THE HARD THINGS ABOUT HARD THINGS: BUILDING… BEN HOROWITZ Books In Hindi Summary

THE HARD THINGS ABOUT
HARD THINGS: BUILDING…
BEN HOROWITZ
इंट्रोडक्शन(Introduction)

क्या आप एक नए उभरते हुए बिजनेस मैन हैं? क्या आप एक स्टार्ट अप शुरू करने में दिलचस्पी रखते
हैं? क्या आपको लगता है कि आपमें एक बड़ी कंपनी चलाने की एबिलिटी है?अगर हाँ, तो आप बिलकुल
सही जगह पर आए हैं. ये बुक आपको स्टार्ट अप से लेकर सक्सेस तक गाइड करेगी.बेन आपको अपने
पर्सनल एक्सपीरियंस के सफ़र पर ले जाएँगे कि कैसे उन्होंने एक फेल्ड स्टार्ट अप से Hewlett
Packard के साथ डील की.इसमें आप बेन के स्ट्रगल और जीत के बारे में जानेंगे. “Opsware” के सीईओ
आपको टॉप पर पहुँचने के लिए गाइड करेंगे. From Communist to Venture Capitalist मैं बर्कली में बड़ा हुआ. मेरेदादा-दादी कम्युनिस्ट थे.कॉलेज कम्पलीट करने के बाद मैं अपने पिता के पास लॉस एंजिल्स रहने चला गया.मेरे एक दोस्त ने ब्लाइंड डेट सेट किया था और उसी के द्वारा मैं अपनी वाइफ फेलिसिया से मिला. हमने डिनर तैयार किया लेकिन फेलिसिया तब तक आई नहीं थी. मैंने फेलिसिया को फ़ोन किया और उसे आने के लिए मनाया. डेढ घंटे बाद वो आई. मझे पहली नजर में ही वो अच्छी लगने लगी. उसके साथ समय बिताना मुझे बहुत अच्छा लगा.आज फेलिसिया और मैं 25 साल से एक अच्छी शादीशुदा जिंदगी जी रहे हैं और हमारे तीन बच्चे हैं.

मुझे Silicon Graphics (SGI) में इंजिनियर की जॉब मिली थी.वहाँ काम करते हुए मैं रोज़ली
बुउनाउरो(Roselie Buonauro) से मिला. रोज़ली ने एक स्टार्ट अप की शुरुआत की थी और उसने मुझे
जॉब ऑफर की. इसी समय के दौरान हमें पता चला कि मेरी दूसरी बेटी मारिया को आटिज्म था. वहाँ
काम करना मेरे मुश्किल हो गया था और अंत में मैंने जॉब छोड़ने का फैसला किया कुछ महीनों बाद मुझे
Netscape में जॉब मिली. मार्क एंडरसन ने मेरा इंटरव्यू लिया. मैंने मार्क के साथ टेक्निकल नॉलेज
शेयर की.आज 18 साल हो गए हम बिज़नस पार्टनर होने के साथ-साथ करीबी दोस्त भी बन गए हैं. अब मैं
कंपनी के Enterprise Web Server प्रोडक्ट लाइन का इनचार्ज था. Netscape का Microsoft के साथ ज़बरदस्त मुकाबला था.जब Microsoft ने Windows 95 को फ्री में रिलीज़ करने की बात कही तो Netscape के लिए खतरा पैदा हो गया था.Operating System की सेल के मामले में Microsoft
का मार्केट में मोनोपोली था. Netscape ने तब Web-Servers से प्रॉफिट कमाने का फैसला
किया.इस बीच, Microsoft ने अपने Web server, Internet Information Server (IIS) का पहला वर्ज़न रिलीज़ किया.उसमें Netscape की तुलना में ज़्यादा बेहतर features थे.

