The Go-Giver Bob Burg andJohn David Mann. Books In Hindi Summary

The Go-Giver Bob Burg andJohn David Mann इंट्रोडक्शन (Introduction) क्या आप एक गो गेटर हैं? क्या कड़ी मेहनत करने के बाद भी आप सक्सेस के उस लेवल पर नहीं पहुंच पा रहे हैं जहां आप पहुंचना चाहते हैं? अगर हाँ, तो ये बुक आपके लिए है. इस बुक में, आप स्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस के 5 लॉज़ के बारे में सीखेंगे. स्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस मतलब इतनी सक्सेस जो हमारी कल्पना से बहुत ज्यादा बड़ी और ऊँची होती है. आप “गिविंग” यानीदेने के इम्पोर्टेस के बारे में सीखेंगे, आप उन लोगों की सफलता की कहानियों के बारे में जानेंगे जिन्होंने खुद के लिए कुछ माँगने या चाहने की बजाय दूसरों को कुछ देने की इच्छा की और वो सफलता के उस शिखर पर पहुंचे जहां वो पहुंचना चाहते थे. उन्होंने सिर्फ खुद के बारे में नहीं सोचा, उन्होंने पहले दूसरों को देने के बारे में सोचा. क्यों, ये सुन कर विश्वास नहीं हो रहा है ना ? तो खुद ये देख लीजिये. इस बुक को एक मौका दीजिये और इससे वो ज्ञान हासिल कीजिये जो आपको आसमान की ऊँचाइयों तक ले जाएगा. द गो-गेटर (The Go-Getter) “जो” एक गो गेटर है. गो गेटर का मतलब वो आदमी जो अपने गोल को पाने के लिए बहुत ज्यादा एम्बिशयस होता है तो सबसे पहले खत के बारे में सोचता है A < जा अपन गाल का पान क लिए बहुत ज्यादा एम्बशयस होता है . वो सबसे पहले खुद के बारे में सोचता है, जैसे ये काम करने से मुझे क्या मिलेगा, इसमें मेरा क्या फायदा है. वो कुछ माँगने से भी हिचकिचाता नहीं है.”जो” टॉप पर पहुंचना चाहता था. अपने फर्म में नंबर 1 और बेस्ट एजेंट बनने के लिए वो कड़ी मेहनत कर रहा था. इतना सब कुछ करने के बाद भी वो अपनी मंजिल तक पहुँच ही नहीं पा रहा था. 1st और 2nd क्वार्टर में वो अपना टारगेट पूरा ही नहीं कर पाया. अब तीसरा क्वार्टर भी ख़त्म होने को था, लेकिन अब भी जो काफ़ी पीछे था. इसलिए वो मदद माँगने एक जाने माने कंसलटेंट “पिंडार” के पास गया. पिंडार को सब प्यार से चेयरमैन कह कर बुलाते थे. कंसलटेंट होने के साथ साथ वो एक गुरु या मेंटर और कीनोट स्पीकर भी थे. उन्होंने बिज़नेस के फील्ड में बहुत सक्सेस और पैसा कमाया था जिसके कारण वो एक बिज़नेस टाइकून भी थे. वो अपने बिज़नेस से रिटायरमेंट ले चुके थे, अब वो अपना पूरा ध्यान दूसरे कंपनी और प्रोफेशनल्स को सफल होने में मदद करने में लगा रहे थे. जो पिंडार से मिल कर बहुत प्रभावित हुआ. उसे लगा कि सच में पिंडार प्रशंसा के योग्य हैं. उसने चेयरमैन से उनके सक्सेस का राज़ पूछा, पिंडार ने सिर्फ एक शब्द कहा “गिविंग” मतलब दूसरों को देना. जो को ये बड़ा अटपटा सा लगा, उसे इस पर विश्वास ही नहीं हो रहा था. क्योंकि लोग तो उस दुनिया के आदि हो चुके हैं जहां ज़िन्दगी की रेस में आगे निकलने के लिए पतंगाट गरे तो तल गे उतना ना नहा हा रहा था. क्यााक लागता उस दुनिया क आदि हा चुके हैं जहां ज़िन्दगी की रेस में आगे निकलने के लिए एक इंसान दूसरे को कुचल कर, उसे नुक्सान पहुंचा कर खुद आगे बढना चाहता है. यहाँ तो हर इंसान सिर्फ खुद के लिए सोचता है और खुद के लिए सब कुछ चाहता के है. जो सोचने लगा, अगर आप हमेशा देते रहेंगे तो खुद के लिए प्रॉफिट कैसे कमाएंगे ? लेकिन पिंडार ने जो को एक रोमांचक सफ़र में चलने के लिए इनवाईट किया. इसमें वो स्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस के 5 लॉज़ का रहस्य खोलने वाले थे. आने वाले हफ्ते के हर दिन, जो को पिंडार से लंच पर मिलना था जिसमें पिंडार उसे हर रोज़ अपने एक दोस्त से मिलाने वाले थे ताकि वो एक एक करके सारे लॉज़ को सीख सके. लेकिन पिंडार की एक शर्त थी कि जो को सीखे हुए लॉ को उसी दिन अप्लाई भी करना होगा. लंच सेलेकर डिनर के वक़्त तक जो कोउस लॉ को खुद रियल लाइफ में अप्लाई करके टेस्ट करना होगा. ऐसा इसलिए ताकि हफ्ते के ख़तम होने पर जो खुद उन लॉज़ की सच्चाई को परख सके. मंडे को, जो एक रेस्ट्रान्ट के मालिक से मिला, उसका नाम अर्नेस्टो था. ट्यूसडे को वो एक सीईओ से मिला जिसका नाम निकोल था. वेडनेसडे को वो एक फाइनेंसियल एडवाइजर से मिला जिसका नाम सैम था. थर्सडे को वो एक रियल एस्टेट एजेंट डेबरा से मिला. फ्राइडे को 5th लॉ का राज़ एक