Ravikant: A Guide to We… Eric Jorgenson Books In Hindi Summary

The Almanack of Naval Ravikant: A Guide to We… Eric Jorgenson इंट्रोडक्शन आपके ख्याल से ऐसा क्या है जो इंसान को सक्सेसफुल बनाता है? ऐसा क्या है जिससे इंसान को ख़ुशी मिलती है? क्या आपको लगता है कि सक्सेसफुल इंसान ज़्यादा खुश रहते है? शायद आपका बचपन भी ये सुनते हुए बीता हो कि सक्सेस पर फोकस करो. शायद ही कभी हमारे बड़ों ने हमसे खुश रहने की बात की हो. लेकिन इस समरी में आप सीखोगे कि आप सक्सेस और ख़ुशी दोनों पा सकते हो और ये आपकी पहुँच के बाहर की बात के बिल्कुल भी नहीं है. आप सीखोगे कि बात जब वेल्थ की हो तो इसमें हमारी लाइफ की philosophy का काफी इम्पोर्टेन्ट रोल होता है. Building Wealth अमीर होने का ये मतलब नहीं है कि आप दिन में कितने घंटे काम करते हो और ना ही इसका मतलब दिन भर में कड़ी मेहनत करके थककर चूर हो जाना है. नहीं, गेटिंग रिच यानि अमीर बनने का मतलब है कि आपको पता हो कि क्या करना है, किसके साथ करना है और कब करना है. A< ह. नहा, गाटगारच यान अमार बनन का मतलब हाक आपको पता हो कि क्या करना है, किसके साथ करना है और कब करना है. तो क्या आपको भी इस बात का कोई आईडिया नहीं है कि हमें अमीर बनने के लिए क्या करना होगा? तो उससे पहले आपको ये पता करना होगा कि आपकी लाइफ का गोल क्या है क्योंकि जब तक आपको अपना गोल पता नहीं होगा, आप किसी भी सूरत में अमीर नहीं बन सकते. नवल रविकांत एक सक्सेसफुल एंटप्रेन्योर है. इस समरी में उस विजडम और नॉलेज की बात की गई है, जो नवल को अपने कई सालों के एक्सपीरियंस से मिला है. नवल भी शुरुवात में किसी आम आदमी की तरह एमलेस थे यानि उनका भी कोई गोल नहीं था. एक के बाद एक उन्हें कई बार फेलियर का सामना करना पड़ा. लेकिन फिर उन्होंने एक दिन बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और तब उन्हें एहसास हुआ कि वो बिजनेस की हेल्प से अपना एक एम्पायर खड़ा कर सकते है. ये जानना कि हमे क्या करना है का मतलब है ख़ुद को productize करना यानी खुद को एक प्रोडक्ट की तरह पेश करना. आपके पास कुछ ऐसी स्पेशिफिक नॉलेज होगी जो शायद किसी और के पास ना हो. कोई और बिलकुल आपके जैसा नहीं हो सकता. तो इसलिए खुद को एक प्रोडक्ट की तरह यूज़ करो. अपने स्किल्स और नॉलेज का यूनिक मिक्सचर ऑफर करो. फिर देखना आप कितने आगे तक जाओगे. खाना मा.ाि और अपने स्किल्स और नॉलेज का यूनिक मिक्सचर ऑफर करो. फिर देखना आप कितने आगे तक जाओगे. बेशक इसके लिए आपको कई सालों की प्रेक्टिस और मेहनत भी लगेगी. खुद को स्किल्ड और प्रोडक्टिव बनाना काफी मेहनत का काम है. पर जितनी जल्दी आप स्टार्ट करोगे, उतनी ही जल्दी आप वेल्थ क्रिएट करना शुरू कर पाओगे. नवल रविकांत बिल्डिंग वेल्थ और अमीर होने के बीच फर्क करना जानते थे. अमीर होने से मतलब सिर्फ पैसा कमाना है जिससे कि कुछ वैल्यूएबल क्रिएट करने के लिए सोसाईटी आपकी शुक्रगुज़ार रहती है. नवल इस बात पर ज़्यादा ज़ोर देते है कि हमे पैसा नहीं वेल्थ बिल्ड करना चाहिए. वेल्थ यानि वो एसेट जो आपको सोते-सोते भी कमाई करके दे और पैसा इस वेल्थ का सिर्फ के फिजिकल फॉर्म है. जबकि वेल्थ चाहे किसी भी फॉर्म में हो, आपके लिए पैसे कमाने का काम करती है चाहे आप एक्टिवली उसमे इन्वोल्व हो या ना हो. जैसे फैक्टरी, रोबोट और कंप्यूटर डेटा बनाने का काम करता है, चाहे दिन हो या रात. असल में टेक्नोलोजी का दूसरा नाम ही वेल्थ है. आज टेक्नोलोजी के फील्ड में रोज़ नए बदलाव आ रहे है. एक वक्त था जब कार को ग्राउंडब्रेकिंग टेक्नोलोजी माना जाता था. हेनरी फ़ोर्ड इसी से अमीर हुए थे. फिर इसी टेक्नोलोजी ने उन्हें दुनिया के अमीर लोगों में शुमार कर दिया था. अगर आप भी वेल्थी होना चाहते है तो आपको भी टेक्नोलोजी के फील्ड में बीच फर्क करना जानते थे. अमीर होने से मतलब सिर्फ पैसा कमाना है जिससे कि कुछ वैल्यूएबल क्रिएट करने के लिए सोसाईटी आपकी शुक्रगुज़ार रहती है. नवल इस बात पर ज़्यादा ज़ोर देते है कि हमे पैसा नहीं वेल्थ बिल्ड करना चाहिए. वेल्थ यानि वो एसेट जो आपको