The Fortune Cookie Principle: The 20Keys to… Bernadette Jiwa Books Summary Pdf in hindi

The Fortune Cookie
Principle: The 20Keys to…
Bernadette Jiwa
इंट्रोडक्शन
आज की इस दौड़ती ज़िंदगी के हिसाब से एक
सक्सेसफुल ब्रैडिंग कैसी होनी चाहिए? इस बुक
की ऑथर बर्नाडेट जीवा की मानें तो इसका जवाब
आपकी अपनी ही कहानी में है जो आप अपने बारे में
सुनाते हो.
स्टोरीटेलिंग यानी कहानी सुनाना एक ऐसा पॉवरफुल
टूल है जिसका इस्तेमाल इंसान सदियों से करता रहा
है. एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक अपने ट्रेडिशन और
कल्चर को आगे बढाने के लिए और सोशल इन्फ्लुएंस
क्रिएट करने के लिए इंसान हमेशा कहानियां सुनाता
रहा है.
कहानियां किसे पसंद नहीं होती. हम सब कहानी
सुनना और सुनाना पसंद करते है, ये हमें इंस्पिरेशन
देती है, हमें मीनिंग समझाती है. आप अपने ब्रैंड
को लेकर एक स्टोरी क्रिएट करते हो और ये स्टोरी
जब आप अपने कस्टमर्स से शेयर करते हो तो इसका
डायरेक्ट इन्फ्लुएंस उस इमेज़ पर पड़ता है जो आपके
ब्रैंड को लेकर उनके मन में होती है. टेक्नोलोजी के
बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही ब्रैडस के बीच कॉम्पटीशन

बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही ब्रैंड्स के बीच कॉम्पटीशन
भी काफी बढ़ गया है, हर बैंड की यही कोशिश रहती
है कि वो ज़्यादा से ज़्यादा कस्टमर्स को अपनी तरफ
खींच सके.
अब सवाल ये उठता है कि कम समय में आप अपने
ब्रैड के लिए एक ऐसा इम्पैक्ट छोड़ने वाली स्टोरी कैसे
क्रिएट करोगे जिसका असर लंबे समय तक बना रहे ?
आपका प्रोडक्ट बिना स्टोरी के भी फैक्ट्स के बेसिस
पर चल सकता है पर उसकी कोई इमेज़ नहीं बन
पाएगी और वो सिर्फ एक कॉमन प्रोडक्ट बनकर रह
जाएगा जिसकी जगह कोई और प्रोडक्ट भी ले सकता
है.
एक प्रोडक्ट को बैंड बनाने के लिए आप क्या करोगे
कि लोग उसे पसंद करे और उसे अपनी लाइफ स्टाइल
का हिस्सा बना ले? क्या आपने सोचा है कि कस्टमर्स
को एक मीनिंग प्रोवाइड करने के लिए किस चीज़ की
जरूरत होती है ?
इस समरी में आपको इन सारे सवालों के जवाब तो
मिलेंगे ही और साथ ही आपको चैंडिंग के कुछ बेहद
इम्पोर्टेट, क्लियर और स्पेशिफिक टिप्स भी मिलेंगे.
इससे आप सीखोगे कि अपने कस्टमर्स के सामने
अपनी गुडविल बनाए रखते हुए बेहद कॉम्पटीटिव
मार्केट में कैसे ख़ुद के कदम जमाए रखें और कैसे

इससे आप सीखोगे कि अपने कस्टमर्स के सामने
अपनी गुडविल बनाए रखते हुए बेहद कॉम्पटीटिव
मार्केट में कैसे ख़ुद के कदम जमाए रखें और कैसे
अपना बिजनेस आगे बढ़ाएं.
तो क्या आप बिजनेस को लेकर अपनी सोच को
बदलने के लिए तैयार हैं ? अपने बिजनेस की एक
अच्छी इमेज क्रिएट करने और अपने लॉयल कस्टमर्स
के साथ कनेक्टेड रहने का यही सबसे बेस्ट तरीका है.
Truth-What business are you in?
एक बिजनेस के तौर पर आपकी सच्चाई क्या है?
असल में आपकी सच्चाई इन दो बातों में छुपी है कि
आप किस तरह का बिजनेस कर रहे हो और आपके
कस्टमर्स को असल में किस चीज़ की ज़रुरत है.
कस्टमर्स असल में सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं चाहते जो
उनकी ज़रुरत को पूरा करे, क्योंकि ये काम तो कोई
भी कॉमन ब्रैड भी कर सकता है. आपके पोटेंशियल
लॉयल कस्टमर्स को असल में उस प्रोडक्ट से जुड़ी
फीलिंग्स और ईमोश्न्स चाहिए. चाहे वो इमोशन या
फीलिंग प्रोडक्ट की सर्विस में हो, पैकेजिंग में, मार्केटिंग
में या फिर एम्प्लोईज़ में. उन्हें बस फील होना चाहिए
कि वो एक महान पर्पज से जुड़े हुए है. तो इसलिए
एक ब्रैड सिर्फ एक प्रोडक्ट या सर्विस नहीं है जो आप
दे रहे है बल्कि इसे आपके कस्टमर्स के लिए एक
फीलिंग और एक्सप्रेशन बनना पड़ेगा.

