THE MILLIONAIRE REAL ESTATE INVESTOR GARY KELLER WITH DAVE JENKS AND JAY PAPASAN Books In Hindi Summary

THE MILLIONAIRE REAL
ESTATE INVESTOR
GARY KELLER WITH DAVE JENKS AND
JAY PAPASAN
इस बुक
इंट्रोडक्शन (Introduction)

क्या आप फानेंशियली वेल्थी बनना चाहते हो? क्या आप भी रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करने की सोच रहे हो?
क्या आपका रियल एस्टेट बिजनेस चल नहीं रहा? क्या आपको इन्वेस्टमेंट की नॉलेज चाहिए ? अगर इन
सभी सवालों के जवाब हाँ है तो इस बुक में आपको अपने सारे सवालों के जवाब मिलेंगे. ये बुक आपको
ये फाइनेंशीयली वेल्थी बनने की टेक्नीक्स सिखाएगी. आपको इन्वेस्टमेंट पर बेस्ड डिफरेंट वर्किंग
मॉडल्स के बारे में एक डीप नॉलेज देती है. ये मॉडल्स टाइम के साथ इवोल्व हुए है. इस बुक में आपको इन मॉडल्स के बारे में वन बाई वन बताया गया है ताकि आप अपने रियल एस्टेट स्किल्स को इम्प्रूव कर सके. ये वर्किंग मॉडल्स वो गाइडलाइन्स है जो रियेल एस्टेट इन्वेस्टर्स की गलतियों से सबक लेकर बनाये गए है. इस बुक को पढने के बाद आपको पता चलेगा कि आप से पहले लोगो ने क्या मिस्टेक्स की थी ताकि आप उन मिस्टेक्स को रीपीट करने से बच सके. और आपको इन्वेस्टिंग से जुडी हुई सुनी-सुनाई बातो की सच्चाई भी पता चल जायेगी. क्योंकि ये जानना बेहद जरूरी है कि सच क्या है और झूठ क्या, खासकर बात जब दन्वेस्टमेंट की हो तो एक तरह से ये बुक आपके लिए एक गाइड है जो आपको इन्वेस्टमेंट की हकीकत बताती है.

आप चाहे नए इन्वेस्टर हो या पुराने, ये बुक आपको रियेल एस्टेट इन्वेस्टिंग के हर स्टेप पर गाइड करेगी. इस
बुक में जो टेक्नीक्स दी गयी है उन्हें अप्लाई करके आप अपने कैश फ्लो और इक्विटी को इनक्रीज कर सकते हो. ये बुक आपको अपना वर्थ करने और पैसिव इनकम मेंटेन करने में हेल्प करेगी. क्योंकि नेट वर्थ ही हमारी एक्चुअल फाईनेंशियल वेल्थ डिसाइड करती है, और इसलिए ये बुक उसे इनक्रीज करने पर फोकस करती है. 

पर्सनल मिथ: इट डज़न्ट मैटर इफ आई वांट और
नीड इट – आई जस्ट कांट डू इट Personal
Myth: It Doesn’t matter if I want or
need it – I just can’t do it

ज्यादातर लोग किसी चीज़ को ट्राई करने से पहले ही उसका फ्यूचर बता देते है. यहाँ तक कि वो ट्राई करने
से भी डरते है. और इस तरह उनके फाइनेंशियल वेल्थी होने की पोटेंशियल काफी कम हो जाती है. अगर
आपका भी यही माइंडसेट है तो यकीन मानो, आप लाइफ के साथ समझौते कर रहे हो. ज़्यादातर लोग
अपनी फाइनेंशियल पोटेंशियल को दो तरीको से देखते है: फाइनेंशियली प्रोबेबल और फाइनेंशियली पॉसिबल. प्रोबेबिलिटी थिंकर्स अपनी पास्ट हिस्ट्री और प्रेजेंट पोटेंशियल के बेस किसी फाइनेंशियल सक्सेस को केलकुलेट करते है. उन्हें लगता है कि उनकी केलकुलेशन रियेलिस्टिक होती है और इसीलिए वो अक्सर ज्यादा फाइनेंशीयल वेल्थ अचीव नहीं कर पाते. और इसलिए कोई भी पहले से बता सकता है कि इस टाइप के लोगो फाईनेंशीयल फ्यूचर क्या होगा.

वही दूसरी तरफ पॉसिबल थिंकर्स जितना चाहे उतनी फाईनेंशीयल वेल्थ अचीव कर सकते है. इन्हें अपनी पोटेंशियल पर भरोसा होता है. ये इस बात को मानते है कि फाईनेशीयल वेल्थ उनकी मेहनत पर डिपेंड करती है नाकि उनके पास्ट पर. इस टाइप के लोग लाइफ में काफी ग्रोथ करते है. इसलिए फाइनेंशीयली वेल्थी बनना है तो पॉसिबल थिंकर बनो. ये स्टोरी है ट्रेमल क्रो (Trammel Crow) की, जिसने फाईनेंशियली वेल्थी बनने के लिए पॉसिबल थिंकिंग अप्लाई की. ट्रेमल अपने 7 भाई-बहनों के साथ
डलास में रहता था. गरीबी इतनी थी कि उसकी फेमिली गर्म पानी तक अफोर्ड नहीं कर पाती थी. इसके बावजूद ट्रेमल ने अपनी काबिलियत पर कभी डाउट नहीं किया. उसने लाइफ में काफी ग्रोथ की. 1948 में ट्रेमल ने जब रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करना शुरू किया तो उसे लगा कि अब वो फाईनेंशीयली वेल्थी बन सकता है. रियल एस्टेट मार्किट में अपोरच्यूनिटीज़ की भरमार थी. ट्रेमल सही मौके का वेट करता और हर गोल्डन चांस लपक लेता था. वो किसी भी मौके को हाथ से जाने नही देता था. फिर उसे रियेलाइज हआ कि डेब्ट लेकर और प्राइवेट इन्वेस्टर्स की हेल्प से वो काफी आगे जा सकता है. उसने डिसाइड किया कि वो अब शौपिंग मॉल्स में पैसा इन्वेस्ट करेगा जोकि उन दिनों एक प्रॉफिटेबल डील मानी जाती थी. 1955 तक शौपिंग मॉल्स काफी पोपुलर हो चुके थे और ट्रेमल का बिजनेस पीक पर पहुँच गया. 1960 तक ट्रेमल देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स में से एक बन गया था.

