MANAGE YOUR DAY-TO-DAY-Build Your … Jocelyn K. Glei Books In Hindi Summary Pdf

MANAGE YOUR
DAY-TO-DAY-Build Your …
Jocelyn K. Glei
इंट्रोडक्शन
थॉमस एडिसन ने कहा था “being a genius
only takes 1% inspiration and
99%perspiration”यानि एक जीनियस बनने के
लिए सिर्फ 1% प्रेरणा और 99% मेहनत चाहिए.
इस दुनिया में ऊंची सोच रखने वाले कई लोग होते
हैं. हो सकता हैं आपकी सोचया आपके आइडिया
भी उनकी ही तरह हो. लेकिन कुछ ही आइडिया ऐसे
होते हैं जिनमें दुनिया को बदलने की ताकत होती हैं.
ऐसा क्यों? क्योंकि ज़्यादातर आइडिया को ढंग से
एक्ज़िक्युट नहीं किया जाता है.
ऐसा क्या हैं जो आपके आईडिया को दुनिया बदलने की
ताकत दे सकता हैं ? ऐसा क्या हैं जो आपको कामयाब
बना सकता हैं? आइए कुछ फेमस क्रिएटिव लोगों और
लीडर्स सेइसके बारे में सीखते हैं. यह समरी उन लोगों
के एडवाइस और आइडियाके बारे में हैं, जिन लोगों को
आप पसंद करते हैं. आइए जानते हैं कि इस दुनिया में
हम क्रिएटिव कैसे बन सकते हैं.
एक असरदार रूटीन की तैयारी
बॉउंड्री यानि सीमा के बारे में बात करते हैं. एक
फिज़िकल बॉउंड्री का एग्जाम्पल हैं आपके पड़ोसी
के लॉन और आपके लॉन बीच का अंतर अगर आप

फिज़िकल बॉउंड्री का एग्जाम्पल हैं आपके पड़ोसी
के लॉन और आपके लॉन बीच का अंतर. अगर आप
सक्सेसफुल होना चाहते हैं, तो आपको भी एक बॉउंड्री
खींचनी पड़ेगी. कहाँ? यह बॉउंड्री आपके और दुनिया
की डिमांड के बीच होनी चाहिए.
अब, आपको यह मज़ाक लग सकता है. आपके कंधों
पर ज़िम्मेदारियाँ हैं और आपको कई सारे रोल निभाने
पड़ते हैं. आपका जॉब एक ऐसा काम हैं जिस पर
आपको लगातार फोकस रखना पड़ता हैं. लेकिन बड़े
कामों में वक्त लगता हैं. उस नॉवल के बारे में सोचिए
जो आपको बहुत पसंद हैं. उन आर्ट के बारे में सोचिए
जो बहुत फेमस हैं और म्यूजियम्स में रखे जाते हैं. उन
कंपनियों के बारे में सोचिए जिन्होंने हिस्ट्री में अपना
नाम बनाया हैं. इन सब चीजों में वक्त लगा हैं. जिन
लोगों ने बड़े-बड़े मास्टरपीस को बनाया, उन्होंने वक्त
लगाकर इन पर काम किया.
अपने काम के बारे में सोचकर आप अपने दिन की
शुरुआत करते हैं. आपको मीटिंग की तैयारी करनी
पड़ती हैं, लोगों को कॉल करना पड़ता हैं. एक तरह
तो आपको दूसरे लोगों की जरूरतों की
तरफ ध्यान देना पड़ता हैं और, जब तक आप यह
काम खत्म करते हैं, तब तक आपके पास कोई एनर्जी
नहीं बचती. आपके पास उन चीजों पर काम करने के
लिए एनर्जी और वक्त नहीं बचता जिन पर आपको खुद
के लिए काम करना होता हैं. इसलिए आप कभी भी
कुछ कामयाबी से नहीं कर पाते.
तो ऐसे में आपको क्या करना चाहिए? आपको अपने
से देखा जाए,

पुछि पानपापा 1 0 पार पास.
तो ऐसे में आपको क्या करना चाहिए? आपको अपने
लिए एक हेल्दी आदत बनाने की जरूरत है. आपको
क्रिएटिव और रिएक्टिव दोनों ही तरह के काम के लिए
वक्त तय करना चाहिए. क्रिएटिव काम पहले आना
चाहिए. इसका मतलब हैं कि आपको अपने लिए वक्त
निकालना होगा. एग्जाम्पल के लिए, आप हर सुबह
अपने नॉवल पर काम करने का वक्त निकाल सकते
हैं. अपना फोन और अपने ईमेल को बंद कर दीजिए.
दोपहर के वक्त आप अपना रिएक्टिव काम कर सकते
रिएक्टिव काम वह होते हैं जो आपकी जॉब और दूसरी
जिम्मेदारियों से जुड़े हैं. अपने शेड्यूल में कोई भी चेंज
करना मुश्किल हो सकता हैं, ऑथर इस बात को मानते
हैं. हमेशा कोई न कोई उनके कॉल का इंतज़ार करता
रहता हैं या फिर कोई उनका इंतज़ार कर रहा होता हैं.
लेकिन ऑथर ने बाकी सब कामों को छोड़कर,खुद को
सबसे पहले अहमियत देने की कोशिश की. अगर आप
दूसरे लोगों के प्रेशर के आगे झुकते रहेंगे तो आप दुखी
होंगे. इसमेंबदलाव लाने के लिए आपको खुद को सबसे
पहले रखना होगा,अहमियत देना होगा.
बेशक , कुछ वक्त के लिए दूसरे लोगों को इग्नोर करने
की आदत डालना सिर्फ एक शुरुवात हैं. लेकिन अगर
आपको एक अच्छी डेली रूटीन चाहिए, तो आपको
कई चीजें करने की जरूरत हैं. अब बात करते हैं कुछ
ऐसे कामों की,जिनसे आप अपने क्रिएटिव काम करने
के लिए बेहतरीन सिचुएशन तैयार कर पाएंगे.
सबसे पहले अपने एनर्जी लेवल के रिटम से शरू

