To Sell Is Human: The Surprising Truth About … Daniel H. Pink Books In Hindi Summary

To Sell Is Human: The Surprising Truth About … Daniel H. Pink इंट्रोडक्शन जब आप “सेल्स” या “बिक्री” शब्द सुनते हैं, तो आपके दिमाग में क्या आता हैं? सूट में एक आदमी की तस्वीर, हैं न? क्या ये एक कार सेल्समैन, बीमा एजेंट या रियल एस्टेट एजेंट हैं? क्या आप उन्हें जोर-जबरजस्ती करने वाले , अपनी बातें मनवाने वाले और परेशान करने वाले से जोड़कर देखते हैं? इस बुक में, डैनियल पिंक चर्चा करेंगे कि कैसे हम सब लोग भी सेल्समैन जैसे ही हैं. आप सीखेंगे कि दूसरों को असरदार ढंग से कैसे मनाया जाए. आप अपने आइडियाज़ को सही तरीके से बेचना सीखेंगे. सेल्समैन का नया जन्म अमेरिकी लेबर ब्यूरो के आंकड़ों के हिसाब से, 15 मिलियन अमेरिकी एम्पलॉईस कुछ न कुछ बेच रहे हैं. उनमें से कुछ सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव, रियल एस्टेट एजेंट, या कार डीलर जैसे काम करते हैं. आज इंटरनेट ने दुनिया को बहुत बदल दिया हैं लेकिन तब भी आंकड़े वहीं हैं. हर 9 में से 1 अमेरिकी आदमी सेल्समैन हैं. लेबर ब्यूरो ने ये भी भविष्यवाणी की थी कि 2020 तक 2 मिलियन सेल्स जॉब्स होंगी. दस बीच दनिया के दसरे हिस्सों में भी सेल्स में काम 14. LOZO 42 नासरस शासका. इस बीच, दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी सेल्स में काम करने वालों के नंबर बड़े. यूनाइटेड किंगडम में, 30 मिलियन कामकाज़ी लोगों में से, 3 मिलियन लोग सेल्स में लगे हैं. तो इसका मतलब हैं कि हर 10 में से 1 एम्प्लॉई सेल्स में काम कर रहा हैं. भारत और चाइना भी इसमें पीछे नहीं हैं. लाखों लोग मीडियम क्लास में जुड़ रहे हैं, इसलिए और ज़्यादा सेल्समैन की मांग हो रही हैं. मैकिन्से एंड कंपनी ने भविष्यवाणी की कि भारत के फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में 2020 में 300,000 से ज़्यादा मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव होंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा हैं कि हम में से हर कोई एक सेल्समैन हैं? हम जिन लोगों से रोज़ बात करते हैं, उनको मनाते हैं, समझाते हैं और अपने आइडियास बेचते हैं. हम अपने बातों और कामों से दूसरों को मनाते हैं.एग्जाम्पल के लिए एक डॉक्टर को लीजिए जो एक मरीज को किसी नुस्खे के लिए राज़ी करता हैं. एक वकील जो फैसले पर जूरी को मना लेता हैं. या एक टीचर जो स्टूडेंट को क्लास में ध्यान लगाने के लिए मनाता हैं. इस बुक के ऑथर डैनियल पिंक ने एक स्टडी की ताकि पता कर सकें कि क्या हम सभी सेल्समैन हैं या नहीं. हम “नॉन-सेल्स सेलिंग” में कितना वक्त और कोशिश लगा रहे हैं? नॉन-सेल्स सेलिंग का मतलब हैं लोगों को समझाना, मनाना और लोगों को बदलना, लेकिन इसमें न किसी चीज़ को खरीदा गया हो और न ही बेचा गया हो समझाना, मनाना और लोगों को बदलना, लेकिन इसमें न किसी चीज़ को खरीदा गया हो और न ही बेचा गया हो. इस स्टडी का नाम था- “आप अपने काम पर क्या करते हैं?” इस स्टडी में 7,000 फुल टाइम अमेरिकी वर्कर शामिल हैं. डैनियल पिंक को इस स्टडी से दो बातें पता चली. नंबर एक, लोग अपने काम के 40% घंटे नॉन-सेल्स सेलिंग पर खर्च करते हैं. ये बिना किसी चीज़ के खरीदे और बेचे ही सामने वाले को बदल देता हैं. नंबर दो, लोग कहते हैं कि नॉन-सेल्स सेलिंग उनके प्रोफेशनल कामयाबी के लिए ज़रूरी हैं. इन पार्टिसिपेंट्स ने इस स्टडी को ईमेल से, आमने-सामने बात करके और मीटिंग करके भाग लिया. “आप अपने काम पर क्या करते हैं?” स्टडी में कुछ और बात भी सामने आई. हां, हर 9 में से 1 अमेरिकी सेल्समैन है. लेकिन डेटा ये भी कहता हैं कि बाकी के 9 में से 8 अमेरिकी नॉन-सेल्स सेलिंग में शामिल हैं. हम सभी भी सेल्स में हैं. हम दूसरे लोगों पर अपना असर डालते हैं और उन्हें मनाते हैं. हर कोई एक