ऐसे शख्स ने खोला जिसकी जो ने कभी उम्मीद भी नहीं की थी. तो आने वाले चैप्टर्स में आप एक एक लॉ के बारे में जीनोमो मिला और रेतारे के लिए प्रॉफिट कैसे कमाएंगे? लेकिन पिंडार ने जो को एक रोमांचक सफ़र में चलने के लिए इनवाईट किया. इसमें वो स्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस के 5 लॉज़ का रहस्य खोलने वाले थे. आने वाले हफ्ते के हर दिन, जो को पिंडार से लंच पर मिलना था जिसमें पिंडार उसे हर रोज़ अपने एक दोस्त से मिलाने वाले थे ताकि वो एक एक करके सारे लॉज़ को सीख सके. लेकिन पिंडार की एक शर्त थी कि जो को सीखे हुए लॉ को उसी दिन अप्लाई भी करना होगा. लंच सेलेकर डिनर के वक़्त तक जो कोउस लॉ को खुद रियल लाइफ में अप्लाई करके टेस्ट करना होगा. ऐसा इसलिए ताकि हफ्ते के ख़तम होने पर जो खुद उन लॉज़ की सच्चाई को परख सके. मंडे को, जो एक रेस्ट्रान्ट के मालिक से मिला, उसका नाम अर्नेस्टो था. ट्यूसडे को वो एक सीईओ से मिला जिसका नाम निकोल था. वेडनेसडे को वो एक फाइनेंसियल एडवाइजर से मिला जिसका नाम सैम था. थर्सडे को वो एक रियल एस्टेट एजेंट डेबरा से मिला. फ्राइडे को 5th लॉ का राज़ एक ऐसे शख्स ने खोला जिसकी जो ने कभी उम्मीद भी नहीं की थी. तो आने वाले चैप्टर्स में आप एक एक लॉ के बारे में सीखेंगे. आप अर्नेस्टो , निकोल, सैम और डेबरा के सक्सेस स्टोरीज के बारे में जानेंगे. और हम ये भी देखेंगे कि जो की कहानी किस मोड़ पर ख़त्म हुई. The Go-Giver Bob Burg andJohn David Mann द लॉ ऑफ़ वैल्यू (The Law of Value) द लॉ ऑफ़ वैल्यू का मतलब है कि “आपकी असली कीमत या वर्थ उस बात पर डिपेंड करती है कि आप लोगों को उनके पैसे के बदले में कितनी वैल्यू provide करते हैं” इसका मतलब है किअगर आप उसी दाम पर अपने सर्विस में और ज्यादा वैल्यू जोड़ कर अपने कस्टमर को देंगे तो आप बहुत ज्यादा सक्सेसफुल होंगे. वैल्यू मतलब कस्टमर को एक ऐसा एक्सपीरियंस देना कि वो उसे याद रखे और बोलने पर मजबूर हो जाए कि वाह क्या बात है. आप जितना ज्यादा वैल्यू जोड़ते जाएंगे आप और भी ज्यादा सक्सेसफुल होते जाएँगे. अर्नेस्टो लानेट रियल एस्टेट के बिज़नस टाइकून हैं. वो शेफ होने के साथ साथ एक रेस्ट्रान्ट के मालिक भी हैं. करीबन बीस साल पहले, अर्नेस्टो के पास सिर्फ एक हॉट डॉग का स्टैंड था. कुछ ही समय में उसे कुछ ऐसे कस्टमर्स मिले जो हमेशा उसी के स्टैंड पर आया करते थे. ये बात चारों तरफ फैलने लगी. अब तो ये आलम था किशहर के बड़े बड़े बिज़नेस एग्जीक्यूटिव भी अर्नेस्टो के स्टैंड पर लंच करने आने लगे. उन्हें अर्नेस्टो का हॉट डॉग इतना लाजवाब लगता था कि कुछएग्जीक्यूटिव ने अर्नेस्टो की मदद करने के लिए कळ पैसे दन्वेस्ट करने का विचार किया ताकि वो एक करन आन लग. उन्हें अर्नेस्टो का हॉट डॉग इतना लाजवाब लगता था कि कुछएग्जीक्यूटिव ने अर्नेस्टो की मदद करने के लिए कुछ पैसे इन्वेस्ट करने का विचार किया ताकि वो एक रेस्ट्रान्ट खोल सके. अर्नेस्टो के स्टाल पर लोगों का तांता लगा रहता था. उसके इतने कस्टमर बन गए थे कि जब उसने रेस्ट्रान्ट चालु किया तो हमेशा की तरह अपने कस्टमर्स को बेहतरीन डाइनिंग एक्सपीरियंस दिया जो दूसरे रेस्ट्रान्ट नहीं दे पा रहे थे. ऐसा करने से उसने बहुत प्रॉफिट कमाया. अर्नेस्टो नेउ स रेस्ट्रान्ट को खरीद लिया.उनएग्जीक्यूटिवज़ ने भी ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लिया क्योंकि उन्हें भी इससे बहुत फायदा हुआ था. इस सफलता के बाद अर्नेस्टो ने उस शहर में और भी कई रेस्ट्रान्ट खोले. इसके अलावा उसने कुछ कमर्शियल प्रॉपर्टी में पैसा लगाने के बारे में सोचा. कमर्शियल प्रॉपर्टी मतलब रियल एस्टेट प्रॉपर्टी जहां ज़्यादातर बिज़नेस एक्टिविटीज होती हैं और जिनसे बहुत प्रॉफिट कमाया जा सकता है. इस तरह वो रियल एस्टेट की दुनिया के टाइकून बने. तो अर्नेस्टोकी सफलता का राज़ क्या है? यूं तो उस शहर में कई रेस्ट्रान्ट और हॉट डॉग स्टैंड्स हैं और उनका भी खाना बहुत टेस्टी और लज़ीज़ है. तो ऐसा क्या था जो अर्नेस्टो के बिज़नेस को इतना ख़ास, इतना अलग बनाता था? इसका जवाब ये है कि वो अपने सर्विस में बहुत ज्यादा वैल्यू जोड़ कर अपने कस्टमर को देते थे. अर्नेस्टो के टॉट टॉप ट . पाटो नसा नो नोानों A < इसका जवाब ये है कि वो अपने सर्विस में बहुत ज्यादा वैल्यू जोड़ कर अपने कस्टमर को देते थे. अर्नेस्टो के हॉट डॉग स्टैंड के पहले कस्टमर बच्चे थे. वो उन बच्चों के नाम और बर्थडे याद रखते थे. उनसे जुडी छोटी छोटी बातें उन्हें याद रहती थी जैसे उनका favourite कलर, कार्टून करैक्टर. अर्नेस्टो को बच्चों से बहुत लगाव था. वो उन से बहुत बातें किया करते थे और उन्हें कुछ ना कुछ स्पेशल ट्रीट देते रहते थे. बच्चे उन्हें अच्छे से जानने लगे थे, उन्हेंपसंद करने लगे थे और उन पर भरोसा करने लगे थे. और अंत में वो अपने साथ अपने पेरेंट्स को भी उस स्टैंड पर ले जाने लगे. अर्नेस्टो को बड़ों के भी नाम, बर्थडे और उनकी पसंद नापसंद सब याद रहते थे. अब ये पेरेंट्स भी अर्नेस्टो को जानने लगे, पसंद करने लगे और उन पर भरोसा करने लगे. अर्नेस्टो का व्यवहार उनके साथ ऐसा था मानो कितने पुराने दोस्त हों या कितना गहरा रिश्ता हो जिसकी वजह से अब बड़े भी दोबारा उनके स्टैंड पर जाना पसंद करते थे. यहाँ तक कि वो अपने जान पहचान वालों को भी अर्नेस्टो के स्टैंड पर जाने के लिए कहने लगे. बाकी रेस्ट्रान्टखाने की मेनू पर जो दाम लिखा होता है बिलकुल उसके बराबर का सर्विस और वैल्यू देते हैं. लेकिन अर्नेस्टो ने हमेशा कुछ ज्यादा ही दिया. वो उसी दाम पर लाजवाब खाने के साथ साथ फाइव स्टार होटल जैसी सर्विस और वैल्यू देते थे. एक ऐसा एक्सपीरियंस जिसके सामने दूसरों की सर्विस फ़ीकी and A८ कहने लगे. बाकी रेस्ट्रान्टखाने की मेनू पर जो दाम लिखा होता है बिलकुल उसके बराबर का सर्विस और वैल्यू देते हैं. लेकिन अर्नेस्टो ने हमेशा कुछ ज्यादा ही दिया. वो उसी दाम पर लाजवाब खाने के साथ साथ फाइव स्टार होटल जैसी सर्विस और वैल्यू देते थे. एक ऐसा एक्सपीरियंस जिसके सामने दूसरों की सर्विस फ़ीकी लगने लगती थी. इसलिए तो कस्टमर्स उनके रेस्ट्रान्ट को इतना पसंद करते थे. वो बार बार उनके रेस्ट्रान्ट मेंजातेथे और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताते थे. आप सोच रहे होंगे किऐसे बिज़नेस आईडिया के जिसमें सिर्फ देना, देना और देना है, ऐसे तो आप का दिवाला निकल जाएगा, है न? लेकिन ये बिलकुल सच नहीं है.बिज़नेस शुरू करते समय ये मत सोचिये कि आप कितना कमाएंगे. बल्कि आपको ये सोचना चाहिए कि आप अपने कस्टमर को क्या दे सकते हैं, उनसे पैसे के बदले में उन्हें कैसी सर्विस और कितनी वैल्यू दे सकते हैं. ये वैल्यू कुछ भी हो सकता है जैसे इमोशनल वैल्यू, फाइनेंसियल वैल्यू, परफॉरमेंस वैल्यू , कुछ भी. अगर आप सिर्फ इसमें वैल्यू जोड़ते चले जाएँगे तो आप उतने ही लॉयल कस्टमर्स बनाते चले जाएँगे. और ये और ज्यादा प्रॉफिट और सक्सेस लेकर आएगा. तो ये थास्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस का सबसे पहला लॉ. The Go-Giver Bob Burg andJohn David Mann द लॉ ऑफ़ कॉम्पन्सेशन (The Law of Compensation) द लॉ ऑफ़ कॉम्पन्सेशन का मतलब “आपकी कमाई उस बात पर डिपेंड करती है कि आप कितने लोगों को सर्व कर पाते हैं और कितनी अच्छे तरीके से सर्व कर पाते हैं”. जिसका मतलब है कि आपको ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी प्रोडक्ट को पहुंचाने का तरीका ढूंढना होगा. मान लीजिये कि अभी आप 25 लोगों को सर्व करते हैं तो आपको ऐसा तरीका सोचना होगा कि आप 25,000 लोगों तक अपनी प्रोडक्ट या सर्विस को पहुंचा सकें. बस उन्हें आप अच्छे से सर्व कीजिये और आपकी इतनी कमाई होगी की आप गिन भी नहीं पाएँगे. निकोल मार्टिन बच्चों की स्कूल में टीचर हैं. वो एक एजुकेशनल सॉफ्टवेर कंपनी “लर्निंग सिस्टम्स फॉर चिल्ड्रेन इंक.” की सीईओ भी हैं.निकोल को पढ़ाना बेहद पसंद है. लेकिन उन्हें लगता है कि बच्चे उतना नहीं सीख पा रहे हैं जितना उन्हें सीखना चाहिए. अभी का जो एजुकेशन सिस्टम है वो बस रट्टामारने और याद करने पर ही ध्यान देती है. ये सिस्टम बच्चों की क्रिएटिविटी और उनके जानने की इच्छा को बढ़ावा नहीं देती है. इसलिएनिकोल ने ऐसे गेम्स बनाए जो मजेदार तोथे ही लेकिन साथ साथ उसमें बहत बन्दि लगाने की जरुरत क्रिएटिविटा आर उनक जानन का इच्छा को बढ़ावा नहा देती है. इसलिएनिकोल ने ऐसे गेम्स बनाए जो मजेदार तोथे ही लेकिन साथ साथ उसमें बहुत बुद्धि लगाने की ज़रुरत भी पड़ती थी. बच्चों को इसमें बहुत मज़ा आता था. और इसकी वजह से निकोल ने उनकी परफॉरमेंस में बहुत इम्प्रूवमेंट देखा. वो