My life in advertising Claude C. Hopkins Books In Hindi Summary

My life in advertising Claude C. Hopkins परिचय क्या आपको इफेक्टिव एडवरटाईजिंग के सीक्रेट्स जानने है? क्या आप जानना चाहते कि क्लोड होपकिंस ने अपने 35 साल के एडवरटाईजिंग करियर में कैसे प्रोस्पर किया? ऑथर इन सालो में एक फेमस और रिच एड राइटर बना. लेकिन उनके साथ स्टार्टिंग से ऐसा नहीं था. क्लोड ने खुद अपनी सक्सेस स्टोरी लिखी जो अभी आपने हाथो में पकड़ी है. उन्होंने नाइन की एज से काम करना स्टार्ट कर दिया था. और तब से उन्होंने सेलिंग और एडवरटाईजिंग के कई लेसंस लर्न किये. और यही सब वो अपनी इस बुक के श्रू आपसे शेयर करना चाहते है. इसमें आपको ऐसी टेक्नीक्स और स्ट्रेटीज मिलेंगी जो अप्लाई करके आपका एक मोस्ट इफेक्टिव एड केम्पेन बना सकते है. पामोलिव, क्वेकर ओट्स, और पेप्सोडेंट अपनी इंडस्ट्रीज के बड़े ब्रांड बने है. इन ब्रांड को फेमस बनाने के पीछे क्लोड होपकिंस का काफी हार्ड वर्क है तो उन्होंने कैसे इन थ्री प्रोडक्ट्स को मार्किट में इतना बड़ा ब्रांड बना दिया? ये सब और बहुत कुछ आप इस बुक में सीखेंगे, अर्ली इन्फ्लुयेंश मैंने अपने पेरेंट्स से दो इम्पोर्टेन्ट चीज़े सीखी थी जिसने एडवरटाईजिंग करियर में मेरी काफी हेल्प की. अपनी माँ से मैंने अपने काम से प्यार करना सीखा और अपने माँ से मैंने अपने काम से प्यार करना सीखा और अपने पिता से कॉमन लोगो को. जब मेरी एज 10 साल थी, मेरे पापा चल बसे थे और तब से मेरी माँ ही पूरी फेमिली को सपोर्ट करती आई थी. वो बड़ी हार्ड वर्किंग थी मुझे ऐसा कोई टाइम याद नहीं आता जब वो काम ना कर रही हो. मेरी मोम के पास कॉलेज की डिग्री थी. मोर्निंग में वो छोटे बच्चो को पढाती थी. पूरा घर क्लीन करने के बाद वो अपने स्कूल जाया करती थी. और जब लौटती थी तो फिर से घर के कामो में लग जाती थी. रात में मेरी माँ किंडरगार्टनर के लिए बुक्स लिखा करती थी. फिर जब वेकेशन होते तो उन बुक्स को साईकल में रखकर हर स्कूल तक पहुंचाया करती थी. एक ही टाइम में मेरी माँ एक टीचर बनी, राइटर बनी, पब्लिशर बनी और एक स्लेसपर्सन भी बनी. मैंने भी उसके फूटस्टेप फोलो किये. मैंने भी 9 साल की एज से काम करना शुरू कर दिया था. अपने स्कूल जाने से पहले मुझे दो स्कूल हाउसेस ओपन करने पड़ते थे, मै फायर प्लेस में फायर जला कर रूम्स गर्म रखता और डेस्क की सफाई करता था. स्कूल के बाद मै फ्लोर्स साफ़ करता था और रात को करीब 65 घरो में जाकर डेटरोयेट इनविंग न्यूज़ डिलीवर किया करता था. हर सेटरडे को मेरा काम था 2 स्कूल हाउसेस को क्लीन करना और मैं घरो में बिल्स भी डिलीवर करता था. संडे को मै अपनी कम्यूनिटी के चर्च में जेनिटर का काम करता था. जहाँ मै अर्ली मोर्निंग से लेकर रात के 10 बजे तक क्लीनिंग करता था. और जब स्कूल के वेकेशन होते थे तो मै एक फार्म बॉय बनता था. मुझे वेकेशन होते थे तो मै एक फार्म बॉय बनता था. मुझे हार्ड वर्क की आदत सी हो गयी थी. और इसी क्वालिटी के साथ मै बिजनेस के फील्ड में में आया. हर घंटा मेरे लिए वर्किंग आवर था. मिडनाईट में घर आने पर ही मै रेस्ट करता था. लेकिन मै अक्सर रात 2 बजे तक काम करता रहता था. और संडे तो मेरा फेवरेट था क्योंकि इस दिन मै बिना किसी इंटरपश्न के सारा दिन काम कर सकता था. मेरे फादर एक चर्च मिनिस्टर के बेटे थे. उनके कई पुरखे भी पहले चर्च मिनिस्टर रह चुके थे. लेकिन सब गरीबी में ही जिए. मै भी उसी गरीबी में पैदा हुआ और पला बड़ा था. पर मैने इसे अपने लिए एक ब्लेसिंग की तरह ही समझा क्योंकि मै कॉमन लोगो के साथ रहता था, उन्हें अच्छे से जानता था. मुझे उनकी डिजायर्स मालूम थी, उनका स्ट्रगल पता था और उनकी नीड्स मालूम थी. मुझे ये पता था कि उनके लिए क्या काम करेगा. और यही चीज़ एडवरटाईजिंग में मेरे लिए एडवांटेज बनी. कस्टमर्स में से 95% कॉमन पीपल होते है. इसलिए उनकी मेजोरिटी है. जितने भी एड्स मैंने क्रियेट किये है, मुझे पता है कैसे इन कॉमन पीपल को अपील करना है क्योंकि मै भी उनमे से ही एक था. जैसे अगर रोल्स रॉयस वाले मुझे अपनी कार की एड्स के लिए हायर करते तो शायद में उतना सक्सेसफुल नहीं हो पाता. क्योंकि मै तो रिच लोगो को जानता ही नहीं हूँ, क्योंकि मुझे लक्जरी और शानो-शौकत कभी मिली ही नहीं. मै खुद को लेबर लोगो के ज्यादा करीब पाता हूँ. मुझे हाउसवाइव्स का A < थी, उनका स्ट्रगल पता था और उनकी नीड्स मालूम थी. मुझे ये पता था कि उनके लिए क्या काम करेगा. और यही चीज़ एडवरटाईजिंग में मेरे लिए एडवांटेज बनी. कस्टमर्स में से 95% कॉमन पीपल होते है. इसलिए उनकी मेजोरिटी है. जितने भी एड्स मैंने क्रियेट किये है, मुझे पता है कैसे इन कॉमन पीपल को अपील करना है क्योंकि मै भी उनमे से ही एक था. जैसे अगर रोल्स रॉयस वाले मुझे अपनी कार की एड्स के लिए हायर करते तो शायद में उतना सक्सेसफुल नहीं हो पाता. क्योंकि मै तो रिच लोगो को जानता ही नहीं हूँ, क्योंकि मुझे लक्जरी और शानो-शौकत कभी मिली ही नहीं. मै खुद को लेबर लोगो के ज्यादा करीब पाता हूँ. मुझे हाउसवाइव्स का स्ट्रगल पता है जिन्हें छोटे से बजट में पूरे मंथ का गुज़ारा करना पड़ता है. मुझे उन बोयज़ और गर्ल्स का स्ट्रगल अच्छे से पता है जिन्हें हार्ड वर्क किये बगैर नेक्स्ट मील नहीं मिलता है. अगर आप मुझे कोई प्रोडक्ट देगे तो मुझे पता है कि कैसे उसे एक बिग रिजल्ट पाने के लिए एडवरटीज़ करना है. मै सिंपल वर्ड्स यूज़ करता हूँ. मेरे लिखे सेंटेंस शोर्ट होते है. स्कोलर्स और अमीर लोग शायद मुझ पर हँसे लेकिन कॉमन पीपल ज़रूर मेरी बात समझेंगे , ये मै जानता हूँ. मुझे मालूम है कि मेरे एड्स पढ़ते हुए वो मेरे और मेरे प्रोडक्ट के साथ एक कनेक्शन फील करते होंगे. My life in advertising Claude C. Hopkins लेसंस इन एडवरटाईजिंग एंड सेलिंग मै, एक स्माल टाउन में रहने वाल यंग बॉय था जहाँ मैंने एडवरटाईजिंग और सेलिंग के फर्स्ट लेसंस सीखे. मैंने देखा कि फ्री सेम्ल्स