Jugaad Innovation Think Frugal, Be Flexible, Gene… By NaviRadjou, JaideepPrabhu, and Simone Ahuja. Books In Hindi Summary

Jugaad Innovation Think Frugal, Be Flexible, Gene… By NaviRadjou, JaideepPrabhu, and Simone Ahuja इंट्रोडक्शन (Introduction) क्या आपको भी कभी ऐसा फील हुआ है. कि आप गलत जगह में, गलत टाइम में पैदा हो गए है? क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा मै तो अनलकी हूँ, अब कुछ नहीं हो सकता और आपने गिव अप कर दिया. अगर आप ऐसे कंडिशन से गुजर चुके है तो टेंशन मत लो क्योंकि आपके जैसे कई लोग है जो खुद को अनलकी समझते है. जिन्हें लगता है कि वो गलत टाइम पर पैदा हुए है. मगर इनमे से भी कुछ लोग ऐसे है जिन्होंने गिव अप करने का बजाये लाइफ के हर स्ट्रगल में एक मौका ढूँढा है. ये वो लोग है जिन्होंने दुनिया को ही नहीं बल्कि खुद को भी चेलेंज किया और खुद को प्रूव करके दिखाया. आप चाहे तो आप भी इनकी तरह बन सकते है, मगर कैसे? इस बुक में हम आपको जुगाड़ प्रिंसिपल यूज़ करना सिखायेंगे. जुगाड़ एक हिंदी वर्ड है जिसका मतलब है किसी भी प्रोब्लम या सिचुएशन का एक स्मार्ट सोल्यूशन निकालना. क्योंकि हर बार आप अपनी सिचुएशन का रोना नहीं रो सकते, तो यहाँ पर जुगाड़ प्रिंसिपल आपके काम आएगा. इण्डिया में ऐसे कई लोग है जिन्होंने अपनी प्रोब्लम्स का इनोवेटिव सोल्यशन निकाला है और ये लोग सक्सेसफल भी द्वारा |प्रासपल आपक काम आएगा. इण्डया म एस कई लोग है जिन्होंने अपनी प्रोब्लम्स का इनोवेटिव सोल्यूशन निकाला है और ये लोग सक्सेसफुल भी हुए है. अगर आप भी उनके जैसा बनना चाहते है तो ये बुक आपको ऐसे सीक्रेट्स बताएगी जो आज एंटप्रेन्योर्स यूज़ कर रहे है. आपको ब्रेव और रीसोर्सफुल बुक बनाने में ये बुक आपकी हेल्प करेगी. इसे पढकर आप सीख सकते है कि कैसे आप किसी भी सिचुएशन को एक अपोर्चुनिटी में टर्न कर सकते है जिसे कि हम स्मार्ट लिविंग बोलेंगे. आपने सुना होगा ऐसे लोगो के बारे में जिन्होंने अपने बिजनेस में इस माइंडसेट को यूज़ किया है. ये माइंडसेट बड़े काम की चीज़ है, ना सिर्फ इंडियंस के लिए बल्कि चाइना और ब्राज़ील जैसी कंट्रीज के लोगो ने भी इसका बेनिफिट उठाया है. जुगाड़: अ ब्रेकश्रू ग्रोथ स्ट्रेटेजी (Jugaad: A Breakthrough Growth Strategy) आज 20 वी सेंचुरी में अमेरिका और योरोप जैसे देशो में कोई ख़ास जेन्युइन इनोवेशन नहीं हो रहे. ये कंट्रीज अब इनोवेशन और मैनेजिंग से ज्यादा इंडस्ट्रीलाइजिंग पर जोर दे रही है. इसे बिजनेस का स्ट्रक्चर्ड अप्रोच फोलो करना बोलते है. लेकिन इस अप्रोच ने तीन प्रोब्लम्स क्रियेट की है. फर्स्ट, ये अप्रोच बड़ी एक्सपेंसिव थी वेस्टर्न कंट्रीज़ आलरेडी इनोवेटिव सोल्यूशंस और प्रोडक्ट्स पर काफी रीसोर्सेस और पैसा खर्च कर चुकी है. दूसरा, ये फ्लेक्सिबल नहीं है क्योंकि इसमें हर चीज़ दिजाईन की गयी है किाटिविटी भी शाई रो दिगी के दूसरा, ये फ्लेक्सिबल नहीं है क्योंकि इसमें हर चीज़ डिजाईन की गयी है, क्रिएटिविटी भी. थर्ड, ये डिग्री के बेस पर नॉलेज जज करती है तो इनके हिसाब से सिर्फ साइंटिस्ट और एलीट ग्रेजुएट्स ही जॉब के लिए स्मार्ट माने जायेंगे. हो सकता है पहले ये अप्रोच काम करती होगी मगर आज के टाइम में नहीं. आज दुनिया हर पल बदल रही है इसलिए आपको भी टाइम के साथ एडजस्ट करने के लिए एक फ्लेक्सीबल सिस्टम चाहिए और इस सिस्टम का नाम है जुगाड़ सिस्टम. वेस्टर्न सिस्टम तो अब चल नहीं रहा तो इस बुक के ऑथर ने डिफरेंट माइंडसेट्स को टारगेट किया है. इन्होने सोल्यूशन की तलाश में इण्डिया, ब्राज़ील, चाइना और रशिया जैसे देशो के चक्कर लगाए है. इनकी इसी मेहनत और रीसर्च का रीजल्ट ये बुक है जो हम आपके लिए लेकर आए है. तभी तो हम ये बुक आपको रेक्म्न्ड कर रहे है. एक बार इसे पढके देखे, आपको पता चल जायेगा कि कैसे सक्सेसफुल लोगो ने खुद को चलेंजे करके बिलियन डॉलर वर्थ कंपनीज़ खड़ी की है. इस बुक के ऑथर्स उन इनोवेटर्स पर फोकस करते है जो इन कंट्रीज़ में सक्सेसफुल रहे है. इस रीसर्च के दौरान उन्हें ये बात पता लगी कि बहुत जल्दी इण्डिया इनोवेशन में सबसे आगे निकलने वाला है. ये सब जानते है इन्डियन मार्किट थोड़ी कॉम्प्लेक्स है, चाओटिक है लेकिन इन सारे चेलेन्जेस के बावजूद लगातार ग्रो कर रही है. अगर आप इन्डिया, चाइना, ब्राज़ील या रशिया से है तो ये बुक समरी ख़ास आपके लिए ही है. इसे पढकर आप सिख्नेगे कि लिमिटेड A < डिफरेंट माइंडसेट्स को टारगेट किया