The Personal MBA: A World-Class Business Ed… Josh Kaufman Books In Hindi Summary

The Personal MBA: A
World-Class Business Ed…
Josh Kaufman
इंट्रोडक्शन (Introduction)
फेमस एक्टर जॉन वायने ने एक बार कहा था, “लाइफ टफ है लेकिन अगर आप स्टुपिड हैं तो ये और भी
ज़्यादा टफ हो जाता है”. एक बिज़नेस चलाना इतना भी पेचीदा काम नहीं है. एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन बनने के लिए आपको MBA की डिग्री लेने की ज़रुरत भी नहीं है. हो सकता है कि आप फेल होने से डरते हों या शायद आपको पता नहीं है कि शुरुआत कहाँ से करनी है. अगर आप भी इन सवालों में उलझे हैं तो ये बुक आपके लिए है. ये सबसे प्रैक्टिकल और समझने में आसान बिज़नेस बुक है. इसमें आप कई इम्पोर्टेन्ट कॉन्सेप्ट्स के बारे में सीखेंगे. आप समझेंगे कि असल में बिज़नेस कैसे काम करता है, इसकी शुरुआत कैसे करनी चाहिए और अपने मौजूदा बिज़नेस को कैसे इम्प्रूव किया जा सकता है. आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा कि बिज़नेस करना बहुत रिस्की होता है, आप इसमें बड़ा पैसा खो सकते हैं या आप बिज़नेस चलाने में एक्सपर्ट नहीं हैं. जितनी भी नेगेटिव बातें लोग आपको बताते हैं उन सब के बारे में भूल जाइए. आपको सक्सेसफुल होने के लिए सब कुछ जानने की ज़रुरत नहीं है और एक बड़े इन्वेस्टमेंट की जगह आप छोटी सी शुरुआत भी कर सकते हैं. एक बिज़नेस शुरू करने के लिए आपको 5 चीज़ों को समझना होगा.तो आइये एक एक करके इन्हें गहराई से समझते हैं.

वैल्यू क्रिएशन (Value creation)
बिज़नेस शुरू करने के लिए सबसे पहली चीज़ जो आपको सोचनी है वो है प्रोडक्ट. आप कौन सा प्रोडक्ट
या सर्विस लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं. अपने प्रोडक्ट या सर्विस के ज़रिए आप लोगों को कितनी वैल्यू दे
पाएँगे. आपकी असली वर्थ इस बात पर डिपेंड करती है कि आप लोगों को उनके पैसों के बदले कितनी वैल्यू
दे सकते हैं. ऐसी कौन सी चीज़ है जिसकी लोगों को ज़रुरत है या मार्केट में जिसकी कमी है? जो भी चीज़ कस्टमर की लाइफ को थोड़ा भी बेटर बना दे उसे वैल्यू कहा जाता है. वैल्यू एक ऐसा एक्सपीरियंस
भी हो सकता है जिसे कस्टमर हमेशा याद रखे और दूसरे प्रोडक्ट उसे अपनी ओर अट्रैक्ट ना कर सकें, एक
ऐसा एक्सपीरियंस जिसके सामने दूसरों की सर्विस फ़ीकी लगने लगती है. यानी अगर आप दूसरों के
मुकाबले उसी दाम पर अपने प्रोडक्ट में ज़्यादा वैल्यू जोड़ कर देंगे तो आप लंबे समय तक सक्सेसफुल
बने रहेंगे और ये संभव है ।इसी सोच से आप लॉयल कस्टमर्स बना सकते हैं.दुनिया के टॉप ब्रांड्स और
बिज़नेस ने इसी बात पर फोकस किया है. इसे और अच्छे से समझने के लिए आइये पहले बिज़नेस को डिटेल में समझते हैं.

बिज़नेस एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है जो-
1. डिमांड को समझ कर प्रोडक्ट या सर्विस क्रिएट करके वैल्यू प्रोवाइड करता है
2. जो कुछ लोगों की ज़रुरत को पूरा करता है
3. प्रोडक्ट या सर्विस को ऐसे दाम पर बेचता है जिसे कस्टमर देने के लिए तैयार होता है
4. ऐसा प्रोडक्ट बनाता है जो लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सके।
5. इस तरह बिज़नेस इतना प्रॉफिट कमा सकता है जिससे बिज़नेस जारी रखने के लिए बिजनेसमैन को
सोचना ना पड़े.
ये 5 चीजें बिज़नेस के इम्पोर्टेन्ट पॉइंट्स हैं और एक दूसरे सेजुड़े हुए हैं. पहला है, वैल्यू क्रिएशन.
इसमें कस्टमर की ज़रुरत को समझ कर एक प्रोडक्ट या सर्विस बनाया जाता है. दूसरा है मार्केटिंग, इसका
मकसद होता है लोगों का ध्यान अपने प्रोडक्ट की तरफ़ खींचना और अपने बनाए हुए प्रोडक्ट की डिमांड को
क्रिएट करना. तीसरा है, सेल्स. इसमें आप अपना प्रोडक्ट कस्टमर तक पहुंचाते हैं जिसके लिए वो उचित कीमत चुकाते हैं. चौथा है, वैल्यू डिलीवरी. इस स्टेप में आपने जो वादा किया था वो वैल्यू और एक्सपीरियंस कस्टमर को देना और इस बात का ध्यान रखना होता है कि आप उनकी उम्मीदों पर खरे उतरें. पाँचवा है, फाइनेंस. इसका मकसद ये देखना होता है कि आप इतना प्रॉफिट तो कमाएँ कि बिज़नेस को कंटिन्यू किया जा सके.

