THE SLIGHT EDGE -Turning Simple Discipli… Jeff Olson Books In Hindi Summary

THE SLIGHT EDGE -Turning Simple Discipli… Jeff Olson इंट्रोडक्शन क्या आपने कभी कुछ अचीव करने की कोशिश की है और फ़िर उसे बीच में अधूरा ही छोड़ दिया हो? क्या अपने गोल को सिर्फ इसलिए छोड़ा था क्योंकि आपको उसका रिजल्ट तुरंत नहीं मिला? आप अभी अपनी जिंदगी में क्या हैं और आप क्या बन सकते हैं क्या इस बीच का फ़र्क आपको बेचैन कर देता है? अगर आपका जवाब हाँ है तो आपको इस बुक को पढ़ने की ज़रुरत है. हम सब जिंदगी में कुछ ना कुछ बनना चाहते हैं, ख़ुद को साबित करना चाहते हैं लेकिन अक्सर हम इसी उलझन में उलझे रह जाते हैं कि क्या करें, कैसे करें. बार-बार प्रॉब्लम का सामना करना हमें irritate कर देता है लेकिन ये भी सच है कि उससे बचकर भागना उसे सोल्व नहीं कर सकता, वो प्रॉब्लम कभी ना कभी लौटकर फ़िर आपके सामने खड़ी हो जाएगी. सक्सेसफुल लोगों की कामयाबी का राज़ ये है कि वो जो कुछ भी पाना चाहते हैं उसे हासिल करने के लिए सिंपल चीज़ों को फॉलो करते हैं. इस बुक में आप सीखेंगे कि ये सिंपल चीजें क्या हैं. आप ये भी सीखेंगे कि अपने गोल को अचीव करने के लिए कैसे आपको थाने का की रात में लो ग्टना चाटिना कि अपने गोल को अचीव करने के लिए कैसे आपको अपने काम की धुन में लगे रहना चाहिए. इस बुक का मकसद आपके सामने आने वाली हर प्रॉब्लम को सोल्व करने के लिए एक परफेक्ट solution देना नहीं है. हर प्रॉब्लम को सोल्व करने का exact solution नहीं हो सकता. इस बुक का मकसद है आपको क्लैरिटी देना. इसके साथ-साथ ये आपको अपने गोल्स को अचीव करने के लिए और अपने प्रॉब्लम को हैंडल करने के लिए उसे एक अलग नज़रिए से देखना सिखाएगी. The Beach Bum and the Millionaire इस बुक के ऑथर जेफ़ के दो दोस्त थे. ये दोनों इतने जिगरी दोस्त थे कि इन्हें एक दूसरे से अलग करना नामुमकिन था. बचपन में साथ खेलने से लेकर कॉलेज में असाइनमेंट और एग्जाम के लिए तैयारी करना, इन दोनों ने सब साथ-साथ किया था. अगर उनके स्किल और बुद्धिमानी की बात की जाए तो दोनों में ज़्यादा फ़र्क नहीं था लेकिन दोनों ने आगे चलकर अपने लिए अलग-अलग रास्ता अपनाया. जो पहला दोस्त था उसे कॉलेज में कम मार्क्स मिले थे जिसके बाद उसने कॉलेज छोड़ दिया. वो इधर उधर घूमने में और ज़्यादातर वक़्त बीच पर मस्ती करने में बिताने लगा. लोग उसे Gorgeous जॉर्ज कहने लगे. कहने को तो वो अपनी लाइफ एन्जॉय कर रहा था, लेकिन वो पैसों की काफ़ी तंगी भी झेल रहा था. अपने ख़र्च उठाने के लिए उसे एक साथ कई जॉब करने पड़ रहे थे. अंत में वो ऐसी लाइफ से एकदम दुखी हो गया रहे थे. अंत में वो ऐसी लाइफ से एकदम दुखी हो गया और उसने एक बिज़नेस शुरू करने की कोशिश की. लेकिन उसकी ये कोशिश भी फेल हो गई. वहीं दूसरी ओर, उसके दोस्त ने कॉलेज में बहुत अच्छा परफॉर्म किया. उसे एक बड़ी टेक फर्म में जॉब मिली. उसकी जिंदगी अच्छी चल रही थी, उसने बहुत पैसे भी कमाए और अपने जॉब