सोते-सोते भी कमाई करके दे और पैसा इस वेल्थ का सिर्फ के फिजिकल फॉर्म है. जबकि वेल्थ चाहे किसी भी फॉर्म में हो, आपके लिए पैसे कमाने का काम करती है चाहे आप एक्टिवली उसमे इन्वोल्व हो या ना हो. जैसे फैक्टरी, रोबोट और कंप्यूटर डेटा बनाने का काम करता है, चाहे दिन हो या रात. असल में टेक्नोलोजी का दूसरा नाम ही वेल्थ है. आज टेक्नोलोजी के फील्ड में रोज़ नए बदलाव आ रहे है. एक वक्त था जब कार को ग्राउंडब्रेकिंग टेक्नोलोजी माना जाता था. हेनरी फ़ोर्ड इसी से अमीर हुए थे. फिर इसी टेक्नोलोजी ने उन्हें दुनिया के अमीर लोगों में शुमार कर दिया था. अगर आप भी वेल्थी होना चाहते है तो आपको भी टेक्नोलोजी के फील्ड में कोई नई और इनोवेटिव चीज़ इंट्रोड्यूस करनी होगी. तो पता लगाओ कि लोगों को क्या चाहिए, बेशक उन्हें अभी खुद पता ना हो कि उन्हें क्या चाहिए और इसके लिए आपको अपनी स्किल सेट, नॉलेज और एबीलीटीज़ का सही यूज़ करना होगा. The Almanack of Naval Ravikant: A Guide to We… Eric Jorgenson Find and Build Specific knowledge यहाँ पर एक ख़ास तरह की नॉलेज पर जोर दिया गया है, जो है सेल्स. कुछ लोगों में पैदाईशी सेल्समेन के गुण होते है, यानि ऐसे लोग किसी को कुछ भी बेच सकते है. ये एक ऐसी स्किल सेट और नॉलेज है जो हर किसी में नहीं होती. जिन लोगों में नैचुरल सेल्समेनशिप की क्वालिटी होती है, वो पैदाईशी होती है, शायद ही उन्होंने ये स्किल किसी स्कूल या कॉलेज में सीखी होगी या शायद बचपन से ही अपने दोस्तों और फेमिली के साथ नेगोशिएशन करते-करते वो इस आर्ट में माहिर हो जाते है. वजह चाहे जो भी हो पर ऐसे लोग नैचुरल सेल्समेन होते है. पर अगर आप ऐसी किसी ग्रेट सेल्स स्किल के साथ पैदा नहीं हुए, तो भी टेंशन की कोई बात नहीं है. आप भी एक ग्रेट सेल्समेन बन सकते हो. इसके लिए आप सेमिनार और वर्कशॉप अटेंड कर सकते हो. धीरे-धीरे प्रेक्टिस के साथ आपके अंदर इम्प्रूवमेंट आने लगेगी. लेकिन नवल कहते है कि आपको इस बात पर गौर करना चाहिए: ऐसी कौन सी स्किल या क्वालिटी है जिसमे आप बचपन से ही अच्छे थे? तब शायद आपको तो कोर्ट स्किल नहीं लगी टोगी र तटे टोने पर आ गार पारना चाहिए. एसा पान सा स्किल पा पपालिका जिसमे आप बचपन से ही अच्छे थे? तब शायद आपको वो कोई स्किल नहीं लगी होगी पर बड़े होने पर आप उसमे अपनी पोटेंशियल ढूंढ सकते है. नवल कहते है कि आपको थोड़ी रिसर्च करनी पड़ेगी. जैसे एक सेप्शिफिक नॉलेज आपकी म्यूजिकल स्किल हो सकती है जिसे आप बढ़ा सकते हो या आपकी राईटिंग स्किल अच्छी हो सकती है. नवल स्पेशिक नॉलेज पर जोर देते है क्योंकि आपके वेल्थ कमाने का एक बढ़िया तरीका हो सकता है. इसे अपनी यूनीक स्किल सेट, अपब्रिगिंग और एटीट्यूड के साथ कम्बाईन कर दो यानि खुद को प्रोडक्टीफाई करो. अपनी यूनीकनेस को सेल करो. जैसे कि नवल को हमेशा से ही टेक्नोलोज़ी और रीडिंग बहुत attract करते थे. वो एक फ़ास्ट लर्नर थे. लेकिन वो किसी भी चीज़ से जल्दी बोर हो जाने वालो में थे. क्योंकि वो खुद को समझते थे, इसलिए वो किसी ऐसे प्रोफेशन में नहीं जाना चाहते थे जो उन्हें बोर करे यानि दूसरे शब्दों में कहे तो वो किसी ऐसे करियर में एंटर नहीं करना चाहते थे जहाँ उन्हें एक ही चीज़ रूटीन में करनी पड़े. इसलिए नवल ने वेंचर इन्वेस्टिंग में कदम रखना ज़्यादा सही लगा. इस फील्ड में स्पीड है और इसमें आने के लिए आपके अंदर वाकई में इंटरेस्ट होना चाहिए. आज के टाइम में नई-नई टेक्नोलोजी आती रहती है और नवल का काम है इनका पता लगाना. वो एक फ़ास्ट लर्नर तो थे ही पर क्योंकि वो जल्दी बोर हो जाते थे इसलिए वेंचर टन्तेनिंग रन्टे गोरली या करती है पान.