प्रोवाइड करके आप अपनी एडवरटाईजिंग काफी इफेक्टिव बना सकते है. और मैंने ये चीज़ भी समझी कि वही एड केपेंस सेल करते है जो ट्रायल्स और एक्सपेरिमेंट्स करते है. एक दिन मेरी मोम ने होममेड सिल्वर पोलिश प्रीपेयर की. मैंने उन्हें स्माल केक के साइज़ में शेप किया और हर एक केक को एक अच्छे से पेपर में पैक कर दिया. उसके बाद मैं अपनी साईकिल से उन्हें डोर टू डोर बेचने निकला. अपना वो प्रोडक्ट जब मैंने किसी के डोर पे जाकर बेचने की कोशिश की तो देखा कि 10 में से सिर्फ 1 ही बिका. लेकिन उसी सिल्वर पोलिश को मुझे जब होम ओनर के किचेन में यूज़ करने का चांस मिला तो मेरे 10 के 10 डब्बे बिक गए थे. जब आप लोगो को फ्री सैंपल देते है तो आपका प्रोडक्ट 10 गुना ज्यादा बिकता है. लेकिन बाकी एडवरटाईजर्स को ये आईडिया कुछ हज़म नहीं होता. वे अपने प्रोस्पेक्ट्स यानी फ्यूचर कस्टमर्स को कोई सैंपल या ट्रायल प्रोडक्ट नहीं देते. भले ही उन्हें बड़े बड़े एडवरटीज़ में पैसा खर्च करना पड़े तो करेंगे. कुछ बिजनेसेस को लगता है कि फी सैंपलस उन्हें कॉस्टली A < सैंपल या ट्रायल प्रोडक्ट नहीं देते. भले ही उन्हें बड़े बड़े एडवरटीज़ में पैसा खर्च करना पड़े तो करेंगे. कुछ बिजनेसेस को लगता है कि फ्री सैंपलस उन्हें कॉस्टली पड़ेगे और कुछ सोचते है कि लोग और ज्यादा फ्री ट्रायल्स डिमांड करेगे. लेकिन मैंने अपने सिल्वर पोलिश वाले एक्सपेरिमेंट से कुछ और ही सीखा. इन फैक्ट मै तो बहुत से न्यूज़पेपर्स और मैगेजींस में कूपंस देकर ही एक वेल नोन एडवरटाईजर बना हूँ. सेम्पलिंग एक सिंपल मगर बड़ी इफेक्टिव स्ट्रेटेजी है. लोग फ्री में आपके प्रोडक्ट को ट्राई करना चाहते है. और अगर उन्हें आपका प्रोडक्ट सैंपल पसंद आया तो वो फिर आपके पास आकर इसे पैसे देकर खरीदना चाहेंगे. एक और लेसन मैंने बुक्स सेलिंग से सीखा. एलेन पिंकरटन एक सक्सेस फुल डिटेक्टिव है. वो मेरा हीरो और मेरा आइडल था. उसने अपनी बायोग्राफी लिखी है. मैंने अपनी माँ को इसमें इन्वेस्ट करने के लिए बोला क्योंकि मुझे ये बुक बहुत पंसद आई थी और मुझे लगा कि औरो को भी ये पसंद आएगी. फिर बुक्स जब हमारे घर में डिलीवर हुई तो मैंने उन्हें फ्लोर पर फैला कर रख दिया. मै वो सारी बुक्स बेचना चाहता था. मेरी माँ ने मुझसे कहा” पहले लीडिंग मेन को लाओ फिर वो बाकीयों को ले आयेंगे.” इसलिए मै अर्ली मोर्निंग मेयर से मिलने गया. मिस्टर मेयर ने मुझे अपने घर में इनवाईट किया. वो हमेशा ऐसे हार्ड वर्किंग नौजवान लड़के या लड़की की हेल्प करने में आगे रहते थे. मैं बड़ा एन्थूयास्टिक था पर जब मैंने उन्हें बुक प्रेजेंट लड़क या लड़का का हल्प करन में आगे रहत थ. मैं बड़ा एन्थूयास्टिक था पर जब मैंने उन्हें बुक प्रेजेंट की उन्होंने बड़े रफ वे में मना कर दिया. मेयर ने कहा” यू आर वेलकम इन माई होम बट नोट योर बुक….. इस एलेन पिंकरटोन को सपोर्ट करना मेरे आइडियल्स के लिए एक शर्मनाक बात होगी…” एक डिटेक्टिव की सोसाइटी में कोई रिस्पेक्ट नहीं होती है, क्योंकि पिंकरटोन जैसे लोग हमेशा क्रिमिनल्स के साथ काम करते है” उन्होंने कहा. उनकी ये बात मेरे लिए एक वेक अप कॉल थी. कोई प्रोडक्ट आपको पसंद है तो इसका मतलब ये नहीं कि वो दूसरो को भी अच्छा लगेगा. मैंने कई सारे बोर्ड्स ऑफ़ डाईरेक्टर्स को यही कहा कि वे कुछ ट्रायल्स लौंच करे ताकि पहले उन्हें पब्लिक की फीलिंग्स तो पता चले. लेकिन उन्हें हमेशा यही लगता है कि ये दुनिया उनके हिसाब से चलती है. असली बात ये है कि जब तक आप रियल फ्यूचर कस्टमर्स से नहीं मिलते आपको उनकी पसंद-नापसंद कभी पता ही नहीं चलेगी. आपकी डिजायर्स और नीड्स कुछ लोगो को अपीलिंग लग सकती है, मेजोरिटी को नहीं. एडवरटाईजिंग 100% पब्लिक की ओपिनियन पर डिपेंड करता है. जो लोग आपका प्रोडक्ट खरीदते है, कॉमन पीपल होते है इसलिए आपको उनकी बात सुननी चाहिए. माई स्टार्ट इन बिजनेस “सो लॉन्ग एज वी आर गोइंग अपवार्ड, नथिंग इज़ अ हार्डशिप”. पहले मैंने एक फार्म बॉय का काम किया गीत नाटों नई से ओत डॉा नि पालो मा A माई स्टार्ट इन बिजनेस “सो लॉन्ग एज वी आर गोइंग अपवार्ड, नथिंग इज़ अ हार्डशिप”. पहले मैंने एक फार्म बॉय का काम किया फिर बाद में कई सारे ओड जॉब्स भी किये. मुझे अपनी $4.50 सेलेरी एक सक्सेस लगती थी. मै रोड साइड में घास के गठ्ठरो पे सो जाता था. मैं एक कम्पनी के लिए छोटे-मोटे काम करता था फिर मैंने एक अपार्टमेंट रेंट पे लिया जिसमे ना के बराबर जगह थी. वहां एक छोटा सा बेड लगाकर मै अकेला उसपर सोता था. लेकिन मेरे लिए तो ये एक बड़ी इम्प्रूवमेंट थी जिसके लिए मै ऊपर वाले का शुक्रगुज़ार था. हाई स्कूल के बाद ही मै अपनी माँ से अलग रहने लगा था. मैंने हमेशा यही सोचा कि मै चर्च मिनिस्टर बनूँगा क्योंकि जब मै छोटा था तो मुझे बाइबल पढना अच्छा लगता था. लेकिन जल्दी ही मेरे सामने असलियत खुल गयी. क्योंकि मैंने देखा कि कैसे ये मिनिस्टर्स हमेशा हमें एविल डीड्स के बारे में सरमन करते रहते थे. वे हमें सिखाते थे कि डांसिंग, प्लेइंग कार्ड्स, और थियेटर जाना वगैरह सब डेविल का काम है जो हमें नहीं करने चाहिए. उनकी बातो से ऐसा लगता था कि जैसे लाइफ में एन्जॉयमेंट की हर चीज़ पाप है. इसलिए एक दिन मैंने अपन होम टाउन ही छोड़ दिया. उस दिन मेरे पॉकेट में बस $3 थे. मुझे अपने एक अंकल का ख्याल आया जिनका स्प्रिंग लेक में एक फ्रूट फ़ार्म था. ये हार्वेस्टिंग का सीजन चल रहा था. मैंने डिसाइड किया कि मै उनके पास जाकर उनकी फूट पीकिंग में हेल्प करूँगा. मैंने स्प्रिंग लेक रहा था. मन डिसाइड किया क म उनक पास जाकर उनकी फ्रूट पीकिंग में हेल्प करूँगा. मैंने स्प्रिंग लेक जाने के लिए कुछ पैसे अर्न किये. अंकल ने मुझे एक दिन के काम के $1.25 दिए. मै रोजाना फार्म में 16 घंटे काम करता था. मेरी सेविंग $ 100 हो गयी थी. लेकिन मेरे कॉलेज की फीस भरने के लिए ये रकम काफी नहीं थी. मेरी किस्मत अच्छी थी कि मेरे ग्रांडफादर ने मुझे इतना हार्ड वर्क