चलिये हम यहाँ पर प्रॉक्टर एंड गैम्बल का एक्जाम्पल
लेते है. जैसा कि सब जानते है ये कंपनी मार्केट में
कितनी पुरानी है पर 1997 के दशक में P&G के
कॉम्पटीशन में कई और डायपर बनाने वाले बैंड मार्केट
में उतर चुके थे. ख़ासकर उनके डायपर बैंड पैम्पर्स
को यूरोपियन मार्केट में कुछ खास response नहीं
मिल रहा था जबकि उनके कॉम्पटीशन में हगीज़,
जो उनके मुकाबले सस्ता था, वो काफी पोपुलर बैंड
बनता जा रहा था. पीएंडजी के पास ऐसा कोई फ़ॉर्मूला
नहीं था कि वो पैम्पर्स को मार्केट में हिट करवा दे,
बावजूद इसके कि पैम्पर्स अपने कस्टमर्स की सारी
ज़रूरतों को पूरा करने की काबिलियत रखता था.
गीलापन सोखने और ड्रायनेस के मामले में भी पैम्पर्स
पूरी तरह खरा उतरता था. इन सबके बावजूद पैम्पेर्स
को झीज़ जैसी पोपुलेरिटी नहीं मिल पा रही थी. माएं
अपने बच्चों के लिए पैम्पर्स के बजाये हमीज़ ज़्यादा
पसंद करती थी. पैम्पर्स के इनोवेटर जी-जान से अपने
प्रोडक्ट को और बेहतर बनाने में जुट गए- पहले से
ज़्यादा absorption, पहले से ज़्यादा कम्फर्ट और
ज़्यादा ड्राईनेस जैसी खासियत भी बेकार गई क्योंकि
झीज़ अभी भी नंबर वन पर था..
कुछ ही टाइम बाद पीएंडज़ी के चीफ़ मार्केटिंग
ऑफिसर जिम स्टेंजेल और उनकी टीम को एक
आईडिया सूझा. उन्होंने सीधे कस्टमर्स से पूछना शुरू
किया कि आखिर उन्हें क्या चाहिए. कंपनी ने सर्व

किए, वर्कशॉप रखे, इंटरव्यू लिए, यानि ये पता करने के
लिए सब कुछ किया कि एक माँ को अपने बच्चे के
डायपर से क्या चाहिए था और जब रिजल्ट सामने आए
तो चौंकाने वाले थे. पता चला कि माओं को अपने
बच्चे के लिए ऐसा डायपर बिल्कुल नहीं चाहिए था
जो बच्चे को पूरी तरह से सुखा यानी ड्राई रखने का
दावा करे. उन्हें ड्रायनेस से ज़्यादा कम्फर्ट की चिंता
थी. नवजात बच्चों की स्किन के लिए बहुत ज़्यादा
ड्रायनेस ठीक नहीं होती है.
तो कंपनी को एक सिंपल सच का पता चला कि
माएं अपने बच्चों के लिए सुपरड्राय डायपर नहीं
बल्कि कम्फर्ट और केयर चाहती है, बेशक प्रोडक्ट
जल्दी गीला हो जाए और डस्टबिन में फेंकना पड़े पर
माएं प्रोडक्ट में एक मीनिंग चाहती थी. तो इस तरह
पीएंडजी ने उन्हें उनकी सच्चाई देने का फैसला लिया.
वो माओं को कुछ ऐसा देना चाहते थे जो बेहद प्यार से
बनाया गया हो और माएं उस प्रोडक्ट पर भरोसा कर
सकें.
पीएंडजी ने मों को डायपर देने से पहले उनकी बात
गौर से सुनी और समझी और उस पर अमल किया.
माओं को ये भरोसा दिलाया गया कि पैम्पर्स उनके
बच्चों के लिए बड़े ही प्यार और केयर के साथ बनाया
गया है जिस पर वो आँखे मूंदकर भरोसा कर सकती
है. पैम्पर्स ने अपनी वेबसाइट पर माओं के लिए कई
टिप्स भी देने शुरू किए. उन्होंने कई माओं के साथ
१.

पीएंडजी ने मों को डायपर देने से पहले उनकी बात
गौर से सुनी और समझी और उस पर अमल किया.
माओं को ये भरोसा दिलाया गया कि पैम्पर्स उनके
बच्चों के लिए बड़े ही प्यार और केयर के साथ बनाया
गया है जिस पर वो आँखे मूंदकर भरोसा कर सकती
है. पैम्पर्स ने अपनी वेबसाइट पर माओं के लिए कई
टिप्स भी देने शुरू किए. उन्होंने कई माओं के साथ
कोलाब्रेट भी किया ताकि बच्चों की अलग-अलग
स्टेज की डेवलपमेंट के हिसाब से प्रोडक्ट बनाया जा
सके और फाईनली जब उन्होंने अपना प्रोडक्ट मार्केट
में लॉन्च किया तो वो पहले से काफी बेहतर था जो
माओं की कसौटी पर एकदम खरा उतरा. इस तरह से
पीएंडजी को एक लॉयल कस्टमर बेस बनाने में मदद
मिली जिसकी वजह से उनकी ग्लोबल एनुअल रेवेन्यू
$70 बिलियन तक पहुंच गई थी.
तो देखा आपने, एक बैंड के लिए अपने सच को
जानना कितना इम्पोर्टेट है. अपने सच को समझने के
साथ ही अपने कस्टमर्स के सच को समझना और ये
समझने की कोशिश करना कि आपके बैंड की आपके
कस्टमर्स के लिए क्या इम्पोर्टेस है, ये सब उतना ही
ज़रूरी है जितना कि कोई प्रोडक्ट या सर्विस देना.

