The Gospel of Wealth Andrew Carnegie Books In Hindi Summary

The Gospel of Wealth Andrew Carnegie इंट्रोडक्शन आप अमीर लोगों के बारे में क्या सोचते हैं? क्या उन्हें अपनी दौलत बाकी दुनिया में बाँट देनी चाहिए? या ऐसा कदम आम जनता को आलसी बना सकता हैं? एंडू कार्नेगी के दिमाग में ऐसे विचार दौड़ते रहते हैं. अगर सारे अमीर लोगों ने अपने सारे पैसे बाँट दिए, तो क्या ये दुनिया एक बेहतर जगह बन जाएगी? इस बुक में, आप अमीर और गरीब के बीच की खाई के बारे में जानेंगे. आप सीखेंगे कि ये गैप सभी के लिए एक विन विन सिचुएशन कैसे है. सबसे ज़रूरी बात, ये इंसानियत की भलाई के लिए एक ज़रूरी टूल हैं. तो क्या आप ‘ गॉस्पल ऑफ़ वेल्थ’ को सुनने के लिए तैयार हैं? The Gospel of Wealth Andrew Carnegie दौलत जब भी धन-दौलत की बात आती हैं, तो ये ज़ाहिर हैं कि ये सब लोगों के बीच बराबर बँटा हुआ नहीं हैं. कुछ के पास बहुत ज़्यादा हैं तो कईयों के पास दौलत होती ही नहीं हैं. कार्नेगी ने बताया कि कैसे दौलत को सही ढंग से सब में बराबर बँटना चाहिए ताकि अमीर और गरीब मिल जुल कर रह सकें. आज आप जैसे रहते हैं, वो उससे बिलकुल अलग है जैसे एक हजार साल पहले लोग रहा करते थे. आपके पूर्वजों ने जिंदा रहने के लिए हर चीज़ या resource को दूसरों से बांटा जैसे कि उन्होंने जो भी खाया-पिया दूसरों ने भी वही खाया. जैसे-जैसे हमारी सभ्यता यानि सिविलाइज़ेशन ने प्रोग्रेस किया, लोगों के बीच का गैप बढ़ता चला गया. कुछ ऐसे लोग थे जो एक शानदार जिंदगी जीते थे और कुछ की ज़िंदगी साधारण थी. लेकिन अब तो ये गैप काफी गहरा हो गया हैं जो साफ़-साफ़ दिखाई भी देता हैं. कार्नेगी को इसमें फायदा ही दिखा. उनके लिए अमीर और गरीब के बीच का अंतर होना जरूरी हैं. कार्नेगी इसकी तुलना घरों से करते हैं. मान लीजिए कि एक बंजर ज़मीन पर कई सौ साधारण से घर बने हैं. फिर, इन घरों के बीच में एक बड़ी हवेली हैं. इस हवेली में दुनिया की सबसे बढ़िया पेंटिंग, किताबें इस हवेली में दुनिया की सबसे बढ़िया पेंटिंग, किताबें और आर्ट रखे हुए हैं. ये हवेली सिविलाइज़ेशन का ही प्रतीक हैं. घरों और लोगों के साथ सब कुछ अच्छा होना चाहिए. और, लोगों के लिए सबसे अच्छा उसके पास दौलत का होना ही है. ये बात सुनने में गलत लग सकती है, लेकिन कार्नेगी के पास इसके लिए एक एक्सप्लनेशन हैं. इन सालों में, इंसानियत ने बड़ी लम्बी छलांग लगाई हैं. ये कहना ठीक होगा कि शुरुवात में इंसानियत का मतलब बहुत ही साधारण सा था. एग्जाम्पल के लिए, एक गुरु और उसके शिष्य को लेते हैं. सालों पहले, ये दोनों एक साथ ही काम करते थे. गुरु अपने शिष्य को पढ़ाते थे. बदले में, शिष्य अपने गुरु की हर तरह से मदद करते थे. साल बीतते और शिष्य खुद ही एक मास्टर या गुरु बन जाता. फिर सिखाने के लिए वो भी एक शिष्य को चुनता और, फिर से वही साईकल शुरू हो जाता. यही जिंदगी थी. हम एक दूसरे की मदद करते थे. इस सिस्टम से काफी लोगों को