Ogilvy on Advertising David Ogilvy Books In Hindi Summary Pdf

Ogilvy on Advertising
David Ogilvy
परिचय
क्या आपको मार्किट के सबसे बड़े ब्राड्स का सीक्रेट
जानना है ? क्या आप जानना चाहते है कि सबसे
ज्यादा इन्फ्लुयेंश्ल एड कैसे बनाए जाते है? डेविड
ओगिल्वी एक कॉपी राइटर थे. उनका काम था बड़े
बड़े ब्रांड्स के लिए एडवरटीज्मेंट्स ना जैसे
कि डव, रोल्स रोयस, और मर्सीडीज बेंज. बाद में
उन्होंने ओगिलवी एंड माथेर नाम से अपनी खुद की
एडवरटाईजिंग एजेंसी खोल ली.
ओगिलवी एडवरटाईजिंग में एक एक्सपर्ट थे. उनकी
अथॉरिटी थी इस फील्ड में. जिन टेक्नीक्स को फोलो
करके वो सक्सेसफुल बने वो टेक्नीक्स आपको इस
बुक
में मिलेगी. पब्लिक का दिल जीतने वाले टीवी
एड्स और कमर्शियल्स कैसे बनाए, ये सब आप
इस बुक से सीखेंगे. आपको इसमें दुनिया के सबसे
बड़े ब्रांड्स की एडवरटाईजिंग के सीक्रेट्स भी बताये
जायेंगे. जो चीज़ ओगिलवी को बाकी एडवरटाईजेर्स से
अलग करती है वो है उनकी मार्किट रिसर्च. ओगिलवी
अपने हर प्रोडक्ट की एडवरटीज़ के लिए एक
स्टेटिसस्टिक चलाते है ताकि उन्हें पता चल सके कि
ये कस्टमर को कितना पसंद आ रहा है, उन्हें कितना
अफेक्ट कर रहा है. ओगिलवी रूल्स पर नहीं बल्कि
एक्चुअल रिजल्ट्स पर बीलीव करते है.

A८
हाउ टू प्रोड्यूस एडवरटाईजिंग देट सैल्स
आप ज़रा दो डिफरेंट प्रिंटेड एड्स इमेजिन करो. दोनों
ही एड्स पूरे-पूरे पेज पर दिए गए है. और दोनों ही सेम
मैगजीन में प्रिंट हुए है. दोनों में ही इमेजेस दी गयी है
और दोनों का ही टेक्सट बड़े अच्छे ढंग से लिखा हुआ
है. हालांकि उनमें से एक एड दुसरे वाले से 20 गुना
ज्यादा इफेक्टिव है. और जिस प्रोडक्ट का ये एड है वो
दुसरे वाले से 20 गुना ज्यादा बिकता है. तो ज़रा सोचो
कि ऐसा क्यों है? दुसरे एड में क्या कमी हो सकती है?
इस बात का ज़वाब एक चीज़ पर डिपेंड है. और वो
चीज़ है अपील.
जिस एड की अपील ज्यादा है वो ही ज्यादा सेल करेगा
नाकि दूसरा वाला. और जिस कॉपी राइटर ने दूसरा
एड बनाया है, उसने अगर थोड़ी सी रिसर्च की होती तो
शायद ऐसा नहीं होता. तो आपको अपना एड बनाने
के लिए किस चीज़ की रिसर्च करनी है? आपको रिसर्च
करनी है अपने प्रोडक्ट के बारे में, अपने कॉम्पटीटर्स
के बारे में और अपने कंज्यूमर्स के बारे में. रिसर्च करने
और स्टडी में टाइम,एफर्ट और पैसा लग सकता है
लेकिन एक इफेक्टिव एडवरटीज़मेंट बनाने के लिए ये
बहुत इम्पोर्टेट है. सबसे पहले तो उस प्रोडक्ट के बारे में
रिसर्च करे जो आप मार्किट में बेचने जा रहे है.
इसे अंदर-बाहर अच्छे से स्टडी कर ले. इसकी बेस्ट
क्वालिटी ढूंढो जो आपके कस्टमर को अपील कर
सके. डेविड ओगिलवी ने एक बार रोल्स रॉयस के लिए
एडवरटीज़ किया. उन्होंने कार को पूरे तीन हफ्ते तक
स्टडी किया. उन्होंने एक स्टेटमेंट पढा जो ये था” 60

