Google Company Case Study In Hindi Pdf

Google Company Case Study सर्गे ब्रिन और लैरी पेज- गूगल के फाउंडर (Sergey Brin & Larry Page – the founders of google) गूगल दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला वेब बेस्ड सर्च इंजन ही नहीं है बल्कि ये एक मल्टीनेशनल टेक जाएंट है जो आज बड़े पैमाने पर कई इंटरनेट प्रोडक्ट और सर्विस जैसे गूगल क्रोम, गूगल एड, यूट्यूब, गूगल मैप जैसी कई सर्विसेस का ओनर भी है. गूगल दुनिया की सबसे बड़ी चार टेक कंपनीयों में से एक माना जाता है जिसका टेक इंडस्ट्री के एक बड़े पार्ट पर कब्ज़ा है जैसे अमेज़न, फेसबुक और एप्पल. लैरी पेज ने सबसे पहले popularity के बेसिस पर वेब पेज बनाने के बारे में सोचा। उस वक्त लैरी पेज स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस में पी. एच. डी. कर रहे थे. असल में लैरी ने गूगल सर्च इंजन अपने क्लासमेट सर्गे ब्रिन के साथ मिलकर एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तौर पर बनाया था, आपने देखा होगा कि आज ज्यादातर लोग इंटरनेट के इस्तेमाल के साथ ही गूगल यूज़ करना शुरू कर देते है. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा कि वो जीनियस था कौन जिसके दिमाग में सबसे पहले गूगल का आईडिया आया? ये दोनों ब्रिलिएंट पी. एच. डी. स्टूडेंट आज दुनिया के सबसे अमीर लोगों में गिने जाते है. अगर आप इस बारे में और जानना चाहते है तो आइए, A < आईडिया आया? ये दोनों ब्रिलिएंट पी. डी. स्टूडेंट आज दुनिया के सबसे अमीर लोगों में गिने जाते है. अगर आप इस बारे में और जानना चाहते है तो आइए, पढ़ते है उस जोड़े की कहानी जिन्होंने इंटरनेट के शुरुवाती दिनों में गूगल क्रिएट किया था. लैरी पेज का शुरूआती जीवन (Early years of Larry page) लॉरेंस पेज मिशिगन शहर में जन्मे थे, उनके पिता डॉक्टर कार्ल विक्टर पेज मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस और आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के प्रोफेसर थे. उनकी मदर ग्लोरिया भी कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की टीचर थी. इसलिए लैरी को बचपन से ही कंप्यूटर और टेक्नोलोजी के बारे में जानने और समझने का मौका मिल गया था क्योंकि उनके घर में कई फर्स्ट जेनेरेशन पर्सनल कंप्यूटर थे और कई टेक मैगज़ीन भी आती थी. इसलिए कोई हैरानी की बात नहीं अगर पेज के बड़े भाई, कार्ल पेज जूनियर, आज एक जाने-माने इंटरनेट एंटप्रेन्योर है. पेज ने मिशिगन यूनिवर्सिटी से पढाई की थी. वो अपने कॉलेज के सोलर कार टीम का पार्ट थे जो सस्टेनेबल vehicle टेक्नोलोजी एक्सप्लोर कर रही थी, जिसके बारे में पेज आज भी काफी पैशनेट है. उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बैचलर की डिग्री ली और उसके बाद जल्द ही पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया. जब वो स्टैंडफोर्ड में थे तो उन्ही दिनों उन्होंने एक रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया था जिसकी वजह से गूगल का लिया. जब वो स्टैंडफोर्ड में थे तो उन्ही दिनों उन्होंने एक रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया था जिसकी वजह से गूगल का जन्म हुआ. इस प्रोजेक्ट में उन्हें इंटरनेट और वेबसाइट के बीच लिंक