फायदा पहुँचता था. एक गरीब आदमी वो कर सकता था जो वो आम तौर पर नहीं पाता था. कभी-कभी, एक किसान के पास जमींदार से ज़्यादा जायदाद होती थी. लेकिन दूसरों को मदद करने वाले इस सिस्टम से इकॉनमी को कोई फायदा नहीं पहुंच सकता था. इस तरह, ‘मुकाबले का कानून’- ‘Law of Competition’ पैदा हुआ. अब मालिक नहीं चाहते थे कि उनके नीचे काम करने वाले लोगों के पास उनसे ज्यादा दौलत हो. इस कारण मजदरी के पैसे भी कम थ कि उनक नाच काम करन वाल लागा क पास उनस ज़्यादा दौलत हो. इस कारण मज़दूरी के पैसे भी कम कर दिए गए. गरीब और अमीर के बीच के रिश्ते में तनाव आ गया था. इस मुकाबले से छुटकारा पाना नामुमकीन है और, यही इंसानियत कायम करने के लिए सही हालात बनाता हैं. ये, असल में ‘ सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट’ ही हैं. जो दूसरों से ज़्यादा लायक हैं, वही अपनी मर्जी के मुताबिक जी सकता हैं. जो जीतें, उसकी ही बात मानी जाए. अगर आप काम करते हैं, तो ही आपको पैसे मिलेंगे. काफी लोगों ने इस सिस्टम से छुटकारा पाने की कोशिश की. इन लोगों का कहना हैं कि सोसाइटी को क्लास में नहीं बांटना चाहिए. कोई भी न तो अमीर और कोई भी गरीब नहीं होना चाहिए. लेकिन ये सही नहीं हैं. इंसानियत की जड़ें बहुत गहरी और मज़बूती से बैठी हुई हैं. सोसाइटी में लोगों के बीच बने गैप के कारण ही इंसानियत आगे बढ़ती है. हमारे बीच मुकाबला होने कि वजह से ही हम एक दूसरे से बेहतर होने की कोशिश करते हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं हैं कि दौलत बांटना एक बुरी सोच हैं. कभी कभार ऐसा भी होता हैं जब किसी के पास ज़रूरत से ज़्यादा दौलत होती हैं. तो उस अमीर शख्स को क्या करना चाहिए? कार्नेगी का कहना हैं कि एक्स्ट्रा या सरप्लस दौलत को बांटने के तीन तरीके हैं. पहला, दौलत आदमी के वारिस को दिया जा सकता हैं. दूसरा, इसे पब्लिक प्रॉपर्टी और जगहों को बेहतर बनाने के लिए उस अमीर आदमी के वारिस को दिया जा सकता हैं. दूसरा, इसे पब्लिक प्रॉपर्टी और जगहों को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं. तीसरा, जिसकी दौलत हैं, वो जैसे जिसे चाहे बाँट सकता हैं. पहला तरीका सबसे कॉमन हैं. अक्सर कई सारे देश इसी को मानते हैं. इसमें, बड़े बेटे को सारा पैसा और संपत्ति मिलता हैं. ये माँ-बाप के लिए भी अच्छी बात होती हैं. लेकिन विरासत में दौलत मिलना इतना आसान नहीं हैं जितना कि लगता हैं. काफी लोग अपनी नई-नई मिले संपत्ति को ढंग से संभाल नहीं पाते हैं. उन्हें लगता हैं कि दौलत खत्म नहीं हो सकती. लेकिन वे खुद ही इसे खत्म कर देते हैं. क्या इस तरह से विरासत में मिली दौलत बच्चों के लिए बोझ नहीं हैं? अक्सर, ये फायदा देने से ज़्यादा नुकसान देती हैं. इसलिए, अपनी सारी दौलत विरासत में छोड़ना समझदारी नहीं हैं. अपने फैमिली को दौलत बांटकर उनकी मदद करना ठीक हैं पर उन्हें उतना ही देना चाहिए जितना वे संभाल सकें. उससे ज़्यादा देना एक