उसका बिजनेस लगातार ग्रो करता गया और 1980 तक ट्रेमल यूनाइटेड स्टेट्स का सबसे बड़ा रियल एस्टेट
इन्वेस्टर और प्रॉपर्टी मैनेजर बन चूका था. लेकिन ये सब इसलिए पॉसिबल हुआ क्योंकि ट्रेमल को अपनी
पोटेंशियल का एहसास हो चूका था. आज के टाइम में द ट्रेमल को कंपनी एक बड़ी कमर्शियल कंपनी है जो
काफी लोगो को रियल एस्टेट सर्विसेज़ धूवाईड कराती है. क्रो की सक्सेस उसके पोसिबिलिटी थिंकिंग पर बेस्ड है. उसने अपने पास्ट या प्रेजेंट के बेस पर अपना फ्यूचर डिसाइड नहीं किया था. अपनी पोजिटिव थिंकिंग और सेल्फ-कांफिडेंस की वजह से उसने एक ग्रेट फाईनेंशियल वेल्थ अचीव की जो लगातार साल-दर-साल बढ़ती गयी. वो समझ चूका था कि रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करने के लिए उसे खुद के पैसे लगाने की ज़रूरत नहीं है. उसने एक प्रॉपर वर्किंग मॉडल फोलो किया और दूसरो के पैसे से इन्वेस्ट किया. जिससे कि उसे खूब सारा कैश फ्लो मिला. हालाँकि क्रो की स्टोरी में सब कुछ इतना आसान भी नहीं था.

लेकिन उसने जो मेहनत की और रिस्क लिया, उसका उसे काफी अच्छा रिजल्ट मिला. और ये सच है कि
बिना रिस्क लिए हम कोई भी बिजनेस स्टार्ट नहीं कर सकते. इसलिए कभी अपनी पोटेंशियल पर शक मत
करो. अगर आप चाहो तो आप भी ट्रेमल क्रो की तरह फाईनेंशियली वेल्थी बन सकते हो.
इन्वेस्टिंग मिथ: इन्वेस्टिंग इज़ रिस्की- आई विल लूज़ माई मनी (इन्वेस्टिंग बड़ा रिस्की है,
मेरे सारे पैसे डूब जायेंगे) Investing Myth: Investing is Risky- I’ll lose my money

डेफिनेशन के हिसाब से इन्वेस्टिंग रिस्की नहीं है. एक राईट वर्किंग मॉडल फोलो करके और अपने बिजनेस
को कण्ट्रोल करके इन्वेस्टिंग का रिस्क फैक्टर हटाया जा सकता है. दरअसल हमारा माइंडसेट हमे इन्वेस्टमेंट को रिस्की बिजनेस समझने पर मजबूर कर देता है. ग्रेट इन्वेस्टर रिस्क फैक्टर को इग्नोर नहीं करते लेकिन वो रिस्क कम करने के लिए सही गाइडलाइन्स जरूर फोलो करते है. साथ ही कुछ ऐसी डील्स होती है जिनमे ज़रा भी रिस्क नहीं होता. एक ग्रेट इन्वेस्टर वही होता है जिसे रिस्क कण्ट्रोल करना आ जाये. इन्वेस्टमेंट भी बाकि बिजनेस की तरह ही रिस्की है. क्योंकि रिस्क लाइफ में हर जगह है. यहाँ तक कि रोड क्रोस करना भी उतना ही रिस्की है. इसलिए आपको एक सन प्लान फोलो करना होगा ताकि आप सक्सेसफूली इन्वेस्ट कर सको. शुरुवात में उन चीजों पर इन्वेस्ट करो जिनके बारे में आपको नॉलेज है.

जेरी क्लेवेंगेर (Jerry Clevenger) एक मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर है जो केंसास सिटी, मिसौरी में
रहता है. एक सर्टेन वर्किंग मॉडल्स और गाइडलाइंस फोलो करने की वजह से ही जेरी एक ग्रेट इन्वेस्टर
बन पाया. उसके अंदर बिजेनस रिस्क रिमूव करने की का बिलियत थी जिसकी वजह से वो इतना सक्सेसफुल बन पाया. ये स्टोरी एक रियल एस्टेट डील की है जो जेरी ने की थी. एक दिन शाम को जेरी के रियल एस्टेट एजेंट ने उसे कॉल करके एक प्रॉपर्टी के बारे में बताया जिसकी वैल्यू घट चुकी थी. पहले ये प्रॉपर्टी $65,000 की थी जोकि अब $39,000 की हो चुकी थी. जेरी को इस डील में एक अपोरच्यूनिटी नजर आई और उसने वो प्रॉपर्टी $42,000 में खरीद ली. कहीं मौका हाथ से ना निकल जाये ये सोच के उसने तुरंत डील फाइनल कर ली थी. जेरी के एजेंट ने डील सील कर ली और ओनर को इन्फॉर्म कर दिया. जेरी को मालूम था कि उसका डिसीजन एकदम राईट है. उसे अपने फैसले पर पूरा यकीन था. और इस तरह उसने इन्वेस्टमेंट से रिस्क रीमूव कर लिया था. बाद में उसने $54,000 में वो घर बेच दिया. इस डील से उसने काफी बड़ा प्रॉफिट कमाया. जेरी ने इस तरह की कई और भी सक्सेसफुल इन्वेस्टमेंट डील्स की थी. अपने जैसे कई और मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर्स की तरह जेरी तुंरत डिसाइड कर लेता था कि कौन सी डील करनी है और कौन सी नहीं. इन्वेस्टमेंट के रिस्क दूर करने के लिए और सक्सेसफुल इन्वेस्टर बनने से पहले आपको वर्किंग मॉडल्स और प्रिंसिपल्स फोलो करने होंगे. इन्वेस्टमेंट फील्ड में उतने ही रिस्क है जितना बाकी फील्ड्स में होते है. पर अगर आपको बेसिक नॉलेज है और आप वर्किंग मॉडल फोलो करोगे तो स्कसेस जरूर मिलेगी.

