The Wright Way: 7 Problem-Solving Princi… Mark Eppler Books In Hindi Summary

The Wright Way:
7 Problem-Solving Princi…
Mark Eppler
Introduction
इंट्रोडक्शन
अपने आप को 1903 में (Imagine) कल्पना कीजिए जहाँ कोई एयरप्लेन, स्मार्ट फोन , इंटरनेट नहीं था । कैसे साइकिल बनाने वाले दो भाई जों एक (christian bishop) ईसाई बिसोप के बेटे थे, उन्होने वो चीज कर डाली जो उस समय तक कोई नहीं कर पाया? कैसे 17 दिसंबर, 1903 का वो महत्वपूर्ण दिन को राइट ब्रदर्स ने उड़ान भरी? आखिरकार कैसे वो एक इंसान को उड़ाने में सफल हुए? इस किताब मे आप राइट ब्रदर्स के बारे में जानेंगे। उनके पूरा जर्नी के बारे में जानेंगे। आप जानेंगे कि कैसे वो दोनों इतिहास में पहली बार किसी इंसान को उड़ाने में सफल हुए। क्या है उनके सीक्रेट? क्या चीजें उन्हें सबसे अलग बनाता है?
आप 7 प्रॉब्लम सॉल्व करने (wale)वाला प्रिंसिपल्स के बारे में जानेंगे जो राइट ब्रदर्स ने अप्लाई किये था ।
बह अपके किसी भी प्रॉब्लम को सॉल्व करने में आपका काम आयेगा चाहे वो प्रॉब्लम आपके (personal
life)
निजी जिंदगी, काम ,स्कूल या बिजनेस की ही क्यूं ना हो। राइट ब्रदर्स बस एक छोटे से शहर के लोग थे। वो दोनों हाई स्कूल की पढ़ाई भी ख़त्म नहीं कर पाए। लेकिन उन्होंने मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन हासिल किया। राइट ब्रदर्स ने ये किया था उस 7 प्रिंसिपल्स के मदद से। तो अब समय हैं कि आप भी उन सात प्रिसिपल के बारे में जाने।

The event of century
द इवेंट ऑफ द सेंचरी

8 दिसंबर, 1903 में न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपने एडिटोरियल में लिखा कि इंसान को लेकर उड़ने वाला
एयरप्लेन बनाने में इंजीनियरो को काम से कम 10 लाख साल लगेंगे। लेकिन कुछ ही दिन बाद डेटोन,
ओहायो के रहने वाले दो भाई ने ये करके दिखाया। कैरो लाईना के किल डेविल्स हिल में उन्होंने अपने
हवाई जहाज के साथ उड़ान भरी। बड़े भाई प्लेन में सवार थे और छोटा भाई रनवे में खड़ा होकर इस उड़ान
पे नज़र रख रहा था। ये 17 दिसंबर, 1903 था राइट ब्रदर्स ने उस सुबह चार बार कोशिश की लेकिन वो सफल नही हुए। उन्हें हेल्प मिल रही था उनके अनोखे ग्राउंड क्रू से । इंसान का हवाईजहाज मै पहला उड़ान देखने के लिए वहां मौजूद थे एक लकड़ी का व्यापारी, तीन सर्फ मेन और एक 17 साल का लड़का। राइट ब्रदर्स जो कर रहे थे उसे लेकर बे सब बहुत उत्सुक थे। अपने पांचवे प्रयास में विलबर और ऑर्विल अपने पहला उड़ान भरने में सफल हुए। उन तीन सर्फ मैन में से एक जॉन डेनिएल्स को ऑर्विल ने एक फोटो खींचने के लिए बोला था। ये उस ऐतिहासिक पल का लिया गया एकमात्र फोटो था। इसके बाद सब अपने कैंप में वापस चले गए।

उन सबको उड़ान देखने के बाद अपने आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। वे पहाड़ों को पार कर गए इस
खबर को सबके पास पहुँचाने के लिए। जॉन डेनिएल्स को इस बात का चिंता हो रही थी कि उसने ठीक समय
पे तस्वीर लिया था कि नहीं। ज़ाहिर है उसने ली थी यह तस्वीर इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीरों में से एक बन गयी। राइट ब्रदर्स को बहुत भूख लगी था। उन्होंने कैंप में अच्छी तरह से खाना खा कर थोड़ा आराम किया। ये लग रहा था कि उनके ग्राउंड क्रू उनसे भी ज्यादा उत्तेजित थे। बाद में एक इंटरव्यू में विल्बर राइट ने
बोला कि वो और उनके भाई ने अपने कल्पना मै कई बार उनके बनाए हुए हवाईजहाज मै उड़ान भर चुके हैं,
इसीलिए ये उन दोनों के लिए बस और एक उड़ान की तरह ही थी।