सेल्समैन बन सकता हैं. डोर-टू-डोर सेलिंग, मेल ऑर्डर से लेकर इंटरनेट तक के आंकड़े बताते हैं कि बेचना इंसान के अंदर ही होता हैं. To Sell Is Human: The Surprising Truth About … Daniel H. Pink एंट्रेप्रेन्योरशिप, इलास्टिसिटी और एड-मेड पहले, सेल्स वालों और नॉन-सेल्स वाले लोगों के बीच फ़र्क साफ़ दिखाई देता था. कुछ लोग सामान बेचते थे, और कुछ सामान बनाते थे. हर कोई इस अरेंजमेंट से खुश था. लेकिन आजकल, एक बदलाव आया हैं. ज़्यादा से ज़्यादा लोग अपना खुद का बिज़नस शुरू करना और एंट्रेप्रेन्योर बनना चाहते हैं. हम खुद का प्रॉडक्ट बना रहे हैं और उन्हें बेच भी रहे हैं. इसलिए एंट्रेप्रेन्योर भी एक सेल्समैन हैं. हमने पाया कि बड़े ऑपरेशन चलाने वाली कंपनियों को सेल्स डिपार्टमेंट की ज़रूरत हैं. हरेक की नौकरी की ज़िम्मेदारी को साफ़-साफ़ बाँट दिया गया हैं. कंपनियों में स्पेशलाइजेशन होता हैं जहां किसी एक पोज़ीशन के लिए उनका काम तय हुआ होता हैं. लेकिन स्टार्ट-अप और छोटे बिज़नस में, फ्लेक्सिबिलिटी होता हैं. वहां लोगों के हुनर बँटे नहीं होते. वहां, एंट्रेप्रेन्योर ही मार्केटिंग एजेंट, एडवर्टाइज़र, सेल्समैन, मैन्युफैक्चरर, ह्यूमन रिसोर्स और बाकी सब खुद ही होते हैं. ये ब्रुकलिन ब्राइन की कहानी हैं. ये एक मालिक और दस एम्पलॉईस की कंपनी हैं. ये चौदह अलग-अलग सब्जियों के अचार बनाते हैं जिनका स्टोर बहुत ही हिट हैं. ब्रुकलिन ब्राइन के मालिक शामस जोन्स खुद को कैपिटलिस्ट नहीं मानते. वो पहले एक रेस्तरां में शेफ थे, लेकिन वो इससे खुश नहीं थे और इसलिए उन्होंने चीजों को अपने तरीके से करना शुरू कर दिया. शामस ने अपने खाली वक्त में सब्जियों का अचार बनाना शुरू किया. उन्होंने इस काम को तब तक करना जारी रखा जब तक उनका ये छोटा सा प्रोजेक्ट फुल टाइम जॉब नहीं बन गया. ब्रुकलिन ब्राइन के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल अब अमेरिका और एशिया के अलग-अलग रेस्तरां में किया जा रहा हैं. शामस अपना ज़्यादातर वक़्त प्रोडक्ट और लोगों को मैनेज करने में खर्च करते हैं. वो हफ्ते के सातों दिन, अपनी कंपनी की कहानी शेयर करने में, अलग-अलग रेस्तरां को अपने प्रॉडक्ट को इस्तेमाल करने के लिए मनाने में, अपने डिस्ट्रीब्यूटर से मिलने में, और भी बहुत कुछ करने में इस्तेमाल करते हैं. जब शामस ब्रुकलिन में अपने स्टोर पर वापस आते हैं, तो वो अपने एम्पलॉईस का हौसला बढ़ाते हैं और उन्हें इंस्पायर करते हैं. वो कहते थे, “मैं चाहता हूं कि मेरे सारे एम्पलॉई खुश रहें. मैं चाहता हूं कि वे एनर्जी और स्किल के साथ काम करें. शामस का कहना हैं कि वो पैसे तो कमाना चाहते हैं, लेकिन वो इसके लिए अपनी ईमानदार कंपनी के ईमानदार प्रॉडक्ट को लोगों के सामने रखना चाहते हैं. एक छोटे बिज़नस के मालिक के तौर पर शामस को सब कुछ करना चाहिए. इसमें दोनों सेल्स और नॉन-सेल्स शामिल हैं. उन्हें एक अल-राउंडर होना नॉन-सेल्स शामिल हैं. उन्हें एक अल-राउंडर होना चाहिए. उनकी कामयाबी का राज़ हैं उनका लचीलापन. ब्रुकलिन ब्राइन पर उन्हें बहुत गर्व हैं. आइए इस लचीलेपन के बारे में और बातें करें. यहां उन कंपनियों की कहानियां हैं जिनके पास सेल्स डिपार्टमेंट नहीं हैं. क्यों? क्योंकि हर एम्प्लॉई एक सेल्समैन ही होता हैं. इसके पीछे सोच ये हैं कि आप जो भी काम करते हैं, जो भी नौकरी करते हैं, आप कंपनी को रिप्रेजेंट करते हैं. और इसलिए, आप जो कुछ भी करेंगे वो आपके ऑर्गनाइज़ेशन का नाम बढ़ाएगा. एटलासियन (Atlassian) एक सॉफ्टवेयर एंटरप्राइज़ कम्पनी हैं. ये सरकार और बिज़नस वालों को उनके प्रोग्रेस को ट्रैक करने, प्रोजेक्ट्स को मैनेज करने और एम्पलॉईस के बीच को-ऑर्डिनेशन को बढ़ावा देने के लिए पैकेज देता हैं. एटलासियन के 53 देशों में 12,000 कस्टमर्स हैं. इनमें माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग और यूनाइटेड नेशंस मैन हैं. पिछले साल, एटलासियन की कमाई 100 मिलियन डॉलर था. ये बिना किसी एक भी सेल्समैन के हुआ था. माइक केनन-ब्रूक्स, सी ई ओ, का कहना हैं कि बात बहुत अजीब हैं लेकिन एटलासियन में हर कोई एक सेल्समैन हैं. एग्जाम्पल के लिए मान लीजिए कि कोई एक होने वाला कस्टमर, एटलासियन के प्रोडक्ट्स को try करने के लिए एटलासियन प्रोडक्ट्स को डाउनलोड करता हैं. कस्टमर को कुछ सवाल करना हो तो वे सपोर्ट स्टाफ से पूछेगे. एटलासियन एम्पलॉईस जो सपोर्ट देते हैं, वे आम पिछले साल, एटलासियन की कमाई 100 मिलियन डॉलर था. ये बिना किसी एक भी सेल्समैन के हुआ था. माइक केनन-ब्रूक्स, सी ई ओ, का कहना हैं कि बात बहुत अजीब हैं लेकिन एटलासियन में हर कोई एक ‘ सेल्समैन हैं. एग्जाम्पल के लिए मान लीजिए कि कोई एक होने वाला कस्टमर, एटलासियन के प्रोडक्ट्स को try करने के लिए एटलासियन प्रोडक्ट्स को डाउनलोड करता हैं. कस्टमर को कुछ सवाल करना हो तो वे सपोर्ट स्टाफ से पूछेगे. एटलासियन एम्पलॉईस जो सपोर्ट देते हैं, वे आम सेल्स वालों जैसे बिलकुल भी नहीं हैं. वे लंबे कमिटमेंट के लिए कस्टमर को छूट या डिस्काउंट देने की बात नहीं करते. एटलासियन सपोर्ट एम्पलॉईस सिर्फ सॉफ्टवेयर को समझने में कस्टमर्स की मदद करते हैं. उन्हें भरोसा हैं कि उनके असिस्टेंस की क्वालिटी और वैल्यू ही लोगों को इतनी तसल्ली देने के लिए काफी हैं कि वे उनका कस्टमर बन जाएंगे. यही बात एटलासियन इंजीनियरों के लिए भी लागू होता हैं. वे न सिर्फ एक अच्छा सॉफ्टवेयर बनाते हैं, बल्कि वे कस्टमर्स की जरूरतों को भी स्टडी करते हैं, समझने की कोशिश करते हैं कि उनके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कैसे किया जाता हैं, ताकि प्रोडक्ट्स को सबसे बेहतरीन ढंग से बनाया जा सकें. To Sell Is Human: The Surprising Truth About … Daniel H. Pink कैविट एम्प्टर से कैविट वेंडिटर तक आइए हम पहले इन लैटिन शब्दों को सिंपल बनाते हैं. कैविट एम्प्टर का मतलब होता हैं खरीदार सावधान, जबकि कैविट वेंडिटर का मतलब होता हैं बेचने वाले सावधान. एग्जाम्पल के लिए, यूस्ड कारों के बिज़नस में, ऐसा हमेशा लगता हैं कि खरीदने वाले से ज़्यादा बेचने वाले के पास जानकारी होता हैं. खरीदार खुद को अलग-थलग महसूस करता हैं. बेचने वाला पहले से इस्तेमाल हो चुके इन यूस्ड कार के बारे में सब कुछ नहीं बताते हैं. इस मामले में, खरीदार सावधान रहें, यानि कैविटी एम्प्टर की बात आती हैं. लेकिन डैनियल पिंक ने कहा कि दुनिया अब बदल गई हैं. खरीदार अब ऑनलाइन जा सकता हैं और इस्तेमाल की गई कारों में भी वो खरीद सकता हैं जो उसे पसंद हैं. वो अब बेचने वाले यानि सेलर के बारे में रिसर्च कर सकता हैं और रिव्यु पढ़ सकता हैं. अगर किसी खरीदार यानि बायर का किसी सेलर से खरीदारी के बाद का एक्सपीरियंस बुरा रहा, तो वो इसके बारे में अपने फेसबुक, ट्विटर या ब्लॉग पर लिख सकता हैं. अब आप देखिए कि बायर से अब सेलर को सावधान रहने तक कैसे बात बदल सकती हैं. सेलर को अपने जाने TOTT रहने तक कैसे बात बदल सकती हैं. सेलर को अपने वादे पुरे करने होते हैं, कस्टमर्स की तसल्ली का ध्यान रखना होता हैं और बायर के लिए वाकई में चिंता करना होता हैं. अगर नहीं, तो सेलर को नेगेटिव रिव्यु और खराब रेपुटेशन का सामना करना पड़ता हैं. ईमानदार सर्विस देने के अलावा कामयाब होने का कोई और तरीका नहीं हैं. पहले सेलर के पास ज़्यादा इनफार्मेशन होता था, अब हालात बदलकर ऐसे हो गए हैं जहाँ बायर के पास ज़्यादा से ज़्यादा इनफार्मेशन पहुंच गई हैं और वे समझदार और ताकतवर बन गए हैं. बायर सावधान रहें, और सेलर सावधान रहें अब दोनों एक साथ हो सकता इस कहानी को सुनते हैं. एक शनिवार, डैनियल पिंक ने यूस्ड कारों को बेचने वाले दो स्टोरों का दौरा किया. उनमें से एक एस के मोटर्स, लैंहम, मैरीलैंड में हैं. इसके