तो देखा आपने, एक बिज़नेस को चलाने के लिए सिर्फ इन 5 बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है. ज़रूरी तो नहीं कि बिज़नेस करना बहुत मुश्किल और पेचीदा हो. चाहे आपने फाइनेंस के सब्जेक्ट को स्टडी किया हो या
नहीं या आप अमीर हों या नहीं या आपके परिवार में कभी भी किसी ने बिज़नेस नहीं किया हो तब भी आप
अपने दम पर बिज़नेस की शुरुआत कर सकते हैं. अपने बिज़नेस के इन 5 पॉइंट्स को पेपर पर लिखें
या आप एक सिंपल डायग्राम भी बना सकते हैं. अगर आपने इसे ठीक से कर लिया तो इसका मतलब है कि
आप सही डायरेक्शन में बढ़ रहे हैं. इसका ये मतलब भी है कि आपके पास एक क्लियर बिज़नेस प्लान है
और वो बिलकुल सक्सेसफुल हो सकता है. आपको एक और बात जानने की ज़रुरत है. इसे “आयरन लॉ ऑफ़ द मार्केट” कहते हैं. इसे हम इस कहानी से समझ सकते हैं. डीनकैमेन एक इन्वेंटर हैं. 2002 में उन्होंने Segway PT बनाई थी. ये एक सेल्फ-बैलेंसिंग टू व्हीलर स्कूटर है जिसे उन्होंने 5,000 $ में बेचा था. डीन का कहना था कि उनका प्रोडक्ट ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में एक रेवोल्यूशन लाने की ताकत रखता था, ठीक वैसे ही जैसे कार के इन्वेंशन ने घोड़ों और बग्घियों(कार्ट) की जगह ले ली थी.उन्होंने उम्मीद की थी कि वो एक साल में 50,000 स्कूटर बेचेंगे.

लेकिन पाँच साल बाद भी वो सिर्फ़ 23,000 स्कूटर ही बेच पाए थे. ये उनके गोल का 10% भी नहीं था. स्कूटर
का डिजाईन उसका प्रॉब्लम नहीं था. वो काफ़ी सिंपल और आरामदायक था और तो और वो इको-फ्रेंडली
भी था. प्रॉब्लम थी उसकी कॉस्ट. लोग एक स्कूटर पर 5,000 $ खर्च नहीं करना चाहते थे. इसके बजाय
पैदल चलना या बाइक पर जाना ज़्यादा सस्ता था. इस प्रोडक्ट की मार्केट में कोई डिमांड ही नहीं थी.
जो बिजनेसमैन बनना चाहते हैं वो अक्सर यही गलती दोहराते हैं. प्रॉफिट कमाने के लिए मार्केट में आपके
प्रोडक्ट की रियल डिमांड होनी चाहिए, अगर ये सिर्फ आपकी इमेजिनेशन में होगा तो काम नहीं करेगा.
इसे “आयरन लॉ ऑफ़ द मार्केट” कहते हैं. अगर आपके प्रोडक्ट की डिमांड नहीं होगी तो इसे ख़रीदेगा
कौन.इसलिए अपने बिज़नेस प्लान को बनाने के बाद उसे दोबारा ठीक से देखें. थोड़ा मार्केट रिसर्च करना
बहुत फायदेमंद होगा.

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मार्केटिंग (Marketing)

अब आप अपने प्रोडक्ट की डिमांड कैसे क्रिएट करेंगे? ये सिर्फ़ मार्केटिंग द्वारा किया जा सकता है. सिर्फ़
प्रोडक्ट बनाना काफ़ी नहीं है. आप क्या ऑफर कर रहे हैं लोगों को इसके बारे में पता होना चाहिए.
मार्केटिंग का मकसद होता हैसही लोगों का ध्यान अपनी ओर अट्रैक्ट करना और आपका प्रोडक्ट खरीदने
के लिए उनमें दिलचस्पी जगाना. ये आपके टारगेट कस्टमर होते हैं. मार्केटिंग उन कस्टमर्स को ढूँढने का साइंस है जो आपका प्रोडक्ट ज़रूर खरीदेंगे.जो बिज़नेस सबसे तेज़ और कम पैसों को ख़र्च कर के अपने टारगेट कस्टमर को अट्रैक्ट कर लेता है उसे एक उम्दा और सक्सेसफुल बिज़नेस कहा जा सकता है. आप जितने ज़्यादा लोगों तक अपना प्रोडक्ट पहुंचा पाएँगे, आप उतने ज़्यादा सक्सेसफुल होंगे.
मार्केटिंग को अक्सर सेल्स समझने की गलती की जाती है. हम सब ने डायरेक्ट मार्केटिंग के बारे में सुना है.
इसमें सेल्समेन स्पॉट पर कस्टमर को अपना प्रोडक्ट दिखा कर उसे खरीदने के लिए कन्विंस करता है.
लेकिन आमतौर पर, मार्केटिंग राईट कस्टमर का ध्यान अपनी ओर खींचने के बारे में है. तो वहीं, सेल उसे कहा जाता है जब कस्टमर आपका प्रोडक्ट खरीद कर बदले में आपको पैसे देता है.