है. इन्होने सोल्यूशन की तलाश में इण्डिया, ब्राज़ील, चाइना और रशिया जैसे देशो के चक्कर लगाए है. इनकी इसी मेहनत और रीसर्च का रीजल्ट ये बुक है जो हम आपके लिए लेकर आए है. तभी तो हम ये बुक आपको रेक्ान्ड कर रहे है. एक बार इसे पढके देखे, आपको पता चल जायेगा कि कैसे सक्सेसफुल लोगो ने खुद को चलेंजे करके बिलियन डॉलर वर्थ कंपनीज़ खड़ी की है. इस बुक के ऑथर्स उन इनोवेटर्स पर फोकस करते है जो इन कंट्रीज़ में सक्सेसफुल रहे है. इस रीसर्च के दौरान उन्हें ये बात पता लगी कि बहुत जल्दी इण्डिया इनोवेशन में सबसे आगे निकलने वाला है. ये सब जानते है इन्डियन मार्किट थोड़ी कॉम्प्लेक्स है, चाओटिक है लेकिन इन सारे चेलेन्जेस के बावजूद लगातार ग्रो कर रही है. अगर आप इन्डिया, चाइना, ब्राज़ील या रशिया से है तो ये बुक समरी ख़ास आपके लिए ही है. इसे पढकर आप सिख्नेगे कि लिमिटेड सोर्सेस में भी आपके अमीर बनने का ड्रीम सच हो सकता है. लेकिन अगर आप किसी और कंट्री के भी है तो भी ये बुक समरी आपके लिए हेल्पफुल रहेगी. एक बार रीसर्च एक्सपेंड हो जाए तो ये बात प्रूव हो जाएगी कि जुगाड़ प्रिंसिपल यूनिवरसली इफेक्टिव है. इसलिए पोजिटिव रहो, और एक लाइफ चेंजिंग लेसंस सीखने के लिए रेडी हो जाओ. Jugaad Innovation Think Frugal, Be Flexible, Gene… By NaviRadjou, Jaideep Prabhu, and Simone Ahuja प्रिंसिपल वन: सीक अपोर्चुनिटी इन एडवरसिटी (Principle One: Seek Opportunity in Adversity) जुगाड़ इनोवेटर्स काफी क्रिएटिव और रेज़िलेंट टाइप के होते है. इनकी आदत है कि ये लोग ग्लास को हाफ फुल देखते है यानी चीजों के हमेशा पोजिटिव साइड देखते है. इन्हें तो हर चेलेंज एक अपोर्चुनिटी नजर आता है. ये लोग अपने आस-पास के माहौल से घबराते नहीं है बल्कि रास्ते की हर रुकावट को गले लगाते है, उन्हें अपने मनमुताबिक ढाल लेते है. और हमे लगता है कि एक टफ एन्वायर्नमेंट से ही ग्रेटनेस निकल के आती है. अगर आप एक हार्श लाइफ जी रहे है तो यकीन मानो आप उन लोगो से कहीं ज्यादा सक्सेसफुल हो सकते हो जो आराम की लाइफ जीते है. क्योंकि आप अपने लिए अपो→निटी क्रियेट कर सकते हो, आप चेलेंज को अपोhनिटी में बदल सकते हो. लेकिन इसके लिए आपको कुछ रूल्स भी फोलो करने होंगे. आप इन तीन रूल्स को फोलो करके किसी भी हार्डशिप से अपोचूँनिटी क्रियेट कर सकते हो. फर्स्ट रूल, अपने सामने आने वाले हर चेलेंज को एक मौके की तरह देखो. सेकंड, ओब्स्टेकल को अपना हथियार बनाओ. और थर्ड, हर प्रोब्लम का एक सोल्यूशन होता A A २ बनाओ. और थर्ड, हर प्रोब्लम का एक सोल्यूशन होता है जो आपको ढूंढना है और इसके लिए आपको चेंजेस एडाप्ट करने होंगे. अब जैसे एक्जाम्पल के लिए, 1980 में एक इंडियन एंटप्रेन्योर तुलसी तांती ने सूरत जाकर अपनी टेक्सटाइल यूनिट स्टार्ट की. मगर जैसा कि होता है, बाकि और लोगो की तरह उन्हें भी काफी प्रोब्लम्स फेस करनी पड़ी. अब टेक्सटाइल बिजनेस की सबसे बड़ी मुसीबत है पॉवर सप्लाई. तुलसी को इलेक्ट्रिक बिल काफी एक्सपेंसिव पड़ रहा था जिसकी वजह से उसका प्रॉफिट ना के बराबर था. लेकिन वो इतनी ईजीली गिव अप करने वाला नहीं था. इंडिया में तो कोई बिजनेस चल ही नहीं सकता, ये सोचने के बजाये उसने कुछ ये क्रिएटिव सोचा और अपने काम को चेलेंज की तरह लिया. तांती ने पॉवर जेनरेटिंग के डिफरेंट तरीको के बारे में काफी स्टडी की और देखा कि हर पॉवर सोर्स में फ्यूल, गेस या आयल की ज़रूरत पड़ती है. लेकिन ये सारे सोर्स एक्सपेंसिव होते है इसलिए उसने ऐसे इलेक्ट्रीसिटी सोर्स के बारे में सोचा जिसमे आयल, फ्यूल या गेस की ज़रूरत ही ना पड़े. एक साल बाद उन्होंने दो विंड टरबाइंस बिल्ड किये. अब उनके पास एक ऐसी पॉवर सप्लाई थी जो अनलिमिटेड तो थी ही साथ ही जिसमे उनका एक पैसा भी खर्च नहीं हो रहा था. ये लाईट उन्होंने हवा से बनाई थी और हवा तो फ्री मिलती है. तांती का क्रिएटिव माइंड सिर्फ यही तक नहीं रुका, उन्होंने सोचा क्यों ना सारी इन्डियन फेक्ट्रीज इस विंड टरबाइंस का फायदा उठाये. तो उन्होंने इंडिया -II Ir.. -11-1. नहीं रुका, उन्होंने सोचा क्यों ना सारी इन्डियन फेक्ट्रीज इस विंड टरबाइंस का फायदा उठाये. तो उन्होंने इंडिया में एक विंड एनेर्जी सप्लायर बिल्ट की, जिसका नाम उन्होंने रखा सुजलोन एनेर्जी. उनकी कंपनी वर्ल्ड की फिफ्थ लार्जेस्ट एनेर्जी सोल्यूशन प्रोवाइडर कंपनी है. तांती की स्टोरी प्रूफ है इस बात का कि प्रोब्लम में ही सोल्यूशन छिपे होते है, बस आपके देखने