बस 25 बच्चों को ही नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को पढ़ाना चाहती थी लेकिन उनकी सैलरी इतनी नहीं थी. इसलिए उन्हें एक कमाल का आईडिया आया. एक दिन,निकोल ने पेरेंट्स टीचर मीटिंग रखी. उसने वहाँ एक बच्चे के फ़ादर, जो की एक सॉफ्टवेर इंजिनियर थे, उनसे बात की. उसने उनसे पूछा कि क्या वो उसके द्वारा बनाए गए गेम्स के लिए सॉफ्टवेर प्रोग्राम लिख सकते हैं. फिर उसने वहाँ एक बच्चे की मदर से बात की, जिनका एक छोटा एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग बिज़नेस था. निकोल, वोइंजिनियर और मार्केटिंग एक्सपर्ट तीनों बिज़नेस पार्टनर बन गए.यही तीन लोग “लर्निंग सिस्टम्स फॉर चिल्ड्रेन इंक.” के फाउंडर हैं. अगले कुछ सालों में निकोल का प्रोडक्ट बहुत पोपुलर हो गया. इस सॉफ्टवेर के ज़रिये वो पूरी दुनिया में एक साथ 25 मिलियन बच्चों को पढ़ा सकती थी. तोआप जितने ज्यादा लोगों को सर्व करेंगे, आप जितनी ज्यादा जिंदगियों को छूएंगे , आप उतना ही ज्यादा कमाई भी करेंगे. तो ये था दूसरा लॉ. ज्यादा सक्सेसफुल होने लिगा आगाटाोगाटा सोंटीन A A८ करेंगे. तो ये था दूसरा लॉ. ज्यादा सक्सेसफुल होने के लिए, आपको ज्यादा से ज्यादा लोगों को बेहतरीन तरीके से सर्व करना होगा. और इस चीज़ की कोई सीमा या अंत नहीं है क्योंकि हमेशा लोग तो मौजूद होंगे ही जिन्हें आप सर्व कर सकते हैं. जैसा कि मार्टिन लुथर किंग जूनियर ने कहा था “महान तो कोई भी बन सकता है क्योंकि सेवा (सर्व) तो कोई भी कर सकता है”. चाहे आप जीवन में कुछ भी करें, चाहे आपका कोई भी प्रोफेशन हो, आप स्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस हासिल कर सकते हैं. ये सिर्फ आप पर डिपेंड करता है. आप कितना पैसा कमाने की इच्छा रखते हैं? ज्यादा से ज्यादा लोगों को सर्व किजिये और आपको जीत मिलना तय है. द लॉ ऑफ़ इन्फ्लुएंस (The Law of Influence) द लॉ ऑफ़ इन्फ्लुएंस कामतलब है”आपका कितना इन्फ्लुएंस या असर होता है ये इस बात पर डिपेंड करता है कि आप कितना खुल कर दूसरों के हित के बारे में पहले सोचते हैं, उसे खुद से पहले और आगे रखते हैं”. एक ऐसी सिचुएशन भी होती है जिसे हम “विन-विन” सिचुएशन कहते हैं, मतलब सबका बस फायदा ही फायदा. इसके मुताबिक़ अगर आप अपने बिज़नस में जीत हासिल करना चाहते हैं तो आपको अपने कस्टमर को कुछ ऐसा देना होगा जिसे पा कर उसे भी फायदा हो. ये बिलकुल 50-50 वाली डील अपने कस्टमर को कुछ ऐसा देना होगा जिसे पा कर उसे भी फायदा हो. ये बिलकुल 50-50 वाली डील जैसा है. लेकिन ये लॉ हमें सिखाती है कि हमें कस्टमर को पूरा100% देना चाहिए सिर्फ 50% नहीं. आपको दूसरों की ज़रुरत को समझना होगा. आपको दूसरों को पहले जीताना होगा. तभी आप अपार सफलता पा सकेंगे. ये इस बारे में नहीं है कि आप कितने लोगों को जानते हैं. ये इस बारे में है कि आप उन लोगों के लिए क्या क्या और कितना कर सकते हैं. सच्चे मायनों में इसे ही लम्बे समय तक चलने वाला इन्फ्लुएंसकहते हैं. सैम रोसेन एक लीडिंग सेल्समेन और फाइनेंसियल एडवाइजर हैं. पहले वो एक रेगुलर इंश्योरेन्स (insurance) एजेंट थे. मगर कुछ ही सालों बाद वो उस कंपनी में नंबर ] पोजीशन पर पहुंच गए थे. उनका सेल्स ज़ीरो से 400 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया था. फुल टाइम फाइनेंसियल एडवाइजर बनने से पहले उन्होंने कुछ क्लाइंट्स को मीडिएटर और एजेंट की सर्विस भी दी थी. अब वो पूरी दुनिया में नॉन प्रॉफिट आर्गेनाइजेशन और चैरिटी को रिप्रेजेंट करते हैं. उन्हें वो अपनी सर्विस फ्री में देते हैं. सैम ने जब शुरुआत की थी तब वो एक भी इंश्योरेन्स प्लान नहीं बेचपाया था. लेकिन फिर वो पूरी तरह बदल गया. सैम का सीक्रेट ये है कि उसने ये सोचना बंद कर दिया था कि उसे क्या मिलेगा. उसने ये देखना शुरू दिया था कि उसे क्या मिलेगा. उसने ये देखना शुरू किया कि वो क्या दे सकता है. उसने अपने कमीशन की फ़िक्र करना छोड़ दिया. अब बस वो इसी बात पर ध्यान देने लगा कि अपने क्लाइंट को कैसे बेस्ट सर्विस दे सके. ऐसा करने से जैसे लोगों का एक नेटवर्क बनता चला गया जो सैम को जानने लगे , पसंद करने लगे और उस पर भरोसा करने लगे थे. कुछ ऐसे भी लोग थे जो सैम से इंश्योरेन्सप्लान नहीं खरीदते थे लेकिन सैम ने फिर भी उनसे दोस्ती कर ली थी. सैम सचमुच दिल से