MONEY Master the Game Tony Robbins. Books In Hindi Summary

MONEY Master the Game Tony Robbins इंट्रोडक्शन (Introduction) पैसा आपके लिए क्या मायने रखता है? कुछ लोगो के लिए ये बस एक टूल है. जो उन्हें चाहिए उसे हासिल करने का जरिया पैसा है. और कुछ लोगो के लिए पैसा पॉवर है. कुछ ऐसे भी लोग है जो पैसे के लिए अपनी फेमिली, सेल्फ वर्थ या इंटेग्रीटि सब कुछ छोड़ सकते है. अब कुछ लोग बोलेंगे कि पैसा बस मोह-माया है. कंप्यूटर स्क्रीन पर लिखे कुछ नंबर्स. जबकि कुछ लोगो के लिए पैसा एक एबस्ट्रेक्ट कांसेप्ट है जो उन्हें फ्रीडम और सिक्योरिटी देता है, उन्हें जिंदा होने का एहसास दिलाता है. पैसा आपके लिए चाहे जो भी मायने रखता हो, पर एक चीज़ श्योर है कि आपको मनी को मास्टर करना होगा वर्ना मनी आपको मास्टर बन जायेगा. या तो आप पैसे को यूज़ करो या पैसा आपको यूज़ करने लगेगा. टोनी रॉबिन्स कहते है कि मनी एक गेम है क्योंकि ऐसे कई फाइनेंशियल मास्टर्स है जिन्होंने मनी को कण्ट्रोल किया है. जॉन सी, बोगल (John C. Bogle,) वारेन बुफे ( Warren Buffet) और रे डेलियो ( and Ray Dalio)ने कई बिलियन कमाए क्योंकि वो मनी मास्टर थे. उनके जैसे ही आप भी शतरंज का मोहरा बनने बजाए शतरंज के गेम के मास्टर बन सकते हो. इस बुक से आप सीखेंगे कि फीडम फानेंशियल कैसे अचीव की || Mu’N।। १ शतरंज के गेम के मास्टर बन सकते हो. इस बुक से आप सीखेंगे कि फ्रीडम फानेंशियल कैसे अचीव की जाए. यानी आपके पास इतना पैसा हो कि पूरी लाइफ काम करने की जरूरत ना पड़े. अगर आपके पास फाइनेंसशीयल फ्रीडम होगी तो आपको अपनी फेमिली के ईलाज, पढ़ाई और शादी की टेंशन नहीं करनी पड़ेगी. क्योंकि आप उनकी हर ज़रूरत को ईज़ीली पूरा कर पाएंगे. ये सब सुनने में सपने जैसा लगता है ना? लेकिन ये सच हो सकता है और ये बुक इसमें आपकी हेल्प करेगी. मेक द मोस्ट इम्पोटेंट फाइनेंशीयल डिसीजन ऑफ़ योर लाइफ ( अपनी लाइफ के मोस्ट इम्पोटेंट फाइनेंशीयल डिसीजन लो) Make The Most Important Financial Decision Of Your Life आपके पेरेंट्स शायद आपको यही बोलते होंगे कि खूब मेहनत करो ताकि अच्छी जॉब मिल सके. अगर आप हार्ड वर्क करोगे तो अपनी फेमिली को सपोर्ट कर पाओगे और आपके बैंक अकाउंट में भी खूब पैसा होगा. लेकिन सच तो ये है कि कई सालो तक रेगुलर सेलरी मिलने के बावजूद आपको फाइनेंशियल फ्रीडम नहीं मिल पाती है. सालो तक जॉब करने के बावजूद कई बार ऐसा भी होता है कि आपकी सारी सेविंग खत्म हो जाती है. पर एक स्मार्ट इन्वेस्टिंग के श्रू आपको फाइनेंशियल फ्रीडम मिल सकती है. चलो एक इम्पोर्टेट कांसेप्ट कम्पाउंडिंग के बारे में थोडा जान लेते है. ये तब होता है जब आप बिना इंटरेस्ट लिए A < फाइनाशयल फ्रीडम मिल सकता है. चलो एक इम्पोर्टेट कांसेप्ट कम्पाउंडिंग के बारे में थोडा जान लेते है. ये तब होता है जब आप बिना इंटरेस्ट लिए अपनी इन्वेस्टमेंट को ग्रो करने देते हो. इससे हर साल आपके प्रिंसिपल अमाउंट में इंटरेस्ट जमा होता रहता है. कम्पाउंडिंग से आपका पैसा बहुत जल्दी बढ़ता है. इसे एक एक्जाम्पल से समझेंगे. दो जुड़वाँ भाई थे. विलियम ने 20 साल की उम्र से ही इन्वेस्टिंग करना स्टार्ट कर दिया था. हर साल वो अपनी सेलरी से पैसे बचाकर रीटायरमेंट अकाउंट में सेव करता था. उसके अकाउंट में करीब $4,000 तक सेव हो चुके थे. 