THE BOGLEHEADS’ GUIDE TO INVESTING TAYLOR LARIMORE, MEL LINDAUER, AND MICHAEL LEBOEUF. Books In Hindi Summary Pdf

THE BOGLEHEADS’ GUIDE
TO INVESTING
TAYLOR LARIMORE, MEL LINDAUER,
AND MICHAEL LEBOEUF
इंट्रोडक्शन
क्या आप अभी इन्वेस्टिंग बिजनेस में शुरुवात कर
रहे हो? क्या आपको भी “स्टॉक्स, bonds , और
मयूच्वल फंड्स” जैसे वर्ड्स कंफ्यूजिंग लगते है? अगर
ऐसा है तो ये समरी आपको इन्वेस्टमेंट बिजनेस से
रिलेटेड वो सारी नॉलेज देगी जो आप जानना चाहते है.
फिर चाहे आप कोई नौसिखिए ही क्यों ना हो, क्योंकि
ये ख़ास आपको ध्यान में रखते हुए लिखी गई है!
इस बुक के राइटर्स आपको सेविंग और इन्वेस्टमेंट करने
के सही तरीकों के बारे में समझायेंगे और ये भी बतायेंगे
कि कैसे लाइफ टाइम के लिए एक प्रॉपर फाइनेंसियल
लाइफस्टाइल चूज़ की जाए. तो इंतज़ार किस बात का!
आइए जानते हैं इस दिलचस्प कॉन्सेप्ट के बारे में!
Choose a Sound Financial Lifestyle
अगर आप 25 की उम्र से शुरुवात करते हुए
100
अमेरिकन्स को लेते है तो इस बात के पूरे चांस है कि
65 की उम्र तक आते-आते उनमें से एक तो जरूर
अमीर होगा और चार फाईनेंशीयली इंडीपेंडेट होंगे.

अमीर होगा और चार फाईनेंशीयली इंडीपेंडेट होंगे.
बाकि के लोग रिटायरमेंट की उम्र तक पहुँचते-पहुंचते
खुद सर्वाइव करने की हालत में भी नहीं रहेंगे. यूनाइटेड
स्टेट्स दुनिया के अमीर देशो में से एक है तो फिर क्यों
इसकी सिर्फ 5% population ही फाईनेंशीयली
इंडीपेंडेट है? इसे समझने के लिए हमें पहले ये जानना
होगा कि फाइनेंसियल लाइफस्टाइल होती क्या है?
आप क्या हो, एक बोरोवर, कंज्यूमर या कीपर?
बोरोवर्स कल की टेंशन नहीं लेते. ये लोग आज में
जीते है. बिल और बैटी भी ऐसे ही लोगों में आते है.
दोनों को महंगी गाड़ियों में घूमने का शौक है, दोनों
महँगी ज्वेलरी पहनते है और एक आलीशान घर में
रहते है. उनका सारा खर्चा उधारी पर चल रहा है. अगर
उनकी यही लाइफस्टाइल रही तो आगे चलकर वो
किसी बड़ी मुसीबत में भी फंस सकते है. असल में ये
लोग वेल्थ बिल्ड नहीं कर रहे बल्कि नेगेटिव वेल्थ
जमा कर रहे है-यानि डेट यानी उधार. मान लो उनकी
जॉब चली गई या कोई एक्सीडेंट हो गया तो उनके
ये ऐशो-आराम धरे के धरे रह जायेंगे. उनकी गाड़ीयां
बिक जाएँगी और उन्हें घर से बेघर होना पड़ जाएगा
और लास्ट में जब वो दिवालिया हो जायेंगे तो उनका
सारा सामान किसी ऑक्शन में बिक रहा होगा. ऐसे
में उनके पड़ोसी और दोस्त कोई काम नहीं आयेंगे.
सबको लगेगा कि वो ऐशो-आराम से रह रहे है तो उनके
पास खूब पैसा होगा जबकि हकीकत में ये सब उधारी
पर चल रहा था. ऐसे लोग अपने फ्यूचर को दांव पर

पर चल रहा था. ऐसे लोग अपने फ्यूचर को दांव पर
लगाकर आज में मौज़ करते है.
अब आते है कंज्यूमर्स टाइप के लोगों पर. जेम्स और
कैथी भी ज़्यादातर अमेरिकंस की तरह वही सामान
खरीदते है जो उनके बज़ट में होता है. चाहे वो कुछ
भी
खरीदने की सोच रहे हो, हमेशा अपने बज़ट के हिसाब
से ही खरीदते है. वो उतना ही खर्च करते है जितनी
उनकी कमाई है. वो सेविंग भी करना चाहते है पर खर्चे
इतने ज्यादा है कि पूछो मत. लेकिन देखा जाए तो ये
लाइफस्टाइल बिल और बैटी की लाइफस्टाइल से कहीं
ज्यादा बैटर है. हालाँकि जेम्स और कैथी ने कोई लॉन्ग
टर्म प्लानिंग नहीं की है.
एक थर्ड ग्रुप भी है जिसमें केन और किम जैसे अलग
माइंडसेट वाले लोग आते है. ये लोग है जो वेल्थ
बिल्ड करते है. बेशक इनकी इनकम भी बोरोवर्स और
कंज्यूमर्स जितनी ही है या शायद इनसे भी कम पर
इनके पास खर्च करने के लिए पैसा ज्यादा होता है. ये
भी पॉसिबल है कि वो जल्दी रिटायर हो जाएं तब भी
आराम से बैठकर खा सकते हैं. ये लोग कीपर्स कहलाते
है. तो ये लोग बाकी दोनों ग्रुप से क्या अलग करते है?
असल में ये अपनी टोटल इनकम का 10% फ्यूचर के
लिए सेव करते है और ये पैसा इन्वेस्ट कर दिया जाता
है. अब आपको कुछ-कुछ अंदाजा हो गया होगा कि
आप कौन सी फाइनेंसियल लाइफस्टाइल में जीते है
तो शायद आप ये भी समझ गए होंगे कि इन्वेस्टमेंट

तो शायद आप ये भी समझ गए होंगे कि इन्वेस्टमेंट
आपके लिए कितना जरूरी है लेकिन इन्वेस्टिंग से
पहले ये तीन चीज़े समझना बहुत जरूरी है:
1. पे-चेक mentality से आगे बढ़कर नेट वर्थ
mentality की तरफ बढो.
वेल्थ और इनकम में फ़र्क है. इनकम वो पैसा है जो
आप एक टाइम पीरियड के अंदर कमाते हो. जैसे अगर
आपने साल में एक मिलियन कमाए और सारे उड़ा
दिए तो आपने कुछ भी नहीं कमाया. सेविंग करने के
लिए जरूरी नहीं है कि आपको बहुत ज़्यादा कमाना
होगा. आपकी सेविंग आपके इनकम पर डिपेंड नहीं
करती है बल्कि इस बात पर डिपेंड करती है कि आपने
कितना पैसा बचाया.
2. हाई इंटरेस्ट वाले लोन और क्रेडिट कार्ड का बिल
चुकता कर दो.
इन्वेस्टिंग करने से पहले अपने सारे कर्जे उतार दो.
अपने पैसे पर रिस्क फ्री, टैक्स फ्री और हाईएस्ट
return के लिए ये जरूरी है कि आपके ऊपर कोई
देनदारी ना हो.
3.एक इमरजेंसी फंड बनाओ
फाईनली ये ध्यान रहे कि इमरजेंसी जैसे एक्सीडेंट या
बीमारी या जॉब चली जाना जैसी सिचुएशन में आपके
पास कैश रहना चाहिए और नुक्सान से बचने के लिए
आपको insurance भी लेना चाहिए.