मालिक स्टीव केम्प थे. स्टीव एक हंसमुख शख्स थे, और एस के मोटर्स पुराने जमाने की जगह हैं. इसमें पचास यूस्ड कार रखे हुए थे. शनिवार की सुबह, एक बाप-बेटे की जोड़ी, कुछ यूस्ड कार देखने आते हैं. बेटा निसान अल्टिमा ख़रीदना चाहता हैं, उसकी कीमत 16,500 डॉलर है जो वो afford नहीं कर सकता. इसलिए, वो इसके बजाय फोर्ड एस्कॉर्ट का टेस्ट ड्राइव करता है. उसके बाद, बेटा क्रेडिट एप्लीकेशन के लिए ऑफिस में जाता हैं. वहां ये पता चलता हैं कि एस के मोटर्स के पास सिर्फ दो कंप्यटर हैं. उनमें एक स्टीव के उसके बाद, बेटा क्रेडिट एप्लीकेशन के लिए ऑफिस में जाता हैं. वहां ये पता चलता हैं कि एस के मोटर्स के पास सिर्फ दो कंप्यूटर हैं. उनमें से एक स्टीव के ऑफिस में है. स्टीव को पता चला कि बेटे के पास पहले से ही कुछ कारें हैं जिनके पूरे पैसे वो दे नहीं पाया था. बेटे के पास पहले से ही एक कार थी जिसे एस के मोटर्स ने पैसे पुरे न देने की वजह से वापस ले ली थी. अब, स्टीव उसे लोन का ऑफर देने के लिए तैयार थे. ऑफर था लोन 24% इंट्रेस्ट रेट पर देना, लेकिन शर्त थी कि कार में एक ट्रैकिंग डिवाइस लगा दिया जाएगा और 1,500 डॉलर का डाउन पेमेंट भी देना होगा. बाप-बेटे की वो जोड़ी इन शर्तों को मानने से इंकार कर देते हैं और वहां से चले जाते हैं. एस के मोटर्स उस दिन दो यूस्ड कारों को दो कस्टमर्स को बेच पाते हैं. बस शनिवार के लिए उनकी यही सेल्स थी. डैनियल पिंक ने कारमैक्स (CarMax) नाम के दूसरे यूस्ड कार की दुकान का दौरा किया. ये रॉकविल, मैरीलैंड में हैं. ये एस के मोटर्स से तीस मील दूर हैं. कारमैक्स में एस के मोटर्स के मुकाबले सेल्स के लिए ज़्यादा कारें थे. यहाँ लोगों को दिखाने के लिए और उनके मनचाही कार खोजने में मदद करने के लिए अलग-अलग सेक्शन बने थे. कारमैक्स के मैन ऑफिस में, दो दर्जन डेस्क और चालीस सेल्समैन थे. वो जगह कस्टमर्स से भरा हुआ था. लेकिन एस के मोटर्स और कारमैक्स के बीच का चालीस सेल्समैन थे. वो जगह कस्टमर्स से भरा हुआ था, लेकिन एस के मोटर्स और कारमैक्स के बीच का अंतर उसका साइज़ में अंतर नहीं हैं. ये शोर मचाने के बारे में भी नहीं हैं. दोनों में फ़र्क है इनफार्मेशन का. एस के मोटर में, कस्टमर्स ने आने से पहले कोई रिसर्च नहीं किया. वे वहां सिर्फ टेस्ट ड्राइव के लिए आते हैं और मोल-भाव करते हैं. लेकिन कारमैक्स में, कस्टमर्स के पास सारे इनफार्मेशन होते हैं. वे पहले से ही अपने घर पर किए हुए रिसर्च का प्रिंटआउट लेकर आते हैं. उनकी रिसर्च कीमत, कार की क्वालिटी, और डील्स के बारे में होती हैं. दूसरे कस्टमर अपने फोन या आईपैड से इसके बारे में पढ़ते हैं. कारमैक्स ने कस्टमर्स के इस्तेमाल के लिए कुछ कंप्यूटर भी रखे हुए हैं. कारमैक्स 1993 के आसपास से हैं और ये एक फॉर्म्यन 500 कंपनी हैं. ये हर साल 400,000 से ज़्यादा कारें बेचता हैं, जिसमें 9 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की कमाई हैं. ये बात एस के मोटर्स में अलग हैं. यहाँ बायर सावधान रहे प्रिंसिपल का इस्तेमाल होता हैं जबकी कारमैक्स का प्रिंसिपल हैं, बायर सावधान और सेलर सावधान, दोनों बातें लागू होते हैं. कारमैक्स में, कस्टमर्स अब कीमत को लेकर लड़ते नहीं हैं. इसके अलावा, यहाँ सेल्स के लोग टाई नही बांधते. वे कंपनी के लोगो वाले पोलो शर्ट पहनते हैं. उनकी सैलरी कमीशन पर होता हैं, फिर चाहे वो सस्ती कार बेचे या महंगी, उन्हें उतने ही पैसे मिलते हैं. इसलिए, कारमैक्स में सेल्स के लोग कस्टमर्स को कोई ज़बरजस्ती नहीं करते. वे हर कार के साथ गारंटी, DA८ घर पर किए हुए रिसर्च का प्रिंटआउट लेकर आते हैं. उनकी रिसर्च कीमत, कार की क्वालिटी, और डील्स के बारे में होती हैं. दूसरे कस्टमर अपने फोन या आईपैड से इसके बारे में पढ़ते हैं. कारमैक्स ने कस्टमर्स के इस्तेमाल के लिए कुछ कंप्यूटर भी रखे हुए हैं. कारमैक्स 