40 की एज तक उसने लगातार पैसे सेव किये. उसने अब फंड्स जमा करने छोड़ दिए थे लेकिन अब भी उसकी इन्वेस्टमेंट सालाना 10% के हिसाब से ग्रो कर रही थी. वही उसके ब्रदर जेम्स ने 40 का होने पर इन्वेस्टिंग शुरू की. उसने भी 10% के हिसाब से साल के $4,000 इन्वेस्ट किये. अब विलियम और जेम्स दोनों 65 साल के है. विलियम ने टोटल $80,000 इन्वेस्ट कर लिए है. यानी 20 से लेकर 40 की एज तक $4,000 हर साल. और जेम्स ने टोटल $100,000 इन्वेस्ट किये. यानी 40 से 65 की एज तक $4,000 हर साल. तो आपके हिसाब से कौन ज्यादा अमीर है? किसने अपनी फेमिली और अपने लिए फाईनेंशियल फ्रीडम अर्न की? विलियम ने या जेम्स ने ? अपने 65 वे बर्डडे पर जेम्स के पास टोटल $40,000 थे जबकि विलियम के पास $2.5 मिलियन, ये सही है. विलियम A < फाइनाशयल फ्रीडम मिल सकता है. चलो एक इम्पोर्टेट कांसेप्ट कम्पाउंडिंग के बारे में थोडा जान लेते है. ये तब होता है जब आप बिना इंटरेस्ट लिए अपनी इन्वेस्टमेंट को ग्रो करने देते हो. इससे हर साल आपके प्रिंसिपल अमाउंट में इंटरेस्ट जमा होता रहता है. कम्पाउंडिंग से आपका पैसा बहुत जल्दी बढ़ता है. इसे एक एक्जाम्पल से समझेंगे. दो जुड़वाँ भाई थे. विलियम ने 20 साल की उम्र से ही इन्वेस्टिंग करना स्टार्ट कर दिया था. हर साल वो अपनी सेलरी से पैसे बचाकर रीटायरमेंट अकाउंट में सेव करता था. उसके अकाउंट में करीब $4,000 तक सेव हो चुके थे. 40 की एज तक उसने लगातार पैसे सेव किये. उसने अब फंड्स जमा करने छोड़ दिए थे लेकिन अब भी उसकी इन्वेस्टमेंट सालाना 10% के हिसाब से ग्रो कर रही थी. वही उसके ब्रदर जेम्स ने 40 का होने पर इन्वेस्टिंग शुरू की. उसने भी 10% के हिसाब से साल के $4,000 इन्वेस्ट किये. अब विलियम और जेम्स दोनों 65 साल के है. विलियम ने टोटल $80,000 इन्वेस्ट कर लिए है. यानी 20 से लेकर 40 की एज तक $4,000 हर साल. और जेम्स ने टोटल $100,000 इन्वेस्ट किये. यानी 40 से 65 की एज तक $4,000 हर साल. तो आपके हिसाब से कौन ज्यादा अमीर है? किसने अपनी फेमिली और अपने लिए फाईनेंशियल फ्रीडम अर्न की? विलियम ने या जेम्स ने ? अपने 65 वे बर्डडे पर जेम्स के पास टोटल $40,000 थे जबकि विलियम के पास $2.5 मिलियन, ये सही है. विलियम MONEY Master the Game Tony Robbins नो द रूल्स बीफोर यू गेट इन द गेम गेम में एंटर करने से पहले रूल्स समझ लो Know The Rules Before You Get In The Game अब शायद आपका सवाल होगा, शुरूवात कहाँ से करे? कहाँ इन्वेस्ट करना है? क्या आपको ब्रोकर या फाइनेशियल एडवाईजर्स की जरूरत पड़ेगी? जी नहीं, टोनी रॉबिन्स कहते है आपको ये सब सोचने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है. क्योंकि ये सो-काल्ड इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट्स आपका पैसा हडपने को तैयार बैठे है. जैसे एक्जाम्पल के लिए आपको म्यूचुव्ल फंड्स में पैसा डालना है. आपको एक बड़ी ब्रोकेज़ फर्म का पता चलता है जो आपके पैसे इन्वेस्ट करने के लिए आपसे फीस लेगी. आपका पैसा कहाँ और कितना इन्वेस्ट करना है, ये सब टेंशन ब्रोकेज कंपनी की होगी. आईडिया अच्छा है? है ना. लेकिन असली बात कुछ और है. आप अपना 100% पैसा दोगे और बदले में आपको 100% रिस्क भी मिलेगा. ऊपर से आपका ब्रोकर आपके पैसे का 60% हिस्सा अपनी फ़ीस के तौर पर काट लेगा. है. उसे बस अपनी फीस से मतलब है. आपको प्रॉफिट हो या लोस उसे कोई फर्क नही पड़ता. क्योंकि आपको ब्रोकर की फीस देनी ही पड़ेगी. सुनने में अजीब लगता है ना? लेकिन 90% अमेरिकन्स को इसी शर्त पर ब्रोकर की फीस देनी ही पड़ेगी. सुनने में अजीब लगता है ना? लेकिन 90% अमेरिकन्स को इसी शर्त पर म्यूचवल फंड्स में इन्वेस्ट पड़ता है. उनके ब्रोकर्स उनकी लाइफ इन्वेस्टमेंट का 60% से भी ज्यादा पैसा हडप लेते है. पूरी दुनिया में करीब $13 ट्रिलियन पैसा म्यूचल फंड्स में इन्वेस्ट होता है. तो ज़रा सोचो कि इसमें से कितना पैसा ब्रोकर्स की जेब में जाता होगा. क्यों इतने सारे लोग इन्वेस्टमेंट के लिए ब्रोकर्स की मनमानी सहते है? तो