का नजरिया अलग होना चाहिए. प्रिंसिपल टू: डू मोर विथ लेस (Principle Two: Do More with Less) जुगाड़ एंटप्रेन्योर्स को काफी चेलेन्जेस फेस करने पड़ते है. सबसे पहले तो फाइनेशियल रीसोर्स का चेलेंज. नैचुरल रीसोर्स जैसे पानी और बिजली काफी कॉस्टली पड़ती है. इसके अलावा उनके पास उतने टेलेंटेड लोग भी नहीं होते. इन्फ्रास्ट्रक्चर की क्वालिटी भी एक और चेलेंज होती है. आपने प्रोडक्ट्स बना भी लिया तो भी आपके सामने कनेक्टीविटी और ट्रांसपोर्ट का चेलेंज रहेगा. और लो इनकम कंज्यूमर्स भी एक चेलेंज है जो आपके पोटेंशियल कस्टमर्स है, मगर वो इतने गरीब होते है कि आपका प्रोडक्ट अफोर्ड नहीं कर पाते. बेशक ये लोग गरीब होते है मगर इन्हें प्रोडक्ट की क्वालिटी के बारे में पता होता है. इसलिए आपको ऐसा प्रोडक्ट बनाना है जो हाई क्वालिटी के साथ अफोर्डेबल भी हो. इन सारे ओब्स्टेकल्स के पॉइंट ऑफ़ व्यू से देखे तो इंडिया जैसे देश में कोई भी न्यू बिजनेस स्टार्ट करना ऑलमोस्ट क्वालिटी के साथ अफोर्डेबल भी हो. इन सारे ओब्स्टेकल्स के पॉइंट ऑफ़ व्यू से देखे तो इंडिया जैसे देश में कोई भी न्यू बिजनेस स्टार्ट करना ऑलमोस्ट इम्पॉसिबल लगता है. लेकिन रीसर्च से प्रूव होता है कि अगर आप स्मार्ट और रीसोर्सफुल है तो आप इन सब ओब्सटेकल्स को पार कर सकते है. इसके लिए जुगाड़ इनोवेटर्स को अपने हर स्टेप पर सोल्यूशंस ढूँढने होंगे. इसके लिए मौजूदा प्रोडक्ट्स और रीसोर्सेस को रीयूज़ या कम्बाइन करते है. एसेट्स खरीदने के बाजए रेंट और शेयर करना आइडियल रहेगा. ये लोग ऐसे नेटवर्क यूज़ करते है जो कस्टमर्स को प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए पहले से मौजूद है. ये इंटेलीजेंट इनोवेस्टर्स सिर्फ अपने प्रॉफिट का नहीं सोचते. बल्कि कस्टमर्स की नीड्स पूरी करना उनकी फर्स्ट प्रायोरिटी होती है. ये लोग कूल के बजाये वैल्यूएबल और सिंपल प्रोडक्ट्स बनाना पसंद करते है जो क्वालिटी ऑफ़ लाइफ बढ़ा सके. ऐसी ही एक स्टोरी है गुस्तावो की जिन्होंने कम रीसोर्सेस होते हुए भी काफी कुछ अचीव किया. गुस्तावो ग्रोबोकोपाटेल एक अन्जेंटीनियन फार्मर है. उसके पास अपना एक छोटा सा फेमिली फार्म था. लेकिन उसके सपने काफी बड़े थे. वो एक बड़े मार्किट तक अपनी पहुँच बनाना चाहता था. स्टार्टिंग से ही उसे काफी प्रोब्लम्स फेस करनी पड़ी. उसकी फर्स्ट प्रोब्लम, उसे अर्जेंटाइना में कोई बड़ा फ़ार्म नहीं मिल रहा था, जो बड़े फार्म थे वो अमीरों के थे और वो लोग बेचने को तैयार नहीं थे. सेकंड प्रोब्लम थी कि थे. वो एक बड़े मार्किट तक अपनी पहुँच बनाना चाहता था. स्टार्टिंग से ही उसे काफी प्रोब्लम्स फेस करनी पड़ी. उसकी फर्स्ट प्रोब्लम, उसे अर्जेंटाइना में कोई बड़ा फ़ार्म नहीं मिल रहा था, जो बड़े फार्म थे वो अमीरों के थे और वो लोग बेचने को तैयार नहीं थे. सेकंड प्रोब्लम थी कि उसे स्किल्ड वर्कर्स नहीं मिल रहे थे जो उसके फार्म में काम कर सके. और जो स्किल्ड थे वो काफी पैसे मांग रहे थे. थ्रेड प्रोब्लम थी फाईनेंशियल रीसोर्सेस, उसके पास लैंड खरीदने और वर्कर्स हायर करने के पैसे नहीं थे. लेकिन गुस्ताव गिव अप नहीं करना चाहता था, बल्कि उसने कम में ज्यादा वाली मेंटलिटी ट्राई की. उसने लैंड रेंट पे लिया. उसने फ़ार्म के हर एक काम को छोटे-छोटे टास्क में डिवाइड कर दिया और फिर वर्कर्स के हर ग्रुप के डिफरेंट टास्क दिए गए जो वो ईजिली परफोर्म कर सके. उसने फार्म के लिए ब्रांड न्यू मशीने और टूल्स खरीदने के बजाये ये चीजे रेंट पे ली. 2010 में उसकी कंपनी लैटिन अमेरिका की सेकंड लार्जेस्ट ग्रेन प्रोड्यूसर कंपनी बन चुकी थी.लेकिन ये सोचने की बात है कि अगर गुस्तावो ने जुगाड़ नहीं लगाया होता तो उसे सक्सेस कभी नही मिलती. तो इसलिए लाइफ में कई बार गरीब होना भी बड़े काम आता है. जो भी रीसोर्सेस आपके पास है उनका फुल यूज़ करो, हार मत मानो, बस लड़ते रहो. A < Jugaad Innovation Think Frugal, Be Flexible, Gene… By NaviRadjou, JaideepPrabhu, and Simone Ahuja प्रिंसिपल थ्री: थिंक एंड एक्ट फ्लेक्सीबिली (Principle Three: Think and Act Flexibly) जुगाड़ इनोवेटर्स अक्सर अनप्रेडिक्ट और अजीबो-गरीब हालात में पैदा होते है. हमारी इंडियन सोसाइटी में डिफरेंट मेंटलीटी के लोग रहते है. इसलिए हमारे यहाँ कुछ डिफरेंट और क्रिएटिव सोचने के ज्यादा चांसेस है. कुछ ऐसे रूल्स है जिन्हें फोलो करके आप एक फ्लेक्सीबल थिंकिंग अचीव कर सकते है. सबसे पहले तो कुछ ऐसा