1993 के आसपास से हैं और ये एक फॉर्म्युन 500 कंपनी हैं. ये हर साल 400,000 से ज़्यादा कारें बेचता हैं, जिसमें 9 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की कमाई हैं. ये बात एस के मोटर्स में अलग हैं. यहाँ बायर सावधान रहे प्रिंसिपल का इस्तेमाल होता हैं जबकी कारमैक्स का प्रिंसिपल हैं, बायर सावधान और सेलर सावधान, दोनों बातें लागू होते हैं. कारमैक्स में, कस्टमर्स अब कीमत को लेकर लड़ते नहीं हैं. इसके अलावा, यहाँ सेल्स के लोग टाई नही बांधते. वे कंपनी के लोगो वाले पोलो शर्ट पहनते हैं. उनकी सैलरी कमीशन पर होता हैं, फिर चाहे वो सस्ती कार बेचे या महंगी, उन्हें उतने ही पैसे मिलते हैं. इसलिए, कारमैक्स में सेल्स के लोग कस्टमर्स को कोई ज़बरजस्ती नहीं करते. वे हर कार के साथ गारंटी, वे वारंटी और सर्टिफिकेट देते हैं. कारमैक्स एक कामयाब कम्पनी हैं क्योंकि वो कस्टमर्स को ईमानदार सर्विस और कीमती इनफार्मेशन देते हैं. दोनों बायर और सेलर के पास ज़रूरी इनफार्मेशन होते हैं, इसलिए दोनों साइड को तसल्ली मिलती हैं. A < b.जाप उस रात कापस जापफ सायफncषल और ओपन बना सकते हैं? जिम कॉलिन्स के पास एक बढ़िया सुझाव हैं. वे सबसे ज्यादा बिकने वाली बुक- गुड टू ग्रेट के ऑथर हैं. जिम बातचीत शुरू करने के लिए कहते हैं, “आप कहाँ से हैं?” अब, सामने वाला इस सवाल का कई तरीकों से जवाब दे सकता हैं. वो अपने अतीत के बारे में ऐसा कह सकता हैं, जैसे “मैं बर्लिन में बड़ा हुआ हूँ.” या उस कंपनी के बारे में बात कर सकता हैं जहाँ वो काम करता हैं, जैसे कि “मैं चिबा कोग्यो बैंक से हूं.” लोग अक्सर किसी पार्टी में, या किसी से मिलने पर सवाल पूछते हैं, “आप क्या करते हैं?” आप देखेंगे कि कोई-कोई इस सवाल से कैसे बेचैन हो जाता हैं. क्या होगा अगर वो शख्स नौकरी से खुश नहीं हैं या फिर अभी अपनी जिंदगी से खुश नहीं हैं? क्या पता उसे डर हैं कि सामने वाला उसके बारे में नजाने क्या राय बनाए. इसलिए जिम कॉलिन्स कहना पसंद करते हैं “आप कहां से हैं?” आप भी इसी बात से बातचीत शुरू कर सकते हैं. ये सवाल लोगों को और भी दूसरे चीज़ों के बारे में खुलकर बात करने के लिए मनवाता हैं. Attunement प्रैक्टिस का एक और तरीका हैं. स्ट्रेटेजिक मिमिक्री की ताकत का इस्तेमाल कीजिए. इसका आसान मतलब हैं कि आप जिससे बात कर रहे हैं, उसके बातों और एक्शन को कॉपी करना. सबसे पहला कदम हैं, ध्यान से देखना. अगला क्या कर रहा हैं? कैसे बैठता हैं? क्या उसने पैर क्रॉस किए हैं? क्या तोळे टाका टया हैं? त्गा तो नेत नोलना हैं गा b.जाप उस रात कापस जापफ सायफncषल और ओपन बना सकते हैं? जिम कॉलिन्स के पास एक बढ़िया सुझाव हैं. वे सबसे ज्यादा बिकने वाली बुक- गुड टू ग्रेट के ऑथर हैं. जिम बातचीत शुरू करने के लिए कहते हैं, “आप कहाँ से हैं?” अब, सामने वाला इस सवाल का कई तरीकों से जवाब दे सकता हैं. वो अपने अतीत के बारे में ऐसा कह सकता हैं, जैसे “मैं बर्लिन में बड़ा हुआ हूँ.” या उस कंपनी के बारे में बात कर सकता हैं जहाँ वो काम करता हैं, जैसे कि “मैं चिबा कोग्यो बैंक से हूं.” लोग अक्सर किसी पार्टी में, या किसी से मिलने पर सवाल पूछते हैं, “आप क्या करते हैं?” आप देखेंगे कि कोई-कोई इस सवाल से कैसे बेचैन हो जाता हैं. क्या होगा अगर वो शख्स नौकरी से खुश नहीं हैं या फिर अभी अपनी जिंदगी से खुश नहीं हैं? क्या पता उसे डर हैं कि सामने वाला उसके बारे में नजाने क्या राय बनाए. इसलिए जिम कॉलिन्स कहना पसंद करते हैं “आप कहां से हैं?” आप भी इसी बात से बातचीत शुरू कर सकते हैं. ये सवाल लोगों को और भी दूसरे चीज़ों के बारे में खुलकर बात करने के लिए मनवाता हैं. Attunement प्रैक्टिस का एक और तरीका हैं. स्ट्रेटेजिक मिमिक्री की ताकत का इस्तेमाल कीजिए. इसका आसान मतलब हैं कि आप जिससे बात कर रहे हैं, उसके बातों और एक्शन को कॉपी करना. सबसे