मैंने महसूस किया कि IIS के रिलीज़ होने से पहले हमारे पास सोचने के लिए सिर्फ पांच महीने थे. मैं
अपने डिपार्टमेंट के हेड, माइक होमर, से मिलने गया. वो हमेशा अपने काम में डूबे रहने वाले इंसान थे और
प्रेशर की सिचुएशन में और भी ज़्यादा कड़ी मेहनत करते थे. अगले कुछ महीनों में हमने Netscape
SuiteSpot लॉच किया.आने वाले सालों में SuiteSpot तेज़ी से बढ़ने लगा. अंत में America Online (AOL) ने कंपनी को खरीद लिया. AOL टेक्नोलॉजी से ज़्यादा मीडिया में इंवेस्ट करते थे. इसलिए मैंने और मार्क ने एक नई कंपनी बनाने के बारे में सोचा और Cloud के ऊपर काम करने का फ़ैसला किया. हमने अपनी टीम में और मेंबर्स को add किया.Timothy Hower “Lightweight Directory Access
Protocol” के को-इनवेंटर थे और Sik Rhee ‘Kiva Systems’ के को-फाउंडर थे. अंत में, 1999
में ‘Loudcloud’ को लॉच किया गया.

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I Will Survive

मैं Loudcloud का सीईओ बनने जा रहा था. मार्क एंडरसन बोर्ड में फुल टाइम चेयरमैन के रूप में काम
करने वाले थे और टिमोथी हावर चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर का काम संभालने वाले थे. Netscape
की सक्सेस के कारण मार्क इंवेस्टर्स को जानते थे. उन्होंने Benchmark Capital के एंडी रैचलेफ
(AndyRachleff) के साथ बातचीत की. वो 45 मिलियन $ इंवेस्ट करने जा रहे थे और मार्क 6
मिलियन $. कंपनी की टोटल वैल्यू 66 मिलियन $ थी. Loudcloud ने जल्द ही cloud स्ट्रक्चर बनाना
शुरू कर दिया. हमने टैलेंटेड एम्प्लाइज को काम पर रखा और काम शुरू करने के लिए एक बड़ी
जगह में चले गए. सिर्फ़, नौ महीनों में कंपनी बहुत प्रॉफिट कमाने लगी. इसके बाद वो घटना हुई जिसे
‘dot-com crash’ कहा जाता है. 1996 के आस पास इन्टरनेट तेज़ी से बढ़ रहा था. लोगों की दिलचस्पी
इन्टरनेट में बढ़ने लगी.तब शुरुआत हुई ऑनलाइन बिज़नेस की और कुछ इन्टरनेट बेस्ड कम्पनीज काफ़ी
अच्छा परफॉर्म भी कर रही थी. इन्टरनेट पर बढती एक्टिविटीज देखकर और कंपनी की अच्छी पर फॉरमेंस देखकर इंवेस्टर्स उसमें पैसा इन्वेस्ट करने लगे.उन्हें यकीन था कि इन्टरनेट का यूज़ बढ़ने से उन कम्पनीज की वैल्यू बढ़ेगी जिसके कारण उन्हें भी बहुत प्रॉफिट होगा. यही सोच कर लोग अंधाधुन पैसा इन्वेस्ट करने लगे. कईयों ने तो कंपनी के बिज़नेस मॉडल या उसकी return तक को देखना भी ज़रूरी नहीं समझा. लेकिन जैसा की उम्मीद की गई थी, असल में ये कम्पनीज अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाई और उनका दिवाला निकल गया. उनकी शेयर के दाम गिरने लगे और कई ऑनलाइन बिज़नेस बंद हो गए.ऑनलाइन बिज़नेस अपने नाम के आगे डॉट कॉम लगाते थे इसलिए इसे डॉट कॉम क्रेश कहा जाने लगा.

