Turn the Ship Around! A True Story of Turning F… Captain David Marquet. Books In Hindi Summary Pdf

Turn the Ship Around! A True Story of Turning F… Captain David Marquet इंट्रोडक्शन बचपन से ही हम अपने बड़े-बुजुर्गों की बातों पर चलते रहे हैं. चाहे वो घर हो, स्कूल हो या फिर ऑफिस, हम दिन भर उनके ऑर्डर लेते रहते हैं. हम वही सुनते हैं जो हमें कहा जाता हैं और उसी को फॉलो करते हैं. अगर हमने कोई गलती की या कुछ अलग करने की कोशिश की, तो अक्सर हमें सज़ा दी जाती थी और जो हमें बताया गया था उसी को फॉलो करने के लिए कहा जाता था. सालों से इसी तरह से होता आया है कि कोई बुजुर्ग या पढ़ा-लिखा शख्स अपने तरीके से काम करवाना चाहता था. वैसे, अक्सर ऐसे करने से काम बन ही जाता हैं, लेकिन कई बार इसके अलावा भी दूसरे तरीकों से काम निकलवाया जा सकता है. हमारे आसपास ऐसे कई सारे एग्जाम्पल हैं जिनमें काम को अलग तरीके से किया गया है . अगर कुछ अलग करने से रिजल्ट अच्छा रहा तो चारों तरफ तारीफ़ होती हैं, नहीं तो बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता हैं, इसीलिए चीजों को अलग तरीके से करने का डर बना रहता है. टेक्निकल या साइंटिफिक कामों को छोड़कर दूसरे किसी भी काम को करने के लिए कोई फिक्स्ड तरीका नहीं होता. खासकर जब किसी से अपनी बात कहने की . पिता मा कामपा परतफलिए पापपतराफा नहीं होता. खासकर जब किसी से अपनी बात कहने की बात आती हैं, यानि कम्युनिकेशन की बात आती हैं, तो उसके एक से ज़्यादा तरीके होते हैं. कोई भी कम्युनिकेशन हो, साफ़ और क्लियर होनी चाहिए, इसे दो-तरफ़ा प्रोसेस के तौर पर लेना चाहिए. इनफार्मेशन या आईडिया की अदला-बदली करने के लिए कम्यूनिकेट करें, साथ-साथ सभी प्रोसेस और procedure को फॉलो करें. इस तरह से कम्यूनिकेट करें जिससे दूसरे आपको समझ सकें और आप उन्हें अपनी बात और अपना purpose आसानी से समझा सकें. इससे आप हर किसी को सीखने और कॉन्फिडेंट बनने का मौका देते हैं. ये कॉन्फिडेंस आगे जाकर किसी को भी सक्सेसफुल बनाता हैं. बदले में, हर शख्स को दूसरों से कैसे कम्यूनिकेट करना चाहिए, वो सीखता जाता है. जहाँ तक हो सकें इनफॉर्मल कम्युनिकेशन रखिए, लेकिन शॉर्ट और क्लियर रखिए. ‘ The chain of command ‘ जो एक शख्स से दूसरे शख्स को दी जानी वाली हिदायतें हैं, वो chain of command, chain of communication बन गई हैं और वो भी इनफॉर्मल तरीके से! ये तरीका leader to leader structure के ऊपर बेस्ड हैं, जैसा कि ऑथर डेविड ने अपनी बुक ‘टर्न द शिप अराउंड’ में लिखा है. इस बुक में, आप सीखेंगे कि कैसे अपनी ज़िम्मेदारी उठाएँ और प्रोएक्टिव Structureक ऊपर बस्तह, जसा कि जायर डावड ने अपनी बुक ‘टर्न द शिप अराउंड’ में लिखा है. इस बुक में, आप सीखेंगे कि कैसे अपनी ज़िम्मेदारी उठाएँ और प्रोएक्टिव रहें. ऐसा करने से, किसी भी प्रोसेस का पार्टिसिपेंट एक फॉलोवर होने के बजाय एक लीडर बन सकता है. ये बुक किसी आर्गनाईजेशन को टॉप-डाउन स्ट्रक्चर से बदलकर लीडर-लीडर स्ट्रक्चर में बदलने में गाइड कर सकती है. इससे वो organization एक महान आर्गनाईजेशन बनने के रास्ते पर चल पड़ेगा! The Command Structure हमेशा से दुनिया भर में, सिर्फ यही होता आया हैं कि लीडर्स