एसमाना पाता | HII.4 पनपा
के लिए बेहतरीन सिचुएशन तैयार कर पाएंगे.
सबसे पहले, अपने एनर्जी लेवल के रिदम से शुरू
कीजिए. दिन के कुछ ऐसे वक्त होते हैं जब आप मेन्टल
तौर पर सबसे ज़्यादा एक्टिव होते हैं. यह वह वक्त
होता हैं जब आपके पास सबसे ज़्यादा एनर्जी होती हैं.
इस वक्त को पहचानने की कोशिश कीजिए. क्या यह
सुबहका वक्त हैं या दोपहर का? अपने क्रिएटिव कामों
को करने के लिए इस वक्त का इस्तेमाल कीजिए
दूसरा, क्रिएटिव ट्रिगर को यूज़ कीजिए. जब भी आप
क्रिएटिव काम करें, तब आप एक ही तरह के टूल्स,
माहौल और म्यूजिक को यूज़ करें. मशहूर राइटर
स्टीफन किंग सालों से ऐसा ही करते आ रहे हैं. वह
बैठ जाते हैं और उनके पास हमेशा एक कप चाय का
रखा होता हैं. उनके लिखने का सबसे अच्छा वक्त सुबह
8:00 से 8:30 के बीच का होता हैं. स्टीफन किंग
हमेशा एक ही म्यूजिक बजाते हैं, और वह हमेशा एक
ही कुर्सी पर बैठते हैं.
तीसरा, अपनी टू-डू लिस्ट यानि काम के लिस्ट को
मैनेज कीजिए. एक दिन में आपको जो काम करना
है, उसे लिमिट में रखिए. सिर्फ वही काम कीजिए जो
स्टिकी-नोटके छोटे से कागज़ में फिट हो सकते हैं.
अगर आप किसी काम को एक नोट में फिट नहीं कर
सकते, तो आप उन्हें एक दिन में कैसे पूरा कर सकते
हैं? आपके पास लिमिटेड टाइम और एनर्जी रिसोर्स हैं
इसलिए इसे समझदारी से यूज़ कीजिए.
चौथा, हर कमिटमेंट को नोट कीजिए. अपने आप से या
दसरे लोगों से किए गए हर कमिटमेंट को रिकॉर्ड करने

8:00 से 8:30 के बीच का होता हैं. स्टीफन किंग
हमेशा एक ही म्यूजिक बजाते हैं, और वह हमेशा एक
ही कुर्सी पर बैठते हैं.
तीसरा, अपनी टू-डू लिस्ट यानि काम के लिस्ट को
मैनेज कीजिए. एक दिन में आपको जो काम करना
है, उसे लिमिट में रखिए. सिर्फ वही काम कीजिए जो
स्टिकी-नोटके छोटे से कागज़ में फिट हो सकते हैं.
अगर आप किसी काम को एक नोट में फिट नहीं कर
सकते, तो आप उन्हें एक दिन में कैसे पूरा कर सकते
हैं? आपके पास लिमिटेड टाइम और एनर्जी रिसोर्स हैं
इसलिए इसे समझदारी से यूज़ कीजिए.
चौथा, हर कमिटमेंट को नोट कीजिए. अपने आप से या
दूसरे लोगों से किए गए हर कमिटमेंट को रिकॉर्ड करने
की आदत डालिए. इस तरह, आपको पता चलेगा कि
आप दूसरों पर और खुद पर कितना वक्त लगाते हैं. यह
आपके लाइफ को ऑर्गनाइज़ भी करेगा.
पांचवां, अपने दिन में मज़बूत पलों की पहचान
कीजिए. अपना काम शुरू करने और खत्म करने के
लिए एक वक्त सेट कीजिए. साथ ही, दिन के कुछ वक्त
अलग-अलग चीजों को करने के लिए रखिए. एग्जाम्पल
के लिए, आप सुबह 8:00 बजे से 10:00 बजे तक
क्रिएटिव काम कर सकते है और, सुबह 10:00 बजे से
दोपहर 2:00 बजे तक आप मीटिंग अटेंड कर सकते
हैं.