करने वाले पैटर्न को ऐनालाईज़ करना था. इस प्रोजेक्ट में उन्होंने अपने क्लासमेट सर्गे ब्रिन की हेल्प ली जो उन्ही की तरह स्टैंडफोर्ड के साइंस ग्रेजुएट थे. Exposure to computers and technology from a young age लैरी पेज एक ऐसे इंसान के बेटे थे जो कंप्यूटर की खोज या उसका रास्ता बनाने वाले माने जाते थे. इंटरनेट के शुरुवाती दौर से ही लैरी के दोनों पेरेंट्स कंप्यूटर को लेकर पैशनेट थे और यही वजह थी कि उनके घर में कई सारे फर्स्ट जेनरेशन कंप्यूटर रखे हुए थे. अब इसमें हैरानी की कोई बात नहीं कि ऐसे माहौल में रहते हुए लैरी बचपन से ही टेक्नोलज़ी और कंप्यूटर की तरफ अट्रेक्ट होने लगे थे. घर के माहौल ने उन्हें लाइफ में सही डायरेक्शन भी दी जिसने उनके अंदर कंप्यूटर के लिए गहरी दिलचस्पी पैदा कर थी. कारण था कि उन्होंने अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई के लिए सब्जेक्ट के तौर पर कंप्यूटर साइंस चूज़ किया था . ” wired.com को दिए एक इंटरव्यू में पेज ने बताया कि ” उनका बचपन से ही एक इन्वेंटर बनने का सपना था और वो नए-नए गैजेट बनाकर दुनिया को बदलना technology from a young age लैरी पेज एक ऐसे इंसान के बेटे थे जो कंप्यूटर की खोज या उसका रास्ता बनाने वाले माने जाते थे. इंटरनेट के शुरुवाती दौर से ही लैरी के दोनों पेरेंट्स कंप्यूटर को लेकर पैशनेट थे और यही वजह थी कि उनके घर में कई सारे फर्स्ट जेनरेशन कंप्यूटर रखे हुए थे. अब इसमें हैरानी की कोई बात नहीं कि ऐसे माहौल में रहते हुए लैरी बचपन से ही टेक्नोलज़ी और कंप्यूटर की तरफ अट्रेक्ट होने लगे थे. घर के माहौल ने उन्हें लाइफ में सही डायरेक्शन भी दी जिसने उनके अंदर कंप्यूटर के लिए गहरी दिलचस्पी पैदा कर दी थी. यही कारण था कि उन्होंने अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई के लिए सब्जेक्ट के तौर पर कंप्यूटर साइंस चूज़ किया था . wired.com को दिए एक इंटरव्यू में पेज ने बताया कि ” उनका बचपन से ही एक इन्वेंटर बनने का सपना था और वो नए-नए गैजेट बनाकर दुनिया को बदलना चाहते है”. बाद में मिशिगन यूनिवर्सिटी में जब वो एक अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट थे, तो वहां एक स्टूडेंट लीडरशिप प्रोग्राम” LeaderShape, से बड़े मोटिवेट हुए जिसकी टैगलाइन थी “a healthy disregard for the impossible.” जिसका मतलब है “हम नामुमकिन शब्द को नहीं मानते”. Google GIGL (गूगल के शुरुवाती दिन ) The beginning years of Google इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब आने के कुछ ही दिनों इसने टेलीकम्यूनिकेशन की दुनिया में कदम रखा जब पेज अपने वेब बेस्ड सर्च इंजन पर काम कर रहे थे. वैसे उन दिनों वेब एक्सप्लोर करने के लिए पहले से कई और सर्च इंजन मौजूद थे लेकिन ये उतने एफिशिएंट नहीं थे. ये सर्च इंजन यूजर के वेब पेज पर उसकी क्वेरी से मैच करते वेब पेज डिस्प्ले कर देते थे, और होता ये था कि कई सारे ऐसे वेब पेजेस आ जाते थे जिनका यूजर की क्वेरी से कोई लेना-देना नहीं होता था. पेज का आईडिया था कि एक ऐसा मेथड क्रिएट किया जाए जिससे ये पता चल सके कि एक दिए हुए पेज से लिंक्ड कितनी सारी वेबसाईट अवलेबल है. पेज जानते थे कि दूसरी वेबसाइट से नंबर ऑफ़ लिंक्स पर बेस्ड वेब पेज को रैंक