में सक्सेस भी हासिल की. आप कह सकते हैं कि वो अपने दोस्त से बिलकुल opposite लाइफ जी रहा था. इतना फ़र्क होने के बाद भी वो अब भी एक दूसरे के टच में थे. क्या आप इसका कारण जानते हैं? क्योंकि वो दोनों दोस्त एक ही इंसान थे जो ख़ुद जेफ़ थे. एक वक़्त था जब जेफ़ ने कम मार्क्स की वजह से कॉलेज छोड़ दिया था और इधर उधर मस्ती कर टाइम पास करने लगे थे. साथ में वो छोटे मोटे काम भी कर लिया करते. एक बार जब एक गोल्फ़ क्लब के लिए वो घास काटने वाले के तौर पर काम कर रहे थे तो उन्होंने अमीर लोगों के महेंगे कपड़े और गोल्फ़ के सामान को देखा. इस नज़ारे ने जॉर्ज को बेचैन कर दिया. उन्हें लगने लगा कि जिंदगी कितनी बेरहम है, जहां उन्हें अपने रहने और खाने के लिए भी इतना स्ट्रगल करना पड़ रहा था, वहीं दुनिया में ऐसे भी लोग थे जो हर पल अंधाधुन पैसे कमा रहे थे. जॉर्ज को बहुत गुस्सा आ रहा था और तभी उन्होंने एक फ़ैसला किया. उन्होंने ख़ुद से वादा किया कि चाहे जो भी करना पड़े अब वो भी कुछ ना कुछ बनकर ज़रूर दिखाएंगे. उन्होंने दोबारा कॉलेज जाना शुरू किया और दिखाएंगे. उन्होंने दोबारा कॉलेज जाना शुरू किया और अपनी आदतों में कुछ बदलाव किए जिसका नतीजा ये हुआ कि अब उन्हें अच्छे मार्कस मिलने लगे. इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने अपने क्लास में टॉप भी किया. तो आप यहाँ कह सकते हैं कि उनकी स्टोरी का हैप्पी एंडिंग हुआ लेकिन उनकी स्टोरी यहाँ ख़त्म नहीं हुई थी. भले ही वो एक बड़े टेक कंपनी “टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स” में एक मैनेजर के रूप में अच्छी ख़ासी जॉब कर रहे थे लेकिन उन्हें कंपनी के अंदर चलने वाली पॉलिटिक्स से बेहद नफ़रत थी. इसलिए जॉर्ज ने जॉब छोड़कर बिज़नेस शुरू करने का मन बनाया. उन्होंने एक सोलर एनर्जी कंपनी की शुरुआत की जिसके बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं थी. लेकिन जॉर्ज ने हिम्मत दिखाई और वो डटकर खड़े रहे, अपने काम को बीच में बंद नहीं किया. धीरे-धीरे उनकी कंपनी ने उनके स्टेट और उसके बाद पूरे देश में बहुत अच्छा परफॉर्म करना शुरू कर दिया. लेकिन जॉर्ज ने कभी सोचा भी नहीं था कि इतना लंबा सफ़र तय करने के बाद वो दोबारा उसी जगह पहुँच जाएँगे जहां से उन्होंने शुरुआत की थी. ज़माना बदल रहा था और सोलर एनर्जी इंडस्ट्री की हालत बद से बदतर होती जा रही थी और एक दिन जॉर्ज की कंपनी भी ढेर हो गई. जॉर्ज अपने अब तक के सफ़र के बारे में सोचने लगे. कैसे वो इधर उधर घूमा करते थे, उसके बाद उनमें कुछ कर कर दिखाने का जुनून पैदा हुआ, फ़िर वो एक कंपनी के मैनेजर बने उसके बाद एक सक्सेसफुल ना शुता १५, I.11 एक कंपनी के मैनेजर बने उसके बाद एक सक्सेसफुल सोलर एनर्जी कंपनी के मालिक बने लेकिन आज वो वापस घूमकर उसी मोड़ पर आ गए थे. बीते दिनों की झलक ने उन्हें एहसास दिलाया कि यूं बीच पर आवारा की तरह घूमना या एक मिलियनेयर बनना उन छोटी छोटी चीज़ों पर डिपेंड करता है जो