The Wright Way:
7 Problem-Solving Princi… Mark Eppler Forging :The Principle of Constructive Conflict

फॉर्जिंग एक ऐसी प्रोसेस है जिससे लौहार तलवार बनाता है। बह एक मेटल को आग में रखके बार बार
हथौड़े से पीटता हैं और मोड़ता हैं। यही चीज तलवार को मजबूत बनाता है। इसी तरह जब कोई आइडिया को लेकर डिबेट किया जाए यानी आग में रखा जाए, हथौड़े से पीटा जाए यानी लगातार उसको चैलेंज किया जाए तो बह आइडिया शक्तिशाली बन जाता है। वह सच के करीब पहुँच जाता है। यही चीज राइट ब्रदर्स ने अपने आइडिया के साथ की थी। जब वे इस पर डिबेट करते हैं, तो वे उस उत्तर के थोड़ा और करीब पहुँच जाते हैं जिसे वो ढूढ रहे हैं । कंस्ट्रक्टिव कॉन्फ्लिक्ट (constructive conflict) डिबेट का ही रूप है। जब राइट ब्रदर्स किसी आइडिया पर बात करते थे तो एसा लगता था कि बे लड़ रहे है, लेकिन ऐसे ही बे अपने रास्ते में आने वाले प्रॉब्लम को सॉल्व करते थे। ये 1900 के गर्मियों का समय है। राइट ब्रदर्स डेटन, ओहायो में अपने साइकिल के दकान में है। वे अपने दुकान के सारे खिड़की और दरवाजे खोल देते है ताकि हवा आए। पास से गुजरने वाले देखकर चौक जाएंगे।

राइट ब्रदर्स एक दूसरे पर चीख रहे हैं। पहली बार देखने पर सब सोचेंगे की वो एक दूसरे पर बहुत गुस्सा
है। पास से गुजरने वाले लोग उनके बीच जाके उन्हें शांत कराने की कोशिश भी कर सकते है। लेकिन सच्चाई ये है कि राइट ब्रदर्स बस अपने आप में डिबेट कर रहे है। वो बस एक आइडिया के ऊपर चर्चा
कर रहे है जिसे लेकर उन दोनों में अलग विचार हैं। उनके पड़ोसियों को भी ये डिबेट सुनने की आदत हो
गई थी। वो बोलते है ” लड़के फिरसे शुरू हो गए” और अनदेखा कर देते है। अगर आखिर में उन दोनों के अंसर सेम नहीं होते थे तो ये डिबेट शाम तक चलती थी रात को खाने के बाद वे दोनों लिविंग रूम में जाकर बैठते थे। ऑर्विल लकड़ी से बनी हुई कुर्सी में बैठना पसंद करते थे| बह हमेशा सीधे होके अपने हाथो को गोद में रखके बैठते थे। लेकिन दूसरी तरफ विल्बर स्टफ्ड चेयर(stuffed chair) में बैठते है। विल्बर अपने हाथों को अपने सर के पीछे रखके , अपने पैरो को फैला कर आराम से बैठते हैं। कुछ देर बाद आर्विल अचानक से उस आइडिया के बारे मे बोलना सुरु कर देते थे जिसके बारे में वे पहले बात कर रहे थे। विल्बर अचानक बोलते है “नहीं, यह ऐसा नहीं है”। और फिर वह डिबेट फिर से शुरू हो जाता है। उनकी आवाज इतनी ज्यादा है कि उनकी आवाज उनके हाउसकीपर के कानो तक पहुँच जाती थी। बूढ़ी हाउसकीपर ये देखने चली आती थी कि वे दोनों कही एक दूसरे को मार तो नहीं रहे है। लेकिन जाहिर है कि वे ऐसा नहीं कर रहे थे। बे सिर्फ कंस्ट्रक्टिव कंफ्लिक्ट कर रहे थे।

Tackle the tyrant: The principal of worst things firsti
टेकल द टीरांट का मतलब है कि पहले सबसे बड़े प्रॉब्लम (problem) को सॉल्व करे। उदाहरण के
तौर पर एक बिजनेस प्रोजेक्ट को लीजिए। टीम पहले आसान प्रॉब्लम को सॉल्व करती है। छोटे मोटे चीज सब सही जगह पे है। लेकिन जब वे प्रोजेक्ट को खत्म करने के नज़दीक होते हैं फिर जाकर उनको पता चलता है कि बे आगे नहीं बढ़ सकते क्युकी उन्होंने सबसे बडी प्रॉब्लम को अनदेखा किया था। वो सबसे जरूरी काम को करना भूल ही गए। फिर वो टीम उस प्रोजेक्ट को खत्म नहीं कर पाते है। अगर आप पहले टीरांट से छुटकारा पा ले , अगर आप पहले सबसे बड़े प्रॉब्लम से छुटकारा पा लेते है, फिर बाकी सब चीजें आसान हो जाती है। ये आपको भरोसा दिलाता है कि प्रोजेक्ट सफल होगा। ये उस सिद्धांतो में से एक है जिसे राइट ब्रदर्स ने इस्तेमाल किया था दुनिया का पहले इंसान को लेकर उड़ने वाला हवाईजहाज बनाने में।