जल्द ही Microsoft को एक मोनोपोली के रूप में डिक्लेअर कर दिया गया. इससे स्टार्ट अप्स को
भारी नुक्सान होने लगा. कम्पटीशन में बने रहने के लिए Loudcloud को बहुत पैसा की ज़रुरत थी.
सिचुएशन बिगडती ही जा रही थी, तब मैंने फैसला किया कि शेयर्स को आम जनता को बेचना ही पड़ेगा.
मुझे लगा बिल कैम्पबेल को समझाना मुश्किल होगा, जो पहले एक पब्लिक कंपनी के सीईओ रह चुके थे.
वो बोर्ड मेंबर्स में से एक थे. आख़िरकार, कंपनी अपने शेयर्स मार्केट में लाने के लिए तैयार हो गई.
पब्लिक की नज़रों में Loudcloud की reputation इतनी अच्छी नहीं थी. मीडिया लगातार कंपनी के नुक्सान के बारे में रिपोर्ट कर रहे थे. हमसे फ़िर स्प्लिट स्टॉक को रिवर्स करने के बारे में सोचा.

स्प्लिट स्टॉक रिवर्स करने का मतलब है कि शेयर्स को जोड़कर उनका नंबर कम कर दिया जाएगा लेकिन
उनकी वैल्यू ज़्यादा होगी. इस फैसले से कंपनी में काम करने वाले लोग और ज़्यादातर इंवेस्टर नाराज़ थे.
कंपनी दिवाला निकलने के कगार पर आ गई थी. मैं इतना चिंतित था कि मुझे नींद नहीं आती थी. मुझे तो
इतना भी होश नहीं था कि मैंने क्या पहना था या मैंने दो रंग के जूते तो नहीं पहन लिए थे. तब मैं सोचने लगा कि अगर हमारा दिवाला निकल गया तो मैं क्या करूंगा. तब मैंने एक नई सॉफ्टवेर कंपनी Opsware बनाने के बारे में सोचा. Opsware एक सॉफ्टवेर था जो Loudcloud पर चलता था. तब मैंने Opsware को Loudcloud से अलग करने के बारे में सोचा.कंपनी ने दोनों को अलग करने के काम में दस engineers को लगाया. इस काम में लगभग नौ महीने लगे. आगे आने वाले महीनों में Loudcloud को ख़रीदने के लिए कई buyer मिले जैसे IBM और EDS. अंत में EDS ने Loudcloud को 63.5 मिलियन
$ में खरीदा.मेरी टीम और मैं Opsware के मालिक बने रहे और सॉफ्टवेर कंपनी को शुरुआत की. हमारी
कंपनी की सिचुएशन पहले से बेहतर थी. लेकिन अभी भी मुझे कुछ एम्प्लाइज को EDS को देना पड़ा और
कुछ को काम से निकालना पड़ा. This Time With Feeling EDS के साथ डील करने के बाद कंपनी अब भी स्ट्रगल कर रही थी. मैंने कुछ कमरे रेंट पर लिए और अपने एम्प्लाइज को खाने पर ले गया. मैंने कंपनी की पोजीशन के बारे में उन्हें सब सच-सच बता दिया. मैंने उनसे कहा कि अगर उन्हें कंपनी के फ्यूचर के बारे में डाउट है तो वो इसे छोड़ कर जा सकते हैं. उस दिन, 80 में से 2 लोगों ने काम छोड़ दिया.

Opsware को सिर्फ एक प्लेटफार्म Loud cloud पर चलाने के लिए बनाया गया था. अभी इस प्रोडक्ट
में कमाल के features की कमी थी और इसे बेचा नहीं जा सकता था. EDS संतुष्ट नहीं था और कॉन्ट्रैक्ट
ख़त्म करना चाहता था. कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म होने का मतलब था कि Opsware अपना 90% इनकम खो देता.
मैंने तुरंत एक मीटिंग के लिए जेसन रोसंथल और एंथनी राईट को बुलाया. मैंने जेसन को EDS का इन
चार्ज बना दिया और एंथनी को रिलेशनशिप मैनेजर. वो फ्रैंक जॉनसन से मिले (बदला हुआ नाम) जो EDS में काम करते थे. फ्रैंक ने हमें प्रॉब्लम का हल निकालने के लिए 60 दिनों का समय दिया. एंथनी ने मुझे फ़ोन पर बताया कि EDS Tangram नाम के एक कंपनी का प्रोडक्ट इस्तेमाल करती थी जो फ्रैंक को बेहद पसंद था. लेकिन Computer Associates के साथ EDS के अग्रीमेंट के कारण, वो EDS को अपना प्रोडक्ट
खरीदने के लिए मजबूर करेंगे. फ्रैंक को उनका प्रोडक्ट पसंद नहीं आया. इसलिए हमने Tanaram को खरीदने और उसे अपने सॉफ्टवेर के साथ फ्री में बेचने का फ़ैसला किया.Tangram एक छोटी कंपनी थी और उन्होंने इस डील में दिलचस्पी दिखाई. नॉर्म फेल्प्स कंपनी के सीईओ थे. डील पर साइन किये गए और हमने Tangram को 10 मिलियन $ में खरीद लिया.फ्रैंक बहुत खुश थे, हम उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे थे. लेकिन अभी हमें ये तय करना था कि जिस कंपनी को हमने खरीदा है उसका क्या करना है.