हम हर दिन करते हैं. क्या आप जानते हैं कि उनके फेलियर का कारण क्या था? इसका कारण था कि उन्होंने उन छोटे छोटे काम को करना बंद कर दिया था जिसने उन्हें सक्सेसफुल बनाया था. इमेजिन कीजिए कि जॉर्ज समुद्र के बिलकुल नीचे एकदम गहराई में थे. जब वो ऊपर आने की कोशिश कर रहे थे और किनारे के बिलकुल पास पहुँच गए थे तब अचानक उन्होंने तैरना बंद कर दिया. तो ज़ाहिर सी बात है कि वो फ़िर से डूबने लगेंगे. बस लोगों के साथ भी यही प्रॉब्लम है. एक पॉइंट पर आकर वो काम करना ही बंद कर देते हैं. एक बार जब हमें लगने लगता है कि हम सक्सेसफुल हो रहे हैं तो हम उन चीज़ों को करना बंद कर देते हैं जिसने हमें ऊँचाइयों तक पहुंचाया था. हम मेहनत करना कम कर देते हैं, लापरवाह हो जाते हैं. जॉर्ज भी हमें यही समझाना चाहते हैं. ऐसे एक्शन जो हमें लाइफ में सक्सेस अचीव करने में मदद करते हैं वो काफ़ी सिंपल और इजी हैं. शुरुआत में ये हमें मामूली और बेकार लगते हैं लेकिन समय के साथ यही बढ़ते-बढ़ते हमारी स्किल को इम्प्रूव कर हमें औरों से बेहतर बना देते हैं. इसे ही sliaht edae बनाया था. इमेजिन कीजिए कि जॉर्ज समुद्र के बिलकुल नीचे एकदम गहराई में थे. जब वो ऊपर आने की कोशिश कर रहे थे और किनारे के बिलकुल पास पहुँच गए थे तब अचानक उन्होंने तैरना बंद कर दिया. तो ज़ाहिर सी बात है कि वो फ़िर से डूबने लगेंगे. बस लोगों के साथ भी यही प्रॉब्लम है. एक पॉइंट पर आकर वो काम करना ही बंद कर देते हैं. एक बार जब हमें लगने लगता है कि हम सक्सेसफुल हो रहे हैं तो हम उन चीज़ों को करना बंद कर देते हैं जिसने हमें ऊँचाइयों तक पहुंचाया था. हम मेहनत करना कम कर देते हैं, लापरवाह हो जाते हैं. जॉर्ज भी हमें यही समझाना चाहते हैं. ऐसे एक्शन जो हमें लाइफ में सक्सेस अचीव करने में मदद करते हैं वो काफ़ी सिंपल और इजी हैं. शुरुआत में ये हमें मामूली और बेकार लगते हैं लेकिन समय के साथ यही बढ़ते-बढ़ते हमारी स्किल को इम्प्रूव कर हमें औरों से बेहतर बना देते हैं. इसे ही slightedge कहा जाता है जिसका मतलब है दूसरों की तुलना में हमारे पास कोई एडवांटेज होना जो हमें उनसे अलग और better बनाती है. हम आसान और छोटी छोटी चीज़ों को बेकार समझते हैं कि इससे क्या फ़र्क पड़ेगा लेकिन आगे चलकर यही हमें एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट देते हैं. तो आइए अब जानते हैं कि ये छोटी छोटी चीजें हैं क्या. THE SLIGHT EDGE -Turning Simple Discipli… Jeff Olson The First Ingredient जॉर्ज का बिज़नेस बंद होने के बाद उन्होंने एक डायरेक्ट मार्केटिंग करने वाले फर्म को ज्वाइन किया और बाद में जाकर The People’s Network या TPN नाम की एक डेवलपमेंट ट्रेनिंग कंपनी शुरू की. TPN ने ऐसे कई टीवी प्रोग्राम को produce किया था जो अलग अलग टॉपिक पर पब्लिक को इनफार्मेशन देते थे. उनका मकसद था लोगों तक काम की इनफार्मेशन पहुंचाकर उनकी जिंदगी को बेहतर करने में मदद करना. लोगों ने भी बड़ी उम्मीद और