बच्चो की एक कहानी हैं जिसका नाम है ” द थ्री बिली गोट्स ग्राफ”। एक समय की बात है, कुछ बकरे थे जो
एक नदी के उस पार जाना चाह रहे थे। वो बहुत खुश थे क्युकी नदी के उस पार बहुत सारा हरा घास था।
उस पार जाने का एक ही रास्ता था ,जो था एक पुराना लकड़ी का पुल। पुल के नीचे पानी का बहाब बहुत
ज्यादा था। पुल के नीचे एक बड़ा और एक आंख बाला ट्रोल रहता था जो उस पुल से गुजरने वाले सभी को खाने कि कोशिश करता था। छोटी सी लड़की जो ये कहानी सुन रही थी उसने अपने दादी से पूछा “बकरियां कोई दूसरे रास्ते से क्यों नहीं गए?” | दादी ने कहा ” हो सकता है उन सबने कोशिश की हो, लेकिन आज हो या कल उन्हें उस ट्रोल का सामना करना ही था यानि उन्हें टीरंट (tyrant) का सामना करना ही था”।
1907 में विल्बर राइट को इनके मेंटर ऑक्टेव सन्यूट ने (Chicago) में वेस्टर्न सोसाइटी ऑफ
इंजीनियर्स(western society of engineers) के सामने अपनी बात रखने के लिए इनवाइट किया।
जब सन्यूट ने विल्बर का परिचय करवाया तो उन्होंने हवाईजहाज का भारी होने के वजह से जो प्रॉब्लम हो रहै थे उसके बरे में बताया। सन्यूट ने बोला कि असली प्रॉब्लम है एक सही पॉवर प्लांट (suitable power plant) मतलब हवाई जहाज का मोटर। उन्होंने बताया कि विल्बर भी ये मानते है।

विल्बर ये सुनके चौक गए। उनको नहीं लगता था कि यहाँ मोटर टीरंट (tyrant) है। लेकिन वह अपने मेंटर
को नीचा नहीं दिखाना चाहते थे। तो विल्बर खड़े हुए और अपनी बात सबके सामने खुलकर बोले। राइट
ब्रदर्स के लिए हवाईजहाज के मोटर सबसे बड़ी प्रॉब्लम नहीं था। बल्कि असली प्रॉब्लम थी बैलेंस(balance) और कंट्रोल(control)| उन्होंने अपने मन की बात सोसाइटी में सबके सामने रखी।
“बैलेंस(balance) और कंट्रोल(control) को छोड़ के बाकी सभी प्रॉब्लम छोटी है..राईट ब्रोदर्स ने कहा अगर हम बैलेंस और कंट्रोल के प्रॉब्लम का समाधान कर सके तो हम इतिहास में पहली बार किसी इंसान को हवाईजहाज में उड़ने में सफल होंगे”। यही बह चीज थी जिसके ऊपर उन्होंने किल डेविल्स हिल पर विजय
हासिल की। वो टायरेन्ट को हरा के सफल हुए।

The Wright Way: 7 Problem-Solving Princi… Mark Eppler
Fiddling :The Principle of Inveterate Tinkering (Fiddling or Tinkering)

 फीडलिंग और टिंकारिंग लोगो बॉक्स के साथ खेलने के जैसा है। आप तब तक उसे जोड़ते और तोड़ते है जबतक कि आप अपने मुताबिक कुछ बना ना ले। ये राइट ब्रदर्स की एक खासियत थी। बे मशीनो को खोल कर देखते थे कि वो कैसे काम करती है। वे इसके साथ छेड़छाड़ करते थे और उसे पहले से बेहतर मशीन बना देते थे। विल्बर और आर्विल के पापा थे बिशप मिल्टन राइट। अक्सर उन्हें काम के वजह से दूर रहना पड़ता था। बिशप की सैलरी कम थी लेकिन वो अपने बच्चो के लिए तोहफा जरूर लाते थे। बिशप उन्हें ऐसा कोई
खिलौना लाकर देते थे जो बच्चो को उत्सुक करे और उनकी नॉलेज बढ़ाए। एक दिन जब विल्बर 11 और ऑर्बिल 7 साल के थे , बिशप ने अपने पीछे छुपाके एक खिलौना लेकर आए। दोनों लड़के दरवाजे तक दौर के गए और अपने पापा का वेलकम किया। इस से पहले वो दोनो उस गिफ्ट को पकडते, बिशप ने उसे हवा में छोड़ा। वो जमीन पे गिर कर टूटा नहीं। बह कुछ देर तक हवा मै उड़ा और फिर धीरे से आकर जमीन पे गिर गया।