२१%ा पता II II पाएमा पाप ही पर क्योंकि वो जल्दी बोर हो जाते थे इसलिए वेंचर इन्वेस्टिंग उन्हें परफेक्टली सूट करती है. स्पेशिफिक नॉलेज का मतलब है किसी फील्ड में आपको महारत हासिल होना यानि आपको उसके बारे में छोटी से छोटी पता होना चाहिए यानि जिस चीज़ को लेकर आप पैशनेट या क्यूरियस है, उसे करना. जब आपको अपना जॉब पसंद होता है तब आप हमेशा उसमे अपना बेस्ट देने की कोशिश करते हो. साथ ही प्लस पॉइंट ये है कि कोई और आपको कॉपी नहीं कर पाएगा. हां, नवल सिर्फ एक वेंचर इन्वेस्टर ही नहीं है बल्कि वो अपनी इस स्पेशिफिक स्किल सेट और नॉलेज के कारण यूनीक है. इसलिए कभी सीखना मत छोड़ो. अमीर बनने का रास्ता यहीं से शुरू होता है. लेकिन इसका मतलब सिर्फ मन लगाकर पढाई करने या कॉलेज की डिग्री हासिल करने से नहीं है. ये तो घिसी-पिटी सोच है. आज जब इतना कुछ बदल रहा है तो हमे अपनी सोच भी बदलनी पड़ेगी. आपको कुछ ना कुछ सीखते ही रहना चाहिए. सबसे पहले उन बेसिक फील्ड से शुरु करो जिसमे आपका इंटरेस्ट हो. किसी भी कोम्प्लिकेटेड केलकुलस से बेसिक मैथ्स की नॉलेज होना ज़्यादा जरूरी होता है. इसी तरह बेशक आपको पोएट्री की नॉलेज हो ना हो पर बेसिक इंग्लिश आना बहुत जरूरी है. बेशक आप एक एक्सपर्ट डिज़िटल मार्केटर हो या ना हो लेकिन आपके अन्दर किसी को भी मनाने या राज़ी करने की कला होनी चाद्विा तेमिकली किसी भी फील्द की मारंडेशन आपको अपना जॉब पसंद होता है तब आप हमेशा उसमे अपना बेस्ट देने की कोशिश करते हो. साथ ही प्लस पॉइंट ये है कि कोई और आपको कॉपी नहीं कर पाएगा. हां, नवल सिर्फ एक वेंचर इन्वेस्टर ही नहीं है बल्कि वो अपनी इस स्पेशिफिक स्किल सेट और नॉलेज के कारण यूनीक है. इसलिए कभी सीखना मत छोड़ो. अमीर बनने का रास्ता यहीं से शुरू होता है. लेकिन इसका मतलब सिर्फ मन लगाकर पढाई करने या कॉलेज की डिग्री हासिल करने से नहीं है. ये तो घिसी-पिटी सोच है. आज जब इतना कुछ बदल रहा है तो हमे अपनी सोच भी बदलनी पड़ेगी. आपको कुछ ना कुछ सीखते ही रहना चाहिए. सबसे पहले उन बेसिक फील्ड से शुरु करो जिसमे आपका इंटरेस्ट हो. किसी भी कोम्प्लिकेटेड केलकुलस से बेसिक मैथ्स की नॉलेज होना ज़्यादा जरूरी होता है. इसी तरह बेशक आपको पोएट्री की नॉलेज हो ना हो पर बेसिक इंग्लिश आना बहुत जरूरी है. बेशक आप एक एक्सपर्ट डिज़िटल मार्केटर हो या ना हो लेकिन आपके अन्दर किसी को भी मनाने या राज़ी करने की कला होनी चाहिए. बेसिकली किसी भी फील्ड की फाउंडेशन आपको पता होनी चाहिए और फिर जिस फील्ड में आपका इंटरेस्ट हो आप उसकी और ज़्यादा नॉलेज हासिल कर सकते हो. A < The Almanack of Naval Ravikant: A Guide to We… Eric Jorgenson Build or Buy Equity in Business बेसिकली किसी कंपनी की वैल्यू या प्रॉफिट में जो आपका शेयर होता है उसे इक्विटी कहते है. अगर आप अमीर होना चाहते हो तो आपके पास इक्विटी होनी चाहिए. यही से हमारी पैसिव इनकम आती है यानी चाहे आप वेकेशन पर हो तो भी आपकी कमाई होती रहेगी. इक्विटी का मतलब है आपकी लगातार कमाई होती रहे, यानि जब आप सो रहे हो तब भी आपके अकाउंट में पैसा आता रहे. लेकिन ये सुविधा आपको जॉब में नहीं मिल सकती. जॉब में आपको एक फिक्स्ड सैलरी मिलती है. आप काम करते हो तो पैसा मिलता है नहीं करते तो नहीं मिलता. सिंपल सी बात है. सैलरीड जॉब यानि किसी और के लिए काम करना यानि जो मेहनत आप खुद के लिए कर सकते थे, वो आप दूसरों के लिए कर रहे हो. आप जो भी आउटपुट क्रिएट करते हो, वो सब कंपनी के पास जाएगी. यही दस्तूर है और कंपनी हमेशा आपसे ज़्यादा से ज़्यादा काम लेकर कम से कम पेमेंट करने ही कोशिश करेगी. लेकिन सिर्फ इक्विटी ही एक ऐसा तरीका है जो आपको वेल्थ बिल्ड करने की गारंटी देता है. इसकी शकतात या किसी तानी में शेगर टोल्टर तनकर भी पापा ।1पाशपपाहा एफएसा सिपाहणा आपको वेल्थ बिल्ड करने की गारंटी देता है. इसकी शुरुवात आप किसी कंपनी में शेयर होल्डर बनकर भी कर सकते हो, जब कंपनी का प्रॉफिट होगा तो आपको भी उसमें से हिस्सा मिलेगा. नवल इस बात पर जोर देते है कि ओनरशिप इम्पोर्टेट है. आपके पास किसी बिजनेस का पार्ट या किसी प्रोडक्ट की ओनरशिप होनी चाहिए. बेशक शुरुवात आपकी छोटी हो पर माइंड में एक गोल फिट कर लो. हर हाल में इक्विटी लेना जरूरी है. Find a Position of Leverage जैसा की पहले भी मेंशन किया गया है, आपकी वेल्थ वही है जहाँ आपकी स्पेशिफिक स्किल है. नवल एक और एडवाईस देना चाहते है: ड्र थिंग्स फॉर देयर ओन सेक लेकिन इसका मतलब क्या है? एक ऐसा वक़्त भी था जब नवल ने खूब