INNER BONDING- Becoming a Loving Adul… Margaret Paul. Books In Hindi Summary

INNER BONDING-
Becoming a Loving Adul…
Margaret Paul
इंट्रोडक्शन
जब आप छोटे थे आपको क्या सिखाया गया था? आपको अपने जूतों की रस्सी बांधना सिखाया गया
था। आपको नम्र होना सिखाया गया था। आपको पढ़ना लिखना सिखाया गया था। लेकिन क्या आपको खुद से प्यार कैसे करना सिखाया गया था? हो सकता है इस सवाल ने आपको सोचने पर मजबूर कर दिया हो। खुद से प्यार करने वाला कॉन्सेप्ट हाल ही में अपनाया गया है। पर पुराने समय में इसे बकवास समझा जाता था, जिसे खास चीज नहीं माना जाता था। लेकिन बहुत से लोग उस प्यार की कमी से जूझ रहे हैं जो उन्हें बचपन में ही मिलना चाहिए था और इस प्यार की कमी ने उन्हें गुस्सैल, दुखी और अकेले इंसान में
बदल दिया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते। यह समरी आपको आपके अंदर के बच्चे को heal करने में मदद करेगी। यह आपको समझाएगी कि वो प्यार, देखभाल और ध्यान जिसके लिए आप बचपन से तड़प रहे हैं अभी भी आपको मिल सकती है और सबसे बड़ी बात, इन सबके लिए आपको किसी parent की जरूरत नहीं है। आप बहुत अच्छे से अपने खुद के parent बन सकते हैं।

Finding the Life We Lost in Living:
Understanding Inner Bonding

Tom की जिंदगी अच्छी ख़ासी है। वो अपने जॉब में अच्छी पोस्ट पर हैं। वो अपनी मर्जी के हिसाब से
जब चाहे वो चीज़ खरीद सकते हैं, इसके लिए उन्हें पैसे बचाने की जरूरत नहीं है। उनकी जिंदगी ऐसी है
जिससे लोगों को जलन होती है. लेकिन फिर भी Tom दुखी महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि चाहे वो
जितना भी अचीव कर लें, उनके लिए वह काफी नहीं होगा। इस emotion से Tom को बहुत तकलीफ
होती है। उन्हें समझ में नहीं आता कि इसे सही तरीके से कैसे एक्सप्रेस करें। इसीलिए ये दर्द गुस्से के रूप में
बाहर आता है। वह हमेशा अपने employees पर हर चीज के लिए चिल्लाते हैं। वह हमेशा गुस्से में रहते
हैं। आखिर इस मामले में कंपनी के CEO को दखल देना पड़ा। Tom कंपनी के asset थे। लेकिन उनके
लिए अपने गुस्से को कंट्रोल करना बेहद ज़रूरी हो गया था वर्ना उनकी नौकरी जा सकती थी। इसके लिए Tom को थेरपी लेने के लिए कहा गया। लेकिन उन्हें वहां नहीं जाना था। उन्होंने कहा कि यह बेकार की चीज़ है। लेकिन उनके पास और कोई ऑप्शन नहीं था। अगर वह नहीं जाते तो उन्हें जॉब से निकाल दिया जाता। इसलिए वो ऑथर मार्गरेट पॉल से मिले। मार्गरेट ने यह पता लगाया कि Tom कितने तनाव में और काम में बोझ तले दबे हुए थे। उन्होंने कहा कि Tom को अपना ख्याल ज्यादा अच्छे से रखना सीखना होगा।

इससे Tom चकित हो गए। अक्सर लोग बड़े हो जाने के बाद अपना ख़याल सीख ही नहीं पाते। एक
बच्चे के रूप में, Tom को अपनी मां और बहन को तकलीफ से बचाने के लिए उनके लिए ढाल बनना
पड़ा। उनके पिता एक बहुत बड़े शराबी थे। बड़े होकर, Tom ने कभी खुद की देखभाल करने के बारे में नहीं
सोचा। भले ही किसी का बचपन खराब न हो, लेकिन खुद से प्यार करना भी आम बात नहीं है। किसी इंसान
को खुद से प्यार करने के लिए कहना normal नहीं लगता। बचपन में, आपने जो भी दर्द सहा है,
उसे नजरअंदाज या नकार दिया होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि बुरे emotion का सामना करते हुए, आपको
नहीं पता था कि क्या करना है। आपका default response बस उसे गुजर जाने देना था।