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इन्वेस्टिंग मिथ: सक्सेसफुल इन्वेस्टर्स मार्किट में
टाइम देते है ( Investing Myth: Successful Investors are able to time the Market)

टाइम का कांसेप्ट ऐसा है जिसके बारे में लोगो को गलतफहमी है. ज्यादातर लोग सोचते है कि गुड
टाइमिंग का मतलब है कि तुरंत किसी अपो→निटी को लपक लो. हालाँकि ये एक झूठा कांसेप्ट है. टाइमिंग
का मतबल है एक्टिव रहना और राईट टाइम पर राईट मौके की तलाश. सक्सेसफुल टाइमिंग का मतबल है
कि आप किसी टास्क को अचीव करने से पहले कितना टाइम देते हो. इसलिए एक्टिव रहो और सही मौको का इंतज़ार करते रहो. गुड टाइमिंग का राईट मीनिंग है कि आपको हर वक्त सही मौके की तलाश में रहना चाहिए. ऐसे मौके ढूंढो जो आपके क्राईटेरिया में फिट बैठते हो. आपको अपने क्राईटेरिया के हिसाब से जो चांस मिले, उस पर तुरंत रिएक्ट करो. उस मौके को हाथ से जाने मत दो. गुड टाइमिंग का कोई मैजिकल फार्मूला नहीं है. बस एक राईट मौके की तलाश ही गुड टाइमिंग है. चलो इस कांसेप्ट को एक एक्जाम्पल से समझते है कि इन्वेस्टमेंट में टाइमिंग कैसे काम करती है.

(DychesBoddiford) की जो एक रियल एस्टेट इन्वेस्टर मिलेनियर है. वो मैरीएटा , ज्योर्जिया (Marietta, Ceorgia) में बिजनेस करते है. एक दिन उन्होंने सेल क्लोजर से पहले नोटिस किया कि बैंक ने एक प्रॉपर्टी पर $700,000 से भी ज्यादा ओपनिंग बिड कम कर दिया है. उन्होंने तुरंत बैंक को कॉल करके प्रॉपर्टी की डिटेल्स मांगी. वो और उनके पार्टनर ने बैंक को कांटेक्ट करके काफी इन्फोर्मेशन ले ली जिससे उन्हें
पता चल गया कि आगे क्या करना है. ऑक्शन यानी नीलामी के टाइम पर उन्होंने वो प्रॉपर्टी खरीद ली और उसे मार्किट में सेल पर रख दिया. तीन महीने बाद उन्होंने उस प्रोएर्टी को बेचकर $100,000 का प्रॉफिट कमाया. इसे हम बोडीफोर्ड (Boddiford) का लक नहीं बोलेंगे बल्कि उनके एक्टिव बिहेवियर की वजह से उन्हें प्रॉफिट हुआ. इसे हम सक्सेसफुल टाइमिंग का परफेक्ट एक्जाम्पल बोल सकते है. सही मौके किस्मत से नहीं बल्कि हमेशा एक्टिव रहने से और राईट टाइमिंग से मिलते है. बोडीफोर्ड (Boddiford) जानते थे कि उनका क्राईटेरिया क्या है. इसलिए जैसे ही उन्हें मौका मिला उन्होंने तुरंत एक्शन लिया. ऐसे मौको का वो हमेशा इंतज़ार करते थे. ये स्टोरी बताती है कि आपको परफेक्ट अपोचूँनिटी का वेट करना है और उसे ग्रेब करना है. इसके लिए आपको परे सब के साथ इंतजार करना होगा कोई भी चांस सिर्फ लक पर नहीं होता बल्कि हमारी मेहनत और सही समय पर लिये गये सही कदम पर बेस्ड होता है। थिंक बिग गोल्स, बिग मॉडल्स एंड बिग हैबिट्स