अपने क्लाइंट्स की परवाह करता था इसलिए उनके क्लाइंट्स भी सैम के लिए ऐसा महसूस करने लगे थे. वो उन्हें सफल होने में, बेस्ट डील दिलाने में और उन्हें financially सिक्योर करने में मदद करता था. और इसलिए उसके क्लाइंट्स ने भी उसे सफल होने में बहुत मदद की. ऐसा लगता था मानो वो सैम के चलते फिरते पर्सनल ambassador बन गए हों. वो अपने जान पहचान के लोगों को सैम से इंश्योरेन्सकराने के लिए कहने लगे. और ऐसा नहीं था कि इसके बदले सैम उन्हें कोई पैसे देता था. उन क्लाइंट्स ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो सैम को पसंद करने लगे थे, उस पर भरोसा करने लगे थे. वो जानते थे कि सैममार्केट में सबसे बेस्ट इन्सुरांस एजेंट है. इसलिएये स्कोरबोर्ड बनाना बंद कीजिये. इसकी गिनती मत कीजिये कि आपने किसी के लिए क्या क्या किया. किसी के लिए कल करने के बाट रससे बदले में कटक ambassador बन गए हों. वो अपने जान पहचान के लोगों को सैम से इंश्योरेन्सकराने के लिए कहने लगे. और ऐसा नहीं था कि इसके बदले सैम उन्हें कोई पैसे देता था. उन क्लाइंट्स ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो सैम को पसंद करने लगे थे, उस पर भरोसा करने लगे थे. वो जानते थे कि सैममार्केट में सबसे बेस्ट इन्सुरांस एजेंट है. इसलिएये स्कोरबोर्ड बनाना बंद कीजिये. इसकी गिनती मत कीजिये कि आपने किसी के लिए क्या क्या किया. किसी के लिए कुछ करने के बाद उससे बदले में कुछ मांगिये मत. बस ये देने का सिलसिला चालु रखिये. इस बात पर भरोसा रखिये कि जब आपको ज़रुरत पड़ेगी तो कहीं न कहीं से मदद आपके रास्ते में खुदब खुद मिल जाएगी. आप लोगों को अपने पैसे, पॉपुलैरिटी या पोजीशन के दम पर इन्फ्लुएंस नहीं कर सकते. आप उनकी ज़रूरतों को पहले रख कर उन्हें इन्फ्लुएंस करते हैं. यूं कहिये तो आप उन पर कभी ना मिटने वाला असर छोड़ देते हैं. अपने कस्टमर की ज़रुरत को इम्पोर्टेस दीजिये. उन्हें क्या चाहिए उन तक वो पहुंचाइये. उन्हें जीतने दीजिये. आप देखेंगे कि जैसे जैसे आप उनके साथ अच्छा करते जाएँगे वैसे वैसे आपका प्रभाव उन पर बढ़ने लगेगा और आप सफलता के और ऊँचे शिखर पर पहुँच जाएँगे. The Go-Giver Bob Burg andJohn David Mann द लॉ ऑफ़ ऑथेंटिसिटी (The Law of Authenticity) लॉ ऑफ़ ऑथेंटिसिटी कहती है कि “जो बेशकीमती तोहफ़ा आप किसी को दे सकते हैं, वो आप खुद हैं”. अगर आपको लगता है कि आपके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है तो आप बिलकुल गलत हैं. आपके पास आपका टैलेंट, स्किल, टाइम, एनर्जी और आपकी abilities हैं. आप लोगों को ये सब कुछ दे सकते हैं. डेबरा डेवेन्पोर्ट 42 साल की सिंगल मदर हैं. एक दिन, उसके पति अचानक से कहीं चले गए और कभी लौट कर नहीं आए.उसने किसी दूसरी औरत के लिए डेबरा को छोड़ दिया था. उस वक़्त डेबरा सिर्फ एक हाउसवाइफ थी, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो अपने 3 बच्चों का पालन पोषण कैसे कर पाएगी. डेबरा जॉब ढूँढने में लग गई लेकिन जहां भी वो अप्लाई करती वहाँ से उसे रिजेक्ट कर दिया जाता था. वो उसे ये कह कर रिजेक्ट कर देते कि उसकी उम्र बहुत ज्यादा है या उसमें वो स्किल नहीं है जिसकी उन्हें ज़रुरत है. और फिर डेबरा ने रियल एस्टेट बिज़नेस का लाइसेंस लेने के बारे में सोचा. उसने रियल एस्टेट एजेंट बनने की ट्रेनिंग ली, कुछ महीनों तक इसकी पढ़ाई की और लाइसेंस लेने की एग्जाम को पास कर लिया. डेबरा ने दूसरे एजेंट्स द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले हर क्लोजिंग (closinal techniaue को बारीकी A८ लाइससलन का एग्जाम का पास कर लिया. डेबरा ने दूसरे एजेंट्स द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले हर क्लोजिंग (closing) technique को बारीकी से समझ लिया था. ये वही टेक्निक्स थे जिसे यूज़ करके क्लाइंट से सौदा पक्का किया जाता था. डेबरा ने डायरेक्ट क्लोज (close), ट्रायल ऑफर क्लोज, बेस्ट-टाइम-टू-बाय क्लोज और भी बहुत सारे टेक्निक्स के बारे में सीख लिया था. लेकिन इन सब में से कुछ भी उसके काम नहीं आया. पूरा एक साल बीत चुका था लेकिन डेबरा एक भी प्रॉपर्टी नहीं बेच पाई थी. अबवो खुद से निराश होने लगी थी. उसके 43rd बर्थडे पर डेबरा के एक दोस्त ने उसे सेल्स कन्वेंशन कीटिकेट दी. सेल्स कन्वेंशन मतलब एक मीटिंग