५७परा पापा. हा फार फापूर ता.परा तफा
स्टडी किया. उन्होंने एक स्टेटमेंट पढ़ा जो ये था” 60
माइल्स पर-आवर में जो लाउडेस्ट नॉइज़ आती है वो
इलेक्ट्रिक क्लॉक की है” ओगिलवी ने इस लाइन को
ही अपने एड की हेडलाइन बनाया था. ओगिलवी ने
मर्सीडीज़ के लिए भी एड किया था. उन्होंने अपनी टीम
को डैमलर- बेंज के स्टुटगार्ट हेडक्वार्टर्स भेजा. वहां
जो इंजीनियर्स थे टीम ने उनका 3 वीक्स तक इंटरव्यू
लिया.
ये इंटरव्यू मर्सीडीज़ के एड केम्पेन के लिए मटिरियल
बना. और उन्हें एक्सपर्ट्स से जो फैक्ट्स मालूम हुए
उसकी वजह से मर्सीडीज़ की सेल यू.एस में पर इयर
10,000 से 40,000 कार तक पहुँच गयी थी. अपने
प्रोडक्ट को पूरी तरह जान लेने के बाद आपको अपने
कोम्प्टीशन के एड्स भी स्टडी करने चाहिए. उनके
एड्स की अपील क्या है? ये अपील कितनी इफेक्टिव
है? अगर आप अपने कॉम्पटीटर्स पर भी थोड़ी रिसर्च
कर लेंगे तो आपका पता चल जाएगा कि आप मार्किट
में कहाँ खड़े है. सबसे इम्पोर्टेट बात ये कि अपने
कंज्यूमर्स पर इंटेंसिव रिसर्च करे.
वो आपको प्रोडक्ट के बारे में क्या फील करते है, ये
जानने की कोशिश करे. ऐसी क्या क्वालिटीज़ है जो वे
एक ब्रांड में ढूढ़ते है ? ऐसा क्या है जो आप उन्हें देने
का प्रोमिस कर सकते है? अगर आप रिसर्च टीम का
खर्चा नहीं उठा सकते तो एक कॉपी राइटर के तौर पर
आप खुद भी ये कर सकते है. अगर आपको काम की
इन्फोर्मेशन चाहिए तो हाउसवाइव्स से बात करो. उनकी
सत्तेशन आपके बटे काम आरोगी रनका टंटरतय लेने

DA ८
इन्फोर्मेशन चाहिए तो हाउसवाइव्स से बात करो. उनकी
सजेशन आपके बड़े काम आयेगी. उनका इंटरव्यू लेने
से आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा.
अब आपको सीखने है एडवरटाईजिंग के दो ऐसे
कांस्पेट्स जो आपके लिए मोस्ट इम्पोर्टेट है. ये है
पोजिशनिंग और ब्रांड इमेज. जब आप पोजिशनिंग की
बात करते है तो इसका सीधा मतलब है कि”ये प्रोडक्ट
क्या करता है और ये किसके लिए है।
ओगिलवी ने डव सोप के लिए भी एड बनाया था. वो
चाहते तो डव को सिर्फ मर्दो के हाथ धोने का सोप बना
सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने इसे
औरतो के लिए ब्यूटी बार सोप की तरह पेश किया जो
ड्राईनेस दूर करके स्किन को सॉफ्ट बनाता है. और 25
सालो से डव की यही इमेज बनी हुई है. आपको ब्रांड
की पोजिशनिंग के बारे में सोचना है. आपको प्रोडक्ट
की ब्रांड इमेज भी क्रियेट करनी पड़ेगी.
क्योंकि ये प्रोडक्ट की ओवरआल क्वालिटीज़ जैसे कि
नाम से लेकर प्राइस, पैकेजिंग, एडवरटाईजिंग स्टाइल
जैसी सभी चीज़े रिप्रेजेंट करता है. ज्यादा एक्यूरेट बोले
तो ब्रांड इमेज किसी भी प्रोडक्ट की पर्सनेलिटी होती है.
इसलिए जो भी एडवरटीज़मेंट्स प्रोडक्ट के लिए बने
वे सब उसकी ब्रांड इमेज से मैच करने चाहिए. और ये
हमेशा सेम रहे चाहे मार्केटिंग डायरेक्टर या एड एजेंसी
बदल जाए. एक पॉवरफुल ब्रांड इमेज कई सालो तक
इफेक्टिव रहता है. फिर लोग सालो साल तक उस
प्रोडक्ट को उसकी ब्रांड इमेज से जोड़ कर ही देखते है.
ब्रांड इमेज ही ये डिसाइड करता है कि कोई प्रोडक्ट

नाम से लेकर प्राइस, पैकेजिंग, एडवरटाईजिंग स्टाइल
जैसी सभी चीज़े रिप्रेजेंट करता है. ज्यादा एक्यूरेट बोले
तो ब्रांड इमेज किसी भी प्रोडक्ट की पर्सनेलिटी होती है.
इसलिए जो भी एडवरटीज़मेंट्स प्रोडक्ट के लिए बने
वे सब उसकी ब्रांड इमेज से मैच करने चाहिए. और ये
हमेशा सेम रहे चाहे मार्केटिंग डायरेक्टर या एड एजेंसी
बदल जाए. एक पॉवरफुल ब्रांड इमेज कई सालो तक
इफेक्टिव रहता है. फिर लोग सालो साल तक उस
प्रोडक्ट को उसकी ब्रांड इमेज से जोड़ कर ही देखते है.
ब्रांड इमेज ही ये डिसाइड करता है कि कोई प्रोडक्ट
आपको लेना है या नहीं. आप बाकी ब्रांड्स के बदले
एक ख़ास ब्रांड का प्रोडक्ट इसलिए चूज़ करते है
क्योंकि वो आपको रीप्रजेंट करता है. ये आपकी
पर्सनेलिटी और आपके लाइफस्टाइल को रीप्रेजंट करता
है. यहाँ पर हम मार्लबोरो सिगरेट का एक्जाम्पल ले
सकते है.
जब ये सिगरेट फर्स्ट टाइम रीलीज़ हुई थी तो उस टाइम
तक किसी ने इसका नाम तक नहीं सुना था. तब ये एक
छोटा सा ब्रांड हुआ करता था. लेकिन एडवरटाईजिंग
जीनियस लियो बर्नेट ने इस पर काफी मेहनत की.
उन्होंने ही मार्लबोरो के लिए काऊबॉय की इमेज़
क्रियेट की थी. और शायद इसीलिए मार्लबोरो सिगरेट
इंटरनेशनल सिगरेट ब्रांड बन गया. आज भी मार्लबोरो
के पैकेट पर काऊबॉय की इमेज देखी जा सकती है.