से रखना ज्यादा सही रहेगा, ताकि पता चल सके कि वो वेब पेज यूजर की सर्च क्वेरी से कितना मिलता-जुलता है. तो इस तरह पेज ने अपने इस आईडिया को बेस बनाकर एक algorithm पर काम करना शुरू कर दिया. इस प्रोजेक्ट में उनकी मदद के लिए उनके साथ सर्गे ब्रिन भी थे जो उनके क्लासमेट और एक डेटा माईनिंग एक्सपर्ट थे. पेज और सर्गे ने मिलकर एक ” पेजरँक” काम करना शुरू कर दिया. इस प्रोजेक्ट में उनकी मदद के लिए उनके साथ सर्गे ब्रिन भी थे जो उनके क्लासमेट और एक डेटा माईनिंग एक्सपर्ट थे. पेज और सर्गे ने मिलकर एक ” पेजक” algorithm क्रिएट किया और इसी के बेस पर दोनों ने अपने रिसर्च पेपर लिखे थे, पहला “Dynamic Data Mining: A New Architecture for Data with High Dimensionality” और उसके बाद “The Anatomy of a Large-Scale Hypertextual Web Search Engine”. पेज और ब्रिन ने एक सर्च इंजन के प्रोटोटाइप (प्रोटोटाइप मतलब शुरूआती मॉडल) पर काम किया जिसे उस वक्त उन्होंने ” बैकरब” नाम दिया था. इसके बारे में लोगों को पता चला और बैक रब को ज़बरदस्त रिव्यु मिलने लगे. दोनों अब तक बैकरब को डेवलप करने के लिए एक सर्वर नेटवर्क भी क्रिएट कर चुके थे जो उन्होंने लैरी पेज के होस्टल रूम में रखे कुछ सस्ते पर्सनल कंप्यूटर्स यूज़ करके बनाया था. यहाँ तक कि दोनों ने अपने प्रोजेक्ट के लिए डिसकाउंटेड टेराड्राइव्स खरीदने के लिए अपने क्रेडिट कार्ड के मैक्सिमम लिमिट तक यूज़ किये. बैकरब पर काम करने के दौरान ही उन्होंने इसका नाम बदलकर गूगल रख दिया. ये नाम उन्हें सूझा था एक लार्ज नंबर से जिसे गूगोल (googol) कहते है—नंबर ] के पीछे 100 जीरो—ये नाम उन्होंने एक बुक में पढ़ा था जिसका टाईटल था” मैथमेटिक्स एंड द इमेजिनेशन” HIG I५17 || ve पूरा। नाS VIII से जिसे गूगोल (googol) कहते है—नंबर ] के पीछे 100 जीरो—ये नाम उन्होंने एक बुक में पढ़ा था जिसका टाईटल था” मैथमेटिक्स एंड द इमेजिनेशन” और जिसके राईटर थे Edward Kasner और James Newman. ये नाम इसलिए चूज़ किया गया क्योंकि ये इन्फोर्मेशन की उस अथाह गहराई को रीप्रेजेंट करता है जो गूगल अपने यूजर्स को प्रोवाइड करता है. गूगल का मिशन है “to organize the world’s information and make it universally accessible and useful.” जिसका मतलब है “दुनिया भर की इनफार्मेशन को इस तरह organize करना ताकि दुनिया के किसी कोने से भी इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सके और लोगों के लिए useful बनाया जा सके”. (गूगल मिशन स्टेटमेंट) गूगल को जो चीज़ यूनीक बनाती है वो है उसका algorithm पेजक जिसे पेज और ब्रिन ने डेवलप किया था जो वेबसाईट को पोपुलेरिटी और relevance के हिसाब से रैंक करती है. और ये डिसाइड होता है उन वेब पेज के श्रू जो ओरिजिनल साईट से लिंक्ड रहते है. ये सर्च रीजल्ट क्राईटेरिया वही सर्च रीज्ल्ट डिस्प्ले करेगा जो यूजर्स की एंटर की गई सर्च क्वेरी के साथ पूरी तरह से मैच कर जाए. शूरू-शुरू में जब उन्होंने अपने सर्च इंजन algorithm का लाईसेंस लेने की कोशिश की तो कोई भी इस प्रोडक्ट को लेना नहीं चाहता था क्योंकि तब ये डेवलप हो ही रहा था. पेज और ब्रिन ने लेकिन – algorithm का लाईसेंस लेने की कोशिश की तो कोई भी इस प्रोडक्ट को लेना नहीं चाहता था क्योंकि तब ये डेवलप हो ही रहा था. पेज और ब्रिन ने लेकिन हार नहीं मानी. वो गूगल में काम करते रहे, इसमें इम्प्रूवमेंट लाते रहे क्योंकि वो इसे एक प्रॉफिटेबल प्रोडक्ट बनाकर एक दिन पब्लिक कर देना चाहते थे. 