THE COACHING HABIT-Say Less, Ask More, and Cha… Michael Bungay Stanier Books Summary In Hindi

THE COACHING HABIT-Say
Less, Ask More, and Cha…
Michael Bungay Stanier
1. Introduction

कोच वह होता है जो दूसरों को गाइडेंस देता है और लीड करता है। यह पोजीशन सिर्फ स्पोर्ट्स की फील्ड
तक ही नहीं लिमिटेड नहीं होती है। बिजनेस लीडर्स भी कोच हो सकते हैं। एक मजबूत और इंडिपेंडेंट टीम
बनाना हर कोच का सपना होता है। लेकिन कोचिंग आसान जॉब नहीं है। कई बार अपना सबसे बेस्ट देना भी काफी नहीं होता। कई बार आपकी टीम आपके सिखाए हुए लेशंस को भूल जाती है। इसका हल यह है कि आप अपने कोच करने का तरीका बदलिए। इसे scheduled कोचिंग सेशन यानी टाइम में बंधे हुए कोचिंग सेशन के जरिए करना बंद कीजिए। इसके बदले कोचिंग अपनी आदत बना लीजिए। एक लेसन सिखाने का कोई भी मौका मत छोड़िए, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों ना हो। यह समरी आपको उन चैलेंजेज को दिखाएगी जिसका सामना अक्सर हर बिजनेस को प्रॉब्लम सोल्व करते हुए करना पड़ता है। आप AWE के
सवाल यानी “And what else ?“, जिसका हिंदी में मतलब है “और क्या”, के जरिए प्रोडक्टिव बातचीत करना सीखेंगे। यह सवाल आपकी टीम को creative solutions ढूंढने में भी मदद करेगा । इन solutions से आप सबसे बेस्ट डिसिशन ले सकते हैं।

एक कोच के रूप में आपको लोगों को इस तरीके से गाइड करना चाहिए, जिससे उन्हें और किसी सुपर विजन की जरूरत ना पड़े। यह समरी आपको दिखाएगी कि ऐसा कैसे करना है। आपको यह भी
सीखने को मिलेगा कि कोई प्रॉब्लम हल करते समय सच में स्ट्रेटजीक कैसे बनें। यह आपको और ज्यादा
यूज़फुल और मीनिंगफुल काम करने में मदद करेगी। यह समरी आपको कुछ भी सीखने का सबसे असरदार तरीका बताएगी।
एक कोच के तौर पर आपका आपकी टीम के लिए और अपने लिए टारगेट बहुत ऊंचे होंगे। उस तक
पहुंचने के लिए आपको एफिशिएंट और मदद करने वाला कोच बनना सीखने की जरूरत है। इसका मतलब
यह नहीं है कि आप हर बार अपनी टीम को बताएं कि उन्हें क्या करना है। आपको उन्हें ऐसे सवाल पूछने की
जरूरत है जो उन्हें self-improvement की ओर गाइड करें। आप कम बोलकर भी उनके लिए बहुत
कुछ कर सकते हैं।

2.0 The Kickstart Question
जब आप लोगों के ग्रुप को लीड करते हैं तब आपको कोच समझा जाता है। डायरेक्टर, मैनेजर और
सुपरवाइजर, इन सब को कोच के रूप में देखा जाता है। आपको उन लोगों को बेहतर बनने में मदद करनी
चाहिए जो आपके लिए काम करते हैं । ऐसे दो मेन प्रॉब्लम हैं जिन्हें किसी भी कोच को सुलझाना होता है। प्रॉब्लम सॉल्विंग एक ऐसी चीज है जिसमें बहुत से business को बेहतर होने की जरूरत है। ज्यादातर कंपनियां इंटरनल प्रॉब्लम का पता लगाने में समय लेती हैं। वह हर हफ्ते बहुत सी मीटिंग्स करती हैं लेकिन यह सब मीटिंग हल ढूंढने में कामयाब नहीं होतीं। दूसरा प्रॉब्लम है ऑफिस में बहुत ज्यादा छोटी छोटी
बातचीत होना। यह वह समय है जब आप बिजनेस के अलावा दूसरी चीजों के बारे में बात करते हुए समय
बर्बाद करते हैं। छोटी बातचीत की कभी कभी जरूरत पड़ती है। यह रोज की रूटीन से ब्रेक के लिए होती
है। हर बार काम की बातचीत करना थकाने वाला हो सकता है लेकिन यह चीज किसी coach के लिए
ठीक नहीं है।
कई बार बहुत कम बात करना या मीटिंग ना करना भी एक प्रॉब्लम हो सकता है। कई बिजनेस बिना डिस्कशनकिए ही प्रॉब्लम को सोल्व करने की कोशिश करते हैं। वह गलत प्रॉब्लम की ओर भागते हैं और अपना समय और पैसा दोनों बर्बाद करते हैं। तो आप एक कोच के रूप में यह कैसे तय करेंगे कि कौन से प्रॉब्लम को सोल्व करने की जरूरत है? आप ऐसा kickstart सवाल पूछकर कर सकते हैं | Gary जब भी अपनी टीम से मिलते हैं वह एक किकस्टार्ट सवाल पूछते हैं। वह उनसे पूछते हैं, “तुम्हारे माइंड में क्या चल रहा है ?”