इसका सिम्पल जवाब है: मार्केटिंग. फाईनेंशियल इंडस्ट्री ने इन सारी इन्वेस्टमेंट टर्स और कांसेप्ट को इतना मुश्किल बना रखा है कि कॉमन आदमी इन बातो को समझ नहीं पाता है और उसे मजबूरी में ब्रोकर्स की सर्विसेज़ लेनी पड़ती है. इसके अलावा फाइनेंशियल रीपोर्ट्स स्टॉक एक्सचेंज मॉनिटर के टॉप पर होती है, ये सुनने में इतना इंट्रेस्टिंग लगता है कि अपने घरो में बैठे पोटेंशियल बायर्स इसे सुनकर ज्यादा से ज्यादा पैसा इन्वेस्ट करने को रेडी हो जाते है. और एंड में प्रॉफिट सिर्फ ब्रोकर्स और ब्रोकेज फर्म वालो को होता है. क्या आपने “द वुल्फ ऑफ़ वाल स्ट्रीट” मूवी देखी है जिसमे लियोनार्डो डी कार्पियो हीरो थे? इस मूवी से शायद आपको कुछ आईडिया मिले. इस मूवी में दिखाया गया है कि लियोनार्डो और उनके ब्रोकर फ्रेंड्स इन्वेस्टर्स के पैसे पर ऐश करते है. ये लोग पार्टीज़ देते है, ड्रग्स खरीदते है और मजे करते है. तो अब सवाल ये है कि कहाँ इन्वेस्ट किया जाये? किस पर टस्ट किया ड्रग्स खरीदते है और मजे करते है. तो अब सवाल ये है कि कहाँ इन्वेस्ट किया जाये? किस पर ट्रस्ट किया जाये? तो जवाब ये है कि आप खुद एक स्मार्ट इन्वेस्टर बनो. आप ट्रेड के बारे में सीख सकते हो, इस बारे में बुक्स पढ़ सकते हो और वारेन बुफे और रे डालियो की तरह मनी मास्टर्स बन सकते हो. लेकिन इस गेम को ज्वाइन करने से पहले इसके कुछ रूल्स सीख लो. एक इम्पोर्टेट रूल है कि इंडेक्स फंड्स में इन्वेस्ट करो. एक स्टॉक इंडेक्स को बास्केट ऑफ़ स्टॉक्स भी बोलते है. एसएंडपी 500 (S&P 500) इंडेक्स फंड का एक्ज्मापल है. इसमें यू.एस की 500 लीडिंग कंपनीज़ की लिस्ट है जिसे स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स ने चूज़ किया है. इसमें माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, फेसबुक और अमेज़न जैसी कंपनीज शामिल है. इंडेक्स फंड में इन्वेस्ट करने से इन टॉप 500 कंपनीज़ में आपका भी शेयर बन जाता है. इंडेक्स फंड आपका बेस्ट आप्शन क्यों है? फर्स्ट, क्योंकि ये कंपनीज़ रातो-रात बैंकरप्ट नहीं होने वाली. सेकंड, इसमें रिस्क कम है और धीरे-धीरे रिटर्न्स मिलते है. थर्ड, आपको स्टॉक्स में इन्वेस्ट करने के लिए किसी ब्रोकर की सर्विस नहीं लेनी पड़ेगी क्योंकि एसएंडपी पहले से ही आपके लिए बेस्ट चूज़ कर लेता है. व्हाट इज द प्राइस ऑफ़ योर ड्रीम्स ( आपके सपनों की कीमत क्या है ) फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए आपको कितना पैसा चाहिए? अपने सारे सपने पूरे करने के लिए आपको कितना पैसा चाहिए? शायद $7 मिलियन $10 फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए आपको कितना पैसा चाहिए? अपने सारे सपने पूरे करने के लिए आपको कितना पैसा चाहिए? शायद $7 मिलियन $10 मिलियन या फिर $100 मिलियन? इस चैप्टर में आप पढ़ेंगे कि अपने सपनों की लाइफ जीने के लिए बहुत सारा पैसा नही चाहिए. क्योंकि आप फाईनेंशियल फ्रीडम अचीव कर सकते हो. टोनी रॉबिन्स ने अपने एक सेमिनार में लोगो से पुछा कि उन्हें एक खुशहाल और सुकून भरी लाइफ जीने के लिए कितने पैसे चाहिए. तो वहां एक 20 साल के लड़के ने हाथ उठाकर कहा” 1 बिलियन डॉलर. उसका जवाब सुनकर लोग हैरान रह गए क्योंकि ये ] बिलियन डॉलर काफी बड़ा अमाउंट होता है. लेकिन टोनी रॉबिन्स ने उस लड़के को ये रिएलाइज कराया कि अपने ड्रीम्स पूरे करने के लिए जितना वो सोच रहा है, उतने पैसे नहीं लगेंगे. “अगर तुम्हे 1 बिलियन डॉलर मिल जाए तो तुम क्या करोगे? टोनी ने उससे पुछा. उस लडके ने कहा कि वो एक ब्रांड न्यू प्राइवेट जेट लेगा, न्यू यॉर्क में घर लेगा और बिजनेस मीटिंग के लिए लोस एजेंलेस और वेकेशन के लिए बहामास जायेगा. उस लड़के