वो तोहफा था एक खिलौना हवाई जहाज। उसे बनाया था अल्फोंसे पेनुद नाम के एक प्रतिभाशाली
फ्रेंचमैन(Frenchman) ने। खिलौना हबाई जहाज तो पहले से ही बनाया जाता था लेकिन अल्फोंसे पेनुद
के बनाए गए खिलौना सबसे अलग और शानदार होते थे। उस तरह के दूसरे खिलौने चलते थे
धनुष और धागे से। लेकिन पेनुद का मॉडल(model) चलता था दो प्रोपेलर(propeller) और एक रबर बैंड से। वो खिलौना हवाईजहाज बहुत ही अच्छे से और आराम से हवा में उड़ता था। राइट ब्रदर्स बहुत एक्साइटेड (excited) थे। बे दोनों इसके साथ छेड़छाड़ करते रहे ताकि वो समझ सके कि बह खिलौना काम कैसे करता है। उन्होंने उस बेहतर बनाने की कोशिश की। उन्होंने उस खिलौने का बड़ा रूप भी बनाया लेकिन उसको उड़ा नहीं पाए। कुछ साल बाद वो दोनों वजन और ताकत के बीच के रिश्ते को समझ पाए। राइट ब्रदर्स ने समझा कि अगर किसी मशीन के आकार को दो गुना किया जाए तो उसके ताकत को आठ गुना बढ़ाना पड़ता है। जितना बड़ा मशीन होगा उतनी ज्यादा ताकत की जरूरत चाहिए। ऐसे ही हवा से भारी किसी चीज को उड़ाया जा सकता है।

Mind Warping : The Principle of Rigid
Flexibility

माइंड वापिंग(mind warping) का मतलब है बाक्स के आईडिया को भूले बिना आऊट ऑफ दी
बाक्स सोचना । इमेजिन कीजिए कि आपके पास एक बॉक्स है। आप इसे माइंड वार्प करते हैं। आप इसे उन
सभी शेप और फॉर्म में इमेजिन करते है जो पॉसीबल हैं। असली बॉक्स को सोसाइटी और आपके पर्सनल
एक्सपीरिएंस से इन्फ्लुएंस (influence) किया गया था। अगर आप इसे वार्प करते हैं तो आप नए
पोसिबिलिटीज को देखेंगे जो अपने पहले कभी नहीं देखी। आप उस प्रॉब्लम के नए सॉल्यूशंस को जानेंगे।
राइट ब्रदर्स ने “इनहेरेंट इंस्टाबिलिटी” (“inherent instability”) के प्रॉब्लम को सॉल्व किया। विल्बर
ने 1907 में इसे वेस्टर्न सोसाइटी ऑफ इंजीनियर्स के सामने एक्सप्लैन किया। इमेजिन कीजिए कि आप एक कागज के टुकड़े को पकड़े हुए हैं और उसे लेटराल पोजिशन(lateral position) यानी साईड से छोड़ते है। वो पेपर हबा में जैसे लेहरते हुए नीचे गिरता है उसे कहते हैं “इनहेरेंट इंस्टाबिलिटी” अभी इमेजिन कीजिए की आप उस कागज के टुकड़े के पायलट है। आप उसपे सवार है। ये बस एक कागज के टुकड़े से किया। आप उसपे सबार है। आपको पेपर के डायरेक्शन को कंट्रोल करना पड़ेगा और इसको हबा में बैलेंस करके रखना पड़ेगा। इस तरह राइट ब्रदर्स ने प्रॉब्लम को पिक्चराइज था।