यह सवाल मीनिंगफुल है क्योंकि यह बातचीत तो शुरु करता है लेकिन गैर जरूरी बातचीत नहीं। दूसरे शब्दों
में कहा जाए तो यह सवाल छोटी बातचीत की तरफ नहीं लेकर जाता। यह employee को उनके मन में
जो भी है वह बोलने की आजादी देता है। ये बताता है की Gary उन से सबसे ज्यादा जरूरी चीजों के बारे में
बात करने की उम्मीद करते हैं। किकस्टार्ट सवाल आपको प्रॉब्लम को पहचानने में मदद करता है। लेकिन 3P model आपको इसके आगे मदद कर सकता है। 3P का मतलब होता है। प्रोजेक्ट, पीपल या लोग और पैटर्न । प्रोजेक्ट वह काम है जो आपकी टीम कर रही है। पीपल किकस्टार्ट सवाल आपको प्रॉब्लम को पहचानने में मदद करता है। लेकिन 3P model आपको इसके आगे मदद कर सकता है। 3P का मतलब होता है. प्रोजेक्ट, पीपल या लोग और पैटर्न। प्रोजेक्ट वह काम है जो आपकी टीम कर रही है। पीपल वह लोग हैं जो इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। पैटर्न वह व्यवहार या हरकत है जो लोग काम करते हुए दिखाते हैं। आमतौर पर इन तीनों एरिया में से ही किसी एक में प्रॉब्लम आती है।

Gary हर डिस्कशन में 3P पर ध्यान देते हैं | 3P model और किकस्टार्ट सवाल हर मीटिंग को प्रोडक्टिव बनाते हैं। आमतौर पर प्रोजेक्ट में हो रही प्रॉब्लम को ढूंढना सबसे आसान है। इसीलिए Gary हमेशा इसके बारे में सबसे पहले पूछते हैं। जब पीपल यानी लोगों की बात आती है तो Gary यह पहचानने की कोशिश करते हैं की किसका वर्कप्लेस रिलेशनशिप सबसे खराब है। मान लीजिए पहले दो पी इस टीम के प्रॉब्लम नहीं है, तब Gary प्रॉब्लमैटिक पैटर्न या behaviour खोजते हैं।

3.0 THE COACHING HABIT-Say
Less, Ask More, and Cha…
Michael Bungay Stanier
The AWE Question

Paul Nutt एक एनालिस्ट हैं जिन्होंने ऑर्गेनाइजेशंस में लिए जाने वाले फैसलों पर स्टडी की है। स्टडी
करते हुए Nutt को कुछ इंटरेस्टिंग मिला। जितने भी फैसले कंपनियां लेती है वह उनमें से ज्यादातर बायनरी
ऑप्शन होते हैं यानी दो आप्शन। इसका मतलब है जिसके पास फैसले लेने का हक है उसके पास
डिसिशन लेने का एक आसान तरीका है। वो बस एक सवाल पूछता है, “हमें यह करना चाहिए या नहीं?”
फैसले लेने का ये बायनरी सिस्टम ज्यादातर समय फेल होता है और यह चिंता की बात है। ऑर्गेनाइजेशंस
इसके पीछे समय, मेहनत और पैसे जैसे बहुत से रिसोर्सेज बर्बाद करते हैं। Nutt ने कहा ऑर्गेनाइजेशंस
ऐसे फैसले ले रहे हैं जैसे कोई गैरजिम्मेदार टीनएजर लेता है। लेकिन वे ऑर्गेनाइजेशंस जो और भी ज्यादा
ऑप्शन कंसीडर करते हैं, उनके रिजल्ट अलग थे। वे ऑर्गेनाइजेशन यह नहीं पूछ रहे थे कि ” यह करना
चाहिए या नहीं ?” इसके बजाय उनका सवाल होता था, “या शायद हमें ये करना चाहिए? या फिर शायद उनके फैसले ज्यादातर सक्सेसफुल रहे इसलिए उन्होंने न सिर्फ अपने रिसोर्सेस बचाए, बल्कि कुछ रिसोर्सेस कमाए भी। इसलिए कंपनियों को फैसले लेने के लिए कम से कम तीन ऑप्शन को कंसीडर करना चाहिए। एक कोच के रूप में आप अक्सर लोगों को सिर्फ दो पॉसिबिलिटी कंसीडर करते देखेंगे और यही कार्ला ने भी अपने वर्कप्लेस में गौर किया। कार्ला अपनी टीम से एक सवाल पूछती है जो उन्हें किसी भी सिचुएशन में ज्यादा नॉलेज देता है। वह सवाल है, And what else? यानी “और क्या?”। इसे AWE सवाल भी कहा जाता है।