सारा पैसा कमाया था ये वो साल था जब वो सिर्फ और सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते थे. उसी साल उन्होंने कुछ ऐसी चीज़े भी की जिनमें उन्हें मज़ा आता था. उन दिनों वो एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे जो उनके लिए दिलचस्प और एंटरटेनिंग दोनों था. क्योंकि नवल को इसमें मज़ा आ रहा था इसलिए उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरे दिल से किया. किसी काम को जबर्दस्ती परफेक्ट बनाने की कोशिश जितनी कम करोगे, उतना ही नैचूरली आप उसे कर पाओगे. जितना कम प्रेशर आपके ऊपर होगा, उतना ही आप उस काम के लिए ही नैचुरली आप उसे कर पाओगे. जितना कम प्रेशर आपके ऊपर होगा, उतना ही आप उस काम के लिए पैशनेट फील करोगे और बेस्ट रीजल्ट आपको तभी मिलता है. जरूरी नहीं कि मार्केट में जो भी करियर चॉइस ट्रेंड कर रहा हो आप उसके पीछे भागने लगो. वो करो जिसमे आप अच्छे हो, तभी आप अपना बेस्ट दे पाओगे. खुद को ऐसा बनाओ कि आपके जैसा कोई और ना हो. खुद को ऐसा बनाओ कि लोग आप जैसा कोई और ढूंढ ना पाएं और खुद आपके पास चलकर आएं. एक बार जब आपकी डिमांड बढ़ जाएगी तो आप अपनी सही कीमत भी वसूल कर पाओगे. यही है पैसे कमाने का असली सीक्रेट. बेशक, ये सब रातो-रात नहीं होने वाला. आपको पेशंस रखना होगा. इसी बीच धीरे-धीरे आपको अपना नाम बिल्ड करना है यानि अपनी पहचान बनानी है. सोशल मिडिया जैसे ट्विटर और यूट्यूब पर advertise करो. आप जो भी कुछ ऑफर कर रहे हो, उसके लिए ये सोशल प्लेटफॉर्म बेस्ट साबित होंगे क्योंकि इससे आप कम वक्त में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हो और जब आपका नाम हो जाए तो आप लिवरेज यूज़ कर सकते हो. लिवरेज का मतबल है किसी भी सिचुएशन या लोगों पर आपकी एडवांटेज होना. तीन टाइप की लिवरेज होती है: पहला है लेबर. बेसिकली ये तब होता है जब दूसरे पहला है लेबर. बेसिकली ये तब होता है जब दूसरे लोग आपके लिए काम करते है. ये सबसे पुराने टाइप के लेबर में से एक है और नवल इसे सबसे बुरा मानते है क्योंकि एक बॉस होना किसी सिरदर्द से कम नहीं है. बॉस बनने की शुरुवात ही लीडरशिप स्किल से होती है. एक लीडर होने का मतलब है आपके अंदर कम्यूनिकेशन स्किल भी होनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं है तो मतलब आपके लिए काम करने वाले लोग कभी भी काम छोडकर जा सकते है. दूसरा है पैसा. पैसा आप एक कैपिटल की तरह यूज़ कर सकते है जैसे वेल्थी लोग करते है. ये इस सेंचुरी का सबसे ज़्यादा यूज़ होने वाला लिवरेज है. अमीर लोग, बेईमान politician और अमीर और upper क्लास के लोग काफी पैसों का हेर-फेर करते है. पैसा लेबर से ज़्यादा स्ट्रोंग है, इसके दम पर आप कुछ भी कर सकते हो. तीसरा है रेप्लीकेशन बिना किसी मार्जिनल कॉस्ट के. इस लिवरेज में किताबें , मिडिया वगैरह आते है. कोई भी इस लिवरेज को यूज़ कर सकता है क्योंकि आपको इसके लिए कोई परमिशन नहीं चाहिए. पहले के वक़्त में किसी प्रोडक्ट या बिजनेस की वजह से गिने-चुने लोग ही अमीर बन पाते थे पर आज इंटनेट की वजह से कोई भी कंटेंट क्रिएट करके पैसा कमा सकता है. जैसे की ‘जो रोगन’ अपने पॉडकास्ट की वजह से साल से में करीब 100 मिलियन डॉलर कमाते है. यूट्यूब गेमर PewDiePie दुनिया के सबसे अमीर गेमर्स में से एक A < कोई भी इस लिवरेज को यूज़ कर सकता है क्योंकि आपको इसके लिए कोई परमिशन नहीं चाहिए. पहले के वक़्त में किसी प्रोडक्ट या बिजनेस की वजह से गिने-चुने लोग ही अमीर बन पाते थे पर आज इंटनेट की वजह से कोई भी कंटेंट क्रिएट करके पैसा कमा सकता जैसे की ‘जो रोगन’ अपने पॉडकास्ट की वजह से साल में करीब 100 मिलियन डॉलर कमाते है. यूट्यूब गेमर PewDiePie दुनिया के सबसे अमीर गेमर्स में से एक है. और एक्जाम्पल्स चाहिए? तो आप स्टीव जॉब्स, मार्क जकरबर्ग और जेफ़ बेजोस के एक्जाम्पल ले सकते है. इन लोगों ने जो किया उसके लिए उन्हें परमिशन की जरूरत नहीं पड़ी थी. उन्होंने बस प्रोडक्ट क्रिएट किया और उन्हें दुनिया के साथ शेयर किया. लेबर लिवरेज में एक आदमी होता है जो आपके लिए काम करने का