पहला कदम हैं, ध्यान से देखना. अगला क्या कर रहा हैं? कैसे बैठता हैं? क्या उसने पैर क्रॉस किए हैं? क्या तोळे टाका टया हैं? त्गा तो नेत नोलना हैं गा हैं? कैसे बैठता हैं? क्या उसने पैर क्रॉस किए हैं? क्या वो पीछे झुका हुआ हैं? क्या वो तेज बोलता हैं या धीमा? वो कौन-से शब्द बार-बार बोलता हैं? अगला कदम हैं इंतजार करना. वो शख्स जिस तरह बात करता हैं और जो भी करता हैं, उसे कॉपी कीजिए. लेकिन अपनी मिमिक्री में नेचुरल रहिए ताकि वो शख्स खुश हो और नाराज न हो. क्या होगा अगर आप जिस शख्स के attunement करने की कोशिश कर रहे हैं, वो अगर कमरे में नहीं हो तो? क्या होगा अगर वे आपके ऑडियंस या कस्टमर हैं? आपके लिए जेफ बेजोस खुद टिप्स लेकर आए हैं. वो अमेज़न के फाउंडर हैं और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं. यहाँ ज़ेफ़ के कामयाबी के राज के बारे में बातें करेंगे. अपने सीनियर एक्सेक्यूटिव्स के साथ मीटिंग में, ज़ेफ़ बेजोस हमेशा एक खाली चेयर रखने के लिए कहते हैं. वो चेयर अमेज़न कस्टमर्स के नाम का रखा जाता हैं जिनकी वैल्यू वहां सबसे ज़्यादा हैं. ये attunement टिप हैं जिसे ‘Pull up a chair’ कहा जाता हैं. खाली चेयर सिएटल में अमेजन के हेडक्वार्टर्स में एक बहुत बड़ी बात हैं. इस चेयर को देखकर, वहां कस्टमर्स को सबसे ज़्यादा प्रायोरिटी दिया जाता हैं. आप भी अपने कस्टमर्स, स्टूडेंट्स, ऑडियंस के साथ जुड़ने के लिए यही ‘Pull up a chair’ टेक्निक का यूज़ कीजिए. To Sell Is Human: The Surprising Truth About … Daniel H. Pink Buoyancy Buoyancy का मतलब हैं तैरना, हंसमुख होना, केयरफ्री होना, लचीला होना. दूसरों पर असर डालने के लिए ये एक ज़रूरी कदम हैं. यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं कि आप कैसे इस buoyancy को अपना सकते हैं. इमेजिन कीजिए कि आप अपने एक दोस्त से बात कर रहे हैं, किसी कस्टमर को कुछ बेचने या किसी को मनाने की कोशिश कर रहे हैं. फिर चाहे आप अपने बच्चे को दाँत ब्रश करना सिखा रहे हों, या अपने फैमिली के साथ रात के खाने का प्लान बना रहे हों, इन सबको नॉन-सेल्स सेल्लिंग कहते हैं. इनमें आप अपने विचारों को दूसरे लोगों को बेच रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि आप कामयाब होंगे. Buoyancy नंबर वन का टिप हैं- interrogative सेल्फ-टॉक प्रैक्टिस कीजिए. इसका मतलब हैं खुद से जब बात करें तो सिर्फ ऐसे सवाल करें जैसे- ” क्या मैं इन लोगों को बदल सकता हूं?” ये declarative सेल्फ-टॉक से अलग हैं क्योंकि इसमें आप किसी बात को कहने के बजाय सवाल करते हैं. “क्या मैं इन लोगों को बदल सकता हूं?” पूछने पर आपको इन सवालों का जवाब भी देना पड़ता हैं. अपने आप से कहिए, “हाँ, आप लोगों को बदल सकते हैं.” ॥ । Tी. में पाया निशानों। आप से कहिए, “हाँ, आप लोगों को बदल सकते हैं.” पाँच चीज़ों की लिस्ट बनाइए कि आप ऐसा क्यों और कैसे कर सकते हैं. ये स्ट्रेटेजी आपके कॉन्फिडेंस और सेल्फ-एस्टीम को बढ़ाएगी. दूसरा buoyancy टिप हैं ग्लास को आधा भरा हुआ देखना. हर दिन, आप दूसरों को बदलने की कोशिश करते हैं जिसमें आप नाकाम भी हो सकते हैं. आप इस नाकामी से भाग नहीं सकते. लेकिन, इससे आप अपने परफॉरमेंस लेवल को बढ़ा सकते हैं. अपने आप से ये तीन सवाल पूछिए और उन कारणों के बारे में सोचिए जिनके कारण आपको ‘ना’ सुनना पड़ा. अपनी नाकामी को ध्यान में रखते हुए, खुद से पूछिए “क्या ये परमनेंट हैं?” ” क्या ये पर्सनल हैं?” यहाँ सही जवाब हैं “नहीं, मैं आज ढीला पड़ गया था क्योंकि मेरी नींद पूरी नहीं हुई थी”. “नहीं, वैसे हर कोई बुरा नहीं होता, वो आदमी ही बेकार था.” “नहीं, मेरा प्रेजेंटेशन अच्छा था, क्लाइंट ने पर्सनल कारणों के वजह से इनकार कर दिया होगा.” आपको ये सोचना होगा कि बुरी घटनाएँ टेम्पररी होते हैं. ये गुज़र ही जाएगा. ज़रूरी नहीं कि