Traction: How Any Startup Can Achieve Explosive C… Gabriel Weinberg and Justin Mares Books In Hindi Summary

Traction: How Any Startup
Can Achieve Explosive C…
Gabriel Weinberg and Justin Mares
इंट्रोडक्शन
क्या आप भी कोई कंपनी स्टार्ट करने की सोच रहे है? क्या आपको खुद का ही बॉस बनने से डर लगता है?
क्या आपको नहीं पता कि जब खुद का स्टार्ट-अप होता है तो आपकी प्रायोरीटीज़ क्या होनी चाहिए?
हर स्टार्ट-अप फाउंडर के मन में ये सवाल उठते है और ये एक नॉर्मल सी बात है. लेकिन परेशान होने की
जरूरत नहीं क्योंकि आप अकेले ऐसे नहीं है जिसे स्टार्ट-अप के नाम से ही घबराहट होती है, क्योंकि
इस समरी में आपको सीखने को मिलेगा कि हमारी प्रायोरीटी क्या होनी चाहिए और आप ये सीखोगे कि
यहाँ हम सिर्फ एक अच्छे प्रोडक्ट या सेरिवेज़ की बात नहीं कर रहे. आप सीखोगे कि ट्रैक्शन आपको
सक्सेसफुल बनने में हेल्प करेगा. ट्रैक्शन का मतलब है कस्टमर ग्रोथ अचीव करना. इसमें आप बुल्सआई अप्रोच के बारे में पढ़ेंगे जो आपको ये समझने में हेल्प करेगी कि आपके लिए कौन सा ट्रैक्शन चैनल बेस्ट रहेगा. बुल्सआई अप्रोच को brainstorming, prioritizing, testing 31 focusing से डिफाईन किया जा सकता है. इसके अलावा आप कई और ट्रैक्शन टूल्स के बारे में भी पढ़ोगे.

Traction Channels
आजकल कोई भी एंटप्रेन्योर बन सकता है. अब वोज़माना नहीं रहा कि जब लोग सोचते थे कि अगर
बिजनेसमेन बनना है तो आपको किसी कॉलेज से बिजनेस की पढ़ाई करनी होगी. यही वजह है कि
आजकर हर जगह स्टार्ट-अप कंपनीज़ खुल रही है. यानी अब हर कोई बिजेनस कर सकता है और अपना
बॉस खुद बन सकता है. लेकिन ये हर कोई तय नहीं कर सकता कि उनका स्टार्ट-अप आगे चलेगा या नहीं
चलेगा. और यही पर हमे ट्रैक्शन की ज़रूरत पड़ती है. इस बुक के ऑथर्स गेब्रियल और जस्टिन के लिए
ट्रैक्शन का मतलब है कि आपका स्टार्ट-अप चल रहा है. क्योंकि यही वो पॉइंट है जहाँ कस्टमर्स आपके
प्रोडक्ट या सर्विस के लिए पे करते है. यही वो चीज़ है जो आपको बताती है कि आपके कस्टमर्स की डिमांड
धीरे-धीरे बढ़ रही है. ट्रैक्शन हर तरीके से अचीव किया जा सकता है. आप चाहे तो अपना प्रोडक्ट ऑनलाइन या ऑफलाइन बेच सकते हो. आप फंड रेजिंग इवेंट होस्ट कर सकते हो या बाकि कंपनीज़ के साथ पार्टनरशिप कर सकते हो. ये सारे बेसिक आईडिया लगते है ना? लेकिन इनके बेसिक होने के पीछे भी एक वजह है. अगर आप सक्सेस चाहते हो तो ट्रैक्शन आपकी प्रायोरिटी होनी चाहिए. स्टार्ट-अप कंपनीज़ ट्रैक्शन के बारे में तभी सोचती है जब उन्हें और कोई ऑप्शन समझ नहीं आता. यही वजह है कि ज्यादातर इस तरह के स्टार्ट-अप फेल हो जाते है. अक्सर स्टार्ट कुछ ऐसे शुरू होता है. जैसे मान लो किसी आदमी को कोई ब्रिलिएंट आईडिया आया है,

तो वो क्या करता है कि अपने उस आईडिया पर काम करने के लिए कुछ लोगों के साथ मिलकर एक टीम
बना लेता है. अब ये टीम अपने इस आईडिया को लेकर इतनी एक्साईट होती है कि वो इसे किसी प्रोडक्ट या
सर्विस में डेवलप करने के बारे में सोचने लगते है और फाईनली वो एक प्रोडक्ट बनाने में कामयाब होते है.
लेकिन होता क्या है कि उनका वो प्रोडक्ट फेल हो जाता है क्योंकि प्रोडक्ट बनाने के बाद उनके दिमाग
में उसे प्रमोट करने का ख्याल आया था. लेकिन एक अच्छी ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ी को खूब अच्छे से सोच-समझ
कर प्लान करना पड़ता है. इसके बारे में स्टार्ट-अप ब्रेनस्ट्रोम्स आईडियाज़ की तरह डिस्कस किया
जाना चाहिए. यही तय करेगा कि आपका प्रोडक्ट सक्सेसफुल होगा या नहीं होगा. लेकिन सवाल है कि ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ीज़ को डेवलप करने की शुरुवात कहाँ से की जाए? तो जवाब है ट्रैक्शन चैनल से. ट्रैक्शन चैनल वहां होता है जहाँ आप अपने कस्टमर्स बढ़ाते है. जहाँ आप अपना प्रोडक्ट प्रमोट करते है और उसे मार्केट में लौंच करते है.