सोचो जो किसी और ने अब तक नहीं सोचा है. खुद की रिएलिटी को चेलेंज करो, अपने बिलीफ्स को चेलेंज करो. कई बार एक कॉमन माइंडसेट हमारी पोटेंशियल को लिमिट कर देता है. अगर आपको कुछ अलग करना है तो कुछ क्रिएटिव सोचना होगा, कुछ एक्सपेरिमेंट करने होंगे. और इसके लिए आपके अंदर इतने गट्स भी होने चाहिए कि आप लीक से हटकर एक नया रास्ता चूज़ कर सके. दूसरी बात, इम्प्रूवाइज़ करना बेहद ज़रूरी है. जुगाड़ इनोवेटर्स प्लान नहीं बनाते क्योंकि उन्हें पता रहता है कि मार्केट हमेशा चेंज होती रहती है और इकोनोमी कभी स्टेबल नहीं रहती. ऐसे में फिक्स प्लान बनाना कभी काम नहीं आता तो इसलिए डिफरेंट और इकोनोमी कभी स्टेबल नहीं रहती. ऐसे में फिक्स प्लान बनाना कभी काम नहीं आता तो इसलिए डिफरेंट ऑप्शन ट्राई करते रहो. थर्ड, इंडियन सोसाइटी में डिफरेंट टाइप के कस्टमर्स है. और हमारे प्रोडक्ट्स पर उनका क्या रिएक्शन होगा ये बात हमे मालूम नहीं. इसलिए आपको अपने डीजायर्ड गोल्स अचीव करने के लिए कस्टमर्स को डिफरेंट तरीके से अप्रोच करना होगा. फाइनली, जोकि हम पहले भी बोल चुके है, वेस्टर्न कंट्रीज में कोई नया बिजनेस खोलना थोडा मुश्किल होता है. अगर आप फ्लेक्सीबल बनना चाहते हो तो आपको हर चेलेंज से तुरंत निपटना होगा. ओब्स्टेक्लस और आपके कॉम्पटीटर्स आपको पीछे खीच सकते है. लेकिन आपको बड़े स्मार्टली उनका सोल्यूशन निकालना होगा. फ्लेक्सीबिलिटी का बेस्ट एक्जाम्पल हम डॉक्टर मोहन से ले सकते है. वो एक इंडियन डॉक्टर है जिन्होंने अपने जुगाड़ माइंडसेट से रुरल एरियाज में डायेबिटिक पेशेंट्स को मोनिटर और ट्रीट करने के लिए एक इनोवेटिव आईडिया निकाला. डॉक्टर मोहन जानते है कि रुरल एरियाज़ में एक्सेसीबिलिटी थोड़ी मुश्किल है. बहुत से पेशेंट ट्रीटमेंट के लिए डॉक्टर के पास नहीं आ पाते है. तो इसीलिए डॉक्टर मोहन ने सोचा क्यों ना डॉक्टर्स को पेशेंट्स के पास लाया जाए. उनका विजन था कि एक ऐसी वैन बनाये जिसमे डॉक्टर्स ट्रेवल करके पेशेंट्स के पास पहुँच सके, और अपना यही गोल अचीव करने के लिए उन्होंने हाई जापासपल कारक पराट्सक पास पहुपसका. जार अपना यही गोल अचीव करने के लिए उन्होंने हाई स्कूल ग्रेजुएट्स को हायर किया, उन्हें मेडिकल ट्रेनिंग दी और क्वालीफाईड डॉक्टर्स के बदले उन्हें पेशेंट्स तक भेजना शुरू किया. क्योंकि क्वालिफाइड डॉक्टर्स की फीस एक्सपेंसिव होती है इसलिए गरीब लोग उनकी फीस अफोर्ड नहीं कर पाते और ना ही उन्हें इस तरह वैन में बिठाकर हर जगह भेजा जा सकता है. डॉक्टर मोहन ने कम्यूनिकेशन के लिए इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गेनाइजेशन रिक्वेस्ट की कि उन्हें सेटेलाईट प्रोवाइड की जाए. इस तरह अब वो अपने पेशेंट्स को वीडियो काल्स के श्रू मोनिटर कर पाते है. अगर ये आदमी हज़ारो लोगो की हेल्प करने के लिए इस तरह का इनोवेटिव आईडिया निकाल सकता है तो आप क्यों नहीं. बस आपको ज़रूरत है तो फ्लेक्सीबल बनने की और एक ग्रेट चेंज आप भी ला सकते है. प्रिंसिपल फोर: कीप इट सिंपल ( Principle Four: Keep It Simple) इस चैप्टर में हम बात करेंगे जुगाड़ थिंकिंग में सिंपलीसिटी की. “सिंपलीसिटी इज अ की”. हमे बचपन यही सिखाया गया है कि बिगर इज आलवेज़ बैटर. मगर जुगाड़ इनोवेटर्स ने प्रूव करके दिखाया है कि आपका प्रोडक्ट ही काफी है जो लोगो को अपील कर सके और लोग जिसे अफोर्ड कर सके. सिंपल प्रोडक्ट्स बनाने में चीप होते है इसलिए उन्हें कम प्राइस में भी बेचा जा सकता है. इन्हें यूज़ और मेंटेन करना भी ईजी होता है. इसके साथ ही ये एक बडे कस्टमर ग्रप की पपा जा सपा ९. २० पूजा नपारा ना२णा होता है. इसके साथ ही ये एक बड़े कस्टमर ग्रुप की नीड सेटिसफाई करते है. मगर अपने प्रोडक्ट को सिंपल बनाने के लिए आपको अपने कस्टमर्स की डीजायर से ज्यादा उनकी नीड का ध्यान रखना होगा. आपका प्रोडक्ट ऐसा हो जो उनकी लाइफ ईजी बना दे. लेकिन प्रोडक्ट इतना भी सिंपल ना हो कि उसकी वैल्यू ही खत्म हो जाए. आपको अपने कस्टमर्स की नीड्स के हिसाब से उन्हें सिंपल मगर वैल्यूएबल सोल्यूशन ऑफर करना है. अगर उनकी प्रोब्लम कॉम्प्लेक्स है तो पहले थोड़ी रीसेच और स्टडी कर लो फिर उसका सोल्यूशन निकालो. आपकी पूरी कंपनी सिंपलीसिटी के बेस पर डिजाईन होनी चाहिए. कॉम्प्लेक्स स्ट्रेटेजी लेकर आप सिंपल प्रोडक्ट नहीं बना सकते. इसलिए अपने बिजनेस के हर स्टेप पर सिंपलीसिटी का ध्यान रखो. डॉक्टर सत्या जगंथानन एक इंडियन पीडियाट्रेशियन है जो साउथ इंडिया के रुरल एरियाज में काम करते है. उन्होंने देखा कि वहां पर इन्फेंट डेथ यानी न्यू बोर्न बेबीज़ की डेथ रेट बहुत ज्यादा थी. 