लोगों का ध्यान खींचना बहुत मेहनत का काम है. लोग अपने डेली लाइफ में इतने बिजी हैं कि हो सकता है
कि उनका ध्यान आपके प्रोडक्ट पर ना जाए. इसलिए आपकी मार्केटिंग बहुत ज़बरदस्त और असरदार होनी
चाहिए ताकि कस्टमर उसे नोटिस करने पर मजबूर हो जाए. अब सवाल ये है कि इसे किस तरह किया जा सकता है. पहला, मार्केटिंग राईट कस्टमर को अट्रैक्ट करने के लिए किया जाना चाहिए. मान लीजिये कि आप घर पर बना वेजीटेरियन खाना बेचना चाहते हैं तो सोशल मीडिया पर वेजीटेरियन ऑडियंस को सर्च करें. आप वहाँ एक ब्लॉग पोस्ट कर सकते हैं या अपनी वेबसाइट का लिंक शेयर कर सकते हैं.अगर आप
नॉन-वेजीटेरियन ऑडियंस को अपने add के बारे में बताएँगे तो ये आपकी बेवकूफ़ी होगी. दूसरा, आपकी मार्केटिंग कुछ हट कर होनी चाहिए. कुछ ऐसा जिसे देख कर उससे नज़रें हटाना मुश्किल हो. जो कस्टमर में उस प्रोडक्ट के बारे में और जानने की इच्छा को पैदा करे. जैसे की इस एक्जाम्पल में. जौश कॉफ़मैन जब भी जॉगिंग पर जाते तो अपना Vibram Five Fingers shoes पहनते थे. वो जूते काफ़ी यूनिक थे और आसानी से किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच लेते थे.रास्ते में लोग अक्सर जौश को रोक कर उनके जतों के बारे में पछा करते थे.

जूतों का शेप इतना हट कर था कि लगता था मानो उसे ग्लव्स और जूतों की डिजाईन को मिक्स कर के बनाया गया था. अंगूठे की जगह एक पॉकेट जैसा शेप था. उनके सोल पतली रबर के थे जो रास्ते पर पड़े पत्थर और काँच से पैरों को सुरक्षित रखने का काम करते थे. इसे पहनने वाले के पैर बिलकुल एक मेंडक के पैर जैसे लगते थे. उसकी डिजाईन इतनी अलग थी कि सबकी नज़र उस पर पड़ ही जाती. यहाँ तक कि एक खडूस और स्ट्रिक्ट दिखने वाला आदमी भी जोश को रोक कर पूछ लेता कि उन्होंने जूते कहाँ से खरीदे.
Vibram को अब advertise करने की ज़रुरत नहीं थी. उनका ये यूनिक प्रोडक्ट अपने आप बिक जाता
था.ये प्रोडक्ट बहुत ज़्यादा सक्सेसफुल रहा. 2006 में जब इसे पहली बार मार्केट में डिस्प्ले किया गया तब
से लेकर हर साल इसकी सेल तीन गुना बढ़ती रही. ये एक फैशन ट्रेंड और क्रेज़ बन गया था. 2009 तक
इसकी टोटल सेल 10 मिलियन$ पहुँच गई थी.उन्हें टीवी कमर्शियल और बड़े बड़े बिलबोर्ड के जरिए
advertisement करने की ज़रुरत नहीं थी. ऑथर सेथ गोडिन का कहना है कि मार्केटिंग एकदम
यूनिक और दिलचस्प होनी चाहिए बिलकुल एक पर्पल cow की तरह. जितने भी मार्केटिंग techiques
और आइडियाज हैं वो सबब्राउन COW जैसे हैं, बिलकुल एक जैसे, बोरिंग और आर्डिनरी. अब एक फील्ड में बहुत सारे ब्राउन cows के बीच एक पर्पल  cow को इमेजिन करें. आपकी नज़र उस पर पड़ेगी ही पड़ेगी. आप चाह कर भी उससे नज़रें नहीं हटा पाएँगे. आपको exactly यही अपने कस्टमर के साथ करना है. आपकी मार्केटिंग इतनी ज़बरदस्त होनी चाहिए कि लोग आपका प्रोडक्ट खरीदे बिना ना रह सकें.

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सेल्स(Sales)