ने ये भी बोला कि वो सालभर में 12 फ्लाइट्स तो लेगा ही लेगा. टोनी रॉबिन्स ने उस लडके के साथ मिलकर थोड़ी रीसर्च की. एक ब्रांड न्यू प्राइवेट जेट का प्राइस $65 मिलियन पड़ेगा और सेकंड हैण्ड जेट का प्राइस $10 मिलियन. ये तो सिर्फ जेट का प्राइस था, इसके अलावा मेंटेनेस यल और क का खर्चा अलग था लेकिन मिलियन. ये तो सिर्फ जेट का प्राइस था, इसके अलावा मेंटेनेस, फ्यूल और क्रू का खर्चा अलग था. लेकिन अगर वो लड़का प्राइवेट जेट खरीदने के बजाये रेंट पे लेता है तो उसे सिर्फ $2,500 खर्च करने पड़ेंगे. उसकी फेमिली में चार मेंबर्स थे तो एक मीडियम साइज़ का जेट उनके लिए काफी रहेगा. और अगर वो 100 घंटे हर साल भी जेट से फ्लाई करता है तो उसे $250,000 रेंट देना होगा. और अगर उसे प्रीमियम जेट गल्फस्ट्रीम पंसद हो तो उसका खर्च $500,000 होगा. ये अभी भी एक नया गल्फस्ट्रीम जी 560 के मुकाबले काफी सस्ता था. फिर टोनी ने उससे पुछा” तुम अपने 1 बिलियन डॉलर के साथ और क्या करोगे? “एक प्राइवेट आईलैंड लूँगा” लड़के ने कहा, टोनी के पास फिजी आईलैड में खुद का अपना 500 एकर का रीजोर्ट है. लेकिन अपने बिजी शेड्यूल के चलते वो वहां पर हर तीन साल में सिर्फ सिक्स वीक के लिए ही जा पाते है. टोनी ने कहा” अगर तुम प्राइवेट अपने आईलैंड को फुली एन्जॉय करना चाहते हो तो होटल बिजनेस में एंटर मत करो. क्योंकि फिर तुम्हे अपने प्राइवेट बीच में रिलेक्स करने का टाइम नही मिल पायेंगा. फिर दोनों ने कुछ और रीसर्च किया तो पता चला कि बहामास में एक आईलैंड $100,000 में अवेलबल है. और उसे एक रीजोर्ट बनाने के लिए $40 मिलियन खर्च करने पड़ेंगे. लेकिन इसके बदले अगर वो लड़का नेक्कर आईलैंड रीजोर्ट रेंट पे ले ले तो ज्यादा सस्ता पड़ता जैसे रिचर्ड ब्रेनसन ने लिया है. इसमें एक वीक के लिए स्टे करने का खर्चा सिर्फ $350,000 पड़ेगा. एंटर मत करो. क्योंकि फिर तुम्हे अपने प्राइवेट बीच में रिलेक्स करने का टाइम नही मिल पायेंगा. फिर दोनों ने कुछ और रीसर्च किया तो पता चला कि बहामास में एक आईलैंड $100,000 में अवेलबल है. और उसे एक रीजोर्ट बनाने के लिए $40 मिलियन खर्च करने पड़ेंगे. लेकिन इसके बदले अगर वो लड़का नेक्कर आईलैंड रीजोर्ट रेंट पे ले ले तो ज्यादा सस्ता पड़ता जैसे रिचर्ड ब्रेनसन ने लिया है. इसमें एक वीक के लिए स्टे करने का खर्चा सिर्फ $350,000 पड़ेगा. और वो अपनी पूरी फेमिली और फ्रेंड्स के साथ यहाँ एन्जॉय कर सकता है. और उनकी सर्विस के लिए 50 लोगो का स्टाफ हर वक्त अवलेबल रहेगा. अगर वो हर साल एक हफ्ते के लिए नेक्कर आईलैंड रेंट पे लेता है तो उसे सिर्फ $3.5 मिलियन स्पेंड करने होंगे. तो इसे अगर हम एड करे तो उस लडके को अपनी ड्रीम लाइफ जीने के लिए $10 मिलियन से ज्यादा नही चाहिए जिसमे वो अपनी फेमिली और फ्रेंड्स के साथ एक प्राइवेट जेट से अपने प्राइवेट आईलैंड में जाकर होलीडे एन्जॉय कर सकता है. तो ये प्रूव हो गया कि उस लड़के को अपनी फाईनेंशियल फ्रीडम अचीव करने के लिए 1 बिलियन डॉलर का सिर्फ 7% लगेगा. और वो अगर वो एक स्मार्ट इन्वेस्टर बन जाए तो डेफिनेटली इस फ्रीडम को अचीव कर सकता MONEY Master the Game Tony Robbins एसेट अलोकेशन (Asset Allocation) तो आपको $10 मिलियन मिलेंगे कैसे? इन्वेस्टिंग का स्मार्ट तरीका क्या है? तो इसका जवाब है एसेट अलोकेशन. इसके पीछे जो स्मार्ट आईडिया है, वो है” अपने सारे अंडे एक बास्केट में मत रखो” आप कम्पाउंडिंग के लिए अपनी इनकम का कुछ पार्ट सेव कर सकते हो. और इस तरह गेम में आपकी एंट्री हो जायेगा. अब आपको इस गेम में लॉन्ग टर्म के लिए रहना है. अगर सोच-समझ कर इन्वेस्ट नहीं किया तो सारे पैसे डूब सकते है. एसेट अलोकेशन आपके