डिसीजन लेता है. कैपिटल लिवरेज में कोई आपको प्रोडक्ट या बिजनेस क्रिएट करने के लिए पैसे देता है. तीसरा लिवरेज इंडिपेंडेस यानी आज़ादी को प्रोमोट करता है, जहाँ आप किसी और पर नहीं बल्कि खुद पर डिपेंडेंट होते है. जो भी आप करते है, उसकी सारी जिम्मेदारी आप ऊपर के होती है और हर इंसान का यही सबसे बड़ा सपना होता है. A < The Almanack of Naval Ravikant: A Guide to We… Eric Jorgenson Building Judgement अगर आप वेल्थी बनना चाहते हो, तो आपको टॉप पर पहुँचने की कला आनी चाहिए और इसके लिए आपको अपने अंदर जजमेंट डेवलप करनी होगी. लेकिन जजमेंट ही क्यों? क्योंकि जजमेंट आपके कई सालों के एक्सपीरियंस और विज़डम या समझ का नतीजा होती है. नवल की नज़रो में जजमेंट का मतलब है अपने एक्श्न का रिजल्ट पता होना. ये पता होना कि आप सही डिसीजन ले रहे है या गलत क्योंकि आपके सही डिसीजन ही आपको पैसा कमाने में मदद करेंगे. जजमेंट को हम क्लियर थिंकिंग के ज़रिए इम्प्रूव कर सकते है. लेकिन आप एकदम क्लियर कैसे सोच पाओगे? आपको बस बेसिक्स याद रखने है. जब आपको फाउंडेशन पता होंगे तो आप क्लियरली सोच पाओगे. जैसे मान लो जब तक आपको बेसिक मैथ्स नहीं मालूम होगा तब तक आप ट्रीगोनोमेट्री नहीं समझ सकते. नवल मानते है कि सबसे स्मार्ट लोग एक बच्चे को कोई भी कॉन्सेप्ट बड़ी आसानी से समझा सकते है क्योंकि क्लियर थिंकर्स ही स्मार्ट थिंकर्स होते है. तो जो आप सीखना चाहते हो, पहले उसकी बेसिक TATARA – क्लियर र्थिकसे ही स्मार्ट थिकसे होते हैं. तो जो आप सीखना चाहते हो, पहले उसकी बेसिक फाउंडेशंस सीखो. फिर धीरे-धीरे और ज़्यादा कॉम्प्लेक्स लेवल की तरफ जाओ. और जहाँ तक राईट डिसीजन लेने का सवाल है, आप इसे इम्प्रूव कर सकते हो, जब आपको ये पता होगा कि हकीकर या रियल दुनिया से डील कैसे करना है. आपको रिएलिटी को एक्सेप्ट करना ही होगा. हकीकत कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आपकी पसंद या हिसाब से तय हो सके. आपकी सोच आपको गलत डिसीजन की तरफ भी ले जा सकती है. अब जैसे कि आप सोचते है कि आपका बिजनेस अच्छा चल रहा है. जबकि असल में ये बंद होने की कगार पर खड़ा है. लेकिन आप इस सच्चाई से इनकार कर रहे है. फिर जब बिजनेस बंद हो जाएगा तो आप गुस्से से पागल हो जाओगे. असल में सच्चाई स्वीकार करना मुश्किल होता है. सच तब और कडवा लगने लगता है जब वो हमारे फेवर में नहीं होता. लेकिन अगर आप वेल्थी बनना चाहते हो तो आपको हर सच्चाई को अपनाना होगा. हकीकत और सच्चाई से मुंह मोड़कर आप प्रोग्रेस नहीं कर सकते, सही डिसीजन नहीं ले सकते. इसलिए अपने ईगो और इच्छाओं को अलग रखकर सच्चाई को एक्स्पेट करना सीखो चाहे वो कितना ही कडवा क्यों ना हो. Learn the Skills of Decision-Making त्तिनना टो सकता है नवल रतना यॉनेस ग्रने की Learn the Skills of Decision-Making जितना हो सकता है, नवल उतना ऑनेस्ट रहने की कोशिश करते है क्योंकि ईमानदारी और सच बोलना हमें आज़ाद महसूस कराती है. जिस वक्त आप किसी से झूठ बोल रहे होते हो तो आप अपनी नजरों में ही झूठे बन जाते हो और फिर आपकी पूरी लाइफ की झूठ का ताना-बाना बनकर रह जाती है. आपका सच और आपका झूठ आपस में इस कदर मिल जाते है कि जिंदगी उलझकर रह जाती है. ये एक ऐसी दुर्घटना है ये जो कभी ना कभी होकर रहती है. बेशक हमे पता है सच कड़वा होता है, यही वजह है कि नवल यहाँ फेमस एंटप्रेन्योर वॉरेन बफ़ेट की एडवाईज लेते है. लेकिन जब बात तारीफ़ करने की हो तो स्पेशिफिक रहो और बुराई करते वक्त general या आम तरीके में बात करो. मान लो आपके एम्प्लोई से किसी काम में गडबड हो गई है. तो आप ये मत बोलो कि वो बेहद बुरा इंसान है बल्कि उसके रिपोर्ट में हुई गडबड पर बात करो. उसे उसकी गलती समझाओ कि शायद उसने जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार कर ली होगी इसलिए ऐसा हुआ है. लेकिन अगर आप किसी की तारीफ़ करना चाहते हो तब आप उसे पॉइंट आउट करते हुए बोल सकते हो कि तुमने अच्छा काम किया है. ऑनेस्टी और गुड डिसीजन मेकिंग हाथो हाथ चलते है. ऑनेस्टी हमेशा ही अच्छा रिजल्ट देती है. मान