2002 – (लैरी पेज ने गूगल को $3 बिलियन में याहू को बेचने से मना कर दिया ) Larry page refuses to sell Google for $3 billion to Yahoo 2002 में याहू एक बड़ी टेक जाएंट बनकर उभर रही थी, जो उस वक्त इंटरनेट की दुनिया में टॉप पर थी, ये उन्ही दिनों की बात है जब याहू का ध्यान गूगल के फ़ास्ट ग्रोईंग सर्च इंजन की तरफ गया. तो याहू ने गूगल को $3 बिलियन में खरीदने का ऑफर दे डाला, जो उस वक्त के हिसाब से किसी भी स्टार्ट-अप के लिए काफी बड़ी रकम थी. याहू के सीईओ टेरी सेमेल का मानना था कि उस वक्त गूगल को तो इतना रेवेन्यू भी नहीं मिल रहा था. याहू ने गूगल में पोटेंशियल देखी कि आने वाले वक्त में गूगल इंटरनेट की दुनिया में छा जाएगा. लेकिन इसके बावजूद और ब्रिन क्विक मनी के लालच में नहीं पड़े. सिर्फ तीन साल पहले तक वो गूगल को $750,000 में भी बेचने को तैयार थे लेकिन आज वो इसे एक ऐसे प्रोडक्ट में तब्दील कर चुके थे जो बेशकीमती था. आज इंटरनेट की दुनिया पर सिर्फ गूगल की मोनोपोली चलती है जबकि याहू जितनी तेज़ी से उभरा था, उतनी ही तेज़ी A ९ इंटरनेट की दुनिया पर सिर्फ गूगल की मोनोपोली चलती है जबकि याहू जितनी तेज़ी से उभरा था, उतनी ही तेज़ी से नीचे गिरा और एंड में इसे वेरिज़ोन (Verizon) ने खरीद लिया और आज इसकी ई-मेल सर्विस कोई यूज़ नहीं करता. ये चीज़ हमे सिखाती है कि अपने प्रोडक्ट की वर्थ जानना और एक फ्यूचर विज़न रखना कितना इम्पोर्टेट होता है. पेज और ब्रिन गूगल में इन्वेस्ट करते रहे. दोनों हमेशा इसे एक्सपैंड और डेवलप करने में बिजी रहते थे, इसलिए उन्होंने ऐसे बड़े ऑफर की भी परवाह नहीं की और गूगल को बेचने से मना कर दिया. क्योंकि उन्हें अपने प्रोडक्ट की पोटेंशियल मालूम थी और उनके इस राईट डिसीजन ने ही आज उन्हें मल्टी-बिलेनियर बना दिया. (शुरुवाती फंडिंग) Initial Funding आखिरकार लैरी और ब्रिन की कड़ी मेहनत और कमिटमेंट रंग ले ही आई, क्योंकि उन्हें अपना पहला इन्वेस्टर मिल चूका था. Andy Bechtolsheim, सन माइक्रोसिस्टम के को-फाउंडर थे जिन्हें सिर्फ एक शोर्ट गूगल डेमो देखने के बाद ही टेक्नोलोजी पसंद आ गई थी. उन्होंने पेज और ब्रिन से कहा” सारी डिटेल्स वगैरह डिस्कस करने के बजाए क्यों ना मैं तुम्हे सीधे चेक ही दे दूं?” (लैरी पेज- गूगल इंक के को-फाउंडर) और उन्होंने गूगल इंक को $100,000 का चेक तब लिखकर दिया था जब गूगल एक लीगल फर्म के तौर पर अभी रजिस्टर्ड भी नहीं हुई थी. फिर जल्द ही A < सन माइक्रोसिस्टम के को-फाउंडर थे जिन्हें सिर्फ एक शोर्ट गूगल डेमो देखने के बाद ही टेक्नोलोजी पसंद आ गई थी. उन्होंने पेज और ब्रिन से कहा” सारी डिटेल्स वगैरह डिस्कस करने के बजाए क्यों ना मैं तुम्हे सीधे चेक ही दे दूं?” (लैरी पेज- गूगल इंक के को-फाउंडर) और उन्होंने गूगल इंक को $700,000 का चेक तब लिखकर दिया था जब गूगल एक लीगल फर्म के तौर पर अभी रजिस्टर्ड भी नहीं हुई थी. फिर जल्द ही सितम्बर 4,1998 में गूगल बाकायदा एक रजिस्टर्ड कंपनी बनी. फंडिंग के शुरुवाती दौर में उन्होंने एक बार फिर से $900,000 