The Fortune Cookie
Principle : The 20 Keys to…
Bernadette Jiwa
Purpose–The reason you exist
सक्सेसफुल बिजनेस सिर्फ पैसे कमाने के बारे में नहीं
बल्कि अपने पर्पज के बारे में भी सोचते है क्योंकि
एक पर्पज ही उनके बिजनेस को असली मीनिंग देता
है, उन्हें मार्केट में अलग पहचान देता है. बिना पर्पज के
कोई बिजनेस आगे नहीं बढ़ सकता. पर्पज एक बड़ा
आईडिया है, ये एक पैशन है जो बिजनेस को आगे
बढ़ने में और उसे चलाने में हेल्प करता है. इसलिए
अगर आपको अपने प्रोडक्ट या सर्विस की फ़िक्र है
तो अच्छी बात है. लेकिन ये बात हर बार साबित हो
चुकी है कि एक अच्छी ग्रोथ स्ट्रेटेज़ी आपके बिजनेस
के पर्पज पर डिपेंड करती है और ये पर्पज पैसे से कहीं
बढ़कर होना चाहिए. एक सक्सेसफुल बिजनेस चलाने
के लिए पैसे के पीछे नहीं बल्कि पर्पज के पीछे भागो
तभी बात बनेगी.
आपका पर्पज कुछ भी हो सकता है, ये कोई आईडिया
हो सकता है जिसे आप अचीव करना चाहे या कोई
सर्विस जो लोगों की ज़रुरत को पूरा करे. अपने
बिजनेस को सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं बल्कि
उससे कहीं बढ़कर एक वैल्यूएबल एक्सपीरिएंस
बनाओ. एक अच्छा पर्पज आपको ऐसा क्रिएटिव और
शनेट दादत टेगा जिससे को सत्सेस तो मिलेगी

उसस कहा बढ़कर एक पल्यूएबल एक्सपाारएस
बनाओ. एक अच्छा पर्पज आपको ऐसा क्रिएटिव और
पैशनेट ड्राइव देगा जिससे आपको सक्सेस तो मिलेगी
ही साथ ही साथ आपके कस्टमर्स भी संतुष्ट होंगे.
क्या आप एक कप कॉफ़ी के जरिए लोगों को खुशियाँ
बांटना चाहते है? क्या आप लोगों को हर तरह की
इन्फोर्मेशन एक ही प्लेटफॉर्म पर देने का सपना देखते
है? अगर हाँ तो ये आपका पर्पज हो सकता है. अपने
बिजनेस के लिए कोई युनीक रीज़न ढूंढो क्योंकि यही
वो चीज़ है जो आपको गाईड करेगी और आपके होने
की वजह बनेगी.
एक एडल्ट के लिए लेगो सिर्फ बच्चों का एक गेम
है हालाँकि लेगो को असेम्बल करने में बड़े-बडो के
पसीने छूट जाते है. लेगो की कहानी अपने आप में
काफी यूनिक है जो काफी ट्विस्ट और टर्न से भरी हुई
है. साल 2000 में ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ़ टॉय
रीटेलर्स ने लेगो कंपनी को टॉय ऑफ़ द सेंचुरी का नाम
दिया था. लेकिन तब कोई नहीं जानता था कि कंपनी
को एक बड़ा चैलेंज फेस करना पड़ेगा. 2004 खत्म
होते-होते लेगो कंपनी लोस में आ चुकी थी जिस वजह
से कंपनी को अपने हजारों एम्प्लोईज़ को निकालने
पड़े. इसी दौरान एक नए सीईओ ने कंपनी ज्वाइन की
जिसका नाम था जोर्गेन विग क्नुडस्टोर्प (Jorgen
Vig Knudstorp). एक साल के अंदर ही जोर्गेन ने
$3 मिलियन के घाटे को $110 मिलियन के प्रॉफिट में
बदल कर रख दिया

Vig Knudstorp). एक साल के अंदर ही जोर्गेन ने
$3 मिलियन के घाटे को $170 मिलियन के प्रॉफिट में
बदल कर रख दिया.
तो कहाँ गडबड हो रही थी? क्योंकि कंपनी ने लेगोलैंड
थीम पार्क, कंप्यूटर गेम और क्लोथिंग में फंडिंग की
थी तो प्रॉफिट टर्नओवर इनक्रीज होना ही चाहिए था
तो फिर कंपनी लोस में क्यों जा रही थी? जोर्गेन की
माने तो एक सवाल बार-बार उन्हें परेशान कर रहा था.
आखिर लेगो की शुरुवात क्यों हुई थी? जोर्गेन ने इस
सवाल का जवाब देने के लिए कंपनी की हिस्ट्री चेक
करने का फैसला किया ताकि वो जान सके कि लेगो में
ऐसा क्या यूनीक है और कहाँ उनसे गलती हुई थी.
जांच-पड़ताल से उन्हें पता चला कि लेगो के डाउनफाल
के पीछे एक बड़ी वजह थी और वो वजह थी कि कहीं
न कहीं कंपनी अपना यूनीक विज़न खो बैठी थी. उनका
यूनिक विज़न था बच्चों के जरिए फ्यूचर के बिल्डर्स
को इंस्पायर करना. कंपनी अपनी सप्लाई चेन को
organize करना भूल गई थी. कंपनी अपनी अच्छी
कस्टमर सर्विस के बारे में भूल चुकी थी यानि असल में
में
कंपनी अपना मेन प्रोडक्ट ही भूल गई थी. एक कंपनी
का फाउंडेशन उतना ही स्ट्रोंग होने चाहिए जितना कि
उसका पर्पज और यही पर्पज लेगो से छूट गया था और
कंपनी घाटे में चली गई.
ये तो अच्छा हुआ कि जोर्गेन को टाइम से अपना