करते देखा. वो मुझे पसंद करने लगे थे. उन्होंने मुझे $100 और दे दिए जिसकी मुझे ज़रूरत थी. मैंने 6 मंथ्स की बुककीपिंग कोर्स के लिए स्वेंसबर्ग के बिजनेस कॉलेज में एडमिशन ले लिया. वैसे ये कोई उतनी अच्छी भी पढ़ाई नहीं थी लेकिन इसने मुझे एक अपोरच्यूनिटी दी. एक दिन प्रोफेसर स्वेंसबर्ग एक लैटर लेकर हमारे पास आये. ग्रेड रेपिड्स फेल्ट बूट कम्पनी में बुककीपिंग की एक पोजीशन वेकेंट थी. और सेलरी थी $4.50 पर वीक. मैं क्लास के बाद सीधे प्रोफेसर स्वेंसबर्ग के पास गया. मुझे वो जॉब मिल गयी. वहां मुझे थोड़ी बहुत बुककीपिंग करनी होती थी लेकिन असल में मुझे ऑफिस के ओड जॉब्स करने होते थे जैसे फ्लोर और विंडो क्लीन करना वगैरह. फिर भी मैं पूरी मेहनत करता था क्योंकि मुझे एक छोटे से बजट में अपने रहने और खाने का इंतजाम करना पड़ता था. कुछ मील्स तो मैं स्किप कर देता था. मेरे फेल्ट बूट कम्पनी में काम के दौरान, मिस्टर एम्. थार तिरोल से पीतानादचान र्ट तो तिगेल ग्रेड रेपिड्स फेल्ट बूट कम्पनी में बुककीपिंग की एक पोजीशन वेकेंट थी. और सेलरी थी $4.50 पर वीक. मैं क्लास के बाद सीधे प्रोफेसर स्वेंसबर्ग के पास गया. मुझे वो जॉब मिल गयी. वहां मुझे थोड़ी बहुत बुककीपिंग करनी होती थी लेकिन असल में मुझे ऑफिस के ओड जॉब्स करने होते थे जैसे फ्लोर और विंडो क्लीन करना वगैरह. फिर भी मैं पूरी मेहनत करता था क्योंकि मुझे एक छोटे से बजट में अपने रहने और खाने का इंतजाम करना पड़ता था. कुछ मील्स तो मैं स्किप कर देता था. मेरे फेल्ट बूट कम्पनी में काम के दौरान, मिस्टर एम्. आर बिस्सेल से मेरी जान पहचान हुई जो बिस्सेल कारपेट स्वीपर कम्पनी के ओनर थे. मिस्टर बिस्सेल ने ही मेरे एडवरटाईजिंग करियर की शुरुवात के लिए रास्ता तैयार किया था. एक दिन मै मिस्टर बिस्सेल के साथ चल रहा था जब वो लंच के लिए जा रहे थे. मैंने उन्हें अपनी स्टोरी सुनाई. उन्हें अपने $4.50 वीकली बजट और स्किप मील्स के बारे में बताया. और सबसे बड़ी बात जो मैंने उन्हें शेयर की वो थी पाई खाने का मेरा ड्रीम. मिस्टर बिसेल को भी पाई पसंद थी. उन्होंने मुझे अपने घर पे पाई खाने के लिए इनवाईट किया. उन्होंने मेरी सेलरी $6 पर वीक करने का भी अरेंज कर दिया था. अब मै डिनर में पाई अफोर्ड कर सकता था. My life in advertising Claude C. Hopkins हाउ आई गोट माई स्टार्ट इन एडवरटाईजिंग इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक फेमस एड राइटर हो या आपके पास एक बड़ा केम्पेन बजट हो अगर आप कस्टमर को अपील नहीं कर पाए. इसके लिए आपको अपने टारगेट क्लाइंट्स को स्पॉट करना होगा और ऐसे एड बनाने होंगे जो डाइरेक्टली उनसे बात करे. मिस्टर बिसेल के साथ मेरी कुछ और भी मीटिंग्स हुई. उन्हें पता लगा कि मै रात 2 बजे तक काम करता था फिर उसके बाद घर जाता था. सुबह फिर मै 8 बजे अपने काम पर आ जाता था. मिस्टर बिसेल खुद भी बड़े हार्ड वर्किंग थे उन्होंने मुझे एंकरेज किया कि मैंने उनकी कंपनी ज्वाइन कर लूँ. और इस तरह मुझे बिसेल स्वीपर कंपनी में असिस्टेंट बुककीपर की जॉब मिली. मेरी सेलरी थी $40 मंथली. ये फेबररी का टाइम था. और नवंबर में मुझे प्रोमोट करके हेड बुककीपर बना दिया गया जिसके $75 सेलरी मिलने लगी. इसके बाद मुझे कोई और प्रोमोशन नहीं मिल सकती थी. मुझे रियेलाईज़ हुआ कि बुक कीपर की मेरी पोजीशन मुझे कंपनी में एक एक्सप्रेस के तौर पर रखती है जबकि अगर मै एक सेल्समेन होता तो शायद मै एक एक्सपेंस की तरह इतना नहीं दिखता क्योंकि तब मै कंपनी के लिए रेवेन्यू ला रहा होता. और इसके अलावा सेल्समेन को ज्यादा प्रॉफिट भी मिलता wa A अकाउंटिंग में बुक कीपर क्रेडिट साइड पे होते है और सेल्समेन डेबिट साइड में. उस टाइम में जॉन ई पावर्स नाम का एक फेमस एड राइटर था. उसके सक्सेसफुल एड केस की वजह से कुछ कंपनीज़ बैंक रप्ट होते होते बची थी. जब पावर्स ने हमारी कंपनी कारपेट स्वीपर्स के लिए एड बनाया तो मुझे लगा कि ये एड शायद और बैटर बन सकता था. उसके बनाये पेम्फलेट में ऐसा कुछ नहीं था जो हाउसवाइव्स को अट्रेक्ट करता खरीदने के लिए. मैंने अपने अकाउंटिंग मैनेजर मिस्टर चार्ल्स बी जुड से कहा कि मै इससे ज्यादा अपीलिंग और इफेक्टिव पेम्फलेट बना सकता हूँ. फिर मै 48 आवर्स तक सीधा उस पेम्फलेट को बनाने में जुटा रहा. यहाँ तक कि मै सोया भी नहीं. और तीसरे दिन मैंने अपना खुद का बनाया पेम्फलेट प्रेजेंट किया जिसे हाई पोजीशन पे बैठे लोगो ने अप्रूव भी कर दिया. उस टाइम हमारी कंपनी की सेल्स काफी कम हुआ करती थी. काफी सामान तो ऐसा था जो स्टोर में पड़े-पड़े धूल खाता था. फिर एक दिन मुझे एक ब्रिलिएंट आईडिया आया. क्रिसमस का सीजन था. मैंने सोचा कि अगर लेडीज़ को कारपेट स्वीपर्स क्रिसमस गिफ्ट के तौर पे मिले तो कैसा रहे? सबसे पहले मैंने कारपेट स्वीपर्स के लिए एक बढ़िया सा डिस्प्ले रैक डिजाईन किया फिर मैंने कुछ कार्ड्स बनाये जिन पर लिखा था” द क्वीन ऑफ़ क्रिसमस प्रेजेंट्स” मैंने डीलर्स को लैटर लिखे. अपने लेटर्स में मैंने उनके क्रिसमस प्रेजेंट्स” मैंने डीलर्स को लैटर लिखे. अपने लेटर्स में मैंने उनके स्टोर में अपने कार्ड्स और डिस्प्ले रैक्स इंस्टाल करना का ऑफर दिया. उन्हें बदले में हमें कोई पे नहीं करना था. ये उनके लिए एजेंसी की तरफ से गिफ्ट था. मैंने डीलर्स से कुछ भी खरीदने को नहीं बोला. बल्कि मैंने पुछा कि क्या मैं उन्हें सर्व कर सकता हूँ. इस सबकी वजह से डीलर्स ने एक एग्रीमेंट साईंन किया जिसमे उन्हें कारपेट स्वीपर्स को अपने स्टोर में रखना था. मैंने 5,000 लेटर्स डिफरेंट स्टोर डीलर्स को भेजे थे जिसकी वजह से मुझे 1,000 नए ऑर्डर्स के रिप्लाई मिले. फिर एक और सक्सेसफुल कारपेट स्वीपर्स एड केम्पेन ने मुझे एक और चीज़ रियेलाईज कराई. और वो थी कि मुझे बुक कीपिंग छोड़कर सेलिंग करनी चाहिए क्योंकि मेरे कारपेट स्वीपर्स एड अब तक बड़े सक्सेसफुल हुए थे और जिनकी वजह से कुछ ही वीक्स में प्रोडक्ट्स की सेल