विश्वास के साथ उनकी सलाह को फॉलो किया था लेकिन उन्हें उसका कोई फायदा नहीं हुआ. लेकिन ये कैसे हुआ, इसका क्या कारण था? इसका कारण था कि जब लोगों ने उनकी एडवाइस को फॉलो किया और जब उन्हें तुरंत रिजल्ट दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने उसे बीच में ही करना छोड़ दिया. यही तो सबसे दिक्कत है. हम चाहते हैं कि हमें तुरंत रिजल्ट मिले. लेकिन कुछ पाने की सिर्फ़ इच्छा रखने से वो आपको नहीं मिल जाएगा. उसके लिए आपको पहले फैक्टर की ज़रुरत होगी. अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने वाला पहला फैक्टर है जिंदगी के बारे में आपकी फिलोसोफी यानी आप बिना तो बोनापा १।। ।५।। नारस। पारा नाम है जिंदगी के बारे में आपकी फिलोसोफी यानी आप जिंदगी के बारे में क्या सोचते हैं, उसे किस नज़रिए से देखते हैं. अगर आप जिस तरह चीज़ों को देखते हैं वो आपके लिए काम नहीं कर रहा है तो आपको अपना नज़रिया बदलने की ज़रुरत है. अगर आप अपने सोचने का तरीका नहीं बदलेंगे तो चाहे आप जितनी भी सेल्फ़ हेल्प किताबें पढ़ लें किसी से फ़र्क नहीं पड़ने वाला. सिर्फ़ स्टेप्स जान लेना आपको रिजल्ट नहीं दे सकता बल्कि आप उसे किस तरह अप्लाई करते हैं वो मायने रखता है. कहने का मतलब है कि आपके एक्शन के पीछे आपका क्या नज़रिया है वो आपको आपके गोल्स को अचीव करने में मदद करता है. कई बार जब हम किसी को देखकर इंस्पायर हो जाते हैं या अपने दोस्त की बातों को सुनकर हममें जोश आ जाता है तो उस वक़्त हमारा नज़रिया बदल जाता है और ये अच्छी बात है क्योंकि ये हमें सही रास्ता देखने में मदद करता है. लेकिन दिक्कत ये है कि ये लंबे समय तक टिक नहीं पाता. हमारे इमोशंस बहुत जल्दी बदलते रहते हैं और हम अक्सर वापस उसी जगह पहुँच जाते हैं जहां हम पहले थे. एग्ज़ाम्पल के लिए, आप ख़ुद से कहते हैं कि आप आज से अपना वेट कम करना शुरू करेंगे. ये थॉट आपको मोटीवेट करता है और आप अपने दिन की शुरुआत एक्सरसाइज से करते हैं. क्योंकि इमोशंस कभी एक जैसे नहीं रहते तो इस बात की संभावना बहुत ज़्यादा है कि कुछ दिनों बाद आपका एक्सरसाइज करने का मन नहीं करेगा. इस मोटिवेशन को बनाए करने का मन नहीं करेगा. इस मोटिवेशन को बनाए रखने के लिए आपको फैक्टर की मदद लेनी होगी. आप जिस नज़रिए से चीज़ों को देखेंगे उसका आप पर अलग अलग असर होगा. ये एक चेन रिएक्शन जैसा होता है. अगर आपका नज़रिया पॉजिटिव है तो आपके एक्शन भी पॉजिटिव होंगे जो आपको पॉजिटिव रिजल्ट देंगे. जैसे ऊपर के एग्ज़ाम्पल में अगर आपका attitude पॉजिटिव होगा तो चाहे आपको कितना भी आलस फील हो रहा हो या आपकी बॉडी दर्द कर रही हो आप इस पाजिटिविटी के साथ एक्सरसाइज करने में लगे रहेंगे कि आपका वेट कम होने के बाद आपकी बॉडी और लाइफस्टाइल कितनी healthy हो जाएगी. आप जंक फूड की जगह healthy खाना खाने लगेंगे, रात को जाग जाग कर Netflix पर सीरीज देखने की बजाय इस बात की कदर करने लगेंगे कि पूरी नींद लेना हमारी बॉडी के लिए कितना