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Jocelyn K. Glei
अपने क्रिएटिव प्रैक्टिस को चमकाना
आपने नोटिस किया होगा कि आप जिन सक्सेसफुल
और क्रिएटिव लोगों को जानते हैं, वे लोग अपने रूटीन
पर बहुत ज़्यादा ज़ोर देते हैं. एक अच्छी डेली रूटीन
आपको चीजों को पूरा करने में हेल्प करेगी. लेकिन
रूटीन कीखासियत यह हैं कि आपको इसे हर दिन
करना होगा. अब, यह मुश्किल पार्ट हैं और सबसे
ज़रूरी भी है.
आपको इसे रोज़ प्रैक्टिस करना होगा और इसे आदत
बनाना होगा.अगर आप किसी खास तरीके से क्रिएटिव
काम को करना पसंद करते हैं, तो कीजिए. अगर आप
सिर्फ एक खास ब्रैड के पेंट या पेन पसंद करते हैं, तो
उन्हें ही यूज़ कीजिए. लेकिन यह आपकी नंबर वन
प्रायोरिटी नहीं होनी चाहिए. आपकी पहली प्रायोरिटी
यह हैं कि आपको अपना काम पूरा करना हैं, चाहे कुछ
भी हो जाए.
जब आपका अपने क्राफ्ट पर काम करने का मन नहीं
होता, तो उस दौरान ही आपको उस पर काम करना
चाहिए. ये पल ज़रूरी है क्योंकि अगर आप इसे सिर्फ
तभी करते हैं जब आपका मन करता हैं, तो आप इसे
कभीपूरा नहीं कर पाएंगे.
इसे हर दिन करने के अलावा, क्रिएटिव होने में सेल्स
.
11-2ATIALA

इसे हर दिन करने के अलावा, क्रिएटिव होने में सेल्स
भी शामिल हैं. कुछ सेल करने की यानि बेचने की
काबिलियत तभी आती हैं जब आप कुछ ऐसा करते
हैं जिनके लिए आप पैशनेट हैं, जिनके लिए आपमें
जुनून भरा है और, आप शायद आप यह सुनकर डर
जाते होंगे क्योंकि कुछ बेचने का मतलब हैं लोगों की ना
सुनना, उनके इंकार को झेलना. लेकिन अगर आपके
लिए क्रिएटिव होना इम्पोर्टेन्ट हैं, तो आपको अपने
क्रिएटिव मास्टरपीस आर्ट को बेचना सीखना होगा.
बहुत सारे लोग होते हैं जिनमें टैलेंट होता हैं. उनकी
बनाई हुई बहुत सी चीजें पॉपुलर होती हैं. लेकिन
उन्हें लोगों का ध्यान खींचने का मौका नहीं मिलपाता
क्योंकि वे लोग अपने मास्टरपीस को बेचना नहीं चाहते.
क्रिएटिव काम से जुड़े इस पार्ट को वे करना नहीं चाहते.
अगर आप प्रैक्टिस और सेल करते भी रहेंगे, तब भी
आप हमेशा सक्सेसफुल नहीं होंगे. लेकिन, आपको
कभी नहीं रुकना चाहिए. आप मायूस हो सकते हैं.
मान लीजिए, आपकी पहली शॉर्ट फिल्म सक्सेसफुल
रही और बहुत सारे फिल्म क्रिटीक्स ने आपके काम की
तारीफ़ की. इसके लिए आपको काफी पैसे भी मिले.
यह सपोर्ट पाकर आप एक और फिल्म बनाने की
कोशिश करते हैं. आप इस फिल्म को थोड़ा लंबा और
महंगा बनाने का प्लान बनाते हैं. लेकिन, आप ऐसा नहीं
कर सकते क्योंकि जब भी आप कहानी के बारे में वक्त
लगाकर सोचते हैं, आपको मेन्टल ब्लॉक का सामना
करना पड़ता हैं.
इसे self-sabotaaeकहते हैं यानि खट को

यह सपोर्ट पाकर आप एक और फिल्म बनाने की
कोशिश करते हैं. आप इस फिल्म को थोड़ा लंबा और
महंगा बनाने का प्लान बनाते हैं. लेकिन, आप ऐसा नहीं
कर सकते क्योंकि जब भी आप कहानी के बारे में वक्त
लगाकर सोचते हैं, आपको मेन्टल ब्लॉक का सामना
करना पड़ता हैं.
इसे self-sabotageकहते हैं यानि
खुद
को
नुकसान पहुँचाना. इसमें आप अपने ही सक्सेस का
मौका खत्म कर देते हैं. ऐसा इसलिए हैं क्योंकि आपको
डर हैं कि आपको एकधोखेबाज़ समझा जाएगा.
फिल्म बनाने का मतलब होगा यह जाताना कि आप
अपने काम को लेकर प्राउड फील करते हैं. आपको
लगता हैं कि सब कुछ कितना अच्छा हैं. लेकिन ऐसा
करना मुश्किल है क्योंकि लोग आपको क्रिटिसाइज़ कर
सकते हैं. सबसे ज़रूरी बात, यह दुनिया के लिए एक
अनाउंसमेंट हैं कि आप जानते हैं कि आप क्या कर रहे
हैं.
आपको इससे डर लगता हैं क्योंकि अब आपसे उम्मीद
की जाएगी कि आपको फिल्मों और पूरी इंडस्ट्री के
बारे में सब कुछ जानने की जरूरत हैं.
इससे आप पर बहुत प्रेशर पड़ सकता हैं. इस तरह
यह सेल्फ-सबोटाज हैं. इसमें आप खुद को नहीं बल्कि
दूसरों को दोष देने लगते हैं.इससे कम से कम आपको
बेहतर महसूस होगा बजाय इसके कि आप यह सोचे
कि आप एक बेहतर फिल्म बना सकते थे.