(बड़े गोल्स, बड़े मॉडल्स और बड़ी हैबिट्स के बारे में सोचो )Think Big Goals, Big Models, And Big      Habits
इन्वेस्टमेंट में आपके माइंडसेट का सबसे इम्पोर्टेट रोल है. क्योंकि आपकी सोच ही आपकी पर्सनेलिटी बनाती है. इस बुक का एक बड़ा सेक्शन है थिंकिंग पर फोकस करता है क्योंकि यही चीज़ लंबे टाइम तक मैटर करती है. अपने गोल्स सेट करते वक्त एक मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर जैसा माइंडसेट रखो. आपको बड़ा गोल रखना पड़ेगा, बड़े मॉडल्स और बिग हैबिट्स जो आपको एक सक्सेसफुल इन्वेस्टर बनने में हेल्प करे. एक इन्वेस्टर के तौर पे अपनी पहचान बनाने के लिए सबसे पहले तो आप अपनी थिंकिंग बड़ी करो. हालाँकि सिर्फ इससे काम नहीं चलेगा. थिंकिंग बिग और मेकिंग बिग के बीच का डिफ़रेंस मिटाने के लिए “वर्किंग मॉडल्स” ब्रिज का काम करता है. आपको को भी वही वर्किंग मॉडल्स अडॉप्ट करनी होगी जिसे फोलो करके कई दुसरे लोग मिलेनियर रीएल एस्टेट इन्वेस्टर बने है. ये मॉडल्स टाइम के साथ काफी चेंज भी हुए है. आपसे पहले जो गलतियाँ लोगो ने की है, उन्हें इन मॉडल्स में कवर किया गया है ताकि आप उन गलतियों को रीपीट ना कर पाए बिग मॉडल्स सेट ऐसे प्रूव्ड प्रिंसिपल्स पर बेस्ड है जो किसी को भी इन्वेस्टमेंट में सक्सेस दिला सकते है. मिलेनियर रीयल एस्टेट इन्वेस्टर्स की तरह आप भी अपनी लाइफ स्टाइल में बिग हैबिट्स लाओ. लेकिन आपको लगातार खूब मेहनत करनी होगी तभी आप अपने गोल्स अचीव कर पाओगे.

इन्वेस्टमेंट में हैबिट्स का बड़ा रोल होता है. बुरी आदते आपको आगे बढ़ने से रोकती है जबकि गुड
हैबिट्स आपकी लाइफ इम्प्रूव करती है. ये स्टोरी खुद ऑथर गैरी डब्ल्यू. कैलर की लाइफ से है (Gary
W Keller). एक वीकेंड वाले दिन गैरी और उनकी वाइफ मैरी एक बीच रीजोर्ट में होलीडे पर गए. होटल
के लिफ्ट में उन्हें एक रियल एस्टेट एजेंट मिला जिसने उन्हें एक कोंडो डील के बारे में बताया. गैरी और उसकी वाइफ कोंडो देखने तो गए लेकिन उन्होंने खरीदा नहीं क्योंकि वो मेंटली प्रीपेयर्ड नहीं थे. $760,000 वाले प्राइस का ये कोंडो हाउस काफी अच्छी कंडीशन में था. एक हफ्ते बाद गैरी और उसकी वाइफ उस कोंडो पर डिस्कस कर रहे थे. उस वक्त गैरी को लगा कि उन्हें वो कोंडो खरीद लेना चाहिए था. उसने तुरंत रियल एस्टेट एजेंट को कॉल करके बोला कि हमे वो कोंडो खरीदना है तो उसने बताया कि वो कोंडो पहले ही सोल्ड हो चूका है. गैरी को रियेलाईज़ हुआ कि उन्होंने एक अच्छी डील मिस कर दी. अगर वो इसमें इन्वेस्ट कर लेते तो बाद में इसे डबल या ट्रिपल प्राइस में बेच सकते थे.

लेकिन कोई प्रॉपर वर्किंग मॉडल ना होने की वजह से अच्छी-खासी अपो→निटी उनके हाथ से निकल गयी.
गैरी को फील हुआ कि उन्हें इन्वेस्टमेंट की कोई नॉलेज नहीं है और ये उनके लिए एक लेसन था.
उस दिन के बाद से गैरी ने बेस्ट वर्किंग प्लान और हैबिट्स के बारे में सोचना शुरू कर दिया जो उन्हें
इन्वेस्टमेंट में हेल्प कर सके. और बेस्ट वर्किंग मॉडल्स फोलो करने के बाद उन्हें रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट में
काफी सक्सेस मिली. एक टू इन्वेस्टर की हैबिट्स अडॉप्ट करके गैरी बहुत जल्दी ही एक मिलेनियर एस्टेट
इन्वेस्टर बन गए थे. ये स्टोरी शो करती है कि बेस्ट वर्किंग मॉडल्स और हैबिट्स आपके बिजनेस लाइफ
स्टाइल के लिए कितनी इम्पोर्टेट है और ये आपको सक्सेसफुल बनाती है. बस ये याद रखो कि आपको
अपनी जरूरत के हिसाब से हमेशा बेस्ट वर्किंग मॉडल फोलो करना है.

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द नेटवर्थ मॉडल ऑफ़ द मिलेनियर रियल एस्टेट greece (The Net Worth Model Of The
Millionaire Real Estate Investor)

नेट वर्थ का मतलब है कि आपके पास कितना पैसा है. ये मॉडल आपकी नेट वर्थ को इनक्रीज करने के लिए बनाया गया है जिसमें 3 स्टेप फोलो करने होते है : पाथ ऑफ़ मनी के बारे में सीखना, एक पर्सनल बजट मैनेज करना, पर्सनल नेट वर्थ ट्रैक करना. ज़्यादातर लोग नहीं जानते कि मनी का एक पाथ होता है. मिलेनियर्स अपने पैसे को राईट डायरेक्शन में लगाते है जो उन्हें बड़ा प्रॉफिट देता है. पैसे को सही जगह लगाने के बहुत से तरीके है, जैसे कि या तो आप लोन पर पैसा दो या फिर एसेट्स खरीद लो जो आपको लगातार कैश फ्लो देता रहे. नेट वर्थ मॉडल का सेकंड स्टेप है के पर्सनलाइज बजट मैनेज करना. एक बार जब आपको पता चल जाये कि पैसा कहाँ लगाना है तो इस पर फिक्स रहो. क्योंकि अगर आप माइंड चेंज करते रहोगे तो आपकी सक्सेस के चांस उतने ही कम होंगे. एक प्लान बनाओ और उस पर स्टिक रहो. सबसे अच्छा होगा कि आप इन्वेस्टिंग करने का एक बजट बना लो. नेट वर्थ मॉडल का थर्ड स्टेप है अपनी वर्थ टेक करना.