लेकिन यह बेपरवाही समय के साथ बढ़ती जाएगी। यह आपके बड़े होने के बाद आपके सामने आएगी।
आप खुद को अपनी तरफ आने वाले प्यार और दया के लायक नहीं समझेंगे। इसका नतीजा यह होगा कि
आप लोगों को ठुकराने लगेंगे और खुद को अकेला कर लेंगे। आप टॉम की तरह बन जाएंगे, जिन्हें हर चीज पर गुस्सा आता था। तो क्या आप अपने बचपन की चोट को ठीक करने के लिए कुछ कर सकते हैं? इसका जवाब है हाँ। इसे inner bonding के ज़रिए किया जा सकता है। Inner bonding वह प्रोसेस है जिसमें आप, एक adult के रूप में, अपने अंदर के बच्चे से जुड़ते हैं। Inner bonding खुद को वह प्यार देना है जो आपको बचपन में कभी नहीं मिला था । यह आपके अंदर की कशमकश को समझने और उसे सुलझाने की
एक कोशिश है। हां, आपका खुद के साथ एक inner conflict है यानी अंदरूनी लड़ाई। यह conflict आपकी सोच और feelings के बीच में है। ये सोच तय करती है कि आपको क्या करना चाहिए और क्या महसूस करना चाहिए। मान लीजिए जब आप कुछ करते हैं तो आप अपनी feelings के बारे में नहीं सोचते। कई बार
आप अपनी feelings को नकार भी देते हैं। यह आपके अंदर एक conflict यानी संघर्ष या विरोध
पैदा करता है। आप disconnected महसूस करते हैं। आपके अंदर का बच्चा एक बार फिर तकलीफ महसूस करने लगता है। लेकिन असल में आपके अंदर का बच्चा है कौन? आपके अंदर का बच्चा आपका वह पहलू है जो vulnerable यानी कमज़ोर या आसानी से चोट खाने वाला साइड है। वह नाजुक और sensitive है।

माना जा सकता है। वह आश्चर्य और इमेजिनेशन से भरा है। वह feelings से भरा है और intuitive
है। अब एक adult के रूप में, आप अपने अंदर के बच्चे को किसी साइड में रखकर भूल जाते हैं। आज
की दुनिया में जब सिर्फ logic और knowledge की जरूरत है तो feelings के लिए समय किसके
पास है? लेकिन आपके अंदर के बच्चे की अपनी जरूरतें होती हैं और आपको इन जरूरतों को inner
bonding के जरिए पूरा करना होगा।

INNER BONDING-
Becoming a Loving Adul…
Margaret Paul
Taking the Road Less Traveled: The
Inner Bonding Process

आपकी feelings और vulnerable side ही आपके अंदर का बच्चा है। यह आपकी feelings और अनुभवों को ज़्यादा महत्त्व देता है। आपका अंदर का adult आपके logical side को दिखता है। यह action और knowledge को महत्त्व देता है। पिछले chapter के example में Tom के अंदर का adult ज्यादा ताकतवर था। बहुत से लोगों का यही हाल है। आप जिंदगी भर struggle करने में busy हो जाते हैं। आपके पास अपने emotions को समझने का बिल्कुल समय नहीं है। जब आप एक adult होने के साथ आने वाली इतनी सारी परेशानियों को सुलझाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं तो आप ऐसा कैसे कर सकते हैं?
लेकिन खुद को ठीक करने के लिए हमेशा समय होता है। अपने अंदर के बच्चे की देखभाल करना
आपका adult होने को कम नहीं करता। Inner bonding में आपको उन गलत धारणाओं को
छोड़ना है जो आपने तब बनाई थी जब आप छोटे थे। आपको यह समझना है कि जो चीजें आपको पहले सिखाई गई थीं, हो सकता है कि वह हमेशा सच ना हों। Inner bonding आपके लॉजिकल और emotional पहलुओं को जोड़ना है।