Ogilvy on Advertising
David Ogilvy
वांटेड : अ रेनिसेंस इन प्रिंट एडवरटाईजिंग
विनिंग प्रिंट एडवरटीज़मेंट क्रियेट (create) करने के
कुछ ऐसे रूल्स है जो कॉपी राइटर को फोलो करने
ज़रूरी है. दुनिया के किसी भी कस्टमर के लिए ये
रूल्स बहुत इफेक्टिव है. क्योंकि ये पास्ट में काम आये
थे और प्रेजेंट में भी बड़े काम के है. इसका रीजन यही
है कि चाहे कोई भी जगह हो या कोई भी टाइम पीरियड
हो, ह्युमन नेचर हमेशा सेम रहता है. लोग हमेशा से
ही मनी, हेल्थ, ब्यूटी, सोशल स्टेट्स की डिजायर करते
आये है और अपनी मुसीबतों से छुटकारा ही चाहते
आये है.
जो एड आप बनाये वो लोगो को ऐसा लगे जैसे कि
उनकी सब मुश्किलों का सोल्यूशन हो.,हेड लाइन्स
इलूस्ट्रेशन और बॉडी कॉपी के रूल्स फोलो करके आप
भी ऐसे इफेक्टिव एड्स क्रियेट कर सकते है जो लोगो
को खींचे. किसी भी प्रिंटेड एड का फर्स्ट एलिमेंट होता
है उसकी हेड लाइन. यही वो चीज़ है जो लोग सबसे
पहले देखते है और रीडर की अटेंशन कैच करती है.
90% बार ऐसा होता है कि अगर हेडलाइन इंट्रेस्टिंग ना
हो तो लोग पूरी कॉपी नही पढ़ते ..
बेस्ट हेडलाइन्स वो होती है जो रीडर्स को कुछ
बेनेफिट्स देने का प्रोमिस करे. अब जैसे मान लो किसी
टूथ पेस्ट का एड जो ज्यादा व्हाईट टीथ (white
teeth ) और जीरो कैविटी का वादा करे या फिर

टूथ पेस्ट का एड जो ज्यादा व्हाईट टीथ (white
teeth ) और जीरो कैविटी का वादा करे, या फिर
गैसोलीन का एड जो कहे कि” मोर माइल्स पर
गैलन” (more miles per gallon).
अगर कोई डीटरजेंट (detergent) का एड हुआ
तो वो ज्यादा क्लीन और खुशबूदार कपड़ो का प्रोमिस
कर सकता है. कुछ हेडलाइन्स जो कोई न्यूज़ बताती
है, वो भी अच्छा सेल करती है. जैसे किसी नए शैम्पू के
बारे में न्यूज या किसी ओल्ड प्रोडक्ट के नए फीचर्स या
उसे यूज़ करने का नया तरीका भी हेडलाइन हो सकती
है. इसका एक बढ़िया एक्जाम्पल है. कई साल पहले
कैम्पबेल ने एक बड़ी स्ट्रोंग हेडलाइन बनाई थी” सूप
ओन द रोक्स” (Soup on the Rocks). ये कैन्ड
बीफब्रोथ को आइस के साथ खाने के नये तरीके के बारे
में थी. तब ये एक बड़ी शॉकिंग न्यूज़ बनी थी.
अगर आपकी न्यूज़ आपके प्रोडक्ट के बारे में कुछ
बताती है तो इसे यूज़ करे. अपने प्रिंट एड में इसे
अपनी हेडलाइन बनाकर प्रजेंट करे. अगर आप कुछ
ऐसे वर्ड्स जैसे” इंट्रोड्यूसिंग” (introducing)
“अमेजिंग (amazing) नाऊ (now) या सडनली
(“suddenly) यूज़ करते है तो पढने वालो को ये
और भी इफेक्टिक लगेगा. आपने इन वर्ड्स को अक्सर
एड्स में बार-बार देखा होगा क्योंकि ये सच में काम
करते है.
प्रिंटेड एड्स का सेकंड एलिमेंट है इलुस्ट्रेशन
(illustration). पहले के टाइम में एड एजेंसीज़
फोटोग्राफ्स और पेंटिंग्स यज करती थी. आजकल