तक फंड रेज़ कर लिया था. कुछ इन्वेस्टर्स जो इनके लिए फ़रिश्ता बनकर आये थे उनमे से थे टेक पायनियर अमेज़न. कॉम के फाउंडर जेफ़ बेज़ोस. होस्टल के एक छोटे से कमरे से लेकर, गैराज और फिर कई टेम्पररी ऑफिस के बाद आखिरकार 1999 में गूगल ने माउंटेन व्यू, कैलिफ़ोर्निया में कुछ बिल्डिंग लीज पर लेकर अपना खुद का ऑफिस खोला. तब से लेकर आज तक गूगल का हेडक्वार्टर इसी ऑफिस में है. आज इन सभी बिल्डिंग को मिलाकर गूगलप्लेक्स बोला जाता है और गूगलप्लेक्स अपने एम्प्लोईज़ को एक क्रिएटिव और अनोखे वर्क एनवायरमेंट में कई सारी एंटरटेनमेंट फेसिलिटी ऑफर करने के लिए ही जाना जाता है. Google GIGL (गूगल की सफलता) The success of google 2000 में गूगल ने टेक्स्ट ओनली एडवरटीज़मेंट बेचने शुरू किये जो सर्च की-वर्ड्स पर बेस्ड होते थे. टेक्स्ट बेस्ड एड्स और एक होम पेज़ जिसमे कोई ग्राफिक्स नहीं होता था, डाउनलोड में काफी टाइम लेता था. एड स्पेस को जो चीज़ यूनीक बनाती थी, वो ये थी कि इसमें डिस्प्ले होने वाले एड्स यूजर के इंटरेस्ट पर बेस्ड होते थे. 2004 में गूगल ने अपनी इनिशियल पब्लिक ऑफ़रिंग(IPO) की जिससे $1.67 की कमाई हुई जिससे गूगल की मार्केट वैल्यू $23 बिलियन हो गई. गूगल के कई सारे पुराने एम्प्लोई जिन्होंने गूगल में इन्वेस्ट किया था, रातो-रात मिलेनियर बन गए जबकि सिर्फ 27 साल के लैरी पेज और सर्गे ब्रिन मल्टी-मिलेनियर हो गए थे और गूगल के स्टॉक प्राइस जो आसमान छू रहे थे, अचानक ही इंडीविजुअल इन्वेस्टर्स के लिए हॉट केक बन गए जो हाथो-हाथ बिक रहे थे. लैरी, सर्गे और एरिक स्मिड (Eric Schmidt), गूगल के तीन टॉप एक्जीक्यूटिव्स ने अपनी ईयरली सैलरी घटाकर सिर्फ एक डॉलर कर ली और बोनस वगैरह लेना बंद कर दिया था. तो अब उनकी सारी कमाई गूगल की स्टॉक मार्केट परफोर्मेंस पर डिपेंडेंट थी. (गूगल इंक का फैलाव) Expansion of Gooale. Inc पर 545८ या, (गूगल इंक का फैलाव) Expansion of Google. Inc साल 2006 के एंड तक गूगल में काम करने वाले लोगों की संख्या 10,000 से भी ज्यादा हो चुकी थी और कंपनी $10 बिलियन से भी ज्यादा का ईयरली रेवेन्यू कमा रही थी. आज लैरी पेज और सर्गे ब्रिन दुनिया के टॉप 10 सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में आते है. गूगल के वर्किंग एन्वायरमेंट में इनोवेटिव थिंकिंग पर हमेशा से ही फोकस किया जाता रहा है. जिस तेज़ी से गूगल आज आगे बढ़ रही है, उसका सारा क्रेडिट जाता है इसकी इनोवेशन ड्राइव और नई टेक्नोलोजी को, जो आसानी से इस्तेमाल किये जा सकते है. गूगल ने कई सारे इन-हाउस प्रोडक्ट तो डेवलप किये ही है साथ कुछ इनोवेटिव टेक प्रोडक्ट भी बनाये है जो सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर फर्स को इंटेलीजेंट वे में सपोर्ट करते है. गूगल के कुछ बेहद सक्सेसफुल इन्वेस्टमेंट में से एक है youtube , जिसे गूगल ने 2006 में $1.65 बिलियन में खरीदा था. गूगल ने जब यूट्यूब खरीदा तो उस वक्त ये उतना प्रॉफिटेबल नहीं था, पर सब जानते है कि आज यूट्यूब दुनिया का मोस्ट पोपुलर प्रॉफिट generating वीडियो स्ट्रीमिंग बन चूका है. यूट्यूब खरीदने के अगले ही साल में गूगल ने एक सॉफ्टवेयर कंपनी डबल क्लिक भी खरीद ली थी. डबलक्लिक टेक्नोलोजी यूजर के सर्च बिहेवियर को यूज़ करके