आपको अपने सारे एसेट्स जोड़ने है और उसमे से लाएबिलिटीज़ घटा दो, जो बचे वही आपका नेट वर्थ
है. अपनी नेट वर्थ ट्रेक करने से आपको बैटर फोकस मिलेगा जो बताएगा कि आप कहाँ खड़े हो. नेट वर्थ
मॉडल समझने के लिए हम एक एक्जाम्पल लेंगे. ये स्टोरी है ऑथर के अंकल और आंटी की. क्लेम और वुडी की गेलेना पार्क, टेक्सास में एक बार्बरशॉप थी. उन्हें फील हुआ कि इस बार्बरशॉप की इनकम से वो फाईनेंशियली वेल्थी नहीं बन पाएंगे. क्लेम और वुडी वैसे काफी हार्डवर्किंग थे लेकिन दोनों को पता था कि उन्हें एक्स्ट्रा सोर्स ऑफ़ मनी की काफी जरूरत है. तो इसलिए दोनों ने इन्वेस्टमेंट का प्लान किया और नेट वर्थ मॉडल फोलो करना शुरू कर दिया. दोनों ने इन्वेस्टमेंट करनी स्टार्ट कर दी. वो अपनी इनकम को बजट करके उसमे से इन्वेस्टमेंट के लिए पैसा बचाने लगे. प्लानिंग के साथ सेविंग करने से उनका बजट मेंटेन रहने लगा था. और अब वो इन्वेस्ट करने के लिए रेडी थे. फिर उन्हें ऑस्टिन, टेक्सास से एक इन्वेस्टर ग्रुप मिला जो उनके शहर में आया था. ये लोग इन्वेस्टर्स को दो मेजर हाईवेज़ के पास लैंड ऑफर कर रहे थे. क्लेम और वूडी ने इस मौके का फायदा उठाकर पैसा इन्वेस्ट कर दिया. कुछ सालो बाद उनकी मेहनत काम आई और वो मल्टीमिलेनियर्स बन गए. उन्होंने अपना ड्रीम पूरा करने के लिए तीन सिंपल रूल्स फोलो किये. पहला. उन्होंने एक फिक्स पाथ चज किया कि उन्हें पैसा कहाँ लगाना है और उसी पर स्टिक रहे. और उन्होंने अपनी इनकम से एक बजट बनाया.

उन्होंने फालतू के खर्चे एकदम बंद कर दिए थे. उन्होंने इन्वेस्टमेंट के लिए पैसा बचाया ताकि वो लॉन्ग टाइम के लिए फाईनेंशीयली वेल्थी बन सके. वो अपनी नेट वर्थ हमेशा ट्रेक करते थे जिससे उन्हें पता रहता था कि कहाँ फोकस करना है. आपको भी नेट वर्थ मॉडल के ये तीन सिम्पल रूल्स हमेंशा याद रखने होंगे. इन रूल्स की हेल्प से आप बहुत जल्दी फाईनेंशीयली ग्रो कर पाओगे. ये याद रखो कि आपका पैसा राईट डायरेक्शन में जाना चाहिए, एक गुड बजट मेंटेन करो, और अपनी नेट वर्थ ट्रेक लगातार करते रहो.
द फाईनेंशियल मॉडल ऑफ़ द मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर (मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर का फाइनेंशियल मॉडल )The Financial Model Of The Millionaire Real Estate Investor
सेकंड वर्किंग मॉडल है फाइनेंशियल मॉडल. इसके हिसाब से रियल एस्टेट फील्ड में पैसे कमाने के दो ही
तरीके है. ये दोनों तरीके कई और दुसरे स्पेशिफिक तरीको से मिल जाते है. हालाँकि हम बोल सकते है
कि मोटे तौर पर रियल एस्टेट में अर्निंग के सिर्फ दो ही तरीके है. मल्टीमिलेनियर्स इन दो तरीको के अंदर कई सारे दुसरे ऑप्शन भी एक्सप्लोर करते है जोकी इस प्रोसेस को कॉम्प्लेक्स बना देता है. वैसे शुरूवात में
आपको सिर्फ दोनों बेसिक तरीको पर ही फोकस करना चाहिए. इस मॉडल से फाइनेंशियल वेल्थ कमाने के ये दो मेथड है इक्विटी बिल्ड-अप और कैश फ्लो. ये दोनों एक ही टाइम पर आपको फायदा दे सकते है.

