(Full Book) Think and Grow Rich Napoleon Hill Pdf In Hindi

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
1. इंट्रोडक्शन
एक इंसान, जिसने थॉमस अल्वा एडियन के साथ
बिज़नेस पार्टनरशिप करने की सोची।
हमारे विचारों
अनलिमिटेड पॉवर होती है। अगर इन
विचारों में पर्पस और मजबूत इरादे जुड़े हुए हों तो
आप अमीर बन सकते है और वह सब कुछ हासिल कर
सकते है, जो आपने सोचा है।
एडविन सी. बर्न्स ने यह खोज निकाला कि कैसे विचार
यानी थॉट की पॉवर से अमीर बना जा सकता है। इस
खोज में सक्सेस पहली कोशिश में हासिल नहीं हुई,
बल्कि धीरे-धीरे हासिल हुई। इस महान रहस्य की खोज
की शुरुआत, बर्न्स की उस इच्छा से हुई, जो उन्हें
महान एडिशन का बिज़नेस पार्टनर बनाने के लिए चैन
से सोने नहीं दे रही थी । बर्न्स की उस विल पॉवर की
सबसे बड़ी बात यह थी कि वह क्लियर थी कि उन्हें
एडिसन के साथ काम करना है, ना कि एडिशन के
ऑफिस में काम करना है। आप बर्न्स की कहानी को
ध्यान से सुनें, उनकी सोच हकीकत में कैसे बदली?
फिर आपको वे 3 रूल बेहतर समझ में आएँगे, जो
आपको अमीर बनाते हैं।

जब बर्न्स के मन में यह विचार कौंधा, तब वह इस
हालत में नहीं थे कि वह इस पर कोई कदम उठा सके।
उनके रास्ते में दो चुनौतियाँ थी, पहली यह कि एडिशन
से उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई थी, ना ही एडिशन
उन्हें जानते थे। दूसरा यह, उनके पास रेल का भाड़ा देने
का इतना पैसा नहीं था कि वह ऑरेंज, न्यू जेर्सी तक
पहुँच सके। ये चुनौतियाँ इतनी बड़ी थी कि ज़्यादातर
लोगों के कांफिडेंस को डगमगा दे और उनकी सोच यहीं
पर दम तोड़ दे।
लेकिन उनके इरादे इतने कमजोर नहीं थे। उन्होंने ठान
ली थी। उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि बिना टिकेट
मालगाड़ी से सफ़र करके ईस्ट ऑरेंज पहुंच गए।
उन्होंने एडिशन के लेबोरेटरी में खुद का परिचय दिया,
और कहा कि वह इस इन्वेंटर के साथ बिज़नेस करने
आए थे। काफी समय के बाद एडिशन ने इस पहली
मुलाकात का खुलासा कुछ इस तरह किया था, वह
मेरे सामने एक आम टूरिस्ट की तरह खड़ा था, लेकिन
उसके चेहरे का तेज देखकर यह पता चल गया था कि
वह जिस कारण से यहाँ आया है, उसके लिए पक्का
इरादा कर के आया है । इतने साल के एक्सपीरियंस में
मुझे यह नॉलेज हो गया था कि अगर किसी चीज को
दिल से चाहो तो सारी कायनात तुम्हे उससे मिलाने की
कोशिश में जुट जाती है। मैंने भी उसके मजबूत इरादों
—–Am or —-

कोशिश में जुट जाती है। मैंने भी उसके मजबूत इरादों
को भाँपकर उसे एक मौका दे दिया था और उसने इस
बात को पूरी तरह से दिमाग में बैठा लिया था कि उसे
इस सक्सेस को पाकर ही रहना है। धीरे-धीरे उसके
काम ने भी यह साबित कर दिया कि मैंने उसे मौका
देकर कोई गलती नहीं की थी। उस नौजवान बर्न्स ने
उस वक्त एडिशन से क्या कहा यह उतना इम्पोर्टेन्ट
नहीं था, जितना कि उन्होंने इस बारे में सोचा कि
उन्हें एडिशन के साथ में काम करना है। इस बात पर
एडिशन ने भी अपनी सहमति जताई थी।
अगर थॉट के पॉवर की यह बात हर रीडर तक पहुँच
जाए तो उन्हें पूरी किताब पढ़ने की कोई जरुरत नहीं है।
बर्स अपने पहले ही इंटरव्यू के बाद एडिशन के
बिज़नेस पार्टनर नहीं बन गए थे। बल्कि उन्हें एडिशन
के ऑफिस में बहुत ही कम सैलरी में काम करने का
मौका दिया गया था। यह काम ऐसा था, जो एडिशन के
लिए ज़्यादा काम का नहीं था पर बर्न्स के लिए बहुत
इम्पोर्टेन्ट था। इस मौके ने बर्न्स को अपने होने वाले
पार्टनर को अपने बिज़नेस स्किल दिखाने का मौका
दिया था। उनके होने वाले पार्टनर वहाँ उनके काम को
परख सकते थे।
कई महीने बीत चुके थे, पर ऐसा कुछ भी ख़ास नहीं
हो रहा था जिससे बर्न्स अपने उस गोल तक पहुँच
सके, जो उन्होंने अपने दिलो-दिमाग में संजो रखा

हा रहा था जिसस बन्स अपन उस गाल तक पहुच
सके, जो उन्होंने अपने दिलो-दिमाग में संजो रखा
है। पर उनके मन में कुछ ना कुछ ऐसा चल रहा था,
जिसका रिजल्ट बाद में निकला। पर तब तक वह
subconsciously एडिशन के बिज़नेस पार्टनर
बनने के अपने विचार पर और ज़ोर देकर सोचने लगे
थे।
साइकोलोजिस्ट ने यह सही कहा है “जब कोई विचार
दिमाग पर हावी हो जाए, तो वह हकीकत में आपके
सामने आ जाता है।’ बर्न्स पूरी तरह एडिशन के साथ
काम करने के लिए तैयार थे और वह तब तक अडिग
खड़े रहे, जब तक उन्होंने वह हासिल नहीं कर लिया,
जिसे वह इतने समय से खोज रहे थे।
उन्होंने कभी इस बात पर विचार नहीं किया कि इतना
परेशान होने की क्या जरुरत है, कुछ नहीं तो चलो
सेल्समैन की जॉब असानी से मिल जायेगी। बल्कि
उन्होंने यह विचार किया, मैं यहाँ पर एडिशन के साथ
बिज़नेस करने के लिए आया हूँ। मैं तब तक पीछे नहीं
हदूंगा, जब तक मैं इस मकसद में जीत नहीं जाता, चाहे
बची हुई सारी जिंदगी यहीं पर गुजारनी पड़े। यह सच है
कि अगर आप एक पर्पस को लेकर पूरी जिंदगी जीते है
तो आप एक अलग ही कहानी लिख सकते हैं।
शायद उस समय बर्न्स को यह बात पता नहीं थी,
लेकिन उनकी मजबूत विल पॉवर और पक्के इरादे ने
बडी-से-बडी बाधाओ को पार करके उन्हें वह मौका

शायद उस समय बर्न्स को यह बात पता नहीं थी,
लेकिन उनकी मजबूत विल पॉवर और पक्के इरादे ने
बड़ी-से-बड़ी बाधाओ को पार करके उन्हें वह मौका
दिला दिया था जिसकी वह तलाश कर रहे थे। मौकों
की एक खास बात होती है, ये बिल्कुल अलग अंदाज में
हमारे सामने आते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं जैसा आपने
सोचा होता है, उससे बिल्कुल अलग दिशा से भी ये
मौके आने लगते हैं । ऐसा कह सकते है कि मौकों की
यह चालाकी होती है कि वे पिछले दरवाजे से आते है
और कई बार तो दुर्भाग्य और कुछ पलों की हार के
रूप में भी सामने आ जाते है। शायद यही कारण है कि
ज़्यादातर लोग इन मौकों को पहचानने में चूक जाते है।
उस समय एडिशन ने एक नई डिवाइस खोजी थी,
जिसका नाम “एडिशन डिस्टार्टिंग मशीन” था। बाद में
उसे “एडिफोन” नाम से भी जाना गया। एडिशन के
सेल्समेन उस मशीन के लिए ज़्यादा excited नहीं थे।
उन्हें ऐसा लग रहा था कि इसे बेचने के लिए उन्हें कुछ
ज़्यादा ही मेहनत करनी पड़ेगी । बर्न्स को इसी मौके
की तो तलाश थी। उन्होंने इस मौके का फ़ायदा उठाया
और तुरंत उस मशीन को बेचने की अपनी इच्छा जाहिर
की। यह वह मशीन थी, जिसके लिए दुनिया में सिर्फ दो
ही लोग excited थे, एक बर्न्स और दूसरा उस मशीन
को बनाने वाला। उन्होंने इतने बेहतरीन तरीके से इस
मशीन को बेचा कि एडिशन ने बर्न्स को उस मशीन को
पूरे देश के मार्केट में डिलीवर करने का कॉन्ट्रैक्ट ही दे

उनके पास बिलकुल भी पैसा नहीं था। वह ज़्यादा पढ़े
लिखे भी नहीं थे। यहाँ तक कि उनके पास कोई पावर
भी नहीं थी। पर उनके पास हिम्मत थी, विश्वास था और
विल पॉवर थी कि वह जीत सकते हैं। इन सभी ताकतों
के साथ वह उस महान इन्वेंटर का दायाँ हाथ बन बैठे।
आइए अब उस इंसान की कहानी पढ़ते है, जिनके पास
अमीर बनने के कई मौक़ा थे, पर उन्होंने अपने गोल से
सिर्फ तीन फीट की दूरी पर काम करना बंद कर दिया।
सोना, सिर्फ तीन फीट दूर था
थोड़ी हार के कारण कोशिश करना छोड़ देना,
फेलियर का सबसे आम कारण होता है। हर किसी को
कभी-न-कभी इस गलती का एहसास जरूर होता है।
आर यू डर्बी, जो बाद में देश के सक्सेसफुल
insurance एजेंट बने, वह अपने अंकल की कहानी
बताते है कि उस समय लोग सोने (gold) के पीछे
पागल थे, तब उनके अंकल पर भी औरों की तरह सोने
का भूत सवार हो गया था और वह वेस्ट की तरफ सोना
खोजने और अमीर बनने निकल पड़े। शायद उन्होंने
कभी यह नहीं सुना था कि हमारा दिमाग सोने का
सबसे बड़ा manufacturer है ना कि जमीन। वह
खुदाई करने के लिए निकल पड़े। बेशक यह मुश्किल
था लेकिन वो ठान कर गए थे ।
कर्ट टाानों की शानटरी के बाट .रन्टें कमाता

कई हफ्तों की मजदूरी के बाद, उन्हें एक चमचमाता
हुआ मेटल दिखाई दिया। उन्हें इस मेटल को बाहर
निकालने के लिए मशीन की जरुरत पड़ी। जिसके लिए
वह तुरंत अपने घर वीलियम्सबर्ग, मेरीलैंड वापस आ
गए।
अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को इस कामयाबी के
बारे में बताया। उनकी बातो ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया
था और सभी ने मिलकर पैसा इकट्ठा किया और उस
मशीन को खरीदकर, उसी खान में भेज दिया। डर्बी
और उसके अंकल फिर से उसी खान में काम करने
पहुँच गए।
जब उस चमचमाती मेटल के पहले बैच को गलाने
और उसे pure करने के लिए भेजा गया तो उसका
रिजल्ट देखकर उन्हें इस बात का विश्वास हो गया कि
colorado की सबसे बड़ी खान उनके पास ही है।
उनकी उम्मीदे तूफान की तरह दिन ब दिन बढ़ती जा
रही थी। तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ कि उस सोने
की खान से सोना गायब ही हो गया। वे दुखी और
निराशा के चरम पर पहुंच गए। उन्हें उस खान में कहीं
सोना दिखा ही नहीं। उन्होंने सोने के सिरे (टिप) को
ढूँढने की कोशिश की लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं
लगा.
अंत में उन्होंने उस मशीन को बेच देने का फैसला