ये बुक लिखने से पहले गेब्रियल और जस्टिन ने चालीस से भी ज्यादा स्टार्ट-अप ओनर्स के इंटरव्यू लिए और इस इंटरव्यू के बाद उन्हें दो कॉमन गलती समझ आई, जो लोग अक्सर ट्रैक्शन चैनल के मामले में करते है. पहला तो ये कि स्टार्ट-अप्स सिर्फ उन्ही ट्रैक्शन चैनल्स तक सीमित रहते है जो उन्हें पता होते है. उन्हें ये समझ ही नहीं आता कि उन्हें नए चैनल भी एक्सप्लोर करने चाहिए ताकि उन्हें और ज्यादा कस्टमर्स मिल सके. दूसरी बात, स्टार्ट-अप्स ट्रैक्शन टेस्ट करने को तैयार नहीं होते. बेस्ट ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ी trial and error मेथड के बाद ही बनती है. इसलिए एक सक्सेसफुल बिजनेस चलाने के लिए स्टार्ट-अप्स को चाहिए कि वो अपनी ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ी को कस्टमाईज़ करे. आप शायद सोच भी नहीं सकते कि अनएक्सप्लोर्ड
यानी जो ट्रैक्शन चैनल अब तक खोजे नहीं गए हैं यो आपको कितने सारे कस्टमर्स दिला सकता है. आप
तभी ग्रो कर सकते हो जब आप अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलोगे.

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Traction Thinking

हाँ, ये सच है कि प्रोडक्ट इम्पोर्टेट है और ये भी सच है कि आपको अपना प्रोडक्ट ऐसा बनाना है जो सबसे अलग हो. लेकिन एक अच्छे प्रोडक्ट का फायदा ही क्या अगर लोगों ने उसका नाम तक ना सुना हो?
जैसे ही आप एक प्रोडक्ट डेवलप करे, साथ ही उसके ट्रैक्शन के बारे में भी सोचना शुरू कर दो. ये दोनों चीजें
आपको साथ-साथ प्लान करने है. इसलिए आपको यहाँ 50% रुल अप्लाई करना होगा. 50% अटेंशन अपने प्रोडक्ट की डेवलपमेंट पर दीजिए और बाकि 50% ट्रैक्शन पर. फिर से एक बार आपको याद दिला दे, ट्रैक्शन का मतलब है कस्टमर ग्रोथ अचीव करना. अगर आपने ये 50% वाला रुल फॉलो नहीं किया तो आपके स्टार्ट-अप के फेल होने के ज्यादा चांसेस है. बेशक लोग आपका प्रोडक्ट पसंद करेंगे लेकिन उसे खरीदना नहीं चाहेंगे. एक और सिनेरियो ये हो सकता है कि लोग आपका प्रोडक्ट खरीद ले लेकिन इतना प्रॉफिट नहीं होगा कि बिजनेस आगे चल सके. यानि कई ऐसे चांस है कि आपका स्टार्ट-अप फेल हो सकता है. लेकिन एक अच्छी ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ी इन चांसेस को कम कर देती है और ये बात ऑथर्स समझ चुके थे. अपना फोकस डिवाइड करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि अपने प्रोडक्ट को डेवलप करने के चक्कर में आप दिन-रात एक कर दोगे, लेकिन ये मत भूलो कि किसी भी बिजनेस को सक्सेसफुल बनाने में मार्केटिंग एक इम्पोर्टेट पार्ट है और इससे आपको अपने प्रोडक्ट की कमियां भी तुरंत मालूम पड़ जाएँगी. आप पूछोगे कैसे?

मान लो आप 50% रुल फॉलो करते हो. अब जैसे ही आपने प्रोडक्ट डेवलप किया, आप इसे कुछ
कस्टमर्स पर आजमाना चाहोगे, और वो आपको उसके बारे में ऊपरी तौर पर फीडबैक देंगे, जैसे कि वो आपको बता सकते है कि कौन से फीचर्स एड या रिमूव किये क्योंकि हम सब अपनी बनाई हुई चीज़ को
परफेक्ट मानते है पर उसमें क्या कमी या खूबी है, ये सिर्फ दूसरे लोग ही बता सकते है. प्रोडक्ट डेवलपमेंट के साथ-साथ ट्रैक्शन करने का एक और फायदा भी है. ट्रायल और एरर किसी भी प्रोडक्ट को सक्सेसफुल बनाने की गारंटी है. अपने प्रोडक्ट की टेस्टिंग के साथ ही आप अलग-अलग ट्रैक्शन चैनल भी टेस्ट कर सकते हो. क्या आपका प्रोडक्ट ट्रैक्शन क्रिएट करने के लिए Search Engine Optimization (SEO) यूज़ करता है? या आपको सेल्समेन हायर करके घर-घर जाकर अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कराना पसंद करोगे?