ये सरप्राइजिंग नहीं था कि उन्होंने बैलेंस और कंट्रोल को सबसे बड़ा प्रॉब्लम माना था क्योकि वो साइकिल
बनाते थे। एक एयरप्लेन को उड़ाना एक साइकिल चलाने के जैसा ही है। जब आप पहली बार किसी
साइकिल को चलाएंगे तो बह बहुत परेशानियों भरा हो सकता है। आपको बैलेंस और कंट्रोल सीखना पड़ेगा
ताकि आप गिर ना जाए। साइकिल बनाने के लिए आपको इनहेरेंट इंस्टाबिलिटी के साथ डील करना
पड़ेगा। एक स्मूथ चलने वाला साइकिल बनाने की लिए आपके पास बेहतरीन डिजाइन और स्किल होना जरूरी है। राइट ब्रदर्स ने बहुत बार माइंड वार्मिंग की है। उन्होंने चीजो को इमैजिन, विज्यूलाइज और कैलकुलेट किया। एयरप्लेन बनाना साइकिल बनाने से थोड़ा सा ज्यादा मुश्किल है। क्योकि पायलट की लाइफ बहुत जोखिम में होता है। एयरप्लेन उड़ाने से पहले उन्हें सियोर(sure) होना पड़ता है कि मशीन चलाने में सेफ (safe) है या नहीं। विल्बर और ऑर्विल ने 1900 में पहला अटेम्प्ट किया
था क़िटी हॉक(kitty hawk) में। बे ग्लाइडर को उड़ाने में असफल हुए। लेकिन वो हैप्पी और ऑप्टिमिस्टिक थे। क्योकि वो सभी पॉसिबिलिटीज को ट्राई कर चुके थे। बे उनके बनाए हुए सभी थियोरीज (theories) को टेस्ट कर चुके थे।उनमें से कोई भी सही तरीके से काम नहीं करी और बे जानते थे कि उन्हें मशीन को और ज्यादा दंपत करना होगा। दसलिये राइट ब्रदर्स ने और ज्यादा दिमाग लगाया, और ज्यादा माइंड वापिंग की।

The Wright Way:
7 Problem-Solving Princi… Mark Eppler
Relentless preparation : The principle of forever learning

रिलेंटलेस प्रिपरेशन का मतलब होता है सीखने से प्यार। ये तब होता है जब कोई व्यक्ति अपना पसंद की कोई किताब पड़ता है या अपने पसंद का कोई सब्जेक्ट को स्टडी करता है। कोई एग्जाम नहीं है लेकिन आप फिर भी पड़ रहे है क्योंकि आप सीखना चाहते हैं। इससे आप नई चीजों के बारे में जानेंगे। जब आपको आंसर
की जरूरत होगी, तब यह अपने आप आपके दिमाग में आ जायेगी क्योंकि आपने पहले से कई आईडियाज
सीखे हुए थे। और आप किसी भी समस्या को हल करने के लिए हमेशा तैयार थे। राइट ब्रदर्स की तरह जाने माने चित्रकार माइकल एंजेलो को भी नई चीजे सीखना पसंद थी। जब माइकलएंजेलो 13 साल के थे तब उन्होंने इटली के फ्लोरेंस शहर में एक अपरेंटाइस (apprentice) के रूप में एडमिशन ली | वहां एक पैंटर ने उनसे पूछा “क्या तुम्हें ड्राइंग आती है?” उन्होंने जवाब दिया “नहीं”। लेकिन माइकल एंजेलो ने ये भी बोला “मैं सीख सकता हूं”। यह अपरेंटाइस उसके बाद बहुत आगे तक गया। माइकलएंजेलो ने कहा था कि अपने पूरे जीवन काल में वह एक नदी में रखा हआ स्पंज की तरह थे। जब भी उन्हें कहीं से नॉलेज मिलती थी तो वो उसको स्पंज की तरह सोख लेते थे। बह बहुत जिज्ञासु थे। सीखने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे। जब बह 84 साल के थे तब उनके बायोग्राफी लिखते समय उनसे पूछा गया कि उनके जीवन का फिलोसॉफी (philosophy) क्या है।