ऐसा कई बार हुआ है जब कार्ला यह सवाल पूछती है। जैसे, कोई कार्ला को फ्यूचर के लिए अपने plan
के बारे में बताता है। “आप और क्या कर सकते हैं?” पूछकर कार्ला उन्हें और ज्यादा possibilities
कंसीडर करवाती हैं | यह कार्ला को तब भी मदद करता है जब उनकी टीम कोई प्रॉब्लम सोल्व कर रही होती है। कार्ला उनसे पूछती हैं कि “हमारा सबसे बड़ा चैलेंज क्या है ?” लेकिन उसका जो जवाब बताया गया था कार्ला उससे खुश नहीं थीं। तो उन्होंने पूछना जारी रखा। उन्होंने पूछा “यहां और क्या है जो हमारे लिए चैलेंजिंग है ? ” AWE सवाल helpful है क्योंकि यह आपको “advice monster” बनने से रोकता है यानी जब आप हमेशा लोगों को बताते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए। समय-समय पर सलाह देना जरूरी होता है

लेकिन ज्यादा सलाह देना खराब हो सकता है। कई बार आपकी सलाह गलत भी साबित हो सकती
है। आप यह बात तब तक नहीं जान सकते जब तक आपके पास ज़्यादा information ना हो। AWE
सवाल आपको यह गलती करने से रोकता है। AWE सवाल अपनी आदत बना लीजिए। यह कोई भी प्रॉब्लम
हल करने का सबसे आसान तरीका है। एक कोच के रूप में कई बार सिचुएशन समझना आसान नहीं होगा। आपको उसे समझने में समय लगेगा और सही इंस्ट्रक्शन देने के लिए भी आपको समय लगेगा। ऐसे समय में पूछिए, “And what else?” यानी “ और क्या?”, इस तरीके से आपको सोचने के लिए कुछ समय मिल जाएगा।  ऐसी कुछ चीजें है जिसे आपको AWE सवाल पूछते समय ध्यान में रखना चाहिए। पहला इसे बहुत ज्यादा इस्तेमाल मत कीजिए। कई बार आपको लगेगा की बातचीत में एनर्जी की कमी हो रही है, आपकी टीम थक गई है, तब AWE सवाल पूछना बंद कर दीजिए अगर कोई कहता है कि “इसमें और कुछ भी नहीं है। “तो नई बात शुरू कीजिए ।

जब आप यह सवाल करें तब सच्चे मन से कीजिए सिर्फ इसलिए कि आप यह सवाल पूछ सकते हैं
इसलिए इसे मत पूछिए। आपको यह खुद एक्सपीरियंस करके पता लगाना होगा कि कितनी बार इसे
इस्तेमाल करना इफेक्टिव है। इस बुक के Author Michael Stanier इसे कम से कम 3 बार पूछने
की सलाह देते हैं लेकिन आपको इसे 5 बार से ज्यादा नहीं पूछना चाहिए।
आप इस सवाल को कितनी बार पूछते हैं यह बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत ज्यादा ऑप्शंस
होना भी खराब है। AWE सवाल का गोल यह नहीं है कि आपके पास जितना हो सके उतने ज्यादा आईडिया
हों। इसका गोल है एक इंसान या एक टीम के पास जितने भी अच्छे आईडिया हो सकते हैं उसे खोजना।

प्रॉसिक्यूटर वह इंसान होता है जो यह मानता है कि उसके चारों तरफ सिर्फ बेवकूफ भरे पड़े है। उसे लगता
है कि हर प्रॉब्लम का कारण दूसरे लोग हैं। प्रॉसिक्यूटर यह भी मानता है कि बाकी लोग उसके जितने अच्छे
या efficient नहीं हैं। लोगों को प्रॉसिक्यूटर के साथ काम करना पसंद नहीं होता है।
विक्टिम को हमेशा यह लगता है कि उसकी जिंदगी मुश्किल इसलिए है क्योंकि पूरी दुनिया ही गलत या
अनफेयर है। उन्हें निराशा और नाउम्मीदगी महसूस होती है। वह अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए
कुछ नहीं करते। विक्टिम मेहनत करने के बजाए हमेशा अपनी प्रॉब्लम के बारे में शिकायत करते रहते हैं।
विक्टिम अपनी प्रॉब्लम सुलझाने के लिए दूसरे लोगों पर डिपेंड करते हैं । रेस्क्यूअर को लगता है कि सभी प्रॉब्लम को सुलझाना उन्हीं की जिम्मेदारी है। रेस्क्यूअर को लगता है कि उनके बिना कोई भी चीज ठीक से नहीं हो सकती।
वह जिम्मेदारी उठाते हैं और सब की मदद करने की कोशिश करते हैं। लेकिन बिना मांगे मदद भी अच्छी नहीं होती है। आखिरकार लोग रेस्क्यूअर को नजरअंदाज करने लगते हैं और उनसे मदद नहीं लेते। जब भी कोई प्रॉब्लम आती है तो सभी लोग इन तीन में से ही किसी एक रोल में आ जाते हैं। लेकिन हर इंसान
का एक मनपसंद पोजीशन होती है। ज्यादातर कोच का रोल रेस्क्यूअर का होता है। आपको लगता है किआपको सलाह देनी ही चाहिए। उनके अंदर अपनी टीम का हर प्रॉब्लम सोल्व करने की बहुत ज्यादा इच्छा होती है।