ad डिस्प्ले करती थी. डबलक्लिक ने गूगल टेक्नोलोजी में और भी वैल्य एद कर दी थी जिसकी वजह से गगल A टेक्नोलोजी यूजर के सर्च बिहेवियर को यूज़ करके ad डिस्प्ले करती थी. डबलक्लिक ने गूगल टेक्नोलोजी में और भी वैल्यू एड कर दी थी जिसकी वजह से गूगल आज की ऑनलाइन एडवरटाईजिंग में revolution ला पाया और उसे डोमिनेट कर पाया है. गूगल एनालिटिक्स वेबसाईट ओनर्स को अपने वेबसाईट का ट्रैफिक स्टडी करने में हेल्प करता है. गूगल एडसेंस की मदद से वेबसाईट ओनर अपनी साइट पर ad रख सकते है जिसके लिए एडवरटाईजर उन्हें पर-क्लिक बेसिस पर पे करते है. आज की डेट में गूगल अपना 90% से भी ज्यादा रेवेन्यू एडवरटाईजिंग के जरिये ही कमाती है. (इनोवेटिव थिकिंग पर फोकस) focus on innovative thinking जैसे-जैसे टाइम गुजरता गया गूगल की पोपुलेरिटी बढती चली गई और साथ ही कंपनी की ग्रोथ भी लेकिन इतने सालो बाद आज भी गूगल के माउंटेन व्यू, कैलिफोर्निया वाले ऑफिस में एक ऐसा इनफॉर्मल माहौल है जो इनोवेशन को सबसे ज्यादा वैल्यू देता है और उसे प्रोमोट करता है. गूगल में, एक चीफ कल्चर ऑफिसर का काम है एक ऐसा भरा एनवायर्नमेंट मेंटेन और डेवलप करना जहाँ क्रिएटिव थिंकिंग को उभरने का मौका दिया जाता है. गूगल एम्प्लोईज़ से उम्मीद की जाती है कि वो अपने वर्किंग ऑवर्स में से 20% अपने इंडीपेंडेंट प्रोजेक्ट में लगाये. गूगल की इनोवेशन टाइम ऑफ़ स्ट्रेटेज़ी ने कई नए गूगल प्रोडक्ट्स के आईडियाज़ दिए है जिन्हें योग से में लगाये. गूगल की इनोवेशन टाइम ऑफ़ स्ट्रेटेजी ने कई नए गूगल प्रोडक्ट्स के आईडियाज़ दिए है जिन्हें सक्सेसफूली लांच किया गया और जो आज एक एसेट बन गए है. कोई हैरानी की बात नहीं कि 2007 में फायूँन मैगजीन ने अपनी ईयरली टॉप 100 की रैंकिंग में गूगल को काम करने के लिए दुनिया की बेस्ट कंपनी का दर्जा दिया था. “If you’re not doing some things that are crazy, then you’re doing the wrong things.” यानी “अगर आप कुछ ऐसे काम नहीं कर रहे हैं जिसे पागलपन कहा जा सके तो आप असल में गलत काम कर रहे हैं”. ये शब्द हैं गूगल को-फाउंडर लैरी पेज के जो उन्होंने 2013 wired मैगजीन को दिए अपने इंटरव्यू में कहे थे. पेज मानते है कि टेक वर्ल्ड का असली मकसद सिर्फ इन्क्रीमेंटल चेंज लाना नहीं है बल्कि रेवोल्यूशनरी एरिया ऑफ़ ग्रोथ में इन्वेस्ट करना है. एक टेक कंपनी को टाइम के साथ relevant बने रहने के लिए लेटेस्ट टेक्नोलोजी में शामिल करना ही चाहिए चाहे वो कितनी भी इम्पॉसिबल क्यों ना लगे. पेज 10X रुल फॉलो करने के लिए जाने जाते है, जिसका मतलब है कि एक टेक कंपनी का टारगेट अपने प्रोडक्ट्स में 10% इम्प्रूवमेंट लाना नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे बहुत मामूली सी बढ़त होगी. बल्कि एक टेक कंपनी का गोल होना चाहिए अपने कॉम्पटीटर्स से 10 गुना या 1000% बैटर प्रोडक्ट्स क्रिएट करना जोकि तभी का दर्जा दिया था. “If you’re not doing some things that are crazy, then you’re doing the wrong things.” यानी “अगर आप कुछ ऐसे काम नहीं कर रहे हैं जिसे पागलपन कहा जा सके तो आप असल में गलत काम कर रहे हैं”. ये शब्द हैं गूगल को-फाउंडर लैरी पेज के जो उन्होंने 2013 wired मैगजीन को दिए अपने इंटरव्यू में कहे थे. पेज मानते है कि टेक