1000 बच्चो में से करीब 39 बच्चे पैदा होने के कुछ टाइम बाद मर जाते थे. उन्होंने इस प्रोब्लम को सोल्व करने के लिए इनक्यूबेटर्स लगाने की सोची जो वो यू.एस. से लेकर आई थी. और वो जानती थी कि इनक्यूबेटर्स काफी एक्सपेंसिव होते है. तो एक सिंपल सोल्यूशन के तौर पर डॉक्टर सत्या ने डिसाइड किया कि वो खुद ऐसा इनक्यूबेटर बनाएगी जो लकड़ी से बना ट्रो और वो एक्सपेरीमेंट करती गयी जब तक कि तो प्रोडक्ट नहीं बना सकते. इसलिए अपने बिजनेस के हर स्टेप पर सिंपलीसिटी का ध्यान रखो. डॉक्टर सत्या जगंथानन एक इंडियन पीडियाट्रेशियन है जो साउथ इंडिया के रुरल एरियाज में काम करते है. उन्होंने देखा कि वहां पर इन्फेंट डेथ यानी न्यू बोर्न बेबीज़ की डेथ रेट ‘ बहुत ज्यादा थी. 1000 बच्चो में से करीब 39 बच्चे पैदा होने के कुछ टाइम बाद मर जाते थे. उन्होंने इस प्रोब्लम को सोल्व करने के लिए इनक्यूबेटर्स लगाने की सोची जो वो यू.एस. से लेकर आई थी. और वो जानती थी कि इनक्यूबेटर्स काफी एक्सपेंसिव होते है. तो एक सिंपल सोल्यूशन के तौर पर डॉक्टर सत्या ने डिसाइड किया कि वो खुद ऐसा इनक्यूबेटर बनाएगी जो लकड़ी से बना हो. और वो एक्सपेरीमेंट करती गयी जब तक कि वो सक्सेसफुल नहीं हो गयी. फाइनली डॉक्टर सत्या ने अपना लकड़ी का इनक्यूबेटर तैयार कर लिया और जब उसे यूज़ करना शुरू किया तो बच्चो की डेथ रेट घटकर हाफ हो गयी थी. यू.एस में बने एक इनक्यूबेटर का कॉस्ट करीब 20000 डॉलर पड़ता है. जबकि उन्होंने सिर्फ 100 डॉलर का इनक्यूबेटर बना के दिखा दिया. तो क्यों हम चीजों को कॉम्प्लीकेट करे जबकि हम उन्हें सिंपल मेथड से भी कर सकते है. आखिरकार एक इनक्यूबेटर का काम बच्चे को वार्म रखना ही तो होता है. Jugaad Innovation Think Frugal, Be Flexible, Gene… By NaviRadjou, JaideepPrabhu, and Simone Ahuja प्रिंसिपल फाइव: इन्क्ल्यूड द मार्जिन (Principle Five: Include the Margin) अगर आप इंडिया जैसी कंट्री में रहते है और जुगाड़ माइंडसेट इम्प्लीमेंट करना चाहते है तो आपको मार्जिनल कस्टमर्स और एम्प्लोईज़ को भी ध्यान में रखना होगा. आप अपने कस्टमर्स और एम्प्लोईज को इग्नोर नहीं कर सकते क्योंकि हम लोग एक डाइवर्स कंट्री में रहते है और इसीलिए हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते है. लेकिन हम एक ऐसी कंट्री में भी रहते है जिसे अपनी कमियों के लिए जाना जाता है. और यही चीज़ आपको एक ह्यूज़ मार्किट भी प्रोवाइड करा सकती है. एक ऐसी मार्किट जिसे अभी तक किसी ने एक्सप्लोर नहीं किया है. आज के टाइम में हर कोई इंटरकनेक्टेड है. यहाँ तक कि रुरल एरियाज में भी घर-घर में केबल टीवी है. लोग इंटरनेट के श्रू एक दुसरे से जुड़े है. आज लोगो के पास घर बैठे दुनिया भर की इन्फोर्मेशन है. और आप इसी चीज़ का बेनिफिट लेकर लोगो तक पहुँच सकते है, उनके ज़रूरत की चीज़ उन्हें प्रोवाइड करा सकते है. जुगाड़ इनोवेटर्स ज्यादातर इन्ही मार्जिनल एरिया से निकलते है, उन्हें गरीबो की ज़रूरतों का पता होता है और इसीलिए इन जगाड इनोवेटर्स के सामने परा A . सफलत, ७ गराषा का पता का पता blता है और इसीलिए इन जुगाड़ इनोवेटर्स के सामने पूरा एक नया मार्किट होता है जिसे वो एक्सप्लोर कर सके. किसी की इनकम लो है तो इसका ये मतलब नहीं कि उसे हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स की डीजायर नहीं है. अब अगर आप इन लोगो के लिए कोई प्रोडक्ट बनाते है तो वो हाई क्वालिटी का और अफोर्डेबल प्राइस का होना चाहिए. मार्जिनल ग्रुप को कभी नेगलेक्ट मत करो, आने वाले टाइम में ये मार्जिनल ग्रुप्स मेजोरिटी बनेंगे. इसलिए बैटर होगा कि आप अपनी स्ट्रेटेजी पर कुछ ऐसे मेथड्स पर गौर करो जिससे इन लोगो की लाइफ में चेंजेस आये और साथ ही आप प्रॉफिट भी कमा सको. डॉक्टर, राना कपूर एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे थे. 