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Start Early and Invest Regularly
2005 में जैक बोगल और कई दूसरे बोगलहेड
फ्लोरिडा में डिनर पर मिले. मिस्टर बोगल ने ग्रुप को
बताया कि उन्हें वैनगार्ड के एक शेयरहोल्डर से एक
लैटर मिला है. ये शेयरहोल्डर 1970 के दशक से ही
इन्वेस्ट करता रहा है और अब उसका पोर्टफोलियो
$1,250,000 तक पहुँच चुका है और इंट्रेस्टिंग बात ये
है कि उन्होंने साल में कभी $25000 से ज्यादा कमाए
ही नहीं थे. तो सवाल ये है कि इतना पैसा आखिर
उन्होंने जमा कैसे कर लिया ?
कहीं उन्होंने कोई बैंक तो नहीं लूट लिया या फिर
उनकी कोई लॉटरी तो नहीं लग गई थी?
नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था. असल में वो हमेशा
अपना पैसा इन्वेस्ट करते रहे. आप भी ऐसा कर सकते
है.
इसमें सारा कमाल कम्पाउंडिंग का है. कई लोग
जिनकी एनुअल इनकम $25000 के लगभग होती
है, उन्हें लगता है अगर वो लॉटरी का टिकेट लेंगे तभी

है, उन्हें लगता है अगर वो लॉटरी का टिकेट लेंगे तभी
मिलियनेयर बन सकते है. लेकिन लॉटरी जीतना ऐसा
है जैसे आसमान से बिजली ख़ुद पर गिरना यानि लाखों
में एक चांस. तो सारा कमाल compounding
का है. बहुत से लोग जो साल के $25000 कमाते
है, उन्हें यही लगता है कि मिलियनेयर बनने के लिए
कोई लॉटरी लगनी चाहिए लेकिन प्रॉब्लम ये है कि
लॉटरी लगने का चांस तो सिर पर बिजली गिरने से
भी कम होता है. इसे समझने के लिए आपको रुल
72 समझना पड़ेगा. अगर आप जानना चाहते हो कि
किसी इन्वेस्टमेंट को डबल होने में कितने साल लगते
है तो 72 को एनुअल रेट ऑफ़ return से डिवाइड
करना होता है. जैसे एक्जाम्पल के लिए मान लो किसी
इन्वेस्टमेंट का return 8% है तो ये 9 साल में डबल
होगा 72/8=9.
तो देखा आपने, कम्पाउडिंग की पॉवर का कमाल
जिसके बारे में आइंस्टाइन तक कहा करते थे कि ये
दुनिया की सबसे बड़ी मैथ्स डिस्कवरी है.
तो अब आप पॉवर ऑफ़ कम्पाउडिंग समझ गए होंगे.
बस आपको अब सिर्फ सेविंग करनी है! ये इतना सिंपल
है कि एक बच्चा भी इन्वेस्टिंग के बारे में सीख सकता
है. सिंपल सीक्रेट है कि अपनी कमाई से ज्यादा खर्च
मत करो. अपनी इनकम का कम से कम 10% तो
जरूर सेव करो. अपने खर्चे कम करने के कई तरीके
है. जैसे आप सेकंड हैण्ड सामान ले सकते है, कार के

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जरूरसव करा. अपनखचकमकरन ककइतराक
है. जैसे आप सेकंड हैण्ड सामान ले सकते है, कार के
बजाए साईंकल यूज़ करो, रेस्टोरेंट में खाना-पीना कम
करो. यानि जितना हो सके सेव करो. किसी ऐसी सिटी
में चले जाओ जहाँ कॉस्ट ऑफ़ लिविंग कम पडती हो
या फिर अपने एरिया के किसी कम बजट वाली जगह
शिफ्ट हो जाओ या ऐसी कंट्री में जाकर रहो जहाँ कॉस्ट
ऑफ़ लिविंग कम हो. पैसे बचाने की हर संभव कोशिश
करो.
Know What You’re Buying: Part One
and Part Two
इन्वेस्टिंग से पहले आपको अलग-अलग टाइप में
इन्वेस्टमेंट प्लान और ऑप्शंस के बारे में मालूम होना
चाहिए: जैसे स्टॉक्स, bonds , ट्रेजरी इश्यूज,
म्युचुअल फंड और एनुईटी.
स्टॉक किसी कंपनी के अंडर आते है. जब कोई कंपनी
स्टॉक्स इश्यू करती है तो यानि वो अपने बिजनेस का
एक छोटा सा हिस्सा उन लोगों को दे रही है जो उनके
स्टॉक्स लेते है. एक बार इनीश्यल स्टॉक ऑफरिंग
कम्पीट हो जाए तो स्टॉक खरीदे और बेचे जा सकते है.
ये सेल स्टॉक ब्रोकर्स के ज़रिए होती है जो सर्विस के
बदले फीस चार्ज करते है और इन शेयर्स की वैल्यू में
बदलाव होते रहते है. ।
जब आप bonds लेते हो तो उसका मतलब