लेकिन ऐसा करना आपकी टीम के डेवलपमेंट को लिमिटेड कर देता है। अगर आप उन्हें लगातार बचाते
रहेंगे, तो एक कोच के रूप में आप फेल हो जाएंगे। तो आपको इस ड्रामा ट्रायंगल में फंसने से बचने के लिए
क्या करना चाहिए? बदकिस्मती से आप इसके लिए कुछ भी नहीं कर सकते। कोई ना कोई ड्रामा हमेशा
होता ही रहेगा। लेकिन आप यह कर सकते हैं कि जैसे ही ड्रामा ट्रायंगल शुरू होने लगे, आप उसे जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करें। अगर आपको आपका मनपसंद रोल पता है, तो आप इन हरकतों को होने से रोक सकते हैं। लेजी क्वेश्चन या आलसी सवाल एक ऐसा तरीका है जिससे आप रेस्क्यूअर बनने से बच सकते हैं। मान लीजिए आपकी टीम से कोई आपके पास एक प्रॉब्लम लेकर आया है, तो यह जरूर पूछें, “मैं मदद कैसे कर सकता हूं?”
यह सवाल दो कारणों से असरदार है। पहला, जो इंसान आपके पास मदद के लिए आया है उसे एक साफ-साफ रिक्वेस्ट करनी पड़ेगी। हो सकता है कि उसे पता ही ना हो कि उसे आपकी मदद किस चीज के लिए चाहिए । का रोल रेस्क्यूअर का होता है। आपको लगता है कि आपको सलाह देनी ही चाहिए। उनके अंदर अपनी टीम का हर प्रॉब्लम सोल्व करने की बहुत ज्यादा इच्छा होती है।

लेकिन ऐसा करना आपकी टीम के डेवलपमेंट को लिमिटेड कर देता है। अगर आप उन्हें लगातार बचाते
रहेंगे, तो एक कोच के रूप में आप फेल हो जाएंगे। तो आपको इस ड्रामा ट्रायंगल में फंसने से बचने के लिए
क्या करना चाहिए? बदकिस्मती से आप इसके लिए कुछ भी नहीं कर सकते। कोई ना कोई ड्रामा हमेशा
होता ही रहेगा। लेकिन आप यह कर सकते हैं कि जैसे ही ड्रामा ट्रायंगल शुरू होने लगे, आप उसे जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करें। अगर आपको आपका मनपसंद रोल पता है, तो आप इन हरकतों को होने से रोक सकते हैं।
लेजी क्वेश्चन या आलसी सवाल एक ऐसा तरीका है जिससे आप रेस्क्यूअर बनने से बच सकते हैं। मान
लीजिए आपकी टीम से कोई आपके पास एक प्रॉब्लम लेकर आया है, तो यह जरूर पूछें, “मैं मदद कैसे कर
सकता हूं?” यह सवाल दो कारणों से असरदार है। पहला, जो इंसान आपके पास मदद के लिए आया है उसे एक साफ-साफ रिक्वेस्ट करनी पड़ेगी। हो सकता है कि उसे पता ही ना हो कि उसे आपकी मदद किस चीज के लिए चाहिए ।

जिससे आप रेस्क्यूअर बनने से बच सकते हैं। मान लीजिए आपकी टीम से कोई आपके पास एक प्रॉब्लम
लेकर आया है, तो यह जरूर पूछें, “मैं मदद कैसे कर सकता हूं?” यह सवाल दो कारणों से असरदार है। पहला, जो इंसान आपके पास मदद के लिए आया है उसे एक साफ-साफ रिक्वेस्ट करनी पड़ेगी। हो सकता है कि उसे पता ही ना हो कि उसे आपकी मदद किस चीज के लिए चाहिए । आलसी सवाल उसे अपने परेशानी को बेहतर समझने का मौका देगा। दूसरा यह आपको तुरंत सलाह देने से रोकेगा, यह आपको रेस्क्यूअर या एडवाइस मॉन्स्टर बनने से रोकेगा।
“मैं कैसे मदद कर सकता हूँ?” पूछने में परेशानी यह है कि आपको इसके कई जवाब मिल सकते हैं। उनके
कुछ बहुत ज्यादा पूछ लेने से आप घबरा भी सकते हैं। अगर वो आपसे किसी बड़े प्रोजेक्ट की पूरी जिम्मेदारी
लेने के लिए कहें, तो क्या होगा? अगर वे एक बड़े बजट के लिए रिक्वेस्ट करते हैं तो क्या होगा?
एक बात जो आपको हमेशा याद रखनी चाहिए कि आप हमेशा ना बोल सकते हैं। आपको तुरंत ना बोलने
की भी जरूरत नहीं है। आप उनसे जवाब देने के लिए समय भी मांग सकते हैं। इसलिए कभी भी आलसी
सवाल, मत।”मैं कैसे मदद कर सकता हूँ?” पूछने से डरिए