लो आपको किसी एम्प्लोई की रिपोर्ट पसंद नहीं आई. … ऑनेस्टी और गुड डिसीजन मेकिंग हाथो हाथ चलते है. ऑनेस्टी हमेशा ही अच्छा रिजल्ट देती है. मान लो आपको किसी एम्प्लोई की रिपोर्ट पसंद नहीं आई. आपको वो बहुत बोरिंग और लम्बी लग रही है तो आप सच बोलकर उसे ये बता सकते हो ताकि वो इसे इम्प्रूव करने के लिए सही डिसीजन ले सके. लेकिन अगर आप झूठ बोलते हो तो वो हमेशा ही इस तरह की रिपोर्ट बनाता रहेगा, उसे कभी इम्प्रूव करने का मौका नहीं मिल पाएगा. अगर आप डिसीजन मेकिंग में इम्प्रूव करना चाहते हो तो मेंटल मॉडल कलेक्ट करो. मान लो कोई सिचुएशन पहले भी हो चुकी है. अब आप सोचोगे कि वही सेम सिचुएशन फ्यूचर में भी सेम रिजल्ट देगी. हालाँकि ऐसा नहीं होता है क्योंकि एक्जेक्टली कोई भी चीज़ एक जैसी नहीं हो सकती है. इसलिए मेंटल मॉडल चूज़ करना सीखो. ये आपके लिए गाईडिंग प्रिंसिपल की तरह काम करेंगे. कैसी भी सिचुएशन आए , अपने मेंटल मॉडल पर जाओ और इसी के बेस पर डिसीजन लो. यहाँ कुछ मेंटल मॉडल है जो नवल अक्सर यूज़ करते एक है इन्वर्जन (inversion). इस मेंटल मॉडल को यूज़ करके नवल हमेशा समझ जाते है कि” क्या चीज़ काम करेगी या नहीं करेगी. इसके बारे में वो पहले से एक्यूरेट नहीं हो सकते. इन्वर्जन यूज़ करके वो उन तरीको को ट्राई करने से बच जाते हैं जो काम नहीं करेगा. अब जैसे कि नवल के सामने logistic यानी ऑनेस्टी और गुड डिसीजन मेकिंग हाथो हाथ चलते है. ऑनेस्टी हमेशा ही अच्छा रिजल्ट देती है. मान लो आपको किसी एम्प्लोई की रिपोर्ट पसंद नहीं आई. आपको वो बहुत बोरिंग और लम्बी लग रही है तो आप सच बोलकर उसे ये बता सकते हो ताकि वो इसे इम्प्रूव करने के लिए सही डिसीजन ले सके. लेकिन अगर आप झूठ बोलते हो तो वो हमेशा ही इस तरह की रिपोर्ट बनाता रहेगा, उसे कभी इम्प्रूव करने का मौका नहीं मिल पाएगा. अगर आप डिसीजन मेकिंग में इम्प्रूव करना चाहते हो तो मेंटल मॉडल कलेक्ट करो. मान लो कोई सिचुएशन पहले भी हो चुकी है. अब आप सोचोगे कि वही सेम सिचुएशन फ्यूचर में भी सेम रिजल्ट देगी. हालाँकि ऐसा नहीं होता है क्योंकि एक्जेक्टली कोई भी चीज़ एक जैसी नहीं हो सकती है. इसलिए मेंटल मॉडल चूज़ करना सीखो. ये आपके लिए गाईडिंग प्रिंसिपल की तरह काम करेंगे. कैसी भी सिचुएशन आए , अपने मेंटल मॉडल पर जाओ और इसी के बेस पर डिसीजन लो. यहाँ कुछ मेंटल मॉडल है जो नवल अक्सर यूज़ करते एक है इन्वर्जन (inversion). इस मेंटल मॉडल को यूज़ करके नवल हमेशा समझ जाते है कि” क्या चीज़ काम करेगी या नहीं करेगी. इसके बारे में वो पहले से एक्यूरेट नहीं हो सकते. इन्वर्जन यूज़ करके वो उन तरीको को ट्राई करने से बच जाते हैं जो काम नहीं करेगा. अब जैसे कि नवल के सामने logistic यानी पापा-२०५५ सामान गए। करेगा. अब जैसे कि नवल के सामने logistic यानी ट्रांसपोर्ट की प्रॉब्लम आ रही थी जहाँ उन्हें प्रोडक्ट के अगले दिन आने की उम्मीद थी पर वो अगले हफ्ते तक आने वाला था. नवल यहाँ इन्वर्जन यूज़ करते है. उन्हें पता है ट्रांसपोर्ट कंपनी के ऊपर चिल्लाने से प्रॉब्लम सोल्व नहीं होने वाली, इसके बजाए वो कंपनी के साथ डील करने का तरीका ढूंढ लेते है. दूसरा है प्रिंसिपल एजेंट प्रॉब्लम .ये मेंटल मॉडल बिजनेस से प्रॉब्लम के लिए ज़्यादा काम करता है. इसे फेमस रोमन general जूलियस सीज़र ने डेवलप किया था. सीज़र का मानना था कि अगर आप कोई काम एकदम सही तरीके से चाहते हो तो उस काम को खुद करो यानि उसकी जिम्मेदारी किसी और पर मत डालो क्योंकि वो आईडिया आपके दिमाग में आया है तो आप ही उसे बेहतर तरीके से कर सकते हो. हालाँकि जब कोई और आपके लिए काम करता है तो वो सिर्फ़ एक एजेंट होता है और सारी प्रॉब्लम की जड़ यही है. एक एजेंट आपके जैसा बढिया काम कभी नहीं कर पाएगा क्योंकि काम ढंग से हो या ना हो उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा. अक्सर छोटी कंपनियों में ये प्रॉब्लम ज़्यादा नहीं होती क्योंकि वो उस वैल्यू की कद्र करते है जो वो कंपनी को दे रहे है इसलिए हर एक एम्प्लोई एक प्रिंसिपल या ओनर की तरह फील करता है. जब आप किसी को कोई