जहां एक ही फील्ड के लोग जमा हो कर अपने काम के बारे में dicuss करते हैं. वहाँ डेबरा ने ये सीखा कि ज्यादा पैसा कमाने के लिए आपको अपने प्रोडक्ट में ज्यादा वैल्यू ऐड करना होगा. आप जितना ज्यादा वैल्यू ऐड करेंगे, आप उतना ही ज्यादा प्रॉफिट भी कमाएंगे. इससेकोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप मेक अप प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं या बर्गर, लांड्री सर्विस दे रहे हैं या रियल एस्टेट एजेंट की , बस उसमें वैल्यू जोड़ते जाइए. ये कस्टमर्स को बहुत पसंद आता है और इससेवो आपके पास दोबारा भी आएँगे. सेमीनार के बाद डेबरा चिंतित थी. उसके पास तो ऐसा कुछ नहीं था जिसे वो अपनी सर्विस में ज्यादा वैल्यू ऐड कर सकती थी. उसेऐसा लग रहा था जैसे उसका आत्म TITITHोला. HTafी पाने. तिने TT साना कर सकती थी. उसेऐसा लग रहा था जैसे उसका आत्म सम्मान(सेल्फ एस्टीम) भी उसके पति के साथ उसका साथ छोड़ कर चला गया हो. डेबरा अब उस मुकाम पर थी जब वो ये करियर छोड़ने के बारे में सोचने लगी. लेकिन उसका एक आखरी अपॉइंटमेंट बचा था. उस सुबह, वो क्लाइंट को लेकर प्रॉपर्टी दिखाने चली गई. क्योंकि डेबरा की ये आखरी क्लाइंट थी तो उसने जितने भी टेक्निक्स को सीखा था उन सब को पूरी तरह से नज़रंदाज़ कर दिया, उनमें से कुछ भी फॉलो नहीं किया. वो अपने क्लाइंट के साथ खुल कर बातें किये जा रही थी. उसने किसी भी ट्रिक या रटी रटाई बातों का इस्तेमाल नहीं किया. डेबरा तो बस अपने क्लाइंट के साथ एक दोस्त की तरह बात कर रही थी. वो अपने क्लाइंट की कहानियां सुन रही थी. वो पूरे दिन हँसते रहे और बातें करते रहे. डेबरा ने सोचा कि ये उसका आज तक का सबसे अलग बिज़नेस मीटिंगथा. इसमें वो एक प्रोफेशनल से ज्यादा अपना पर्सनल टच ऐड कर चुकी थी. उसे तो ये तक याद नहीं था कि उसने क्लाइंट को प्रॉपर्टी की कीमत बताई भी है या नहीं. डेबरा को लगा उसने तो सब सत्यानाश कर दिया. लेकिन कुछ दिनों बाद उसे फ़ोन आया. जिस क्लाइंट से उसने इतने घुल मिल कर दोस्तों की तरह बातें की थी उसने वाकई में प्रॉपर्टी को खरीद लिया था. तोआखिर में , डेबरा अपना पहला डील कम्पलीट करने में सफल कर सकती थी. उसेऐसा लग रहा था जैसे उसका आत्म सम्मान(सेल्फ एस्टीम) भी उसके पति के साथ उसका साथ छोड़ कर चला गया हो. डेबरा अब उस मुकाम पर थी जब वो ये करियर छोड़ने के बारे में सोचने लगी. लेकिन उसका एक आखरी अपॉइंटमेंट बचा था. उस सुबह, वो क्लाइंट को लेकर प्रॉपर्टी दिखाने चली गई. क्योंकि डेबरा की ये आखरी क्लाइंट थी तो उसने जितने भी टेक्निक्स को सीखा था उन सब को पूरी तरह से नज़रंदाज़ कर दिया, उनमें से कुछ भी फॉलो नहीं किया. वो अपने क्लाइंट के साथ खुल कर बातें किये जा रही थी. उसने किसी भी ट्रिक या रटी रटाई बातों का इस्तेमाल नहीं किया. डेबरा तो बस अपने क्लाइंट के साथ एक दोस्त की तरह बात कर रही थी. वो अपने क्लाइंट की कहानियां सुन रही थी. वो पूरे दिन हँसते रहे और बातें करते रहे. डेबरा ने सोचा कि ये उसका आज तक का सबसे अलग बिज़नेस मीटिंगथा. इसमें वो एक प्रोफेशनल से ज्यादा अपना पर्सनल टच ऐड कर चुकी थी. उसे तो ये तक याद नहीं था कि उसने क्लाइंट को प्रॉपर्टी की कीमत बताई भी है या नहीं. डेबरा को लगा उसने तो सब सत्यानाश कर दिया. लेकिन कुछ दिनों बाद उसे फ़ोन आया. जिस क्लाइंट से उसने इतने घुल मिल कर दोस्तों की तरह बातें की थी उसने वाकई में प्रॉपर्टी को खरीद लिया था. तोआखिर में , डेबरा अपना पहला डील कम्पलीट करने में सफल उसने इतने घुल मिल कर दोस्तों की तरह बातें की थी उसने वाकई में प्रॉपर्टी को खरीद लिया था. तोआखिर में , डेबरा अपना पहला डील कम्पलीट करने में सफल इसने उसे एक बहुत ज़रूरी बात सिखाई. उसे लगता था कि क्लाइंट को देने के लिए उसके पास कुछ ख़ास नहीं है.