क्या आपको यह समझने में परेशानी हो रही है कि आपके अंदर का बच्चा और अंदर का adult आपके
अंदर कैसे रहते हैं? मान लीजिए, आप अलार्म बजने के कारण जाग गए हैं। आज सोमवार है, और आपको
एहसास होता है कि आपको एक प्रोजेक्ट पर काम करना है। यह आपके अंदर का adult है, जो आपको
बता रहा है। यह आपके अंदर की knowledge और logic की आवाज है। लेकिन साथ ही आप यह
सोचते हैं कि आप सिर्फ़ तब अच्छे से काम कर सकते हैं जब आप अपनी नींद पूरी कर लेने के बाद फ्रेश हो
जाएँगे. यह आपके अंदर का बच्चा है जो बोल रहा है। यह खुद से बात करना है जो कि इंसान तब करता है
जब उसके पास चुनने के लिए एक से ज्यादा choice हों। लोग अक्सर चुनते हुए अपने अंदर के बच्चे पर
ध्यान नहीं देते और इसी से उनके अंदर conflict पैदा होता है। अपने अंदर के बच्चे और adult दोनों
की बात सुनने के लिए थोड़ा समय देने से आप बेहतर और सही option को चुन पाएंगे। आप inner bonding process कैसे शुरू करते हैं? इसके पाँच steps हैं-

पहला स्टेप है, अपने अंदर के conflict को पहचानिए। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जब आप कुछ
महसूस करते हैं उसे स्वीकार कीजिए। जैसे बहुत ज्यादा खा लेने के बाद आप जो महसूस करते हैं उसे
uncomfortable feeling कहा जा सकता है। आपने जो ज्यादा खाना खाया है उससे आपको दर्द
महसूस हो रहा है। इसके बावजूद, आप पेट भर जाने के बाद भी खाते रहे। आपने सिर्फ तब खाना बंद किया जब आप एक और bite नहीं खा पाए। यही adults के साथ होता है जब feelings की बात आती है। वह
खुद को ढकेलते जाते हैं और अपनी feelings को नजरंदाज करते रहते हैं। इस वजह से उनके अंदर का
बच्चा तकलीफ झेलता है। वह इस दर्द और तकलीफ को दबाने की कोशिश में गलत तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका मतलब उन्हें सेक्स या जुए की लत लग सकती है। आपकी feelings आपके शरीर को signal देती हैं। आपको इन signals पर ध्यान देना शुरू करना होगा। हो सकता है जब आप anxious यानी घबराए हुए हों तो आपको अपने पैर कमजोर महसूस होने लगे। जब आप स्ट्रेस में होते हैं तो आपकी छाती में जकड़न महसूस हो सकती है। इन signals पर ध्यान दीजिए।

दूसरा स्टेप है एक प्यार करने वाले एडल्ट की तरह respond कीजिए। एक बार जब आपने इन
feelings को पहचानकर स्वीकार कर लिया, तब आपका response कुछ सीखने की इच्छा से आना
चाहिए। इसका मतलब है आपको यह जानने की इच्छा है कि आपके अंदर का बच्चा ऐसा क्यों महसूस कर
रहा है। दिखाइए कि आपको उसमें interest है, आप उसकी देखभाल करना चाहते हैं, आप उससे हमदर्दी
रखते हैं। खुद से पूछिए कि क्या बात है? आप खुद से भी पूछ सकते हैं कि आप ऐसा महसूस क्यों कर रहे हैं। खुद को यह बोलना बंद कीजिए कि आप जो महसूस कर रहे हैं आपको ऐसा महसूस नहीं करना चाहिए।
तीसरा स्टेप है, अपने अंदर के बच्चे के बात कीजिए। जब आप इस बात पर ध्यान दे रहे हों कि
आपकी feelings आपके शरीर पर क्या असर डालती हैं, तब अपने अंदर के बच्चे को खुला छोड़
दें। अपने आपको इस तरह express कीजिए जैसे आमतौर पर बच्चे करते हैं। चौथा स्टेप है, पूरे पावर के साथ कहें । इस समय, अब आप अपने अंदर की feelings को समझते हैं। अगर आप comfortable हैं, तो आप अपनी feelings महसूस हो सकती है। इन signals पर ध्यान दीजिए।