बड़ गयी थी. इस सब से अब तक जो कमाई हुई थी वो कई सालो की सेल के बराबर थी. तो ये स्टोरी है मेरे एड राइटर बनने की. द स्टार्ट ऑफ़ माई सेवेनटीन इयर्स विथ एन एडवरटाईजिंग एजेंसी अगर आपका एड ब्रांड का सेल्फिश एजेंडा शो कराएगा तो ये कभी भी सक्सेसफुल नहीं होगा. अपने बिजनेस के लिए एडवांटेज मत लो बल्कि अपने कस्टमर्स के लिए लो. अगर आप ये बोलेंगे कि आपका ब्रांड उन्हें कैसे सर्व कर सकता है तो लोग ज़रूर सुनेंगे. इस तरह आपको उनका सपोर्ट और ट्रस्ट दोनों मिलेगा और वो कैसे सर्व कर सकता है तो लोग ज़रूर सुनेंगे. इस तरह आपको उनका सपोर्ट और ट्रस्ट दोनों मिलेगा और वो आपका प्रोडक्ट खरीदेंगे. मै मिशिगन छोड़कर शिकागो आ गया था. मुझे लगता था कि यहाँ मेरे लिए ज्यादा चेलेंज है. अगर बात एडवरटाईजिंग और बिजनेस की जाये तो शिकागो में ज्यादा कॉम्पटीशन था. मै और ज्यादा हार्ड वर्क करता रहा. शिकागो बिजनेस का एक बड़ा जंगल था पर मैंने भी इसमें घुसने की ठान ली थी. मै स्विफ्ट एंड कंपनी और कुछ दूसरी कंपनियों के लिए काम करने लगा. बेशक मैंने बड़ी सारी मिस्टेक्स भी की. और कई बार तो मै खुद को किसी डेड एंड पे पाता था जिससे मुझे लगता था कि ये काम मुझे छोड़ देना चाहिए. मै एक नयी शुरुवात करना चाहता था, एडवरटाईजिंग की टेंशन भरी दुनिया से दूर एक शांत लाइफ जीना चाहता था. लेकिन फिर एक और अपोरच्यूनिटी मेरा दरवाजा खटखटाने लगती और मै फिर काम में लग जाता. मिस्टर एल्बर्ट लस्कर, लार्ड एंड थोमस एडवरटाईजिंग एजेंसी के ओनर ने मुझे ऐसा ऑफर दिया जो मै मना नहीं कर पाया. उन्होंने मुझे शिकागो में अपने ऑफिस में इनवाईट किया और मुझे $400,000 का एक कॉन्ट्रैक्ट प्रजेंट किया. ये कॉन्ट्रैक्ट वेन कैंप पैकिंग कंपनी का था. मुझे एक ऐसा एड क्रियेट करना था जो मिस्टर वेन कैंप को इम्प्रेस कर सके. “मुझे तीन एड्स दो जो इस केम्पेन को स्टार्ट करेंगे और मुझे तीन एड्स दो जो इस केम्पेन को स्टार्ट करेंगे और तुम्हारी वाइफ मिशिगन एवेन्यू जाकर जो पसंद आये वो कार सेलेक्ट कर सकती है, पैसे मै दूंगा” मिस्टर लस्कर ने मुझसे कहा. उसी शाम मै इंडियानापोलिस के लिए निकल पड़ा. प्रोडक्ट था केंड पोर्क और बीन्स. इंडियानापोलिस की 94% औरते घर पे पोर्क और बीन्स खुद बनाती थी. सिर्फ 6% औरते ही केंड पोर्क और बीन्स ट्राई करने के लिए एग्री थी लेकिन फिर जितने भी ब्रांड एड्स इस प्रोडक्ट के थे, सब यही चिल्लाते थे” बाई माई प्रोडक्ट” लेकिन लोग फिर भी नहीं खरीदते थे. अपने फर्स्ट केम्पेन के लिए मैंने होम बेकिंग और फेक्टरी बेकिंग के बीच कम्पेयर किया. होम बेकिंग में 16 घंटे लगते थे फिर भी बीन्स ऊपर से तो क्रिस्पी रहते थे लेकिन नीचे से सॉफ्ट. और फैक्टरी बेकिंग में बीन्स को केयरफूली सेलेक्ट किये जाते थे फिर स्ट्रीम अवंस यूज़ करके बीन्स को 245 डिग्री पर बेक किया जाता था जिससे वेन कैंप के पोर्क एंड बीन्स कंसिसटेंसी के साथ बनकर निकलते थे. मैंने अपने प्रोडक्ट के कुछ फ्री सेम्पल बांटे ताकि पब्लिक को होम मेड और फैक्टरी मेड पोर्क एंड बीन्स का डिफ़रेंस पता चले. मेरे इस केम्पेन को ह्यूज सक्सेस मिली. बाकी ब्रांड्स ने हमारी स्ट्रेटीज कॉपी करने की कोशिश की लेकिन फिर भी उनका मैसेज रोंग था. जब आप ऐसी हेडलाइंस यूज़ करते है” बी श्योर टू गेट द जीनियस” या फिर “ माइन इज़ द ओरिजिनल” तो ये आपके ब्रांड का बड़बोलापन लगता है, ऐसा साथ बनकर निकलते थे. मैंने अपने प्रोडक्ट के कुछ फ्री सेम्पल बांटे ताकि पब्लिक को होम मेड और फैक्टरी मेड पोर्क एंड बीन्स का डिफ़रेंस पता चले. मेरे इस केम्पेन को ह्यूज सक्सेस मिली. बाकी ब्रांड्स ने हमारी स्ट्रेटीज कॉपी करने की कोशिश की लेकिन फिर भी उनका मैसेज रोंग था. जब आप ऐसी हेडलाइंस यूज़ करते है” बी श्योर टू गेट द जीनियस” या फिर ” माइन इज़ द ओरिजिनल” तो ये आपके ब्रांड का बड़बोलापन लगता है, ऐसा लगता है जैसे आप बोस्ट कर रहे है. इस टाइप की एडवरटाईजिंग से कभी कस्टमर नहीं बनते. अगर आप बोले” बाई माई ब्रांड”, “कम टू माई स्टोर, नोट द नेक्स्ट स्टोर” या” गिव द मनी व्हिच यू गिव द अदर्स” तो ये भी आपका लालच शो करता है, और लोग ऐसा बिल्कुल पसंद नहीं करते है. मैंने जो एड्स क्रियेट किये उनमे से कुछ की हेड लाइंस इस तरह थी” ट्राई आवर राइवल्स टू” ताकि लोग वेन कैंप का पोर्क एंड बीन्स बाकी ब्रांड्स से कम्पेयर कर सके. ताकि उन्हें पता चल सके कि उनकी फेमिली के लिए कौन सा ब्रांड बैटर है. मेरे केम्पेन सक्सेसफुल हुए क्योंकि ये सेल्फिश नहीं थे और ना ही बोस्टफुल. मेरे एड्स में कॉमन पीपल को सर्व करने की और उन्हें एडवांटेज देने की विश नज़र आती थी. इसीलिए उन्होंने बाकी ब्रांड्स छोड़कर सिर्फ वेन कैंप के पोर्क एंड बीन्स को चूज़ किया. साथ बनकर निकलते थे. मैंने अपने प्रोडक्ट के कुछ फ्री सेम्पल बांटे ताकि पब्लिक को होम मेड और फैक्टरी मेड पोर्क एंड बीन्स का डिफ़रेंस पता चले. मेरे इस केम्पेन को ह्यूज सक्सेस मिली. बाकी ब्रांड्स ने हमारी स्ट्रेटीज कॉपी करने की कोशिश की लेकिन फिर भी उनका मैसेज रोंग था. जब आप ऐसी हेडलाइंस यूज़ करते है” बी श्योर टू गेट द जीनियस” या फिर ” माइन इज़ द ओरिजिनल” तो ये आपके ब्रांड का बड़बोलापन लगता है, ऐसा लगता है जैसे आप बोस्ट कर रहे है. इस टाइप की एडवरटाईजिंग से कभी कस्टमर नहीं बनते. अगर आप बोले” बाई माई ब्रांड”, “कम टू माई स्टोर, नोट द नेक्स्ट स्टोर” या” गिव द मनी व्हिच यू गिव द अदर्स” तो ये भी आपका लालच शो करता है, और लोग ऐसा बिल्कुल पसंद नहीं करते है. मैंने जो एड्स क्रियेट किये उनमे से कुछ की हेड लाइंस इस तरह थी” ट्राई आवर राइवल्स टू” ताकि लोग वेन कैंप का पोर्क एंड बीन्स बाकी ब्रांड्स से कम्पेयर कर सके. ताकि उन्हें पता चल सके कि उनकी फेमिली के लिए कौन सा ब्रांड बैटर है. मेरे केम्पेन सक्सेसफुल हुए क्योंकि ये सेल्फिश नहीं थे और ना ही बोस्टफुल. मेरे एड्स में कॉमन पीपल को सर्व करने की और उन्हें एडवांटेज