हमेशा ऑर्डर देते हैं और नीचे के लोग इन ऑर्डर्स को मानते हैं और वही करते हैं जो उन्हें बताया जाता है. ऐसे में उन लोगों में से कुछ को कन्फ्यूज़न हो सकता है और वे कुछ एक्सप्लनेशन चाहते हैं मगर किसी में सवाल करने की हिम्मत नहीं होती. वे बस दूसरों को देखकर वही करते हैं जैसा सामने वाले करते हैं. दूसरों को देखकर वही करते हैं जैसा सामने वाले करते हैं. सारे बड़े-बड़े घराने और ख़ानदान ऐसे ही लीडर्स के ऑर्डर्स को फॉलो करते हुए ही बने हैं. लीडर्स के किसी भी काम पर कोई शक या सवाल नहीं किया जाता. अगर किसी ने सवाल करने की हिम्मत की, तो उसे सज़ा सुनाई जाती थी या उसे फांसी तक दे दी जाती थी. ये डर हर किसी के मन में घर कर गया, और इसलिए हर कोई लीडर की बातों को आँख बंद कर फॉलो करने लगा. ऑर्डर्स को फॉलो करने की आदत खुद ही एक कानून बन गया था. आज भी, हम उसी कानून को बिना सोचे अपना रहे हैं. इसमें अमेरिकी नेवी भी अलग नहीं थी. बड़े से लेकर छोटे, हरेक सिस्टम को ठीक से फॉलो किया जाता था. सालों साल, कई जहाज़ आए, लोग आए और चले गए. उन्हें जो भी ऑर्डर दिया जाता था, उसे उसी तरह से फॉलो किया जाता था. अगर कभी किसी लीडर ने कोई अलग एक्शन लिया भी होगा तो वो भूले भटके ही हुआ होगा. किसी भी तरीके से अलग एक्शन लेना हो तो उसके लिए लिखकर एक्सप्लनेशन देना होता था और अक्सर उनसे पूछताछ kइ जाती थी. चाहे कोई भी बदलाव हो, उसका सामना किसी रेजिस्टेंस से होता था! लोग कमांड लाइन फॉलो करने में ही खुश थे ! बस वही करते थे जो उन्हें बताया जाता था ! लेकिन फिर एक बडे इरादे वाला शख्स आया. जिसने अपना रहे हैं. इसमें अमेरिकी नेवी भी अलग नहीं थी. बड़े से लेकर छोटे, हरेक सिस्टम को ठीक से फॉलो किया जाता था. सालों साल, कई जहाज़ आए, लोग आए और चले गए. उन्हें जो भी ऑर्डर दिया जाता था, उसे उसी तरह से फॉलो किया जाता था. अगर कभी किसी लीडर ने कोई अलग एक्शन लिया भी होगा तो वो भूले भटके ही हुआ होगा. किसी भी तरीके से अलग एक्शन लेना हो तो उसके लिए लिखकर एक्सप्लनेशन देना होता था और अक्सर उनसे पूछताछ kइ जाती थी. चाहे कोई भी बदलाव हो, उसका सामना किसी रेजिस्टेंस से होता था! लोग कमांड लाइन फॉलो करने में ही खुश थे ! बस वही करते थे जो उन्हें बताया जाता था ! लेकिन फिर एक बड़े इरादे वाला शख्स आया, जिसने कमांड लाइन को बदला, उसे इरादे या इरादे से भरी हुई बात में बदलने और किसी भी काम को ज़िम्मेदारी, कंट्रोल, काबिलियत और सफाई से करने के लिए! सबमरीन USS सैंटा फे (USS Santa Fe) के कैप्टन डेविड मार्के ने यही काम किया और दिखाया कि बिना किसी को ऑर्डर दिए या कमांड किए बिना कैसे काम करवाया जाए. आइए देखें, अगले चैप्टर में, डेविड ने कौन सा मुश्किल काम किया था और उसे कैसे अचीव किया. Turn the Ship Around! A True Story of Turning F… Captain David Marquet I intend to याद हैं, इंट्रोडक्शन में, हमने जिम्मेदार और प्रोएक्टिव बनने की बात कही थी, साथ ही कम्युनिकेटिव होने की भी बात कही थी. प्रोएक्टिव होने का मतलब हैं किसी के कहे बिना ही किसी भी सिचुएशन में respond करना ताकि काम में कोई मुश्किल ना आए. यही प्रिंसिपल तब भी अप्लाई होते हैं जब एक फील्ड पर अमेरिकी नेवी काम करता है. जैसा