गलती साबित हो सकता हैं. इसे लिमिट में ही करना चाहिए. दूसरा तरीका बहुत ज़्यादा आइडियल तो नहीं हैं क्योंकि इसमें अमीर आदमी के गुज़र जाने के बाद उनकी दौलत का बंटवारा हो सकता हैं. लेकिन क्या उन्हें इस बात का पता नहीं होना चाहिए कि उनकी दौलत का सही इस्तेमाल हो रहा हैं या नहीं. इसके अलावा, मौत के बाद छोड़ी गई विरासत पर भारी टैक्स भी लग के बाद छोड़ी गई विरासत पर भारी टैक्स भी लग सकता हैं. इसके लिए बेहतर होगा कि जिंदा रहते हुए ही अपने विरासत के बारे में डिसिशन कर लें. तीसरा तरीका एक बहुत क्लियर सोल्युशन हैं. ये गरीब और अमीर के बीच अच्छे रिश्तों के लिए रास्ता बनाता हैं. तीसरा तरीका ही वो परफेक्ट सिचुएशन पैदा कर सकता हैं जिसमें इंसानियत फलती-फूलती हैं. इस तरह दौलत को बांटने से बहुत लोगों का फायदा होता हैं. लेकिन इसे धीरे-धीरे ही बांटना चाहिए. हो सके तो कई साल लगाकर इसे बांटना चाहिए. तो, अमीर लोग दूसरों की भलाई के लिए जो कर सकते हैं, उसका सबसे बेहतरीन तरीका हैं अपने एक्स्ट्रा सरप्लस दौलत को बांटने का सही इंतज़ाम करना. इसमें आम जनता के फायदे का ध्यान रखा जाए. जिनके पास बिलकुल भी पैसे नहीं हैं, जो गरीब हैं, उन्हें सबसे ज़्यादा फायदा पहुंचाया जाए. पैसे वाले लोगों के पास सब तरह के सहूलियतें होते हैं इसलिए उनके कुछ फ़र्ज़ होते हैं. सबसे पहले, उन्हें बिलकुल सिंपल लाइफ जीना चाहिए. उनके नाम की कोई आलीशान चीज नहीं होनी चाहिए. अपने पास पड़ी बाकी पैसों के लिए, उसका फ़र्ज़ बनता हैं कि वे लोगों की भलाई के लिए इसका इस्तेमाल करे. ऐसे दौलतमंद लोगों के पास ज़्यादा एक्सपीरियंस और समझदारी होती हैं. उन्हें अपने दौलत का इस्तेमाल उन लोगों की मदद करने में करना चाहिए जो उनसे कम हैंसियत के हैं. लेकिन ऐसे एक्स्ट्रा सरप्लस दौलत का हकदार कौन हैं? गरीबों को दान देने में, इस बात पर सोचना चाहिए अपने दौलत का इस्तेमाल उन लोगों की मदद करने में करना चाहिए जो उनसे कम हैंसियत के हैं. लेकिन ऐसे एक्स्ट्रा सरप्लस दौलत का हकदार कौन हैं? गरीबों को दान देने में, इस बात पर सोचना चाहिए कि जो लोग खुद की मदद करते हैं, उनकी मदद करनी चाहिए. ये उन लोगों को दान देने का कोई फायदा नहीं हैं जो इन पैसों को बर्बाद करेंगे. हो सकता हैं कि वे पैसों को गलत कामों में ख़र्च कर दें. जैसा कि हमने बात की हैं, पब्लिक इंस्टीट्यूशन के लिए दौलत छोड़ना सबसे आइडियल तरीका नहीं हैं. हालांकि, ये फिर भी किसी अमीर के दौलत को बांटने का एक अच्छा तरीका हैं. पब्लिक इंस्टीट्यूशन जैसे पार्क और लाइब्रेरी लोगों के लिए, उनका मन बहलाने में बहुत फायदेमंद होते हैं. अमीर और गरीब इस अरेंजमेंट से मिलजुल कर रहेंगे. इससे अमीर आदमी उन लोगों की देखभाल करेंगे जो गरीब हैं. अमीर लोगों की एक ज़िम्मेदारी होती हैं, इंसानियत की देखभाल. उनके पास ऐसा करने का ज़रिया होता हैं. मान लीजिए एक धनवान आदमी की मौत हो जाती हैं. अगर उसने अपने धन को आम लोगों