4.0 THE COACHING HABIT-Say
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Michael Bungay Stanier
The Strategic Question

आप जो काम करते हैं वह दो तरह के होते हैं। एक वह काम होता है जिसे करने के लिए आप मोटिवेटेड
महसूस करते हैं। यह काम मीनिंगफुल होता है और इसका एक पर्पस होता है। इसे ग्रेट काम के तौर पर
जाना जाता है। मान लीजिए आप अपनी कंपनी के लिए एक नई सेल्स स्ट्रेटजी बनाते हैं। आपको पता है कि आगे चलकर यह प्रॉफिट को बढ़ाएगा। आप इस प्लान को लेकर passionate है क्योंकि यह आपका खुद का आइडिया है। इस प्लान को पूरा करना बहुत ग्रेट काम के रूप में गिना जाएगा।
दूसरे तरीके का काम है गुड यानी अच्छा काम। यह वह ऑर्डिनरी काम है जो आप रोज करते हैं, जैसे ईमेल
लिखना, डॉक्यूमेंट साइन करना । स्ट्रैटेजिक बनकर आप और भी ज्यादा ग्रेट काम कर सकते हैं। लेकिन स्ट्रैटेजिक होने का मतलब क्या है? लोग अक्सर इस शब्द का इस्तेमाल चीजों को खास दिखाने के लिए करते हैं। जैसे वह स्ट्रैटेजिक मीटिंग रखते हैं और स्ट्रैटेजिक रिपोर्ट पब्लिश करते हैं। लेकिन यह मीटिंग और रिपोर्ट आखिर में बेकार होती हैं। इनसे स्ट्रैटेजिक plan नहीं बनते स्ट्रेटेजी का असली मतलब है यह चुनना कि आपको क्या नहीं करना है। स्ट्रैटेजिक सवाल प्रॉब्लम की जड़ तक जाता है। इसका सवाल है, “अगर आप इसके लिए हां बोल रहे हैं, तो आप किसके लिए ना बोल रहे हैं?” हम corporate environment की ज़रूरतों को समझे बिना चीजों के लिए हां बोल देते हैं। जैसे Grace ने एक मीटिंग अटेंड करने के लिए हां कहा था। साथ ही Grace ने उस समय होने वाली बाकी चीजों को ना कह दिया था। उसने अपने प्रोजेक्ट पर काम करने को ना कहा था, साथ ही वो उसने अपने बचे हुए काम को पूरा करने को ना कह रही थी।

स्ट्रैटेजिक सवाल आपको यह समझने में मदद करता है कि आप क्या खो रहे हैं। यह आपको यह समझने में
मदद कर सकता है कि वह मीटिंग जरूरी है या नहीं। इस बात को और अच्छे से समझने के लिए कि आप
किस चीज को ना बोल रहे हैं, आप 3p मॉडल का इस्तेमाल कर सकते हैं। मीटिंग के लिए हां बोलने पर आपको किस प्रोजेक्ट को रोकना या postpone करना पड़ेगा? पीपल या लोगों के लिए, मीटिंग में हां बोलने से आपके साथ काम करने वालों से आपके रिश्ते पर क्या असर पड़ेगा? और जब बात पैटर्न की आए, तो आपकी कौन सी आदत या beliefs पर, उनसे जुड़ने से असर पड़ेगा?

स्ट्रैटेजिक सवाल के जरिए यह जानना आसान हो जाता है कि आपको किस चीज को ना बोलना है। लेकिन
असल में, ना बोलना ही मुश्किल है और आपके साथ काम करने वाले लोगों को ना बोलना सबसे ज्यादा
मुश्किल होता है। ना बोलने की प्रैक्टिस करने का सबसे अच्छा तरीका है हां बोलना थोड़ा धीरे कर दें। इसका मतलब है और ज्यादा सवाल पूछना। यह आपको हां बोलने से पहले प्रोजेक्ट को समझने में मदद करता है। आप, “आप मुझसे क्यों पूछ रहे हैं?” या “आपने और किस किस से पूछा है?” जैसे सवाल पूछ सकते हैं। और भी सवाल हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं, जैसे, “यह काम कितना अर्जेंट है?” और “यह किस स्टैंडर्ड के हिसाब
से पूरा करना होगा ?”
अच्छे जवाब पाना बहुत जरूरी है। इसका मतलब होगा कि यह प्रोजेक्ट बहुत ग्रेट काम से भरा हुआ है। मान
लीजिए आपको साफ-साफ जवाब नहीं मिलता तब कम से कम आपके पास फैसला लेने के लिए समय मीटिंग के लिए हां बोलने पर आपको किस प्रोजेक्ट को रोकना या postpone करना पड़ेगा? पीपल या लोगों के लिए, मीटिंग में हां बोलने से आपके साथ काम करने वालों से आपके रिश्ते पर क्या असर पड़ेगा? और जब बात पैटर्न की आए, तो आपकी कौन सी आदत या beliefs पर, उनसे जुड़ने से असर पड़ेगा? स्ट्रैटेजिक सवाल के जरिए यह जानना आसान हो जाता है कि आपको किस चीज को ना बोलना है। लेकिन असल में, ना बोलना ही मुश्किल है और आपके साथ काम करने वाले लोगों को ना बोलना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है।