कि हम पहले ही बात कर चुके हैं, पूरी दुनिया की मिलिट्री में कमांड करना ही कम्युनिकेशन का तरीका रहा हैं. इन तरीकों और प्रोसीज़र को रेगुलरली कंडक्ट किया जाता हैं. ऐसे सिचुएशन में, क्या, क्यों, और कैसे ये सवाल करने की गुंजाइश नहीं रहती. कैप्टन डेविड मार्के कम्युनिकेशन के तरीके को बदलना चाहते थे, दूसरों को ऑर्डर देने वाले तरीका नहीं चाहते थे. ‘फॉलो-इन-लीडर’ पॉलिसी जिसमें सिर्फ लीडर की बात मानी जाती थी, उसे खत्म करना उनका मकसद था. इसके बदले में, वे एक प्रोएक्टिव आदत को लाना चाहते थे, जिसमें कम्युनिकेशन ठीक उलटे तरीके से और proactively होता है. US Navy, में ग्रेजुएशन के बाद से, वे जहाजों पर कम्युनिकेशन को बदलना चाहते थे. ग्रजुएशन क बाद स, व जहाजा पर कम्युनिकशन का बदलना चाहते थे. अपने US Navy के कैरियर के शुरुवात में डेविड को USS सबमरीन, सनफिश, सौंपा गया था. कमांडर मार्क पेलेज़ के अंडर काम करते हुए, डेविड पास मौका था कि वे प्रोएक्टिव ” | intend to यानी मेरा इरादा” प्रोसेस को शुरू करें. एक बार, अटलांटिक महासागर के पानी में, उन्हें अपनी सबमरीन,सनफिश, के आगे एक मर्चेट शिप दिखा. डेविड चाहते थे कि उनके सबमरीन से उस जहाज को मैसेज भेजा जाए, पर इनएक्टिव होकर सिग्नल को सुनते हुए नहीं बल्कि एक्टिव सोनार का यूज़ करके. कैप्टन पेलेज़ ने डेविड को अपनी इच्छा पूरी करने की इज़ाज़त दे दी. डेविड ने मौके का फायदा उठाया और कहा, “कैप्टन, मेरा इरादा एक्टिव होकर सोनार पर ट्रेनिंग के लिए जाने का है. 11 कैप्टन पेलेज़ फौरन मान गए. ये उनके इरादे की शुरुआत थी, कमांड लाइन के टॉप-डाउन स्ट्रक्चर से बॉटम-टॉप वाली सोच में बदलने का. एक लीडर-लीडर नज़रिया लाने का. समुन्दर से कुछ सालों तक दूर रहने के बाद, डेविड वापस आए और इस बार, USS विल रोजर्स में एक इंजीनियर के तौर पर. जैसा कि होता आया था, यहाँ टॉप-डाउन लीडरशिप थी और सारे क्रू मेंबर्स बिना क्रू इंटरेस्ट के काम कर रहे थे , बस अपने कैप्टन के ऑर्डर को फॉलो कर रहे थे . डेविड ने यहाँ भी “मेरा इरादा” पर्यादा पानी Gि नि.- नान Turn the Ship Around! A True Story of Turning F… Captain David Marquet जिम्मेदारी से कीजिए, ओनरशिप लीजिए डेविड मार्के ने सैंटा ने की बिगड़ती हालत को देखा और समझा कि इसमें लीडरशिप की कड़ी कहीं-कहीं से टूटी हुई हैं और क्रू मेंबर्स इससे खुश नहीं थे! लीडर-लीडर मॉडल में, आप दूसरों को रिएक्ट करने का मौका देते हैं. लोगों को सोचने और बोलने के लिए जगह और वक्त देते हैं. अगर वॉर हो जाए तो उस दौरान कोई जगह और टाइम देने की गुंजाइश नहीं होती लेकिन, प्रैक्टिस के दिनों के दौरान, जब आप ऐसे डिसिशन-मेकिंग की इज़ाज़त देते हैं, तो वो ज़रूरत के हिसाब से टाइम एडजस्ट कर लेते हैं. लीडर-फॉलोवर स्ट्रक्चर में, सब कुछ बहुत आसान हैं, क्योंकि लीडर फैसला लेता हैं और दूसरों को बस फॉलो करने की ज़रूरत होती हैं. इससे फ्यूचर में दूसरों को लीडर बनने का चांस नहीं मिलता. कैप्टन डेविड को इस बात का पूरा एहसास था. उन्होंने ज़्यादा प्रैक्टिस सेशन की इज़ाज़त दी और अपने क्रू मेंबर्स को सोचने और बातचीत करने का मौका दिया, और सभी को खुद ही सही डिसिशन लेने के लिए कहा. ये उनके लिए मुश्किल काम था. फिर