में नहीं बांटा तो उसे सम्मान की नज़रों से नहीं देखा जाएगा. कोई उसकी मौत पर दुःख नहीं जताएगा. उसे कोई याद नहीं करेगा. The Gospel of Wealth Andrew Carnegie दूसरों की भलाई करने के बेहतरीन रास्तें दौलतमंद लोगों के लिए अच्छा होगा अगर वो खुद ही इसके बांटने के काम को देखें. लेकिन इस काम के लिए कुछ स्टैंडर्ड होना चाहिए. सबसे पहले तो अमीर शख्स के इरादे अच्छे होने चाहिए. उसका कोई छिपा हुआ मकसद नहीं होना चाहिए. उसकी इच्छा सिर्फ गरीबों की मदद होनी चाहिए. लेकिन, ये दौलत किसी को भी ऐसे ही नहीं देनी चाहिए. अमीरों को ध्यान से सोच-समझ कर ही ये फैसला करना चाहिए कि उन्हें अपनी दौलत किसे बांटनी हैं. मदद के लायक वही लोग होने चाहिए जो खुद की मदद करते हैं. यही एक गोल्डन स्टैंडर्ड हैं जिससे आप ये तय कर सकते हैं कि दौलत किसे देनी चाहिए. एक और बात जिसपर सोचने-समझने की ज़रूरत हैं. वो ये कि दान में कितनी दौलत देनी चाहिए. अक्सर, देखा गया हैं कि आप जितना ज़्यादा देते हैं, नतीजा उतना ही ज़्यादा बुरा निकलता हैं. आप जितने दयालु होते हैं, लोग उतना ही फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. ऐसे लोग जिंदा रहने के लिए आप पर ही मोहताज़ रहेंगे. और, ये जैसा आप चाहते हैं, वैसा बिलकुल भी नहीं होगा. याद रखिए कि एक दौलतमंद आदमी का लक्ष्य इंसानियत को बेहतर बनाना हैं. जनता को Do A रहग. जार, पजसा जाप पाहत , पसा बिलकुल भी नहीं होगा. याद रखिए कि एक दौलतमंद आदमी का लक्ष्य इंसानियत को बेहतर बनाना हैं. जनता को आलसी बनाना कभी भी इस लक्ष्य का हिस्सा नहीं हो सकता. अब, किसी के पास पड़ी सरप्लस दौलत को सही ढंग से बांटने के हिस्ट्री को देखते हैं. सबसे पहली बात, सरप्लस दौलत का यूज़ ज्ञान फैलाने के लिए किया जा सकता हैं. सेनेटर स्टैनफोर्ड ने एक नामी यूनिवर्सिटी बनवाने के लिए अपने लाखों डॉलर का यूज़ किया. यहां तक कि लोग अब तक उनके इस गिफ्ट के लिए सेनेटर स्टैनफोर्ड की तारीफ़ करते हैं. उनके ही जैसे, दुनिया में बहुत से पैसे वाले लोग हैं. उनके काम के लिए उनकी तारीफ़ करनी चाहिए. नॉलेज यानि ज्ञान, न सिर्फ यंग लोगों की सोच को आगे बढ़ाती हैं, बल्कि ये देश को भी आगे बढ़ने में हेल्प करती हैं. दूसरा, सरप्लस दौलत को लाइब्रेरी के लिए यूज़ किया जा सकता हैं. कार्नेगी ने खुद भी फ्री लाइब्रेरीयों के लिए पैसे लगाने की बात की हैं. जब वो छोटे थे तो कार्नेगी बड़ी बेचैनी से कर्नल एंडरसन की मिनी लाइब्रेरी के खुलने का इंतजार करते थे. वहां की हर किताब कार्नेगी के लिए एक खजाने की तरह थी. वो जानते हैं कि किताबों ने ही उन्हें वो शख्स बनाया हैं जो वो थे. कार्नेगी ने उस लाइब्रेरी के चार दीवारी के अंदर ही बहुत कुछ सीखा था. तीसरा, हेल्थ से जुड़े इंस्टिट्यूट की फंडिंग करना भी एक अच्छा स्टेप हैं. हॉस्पिटल और लैब जैसे इंस्टिट्यूट टंगानिगन को सजाने के लिा लटन तकरी टोने हैं कुछ सीखा था. तीसरा, हेल्थ से जुड़े इंस्टिट्यूट