कंपनी के सीएफओ, जॉन नेली ने अपनी जॉब खो दी थी. कुछ समय बाद उनकी हेल्थ ख़राब होने लगी. जॉन को ब्रेन कैंसर था. क्योंकि वो Opsware के एम्प्लोई नहीं थे, उनका insurance नहीं कराया जा सकता था. मैंने उनके मेडिकल ख़र्च को उठाने का फैसला किया. दुर्भाग्य से, जॉन कुछ महीनों बाद गुज़र गए. मुझे जॉन की पत्नी का लैटर मिला जिसमें उसने कहा था कि वो मेरी मदद के लिए शुक्रगुज़ार थीं.
अब मार्केट में एक नया competitor BladeLogic आ गया था. मार्क ने भी Ning नाम की कंपनी बनाने का फ़ैसला किया. अब मार्केट में हर डील के लिए कड़ा मुकाबला हो रहा था और हम Blade Logic से हारने लगे. आने वाले छ महीने पूरी कंपनी के लिए बहुत challenging थे. मैंने अपने एम्प्लाइज से कहा कि वो कड़ी मेहनत करें. हमने पूरे हफ़्ते काम किया-सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक.

आखिर हमने Rendition Networks को 33 मिलियन $ में खरीदा और हमारे प्रोडक्ट को बेचने के
लिए Cisco Systems के साथ डील की. कई buyers ने हमें कांटेक्ट किया लेकिन मैंने हमेशा
कहा कि Opsware को बेचा नहीं जाएगा. बोर्ड ने भी इसमें मेरा साथ दिया. लेकिन अंत में हमने Hewlett
Packard के साथ एक डील साइन की. हमें 1.65 बिलियन $ कैश में ऑफर दी गई. शुरुआत में, मैं दुखी
था. अक्सर मैं घबराकर उठ जाता और रोने लगता कि मैंने अपने आठ साल की मेहनत बेच दी. लेकिन बाद में जाकर मुझे एहसास हुआ कि ये कितना स्मार्ट डिसिशन था. हमारी टीम ने ज़ीरो से शुरू कर कंपनी को 1.65 बिलियन $ की कंपनी बना दिया था.

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When Things Fall Apart

एक सीईओ को कई तरह के स्ट्रगल का सामना करना पड़ता है जैसे वो ख़ुद पर डाउट करता है , कंपनी बनाने के डिसिशन पर डाउट करता है या लोगों को काम से निकालने के लिए भी उलझन में पद जाता है. किसी को भी ख़ुद पर सभी जिम्मेदारियों का बोझ नहीं लेना चाहिए. लोग सोचते हैं कि जो नुक्सान एक सीईओ को परेशान करता है वही एम्प्लाइज को भी परेशान करेगा. लेकिन ये सच नहीं है. जिस काम की ज़िम्मेदारी जिस इंसान पर होती है उसे ही सबसे ज़्यादा फ़र्क पड़ता है. कंपनी में काम करने वाले लोगों के साथ इमानदार होना बहुत ज़रूरी है.उन्हें कंपनी के बारे में सब सच पता होना चाहिए. ऐसा करने से आप एम्प्लाइज का विश्वास हासिल करते हैं. एम्प्लाइज कंपनी में आने वाली प्रोब्लम्स को पहचान लेते हैं इसलिए उन्हें ये प्रॉब्लम शेयर करने के लिए encourage करना चाहिए. एम्प्लाइज को काम से निकालना एक मुश्किल काम होता है. इसलिए फ्यूचर पर फोकस कर ध्यान से ये डिसिशन लेने चाहिए. एक बार जब सीईओ को पक्का यकीन हो जाता है कि उन्हें किसी को जॉब से निकालने की ज़रुरत है तो उस काम में ढील नहीं देनी चाहिए.