आपको ट्रैक्शन गोल्स बनाने की भी जरूरत पड़ेगी. ट्रैक्शन गोल्स को हम थ्री फेज़ में डिवाइड कर सकते
है. फेज़ वन में, आप एक ऐसा प्रोडक्ट बनाते हो जो लोग चाहते है, यहाँ आप कस्टमर फीडबैक से अपने
प्रोडक्ट में इम्प्रूवमेंट लाते हो. अब आता है फेज़ टू, आपने थोडा-बहुत ट्रैक्शन कर लिया है. यानी आपको
अपने प्रोडक्ट के लिए कुछ लॉयल कस्टमर्स मिल गए आपने पता कर लिया है कि कौन से ट्रैक्शन चैनल्स
आपको सूट करते है. इसके बाद आता है थर्ड फेज़ यानी फाइनल फेज़, अब मार्किट में आपका इम्प्रैशन
बन गया है. यानि आप फेमस भी हो रहे है और आपको प्रॉफिट भी हो रहा है. एक स्टार्ट-अप ग्रो करने का मतलब सिर्फ प्रॉफिट कमाना नहीं है. बल्कि अपनी एक पहचान बनाना भी है. ये पता लगाना कि आपके लिए कौन सी ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ी बेस्ट रहेगी , आपको आगे चलकर बड़ा फायदा दे सकती है और साथ ये इस बात की भी फुल गारंटी देती है कि कस्टमर्स आपके साथ लम्बे टाइम तक जुड़े रहेंगे.

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Bullseye

कई सारे स्टार्ट-अप्स इसलिए भी फेल होते है क्योंकि उनके प्रोडक्ट एकदम बेकार होते है. और वो फेल
इसलिए होते है क्योंकि वो उन मल्टीपल ट्रैक्शन चैनल्स को एक्सप्लोर करने की कोशिश तक नहीं करते जो उन्हें अवलेबल रहते है. आप शायद सोच रहे होंगे” भला मुझे कैसे पता चलेगा कि कोई ट्रैक्शन चैनल मेरे
काम आएगा या नहीं ? “तो इस सवाल के जबाव में ऑथर आपको बुल्सआई से इंट्रोड्यूस कराते है. ये एक
थ्री स्टेप अप्रोच है जो आपको कस्टमर ग्रोथ में हेल्प करेगी. इस फ्रेमवर्क को बुल्सआई इसलिए कहते है क्योंकि इसकी अप्रोच वही है जो किसी डार्टबोर्ड के रिंग में होती है. सबसे पहले हम आउट रिंग से स्टार्ट करते है. आउटर रिंग जहाँ आप डिसाइड करते है कि कौन से ट्रैक्शन चैनल यूज़ करने चाहिए. अगर आप ऑफलाइन एडवरटीज़मेंट के फेवर में है तो ये डिसाइड करना होगा कि मीडियम कौन सा यूज़ करना है? न्यूज़पेपर कॉलम या कुछ और? सोचो जरा हर चैनल कैसा रिजल्ट देगा. अपनी सारी उम्मीदों को एक पेपर पर लिख लो. बेशक आप अपनी पर्सनल चॉइस के हिसाब से किसी एक चैनल को बाकियों से ज्यदा prefer करोगे. ऑथर आपको ऐसी स्ट्रेटेजी के बारे में सोचने के लिए एनकरेज करते है जो हर ट्रैक्शन चैनल पर काम करे. इससे आपको सेलेक्ट करने में आसनी रहेगी. आपके लिए ट्रैक्शन चैनल्स की भरमार है, आप चाहे कोई भी चूज़ कर सकते हो चाहे

वो फेसबुक हो या SEO या फिर वायरल मार्केटिंग. मिडल रिंग आपसे कहेगी कि उन ट्रैक्शन चैनल्स को
ईवैल्यूएट करो जो आपको सबसे ज्यादा प्रोमिसिंग लग रहे है. क्योकि यही आप टेस्ट करके ये पता लगा पायेंगे कि कौन सा ट्रैक्शन सबसे ज्यादा एंगेजिंग है. ऑथर यहाँ रीडर्स को सजेस्ट करते है कि उन्हें डिफरेंट चैनल्स को टेस्ट करना चाहिए. इससे आपको कम्पेयर करने में आसानी होगी कि कौन सा आपके लिए बेस्ट रहेगा. साथ ही मिडल रिंग आपको अपने ट्रैक्शन चैनल्स को ईवैल्यूएट करने के लिए भी एनकरेज करती है. जैसे कि चैनल को यूज़ करने की कोस्ट क्या पड़ेगी? अगर आप इसे यूज़ करते है तो कस्टमर ग्रोथ की highest estimate क्या होगी? और इस ख़ास चैनल के लिए आप किस तरह के कस्टमर्स को attract कर रहे हो? टेस्ट रन करना मार्केटिंग से अलग है. अक्सर स्टार्ट-अप बिजनेस वालो को ये गलतफहमी रहती है कि टेस्टिंग ही मार्केटिंग है. आप टेस्ट इसलिए कर रहे हो ताकि पता लग सके कि ट्रैक्शन है या नहीं. इसके बाद आपको डेटा कलेक्ट करके एनालाईज़ करना है. इसलिए टेस्ट रन अक्सर सस्ते पड़ते है और छोटे होते