ज़रूरी होता है और ये आपको सुबह जल्दी उठने में भी मदद करेगी जो फाइनली आपकी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने में मददगार साबित होगा. अगर आप भी ख़ुद को दूसरों से कुछ अलग और एक क़दम आगे रखना चाहते हैं, ये slightedge पाना चाहते हैं तो इस बात को समझें कि सक्सेस पाने का कोई शोर्ट कट नहीं होता. उसे आप सिर्फ़ मेहनत और अपने स्किल्स को इम्प्रूव कर के ही हासिल कर सकते THE SLIGHT EDGE -Turning Simple Discipli… Jeff Olson Mastering the Slight Edge किसी भी चीज़ में मास्टरी हासिल करना हमारा गोल नहीं होना चाहिए क्योंकि जेफ़ के लिए मास्टरी का मतलब सिर्फ़ अंत तक पहुंचना नहीं होता. मास्टरी का मतलब है जब आप कोई रास्ता चुनते हैं तो उस पर टिके रहने का ज़ज्बा अपनाना. मास्टरी हासिल करना एक दिन का काम नहीं है. इसे आपको हर रोज़ करना है. ये छोटी चीजें आपकी आदतों और स्किल्स को दिन ब दिन बेहतर बनाती जाती हैं और इस तरह आप लाइफ में जो भी पाना चाहते हैं उसे अचीव करने के करीब पहुँच जाते हैं और इसकी शुरुआत एक छोटे से स्टेप से होती है. ज़रा सोचिए कि जब हम छोटे थे तो क्या हमने तुरंत चलना शुरू कर दिया था. नहीं, बिलकुल नहीं. पहले हम घुटनों के बल चले, अपने आस पास के लोगों को चलते हुए देखा और हमने बार-बार कोशिश करने के बाद चलना सीखा. पहले हमने किसी चीज़ का सहारा लेकर खड़े होने की कोशिश की. हालांकि तब भी हम लड़खड़ा रहे थे फ़िर भी हमने कोशिश करना बंद नहीं किया. हम ना जाने कितनी बार गिरे, ना जाने कितनी बार चोट भी आई लेकिन कुछ भी हमें चलना सीखने की कोशिश करने से रोक नहीं पाया. 7 सा जिविा – TT TT TH . पापारारापान सराप महा पापा. जेफ़ कहते हैं कि जिस पल आप अपना मन बना लेते हैं कि आपको वो पहला कदम बढ़ाना है तो आप आधी जंग तो वैसे ही जीत जाते हैं. भले ही हमें ये याद ना हो कि हमने कब चलने की कोशिश की थी लेकिन यकीकन वो हमारे लिए बेहद मुश्किल रहा होगा क्योंकि हम या तो घुटनों के बल चलते थे या किसी बड़े की गोद में रहते थे लेकिन फिर भी हमारे मन में कभी नहीं आया कि हमें चलने की कोशिश करना छोड़ देना पाहिए. तब हमने कभी ये नहीं कहा था कि “मैंने चलने की बहुत बार कोशिश की लेकिन मैं बार-बार गिर जाती हूँ तो अब ट्राय करने से क्या फ़ायदा, वैसे भी बड़े लोग तो हैं ही मुझे गोद में उठाने के लिए”. पहला कदम उठाना ही मुश्किल होता है लेकिन प्रैक्टिस के साथ आप उसमें मास्टर हो जाते हैं. ये सिर्फ अपने स्किल को इम्प्रूव करने के बारे में है. तो यहाँ मुझे बड़ा ही मज़ेदार ख़याल आया : हम कह सकते हैं कि सारे बच्चे सक्सेसफुल होते हैं. वो गिरते पड़ते आख़िर चलना सीख ही जाते हैं लेकिन कोशिश करना बंद नहीं करते और यही चीज़ हमें सक्सेसफुल या एक एक फेलियर बनाती है. लेकिन दुःख की बात तो ये है कि हम जैसे-जैसे बड़े होने लगते हैं वैसे वैसे हम विश्वास खोने लगते हैं. हमें लगने लगता है कि छोटी छोटी चीजें मायने नहीं रखती. क्या आपने कभी