कंपनी बढ़ रही हो और वो उसे हैंडल नहीं कर पा रहा है. कारण समझने के बाद बोर्ड को ख़बर दी जानी
चाहिए. सीईओ को खुलकर साफ़-साफ़ कारण बता देना चाहिए. एक बार कोई फैसला लेने के बाद उस
पर अटल रहना चाहिए, उसे बदलने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए. एम्प्लोई को बताते समय ये कहना चाहिए
“हमने फ़ैसला किया है कि…” और ये नहीं कहना चाहिए “हमें लगता है कि….”. उसके बाद कंपनी को एम्प्लाइज के बदलाव के बारे में बताया जाना चाहिए. ठीक इसी तरह, किसी को अपनी पोजीशन से नीची पोजीशन पर भेजना भी बेहद मुश्किल काम होता है. इस प्रोसेस को डिमोट करना कहते हैं. डिमोट होने वाला एम्प्लोई शर्मिंदा महसूस कर सकता है. डिमोट करते समय उनकी कड़ी मेहनत को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए. एक कंपनी में सबसे ज़्यादा वहाँ पर काम करने वाले लोगों का ध्यान रखा जाना चाहिए, उसके बाद प्रोडक्ट का और अंत में प्रॉफिट का. कंपनी में लोगों की देखभाल करने का मतलब है कि कंपनी अपने लोगों की कद्र करती है और वो जगह उनके काम करने के लिए एक अच्छी जगह है. एक अच्छी कंपनी वो होती है जहां ज़रूरी काम को अनदेखा नहीं किया जाता.सिस्टम पूरी तरह से आर्गनाइज्ड होता है और सारे काम बिना रुकावट के चलते रहते हैं. एक अच्छी कंपनी वो होती है जो कंपनी की खामियों पर चर्चा करने को बढ़ावा देती है वो ऐसे डिस्कशन को reputation से ज़्यादा इम्पोटेंस देती है. कंपनी में काम करने वाले लोगों को उनकी जॉब के लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. ये मान लेना कि क्योंकि वो पढ़े लिखे हैं वो अपने काम को अच्छे से कर लेंगे, गलत है. उन्हें बताया जाना चाहिए कि उनसे क्या उम्मीदें हैं. ट्रेनिंग एम्प्लोई की प्रोडक्टिविटी और प्रोडक्ट की क्वालिटी दोनों को बढ़ाते हैं.

कभी-कभी किसी ऐसे इंसान को काम पर रखना पड़ता है जो उस पोजीशन के लिए आपसे भी ज़्यादा पढ़े
लिखे होते हैं. ऐसा करने के लिए आपको कॉफिडेंट होना चाहिए कि आप उस कैंडिडेट में क्या qualities
चाहते हैं. इसके लिए आपको सिर्फ़ इंटरव्यू के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि एक पेपर पर वो पॉजिटिव
क्वालिटी लिखनी चाहिए जो आप उसमें चाहते हैं और वो नेगेटिव क्वालिटी जिसे आप अनदेखा कर सकते हैं. इसके हिसाब से आपकोफ़ैसला लेना चाहिए कि आप किसी को सेलेक्ट करना चाहते हैं या नहीं. एक इंटरव्यू करने वाली टीम बनाई जानी चाहिए और अंत में, फाइनल डिसिशन सिर्फ एक इंसान द्वारा लिया जाना चाहिए.जो इंसान कंपनी की ज़रूरतों को जानता है और जिसने लोगों को काम पर रखने का प्रोसेस बनाया था उसे ही फाइनल डिसिशन लेना चाहिए.