फोटोग्राफ्स और पेंटिंग्स यूज़ करती थी. आजकल
काफी मॉडर्न टूल्स यूज़ होते है लेकिन आज भी
इलुस्ट्रेशन का इम्पैक्ट (impact)उतना ही है जितना
कि पहले था. ये किसी एड को बना भी सकते है और
बिगाड़ भी. इलुस्ट्रेशन हमेशा से ही पॉवरफुल रहा है ,
अब जैसे मार्लबोरो के काऊबॉय को ही देख लो.
उस काऊबॉय की इमेज को लोगो ने सिगरेट से ही जोड़
लिया है. हम यहाँ कुछ टिप्स दे रहे है इलुस्ट्रेशन बनाने
के लिए. सबसे पहले तो सब्जेक्ट देखे जो इलुस्ट्रेशन
का मोस्ट इम्पोर्टेट पार्ट है, ये ऐसा होना चाहिए कि लोगो
में क्यूरियोसिटी (curiosity) बढ़ा सके, उन्हें एक
स्टोरी बता सके. जैसे एक्जाम्पल के लिए हम बिफोर
और आफ्टर वाले इलुस्ट्रेशन ले सकते है जिनका
काफी पॉवरफुल इफ्केट पड़ता है. इसमें लोगो को एक
फेसिनेटिंग स्टोरी नज़र आती है.
और सब्जेक्ट जितना पोसिबल हो उतना सिम्पल रखे.
ओगिलवी ने अपने एक्स्पिरियेश से सीखा कि क्राउड
कभी भी (crowds ) अच्छा सब्जेक्ट नही होता
बल्कि फोकस सिर्फ एक पर्सन पर होना चाहिए. उन्हें ये
भी लगता था कि हिस्टोरिकल रेफरेंस वाले एड मुश्किल
से ही बिकते है. एक बार ओगिलवी ने एक इलुस्ट्रेशन
क्रियेट किया जिसमे शेफ्स (chefs) का एक ग्रुप
दिखाया गया था. लेकिन जल्दी ही उन्हें रियेलाईज
हुआ कि शेफ्स (chefs) कभी भी हाउसवाइव्स
(housewives) को अपील नहीं करते.
ये उनकी मिस्टेक थी क्योंकि जरूरी नहीं कि जो चीज़
उन्हें अपील करे वो रीडर्स को भी अपील करेगी. अगर

उन्हें अपील करे वो रीडर्स को भी अपील करेगी. अगर
प्रोडक्ट कुकिंग के लिए हो तो कभी भी इंग्रीडीएंट्स
(ingredient) की पिक्चर शो ना करे बल्कि
डिलीशिय्स (Delicious ) मील के फोटो शो करे जो
पब्लिक को ज्यादा अपील करेगी. एक स्विस कैंन्ड
(Swiss canned good ) गुड ब्रांड था जिसमे
वेजिटेबल्स (vegetables) की पिक्चर्स थी. लेकिन
अगर इसमें बढ़िया सा होम कुक्ड मील (home
cooked meal) दिखाया जाता तो इसका प्रिंट एड
और भी बैटर बन सकता था.
प्रिंटेड एड का थर्ड एलेमेन्ट है बॉडी कॉपी (body
copy). जिसका मतलब है टेक्स्ट (text) जोकि
हेडलाइन के साथ दिया जाता है. बॉडी कॉपी कोई
नहीं पढ़ता” “Nobody reads body copy”.
ये बिलकुल सच्ची बात है क्योंकि अगर हेडलाइन
और इलुस्ट्रेशन (illustration) में दम नहीं है तो
रीडर्स बाकि का कुछ भी नहीं पढ़ेगा. तो एक कॉपी
राइटर की जॉब है कि वो ऐसी बॉडी कॉपी क्रियेट करे
जो रीडर्स को पढने पर मजबूर कर दे. आपकी बॉडी
कॉपी इतनी इंट्रेस्टिंग (interesting) लगे कि रीडर्स
उसे पढना चाहे. बॉडी कॉपी लिखते टाइम ऐसा लगे
जैसे आप खुद रीडर से पर्सनली बात कर रहे हो. लंबे
पैराग्राफ्स (paragraphs) के बजाये छोटे सेंटेंस
(sentences)यूज़ करे. सिंपल वर्ड्स चूज़ करे और
ऐसे लिखे जैसे आप डे टू डे लाइफ में नार्मल बात करते
ओगिलवी ने एक बार गलती से डिफिकल्ट वर्ड

है.
ओगिलवी ने एक बार गलती से डिफिकल्ट वर्ड
(difficult word) यूज़ कर लिया था. उन्होंने
कुछ ऐसा लिखा” डव मेड सोप ओब्सोलेट” (Dove
made soap obsolete) और ये एड फेल हो
गया क्योंकि ज़्यादातर हाउसवाइव्स को ओब्सोलेट
(obsolete) का मीनिंग नहीं पता था. बाद में
उन्होंने इस वर्ड को चेंज करके “ओल्ड फेशंड”
“old-fashioned” वर्ड लिखा.
बॉडी कॉपी कोई एस्से (essay) नहीं है. बैटर होगा
कि आप रीडर को एक स्टोरी सुनाये.ज़िप्पो(Zippo)
ने एक बार एक विनिंग प्रिंट एड (winning print
ad ) निकाला जो इस तरह था” एक ज़िप्पो की
अमेजिंग स्टोरी जिसे एक फिश के पेट से निकाला गया
217″ (The amazing story of a Zippo that
worked after being taken from the
belly of a fish)”.
एनालोजीज़ (analogies) यूज़ ना करे क्योंकि
इससे आपके रीडर्स कन्फ्यूज़ हो सकते है. जैसे कि
अगर आपका प्रोडक्ट कोई फेशियल क्रीम है तो ऐसा
कभी ना कहे” जैसे प्लांट्स को मोईश्चर चाहिए वैसे ही
आपकी स्किन को भी चाहिए” (Just as plants
require moisture, so too does your
skin). आपकी बॉडी कॉपी ऐसी हो जो रीडर्स को
ईजिली समझ आये. इसमें क्लियर और डायरेक्ट बात
हो कि आपका प्रोडक्ट रीडर्स के लिए क्या कर सकता
है. अब पोस्टर मेकिंग के बारे में कुछ इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