पोर्टफोलियो में वैराएटी लाती है. इसका सीधा मतलब है अपने सारे अंडे डिफरेंट बास्केट्स में डालना. आप अपने पैसे डिवाइड करके डिफरेंट टाइप के इन्वेस्टमेंट्स में लगा दो जैसे बांड्स खरीद लो और स्टॉक्स, रियेल एस्टेट और कमोडिटीज़ में पैसा लगा लो. एसेट अलोकेशन का फायदा ये है कि इसमें रिस्क कम होता है, ये लो कॉस्ट होते है और रिटर्न्स भी अच्छा देते है. अब कुछ लोग बोलेंगे कि उन्हें बांड्स में ज्यादा ट्रस्ट है या फिर उन्हें स्टॉक्स की ज्यादा नॉलेज है इसलिए वो या तो स्टॉक्स में इन्वेस्ट करना पसंद करते है या बांड्स में. लेकिन एक बात याद रखो, इन्वेस्टमेंट चाहे किसी भी टाइप का हो, उतार-चढाव सबमे आता है. सबसे ज्यादा बिकने वाले स्टॉक्स भी कभी डाउन हो जाते है इसलिए लेकिन एक बात याद रखो, इन्वेस्टमेंट चाहे किसी भी टाइप का हो, उतार-चढाव सबमे आता है. सबसे ज्यादा बिकने वाले स्टॉक्स भी कभी डाउन हो जाते है. इसलिए एस्सेट एलोकेशन करने से अगर एक जगह लोस हो भी गया तो दूसरी जगह प्रॉफिट जरूर होगा. बजाये इसके कि आप एक साथ सारा पैसा हार जाओ. यहाँ हम कुछ स्टोरीज़ शेयर कर रहे है जिनसे आप कुछ सीख सकते हो. टोनी रॉबिन्स के एक फ्रेंड ने अपना सारा पैसा एप्पल के स्टॉक्स में लगा दिया था. अब क्या इसमें उसकी गलती है? क्योंकि एप्पल अमेरिका का ही नहीं बल्कि वर्ल्ड का सबसे सक्सेसफुल स्टॉक है. लेकिन इसके बावजूद वही हुआ जिसका डर था. टोनी में फ्रेंड को तब बहुत बड़ा शॉक लगा जब इन्वेस्ट करने के कुछ ही वीक बाद एप्पल के स्टॉक एकदम से गिर गए थे. क्योंकि उसने सारा पैसा एक ही स्टॉक में लगाया था इसलिए वो कुछ भी नहीं कर पाया. टोनी की एक फ्रेंड टेलीविज़न एक्जीक्यूटिव थी. उसने डिसाइड किया कि वो अपना हाई पेइंग जॉब छोडकर, लोस एंजेलेस का अपना महंगा फ्लैट बेच कर सारे पैसे से व्यूमिंग में एक रेस्ट्रोरेन्ट खोलेगी. उसने अपना बाकि पैसा जंक बांड्स और हाई रिस्क स्टॉक्स में लगा दिया, उसे लगा कि अब वो लॉन्ग टाइम के लिए फाइनेशियली सिक्योर है. और ऐसा ही हुआ भी लेकिन फिर 2008 में इकोनॉमिक क्राइसिस आया तो उसके सारे पैसे डूब गए. उसे फिर से सब कुछ स्टार्ट करना पड़ा, यहाँ तक नि.कोरिडॉन सीनाटी अनो उसे फिर से सब कुछ स्टार्ट करना पड़ा, यहाँ तक कि उसे फ्रीलांसर की जॉब भी करनी पड़ी. अब तो आप समझ गये होंगे कि एसेट अलोकेशन कितना इम्पोर्टेट है. ये मनी रुल का एक गेम है. अगर एक ही जगह इन्वेस्ट करोगे तो आप गए. लेकिन अगर आपने डिफरेंट टाइप के स्टॉक्स या बांड्स लिए है तो आपके पैसे सिक्योर है. यहाँ हम दो इन्वेस्टमेंट बकेट के एक्जाम्पल देंगे जो आप फोलो कर सकते हो. पहला है सिक्योरिटी/पीस ऑफ़ माइंड बकेट. ये एक डाइवर्स पोर्टफोलियो है जहाँ आपके पैसे पूरे सेफ है हालाँकि इसमें ग्रोथ काफी स्लो है. दूसरा है रिस्क/ग्रोथ बकेट. इसमें रिस्क ज्यादा है लेकिन फ़ास्ट ग्रोथ है. सिक्योरिटी/पीस ऑफ़ माइंड में जो एसेट्स आते है वो है. : पहला है कैश या कैश इक्वेलेंट्स (First is Cash or Cash Equivalents. ये आपका सेविंग अकाउंट है. आप इसे ईजिली विदड्रा कर सकते हो और जब चाहे तब खर्च कर सकते हो. चाहे इसमें इंटरेस्ट रेट काफी कम है लेकिन आप किसी भी इमरजेंसी में अपना पैसा निकाल सकते हो. जैसे कि 2008 में जो इकोनॉमिक क्राइसिस आया था, तो सारे बैंक बंद हो गए थे. लोगो को ना तो पैसा उधार मिल रहा था और ना ही कोई अपने स्टॉक्स लिक्वीडेट कर पा रहा था. जिन्होंने रियेल एस्टेट में इन्वेस्ट किया था वो भी सेल नहीं कर पा रहे थे. इसलिए बैंक अकाउंट में कैश होना बहुत जरूरी है. : पोटामोल Hon इसलिए बैंक अकाउंट में कैश होना बहुत जरूरी है. सेकंड है बांड्स. इसे फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट भी बोलते है. जब आप को बांड्स लेते हो तो आपको कंपनी या गवर्नमेंट के साथ एक एग्रीमेंट करना पड़ता है कि वो आपका पैसा बोरो कर सकते है जिसे वो एक स्पेशिफिक डेट तक फिक्स्ड इंटरेस्ट के साथ वापस कर देंगे. तीसरा है सीडी या सर्टिफिकेट ऑफ़ डिपॉजिट्स. इस टाइप के एसेट में आप बैंक को पैसे उधार देते हो. बैंक आपका पैसा यूज़ करता है और एक टाइम के बाद फिक्स्ड इंटरेस्ट के साथ लौटा देता है. हालाँकि ये एक टाइम डिपोजिट है जब तक सीडी डेट ना फिक्स करे, आप अपना पैसा नही निकाल सकते. चौथा है लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी. इंश्योरेंस तो हम सबको लेना चाहिए, खासकर जब आपकी फेमिली हो. अगर कल को आपको कुछ हुआ तो कम से कम आपकी फेमिली तो सिक्योर रहेगी. तो देखा आपने कैसे ये इन्वेस्टमेंट बकेट आपको सिक्योरिटी और पीस ऑफ़ माइंड देती है ? आपका पैसा धीरे-धीरे ग्रो करता है लेकिन सेफ रहेगा. लेकिन अगर आप इस टाइप के इन्वेस्टर हो जिसे रिस्क लेना पसंद है, जो एक्साईटमेंट चाहते है तो आप रिस्क/ ग्रोथ बकेट चूज़ कर सकते हो. इस बकेट में हायर रिटर्न्स के साथ हायर रिस्क भी है. आप जीत भी सकते हो और हार भी सकते हो. रिस्क/ ग्रोथ बकेट में जो एसेट्स आते है वो ये है : पहला है, ईटीऍफ़’स या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स. ईटीऍफ़ स्टॉक्स का ग्रुप है जैसे इंडेक्स या म्यूचुअल फंड्स लेकिन फर्क इतना है कि एक ईटीऍफ़ में आप स्टॉक्स ग्रोथ बकेट में जो एसेट्स आते है वो ये है : पहला है, ईटीऍफ़’स या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स. ईटीऍफ़ स्टॉक्स का ग्रुप है जैसे इंडेक्स या म्यूचुअल फंड्स लेकिन फर्क इतना है कि एक ईटीऍफ़ में आप स्टॉक्स अलग से ट्रेड कर सकते हो. जब भी आपको लगे कि सही लगे, आप स्टॉक्स खरीद या बेच सकते हो. हालंकि ये ध्यान रखने वाली बात है कि इसे हम ट्रेडिंग कहेंगे नाकि इन्वेस्टिंग. जितनी बार आप स्टॉक लेते या बेचते हो, आपको एक फीस देनी पड़ेगी. दूसरा है हाई यील्ड बांड्स जिन्हें हम जंक बांड्स भी बोलते है क्योंकि इनमे सबसे कम सेफ्टी रेटिंग होती है. ये बांड्स हाई यील्ड यानी हाई प्रॉफिट देते है पर बहुत रिस्की भी है. तीसरा है आरईआईटी (REIT) या रियेल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स. ये वो कंपनीज़ होती है जो इनकम जेनरेटिंग रियल एस्टेट की ओनर होती है. ये इंडीविजुएल्स इन्वेस्टर्स के फंड्स शेयर बेचती है. आरईआईटी को आप स्टॉक्स की तरह बेच सकते हो. आप इसमें डीवाईडेड्स (dividends ) भी कमा सकते हो और वो भी बिना खुद प्रोपर्टीज़ मैनेज किये. चौथा है, कमोडिटीज. इसमें गोल्ड, सिल्वर और ऑइल आता है. अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड होना अच्छा है क्योंकि ये आपको इन्फ्लेशन में प्रोटेक्ट करता है और ये आपके पोर्टफोलियो को ज्यादा बेलेंस और डाईवर्स भी बनाता है. MONEY Master the Game Tony Robbins द आल सीजंस स्ट्रेटेजी (The All Seasons Strategy) इससे पहले के चैप्टर्स में आपने सीखा कि अपने पोर्टफोलियो को कैसे डाईवर्स रखा जाए. यानी अपने सारे पैसे एक जगह इन्वेस्ट मत करो. एक टाइप की इन्वेस्टमेंट रिस्की है. अगर ज्यादा सेफ्टी चाहिए तो माइंड बकेट के सिक्योरिटी या पीस ऑफ़ माइंड प्लान फोलो कर सकते हो. लेकिन अगर आप रिस्क लेना पसंद करते हो तो रिस्क या ग्रोथ बकेट में इन्वेस्ट करो. इस चैप्टर में आप एक और अमेजिंग पोर्टफोलियो के बारे में सीखोगे जो आप एडाप्ट कर सकते हो. ये अब तक मोस्ट ब्रिलिएंट पोर्टफोलियो माना जा सकता है जिसे हम आल सीजंस स्ट्रेटेजी बोलते है. इस कांसेप्ट को रे डालियो ने इन्वेंट किया है जो दुनिया के सबसे बड़े हेज फण्ड ब्रिजवाटर एसोशिएट्स के फाउंडर है. 