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Concerning the Going Concern:

कंपनी की policy और डिसिशन में क्लैरिटी होनी चाहिए. एक बार, किसी ने मीटिंग में बुरे लैंग्वेज
का मुद्दा उठाया. ये आरोप मुझ पर लगाए गए थे. कुछ एम्प्लाइज इसमें कम्फर्टेबल थे और कुछ नहीं.
Microsoft और Intel जैसी कम्पनीजमें ये सब चलता था इसलिए मैंने भी इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं
दिया. हालांकि, इसे encourage नहीं किया जाना चाहिए लेकिन इसे मना करना अनरीयलिस्टिक
लगा.एम्प्लाइज को ये बताना भी ज़रूरी है कि बुरी लैंग्वेज का इस्तेमाल कर किसी को सेक्सुअली परेशान
करना और बाद में उसके लिए बहाना बनाना सही नहीं है. मैंने मीटिंग में एम्प्लाइज से कहा कि या तो इसे पूरी तरह एक्सेप्ट करें या पूरी तरह रिजेक्ट करें, बीच का कोई रास्ता नहीं हो सकता. और क्योंकि मेरा मानना था कि इसे बैन करने से हमारी प्रोडक्टिविटी लिमिट हो सकती है इसलिए मैंने इसे allow किया था.
उस दिन के बाद कभी कोई शिकायत नहीं आई. कभी-कभी प्रॉब्लम के लिए किसी solution
की ज़रुरत नहीं होती. बस कंपनी की policy में साफ़-साफ़ बताया जाना चाहिए कि क्या किया जा
मे नहीं पॉलिटिक्स हर फील्ड में होती है, तो कंपनी में ये पॉलिटिक्स कम से कम होनी चाहिए. कंपनी में पॉलिटिक्स का मतलब है सिर्फ़ अपने कैरियर के बारे में सोचना और उसी के अनुसार आगे बढ़ना. अपनी कंपनी में पॉलिटिक्स को कम करने के लिए ऐसे लोगों को काम पर रखें जो कंपनी की तरक्की को पहले रखते हों. प्रमोशन का प्रोसेस स्ट्रिक्ट होना चाहिए.एक एम्प्लोई की प्रमोशन से दूसरों के मन में जलन की भावना पैदा हो सकती है. उन्हें लग सकता है कि उनके काम को कम वैल्यू दी जाती है.ये आमतौर पर तब होता है जब प्रमोशन मिलने वाला इंसान उसके लायक नहीं होता. इसलिए प्रमोशन का प्रोसेस फॉर्मल और सबके सामने खुलकर होना चाहिए.

कभी-कभी कंपनी में स्मार्ट और पढ़े लिखे लोग बुरे एम्प्लोई साबित होते हैं. हो सकता है कि वो अपने काम
में काफ़ी अच्छे हों लेकिन अक्सर वो अपनेकाम को स्किप भी करते हैं. अगर आप चाहें तो इन्हें कंपनी में
बनाए रख सकते हैं लेकिन याद रखें कि ये आपकी कंपनी के प्रोसेस कोस्लो कर देंगे. कई बार आपको ऐसे लोगों को काम पर रखना पड़ता है जो उम्र में बड़े होते हैं. सीनियर एम्प्लाइज यंग generation की तुलना में अपने परिवार से मिलना और उनका ध्यान रखने पर ज़्यादा तवज्जो देते हैं. वो अपने साथ उन वैल्यूज और आदतों को लेकर आते हैं अपने साथ उन वैल्यूज और आदतों को लेकर आते हैं जो शायद कंपनी के माहौल से मेल नहीं खाते. लेकिन उनके एक्सपीरियंस आपके लिए मददगार हो सकते हैं. किसी भी कंपनी में बेस्ट टैलेंट और नॉलेज को हासिल करने के लिए कभी-कभार ये रिस्क ज़रूर लेना चाहिए.