2010 में उन्होंने अपनी जॉब छोडकर खुद का इन्क्ल्यूसिव बैंक स्टार्ट किया. वो एक ऐसा बैंक शुरू करना चाहते थे जो ज्यादा से ज्यादा कंज्यूमर ग्रुप्स को फानेंशियल सपोर्ट प्रोवाइड कर सके. उन्होंने एक टारगेट सेट किया कि वो सिक्स मिलियन इंडियंस तक जिनके पास कोई फाईनेंशियल सपोर्ट नहीं है, अपनी सर्विस एक्सपेंड करेंगे. इस बैंक का नाम उन्होंने एस बैंक रखा. वो अक्सर ऐसे क्रिएटिव माइंडेड लोगो की तलाश में रहते थे जो उन्हें ऐसे सोल्यूशन्स दे कि उनका बैंक ज्यादा से ज़्यादा इंडियंस तक पहुँच सके. डॉक्टर कपूर ने हाई टेक बैंकिंग प्रोडक्ट्स को रेंट पे लेना शुरू किया. उन्होंने माइक्रो बिजनेसेस पर खास तौर पर ज्यादा फोकस किया जिन्हें टसरे बैंक ताले टेला नहीं करने A < कपूर न हाइटक बाकग प्राऽक्ट्स कार पलना शुरू किया. उन्होंने माइक्रो बिजनेसेस पर खास तौर पर ज्यादा फोकस किया जिन्हें दुसरे बैंक वाले हेल्प नहीं करते थे. एस बैंक के रीजल्ट अमेजिंग थे, डॉक्टर कपूर और उनके लोगो ने ऐसे सोल्यूशन्स क्रिएट किये जिससे माइक्रो एंटप्रेन्योर्स को भी बैंक के साथ जोड़ा जा सके और वो बैंक की फेसिलिटी का बेनिफिट ले सके. उनका मानना था कि ये मार्जिनल ग्रुप्स सिर्फ उनके इन्वेस्टमेंट का पार्ट नहीं है बल्कि उनके बिजनेस का कोर पार्ट है. एस बैंक का मानना है कि वो प्रॉफिट कमाने के साथ-साथ सोसाइटी का भी भला कर रहे है. प्रिंसिपल सिक्स: फोलो योर हार्ट (Principle Six: Follow Your Heart) जुगाड़ इनोवेटर्स कुछ ऐसे माहौल में पले-बढे होते है कि उनके अंदर एक पैशन होता है, ये लोग बड़े ही इंट्यूटिव और एम्पेथेटिक होते है. ये लोग मटेरियलिस्टिक वर्ल्ड में नहीं रहते. इन्हें अपने से ज्यादा दूसरो की फ़िक्र रहती है तभी तो ये लोग हमेशा हेल्प करने के लिए रेडी रहते है. इन्हें डे टू डे लाइफ में हार्श रियेलिटी फेस करनी पड़ती है, स्ट्रगल इनकी लाइफ का एक पार्ट है. तो ऐसे में प्रोब्लम सोल्विंग के लिए सिर्फ दिमाग से काम लेना काफी नहीं होगा. आपको इसके साथ ब्रेव और कॉफिडेंट भी होना पड़ेगा, वो भी जब आपके सामने डू ओर डाई वाली सिचुएशन हो. चाहे फेलर मिले या स्कसेस आपको घबराना नहीं है काफी नहीं होगा. आपको इसके साथ ब्रेव और कॉफिडेंट भी होना पड़ेगा, वो भी जब आपके सामने डू ओर डाई वाली सिचुएशन हो. चाहे फेलर मिले या स्कसेस आपको घबराना नहीं है क्योकि आपकी लाइफ का गोल इन बातो से कहीं ऊँचा है. जुगाड़ इनोवेटर्स सिर्फ अपने पैशन को जिंदा नहीं रखते बल्कि बाकियों को भी उनके गोल अचीव करने के लिए इंस्पायर करते है. उनका गोल होता है पूरे देश को अपनी तरह ही डेवलप करना और आगे बढ़ाना. गट फीलिंग का ऐसा ही एक एक्जाम्पल है किशोर बियानी का जो बिग बाज़ार के ओनर है. उन्होंने जब अपना बिजनेस खोला तो लोगो ने एडवाइस दी कि आप वाल मार्ट के जैसा एक अमेरिकन स्टाइल का सुपरमार्किट खोलो. लेकिन ये आईडिया चला नही, क्योंकि हम इंडियंस का अपना एक यूजवल टेस्ट है तो लोग इस टाइप की शॉप्स में जाना पसंद नहीं करते. फिर बियानी ने सोचा कि अगर वो एक सुपर मार्किट खोल रहे है तो ये एक इंडियन बाज़ार जैसा ही लगना चाहिए. और उनकी यही इनोवेटिव सोच हिट हो गयी. बताने की ज़रूरत नहीं कि आज बिग बाज़ार बिगेस्ट इंडि इपरमार्किट जहाँ रोज़ लाखो लोग शौपिंग करने आते है. बियानी ने अपना इंट्यूशन फोलो किया और अपनी फेलर को सक्सेस में बदल दिया. अगर आपको भी लगे कि आप कहीं फेल हो रहे है तो वही करो जो आपका दिल बोलता है. अपने पैशन को फोलो करो मगर दूसरो की एडवाइस से नहीं बल्कि अपने इंट्यूशन से. Jugaad Innovation Think Frugal, Be Flexible, Gene… By NaviRadjou, JaideepPrabhu, and Simone Ahuja इन्टीग्रेटिंग जुगाड़ इनटू योर ऑर्गेनाइजेशन (Integrating Jugaad into Your Organization) पिछले चैप्टर्स में हमने आपसे जुगाड़ के सिक्स प्रिंसिपल्स डिस्कस किये थे. तो अब सवाल ये है कि ये प्रिंसिपल्स कब बेस्ट काम आते है? जुगाड़ माइंडसेट बेस्ट काम करता है: जहाँ एन्वायर्नमेंट हमेशा चेंजिग रहता हो, जब लिमिटेड रीसोर्सेस हो, वाइड रेंज ऑफ़ कस्टमर्स हो यानी काफी तादाद में कस्टमर्स हो, जहाँ बिजनेस वेल एस्टेबिलिश प्रेक्टिस में ना हो यानी जहाँ बिजनेस का ज्यादा स्कोप ना हो. और जब टेक्नोलोजी रेवोल्यूशन चल रहा हो. अगर आपकी कंपनी ट्रेडिशनल लीनियर अप्रोच को सक्सेसफूली फोलो कर रही है तो आपको तुरंत अपनी बीजनेस स्ट्रेटेजी चेंज करने की ज़रूरत नहीं है. क्योंकि ये थोडा रिस्की हो सकता है. इससे बैटर ये होगा कि अपने बिजनेस को जुगाड़ अप्रोच से एक्सपेंड करो, लेकिन आपको हर प्रोसेस को सही टाइमिंग के साथ करना है, और स्मार्ट तरीके से फ्लेक्सिबल वे में काम करना है. कांफिडेंस बूस्ट करने के लिए जुगाड़ प्रिंसिपल के बारे में सोचो. अगर आप अपने बिजनेस प्लान के साथ कम्फर्टेबल है तो इसे तभी यूज़ करो जब पा (ए. ON ITS Y”: प्रिंसिपल के बारे में सोचो. अगर आप अपने बिजनेस प्लान