ये तो अच्छा हुआ कि जोर्गेन को टाइम से अपना
असली पर्पज और वैल्यू का एहसास हो गया. अब
उनका main पर्पज है बच्चों को टूल्स प्रोवाइड
करके उनके अंदर क्रिएटिविटी को इंस्पायर करना,
उनके अंदर इमेजीनेशन डेवलप करना और फ्यूचर
के लिए उनके अंदर असली पोटेंशियल को रिलीज़
करना. अपने विज़न को फ़िर से डिस्कवर करके लेगो
ने अपने ऑपरेशन और डिसीजन को बढ़ाने पर फ़ोकस
करना शुरू कर दिया था और उन्होंने अपने ब्रिक्स
और सप्लायर्स को ठीक से organize करने पर
ध्यान दिया. इसके अलावा अपने कस्टमर्स को पास ही
डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर प्रोवाइड करके उन्हें बैटर कस्टमर
सपोर्ट देने में भी आसानी रही. इन सारे चेंजेस की वजह
से कंपनी का रेवेन्यू $17 बिलियन तक पहुंच गया था
और 2017 में सेल्स 17% तक बढ़ गई और ये सब हुआ
क्योंकि लेगो ने फाईनली उस चीज़ पर फ़ोकस करना
स्टार्ट कर दिया था जो उनके लिए सबसे ज़्यादा मैटर
करती थी और वो चीज़ थी: उनका पर्पज.
अपना खुद का पर्पज जानना और अपने होने की
वजह को समझना किसी भी बिजनेस को स्टार्ट करने
और चलाने के लिए सबसे इम्पोर्टेट फैक्टर्स में से एक
है. ये आपकी कंपनी policy से लेकर ब्रैड स्ट्रेटेज़ी
तक आपके हर छोटे-बड़े डिसीजन को गाइड करेंगे,
इसलिए ये बाद हमेशा ध्यान रखे कि किसी भी बैंड
को सर्वाइव करने के लिए एक पर्पस का होना जरूरी
है.

The Fortune Cookie
Principle: The 20Keys to…
Bernadette Jiwa
Vision
एक बार अपने पर्पज को बना लेने के बाद आपको
अपनी कंपनी के लिए विज़न भी ख़ुद ही मिल
जाएगा. विजन ही आपके बैंड का रियल गोल है. ये
एक डिक्लेयरेशन है कि आप फ्यूचर को इन्फ्लुएंस
करने के लिए कैसे प्लान करोगे. अगर आपका विज़न
क्लियर है तो वो ख़ुद आपके बिजनेस को चलाने के
तरीके और ब्रैड के फ्यूचर के लिए जो आप स्ट्रेटेज़ी
बनाते हो उसमें साफ़ नज़र आएगा. आपके बैंड का
विज़न भी बैंड के साथ-साथ ईवोल्व होगा. इसलिए
जरूरी है कि आप एक क्लियर मंजिल डिसाइड कर
ले कि आपका बिजनेस किस डायरेक्शन में जाना
चाहिए.
एयरबीएनबी के को-फाउंडर है जो गेब्बिया और
ब्रायन चेस्की (Joe Gebbia and Brian
Chesky) जिन्होंने उस दिन से पहले कभी फ्यूचर
की प्लानिंग तक नहीं की थी जिस दिन दोनों जो के
सैन फ्रांसिस्को के अपार्टमेंट का बढ़ा हुआ रेंट अफोर्ड
नहीं कर पा रहे थे. उनकी किस्मत अच्छी थी कि शहर
में एक इंटरनेशनल डिजाईन कांफ्रेंस हो रहा था और
सारे होटल बुक थे. दोनों मिलकर कोई ऐसा ब्रिलिएंट
सादिया सोच रहे थे जिससे एक तीर से टो शिकार

सारे होटल बुक थे. दोनों मिलकर कोई ऐसा ब्रिलिएंट
आईडिया सोच रहे थे जिससे एक तीर से दो शिकार
हो सके. इससे उनकी रेंट की प्रॉब्लम के साथ-साथ
कांफ्रेंस अकोमोडेशन की प्रॉब्लम भी सोल्व हो सकती
थी.
जो और ब्रायन ने अपने लिविंग रूम में एयर मैटरेस
लगा दिए और उन लोगों को रेंट पर दे दिया जो कांफ्रेंस
अटेंड करने सैन फ्रांसिस्को आए थे. दोनों ने 24 घंटे के
अंदर एक वेबसाईट बनाई और कुछ फेमस डिज़ाइनर्स
को ई-मेल भेजकर उनकी हेल्प से अपनी वेबसाईट को
प्रोमोट कर दिया. बस फिर क्या था! फौरन उन्हें तीन
लोग मिल गए जो उनके लिविंग रूम को रेंट पर लेने
को तैयार थे और इस तरह से एयर बेड और ब्रेकफास्ट
यानि एयरबीएनबी की शुरुआत हुई.
कुछ ही दिनों बाद Nathan Blecharczyk भी
इनके साथ जुड़ गए जो फंडिंग टीम का एक पार्ट बने
और प्लेटफॉर्म के हेड आर्किटेक्ट की पोजीशन संभाली.
पहले उनका आईडिया था कि वो लोग सिर्फ US
कांफ्रेंस में आने वाले लोगों को ही होस्ट किया करेंगे
लेकिन फिर जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि उनका
विज़न उनके यूजर्स के लिए कुछ ज़्यादा ही लिमिटेड
हो जाएगा. फाउंडर्स कुछ बड़ा सोच रहे थे. उन्हें अपना
विज़न मार्केट और कस्टमर की जरूरतों के हिसाब से
ईवोल्व करना था.