काम करने के लिए दो तो ये चीज़ याद रखना. अगर आपको लो-क्वालिटी का काम या आरटपट नहीं चाहिए तो बेहतर है कि उसे खट A < जब आप किसी को कोई काम करने के लिए दो तो ये चीज़ याद रखना. अगर आपको लो-क्वालिटी का काम या आउटपुट नहीं चाहिए तो बेहतर है कि उसे खुद करो. अगर आप अभी तक अपने मेंटल मॉडल को ढूँढने की कोशिश कर रहे हो तो कोई बात नहीं. नवल एक और तरीका बताते हैं जिससे आपको डिसीजन लेने में आसानी होगी. अगर आप किसी काम के लिए डिसाइड नहीं कर पा रहे तो उस काम को सीधा ना बोल दो. क्या आपको किसी दुसरे शहर में रहने के लिए चले जाना चाहिए ? क्या आपको उस इंसान से शादी करनी चाहिए? क्या आपको वो जूते लेने चाहिए जो आपने स्टोर में उस दिन देखे थे? अगर आपको जवाब ढूँढने में मुश्किल हो रही है तो सिंपल ना बोल दो. जिस सोसाईटी में आप आज रह रहे हो, वहां कई तरह के ऑप्शन्स मौजूद है. आप जब मर्जी हो किसी दूसरे शहर में शिफ्ट कर सकते हो, आप किसी और से शादी कर सकते हो. आप अगले महीने किसी और तरह के जूते खरीद सकते हो. पॉइंट ये है कि आपकी चॉइस एक परमामेंट चीज़ है, जिसके साथ आपको लम्बे समय तक रहना पड़ता है. इसलिए ये इम्पोर्टेट है कि आपको 100% श्योर होकर ही कोई डिसीजन लेना चाहिए और इसलिए मना करना आपकी चॉइस है जो आपको गलत डिसीजन लेने बचा सकती है. ये आपको थोडा और सोच-विचार करने के लिए ज़्यादा टाइम भी देती है. ( A < The Almanack of Naval Ravikant: A Guide to We… Eric Jorgenson Happiness is Learned 10 साल पहले तक नवल को किसी बात से ख़ुशी नहीं होती थी. बल्कि यूं कह लो कि खुश रहना उनकी लिस्ट में थी ही नहीं. अगर तब उन्हें अपनी खुशियों को 1-10 के स्केल पर रखने को कहा जाता तो वो शायद उसे 2 ही नंबर देते. लेकिन आज के वक़्त में नवल ये कह सकते है कि वो एक खुशहाल इंसान है. बल्कि वो अपनी लाइफ से इतने खुश है कि 7 से 10 के स्केल पर 9 नंबर दे सकते है. हाँ, ये सच है कि दौलत कमाकर उन्हें जिंदगी की खुशियाँ हासिल हुई है. लेकिन नवल ने ये भी सीखा कि ज़िंदगी में खुश रहना सबसे इम्पोर्टेट है बेशक दौलत कम हो या ज्यादा क्योंकि इंसान का खुश रहना ही सबसे ज़्यादा मायने रखता है. लेकिन असल में खुशियाँ होती क्या है क्योंकि हर इंसान के लिए ख़ुशी के अलग-अलग मायने होते है. नवल को जो चीज़ ख़ुशी देती है, शायद वो चीज़ आपको खश ना कर पाए और शायद जिस चीज़ से है. नवल को जो चीज़ ख़ुशी देती है, शायद वो चीज़ आपको खुश ना कर पाए और शायद जिस चीज़ से आपको ख़ुशी मिलती है, वो नवल को ख़ुश ना कर पाए. तो ये हर किसी की अपनी चॉइस है. कुछ लोगों के लिए ख़ुशी के मायने है सेटिसफेक्शन यानी संतुष्टि जबकि कुछ लोग बहुत कुछ पाने पर भी खुश नहीं रह पाते. लेकिन नवल कहते है कि ख़ुशी हर इंसान की डिफ़ॉल्ट सेटिंग होनी चाहिए यानि इंसान पैदा ही खुश रहने के लिए हुआ है, दुःख तो उसकी अपनी खोज है. हैप्पीनेस का मतबल है वो फीलिंग हटाना कि आपकी लाइफ में कोई कमी है. आपने कितनी बार ये कहा होगा” मुझे ये चाहिए” या “वो चाहिए? आप गिनती भी नहीं कर पाओगे शायद क्योंकि हम ये बात बार-बार रिपीट करते है. कुछ ना कुछ पाने की यही चाह हमें कभी खुश नहीं रहने देती. ये आपको पास्ट या फ्यूचर में रखती है पर प्रेजेंट को कभी एन्जॉय नहीं करने देती. जब मन में कोई चाह नहीं रहती तो यही सच्ची ख़ुशी होती है यानि आपके पास जो कुछ है, आप उसी में संतुष्ट रहते है. संतोष या संतुष्टि की यही फीलिंग हमें ख़ुशी देती है. नवल के लिए यही सच्चाई है. लेकिन आप चाहे तो उनसे असहमत हो सकते हो क्योंकि ख़ुशी होती है यानि आपके पास जो कुछ है, आप उसी में संतुष्ट रहते है. संतोष या संतुष्टि की यही फीलिंग हमें ख़ुशी देती है. नवल के लिए यही सच्चाई है. लेकिन आप चाहे तो उनसे असहमत हो सकते हो क्योंकि खुशियों के मायने सबके लिए अलग होते है. हैप्पीनेस सिर्फ पॉजिटिव थॉट या फीलिंग नहीं है. इसका असली मतलब है किसी चीज़ की चाह ना रखना, यानि जब दिल में कुछ पाने की ख्वाहिश बाकि ना रह जाए. आपकी इच्छाएं जितनी कम होंगी, उतना ही ज़्यादा खुश आप आज में रहेंगे. तब आप