उन्होंने बोला “अंकोरा इंपारो”। जिसका हिंदी मै मतलब है” ” मैं अभी भी सीखता हूं”। माइकल एंजेलो का 13
साल उम्र से लेकर 89 साल उम्र तक एक चित्रकार के रूप में एक लंबा केरियर(career) था। जो उन्हें पसंद
था वह उसे करते रहते थे। वो अपने स्किल (skill) को सुधारते रहते थे। वह अपने आप में एक मास्टर होने के
बाद भी सीखना नहीं छोड़ते थे।
राइट फैमिली में सबमें किताब पड़ने का एक पैशन था और होपफुली आपमें भी तभी आप गिगल एप में ये
समली सुन रहे है। एजुकेशनल टॉय के इलावा बिशप मिल्टन बच्चों के लिए बहुत सारे बुकस भी लाते थे। हर रविवार पड़ने लिखने के लिए रिजर्व रहता था। विल्बर ऑर्बिल और उनके बहन कैथरिन को पढ़ने
में बहुत मजा आता था। वो अपने फादर की बुक्स कलेक्शन में से बुक्स निकाल के पढती रहती थी।
असल में उनके घर के फर्स्ट फ्लोर में एक लाइब्रेरी थी। और दूसरा लाइब्रेरी थी सेकंड फ्लोर पर।
विल्बर को इंटरेस्ट था हिस्टी कल्चर. फ्रांस और इंग्लैंड में। दूसरी तरफ आर्बिल को साइंस में ज्यादा इंटरेस्ट था। विल्बर की फेवरेट किताब थी प्लूतार्चस लाइव्स और ऑर्विल की फेवरेट बुक थी ब्रिटानिका इनसाइक्लोपीडिया। बे चार्ल्स डार्विन , आर्विंग, ग्रीम, एंडरसन और बहुत सारे लेखकों की बुक्स भी पढते थे। बिशप मिल्टन सभी बच्चों को क्रिटिकल थिंकर्स बनने में उत्साहित करते थे। बच्चे कौनसी किताब पड़ेंगे उस चीज को बह डिसाइड नहीं करते थे। इस फ्रीडम ऑफ नॉलेज ने राइट ब्रथस को सफल होने में हेल्प किया।

Meassure twice : The principal of
methodical meticulousness

मेथोडिकल और मेटिक्यूलस बनिये। इस तरह दो बार (measure) करना चाहिए। एग्जांपल के तौर पर,
अगर कोई प्रॉब्लम आती है तो कुछ बदलने से पहले आपको सभी डिटेल्स को स्टडी करना पड़ेगा और एक
मेथड सोचना पड़ेगा। इसी तरह आप कोई मिस्टेक या डैमेज होने से रोक सकते हैं। राइट ब्रदर्स की सबसे पॉपुलर फोटो थी उनकी पहले फ्लाइट किं फोटो। ये लिया गया था 17 दिसंबर ,1903 को किल डेविल्स हिल्स पर। कुछ लोग कहते है कि उनके परफेक्ट फोटो लेना बस उनका लक था। लेकिन लेखक मार्क एप्लर सोचते है की उस ऐतिहासिक फोटो के पीछे मेथड और मेटिक्यूलसनेस है।

तस्वीर दिखाती है विल्बर राइट एयरप्लेन की पायलट है। ऑर्विल एयरस्ट्रिप पर दौर रहे है जब विल्बर ने
प्लेन के साथ लिफ्ट ऑफ किया। रिसर्चर कहते है कि प्रोपेलर को ब्लार (blur) होना चाहिए क्योकि वो
बहुत तेजि से घूम रहे थे। लेकिन उन्होंने बाद में जाना की कैमरा स्टॉप सेटिंग पे था ताकि घूमता हुआ प्रोपेलर
साफ दिखे। यह चीज ऑर्विल का मेटिकुलासनेस को प्रूव करता है। जो भी इस फोटो को देखता है बह कैप्टीवेट हो जाता है। उस तस्वीर के सामने खड़े होने पर लगता है कि आप खुद वहीं खड़े हैं। ये खुद वहां खड़े हो कर पहली बार इंसान को उड़ते देखने के जैसा ही है। ये जानना इंटरेस्टिंग है कि ये उस मोमेंट का एकमात्र फोटो है। वह कैमरा के पीछे खड़े होकर खींचा गया पहला और आखरी फोटो था। जॉन डेनिएल्स एक सर्फ
मेन थे। उन्होंने अपने लाइफ में इससे पहले कभी कैमरे को टच भी नहीं किया था। फिर भी उन्होंने इतिहास का सबसे इंपॉर्टेट फोटो को खींचा। क्या यह लक था? वह सुंदर फोटो और पहला सक्सेसफुल उड़ान का सफल होना कोई ऐक्सिडेंट नहीं था। राइट ब्रदर्स ने उनके उस अटेम्प्ट पे सफल होने के लिए मेथड और मेटिक्यूलसनेस का इस्तेमाल किया था। 17 दिसंबर,1903 की उस सुबह किल डेविल्स हिल्स में ऑर्विल ने राइट फ्लायर (wright flyer) को रनवे पे पार्क किया था। फिर उन्होंने एनिमोमीटर लिया हवा के रफ्तार को चैक करने के लिए। वो पहले जानते थे