आपकी स्किन को भी चाहिए” (Just as plants
require moisture, so too does your
skin). आपकी बॉडी कॉपी ऐसी हो जो रीडर्स को
ईजिली समझ आये. इसमें क्लियर और डायरेक्ट बात
हो कि आपका प्रोडक्ट रीडर्स के लिए क्या कर सकता
है. अब पोस्टर मेकिंग के बारे में कुछ इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स
बताते है.
सिंपली बोले तो आपको इसे एक “विजुएल स्कैंडल”
बनाना पड़ेगा. पोस्टर ऐसा हो जो दूर से ही लोगो की
अटेंशन ग्रेब कर ले. इसके लिए खूब बड़े फोंट्स और
सॉलिड कलर्स यूज़ करे. आपका ब्रांड प्रोमिस ना सिर्फ
वर्ड्स में बल्कि इलुस्ट्रेशन्स में भी दिखना चाहिए.
जितना हो सके पोस्टर में उतने कम एलिमेंट्स हो और
कोई क्लटर (clutter) ना हो.
इंग्लैण्ड में एक पोस्टर वाकई में विजुअल स्कैंडल
(visual scandal) की तरह था. ये एक सुपर
ग्ल्यू (super glue )का ब्रांड एड था. एक असली
की कार को बिलबोर्ड में ग्ल्यू किया गया था जिसके
साथ टैगलाइन थी “इट आल्सो स्टिक्स हैंडल्स
टू टीपॉट्स” (It also sticks handles to
teapots). व्हाईट बैकग्राउंड में ब्लैक इंक से लिखा
गया था और साथ में प्रोडक्ट का लोगो था. अल्टीमेटली
(ultimately) ये पोस्टर एक अटेंशन ग्रेबर था
क्योंकि इसमें कार को ग्ल्यू किया गया था.

Ogilvy on Advertising
David Ogilvy
हाउ टू मेक टीवी कमर्शियल देट सेल
How to make TV commercials that
sell
ओगिलवी हमेशा ही रिसर्च पर रिले करते रहे है ताकि
उन्हें पता चल सके कि उनके एड्स का कस्टमर्स पर
क्या इम्पैक्ट (impact) होता है. रिसर्च के लिए वो
ज़्यादातर मैप्स एंड रोस फर्म (firm Mapes &
Ross )को हायर किया करते थे. वो कस्टमर रिसर्च
और एनालिसिस के लिए रेगुलरली कमिशन करते है.
जब बात टीवी कमर्शियल (TV commercials)
की हो तो ओगिलवी ने देखा कि 5 ऐसी अप्रोचेस
(approaches) है जो मार्किट में काम करती है. ये
5 कमर्शियल पइफेक्टिव (effective) प्रूव हो चुके
है जो कस्टमर्स को अपनी ब्रांड प्रेफेरेसं (brand
preference) चेंज करने पर मजबूर कर सकते है.
नेक्स्ट टाइम जब आप टीवी देखे तो आप नीचे दिए
कमर्शियल्स अप्रोच को ज़रूर नोट करे.
फर्स्ट कमर्शियल अप्रोच है ह्यूमर (humour)
एडवरटाईजिंग पायनियर( Advertising
pioneer ) क्लॉउड़े होपकिन ने एक बार कहा था”
पीपल डू नोट बाई फ्रॉम क्लाउंस” (People do
not buy from clowns) उनकी ये बात शायद
उनके टाइम में सच हो, लेकिन अब नहीं. क्योंकि रिसर्च
से पूव हुआ है कि फनी कमर्शियल्स लोगो को याद रहते

उनके टाइम में सच हो, लेकिन अब नहीं. क्योंकि रिसर्च
से प्रूव हुआ है कि फनी कमर्शियल्स लोगो को याद रहते
है इसलिए वो उन ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स खरीद लेते है.
एक बार ऐसे ही फ़्रांस में एड्स की सीरीज (series
of ads) चलाई गयी थी जिसमे एक स्माइलिंग ओल्ड
वुमेन थी.
उसमे दिखाया गया था कि कैसे वो औरत जो पहले
गरीब थी, वाशिंग मशीन ब्रांड के एड की कमर्शियल
मॉडल बनकर फेमस हो गयी थी. 4 में से 3 कस्टमर
को वो लेडी याद रही और इस तरह उस ब्रांड के वाशिंग
मशीन की सेल बड़े सिग्नीफिकेंट (significant)
तरीके से इनक्रीज हो गयी थी. उस लेडी के एड ने उस
वाशिंग मशीन ब्रांड को मार्किट में दो रैंक ऊपर पहुंचा
दिया था. सेकंड अप्रोच है स्लाइस ऑफ़ लाइफ (slice
of life). ये कमर्शियल्स रियल लाइफ सिचुएशन
दिखाते है जहाँ एक केरेक्टर (character)किसी और
को उस ब्रांड के बेनेफिट्स के बारे में कन्विंस करने की
कोशिश करता है.
हम एक्जाम्पल के लिए फूड सीजनिंग (food
seasoning) का कमर्शियल लेते है. इसमें एड की
सेटिंग किचेन के अंदर है जहाँ एक हाउसवाइफ अपनी
फ्रेंड को सीजनिंग (seasoning) के बेनिफिट्स
बता रही है. उसकी फ्रेंड डिलीशियस (delicious)
सूप टेस्ट करती है और कन्विंस हो जाती है. वैसे तो ये
स्लाइस ऑफ़ लाइफ टाइप के कमर्शियल थोड़े कार्नी
(corny) लगते है मगर एड एजेंसी इन्हें थोडा चार्मिंग,
रियेलिस्टिक और प्रोफिटेबल बना सकती है.