भी, वे जानते थे कि वे रातोंरात चीजों को बदल नहीं सकते. इससे पहले A < ये उनके लिए मुश्किल काम था. फिर भी, वे जानते थे कि वे रातोंरात चीजों को बदल नहीं सकते. इससे पहले कि वे अपने दम पर आगे चलें, उन्हें अपने क्रू को काफी क्रू टाइम देना पड़ेगा ताकि वे ट्रेनिंग ले सकें. ऐसे ही एक ट्रेनिंग सेशन में टॉरपीडो की शूटिंग के दौरान, कैप्टन डेविड ने देखा कि वे और उनके क्रू मेंबर मेमोरेंडम बाइंडर को मेन्टेन करना भूल गए थे. ये बाइंडर एक छोटी बुक होती है जो रेडियो सिग्नल से मिले मैसेज को मेन्टेन करने के लिए होती है. उन्हें बाइंडर मीटिंग के प्रोसेस को फॉलो करना था. टॉरपीडो शूटिंग में बिज़ी होने की वजह से वे बाइंडर को इम्प्लीमेंट करना भूल गए थे . कैप्टन डेविड और उनकी टीम बाइंडर और बाइंडर मीटिंग के इम्पोर्टेस पर डिसकस करने के लिए बैठे. उन्होंने माना कि बाइंडर प्रोसेस को फॉलो करने के बजाय काम को पूरा करना ज़रूरी होता है. उन्हें याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए. इसके बजाय, हर किसी को अपनी जिम्मेदारी का एहसास करना होगा और बस काम खत्म करना होगा. इसलिए, इस प्रोसेस की शुरुवात की गई, जिसने उन्हें जिम्मेदारी का एहसास करवाया. अलग-अलग लेवल के इंटरेक्शन से और चीज़ों को अलग तरीके से हासिल करने से क्रू मेंबर खुश हुए थे. . सोल्यूशन देने की आदत को छोड़िए, सोच को तेज़ रखिए —- सोल्यूशन देने की आदत को छोड़िए, सोच को तेज़ रखिए ज़रूरत से ज़्यादा चौकन्ना रहना और सिर्फ फॉर्मल तरीके से ही कम्युनिकेशन करना, ये दो चीजें थीं जिन्हें हटाने की ज़रूरत थी. अब तक टॉप-डाउन स्ट्रक्चर के कारण, फॉर्मल कम्युनिकेशन ही चलती थी . नेवी के क्रू को सबमरीन पर जाने से पहले फॉर्मल कम्युनिकेशन से ही ट्रेनिंग दी जाती हैं. डेविड के हिसाब से फॉर्मल कम्युनिकेशन का इस्तेमाल सिर्फ टेक्निकल ऑपरेशन तक ही रहना चाहिए. लेकिन इनफॉर्मल कम्युनिकेशन से कोई भी काम तेजी से आगे बढ़ता हैं. एक बार, सबमरीन और क्रू की तैयारियों के इंस्पेक्शन के बाद, USS सैंटा फ़े, पर्ल हार्बर पोर्ट लौट रहा था. चैनल में सबमरीन को चलाते हुए, लेफ्टिनेंट, डेव एडम्स ने एक मोड़ को निशान बनाकर आवाज़ लगाई. जैसे अंदाजा लगाया था वो सबमरीन को उतनी जल्दी मोड़ नहीं पाए. तभी कैप्टन डेविड बीच में आए और पूछा कि क्या वो इसे मोड़ पाएंगे. ऐसे सिचुएशन में हर सेकंड बहुत मायने रखता हैं. अगले स्टेप में लेफ्टिनेंट ने हार मान ली. यहां, कैप्टन डेविड ने खुद को बिना ज़रुरत के इंटरफेयर करते हुए पाया और ये सबक सीखा- “सोल्यूशन देने की आदत पर कंट्रोल कीजिए.” लेफ्टिनेंट सही काम कर रहा था और इसलिए उसे अपने इरादे को बताने की ज़रूरत नहीं थी, जिससे इसके बाद, Il जैसे अंदाज़ा लगाया था वो सबमरीन को उतनी जल्दी मोड़ नहीं पाए. तभी कैप्टन डेविड बीच में आए और पूछा कि क्या वो इसे मोड़ पाएंगे. ऐसे सिचुएशन में हर सेकंड बहुत मायने रखता हैं. इसके बाद, अगले स्टेप में लेफ्टिनेंट ने हार मान ली. यहां, कैप्टन डेविड ने खुद को बिना ज़रुरत के इंटरफेयर करते हुए पाया और ये सबक सीखा- “सोल्यूशन देने की आदत पर कंट्रोल कीजिए.” लेफ्टिनेंट सही काम कर रहा था और इसलिए उसे अपने इरादे को बताने की ज़रूरत नहीं थी, जिससे कैप्टन