ऐसी घटना फिर से हो या हर शख्स वैसा ही निकले. ये सोचिए कि ये प्रॉब्लम आपके बारे में नहीं हैं. अगर आप हर दिन खुद को ये याद दिलाएंगे तो आप किसी भी चुनौती या प्रॉब्लम का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे. अगली buoyancy की टिप को enumerate and embrace strategy कहा जाता हैं. . II अगली buoyancy की टिप को enumerate and embrace strategy कहा जाता हैं. आपको जितने भी नाकामी मिले हैं, उसे गिनिए. एक हफ्ते में आपको जितने ‘ना’ सुनने को मिले, उसकी लिस्ट बनाकर एक नोटबुक में या अपने फ़ोन में संभालकर कर रखें. हफ्ते के आखिर में, इस लिस्ट को देखकर आपको हैरानी होगी कि आपको दूसरों से कितने “ना” मिले हैं. लेकिन क्या आपको एक बात का एहसास हैं? आप अभी भी यहाँ हो. आप अभी भी ज़िंदा हैं और सांस ले रहे हैं. जे गोल्डबर्ग की इस कहानी को सुनिए. वो बर्गिनो बेसबॉल क्लबहाउस के फाउंडर हैं. ये न्यूयॉर्क का एक आर्ट गैलरी और मेमोरिबिलिया स्टोर हैं. जे एक मशहूर पोलिटिकल कंसलटेंट के लिए काम करते थे, लेकिन वो असल में मेजर लीग बेसबॉल के लिए काम करना चाहते थे. इसलिए, जे ने मेजर लीग की सभी 26 टीमों को लेटर भेजा जिसमें उन्होंने किसी भी तरह की नौकरी, इंटरव्यू या इंटर्नशिप के बारे में पूछा. इनमें से 25 टीमों ने उन्हें इंकार लेटर भेजा. ध्यान दीजिए कि एक टीम- न्यूयॉर्क यांकीज़ ने कभी भी उनका जवाब नहीं दिया. जे गोल्डबर्ग ने हार नहीं मानी. वो अभी भी मेजर लीग बेसबॉल की दुनिया में काम करना चाहते थे. 1990 के दशक तक, जे ने अपनी स्पोर्ट्स एजेंसी शुरू की. उन्होंने अपने ऑफिस की दीवार पर उन सभी लेटर्स को टांगा जिसमें उन्हें इंकार किया गया था. उन्होंने ऐसा सबके ‘ना’ को स्वीकार करने के लिए किया था. ये A < को देखकर आपको हैरानी होगी कि आपको दूसरों से कितने “ना” मिले हैं. लेकिन क्या आपको एक बात का एहसास हैं? आप अभी भी यहाँ हो. आप अभी भी ज़िंदा हैं और सांस ले रहे हैं. जे गोल्डबर्ग की इस कहानी को सुनिए. वो बर्गिनो बेसबॉल क्लबहाउस के फाउंडर हैं. ये न्यूयॉर्क का एक आर्ट गैलरी और मेमोरिबिलिया स्टोर हैं. जे एक मशहूर पोलिटिकल कंसलटेंट के लिए काम करते थे, लेकिन वो असल में मेजर लीग बेसबॉल के लिए काम करना चाहते थे. इसलिए, जे ने मेजर लीग की सभी 26 टीमों को लेटर भेजा जिसमें उन्होंने किसी भी तरह की नौकरी, इंटरव्यू या इंटर्नशिप के बारे में पूछा. इनमें से 25 टीमों ने उन्हें इंकार लेटर भेजा, ध्यान दीजिए कि एक टीम- न्यूयॉर्क यांकीज़ ने कभी भी उनका जवाब नहीं दिया. जे गोल्डबर्ग ने हार नहीं मानी. वो अभी भी मेजर लीग बेसबॉल की दुनिया में काम करना चाहते थे. 1990 के दशक तक, जे ने अपनी स्पोर्ट्स एजेंसी शुरू की. उन्होंने अपने ऑफिस की दीवार पर उन सभी लेटर्स को टांगा जिसमें उन्हें इंकार किया गया था. उन्होंने ऐसा सबके ‘ना’ को स्वीकार करने के लिए किया था. ये लेटर्स हमेशा कोशिश करते रहने की हिम्मत देते थे. जे का मानना हैं कि कामयाबी इस बात पर मिलती हैं कि आप अपनी जिंदगी कि नाकामियों को कैसे देखते हैं. To Sell Is Human: The Surprising Truth About … Daniel H. Pink Clarity क्लैरिटी का मतलब हैं, सिंपल, क्लियर, सटीक, जागना और होंच-पोंच से निकलकर अपना रास्ता बनाना, क्या आप जानते हैं कि एक छोटा बच्चा हर वक्त “क्यों” पूछता हैं? ऐसा इसलिए हैं क्योंकि वो अपने आसपास की बड़ी दुनिया के बारे में अपनी समझ बना रहा होता हैं. और ये उस बच्चे के बड़ो का काम हैं कि वे उसे क्लैरिटी ढूंढ़ने में मदद करें. आईडीओ, एक अवार्ड विनिंग डिज़ाइन और इनोवेशन कंपनी हैं जिसकी शुरुवात डेविड केली ने की थी. वो क्रिएटिव कॉन्फिडेंस नाम के बुक के ऑथर भी हैं. आईडीओ के एम्पलॉईस डिजाइन से जुडी किसी भी प्रॉब्लम को हल करते वक्त ” Five Whys” टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं. ये