प्रेजेंट में एयरबीएनबी की यही कोशिश रहती है कि
वो दुनिया के 192 देशों में अपने कस्टमर्स को उनकी
जरूरत के हिसाब से एकोमोडेशन फेसिलिटी दे सकें.
कंपनी का बड़ा विज़न है दुनिया भर के लोगों के
साथ एक शेयर्ड मार्केटप्लेस के जरिये कनेक्ट होना.
इसलिए किसी भी बैंड को सक्सेसफुल होने के लिए
एक विज़न और डेस्टीनेशन की बेहद जरूरत पडती
है. लेकिन साथ ही ये भी उतना ही इम्पोर्टेट है कि
आप अपने बिजनेस को सिर्फ अपने विज़न तक ही ना
सीमित रखे. एक बिजनेस का विज़न उसके साथ-साथ
ह्मेशा ईवोल्व और ग्रो करता है.
Content and copy
कई नए एंटप्रेन्योर ये गलत सोच माइंड में बैठा लेते
है कि उनका कंटेंट हमेशा 100% प्रोफेशनल दिखना
चाहिए. एक और गलत सोच ये है कि उन्हें अपने
कंटेंट में ऐसे शब्दों को use करना चाहिए ताकि वो
प्रोफेशनल लगे ताकि लोग उन्हें और भी ज़्यादा
सीरियसली ले. जब ये सब किया जाता है तो रिजल्ट
के तौर पर उन्हें मिलता है एक ऐसा कंटेंट और कॉपी
जिसे ज्यादातर लोग देखना तक पंसद नहीं करते.
आज के टाइम में जहाँ अटेंशन बड़ी मुश्किल से
मिलता है तो भला क्यों कोई कस्टमर अपना टाइम
ऐसे कंटेंट और कॉपी पर वेस्ट करना चाहेगा जो किसी
अंडरग्रेजएट की थीसीस जैसी लगे जबकि मार्केट उन्हें

आज के टाइम में जहाँ अटेंशन बड़ी मुश्किल से
मिलता है तो भला क्यों कोई कस्टमर अपना टाइम
ऐसे कंटेंट और कॉपी पर वेस्ट करना चाहेगा जो किसी
अंडरग्रेजुएट की थीसीस जैसी लगे जबकि मार्केट उन्हें
ज़्यादा एक्साईटेड और रिलेटेबल कंटेंट प्रोवाइड करा
रही है जिसे देखकर उन्हें सच में कुछ महसूस होता है?
किसी भी बैंड का कंटेंट और कॉपी उसके कस्टमर्स
के साथ उसकी सबसे बड़ी कम्यूनिकेशन लाइन होती
है. ये ब्रैंड की आवाज़ और उसकी पर्सनेलिटी को
कस्टमर्स तक पहुंचाती है. बोरिंग और प्रोफेशनल लगने
वाले कंटेंट बैंड को भी बोरिंग बना देते है. एक अच्छा
कंटेंट कस्टमर्स को इन्फोर्मेशन के साथ-साथ और भी
बहुत कुछ जानने के लिए ललचाता है और बस यही से
कहानी स्टार्ट हो जाती है.
जरा इमेजिन कीजिये, एक अट्रेक्टिव लुकिंग कम कपड़े
पहने हुए एक आदमी किसी सपने जैसे बैकग्राउंड के
बीच आपसे बातें करता हुआ घूम रहा है और बोलता
है, “मैं एक घोड़े पर सवार हूँ”” और आप फौरन
समझ जाओगे कि ये ओल्ड स्पाईस का एड है. ओल्ड
स्पाइस एक ऐसा बैंड है जो 75 सालों से चला आ
रहा है. जब कॉम्पटीशन ज़्यादा नहीं था तब मार्केट
में ओल्ड स्पाइस का सबसे बड़ा शेयर हुआ करता था.
लेकिन कुछ दशको बाद बॉडी वाश इंडस्ट्री में कई सारी
कंपनीज़ अपना लक आजमाने कूद पड़ी तो फ्री मार्केट
की वजह से ओल्ड स्पाइस को लोग जैसे भूल ही गए
थे, और धीरे-धीरे कंपनी लोस में जाने लगी.

ओल्ड स्पाइस की इस दुःखभरी कहानी में
विएडेन-कैनेडी (Wieden+Kennedy) की जोकि
एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी है, किसी हीरो की तरह
एंट्री हुई. उन्होंने ओल्ड स्पाईस के मेन्यूफेक्चर पीएंडजी
को एक ऐसा ब्रैंड क्रिएट करने के लिए मना लिया जो
औरतों को अपने हज़बैंड या बॉयफ्रेंड के लिए और
ज़्यादा masculine सेंटेड बॉडी wash खरीदने के
लिए मोटिवेट कर सके. जुलाई 2010 सुपर bowl के
दौरान उन्होंने एक वीडियो कैंपेन लॉन्च किया, जिस
टाईटल था “The Man Your Man Could
Smell Like” जिसमे बेहद अट्रेक्टिव लुकिंग एक्टर
Isaiah Mustafa को लिया गया था.
फर्स्ट वीक के एंड तक ओल्ड स्पाइस को 40
मिलियन व्यूज़ मिले. उनकी वेबसाईट के ट्रेफिक में
300% इन्क्रीमेंट हुआ था और एक साल के अंदर
उनकी सेल्स पूरे 107% तक पहुँच चुकी थी. उनका वो
ad एक कल्चर जैसा बन गया था. लोग इस कैंपेन
की पैरोडी सोशल मिडिया पर पोस्ट करते थे जिसकी
वजह से और भी ज़्यादा लोगों ने ओरिजिनल वीडियो
को देखा.
सिर्फ एक कैम्पेन की वजह से मेंन’स ग्रूमिंग बैंड को
लेकर एक पूरी जेनरेशन की सोच ही बदल गई थी
और ये एक मेमोरेबल कैम्पेन बन कर रह गया था.
क्या ये ad प्रोफेशनल साउंड करता है? नहीं क्या
उन्होंने इसमें अपने ब्रैंड को लेकर कछ प्रोफेशनल शब्द