अंत में उन्होंने उस मशीन को बेच देने का फैसला
ले लिया। वो एक कबाड़ी को कुछ सौ डॉलर में उस
मशीन को बेचकर घर वापस आ गए। आपने सुना
होगा कि कुछ कबाड़ी सच में बेवकूफ होते है पर वह
आदमी उनमे से नहीं था। उसने दिमाग लगाया और
एक माइनिंग इंजीनियर को वो खान दिखाने के लिए
बुलाया। उसने यह देखकर अनुमान लगाया कि सोने
का सिरा सिर्फ तीन फीट नीचे पाया जा सकता है, जहाँ
पर डर्बी और उसके अंकल ने खुदाई रोक दी थी और
हकीकत में हुआ भी वही!
वह कबाड़ी उस खान से निकले मेटल की वजह से
करोड़पति बन गया था क्योंकि वह जानता था कि
किसी काम को छोड़ने के पहले किसी एक्सपर्ट की राय
लेना जरुरी होता है। उस मशीन की खरीदने के लिए
रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पैसा लिया गया था जिसका
पेमेंट डर्बी ने किया था क्योंकि उन लोगो को उस
नौजवान पर विश्वास था। डर्बी को उस मशीन का पैसा
चुकाने में कई साल लग गए।
इतना नुक्सान होने के बाद वह इस गम से तब निकल
पाए, जब वह एक insurance कंपनी में एजेंट बने
और उन्हें पता लगा कि थॉट की पॉवर के दम पर सोना
बनाया जा सकता है।
वह उस घटना को भूले नहीं थे, जिसने उनकी जिंदगी
बदल दी। उन्होंने असीम दौलत हासिल करने से सिर्फ

बनाया जा सकता है।
वह उस घटना को भूले नहीं थे, जिसने उनकी जिंदगी
बदल दी। उन्होंने असीम दौलत हासिल करने से सिर्फ
तीन फीट की दूरी पर कोशिश करना छोड़ दिया था।
डर्बी को उस एक्सपीरियंस से बहुत फ़ायदा हुआ, उन्हें
पता चल गया था कि किसी की ‘ना’ का मतलब ‘ना’ ही
हो यह जरूरी नहीं है। उन्होंने अपने काम को बीच में
छोड़ने की आदत को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ दिया
और यह तय कर लिया कि उन्हें कोशिश तब तक करनी
है, जब तक सोना ना मिल जाए यानी जब तक इंसान
“हाँ” ना कह दे।
सक्सेस का रास्ता कुछ पलों के फेलियर से होकर
गुजरता है। ज़्यादातर लोग काम को बीच में ही एक
फेलियर के बाद छोड़ देते है। उन्हें पता होना चाहिए कि
फेलियर सिर्फ कुछ देर का इंतज़ार है, हार नहीं।
अमेरिका के लगभग 500 सक्सेसफुल लोगों ने यह
स्वीकार किया है कि उन्हें सक्सेस तब मिली, जब हार
उनके बिल्कुल करीब थी।
फेलियर इस मामले में बहुत चालाक होती है। वह लोगो
के मन भटकाने के लिए अकसर तभी आती है, जब
सक्सेस बहुत क़रीब होती है।

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Grow Rich
Napoleon Hill
अटलता का पचास सेंट लेसन
‘हार्ड नॉक्स यूनिवर्सिटी’ से डिग्री लेने के कुछ दिनों बाद
मिस्टर डर्बी ने insurance एजेंट के रूप में काम
करना शुरू कर दिया क्योंकि उन्हें सोने की खान वाले
किस्से से यह पता लग गया था कि जरुरी नहीं की ‘ना’
का मतलब “ना” ही हो।
एक दोपहर वह अपने अंकल के गेहूँ पीसने वाली
पुरानी मशीन मिल में बैठे हुए थे। उनके अंकल के पास
बहुत जमीन थी। जिसके आस-पास उन खेतो में काम
करने वाले मजदूर रहा करते थे। डर्बी को बैठे हुए कुछ
ही देर हुआ था कि तभी, धीरे से दरवाजा खुला और
एक मजदूर की छोटी सी बच्ची अंदर घुस आई और
दरवाजे के ठीक बगल में खड़ी हो गई।
अंकल ने उसकी ओर देखा और बड़ी तेज़ी से गुर्राते हुए
बोले “तुझे क्या चाहिए?”
उस बच्ची ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, “मेरी
मम्मी ने अपने पचास सेंट मंगाए हैं” |
‘मैं नहीं दूंगा” अंकल ने चिल्लाते हुए जोड़ा ‘दफा हो
जाओ यहाँ से’ ‘ठीक है’ उस लड़की ने जवाब दिया पर
वह कहीं नहीं गई।

फिर अंकल अपने काम पर लग गए और काम में इतना
मसरूफ़ हो गए कि उन्हें पता ही न चला कि वह लड़की
अभी भी खड़ी थी। कुछ देर बाद जब उन्होंने पलटकर
देखा तो उस बच्ची को खड़ा पाया। वह फिर से चिल्लाए
“जाती हो यहाँ से या फिर मैं भगाऊँ?”
उस लड़की ने फिर से यह जवाब दिया “ठीक है” पर
उस जगह से हिली तक नहीं।
अंकल अनाज की बोरी को मिल में डालने जा रहे थे पर
उन्होंने उसे रखकर एक लोहे का डंडा उठाया और ऐसा
भयानक चेहरा बनाकर चल दिए जैसे उसे आज मार ही
डालेंगे।
डर्बी की साँसे रुक गई। उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे
वह आज अपने सामने एक बच्ची की हत्या देखने
जा रहे थे। उन्हें पता था कि उनके अंकल बड़े गुस्सैल
और निर्दयी आदमी है। जैसे ही अंकल उस बच्ची के
नजदीक पहुँचे, वह लड़की अपनी जगह से एक कदम
आगे बढ़ आई और अंकल की नजरो से नजर मिलाते
हुए हिम्मत करके बोली “वह पैसे मेरी मम्मी के है, उन्हें
दे दो”।
अंकल वहीं रुक गए, उस बच्ची को एक मिनट तक
घूरते रहे फिर धीरे से डंडे को नीचे जमीन पर फेंक
दिया और अपने जेब में हाथ डालते हुए आधा डॉलर
निकालकर उस बच्ची को पकडा दिया। उस बच्ची ने

दिया और अपने जेब में हाथ डालते हुए आधा डॉलर
निकालकर उस बच्ची को पकड़ा दिया। उस बच्ची ने
वह पैसा लिया और बिना नजर हटाए जाने लगी।
उसके जाने के बाद अंकल एक चबूतरे के ऊपर बैठ
गए और खिड़की से आसमान की तरफ दस मिनट तक
निहारते रहे और शायद इस घटना के बारे में सोचते रहे।
मिस्टर डर्बी भी यही सोच रहे थे। उन्होंने पहली बार
देखा था कि खेतो में काम करने वाले किसान की
बेटी ने अपने से बहुत बड़े और ऊँचे आदमी का इतनी
अटलता या फिर हिम्मत के साथ सामना किया था।
आखिर उसने ऐसा क्या कर दिया कि उनके अंकल का
सूरज के जैसा गुस्सा, चंद्रमा के समान शांत हो गया?
इस बच्ची के पास आखिर ऐसा कौन सा जादू था, जो
उसने इतने बड़े आदमी पर चला दिया। डर्बी का दिमाग
इन्ही सवालों के चारो तरफ घूम रहा था पर उन्हें कोई
ठीक ठीक जवाब नहीं मिला।
जानते हो, डर्बी ने उस अनोखी घटना के बारे में ऑथर
को उसी पुरानी मिल में ले जाकर बताया था। ठीक उसी
जगह पर जहाँ उनके अंकल बैठकर खिड़की
बाहर
झाँकते हुए आसमान की तरफ देख रहे थे। हम लोग
उसी पुरानी मिल में खड़े थे, जो अब किसी काम की
नहीं रह गई थी और डर्बी फिर से उसी को दोहराते हुए
सवाल कर बैठे “आखिर उस बच्ची के पास ऐसी कौन
सी ख़ास ताकत थी, जिसने मेरे अंकल के इरादों को

IPI २ मा पासपा पार SS
सवाल कर बैठे “आखिर उस बच्ची के पास ऐसी कौन
सी ख़ास ताकत थी, जिसने मेरे अंकल के इरादों को
एकदम से बदल दिया?
इस सवाल का जवाब इसी किताब में एक प्रिंसिप्ल के
रूप में बताया गया है।
अपने दिमाग को चौकन्ना कर लीजिए और यह
पढ़ने की कोशिश कीजिए कि आखिर वह कौन सी
एक्स्ट्राआर्डिनरी पॉवर थी, जिसने उस बच्ची का बचाव
किया था। अगले चैप्टर में आपको इस अनलिमिटेड
पॉवर की एक झलक दिखाई देगी । इस बुक में
कहीं-न-कहीं आपको यह पता लग जाएगा कि इस
असीम शक्ति का अपने फ़ायदे और जरुरत के लिए
कैसे इस्तेमाल करना है। यह एक अकेले थॉट के
रूप में भी आ सकता है या फिर किसी प्लान या फिर
मकसद के रूप में भी। फिर से आपको अपने अतीत
में जाना पड़ सकता है, जब आपने कुछ खोया था,
आप हताश हुए थे। अब इस शक्ति को जानने के बाद,
आप वह चीज़ फिर से हासिल कर सकते है, जो आपने
खोया था।
मैंने डर्बी को यह बताया कि उस बच्ची ने अनजाने में ही
उस शक्ति का इस्तेमाल किया था। तभी मिस्टर डर्बी के
मन में उनके तीस साल की सक्सेसफुल insurance
एजेंट का रास्ता एक एक कर फिल्म की तरह चल
पड़ा। उन्हें यह एहसास हो गया कि insurance

एजेंट का रास्ता एक एक कर फिल्म की तरह चल
पड़ा। उन्हें यह एहसास हो गया कि insurance
एजेंट के रूप में सक्सेस किसी कागज पर मिली डिग्री
की वजह से नहीं थी बल्कि वह उस एक कीमती सबक
की वजह से थी, जो उस बच्ची से उस दिन उन्होंने
सीखा था।
मिस्टर डर्बी ने यह बताया जब किसी चीज़ के होने
का चांस कम होता नज़र आता है या फिर मेरे
insurance करने की संभावना कम हो जाती है,
तभी मुझे उस बच्ची का चेहरा याद आता है जो अपने
बचाव में डटी रही। फिर मेरा मन खुद कहता है असल
में ‘ना’ का मतलब “ना” नहीं होता। आपको नहीं पता
होगा कि मेरे insurance ख़रीदने वाले सबसे ज्यादा
वही लोग है, जिन्होंने पहले “ना” कहा था।
उन्होंने याद किया कि वह सोना हासिल करने से सिर्फ़
तीन फीट पहले ही रुक गए थे पर उस एक्सपीरियंस ने
उन्हें सक्सेसफुल होना सीखा दिया था। उसने डर्बी को
यह सीखा दिया कि सक्सेस उसे नहीं मिलती जो उसके
लिए कोशिश करते है बल्कि सक्सेस उसे मिलती है जो
सक्सेस पाने तक कोशिश करते है।
मिस्टर डर्बी और उनके अंकल, उस मजदूर की बेटी
और सोने की खान, ये तीनो कहानिया बेशक हर उस
इंसान को पढ़नी चाहिए, जो लाइफ insurance
एजेंट के रूप में अपनी जिंदगी संवारना चाहता है। उन
-…
….