1971 में रे का करियर स्टार्ट हुआ जब वो न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में एक क्लर्क थे. उस टाइम अमेरिका की इकोनॉमी काफी बुरे दौर से गुजर रही थी. 1970 में बेरोजगारी और महंगाई काफी ज्यादा थी. फिर 1973 में एक आयल स्टॉक आया जिससे ऑइल का प्राइस $2.10 से बढकर $70.40 पर बैरल पहुँच गया था. इसके सोल्यूशन में गर्वनमेंट ने एक ओड-इवन स्कीम निकाली जिसमे लोग महीने के ओड या इवन डेज में ही गैस खरीद सकते थे. हालत ये पर बैरल पहुँच गया था. इसके सोल्यूशन में गर्वनमेंट ने एक ओड-इवन स्कीम निकाली जिसमे लोग महीने के ओड या इवन डेज़ में ही गैस खरीद सकते थे. हालत ये थी कि गैस खरीदने के लिए लोग गैस स्टेशन के बाहर घंटो लाइन में खड़े रहते थे. वियतनाम वार और वाटरगेट स्कैंडल के बाद अमेरिका में काफी पोलिटिकल उथल-पुथल हुई जिसके चलते प्रेजिडेंट निक्सन को 1974 में रीजाइन करना पड़ा. और इन सब चीजों का जर्बदस्त असर स्टॉक मार्किट पर भी पड़ा था. स्टॉक के रेट तेज़ी से अप-डाउन होते रहते थे. डिफरेंट टाइप के स्टॉक्स में हाई इंस्टेबिलिटी और रेपिड चेंज आ रहा था. ऐसी सिचुएशन में रे डालियो के माइंड में बस एक ही बात आती थी कि आखिर स्टॉक मार्किट प्राइस और स्टेट इकोनॉमी के बीच क्या रिलेशन है. उन्होंने इकोनॉमिक मशीन और इन्वेस्टर्स के मूड के बीच का लिंक पता करने लिए काफी सारी स्टडीज़ करने के बाद आल सीज़न स्ट्रेटेजी का फार्मूला डेवलप किया. ये एसेट लोकेशन दोनों ही सिचुएशन में अच्छा परफोर्म करती है चाहे इकोनॉमिक क्राईसेस हो या प्रॉफिट हो. लेकिन हमे ये कैसे पता चलेगा कि एक वाकई में इफेक्टिव है? 1974 से 2013 तक एक्सपर्ट्स इसे फोलो करते आ रहे है. यानी पूरे 40 सालो से इसकी इफेक्टिवनेस काम कर रही है. तो अगर आपने 1974 से 2013 तक आल सीज़न स्ट्रेटेजी के साथ इन्वेस्टमेंट की होगी तो आपको ये रिजल्ट मिलेंगे: फर्स्ट, इसमें एक्स्टाओर्डीनेरी रिटर्न्स स्ट्रा सापत्न८पाहा II II जापपा रिजल्ट मिलेंगे: फर्स्ट, इसमें एक्स्ट्राओर्डीनेरी रिटर्न्स मिलते है. आपका पैसा 1974 से 2013 तक 10 % की एनुअल रेट से बढा होगा. सेकंड, इसमें एक्स्ट्राओर्डीनेरी सेफ्टी भी है इन 40 सालो में आपको शायद सिर्फ 4 बार लोस हुआ होगा. जी, हाँ सही सुना आपने. सिर्फ चार बार. इसमें एवरेज लोस सिर्फ 1.74% है. इसका मतलब है कि 85% बार आपका इन्वेस्टमेंट ग्रो हुआ है. थर्ड, इसमें एक्स्ट्राओर्डीनेरी लो इनस्टेबिलिटी भी है. ज्यादा से ज्यादा आपको सिर्फ 3.93% का लोस हुआ है. और वो भी 2008 के इकोनॉमिक क्राईसिस के टाइम. जब फाईनेंशियल वर्ल्ड एकदम डाउन चला गया था, उस वक्त आपने सिर्फ 3.93% का इन्वेस्टमेंट लोस किया और ये कितनी अमेजिंग बात है, है ना? तो, ये आल सीज़न स्ट्रेटेज़ी आखिर है क्या और इसे कैसे करते है? आपने शायद लोगो को कहते सुना होगा कि अपनी इन्वेस्टमेंट को 50% बांड्स में और 50% स्टॉक्स में लगाओ. इससे पैसे डूबने का रिस्क काफी कम रहता है. लेकिन क्या ये फुलप्रूफ प्लान है? रे डैलियो (Ray Dalio) ऐसा नहीं मानते. सच तो ये है कि स्टॉक्स बांड्स से तीन गुना ज्यादा रिस्की होते है. अगर आप अपने पैसे को 50-50 डिवाइड करते हो तो स्टॉक्स का रिस्क बढ़ जायेगा और इसका इफेक्ट ऐसा ही होगा जैसे आपने स्टॉक्स में 95% इन्वेस्ट किया हो. ये सिर्फ एक फाईनेशियल मिथ है, इसलिए इसे अवॉयड करो यहाँ टम को माल सीजन मेटेती तताते है जैसे आपने स्टॉक्स में 95% इन्वेस्ट किया हो. ये सिर्फ एक फाईनेशियल मिथ है, इसलिए इसे अवॉयड करो. यहाँ हम आपको आल सीज़न स्ट्रेटेजी बताते है जो काफी सिंपल है लेकिन पूरी