जैसे मान लो आपको वायरल मार्केटिंग के श्रू ट्रैक्शन मिलता है. लोग आपके वीडियोज़ शेयर करते है
और आपको कई सारे कोमेंट्स भी मिलते है. अब ये वीडियज़ किसी भी टाइप के हो सकते है, जैसे क्यूट
एनिमल्स के या कुछ फनी वीडियोज. ये आपका कोर चैनल है. और वीडियोज़ के बीच आप अपना प्रोडक्ट
भी दिखा देते हो. तो लोग जब ऐसे और क्यूट वीडियोज़ के लिए आपका न्यूज़लैटर साईंन करेंगे तो उन्हें
बार-बार आपका प्रोडक्ट भी देखने को मिलेगा. इस तरह से ये एक ट्रैक्शन चैनल बन जाएगा जो आपके
कोर चैनल को सपोर्ट करेगा जोकि वायरल मार्केटिंग है. यानि बुल्सआई अप्रोच रिजल्ट में ईज़ाफा करते हुए
आपको ट्रैक्शन चैनल पर फोकस करने में हेल्प करेगी. हालाँकि नॉर्मल तरीको से कुछ हटकर करना थोडा
रिस्की लग सकता है क्योंकि ज्यादातर स्टार्ट-अप्स सोशल मिडिया की हेल्प से अपने कस्टमर्स बढ़ाते है.
ऑथर ये नहीं कह रहे कि आपको सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म यूज़ ही नहीं करना चाहिए. वो बस ये चाहते है कि आपको एक से ज्यादा ट्रैक्शन चैनल्स एक्सप्लोर करने चाहिए. अक्सर अंडररेटेड चैनल्स ही बेस्ट परफोर्म करते है. तो बुल्सआई अप्रोच की हेल्प से आगे बढ़ते रहिये और साथ ही brainstorm, prioritize, test और focus करना मत भूलिए.

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Traction Testing

टेस्ट करना अच्छे ट्रैक्शन की गारंटी दे सकता है. जैसा हमने पहले भी मेंशन किया है, मिडल रिंग में जो
चैनल्स आप आईडेंटीफाई कर लेते है, उन्हीं को टेस्ट करना चाहिए. लेकिन इस मिडल रिंग टेस्ट में आखिर
होता क्या है? मिडल रिंग टेस्ट आपसे ईवैल्यूएट करने को कहेगा. एक स्पेशिफिक चैनल स्ट्रेटेज़ी के लिए, आपको कस्टमर्स बनाने के लिए कितना खर्चा करना होगा? जब हम इस पार्टीक्यूलर चैनल स्ट्रेटेज़ी की बात करते है तो क्या कस्टमर्स ज्यादा होते है? और क्या ये वही कस्टमर्स है जो आपको चाहिए? याद रहे टेस्टिंग महंगी नहीं होनी चाहिए, अगर आप ऑफ़लाइन ad चूज़ करते हो तो किसी मैगज़ीन या न्यूज़पेपर में एक ट्रैक्शन टेस्ट चला दो. ये पता लगाओ कि कौन सी स्ट्रेटेज़ी ज्यादा सक्सेसफुल है. साथ ही ये भी नोट करना कि ये सिर्फ अभी आपके ट्रैक्शन गोल्स का फेज़ ] है. आप यहाँ सस्ते से काम चला सकते हो. हालाँकि फेज़ 2 और 3 में आपको और ज्यादा रीसोर्सेज़ यूज़ करने पड़ेंगे. इनर रिंग टेस्ट के दो गोल हैं. पहला, ये आपके ट्रैक्शन चैनल स्ट्रेटेज़ी पर फोकस करता है ताकि उसमे से बेस्ट रिजल्ट मिल सके. और दूसरा, ये आपको उस चैनल के अंदर ही और भी कई ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ी को जानने में हेल्प करता है.