How To Lead Even When You Don’t
Know Where You’re Going

Loudcloud को EDS को बेचने के बाद इंवेस्टर्स ने अपने Opsware के शेयर बेच दिए जिससे स्टॉक की
कीमत गिर गई. इस बारे में क्या किया जाना चाहिए, इस चर्चा के लिए बोर्ड ने मीटिंग बुलाई गई. हालांकि,
बोर्ड को बहुत सहानुभूति हो रही थी और उन्होंने खुले दिमाग से सारे सुझाव सुने लेकिन हम इसका कोई हल
नहीं निकाल पाए. हालात ने मुझे और मार्क को मैनहैट्नमें एलन एंड कंपनी के ऑफिस में जाने के लिए मजबूर कर दिया था. हर्ब एलन बड़े ही क्लासी और विनम्र इंसान थे. उन्होंने हमारे प्रेजेंटेशन को ध्यान से सुना और कहा कि वो हमारी मदद करेंगे. एलन एंड कंपनी ने Opsware के स्टॉक को खरीदा
और स्टॉक की कीमत 0.35$ से 3$per शेयर हो गई. एलन एंड कंपनी के कई क्लाइंट्स भी Opsware
के मेजर इंवेस्टर बन गए. इस डील के कई सालों बाद मैंने हर्ब से पूछा कि उन्होंने एक ऐसी कंपनी में इंवेस्ट करने का फ़ैसला क्यों किया जिस पर किसी और को भरोसा नहीं था जबकि एलन एंड कंपनी का टेक्नोलॉजी से इतना कोई ताल्लुक नहीं था. उन्होंने कहा कि भले ही वो हमारे बिज़नेस को समझते नहीं थे,लेकिन उन्होंने हमारे पक्के इरादे और हिम्मत को देखा.

उन्हें हमारे विश्वास पर विश्वास था कि हम ज़रूर सक्सेसफुल होंगे. इस तरह मैंने महसूस किया कि क्या
सही किया जा सकता है इस बात पर फोकस करना चाहिए.अतीत में लिए गए गलत डिसिशन के बारे में
सोचना या ये सोच कर डरना कि कुछ गलत हो गया तो, इसमें कोई बुद्धिमानी नहीं है. एक सक्सेसफुल सीईओ बनने के लिए इंसान में लीडरशिप क्वालिटी होनी चाहिए.उन्हें एम्प्लाइज के लिए माहौल को फ्रेंडली बनाना चाहिए. इससे एम्प्लाइज को ये विश्वास हो जाता है कि कंपनी में उनकी भी कद्र की जाती है और वो बेहतर परफॉर्म करते हैं. एक सीईओ को तीन बातें पता होनी चाहिए.पहला ये है कि उन्हें पता होना चाहिए कि वो क्या कर रहे हैं.जिसका मतलब है फाइनेंस, प्रोडक्ट और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी के बारे में जानना. दूसरा है, कंपनी के गोल के अनुसार सबसे काम करवानातीसरा है, गोल अचीव करना.

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First Rule of Entrepreneurship: There Are No Rules

Opsware को बेचते समय HP की शुरूआती बोली 14$ per शेयर थी. BM ने 14.05$ की बोली HP ने अंत में दोनों को 14.25$ का काउंटर दिया. इन तीनों डील में “CA Clause” शामिल था.इसका नाम सॉफ्टवेयर कंपनी Computer Associates के बिज़नेस प्रैक्टिस के ऊपर रखा गया था. CA ने अपने कस्टमर्स को उनके प्रोडक्ट के लिए फ्री अपग्रेड देने का झूठा वादा कर धोखा दिया था. उन्होंने बाद में प्रोडक्ट के नाम को बदल दिया और जो चीज़ फ्री में अपग्रेड होनी चाहिए थी उसके बदले पैसे लेने लगे. इसलिए कस्टमर्स ने अपने कॉन्ट्रैक्ट में “CA Clause” को शामिल किया था.इसमें कहा गया था कि अगर कोई नया प्रोडक्ट लॉच किया जाता है जिसमें पहले function के साथ कुछ एक्स्ट्रा features होंगे तो वो प्रोडक्ट मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के अंदर आएगा और उसके लिए कोई एक्स्टा पैसा नहीं दिया जाएगा.