सेल्स बिज़नस प्रोसेस का वो हिस्सा है जहाँ आपके पास असल में पैसा आता है.अगर आपकी मार्केटिंग
ज़ोरदार है तो प्रोडक्ट अपने आप बिकने लगेगा. आपको अलग से कोई स्ट्रेटेजी या ट्रिक यूज़ करने की
ज़रुरत नहीं होगी. आपका गोल होना चाहिए कि लोग आपके प्रोडक्ट के बारे में जानें, उसे पसंद करें और उसकी क्वालिटी पर भरोसा करें.तब जाकर वो हमसे खरींगे, बार बार खरीदेंगे और लोगों को भी इसके बारे में बताएँगे. सेल्स का सीधा कनेक्शन वैल्यू क्रिएशन, मार्केटिंग और वैल्यू डिलीवरी से है. आपको राईट कस्टमर पर फोकस्ड मार्केटिंग के साथ उनका भरोसा जीतना होगा. लेकिन अगर आपकी क्वालिटी ख़राब हुई तो सब कुछ बेकार हो जाएगा. आप ब्रांड और reputation सिर्फ़ तब बना पाएँगे जब आपके प्रोडक्ट की क्वालिटी टॉप क्लास होगी. आप जितना ज्यादा वैल्यू अपने प्रोडक्ट में जोड़ते जाएँगे, आपके कस्टमर उतने ही आपकी तरफ़ लॉयल होंगे. वैल्यू जोड़ने का मतलब है अपने कस्टमर को उसी कीमत पर एक ऐसा एक्सपीरियंस देना जो दूसरे ना दे सकें. कई बार ये एक्सपीरियंस उनके लिए इतना अच्छा होता है कि वो ज़्यादा कीमत चुकाने के लिए भी तैयार हो जाते हैं. आपको अपने कस्टमर्स को अपने साथ बांधे रखना है ताकि अगर नए प्रोडक्ट्स लांच हों तो वो तब भी आपका ही प्रोडक्ट खरीदना पसंद करें.

जब कस्टमर आपके प्रोडक्ट और सर्विस से संतुष्ट होंगे तब वो दूसरों को इसके बारे में बताएँगे. आप इसे माउथ टू माउथ पब्लिसिटी भी कह सकते हैं जब आपके प्रोडक्ट की क्वालिटी उसकी पब्लिसिटी का कारण बन जाती है. सेल बढ़ाने की एक और टिप है. इसे”damaging एडमिशन” कहा जाता है. जब कोई चीज़ बहुत अच्छी होती है तो लोगों को उस पर शक होने लगता है, उस पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है. अगर आपका ऑफर कुछ ज़्यादा ही परफेक्ट हुआ तो संभावना है कि लोग पूछने लगेंगे कि “ चक्कर क्या है भई”?
damaging एडमिशन कस्टमर को सीधे सीधे अपनी प्रोडक्ट की कमी यानी ड्रा बैक बताने के बारे में
है. इस तरह, आप उनका भरोसा जीत सकते हैं.ऐसा करने से उन्हें एहसास होगा कि आपने झूठ बोल कर
उन्हें चीट करने की कोशिश नहीं की. जौश कॉफ़मैन और उनकी वाइफ केल्सी Colorado में एक घर रेंट पर लेना चाहते थे.उस समय वो न्यू यॉर्क में रहते थे. उनके नए लैंडलॉर्ड बेन और Betty ने damaging एडमिशन का इस्तेमाल किया था. उन्होंने उन्हें प्रॉपर्टी के बारे में सब खुल कर बताया..

Northern Colorado एक पहाड़ी इलाका है.उन्होंने जोश को बताया कि उन्हें रॉक स्लाइड के लिए
तैयार रहना होगा. उन्हें आस पास के एरिया में घूमने वाले शेर और भालू से भी चौकन्ना रहना होगा.
जोश ये सुन कर घबराए नहीं और ना ही उनका मन बदला. अब वो बेन और Betty पर और भी ज़्यादा
भरोसा करने लगे. उन्हें इस बात की ख़ुशी थी कि उन्होंने कुछ छुपाया नहीं, उनके साथ क्या क्या हो
सकता है उस बारे में सब खुल कर बता दिया और आखिर में भालू को भगाने के लिए पेपर स्प्रे खरीदने के
बाद उन्होंने फाइनली पेपर्स पर sign कर दिया. अब उन्हें एक कार की भी ज़रुरत थी क्योंकि न्यू यॉर्क
में उनके पास अपनी कार नहीं थी. उन्होंने ऑनलाइन सेकंड हैंड कार सर्च करना शुरू किया. लेकिन
ऑनलाइन एक बड़ी अमाउंट का पेमेंट करने में उन्हें हिचकिचाहट हो रही थी.
तब उन्हें कार डीलर Master Auto Collection के बारे में पता चला. उन्होंने जोश को कार की छोटी
से छोटी डिटेल को ठीक से दिखाने के लिए कई फोटो दिखाए.यहाँ तक किकार के पीछे जो थोड़ा सा खरोंच
कानिशान था उसे कार डीलर ने छुपाया नहीं बल्कि उसकी भी फोटो जोश को भेजी. जौश और उनकी
वाइफ कार डीलर की आनेस्टी से बहुत खुश थे. उन्हें विश्वास हो गया था कि वो डीलर भरोसेमंद था इसलिए
उनमें कार खरीदने का कॉन्फिडेंस और बढ़ गया था. मान लीजिये कि आप एक लैपटॉप डीलर हैं तो आप
कस्टमर को एक्सप्लेन कर सकते हैं कि लैपटॉप का एक पर्टिकुलर मॉडल ऑफिस और घरके काम के लिए तो बहुत बढ़िया है लेकिन गेमिंग के लिए नहीं क्योंकि उसमें हाई ग्राफ़िक्स और ज़्यादा स्पेस की ज़रुरत होती है.या अगर आप स्मार्टफ़ोन के सेक्टर में हैं तो आप कस्टमर को बता सकते हैं कि इस फ़ोन की कैमरा क्वालिटी तो लाजवाब है लेकिन बैटरी कैपेसिटी कम है.सच बोलने से, सब कुछ पहले बता देने से आप कस्टमर का बिश्वास जीत सकते हैं और बहुत हाई चांस है कि आपका डील उस वक़्त फाइनल भी हो जाए.