जब आप bonds लेते हो तो उसका मतलब
है कि आप bond इश्यू करने वाले या कंपनी
को एक अमाउंट उधार दे रहे हो. बदले में कंपनी
आपको एक टाइम के बाद आपका पैसा इंटरेस्ट के
साथ return करती है. शोर्ट में बोले तो bond
का मतलब है आपको अपने पैसे पर टाइम टाइम पर
मिलने वाला इंटरेस्ट. ये bonds गवर्नमेंट एजेंसी,
corporation या यू.एस. ट्रेजरी इश्यू करती है.
ट्रेज़री bonds सबसे सेफ माने जाते है क्योंकि ये
यू.एस. गवर्नमेंट के क्रेडिट पर चलते है.
म्युचुअल फंड्स को हम स्टॉक्स, bonds और
बाकि दूसरे इन्वेस्टमेंट का कलेक्शन बोल सकते है. कई
इन्वेस्टर सिक्योरीटी के लिए भी पैसे जमा करते है.
म्युचुअल फंड मैनेजमेंट स्टाइल दो टाइप की होती है:
एक्टिव मैनेजमेंट और इंडेक्सिंग.
इंडेक्सिंग में फंड किसी बेंचमार्क के हिसाब से रिजल्ट
दिखाती है जैसे S&P 500. ये स्टॉक मार्केट की
500 बड़ी कंपनियों का परफॉरमेंस ट्रैक करती है.
वहीं दूसरी तरफ एक्टिव मैनेजर्स उन bonds और
स्टॉक्स को सिलेक्ट करते है जो उन्हें लगता है कि
बेंचमार्क को आउटपरफॉर्म कर जायेंगे.
एनुईटीज़ insurance कॉन्ट्रैक्ट होते है जो
लाइफटाइम के लिए एक फिक्स्ड इनकम प्रोवाइड
करते है. ऐसे कई ऑनलाइन सोर्सेज अवलेबल है जहाँ

पाराशा |२२
मिलने वाला इंटरेस्ट. bonds गवर्नमेंट एजेंसी,
corporation या यू.एस. ट्रेजरी इश्यू करती है.
ट्रेजरी bonds सबसे सेफ माने जाते है क्योंकि ये
यू.एस. गवर्नमेंट के क्रेडिट पर चलते है.
म्युचुअल फंड्स को हम स्टॉक्स, bonds और
बाकि दूसरे इन्वेस्टमेंट का कलेक्शन बोल सकते है. कई
इन्वेस्टर सिक्योरीटी के लिए भी पैसे जमा करते है.
म्युचुअल फंड मैनेजमेंट स्टाइल दो टाइप की होती है:
एक्टिव मैनेजमेंट और इंडेक्सिंग.
इंडेक्सिंग में फंड किसी बेंचमार्क के हिसाब से रिजल्ट
दिखाती है जैसे S&P 500. ये स्टॉक मार्केट की
500 बड़ी कंपनियों का परफॉरमेंस ट्रैक करती है.
वहीं दूसरी तरफ एक्टिव मैनेजर्स उन bonds और
स्टॉक्स को सिलेक्ट करते है जो उन्हें लगता है कि
बेंचमार्क को आउटपरफॉर्म कर जायेंगे.
एनुईटीज़ insurance कॉन्ट्रैक्ट होते है जो
लाइफटाइम के लिए एक फिक्स्ड इनकम प्रोवाइड
करते है. ऐसे कई ऑनलाइन सोर्सेज़ अवलेबल है जहाँ
आपको ये सारी इन्फोर्मेशन डिटेल में मिलेंगी और आप
उन्हें पढ़कर और भी बैटर तरीके से समझ पाएंगे.

THE BOGLEHEADS’ GUIDE
TO INVESTING
TAYLOR LARIMORE, MEL LINDAUER,
AND MICHAEL LEBOEUF
Preserve Your Buying Power with
Inflation-Protected Bonds
Much Do You Need to Save?
इन्फ्लेशन एक चोर की तरह है जो रात के अंधेरे में
हमारा सामान लूटकर चला जाता है. लेकिन चोरी
होने के बाद हमें पता चलता है कि हमारा क्या-क्या
कीमती सामान चोरी हुआ है. लेकिन इन्फ्लेशन
एक ऐसी चीज़ भी चुरा लेता है जो हमें नज़र नहीं
आती- यानि हमारी फ्यूचर में खरीदने की पावर यानी
purchasing पावर.
अगर हम $7000 से स्टार्ट करते है तो 10 साल बाद
हमारे पास सेम अमाउंट होगा, अब कई लोग कहेंगे
कि हमने कुछ नहीं खोया है लेकिन हम ये भूल जाते
है कि जो चीज़े हम $1000 में आज से 10 साल पहले
खरीद सकते थे वो आज नहीं खरीद सकते. इसलिए
परचेजिंग पॉवर इम्पोर्टेट है. आज ] रूपये में शायद
मुश्किल से ही कोई चीज़ आती होगी. पर यही बात
आप अपने दादा-दादी से पूछिए तो वो बताएँगे कि वो
1 रूपये में क्या-क्या खरीद लेते थे. यही है इन्फ्लेशन

1 रूपये में क्या-क्या खरीद लेते थे. यही है इन्फ्लेशन
का कारनामा.
तो अब जबकि आपने सेविंग और इन्वेस्ट करने का
फैसला ले ही लिया है तो सवाल ये है कि आपको
कितनी सेविंग करनी चाहिए ? इसमें कुछ फैक्टर्स को
ध्यान में रखते हुए आप सही अमाउंट डिसाइड कर
पायेंगे जो आपको फ्यूचर के लिए सेव करना चाहिए.
1. जितना अमाउंट हम सेव करते है.
2. हमारी करंट उम्र ताकि हम डिसाइड कर सके कि
कितनी सेविंग करना ठीक होगा.
3. हमारे रिटायरमेंट एज की प्लानिंग
4. अपने रिटायरमेंट अकाउंट पर हम कितने साल
गुज़ारा कर सकते है.
5. रेट ऑफ़ इन्फ्लेशन
हमारी रिटायरमेंट की उम्र डिपेंड करती है कि कब
हमारे पास इतना पैसा होगा कि हम रिटायरमेंट प्लान
कर सके. साथ ही आपको किसी खानदानी पैसे के
भरोसे नहीं बैठना चाहिए. आप अपने पेरेंट्स के
हेल्दी और फिट रहते हुए भी रिटायर हो सकते है.
इसलिए जायदाद में मिलने वाला पैसा आपके प्लान
में नहीं होना चाहिए. ये सारे फैक्टर्स ध्यान में रखते
हुए आपको फैसला लेना है कि कितना पैसा सेव करना
ठीक होगा.
Keep It Simple

Keep It Simple
Make Index Funds the Core, or All, of
Your Portfolio
बहुत से लोग इस बात को मानेंगे नहीं पर ज्यादातर
स्टॉकब्रोकर, म्युचुअल फंड मैनेजर अपना पैसा नहीं
कमाते बल्कि अपने क्लाइंट के खर्चे पर कमाते है.
लेकिन अगर आप खुद अपना पैसा इन्वेस्ट करेंगे तो
70% चांस हैं कि आप मार्केट को आउटपरफोर्म कर
पाएँगे यानी मार्केट को बीट कर पाएँगे. ऐसा इसलिए
क्योंकि आपको ब्रोकर या म्युचुअल फंड मैनेजर को
किसी फीस के रूप में पैसा नहीं देना पड़ेगा. आमतौर
पर कुछ ऐसे प्रिंसिप्ल हैं जिन्हें लोग लाइफ में फॉलो
करते हैं. जैसे एक्जाम्पल के लिए:
1. लाइफ में कभी compromise मत करो बल्कि
बेस्ट अचीव करने की कोशिश करो
2. अपने दिल की सुनो
3. अगर आपको नहीं पता तो एक्सपर्ट की राय लो.
4. अगर कोई क्राइसिस आए, तुरंत एक्शन लो
5. हिस्ट्री खुद को रिपीट करती है
बदकिस्मती से इन प्रिंसिपल्स को इन्वेस्टिंग के फील्ड
में अप्लाई करने से आपका दिवालिया निकल सकता
है. एक इन्वेस्टर होने के नाते अगर आपको एवरेज़
से थोड़ा ज़्यादा return चाहिए तो आप थोड़ा
कोम्प्रोमाईज यानी समझौता कर सकते है. इन्वेस्टिंग
के फील्ड में अपने दिल की सुनने के बजाए किसी