डेविड को इंटरफेयर करने का मौका मिला था. इस तरह, अपनी सोच को तेज़ रखने की जरूरत पैदा हुई. तेज़ सोचने का मतलब ये हैं कि आप जो करना चाहते हैं उसे जोर से कहिए ताकि आसपास के लोग आपकी बात सुन सकें. इससे कोई इंटरफेयर करने के बजाए आपसे कदम से कदम मिलाकर काम करेगा, इससे कोऑर्डिनेशन बढ़ेगी. “तेज़ सोचने से,” लगातार डिस्कशन चलती रहती हैं, और लीडर को पता होता हैं कि कब इंटरफेयर करना हैं या क्रू मेंबर्स को चलते रहने देना हैं. ये एक ऐसा एग्जाम्पल था जो ये बताता हैं कि कैसे टीमवर्क से लोगों की सोच और उनके काम में जिम्मेदारी आ जाती हैं. इससे लीडर-लीडर का नज़रिया बनता चला जाता हैं. ॥ Turn the Ship Around! A True Story of Turning F… Captain David Marquet काबिलियत के लिए सोचकर एक्शन लेना ऑपरेटिंग मेकेनिज़्म के दौरान, मशीनों को सही प्रोसेस से गुजरना पड़ता हैं. कोई भी गलती एक बड़े एक्सीडेंट का कारण बन सकती हैं. मशीनों पर काम करने वाले लोग लंबे समय तक चीजों को दोहराते रहते हैं जिससे उनका परफॉरमेंस सुस्त हो जाता हैं. एमरजेंसी के दौरान, आम तौर पर लिए जाने वाले कदम शायद न उठाए जाएँ क्योंकि अचानक सारे हालात और घटनाएँ बदले हुए होते हैं. कोई एक सही कदम उठाने के बजाय, दूसरे कदम उठाए जा सकते हैं जिससे एक्सीडेंट हो सकते हैं. ऐसी घटनाओं से बचने के लिए, हाथ के इशारे से पहले बताना बेहतर हैं कि कौन सा कदम उठाना हैं, फिर चाहे वो सोचकर उठाए जाने वाले कदम हो या फिर किसी मतलब से उठाए जाने वाले कदम. ऐसा करने पर दूसरों का ध्यान आपकी ओर खिंचेगा, और अगर ज़रूरत पड़े तो चीज़ों को सुधारा भी जा सकता हैं. सोचकर एक्शन लेना भी टीमवर्क का काम हैं जिसमें आसपास के दूसरे लोग भी शामिल होते हैं. हर कोई इस तरह के टीमवर्क से बहुत कुछ सीखता हैं और बार-बार सीखता हैं. आसपास के दूसरे लोग भी शामिल होते हैं. हर कोई इस तरह के टीमवर्क से बहुत कुछ सीखता हैं और बार-बार सीखता हैं. जैसे ही USS सैंटा फ़े पोर्ट में पहुंचा, दूसरा एक्सरसाइज शुरू हुआ. सबमरीन के अंदर की अपने न्यूक्लियर रिएक्टर से उसे पावर मिलना बंद हो गया था. पावर लाने का दूसरा तरीका था सबमरीन को किनारे लगाकर एक्सटर्नल पावर देना या पोर्ट से पावर लेना. एक्सीडेंट से बचने के लिए, सारे प्रोसेस के दौरान लाल टैग लगाया गया था. एक सेलर सबमरीन को पावर मिल जाने के बाद, अनजाने में लाल टैग हटाना भूल गया. पावर लेने के बाद ऐसी लापरवाही नहीं की जानी चाहिए और वो भी न्यूक्लियर पावर के साथ काम करते हुए तो बिलकुल भी नहीं. ऐसी गलतियों से बचने के लिए, एक ब्रैनस्टोर्मिंग सेशन रखवाया गया. इससे ये बात निकल कर आई कि ऐसी गलतियों को कंट्रोल करने के लिए सोचकर एक्शन लेने वाला तरीका अपनाना चाहिए. इससे जुड़े सारे क्रू मेंबर्स ने । इस तरीके पर डिस्कशन किया और इसके लिए मान गए. यहाँ फिर से, टीम वर्क आया! काम को तरीके से करने के ऑर्डर देने के बजाय, सभी के सोच और डिसिशन को एक साथ मिलाया गया. तेज़ सोचने की तरह ही, सोचकर किए जाने वाले एक्शन ने भी दूसरों को तैयार किया ताकि जब भी जरूरत पड़े, वे हमेशा मदद करने के लिए आगे आएँ. तज़ साचन का तरह हा, साचकर किए जान वाल एक्शन ने भी दूसरों को तैयार किया ताकि जब भी जरूरत पड़े, वे