देने की विश नज़र आती थी. इसीलिए उन्होंने बाकी ब्रांड्स छोड़कर सिर्फ वेन कैंप के पोर्क एंड बीन्स को चूज़ किया. A . My life in advertising Claude C. Hopkins अर्ली हिस्ट्री ऑफ़ पामोलिव फूड प्रोडक्ट्स के एड्स के लिए फ्री सैंपल वाकई में मैजिक का काम करते है. लेकिन हाइजीन से रिलेटेड प्रोडक्ट्स के साथ ऐसा नहीं है. साबुन जैसे प्रोडक्ट के लिए जो कूपन्स आप देते है, उनमे कोई वैल्यू ज़रूर होनी चाहिए ताकि लोग उसे हाई रिगार्ड में ले सके. हमने अपनी एडवरटाईजिंग एजेंसी लार्ड एंड थोमस में एक एडवाईजरी बोर्ड बनाया. जिसमे मेरे अलावा बाकी 15 और टेलेंटेड लोग थे. बिजनेस कंपनीज हमारे पास अपने प्रोडक्ट की एडवरटाईजिंग के लिए आती थी. कई प्रोजेक्ट ऐसे भी थे जो हमें लगता था कि सक्सेसफुल नहीं होंगे तो हमने रिजेक्ट कर दिए थे. हम अपने एडवरटाईजर्स को बेस्ट स्ट्रेटीज़ के बारे में एजुकेट करने के लिए कमिटेड थे. हमारी इस एडवरटाईजिंग बोर्ड ने बिजनेस एडवाइस के लिए कई बुक्स भी प्रोड्यूस की थी जिनमे हमने खुद के एक्सपीरियेश के कई सारे एक्जाम्पल दिए थे. हमारे ग्रुप का मेन गोल था एडवरटाईजिग इंडस्ट्री को जेर्नल वे में इम्प्रूव करना. क्योंकि हमारे कई रिंग डिसीज़न की वजह से लोगो का ट्रस्ट टूटा था. क्योंकि मुझे यकीन था कि हमारा इस अनसेल्फिश डीड की वजह से सालो से हमने इस इंडस्ट्री को प्रोसपर और इम्प्रूव करने में हेल्प की थी. एक दिन मिल्वुकी की जॉनसन सोप कंपनी के ओनर मिस्टर बी जे जॉनसन पारस HIVII सन’। २१ २७५ सालमा II इम्प्रूव करने में हेल्प की थी. एक दिन मिल्वुकी की जॉनसन सोप कंपनी के ओनर मिस्टर बी. जे. जॉनसन हमारे पास आये. उनके साथ उनके नए सेल्स मैनेजर मिस्टर चार्ल्स पियर्स भी थे. वो चाहते थे कि हम उनकी लौंड्री सोप प्रोडक्ट” गल्वेनिक सोप” के लिए एडवरटाईज़ करे. लेकिन हमने उनका ये आईडिया रिजेक्ट कर दिया. हम उनके टॉयलेट सोप प्रोडक्ट जिसका नाम था पामोलिव, उसके लिए एडवरटाईज करने को तैयार थे. जैसा कि नाम से ही लगता है, ये सोप पाम आयल और ओलिव आयल से तैयार किया गया था. जॉनसन एंड पियर्स ने कहा कि ये एक स्माल टाइम प्रोडक्ट है जिसकी डिस्ट्रीब्यूशन भी काफी कम थी. लेकिन हमारे एडवाईजरी बोर्ड को पामोलिव में पोटेंशियल नज़र आ रही थी, हमने इसे टॉयलेट सोप से एक ब्यूटी सोप बना दिया. हम विजुयेलाइज़ कर रहे थे कि सारी औरतो को ये पंसद आएगा. क्लियोपेट्रा अपनी स्किन के लिए पाम ऑयल और ओलिव आयल दोनों यूज़ करती थी. हमने एक नए एक्सपेरिमेंट के लिए जॉनसन और पियर्स का अप्रूवल ले लिया था. ये 19]] की बात थी. हमे ये एक्सपेरिमेंट ग्रैंड रेपिड्स मिशिगन में लौंच करना था लेकिन इसके लिए $1, 000 का खर्च आ रहा था. इसलिए बोर्ड इसे $700 के बजट में बेंटन हार्बर, मिशिगन में करने के लिए एग्री हो गया. ये वो पहला टाउन था जहाँ पर पामोलिव का सबसे पहला ण्ड निकला हमने तीन एड पिंट किये दसमें पामोलिव CTED A < लापर, मारामफरत फलिए एमाला गया. पपा पहला टाउन था जहाँ पर पामोलिव का सबसे पहला एड निकला. हमने तीन एड प्रिंट किये. इसमें पामोलिव की स्टोरी थी जो अपने साथ एक ब्यूटी अपील लाया था. एड के सबसे टॉप में हमने एक टीजर लिखा था कि अगले कुछ दिनों में जो औरते पामोलिव सोप ट्राई करना चाहती है, उन्हें एड एजेंसी की तरफ से फर्स्ट सोप बार फ्री में मिलेगा. इस टीजर ने बहुत सारी औरतो को हमारा एड पढने के लिए अट्रेक्ट किया था. और जब हमे पास काफी कस्टमर मिले तो हमने एक नया एड निकाल दिया. इस टाइम इसमें एक कूपन भी था जो औरते एक 10 सेंट के पामोलिव बार के बदले में एक्सचेंज कर सकती थी. हमने ये भी लिखा कि डीलर या स्टोर ओनर कूपन हमें सिर्फ मेल कर सकते है ताकि हम उन्हें बदले में पे कर सके. ये 10 सेंट का कूपन फ्री कूपन से काफी डिफरेंट था. क्योंकि प्राइस इसमें लिखा था इसलिए पामोलिव को कोई चीप ब्रांड या चीप प्रोडक्ट नहीं समझा गया. मेरी साइकोलोजी पर इस बात का बड़ा इफेक्ट हुआ. औरतो को पामोलिव एक ऐसा ब्रांड लगा जो कॉस्टली तो था लेकिन इस पर पैसे खर्च करना वर्थ था. डिमांड बढने की वजह से स्टोर ओनर्स के पास हमेशा पामोलिव का स्टोक रहता था. हमे इसे प्रोमोट करने के लिए सेल्सपर्सन की ज़रूरत नहीं पड़ी. अपने 2 वीक्स के एक्सपेरिमेंट से हमने काफी कुछ सीखा. और सबसे बड़ी बात तो ये थी कि हमने पामोलिव के कर्ट शा.सनेट गाती तटा टिम थे औरतो ने 10 सेंट A < और सबसे बड़ी बात तो ये थी कि हमने पामोलिव के कई थाउज्नेड यूजर्स बढ़ा दिए थे. औरतो ने 10 सेंट सोप यूज़ करने के बाद अपने लिए पामोलिव खरीदे थे. सेम एक्सपेरिमेंट हमने बाकी दूसरी सिटीज़ में भी की और वहां भी हमें काफी पोजिटिव रिजल्ट्स मिले थे. हमने मैगेजींस में भी 10 सेंट के कूपन डाले थे. धीरे-धीरे पामोलिव पूरी कंट्री में डिस्ट्रीब्यूट होने लगा. मुझे याद है कि इसके लिए हमें पूरी कंट्री में डीलर्स से $100,000 के एडवांस ऑर्डर्स मिले थे. प्पड ग्रेन्स एंड क्वेकर ओट्स अपने सैंपल्स कहीं भी या किसी के भी सामने ऐसे ही ना फेंके. पहले एड चलाए फिर अपने टारगेट क्लाइंट्स को ही सैंपल दे. ताकि आप जो भी मेहनत करे वो वेस्ट ना हो बल्कि उसका कोई फायदा ही निकले. मै क्वेकर ओट्स कम्पनी के ओनर मिस्टर एच पी क्रोवेल को काफी टाइम से जानता था. एक दिन उन्होंने मुझे अपने ऑफिस में इनवाईट किया. उन्होंने मुझसे कहा कि उनके बड़े सारे प्रोडक्ट्स को एडवरटीज की ज़रूरत है. अगर उनके किसी प्रोडक्ट में मुझे कोई पोटेंशियल दिखती हो तो वो मुझे स्ट्रेटीजी के लिए $50,000 की फंडिंग कर सकते है. मै क्वेकर ओट्स गया और उनके प्रोडक्ट्स को देखा. उनमे से दो प्रोडक्ट्स मुझे काफी अपीलिंग लगे. जो थे प्पड राईस और व्हीट बैरीज. तब राईस 10सेंट का और व्हीट 7 सेंट के बिक रहे थे. और दोनों प्रोडक्ट्स की सेल बुरी तरह घटती जा रही थी. ये एक्स्पेक्ट किया जा रहा था कि दोनों प्रोडक्ट्स जार दाना प्राऽपल्स का सल बुरा तरह पाता जा रहा थी. ये एक्स्पेक्ट किया जा रहा था कि दोनों प्रोडक्ट्स शायद मार्किट से हटा दिए जाए. लेकिन मुझे इनमे ग्रेट पोटेंशियल दिख रही थी. मैंने कंपनी को एंकरेज किया कि व्हीट बैरीज का नाम चेंज करके प्फड व्हीट रखे. वो इसलिए ताकि इसका नाम प्फड राईस के साथ मैच कर सके. मैंने उनसे प्राइस चेंज करने की भी रिक्वेस्ट की. प्फड राईस 15 सेंट्स में और प्फड व्हीट 10 सेंट्स में बिकना चाहिए ताकि जो भी एडिशनल प्रॉफिट हो उसे एडवरटीज़मेंट में लगाया जाएगा. इससे कोई घाटा नहीं होगा क्योंकि ये केम्पेन प्रोडक्ट सेल को इनक्रीज करेगा. उसके बाद मै उस साईट पे गया जहाँ ग्रेन्स प्रोड्यूस होते थे. मेरे साथ प्रोफेसर ए.