वर्ल्ड का असली मकसद सिर्फ इन्क्रीमेंटल चेंज लाना नहीं है बल्कि रेवोल्यूशनरी एरिया ऑफ़ ग्रोथ में इन्वेस्ट करना है. एक टेक कंपनी को टाइम के साथ relevant बने रहने के लिए लेटेस्ट टेक्नोलोजी में शामिल करना ही चाहिए चाहे वो कितनी भी इम्पॉसिबल क्यों ना लगे. पेज 10X रुल फॉलो करने के लिए जाने जाते है, जिसका मतलब है कि एक टेक कंपनी का टारगेट अपने प्रोडक्ट्स में 10% इम्प्रूवमेंट लाना नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे बहुत मामूली सी बढ़त होगी. बल्कि एक टेक कंपनी का गोल होना चाहिए अपने कॉम्पटीटर्स से 10 गुना या 1000% बैटर प्रोडक्ट्स क्रिएट करना जोकि तभी मुमकिन होगा जब एक फ़ास्ट पेस्ड, लेजर-फोकस्ड एफर्ट अप्लाई करके प्रोडक्ट को इनोवेट और इम्प्रूव करने की कोशिश की जायेगी. Google GIGL नए प्रोडक्ट और सर्विस (New services and products) अपने शुरुवात के दिनों से ही गूगल लगातार नए-नए एप्लीकेशन और सर्विस launch करता रहा है. अब जैसे कि गूगल का एक इन्वेंशन था, नेविगेशन गूगल मैप का पोपुलर टूल जो आज हमारी लाइफ का एक इम्पोर्टेट पार्ट बन चूका है. गूगल अर्थ की वजह से एक आम आदमी भी आज सैटेलाईट इमेज़ देख सकता है और जब मन चाहे दुनिया के किसी भी हिस्से को जूम करके एक्सप्लोर कर सकता है. गूगल का ऐसा ही एक और एम्बिशियस प्रोजेक्ट है-गूगल बुक सर्च जिसका मकसद लोगों को एक बड़े पैमाने पर ऑनलाइन अवलेबल बुक्स प्रोवाइड कराना है, जिसमे पब्लिक अबलेबल बुक्स फ्री में पढ़ी और डाउनलोड की जा सकती है और इसके धू ई-बुक्स भी श्रू बेची जाती है. गूगल का फ्री ई-मेल सर्विस जी-मेल पोपुलर ई-मेल सर्विस में से एक है जो अपने बाकि कॉम्पटीटर्स के मुकाबले यूजर्स को ज्यादा स्टोरेज देता है. एक वेब ब्राउज़र, गूगल क्रोम भी गूगल ने ही क्रिएट किया A सापास ५५ पापा पापाता मुकाबले यूजर्स को ज्यादा स्टोरेज देता है. एक वेब ब्राउज़र, गूगल क्रोम भी गूगल ने ही क्रिएट किया है जोकि एक हाईली प्रोफिटेबल प्रोडक्ट है जो यूजर्स के ब्राउजिंग हैबिट को मोनिटर करता है और एडवरटाईजिंग के लिए जरूरी डेटा भी कलेक्ट करता है. गूगल का एक और पोपुलर फोटो एडिटिंग अप्लिकेशन है पिकासा. कुछ और भी एप्लीकेशंस है जो गूगल ने बनाये है जैसे गूगल ड्राईव, गूगल डॉक्स एक वैल्यूबल ऑनलाइन टूल है जो डाक्यूमेंट्स लिखने और एडिट करने के काम आता है और साथ ही यूजर्स इसमें दूसरे यूजर्स के साथ जुड़ भी सकते है. इसके अलावा गूगल ने गूगल ट्रांसलेट भी क्रिएट किया जिसमे आप कई सारी लेंगुएज़ को आपस में ट्रांसलेट कर सकते है और alternative ट्रांसलेशन को कंपेयर कर सकते है और रेटिंग भी दे सकते है. गूगल की एक और बड़ी अचीवमेंट है इसका एंड्राइड स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम जिस पर दुनिया के तमाम स्मार्टफोन डिपेंड करते है, ये भी गूगल की ही देन है जो एड्स, सर्च ट्रैफिक के श्रू एड्स जेनरेट करता है और गूगल के प्ले स्टोर से हुई हर परचेज़ का एक परसेंट चार्ज करता है. लैरी पेज ने गूगल को लेकर अपना लक्ष्य कुछ इस तरह से एक्सप्रेस किया है “a big 12:09PM voe voBA 4G LTE LTE A ९ । -IN 1।। चार्ज करता है. लैरी पेज ने गूगल को लेकर अपना लक्ष्य कुछ इस तरह से एक्सप्रेस किया है “a big company that has the nimbleness