दूसरा स्टेप है एक प्यार करने वाले एडल्ट की तरह respond कीजिए। एक बार जब आपने इन feelings को पहचानकर स्वीकार कर लिया, तब आपका response कुछ सीखने की इच्छा से आना चाहिए। इसका मतलब है आपको यह जानने की इच्छा है कि आपके अंदर का बच्चा ऐसा क्यों महसूस कर रहा है। दिखाइए कि आपको उसमें interest है, आप उसकी देखभाल करना चाहते हैं, आप उससे हमदर्दी रखते हैं।
खुद से पूछिए कि क्या बात है? आप खुद से भी पूछ सकते हैं कि आप ऐसा महसूस क्यों कर रहे हैं। खुद को
यह बोलना बंद कीजिए कि आप जो महसूस कर रहे हैं आपको ऐसा महसूस नहीं करना चाहिए।
तीसरा स्टेप है, अपने अंदर के बच्चे के बात कीजिए। जब आप इस बात पर ध्यान दे रहे हों कि
आपकी feelings आपके शरीर पर क्या असर डालती हैं, तब अपने अंदर के बच्चे को खुला छोड़
दें। अपने आपको इस तरह express कीजिए जैसे आमतौर पर बच्चे करते हैं।
चौथा स्टेप है, पूरे पावर के साथ कहें । इस समय, अब आप अपने अंदर की feelings को समझते हैं। अगर
आप comfortable हैं, तो आप अपनी feelings की जरूरत होती है। प्यार भरा व्यवहार उन गलत धारणाओं का सामना करना है जो आपमें बचपन से है। हो सकता है कि कुछ लोग आपके प्यार जताने के तरीके से सहमत ना हों। लेकिन इसमें कोई परेशानी नहीं है। आप खुद का इलाज और देखभाल कर रहे हैं।

जैसे जब भी आप अपने बॉयफ्रेंड के साथ झगड़ा करती हैं, आपको बुरा लगता है। आप बिना रोए उससे
बात नहीं कर सकतीं। आपको लगता है आप सांस नहीं ले पा रही हैं। आप उससे झगड़ा या बहस हो जाने की
बात से डरने लगती हैं। आप यह मानने लगती हैं कि आप एक कमजोर इंसान हैं। लेकिन यह आपके अंदर का बच्चा है जो बात कर रहा है। उसकी बात सुनिए। सबसे पहला स्टेप होगा कि आप उस signal पर ध्यान दीजिए जो आपका शरीर आपको दे रहा है। जैसे आपके दिल की धड़कन बढ़ जाना, आपके सीने में जकड़न महसूस होना। जब भी आप अपने बॉयफ्रेंड के सामने आने के बारे में सोचती हैं, आप स्ट्रेस महसूस करती हैं।
उन signals को नजरअंदाज करने के बदले खुद को दूसरे step पर ले जाइए। दूसरा step है,
यह समझना की इन body signals का मतलब क्या है। इस feeling को नजरअंदाज मत कीजिए
| अपने अंदर के बच्चे को बोलने की खुली आजादी दीजिए।

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Becoming a Loving Adul…
Margaret Paul