सोचा है कि अगर बच्चे मान लेते कि वो कभी चल नहीं पाएंगे और कोशिश करना ही छोड़ देते तो क्या होता? बच्चों को नैचुरली पता होता है कि दर टिन चलने की पैक्टिस करने से एक दिन वो भी क्या आपने कभी सोचा है कि अगर बच्चे मान लेते कि वो कभी चल नहीं पाएंगे और कोशिश करना ही छोड़ देते तो क्या होता? बच्चों को नैचुरली पता होता है कि हर दिन चलने की प्रैक्टिस करने से एक दिन वो भी बड़ों की तरह बिना लडखडाए चलने लगेंगे. वो जानते हैं कि सिंपल और छोटी चीजें करना,जैसे फेल होने के बाद भी ट्राय करते रहना, उन्हें सक्सेसफुल ज़रूर बनाएगा. बड़े होने के बाद हमारा नज़रिया ही नेगेटिव हो जाता है, हम आसानी से फेलियर को एक्सेप्ट कर लेते हैं जो हमें सक्सेस से दूर ले जाती है. क्या कभी आपने कुछ पाने की इतनी इच्छा की है कि वो आपको तकलीफ़ देने लगी हो? जब हम कोई सपना देखते हैं तो वो हमें दर्द देने लगता है क्योंकि वो हमें एहसास दिलाता है कि वो चीज़ मुझे चाहिए इसका मतलब है कि वो अभी मेरे पास नहीं है. जैसे अगर आप फ़िट होना चाहते हैं तो इसका मतलब है कि अभी आप फ़िट नहीं बल्कि unhealthy हैं और ये सच हमें तकलीफ़ पहुंचाता है. तो इस दर्द से कैसे छुटकारा पाएं? इसका जवाब है कि जो आप हैं और जो आप बनना चाहते हैं उसके बीच के गैप को भरकर, या तो आप अपनी इच्छाओं को भूलकर इस दर्द को मिटा सकते हैं या आप इसे ख़ुद को इंस्पायर करने के लिए यूज़ कर सकते हैं ताकि अंत में आप एक विनर बनकर निकलें. THE SLIGHT EDGE -Turning Simple Discipli… Jeff Olson Cultivate Slight Edge Habits अगर सोच समझकर बनाई जाए, तो हैबिट आपकी सबसे दोस्त हो सकती है. जब आप किसी चीज़ को दोहराते जाते हैं तो एक पॉइंट पर आकर आप उसे automatically करने लगते हैं जो एक हैबिट में बदल जाती है. यहाँ 7 आदतें बताई गई हैं जो आपको सक्सेसफुल बनने में और बने रहने में मदद करेंगी. हैबिट ]#: show up यानी अटेंड. जब जेफ़ की बेटी एम्बर ने कॉलेज जाना शुरू किया तो वो बहुत घबराई हुई थी. नए स्टूडेंट्स को वेलकम करने के लिए एक इवेंट रखा गया था जिसमें 67,000 नए स्टूडेंट्स ज्वाइन करने वाले थे. कॉलेज के डीन ने बताया कि उन सब का GPA लगभग 4.0 के आस पास था. इतना ही नहीं उनका SAT स्कोर पूरे अमेरिका में टॉप 10% में था. एम्बर ने अपने डैड को बताया कि वो कितनी डरी हुई थी और वो अपने साथ पढ़ने वालों से एक कदम आगे जाना चाहती थी. जेफ़ ने कहा कि उस कॉलेज को ज्वाइन करना और उस इवेंट को अटेंड करने की हिम्मत दिखाकर उसने बेस्ट से भी ज़्यादा अच्छा परफॉर्म करने का आधा सफ़र पूरा कर लिया था. हैबिट 2#: Be consistent यानी अटलता के साथ खड़े रहना. जेफ़ ने एम्बर से कहा कि इवेंट अटेंड ने ना मन 000/ पालो साथ खड़े रहना. जेफ़ ने एम्बर से कहा कि इवेंट अटेंड करने का मतलब था कि 80% सक्सेस अचीव हो चुकी थी और इसे 100% बनाने के लिए उसे रेगुलर कॉलेज जाना होगा. उसे सिर्फ अपनी क्लास ही अटेंड नहीं करनी है बल्कि उसे हर रोज़ पढ़ने