रियेलिस्टिक और प्रोफिटेबल बना सकती है.
अब जो थर्ड अप्रोच है वो है डेमोनस्ट्रेशन्स
(demonstrations.) यानी कि ये कमर्शियल
दिखाते है कि कोई प्रोडक्ट कैसे काम करता है? इसका
एक अमेजिंग एक्जाम्पल है सुपर ग्ल्यू ब्रांड (super
glue brand ) का एड जिसमे दिखाया जाता है
कैसे एक एनाउंसर (announcer) के लेदर शूज़
में सुपर ग्ल्यू लगा दिया जाता है फिर कुछ लोग उसे
उल्टा करके सीलिंग (ceiling) से लटका देते है. वो
अनाउंसर छत से लटके-लटके ही सुपर ग्ल्यू के बारे में
बताता है.
अगर आप कमर्शियल्स में प्रोडक्ट कम्पेरिजन
(product comparison) के बारे में सोच रहे है
तो अपने कोम्प्टीटर्स (competitor) का ब्रांड नेम
कभी मत बताओ. क्योंकि लोग ये सोच के कन्फ्यूज़ हो
जायेंगे कि आप आखिर किस ब्रांड की एडवरटाईजिंग
कर रहे है. टाइड डीटरजेंट सोप (Tide detergent
soap) अक्सर अपने ब्रांड को दूसरो से कम्पेरिज़न
(comparison ) करके दिखाता है.
जिसमे दो हाउसवाइव्स व्हाइट यूनिफॉर्स धो रही
है, एक टाइड (Tide ) यूज़ करती है तो दूसरी ब्रांड
X यूज़ करती है. फिर दिखाया जाता है कि टाइड
से धुली यूनिफार्म ज्यादा व्हाईट, क्लीन और फ्रेश
है. फोर्थ अप्रोच है प्रॉब्लम सोल्यूशन (problem
solution.) आपको वो प्रॉब्लम दिखानी है जिससे
कस्टमर रिलेट कर सके.
फिर आप अपने प्रोडक्ट को सोल्यशन की तरह दिखा

A <
फिर आप अपने प्रोडक्ट को सोल्यूशन की तरह दिखा
सकते हो. इसका एक अच्छा एक्जाम्पल होगा ट्रेन
मैचेस (Train matches)
इस कमर्शियल में साउथ इंडिया की सेटिंग दिखाई गयी
है जहाँ के क्लाइमेट में एक आदमी को माचिस जलाने
में मुश्किल आती है. वो बड़ा फ्रस्ट्रेट (frustrated)
हो जाता है. तब उसकी ब्यूटीफुल और कूल वाइफ
आती है, जो उसे ट्रेन मैचेस (Train matches)
का एक बोक्स देती है. और वो आदमी एक ही बार में
माचिस जला लेता है.
फिफ्थ अप्रोच है केरेक्टर. कुछ केसेस में (cases)ऐसे
केरेक्टर्स होते है जिनकी वजह से वो प्रोडक्ट सालो
साल बिकता है. वे उस ब्रांड के साथ इतना घुलमिल
जाते है कि व्यूवेर्स (viewers) के माइंड में हमेशा के
लिए फिट हो जाते है. इसका एक एक्जाम्पल है टाइटस
मूडी (Titus Moody) जो पेप्पेरिज़ फार्म लोफ ब्रेड
(Pepperidge Farm loaf bread) के एड का
केरेक्टर है. टाइटस एक ओल्ड इंग्लिश बेकर है जो 26
सालो तक इस ब्रांड का फेस रहा था.
इसी तरह कॉफ़ी का एक ब्रांड है मैक्सवेल हॉउस
(Maxwell House)जिसका केरेक्टर थी
कोरा (Cora) उसने मैक्सवेल के लिए 7 सालो
तक एडवरटाईज किया. कुछ कमर्शियल्स काफी
सक्सेसफुल रहे तो कुछ ऐसे भी तो जो एकदम फ्लॉप
हुए. ये मुश्किल से ही मार्किट में बिकते थे. रिसर्च से
देखा गया कि ये इतने इनिफेक्टिव (ineffective) रहे
लोगो ने इनका ब्रांड खरीदा ही नहीं. एक एक्जाम्पल