फर्स्ट वीक के एंड तक ओल्ड स्पाइस को 40
मिलियन व्यूज़ मिले. उनकी वेबसाईट के ट्रेफिक में
300% इन्क्रीमेंट हुआ था और एक साल के अंदर
उनकी सेल्स पूरे 107% तक पहुंच चुकी थी. उनका वो
ad एक कल्चर जैसा बन गया था. लोग इस कैंपेन
की पैरोडी सोशल मिडिया पर पोस्ट करते थे जिसकी
वजह से और भी ज़्यादा लोगों ने ओरिजिनल वीडियो
को देखा.
सिर्फ एक कैम्पेन की वजह से मेंन’स ग्रूमिंग बैंड को
लेकर एक पूरी जेनरेशन की सोच ही बदल गई थी
और ये एक मेमोरेबल कैम्पेन बन कर रह गया था.
क्या ये ad प्रोफेशनल साउंड करता है? नहीं . क्या
उन्होंने इसमें अपने बैंड को लेकर कुछ प्रोफेशनल शब्द
शामिल किए थे? नहीं. तो क्या फिर ये बेहद इंट्रेस्टिंग
और एक्साईटिंग था? हां बिल्कुल था. क्या इसने
कस्टमर्स के दिल में और ज़्यादा जानने की ईच्छा पैदा
की थी? तो जवाब है, हाँ.
इफेक्टिव कंटेंट और कॉपी राइटिंग को exciting
और ध्यान खींचने वाला होना चाहिए। यह दिलचस्प
होना चाहिए, और इसे कस्टमर्स में और ज़्यादा जानने
की इच्छा जगानी चाहिए।

The Fortune Cookie
Principle: The 20Keys to…
Bernadette Jiwa
Customer experience
कस्टमर एक्सपीरिएंस हर बँड स्टोरी का एक बड़ा पार्ट
होता है. जिस पल कस्टमर आपके ब्रैड को पहली बार
देखता है तब से लेकर उसके ब्रैंड को छोड़कर आगे
बढने तक वो एक कस्टमर एक्सपीरिएंस ले रहा होता
है. ये एक्सपीरिएंस ऑफलाइन भी हो सकता है और
ऑनलाइन भी. कस्टमर ऐसे बैंड ढूंढता है जो सीधा
उसके दिल को छू ले. इसलिए आपका काम है उनको
वो सेटिसफेक्शन देना जिसकी उन्हें तलाश है.
कस्टमर को जाते वक्त आपके बैंड और अपने कस्टमर
एक्सपीरिएंस को लेकर एक अच्छी फीलिंग आनी
चाहिए. यही वो चीज़ है जो आपके बैंड को दूसरों
से अलग बनाएगी. अगर उन्हें कोई फर्क या डिफ़रेंस
फील नहीं हुआ तो यानि आप उसे वो सेटिसफेक्शन
नहीं दे पा रहे है जिसकी उसे तलाश है. जिन ब्रैंड्स
के साथ कस्टमर्स लॉयल होते है और उनकी बात
करते है, जरूरी नहीं कि वो बेस्ट प्रोडक्ट्स ही बनाते
हो बल्कि ये वो ब्राण्ड है जो उन्हें ओवरआल अच्छा
एक्सपीरिएंस देते हैं.
अगर आपके कस्टमर्स को जाते वक्त एक अच्छा

अगर आपके कस्टमर्स को जाते वक्त एक अच्छा
कस्टमर एक्सपीरिएंस नहीं मिलेगा तो वो शायद ही
लौटकर आना चाहेंगे. इससे बैंड को अपनी स्टोरी शेयर
करने के लिए और जिस टाइप के कस्टमर्स उसे चाहिए,
उस टाइप के कस्टमर्स को अपने बैंड का एक्सपीरिएंस
कराने का भी मौका मिल जाता है.
इन्स्टाग्राम के को-फाउंडर्स केविन सिस्ट्रोम और
माइक क्रिगर (Kevin Systrom and Mike
Krieger,) को भी शुरुवात में काफी बड़ा चेलेंज
फेस करना पड़ा क्योंकि अक्टूबर, 2010 में जब वो
मार्केट में उतरे थे, उस वक्त पहले से ही कई पोपुलर
फोटो शेयरिंग apps की भरमार थी. लेकिन इसके
बावजूद इन्स्टाग्राम तुरंत लोगों की नज़रो में चढ़
गया और इसकी वजह भी काफी सिंपल थी. असल
में इन्स्टाग्राम का गोल बाकि एप्स से एक बैटर यूजर/
कस्टमर्स एक्सपीरिएंस प्रोवाइड कराना था. बैटर
यूज़र एक्सपीरिएंस का मतलब यहाँ डिजाईन की
सिंपलीसिटी और ईज़ी टू यूज़ फीचर्स से है. सबसे
इम्पोर्टेट बात तो ये कि इन्स्टाग्राम अपने यूज़र्स को कुछ
इस तरीके से कनेक्ट करता है जिससे उन्हें ख़ुद की
स्टोरीज़ शेयर करने का मौका तो मिला ही साथ ही
ख़ुद की अपनी ऑडियंस फोलोविंग क्रिएट करने के
लिए एक प्लेटफॉर्म भी मिला और वो भी सिर्फ एक एप
और एक फ़ोन कैमरा की बदौलत.
इन्स्टा के फाउंडर्स ने ये एप बनाई ही इस तरह से है कि