हमेशा मदद करने के लिए आगे आएँ. लीडर-लीडर स्ट्रक्चर में जिम्मेदारी ‘ इसकी जिम्मेदारी में हर मेंबर के साथ कांटेक्ट में रहना और सिचुएशन की पहचान रखना शामिल हैं. ऐसा करने से, अपनेपन का एहसास खुद ही हो जाता हैं. जैसे-जैसे, USS सैंटा फ़े के दिन बदल रहे थे, उसके कई क्रू मेंबर वहाँ काफी लंबे समय तक रुके रहे. जिन्होंने बाद में अपना रेजिग्नेशन दिया था उन्होंने अपना रेजिग्नेशन वापस ले लिया. क्र के लिस्ट के कुछ मेंबर्स ने फिर से अपना नाम register करने के लिए रिक्वेस्ट की. ये वाकई में एक अच्छा बदलाव था! USS सैंटा फ़े पर लोगों ने नौकरी छोड़ना बंद कर दिया था! कई बातों से कैप्टन डेविड को लगता रहा कि USS सैंटा फे पर चीजों को बदलने के लिए उन्हें बहुत कुछ करना बाकी हैं. लेकिन उनका इरादा बहुत ही पक्का था, वे खुद ही क्रू मेंबर्स के पास जाकर उनसे सही जजमेंट के बाद ही एक्शन लेने की हिदायत देते. ऐसा करते हुए वे दूसरों के लिए एक मिसाल कायम कर रहे थे. लेकिन इस दौरान भी उन्होंने हर वक्त लीडर-लीडर नज़रिए को बनाए रखा. वे हमेशा जानते थे कि चीज़ों को बदलने की कोशिश जारी रखनी पड़ेगी. कुछ लोगों को इस बात को समझने में टाइम लगेगा, जबकि कुछ लोगों को इसकी ज़रूरत जल्दी समझ आ जाएगी. जारा रखना पड़ा. पुछ ला|| का इस बात का समझन में टाइम लगेगा, जबकि कुछ लोगों को इसकी ज़रूरत जल्दी समझ आ जाएगी. ऑफिसर्स को अपनी-अपनी जिम्मेदारी उठाने के लिए कहा गया ताकि हर लेवल पर टीम वर्क होता रहे. क्रू के मेंबर्स को इस सोचने के लिए कहा गया जैसे वो खुद भी एक लीडर हों और अपने काम को वैसे ही करने के लिए कहा गया. जैसे-जैसे लोगों को अलग-अलग जगह पर पोस्ट करने का नज़दीक आ रहा था, कैप्टन डेविड ड्रिल ये पक्का करना चाहते थे कि हर कोई USS सैंटा फ़े के आखिरी टेस्ट के लिए तैयार हो जाए. USS सैंटा फ़े की आखिरी डिप्लॉयमेंट के लिए एक महीने से भी कम टाइम था. डेविड देख पा रहे थे कि वहां बहुत कुछ हो रहा था और वो भी सही डायरेक्शन में, दोबारा नाम लिखवाने वाले, मेंटेनेंस ऑपरेशन का काम , मुद्दों को सुलझाने के लिए एक-दूसरे से बात करते हुए ऑफिसर्स, गलती न हो इसलिए सोचकर एक्शन लेते हुए लोग , ये सब काम अपने आप हो रहे थे. लीडर-लीडर स्ट्रक्चर में भरोसा करने वालों के नंबर बढ़ने लगे थे. अब तक, कैप्टन डेविड ने लीडर-लीडर नज़रिए को इतना प्रमोट किया था कि हरेक क्रू मेंबर की बात में वही नज़रिया दिखने लगा था. एक सबमरीन का सोनार सिस्टम आपको वो आवाज़ देता हैं जो सबमरीन के अंदर या बाहर से निकलती हैं. शाम तौर र टंजन कम से निकलने वाली यातात अब तक, कैप्टन डेविड ने लीडर-लीडर नज़रिए को इतना प्रमोट किया था कि हरेक क्रू मेंबर की बात में वही नज़रिया दिखने लगा था. एक सबमरीन का सोनार सिस्टम आपको वो आवाज़ देता हैं जो सबमरीन के अंदर या बाहर से निकलती हैं. आम तौर पर, इंजन रूम से निकलने वाली आवाज़ को सोनार नहीं पकड़ पाता है. इंजन रूम में किसी भी तरह की गड़बड़ी हो तो इसके बारे में ऊपर डेक में बैठे कैप्टन या क्रू को पता ही नहीं चलता है. लेकिन इंजन रूम के आसपास काम करने वाले सेलर आसानी से इन आवाज़ों को पकड़ सकते हैं और अपने ऊपर वालों को किसी भी गड़बड़ी के बारे में बता सकते हैं. आम तौर पर