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वैल्यू डिलीवरी (Value Delivery)
एक अच्छे बिज़नेस का सीक्रेट मंत्र होता है – आपने जो वादा किया उसे ठीक से अपने कस्टमर तक पहुँचाना. कई बिज़नेस झूठे वादे कर के कस्टमर से पैसे ऐंठ लेते हैं लेकिन बदले में उन्हें कुछ और ही डिलीवर करते हैं, उसे स्कैम और धोखा कहा जाता है. वैल्यू डिलीवरी का मतलब होता है कस्टमर ने जितने
पैसे दिए उसके बराबर या उससे ज़्यादा वैल्यू उसे देना. इस प्रोसेस में कई चीजें शामिल हैं जैसे इन्वेंटरी
मैनेजमेंट, आर्डर को प्रोसेस करना, प्रोडक्ट डिलीवरी और सेल के बाद कस्टमर सर्विस. सबसे उम्दा बिज़नस वो होता है जो कस्टमर के सामने ऐसा प्रोडक्ट पेश करे जो उसकी उम्मीदों से भी ऊपर हो. इसका मतलब है कि आपके प्रोडक्ट डिलीवरी में अच्छी क्वालिटी, भरोसेमंद सर्विस और फ़ास्ट सर्विस ये सब शामिल होने चाहिए. इस बात की गैरंटी है कि एक हैप्पी और satisfied कस्टमर दोबारा आपका प्रोडक्ट ज़रूर खरीदेगा. ये कस्टमर दूसरों को आपके प्रोडक्ट के बारे में बता कर आपकी सेल भी बढ़ा सकता है. क्या आप Zappos की सक्सेस का सीक्रेट जानना चाहते हैं? Zappos एक लीडिंग ऑनलाइन शू स्टोर है. 2009 मेंAmazon ने Zappos को 1.2 बिलियन $ में खरीद लिया था.

Zappos कस्टमर को फ्री शिपिंग की सुविधा देते थे. इसके अलावा अगर कस्टमर का मन बदल जाए
तो उन्हें जूते return करने की भी फैसिलिटी दी गई थी और Zappos उनसे बिना कोई सवाल पूछे जूते
वापस ले लेते थे. इन सब सुविधाओं के कारण ज़्यादा से ज़्यादा लोग उनसे जूते खरीदने लगे.
लेकिन Zappos की एक खासियत जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी औरवो ये थी कि वो कस्टमर को
उनकी उम्मीद से बढ़कर सर्विस देते थे. वो नेक्स्ट डे डिलीवरी से अपने कस्टमर्स को सरप्राइज कर देते
थे.आर्डर प्लेस करते समय उनकी वेबसाइट पर लिखा होता था कि डिलीवरी में 3-7 दिन लग जाएँगे लेकिन
वो अगले दिन डिलीवरी कर केकस्टमर को हैरान कर देते थे. Zappos ने अपने स्टोर के लिए या जो एक्स्ट्रा सुविधा वो दे रहे थे उसके लिए कभी advertise नहीं किया, वो सिर्फ अपने कस्टमर को अच्छा एक्सपीरियंस देना चाहते थे. इसलिए उनके कई लॉयल कस्टमर्स बनते चले गए. आप भी ऐसा कर सकते हैं. हमेशा अपने कस्टमर की ज़रुरत को पूरा करने और उनकी उम्मीद से बढ़कर कुछ देने की कोशिश करें, नहीं तो आपके और दूसरों के सर्विस में कोई फ़र्क नहीं होगा. आप एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी नहीं सिर्फ़ आर्डिनरी सर्विस देने वाले बन कर रह जाएँगे.

अब हम बात करते हैं predictability की. इसका मतलब होता है कि आपने जो वादा किया था बिलकुल
उसी समय कस्टमर को क्वालिटी प्रोडक्ट डिलीवर करना. ये फैक्टर मार्केट में आपकी गुडविल बनाता है.
आइये इस कहानी से इसे समझते हैं. ओहायो में आरोन और पैट्रिक शिरा दो भाई रहते थे.वो बिज़नेस पार्टनर्स भी थे. उन्हें” शिरा संस पेंटिंग्स” के नाम से जाना जाता था. वो ज़्यादातर लार्ज स्केल पेंटिंग प्रोजेक्ट का काम करते थे जैसे यूनिवर्सिटी, मल्टी- मिलियन डॉलर के घर, मिलिट्री बेस आदि. उन्होंने जब शुरुआत की थी तब उनके पास कुछ नहीं था लेकिन कुछ समय बाद वो ओहायो में एक जाने माने पेंटिंग ब्रांड के नाम से मशहूर होने लगे थे. तो इन दो नौजवानों ने उस एरिया के पेंटिंग दिग्गजों से कैसे मुकाबला किया? इसका राज़ है predictability. उन्हें hire करने का मतलब था कि इस बात की पूरी गैरंटी थी कि वो आपको बिलकुल टाइम पर क्वालिटी प्रोडक्ट डिलीवर करेंगे.ना क्वालिटी में कोई कसर बाकी होगी और ना टाइम में कोई देरी. इसलिए दिन ब दिन उनके कस्टमर की गिनती बढ़ती जा रही थी. उनके मुकाबले दूसरे painters काफ़ी unpredictable थे. वो काम ख़त्म करने में बहुत समय लगाते थे, काम में देर से आते. बातचीत में मिलनसार और व्यवहारिक भी नहीं थे और उनके काम की क्वालिटी भी अच्छी नहीं थी, लेकिन आरोन और पैट्रिक अलग थे. वो हमेशा समय पर काम शुरू करते और समय पर उसे पूरा भी कर देते थे. उनका स्वभाव अच्छा था और काम की क्वालिटी बहुत बेहतरीन थी.