लेकिन अब उसे समझ में आ गया था कि वो खुद तो है, ये पर्सनल टच ही तो वैल्यू ऐड कर रहा था. उसके बाद तो उसने एक के बाद एक करकेकई प्रॉपर्टी बेच डाली. अब डेबरा एक टॉप रियल एस्टेट एजेंट होने के साथ साथ सेल्लिंग बिज़नेस के सेमीनार में इम्पोर्टेन्ट स्पीकर भी है. वो अपने बच्चों के साथ बहुत खुश है. उसे अपने करियर और सफलता से बहुत संतुष्टि मिली. बस यही लॉ ऑफ़ ऑथेंटिसिटी है, आप जैसे हैं वैसे रहिए. रियल, सच्चे, असली, इसमें कोई बनावटीपन या झूठा दिखावा नहीं होना चाहिए. किसी से या कहीं से सीखा हुआ technique यूज़ मत कीजिये. अपने क्लाइंट को ह्यूमन टच (Human touch) का एक्सपीरियंस दीजिये. एक दोस्त की तरह उनकी ज़रूरतों को समझिये, उनकी बातों पर ध्यान दीजिये. पूरी कोशिश कीजिये कि आप उन्हें बिलकुल वही दे सकें जो उन्हें चाहिए. अपना प्रोडक्ट उन पर थोपने की कोशिश मत कीजिये. इस तरह आप अपने प्रोडक्ट या सर्विस को बेच कर और भी ज्यादा ग्रो कर सकते हैं. A The Go-Giver Bob Burg andJohn David Mann द लॉ ऑफ़ receptivity (The Law of Receptivity) लॉ ऑफ़ receptivity का कहना है कि “कुछ देने की सोच को और ज्यादा असरदार बनाने का तरीका है कि आप खुद भी कुछ लेने के लिए तैयार रहे”. अभी तक इस बुक में आपने सिर्फ खुल कर देने के बारे में सीखा है. शायद आप इस सोच के बीच बड़े हुए होंगे कि “लेने से ज्यादा अच्छा देना होता है”. तो क्या इसका ये मतलब हुआ कि अगर आपका क्लाइंट बदले में आपको कुछ देना चाहता है तो उसे लेने से इनकार कर देना चाहिए? किसी से कुछ लेना भी नेचुरल है, स्वाभाविक है. अगर कोई कुछ देना चाहता है और आप उसे मना कर देते हैं तो वो भी बदतमीज़ी ही है. इसलिए जिस तरह आप देते हैं, उसी तरह स्वीकार करने के लिए भी अपनी सोच को बड़ा कीजिये. ऐसा करने से एक अच्छा और मज़बूत रिश्ता कायम रहता है. और किसी से कुछ वापस मिलना भी तो कितना नेचुरल है न, ये जीवन का एक अहम् हिस्सा है. पेड़ पौधों के बारे में सोचिये. वो कार्बन डाइऑक्साइड ले All Done? Finished नेचुरल है न, ये जीवन का एक अहम् हिस्सा है. पेड़ पौधों के बारे में सोचिये. वो कार्बन डाइऑक्साइड ले कर ऑक्सीजन देते हैं. तो वहीँ इंसान और जानवर ऑक्सीजन लेकर कार्बन डाइऑक्साइड देते हैं. जीवनइसी लेनदेन का एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है. जब आप लोगों की मदद करते हैं, उनके चुकाए हुए दाम के बदले उन्हें ज्यादा वैल्यू देते हैं तो ये एकदम स्वाभाविक है कि वो भी बदले में आपको कुछ ना कुछ देंगे. और आपको इसे स्वीकार करने के लिए तैयार होना चाहिए. आपके क्लाइंट, कस्टमर, एम्प्लोयी या साथ काम करने वाले आपको जो भी देना चाहते हैं चाहे वो कुछ भी हो उसे स्वीकार कीजिये. ये आपके अच्छे सम्बन्ध और स्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस को हमेशा बनाए रखेगा. द गो – गिवर (The Go-Giver) अर्नेस्टो से जो ने लॉ ऑफ़ वैल्यू के बारे में सीखा. निकोल से उसने लॉ ऑफ़ कंपनसेशन के बारे में सीखा, सैम से लॉ ऑफ़ इन्फ्लुएंस के बारे में और डेबरा से लॉ ऑफ़ ऑथेंटिसिटी के बारे में सीखा. मंडे से थर्सडे तक जो इन दिलचस्प लोगों से मिला. फ्राइडे को वो पिंडार के साथ अकेला था. वो दोनोंलॉ ऑफ़ रेसेप्टिविटी (receptivity) के बारे में बात 17 नेपाल 211ो All Done? Finished फ्राइडे को वो पिडार के साथ अकेला था. वो दानोला ऑफ़ रेसेप्टिविटी (receptivity) के बारे में बात करने लगे. तब जाकर ये रहस्य खुला कि फ्राइडे का वो ख़ास मेहमान खुद जो ही है. पूरे हफ्ते जो एक एक करके उन लॉज़ को उस दिन अप्लाई करने में सफल हुआ था. मंडे को, एक क्लाइंट ने जो को रिजेक्ट कर दिया था. तो जो ने उनकी मदद करने के लिए किसी दूसरे का नाम suggest किया ताकि उन्हें जो चाहिए वो उन्हें मिल सके. ये होता है लॉ ऑफ़ वैल्यू, जब आपको दिए गए पैसों के बदले में आप कुछ ज्यादा वापस करते हैं. ट्यूसडे को, जो को हाई क्वालिटी कॉफ़ी बीन्स से भरा हुआ एक बैग मिला, जिसे पिंडारकी शेफ रेचल ने भेजा था. उस दिन जब जो ऑफिस पहुंचा तो उसने सारे कॉफ़ी बीन्स का इस्तेमाल करके कॉफ़ी बनाया और हर एक को उसने कॉफ़ी पिलाई. ये है लॉ ऑफ़ कंपनसेशन कि जितना ज्यादा हो सके उतने लोगों को सर्व कीजिये,ज्यादा लोगों तक अपनी पहुँच बनाइये. वेडनेसडे को, जो अपनी वाइफ सुज़न की परेशानियों और शिकायतों को ध्यान से सुन रहा था. उसने सुजन से अपने मन का बोझ बाँटने के लिए कहा. जो ने उसे बीच में रोका नहीं. वो तब तक उसके पास बैठ कर उसकी तकलीफ को कम करने की कोशिश करता रहा निन तसे कट नहीं था पार्ट में लॉथॉर लालागि All Done? Finished उसकी तकलीफ को कम करने की कोशिश करता रहा जब तक उसे नींद नहींआ गई. ये है लॉ ऑफ़ इन्फ्लुएंस जहां दूसरों की इच्छा और ज़रूरतों को खुद से पहले रखा जाता है. थर्सडे को, जो अपने साथ काम