@ AP
दखा गया कि 4 इतनानफाक्टव (II helleCLIVE) रह
लोगो ने इनका ब्रांड खरीदा ही नहीं. एक एक्जाम्पल
है सेलिब्रेटीज(celebrities) के टेस्टीमोनियल्स
(testimonials). क्योंकि व्यूवेर्स (Viewers)
सोचते है कि वो सिर्फ पैसे के लिए उस प्रोडक्ट की
एडवरटीज़मेट करते है जोकि एक फैक्ट है. असल
में वो उस प्रोडक्ट को शायद ही यूज़ करते हो. फेब्ज़
(Faberge ) ब्रांड ने फराह फावसेट (Farah
Fawcett) को 3 साल तक अपने कमर्शियल के लिए
$2,000,000 पे किये थे.
एक टाइम था जब ओगिलवी ने मिसेज एलेनोर
phylded (Mrs Eleanor Roosevelt) ont
मार्जरीन (margarine )के कमर्शियल में लिया
था. उन्होंने फर्स्ट लेडी को $35,000. पे किये थे.
लेकिन ये अनसक्सेसफुल रहा क्योंकि लोगो को मिसेज
रूज़वेल्ट तो याद रही लेकिन मार्जरीन का ब्रांड नही.
जब सेलेब्रिटीज़ (celebrities) किसी ब्रांड की
टेस्टीमोनियल (testimonials) करते है तो लोगो को
डाउट होता है और वो प्रोडक्ट के बारे में भूल जाते है.
क्योंकि सेलेब्रेटीज़ जो भी प्रोमोट करते है उस प्रोडक्ट
को आउटशाइन (outshine )कर लेते है.
एक और टाइप के एड्स जो ज्यादा बिकते नही वो है
कार्टून वाले कमर्शियल्स. अगर प्रोडक्ट बच्चो का हो
तो बात दूसरी है वर्ना तो ये एडल्ट्स को बिलकुल भी
अपील नहीं करते है. एक फैब्रिक सॉफ्टनर ब्रांड ने
अपने कमर्शियल में कार्टून्स रखे थे लेकिन वो फ्लॉप
रहा तो उन्हें रियल लोगो को लेकर दूसरा कमर्शियल
तनाना पाटा तगोंनि गरें लारत – टिग्तागा रागा

® AP
में वो उस प्रोडक्ट को शायद ही यूज़ करते हो. फेब्ज़
(Faberge ) ब्रांड ने फराह फावसेट (Farah
Fawcett) को 3 साल तक अपने कमर्शियल के लिए
$2,000,000 पे किये थे.
एक टाइम था जब ओगिलवी ने मिसेज एलेनोर
Phyldet (Mrs Eleanor Roosevelt) Ehit
मार्जरीन (margarine )के कमर्शियल में लिया
था. उन्होंने फर्स्ट लेडी को $35,000. पे किये थे.
लेकिन ये अनसक्सेसफुल रहा क्योंकि लोगो को मिसेज
रूज़वेल्ट तो याद रही लेकिन मार्जरीन का ब्रांड नही.
जब सेलेब्रिटीज़ (celebrities) किसी ब्रांड की
टेस्टीमोनियल (testimonials) करते है तो लोगो को
डाउट होता है और वो प्रोडक्ट के बारे में भूल जाते है.
क्योंकि सेलेब्रेटीज़ जो भी प्रोमोट करते है उस प्रोडक्ट
को आउटशाइन (outshine )कर लेते है.
एक और टाइप के एड्स जो ज्यादा बिकते नही वो है
कार्टून वाले कमर्शियल्स. अगर प्रोडक्ट बच्चो का हो
तो बात दूसरी है वर्ना तो ये एडल्ट्स को बिलकुल भी
अपील नहीं करते है. एक फैब्रिक सॉफ्टनर ब्रांड ने
अपने कमर्शियल में कार्टून्स रखे थे लेकिन वो फ्लॉप
रहा तो उन्हें रियल लोगो को लेकर दूसरा कमर्शियल
बनाना पड़ा. क्योंकि इसमें लाइव एक्शन दिखाया गया
था जिससे उस फेब्रिक सॉफ्टनर की सेल इनक्रीज हो
पाई.