तरह से टेस्टेड और प्रूव हो चूका है. सबसे पहले तो जितना पैसा आपके पास है उसका 30% किसी स्टॉक्स में लगा दो जैसे कि एसएंडपी इंडेक्स फंड (S&P 500 index fund). हालाँकि इतना परसेंट कम है पर याद रहे, स्टॉक्स बांड्स से तीन गुना ज्यादा रिस्की है. दूसरी बात, 15% पैसा इंटरमिडीएट बांड्स में लगाओ और 40% लॉन्ग टर्म बांड्स में. इंटरमिडीएट बांड्स 7-10 साल में मैच्योर हो जाते है जबकि लॉन्ग टर्म बांड्स 20 से 25 साल में होते है. अब आप पूछोगे बांड्स में ज्यादा पैसा क्यों लगाए? वो इसलिए बांड्स स्टॉक्स के रिस्क को बेलेंस करते है. रे डालियो (Ray Dalio) का मानना है कि लॉन्ग टर्म बांड्स में इन्वेस्ट किये गए 45% के रिटर्न्स चांसेस काफी हाई है. तीसरी बात, 7.5 गोल्ड में और बाकि के 7.5 कमोडिटीज में इन्वेस्ट करो. गोल्ड और बाकि कमोडिटीज के रेट रेपिड इन्फ्लेशन (महंगाई) के साथ तेज़ी से बढ़ते है. बेशक तब बांड्स या स्टॉक्स के रेट डाउन भी हो जाए तो भी आप सेफ रहोगे. रे डालियो के इस आल सीजंस स्ट्रेटेजी का फाइनल रीमाइंडर है’ रीबेलेंस”. यानी अगर एक टाइप की इन्वेस्टमेंट दुसरे से बैटर प्रॉफिट देती है तो इसमें से थोडा सेल कर दो और फिर से ओरिजिनल अलोकेशन अचीव कर लो. कायदे की बात ये है कि हर साल आपको अपना पोर्टफोलियो MONEY Master the Game Tony Robbins कनक्ल्यूजन (Conclusion) तो आप फाइनेंशियल फ्रीडम अचीव करने के लिए क्या करोगे? एक ऐसी लाइफ एन्जॉय करने के लिए आप क्या करोगे जहाँ कोई फाइनेंशियल टेंशन ना हो? इसके लिए आपको इन्वेस्टिंग करनी पड़ेगी. अगर आप अपनी सेलरी में से थोड़े-थोड़े पैसे बैंक में सेव करते हो तो अब टाइम आ गया है उस पैसे को इन्वेस्ट करने का. इस बुक में आपने कंपान्डिंग के बारे में पढ़ा है तो अब जितनी जल्दी स्टार्ट कर सकते हो करो, आपको हर साल एक सर्टेन अमाउंट सेव करनी होगी जो आपको इंटरेस्ट देता रहेगा. इस बुक से आपने सीखा कि फाईनेंशियल मिथ्स क्या होते है. तो कोई भी फाईनेंशियल डिसीजन लेते वक्त आपको किसी ब्रोकर की जरूरत नहीं है बल्कि आपको खुद सीखना है. जैसे कि एक इंडेक्स फण्ड एक डाइवर्स पोर्टफोलियो है जिसमे रिस्क कम है और रिटर्न्स भी अच्छे मिलते है. आपने ये भी सीखा कि एक बिलेनियर की तरह रहने के लिए एक बिलेनियर पैदा होने की जरूरत नहीं है. अगर चाहो तो आप भी अपना चार्टर जेट या प्राइवेट आईलैंड ले सकते हो. आपकी ड्रीम लाइफ आपकी पहुँच के ले सकते हो. आपकी ड्रीम लाइफ आपकी पहुँच के अंदर है. आपने इस बुक से एसेट अलोकेशन भी सीखा. एक कहावत है” नेवर पुट योर एग्स इन वन बास्केट”. और ये एकदम सही बात है. इसलिए डिफरेंट टाइप के एसेट्स में इन्वेस्ट करो. या तो स्लो लेकिन सिक्योर इन्वेस्टमेंट करो जो पीस ऑफ़ माइंड दे या फिर एडवेंचर और रिस्क से भरा इन्वेस्टमेंट जो बहुत जल्दी ग्रोथ करता है. इस बुक में आपने आल सीजन स्ट्रेटेज़ी के बारे में भी पढ़ा. ये एक स्मार्ट पोर्टफोलियो है जो स्टॉक मार्किट के अप-डाउन से आपके पैसे को पूरी तरह से प्रोटेक्ट करता है. रीकैप के लिए, इसमें 30% स्टॉक्स, 15% इंटरमीडिएट बांड्स, 45%लॉन्ग टर्म बांड्स, 7.5% गोल्ड और 7.5% कमोडीटीज़ है. मगर इसे इफेक्टिव बनाये रखने के लिए हर साल इसे रीबेलन्स करना जरूरी है. तो क्या अब भी इन्वेस्टिंग रिस्की लगती है? शायद अब नहीं. ये बुक आपको इस गेम के बेसिक रूल्स सिखाती है. और इससे आपने कुछ मास्टर टेक्नीक्स भी सीख ली होंगी. तो अब बेशक आप बिना डरे इन्वेस्टिंग कर सकते हो. ये बुक फाईनेंशियल मैटर्स में आपके हर सवाल का जवाब है. इसलिए कभी कोई डाउट लगे तो बेशक ये बुक एक बार फिर पढना क्योंकि ये आपको

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