी चाहिए कि आप बस सिक्का
उछालते रहें. अपनी लाइफ को गमबॉल मशीन मान को
चलो जिसमें चार कलर के गमबॉल होते है: व्हाईट,
रेड, ओरेंज और गोल्ड. ये गमबॉल आपकी लाइफ

को दिखाते हैं जिनमें व्हाईट गमबॉल सबसे ज्यादा
है, थोड़े ऑरेंज है और रेड और गोल्ड सबसे कम है.
व्हाईट गमबॉल यानी कुछ नहीं कोई रिजल्ट, कोई
फीडबैक, कोई लर्निंग नहीं लेकिन व्हाईट गमबॉल
का कोई नेगेटिव इम्पैक्ट भी नहीं है. आप नोटिस
करोगे कि जब आप गमबॉल मशीन में कॉइन डालते
हो तो ज्यादातर व्हाईट बॉल निकलते है. कभी-कभार
ऑरेंज निकल जाते है. ऑरेंज गमबॉल आपकी लाइफ
में फीडबैक और लर्निंग एक्सपीरिएंस या warning
को दिखाते हैं. एक ऑरेंज गमबॉल ने मुझे अपनी रियल
एस्टेट प्रोपर्टी बेचने, अपनी सकेंड बुक लिखने और
अपनी कंपनी बेचने की सलाह दी थी.
कभी-कभार रेड गमबॉल निकलते है जो सब कुछ
तहस-नहस कर देते है. रेड गमबॉल आपकी लाइफ की
वो घटनाएँ है जिन्हें हम दुर्घटना भी बोल सकते है जिन
पर हमारा कोई कण्ट्रोल नहीं रहता. जैसे जॉब छूट
जाना या एक्सीडेंट या बीमारी होना. जैसे-जैसे आप
कॉइन डालते जाते हो गोल्ड गमबॉल आने के चांस
बढ़ते जाते है और फाईनली गोल्ड गमबॉल नजर आती
है. बस, यही वो मौका है जिसका आपको इंतज़ार था.
आप अपने गोल्स तक पहुँच गए हो. हमारी लाइफ और

लाइफ में होने वाली घटनाएँ भी इन गमबॉल्स की तरह
ही है. गोल्ड गमबॉल आने का चांस जीरो तो बिल्कुल
नहीं है. बस आपको ट्राई करते रहना है. लेकिन
ज्यादातर लोग ये कोशिश भी नहीं करना चाहते,
उनके पास बेशुमार बहाने है: लोग सरासर झूठ बोलते
है. अगर आप जिम जाते हो तो आपको वहां ऐसे कई
बहानेबाज़ मिलेंगे. आपने ऐसे बन्दे देखे होंगे जो हमेशा
पैरों के वर्कआउट का दिन स्किप करते है.
कभी-कभार नहीं बल्कि हमेशा. अगर आप उनसे
पूछो कि भाई तुम स्क्वाट्स क्यों नहीं करते या लेग
press क्यों नहीं करते तो ये हमेशा यही जवाब देंगे
कि मेरे घुटनों में दर्द है. आप पूछोगे मुझे ये सब कैसे
पता? वो इसलिए क्योंकि कभी मैं भी एक बहानेबाज़
था.
ऐसे लोग अपनी सफाई में हज़ार बहाने ढूंढ लेते हैं.
किसी भी अनकम्फर्टेबल काम से बचने के इनके पास
तरीके होते है. लोग खुद से यही बोलते रहते है कि
उनके पास पैसे नहीं है, उनकी एज कम है या ज्यादा
है, या वो दिखने में खूबसूरत नहीं है, उनके पास डिग्री
नहीं है, फेमिली का प्रेशर है या फेमिली की जिम्मेदारी