है. एक इन्वेस्टर होने के नाते अगर आपको एवरेज़
से थोड़ा ज़्यादा return चाहिए तो आप थोड़ा
कोम्प्रोमाईज यानी समझौता कर सकते है. इन्वेस्टिंग
के फील्ड में अपने दिल की सुनने के बजाए किसी
एक्सपर्ट की राय लेना बेहतर होगा लेकिन इससे थोडा
कम return मिलेगा क्योंकि आपको एक्स[एर्त की
फीस भी देनी पड़ेगी. ये जरूरी नहीं है कि हर मार्केट
क्राइसिस के टाइम एक्शन लिया जाये. जो मार्केट में
कल हुआ था जरूरी नहीं है कि कल भी वही रिपीट
होगा.
इंडेक्स इन्वेस्टमेंट में ज्यादा नॉलेज की जरूरत नहीं
पडती, ना ही किसी स्किल या एफर्ट की. बस वही
करते रहो जो आप कर रहे हो और आपका पैसा
कम्पाउंड होता रहेगा. एक्सपर्ट की राय का इंतज़ार
मत करो. इंडेक्स फंड्स में पैसा इन्वेस्ट करो और भूल
जाओ. इंडेक्स फंड किसी मार्केट सेगमेंट को रेप्लीकेट
करने की कोशिश करेगा और मैनेजमेंट फी ना के
बराबर होगी.
इंडेक्स में पैसा इन्वेस्ट करने का सबसे बड़ा फ़ायदा
है कि इसमें आपको किसी ब्रोकर की जरूरत नहीं
पड़ेगी जो आपसे पैसा चार्ज करे. ना ही आपको अपना
पोर्टफोलियो मॉनिटर करने के लिए कोई मैनेजर हायर
करना होगा.

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Asset Allocation
The Cornerstone of Successful
Investing
एसेट अलोकेशन एक प्रोसेस है जहाँ आप रिस्क
का खतरा कम करने के लिए अपने इन्वेस्टमेंट को
अलग-अलग एसेट क्लास में डिवाइड कर लेते है. जैसे
हम सारे अंडे एक बास्केट में ना रखकर अलग-अलग
बास्केट में रखकर उन्हें फूटने से बचा सकते है ऐसे ही
ये प्रोसेस भी काम करता है. अगर एक बास्केट टूट भी
गया तो बाकि बास्केट के अंडे तो बचे रहेंगे. लेकिन हम
ये कैसे कर सकते है? इसकी शुरुआत हम ख़ुद से नीचे
दिए गए कुछ इम्पोर्टेन्ट सवाल पूछकर कर सकते हैं!
1. हमें कौन सी इन्वेस्टमेंट सिलेक्ट करनी चाहिए?
2. हर इन्वेस्टमेंट को हमें कितना परसेंट देना चाहिए?
इन दो सवालों के जवाब में कई थ्योरी निकलकर
सामने आती है. इनमें से एक है इफेक्टिव मार्केट
थ्योरी.
1900 में एक यंग फ्रेंच मैथमेटीशियन लूई बैकेलियर
O
0

1900 में एक यंग फ्रेंच मैथमेटीशियन लूई बैकेलियर
ने अपनी पी. एच. डी. थीसीस लिखी जो ईएमटी
थ्योरी की शुरुवात मानी जाती है. ये थ्योरी कहती
है कि मार्केट को बीट करना इम्पॉसिबल है क्योंकि
मौजूदा शेयर प्राइस में पहले से ही सभी ज़रूरी
information शामिल हैं.
इस थ्योरी के बीस साल बाद एक स्टूडेंट एल्फ्रेड
कावेल्स का काफ़ी नाम होने लगा था. उन्होंने 7500
फाइनेंसियल सर्विसेज़ के स्टॉक प्रेडिक्शन को रिव्यु
किया और उन्हें एक्चुअल स्टॉक परफोर्मेंस से कम्पेयर
किया. इस पर उन्होंने एक आर्टिकल भी लिखा और ये
नतीजा सामने रखा कि फाईनेंशियल सर्विसेज़ मार्केट
को पूरी तरह कभी भी प्रेडिक्ट नहीं कर सकती है.
1973 में एक प्रिन्सटन प्रोफ़ेसर, बर्टन मैलकील ने भी
सेम conclusion निकाला. उन्होंने एक बुक तक
पब्लिश कराई थी जिसका नाम था “रैंडम वॉक डाउन
वॉल स्ट्रीट'” जोकि आज एक क्लासिक बन चुका है.
ईएमटी के बारे में हम कह सकते है कि किसी भी हाल
में मार्केट को प्रेडिक्ट नहीं किया जा सकता है.
इन दो सवालों का जवाब एक दूसरी थ्योरी में है जिसे
मॉडर्न पोर्टफोलियो थ्योरी कहते है. ये थ्योरी असल
में हैरी मार्कोविट्ज़ ने ईज़ाद की थी. हैरी ने रिस्क के
इम्पोर्टेस और return के साथ उसके रिलेशनशिप
को समझा. जैसे एक्जाम्पल के लिए दो इन्वेस्टमेंट का