इन गुणों के कारण शिरा संस का नाम बनने लगा और उनकी अच्छी reputation बन गई थी.
Predictability में 3 फैक्टर्स होते हैं. पहला है uniformity यानी आपका प्रोडक्ट या सर्विस हमेशा बिलकुल सेम होना चाहिए.एक्जाम्पल के लिए, Coca-Cola. क्या आपने कभी गौर किया है कि आप दुनिया के किसी भी कोने में जब coke पीते हैं तो उसका taste बिलकुल सेम होता है और लोग ये उम्मीद भी करते हैं कि उसका taste बिलकुल सेम हो. इसे uniformity कहते हैं. ये करना इतना आसान नहीं है. इस ड्रिंक को बनाने से लेकर इसकी पैकेजिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के हर स्टेप में Coca-Cola ने uniformity को बरकरार रखा है. ज़रा सोच कर देखिये कि हज़ारों जगह बिलकुल सेम प्रोडक्ट पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउसऔर न जाने किन किन चीज़ों की ज़रुरत होती है. दूसरा फैक्टर है कंसिस्टेंसी जिसका मतलब है उसी क्वालिटी का प्रोडक्ट बार बार कस्टमर को देते रहना.

Coca-Cola ने 1980 में एक गलती की थी. उन्होंने coke की रेसिपी में बदलाव किया था. उन्होंने”New
Coke
” के नाम से प्रोडक्ट बेचना शुरू किया लेकिन वो लोगों को बिलकुल पसंद नहीं आया. अपनी गलती
का एहसास होने के बाद उन्होंने दोबारा पुराने रेसिपी को फॉलो करना शुरू किया और उनकी सेल पहले की
तरह तेज़ी से बढ़ने लगी. तीसरा फैक्टर है रिलायबिलिटी यानी अपने प्रोडक्ट को बिना किसी गलती और बिना देर किये लोगों तक पहुँचाना. ऑनलाइन स्टोर Snapdeal के साथ पास्ट में शर्मिंदा करने वाले कई हादसे हो चुके हैं. एक बार एक कस्टमर ने Samsung Galaxy Core स्मार्टफ़ोन का आर्डर प्लेस किया था लेकिन जब पैकेज की डिलीवरी की गई तो बॉक्स में से साबुन की बट्टी निकली. ऐसी embarrassing घटना एक बार फ़िर हुई जब एक कस्टमर ने MacBookPro का आर्डर दिया था और बदले में उसे हीटर डिलीवर किया गया था. अरे,रुकिए अभी ख़त्म नहीं हुआ. एक बार किसी कस्टमर ने Iphone 4s का आर्डर दिया था लेकिनजब उसने बॉक्स खोला तो उसमें से मार्बल स्टोन से भरा बैग निकला था. इन सब से उभरने के लिए Snapdeal ने नई शुरुआत की और Snapdeal 2.0 लांच किया. एक अच्छी reputation बनाने के लिए कस्टमर को आप पर भरोसा होना चाहिए कि अगर उन्होंने आपको आर्डर दिया है तो उन्हें सही समय पर अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट ही डिलीवर किया जाएगा. इसलिए आपको अपना वैल्यू डिलीवर करने में यूनिफार्म, कंसिस्टेंट और रिलाए बल तीनों होना होगा. लॉयल कस्टमर्स बनाना इतना आसान नहीं है. लेकिन इन तीनों बातों को ध्यान में रखने के बाद आप ज़्यादा प्रॉफिट और ज़्यादा लॉयल कस्टमर दोनों कमा सकते हैं.

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फाइनेंस(Finance)

जब भी लोग फाइनेंस शब्द सुनते हैं तो बड़े बड़े बोरिंग बार चार्ट, स्प्रेडशीट और कभी ना ख़तम होने वाले
नंबर्स के बारे में सोचने लगते हैं.लेकिन अगर आप सिर्फ़ ज़रूरी बातों पर फोकस करेंगे तो फाइनेंस को समझना सिंपल है. फाइनेंस वो नॉलेज और साइंस है जिसका काम ये देखना है कि बिज़नेस में पैसा कहाँ जा रहा है और कहाँ से आ रहा है. इसके बाद ये डिसाइड करना कि कितना पैसा कहाँ लगाना है और फ़िर देखना और समझना है कि आप जैसे पैसों को मैनेज कर रहे हैं क्या वो आपको मनपसंद रिजल्ट दे रहा है या नहीं.
आपको किसी डरावने बार ग्राफ़ और लंबे कैलकुलेशन को समझने की ज़रुरत नहीं है. चाहे आप एक बिज़नेस ग्रेजुएट हों या ना हों तब भी आप इसे आसानी से और अच्छे से हैंडल कर सकते हैं. तो चलिए मान लेते हैं कि आपने एक बिज़नेस शुरू किया है और वो काफ़ी अच्छा चल रहा है. आपके पोडका से अच्छी कमाई हो रही है उसके बाद आपको कई सारे बिल्स, एम्प्लोयीज़ की सैलरी वगेरह के खर्चों को उठाना पड़ता है. इसके बाद जो बचता है वो होता है