ठीक वैसा ही हैं जैसे बच्चे सवाल पूछते हैं. वे पांच बार ‘क्यों पूछते हैं और जब तक उन्हें उसके जवाब से तसल्ली नहीं मिलती, वे गहराई में जांच करते जाते हैं. या फिर जब तक उनके पास उनके प्रॉब्लम का जवाब नहीं मिल जाता. आईडीओ का कहना हैं कि ” सततल्या नही मिलता, पहरामजापपरत जात हैं. या फिर जब तक उनके पास उनके प्रॉब्लम का जवाब नहीं मिल जाता. आईडीओ का कहना हैं कि ‘ Five Whys” छिपे हुई प्रॉब्लम को भी बाहर लाता हैं जैसे कि बिहेवियर या आदत और उसके कारण होने वाले प्रॉब्लम. क्लैरिटी ढूंढ़ने में ” Five Whys” एक असरदार तरीका साबित होता हैं. यहाँ एक और टेक्निक हैं. इसे ‘1 % ‘ कहते हैं. डैनियल पिंक ने लॉ स्कूल से पढ़ाई की थी. उन्होंने इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन का कोर्स किया. प्रोफेसर का नाम हेरोल्ड कोह (Harold Koh) हैं. उन्हें अपने कोर्स के बारे में कुछ याद नहीं था सिवाय प्रोफेसर के बताई गई इस एक टेक्निक को छोड़कर. इस टेक्निक को ‘1 % ‘ कहते हैं. अगर कोई कानूनी पढ़ाई या कोई भी टॉपिक मुश्किल लगता हैं, तो उस ‘] % ‘ पर ही अपना फोकस रखिए जो उस टॉपिक का सार हैं, उसका निचोड़ हैं. जब आपके पास वो 1% सार होगा, तो आपको बाकी के 99% की याद आ जाएगी. यही 1% अच्छे वकीलों और इन्फ्लुएंसर्स की कामयाबी का राज़ हैं. अगर आप कोई सामान बेच रहे हैं या अपने बच्चे को कुछ सिखाने की कोशिश कर रहे हैं, तो ये सवाल पूछिए कि यहां ” 7% क्या हैं?” उसके जवाब में ही आपको क्लैरिटी मिलेगी. इसी से आप किसी को भी पूछिएक पहा 170 क्या ह! उसका जवाब महा आपको क्लैरिटी मिलेगी. इसी से आप किसी को भी मना सकते हैं और अपना आइडिया बेच सकते हैं. कन्क्लूज़न आपने सीखा कि हम सब एक सेल्समैन हैं. यहां तक कि अगर कोई खरीदारी शामिल न हो तो भी हमारा जिन लोगों से रोज़ सामना होता हैं, उन्हें हम अपने विचारों को बेचते हैं. आपने एंट्रेप्रेन्योरशिप और इलास्टिसिटी के बारे में सीखा. छोटे बिज़नस में, एक एंट्रेप्रेन्योर भी एक सेल्समेन हैं. कुछ कंपनियों में, सेल्स डिपार्टमेंट के न होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता. क्यों? ऐसा इसलिए हैं क्योंकि यहाँ के कस्टमर सपोर्ट और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सर्विस से कम्पनी को रिप्रेजेंट करते हैं और बताते हैं कि कम्पनी कस्टमर्स को कितना ईमानदार सर्विस दे सकते हैं. आपने बायर सावधान और सेलर सावधान दोनों के बारे में भी सीखा. एक बिज़नस के कामयाबी के लिए, बायर और सेलर दोनों के पास जानकारी होनी चाहिए. आखिर में, आपने दूसरों को बदलने के ABC के बारे में सीखा. ये हैं Attunement, Buoyancy, और Clarity. अब आप जानते हैं कि आप दूसरे लोगों को कैसे राजी आपने एंट्रेप्रेन्योरशिप और इलास्टिसिटी के बारे में सीखा. छोटे बिज़नस में, एक एंट्रेप्रेन्योर भी एक सेल्समेन हैं. कुछ कंपनियों में, सेल्स डिपार्टमेंट के न होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता. क्यों? ऐसा इसलिए हैं क्योंकि यहाँ के कस्टमर सपोर्ट और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सर्विस से कम्पनी को रिप्रेजेंट करते हैं और बताते हैं कि कम्पनी कस्टमर्स को कितना ईमानदार सर्विस दे सकते हैं. आपने बायर सावधान और सेलर सावधान दोनों के बारे में भी सीखा. एक बिज़नस के कामयाबी के लिए, बायर और सेलर दोनों के पास जानकारी होनी चाहिए. आखिर में, आपने दूसरों को बदलने के ABC के बारे में सीखा. ये हैं Attunement, Buoyancy, और Clarity. अब आप जानते हैं कि आप दूसरे लोगों को कैसे राजी कर सकते हैं, मना सकते हैं, उन पर असर डाल सकते हैं और उन्हें बदल सकते हैं. आप अपने फैमिली, दोस्तों, कलीग्स के लिए इन प्रिंसिपल का इस्तेमाल कर सकते हैं, भरोसा कीजिए कि आप ऐसा कर पाएंगे क्योंकि कोई भी सेल्समैन बन सकता है.

Leave a Reply