८।। का
7 VNM.
IIN INT
को समझा. जैसे एक्जाम्पल के लिए दो इन्वेस्टमेंट का
सेम एक्स्पेक्टेड return हैं. इन्वेस्टमेंट ए बिना किसी
गिरावट के धीरे-धीरे बढ़ रही है. वहीं इन्वेस्टमेंट
बी एकदम से ऊपर-नीचे होते हुए फाईनली सेम
return पर पहुँच जाती है. तो आप इनमें से कौन सा
इन्वेस्टमेंट चूज़ करोगे ? बेशक आपका जवाब होना
चाहिए इन्वेस्टमेंट ए! इस कांसेप्ट को रिस्क एवेर्जन
कहते है. अब जबकि हमें ये थ्योरीज़ मालूम है तो
चलिए हम आपसे ये चार सवाल पूछते है
1. आपके गोल्स क्या है?
2. आपका टाइम फ्रेम क्या है?
3. आप कितना रिस्क उठा सकते हैं?
4. आपकी फाइनेंसियल सिचुएशन क्या है?
आप किसके लिए पैसा बचा रहे है? अपने बच्चों की
एजुकेशन के लिए या रिटायरमेंट इनकम के लिए या
अपना पहला घर खरीदने के लिए? ये सवाल बेहद
जरूरी है क्योंकि तभी आप डिसाइड कर पायेंगे कि
आपको एक्जेक्टली कितना पैसा सेव करना है.
स्टॉक्स शोर्ट टाइम फ्रेम के लिए ठीक नहीं होते
हैं. जैसे मान लो आप बच्चों की एजुकेशन के लिए
पैसा बचा रहे हो तो आपको अगर तीन साल में पैसे
की जरूरत पड़ गई तो आपको जरूरत के मुताबिक
return नहीं मिल पायेगा. ये जानना भी जरूरी है
कि आप किस हद तक रिस्क ले सकते हो, इसलिए

कि आप किस हद तक रिस्क ले सकते हो, इसलिए
इन्वेस्टमेंट तभी करना जब आपकी नुक्सान झेलने की
हिम्मत हो. आपकी फाइनेंसियल सिचुएशन भी एक
जरूरी फैक्टर है क्योंकि इसका सीधा असर इस बात
पर पड़ेगा कि आप किस टाइप की सिक्योरीटी सिलेक्ट
करते हो. जैसे एक्जाम्पल के लिए जिस इन्सान के
पास पेंशन स्कीम है और फ्यूचर इनकम भी है तो उसे
रिटायरमेंट सेविंग के लिए उतना सेव करने की जरूरत
नहीं पड़ेगी जितना कि उसे जिसके पास ना फ्यूचर
इनकम है ना पेंशन.
Costs Matter
Keep Them Low
Taxes: Part One
Mutual Fund Taxation
लोग सोचते है कि जितना ज्यादा वो किसी चीज़ के
लिए पे करेंगे, उतना ज्यादा वो चीज़ उन्हें मिलेगी.
लेकिन म्युचुअल फंड्स के मामले में ये बात गलत
साबित होती है. हर डॉलर जो हम कमीशन के लिए
खर्च करते है उसके मुकाबले हमें return में एक
डॉलर कम मिलता है. तो इन्वेस्टमेंट कॉस्ट जितना हो
सके कम से कम होना चाहिए. म्युचुअल फंड में तीन
तरह के चार्ज होते है: purchase पर सेल्स चार्ज,
deferred सेल्स चार्ज और नो-लोड म्युचुअल
फंड्स.
मामा– —– – 4

सेल्स चार्ज ऑन परचेज को फ्रंट एंड कमिशन भी
कहते है. बड़े इन्वेस्टर्स के लिए ये कम भी हो सकती
है. इसका नुक्सान ये है कि इसमें जितना आपने
इन्वेस्ट किया है वो अमाउंट कम हो जाता है. जैसे
एक्जाम्पल के लिए आपने म्युचुअल फंड् परचेज करने
के लिए $10,000 का अमाउंट निकाला और फंड
में 9% फंट-एंड लोड है तो आपका सिर्फ $9,500
ही इन्वेस्ट होगा. बाद में आप न्यूज़पेपर में देखोगे कि
आपको 10% return मिला. तो आपको लगेगा कि
आपने पिच्च्ले साल $1000 कमाए, लेकिन क्या सच
में ऐसा हुआ ? नहीं आपने सिर्फ $950 ही कमाए!
Deferred sales चार्ज को बैक एंड लोड भी बोलते
है. यहाँ टोटल अमाउंट जो पे किया गया वो डिपेंड
करता है कि इन्वेस्टर कब तक अपने शेयर को होल्ड
करके रखेगा. अगर इन्वेस्टर लॉन्ग टाइम तक भी शेयर
होल्ड करता है तो इसमें प्रेक्टिकली देखे तो कोई चार्ज
नहीं है.
नो-लोड फंड सेल्स लोड चार्ज नहीं करते लेकिन
थोड़ी-बहुत फीस जरूर चार्ज करते है. इसमें परचेज
फीस, एक्सचेंज फीस, अकाउंट फीस और मैनेजमेंट
फीस शामिल होती है. अब जबकि हमें पता है कि
म्युचुअल फंड वो पैसा ले लेते है जो हम इन्वेस्ट कर
सकते है तो क्यों ना हम इंडेक्स फंड में इन्वेस्ट करे ?
कॉस्ट कम से कम रखे क्योंकि कॉस्ट मैटर करती है.
लेकिन सबसे ज्यादा कॉस्टली जो पड़ता है वो है:

सेल्स चार्ज ऑन परचेज को फ्रंट एंड कमिशन भी
कहते है. बड़े इन्वेस्टर्स के लिए ये कम भी हो सकती
है. इसका नुक्सान ये है कि इसमें जितना आपने
इन्वेस्ट किया है वो अमाउंट कम हो जाता है. जैसे
एक्जाम्पल के लिए आपने म्युचुअल फंड् परचेज करने
के लिए $10,000 का अमाउंट निकाला और फंड
में 9% फंट-एंड लोड है तो आपका सिर्फ $9,500
ही इन्वेस्ट होगा. बाद में आप न्यूज़पेपर में देखोगे कि
आपको 10% return मिला. तो आपको लगेगा कि
आपने पिच्च्ले साल $1000 कमाए, लेकिन क्या सच
में ऐसा हुआ ? नहीं आपने सिर्फ $950 ही कमाए!
Deferred sales चार्ज को बैक एंड लोड भी बोलते
है. यहाँ टोटल अमाउंट जो पे किया गया वो डिपेंड
करता है कि इन्वेस्टर कब तक अपने शेयर को होल्ड
करके रखेगा. अगर इन्वेस्टर लॉन्ग टाइम तक भी शेयर
होल्ड करता है तो इसमें प्रेक्टिकली देखे तो कोई चार्ज
नहीं है.
नो-लोड फंड सेल्स लोड चार्ज नहीं करते लेकिन
थोड़ी-बहुत फीस जरूर चार्ज करते है. इसमें परचेज
फीस, एक्सचेंज फीस, अकाउंट फीस और मैनेजमेंट
फीस शामिल होती है. अब जबकि हमें पता है कि
म्युचुअल फंड वो पैसा ले लेते है जो हम इन्वेस्ट कर
सकते है तो क्यों ना हम इंडेक्स फंड में इन्वेस्ट करे ?
कॉस्ट कम से कम रखे क्योंकि कॉस्ट मैटर करती है.
लेकिन सबसे ज्यादा कॉस्टली जो पड़ता है वो है:

नहीं है.
नो-लोड फंड सेल्स लोड चार्ज नहीं करते लेकिन
थोड़ी-बहुत फीस जरूर चार्ज करते है. इसमें परचेज
फीस, एक्सचेंज फीस, अकाउंट फीस और मैनेजमेंट
फीस शामिल होती है. अब जबकि हमें पता है कि
म्युचुअल फंड वो पैसा ले लेते है जो हम इन्वेस्ट कर
सकते है तो क्यों ना हम इंडेक्स फंड में इन्वेस्ट करे ?
कॉस्ट कम से कम रखे क्योंकि कॉस्ट मैटर करती है.
लेकिन सबसे ज्यादा कॉस्टली जो पड़ता है वो है:
टैक्स!
मान लो एक टैक्स देने वाला आदमी जिसने 1963
में $7 इन्वेस्ट किया था, 30 साल बाद उसके
टैक्स-deferred अकाउंट में $21.89 होंगे. लेकिन
वही टैक्सपेयर अगर एक टैक्सेबल अकाउंट में इन्वेस्ट
करता तो उसे सिर्फ $9.87 मिलेंगे! देखा आपने
कितना फ़र्क है? आधे से भी ज्यादा!
ऐसी कई टेक्नीक है जिससे आप टैक्स कम कर सकते
है. आप लॉन्ग टाइम तक फंड्स होल्ड करके अपना
टर्नओवर लो रख सकते है. बार-बार सेल और परचेज़
करने से आपको ज्यादा टैक्स पे करना पड़ेगा. कोई भी
शोर्ट टर्म फ़ायदा अवॉयड करना चाहिए क्योंकि उन पर
लॉन्ग टर्म गेन से डबल टैक्स लगता है.

THE BOGLEHEADS’ GUIDE
TO INVESTING
TAYLOR LARIMORE, MEL LINDAUER,
AND MICHAEL LEBOEUF
Diversification
Performance Chasing and Market
Timing Are Hazardous to Your Wealth
आपने वो पुरानी कहावत तो सुनी होगी “सारे अंडों को
एक बास्केट में मत रखो, तो यही चीज़ इन्वेस्टिंग पर
भी अप्लाई होती है. अपना सारा पैसा एक ही स्टॉक
या कंपनी में कभी मत लगाना! इसमें बैंकरप्ट होने के
चांस ज्यादा है. सबसे बेस्ट यही होगा कि आप अपने
पोर्टफोलियो को diversify करें. कई बार कोई कंपनी
बहुत प्रोमिसिंग लगती है लेकिन ज्यादा लालच में मत
पड़ना और हमेशा diversify करने की कोशिश
करना!
और ज़्यादा डावसफ़िकेशन के लिए सिर्फ स्टॉक में
इन्वेस्ट ना करे बल्कि bonds और म्युचुअल फंड्स
में भी पैसा लगाये.
एक और चीज़ जो आपको ध्यान रखनी है कि फ्यूचर
परफोर्मेंस कभी पास्ट के बेसिस पर डिसाइड मत
करना क्योंकि कौन सा fund अच्छा करेगा ये कोई
नहीं बता सकता. अगर कोई प्रेडिक्ट करता भी है
तो ये नहीं बतायेगा कि कोई फंड इतने सालों के बाद

नही बता सकता, अगर का प्राऽक्ट करता मा 6
तो ये नहीं बतायेगा कि कोई फंड इतने सालों के बाद
अच्छा परफोर्म कर रहा है. जो पोर्टफोलियों आज टॉप
पर है, 5 साल बाद शायद ना रहे. इन्वेस्टमेंट के फील्ड
में लगातार अच्छा करने की कोई गारंटी नहीं है.
1970 में दशक में 44 वॉल स्ट्रीट फंड अमेरिका का
टॉप परफोर्मिंग फंड माना जाता था. हजारों इन्वेस्टर
इस फंड में पैसे इन्वेस्ट करने के लिए लाइन लगाये खड़े
रहते थे. बदकिस्मती से 1980 आते-आते यही फंड
सबसे ख़राब परफॉर्म करने वाला फंड बन गया था.
कई फाईनेंशियल टीवी शोज़ ऐसे ad बढ़ा-चढ़ाकर
दिखाते है जो मार्केट को आउटपरफॉर्म करने का दावा
करते है और कई लोग उन दावों को सच मान बैठते
है और एक्सपर्ट एडवाईस पर आँख मूंदकर भरोसा
कर लेते है. लेकिन जो चीज़ इतनी प्रोफेशनल और
कन्विंसिंग लगती थी वही एंड में सिवाए एक मार्केटिंग
स्ट्रेटेजी के अलावा और कुछ नहीं निकलती. स्मार्ट
मनी मैगज़ीन ने एक बार दो पोर्टफोलियो मैनेजर के
बीच एक contest निकाला था:
रॉन बैरन और रॉबर्ट मार्कमैन के बीच. ये कॉन्टेस्ट एक
साल तक चला. अगर आपने बैरन का पोर्टफोलियो
फॉलो किया होता तो आपको इन्वेस्टमेंट में 7% का
नुक्सान होता लेकिन ये पोर्टफोलियो बढिया चला
क्योंकि उस साल S&P में 12% डिक्लाइन हुआ था.
अगर आप रॉबर्ट के पोर्टफोलियो को फॉलो कर रहे
होते तो आपको इन्वेस्टमेंट में 64% तक नक्सान

अगर आप रॉबर्ट के पोर्टफोलियो को फॉलो कर रहे
होते तो आपको इन्वेस्टमेंट में 64% तक नुक्सान
होता. ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे ये पता चल
सके कि एक मैनेजर दूसरे से बैटर है या फिर शायद
उनमें से कोई एक लकी है. हालाँकि ये एक शोर्ट टर्म
contest था लेकिन लॉन्ग टर्म में क्या होता, ये कोई
नहीं बता सकता. इस टाइप के contest सिर्फ
अपनी मैगज़ीन बेचने के लिए ये सब करते है, इससे
इन्वेस्टर्स को कोई खास फायदा नहीं पहुचंता.
Sawy Ways to Invest for College
How to Manage a Windfall
Successfully
एक सिंपल फैक्ट: ज्यादा एजुकेशन का मतलब है
जिंदगी भर ज़्यादा अर्निंग कैपेसिटी. पेरेंट्स अपनी सारी
अर्निंग्स इन्वेस्ट करके अपने बच्चों की एजुकेशन में
लगाते है ताकि आगे चलकर उन्हें अच्छी जॉब मिल
सके और उनका फ्यूचर ब्राईट हो. ऑफिशियल फिगर्स
प्रूव करते है कि कॉलेज ग्रेजुएट हाई स्कूल ग्रेजुएट से
ज्यादा कमाते है और ये हाई स्कूल वाले हाई स्कूल ड्राप
आउट लोगों से ज्यादा कमाते हैं.
यहाँ कुछ इन्वेस्टमेंट चॉइस बताई जा रही है जिनमें से
आप कोई भी चूज़ करके अपने कॉलेज की पढाई के
लिए सेविंग कर सकते है. इनमें सबसे पहले आती है
पर्सनल सेविंग्स जो आपके पेरेंट्स के नाम पर होगी.
से ते मातीमा सामे- देश और