जो प्रोसीजर होता हैं वो ये हैं कि चीफ ऑफ़ वॉच (COW) घटना देखने वालों यानि वॉचस्टैंडर्स से पूछते हैं कि क्या किसी ने कोई छोटी-मोटी आवाज़ सुनी है. ये एक टॉप-डाउन स्ट्रक्चर ये हैं. लेकिन, इंजन रूम क्रू इस बात की जिम्मेदारी लेता हैं और वॉचस्टैंडर्स तक इस आवाज़ के बारे में इनफार्मेशन भेजता हैं. बदले में वॉचस्टैंडर्स चीफ ऑफ़ वॉच को यही इनफार्मेशन देते हैं. इस तरह, USS सैंटा फ़े समुन्दर के पानी में सबसे शांत जहाज बन गया, जितना पहले वो कभी नहीं था! अब टॉप-डाउन को स्ट्रक्चर हटा दिया गया था और सब अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी अपनाने लगे थे . ये लीडर-लीडर स्ट्रक्चर की ओर एक और कदम था. Turn the Ship Around! A True Story of Turning F… Captain David Marquet तरीके के बजाय गोल्स पर फोकस करना अब जब कंट्रोल सबको बराबर बाँट दिया गया था , सबकी काबिलियत उनके अपने हाथों में थी ; लेकिन क्लैरिटी बनाए रखना भी ज़रूरी था . यहाँ क्लैरिटी से मतलब हैं किसी भी मिशन या एक्सरसाइज का पर्पस ताकि ऑर्गनाईजेशन को समझा जा सकें. क्लैरिटी सिर्फ गड़बड़ी को नहीं रोकता है, बल्कि इससे सब कुछ पहले से भी बेहतर हो जाता हैं. क्लैरिटी से भरोसा बढ़ता है. किसी भी तरह के चेंज या बदलाव के सिचुएशन में, क्लैरिटी के होने से तुरंत response मिल जाता है. ये क्लैरिटी हमेशा अपने गोल को फोकस में रखती है. डेविड ने ये भी पक्का किया कि सबमरीन में सर्विस देने वाले, अपने-अपने घर से दूर रहने वाले क्रू का ध्यान रखा जाए. क्रू को उनकी एडवांसमेंट एग्जाम के लिए टूल्स और टिप्स, सपोर्ट और एनकॉरेजमेंट देकर उनकी मदद की गई जिन्हें छुट्टी की जरूरत थी, उन्हें छुट्टी दी टूल्स और टिप्स, सपोर्ट और एनकॉरेजमेंट देकर उनकी मदद की गई . जिन्हें छुट्टी की जरूरत थी, उन्हें छुट्टी दी गई. लेकिन किसी भी रूल के तोड़े जाने पर कोई बचाव नहीं था. डेविड ने नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे की तरफ होने वाले काफी चीज़ों को बदला. जब भी किसी ने शानदार काम किया, उन्होंने उसे फ़ौरन रिवॉर्ड और पहचान देने का रिवाज़ बनाया. इसने हर क्रू मेंबर के अंदर कम्पटीशन की भावना डाल दी थी जिससे चारों ओर अच्छी परफॉरमेंस होने लगी. अपने ध्यान में अपने गोल को रखते हुए, उन्होंने सैन डिएगो के सफर के लिए, USS सैंटा फ़े की सारी तैयारी तीन हफ्ते पहले ही कर ली. इससे हर किसी को कम से कम दो हफ्ते तक अपने फैमिली के साथ रहने का काफी टाइम मिल गया था, आखिर उन्हें उनसे छह महीने के लिए दूर जो रहना था. इतनी तैयारियों के बाद, कैप्टन मार्क केनी ने कैप्टन डेविड को एक्चुअल डिप्लॉयमेंट की पुरानी डेट से ग्यारह दिन पहले ही डिप्लॉय करने के ऑर्डर दिए. इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं थी. हर कोई तैयार था और फ़ौरन नए डेट से डिप्लॉयमेंट पूरी की गई. बस अफ़सोस की बात ये थी कि सबको फैमिली के साथ ज़्यादा दिन रहने का मौका नहीं मिला. लेकिन देश की सोना गिलासी का. पीके HTTOT अफ़सोस की बात ये थी कि सबको फैमिली के साथ ज़्यादा दिन रहने का मौका नहीं मिला. लेकिन देश की सेवा को जिम्मेदारी से और ड्यूटी के क्लैरिटी के साथ निभाया गया था. चीजों को अलग-अलग तरीके से करने और