की फंडिंग करना भी एक अच्छा स्टेप हैं. हॉस्पिटल और लैब जैसे इंस्टिट्यूट इंसानियत को बचाने के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं. इसलिए ये क्लियर हैं कि क्यों इस फील्ड में सरप्लस पैसों को डालना चाहिए. वरना इंसान बीमारियों का मुकाबला कैसे करेगी ? अगर उस एरिया में हॉस्पिटल पहले से ही ज़्यादा हैं, तो एक दौलतमंद उन हॉस्पिटल को सुधारने में मदद कर सकता हैं. यही करोड़पति स्वर्गीय मिस्टर वेंडरबिल्ट ने किया था. उन्होंने कोलंबिया कॉलेज में एक केमिकल लैब बनाने के लिए पैसे दिए. लैब का काम बीमारी के जड़ का पता करना था. यहाँ की गई स्टडी ने हज़ारों खोज किए हैं. चौथा, पब्लिक पार्क सुंदरता को बढ़ाते हैं और सब लोगों को प्रेरणा भी देते हैं. ये वो जगह हैं जहाँ लोग आराम करने या मज़े करने जाते हैं. बेशक, सभी को इन पार्क को मेन्टेन करने में अपना कंट्रीब्यूशन देना चाहिए. पार्क को हमेशा साफ रखना चाहिए. पार्क का यूज़ सिर्फ एंटरटेनमेंट एक्टिविटी के लिए ही किया जाना चाहिए. ऐसे पार्क का नाम उसे बनवाने वाले अमीर लोगों के नाम पर ही रखा जाता हैं. इससे बड़ा कोई सम्मान नहीं हैं. मिस्टर फिप्स ने एक पार्क और एक कंजर्वेटरी दान में दी. हैरानी की बात हैं कि लोग कंजर्वेटरी से ज़्यादा आकर्षित हुए थे. लोगों को ये बहुत पसंद आया था. शायद, इसकी वजह से लोग गार्डनिंग करने लगे थे. सरप्लस दौलत को बाँटने पर काफी लोगों का भला सरप्लस दौलत को बाँटने पर काफी लोगों का भला होता हैं. हो सकता हैं इससे लोग अपने हॉबी को बढ़ावा दें. पांचवां, जनता के लिए एक सिटी हॉल देना बहुत बढ़िया गिफ्ट हैं. ये हॉल मीटिंग से लेकर शादी-ब्याह के अलग-अलग फंक्शन के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं. इससे, एक महंगे वेन्यू पर बहुत ज़्यादा खर्च करने से बचा जा सकता हैं. किसी भी शहर के सिटी हॉल या टाउन हॉल एंटरटेनमेंट के काम में लिए जा सकते हैं. ये पूरे कम्युनिटी के मूड को अच्छा बना सकता हैं. छठा, स्विमिंग पूल एक मज़ेदार और हेल्दी ऑप्शन हैं. इससे बच्चे सही ढंग से स्विमिंग करना सीख सकते हैं. बच्चों के पेरेंट्स अपने बच्चों की ट्रेनिंग के दौरान एक दूसरे से बातचीत में अपना टाइम बीता सकते हैं. स्विमिंग पूल, लोगों में और भी कुछ बेहतर करने की सोच पैदा कर सकती हैं. इसके लिए, एक स्विमिंग क्लब कॉम्पीटीशन का अरेंजमेंट कर सकता हैं. फिर वे अच्छा प्रदर्शन करने वालों को मैडल दे सकते हैं. सांतवा, सरप्लस दौलत से धार्मिक स्थान फायदा उठा सकते हैं. कई लोग धर्म में विश्वास रखने वाले होते हैं. धर्म किसी के पहचान का एक ज़रूरी हिस्सा होता हैं. एक दौलतमंद आदमी को पता होता हैं कि धर्म जनता के लिए कितना ज़रूरी हैं. इसलिए, वो उनके धार्मिक जगहों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता हैं. वो इन जगहों के फाउंडेशन को मज़बूत कर सकता हैं या वहां के फैसिलिटी को मॉडर्न बना सकता हैं. ये उस दौलतमंद