and soul and passion of a startup.” यानी एक ऐसी बड़ी कंपनी जिसमें एक स्टार्ट अप का जुनून, बुद्धिमानी और फुर्तीलापन समाया हुआ है. (2011 SUCCESS Achiever of the Year) 2015 में अल्फाबेट की पेरेंट कंपनी के अंडर गूगल के पर्सनल और डिविजन को दोबारा बनाया गया और नई पेरेंट कंपनी के प्रेजिडेंट थे सर्गे और लैरी. सुदंर पिचाई, जो गूगल में काफी टाइम से काम कर रहे थे, उन्हें गूगल का सीईओ बनाया गया. अल्फाबेट और इसकी ब्रांच, जिसमे गूगल भी शामिल है , आज दुनिया के टॉप 10 सबसे इन्फ्लुएंशल और वैल्यूएबल फर्स में शामिल है. (आज की तारिख में गूगल) Google today गूगल आज भी इंटरनेट में सबसे ज्यादा विजिट किया जाने वाला वेबसाईट है जिसके दुनिया भर में एक । मिलियन से भी ज्यादा सर्वर फैले हुए है जो तकरीबन हर रोज़ 3.5 बिलियन के करीब सर्च कवरेज़ प्रोसेस करते है. 2016 में गूगल के अनुसार उनके दुनिया के 40 अलग-अलग देशो में 70 ऑफिस है और कई सारे डेटा सेंटर है जो पूरी दुनिया में फैले है. All Done? Finished 40 अलग-अलग देशो में 70 ऑफिस है और कई सारे डेटा सेंटर है जो पूरी दुनिया में फैले है. 2006 से गूगल की ब्रांड वैल्यू धीरे-धीरे बढती रही है जिसमे अचानक 2014 में काफी तेज़ी आई. 2020, गूगल के लिए एक रिकॉर्ड ब्रेकिंग ईयर साबित हुआ जब इसकी वैल्यू में करीब 323.6 बिलियन यू.एस. डॉलर का ईज़ाफा हुआ. (गूगल की ग्लोबल ब्रांड वैल्यू) 2020 में गूगल का रेवेन्यू all टाइम हाई 181.69 बिलियन यू.एस. डॉलर रिकॉर्ड किया गया जिसमे से 146.9 बिलियन यू.एस. डॉलर तो सिर्फ गूगल की एडवरटाईजिंग सर्विस ने ही अकेले generate की थी. Conclusion टेक वर्ल्ड में गूगल की मल्टी बिलियन मोनोपोली है, जिसका सारा क्रेडिट जाता है इसके मेहनती फाउंडर लैरी पेज और सर्गे ब्रिन को जो हमेशा से ही इम्पॉसिबल को पॉसिबल बनाने की कोशिश करते आए है. पेज की 10X philosophy उनके एम्प्लोईज़ को अपने काम में लगातार एक इम्प्रूवमेंट लाने और कुछ ऐसे इनोवेशन करने के लिए मोटिवेट करती है जो यूजर के एक्सपीरिएंस को और बेहतरीन बना सके. जो चीज़ गूगल को बाकियों से अलग बनाती है और इसके सबसे प्रोफिटेबल एडवरटाईजिंग सर्विस को पॉसिबल बनाने की कोशिश करते आए है. पेज की 10x philosophy उनके एम्प्लोईज़ को अपने काम में लगातार एक इम्प्रूवमेंट लाने और कुछ ऐसे इनोवेशन करने के लिए मोटिवेट करती है जो यूजर के एक्सपीरिएंस को और बेहतरीन बना सके. जो चीज़ गूगल को बाकियों से अलग बनाती है और इसके सबसे प्रोफिटेबल एडवरटाईजिंग सर्विस को ड्राइव करती है, वो है यूजर डेटा की वेल्थ जो एडवरटाईजिंग एक्सपीरिएंस को पर्सनलाईज़ बनाते हुए उसे वही ad शो करेगी जो यूजर की चॉइस और पसंद से मैच करते हो. ऐसे जीनियस से हम एक लेसन ये सीख सकते है कि अपना प्रोडक्ट अपने कॉम्पटीटर्स के मुकाबले 10 गुना ज्यादा बैटर बनाओ, अपनी वर्थ पहचानो और कभी भी हार मत मानो. अगर आपने कोई प्रोडक्ट बनाया है जो आपके कस्टमर्स को वैल्यू दे सकता है, ईजी टू यूज़ है और आपके कॉम्पटीटर्स पर भारी पड़ सकता है तो इस बात का पूरा-पूरा chance है कि आप भी गूगल के फाउंडर्स की तरह अपनी सक्सेस स्टोरी लिख सकते हो और दुनिया में एक अलग पहचान बना सकते हो.

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