आपका प्रॉफिट, यहाँ से प्रॉफिट मार्जिन की शुरुआत होती है. अगर आपका बिज़नेस साल में 10 लाख कमा रहा है लेकिन आपके ख़र्चे ही 999,999 $ हैं तो ये तो बेवकूफ़ी वाली बात हो गई ना. आपको ज़्यादा कमा
कर कम ख़र्च करना होगा ताकि आप ज़्यादा से ज़्यादा प्रॉफिट घर ले जा सकें. इस प्रॉफिट को आप बिज़नेस को बढ़ाने के लिए या unexpected घटनाओं में survive करने के लिए यूज़ कर सकते हैं. अगर आपका प्रॉफिट मार्जिन कम होता गया तो बिज़नेस बंद होने की नौबत आ सकती है. प्रॉफिट मार्जिन का सिंपल मतलब है कि पैसे कमाने के लिए आपने कितने पैसे लगाए. जब revenue और expenses को माइनस किया जाता है तब हमें प्रॉफिट मिलता है. ये मार्जिन जितना बड़ा होगा उतना ही फायदेमंद आपका बिज़नेस होगा. तो मान लेते हैं कि 200$ कमाने के लिए आपको 100$ खर्च करने होंगे. ये 100% प्रॉफिट मार्जिन
हुआ. अगर आपका प्रोडक्शन कॉस्ट 50$ है और आप एक यूनिट 150$ में बेचते हं तो प्रॉफिट मार्जिन 50% हुआ.

प्रॉफिट ही तो है जो किसी भी बिज़नेस को कंटिन्यू करने के लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट फैक्टर होता है . ये
आपके टाइम, एफर्ट और एनर्जी इन्वेस्टमेंट का रिजल्ट होता है. लेकिन बिज़नेस सिर्फ प्रॉफिट के बारे में नहीं है. पैसा इसका एक टूल है. अगर आपका प्रॉफिट फिगर बहुत बड़ा नहीं है तब भी आप एक संतुष्ट और
ख़ुश बिजनेसमैन हो सकते हैं. हम कांसेप्ट ऑफ़ sufficiency की बात कर रहे हैं. आइये इस कहानी
से सीखते हैं. एक बार एक कंपनी का सीनियर एम्प्लोयी छुट्टियाँ मनाने गया. उसके डॉक्टर ने उसे ब्रेक लेने की सलाह दी थी. इसलिए वो एक छोटे से गाँव में हरियाली और शांति के बीच कुछ समय बिताने चला गया. एक दिन, वो walk पर निकला. नदी किनारे चलते चलते उसकी नज़र एक मछली पकड़ने वाले पर पड़ी. वो
अभी-अभी मछलियाँ पकड़ कर अपने बोट के साथ लौट रहा था. उसने कई बड़ी बड़ी मछलियाँ पकड़ी थी. इतनी अच्छी क्वालिटी की मछलियाँ पकड़ने के लिए उस आदमी ने मछुआरे की बहुत तारीफ़ की. उसने पूछा, “सर, इन्हें पकड़ने में आपको कितना समय लगा”?

“ज़्यादा नहीं”, मछुआरे ने कहा. “आप कुछ देर रुक कर और मछलियाँ क्यों नहीं पकड़ लेते”? एम्प्लोयी ने पूछा. “मैं अपने परिवार का पेट भरने जितना कमा लेता हूँ, मछुआरे ने कहा. “फ़िर आप बाकी के समय में क्या करते हैं,?” आदमी ने पूछा. “मैं अपने बच्चों के साथ खेलता हूँ, बीवी के साथ समय
बिताता हूँ, अपने दोस्तों से गप मारने जाता हूँ”, उसने कहा.
“सर, मैंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से MBA किया है, मैं आपकी मदद कर सकता हूँ. आपको थोड़ी और देर
मछलियां पकडनी चाहिए. ज़्यादा प्रॉफिट से आप और बोट खरीद पाएँगे. बीच में किसी आदमी के ज़रिए
मछलियाँ बेचने की बजाय आप सीधे कस्टमर को बेच सकते हैं. फ़िर आप अपनी फैक्ट्री भी शुरू कर सकते
हैं. आप मछलियों को कैन में पैक कर के ग्रोसरी स्टोर में बेच सकते हैं. अगर आपने सब ठीक से मैनेज किया तो आप इस छोटे से गाँव से निकल कर एक बड़े शहर में रह पाएँगे. आपकी लाखों में कमाई होगी”.