है, फलानी प्रॉब्लम है वगैरह-वगैरह. अपनी नाकामी
छुपाने के लिए लोगों के पास कुछ रटे-रटाये जुमले है
जैसे “पैसा कमाने के लिए पैसा लगाना भी पड़ता है “
यानि दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसे लोगों का मानना है
कि हम गरीब थे और गरीब ही रहेंगे, पैसे से खुशियाँ
नहीं खरीदी जा सकती, यानि “मुझे तो गरीबी में
भी खुश रहने की आदत पड़ चुकी है क्योंकि मैं तो
अमीर बन नहीं सकता” तो आपको ऐसी बकवास
को पहचानना होगा और अपनी लाइफ से इसे बाहर
निकाल फेंकना होगा.
फर्ज़ करो कि भगवान आपको धरती पर भेज रहा है
लेकिन
एक शर्त के साथ कि या तो आप शार्क बन
सकते है या फिश. तो आप क्या चूज़ करोगे? ज्यादातर
लोग तो शार्क बोलेंगे क्योंकि शार्क फिश को खा जाती
है और वो फिश बनकर शार्क का भोजन क्यों बनना
चाहेंगे? वो राज करना चाहते हैं, दबना नहीं चाहते और
वो राजा बनना चाहते हैं. अगर ऐसा है तो फिर क्यों
लोग बिजनेस वर्ल्ड में फिश बनते है? लोग widget
बनाकर वॉलमार्ट को बेच रहे है. बहुत से केस में
वॉलमार्ट ही उनका अकेला कस्टमर होता है.

अगर वॉलमार्ट भी उनके प्रोडक्ट लेना बंद कर दे
तो उनकी सेल एक ही सेकंड में $600,000 से
सीधे $0 पर पहुँच जायेगी. Amazon परफेक्ट
एक्जाम्पल है कि कैसे आज एंटप्रेन्योर कॉर्पोरेट पर
डिपेंडेंट हो गए है. इसे हम कहते है “हिचहाईकिंग”
यानि आपका बिजनेस किसी दूसरे बिजनेस पर
डिपेंडेंट है जो ना तो आपके कण्ट्रोल में है और ना ही
आप उस पर भरोसा कर सकते है. तो यानि आप पूरी
तरह से एक अजनबी के रहमोकरम पर है कि वो
क्या डिसीजन लेना. बहुत से लोग शायद ये कारण दे
कि मेरी बुक्स तो Amazon पर बिकती है. इसमें
कोई दो राय नहीं है. लेकिन अगर Amazon मेरी
बुक्स हटा दे तो मेरी सेल o हो जाएगी ना. वो इसलिए
क्योंकि Amazon उन चैनल्स में से ही एक है जो
मैं अपनी बुक्स बेचने के लिए यूज़ करता हूँ. तो
इसका सोल्यूशन है डाइवर्सीफाई करो. अपने बिजनस
ऑपेरेश्न के लिए कभी एक बिजनेस पर डिपेंडेंट मत
रहो.
कुछ टेक्नीक्स है जो आपकी अपनी लाइफ में
अप्लाई करनी चाहिए. शोर्ट फॉर्म में बोले तो कुछ लोग
अपनी लाइफ की कहानी खुद लिखते है और बाकि
लोग स्क्रिप्ट फॉलो करते है. तो मैं आपको यही राय

बुक्स हटा दे तो मेरी सेल o हो जाएगी ना. वो इसलिए
क्योंकि Amazon उन चैनल्स में से ही एक है जो
मैं अपनी बुक्स बेचने के लिए यूज़ करता हूँ. तो
इसका सोल्यूशन है डाइवर्सीफाई करो. अपने बिजनस
ऑपेरेश्न के लिए कभी एक बिजनेस पर डिपेंडेंट मत
रहो.
ये कुछ टेक्नीक्स है जो आपकी अपनी लाइफ में
अप्लाई करनी चाहिए. शोर्ट फॉर्म में बोले तो कुछ लोग
अपनी लाइफ की कहानी खुद लिखते है और बाकि
लोग स्क्रिप्ट फॉलो करते है. तो मैं आपको यही राय
दूँगा कि आप दूसरा ऑप्शन मत चुनना. वो सपना मत
देखो जो लोग पहले देख चुके है और उसे कर रहे हैं.
अपने ख़ुद के सपने को फॉलो करो. शायद 9-5 जॉब
आपका ड्रीम तो नहीं हो सकता हाँ मजबूरी ज़रूर
हो सकती है. आज और अभी से अपने सपनों को
पहचानना सीखो. कल का इंतज़ार मत करो, ना उसके
अगले दिन का और ना अगले हफ्ते का. जो करना है
आज करना है क्योंकि आज ही वो सबसे कीमती पल
है जिस पर आपका कण्ट्रोल है. तो आज और अभी से
अपनी अनस्क्रिप्टेड कहानी लिखना शुरू कर दो.

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