इंसान को पढ़नी चाहिए, जो लाइफ insurance
एजेंट के रूप में अपनी जिंदगी संवारना चाहता है। उन
सभी के लिए ऑथर मिस्टर डर्बी के वे दो एक्सपीरियंस
बताते है, जिन्होंने insurance की वजह से हर साल
उन्हें दस लाख से ज़्यादा डॉलर कमाने की ताकत दी
थी।
जिंदगी अजीब है और आसान भी। कभी उतार मिलता
है कभी चढ़ाव, कभी सक्सेस हाथ लगती है और कभी
फेलियर, कभी खुशियाँ मिलती है तो कभी निराशा। पर
इन सभी से हमें कुछ-न-कुछ सीखने को जरूर मिलता
है।
डर्बी को ही देख लीजिए, सिर्फ दो लाइन ने उनकी
जिंदगी बदल दी थी । असल में उन्होंने उस फेलियर
को ऐसे ही नहीं जाने दिया बल्कि उसके बारे में
सोचा और उसमे से उन्हें जीवन के कुछ रहस्य मिले।
लेकिन मुश्किल यह है कि कोई फेल होना चाहता
ही नहीं है। लोगो को पता होना चाहिए कि फेलियर
के एक्सपीरियंस से ही सक्सेस का दरवाजा खुलता
है। कई बार फेलियर ही हार को जीत में बदलने का
एक्सपीरियंस देती है, यही सिखाती है कि आखिर
बाजीगर कैसे बना जाए।
इससे पहले कि हम उन 3 प्रिंसिपल्स की ओर बढ़े,
आपको यह सुझाव बड़े ध्यान से सुनना चाहिए कि जब
लोग अमीर बनना शुरू करते है, तो वे इतनी स्पीड से

आपको यह सुझाव बड़े ध्यान से सुनना चाहिए कि जब
लोग अमीर बनना शुरू करते है, तो वे इतनी स्पीड से
आगे बढ़ते है कि लोग उन्हें देखते ही रह जाते है और
मन में यह सोचते है कि इतने साल यह कहाँ छुपा हुआ
था। यह एक चौकाने वाली बात लग सकती है क्योंकि
हजारो सालों से आम जनता को यही लगता आया है
कि पैसा कमाने के लिए बहुत ज़्यादा मेहनत करनी
पड़ती है।
जब आप थॉट की पॉवर से अमीर बनने के प्रिंसिपल्स
को जान लेंगे, तब आप उस स्टेट ऑफ़ माइंड में पहुँच
जाएँगे जहाँ से अमीर बनने की शुरुआत होती है।
जिनके पास भी पक्के गोल होते है, वे कम या फिर ना
के बराबर मेहनत में ही सब हासिल कर लेते है। आप
और आपमें से कई लोग इस बात को जानना चाहते
होंगे कि किस तरह से उस माइंडसेट को हासिल किया
जाए जहाँ से अमीर बनने की राह की शुरुआत होती
है। इसके रीसर्च में मेरी 25 सालों की मेहनत है, मैंने
लगभग 25000 लोगो से बात की। आखिर मुझे भी
जानकारी चाहिए थी कि इस तरह से इंसान अमीर कैसे
बनता है।
एक बहुत ही जरुरी सच बताने जा रहा हूँ : 1929 में
देश में मंदी के दौर की शुरुआत हो गई थी और वह
अब तक के सबसे निचले लेवल पर पहुँच गई थी। कुछ
समय बाद जैसे ही प्रेसिडेंट रूसवेल्ट ने राष्ट्रपति भवन
में शपथ ली और ऑफिस में काम करना शुरू किया,

में शपथ ली और ऑफिस में काम करना शुरू किया,
पूरा मार्केट इस तरह स्पीड पकड़ने लगा, जैसे कुछ
हुआ ही न हो। प्रेसिडेंट का आना ठीक वैसा ही था जैसे
एक मोमबत्ती अँधेरे कमरे में धीरे-धीरे उजाला भर देती
है और किसी को पता भी नहीं चलता। ठीक उसी तरह
धीरे-धीरे मन के डर को विश्वास में भी बदला जा सकता
है।
जैसे जैसे आप इन प्रिंसिपल्स को जानकार, इन्हें
अप्लाई करना शुरू करते है, आपकी फाइनेंसियल
कंडीशन बेहतर होने लगती है और आप ठीक उस
आदमी की तरह हो जाएँगे, जो किसी भी चीज़ को छू दे
तो वह सोना बन जाता है। यह आपको नामुमकिन लग
रहा है, है ना? मुझे तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता।
हम इंसानों की यह कमजोरी होती है कि एक आम
आदमी ‘इम्पॉसिबल’ शब्द को बहुत तवज्जो देता है।
वह इस बात को पूरी तरह से मन में स्वीकार कर चुका
है कि हर प्रिंसिप्ल सभी के लिए लागू नहीं होते। हर
काम, हर कोई नहीं कर सकता। यह बुक उन लोगो को
जरूर सक्सेसफुल बनाएगी, जो इन रूल्स पर अपनी
जिंदगी और अपना सब कुछ दाँव पर लगाने के लिए
तैयार हैं।
मैंने बचपन में एक डिक्शनरी खरीदी और जानते हैं
सबसे पहला काम मैंने क्या किया? मैंने इम्पॉसिबल
शब्द को उस डिक्शनरी से काट फेंका। ऐसा करने
में कोर्ट जार्ट उठीं है .या या लिंटी

सबसे पहला काम मैंने क्या किया? मैंने इम्पॉसिबल
शब्द को उस डिक्शनरी से काट फेंका। ऐसा करने
में कोई बुराई नहीं है , आप भी अपनी जिंदगी से
इम्पॉसिबल शब्द को जड़ से उखाड़ फेंक सकते है।
सक्सेस उन्हें मिलती है, जिनका ध्यान सक्सेस पर होता
है, फेलियर उन्हें मिलती है जिनका ध्यान फेलियर पर
होता है।
यह बुक उन लोगो की मदद करेगी, जो अपने दिमाग के
विचारों को फेलियर के डर से हटाकर सक्सेस की ओर
फोकस करना चाहते है।
हम सभी में एक और कमी यह है कि हम अपने
एक्सपीरियंस, अपने फेलियर और अपनी आदतों को
देखकर हर किसी के बारे में राय बना लेते है। कुछ लोग
इस बुक को पढ़ते हुए कह सकते है कि अमीर बनने का
कोई प्रिंसिप्ल नहीं होता क्योंकि वे इस बात को जानते
ही नहीं कि अमीर लोगो का स्टेट ऑफ़ माइंड कैसा
होता है? आखिर उनकी पूरी जिंदगी गरीबी, कंजूसी
और फेलियर में जो गुजरी है।
लाखो लोग हेनरी फोर्ड की सक्सेस को सिर्फ़ इत्तेफ़ाक
या फिर लक मानते है लेकिन ऐसा नहीं है, हजार लोगों
में से सिर्फ एक इंसान को ही हेनरी फोर्ड की सक्सेस
का राज़ पता होता है और वे लोग इस तरह की बात
कहने की गलती नहीं करते। मैं हेनरी फोर्ड का एक
किस्सा बताता हूँ, जो इस राज़ से पर्दा उठा देगा।

जग १ DILIPा | २Vio ला पारा
कहने की गलती नहीं करते। मैं हेनरी फोर्ड का एक
किस्सा बताता हूँ, जो इस राज़ से पर्दा उठा देगा।
जब फोर्ड ने उस फेमस V-8 मोटर को बनाने के
बारे में सोचा था तो उन्होंने एक ऐसा इंजन बनाने का
फैसला किया जिसमें एक ब्लॉक में आठ सिलिंडर
हो। यह डिजाईन पेपर पर तो बन गई थी पर जब इसे
प्रैक्टिकल में एक इंजन का रूप देने की बारी आई तो
सभी इंजीनियर ने हाथ खड़े कर लिए। उन इंजीनियरों
का मानना था कि ब्लॉक में आठ सिलिंडर रखकर यह
इंजन नहीं बनाया जा सकता।
फोर्ड ने कहा “मुझे किसी भी हालत में यह इंजन
चाहिए. “यह तो नामुमकिन है” सभी इंजीनियर्स ने
कहा.
‘*आप काम करना शुरू कीजिए” फोर्ड ने कहा “चाहे
जितना भी वक्त लग जाए, आप तब तक लगे रहिए,
जब तक सक्सेसफुल नहीं हो जाते।
इंजीनियरों ने काम शुरू किया, 6 महीने बीत गए, पर
कुछ हाथ न लगा। छह महीने और बीत गए पर अभी
भी कुछ हासिल नहीं हुआ। इंजीनियरों ने हर पैंतरा
अपना लिया था पर क़ामयाबी उनसे कोसो दूर थी।
लेकिन यहाँ पर एक गौर करने वाली बात ये थी कि एक
साल बाद भी सक्सेस उनके हाथ नहीं लगी थी।
साल के अंत में फोर्ड ने सभी इंजीनियरों को फिर से

साल के अंत में फोर्ड ने सभी इंजीनियरों को फिर से
बुलाया और काम के प्रोग्रेस के बारे में पूछा। इस बार
फिर से सभी ने एक साथ जवाब दिया “हमें प्रोजेक्ट को
जारी रखने का कोई रास्ता नही मिल रहा है”।
“जाइए, फिर से काम पर लग जाइए” फोर्ड ने कहा.
“हर हाल में मुझे यह इंजन चाहिए और मुझे विश्वास है
कि आप इसमें कामयाब हो जाएँगे”।
वे फिर से काम में लग गए। अब कि बार ना जाने कौन
सा जादू हो गया था क्योंकि फोर्ड ने इस राज़ को जान
लिया था। आखिर फोर्ड की अटलता की एक बार फिर
से जीत हुई । फोर्ड ने साबित किया कि इम्पॉसिबल और
अटलता के बीच जंग में जीत पक्के इरादे की ही होती
है। अब आपको भी फोर्ड की सक्सेस का राज़ पता चल
गया है, अब आप भी करोड़ो रुपए कमा सकते है।
हेनरी फोर्ड इसलिए सक्सेसफुल है क्योंकि उन्होंने
सक्सेस के प्रिंसिपल्स को समझा और उसे अप्लाई
किया । उनमे से एक है, किसी चीज़ को पाने की इच्छा।
अगर आप फोर्ड की कहानी पढ़कर उन प्रिंसिपल्स
को अप्लाई करते हैं तो आप भी उसी ऊँचाई पर पहुँच
सकते है, जहाँ पर फोर्ड ने अपना झंडा गाड़ा था।
हेनरी फोर्ड का बीसवीं सदी के अंत में ठीक वही मुकाम
था, जो इस समय बिल गेट्स का है। फोर्ड उस समय
ऐसी कार बनाकर टांसपोर्ट सेक्टर में रेवोल्यशन लेकर

लिया था। आखिर फोर्ड की अटलता की एक बार फिर
से जीत हुई । फोर्ड ने साबित किया कि इम्पॉसिबल और
अटलता के बीच जंग में जीत पक्के इरादे की ही होती
है। अब आपको भी फोर्ड की सक्सेस का राज़ पता चल
गया है, अब आप भी करोड़ो रुपए कमा सकते है।
हेनरी फोर्ड इसलिए सक्सेसफुल है क्योंकि उन्होंने
सक्सेस के प्रिंसिपल्स को समझा और उसे अप्लाई
किया । उनमे से एक है, किसी चीज़ को पाने की इच्छा।
अगर आप फोर्ड की कहानी पढ़कर उन प्रिंसिपल्स
को अप्लाई करते हैं तो आप भी उसी ऊँचाई पर पहुँच
सकते है, जहाँ पर फोर्ड ने अपना झंडा गाड़ा था।
था,
हेनरी फोर्ड का बीसवीं सदी के अंत में ठीक वही मुकाम
जो इस समय बिल गेट्स का है। फोर्ड उस समय
ऐसी कार बनाकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में रेवोल्यूशन लेकर
आए, जिससे हर किसी के पास अपनी खुद की कार
हो सके। ठीक वैसा ही रेवोल्यूशन बिल गेट्स ने भी तो
कंप्यूटर इंडस्ट्री में सॉफ्टबेर डिजाईन करके फैलाई है।
अब कंप्यूटर सिर्फ टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों के लिए
नहीं रह गया। अब यह हर किसी की ऑफिस में जरुरत
बन गया है, स्कूल में भी पहुंच गया है। इतना ही नहीं
सबके घरो में अपने अपने पर्सनल लैपटॉप या कंप्यूटर
हो गए है। ठीक हेनरी फोर्ड की तरह बिल गेट्स ने भी
तो करोड़ो डॉलर की प्रॉपर्टी कमाई है।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
उन्होंने कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग की शुरुआत 13 साल
की उम्र से ही शुरू कर दी थी। 1973 में, उन्होंने
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया और Steve
Ballmer, जो कि माइक्रोसॉफ्ट के चीफ एग्जीक्यूटिव
ऑफिसर रह चुके है, उनके साथ एक कमरे में रहा
करते थे। हार्वर्ड में पढ़ते हुए बिल गेट्स ने सबसे पहले
माइक्रो कंप्यूटर के लिए एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज “बेसिक”
की खोज की।
गेट्स इस तरह से अपने सपनो को पूरा करने में लग
गए कि उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को बीच में ही छोड़
दिया। अब वह पूरी एनर्जी अपने सपनो को पूरा करने
में लगाने लगे। इससे कुछ समय पहले ही उनके बचपन
के दोस्त पॉल एलन के साथ उन्होंने अपनी कंपनी
शुरू की थी, जिसका नाम “माइक्रोसॉफ्ट” था। इस
माइक्रोसॉफ्ट ने उनके सपनो में पहिए लगा दिए। उनका
मानना था कि कंप्यूटर हर ऑफिस, हर स्कूल और हर
घर की जरूरत बन सकती है।
उनका यही मकसद माइक्रोसॉफ्ट की सक्सेस का
कारण बना।
अपना सबसे ख़ास मकसद हासिल करने के बाद
बिल-गेटस रुके नहीं। वे लगातार कंप्यटर और पोगामिंग