ना बोलने की प्रैक्टिस करने का सबसे अच्छा तरीका है हां बोलना थोड़ा धीरे कर दें। इसका मतलब है और
ज्यादा सवाल पूछना। यह आपको हां बोलने से पहले प्रोजेक्ट को समझने में मदद करता है। आप, “आप
मुझसे क्यों पूछ रहे हैं?” या “आपने और किस किस से पूछा है?” जैसे सवाल पूछ सकते हैं। और भी सवाल
हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं, जैसे, “यह काम कितना अर्जेंट है?” और “यह किस स्टैंडर्ड के हिसाब
से पूरा करना होगा ?”
अच्छे जवाब पाना बहुत जरूरी है। इसका मतलब होगा कि यह प्रोजेक्ट बहुत ग्रेट काम से भरा हुआ है। मान
लीजिए आपको साफ-साफ जवाब नहीं मिलता तब कम से कम आपके पास फैसला लेने के लिए समय

कितना अर्जेंट है?” और “यह किस स्टैंडर्ड के हिसाब से पूरा करना होगा ?” अच्छे जवाब पाना बहुत जरूरी है। इसका मतलब होगा कि यह प्रोजेक्ट बहुत ग्रेट काम से भरा हुआ है। मान लीजिए आपको साफ-साफ जवाब नहीं मिलता तब कम से कम आपके पास फैसला लेने के लिए समय होगा। अगर यह प्रोजेक्ट खराब है, तो आपसे पूछने वाला इंसान इसका जवाब नहीं दे पाएगा। इसके बदले में वह किसी दूसरे इंसान को खोजने की कोशिश करेगा जो इतने सवाल ना पूछे। जैसे जॉन ने Mary को एक मीटिंग के लिए इनवाइट किया। Mary की उस मीटिंग को अटेंड करने की उतनी इच्छा नहीं थी क्योंकि उनके पास पहले से ही कुछ करने के लिए था तो वह जॉन से सवाल करने लगती हैं । जॉन ने कहा कि मीटिंग बहुत जरूरी थी। यह अगले महीने होने वाले प्रोजेक्ट को लॉन्च के बारे में थी । उसने मैरी को मीटिंग attend करने के लिए कहा क्योंकि वो मार्केटिंग टीम की head है। उनकी इनपुट वहां जरूरी है। इस situation में, जॉन मैरी को अच्छा जवाब दे पाया इसलिए वह मीटिंग में शामिल होने के लिए तैयार हो गई।

5.0 THE COACHING HABIT-Say
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The Learning Question

एक कोच का गोल होता है अपनी टीम को इंडिपेंडेंट और सक्सेसफुल बनाना। लेकिन ज्यादातर लोगों को
सिखाना मुश्किल होता है। एक कॉन्सेप्ट को बार बार समझाना भी उनमें कोई बदलाव नहीं लाता। कुछ भी
कर लो, वह बस नहीं सीखते। लोग आपके इंस्ट्रक्शन या अपने एक्सपीरियंस से नहीं सीखते। वह तभी सीखते हैं जब उन पर याद रखने के लिए दबाव डाला जाता है और यही नेड हमेशा अपनी मीटिंग्स में करते हैं।
वह अपने employees से जो चीज याद रखने की जरूरत है, उसके बारे में एक सवाल पूछते हैं। नेड उनसे हर मीटिंग के बाद सीखने वाले सवाल पूछते हैं। सीखने वाले सवाल हैं, “आपके लिए सबसे useful क्या था?”
Psychologists ने इस सवाल के इंपॉर्टेंस को लेकर सालों तक स्टडी की है। उन्होंने लोगों को किसी चीज़
को याद रखने के लिए एक आसान सा तरीका निकाला है। आपको भूल जाने के प्रोसेस में रुकावट डालनी होगी। यह पूछना कि “इसमें तुम्हारे लिए सबसे ज्यादा यूज़फुल क्या था?” वह रुकावट पैदा करता है। लोगों को जानकारी याद करवाने के लिए इकलौता सवाल नहीं है। ऐसे और भी सवाल है, जैसे, “आपने क्या सीखा?” लेकिन सीखने वाला सवाल कई कारणों से इन सब सवालों से सबसे अच्छा है।