“और इन सब में कितना वक़्त लगेगा?”, मछुआरे ने पूछा. “15 से 20 साल या शायद 25 साल भी लग सकते है”, उस आदमी ने कहा. “फ़िर उसके बाद क्या होगा”?, मछुआरे ने सवाल किया. “यही तो कमाल की बात है, आप अपनी ढेर सारी जमा पूँजी के साथ रिटायर हो सकते हैं उसके बाद फ़िर आप अपने बच्चों के साथ खेल सकते हैं, बीवी के साथ समय बिता सकते हैं, दोस्तों के साथ गप मार सकते हैं”. तो अंत में यही समझ में आता है कि मछुआरा उस एम्प्लोयी से कम कमाते हुए भी ज़्यादा खुश था. वो अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने जितना कमा कर अपनी जिंदगी में मस्त था. दूसरी ओर, वो एम्प्लोयी लाखों कमा रहा था लेकिन उसका सारा समय ऑफिस में बीत जाता था.उसके पास अपने परिवार के लिए समय ही नहीं था. इसने उसे थका दिया था, बीमार कर दिया था जिस वजह से डॉक्टर ने उसे रिलैक्स करने की सलाह दी थी.
इसी का मतलब होता है sufficient होना यानी काफ़ी होना. सिर्फ़ लाखों कमाने से बिज़नेस सक्सेसफुल नहीं होता. आपको उतने ही प्रॉफिट की ज़रुरत है जिससे आप ठीक से बिज़नेस चला सकें और अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा कर सकें. बचे हुए समय में आप इस जीवन का आनंद ले सकते हैं.

अभी तो आप इस दौड़ती हुई दुनिया में इतने बिजी हैं कि आपके पास ढलते हुए सूरज को देखने का भी वक़्त
नहीं है लेकिन कहीं ऐसा ना हो जाए कि आपको ये भी पता ना चले कि काम करते करते ना जाने कब जिंदगी की शाम हो गई. क्योंकि एम्प्लोयीज़ और कॉन्ट्रैक्टर्स को महीने के अंत में पैसे दिए जाते हैं तो आप हर महीने के खर्चों को कैलकुलेट कर सकते हैं. जब तक खर्चों के बाद बचा हुआ प्रॉफिट आपकी ज़रूरतों को पूरा कर सके तब तक वो बिज़नेस अच्छा है.

कन्क्लूज़न (Conclusion)
तो आपने बिज़नेस के 5 मेजर फैक्टर्स के बारे में जानाजो हैं वैल्यू क्रिएशन, मार्केटिंग, सेल्स, वैल्यू डिलीवरी
और फाइनेंस. आपने “आयरन लॉ ऑफ़ द मार्केट” के बारे में समझा. कोई भी प्रोडक्ट बनाने से पहले मार्केट रिसर्च करना और ये जानना कि क्या सच में उस प्रोडक्ट की डिमांड है या नहीं, सबसे ज़रूरी स्टेप है. बिना ऐसा किए प्रोडक्ट को मार्केट में लांच करना बेवकूफ़ी है. आपने राईट कस्टमर का ध्यान खींचने के बारे में भी सीखा. अपनी मार्केटिंग उन लोगों पर फोकस करें जिनकी आपके प्रोडक्ट को खरीदने की सबसे ज़्यादा
संभावना है. आपने गुडविल और reputation के इम्पोर्टेस के बारे में भी जाना. सिर्फ़ अच्छी क्वालिटी आपको एक ब्रांड बनाने की ताकत रखता है. लोगों को आपके प्रोडक्ट के बारे में जानने की, उसे पसंद करने की और आप पर भरोसा करने की ज़रुरत है तब जाकर वो बार बार आपसे खरीदेंगे और दूसरों को भी इसके बारे में बताएँगे. आपने predictability के बारे में जाना. इस बात का ध्यान रखें कि आप exactly वही प्रोडक्ट उसी क्वालिटी के साथ समय पर कस्टमर तक पहुँचाएं..

और अंत में आपने sufficiency के बारे में समझा. जब तक आप खर्चों के बाद उचित प्रॉफिट घर ले जाते
हैं तब तक आपका बिज़नेस सक्सेसफुल है. अमाउंट मायने नहीं रखता, ये सब के लिए अलग अलग होगा.
ज़रुरत से ज़्यादा काम करने के चक्कर में उन अनमोल पलों को ना गवाएँ जो आप अपने परिवार और अपनों के साथ बिता सकते हैं. हमारी इच्छाएँ कभी ख़त्म नहीं होंगी और ना ही वो कभी कम होने वाली है तो क्या इसका ये मतलब हुआ कि हम बस बिना रुके काम करते रहे? सिर्फ प्रॉफिट के फिगर से सक्सेस को नहीं आंका जा सकता. आपको अपने परिवार, एम्प्लोयीज़ और साथ काम करने वालों की खुशियों को भी ध्यान में रखना होगा. आप कुछ समय निकाल कर समाज सेवा के काम में भी हाथ बंटा सकते हैं. सेवा सिर्फ पैसों से नहीं की जाती. अपना समय देना भी एक सेवा है. जब आप किसी की जिंदगी को थोड़ा भी बेहतर बनाने में कामयाब हो जाते हैं तब सही मायनों में वो एक मीनिंगफुल बिज़नेस और जीवन होता है. तो अब आप जानते हैं कि आपको क्या करना है, कैसे बिज़नेस कीशुरुआत करनी है. किसी भी चीज़ को खुद को पीछे पकड़ कर ना रखने दें. अगर आपने सब कुछ समझदारी और पेशेंस के साथ फॉलो किया तो आपको एक अच्छा बिजनेसमैन बनने से कोई नहीं रोक सकता.


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