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अब,
हमारे हुनर की लिस्ट में से मल्टीटास्किंग को हटाना
क्रिएटिव माइंड होने के बहुत सारे फायदे हैं. आप किसी
भी बोरिंग चीज़ से कुछ इंटरेस्टिंग बना सकते हैं. आप
कुछ अलग सोचने के लिए रेडी हैं. हालांकि, क्रिएटिव
सोच वाले लोगों का दिमाग आसानी से भटक जाता
हैं. इसलिए उनके लिए चीजों को पूरा करना बहुत
मुश्किल हैं.
आज सोसाइटी मल्टीटास्किंग को बढ़ा चढ़ाकर बताता
है. हर कोई एक ही वक्त में कई सारे काम करता हैं.
ऑटोमेटिक आदतों के लिए मल्टीटास्किंग ठीक
हैं. एग्जाम्पल के लिए, चलते-चलते आप पक्का करते
हैं कि आप किसी भी चीज़ से ठोकर न खा लें. लेकिन,
जब उन ज़रूरी काम की बात आती हैं, जिन पर ध्यान
देने की ज़रूरत हैं, तो वो मल्टीटास्किंग नहीं होती.
एग्जाम्पल के लिए, मूवी देखते हुए अपना असाइनमेंट
करना.
असल में आप मल्टीटास्किंग नहीं कर रहे होते हैं. तब
आप बस अपने काम के बीच में स्विच कर रहे होते
हैं. इसका मतलब हैं अपने काम के बीच आगे-पीछे
करना. आप एक काम करते हैं, फिर दूसरा, फिर फर्स्ट
काम पर वापस जाते हैं. आपको लगता हैं कि आप
प्रोडक्टिव हो रहे हैं, काम कर रहे हैं. पर, असल में,
TRATION

प्रोडक्टिव हो रहे हैं, काम कर रहे हैं. पर, असल में,
आप सिर्फ कम स्किल से और कम एक्यूरेसी के साथ
काम कर रहे हैं.
जब आप एक से ज़्यादा कामों के बीच स्विच करते हैं,
तो आपके आउटपुट की क्वालिटी खराब हो जाती है.
साथ ही, अगर आप दो या दो से ज़्यादा काम को एक
साथ करने की कोशिश करते हैं, तो आपके काम को
खत्म होने में ज़्यादा वक्त लगता हैं. इसलिए, एक वक्त
में सिर्फ एक ही काम को खत्म करने की ज़िम्मेदारी
लीजिए और, याद रखिए कि सिर्फ मल्टीटास्किंग ही
आपको प्रोडक्टिव होने से नहीं रोक रही हैं.
बैकग्राउंड में कुछ ऐसी बातें चलती हैं जो आपका
ध्यान भटकाते हैं. जैसे कि आपके सोशल मीडिया
app से एक नोटिफिकेशन अलर्ट आना. आप सोचते
हैं कि आप सिर्फ उस एक वीडियो को देखेंगे जो आपके
किसी फ्रेंड ने आपको भेजा हैं. लेकिन फिर आप एक
और वीडियो देखते हैं. फिर एक और. जब तक आपको
इस बात का एहसास होता हैं, तब तक आपका ध्यान
भटक चुका होता हैं और तब तक आप दिन के तीन घंटे
बर्बाद कर चुके होते हैं.
यह बात तो क्लियर हैं कि इस तरह से ध्यान भटकने से
यह आपको कम प्रोडक्टिव बना सकते हैं. लेकिन इन
ऐप्स पर ध्यान देने से एक और बात होती हैं. आपको
अपने “फ्लो” में वापस जाने के लिए, अपने काम को
फिर से जारी रखने के लिए काफी वक्त लगता हैं.
असल में, इस तरह से आपको प्रोडक्टिव होने में पहले
से भी ज़्यादा वक्त लगता हैं.