पी. एंडरसन भी थे जिन्होंने ये प्फड ग्रेन्स इन्वेंट किये थे. मैंने देखा कि कैसे ग्रेन्स को पफ किया जाता है. इसके लिए उन्हें एक प्रोसेस से गुजरना होता है जिसे स्टीम एक्सप्लोजन कहते है. यहाँ पर हर ग्रेन के 125,000,000 सेल्स एक्स्प्लोड किये जाते है जिससे ग्रेन का साइज़ 8 गुना तक बड़ा हो सकता था. इसलिए 8 इसमें हर आटोम कंज्यूम्पशन के लिए अवलेबल था. ग्रेन फिर प्रोसेसिंग मशीन से ब्लो आउट करता था. इसे देखकर मेरे माइंड में ये अपीलिंग फ्रेज़ आया” फूड शॉट फ्रॉम गन्स” एडवरटाईजिंग क्रिटिक्स ने मेरे आईडिया का मज़ाक उड़ाया लेकिन मार्किट में इसे बड़ा पसंद किया गया. “फूड शॉट फ्रॉम द गन्स” ने लोगो को बड़ा क्यूरियस कर दिया था. और ह्यूमन नेचर में क्यूरियोसिटी तटी गॉतर ल टोनी है तणरिगोशिटी नटाना होता कर दिया था. और ह्यूमन नेचर में क्यूरियोसिटी बड़ी पॉवर फुल होती है. क्यूरियोसिटी बढ़ाना हमेशा एडवरटाईजिंग को इफेक्टिव बना देता है. और तब मैंने प्रोफेसर ए.पी. एंडरसन को क्वेकर ओट्स की पर्सनेलिटी बना दिया. लोगो की आदत होती है कि वे अट्रेक्टिव पेसैनेलिटी से रिलेट होना चाहते है. वे उनके साथ एक कनेक्शन फील करते है बजाये किसी बड़े फेसलेस कारपोरेशन के. मैंने प्रोफेसर की स्टोरी दिखाई और सारे एड्स में शो किया कि प्फड ग्रेन कैसे बनता है. मैंने लोगो को “फूड शॉट फ्रॉम द गन्स” के पीछे का रीज़न एक्सप्लेन किया. लेकिन फिर भी प्फड ग्रेन्स की इतनी सेल नहीं हो रही थी. हमें पता लगाना था कि ऐसा क्यों हो रहा है. और हमें पता चल गया. हम न्यूज़पेपर्स में एड निकालते थे मगर जो लोग ये न्यूज़पेपर पढ़ते थे वे प्फड अफोर्ड नहीं कर पाते थे क्योंकि ये एक्सपेंसिव थे. हमे आईडिया मिला कि न्यूज़ पेपर के बजाये हमे इसका एड मैगेजींस में देना चाहिए. हमने मिलियंस के सैंपल भी बांटे. लेकिन इस स्ट्रेटीज़ से भी कोई फायदा नहीं हुआ. हमे पता लगा कि जो लोग इंटरेस्टेड नहीं है उन्हें सैंपल देना बेकार है. फि हमने ये किया कि जितने भी मैगेजिंस पोसिबल थी उन सब में इसका एड दे दिया. हमने एड में एक कूपन भी इन्क्ल्यूड किया जिसे प्फड राईस या व्हीट के एक पैक के बदले में एक्सचेंज किया जा सकता था. कोई भी जिसे हमारी स्टोरी पसंद आती बस वो कूपन मैगजींस से काट कर प्रोडक्ट ट्राई कर सकता था. इस एड फेसलेस कारपोरेशन के. मैंने प्रोफेसर की स्टोरी दिखाई और सारे एड्स में शो किया कि प्फड ग्रेन कैसे बनता है. मैंने लोगो को “फूड शॉट फ्रॉम द गन्स” के पीछे का रीज़न एक्सप्लेन किया. लेकिन फिर भी प्फड ग्रेन्स की इतनी सेल नहीं हो रही थी. हमें पता लगाना था कि ऐसा क्यों हो रहा है. और हमें पता चल गया. हम न्यूज़पेपर्स में एड निकालते थे मगर जो लोग ये न्यूज़पेपर पढ़ते थे वे प्फड अफोर्ड नहीं कर पाते थे क्योंकि ये एक्सपेंसिव थे. हमे आईडिया मिला कि न्यूज़ पेपर के बजाये हमे इसका एड मैगेजींस में देना चाहिए. हमने मिलियंस के सैंपल भी बांटे. लेकिन इस स्ट्रेटीज़ से भी कोई फायदा नहीं हुआ. हमे पता लगा कि जो लोग इंटरेस्टेड नहीं है उन्हें सैंपल देना बेकार है. फिर हमने ये किया कि जितने भी मैगेजिंस पोसिबल थी उन सब में इसका एड दे दिया. हमने एड में एक कूपन भी इन्क्ल्यूड किया जिसे प्फड राईस या व्हीट के एक पैक के बदले में एक्सचेंज किया जा सकता था. कोई भी जिसे हमारी स्टोरी पसंद आती बस वो कूपन मैगजींस से काट कर प्रोडक्ट ट्राई कर सकता था. इस एड केम्पेन से हमें प्फड ग्रेन्स के ढेर सारे कस्टमर्स मिले. ये किसी भी सीरियल का अब तक का बेस्ट केम्पेन था. इस तरह प्फड राईस और प्फड वहीट ने ना सिर्फ साइज़ में बल्कि सेल में भी इन्क्रीमेंट किया. फेसलेस कारपोरेशन के. मैंने प्रोफेसर की स्टोरी दिखाई और सारे एड्स में शो किया कि प्फड ग्रेन कैसे बनता है. मैंने लोगो को “फूड शॉट फ्रॉम द गन्स” के पीछे का रीज़न एक्सप्लेन किया. लेकिन फिर भी प्फड ग्रेन्स की इतनी सेल नहीं हो रही थी. हमें पता लगाना था कि ऐसा क्यों हो रहा है. और हमें पता चल गया. हम न्यूज़पेपर्स में एड निकालते थे मगर जो लोग ये न्यूज़पेपर पढ़ते थे वे प्फड अफोर्ड नहीं कर पाते थे क्योंकि ये एक्सपेंसिव थे. हमे आईडिया मिला कि न्यूज़ पेपर के बजाये हमे इसका एड मैगेजींस में देना चाहिए. हमने मिलियंस के सैंपल भी बांटे. लेकिन इस स्ट्रेटीज़ से भी कोई फायदा नहीं हुआ. हमे पता लगा कि जो लोग इंटरेस्टेड नहीं है उन्हें सैंपल देना बेकार है. फिर हमने ये किया कि जितने भी मैगेजिंस पोसिबल थी उन सब में इसका एड दे दिया. हमने एड में एक कूपन भी इन्क्ल्यूड किया जिसे प्फड राईस या व्हीट के एक पैक के बदले में एक्सचेंज किया जा सकता था. कोई भी जिसे हमारी स्टोरी पसंद आती बस वो कूपन मैगजींस से काट कर प्रोडक्ट ट्राई कर सकता था. इस एड केम्पेन से हमें प्फड ग्रेन्स के ढेर सारे कस्टमर्स मिले. ये किसी भी सीरियल का अब तक का बेस्ट केम्पेन था. इस तरह प्फड राईस और प्फड वहीट ने ना सिर्फ साइज़ में बल्कि सेल में भी इन्क्रीमेंट किया. My life in advertising Claude C. Hopkins पेप्सोडेंट एडवरटाईजिंग साइकोलोजी पर काफी डिपेंड करती है. अगर आप ह्युमन नेचर के अगेंस्ट कुछ करेंगे तो पक्का फेल होंगे. हर कोई लाइफ म सस्केसफुल बनना चाहता है, खुश रहना चाहता है यही