Inner bonding खुद को यह बताना है कि जो आप महसूस कर रहे हैं वह सही है। आपको अपनी
feelings बिना किसी जजमेंट के express करने की इजाजत है। आप बोल सकती हैं कि मैं ऐसा क्यों
महसूस कर रही हूं? यह इल्जाम लगाने जैसा नहीं है बल्कि यह एक मौका है खुद को और ज्यादा जानने
का। अब आप यह जानना चाहती हैं कि आप वैसा क्यों महसूस कर रही हैं और यही तीसरा स्टेप है। क्यों किसी का सामना करना आपको इतना ज्यादा डरा देता है? क्यों सिर्फ इसके बारे में सोचने से ही आप कमजोरमहसूस करने लगती हैं? कई लोगों को यह स्टेप आसान लगता है  जब वह अपने बचपन की फोटो देखते हैं।
उन्हें यह याद करने में आसानी होती है कि वह बचपन में किस तरह react करते थे, महसूस करते थे और
सोचते थे। अपने अंदर के बच्चे से इस तरह बात कीजिए जैसे वह एक अलग इंसान है। आप बातचीत की शुरुआत यह कहकर कर सकती हैं कि आप क्या फील कर रही हैं । आप कहती हैं कि आप गुस्से और स्ट्रेस में है। फिर आप अपने अंदर की बच्ची से पढ़ सकती हैं कि वह ऐसा क्यों महसूस कर रही है और वह आपको जवाब देती है कि किसी के साथ झगड़ा करना उसे अपने parents की याद दिलाता है। अगर आप और आपका बॉयफ्रेंड झगड़ा करते हैं तो इसका मतलब है कि आप दोनों अलग हो जाएंगे। और यही आपके parents के साथ हुआ था।

फिर आगे आपके अंदर की बच्ची कहती है कि उसे इस बात का भी डर है कि आपका बॉयफ्रेंड अब
आपको प्यार नहीं करता। अगर आप झगड़ा करते हैं तो जल्दी ही अलग हो जाएंगे और आपके अंदर की
बच्ची अकेले हो जाने के ख़याल से बहुत ज्यादा डरी हुई है। सिर्फ इसलिए कि आपका किसी के साथ झगड़ा
हुआ है इसका मतलब यह नहीं कि वह इंसान आपको छोड़ देगा। आपके अंदर की बच्ची यह नहीं जानती
क्योंकि उसे ये कभी सिखाया नहीं गया। उसने ये बात सिर्फ अपने अनुभव से जानी है। यह आपके पैरेंट्स के
साथ हुआ था जब आप छोटी थीं। यह आपके अंदर के adult का काम है कि आपके अंदर के बच्चे को यह
समझने में मदद करे कि यह सोच गलत है।

चौथा स्टेप है किसी बड़ी पावर से बात करना। यह समय है जब आप किसी की guidance या मदद मांगें। खुद से सवाल कीजिए और उसके जवाब के बारे में गहराई से सोचिए। वह सवाल हो सकते हैं, वो क्या बात है जिसकी वजह से मुझे दर्द हो रहा है? मेरे अंदर के बच्चे को अभी क्या चाहिए ताकि वह प्यार महसूस करे? मुझे क्या करना चाहिए? इस हालात में सच्चाई यह है कि झगड़े होना आम बात हैं। आप अपने पार्टनर से हर बात पर हां में हां नहीं मिला सकते। लेकिन झगड़े से जो डर आप महसूस करते हैं वह झूठा है। कोई इंसान सिर्फ एक झगड़े के कारण आपको छोड़कर नहीं चला जाएगा। आपका बॉयफ्रेंड आपको ऐसे ही नहीं छोड़ देगा।

यही वह स्टेज है जब आपको अपने अंदर के बच्चे को प्यार, दया देना है। उसे महसूस कराइए कि कोई
उस पर ध्यान दे रहा है। उसे यह समझने में मदद कीजिए कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है
बल्कि आप उसे उसकी negative feeling से बाहर निकलने में पूरी मदद कर रहे हैं।
चौथे स्टेप में आमतौर पर समय लगता है। जवाब आपको खुद ब खुद नहीं मिलेंगे। आपको अपने अंदर
के बच्चे से लगातार बात करनी होगी। पांचवां और आखिरी स्टेप तभी किया जा सकता है जब आपको यह
पता होगा कि किस प्यार भरे बिहेवियर की जरूरत आपके अंदर के बच्चे को है।