पर डिपेंड करता हैं कि वो अपनी एक दौलतमंद आदमी को पता होता हैं कि धर्म जनता के लिए कितना ज़रूरी हैं. इसलिए, वो उनके धार्मिक जगहों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता हैं. वो इन जगहों के फाउंडेशन को मज़बूत कर सकता हैं या वहां के फैसिलिटी को मॉडर्न बना सकता हैं. ये उस दौलतमंद पर डिपेंड करता हैं कि वो अपनी दौलत बांटने के लिए कौन से ऑप्शन को चुनें. दान लेने वाला जो कोई भी हो, कोई भी गलत या सही नहीं हैं. इसके लिए किसी भी दौलतमंद शख्स को टाइम लगाकर सोचना चाहिए. उनका दिल कौन से ऑप्शन की तरफ झुकता हैं, इस पर ध्यान देना चाहिए. यानि, वो कौन से प्रोजेक्ट को लेकर सबसे ज्यादा एक्साइटेड हैं? सबसे ज़रूरी बात, उनके हिसाब से लोगों का भला किससे सबसे ज़्यादा होगा? ” गॉस्पल ऑफ़ वेल्थ” Jesus Christ के वचनों को फॉलो करता हैं. यही, खुद को मिले आशीर्वाद को दूसरों के साथ बाँटने के लिए, अमीरों को इंस्पायर करता हैं. सिर्फ यही नहीं, बल्कि जनता के लिए सबसे अच्छा क्या हैं, इसके बारे में ध्यान देना ज़रूरी हैं. दौलतमंद लोग अब पहले की तरह मतलबी और घमंडी नहीं हैं. अपने सरप्लस दौलत को बांटने पर वो और भी ज़्यादा अमीर हो जाते हैं. उन्हें बहुत वाहवाही मिलती हैं और लोग उनका एहसानमंद होते हैं. कई लोग उन्हें एक हीरो के तौर पर याद करते हैं. दौलतमंद होने के कारण ऐसे लोगों ने काफी लोगों के लाइफ को बेहतर बनाया हैं. The Gospel of Wealth Andrew Carnegie कन्क्लूज़न आपने कार्नेगी के ” गॉस्पल ऑफ वेल्थ” के बारे में सीखा. इसके मुताबिक अमीर और गरीब के बीच का गैप एक अच्छी बात हैं. हर चीज में बेहतर होने के लिए लोग लगातार एक दूसरे के साथ मुकाबला करते हैं. इससे competition का spirit बना रहता है. आपने जाना कि अमीरी और गरीबी के बीच के गैप के कारण ही इंसानियत आगे बढ़ती रहती हैं. असल में, जो लोग सबसे ज़्यादा लायक होते हैं, वही अपनी ज़िन्दगी जी पाते हैं. लेकिन, कभी-कभार कुछ लोगों के पास सरप्लस दौलत होता हैं. ऐसे दौलतमंद को क्या करना चाहिए? पहला, वो अपने वारिस को अपना दौलत बाँट सकता हैं. दूसरा, इस सरप्लस दौलत का इस्तेमाल पब्लिक इंस्टीट्यूशंस को फंडिंग करने के लिए किया जा सकता हैं. तीसरा, दौलतमंद शख्स खुद तय कर सकता हैं कि उसे अपने पैसे किसे और कैसे देना हैं. तीसरा तरीका ही सबसे आइडियल हैं. इससे ख़ास तौर पर आम जनता को सबसे ज़्यादा फायदा पहुंचाता हैं. लेकिन दौलतमंद लोगों को सावधानी से अपनी दौलत बांटनी चाहिए. उन्हें अपनी सरप्लस दौलत सिर्फ उन लोगों को बांटना चाहिए जो इसके काबिल हैं. इसका मतलब हैं कि सिर्फ उन लोगों की मदद करनी चाहिए लेकिन दौलतमंद लोगों को सावधानी से अपनी दौलत बांटनी चाहिए. उन्हें अपनी सरप्लस दौलत सिर्फ उन लोगों को बांटना चाहिए जो इसके काबिल हैं. इसका मतलब हैं कि सिर्फ उन लोगों की मदद करनी चाहिए जो खुद की मदद करते हैं. एक दौलतमंद आदमी अपने सरप्लस दौलत को कैसे बाँट सकता