हमारे नेशनल ऑडिट पार्टनर Ernst & Young ने हमें अगले 48 घंटों में revenue गाइडलाइन्स को
दोबारा बदलाव के साथ प्रेजेंट करने के लिए कहा. जिसका मतलब था कि उसे कस्टमर्स के कॉन्ट्रैक्ट में
भी लागू करना होगा. हमारे कस्टमर्स तीन बड़े बैंक थे और इतने कम समय में उनके कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव कर पाना नामुमकिन था. हमने पूरी रात काम किया और सिर्फ़ 24 घंटों में तीनों कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव किए. BM ने हमारा साथ छोड़ दिया लेकिन HP ने कांफिडेंस नहीं खोया मगर उन्होंने per शेयर की कीमत गिराकर 13.75% कर दी थी. बोर्ड ने डिसिशन लेने के लिए एक मीटिंग बुलाई.उन्हें लगा कि हमें ऑफर ले लेना चाहिए लेकिन मैं सहमत नहीं था.मैंने Hewlett Packard से बात की कि हम ओरिजिनल बोली के साथ ही आगे बढ़ना चाहते थे, आखिर वो मान गए. उस समय जब हम कंपनी के लिए सबसे बड़ी डील
करने वाले थे, हम सब कुछ खो भी सकते थे. ऐसे समय में अक्सर ये उम्मीद की जाती है कि सही या
गलत के बारे में कोई बहस किए बिना सिचुएशन को एक्सेप्ट कर लेना चाहिए. लेकिन मेरे हिसाब से इसके
बजाय आपको प्रॉब्लम का हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए.

एक सीईओ के लिए सबसे मुश्किल फ़ैसला ये होता है कि उसे कंपनी को बेचना चाहिए या नहीं. अगर कंपनी में टॉप पर जाने की पोटेंशियल है और उसने मार्केट में जगह बना ली है तो उसे नहीं बेचना चाहिए.
एग्ज़ाम्पल के लिए, Google ko 1 बिलियन से ज़्यादा तक का ऑफर मिला था. हालांकि ये बहुत बड़े
ऑफर थे लेकिन Google में इससे भी बड़ा होने की पोटेंशियल थी. ये एक इतना कमाल का प्रोडक्ट था
जिसमें टॉप पर पहुँचने की पॉवर थी.अगर कोई अपनी कंपनी को बेचना चाहता है तो उसे खुद को इमोशनली
और practically तैयार करना होगा.

कन्क्लूज़न (Conclusion)
इस बुक ने हमें Opsware के को-फाउंडर और बिजनेसमैन बेन होरोविट्ज़ के बारे में जानकारी दी, जो
कि उनके एक सक्सेसफुल सीईओ बनने की जर्नी के बारे में था.आपने उनके पर्सनल एक्सपीरियंस के बारे में जाना कि कैसे उन्होंनेअपने स्ट्रगल को आगे बढ़ने के लिए इस्तेमाल किया.इस बुक ने आपको सिखाया कि किसी कंपनी में आने वाली अलग अलग प्रॉब्लम का सामना कैसे किया जा सकता है. आपने सेल्स में महारत हासिल करने वाले आर्ट के बारे में जाना. आपने एम्प्लाइज को ट्रेनिंग देने के इम्पोर्टेस के बारे में भी जाना. इसमें आपने उन स्किल्स के बारे में जाना जो एक सीईओ में होनी चाहिएताकि कंपनी अच्छे तरीके से चलाई जा सके.इतना सब कुछ जानने के बाद आप भी किसी स्किल्ड सीईओ से कम नहीं हैं. बेन होरोविट्ज़ के टिप्स और सलाह के साथ आपका स्टार्ट अप भी सक्सेस की राह पर आगे बढ़ सकता है.

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