अपना सबसे ख़ास मकसद हासिल करने के बाद
बिल-गेट्स रुके नहीं। वे लगातार कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग
में इम्प्रूवमेंट करते रहे। सबसे अद्भुत बात ये थी कि
उन्होंने सिर्फ प्रोग्रामिंग के फील्ड में ही काम नहीं किया
बल्कि वे दुनिया के सबसे बड़े दान पुण्य करने वाले
आर्गेनाइजेशन को भी चलाते है जिसमे उनकी मददगार
उनकी पत्नी मेलिंडा है।
आप ख़ुद अपने भाग्य के विधाता हैं और अपने मन के
राजा भी.
जब अंग्रेजी कवि डब्लू सी हेनले ने लिखा था, “मैं ही
अपने भाग्य का विधाता हूँ और अपने मन का राजा”
तो उन्हें उसी वक़्त हमें यह कहकर बताना चाहिए था
कि हम ही अपनी किस्मत बनाते हैं और अपने मन का
लीडर बन उसे कंट्रोल करते हैं क्योंकि हमारे पास ऐसी
पॉवर है, जिससे हम अपने विचारों पर काबू पा सकते
है।
उन्हें यह भी बताना चाहिए था कि ये आकाश, धरती,
चाँद और इस धरती में रह रहे जानवर या फिर चल
रहे लोग, सभी चीजें एनर्जी हैं, जो सबसे बड़ी
फील्ड से बंधी हुई है। जिसे हम असीम शक्ति यानी
अनलिमिटेड पॉवर कह सकते है। वह अनलिमिटेड
पॉवर हमारे दिमाग में चल रहे विचारों से इन्फ्लुएंस
होता है और जो हम सोचते है, उसे वो हमारी जिंदगी में
असल में attract करता है।

अगर कवि ने इस सच का ज्ञान उस समय करा दिया
होता तो हमें पता चल जाता कि हम अपने भाग्य के
विधाता और मन के राजा क्यों है? उन्हें यह जोर देकर
बताना चाहिए था कि यूनिवर्स की अनलिमिटेड पॉवर
इस बात को नहीं जानती कि आप जो सोच रहे है, वह
अच्छा है या बुरा। वह उन विचार को सच बना देती है
जो आप सोच रहे है। इससे उसे कोई लेना देना नहीं है
कि वह आपके लिए बुरे है या अच्छे।
कवि को यह भी बताना चाहिए था कि हमारे मन में
जब कोई विचार हावी हो जाता है तो वह एक चुंबक की
तरह काम करने लगता है और अपने जैसे सिचुएशन,
लोग और चीज़ों को अपनी ओर चुंबक की तरह
attract करता है।
उन्हें बताना चाहिए था कि इससे पहले कि हम अमीर
बने, हमारे मन को चुंबक की तरह काम करना शुरू
कर देना चाहिए। यह तभी मुमकिन है, जब हमारे मन
में अमीर बनने का थॉट पूरी तरह से हावी हो जाए और
हमारा मन सिर्फ अमीर बनने के बारे में सोचने लगे।
तभी हमारे प्लान सक्सेसफुल हो पाएँगे।
जैसा कि, हेनली कवि थे ना कि फिलोसोफर इस वजह
से वह अपनी बात को सिर्फ कविता के अंदाज में कह
पाए।
उन्हें फॉलो करने वाले कुछ समझ पाए और कुछ नहीं।
धीरे-धीरे समय बीतता गया और इस अटल सच से

उन्हें फॉलो करने वाले कुछ समझ पाए और कुछ नहीं।
धीरे-धीरे समय बीतता गया और इस अटल सच से
परदा उठने लगा।
स्टीवन स्पीलबर्ग एक और शख्स हैं जिन्होंने “हम ख़ुद
अपने भाग्य के विधाता होते है”, इस बात को सही
साबित करके एक नयी मिसाल कायम की है जो अब
तक के फिल्मो के सबसे महान डायरेक्टर साबित हुए।
उन्होंने बचपन से ही फिल्म डायरेक्ट करने का सपना
संजो लिया था। एक खास बात यह थी कि उन्होंने
अपने सपने को मरने नहीं दिया और बचपन से ही एक
पुराने कैमरे से शौकिया तौर पर फिल्मे बनाने लगे।
स्पीलबर्ग को यूनिवर्सल स्टूडियो की तरफ से मौका
किस तरह मिला, इसकी भी बड़ी दिलचस्प कहानी
है। एक गाडी में बैठाकर guests को पूरा यूनिवर्सल
स्टूडियो घुमाया जाता था। स्पीलबर्ग उसी गाडी में
छुपकर बैठ जाते और पूरा चक्कर लगाकर वापस आते
थे। जब वह वापस गेट के पास आ जाते तो उनकी यह
आदत थी कि पहरेदार से दो चार गप्पे जरूर लड़ा लिया
करते थे।
इस तरह कई दिन बीत गए और वह लगातार तीन
महीनों तक स्टूडियो जाते रहे। जाते समय पहरेदार से
हाथ हिलाकर सलाम करते और वापस आते समय
हाथ हिलाकर अलविदा कहते। वह हमेशा कोट पहनते
थे और हाथ में एक सूटकेस रखा करते थे जिससे

थे और हाथ में एक सूटकेस रखा करते थे जिससे
पहरेदारों को यह महसूस हो कि वह summer
क्लास अटेंड करने वाला एक स्टूडेंट है। अब तक
उन्होंने कई डायरेक्टर, राइटर और एडिटर से बातचीत
कर जान पहचान बना ली थी। यहाँ तक कि उस
बिल्डिंग में एक खाली कमरा मिलने पर उन्होंने अपने
नाम के आगे डायरेक्टर लिखकर चिपका दिया था और
वहाँ बैठने लगे।
इसी तरह एक दिन वहाँ के प्रोडक्शन हेड सिड शींबर्ग
से उनकी मुलाकात हो गई। उन्होंने शींबर्ग को कॉलेज
के टाइम पर बनाई हुई फिल्म दिखाई। शीबर्ग उस
फिल्म को देखकर इतना इम्प्रेस हुए कि उन्होंने उस
नौजवान को स्टूडियो के लिए कॉन्ट्रैक्ट दे दिया।
उनकी पहली फिल्म, “The Sugarland
Express” ने बॉक्स ऑफिस पर ज़्यादा अच्छा
बिज़नेस तो नहीं किया पर इसे क्रिटिक्स का बहुत प्यार
मिला। यहाँ तक कि कांन्स फिल्म फेस्टिवल में इस
फिल्म को कई अवार्ड भी मिले।
उन्हें सबसे बड़ा ब्रेक तब मिला, जब कहीं से उन्हें
Jaws बुक मिली। स्टूडियो उस पर फिल्म बनाने के
लिए तैयार थी और उसके लिए उन्हें एक बेहतरीन
डायरेक्टर भी मिल गया था।
स्पीलबर्ग इस फिल्म को खुद बनाना चाहते थे,
aft from the Tho Cucarland

स्पीलबर्ग इस फिल्म को खुद बनाना चाहते थे,
जबकि उनकी पिछली फिल्म The Sugarland
Express, ने कोई खास बिज़नेस नहीं किया था।
उनका कांफिडेंस डगमगाया नहीं था, उन्होंने प्रोड्यूसर्स
के सामने अपनी बात रखी और उस डायरेक्टर को
हटाकर, उन्हें फिल्म देने की मांग कर दी।
यह कोई आसान काम नहीं था। उन्हें शुरू से ही
मुश्किलों का सामना करना पड़ा. प्रोडक्शन तंगी के दौर
से गुजर रहा था।
खैर, जब 1975 में Jaws रिलीज हुई तो उसे डबल
सक्सेस मिली, उसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड
तोड़ डाले और क्रिटिक्स ने भी उसकी बहुत तारीफ़
की। रिलीज होने के एक महीने के अंदर ही इस फिल्म
ने बॉक्स ऑफिस पर 40 करोड़ डॉलर की कमाई कर
डाली थी, जो उस समय की सबसे ज़्यादा कमाई करने
वाली फिल्म बन गई।
उसके बाद स्पीलबर्ग ने कई फिल्में डायरेक्ट की जिनमें
इंडिआना जोंस सीरीज, द कलर पर्पल, जिसे अवार्ड भी
दिया गया था और एंपायर ऑफ द सन शामिल है।
कुछ समय बाद स्पीलबर्ग ने जुरासिक पार्क नाम की
फिल्म डायरेक्ट की, जो उस समय के इतिहास की
सबसे सक्सेसफुल फिल्म थी. यह स्पीलबर्ग की तीसरी
फिल्म थी, जिसने सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे। इसने

सबसे सक्सेसफुल फिल्म थी. यह स्पीलबर्ग की तीसरी
फिल्म थी, जिसने सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे। इसने
करोड़ों डॉलर की कमाई की।
स्पीलबर्ग यहीं नहीं रुके, वे अपने सपनो को लगातार
पूरा करने की तरफ बढ़ते गए। उन्होंने हॉलीवुड के
दो बड़े लोगों के साथ मिलकर अपना एक प्रोडक्शन
हाउस खोल लिया जिसका नाम ‘”ड्रीमवर्क्स’ था। ये थी
स्पीलबर्ग की कहानी।
14.
अब हम सबसे पहले प्रिंसिप्ल को पढ़ने की ओर बढ़ रहे
है। अपना दिमाग खुला रखिए। आपको बता दें कि ये
प्रिंसिप्ल किसी एक इंसान के जिंदगी से नहीं बनाए गए
है बल्कि 500 ऐसे अमीरो के एक्सपीरियंस से बनाए
गए है, जो गरीबी में पले बढे और जिन्हें ज़्यादा पढ़ने
का मौका भी नहीं मिल पाया था फिर भी उन्होंने दुनिया
में अपना परचम फहराया।
ये रूल बहुत मुश्किल नहीं है, बहुत ही आसान है। हमें
यकीन है कि आप इसे अप्लाई कर सकते है।
इससे पहले कि हम अगले चैप्टर की तरफ बढे, मैं
बताना चाहूँगा कि इसमें दो ऐसे लोगो की जिंदगियों की
कहानी है, जिन्होंने अपनी जिंदगी में बड़े कमाल के
बदलाव किए थे।
मैं आपको यह भी बताना चाहता हूँ कि ये दोनों लोग
पटाये काम करीत है। कग करीती टोन है निये

मैं आपको यह भी बताना चाहता हूँ कि ये दोनों लोग
मुझसे काफी करीब है। एक मेरा करीबी दोस्त है, जिसे
मैं 25 सालो से जानता हूँ और दूसरा मेरा बेटा है। इन
दो लोगों की आश्चर्यचकित कर देने वाली सक्सेस के
बारे में अगले चैप्टर में बताए गए प्रिंसिप्ल का बड़ा
योगदान रहा है।
2. विल पॉवर (विल पॉवर)
सक्सेस की ओर पहला कदम
अमीर बनने की ओर पहला कदम
जब एडविन सी बर्न्स उस ओरेंज न्यू जर्सी में मालगाड़ी
से उतरे तो उनके दिमाग में यह बिलकुल नहीं आया कि
वह सिर्फ एक गेस्ट है बल्कि वह एक राजा की तरह
महसूस कर रहे थे। जब उन्होंने थॉमस अल्वा एडिशन
के ऑफिस की ओर रुख किया तो उनका मन काम
पर लग गया था। उन्होंने मन ही मन खुद को एडिशन
के सामने खड़ा पाया। उन्होंने देखा कि एडिशन उन्हें
जिंदगी भर का जुनून और इच्छा पूरा करने के लिए
अपने साथ काम करने का मौका दे रहे है।
बर्न्स की इच्छा सिर्फ एक उम्मीद नहीं थी, न ही सिर्फ
एक साधारण सी इच्छा थी बल्कि वह इससे भी कहीं
ज्यादा थी। यह एक पैशन था, जिसके लिए वह कुछ
भी कर गुजरने को तैयार थे। सबसे बड़ी बात यह
थी कि उन्होंने मन में यह ठान लिया था कि उन्हें यह
हासिल करना ही है , उनका मकसद अटल था।
.