ह्युमन नेचर है. और यही आपकी एडवरटाईजिंग में भी दिखना चाहिए कि आप लोगो को कैसे ख़ुशी दे सकते है. उन्हें लगना चाहिए कि आप उन्हें खुश कर सकते है और तभी वो आपका प्रोडक्ट पसंद करेगे. जिसने पेप्सोडेंट बनाया था वो मेरे अच्छे फ्रेंड है. हमने कई सारे प्रोजेक्ट्स में 22 साल साथ काम किया है. हमने इन प्रोजेक्ट्स से मिलियंस कमाए. फिर मेरा ये फ्रेंड एरिज़ोना में किसी इरीगेशन प्रोजेक्ट में इन्वोल्व हो गया था. लेकिन वहां करने को ज्यादा कुछ था नहीं. इसी बीच उसने हेल्थ वर्कर्स की हेल्प से अपना नया टूथपेस्ट फोर्म्युलेट किया. और इस तरह पेप्सोडेंट बना. अब अपने इस नए टूथपेस्ट ब्रांड की एडवरटाईजिंग के लिए वो मेरे पास आया. पहले तो मैंने एकदम मना कर दिया, अभी तक किसी ने भी कभी टूथपेस्ट का एड केम्पेन नहीं किया था. उसके अलावा पेप्सोडेंट मुझे काफी टेक्निकल लगा, मै लोगो को इसके साइंटिफिक फोर्मुले के बारे में एडवरटीज़ नहीं कर सकता था. सबसे बड़ी बात कि मेरा फ्रेंड अपने इस ब्रांड को 50सेंटस में बेचना चाहता था जबकि तथपेस्ट के फामुल क बार म एडवरटाज़ नहा कर सकता था. सबसे बड़ी बात कि मेरा फ्रेंड अपने इस ब्रांड को 50सेंट्स में बेचना चाहता था जबकि टूथपेस्ट के दुसरे ब्रांड्स नॉर्मली 25सेंट्स में बिकते थे. लेकिन वो अपनी बात पे अड़ा रहा. इसलिए मैंने उसके साथ एक डील की. मैंने उससे कहा कि मै तभी पेप्सोडेंट का एडवरटाईज करूँगा जब वो मुझे रिटर्न में स्टॉक ऑप्शन देगा. वो मान गया और हम दोनों अपने काम पे लग गए. मैंने डेंटिस्ट्री की बहुत सी बुक्स पढ़ी. मैंने साइंस फैक्ट ढूढ़ने की कोशिश की जो पेप्सोडेंट के फ़ॉर्मूला के साथ फिट बैठ सके. मुझे “म्युकिन प्लेक्यूज़” के बारे में पता चला जो हमारे टीथ्स को कवर करती है. इसकी वजह से हमारे टीथ्स ऐसे लगते है जैसे किसी फिल्म में कवर करके रखे गए हो. “क्लाउडी फिल्म” का ये आईडिया मुझे काफी अपीलिंग लगा. मैंने पेप्सोडेंट को कॉमन लोगो तक पहुंचाने के लिए एक राईट अप्रोच के बारे में सोचा. टूथपेस्ट प्लेक्यू और केविटीज़ दूर करता है लेकिन ह्यूमन नेचर का एक टुथ ये भी है कि उसे प्रिवेंशन कभी अपीलिंग नहीं लगती. अपने एडवरटाईजिंग के इतने सालो के एक्स्पिरियेंश से इतना तो मै समझ ही गया था. लोग प्रॉब्लम का सोल्यूशन तो चाहते है लेकिन प्रीवेंशन उन्हें पसंद नहीं है. अब नेस्क्ट एक और चीज़ मुझे करनी थी, वो ये कि लोगो को पेप्सोडेंट ना यूज़ करने के नेगेटिव इफेक्ट्स बताने थे. मतलब कि मुझे ये बताना था कि अगर कोई पेप्सोडेंट यूज़ नहीं करेगा तो उसके कोनसिक्वेंस क्या 1 A 14 A < पेप्सोडेंट यूज़ नहीं करेगा तो उसके कोनसिक्वेंस क्या हो सकते है. लेकिन लोगो को ये भी पसंद नहीं आता. क्योंकि ह्यूमन नेचर है कि उसे कोनसिक्वेंस और पेनल्टीज़ अच्छी नहीं लगती. मै लोगो को प्लेक्यू और केवीटीज़ में कवर्ड टीथ की इमेजेस नहीं दिखा सकता था. फाइनली मैंने ब्यूटी को अपने एडवरटाईजिंग का सेंटर बनाया. पेप्सोडेंट आपको वो परफेक्ट स्माइल देगा. ये आपके दांतों की क्लाउडी फिल्म दूर करके आपके दांतों को चमकदार बना देगा. मैंने अपने एड शो में क्लीन व्हाइट टीथ वाले गुड लुकिंग और हैप्पी लोगो को शो कराया. उन ब्यूटीफुल पिक्चर्स को हमने हर जगह पोस्ट करा दिया. अगर आप चाहते है कि आपकी एडवरटाईजिंग सक्सेसफुल हो तो लोगो को ये कभी ना कहे कि आपका ब्रांड ये प्रिवेंट करेगा या वो प्रिवेंट करेगा. उन्हें ये बताये कि अगर वो आपका प्रोडक्ट यूज़ नहीं करेंगे तो कोनसिक्वेसं क्या होगा. कॉमन लोगो को बताये कि आप उन्हें ब्यूटीफुल, हैप्पी और सक्सेसफुल बनने में हेल्प कर सकते है. और यही उन्हें लाइफ में चाहिए. अपना प्रोडक्ट इस चीज़ पर एडवरटाईज़ करो और फिर देखो ये कैसे सक्सेसफुल होता है. पेप्सोडेंट ने पहले यू. एस. की मार्किट को डोमिनेट किया और बाद में इसे इंटरनेशनली भी डिस्ट्रीब्यूट किया जाने लगा. कुल मिलाकर मैंने इस टूथपेस्ट को एडवरटीज़ करके $1,000,000 कमाए.. रीजन फॉर स्कसेस . रीजन फॉर स्कसेस एक एड राईटर बनके आप कैसे स्कसेस पा सकते है? आपको थ्री पार्टीज़ को अपने बेस्ट लेवल पर सर्व करना पड़ेगा. फर्स्ट पार्टी है पब्लिशर. सेकंड पार्टी है एडवरटाईजिंग एंजेंसी और लास्ट थर्ड पार्टी है प्रोडक्ट के एडवरटाईजर. इन तीनो को खुश रखोगे तो आपकी अपनी करियर की उंचाई तक पहुंचेंगे. आपको हर किसी को विनर बनाना है. पब्लिशर वो है जो किसी न्यूज़पेपर या मैगेजीन का ओनर होता है. हमारी एड एजेंसी उन्हें एड प्रिंट करने के पैसे देती है. जीसमें हमें 15% कमिशन मिलता है. एक एड राईटर के तौर पे हमें ऐसे एड बनाने की ज़रूरत है जो पब्लिक को प्रोडक्ट बेच सके और पब्लिशर का न्यूज़पेपर और मैगेजींस बहुत सारे लोग खरीदेंगे. हमे अपनी एड एजेंसी को भी सर्व करना है. कई सारे एकाउंट जब हमने हैंडल किये थे तो उनकी शुरुवात काफी छोटी थी. मैंने पामोलिव, प्फड व्हीट और पेप्सोडेंट को बड़े एकाउंट्स बनाने में हेल्प की. एड एजेंसी आपसे खुश रहे इसके लिए आपको राइट एड स्ट्रेटीज़ चाहिए और मिस्टेक्स हर पोसिब्ल वे में अवॉयड करे. ताकि एड कंपनी को ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट्स की एडवरटाईजमेंट मिल सके. मैंने जब लार्ड एंड थोमस के लिए काम करना स्टार्ट किया था तब मेरी सेलरी $1,000 पर वीक थी. ये एग्रीमेंट था कि एड राईटर को कमीशन के हिसाब से पैसा मिलेगा. तो जो स्कसेसफुल एड केम्पेन होते थे उनसे मुझे अच्छा कमीशन मिला. एक बार एसा भी हुआ कि मैंने $785,000 का एनुअल कमीशन कमाया. मै खुद सारा काम करता था मेरा कोई सेक्रेटरी या क्लर्क नहीं था, जो भी केम्पेन मैंने बनाए थे, मेरे और मेरे टाइपराइटर की बदौलत थे. मैंने खूब सारा हार्ड वर्क किया और बाद में मुझे एजेंसी की टोटल इनकम का 30% मिलने लगा था. मिस्टर लस्कर ने मुझ पे ट्रस्ट किया था. उन्होंने मुझे मेरे अकाउंट खुद हैंडल करने की छूट दी थी. उन्हें मुझ पर इतना ट्रस्ट था कि मुझे कंपनी प्रेजिडेंट