इनर रिंग में आपके चैनल के सक्सेसफुल होने के ज्यादा चांसेस है. वो इसलिए क्योंकि आपने इसे पहले
ही मिडल रिंग टेस्टिंग में चेक कर लिया है. अगर मिडल रिंग को स्पेशिफ़िक करने की जरूरत थी ये समझ
लो इनर रिंग को और ज्यादा जरूरत होगी. मान लो आपने चैनल स्ट्रेटेज़ी के तौर पर ब्लॉग लिखना चूज़
किया है, तो इनर रिंग आपसे ये सवाल पूछेगी: आप किन कस्टमर्स तक पहुंचना चाहते हो? आपको कैसे
कंटेंट बनाने चाहिए? आपके हर ब्लॉग में कौन से keyword यूज़ होंगे? अपनी चैनल स्ट्रेटेज़ी refine करो लेकिन सिर्फयही तक लिमिट मत रहो. कुछ और नए तरीके सीखो जो आपकी ट्रैक्शन स्ट्रेटेजी को इम्प्रूव करे. दुःख की बात तो ये है कि कस्टमर्स एड्स से बड़ी जल्दी बोर हो जाते है. ट्रैक्शन तब तक काम नहीं करेगा जब तक कि आपके कस्टमर्स इसे देखेंगे नहीं साथ ही ये फैक्ट मत भूलो कि आपके कॉम्पटीटर्स भी है. याद रहे कि आपको भीड़ का हिस्सा नहीं बनना है बल्कि में अपनी अलग पहचान बनानी है. नए ट्रैक्शन चैनल्स एक्सप्लोर करने से डरो मत. मान लो आपके इनर रिंग में ऑनलाइन मार्केटिंग के सिवाए कुछ भी ना हो, लगभग हर मिडिया प्लेटफॉर्म पर आप ब्लॉग,वीडियो और पिक्चर पोस्ट करते हो तो

इस बात की गारंटी है कि काफी कस्टमर्स आपकी तरफ attract होंगे, लेकिन अगर आपको ऑफलाइन
मार्केटिंग एक्सप्लोर करके डबल कस्टमर्स मिल जाए तो कैसा रहे? आप कांफ्रेंस करोगे हो तो आपको कई सारे डोनर मिलेंगे और जब आप कोई सेमीनार अटेंड करोगे तो अपने जैसे कई स्टार्ट-अप फाउंडर्स से मिलने का मौका मिलेगा जहाँ आप एक- दूसरे की कंपनी के साथ मिलकर अपने बिजनेस को प्रमोट कर सकते हो. और इस तरह आप हमेशा टॉप पर रहोगे और ट्रैक्शन ग्रो करने के लिए आने एरिया भी एक्सप्लोर करना
चाहोगे.

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Critical Path

स्टार्ट-अप्स को कई सारे फैक्टर कंसीडर करने पड़ते है. जैसे क्या उन्हें अपना प्रोडक्ट इम्प्रूव करना चाहिए?
क्या कस्टमर ग्रोथ पर फोकस करना चाहिए? अपने ट्रैक्शन गोल्स को डिफाइन करना ही आपकी प्रायोरिटी होनी चाहिए. चाहे वो ऐसे सौ कस्टमर्स तक पहुंचने की बात हो जो आपको पे करते है या फेसबुक पर हज़ारों लाइक्स बटोरने की बात हो. अपने ट्रैक्शन गोल को डीफाइन का एक तरीका है कि पहले आप अपना एक क्रिटिकल पाथ डिसाइड कर लो. क्रिटिकल पाथ का मतलब है उन स्टेप्स को अप्लाई
करना जो आपको अपने ट्रैक्शन गोल अचीव करने के लिए चाहिए. जैसे एक्जाम्पल के लिए DuckDuckGo एक इंटरनेट सर्च इंजिन है जिसे गेब्रियल वाइनबर्ग ने क्रिएट किया है. इनके ट्रैक्शन गोल्स में से एक है, महीने में कम से कम 100 मिलियन सर्चेस. अब इस गोल को अचीव करने का क्रिटिकल पाथ कुछ इस तरह: 1) उन्हें डकडक को और फास्टर बनाना होगा 2) उन्हें इसका मोबाइल वर्जन भी निकालना पड़ेगा और 3) उन्हें और ज्यादा टीवी कवरेज लेनी होगी.

DuckDuckGo को फ़ास्ट बनाना और इसका सक्सेसफुल ट्रैक्शन होना सेम चीज़ नहीं है. लेकिन
प्रोडक्ट फीचर कस्टमर्स को attract करते है कि वो ज्यादा से ज्यादा ये सर्च इंजिन यूज़ करे. क्रिटिकल पाथ आपको ये फोकस करने में हेल्प करता है कि आपकी प्रायोरिटी क्या होनी चाहिए. किसी भी प्रोजेक्ट की स्टार्टिंग में आप शायद सोचे कि मुझे कम से कम तीन लोग को हायर करने ही चाहिए जो अपने फील्ड के एक्सपर्ट हो. लेकिन जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हो, अपन क्रिटिकल पाथ को गाईड करने दो. आप एक मार्केटिंग एक्सपर्ट हायर करके एक ट्रैक्शन गोल अचीव कर सकते हो. अब आपके क्रिटिकल पाथ
को रीईवैल्यूएट करने का टाइम है. आपके इस मार्केटिंग एक्सपर्ट के पब्लिशिंग इंडस्ट्री में भी कुछ कनेक्शन है. तो अब आपको बाकि लोगों को हायर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्योंकि आपका यही मार्केटिंग एक्सपर्ट आपको एक और ट्रैक्शन गोल अचीव करने में हेल्प कर रहा है. बेसिकली क्रिटिकल पाथ आपके उन कामो को भी पूरा कर देता है जिन्हें करने की अब आपको जरूरत नहीं है. ये आपको अपने गोल्स अचीव करने के लिए उस पाथ पर बने रहने में हेल्प करता है.