आपको यह समझने की जरूरत है कि action लेना एक ऐसी चीज है जिसे सिर्फ आप कर सकते
हैं। आपको वो इंसान बनना होगा जो आपके अंदर के बच्चे और अंदर के adult को safe और अपनापन
महसूस कराए। आप अभी भी उस प्यार और देखभाल के हकदार हैं, जो आमतौर पर बच्चों के लिए ही माना
जाता है और आपको इसे चाहने में शर्म नहीं करनी चाहिए।
Loving behavior affirmations के रूप में हो सकता है। अपने boyfriend से बात करना आपको डराता है लेकिन एक लड़ाई में भी, उसने आपको कभी भी शारीरिक रूप से या कुछ बोलकर चोट नहीं पहुंचाई। आप देख सकती हैं कि वह अभी भी आपसे प्यार करता है और आपकी परवाह करता है। खुद से कहिए कि तुम प्यार पाने की हकदार हो। आपको कोई आसानी से छोड़कर नहीं जा सकता। आप हर तरह से काबिल हैं और प्यार पाने की हकदार भी.

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Heading for Home: Parenting,
Reparenting, and Staying Bonded

सिर्फ कुछ ही लोग इतने खुशकिस्मत होते हैं कि उन्हें एक अच्छा बचपन मिलता है। ऐसा तब होता
है जब उनकी सभी जरूरतें पूरी होती है। Jane के पास दिन में तीन बार खाने के लिए खाना हमेशा
होता था। उन्हें snacks खाने को मिलते थे। उनके पेरेंट्स उन पर ध्यान भी देते थे। उन्हें अपने इमोशंस
को दिखाने में कभी डर नहीं लगा। वह जो भी महसूस करतीं, उनके पेरेंट्स ना सिर्फ उसे सपोर्ट करते थे
बल्कि उसे समझते भी थे। बड़े होने के बाद Jane emotionally stable, confident और खुद
पर यकीन करने वाली इंसान बनीं। हम में से कुछ लोग इतने खुशकिस्मत नहीं होते। Duke इस बेहतरीन example है. बचपन में उसके पेरेंट्स ने उस पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया। उसके parents ने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि वह हमेशा शराब पीने में लगे रहते थे। Duke को अपना parent खुद बनना पड़ा जो कि एक 5 साल के बच्चे पर बहुत बड़ा बोझ है। उसे नहीं पता था कि अपनी जिंदगी में आने वाली मश्किलों का सामना कैसे किया जाए। Duke बड़ा होकर एक drug addict और जुआरी बन गया।

आपका बचपन जितना भी बुरा क्यों न हो, आपकी जिंदगी बेहतर होने की अभी भी उम्मीद है। आप अभी
भी अपने लिए वो माता-पिता बन सकते हैं जो आपको बचपन में कभी नहीं मिले। इसे reparenting कहा
जाता है। अपने अंदर के बच्चे को यह महसूस कराइए कि उसे कोई प्यार करता है, उस पर कोई ध्यान देता है,
उसका कोई ख्याल रख रहा है, कोई उसे सपोर्ट करता है। Reparenting की शुरुआत दोष देना बंद करने
से होती है। जो बीत गया वह बीत गया, आप उसे बदल नहीं सकते इसीलिए आपको अपने पेरेंट्स को और
खुद को भी, अपने खराब बचपन के लिए दोष देना बंद करने की जरूरत है।
इसके बदले Reparenting इस बात पर फोकस करती है कि आप अपने अंदर के बच्चे का दर्द कैसे
कम कर सकते हैं। आपमें वह ताकत है कि आप अपनी सिचुएशन के लिए अभी और इसी वक्त कुछ कर सकते हैं। अपने अंदर के बच्चे से कुछ सीखने का यह मौका मत छोड़िए। आप दोनों इसके जरिए एक साथ ठीक हो सकते हैं।