हैं, इसके अलग-अलग तरीकों के बारें में आपने जाना. वो इसका इस्तेमाल युनिवर्सिटी, लाइब्रेरी और मेडिकल इंस्टीट्यूशंस को फंड करने के लिए कर सकता हैं. वो पार्क, स्विमिंग पूल, टाउन हॉल और धार्मिक जगह भी बना सकता हैं. ये कदम आम जनता को फिज़िकली, मेंटली और इमोशनली हेल्प करता हैं. उस दौलतमंद शख्स को भी इस अच्छे काम के लिए याद किया जाएगा. कार्नेगी ने कहा कि जो दौलतमंद आदमी दूसरों के साथ अपनी सुख सम्पत्ति नहीं बांटता हैं, वो अपनी इस खुश्किस्मती की कदर नहीं करता. आपको जितना मिले, उतना बांटना भी चाहिए. दयालु बनकर दुनिया को एक बेहतर जगह बनाइये. ज़रूरी नहीं कि आपको स्कूल या लाइब्रेरी के लिए ही पैसे देने हैं. छोटी से छोटी मदद भी बहुत बड़ा अंतर ला सकता हैं. रॉबर्ट इंगरसोल ने एक बार कहा था कि जब आप दूसरों को ऊँचा उठाते हैं तो आप भी उंचाईं पर चढ़ते हैं. कभी भी अच्छाई फैलाना बंद मत कीजिए. आप अपने ही तरीके से लोगों के ज़िन्दगियों को आसान बना सकते हैं. The Gospel of Wealth Andrew Carnegie फाइनली अगर आप इस समरी के एन्ड तक पहुंच गए है तो Congratulation बहुत ही कम लोग होते है जो नॉलेज के ऊपर टाइम इन्वेस्ट करते है वार्ना आप कही और भी तो टाइम वेस्ट कर सकते थे. Anyways, हमने ये मैसेज इसीलिए बनाय है ताकि हम GIGL का Goal बता सके की क्यों हमने premium membership स्टार्ट की है ? क्यूंकि कई लोग हमसे पूछते है की आपने सुम्मारीएस पेड क्यों की? या प्रीमियम membership में क्या क्या मिलेगा ? या इसका फायदा क्या है etc. तो इसमें हम आपको इन सब सवालों के जवाब देना चाहेंगे. तो सबसे पहला सवाल आता है की हमने Premium membership प्रोग्राम क्यों स्टार्ट किया ..यानी पेड सुम्मारीएस क्यों लायी.? तो एक्चुअली बात ऐसी है की हम 2 सालो से सुम्मारीएस FREE दे रहे थे. लेकिन जैसे जैसे GIGL फॅमिली बढ़ी होती गयी सर्वर्स की cost, engineering कॉस्ट और बाकी टीम मेंबर्स की engineering कॉस्ट और बाकी टीम मेंबर्स की कॉस्ट भी बढ़ती रही. अब हमारे पास कोई फंडिंग तो है नहीं ..तो अब हमारे पास दो ओप्सन्स थे या तो हम GIGL app. को ही बंद कर दे या फिर सारी फ्री बुक्स को पेड कर दे. ताकि जो रीडर है जो एक्चुअल में सुम्मारीएस सुनना चाहते है वो इसकी वैल्यू को समझेंगे और इस तरीके से हम GIGL app को कंटिन्यू रख पाएंगे लेकिन हम खुद ही इस डिसिशन से खुश नहीं थे, क्यूंकि हम जानते है की बहुत लोग , लोअर मिडिल क्लास स्टूडेंट्स इसे सुनते है और हम truly believe करते है की बुक्स से हमें ऐसी बाते पता चलती है जो हमें कभी भी कोई आस पास के लोग नहीं सीखा सकते . हमने इस कांसेप्ट को इम्प्लीमेंट करने से पहले ऑलमोस्ट 6 महीने तक सोचा ..की अगर हम FREE summaries देते भी रहे और अपनी सैलरी का अमाउंट भी इसमें स्पेंड करते रहे और हमेशा की तरह हर हफ्ते एक FREE summary डालते रहे तो हम एक साल में 52 summaries डाल पाएंगे . जिसका मतलब है की 10 सालो में सिर्फ 520 सुम्मारीएस . All Done? Finished की 10 सालो में सिर्फ 520 सुम्मारीएस . यानी हमने अपनी ज़िन्दगी के 10 साल सिर्फ 520 सुम्मारीएस क्रिएट करने में लगा दिए ..