Publicity
अब जबकि आपको मालूम है कि अपने ट्रैक्शन गोल्स कैसे सेट अप किये जाए तो टाइम है डिफरेंट ट्रैक्शन चैनल्स को एक्सप्लोर करने का. पब्लिक रिलेशन या पीआर, उस टर्म को बोलते है जब आपकी कंपनी हर टाइप के कम्यूनिकेशन में एंगेज रहती है. इसके एक्जाम्पल है मैगज़ीन और न्यूज़पेपर. क्योंकि आप भी एक स्टार्ट-अप कंपनी है तो पब्लिसिटी के लिए प्रेस को अप्रोच करना स्मार्ट डिसीजन नहीं होगा, पहले आपको बेसिक्स की नॉलेज होनी चाहिए. आपको ये पता होना चाहिए कि मिडिया ऑनलाइन कैसे काम करती है. आजकल वेबसाइट एडवरटीज़मेंट के जरिये इनकम जेनरेट करती है. लेकिन वो किसी को भी फीचर कर सकती है जिसके पास कोई इंट्रेस्टिंग स्टोरी है. और यही पर आप जैसे स्टार्ट-अप आते है. आपको बड़ी-बड़ी वेबसाइट की अटेंशन लेने की जरूरत नहीं है जैसे हफिंगटन पोस्ट या सीएनएन. ये थोडा मुश्किल हो सकता है इसलिए छोटी वेबसाइट को अप्रोच कीजिये. अगर आप उन्हें भरोसा दिला सके और अपनी स्टोरी एक इंट्रेस्टिंग वे में बता पाए तो शायद वो आपके बारे में कुछ पब्लिश कर सकते है. क्योंकि आजकल मिडिया कुछ ऐसे ही काम करता है. बड़े मिडिया आउटलेट अपने कंटेंट के लिए अक्सर इन छोटे मिडिया आउटलेट पर डिपेंड करते है. किसी जर्नलिस्ट की अटेंशन पानी हो तो आप क्या करोगे? आप अपनी कंपनी के लिए फंड रेज़ कर सकते हो या फिर कोई नई प्रोडक्ट launch कर सकते हो? आप पीआर स्टंट भी कर सकते हो या फिर अपने एरिया के किसी फेमस पर्सनेलिटी के साथ कोलाब्रेट कर सकते हो. लेकिन जो भी करो इतना इंट्रेस्टिंग लगे

कि मिडिया खुद आपकी स्टोरी कवर करना चाहे. लोगों के ईमोश्न्स को अपील करने की कोशिश करो
क्योंकि ईमोश्न्स में आकर लोग कुछ भी करने को तैयार हो जाते है, यहाँ आपको उनसे इमोशनली कनेक्ट करके अपना प्रोडक्ट बेचना है. पब्लिसिटी टैक्टिस भी ट्रैक्शन का एक बढिया तरीका है. इसलिए करंट ट्रेंड के साथ खुद को अपडेट रखे, इसे अपने प्रोडक्ट से कनेक्ट करने की कोशिश करे. कई बार कंपनीज़ किसी करंट टॉपिक पर ट्वीट करने की वजह से भी वाइरल हो जाती है. कस्टमर्स को attract करने के लिए आप अपनी पोपुलेरिटी यूज़ कर सकते हो या अगर आप किसी ऐसे फेमस पर्सनेलिटी को जानते हो जिसके कई सारे फॉलो वर्स है तो आप उनसे अपने प्रोडक्ट के बारे में ट्वीट करने को बोल सकते हो. बैटर ये होगा कि अगर वो अपने हर सोशल मिडिया अकाउंट पर आपके प्रोडक्ट की तारीफ में रिव्यु दे तो फिर आपकी वेबसाईट लोगों की नजरों में 100% आएगी और यही से आपके कस्टमर्स बनने शुरू हो जायेंगे.