app से एक नोटिफिकेशन अलर्ट आना. आप सोचते
हैं कि आप सिर्फ उस एक वीडियो को देखेंगे जो आपके
किसी फ्रेंड ने आपको भेजा हैं. लेकिन फिर आप एक
और वीडियो देखते हैं. फिर एक और. जब तक आपको
इस बात का एहसास होता हैं, तब तक आपका ध्यान
भटक चुका होता हैं और तब तक आप दिन के तीन घंटे
बर्बाद कर चुके होते हैं.
यह बात तो क्लियर हैं कि इस तरह से ध्यान भटकने से
यह आपको कम प्रोडक्टिव बना सकते हैं. लेकिन इन
ऐप्स पर ध्यान देने से एक और बात होती हैं. आपको
अपने “फ्लो” में वापस जाने के लिए, अपने काम को
फिर से जारी रखने के लिए काफी वक्त लगता हैं.
असल में, इस तरह से आपको प्रोडक्टिव होने में पहले
से भी ज़्यादा वक्त लगता हैं.
यहां तक कि सोशल मीडिया के लिए खुद को रोकने
में भी आपका टाइम बर्बाद हो सकता हैं. अपना ध्यान
भटकने न देने में भी ज़्यादा मेन्टल कोशिश की ज़रूरत
पड़ती हैं. तो, इस सिचुएशन से निकलने के लिए सबसे
अच्छा होगा उस वजह को ही हटाना जिनसे आपका
ध्यान भटकता हो. अपना वाई-फाई बंद कर दीजिए या
ऐसी जगह जाइए जहां कोई सिग्नल न हो. यह शायद
ज़्यादा लगे, लेकिन बहुत सारे क्रिएटिव लोग ऐसा करते
हैं. वर्चुअल दुनिया से अलग होने से उन्हें वह सबकुछ
करने में मदद मिलती हैं जो वे करना चाहते हैं.

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उथल पुथल के बीच किसी भी चीज़ को बनाना
सीखना
क्रिएटिव बनना बहुत मुश्किल हैं. सिर्फ बड़े क्रिएटिव
लोगों को ही अपने क्राफ्ट पर ध्यान देने का मौका
मिलता हैं. उनके पास शानदार जिंदगी जीने के लिए
रॉयल्टी और स्पोंसर्स होते हैं. बाकी के दूसरे क्रिएटिव
लोग इतने लकी नहीं होते.कई म्यूजिशियंस के साइड
जॉब होते हैं. कुछ पोएट और ऑथर दिन में प्रोफेसर
होते हैं. फिल्म प्रोड्यूसर्स बीच में एक्स्ट्रा जॉब करते हैं.
यह दुनिया मुश्किलों से भरी है. आपको अपने सभी
कामों को बैलेंस करना होगा. जब आप कुछ क्रिएट
करने की, बनाने की कोशिश करते हैं तो आपको अपना
फोकस हटने नहीं देना चाहिए. इस तरह आपको यह
सीखने की जरूरत हैं कि इस उथल पुथल भरी दुनिया
के बीच रहकर भी आप कैसे चीज़ों को बना सकते हैं.
आपने नेगेटिव डिस्ट्रैक्शन के बारे में जाना जो आपका
ध्यान भटकाते हैं. जैसे कि लाउड म्यूज़िक या टीवी की
आवाज़ जो कभी भी बजना बंद नहीं करते. आपके
फ़ोन पर बहुत सारे नोटिफिकेशन आते रहते हैं. आपके
साथ काम करने वाले आपको गपशप में उलझाते रहते
हैं. आपके अंदर भी नेगेटिव डिस्ट्रैक्शन हैं. जैसे ही आप
कुछ क्रिएटिव बनाने की कोशिश करते हैं, तो आपको
ܟܫܗܟ ܟܫܤܗܒ ܪܡܡܡܟܡܒܫ
का

सापपान पारस पाजापपा परापज्ञात रह
हैं. आपके अंदर भी नेगेटिव डिस्ट्रैक्शन हैं. जैसे ही आप
कुछ क्रिएटिव बनाने की कोशिश करते हैं, तो आपको
स्ट्रेस होने लगता हैं. आपको अपनी काबिलियत पर
शक होने लगता हैं.
लेकिन कुछ पॉजिटिव डिस्ट्रैक्शन भी होते हैं. ऐसे
डिस्ट्रैक्शन आपको इस उथल पुथल वाली दुनिया में
कुछ बनाने में हेल्प करते हैं. यह आपको नेगेटिव
डिस्ट्रैक्शन से निपटने में भी हेल्प कर सकते हैं.
एक फेमस स्टैनफोर्ड एक्सपेरिमेंट हैं जो पॉजिटिव
डिस्ट्रैक्शन के असर को सपोर्ट करता हैं.
इस एक्सपेरिमेंट में बच्चों को मार्शमैलो खाने के लिए
दो ऑप्शन दिए गए. वे इसे फ़ौरन खा सकते थे, या
वे कुछ मिनट तक वेट कर सकते थे. अगर वे कुछ
मिनट वेट करते हैं, तो उन्हें एक के बजाय दो मार्शमैलो
मिलेंगे.
जिन बच्चों ने इंतज़ार किया, उन्होंने अपने ध्यान को
भटकाने के लिए पॉजिटिव डिस्ट्रैक्शन अपनाया. उन्होंने
कुछ गाने गाए या मेज पर पैर मारे. उन्होंने खुद का
ध्यान भटकाया ताकि उन्हें दो मार्शमैलो मिल सकें.
अपने लिए पॉजिटिव डिस्ट्रैक्शन को आप टाइमर सेट
करके भी यूज़ कर सकते हैं और, टाइमर खत्म होने से
पहले किसी काम को पूरा करने की कोशिश कर सकते
हैं. अगर आप इसे कामयाबी से करते हैं, तो आप खुद
को इनाम भी दे सकते हैं. एग्जाम्पल के लिए,अपनी
आंखों को आराम देने के लिए पांच मिनट दे सकते हैं
या आप अपने अच्छे काम के बाद केक का एक पीस
रवा सकते हैं