एक पैरंट बनने के लिए आपको बहुत सारे प्यार की जरूरत होती है। आपको यह सुनने में जितना भी
नामुमकिन लगे, लेकिन यह हो सकता है कि आपको अपने अंदर के बच्चे को प्यार करने में मुश्किल हो।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपको आपने अंदर का बच्चा अभी प्यार करने लायक नहीं लगता। आपकी
यह सोच आपके अंदर आपके parents से आ सकती है। हो सकता है कि आपके parents आपको
इसलिए प्यार करते हो क्योंकि आप अच्छे नंबर लाते थे या फिर शायद आप उनकी हर बात मानते थे। इसलिए आपका नजरिया प्यार की तरफ हमेशा शर्तों वाला हो गया है। लेकिन असली प्यार में शर्ते नहीं होतीं। आपको आपके अंदर के बच्चे और इंसान से इसलिए प्यार करना चाहिए क्योंकि वह प्यार पाना उसका हक है। अगर यह अभी भी मुश्किल लगे, तो ऐसा मान लीजिए कि आपने उस बच्चे को गोद लिया है और वह एक चार साल बच्ची है। वह अलग-अलग अकेली रहती है, और ज्यादातर समय आपकी बातों का जवाब नहीं देती। उसका ऐसा करना वाजिब भी है, क्योंकि वह पहले neglected और abused हो चुकी है। तो उसे
लोगों पर भरोसा करने में मुश्किल होती है। अपनी उस गोद ली हुई बच्ची के लिए एक safe
माहौल बनाइए। उसमें कोई criticism, छोड़ देने की धमकी और शर्म नहीं होनी चाहिए। अगर वह कोई गलती करती है, तो उसे प्यार से सुधारें। उसके नखरों पर गुस्सा होने के बजाय उसे समझने की कोशिश कीजिए और उसे सही चीजें सीखने में मदद कीजिए। सबसे बढ़कर, उसे बहुत ज्यादा प्यार और देखभाल दीजिए।

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Margaret Paul
Personal Power: Loving Your Inner
Child When You Are Alone

कुछ लोगों के लिए अकेला होना सबसे डरावनी चीजों में से एक होता है। ऐसे लोग हमेशा कोशिश करते
हैं कि वह एक रिलेशनशिप में रहें, ताकि उन्हें कभी भी अकेलापण महसूस ना करना पड़े। उन्हें लगता है
कि वह खुद अपने आप में पूरे नहीं हो सकते। अकेले रहना आपके अंदर के बच्चे को ट्रिगर कर सकता है
और आपको यह याद आ सकता है कि बचपन में आप ठुकरा दिए गए थे। अकेला होना कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिससे आपको डरना चाहिए। अगर आपको उससे डर लगता है तो आपको बस अपने अंदर के बच्चे के लिए प्यार करने वाला parent करने की जरूरत है। जैसे Bert को ही लीजिए। 34 साल की
शादीशुदा जिंदगी के बाद उनकी बीवी Dorothy ने उन्हें छोड़ने का फैसला लिया। वह Bert की physical और emotional ज़रूरतों को पूरा करते करते थक चुकी थीं। दोनों ही पति पत्नी का अपना अपना बिजनेस था। जब Dorothy का बिजनेस अच्छा चलने लगा, तो Bert चिड़चिड़े हो गए और अपने बिजनेस के कारण जब Dorothy ने नए दोस्त बनाए, तो Bert को इस बात पर गुस्सा आया।

Bert Dorothy के सहारे जी रहे थे। वह उन पर खाना खिलाने, उनके दोस्त और पार्टनर बनने का बोझ
डाल रहे थे। यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी जिसे कोई नहीं उठा सकता था। इसलिए Dorothy ने Bert को
छोड़ दिया। Bert लंबे समय तक depressed थे। लेकिन एक दिन उन्हें मार्गरेट पॉल की self-help books
में से एक बुक मिली और उन्होंने inner bonding therapy को आजमाने का मन बनाया। Inner
bonding process
के जरिए Bert अपने बचपनमें वापस चले गए। उन्हें याद आया कि उनकी मां ने
उन्हें उन पर डिपेंडेंट होना सीखाया था। उनकी मां उनकी हर जरूरत को पूरा करती थीं और वह यह भी कहती थी कि Bert को खुद के लिए कुछ करना नहीं आता। इसलिए Bert धीरे-धीरे अपनी मां पर डिपेंडेंट होते चले गए।