इम्पोर्टेट बात तो ये कि इन्स्टाग्राम अपने यूज़र्स को कुछ
इस तरीके से कनेक्ट करता है जिससे उन्हें ख़ुद की
स्टोरीज़ शेयर करने का मौका तो मिला ही साथ ही
ख़ुद की अपनी ऑडियंस फोलोविंग क्रिएट करने के
लिए एक प्लेटफॉर्म भी मिला और वो भी सिर्फ एक एप
और एक फ़ोन कैमरा की बदौलत.
इन्स्टा के फाउंडर्स ने ये एप बनाई ही इस तरह से है कि
इसे यूज़ करना बेहद आसान है, इसमें पोस्ट,शेयर और
लाइक करने के स्टेप्स एकदम ईज़ी है. यूजर पलक
झपकते ही फोटो लेकर उसे इन्स्टा पर अपलोड कर
सकता है और उसे तुरंत अपनी ऑडियंस का फीडबैक
भी मिल जाता है.
इन्स्टाग्राम को स्टोरी ख़ुद सुनाने की जरूरत नहीं
पडती बल्कि ये लोगों को प्लेटफॉर्म प्रोवाइड कराता
है जहाँ लोग अपनी स्टोरीज़ अपने ऑडियंस शेयर
करते है. इन्स्टाग्राम का एप और उसे ऑपरेट करने का
तरीका ही उसकी स्टोरी है और बस यही चीज़ यूजर के
साथ क्लिक कर जाती है.
और फाईनली मार्केट में लॉन्च होने के 18 महीने बाद
ही एप्रिल 2012 में फेसबुक ने इन्स्टाग्राम को फाईनली
खरीद लिया और ये उसकी सबसे बड़ी सक्सेस स्टोरी
है.

The Fortune Cookie
Principle: The 20Keys to…
Bernadette Jiwa
Perception
एक ब्रैंड की पोजीशन सिम्पली उसकी वो इमेज होती
है जो कस्टमर उसकी स्टोरी और वैल्यू देखकर इमेजिन
करता है. किसी भी बैंड की पोजीशन बड़ी ईज़िली
एडवरटीजमेंट, बिलबोर्ड और जिंगल के ज़रिए हेरफेर
की जा सकती है. इसका मकसद सिर्फ इतना है कि
ब्रैड और इसका मैसेज कस्टमर्स को हमेशा याद रहे.
लेकिन ये अब उतना सिंपल नहीं रहा, आज के इस
डिजिटल और ट्रांसपेरेंट दुनिया में लोगों को पलक
झपकते ही सारी इन्फोर्मेशन मिल जाती है. ऐसे में एक
ऐसी अँड इमेज क्रिएट और मेंटेन करना जो लोगों के
माइंड में फ़िक्स हो जाए, क्या एक बड़ा चेलेंज नहीं
होगा? बेशक होगा, आप कर ही नहीं सकते. जो चीज़
सबसे ज़्यादा मैटर करती है, वो है कस्टमर का आपके
बैंड को लेकर परसेप्शन यानी सोच जिसे आप एक
सिंपल एडवरटाईजिंग या टैगलाइन के भरोसे नहीं
छोड़ सकते.

इसलिए आज के टाइम में जहाँ इतना कॉम्पटीशन है,
ब्रैड्स को और ज़्यादा मेहनत करनी होगी ताकि वो
अपने कस्टमर्स के साथ कस्टमर केयर और सर्विस,
बैटर प्रोडक्ट और बैटर वैल्यू के ज़रिए एक लंबा रिश्ता
बना सकें. एक अच्छा कस्टमर परसेप्शन इसलिए भी
जरूरी है कि कस्टमर आपके बैंड के लिए लॉयल फील
कर सके. अपने कस्टमर्स का दिल जीतने के बाद ही
आप लंबे सक्सेस की उम्मीद कर सकते है.
सिंपल, सस्ते और एक्सेसिबल, वेस्पा के क्रिएटर
एनरिको पैगियो (Enrico Piaggio,) ने अपने
सामने यही विज़न रखा था जब उन्होंने वॉर के बाद
इटेलियन पोपुलेशन के लिए गाड़ी बनाने के बारे में
सोचा था. 1946 में इसी तरह से इसे पोजीशन किया
गया, जब वेस्पा को मार्केट में लॉन्च किया गया और
बाद में इसकी जो इमेज क्रिएट हुई, वो एकदम ही
अलग कहानी है.
लोगों को वेस्पा एक स्टाइल स्टेटमेंट लगी, उनके लिए
ये आज़ादी और सेलिब्रेशन ऑफ़ इटेलियन स्टाइल
का सिम्ब्ल थी. धीरे-धीर लोग वेस्पा को अच्छे लाइफ
स्टाइल से जोड़ने लगे जहाँ राईडर वेस्पा चलाते हुए
बड़ी शान से चलता है.