आखा का आरामदन कालए पाच मनटद सकत ह
या आप अपने अच्छे काम के बाद केक का एक पीस
खा सकते हैं.
साइकोलॉजिस्ट रॉय बॉमिस्टर के हिसाब से यह सब
सेल्फ कंट्रोल हैं. इसी की वजह से कुछ लोग अपना
फोकस रख सकते हैं और कुछ नहीं.
सेल्फ-कंट्रोल एक स्किल हैं, हुनर हैं और सभी स्किल
की तरह ही आप जितना इसकी प्रैक्टिस करेंगे, उतना
ही यह बेहतर होता जाता हैं. अपने सेल्फ कंट्रोल को
स्ट्रांग बनाने के लिए, छोटे-छोटे बेबी स्टेप्स से इसकी
शुरुवात कीजिए. अपनी एक आसान लेकिन अलग सी
आदत को डेवलॅप कीजिए. एग्जाम्पल के लिए, आप
“yeah ” के बजाय ” yes” कहने की आदत बनाइए
या फिर आधा घंटा जल्दी सोने की आदत डालिए.
ये छोटी और अलग आदतें वक्त के साथ धीरे-धीरे
आपकी विल पावर बनाएगी. अब जब आपको किसी
काम को करने के लिए ज़्यादा विल पावर की ज़रूरत
पड़ेगी, तो अब इसे करना आसान हो जाएगा. यह तब
भी हेल्प करता हैं जब आपको दिमाग लगाने के माइंड
गेम्स में कंसंट्रेशन की ज़रूरत पड़ती हैं. यह आपको
ज़्यादा क्लियरली सोचने में हेल्प करेगा. लंबे प्लॉट वाले
ऑडियोबुक भी आपका ध्यान बढ़ाने में हेल्प कर सकते
हैं.
इसके अलावा, अगर आप हेल्दी आदत रखते हैं, तब
भी यह आपको हेल्प करेगा. जैसे कि पूरी नींद लेना
और आराम करना, इनसे आपका ध्यान, फोकस बढ़
सकता हैं.

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कंप्यूटर के सामने ध्यान से बैठना
आपकी लाइफ पर टेक्नोलॉजीने कब्ज़ा कर लिया हैं.
यह बात कड़वी हैं पर सच हैं. जैसे ही आप सुबह उठते
हैं, आप फ़ोन की तरफ मुड़ते हैं. जब आप बस या ट्रेन
का वेट करते हैं तो आपकी आँखें फ़ोन के स्क्रीन पर
लगी होती हैं. जब आपके पास कुछ करने को नहीं हो
तो, आप लगातार अपना फ़ोन स्क्रॉल करते रहते हैं.
आजकल हर कोई किसी न किसी स्क्रीन से चिपका
रहता है, फिर चाहे वह टीवी हो, कंप्यूटर हो या फोन.
हो सकता हैं कि आपको इस बात की चिंता न हो.
आपको लगता हैं कि वैसे भी हर कोई यही कर रहा हैं.
लेकिन स्क्रीन पर टाइम बिताने पर एक रिसर्च की गई हैं
जो आपको अपने फोन पर बहुत ज़्यादा टाइम बिताने
से मना करते हैं.
इस रिसर्च का रिजल्ट हैं कि एवरेज शख्स एक दिन में
छह घंटे टीवी देखता हैं. जो लोग टीवी देखते हैं उनकी
उम्र टीवी न देखने वालों की तुलना में कम होती हैं.
दरअसल, जो लोग टीवी नहीं देखते हैं वे 4.8 साल
ज्यादा जीते हैं. इसके पीछेकी वजह हैं कम हिलने
डुलने वाली ज़िंदगी.
कम हिलने डलने की वजह से हमारी बॉडी को

DAR
कम हिलने डुलने की वजह से हमारी बॉडी को
नुकसान पहुँचता हैं. किसी भी तरह की मूवमेंट न होना
एक खराब लाइफ स्टाइल हैं.
इसके अलावा स्क्रीन एपनिया नाम की एक कंडीशन
भी होती हैं जो एक शख्स को अपने फोन या कंप्यूटर
पर ज़्यादा वक्त बिताने से होने वाले क्रोनिक स्ट्रेस
से होता हैं. स्क्रीन एपनिया छोटी छोटी सांस लेना हैं
क्योंकि आप घंटों स्क्रीन पर घूरते रहते हैं.
खराब बॉडी के पोस्चर से स्क्रीन एपनिया और भी
बिगड़ जाता हैं. जब आपका पोस्चर बिगड़ता है, तो
आपकी सांसें भी छोटी होती हैं. तो, ऐसा होने से क्या
होता हैं ? नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉ डेविड
एंडरसन और डॉ मार्गरेट चेसनी के पास इसका जवाब
हैं. ऐसे में हमारी बॉडी ज़्यादा एसिडिक बन जाती
है. बॉडी में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और
नाइट्रिक ऑक्साइड का बैलेंस बिगड़ जाता है.
इसके अलावा, छोटी सांस लेने से आपके दिल की
धड़कन तेज हो जाती हैं और आपकी बॉडी भागने के
लिए तैयार हो जाती हैं. कोई खतरा होने पर आपकी
बॉडी ऐसे रियेक्ट करती हैं. लेकिन जब बॉडी यह
भागने की सारी तैयारी को यूज़ नहीं करती, तो हम
ज़्यादा कंज़्यूम करने लगते हैं.
एक शख्स क्या कंज़्यूम करेगा? स्क्रीन टाइम. आप
अपने फोन या लैपटॉप को लगातार use करते रहेंगे.
नए मैसेज और नोटिफिकेशन देखने के लिए आप
लगातार स्क्रीन पर स्क्रॉल करते रहेंगे.