थी कि उन्होंने मन में यह ठान लिया था कि उन्हें यह
हासिल करना ही है , उनका मकसद अटल था।
जब वह एडिशन से मिले तो यह इच्छा बर्न्स के लिए
नई नहीं थी बल्कि यह उनके मन में लंबे समय से सबसे
ज़्यादा हावी रहने वाली इच्छा बन गई थी। हो सकता
है कि शुरुआत में यह इच्छा सिर्फ एक इच्छा ही रही हो
पर जब वह एडिशन के सामने खड़े हुए तो वह सिर्फ
एक इच्छा नहीं थी, बल्कि उससे कहीं ज़्यादा मज़बूत
और अटल थी।
कुछ सालों बाद, वह फिर से उसी ऑफिस में एडिशन
के सामने खड़े हुए, जहाँ वह पहली बार मिले थे । इस
बार उनकी इच्छा हकीकत में बदल चुकी थी। वह
एडिशन के साथ बिज़नेस करने लगे थे।
उनके मन में सबसे हावी रहने वाला सपना सच में बदल
चुका था। आज जो लोग बर्न्स को जानते है और उनसे
जलते है वह बस इसलिए कि उन्हें लगता है कि बर्न्स
को किस्मत की बदौलत एडिशन के साथ काम करने
का मौका मिला था। असल में उन लोगो ने बर्न्स को
कामयाबी हासिल करने के बाद देखा था। सच कहूँ तो
उन लोगो ने कभी उनके कामयाब होने के कारणों पर
गौर ही नहीं किया।
एडिशन के ऑफिस में काम करते हुए पाँच साल
बीतने के बाद भी बर्न्स को सक्सेसफुल होने की कोई

एडिशन के ऑफिस में काम करते हुए पाँच साल
बीतने के बाद भी बर्न्स को सक्सेसफुल होने की कोई
भी उम्मीद नहीं दिख रही थी। न ही ऐसा कुछ हुआ
था, जिससे वह एडिशन के साथ बिज़नेस में पार्टनर
बन सके। हर किसी के लिए वह एडिशन के ऑफिस
में काम करने वाले सैकड़ों लोगों में से एक थे पर वह
अपने मन में पहले दिन से ही एडिशन के बिज़नेस
पार्टनर बन चुके थे।
बर्न्स की कहानी एक स्ट्रोंग विल पॉवर का बेहतरीन
एग्ज़ाम्पल है। बर्न्स सक्सेसफुल इसलिए हुए क्योंकि
उनके मन में इससे बड़ी इच्छा कोई नहीं थी कि उन्हें
सिर्फ एडिशन के साथ काम करना है। उन्होंने इसके
लिए एक प्लान बनाया और उन्होंने वो सारे रास्ते बंद
कर दिए, जिनसे वह पीछे पलट कर वापस जा सके।
वह अपनी इच्छा के साथ खड़े रहे, जब तक कि उनकी
इच्छा मन में हावी न हो गई और फिर हकीकत में ना
बदल गई हो।
जब वह पहली बार ओरेंज, एडिशन के ऑफिस पहुंचे
तो उनके मन में इस तरह के ख्याल बिलकुल नहीं थे
कि “मैं एडिसन से उनके ऑफिस में काम करने के लिए
मौका मांगूंगा।’ बल्कि उन्होंने यह कहा कि उन्हें एडिशन
के साथ उनके बिज़नेस में पार्टनर बनना है।
उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि “मैं कुछ महीने यहाँ
काम करूँगा। अगर मुझे यहाँ कुछ अच्छे मौके नहीं

उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि “मैं कुछ महीने यहाँ
काम करूँगा। अगर मुझे यहाँ कुछ अच्छे मौके नहीं
मिलते है तो मैं छोड़कर कोई और जॉब की तलाश
करूँगा।’ बल्कि उन्होंने यह बात रखी कि “मैं कहीं से
भी शुरुआत करने के लिए तैयार हूँ, मैं आपके लिए
सब कुछ करने को तैयार हूँ जो आप कहेंगे, जब तक
कि मुझे आपके साथ बिज़नेस करने का मौका नहीं
मिल जाता “उन्होंने यह नहीं बोला’ अगर मैं एडिशन के
कंपनी में फेल हो जाता हूँ तो मैं दूसरे मौको की तलाश
करूँगा. “उन्होंने बोला’ मेरी जिंदगी में एक ही इच्छा है
कि मुझे महान थॉमस अल्वा एडिशन के साथ उनके
बिज़नेस में पार्टनर बनना है। इसलिए मैं पीछे लौटने के
सारे रास्ते बंद करके अपने पूरे जीवन को इसे हासिल
करने में लगा दूंगा।
बहुत पहले की बात है, एक महान सोल्जर हुआ करते
थे जिन्हें एक बार जंग के मैदान में जीतने के लिए
कड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्हें अपनी सेना को
दुश्मन
के
साथ जंग में लड़ने के लिए भेजना था, दुश्मनों की सेना
संख्या में उनकी सेना से बहुत बड़ी थी। उन्होंने अपने
सैनिको को नाव में बैठाकर नदी के उस पार भेजा और
सभी सैनिकों और औजारों के उतरने के बाद, उन्होंने
सभी नावों को आग लगाने की आज्ञा दे दी।
फिर जंग होने से ठीक पहले उन्होंने अपने सैनिको से
कहा’ आप देख रहे हैं, सारी नावें जल रही है, अगर
हम अपने दुश्मनों को मार नहीं पाए तो अब हमारे

कहा’ आप देख रहे हैं, सारी नावें जल रही है, अगर
हम अपने दुश्मनों को मार नहीं पाए तो अब हमारे
पास वापस लौटने का कोई जरिया नहीं है। अब हमारे
पास सिर्फ एक ही उपाय है या तो मिट जाओ या फिर
अपने दुश्मनों का नाश कर दो। अंत में हुआ यूँ कि वे
लोग जीत गए। ठीक उसी सोल्जर की तरह हर इंसान
को वापस लौटाने वाली नाव मिटा देनी चाहिए, जला
देनी चाहिए, लौटने के सारे दरवाजे बंद कर देने चाहिए
और चल पड़ना चाहिए अपनी मंजिल की ओर। जब
जीत की इच्छा जिंदगी के लिए जरुरत बन जाए तो
कामयाबी मिलना तो तय है।
उस भयानक शिकागो शहर के आग में झुलसने के
अगले दिन, कुछ बिजनेसमैन शहर की एक गली में
खड़े होकर राख हुई अपनी दुकानों को देख रहे थे।
उन्होंने एक मीटिंग बुलाई, जहाँ वे यह फैसला ले सके
कि शिकागो शहर को फिर से बनाना चाहिए या फिर
देश के किसी दूसरे हिस्से में बेहतर जगह की खोज
करनी चाहिए। हर कोई सिर्फ एक ही नतीजे पर पहुंचा
कि उन्हें शिकागो शहर छोड़ देना चाहिए और किसी
बेहतर जगह की तलाश करनी चाहिए—सिर्फ एक
इंसान को छोड़कर।
वह बिजनेसमैन, जिसने रुकने और फिर से अपना स्टोर
बनाने की हिम्मत जुटाई, उन्होंने अपने साथियों को
उंगली दिखाते हुए कहा “प्यारे दोस्तों, मैं ठीक इस जगह
पर दुनिया का सबसे बड़ा स्टोर बनाऊँगा,चाहे जितनी
1-4
11-17

करनी चाहिए। हर कोई सिर्फ एक ही नतीजे पर पहुंचा
कि उन्हें शिकागो शहर छोड़ देना चाहिए और किसी
बेहतर जगह की तलाश करनी चाहिए—सिर्फ एक
इंसान को छोड़कर।
वह बिजनेसमैन, जिसने रुकने और फिर से अपना स्टोर
बनाने की हिम्मत जुटाई, उन्होंने अपने साथियों को
उंगली दिखाते हुए कहा “प्यारे दोस्तों, मैं ठीक इस जगह
पर दुनिया का सबसे बड़ा स्टोर बनाऊँगा,चाहे जितनी
बार यह जल जाए पर मैं हार नहीं मानूँगा”। वह स्टोर
बना, यहाँ तक कि आज भी उस राज्य की सत्ता में वह
सबसे ऊँचा monument खड़ा हुआ है। उस समय
मार्शल फील्ड के लिए सबसे आसान रास्ता यही होता
कि वह दूसरे बिजनेसमैन की तरह उनके साथ शामिल
हो जाते। जब उनके साथियों ने बुरे होते हालातों और
धूमिल होते फ्यूचर को देखा तो वहाँ से भाग खड़े हुए
और आसान रास्ते की तरफ बढ़ चले।
यही तो फर्क था मार्शल फील्ड और दूसरे बिजनेसमैन
के बीच, ठीक वही फर्क एडविन सी बर्न्स और
दूसरे वर्कर्स में था, जो एडिशन के ऑफिस में काम
करते थे। ठीक यही फर्क हर सक्सेसफुल और
unsuccessful लोगों के बीच होता है। ठीक यही
फर्क एक सक्सेसफुल लीडर और unsuccessful
लीडर के बीच होता है।

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हर इनसान जिसे पैसो की जरुरत है, वह पैसो की
इच्छा रखता है। सिर्फ इच्छा रखना आपको अमीर नहीं
बना देता। लगातार अमीर बनने की इच्छा जब तक
जुनून न बन जाए और फिर उसके लिए पुख्ता प्लान
बनाना और अमीर बनने के लिए ठान लेना फेल होने
पर अपने प्लान पर विश्वास रखना ही हमें अमीर बनने
की ओर ले जाता।
विल पॉवर के दम पर अमीर बनने के नीचे छह स्टेप्स
है, जो आपको आपके सपनो तक पहुँचा सकते है-
1. आप जितना पैसा कामना चाहते है, उसे डिसाइड
कर ले। यह कहना काफ़ी नहीं है कि ‘मुझे ढेर सारा
पैसा कामना है।’ यह अमाउंट बिल्कुल पक्का और
फ़िक्स होना चाहिए, जैसे एक करोड़ रुपए। (इसके
पीछे एक साइकोलॉजिकल कारण है, जो आपको
अगले चैप्टर में बताया जाएगा |)
2. यह डिसाइड कर ले कि इतना पैसा कमाने के लिए
आप क्या कुछ कर गुजरने को तैयार है। (ऐसा कोई
भी रूल नहीं है, जिससे बिना कुछ किए ही बहुत कुछ
हासिल किया जा सके)

3. एक फ़िक्स तारीख़ तय कर ले कि आप कब तक वो
पैसा कामना चाहते है।
4. अपने पैसा कमाने की इच्छा के लिए एक प्लान
तैयार कर ले और तुरंत शुरुआत करें। इससे फर्क नहीं
पड़ता कि आप अभी तैयार है या नहीं।
5. एक कागज पर साफ तौर पर यह सब लिख ले कि
आप कितना पैसा कमाना चाहते है, तारीख, इसके
बदले में आप क्या कर गुजरने को तैयार है और अपने
प्लान को भी लिख ले, जिसके सहारे आप वो फिक्स
अमाउंट कामाने जा रहे है।
6. अपने लिखे हुए सेंटेंस को दिन में दो बार पढ़े, एक
बार रात में सोने से पहले और एक बार सुबह जागने के
बाद। जैसे जैसे आप पढ़े, उसे अपनी नजरो के सामने
देखे, महसूस करे और इस बात पर विश्वास करे कि वह
पैसा आपको मिल चुका है।
ऊपर समझाए गए छह इंस्ट्रक्शन को आपको फॉलो
करना है। खासतौर पर आपको छठा इंस्ट्रक्शन कुछ
ध्यान से पढ़ना है और उस पर अमल करना है।
आप यह शिकायत कर सकते है कि खुद को ऐसे इंसान
के रूप में कैसे देख सकते है, जिसने वह पैसा कमा
लिया है, जब तक आप उसे सच में हासिल न कर ले?
तो इस समय आपको मजबूत विल पॉवर की जरुरत

लिया है, जब तक आप उसे सच में हासिल न कर ले?
तो इस समय आपको मजबूत विल पॉवर की जरुरत
होती है।
मजबूत इच्छा की जरुरत होती है। अगर आपमें सच
में उस दौलत को पाने की इच्छा है और वह आपका
जूनून है तो आपको खुद को उस दौलत को हासिल कर
चुके इंसान के रूप में देखने में कोई मुश्किल नहीं होगी।
गोल है पैसा, बस आपको ख़ुद स्वीकार करना है कि
आपने वह पैसा हासिल कर लिया है, फिर देख लेना ये
यूनिवर्स आपको वह दौलत ज़रूर देगी।
जो लोग पैसों के प्रति जागरूक रहते है वही अमीर
बनते है। पैसों के प्रति जागरूक रहने का मतलब है
कि जो लोग लगातार पैसों के बारे में सोचते रहते है
और पैसे की इच्छा रखते है, वही लोग खुद को अमीर
बनने की सिचुएशन में तब भी देख पाते है, जब असल
में वे नहीं होते हैं। जिन लोगो को इनसानी दिमाग के
बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है, वे लोग इन प्रिंसिपल्स
को impractical कहते है। पर ये 6 रूल हर किसी
की जिंदगी में मदद कर सकते है। ये जानकारी उस
इंसान Andrew कार्नेगी के द्वारा मिली थी, जिसने
एक स्टील मिल में एक आम मजदूर की तरह जिंदगी
की शुरुआत की थी। पर इस साधारण सी शुरुआत
के बावजूद उन्होंने इन प्रिंसिपल्स को अप्लाई कर 10
करोड़ डॉलर से ज़्यादा दौलत कमाई थी।