के लिए दो घंटे भी निकालने होंगे. तीन हफ़्तों बाद, एम्बर ने जेफ़ को बताया कि 400 में से सिर्फ 80 स्टूडेंट्स ही क्लास अटेंड कर रहे थे. लेकिन जेफ़ ने कहा कि दूसरों को मत देखो, जो तुमने फैसला लिया है उस पर अमल करो. इसलिए एम्बर हर रोज़ कॉलेज जाती रही और जो लड़की कॉलेज के पहले दिन इतनी घबराई हुई थी उसने अपनी क्लास में टॉप कर सबको हैरान कर दिया था. इसका कारण था वो दो छोटी आदतें जो उसने अपने डैड के कहने पर अपनाई थी यानी रोज़ कॉलेज अटेंड करना और दो घंटे पढ़ाई करना. हैबिट 3# : हमेशा अपना नज़रिया पॉजिटिव बनाए रखें. कई स्टडी ने इस बात को साबित किया है कि पॉजिटिव सोच रखना आपको आपके गोल्स तक पहुंचाने में मदद करता है. जब आप किसी प्रॉब्लम का सामना कर रहे हों तो उसे प्रॉब्लम समझने की बजाय कुछ नया सीखने के मौके के रूप में देखें. पॉजिटिव attitude रखने का ये मतलब नहीं है कि आप हमेशा खुश रहेंगे. आप ऐसे पल भी एक्सपीरियंस करेंगे जो आपको बहुत तकलीफ़ देंगे लेकिन पॉजिटिव नज़रिया आपके अंदर एक उम्मीद जगाता है और उसे पार करने की आपको हिम्मत देता है और उस चैलेंज से आप कुछ ना कुछ सीखकर बाहर आते हैं. आप कुछ ना कुछ सीखकर बाहर आते हैं. हैबिट 4# : अपने रास्ते पर डटकर खड़े रहने के लिए ख़ुद से वादा करें. क्या आपको याद है हमने फिलोसोफी की बात की थी, ये हैबिट उससे कुछ मिलती जुलती है. चाहे कोई आपको कितना भी भाषण दे दे या मोटीवेट कर दे, आप तब तक काम को ठीक से नहीं करते जब तक आपके अंदर से आवाज़ नहीं आती. किसानों को फ़सल काटने के लिए एक पूरे सीजन का इंतज़ार करना पड़ता है. उनकी तरह, आप भी जो पाना चाहते हैं उसे पाने के लिए लंबे समय तक अपने काम में डटकर लगना होगा. हैबिट 5# : पूरे विश्वास के साथ अपने अंदर गहरी इच्छा पैदा करें. किसी चीज़ को पाने की इच्छा करना ही काफ़ी नहीं है, आपको उस इच्छा को सही डायरेक्शन में आगे बढ़ाना होगा. जब आप किसी मंज़िल पर पहुंचना चाहते हैं तो आपके मन में पक्का विश्वास होना चाहिए कि आप वहाँ ज़रूर पहुंचेंगे. हैबिट 6# : इस दुनिया में कोई चीज़ मुफ़्त में नहीं मिलती, हमें हर चीज़ की कीमत चुकानी पड़ती है. ठीक उसी तरह, अपने सपनों तक पहुँचने के लिए कभी कभी कुछ सैक्रिफाइस भी करना पड़ता है. इसका मतलब ये नहीं है कि आपको अपनी लाइफ में कुछ बड़ा या melodramatic करना पड़ेगा. ये बुक छोटे छोटे सिंपल एक्शन के बारे में है तो बस आपको वही करना है. आप जो चाहते हैं उसे पाने के लिए हो सकता है आपको छोटे-छोटे बदलाव करने पड़ें जैसे अपने खेलने के टादम से थोडा एक्स्टा टादम पढाई को मंज़िल पर पहुंचना चाहते हैं तो आपके मन में पक्का विश्वास होना चाहिए कि आप वहाँ ज़रूर पहुंचेंगे. हैबिट 6# : इस दुनिया में कोई चीज़ मुफ़्त में नहीं मिलती, हमें हर चीज़ की कीमत चुकानी पड़ती है. ठीक उसी तरह, अपने सपनों तक पहुँचने के लिए कभी कभी कुछ सैक्रिफाइस भी करना पड़ता है. इसका मतलब ये नहीं है कि आपको अपनी लाइफ में कुछ बड़ा या