एप सापपरसपत..२१ सपत पहा जाता
पर्सनल सेविंग्स जो आपके पेरेंट्स के नाम पर होगी.
ये इन्वेस्टमेंट सारी पेरेंट्स के कण्ट्रोल में रहेगी और
इसमें कोई इनकम लिमिट नहीं है. आप चाहो तो
custodial एकाउंट भी यूज़ कर सकते हो. अक्सर
बर्थडे या किसी स्पेशल मौके पर दिए गए कैश इसी
अकाउंट में सेव होते है लेकिन कोई एक प्लान आपके
लिए परफेक्ट होगा, ये जरूरी नहीं है. इससे अच्छा
होगा कि आप इस बारे में एक-दो किताबें पढ़ ले ताकि
आप अपनी पढाई के लिए पैसे बचाने के तरीकों को
समझ सके. अब मान लो आपने कम टाइम में अच्छा
पैसा कमा लिया. इसे हम windfall कहते है.
ये लॉटरी विनर्स या एथलीट्स तक ही सीमित नहीं
है. इसमें जायदाद, डिवोर्स सैटलमेंट, insurance
सैटलमेंट या रिटायरमेंट वगैरह सब आते है. लेकिन
आपको इस windfall को मैनेज करना आना चाहिए.
Windfall के साथ ईमोश्सं भी जुड़े होते है जैसे
ख़ुशी या डिप्रेशन. जैसे लॉटरी विनर बहुत ज़्यादा ख़ुश
या अनवर्थी या निकम्मा फील कर सकता है. किसी
ने अगर अपना बिजनेस बेचा हो तो वो अब रिलैक्स्ड
फील करेगा या किसी को ऐसा लग सकता है कि
उसकी लाइफ का कोई गोल नहीं है. कोई डिवोर्स
सैटलमेंट के बाद एक नई जिंदगी के सपने देखेगा या हो
सकता है उसे गहरा सदमा पहुंचे. अपने सारे इमोशंस
के बावजूद हमें windfall को मैनेज करना आना
चाहिए और ऐसा करने के चार तरीके है:

1. अपना पैसा एक सेफ एकाउंट में सेफ रखे और कम
से कम 6 महीनों के लिए इस पैसे को हाथ ना लगाये.
2. एक एस्टीमेट बना लो कि इस पैसे से क्या-क्या
खरीदा जा सकता है..
3. एक विश लिस्ट बनाओ.
4. प्रोफेशनल हेल्प लो.
आपको अपना पैसा कम से कम 6 महीनों तक रखने
की सलाह क्यों दी जा रही है? क्योंकि इस समय के
दौरान आपके इमोशन आपको अफेक्ट कर सकते है
और इमोशन में आकर डिसीजन लेना कोई समझदारी
नहीं होगी. जो ईमोशंस हमारे मन में अचानक से
उमड़ते है, अक्सर छह महीने के अंदर-अंदर खुद चले
जाते है. काफी बड़ा कैश अमाउंट भी ऐसा भ्रम क्रिएट
करता है जैसे आपके पास बहुत सारी दौलत जमा हो
गई हो जो असल में होती नहीं है. इसलिए बैटर यही
होगा कि एक एस्टीमेट लिया जाये कि पैसे से हम
वाकई में क्या-क्या खरीद सकते है और ये करने के
बाद आप एक विश लिस्ट बनाये और सोचे कि अब
लाइफ में आपको क्या करना है. आपको ये सोचना
होगा कि क्या आप जॉब छोड़ना चाहते हो या फिर
आप कहाँ रहना चाहते हो. इन सवालों के जवाब के
हिसाब से आपकी विश लिस्ट बनेगी. फाईनली जब
तक कि आप इन सब मामलों के जानकार नहीं बन
जाते, किसी प्रोफ़ेसनल की हेल्प लेते रहे. इसमें एक
सर्टिफाईड पब्लिक अकाउंटेंट आपकी हेल्प कर सकता
है

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Do You Need an Advisor?
Track Your Progress and Rebalance
When Necessary
कई साल पहले एक ब्रोकर ने अपने फ्रेंड्स को बताया
कि जिस ब्रोकेज़ में वो काम करता था वहां एक
कहावत मशहूर थी “जब कोई इन्वेस्टमेंट खरीदता या
बेचता है तो ब्रोकर की कमाई होती है, ब्रोकेज़ हाउस
की भी कमाई होती है और तीन में से दो बुरा नहीं है”.
ब्रोकेज़ हाउस का main मकसद है पैसा कमाना
जिसके लिए वो अपने क्लाइंट्स को आये दिन बेचने
और खरीदने के लिए एनकरेज करता रहता है. तो
आपको क्या लगता है ब्रोकर के ज़रिए आपको क्या
फायदा होगा? ठीक वैसे ही जैसे किसी लोमड़ी को
मुर्गियों की रखवाली करने को कहा जाए.
तो अब आपको क्या करना है? हम बताते है. आप
एक do-it-yourself (DIY) यानी अपने आप
करें इन्वेस्टर बन जाइए. फाइनेंसियल कन्सल्टेंट”,
फाइनेंसियल प्लानर” या “इन्वेस्टमेंट कन्सल्टेंट” लिखे
बिजनेस कार्ड के साथ कोई भी अच्छा बिजनेस चला

काफी पैशनेट है. इसकी वजह से ही इन्वेस्टमेंट
मीडिया आउटलेट में भी काफी ऊछाल आया है.
लेकिन इन सारी एजेंसीज़ की फॉरकास्टिंग रिपोर्ट
सरासर झूठ होती है. बेशक ये हमें कुछ एक्सीलेंट
सोर्स ऑफ़ इन्फोर्मेशन भी प्रोवाइड करते है जो हम
बुक्स, न्यूज़पेपर, टेलीविज़न में देख सकते है. लेकिन
इन्वेस्टमेंट की एडवाईज़ देने वाले कई बुरे सोर्सेज भी
आपको मिल जायेंगे. बुक्स पर अक्सर जल्दी भरोसा
कर लिया जाता है. हर कोई इन बुक्स को पढ़ता है
और और उनमें लिखी बातों पर भरोसा करता है.
लेकिन पब्लिशर्स का main गोल ज्यादा से ज्यादा
बुक्स बेचना है, उन्हें सच-झूठ से कोई मतलब नहीं
होता. ऐसा जरूरी नहीं है कि अगर कोई बुक नेशनल
बेस्टसेलर है तो वो इन्वेस्टमेंट की बेस्ट बुक होगी. अब
आपके पास एक अच्छा पोर्टफोलियो है तो कुछ सवाल
मन में उठते है कि आपको हर साल कितना पैसा खर्च
करना चाहिए कि आपके पास पैसे की शोर्टेज़ ना हो.
*
*
तो जवाब नीचे दिए इन फैक्टर्स पर डिपेंड करता है :
आपके पोर्टफोलियो की करंट वैल्यू
आपकी डेथ की डेट
हेल्थ केयर कॉस्ट
* आपकी पेंशन या हेल्थ केयर कवरेज़ में
अनएक्स्पेक्टेड बदलाव
ये सारा डेटा कलेक्ट करने के बाद कोई ऑनलाइन
फाईनेंशियल प्रोग्राम यूज़ करो. प्रोग्राम की हेल्प से