के साथ कम्फर्टेबल है तो इसे तभी यूज़ करो जब कोई ऐसा चेलेजं आये जहाँ आपको इंस्टेबिलिटी लगे, जहाँ आपको डाइवरसिटी और स्कारसिटी फील हो. मतलब कि आपको एक बेलेंस क्रियेट करके चलना है. स्टार्टिंग में आपको अपने करंट नीड के हिसाब से प्रिंसिपल्स को प्रायोरिटी देनी है. सबको एक साथ अप्लाई करने की ज़रूरत नहीं है. अब जैसे कि अगर आप कोई लक्जरी प्रोडक्ट बेच रहे हो तो उसे सिंपल बनाना आपका फर्स्ट टारगेट है. फिर कुछ सिंपल स्टेप्स फोलो करो, जैसे प्रोडक्ट का डिजाईन सिम्पल रखो जो लोगो को ईजी लगे. जुगाड़ प्रिंसिपल का एक बढ़िया इन्टेग्रेशन है जीई कंपनी. ये कंपनी एक स्ट्रक्चर्ड अप्रोच पर डिपेंड रहती है. जेफ्री इमेल्ट इस कम्पनी को चलाते है जिनका सेल्स और मार्केटिंग का बैकग्राउंड रहा है. और यही रीजन है कि वो कस्टमर्स की नीड और थिंकिंग बड़े अच्छे से समझते है. उन्हें कस्टमर बेस्ड अप्रोच फोलो करने की इम्पोरटेंस मालूम है. उन्हें मालूम है कि कस्टमर्स को ना सिर्फ गुड क्वालिटी चाहिए बल्कि उन्हें प्रोडक्ट अफोर्डेबल प्राइस में फास्ट भी चाहिए. इसलिए इमेल्ट ने अपने एम्प्लोईज को एंकरेज करना स्टार्ट किया कि उन्हें क्रिएटिव थिंकिंग और एक जुगाड़ अप्रोच लेकर कस्टमर्स की डिमांड के साथ डील करना होगा. तो जीई हेल्थ केयर ने जुगाड़ इनोवेटर्स की तरह सोचना शुरू किया. उनकी इसी थिंकिंग का एक एक्जाम्पल है एक पोर्टेबल इलेक्टोडायोग्राम किएट करना जो सस्ता भी है और A < है जिनका सेल्स और मार्केटिंग का बैकग्राउंड रहा है. और यही रीजन है कि वो कस्टमर्स की नीड और थिंकिंग बड़े अच्छे से समझते है. उन्हें कस्टमर बेस्ड अप्रोच फोलो करने की इम्पोरटेंस मालूम है. उन्हें मालूम है कि कस्टमर्स को ना सिर्फ गुड क्वालिटी चाहिए बल्कि उन्हें प्रोडक्ट अफोर्डेबल प्राइस में फास्ट भी चाहिए. इसलिए इमेल्ट ने अपने एम्प्लोईज को एंकरेज करना स्टार्ट किया कि उन्हें क्रिएटिव थिंकिंग और एक जुगाड़ अप्रोच लेकर कस्टमर्स की डिमांड के साथ डील करना होगा. तो जीई हेल्थ केयर ने जुगाड़ इनोवेटर्स की तरह सोचना शुरू किया. उनकी इसी थिंकिंग का एक एक्जाम्पल है एक पोर्टेबल इलेक्ट्रोडायोग्राम क्रिएट करना जो सस्ता भी है और हल्का भी. अब क्योंकि इंडिया में डॉक्टर्स अक्सर बाइक पर भी ट्रेवल करते है तो उनके लिए स्टैंडर्ड प्रोडक्ट यूज़ करना लोजिकल नहीं था. इससे एक स्टेप आगे बढकर उन्होंने ये डीवाईसेस अमेरिका में इमरजेंसी के दौरान यूज़ करने स्टार्ट किये. सोचो ज़रा, जुगाड़ अप्रोच से उन्हें कितना पैसे और पॉवर का बेनिफिट हुआ. और उन्होंने एक नए मार्जिनल मार्किट में भी अपनी पकड बना ली. तो अगर आपके पास भी कोई एस्टेबिलिश बिजनस है और आप भी जुगाड़ वे ऑफ़ थिंकिंग अडॉप्ट करना चाहते हो तो सिंपल और स्मार्ट प्रोडक्ट क्रियेट करो. A८ Jugaad Innovation Think Frugal, Be Flexible, Gene… By NaviRadjou, Jaideep Prabhu, and Simone Ahuja बिल्डिंग जुगाड़ नेशंस (Building Jugaad Nations) जैसा कि हमने पहले के चैप्टर्स में डिस्कस किया है. जुगाड़ प्रिंसिपल बेस्ट तब काम करता है जब आपके सामने कोई डाइवरसिटी, स्कारसिटी और वोलेटीलिटी जैसी प्रोब्लम्स हो. यानी आपके पास रीसोर्सेस, फाइनेंस और सपोर्ट की कमी हो. और ये प्रोब्लम्स अक्सर अंडरडेवलप कंट्रीज जैसे इण्डिया और एफ्रीका में पाई जाती है. यहाँ लाइफ काफी टफ होती है, मगर जुगाड़ इनोवेटर्स ने अंडर प्रेशर भी सक्सेसफुल और क्रिएटिव होने के तरीके ढूंढें है. यू.एस. जैसी कंट्रीज ड्रीम लैंड माने जाते है. वहां बिजनेस स्टार्ट करना कोई मुश्किल काम नहीं है. हालाँकि अब पहले जैसा नहीं है. न्यू जेनरेशन, ओवर बजट कंपनीज और प्रोडक्ट्स की वजह से अमेरिका में बिजनेस स्टार्ट करना भी अब उतना ही मुश्किल है. ये चलेंजेस सारी दुनिया फेस कर रही है तो अमेरिका, फ़्रांस और यू.के. जैसी कंट्रीज भी अब अपने बिजनेस प्रोब्लम्स के लिए जुगाड़ प्रिंसिपल्स A < रहा ह ता अमारका, फ्रास आर यू.क. जसा कट्राज भा अब अपने बिजनेस प्रोब्लम्स के लिए जुगाड़ प्रिंसिपल्स अडॉप्ट कर रहे है. आज की डेट में दुनिया की हर गवर्नमेंट और यूनिवरसिटीज जुगाड़ इनोवेटर्स को सपोर्ट कर रही है. उन्होंने ऐसे प्रोग्राम सिखाने स्टार्ट कर दिए है जो जुगाड़ थिंकर्स को बिल्ड करते है. और ये जुगाड़ थिंकर्स डूइंग मोर विथ लेस, फ्लेक्सिबल थिंकिंग एंड एक्टिंग, सिंपल इज बैटर और फोलो योर हार्ट जैसे प्रिंसिपल्स लेकर चलते है. सच बात तो ये है कि आज हर कंट्री डू-इट-योरसेल्फ जेनरेशन क्रियेट करने की पूरी कोशिश कर रही है. उन्हें पता है कि ये जेनरेशन ही आगे चलकर फ्यूचर लीडर बनेगी. और सिर्फ यही फ्यूचर में आने वाले चेंजेस को हैंडल कर सकती है. जैसे कि अगर हम आज यू.