अपोइन्ट कर दिया था. इसके बाद मै दो साल तक बोर्ड का चेयरमेन रहा. अगर मेरा मिस्टर लस्कर के साथ कभी कंफ्लिक्ट होता था तो इसी बात को लेकर कि वो हमेशा मुझे ओवर पे करना चाहते थे. और एक एड राईटर के लिए जो लास्ट इंटरेस्ट सर्व करना ज़रूरी है, वो है प्रोडक्ट्स बनाने वाले बिजनेसेस. जिन्हें एडवरटाईज़र भी कहा जाता है. पब्लिशर हमें कमीशन देते है, एजेंसी हमें काम देती है और एडवरटाईज़र हम पर ट्रस्ट करके अपने कम बिकने वाले प्रोडक्ट्स लेकर हमारे पास आते है. ऐसे भी एडवरटाईजर होते है जो एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी के पास जाते है. ऐसे लोग एक लॉन्ग टर्म और अच्छा रिलेशनशिप मेंटेन नहीं कर पाते. कई बार तो ये लोग एड राईटर से ऐसी डिमांड करते है जो पोसिबल ही नहीं होती. सबसे बेस्ट एडवरटाईजर्स वो होते है जो हम पर ट्रस्ट करके हमसे एक राइट एड केम्पेन चाहते है. वो हमारी एडवाइसेस सुनते है और ज्यादा मेनीप्यूलेट नहीं करते. वो हमें ट्रायल केम्पेन करने अच्छा रिलेशनशिप मेंटेन नहीं कर पाते. कई बार तो ये लोग एड राईटर से ऐसी डिमांड करते है जो पोसिबल ही नहीं होती. सबसे बेस्ट एडवरटाईजर्स वो होते है जो हम पर ट्रस्ट करके हमसे एक राइट एड केम्पेन चाहते है. वो हमारी एडवाइसेस सुनते है और ज्यादा मेनीप्यूलेट नहीं करते. वो हमें ट्रायल केम्पेन करने की छूट देते है जो पब्लिक के लिए ज्यादा अपीलिंग होता है. ये वैल्यूबल क्लाइंट्स हमें हमारे एक्सपेरिमेंट की फंडिंग के लिए $5,000 के ऊपर भी दे देते है क्योंकि उन्हें पता है कि अगर एड राईटर एक विनिंग एड केम्पेन क्रियेट करता है तो बिजनेसमेन को वो सारा पैसा बल्कि उससे ज्यादा ही वापस मिल जायेगा. यही चीज़ पामोलिव और बाकी दुसरे ब्रांड्स के साथ हुई जिन्हें मेरी वजह से नेशनल और इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स मिले. इन बिजनेससेस ने मेरे बनाये एड केम्पेन की वजह से मिलियंस कमाए. तो मैंने कैसे तीनो इंटरेस्ट को खुश रखा? मुझे कैसे इस लेवल तक स्कसेस मिली? क्योंकि मैंने ढेर सारी मिस्टेक्स भी की और उन्हें ठीक भी किया. मैंने अपनी मिस्टेक्स से बहुत कुछ सीखा. लेकिन मैंने उन मिस्टेक्स को रीपीट नहीं किया. एडवरटाईजिंग करियर की मेरी जर्नी मैंने कुछ अच्छे प्रिंसिपल बनाए जिनपर मै हमेशा चलता रहा. यही प्रिंसिप्लस है जो मै आज के यंग एडवरटाईजिंग लड़के और लड़कियों को भी सिखाना चाहूँगा. My life in advertising Claude C. Hopkins माई ग्रेट मिस्टेक एंड सम थिंग्स पर्सनल अगर मुझे अपनी लाइफ में कोई रिग्रेट है तो बस यही कि मैं खुद की कंपनी नहीं खोल पाया. मै खुद अपना , रास्ता बना सकता था, खुद की अपनी एड एजेंसी स्टार्ट कर सकता था लेकिन मै एक एम्प्लोयी बनकर अपनी रहा. इस बात में कोई शक नहीं कि मैंने अपने लिए एक लॉन्ग प्रोडक्टिव करियर खड़ा किया जिसमे मुझे काफी कुछ सीखने और दूसरो को सर्व करने का मौका मिला. मैंने ये सब मनी या फेम के लिए नहीं किया. हालाँकि मुझे पैसा और फेम दोनों मिला लेकिन मेरा अल्टीमेट मोटिवेशन मेरा काम था. मुझे अपने काम से बेहद प्यार था. It comes back to the days when I make money as much as I can to help mother. मै कभी रुका नहीं, खुद को हेमशा चेलेंज करता रहा कि कुछ बड़ा करना है. एडवरटाईजिंग का मेरा प्यार मुझे डेट्रॉइट से मिशिगन और फिर शिकागो लेकर आया. जब मै अपनी ये स्टोरी लिख रहा हूँ, मै अपने होम टाउन में हूँ जहाँ मैंने वर्जिन फारेस्ट का एक All Done? Finished आया. जब म अपना य स्टारा लिख रहा हू, म अपन होम टाउन में हूँ जहाँ मैंने वर्जिन फारेस्ट का एक पार्ट लिया है और यहाँ अपने ड्रीम होम के लिए एक पैराडाइज बनाया है. यहाँ मेरे पास ब्यूटीफुल फ्लावर गार्डन्स जिससे होकर एक खूबसूरत, क्लियर लेक तक रास्ता जाता है. मेरे लॉन में हमेशा मेरे रिलेटिव्स, फ्रेंड्स और मेरे ग्रांड किड्स की चहल पहल रहती है. मै हमेशा खुश और सेटिसफाईड फील करता हूँ. मै कॉमन पीपल से जुडी हर चीज़ से प्यार करता हूँ जिन्होंने मेरे एडवरटीज़मेंट्स को हेमशा सपोर्ट किया. क्नक्ल्यूजन आपने क्लौड होपकिंस की स्टोरी से काफी कुछ सीखा. आपने सीखा कि बाकी चीजों से पहले कॉमन पीपल के एडवांटेज को प्रायोरिटी दी जानी चाहिए. क्योंकि कस्टमर में से 95% लोग कॉमन पीपल है. आपकी स्कसेस या फेलर इस बात पर डिपेंड है कि आप उन्हें कैसे अपील करते है. आपने सैंपल की इम्पोर्टेस भी सीखी. पब्ल्कि पहले आपके प्रोडक्ट का सैंपल ट्राई करे ये बहुत ज़रूरी है. बेस्ट एडवरटाईजिंग टेक्नीक्स में से एक है कस्टमर को फ्री ट्रायल्स और सैंपल प्रोवाइड कराना. लेकिन ये ख्याल रहे कि सैंपल आप टारगेट क्लाइंटस को ही दे. All Done? Finished क्लाइट्स को ही दे. ताकि आपके एफर्ट्स का फायदा सेल में हो. आपको मालूम होना चाहिए कि आपके टारगेट क्लाइंट्स को क्या चीज़ टिक करेगी. उनकी डिजायर क्या है? उन्हें लाइफ में क्या चाहिए? कैसे वो आपका प्रोडक्ट खरीदेंगे? जब आप ये सब सोचकर एड बनायेगे तभी आपका प्रोडक्ट बिके पायेगा. आपने पामोलिव की स्टोरी में पॉवर ऑफ़ एंटीसिपेशन देखी. और पफ्ड राईस की स्टोरी से सीखा कि क्यूरियोसिटी का क्या इम्पेक्ट पड़ता है. आप इन्हें एक्जाम्प्ल बनाकर ये स्ट्रेटीज़ अपने एड्स में यूज़ कर सकते है. प्रोफ़ेसर एंडरसन की तरह पर्सनेलिटी क्रियेट करने से भी काफी बड़ा इफेक्ट पड़ता है. क्योंकि कॉमन पीपल के लिए बड़े कॉरपोरेशंस किसी स्टेंजर की तरह होते है इसलिए जब आप कोई ऐसी पर्सनेलिटी क्रियेट करते है जिनसे कॉमन पीपल रिलेट कर सके तो ये पक्की बात है कि फिर वो आपका ही प्रोडक्ट खरीदेंगे. फाइनली आपने ह्यूमन नेचर के बारे में भी सीखा जो बेस्ट एड्स का सीक्रेट इंगरेडीएंट है. हमेशा बेसिक ह्यूमन नेचर को फोलो करे. हमेशा राईट मैसेज दे. ये सारे स्टेप फोलो करके आप भी अपने एडवरटाईजिंग करियर में क्लौड होपकिंस की तरह ऊंचाईयों को छू सकते है. All Done? Finished

Leave a Reply