ब्रिटेन में लोगों का एक क्लास ऐसा भी था जिनके
लिए वेस्पा उनके वर्किंग क्लास रूट्स से बचने का एक
तरीका था. ये उनके लिए एक स्टेटस सिंबल बन गया,
एक ऐसी चीज़ थी जो लोगों की सोशल पोजिशन को
इम्प्रूव करती थी.
आज के प्रेजेंट सिनेरियो में दुनिया भर के लॉयल वेस्पा
राईडर्स वेस्पा क्लब से जुड़े हुए है और वर्ल्ड वेस्पा डे
मनाते है. वो ब्रैंड के साथ अपना लंबा रिश्ता सेलिब्रेट
करते है. क्योंकि वेस्पा बँड आज भी अपने कस्टमर्स
के दिलो-दिमाग में राज करता है.
ये कोई स्टोरी या पोजीशन नहीं थी जो एनरिको बेचना
चाहते थे. ये एक सपना था जिस पर कस्टमर्स विश्वास
करना चाहते थे क्योंकि जो स्टोरी वो ख़ुद को सुनाते
है, वो उस स्टोरी से ज़्यादा उनके दिल के करीब है जो
एनरिको ने उन्हें सुनाने की कोशिश की थी.
Conclusion
इस समरी में आपने जाना कि बैंड स्ट्रेटेज़ी सिर्फ
एडवरटाईजिंग तक सीमित नहीं है बल्कि उससे कहीं
बढ़कर है. ये वो कहानी है जो एक ड्रड से जुडी रहती
है और ब्रैड अपने कस्टमर्स तक इस स्टोरी को पहुंचाता
गर

प०कर 6. पपा पहाना 6 || एप सा रहता
है और भैंड अपने कस्टमर्स तक इस स्टोरी को पहुंचाता
है.
आपने इसमें जाना कि एक बैंड के लिए बेहद जरूरी
है कि वो अपनी असलियत को समझे और अपने
टारगेट कस्टमर्स के साथ हमदर्दी दिखाते हुए उन्हें एक
ऐसी स्टोरी दे जो उन्हें स्पेशल फील कराए ताकि वो
आपके बैंड के लिए लॉयल कस्टमर साबित सके.
आपने ये भी सीखा कि स्कसेस के लिए बेहद जरूरी
है कि आपका बैंड एक उंचा मकसद लेकर आगे बढ़े.
आपके पास कोई स्ट्रोंग कारण होना चाहिए कि आप
ये बिजनेस क्यों और किसलिए कर रहे है और आपके
बिजनेस से आपके कस्टमर्स को कैसे फायदा होगा.
आपने ये भी जाना कि किसी भी बिजनेस को चलाने
के लिए आपके पास एक विज़न होना जरूरी है ताकि
आपको अपना बिजनेस चलाने में और उसका फ्यूचर
डिसाइड करने में हेल्प मिल सके. इसलिए सबसे बेस्ट
यही होगा कि आप खुले दिमाग से सोचें जिससे कि
आपके बिजनेस को ग्रो करने के लिए फुल पोटेंशियल
मिल सके.

बैंड इमेज़ बनाने के लिए शायद प्रोफेशनल लेंगुएज़
ज़्यादा सूट नहीं करेगी. ब्रैंड्स को अगर ज़्यादा
कस्टमर्स चाहिए और उन कस्टमर्स को अपने साथ
जोड़े रखना है तो उन्हें और भी मेहनत करनी होगी
क्योंकि आपके कस्टमर्स को प्रोफेशनल शब्द या बातें
पढना उतना पसंद नहीं है. कस्टमर्स को ऐसे प्रोडक्ट
या सर्विस चाहिए जो कंपनी उन्हें एक एक्साईटिंग और
रिलेटेबल तरीके में बेच रही हो.
ये समरी हमें एक और चीज़ सिखाती है कि
ओवरआल कस्टमर एक्सपीरिएंस बेहद इम्पोर्टेट है. ये
ब्रैंड्स को एक अपोयूँनिटी देता है कि वो उन लोगों
की ज़रुरत को पूरा कर सके जिन्हें वो सर्व करना
चाहते है. कस्टमर की पहली ख़रीददारी से लेकर
उसके जाने तक बैंड उसे जो एक एक्सपीरिएंस देगा,
यही एक्सपीरिएंस डिसाइड करेगा कि कस्टमर वापस
लौटकर आएगा या नहीं.
और फाईनली हमने ये भी जाना कि आज की इस
फ़ास्ट लाइफ में अगर कस्टमर्स के दिल में जगह बनानी
है तो सिर्फ बिलबोर्ड और एडवरटीज़मेंट से काम नहीं
चलने वाला बल्कि कस्टमर्स का आपके बैंड को
लेकर जो सोच या इमेज़ है, वो ज़्यादा मैटर करती है

चलन वाला बाल्क कस्टमस का आपक ब्रड का
लेकर जो सोच या इमेज़ है, वो ज़्यादा मैटर करती है
क्योंकि इसी से आपके कस्टमर्स की लॉयलिटी डिसाइड
होती है. अगर बैंड के पास अपने कस्टमर्स को लुभाने
के लिए कोई स्टोरी नहीं है जो उनके दिल को छुए.
तो वो कभी भी कस्टमर्स के दिल में अपनी जगह नहीं
बना पाएँगे.
अपने बैंड की सच्चाई , पर्पज और विज़न को
समझना, अपना कंटेंट बिल्ड करना, कस्टमर
एक्सपीरिएंस और परसेप्शन ये सब बातें
शुरुआत
में
बहुत मेहनत का काम लगता है पर अगर एयरबीएनबी
के को-फाउंडर्स सिर्फ $1000 के बैंक अकाउंट के
साथ अपनी सक्सेस स्टोरी क्रिएट कर सकते है तो
आप क्यों नहीं कर सकते!
अपना दिलो-दिमाग पूरी तरह से गेम में लगा दो, खुद
पर भरोसा रखो और कभी अपने पर्पज को मत
भूलो, यही वो चीज़े है जो आपको लॉन्ग रन में काम
आएगी और आपको भीड़ में यूनीक बनाएंगी. जो चीज़
पर आप दिल से विश्वास करते हो, अगर वो वाकई में
मीनिंगफुल है तो उसे try करने से डरो मत!

Leave a Reply