एस के बारे में सोचे तो देख सकते है कि वहां आज कई न्यू माइंड ऐसे इनोवेटिव सोल्यूशन लेकर आ रहे है जो चीप भी है और सिम्पल भी. ये इनोवेटिव सोल्यूशन्स प्लेफुल एजुकेशनल सिस्टम, लोवर रेट के हेल्थ केयर क्रियेट करने और मार्जिनल ग्रुप्स को फाईनेंशियल सपोर्ट करने में हेल्प कर सकते है. जेसन रोह्रर भी एक जुगाड़ थिंकर का एक्जाम्पल है. उन्होंने यू.एस गेम डेवलपमेंट वर्ल्ड की हिस्ट्री में एक रिकोर्ड बनाया है. रोहरर मेक्सिको में रहने वाले एक कॉमनमेन है जो अपनी वादफ और तीन बच्चो के साथ रिकोर्ड बनाया है. रोहरर मेक्सिको में रहने वाले एक कॉमनमेन है. जो अपनी वाइफ और तीन बच्चो के साथ रहते है. गेम डेवलप करना उनका पैशन है. उन्होंने कई सारे गेम्स डेवलप किये है और अपने कस्टमर्स को ऑलमोस्ट फ्री ऑफ़ कॉस्ट गेम्स भी प्रोवाइड किये है. जेसन का घर सिंपल है, उनके पास कार नहीं है, एक रेफ्रीजरेटर है जो विंटर में यूज़ नहीं होता. रोहरर की फानेंशियल कंडिशन कैसी है ये तो अब आप समझ ही चुके होंगे. उनके पास ना तो एक्सपेंसिव लैपटॉप है और ना ही डेवलपिंग टूल्स. उनके पास है तो बस एक सिम्पल सा ऑफिस जहाँ ओल्ड कंप्यूटर्स रखे है. रियल लाइफ सिचुएशंस से इंस्पायर होकर रोहरर को गेम्स का चस्का लगा. उनके बनाये गेम्स मैरिज, डेथ, लाइफ के गोल्स और ड्रीम जैसी कई चीजों को टैकल करते है. उनके गेम्स इतने ओथेन्टिक है कि वो यूजर्स को बिलकुल रियल लगते है. उनके कस्टमर्स को ये गेम्स बड़े पसंद है. 2007, में उन्होंने एक गेम रीलीज़ की जिसका नाम था पैसेज. ये गेम मोर्टेलिटी के बारे में थी. रिलीज़ होने के कुछ मंथ्स बाद ही ये गेम वाइरल हो गयी थी. ये रोहरर के लिए काफी बड़ी सक्सेस थी. अब उनका बेस्ट गेम डेवलपर के साथ कॉम्पटीशंन स्टार्ट हो गया था. वर्ल्ड के फोर्थ लार्जेस्ट गेम डेवलपर यूबीशिफ्ट बस्ट गम डवलपर क साथ काम्पटाशन स्टाट हा गया था. वर्ल्ड के फोर्थ लार्जेस्ट गेम डेवलपर यूबीशिफ्ट के क्रिएटिव डायरेक्टर ने भी रोहरर की तारीफ की. यूबीशिफ्ट के डायरेक्टर ने कहा” हमारा खुद का ओल्ड कॉम्प्लेक्स सिस्टम इन नए जुगाड़ इनोवेटर्स के सामने फेल हो रहा है. हमे भी उनकी तरह और ज्यादा क्रिएटिव होना पड़ेगा और ऐसे वीडियो गेम्स बनाने होंगे जो यूजर्स की पसंद आये “. तो ये चीज़ इशारा करती है इस बात की तरफ कि जमाना अब बदल चूका है. और हम अपने ओल्ड माइंडसेट के साथ इस नयी दुनिया में नहीं चल सकते. इसलिए हमे कुछ नया सोचने की ज़रूरत है. हमे जुगाड़ वे ऑफ़ थिंकिंग अडॉप्ट करना ही होगा. कनक्ल्यूजन (Conclusion) इस बुक में आपने जुगाड़ इनोवेटिव वे ऑफ़ थिंकिंग के सिक्स प्रिंसिपल्स सीखे. आपने सीखा कि अपने स्ट्रगल से कैसे अपो→निटीज क्रियेट की जा सकती है, कैसे लिमिटेड रीसोर्स में भी आप काफी कुछ कर सकते है. आपने सीखा कि कैसे आप अपनी थिंकिंग और एक्श्न्स में फ्लेक्सीबिलिटी ला सकते है. अपने प्रोब्लम्स का सिंपल और इफेक्टिव सोल्यूशन निकाल सकते हो. आपने सीखा कि सोसाइटी के मार्जिनल ग्रुप के लोगो को अपने साथ लेकर चलना है और अपने दिल की बात NA८ का सिंपल और इफेक्टिव सोल्यूशन निकाल सकते हो. आपने सीखा कि सोसाइटी के मार्जिनल ग्रुप के लोगो को अपने साथ लेकर चलना है और अपने दिल की बात सुनने के बाद ही अपने डिसीजंस लेने है. इण्डिया जैसी अंडरडेवलप कंट्री के लोगो को अच्छे से मालूम है कि हमारे सामने किस तरह के चेलेंजेस आते है, हमारे ड्राबैक्स क्या है और हमारी मुश्किलें क्या है. आपको कोई ऐसा रीसोर्स ईजिली नहीं मिलने वाला जो आपको सपोर्ट कर सके. आपके सामने सिर्फ और सिर्फ चेलेन्जेस होंगे, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप बड़े सपने देखना छोड़ दो. ऐसे कई इनोवेटिव एंटप्रेन्योर्स है जिन्होंने अपनी जुगाड़ थिंकिंग से अपने लार्ज स्केल बिजनेस ड्रीम्स को पूरा किया. तो अगर आपका भी कोई ड्रीम है तो ब्रेव बनो, और कुछ नया सोचो, जो किसी और ने अब तक नहीं सोचा. स्ट्रगल्स से भागो मत, उन्हें फेस करो, उन्हें अपनी ताकत बना लो तब जाकर आप इतने पॉवरफुल बन सकते हो कि स्कसेस आपके कदम चूमे. याद रखो, आप अकेले नहीं हो. आप अपने जैसे लाखो लोगो के लिए एक मिसाल बन सकते हो.

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