ऊपर दिए छह स्टेप्स को थॉमस अल्वा एडिशन ने भी
जाँचा परखा और फिर कहा कि ये छह रूल सिर्फ पैसा
कमाने में ही नहीं बल्कि किसी भी गोल को हासिल
करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते है। इन छह
स्टेप्स को इस्तेमाल में लाने के लिए कोई खास मेहनत
की ज़रुरत नहीं होती, न ही किसी त्याग की जरुरत
होती है, न ही इन्हें अमल में लाने के लिए कोई बहुत
ज़्यादा एजुकेशन की जरुरत होती है पर इन स्टेप्स का
सही इस्तेमाल सिर्फ़ इमेजिनेशन के ज़रिए से ही संभव
है। इस बात को जानने की जरुरत है कि पैसा
भाग्य या अच्छी तकदीर से नहीं मिलता बल्कि उसे
इमेजिन करना पड़ता है। जिस किसी ने भी अपनी
बेहतरीन तकदीर को बनाया है, उन सभी ने एक सपना
देखा, उम्मीद की है, अटल इच्छा रखी है और प्लान
बनाया है, इससे पहले कि वह दौलत हासिल कर पाते।
आपको यह भी पता होना चाहिए कि सिविलाइज़ेशन
के शुरुआत से ही जितने महान लीडर हुए है, उन
सबका एक विज़न था, वो दूर के बारे में सोचते थे।
अगर आप महान अमीर लोगो तरह अपने मन
इमेजिन नहीं कर सकते तो आप कभी अपने बैंक में
उतना पैसा नहीं देख पाएँगे। सच्चे विज़नरी के लिए
जितने मौके आज मौजूद है, उतने मौके इससे पहले
कभी नहीं थे। इस भागती दौड़ती दुनिया में जो लोग
अमीर बनना चाहते है, उन्हें यह जानकर इंस्पिरेशन
मिलेगी कि आज दुनिया को नए विचार, काम करने

मिलेगी कि आज दुनिया को नए विचार, काम करने
के नए तरीके, नए लीडर, नए इन्वेंशन, एजुकेशन की
नई technique, सामान बेचने के नए तरीके, नई
किताबें, बीमारियों के नए इलाज और बिज़नेस और
जिंदगी के लिए नए नज़रिए की ज़रुरत है।
इन सब नई डिमांड के बीच एक बात तो पक्की है कि
अगर आपको जीतना है तो आपके पास क्लियर पर्पस,
नॉलेज और मजबूत विल पॉवर का होना जरुरी है। ये
सब हासिल करने के लिए सच्चे विज़नरी की जरुरत
होती है, जो अपने सपनों को एक्शन में बदल सके।
सच्चे विज़नरी हमेशा से थे, हैं और रहेंगे, यही वे लोग
होते है, जो दुनिया बनाते है। जो सच में बड़े लीडर हुए
है उन्होंने अपने सपनो, नए मौकों और अनदेखी चीजों
को हकीकत में बदला है। इन लोगो ने अपनी थॉट की
पॉवर से शहरो, हवाई जहाज, फैक्टरियाँ, कार, बढिया
हेल्थ और जिंदगी को आसान बनाने के नए तरीको को
इन्वेंट किया है।
आज सपने देखने वालो में दो जरुरी खूबियाँ होनी ही
चाहिए—पेशेंस और खुली सोच। जिन लोगो को नएपन
से डर लगता है, उनके सपने शुरू होने से पहले ही दम
तोड़ देते है। लीडर्स के लिए आज से बढ़िया समय कभी
नहीं था। आजकल बड़े पैमाने पर बिज़नेस, इकनोमिक
और इंडस्ट्रियलाइजेशन को नए साँचे में ढालकर नए
तरीके से काम करने का वक्त है।

अगर आप अमीर बनने का प्लान बना रहे है तो किसी
को अपने सपनो का मजाक मत उड़ाने दीजिए।
अगर आप जीतना चाहते है तो आपको उन लोगों के
ज़ज्बे को जीना पड़ेगा, जिनके अतीत में देखे गए
सपनो ने सोसाइटी को नई ऊँचाइयाँ दी, वह आत्मा
दी, जिससे हम लोग इस समाज में मिलजुलकर रह
सके–आपको और हमें आगे बढ़ने का और दुनिया को
अपना टैलेंट दिखाने का मौका मिला। उस कोलंबस को
मत भूलिए, जिन्होंने एक अनजान दुनिया को इमेजिन
किया और उसे खोजने के लिए अपनी जिंदगी झोंक
दी। अंत में वह कामयाब भी हुए।
सच ही कहा गया है कि सक्सेस पाने के बाद सारी
गलतियाँ माफ हो जाती है और फेल होने के बाद कोई
बहाना भी काम नहीं करता।
अगर जो आप चाह रहे है वह सही है और उस पर
आपको विश्वास है तो उसे हासिल करने के लिए आगे
बढिए।
आप अपने सपनो को झोंक दीजिए, और अगर आप
कभी कुछ पलों के लिए फेल भी हो जाएं तो उन लोगो
की बातो को अपने दिमाग पर हावी मत होने दीजिए
क्योंकि उन्हें नहीं पता कि ये कुछ समय की हार ही
कामयाबी का दरवाज़ा खोलती है।

हेनरी फोर्ड, एक अनपढ़ और गरीब आदमी थे जिन्होंने
बिना जानवरो के चलने वाली गाडी बनाने का सपना
देखा। उन्होंने उस वक्त का इंतजार नहीं किया, जब
उनके पास ऐसे साधन मौजूद होंगे, जो उस गाडी को
बनाने के लिए मददगार साबित होंगे पर उनके पास जो
कुछ भी था उन्होंने वहीं से काम करना शुरू कर दिया,
और आज पूरी दुनिया उनके पहियों पर चल रही है।
उन्होंने दुनिया में इतनी गाडियाँ चला दी, जितनी किसी
और इंसान ने कभी नहीं चलाई है। यह सब इसलिए
संभव हुआ क्योंकि उन्हें अपने सपनो पर विश्वास था।
थॉमस अल्वा एडिसन ने इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाले
बल्ब को इन्वेंट करने का सपना देखा। इससे पहले कि
उनका यह सपना सच हो पाता, वह दस हजार बार
फेल हुए। सच्चे विज़नरी कभी भी काम को बीच में नहीं
छोड़ते।
लिंकन ने काले नौकरो की आज़ादी का सपना देखा,
अपने सपनो को सच किया और कभी इस बात को मन
से जाने नहीं दिया कि नार्थ और साउथ अमेरिका एक
साथ हो जाएं, जब तक कि यह असल में हो नहीं गया।
राइट brothers ने हवा में उड़ने का सपना देखा और
आज पूरी दुनिया हवा में उड़कर एक जगह से दूसरे
जगह जाती है। मारकोनी ने हवा में मैसेज भेजने का
सपना देखा। उनके सपनो का नतीजा यह हुआ कि
आज हम सभी के पास रेडियो है, टीवी और मोबाइल
फोन है। साथ ही साथ मारकोनी के सपने ने उन्हें उनका

आज हम सभी के पास रेडियो है, टीवी और मोबाइल
फोन है। साथ ही साथ मारकोनी के सपने ने उन्हें उनका
ख़ुद का केबिन और घर भी दिला दिया। इसने दुनिया
के एक कोने में रहने वाले इंसान को दूसरे कोने में रहने
वाले इंसान से जोड़ दिया।
तुरंत कुछ ही पलों में कोई भी न्यूज़, इनफार्मेशन और
एंटरटेनमेंट पूरी दुनिया में फैल जाता है। आपको यह
जानकर हैरानी होगी कि मारकोनी के दोस्तों ने उन्हें
हिरासत में ले लिया था और एक साइकोलोजिस्ट के
पास इलाज के लिए ले गए, जब उन्होंने यह बताया कि
उन्होंने एक ऐसे मेथड की खोज की है, जिससे हवा में
मैसेज को एक जगह से दूसरी जगह बिना पोस्ट के
भेजा जा सकता है।
आज सच्चे विज़नरी के लिए बेहतर मौके मौजूद है।
आज दुनिया को नए विचारों की ज़रुरत है, नए इन्वेंशन
की ज़रुरत है। आज दुनिया को आपके जैसे विज़नरी
की ज़रुरत है।
रे क्रोच एक और बेहतरीन एग्ज़ाम्पल है, जिन्होंने अपने
सपने साकार किए। क्रोच मिल्कशेक का मिक्सचर बेचा
करते थे। उनके main कस्टमर रेस्टेंट और मिठाई
वाले थे। हर कोई उस मिल्कशेक मिक्सचर की ज़्यादा
से ज़्यादा एक या दो यूनिट ख़रीदता था। एक दिन उन्हें
सं बर्नाडिनो, कैलिफोर्निया के एक छोटे से रेस्टुरेंट से
आठ यूनिट मिक्सचर का आर्डर मिला। उन्होंने वहाँ

से ज़्यादा एक या दो यूनिट ख़रीदता था। एक दिन उन्हें
सं बर्नाडिनो, कैलिफोर्निया के एक छोटे से रेस्टुरेंट से
आठ यूनिट मिक्सचर का आर्डर मिला। उन्होंने वहाँ
जाने का फैसला किया ताकि यह पता चल सके कि वे
इस आठ यूनिट मिक्सचर को कैसे इस्तेमाल करते है?
उन्होंने अब तक जितने भी रेस्टेंट देखे थे, उनमे यह
सबसे ज़्यादा बिजी रेस्टोरेंट था।
उसके मालिक मैकडोनाल्ड brothers ने बहुत ही
लिमिटेड मेन्यू बनाया था जिसमें -हैमबर्गर, चीज बर्गर,
फ्रेंच फ्राइज, शेक, और कोल्ड ड्रिंक शामिल थे और वो
उसे आस पास के एरिया में बहुत ही कम दाम पर बेचते
थे।
क्रोच को यहाँ एक मौका दिखा और उन्होंने सोचा
कि अगर इस रेस्टेंट की चेन खोल दी जाए तो ज़्यादा
प्रोडक्शन होगा जिससे बहुत कमाई की जा सकती है।
शायद पैसो का अंबार ही लग जाए। उन्होंने मैकडोनल
brothers के सामने इस आईडिया का प्रपोजल रखा
और उन्होंने हामी भर दी। कुछ ही सालों में मैकडोनाल्ड
देश का सबसे बड़ा फूड रेस्तरां ही नहीं बना बल्कि
इसने फास्ट फूड इंडस्ट्री की भी शुरुआत कर दी। फिर
क्रोच ने इस चेन को आगे बढ़ाकर पूरी दुनिया में फैला
दिया और दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में
शामिल हो गए।
पूरी दुनिया में मौकों की अब कमी नहीं है। किसी भी
.

पूरी दुनिया में मौकों की अब कमी नहीं है। किसी भी
तरह के सपने का पहला कदम मजबूत विल पॉवर होता
है। सपने लापरवाही, आलस और एम्बिशन की कमी
में जन्म नहीं लेते। न ही अब दुनिया सपने देखने वालो
का मज़ाक उड़ाती है और न ही यह कहती है कि यह
impractical है। जिन लोगो को भी आज मनचाही
सक्सेस मिली है, वे लोग बुरी शुरुआत और कई
धड़कन रोक देने वाले मुश्किलों से जरूर गुजरे होते है।
उनकी जिंदगी में
छप्पर फाड़ कर कामयाबी तभी मिलती है, जब वे
गरीबी और मुसीबत के दौर से गुजर रहे होते है। जॉन
बनयान को जब धर्म पर अपनी राय रखने के लिए जेल
में डाल दिया गया था, उसके बाद ही उन्होंने “The
Pilgrim’s Progress” बुक लिखी थी।
रिश्तों के टूट जाने के बाद कई लोग नशे में डूबने
लगते है और अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते है। वह
इसलिए कि ज़्यादातर लोगो ने कभी यह सीखने की
कोशिश नहीं की कि सबसे मजबूत भावनाओ को किसी
क्रिएटिव स्वभाव में कैसे बदला जाता है।
हेलेन केलर जन्म से ना सुन सकती थी, ना बोल सकती
थी और नाही देख सकती थी। अपने इस दुर्भाग्य के
बावजूद उनका नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा
हुआ है। उनकी पूरी जिंदगी इस बात का सिंबल है कि
किसी भी इंसान की हार तब तक नहीं होती, जब तक