करने वाले साथी गस से दिल खोल कर बातें कर रहा था. इससे उनकी दोस्ती और भी गहरी होने लगी थी. ये है लॉ ऑफ़ ऑथेंटिसिटीजहां आप किसी के सामने खुद को पेश करते हैं, एक ह्यूमन टच देते हैं. फ्राइडे को, जो को एक खूबसूरत तोहफ़ा मिला. पिछले मंडे को, जिस क्लाइंट ने जो को रिजेक्ट कर दिया था तब जो ने उन्हें एड बार्न्स नाम के एक लड़के के बारे में बताया था. तो फ्राइडे को जो को पता चला कि एड ने भी एक इम्पोर्टेन्ट क्लाइंट को जो के बारे में बताया था. जो ने एड को एक अमेजिंग मौका दिया था. कुछ दिनों बाद, जो को भी एड की तरफ से एक अद्भुत मौका मिला. ये है लॉ ऑफ़ रेसेप्टिविटीमतलब दूसरे से लेने के लिए तैयार रहना. जो ने पिंडार की शर्त को पूरा कर दिया था. उसने इन पांचो लॉ को अप्लाई करके खुद सच्चाई को परख लिया था. आप सोच रहे होंगे कि उसके बाद क्या हुआ? उसके बाद ये हुआ कि जो एक गो-गेटर से गो-गिवर बन गया था. All Done? Finished लिया था. आप सोच रहे होगे कि उसके बाद क्या हुआ? उसके बाद ये हुआ कि जो एक गो-गेटर से गो-गिवर बन गया था. जब तक वो ये सोचता था कि उसे क्या मिलेगा तब तक वो सफल नहीं हो पाया. लेकिन जब उसने ये सोचना शुरू किया कि वो क्या क्या दे सकता है तब उसने इतनी सफलता हासिल की जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी. एक रेगुलर एम्प्लोयी से जो एक बहुत सक्सेसफुल बिजनेसमैन बन गया. उसने रेचल के साथ मिलकर अपनी कंपनी शुरू की. वो पिंडार की शेफ थी जो दुनिया की सबसे लाजवाब कॉफ़ी बनाती थी. उनकी कंपनी का नाम था “रेचल्स फेमस कॉफ़ी”. इसकी शुरुआत उस बिज़नेस opportunity से हुई थी जो एड ने जो को दिया था. एक साल के अन्दर ही इस कंपनी ने स्ट्रैटोस्फेरिक सक्सेस की ऊंचाइयों को छू लिया था. उनकी कंपनी ने मिलियन डॉलर की कमाई कर ली थी. जो और उसके बिज़नस पार्टनर्स अब समाज सेवा के काम में हाथ बँटानेलगे थे. वो छोटे छोटे गाँव में खेती को आसान करने के लिए इरीगेशन सिस्टम या सिंचाई की सुविधा की प्लानिंग कर रहे थे. उन्होंने एक ऐसे फाउंडेशन की शुरुआत की जिसका Tਰ 9 ਸੇਗਾ ਧਧ 7 ਸੀ ਈ ਹਰੇ ਰਹੇ All Done? Finished की सुविधा की प्लानिंग कर रहे थे. उन्होंने एक ऐसे फाउंडेशन की शुरुआत की जिसका मकसद था दुनिया भर में कॉफ़ी की खेती करने वालों को आत्म निर्भर मतलब सेल्फ sufficient और कम्युनिटी के आधार पर कोआपरेटिव बना कर उनकी मदद करना था, लोगों का मानना है कि “कुछ लेने से ज्यादा अच्छा देना होता है” लेकिन अब आप समझ गए होंगे कि “सबसे पहले देना, बाद में बदले में कुछ लेना और इसे फिर दोहराना” सबसे अच्छा होता है. कानक्लुज़न (Conclusion) तो आपने अर्नेस्टो, सैम, डेबरा, निकोल और जो की कहानियों के बारे में जाना. आपने गो-गिवर बनने के महत्त्व के बारे में समझा. हो सकता है कि आप बिलकुल जो जैसे हैं. आपका ध्यान हमेशा सिर्फ इस बात पर रहता है कि आपको क्या मिलेगा. लेकिन अब तो आप समझ ही गए होंगे कि आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि अभी इस पल में कुछ लेने से पहले आप दूसरों क्या दे सकते इनलॉज़ को एक एक करके अपनाइए और अपने जीवन में अप्लाई करना शुरू कीजिये. आप खुद को ऐसी उड़ान भरते देखेंगे जो आपको उन ऊँचाइयों पर जे All Done? Finished को आत्म निर्भर मतलब सेल्फ sufficient और कम्युनिटी के आधार पर कोआपरेटिव बना कर उनकी मदद करना था. लोगों का मानना है कि “कुछ लेने से ज्यादा अच्छा देना होता है” लेकिन अब आप समझ गए होंगे कि “सबसे पहले देना, बाद में बदले में कुछ लेना और इसे फिर दोहराना” सबसे अच्छा होता है. कानक्लुज़न (Conclusion) तो आपने अर्नेस्टो, सैम, डेबरा, निकोल और जो की कहानियों के बारे में जाना. आपने गो-गिवर बनने के महत्त्व के बारे में समझा. हो सकता है कि आप बिलकुल जो जैसे हैं. आपका ध्यान हमेशा सिर्फ इस बात पर रहता है कि आपको क्या मिलेगा. लेकिन अब तो आप समझ ही गए होंगे कि आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि अभी इस पल में कुछ लेने से पहले आप दूसरों क्या दे सकते इनलॉज़ को एक एक करके अपनाइए और अपने जीवन में अप्लाई करना शुरू कीजिये. आप खुद को ऐसी उड़ान भरते देखेंगे जो आपको उन ऊँचाइयों पर जे जाएगा जो आपकी कल्पना से बिलकुल परे होगा. All Done? Finished

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