हर किसी को इसमें शामिल करने के इन तरीकों के साथ, कैप्टन डेविड ऑर्गनाईजेशन में अपनी सोच के हिसाब से लीडर-लीडर स्ट्रक्चर लेकर आए. इसका नतीज़ा इतना शानदार था कि USS सैंटा फे ने आर्ली बक फ्लीट (Arleigh Burke Fleet) ट्रॉफी हासिल कर ली थी. ये उन्हें जंग करने की काबिलियत में बढ़िया इम्प्रूवमेंट करने के लिए मिला था. इसके पीछे कैप्टन डेविड की लीडर-लीडर स्ट्रक्चर का ही हाथ था. कन्क्लूज़न लीडरशिप एक ऐसी क्वालिटी है जिसे हासिल किया जा सकता हैं – जरूरी नहीं कि कोई जन्म से ही लीडर हो! कैप्टन डेविड मार्के ने दिखाया कि वे किस तरह चीजों को अपने तरीके से कर सकते हैं, लेकिन जिम्मेदारी और अपनेपन के साथ. लीडरशिप ऑर्डर देने का नाम नहीं हैं. ये दूसरों को खुद को एक्सप्रेस करने, अपनी बात कहने और जिम्मेदारी के साथ खुद को चलाने के लिए जगह और मौका देने लीडरशिप ऑर्डर देने का नाम नहीं हैं. ये दूसरों को खुद को एक्सप्रेस करने, अपनी बात कहने और जिम्मेदारी के साथ खुद को चलाने के लिए जगह और मौका देने की बात हैं. इसका मकसद है लोगों को वो करने देना जो वो करना चाहते हैं. जब कैप्टन डेविड को USS ओलंपिया की ज़िम्मेदारी लेने के लिए चुना गया था, तो उन्होंने इस न्यूक्लियर पावर वाली अटैक सबमरीन को एक साल तक पूरी तरह से स्टडी करने के लिए सारी कोशिश लगा दी थी. फिर, जब USS ओलंपिया की कमान संभालने का मौका आया तो उन्हें काफी कमियों वाली, सबमरीन USS सैंटा फे, को कमांड करने को कहा गया. वहाँ उन्हें लीडर-लीडर के नज़रिए को शुरू करने का मौका मिला था. ॥ अपने बड़े ऑफिसर्स के सपोर्ट के साथ, उन्होंने मेरे इरादे” को शुरू किया. शुरू के कुछ दिनों ने उन्हें सिखाया कि USS सैंटा फे पूरी तरह से USS ओलंपिया से अलग था. उन्होंने एक और बात सीखी, नए माहौल में तेजी से खुद को ढालना. उन्होंने ये भी देखा कि क्रू मेंबर्स आँख बंद करके ऑर्डर को फॉलो कर रहे थे और कभी भी कोई मुद्दा लेकर नहीं आते थे जब तक कि उनसे पूछताछ न की जाए. लीडर-फॉलोवर स्ट्रक्चर में इन खामियों को ध्यान में नहा जात पषतपाक नस पूछताछ नया जाए. लीडर-फॉलोवर स्ट्रक्चर में इन खामियों को ध्यान में रखकर उन्होंने अपने नए क्रू को ट्रेनिंग दी कि कैसे उन्हें खुद ही एक लीडर की तरह लीड करना हैं, सिर्फ फॉलोवर की तरह ऑर्डर को फॉलो नहीं करना हैं. धीरे-धीरे ही सही, USS सैंटा फ़े का क्रू, परफॉर्म करने का इरादा रखने वाले बनना शुरू हो गए थे. जिससे, टॉप से नीचे तक कमांड करने की कोई ज़रूरत नहीं सभी ने जिम्मेदारी से अपना काम किया. किसी को ऐसा नहीं लगा जैसे ऑर्डर मिला हो. इस तरह, ज़्यादातर क्रू मेंबर्स ने अच्छा परफॉरमेंस देना सीखा और अपने कैरियर की सीढ़ी पर ऊपर चढ़ गए. कुछ मेंबर्स ने और भी बड़ी पोजीशन हासिल की और कुछ कैप्टन बन गए. कैप्टेन डेविड के USS सैंटा फ़े छोड़ने के बाद भी, इस न्यूक्लियर सबमरीन ने लगातार कई लीडर पैदा किए, कई सारे अवार्ड जीते और नाम कमाया. अब आप जान चुके हैं कि अगर सही ट्रेनिंग दी जाए तो किसी को भी लीडर बनाया जा सकता हैं जिसमें वो ख़ुद involve होकर काम करे, अपने काम की ज़िम्मेदारी ले और सिर्फ आँख बंदकर आर्डर या कमांड को फॉलो ना करें.

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