इक्विटी बिल्ड-अप आपकी नेटवर्थ बढ़ाएगा जबकि कैश फ्लो आपको रेगुलर इनकम देता रहेगा. आप
कैश फ्लो को अपनी नीड्स के लिए, कर्जे उतारने के लिए या रियल एस्टेट में प्रॉपर्टी बनाने के लिए यूज़ कर सकते हो. रियल एस्टेट में बराबर कैश फ्लो का इन्वेस्ट करने से नेट वर्थ आपकी नेट वर्थ बढती है. अब इस फाइनेंशियल मॉडल को डिटेल्स में समझने के लिए एक एक्जाम्पल लेंगे. ये स्टोरी है उस बिजनेसमेन की जिसकी इनकम कैश फ्लो से ग्रो हुई और नेट वर्थ इक्विटी से बढ़ी. 1983 में उसने अपना करियर स्टार्ट किया था. उसने शुरू में $10,000 की इन्वेस्टमेंट से $1.5 मिलियन की इक्विटी कमाई. और उसका कैश फ्लो हर साल $45,000 बढ़ता गया. और ये सब हुआ 20 सालो की उसकी मेहनत से. इस बिजनेसमेन ने $50,000 की एक प्रॉपर्टी ली. उसने $10,000 डाउन पेमेंट के तौर पर दिए और बाकि के $40,000 को 30 साल के मोर्टेज लोन पर फाइनेंस कर लिया. उसने मीडियम प्राइस का फुलप्रूफ फार्मूला यूज़ किया था, 20% डिसकाउंट, 20% डाउन पेमेंट और 30 साल का लोन. और उसकी सक्सेस का सीक्रेट यही फार्मूला
इस आदमी ने एक मॉडल यूज़ किया जिससे उसकी इक्विटी और कैश फ्लो काफी तेजी से बढ़ने लगा. इसके अलावा ये आदमी अपने कैश फ्लो का यूज़ करके रियल एस्टेट में बार-बार इन्वेस्ट करता गया जिससे उसकी टोटल नेट वर्थ इनक्रीज हुई. इस तरह फाइनेंशियल मॉडल को फोलो करके उसने एक स्ट्रोंग इक्विटी पोजीशन अचीव की और उसे लगातार कैश फ्लो का प्रॉफिट भी मिलता रहा. उसने अपने कैश फ्लो को कई तरह से यूज़ किया जैसे कि रियल एस्टेट में डायरेक्ट पैसा लगा के और अपने कर्जे उतारने के लिए. इसलिए एक चीज़ याद रखो! अपने कैश फ्लो और इक्विटी को कई गुना बढ़ाने के लिए हमेशा बेस्ट मॉडल फोलो करो. कैश फ्लो को यूज़ करने का सबसे बेस्ट तरीका है कि उसे रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करते रहो, जिससे कि आपकी नेट वर्थ जल्दी बढ़ सके.

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द नेटवर्क मॉडल ऑफ़ द मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर (मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर का नेटवर्क मॉडल (The Network Model of The Millionaire Real Estate Investor)
थर्ड वर्किंग मॉडल है नेटवर्क मॉडल. इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जिसने बिना किसी हेल्प के सक्सेस अचीव की हो. क्योंकि हर सक्सेसफुल आदमी के पीछे एक एफिशिएंट टीम जरूर होती है. मिलेनियर्स ऐसे लोगो का ग्रुप बनाते है जो उन्हें पूरे प्रोसेस में हेल्प कर सके. यही वो लोग होते है जो मिलेनियर्स को राईट एडवाइस, कॉन्टेक्ट्स वगैरह देते है. अपने ड्रीम अचीव करने के लिए आपको लोगो की एडवाइस लेनी ही पड़ती है. ताकि आप अपना बेस्ट दे सके. बिना नेटवर्क्स के अकेले बिजनेस करना काफी मुश्किल है क्योंकि हमे किसी एडवाईजर्स या गाइड की जरूरत हमेशा पड़ेगी. लोगो के नेटवर्क को हम तीन
सर्कल में बाँट सकते है: इनर सर्कल, सपोर्ट सर्कल और सर्विस सर्कल. इनर सर्कल में वो लोग होते है
जो हमारे मेंटोर्स या पार्टनर्स होते है. सपोर्ट सर्कल में इवेस्टर्स, लेंडर्स और अटोर्नीज़ वगैरह होते है. उसके
बाद आता है सर्विस सर्कल जिसमे फाइनेंशीयल प्लानर्स और क्लीनिंग सर्विस देने वाले लोग होते है. ये स्टोरी है बिलेनियर सैम जैल की (Sam Zell who is a billionaire.) छोटी उम्र से ही जैल को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट में काफी इंटरेस्ट था. उसकी ये जर्नी कम उम्र में ही शुरू हो गयी थी और कॉलेज लाइफ तक चलती रही.

कॉलेज में उसे रोबर्ट लुरी मिला और दोनों फ्रेंड्स बन गए. फिर बाद में दोनों बिजनेस पार्टनर भी बने और यही नेटवर्किंग का इनर सर्कल है. उनके फर्स्ट इन्वेस्टमेंट में 15 घर थे जो उन्होंने कुछ लैंडलॉर्ड्स से
कांटेक्ट करने के बाद अरेंज किया. ये लैंडलॉर्ड्स सपोर्ट सर्कल की कैटेगरी में आते है. 1968 में जैल और लुरी ने इक्विटी ग्रुप इन्वेस्टमेंट क्रिएट किया जो उनका काफी सक्सेसफुल वेंचर रहा. जैल ने जो वर्क नेटवर्क बिल्ड किया था वो काफी एफिशिएंट था जिससे उसे अपना बिजनेस प्रॉपरली चलाने में काफी एडवाइस मिलती थी. इसलिए किसी भी बिजनेस में पहले नेटवर्क बिल्ड करो और उसे मेंटेन रखो और लोगो के साथ प्रॉपर तरीके से एंगेज रहो. इनर सर्कल में वो लोग आते है जो वाकई में आपकी फाइनेंशियल कंडिशन की केयर करते है. और आपके सपोर्ट सर्कल में प्रोफेशनल लोग होते है जो आपको बिजनेस के डिफरेंट आईडियाज़ पर एडवाइस देते है, आपको डील फाईनलाईज़ करने में हेल्प करते है और आपके क्लाइंट्स के साथ रिलेशनशिप मैनेज करते है. ये लोग आपको ट्रांजेक्शन और हायरिंग प्रोसेस में भी हेल्प करते है. सर्विस सर्कल में इंडिपेंडेंट कांट्रेक्टर्स या फ्रीलांसर्स आते है. किसी भी पर्टीक्यूलर ट्रांजेक्शन में इनका अपना एक सेलेक्टेड काम होता है. ये वो प्रोफेशनल होते है जो आपके इन्वेस्टमेंट में फिजिकली शामिल रहते है. ये स्टोरी हमे एक स्ट्रोंग वर्क टीम की इम्पोर्टेस बताती है. ये वो लोग है जो हमें बिजनेस के हर स्टेप पर गाइड करते है. इन तीनो नेटवर्किंग टीम सर्कल के लोगो के बिना आप आगे बढ़ ही नहीं सकते.