किसी भी इंसान की हार तब तक नहीं होती, जब तक
वह उसे स्वीकार नहीं कर लेता।
रोबर्ट बर्न्स एक अनपढ़ इंसान थे। उनका बचपन गरीबी
में बीता और बड़े होते होते उन्हें शराब की लत लग
गई। पर नेचर ने उनके लिए कुछ बेहतर सोच रखा था।
उन्होंने अपने सुंदर विचारों से कविताएँ लिखना शुरू
की जो किसी का भी दिल जीत लेती थी और समा बाँध
देती थी। कविताएँ लिखने का उनका एक मकसद था,
दुनिया में बुराई हटाकर अच्छाइ फैलाना।
फिल्मो में बड़ी सक्सेस भी उन्हें नए गोल बनाने से
नहीं रोक सकी। उन्होंने अपने लिए नए गोल बनाए
और बिज़नेस करने की ओर बढ़ने लगे । उन्होंने अपना
पैसा फिक्स्ड प्रॉपर्टी में लगाया, एक रेस्टेंट के चेन की
शुरुआत की, जिसने इन्हें अरबपतियों की लिस्ट में
लाकर खड़ा कर दिया था।
उन्होंने जिस चीज़ को भी छुआ वह सोना बन गया।
वह कामयाब होते चले गए। फिर उन्होंने समाज की
मदद करनी चाही जिस कारण वह देश के कई दूर
दराज इलाको में गए, छोटे शहरो में गए और वहाँ पर
उन्होंने बच्चो और नौजवानों को हिंसा और अपराध
को छोड़कर, ड्रग्स, शराब और गुंडागर्दी को ना कहकर
पढ़ने लिखने को बढ़ावा देने के लिए आवाज उठाई।
उन्होंने कई आर्गेनाइजेशन में एक एक्टिव लीडर की
भूमिका निभाई जिससे लोग फिजिकल फिटनेस पर

पैसा फिक्स्ड प्रॉपर्टी में लगाया, एक रेस्टेंट के चेन की
शुरुआत की, जिसने इन्हें अरबपतियों की लिस्ट में
लाकर खड़ा कर दिया था।
उन्होंने जिस चीज़ को भी छुआ वह सोना बन गया।
वह कामयाब होते चले गए। फिर उन्होंने समाज की
मदद करनी चाही जिस कारण वह देश के कई दूर
दराज इलाको में गए, छोटे शहरो में गए और वहाँ पर
उन्होंने बच्चो और नौजवानों को हिंसा और अपराध
को छोड़कर, ड्रग्स, शराब और गुंडागर्दी को ना कहकर
पढ़ने लिखने को बढ़ावा देने के लिए आवाज उठाई।
उन्होंने कई आर्गेनाइजेशन में एक एक्टिव लीडर की
भूमिका निभाई जिससे लोग फिजिकल फिटनेस पर
ध्यान दे सके।
बुकर टी. वाशिंगटन का जन्म गुलामी के दौर में हुआ
था, वे जाती और रंग से नीची जाती के थे। वह शांत,
हर टॉपिक पर खुले विचार रखने वाले और सपने देखने
वाले इंसान थे। उन्होंने सभी तरह की जातियों में अपनी
अच्छी इमेज बना ली थी।
बीथोवन सुन नहीं सकते थे, मिल्टन देख नहीं सकते थे,
लेकिन जब तक यह दुनिया रहेगी उनके नाम भी सुनहरे
अक्षरों में ऐसे ही लिखे जाते रहेंगे क्योंकि उन्होंने सपने
देखे और उन्हें साकार किए।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
अर्नाल्ड श्वाजनेजर एक और इंसान है, जिन्होंने अपने
सपनो को साकार किया। उन्हें दुनिया ने पहली बार तब
जाना, जब उन्हें बेहतरीन वेट लिफ्टर के लिए “मिस्टर
यूनिवर्स’ का टाइटल दिया गया। पर श्वाजनेजर सिर्फ
एक लंबे चौड़े muscular इंसान नहीं थे। उनकी
जिंदगी में कई सपने और गोल थे। सपने साकार करके
वे एक अमीर बिजनेसमैन, उसके बाद सबसे ज़्यादा
पैसे लेने वाले फिल्म एक्टर और फ़िर कैलिफोर्निया के
गवर्नर बने।
उनका जन्म ऑस्टिन में हुआ था और बचपन भी वहीं
गुजरा। बचपन से ही उन्होंने वेट लिफ्टिंग की ट्रेनिंग
शुरू कर दी थी। 18 साल की उम्र में उन्होंने बॉडी
बिल्डिंग का पहला कम्पटीशन जीता, इसके बाद पाँच
बार लगातार “मिस्टर यूनिवर्स’ बनने का टाइटल भी
उनके नाम ही है। फिर वे यूनाइटेड स्टेट्स चले गए और
वहाँ पर भी ऐसी ही कम्पटीशन जीतते रहे ।
हालाँकि उन्होंने बॉडी बिल्डिंग के फील्ड में वह सब
कुछ हासिल कर लिया था, जो किसी भी इंसान के
लिए हासिल करना मुश्किल है। उन्हें अब इस फील्ड में
कोई चुनौती नहीं दिखी। इसलिए उन्होंने अपने टैलेंट को
अलग अलग फील्ड में भी आजमाने के बारे में सोचा ।

लिए हासिल करना मुश्किल ह। उन्ह अब इस फाल्ड म
कोई चुनौती नहीं दिखी। इसलिए उन्होंने अपने टैलेंट को
अलग अलग फील्ड में भी आजमाने के बारे में सोचा ।
उनकी फिजिकल ट्रेनिंग ने उन्हें यह सिखा दिया था कि
आम जनता को इन सब की जानकारी नहीं है और ये
जानकारी सभी से शेयर करनी चाहिए।
उन्होंने अपनी बायोग्राफी “Arnold :The
Education of a Body-Builder” लिखी, जो
बेस्ट सेलर साबित हुई। फिर उन्होंने औरतों के लिए
एक किताब लिखी, जिससे वे अलग तरह की प्रैक्टिस
से अपने बॉडी को ट्रेन कर फ़िट बना सके। इस बुक ने
उन्हें एक बिज़नेस शुरू करने के लिए इस्पायर किया ।
उन्होंने एक कंपनी खोली जो बॉडी बिल्डिंग के कांटेस्ट
organize करती थी। इस बिज़नेस ने उनके लिए
बिज़नेस फील्ड में सक्सेस के रास्ते खोल दिए।
उनका अगला गोल एक बड़ा फिल्म स्टार बनना था।
हालाँकि उन्होंने फिल्म करियर की शुरुआत तभी
कर दी थी जब वह बॉडी बिल्डिंग के फील्ड में थे।
छोटे-छोटे रोल करने के बाद, उनकी स्ट्रोंग विल पॉवर
तब काम आई, जब उन्हें “कॉनन द बारबैरियन” फिल्म
में लीड रोल मिला। इस फिल्म सीरीज़ ने उन्हें हॉलीवुड
का सबसे ज़्यादा पैसे लेने वाला हीरो बना दिया था।
2003 में श्वाजनेजर पॉलिटिक्स में आए और उन्हें
कैलिफोर्निया का गवर्नर चुन लिया गया।

2003 में श्वाजनेजर पॉलिटिक्स में आए और उन्हें
कैलिफोर्निया का गवर्नर चुन लिया गया।
आप श्वाजनेजर की जिंदगी से बहुत कुछ सीख सकते
है, आपकी जिंदगी सिर्फ एक ही फील्ड के लिए सीमित
नहीं है। श्वाजनेजर ने भी अपना जीवन सिर्फ बॉडी
बिल्डिंग के फील्ड में ही झोंक दिया होता तो भी वह
बहुत सक्सेसफुल हो जाते, पर उन्होंने इससे कहीं
ज्यादा का सपना देखा, उन्होंने ऊँचे गोल सेट किए,
जिनमे चुनौतियाँ थी और उन्हें हासिल किया। उन्होंने
अपनी पिछली सक्सेस से मिली सीख को बेकार नहीं
जाने दिया और उसका हर फील्ड में इस्तेमाल किया।
श्वाजनेजर की तरह आप भी अपने क्रिटिक्स से डरिए
मत । क्रिटिक ने उनकी पहली फिल्म में उनकी बहुत
बुराई की थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपना
काम जारी रखा। इसी अटलता ने उन्हें हॉलीवुड के
सबसे ज़्यादा पैसे लेने वाले हीरो की लिस्ट में शामिल
कर दिया था।
अगले चैप्टर में बढ़ने से पहले आप उम्मीद, विश्वास,
हिम्मत और पेशेंस की शक्ति को मन में पूरी तरह से
बैठा लीजिए। अगर आपके पास ये माइंडसेट होगा और
इन प्रिंसिपल्स के काम करने के बारे में ढंग से पता
होगा और आप इन्हें फॉलो कर रहे है तो यह समझ
लीजिए आप वह सब हासिल करने के लिए तैयार है,
जो आप चाहते है।

सिर्फ किसी चीज़ की इच्छा रखने और उसे हासिल
करने के लिए तैयार होने में फर्क होता है। किसी भी
इंसान का मन उस चीज़ को तब तक हासिल करने के
लिए तैयार नहीं होता, जब तक उसका मन पूरी तरह से
यह विश्वास न कर ले कि उसे वह चीज़ मिल चुकी है।
यह माइंडसेट विश्वास की होती है न कि सिर्फ उम्मीद
और इच्छा की। इस तरह का विश्वास पाने के लिए
आपका मन किसी भी तरह के इन्फ्लुएंस से आज़ाद
होना चाहिए। किसी चीज़ की तरफदारी करना या पहले
से कुछ मान लेना आपके अंदर इच्छा, हिम्मत और
विश्वास जगा नहीं सकते।
गरीबी, कंजूसी इन सब को हासिल करने से ज़्यादा
कोशिश खुशियाँ और सक्सेस को हासिल करने के लिए
नहीं करना पड़ता है। एक महान कवि ने अपनी कविता
में सही कहा है–
मैंने पैसा के लिए जिंदगी से सौदेबाजी की, और जिंदगी
आपको उससे ज़्यादा नहीं देगी
मैंने शाम को भीख मांगा फिर मुझे मिले कुछ सिक्को
को गिनने बैठ गया
जीवन ए.बी.एस. एक एम्प्लोयर है,
वह आपको वह देता है, जो आप मांगते हो
पर एक बार आपने औकात नाप ली,
उसके बदले आपको बहुत काम करना पड़ेगा
मैंने एक नौकर भाड़े पर लिया,
सिर्फ यह जानने के लिए वह कितना निराश है

सिर्फ यह जानने के लिए वह कितना निराश है
मुझे पता चला कि मैंने भगवान् से कुछ भी माँगा होता,
उन्होंने राजी खुशी से दे दिया होता।
मैरी के ऐश, जो “मैरी के कॉस्मेटिक” की फाउंडर
है, उन्होंने अपनी और दुनिया भर में अपने कंपनी में
काम करने वाले (जो अब कुल मिलाकर 25000
हैं) कंसल्टेंट्स की सक्सेस का राज सेल्फ़-कांफिडेंस
बताया। उनका यह करियर एक साल पहले शुरू हुआ
था, जब उन्होंने स्टेनली होम प्रोडक्ट्स में काम करना
शुरू किया था। उन्होंने कई बार इस बात को स्वीकार
किया है कि अपने इस काम के पहले साल में वह
कामयाब नहीं हो पाई थी और इस काम को छोड़ देना
चाहती थी। पर उनकी सोच तब बदली, जब उन्होंने
स्टैनले सेल्स के सेमीनार में हिस्सा लिया।
उन्होंने बताया उस साल कंपनी के कांटेस्ट में खूबसूरत,
लंबी और कामयाब औरत को रानी के टाइटल से
नवाजा जाना था और उस साल उस औरत को वह
टाइटल मिला, जिसकी किसी ने उम्मीद ही नहीं की थी।
मैंने फैसला लिया कि मैं स्टेज पर जाऊँगी और प्रेसिडेंट
से बात करूँगी और उन्हें अगले साल रानी का यह
टाइटल जीतने का अपना इरादा बताऊँगी।
मिस्टर बेवरिज मुझ पर हँसे नहीं, बल्कि उन्होंने मेरी
आँखों की तरफ देखा और कहा–“मुझे भी लगता है कि
तुम जीत सकती हो।’ इन शब्दो ने मेरी जिंदगी में जान