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Content Marketing

वेबसाइट बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है. आप चाहे तो फ्री में वेबसाईट बनाकर आसानी से यूज़ कर
सकते हो. लेकिन दुःख की बात तो ये है कि आज लगभग हर इंसान जिसके पास भी इंटरनेट कनेक्शन
है, अपनी खुद की वेबसाईट बना लेता है. ऐसे में आप अपनी वेबसाईट को कैसे ख़ास बनायेंगे कि लोग
आपकी तरफ खींचे चले आये. हालंकि ये सच है कि कहना आसान है पर करना मुश्किल होता है. इंटरनेट में
कई सारे ब्लोग्स पोपुलर है जिन्हें रोज़ हजारो लाईक्स और कोमेंट्स मिलते है. और इसी के चलते उनकी
कस्टमर ग्रोथ भी धीरे-धीरे बढती चली जाती है. तो आप भी उनके जैसे कैसे बन सकते हो? इस बुक के ऑथर ने दो पोपुलर वेबसाइट के फाउंडर से बात की, Unbounce और OkCupid . बात अगर कंटेंट मार्केटिंग में ट्रैक्शन लेने की हो तो इन दोनों कंपनीयों का तरीका अलग है. Unbounce एक कंपनी है जो पेज क्रिएशन सॉफ्टवेयर में स्पेशलिस्ट है. इन्होने अपना प्रोडक्ट बनाने से पहले ही वेबसाईट बना ली थी. आप शायद सोच रहे होंगे” तो उन्होंने अपनी वेबसाईट में क्या कंटेंट डाला होगा?’ तो जवाब है ब्लॉग्स. Unbounce ने अपने इन्फोरमेटिव और एंटरटेनिंग ब्लॉग्स के जरिये

कस्टमर्स को बांधे रखा. उनके 2010 के लिखे हुए ब्लॉग्स कस्टमर्स आज भी पढ़ते है. ये है ऑनलाइन
ट्रैक्शन की पॉवर जो कई साल बाद भी उतनी ही रेलेवेंट रह सकती है. जब तक Unbounce अपना प्रोडक्ट
launch करता, उसके पहले ही उन्होंने अपने हजारो कस्टमर्स बना लिए थे. Unbounce ने सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म का भी एडवांटेज खूब लिया. ट्विटर पर भी उन्होंने एक सोशल मिडिया इन्फ्लुयेशर्स को अपना प्रोडक्ट रिव्यु करने को बोला. यहाँ तक कि उन्होंने क्वेरा के श्रू अपने कस्टमर्स के सवालों के
जवाब भी दिए. यानि कुल मिलाकर उन्होंने ट्रैक्शन के लिए काफी अलग तरीके अपनाए लेकिन इससे
Unbounce को बहुत ज्यादा फायदा भी पहुंचा. अब बात करते है OkCupid की जो एक ऑनलाइन डेटिंग साईट है, इसकी अप्रोच Unbounce से कुछ डिफरेंट थी. उन्हें बिजनेस करते हुए 5 साल हो गए थे, तब जाकर उन्होंने अपनी साईट पर ब्लॉग पब्लिश करना स्टार्ट किया. हालाँकि Unbounce की तरह वो आये दिन ब्लॉग पोस्ट नहीं करते थे. OkCupid ज्यादा से ज्यादा डेटिंग पर एक लंबा पर इन्फोर्मेटिव ब्लॉग पब्लिश कर देता था और वो भी महीने में एक बार. और वो अपने ब्लॉग में वो सारा डेटा भी डालते थे जो उनकी साईट में available था.

और उनका यही तरीका लोगों को काफी पसंद आया था. लोगों को लगता था कि अगर कोई डेटिंग
वेबसाईट उन्हें डेटिंग की एडवाइज दे रही है तो वो काफी रिएलाबल होगी. क्योंकि OkCupid फ्री
वेबसाईट है तो वो अपने कस्टमर्स को साईन-अप करने के लिए चार्ज नहीं करते थे. इसलिए उनके
पास पेड एडवरटीज़मेंट का बजट नहीं था. लेकिन OkCupid के लिए ये कोई बड़ी प्रॉब्लम नहीं
थी. उनके ब्लॉग इंट्रेस्टिंग और रीफ्रेशिंग होते थे इसलिए कुछ ही टाइम बाद बड़े मिडिया आउटलेट
जैसे न्यू यॉर्क टाइम्स ने उनके ब्लॉग फीचर करने शुरू कर दिए और इस तरह सिर्फ गुड कंटेंट के दम पर OkCupid की कस्टमर ग्रोथ बढ़ती चली गई और उन्हें ज्यादा एफर्ट भी नहीं करना पड़ा. कंटेंट मार्केटिंग में कभी घबराना नहीं चाहिए. आप शायद ये सोचकर परेशान हो रहे होंगे कि शुरुवात कैसे की जाये या क्या लिखे जो लोगों को पंसद आये. इस सिचुएशन में ऑथर सलाह देते है कि शुरुआत में किसी भी एक टॉपिक पर फोकस करो. उन कॉमन प्रोब्लम्स के बारे में लिखो जो आपके टारगेट कस्टमर्स के माइंड में आ सकते है. कभी जल्दबाजी में मत लिखो. याद रखो, quantity से ज्यादा quality मैटर करती है.