द लीड जेनरेशन मॉडल ऑफ़ द मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर (The Lead Generation
Model Of The Millionaire Real Estate Investor)

फोर्थ वर्किंग मॉडल लीड जेनरेशन मॉडल है. हर किसी को स्कसेस अचीव करने के लिए एक लीड की
जरूरत पड़ती है. क्योंकि बिना लीड्स के सक्सेसफुल बनना इम्पॉसिबल है, खासकर बात जब इन्वेस्टमेंट
की हो. लीड्स जितना ज्यादा होंगी, आपको उतने ही ज्यादा मौके मिलेंगे. ये आपको डिफरेंट टाइप
की अपोरच्यूनिटीज़ देती है जिनमे से आप बेस्ट चूज़ कर सकते हो. अगर आपके पास लीड्स नहीं है तो
इन्वेस्टमेंट में प्रोब्लम्स आती है और आप अपने गोल्स अचीव नहीं कर पाते. लीड जेनरेशन मॉडल 4 सिंपल सवालों पर बेस्ड है जो है : मुझे क्या चाहिए? जो मुझे चाहिए उसे पाने में कौन मेरी हेल्प करेगा? मुझे प्रॉपर्टी कहाँ मिलेगी या इससे जुड़े लोग कहाँ मिलेंगे ? कौन सी प्रोपर्टीज़ रियल अपोर्चुनिटीज़ हो सकती है ?

जब आपको इन सारे सवालों के जवाब मिल जाए तो मान लो कि सक्सेस मिलेगी ही मिलेगी. ये स्टोरी प्रूव
करती है कि लाइफ में कुछ भी अचीव करने के लिए लीड्स सबसे ज्यादा इम्पोर्टेट है. फेमस फिक्शनल
केरेक्टर शेर्लोक होम्स का नाम तो आपने सुना होगा. किसी केस को सोल्व करने के लिए वो पहले लीड्स
ढूंढते थे. शेर्लोक होम्स ने डॉक्टर वाटसन के साथ मिलकर कई सारे केस सोल्व किये थे. उन्हें कोई एक
लीड मिलती थी जो उन्हें बाकी लीड्स तक ले जाती थी और इस तरह वो केस की तह तक पहुँच जाते थे.
ये जो लीड्स होती है, ये आपके आपकी डेस्टिनी से जोडती है. शेर्लोक होम्स जैसे लीड से लीड कनेक्ट
करते थे वही सेम चीज़ इन्वेस्टमेंट पर भी अप्लाई होती है. बस आपको उन लीड्स पर फोकस करने की
ज़रूरत है जो आपको अपनी मंजिल तक ले जायेंगी. आपको किस चीज़ की तलाश है ? आपके माइंड
में एक क्लियर पिक्चर होनी चाहिए कि आप किस टाइप की प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करोगे. क्योंकि आपको
एक्जेक्टली क्या चाहिए, ये पता होना बेहद जरूरी है. और कौन इसमें आपकी हेल्प करेगा, ये सवाल
भी इम्पोर्टेट है. क्योंकि आपको ऐसे किसी इंसान की जरूरत है जो आपको आपकी राईट लीड्स दे सके.

THE MILLIONAIRE REAL
ESTATE INVESTOR
GARY KELLER WITH DAVE JENKS AND
JAY PAPASAN
द एक्वीजीशन मॉडल ऑफ़ द मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर (The Acquisition Model of
The Millionaire Real Estate Investor)

फिफ्थ और लास्ट मॉडल है एक्वीजीशन मॉडल. ज्यादा पैसा कमाने के लिए आपको डिफरेंट डील्स करनी
होंगी. क्योंकि आपके लिए पैसा आपके इन्वेस्टमेंट्स कमाएंगे. इसलिए इन्वेस्टिंग करते रहे. आपको अपने
एफ, मेहनत और सब्र का फल जरूर मिलेगा. लेकिन एक्वीजीशन से पहले उस फील्ड की प्रॉपर नॉलेज जरूरी है जिसमे आप इन्वेस्ट करने जा रहे है ताकि उसमे किसी भी तरह का रिस्क ना हो. क्योंकि अक्लमंदी के बिना सक्सेस नहीं मिल सकती. एक्वीजीशन मॉडल में आप दो चीजों के लिए पैसा खर्च करते हो : कैश फ्लो और इक्विटी बिल्ड-अप फाईनेंशियल मॉडल की तरह. आपके पास कैशफ्लो और इक्विटी के लिए 3 ऑप्शन होते है: लीज  का आप्शन, बाई एंड होल्ड, बाई इम्प्रूव और होल्ड (lease option, buy and hold, buy improve, and hold.)एक्वीजीशन मॉडल बेसिकली हमे इन्वेस्टमेंट अपोद्रूनिटीज़ को ऐनालाइज़ करने की टेक्नीक देता है.