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सिर्फ खुद के लिए बनाना
ब्रिलिएंट से ब्रिलिएंट क्रिएटिव काम करने वाले अक्सर
बात करते हैं Unnecessary Creation की.
जूलिया कैमरून ने ‘द आर्टिस्ट्स वे’ नाम की अपने
बुक में भी इसके बारे में बात की हैं. Unnecessary
में
Creation तब होता हैं जब आप अपनी क्रिएटिविटी
को बाहर निकालने के लिए अपने सुबह का एक हिस्सा
डेडिकेट करते हैं. जूलिया के लिए, Unnecessary
Creation हैं दिमाग में आने वाली हर चीज को
तीन पेज में लिखना. वह जो भी लिखती हैं उसमें कोई
मतलब नहीं होता और उन सब के बीच आपस में कोई
कनेक्शनहो, यह भी ज़रूरी नहीं हैं.
Unnecessary Creation हैं आपके क्रिएटिविटी
को बिना रोक टोक काम करने देना. इससे कोई फर्क
नहीं पड़ता कि आप क्या लिख रहे हैं, पेंटिंग कर रहे
हैं या मूर्ति बना रहे हैं या इन सब से आपको पैसा
मिल रहा हैं या नहीं. कई क्रिएटिव लोगों के लिए,
Unnecessary Creation बहुत ही ज़रूरी होता
हैं यह आपके वक्त की बर्बाटी नहीं हैं असल में दसके
All Done?
Finished

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सिर्फ खुद के लिए बनाना
ब्रिलिएंट से ब्रिलिएंट क्रिएटिव काम करने वाले अक्सर
बात करते हैं Unnecessary Creation की.
जूलिया कैमरून ने ‘द आर्टिस्ट्स वे’ नाम की अपने
बुक में भी इसके बारे में बात की हैं. Unnecessary
में
Creation तब होता हैं जब आप अपनी क्रिएटिविटी
को बाहर निकालने के लिए अपने सुबह का एक हिस्सा
डेडिकेट करते हैं. जूलिया के लिए, Unnecessary
Creation हैं दिमाग में आने वाली हर चीज को
तीन पेज में लिखना. वह जो भी लिखती हैं उसमें कोई
मतलब नहीं होता और उन सब के बीच आपस में कोई
कनेक्शनहो, यह भी ज़रूरी नहीं हैं.
Unnecessary Creation हैं आपके क्रिएटिविटी
को बिना रोक टोक काम करने देना. इससे कोई फर्क
नहीं पड़ता कि आप क्या लिख रहे हैं, पेंटिंग कर रहे
हैं या मूर्ति बना रहे हैं या इन सब से आपको पैसा
मिल रहा हैं या नहीं. कई क्रिएटिव लोगों के लिए,
Unnecessary Creation बहुत ही ज़रूरी होता
हैं यह आपके वक्त की बर्बाटी नहीं हैं असल में दसके
All Done?
Finished

Unnecessary Creation बहुत ही ज़रूरी होता
हैं. यह आपके वक्त की बर्बादी नहीं हैं. असल में, इसके
तीन फायदे हैं.
सबसे पहले, तो यह आपको नई पॉसिबिलिटीज़ का
पता लगाने की आज़ादी देता हैं. कई क्रिएटिव लोग
जो जॉब करते हैं, उन्हें मायूसी होती हैं. हां, वे वही कर
रहे हैं जो वे करना चाहते हैं. लेकिन अक्सर, उनकी
क्रिएटिविटी उनके बॉस या कस्टमर्स की वजह से
लिमिटेड रह जाती हैं. वे किसी भी प्रोजेक्ट में खुद की
डिजाइन डालने के लिए तरसते हैं, लेकिन उन्हें ठुकरा
दिया जाता हैं.
Adobe ने पिछले 2021 में एक सर्वे किया जिससे
यह पता चला कि अमेरिका और जापान जैसी जगहों
में 75% काम करने वालों ने महसूस किया है कि वे
अपनी बेस्ट क्रिएटिव काबिलियत के हिसाब से काम
नहीं कर पा रहे हैं. इनके जैसे मत बनिए. ऐसे प्रोजेक्ट
अपने हाथ में लीजिए जो आपके क्रिएटिविटी को
लिमिट में न रखे. यह वक्त की बर्बादी की तरह लग
सकता हैं. लेकिन बाद में, आपको लगेगा कि आपने
ऐसा कर ठीक किया हैं क्योंकि यह आपको बिना किसी
चिंता के क्रिएटिव काम करने देता हैं.
GHRT, Unnecessary Creation 311967 Rich
लेने और नए स्किल को बढ़ावा देने का मौका देता
All Done?
Finished