उनका उनकी मां के साथ जो रिश्ता था वही रिश्ता वह Dorothy के साथ भी जीना चाह रहे थे। उन्हें
कोई ऐसा चाहिए था जिन पर वह डिपेंडेंट कर सकें। लेकिन inner bonding process के जरिए
Bert को यह एहसास हुआ कि उन्हें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए किसी और की जरूरत नहीं है ।
यह सब वह खुद भी कर सकते हैं। वह अपने अंदर के बच्चे को पूरा attention, देखभाल और प्यार दे
सकते हैं, जिसकी उसे जरूरत है। Bert ने अपने अंदर के बच्चे के साथ लगातार बातचीत के जरिए, ये महसूस किया कि वह कभी भी अधूरा नहीं था। ऐसा उन्हें उनकी माँ ने महसूस कराया था। लेकिन यह सच नहीं था। समय के साथ, Bert ने एक ऐसे support group की मदद ली जो उन लोगों की मदद करता था जो दूसरों पर डिपेंडेंट थे। उन्होंने वहां कुछ दोस्त भी बनाए। धीरे-धीरे, Bert ने अपनी जिंदगी को बदल दिया। उन्होंने exercise करना शुरू किया और अपने business पर focus करने लगे।

आप अकेले भी खुश और सक्सेसफुल हो सकते हैं। समाज ने हमेशा रिलेशनशिप में रहने की जरूरत
को बहुत बड़ा चढ़ा कर सामने रखा है। लेकिन आप खुद अकेले भी अच्छे से जी सकते हैं और ऐसा करना
तब और आसान हो जाता है जब आप अपने अंदर के बच्चे से यह पूछते हैं कि उसे क्या चीज़ ख़ुशी देती है।

Conclusion
सबसे पहले, आपने सीखा कि खुद से प्यार करना ऐसी चीज है जिसे आपको सिखाया नहीं जाता। इसे बेकार
माना जाता है। लेकिन बहुत से adult self-love की कमी से जूझ रहे हैं। यह उनके रिश्तों में, करियर
में और वो ख़ुद को कितना समझते हैं, इन सब में झलकता है। अगर आप खुद से प्यार करना नहीं सीखते हैं, तो आप चिड़चिड़े और दुखी हो जाते हैं। आप अपनी पूरी जिंदगी यह सोचते हुए जीएंगे कि आप काबिल नहीं हैं या आपमें कुछ कमी है। दूसरा, आपने सीखा कि खुद से प्यार करने का पहला कदम है inner bonding therapy| Inner bonding का मतलब है आपका आपके अंदर के बच्चे से जुड़ना। आपके अंदर का बच्चा आपका sensitive, emotional और कमजोर side है।

आपके अंदर का बच्चा जो चाहता है उसे महत्व देना कमजोरी नहीं होती बल्कि यह तो बेहद जरूरी है ताकि
आप एक अच्छी जिंदगी जी सकें। तीसरा, आपने inner bonding process के बारे में सीखा। इसके पांच steps हैं। पहला, अपने अंदर के conflict को पहचानें। दूसरा, एक loving adult के रूप में respond करें। तीसरा, अपने अंदर के बच्चे से बात करें | चौथा, किसी बड़ी पावर से बात करना । पांचवां, उसके लिए एक्शन लें। चौथा, आपने सीखा कि आप ऐसे parent बन सकते हैं जो आपको बचपन में कभी नहीं मिले थे। इसे
reparenting कहा जाता है। Reparenting में आपके अंदर के बच्चे की जरूरतों को पूरा करना आता है। यह उसे loved, nurtured, और supported महसूस कराना है। Reparenting inner bonding process के जरिए की जा के सकती है। यह बहुत ही गलत है कि हममें से कुछ लोगों का बचपन अच्छा नहीं होता। प्यार करना ऐसी चीज है जो naturally होनी चाहिए। लेकिन खुद से प्यार करने के लिए कभी भी देर नहीं होती। इससे आपको और confident महसूस होता है, आप ज्यादा खुश रहते हैं। और सबसे ज्यादा बढ़कर, यह आपको एहसास दिलाता है कि सिर्फ आप ही वह इंसान हैं जिसकी आपको जरूरत है।


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