यहाँ हम OkCupid का एक्जाम्पल ले सकते है. उन्होंने एक ब्लॉग पोस्ट लिखा था जिसका टाईटल
ET “Exactly what to Say in Your First Message” यानी अपने पहले मैसेज में असल में
आपको क्या कहना चाहिए. पढने में ये काफी कैची और इंट्रेस्टिंग लगता है और साथ ही इसमें प्रॉब्लम का
सोल्यूशन भी दिया गया है, तो इस तरह ये ब्लॉग लोगों को काफी पसंद आया. ठीक ऐसे ही आपके ब्लॉग का
कंटेंट भी कैची और इंट्रेस्टिंग होना चाहिए कि टाईटल पढ़ते ही लोग क्यूरियस हो जाए. साथ ही अपने ब्लॉग में इंफोग्राफिक यानी अपनी इनफार्मेशन या डेटा को दिखाने के लिए चार्ट या diagram भी यूज़ कीजिये, आपके कस्टमर्स ज्यादा attract होंगे. असल में Unbounce ने ये चीज़ नोटिस की थी कि उनके जिन ब्लॉग में इन्फोग्राफिक रहता था, उन्हें लोग नॉन इन्फोग्राफिक वाले ब्लॉग के मुकाबले ज्यादा शेयर करते थे. और सबसे जरूरी बात, सब्र रखिये, किसी भी बिजनेस को जमने में वक्त लगता है, धीरे-धीरे ही सही पर आपके कस्टमर्स जरूर बनेंगे, आपके ब्लॉग या इंफोग्राफिक चाहे कितने भी इम्प्रेसिव हो तो भी आपको तुरंत ट्रैक्शन नहीं मिलेगा. अपने ब्लॉग को बूस्ट करने के लिए लोगों को और कंपनियों को अप्रोच करे. बिना किसी झिझक के हर तरीके से अपने ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करने की कोशिश करें.

Conclusion
आपने इस समरी में सीखा कि ट्रैक्शन एक इंडिकेटर है कि आपकी स्टार्ट-अप कंपनी सक्सेसफुल हो रही है.
ट्रैक्शन आपके प्रोडक्ट या सर्विस के लिए एक ग्रोविंग कस्टमर डिमांड है. आपने ये भी सीखा कि ट्रैक्शन आपकी बिजनेस स्ट्रेटेजी में सबसे ऊपर आना चाहिए, कई सारे स्टार्ट-अप्स इसलिए फेल हो जाते है क्योंकि वो प्रोडक्ट launch होने के बाद मार्केटिंग पर ध्यान देते है. लेकिन अगर अपने स्टार्ट-अप को सक्सेसफुल बनाना है तो आपको ट्रैक्शन चैनल यूज़ करने होंगे. ट्रैक्शन चैनल वो अलग-अलग आउटलेट या ज़रिया है जो आपको ज्यादा से ज्यादा कस्टमर्स देते है. आपने बुल्सआई अप्रोच के बारे में भी पढ़ा. ये उन ट्रैक्शन चैनल्स को सिलेक्ट और चूज़ करने का तरीका है जो आप यूज़ करना चाहते हो. यानि इसके आउटर
रिंग वो चैनल है जो आप कंसीडर करते हो. मिडल रिंग यानी उन चैनल्स को सेलेक्ट करना जो आपको
सबसे ज्यादा promising लगे. इनर रिंग यानि जहाँ फाईनली आप डिसाइड करते हो कि अब आप कौन
से ट्रैक्शन चैनल्स यूज़ करोगे. बुल्सआई अप्रोच को कुछ इस तरह सम-अप कर सकते है: brainstorm,
prioritize, test it focus. आपने ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ी और क्रिटिकल पाथ के बारे में भी पढ़ा. ये दोनों बुल्सआई अप्रोच के बाद आते है.

ट्रैक्शन स्ट्रेटेज़ीज़ का मतलब है अपने ट्रैक्शन चैनल्स के बारे में स्पेशिफिक होना. वही दूसरी ओर क्रिटिकल पाथ आपको अपने गोल्स ट्रैक पर बने रहने में हेल्प करेगा. चाहे वो ट्रैक्शन गोल हो या फिर कंपनी के गोल. ये आपको एनकरेज करता रहेगा कि अपने plan को अमल में लाने से पहले हमेशा इवैल्यूएट करो. अक्सर plan और प्रायोरीटीज़ चेंज हो जाती है, लेकिन क्रिटिकल पाथ आपको इन
चेंजेस को समझने और उसी हिसाब से एक्शन लेने में हेल्प करता है. इंडस्ट्री चाहे कोई भी हो, लेकिन अगर सक्सेसफुल होना है तो काफी कुछ सीखना पड़ता है. इसलिए इस समरी में दिए टिप्स हमेशा याद रखिये. और सबसे इम्पोर्टेट बात ये कि ग्रो करने से डरिये मत. इंडस्ट्री में अपने हर मोमेंट को एक लर्निंग मोमेंट बना लीजिये. सक्सेस मिलने में टाइम लगता है लेकिन आपकी तमाम मेहनत और कोशिशो के बाद जब आपको सक्सेस मिलती है तो उसका मज़ा ही कुछ और होता है.

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