दूसरा, Unnecessary Creation आपको रिस्क
लेने और नए स्किल को बढ़ावा देने का मौका देता
हैं. क्रिएटिव काम के लिए इंस्पिरेशन ढूंढ़ना मुश्किल
हो सकता हैं. अगर आपके पास ऐसी जॉब है जिसमें
क्रिएटिविटी की ज़रूरत हैं, तब भी आप धीरे-धीरे सुस्त
हो जाते हैं क्योंकि आप एक ही मेथड और टेक्निक
को बार-बार यूज़ करते हैं. ऐसा इसलिएहोता हैं क्योंकि
आपसे एक जैसे रिजल्ट की उम्मीद रखी जाती हैं.
जब आप अपने Unnecessary Creation में हों
तो एक्सपेरिमेंट करने की हिम्मत रखिए. इससे आपकी
क्रिएटिविटी और भी बढ़ जाएगी. आप खुद को फ्री
होकर एक्सप्रेस कर पाएंगे.
तीसरा, Unnecessary Creation आपको
याद दिलाता हैं कि आप जो भी बनाते हैं वह आपकी
पहचान नहीं हैं. आपके आउटपुट को पहचान नहीं
मिलती, इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक बुरे
आर्टिस्ट हैं. सोसाइटी आर्टिस्ट पर हमेशा कुछ न कुछ
नया क्रिएट करने का प्रेशर डालती हैं. लेकिन एक
मास्टरपीस बनाने में वक्त लगता हैं.
Unnecessary Creation आपको गलती करने
का मौका देता हैं. आप पर कुछ बड़ा और अच्छा बनाने
का प्रेशर नहीं डालता हैं. आपसे कोई उम्मीद नहीं रखी
जाती जिसे आपको पूरा करना हैं. यह आपके लिए खुद
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का प्रेशर नहीं डालता हैं. आपसे कोई उम्मीद नहीं रखी
जाती जिसे आपको पूरा करना हैं. यह आपके लिए खुद
को एक्सप्रेस करने का मौका हैं. यह मौका हैं खुद के
स्टाइल के आर्ट को ढूंढ निकालने का, वह स्टाइल जो
आपका हो.
कन्क्लूज़न
सबसे पहले, आपने सीखा कि कैसे क्रिएटिव लोग
सोसाइटी में अपने रोल को बैलेंस करके चलते हैं. एक
क्रिएटिव शख्स होने का मतलब हैं यह जानना कि हर
दिन का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा कैसे उठाया जाए.
दूसरा, आपने सीखा कि अपनी क्रिएटिविटी को
इम्पोर्टेस कैसे देनी हैं. इसके लिए आपको वक्त
निकालना चाहिए, खासकर जब आपकी एनर्जी का
लेवल मैक्सिमम हो. क्रिएटिव ट्रिगर का यूज़ कीजिए
जैसे कि एक ही म्यूजिक को यूज़ करना या क्रिएटिव
काम करते वक्त एक ही चेयर पर बैठना.
तीसरा, आपने सीखा कि आपके डेवलपमेंट के लिए
क्रिएटिव रूटीन होना बहुत ही ज़रूरी हैं. जब भी
आपको लगे कि कुछ बनाना बंद करना हैं, तो उस वक्त
खुद को पुश कर उस काम को पूरा कर के ,आगे बढ़ने
की पूरी कोशिश करनी चाहिए. ऐसे पल जब आपका
मन कुछ बनाने का नहीं करता हैं लेकिन फिर भी आप
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मन कुछ बनाने का नहीं करता हैं लेकिन फिर भी आप
बनाते हैं, बहुत ख़ास होते हैं.
चौथा, आपने सीखा कि मल्टीटास्किंग प्रोडक्टिव या
फायदेमंद नहीं हैं. असल में, यह आपके लिए बुरा हैं.
इसलिए, अगर आपके पास बहुत से प्रोजेक्ट हैं, तो उन
पर एक साथ काम मत कीजिए. इसके बजाय, एक
बार में एक ही प्रोजेक्ट पर फोकस रखिए.
पांचवां, आपने Unnecessary Creationके बारे
#ital. Unnecessary Creation 3114c
लिए अपने जुनून, अपने पैशन को फ्री होकर प्रैक्टिस
करने का एक तरीका हैं. यह आपके लिए एक क्रिएटिव
शख्स के तौर पर आगे बढ़ने का मौका हैं.
एक क्रिएटिव शख्स की लाइफ कभी आसान नहीं
होती. अपने आउटपुट को क्रिएटिव और सुंदर बनाने
का स्ट्रगल कभी खत्म नहीं होगा. लेकिन आपने जो
कुछ इस समरी से सीखा, उससे आप अपने स्ट्रगल को
एन्जॉय कर पाएंगे. आपको एहसास होगा कि आप
जिन मुश्किलों से गुजरे हैं, आप उसके काबिल थे.
आपके पास भी लोगों को सुनाने के लिए एक कहानी
होगी. इसलिए अपने आप को मत रोकिए और कोशिश
करते रहिए.
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