melodramatic करना पड़ेगा. ये बुक छोटे छोटे सिंपल एक्शन के बारे में है तो बस आपको वही करना है. आप जो चाहते हैं उसे पाने के लिए हो सकता है आपको छोटे-छोटे बदलाव करने पड़ें जैसे अपने खेलने के टाइम से थोड़ा एक्स्ट्रा टाइम पढ़ाई को देना पड़े, या वेट कम करने के लिए अपने favourite पेस्ट्री को छोड़ना पड़े वगैरह. हैबिट 7# : आप जो भी करें पूरी इमानदारी से करें. इस बुक की खासियत ये है कि इसमें बड़े सिंपल और छोटे एक्शन लेने के बारे में बताया गया है. लेकिन जो चीज़ इसे थोड़ी मुश्किल बनाती है वो ये है कि ये स्टेप्स इतने छोटे हैं कि अक्सर आप इसे अनदेखा भी कर देते हैं. इसलिए बिना चूके आपको पूरी इमानदारी से इन छोटे स्टेप्स को रोज़ फॉलो करना है. एग्ज़ाम्पल के लिए, हर रोज़ पढ़ने के लिए दो घंटे निकालना या अपनी बुक के 10 पेज रोज़ पढ़ना. THE SLIGHT EDGE -Turning Simple Discipli… Jeff Olson कन्क्लूज़न अपने गोल को अचीव कर सक्सेसफुल बनने के लिए आपको बड़े बड़े काम करने की कोई ज़रुरत नहीं है. अक्सर हम इसी सोच में फंसे रह जाते हैं कि बड़ी सक्सेस के लिए हमें बड़े डिसिशन, बड़े रिस्क लेने होंगे लेकिन ये सोच ही गलत है. हमारे छोटे डिसिशन ही हमारी लाइफ को बदलते हैं चाहे वो आपको दिखे या ना दिखे और यही बदलाव समय के साथ हमारी सक्सेस का कारण बनता है. इस बुक में आपने हर रोज़ छोटे छोटे सिंपल चीज़ों को करने से जो बदलाव होता है उसकी पॉवर को देखा. ये छोटे स्टेप्स अगर समय रहते अपना लिए जाएं तो आपको बड़ी सक्सेस की ओर ले जाते हैं. चाहे आपको कितनी भी नॉलेज हो लेकिन अगर आप अपने सोचने के तरीके को नहीं बदलते हैं तो आप उस नॉलेज का सही इस्तेमाल नहीं कर पाएँगे. इन सिंपल चीज़ों की ख़ासियत है कि इन्हें करना बड़ा आसान है लेकिन ये मुश्किल इसलिए हैं क्योंकि अक्सर हम दसकी अहमियत समये बिना दसे नजरंदाज कर देते हैं ये छोटे स्टेप्स अगर समय रहते अपना लिए जाएं तो आपको बड़ी सक्सेस की ओर ले जाते हैं. चाहे आपको कितनी भी नॉलेज हो लेकिन अगर आप अपने सोचने के तरीके को नहीं बदलते हैं तो आप उस नॉलेज का सही इस्तेमाल नहीं कर पाएँगे. इन सिंपल चीज़ों की ख़ासियत है कि इन्हें करना बड़ा आसान है लेकिन ये मुश्किल इसलिए हैं क्योंकि अक्सर हम इसकी अहमियत समझे बिना इसे नज़रंदाज़ कर देते हैं. इसलिए छोटी छोटी चीज़ों पर भी ध्यान देना सीखें. अगर आप सच में कुछ अचीव करना चाहते हैं तो आपको विश्वास रखना होगा कि छोटे स्टेप्स भी बहुत मायने रखते हैं क्योंकि वो आपको disciplined बनाते हैं जो आपको सक्सेस की ओर ले जाता है. ये छोटी छोटी चीजें ही हमें वो एडवांटेज या slight edge देती हैं जो हमें दूसरों से अलग और उनसे एक कदम आगे ले जाती है. हमारे सिंपल से प्रोडक्टिव डिसिशन भी हमें बड़ा फ़ायदा देते हैं. वो कहते हैं ना कि बूँद बूँद से घट भरे तो वैसे ही छोटी छोटी चीजें समय के साथ आपमें बदलाव लाकर बड़ा कमाल करती हैं.

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