पास्ट या फ्यूचर में नहीं जियोगे. आप सिर्फ उस पल को एन्जॉय करोगे. यही वो सच्ची ख़ुशी है जिसके बारे में नवल बता रहे है. हैप्पीनेस के बारे में इस नज़रिए से सीखा जा सकता है. खुद को रयाद दिलाते रहो कि आपको नाम, दौलत और शोहरत के पीछे नहीं भागना है. आप दुनिया में आए हो, अभी साँस ले पा रहे हो, जिंदा हो, यही सबसे बड़ी ख़ुशी है क्योंकि ना जाने कब हम इस दुनिया को अलविदा कह दें इसलिए आपको हर पल का मज़ा लेना चाहिए. आर्ट ऑफ़ हैप्पीनेस सीखी जा सकती है और हैप्पीनेस एक चॉइस है. आप चाहो तो हर रोज़ खुश रह सकते हो. आपकी ख़ुशी किसी सिचुएशन या लोगों MA A आर्ट ऑफ़ हैप्पीनेस सीखी जा सकती है और हैप्पीनेस एक चॉइस है. आप चाहो तो हर रोज़ खुश रह सकते हो. आपकी ख़ुशी किसी सिचुएशन या लोगों की मोहताज़ नहीं है. जो लोग खुश रहना जानते है, वो हमेशा खुश रहते है, हर हाल में ख़ुश रहते हैं. ख़ुशी की कोई वजह नहीं होती. आप हमेशा हमेशा के लिए एक खुशमिज़ाज़ इंसान बनकर रह सकते हो और यकीन मानिए ऐसा कर पाना ज़रा भी मुश्किल नहीं है. Conclusion सबसे पहले तो आपने ये सीखा कि बेहद सक्सेसफुल एंटप्रेन्योर नवल रविकांत का इस दुनिया को देखने का नजरिया कैसा है. नवल सिर्फ बिजनेस की बात नहीं करते, वो जानते है कि इंसान हर पहलू से अपनी सक्सेस को इन्फ्लुएंस करता है. दूसरी चीज़ जो आपने सीखी, वो ये कि आपको दौलत नहीं बल्कि अपने लिए एक फो→न कमाना है. दौलत की बात आती है तो हम सिर्फ पैसे पर फ़ोकस करते है. लेकिन फो>न कमाने का मतलब है जब आप सोते-सोते भी पैसे कमा सकते हो. अपनी वेल्थ बिल्ड करने के लिए खुद को प्रोडक्टाईज़ करो यानि खुद को एक सक्सेसफुल ब्रैड बनाओ. तीसरी चीज़, ये पता लगाओ कि आप किस चीज़ में र तो 7 का भला मोटो तो पाया कि करने के लिए खुद को प्रोडक्टाईज़ करो यानि खुद को एक सक्सेसफुल ब्रैड बनाओ. तीसरी चीज़, ये पता लगाओ कि आप किस चीज़ में बेस्ट हो, आप क्या अच्छा कर लेते हो. हो सकता है कि आपके पास कोई स्पेशिफिक नॉलेज हो. अपनी इस नॉलेज के साथ अपना एटीट्यूड और स्किल मिलाओ और सक्सेसफुल बन जाओ. खुद को productize करने का मतलब यही है. हमेशा इम्प्रूव करते रहो. जो आप आज हो उससे बैटर बनना ही आपका गोल होना चाहिए. चौथा, आपने सीखा कि वेल्थ बिल्ड करने के लिए इक्विटी की जरूरत पड़ती है. इक्विटी यानि कंपनी के प्रॉफिट में अपना शेयर होना. बेसिकली आप बिजनेस में पैसा कमाने के लिए ही इन्वेस्ट करते हो इसलिए नौकरी में आप वेल्थ कमा ही नहीं सकते. पांचवा, आपने सीखा जब आप किसी स्किल में माहिर होते है तो वो आपके लिए एक लिवरेज की तरह काम करता है. लिवरेज तीन तरह की होती है: लेबर, मनी और replication with no marginal cost.. तीसरी टाइप की लिवरेज बेस्ट होती है यानि जो आप प्रोड्यूस करते हो, उस पर आपका हक है. अपनी खुद की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी होने से आप खूब सारा पैसा कमा सकते हो. पा २८पपुणI HINDI Vापूष सारा पता कमा सकते हो. छठा, आपने सीखा कि वेल्थी बनने के लिए सही जज़मेंट क्वालिटी होना जरूरी है. आपको अपने हर एक्शन का रिएक्शन मालूम होना चाहिए. गुड जज़मेंट के लिए क्लियर थिंकिंग चाहिए. लेकिन आप तभी क्लियर सोच पाएँगे जब आपको बेसिक्स पता होंगे क्योंकि जब तक आपको मैथ्स नहीं आएगा, तब तक आप सिंपल calculator भी यूज़ नहीं कर पाएँगे. सातवाँ, आपने सीखा कि हैप्पीनेस सीखी जा सकती है और हैप्पीनेस एक चॉइस है. जब आप चीजों के पीछे दौड़ना बंद कर देते हो, तो आपकी लाइफ में खुशियाँ ही खुशियाँ आ जाती है. हैप्पीनेस का असली मतलब है अपने प्रेजेंट यानी आज में फ़ोकस करना. वेल्थ बिल्ड करने में आपकी लाइफ का हर एस्पेक्ट शामिल है. ये कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आप अपने शेड्यूल में रखे. इसलिए अपने गोल को अपना तन-मन-धन दे दो. आप जितना उसमें इन्वोल्व होंगे, आपको रिजल्ट भी उतना ही अच्छा मिलेंगे. वेल्थी होने का मतलब सिर्फ पैसे कमाना नहीं है, ये आपकी खुशियों और सेहत पर भी अप्लाई होता है.

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