हम इस एक्वीजीशन मॉडल को समझने के लिए एक एक्जाम्पल लेंगे. एक बिजनेसमेन ने रियेल एस्टेट डील में पैसा इन्वेस्ट किया. उसे इन्वेस्टिंग में काफी नॉलेज है और साथ ही वो बड़ा हार्डवर्किंग भी है. और वो सब्र रखता है और जल्दी ही मिलेनियर बन जाता है. जब भी वो कोई प्रॉपर्टी देखने जाता है तो उसके बारे में एक पेपर में केलकुलेशन कर लेता है और फिर डिसाइड करता है कि उसे ये डील करनी चाहिए या नहीं.
एक्चुअल में उसकी केलकुलेशन एक्वीजीशन मॉडल पर बेस्ड होते है. उसका मेन गोल फाईनेंशियली वेल्थी बनना है, तो इसलिए वो एक्वीजीशंन मॉडल के दो तरीको में से एक को फोलो करता है जोकि कैश और कैश फ्लो और इक्विटी के लिए है.. किसी भी डील को फाइनल करने से पहले वो उसके डिफरेंट एंगल्स के बारे में सोचता है. वो पहले लीज आप्शन के बारे में सोचता है उसके बाद प्रोपर्टी खरीदता है. प्रॉपर्टी खरीदने के बाद वो उसे इम्प्रूव करने के लिए वो प्रॉपर्टी की वैल्यू बढाने और अपन वेल्थ इनक्रीज करने के लिए उसे होल्ड पर रख लेता है. वही दूसरी तरफ एक और आदमी है जो अपने इन्वेस्टमेंट से कैश कमाना चाहता है. लेकिन वो एक्वीजीशन मॉडल को अलग तरह से फोलो करता है. इस आदमी का मेन गोल प्रॉपर्टी खरीदना और बेचना है जिससे कि वो जल्दी पैसा कमा सके. इस तरह वो ना तो प्रॉपर्टी को इम्प्रूव करता है और ना ही होल्ड. तो उसकी ओवरआल वेल्थ में कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन इन दोनों तरीको से ये दोनों मिलेनियर बने, फर्क बस इतना है कि इनमे से एक ही तरीका इंसान को वेल्थी बनाता है.

कनक्ल्यूजन (Conclusion)
इस बुक से आपने सीखा कि सेल्फ डाउट आपके सपने कभी पूरे नही होने देता. कभी भी खुद को
अंडरएस्टीमेट मत करो. क्योंकि आपके अंदर भी एक मिलेनियर बनने की पोटेंशियल मौजूद है. अपने पास्ट
या प्रेजेंट के बेस पर अपने फ्यूचर को कभी प्रेडिक्ट मत करो कि आप कुछ अचीव कर सकते हो या नहीं.
खुद को किसी भी लिमिट में मत बांधो क्योंकि आपके पास उड़ने के लिए पंख है. इन्वेस्टिंग उतना भी रिस्की
बिजनेस नहीं है जितना कि आप सोचते हो. ये आपकी सोच है जो इन्वेस्टिंग को रिस्की मानती है.

इन्वेस्टिंग हो या कोई और बिजनेस, रिस्क हर जगह है. लेकिन आप अगर इन्वेस्टमेंट को कम रिस्की बनाना चाहते हो तो आपको कुछ वर्किंग मॉडल्स फोलो करने होंगे. आपने इस बुक में ये भी सीखा कि किसी इंसान को स्कसेसफुल बनने के लिए तुरंत मौके ढूँढने की ज़रूरत नहीं है बल्कि आपको पूरी तैयारी के साथ सही मौके का इंतज़ार करने के बाद ही कोई एक्शन लेना है. साथ ही ये याद रखो कि राईट वर्किंग मॉडल्स फोलो करना आपके और आपकी डेस्टिनी के बीच किसी ब्रिज यानी पुल की तरह काम करेगा.
नेट वर्थ मॉडल से आपने सीखा कि अपनी नेट वर्थ को कैसे इनक्रीज किया जाए और इससे जुड़े तीन सिंपल
रूल्स के बारे में भी आपने जाना. इससे एक चीज़ आप समझ चुके होंगे कि आपको पैसे तक पहुँचने के
लिए एक रास्ता डिफाइन करना होगा, एक बजट मैनेज करना होगा और अपने नेट वर्थ को ट्रेक करना होगा. सेकंड मॉडल से आपने पैसे कमाने के दो तरीके सीखे जो है कैश फ्लो और इक्विटी बिल्ड-अप. इक्विटी बिल्ड-अप आपकी टोटल नेट वर्थ को इनक्रीज करती है. रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट का थर्ड मॉडल जिस चीज़ पर सबसे ज्यादा फोकस करता है, वो है लोगो के साथ नेटवर्किंग और वर्क टीम की इम्पोर्टेस पर. क्योंकि आप अकेले सबकुछ नहीं कर सकते. आपको एक टीम की जरूरत पड़ती है जो आपको राईट एडवाइस दे. इसीलिए एक वर्क टीम फॉर्म करना बहुत ज़रूरी है. फोर्थ मॉडल आपको इन्वेस्टमेंट में लीड्स की इम्पोर्टेस सिखाता है. ये आपके उस सवाल का जवाब है जो आप खुद से पूछते हो कि “मुझे एक्जेक्टली क्या चाहिए ?” और लास्ट में वर्किंग मॉडल आपको सिखाता है कि कैसे डिफरेंट डील्स को ऐनालाइज़ करके सही और गलत डील्स के बीच का फर्क समझा जाए. ये सारे वर्किंग मॉडल्स फोलो करके आप इन्वेस्टमेंट के रिस्क काफी हद तक कम कर सकते हो. लेकिन खुद पे कभी डाउट मत रखो, आपके अंदर एक मिलेनियर रियल एस्टेट इन्वेस्टर बनने की पोटेंशियल है. और इस बात पर पूरा यकीन रखो. तो आज से ही हार्डवर्क करना शुरू कर दो और अपनी जीत हासिल करो.

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