हम आप सबको बोलते है THINK BIG… लेकिन ये चीज़ किसी भी एंगल में THINKING BIG नहीं है .क्यूंकि इस से INDIA में भी कोई बड़ा हिंदी सुम्मारीएस का प्लेटफार्म क्रिएट नहीं होता और हम वो knowledgeable आइडियाज ले ही नहीं पाएंगे जिसकी हमें ज़रुरत है . इसीलिए फाइनली हमारा प्लान ये बना की क्यों न हम जो FREE summaries देते है उसे कंटिन्यू रखे और जो हम हर हफ्ते एक summary के इलावा extra summary लाएंगे और उस एक्स्ट्रा समरी को प्रीमियम में इन्क्लुड कर दे इस से हम app की सारी कॉस्ट भी कवर कर लेंगे .पहले जिसे जितनी सुम्मारीएस मिल रही थी वो मिल जाएंगी और जो लोग अपनी नॉलेज में भी इन्वेस्ट करना चाहते है और जो समझते है की उन्हें मूवीज ticket से ज़्यादा अपनी नॉलेज में इन्वेस्ट करना चाहिए तो वो प्रीमियम सब्सक्रिप्शन ले सकते है. और इसीलिए हमने ये decision लिया ? – १ A TA All Done? Finished ले सकते है. और इसीलिए हमने ये decision लिया ? नेक्स्ट सवाल जो हमसे लोग पूछते है वो है की प्रीमियम सब्सक्रिप्शन में उन्हें क्या मिलेगा? तो जब हमने डिसिशन लिया premium membership लाने का तो हमने अपनी टीम ग्रो करनी स्टार्ट करी . लेकिन हमारा मैं गोल था की ज्यादा summaries के चक्कर में summary की क्वालिटी खराब नहीं होनी चाहिए .. इसीलिए अभी हम महीने की 12 से 15 summaries upload करते है .यानी पहले से 4 गुना ज़ादा. हमारा final goal है की हम काम से काम हर रोज़ एक समरी upload करे यानी साल की 365 summaries. और शायद इस भी ज्यादा . और एक “Made In India” India का अपना INDIAN platform हो बुक सुम्मारीएस का . जहाँ कोई barrier न हो . और जहा एक mazdoor से ले के एक crorpati businessman सब बेस्ट आइडियाज सुन रहे हो और अपनी ग्रोथ के साथ साथ INDIA को भी ग्रो कर रहे हो तो अगर आपको लगता है की प्रीमियम A८ गोल था की ज्यादा summaries के चक्कर में summary की क्वालिटी खराब नहीं होनी चाहिए .. इसीलिए अभी हम महीने की 12 से 15 summaries upload करते है .यानी पहले से 4 गुना जादा. हमारा final goal है की हम काम से काम हर रोज़ एक समरी upload करे यानी साल की 365 summaries. और शायद इस भी ज्यादा . और एक “Made In India” India का अपना INDIAN platform हो बुक सुम्मारीएस का . जहाँ कोई barrier न हो . और जहा एक mazdoor से ले के एक crorpati businessman सब बेस्ट आइडियाज सुन रहे हो और अपनी ग्रोथ के साथ साथ INDIA को भी ग्रो कर रहे हो तो अगर आपको लगता है की प्रीमियम सुम्मारीएस से आपको वैल्यू मिल सकती है और हम अपना काम कर रहे है तो आप premium member बन सकते है .. जल्द ही आपसे दोबारा मिलेंगे एक नयी समरी के साथ जय हिन्द

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