प्रोपेलर और मोटर कितना पॉवर रिलीज करेगा। इस तरह ऑर्विल ने हिसाब लगाया कि विल्बर कहा लिफ्ट
ऑफ करेंगे। बह लकड़ी से बना हुआ कैमरे के ट्राइपॉड को उस जगह पर रखा। ये राइट फ्लायर के दाहिने तरफ था। ऑर्विल ने पहले से कैमरे का फोकस और एक्सपोजर को सेट करके रखा था। जब जॉन डेनियल हेल्प करने के लिए आए तब ऑर्बिल ने उनको बता दिया कि कहां शटर दबाना है।
डेनिएल्स को फोटो खींचना था जब फ्लायर जमीन से 2 फीट ऊपर हो। फिर उन्हें प्लेट को कैमरा अंदर
डालना था। इस चीज को उन्होंने किया था ऑर्विल के बताए गए मेथोडिकल और मेटिकुलस इंस्ट्रक्शन की
मदत से। इस तरह उस important दिन पे पहली बार इंसान ने उड़ान भरी। वो इंसान थे विल्बर राइट।
ये लक नहीं था। राइट ब्रदर्स ने हिसाब लगाया कि कैसे एक सटीक फोटो लिया जाय। उनके सफल होने से
पहले वो बहुत बार अटेम्प्ट कर चुके थे। उन्होंने चीजों को दो , तीन बल्कि बहुत बार जांचा। दूसरे भी अपने
अपने एयरप्लेन को उड़ाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन यह सिर्फ राइट ब्रदर्स ही थे जो सक्सेसफुल हुए।

The Wright Way:
7 Problem-Solving Princi…Mark Eppler
Force multiplication : The principal of team equity

इंडिविजुअली, विल्बर और ऑर्विल दोनों ही टैलेंटेड थे। लेकिन दोनों भाई ने एकसाथ काम करके वो चीज
कर डाली जिसे अकेले अचीव करना मुश्किल था। इसे कहते है फोर्स मल्टीप्लिकेसन। अगर आप क्रिएटिव
लोगो को एक टीम में रखते है और वो सब अपना योगदान देते है तो बे एकसाथ ऐसा कुछ बना लेंगे
जिसका बे अकेले कल्पना भी नहीं कर सकते थे। दूसरे शब्दों में , एक साथ काम करना अलग अलग
काम करने से बेहतर होता है। इसे कहते है फोर्स मल्टीप्लिकेसन। ये है टीम इक्विटी(equity)। जैसा
बिशप मिल्टन ने कहा था “दोनों में से कोई भी भाई श्रेष्ठ नहीं है, उनमें से कोई भी दूसरे को नेगलेक्ट कर के
सम्मान एक्सेप्ट नहीं कर सकता है। विल्बर या ऑर्विल कोई भी अकेले सक्सेसफुल नहीं हो सकते थे”।
राइट ब्रदर्स में टीम इक्विटी या टीम वर्क की सभी 5 क्वालिटी थे। वो थे ट्रस्ट, एफर्ट, नॉलेज, प्रॉफिट और ऑनर(honor)। विल्बर और ऑर्विल एक दूसरे पे विश्वास करते थे। वो जानते थे उनमें से कोई भी इस काम को अच्छी तरह जारी रख सकते है। जब बात पैसों पर आती थी तब भी उनमें कोई प्रॉब्लम नहीं होती थी।

विल्बर और ऑर्विल एक ज्वाइंट बैंक अकाउंट को शेयर करते थे। इसका इस्तेमाल उन्होंने अपने पूरे कैरियर मे किया। वे अपने सारी कमाई और सेविंग उस अकाउंट मै जमा कर देते थे। विल्बर और ऑर्विल एक ही तरीके से चैक साइन करते थे। वे लाइन के ऊपर बस “राइट ब्रदर्स” लिखते थे। वे बस उसके साथ नीचे अपने नाम के इनिशल को लिख देते थे जैसे कि O.W या W.W । एक के पैसे निकालने पर दूसरा कभी भी उसका
कारण नहीं पूछता था। 1912 में विल्बर के गुजर जाने तक ये ऐसे ही चलता रहा।
1908 में विल्बर ने फ्रांस में एक कंपटीशन में भागलिया। ये “कूप दे मिशला” ट्रॉफी के लिए था जिसे दिया जाता था इंसान को लेकर सबसे लंबा उड़ान भरने वाले एयरप्लेन को। विजेता को 20000 फ्रांक मिलता था।
विल्बर ने अपने फ्लायर का अच्छे तरीके से प्रदर्शन किया। वह 2 घंटा और 18 मिनट तक उड़ान भरी। जो रनर अप से तीन गुना ज्यादा था। विल्बर को अल्टीमेट चैंपियन के रूप में घोषित किया गया।