पहला कारण है इससे आप लोगों को यह जानकारी देते हैं कि वह बातचीत useful यानी काम की थी।
ये उन्हें महसूस कराता है कि उनके लिए क्या जरूरी है। एक इम्पोर्टेन्ट पॉइंट याद रखना सब भूल जाने से
ज्यादा अच्छा होता है । सीखने वाला सवाल पूछना बातचीत को और भी ज्यादा पर्सनल बना देता है। आपकी टीम को यह महसूस होगा कि उन्होंने एक खास लेसन सीखा है। यह कोच के रूप में फीडबैक पाने का भी एक अच्छा तरीका है। जिन लेशंस को लोग जरूरी समझते हैं आगे जाकर आपको उन्हीं लेशंस पर फोकस करना चाहिए। साथ ही साथ, यह सवाल आपके टीम को आपके कोच होने के value को याद दिलाता है। मान लीजिए कोई आपकी टीम से पूछता है कि क्या आप एक अच्छे कोच हैं। वो तब उस समय के बारे में याद करेंगे जब आपने उनसे सीखने वाला सवाल किया था। वह उन लेशंस सवाल नहीं है। ऐसे और भी सवाल है, जैसे, “आपने क्या सीखा?” लेकिन सीखने वाला सवाल कई कारणों से इन सब सवालों से सबसे अच्छा है।

पहला कारण है इससे आप लोगों को यह जानकारी देते हैं कि वह बातचीत useful यानी काम की थी।
ये उन्हें महसूस कराता है कि उनके लिए क्या जरूरी है। एक इम्पोर्टेन्ट पॉइंट याद रखना सब भूल जाने से
ज्यादा अच्छा होता है । सीखने वाला सवाल पूछना बातचीत को और भी ज्यादा पर्सनल बना देता है। आपकी टीम को यह महसूस होगा कि उन्होंने एक खास लेसन सीखा है। यह कोच के रूप में फीडबैक पाने का भी एक अच्छा तरीका है। जिन लेशंस को लोग जरूरी समझते हैं आगे जाकर आपको उन्हीं लेशंस पर फोकस करना चाहिए। साथ ही साथ, यह सवाल आपके टीम को आपके कोच होने के value को याद दिलाता है। मान लीजिए कोई आपकी टीम से पूछता है कि क्या आप एक अच्छे कोच हैं। वो तब उस समय के बारे में याद करेंगे जब आपने उनसे सीखने वाला सवाल किया था। वह उन लेशंस को भी याद करेंगे जो आपने उन्हें सीखाया था और वो इस बात को appreciate करेंगे कि आप कितने supportive रहे हैं ।

THE COACHING HABIT-Say
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Michael Bungay Stanier
The Masterclass Chapter

बहुत सारे सवाल पूछना कन्फ्यूजिंग हो सकता है इसलिए अपनी टीम से एक बार में एक ही सवाल
पूछिए। कई बार इसका मतलब होता है कि आपको चुपचाप शांति से जवाब मिलने का इंतजार करना चाहिए। चुप्पी को तोड़ना किसी भी इंसान की आदत होती है। मान लीजिए आपने एक सवाल पूछा और ऐसा लगता है कि कोई भी उसका जवाब देना नहीं चाहता। आप चाहेंगे कि “यह कैसा रहेगा?” या “वह कैसा है?” ऐसे सजेशन के जरिए आप उस चुप्पी को तोड़ें। एक कोच रूप में आपको यह समझने की जरूरत है
कि यह चुप्पी एक अच्छा साइन है। इसका मतलब है कि लोग आपकी बात ध्यान से सुन रहे हैं और उसके
बारे में सोच रहे हैं। इस चुप्पी से डील करना शुरू में अजीब लग सकता है लेकिन एक अच्छा कोच अपने
अंदर पेशेंस लाता है और अपनी टीम को वह चुप्पी जानता है। इस पुष्पाताल करना शुरून अजीब लग सकता है लेकिन एक अच्छा कोच अपने अंदर पेशेंस लाता है और अपनी टीम को वह चुप्पी तोड़ने के लिए समय देता है। आखिरकार जब कोई चुप्पी तोड़ता है और आपको जवाब मिलता है तो उसे ध्यान से सुनिए। कई कोच अपना सर हिलाते हैं और आई contact तो बनाकर रखते हैं लेकिन बात को ध्यान से सुनते नहीं है । वह उनकी टीम बताए गए सजेशन को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा करना टीम को unimportant और निराश महसूस कराता है। आपको करना यह चाहिए कि जवाब सुनने के बाद आपको दिखाना चाहिए कि क्या आपने उसे सुना है। आपको उनके जवाब के लिए response देने की जरूरत नहीं है। आपको बस कुछ ऐसा कहने की जरूरत है जिससे आपकी टीम को बाकी सवालों का जवाब देने के लिए इनकरेजमेंट मिले। ऐसा कुछ शब्द बोलकर ही किया जा सकता है, जैसे “बहुत अच्छे”, “मुझे यह पसंद आया” या “यह अच्छा सुझाव है।” यह प्रोसेस सिर्फ आमने-सामने हो रही बातचीत में ही नहीं, बल्कि किसी भी तरह के कम्युनिकेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। कई कोच जब अपनी टीम के सामने या उनके पास नहीं होते तो वे उन्हें कोच करने में स्ट्रगल महसूस करते हैं। लेकिन जो सवाल आपने इससे पहले वाले चैप्टर में जाना, वह आपको ईमेल और टेक्स्ट के जरिए भी इफेक्टिव कोचिंग देने में मदद करेगा।