Ogilvy on Advertising
David Ogilvy
कोम्प्टीइंग विद प्रोक्टर एंडगैम्बल
(Competing with Procter & Gamble)
पीएंडजी (P&G) का अपने प्रोडक्ट्स में मार्किट
शेयर 40% है जैसे कि उनके सोप्स है, टूथपेस्ट है
और फेब्रिक सॉफ्टनर और डिस्पोजेबल डायपर्स
(disposable diapers) है. यही नहीं ये कॉफ़ी,
शैम्पू और डीयोडोरेंट्स (deodorants) का भी
लीडिंग ब्रांड है. ये बात नोट करने वाली है कि पीएंडजी
(P&G) साल का 700 मिलियन डॉलर (700
million dollars) सिर्फ एडवरटाईजिंग पर खर्च
करती है. और हर साल कंपनी की सेल 12 बिलियन
डॉलर (12 billion dollars)बड रही है.
ओगिलवी ने 30 सालो तक पीएंडजी (P&G) के
अगेंस्ट कोम्पीट किया.
उनके लिए एक ग्रेट लर्निंग एस्पिरियेंश
(experience.) रहा. सबसे पहले तो उन्हें ये सीखने
को मिला कि कंपनी डिसप्लींड (disciplined)
है. केयरफुल प्लानिंग और ह्यूज़ रिक्स अवॉयड
करनापीएंडजी (P&G) की फिलोसफी रही है. उनके
कुछ इफेक्टिव प्रिंसिपल्स (principles) भी है जिन
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पाएगा (ITIHINor . ‘
कुछ इफेक्टिव प्रिंसिपल्स (principles) भी है जिन
पर वे स्टिक रहते है. कोई भी प्रोडक्ट लांच करने से
पहले पीएंडजी (P&G ) घरो में फ्री सैंपल्स डिलीवर
करते है. और यही पर उनका ज़्यादातर इनिशियल
इन्वेस्टमेंट लगता है. अगर उन्हें पोसिटिव रिस्पोंस
मिलता है तभी वो उस प्रोडक्ट का पूरा प्रोडक्शन करते
है.
और वो जो चीज़ भी बनाते है यूज़ वोल्यूम (huge
volumes) में बनाते है ताकि लागत कम आये. इससे
उनके प्रोडक्ट्स बाकी दुसरे प्रोडक्ट्स के मुकाबले
अफोर्डेबल होते है. पीएंडजी (P&G ) मार्किट रिसर्च से
मालूम करते है कि कंज्यूमर की नीड क्या है. पीएंडजी
(P&G ) के फोमेर चेयरमेन एड हर्नेस बताते है” हम
कंज्यूमर को स्टडी करते है और उनकी टेस्ट, नीड और
एनवायरमेंट और लिविंग हैबिट में नए ट्रेंड्स को जानने
की कोशिश करते है” उनका सबसे इम्पोर्टेट एस्सेट
(important asset) है प्रोडक्ट सुपिरियोरिटी ,
(superiority) पीएंडजी ( P&G) की हमेशा यही
कोशिश रहती वो अपने कोम्प्टीटर्स(competitors)
से ज्यादा बैटर और अच्छे प्रोडक्ट बनाये.
इसलिए कंपनी अपने बजट का एक बड़ा पार्ट अपने
नए ब्रांड को एडवरटाईज करने में भी लगाती है..
एडवरटाईजिंग का बजट जितना बड़ा होगा ब्रांड भी
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नए ब्रांड को एडवरटाईज करने में भी लगाती है..
एडवरटाईजिंग का बजट जितना बड़ा होगा ब्रांड भी
उतना ही सक्सेसफुल होगा. क्रेस्ट (Crest) का बजट
29 मिलियन डॉलर था. पैम्पेर्स (Pampers) का
19 मिलियन डॉलर जबकि टाइड (Tide ) का बजट
है 17 मिलियन डॉलर. पीएंडजी (P&G) के 60%
कमर्शियल्स डेमोनस्ट्रेशन (demonstrations)
टाइप है. ये लोग हॉउसवाइव्स से डायरेक्ट कम्यूनिकेट
करने में यकीन रखते है. ये ऐसी सिचुएशन और वर्ड्स
यूज़ करते है तो लोगो को फेमिलियर लगती है.
कभी-कभी इनके कमर्शियल्स में स्लाइस ऑफ़ लाइफ
और कंज्यूमर टेस्टीमोनियल भी देखने को मिल जाता
है. और सबसे बड़ी बात कि पीएंडजी (P&G) के ब्रांड
नेम सिंपल और शोर्ट होते है ताकि लोगो को ईजिली
याद रहे. जैसे कि टाइड, जेस्ट और डैश (Dash).
कमर्शियल के स्टार्टिंग में ही ब्रांड नेम अनाउंस कर दिया
जाता है और फिर खत्म होने से पहले तीन बार और.
और उनके एड्स में ब्रांड का प्रोमिस भी रीपीट होता है.
पीएंडजी (P&G ) ने अपने रिसर्च से बेस्ट स्ट्रेटेजी
अडॉप्ट की है. आइवरी (Ivory), जेस्ट (Zest) टाइड
और क्रेस्ट (Crest ) की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी 30 सालो
से सेम रही है. उनका एडवरटाईजिंग केम्पेन 10 साल
तक रहता है. पूरे साल पीएंडजी (P&G ) के ब्रांड्स की
जाने
1 डी Inor
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तक रहता है. पूरे साल पीएंडजी (P&G ) के ब्रांड्स की
एडवरटाईजिंग चलती है. अगर पीएंडजी (P&G) कोई
कमी है तो ये, कि वो प्रेडिक्टेबल है.
Conclusion
इस समरी में आपने पोजिशनिंग और ब्रांड इमोज
के बारे में सीखा। हमने प्रिन्टिड एडस के बेसिक
एलिमेन्टस के बारे में भी जाना। हमने ये भी देखा कि
किस तरीके के टीवे कमर्शियल से ज्यादा से सेल्स
होती है। और वो है जिसमें थोडा सा हयूमर हो रियल
लाईफ के बारे में प्रॉबल्मस हो, उनके साल्यूशन हो और
करेक्टर हो। प्रोक्टर एण्ड गैम्बल ने कई सालो तक
मार्केट में राज किया और हम उनके कर्मशियल और
एड को जरुर स्टडी करना चाहिये ताकि उसे हम अपने
बिजनेस में प्रयोग कर सके।
ओगिल्वी के टाईम में लोग न्यूजपेपर और कमर्शियल
का यूज करके एडस देते थे। आज हम इन्टरनेट यूज
करते है। लेकिन प्रिसिंपल सेम है। आज के टाप
इन्टरनेट मार्केटिंग्स की लाईब्रेरी में आप ये बुकस जरुर
पायेगे। पहले लोग पैसा, और चाहते थे और
आपको पता है आज लोग क्या चाहते है। ये ही तीन
चीज।
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