ये सारा डेटा कलेक्ट करने के बाद कोई ऑनलाइन
फाईनेंशियल प्रोग्राम यूज़ करो. प्रोग्राम की हेल्प से
आपको पता चल जायेगा कि आपको annually
कितना अमाउंट सेव करना है ताकि आपको पैसे की
कभी शोर्टेज़ ना हो.
जाहिर है, आपको फ़िजूलखर्ची में सारा पैसा नहीं
उड़ाना है लेकिन इतनी कंजूसी भी नहीं करनी है
जैसा कि बहुत सारे लोग करते है क्योंकि उनके मन में
डर बैठा जाता है कि कहीं उनका सारा पैसा खत्म ना
हो जाये. ज्यादातर कंजूस लोग मन मारकर जीते है.
पैसा होते हुए भी ये पैसे का सुख नहीं ले पाते.
ऐसे ही एक कंजूस का एक्जाम्पल है जेकब लीडर.
पैसा होते हुए भी वो पुरानी खटारा कार में घूमता है
और एक छोटे से घर में रहता है. उसके बच्चे नहीं है.
उसके घर में केबल टीवी कनेक्शन नहीं है. वो सारा
दिन अपनी गर्लफ्रेंड के घर में पड़ा रहता है. उसी के
फोन से अपने ब्रोकर को फोन करता है. दोनों कभी
बाहर खाने नहीं जाते, अगर जाते भी है तो किसी
सस्ते से रेस्टोरेंट में.
1997 में लीडर की मौत हो गई. वो अपने पीछे $36
मिलियन की जायदाद छोड़ गया था! ये जानकर
उसकी गर्लफ्रेंड भी हैरान रह गई कि उसके पास इतना
पैसा है.

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Well-Insured
Passing It On When You Pass On
You Can Do It
लाइफ हमेशा एक जैसी नहीं रहती. टेंशन और प्रॉब्लम
भी लाइफ का हिस्सा हैं. लाइफ में कभी भी कुछ भी
हो सकता है जैसे कि एक्सीडेंट, डिवोर्स या कोई बड़ा
फाइनेंसियल नुक्सान इसलिए हमें इन चीजों को ध्यान
में रखते हुए पहले से तैयार रहना चाहिए. नीचे ऐसी ही
कुछ इम्पोर्टेट पॉलिसी दी गई है जो हर इन्सान को लेनी
चाहिए:
1.लाइफ insurance .
2. हेल्थ केयर.
3. डिसेबिलिटी insurance .
4. प्रॉपर्टी insurance
5. घर के बुजुर्गो के लिए लॉन्ग टर्म केयर.

लाइफ में कब-क्या हो जाए कोई कह नहीं सकता
और लोग अक्सर ये बात भूल जाते है. जब वो
insurance लेने जाते है तो ज़रूरी चीजों
के बजाए बेकार की चीजों का insurance ले
बैठते है. एक कॉमन गलती लोग ये करते है कि
कार या टीवी की एक्सटेंडेड वारंटी लेना उन्हें याद
रहता है पर वो हेल्थ केयर के बारे में कुछ करते ही
नहीं. इसी तरह हम कई और बेकार की चीजों का
insurance ले लेते है जबकि इम्पोर्टेट चीज़े भूल
जाते है. इसलिए समझदारी इसी में है कि हम उन
चीजों का insurance ले जिनके नुकसान की
भरपाई हम अपनी पॉकेट से नहीं कर सकते. लाइफ
insurance का main पर्पज किसी इन्सान के
मरने के बाद उसकी फेमिली को फाइनेंसियल सपोर्ट
प्रोवाइड कराना है जिसने अपने जीते-जी policy ली
थी. लेकिन अगर आपकी लाइफ में कोई ऐसा नहीं है
जो आप पर डिपेंडेंट हो तो फिर आपको इस policy
की जरूरत नहीं है. अगर आप नए इन्वेस्टर है तो
डरिए मत. शुरुवात में अगर आपसे भी कुछ गलतियां
हुई है तो शर्मिंदगी की कोई बात नहीं है क्योंकि ऐसी
गलतियां बाकियों से भी हुई है. तो अब आप जानते
है कि एक फाइनेंसियल लाइफस्टाइल कैसे चूज़
किया जाए. अब तक तो आप सेविंग और इन्वेस्टिंग

सारा नाश
तः
किया जाए. अब तक तो आप सेविंग और इन्वेस्टिंग
के बारे में समझ ही गए होंगे. तो बस, अब अपना
फाइनेंसियल प्लान बनाकर उसे फॉलो करना स्टार्ट
कर दीजिये. अपने पोर्टफोलियो में लो-कॉस्ट म्यूचअल
फंड्स या सिर्फ इंडेक्स फंड्स शामिल कीजिए. आपको
ऑनलाइन ऐसे कई टूल्स मिल जायेंगे जो आपको एक
सस्केसफुल इन्वेस्टर बनने में हेल्प कर सकते है. याद
रहे, आपको अपना रास्ता खुद बनाना है.
Conclusion
तो इस समरी ने आपको एक इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट बनाने
की पूरी कोशिश की!
इसमें आपने फाइनेंसियल लाइफस्टाइल,
insurance, सेविंग, bonds , स्टॉक्स के अलावा
इन्वेस्टिंग से जुडी और भी बहुत सारी बातों के बारे में
जाना!
हमें उम्मीद है कि अब आप इन्वेस्टमेंट के सफ़र के
लिए पूरे कॉन्फिडेंस के साथ तैयार होंगे क्योंकि अब
आपके पास इन्वेस्टमेंट से जुडी वो सारी नॉलेज़ है
जिनके बारे में पता होना बेहद ज़रूरी है.
एक प्रॉपर प्लान के साथ आप भी इन्वेस्टमेंट के फील्ड
में वैसे ही कामयाब हो सकते है जैसे वॉल स्ट्रीट का

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