Conclusion
सबसे पहले, आपने kickstart question सीखा। आप जानते हैं कि business को असरदार तरीके से
परेशानियों को हल करने से क्या रोकता है – Small talk, unproductive meetings और
discussion की कमी से ऐसा होता है। आप इन परेशानियों को सिर्फ यह पूछकर, कि “तुम्हारे
माइंड में क्या चल रहा है?”, सुलझा सकते हैं। आप बातचीत में 3P’s को देखकर और ज्यादा फोकस ला
सकते हैं। 3P’s का मतलब है प्रोजेक्ट, पीपल यानी लोग और पैटर्न | दूसरा आपने AWE सवाल के बारे में जाना। कई Business अक्सर बायनरी यानी दो ऑप्शन के बेसिस पर डिसीजन लेते हैं। इसका मतलब है सिर्फ दो ऑप्शन को कंसीडर करके लिया गया फैसला। इसका रिजल्ट यह होता है कि 50% फैसले फेल हो जाते हैं। इसका हल है और ऑप्शंस बनाना। इसके लिए आपको AWE सवाल पूछना पड़ेगा: “And what else?” यानी “और क्या?” या “इसके अलावा और क्या?” तीसरा अपने lazy question के बारे में सीखा। काम की जगह में प्रॉब्लम को सुलझाना इसलिए मुश्किल हो जाता है क्योंकि लोग victim, इल्जाम लगाने वाला और बचाव करने वाला का रोल अपना लेते हैं। जब भी कोई प्रॉब्लम हो, तो पहले पूछिए, मैं कैसे मदद कर सकता हूं? यह आपको उस ड्रामे में फंसने से बचाएगा और इससे टीम को problem समझने में भी आसानी होती है।

चौथा, आपने स्ट्रैटेजिक सवाल के बारे में समझा। आप अच्छा काम कम और ग्रेट काम ज्यादा करना चाहते
हैं। आप ऐसा थोड़े ज्यादा स्ट्रैटेजिक बनकर कर सकते हैं। इसका मतलब है वह चुनना जो आपको नहीं करना है। आप यह इस सवाल के जरिए चुन सकते हैं, “अगर आप इसके लिए हाँ कह रहे हैं, तो आप किस चीज़ के लिए ना कह रहे हैं?” पांचवा आपने सीखने वाला सवाल यानी लर्निंग question के बारे में सीखा। लोग सिर्फ अपने एक्सपीरियंस से नहीं सीखते। एक कोच के रूप में आपको यह भूल जाने वाला प्रोसेस रोकना चाहिए।

आपको उनसे पूछना चाहिए, “आपके लिए सबसे ज्यादा यूज़फुल क्या था?” इससे आपकी टीम को यह
पता चलता है वह बातचीत मीनिंगफुल थी। इससे वह जरूरी सीख को लंबे समय तक याद रखेंगे।
आखिर में अपने सीखा कि अपनी टीम से सवाल कैसे पूछना है। एक बार में सिर्फ एक सवाल पूछें। फिर
उसके जवाब के लिए सब्र के इंतजार करें और जब कोई अपनी चुप्पी तोड़कर बोलना शुरू करे, तो उसे
ध्यान से सुनें। अपनी टीम के द्वारा दिए गए सजेशन को encourage करने वाले शब्दों के साथ स्वीकार करें।
एक टीम को कोच करना किसी भी फील्ड में एक चैलेंजिंग जॉब है। लेकिन अपने टीम मेंबर्स
को बढ़ते और अच्छा परफॉर्म करते देखना बहुत cnticfnantian भी है और के आपको यह भूल जाने वाला प्रोसेस रोकना चाहिए। आपको उनसे पूछना चाहिए, “आपके लिए सबसे ज्यादा यूज़फुल क्या था?” इससे आपकी टीम को यहपता चलता है वह बातचीत मीनिंगफुल थी। इससे वह जरूरी सीख को लंबे समय तक याद रखेंगे। आखिर में अपने सीखा कि अपनी टीम से सवाल कैसे पूछना है। एक बार में सिर्फ एक सवाल पूछें। फिर उसके जवाब के लिए सब्र के इंतजार करें और जब कोई अपनी चुप्पी तोड़कर बोलना शुरू करे, उसे ध्यान से सुनें। अपनी टीम के द्वारा दिए गए सजेशन को encourage करने वाले शब्दों के साथ स्वीकार करें।

एक टीम को कोच करना किसी भी फील्ड में एक चैलेंजिंग जॉब है। लेकिन अपने टीम मेंबर्स
को बढ़ते और अच्छा परफॉर्म करते देखना बहुत satisfaction भी देता है और इसे पूरा करने के
लिए कोचिंग को genuine और इफेक्टिव होना जरूरी है। इस समरी से सीखे गए सवालों को पूछना
अपनी आदत बना लीजिए इससे आप जल्द ही एक बेहतरीन कोच बन जाएंगे।

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