वहां उस कंपटीशन के बाद एक डिनर था। ऑर्बिल और कैथरीन भी बहा मौजूद थे विल्बर को सपोर्ट करने
के लिए। उन सबने स्टेज पे एकसाथ कैश प्राइज और ट्रॉफी लिया। विल्बर ने एक स्पीच भी दी। उसके बाद
होस्ट ने उनको 20000 फ़्राकं दिया। बिना किसी हेसिटेशन के विल्बर ने उस प्राइज मनी को दो हिस्सों में बांट दिया। एक हिस्सा उन्होंने अपने भाई ऑर्विल को दिया। ऑर्विल ने उसे लेकर अपने पॉकेट में रख लिया। इस जेस्चर के द्वारा विल्बर ने दुनिया को बोला की वो और उनके भाई दोनों ही इसे समान रूप से डिजर्व करते है। ट्रस्ट और प्रॉफिट के इलावा राइट ब्रदर्स नॉलेज को भी इक्वल(equal) रूप से डिस्ट्रीब्यूट करते थे। विल्बर जो कुछ भी जानते थे वो ऑर्विल के साथ शेयर करते थे। ऑर्विल भी वैसा ही करते थे। वो उन दोनों को एक ही समझते थे। विल्बर एक बार बोले थे कि जो कुछ भी उन्होंने अचीव (achive) किया था बह उन दोनों के शेयर किया हुआ डिस्कशन और सजेशन का नतीजा है। सभी थ्योरी और आइडिया उन दोनों के बीच बाउंस करता था। उन दोनो ने अपनी नोलिज को एक साथ मिलकर बढाया । उन दोनो ने एक साथ एक टीम के रूप में नॉलेज को पावर बनाया।

Conclusion
आपने राइट ब्रदर्स से 7 प्रॉब्लम सॉल्व करने वाले प्रिंसिपल को जाना। वे हैं Forging, टेकल द tyrant, फिडलिंग, माइंड वापिंग, रेलेंटलेस लार्निंग, Measure twice और फोर्स माल्टीप्लिकेसन। फॉर्जिंग का मतलब है एक आइडिया को लेकर तब तक डिबेट करना जब की बह स्ट्रॉन्ग ना बन जाए। टेकल
द tyrant का मतलब है कि सबसे पहले सबसे बड़े प्रॉब्लम को सॉल्व करना। माइंड वार्मिंग का मतलब है
अलग नजरिए से देखना और सोचना। रेलेंटलेस लार्निंग का मतलब है कि नॉलेज के लिए प्यार। मेजर ट्वाइस का मतलब मेथोडीकल और मेटिक्युलस बनना है। फोर्स माल्टीप्लिकेसन का मतलब है कि एक साथ काम करना अकेले काम करने से बेहतर होता है। 

अगर राइट ब्रदर्स के सफल होने के पीछे कोई और सीक्रेट इंग्रीडिएंट था तो वो था उनका पैशन। बे जब
छोटे थे तब से उड़ने के सपने देखते थे। जबसे बिशप मिल्टन ने उन्हें बह टॉय एयरप्लेन दिया था तब से वे
उसके बारे में एक्साइटेड थे। विल्बर और ऑर्विल बड़े हुए बुक लवर और क्रिटिकल थिंकर्स के तौर पे।
राइट ब्रदर्स अपने साइकिल के बिजनेस से खुश रह सकते थे। सक्सेसफुल बनने के लिए उनमें मैकेनिकल 
फाइनेंशियल और एंटरप्रेन्योरियाल स्किल था। लेकिन वे कुछ और चाहते थे। बहुत बार फेल होने के बाद
भी उन्होंने सपना देखना नहीं छोड़ा। वे उड़ने के लिए पैशनेट थे। बे रुके नहीं जब तक वो प्लेन उड़ाने में
सफल नही हुए। राइट ब्रदर्स ने सीखा था अगर आप मशीन के आकार को दो गुना करते है तो आपको इसके पॉवर को आठ गुना करना पड़ेगा इसे उड़ने के लिए। वो विश्वास करते थे कि प्रोपल्सन और पॉवर से बड़ा प्रॉब्लम है बलैंस और कंट्रोल। इस तरह इन सभी प्रिंसिपल्स , उनके पैशन और प्रैक्टिस के मदद से विल्बर और ऑर्विल ने हवा से भारी किसी चीज को हवा में उड़ा कर दिखाया। यह सही मायने में अमेजिंग है कि कैसे एक मशीन 100 लोगों को लेकर घंटो तक आसमान में उडती रहती है। हम राइट ब्रदर्स के आभारी है। हम उन इंजीनियर्स के अभारिं है जो Wright brothers की तरह काम करते है। यह समय है कि इस 7 प्रॉब्लम सॉल्व करने वाले प्रिंसिपल्स को आप भी यूज करें। एक बार अगर आप ये करतें है तो आप एक्स्ट्राऑर्डिनरी बन जाएंगे।

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