आँखों की तरफ देखा और कहा–”
-“मुझे भी लगता है कि
तुम जीत सकती हो।’ इन शब्दो ने मेरी जिंदगी में जान
डाल दी और अगले साल मुझे रानी का टाइटल सच में
मिला।
मैरी के ने इस बात को बताया कि सक्सेस हासिल करने
का पहले कदम यह है कि आप खुद पर विश्वास रखे
कि आप काबिल है और आप उस सक्सेस के असली
हकदार है। उन्होंने अपने एक आर्टिकल में कामयाबी
हासि
ल करने के लिए कुछ स्टेप्स को प्रैक्टिस करने के लिए
बताया है। वे चार स्टेप्स है–
खुद को सक्सेसफुल इंसान के रूप में महसूस
कीजिए–हमेशा खुद को सक्सेसफुल इंसान के रूप
में देखे। उस इंसान को सोचे, जिसके जैसे आप बनना
चाहते है। हर दिन कुछ वक्त अकेले बिताइए। आराम
से रिलैक्स होकर बैठ जाइए। अपनी आँखे बंद कर
लीजिए और अपनी इच्छा और गोल पर ध्यान दीजिए।
अपने आपको एक नए माहौल में देखिए, जिसे आप
इमेजिन करते है, खुद को काबिल समझिए और खुद
को कांफिडेंस से भर लीजिए।
पिछली सक्सेस को याद कीजिए—हर कामयाबी, चाहे
वह छोटी हो या बड़ी, वह यह साबित करती है कि
आप काबिल है और सक्सेसफुल हो सकते है। पिछली
सक्सेस को सेलिब्रेट कीजिए और जब भी आप निराश
हो तो उस कामयाबी को याद कीजिए।

गोल सेट करें–साफतौर पर यह तय कर ले कि आपको
क्या चाहिए। इस बात से हमेशा चैकन्ना रहिए और
अपने गोल से कभी भटकिए मत।
जिंदगी के लिए पॉजिटिव नज़रीया रखे–खुद का
पॉजिटिव पिक्चर बनाएं । आपकी जिंदगी, एक्शन और
फ़ैसले सभी में विश्वास रखे और पॉजिटिव बने रहे।
विल पॉवर से नेचर के रूल्स पर भी जीत हासिल की
जा सकती है
अब मैं आपको एक ऐसे आदमी की अनोखी कहानी
बताने जा रहा हूँ, जिससे ज़्यादा चमत्कारी आदमी मैंने
आज तक देखा ही नहीं। जिसे मैंने जन्म लेने के कुछ
मिनट बाद देखा था, उसके कान नहीं थे। पहले तो
डॉक्टरों ने कुछ भी बताने से मना किया पर जब उन पर
दबाव डाला गया तो उन्होंने बताया कि शायद यह बच्चा
कभी बोल और सुन नहीं पाएगा।
मैं डॉक्टर के विचार से सहमत नहीं था और मैं ऐसा कर
सकता हूँ क्योंकि मैं उस बच्चे का पिता हूँ। मैंने मन ही
मन डॉक्टर के विचार को चुनौती दे दी और खुद एक
फ़ैसला ले बैठा कि भगवान् बिना कान के मेरे बच्चे को
इस दुनिया में भेज सकता है पर वह उसे पूरी जिंदगी
इस तरह तकलीफ़ में जीने के लिए मजबूर नहीं कर
सकता। मैंने यह सोच लिया था कि मेरा बेटा सुनेगा भी
और बोलेगा भी। मुझे नहीं पता था कि यह सब कैसे
होगा पर मैं इस बात पर जरूर विश्वास करता था कि

सकता। मन यह साच लिया था कि मरा बटा सुनगा भा
और बोलेगा भी। मुझे नहीं पता था कि यह सब कैसे
होगा पर मैं इस बात पर जरूर विश्वास करता था कि
जहाँ चाह है वहाँ राह है।
मुझे महान एमर्सन की बात ध्यान आई, दुनिया कि हर
चीज़ सिर्फ एक ही बात सिखाती है वह है विश्वास। हमें
सिर्फ विश्वास करके नेचर के रूल्स को फॉलो करना
है। यह हम सभी पर समान रूप से लागू होती है। कभी
आँख बंद करके आवाज सुनिए, नेचर आपको रास्ता
जरूर दिखाएगी।
वह रास्ता सिर्फ एक ही था—विल पॉवर ! मैंने अपने
अंदर यह विल पॉवर जगा ली थी कि मेरा बेटा सारी
जिंदगी गूंगा और बहरा तो नहीं रह सकता। मैंने इस
विल पॉवर को कभी अपने मन से जाने नहीं दिया, यहाँ
तक कि एक पल के लिए भी नहीं। कुछ सालों पहले
मैंने लिखा भी था, हमारी सबसे बड़ी रुकावट हमारे मन
में पड़े विचार ही है। अगले ही पल मैंने बिस्तर पर लेटे
हुए अपने छोटे से बच्चे को देखा और यह सोचा कि
अगर यह सब सही है तो तो मेरा बेटा बिना कानो के भी
सुन सकता है। मैंने ठान लिया कि अपने बच्चे के मन
में कभी यह बात आने नहीं दूंगा कि वह सुन और बोल
नहीं सकता। इसके लिए चाहे मुझे जो भी करना पड़े।
मैंने कसम खा ली कि अपने बेटे के मन में बोलने और
सुनने की अपनी मजबूत इच्छा के बीज बो दूंगा और
वह जरूर एक दिन बिना किसी मशीन के सुनने और
बोलने लगेगा।

जब बच्चा थोड़ा सा बड़ा हुआ कि वह मेरे साथ सहयोग
कर सके तो मैं अपनी मजबूत विल पॉवर को उसके
अंदर जगाने की कोशिश करने लगा ताकि ये इच्छा सच
में हमारे सामने आ सके। मैं हर रोज उसके कान के
पास यह सब बोलता ताकि मेरे बेटे का मन ज़रा भी यह
स्वीकार न कर सके कि वह सुन नहीं सकता।
जैसे ही वह थोड़ा और बड़ा हुआ, वह आस-पास की
चीज़ों पर ध्यान देने लगा। हमने यह महसूस किया कि
बेशक बहुत कम ही सही पर बच्चे को हल्का सा सुनाई
तो देता था। जिस उम्र में बच्चे बोलने लगते है, वह बोल
तो नहीं पाता था पर वह कुछ आवाजो को सुन जरूर
लेता था। बस हमें यही चाहिए था, मुझे यह विश्वास हो
गया था कि मेरा यह तरीका काम कर रहा है।
तभी कुछ ऐसा हुआ, जिसने मुझे excited कर दिया,
आश्चर्यचकित कर दिया और आशा से भर दिया। ऐसा
कुछ उस साधन से हुआ, जिससे हमने कभी उम्मीद
नहीं की थी–हम एक टेप रिकॉर्डर लाए थे। जब उस
बच्चे ने एक गाना सुना तो वह excited हो गया और
गाने को सुनकर रियेक्ट करने लगा। वह कुछ तरह के
गानों में दिलचस्पी दिखाने लगा था। एक बार तो वह
एक गाना चलाकर दो घंटे तक खड़े-खड़े सुनता रहा।
हमें तब तक इस बात का पता नहीं चला कि ऐसा
क्यों हो रहा है, जब तक हमें आवाज के ‘ bone
conduction ‘ प्रिंसिप्ल के बारे में जानकारी नहीं
थी।

जब वह टेप-रिकॉर्ड पर रियेक्ट करने लगा था, मुझे यह
मालूम पड़ा कि जब मैं उसके कान के पास या फिर
दिमाग के पास जाकर कुछ बोलता हूँ तो उसे समझ में
आता है। मैं अपनी मजबूत विल पॉवर को इसी ज़रिए
उसके अंदर जगाता था पर अभी तक जो रिजल्ट आया
था वह, इतना ख़ुश करने वाला नहीं था। फिर भी मेरी
विल पॉवर ने मेरे विश्वास का साथ दिया और ऐसी
किसी भी नेगेटिव बात को मन में आने से पहले ही
निकाल फेंका।
मेरे पक्के इरादे का नतीजा यह हुआ कि मेरा बच्चा मेरी
आवाज को ठीक-ठीक सुनने लगा था, मैं उसके मन
में यह भरने से कभी नहीं चूकता था कि वह बोल और
सुन सकता है। मैंने यह एक्सपीरियंस किया है कि बच्चो
को दादी नानी की कहानी सुनना अच्छा लगता है। मैं
ऑफिस जाता, वहाँ पर उसके लिए कहानी लिखता
और रात को उसे सुनाता, साथ ही साथ उसके मन में
यह भी भरता कि वह बिल्कुल ठीक है और सुन और
बोल सकता है।
एक कहानी, जब मैं सुनाता हूँ तो उसको हर बार एक
अलग तरीके से सुनाता, उसे अलग रंगों से भर देता।
इसका मकसद उसके मन में यह भरना था कि उसके
शरीर का ये दोष कोई कमी नहीं है बल्कि यह उसके
जीवन की एक बड़ी एसेट यानी गुण और ताकत बनेगी।
गीता में भी लिखा है ‘कुछ दुःख अच्छे के लिए होते

गीता में भी लिखा है ‘कुछ दुःख अच्छे के लिए होते
है।’ और मैंने ऐसी फिलोसोफी को आजमाया भी है
और मुझे ठीक तरह से पता है कि हर कमी अपने साथ
उतनी ही अच्छाइयाँ भी लेकर आती है। मुझे थोड़ा
सा अंदाजा था कि इस कमी को किस तरह से उसकी
बदलना है और मैं हर रोज उसे कहानियों में
पिरोकर उसके मन में यह भरने की कोशिश करता कि
उसकी यह डिसेबिलिटी दुनिया के बड़े काम आ सकती
है।
ताकत
मुझे यह बताया गया था कि उसके कानो में ऐसी कोई
चीज नहीं है, जिससे सुना जा सके। इससे पहले कि
मैं निराश होता मेरी विल पॉवर ने मेरे विश्वास को
डगमगाने नहीं दिया।
मैंने अपने बेटे के अंदर भी यह विश्वास जगा दिया था।
सबसे खास बात उसकी अब यह थी कि वह मुझसे
सवाल नहीं करता था और हर बात को मान लेता
था। मैंने हर तरह से उसके मन में यह बात भर दी थी
कि उसे अपने भाई से ज़्यादा अच्छे रिजल्ट मिलेंगे।
एग्ज़ाम्पल के तौर पर यह बच्चा सभी टीचर्स के लिए
ख़ास था, इसलिए उस पर ज़्यादा ध्यान देना लाजमी
था। उसकी माँ ने उन टीचर्स से मिलकर यह समझा
दिया था कि उस पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए। जब वह
इतना बड़ा हो गया कि न्यूज़पेपर की डिलीवरी कर सके
तो मैंने उसे यह समझाना शुरू कर दिया कि वह अपने
भार्ट (रसका तटा भाई मार्केट में रातार तेचता शा|

दिया था कि उस पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए। जब वह
इतना बड़ा हो गया कि न्यूज़पेपर की डिलीवरी कर सके
तो मैंने उसे यह समझाना शुरू कर दिया कि वह अपने
भाई (उसका बड़ा भाई मार्केट में न्यूज़पेपर बेचता था)
से ज़्यादा पैसे कमा सकता है क्योंकि वह अपने भाई से
ज़्यादा बुद्धिमान और मेहनती है।
हमने यह गौर किया कि जैसे-जैसे वह बड़ा हो रहा
था, उसकी सुनने की क्षमता बढ़ रही थी। दूसरी तरफ
उसके मन में अपनी कमी के बारे में सोचने की आदत
बिलकुल नहीं थी। जब वह सात साल का हुआ, तब
उसने पहली बार हमारी मेहनत को कामयाब साबित
किया। कुछ महीने तक उसने अपनी माँ से बाहर मार्केट
में न्यूज़पेपर बेचने की परमिशन माँगी पर उसकी माँ
उसके बहरेपन की वजह से डरी हुई थी।
एक माँ की तरह उसकी भी चिंता वाजिब थी कि कहीं
उसे कुछ सुनाई न दे और कोई दुर्घटना हो जाए तो?
फिर एक दिन अचानक वह मौका देखकर रसोई की
खिड़की से कूदकर मार्केट भाग गया। वहाँ एक मोची
से उसने 6 सेंट लिए और उससे न्यूज़पेपर खरीदे फिर
बेच दिया। एक बार जब वह न्यूज़पेपर बेच चुका तो
उसने दोबारा पेपर खरीदा और बेचा। यह उसने तब तक
किया जब तक कि शाम नहीं हो गई। फिर उसने वापस
आते समय मोची को उसके 6 सेंट वापस कर दिए। अंत
में उसने देखा कि आज उसने कितने सेंट कमाए थे।
जब हम लोग घर पहुंचे तो वह अपने कमरे में बिस्तर
पार यो ग्रा था।

में उसने देखा कि आज उसने कितने सेंट कमाए थे।
जब हम लोग घर पहुंचे तो वह अपने कमरे में बिस्तर
पर सो रहा था।
उसने अपनी मुट्ठी में सारे पैसे दबा रखे थे। उसकी माँ
ने मुट्ठी खोली तो सिक्के एकदम से गिर पड़े, वह अपने
बेटे की पहली कमाई पर भावुक होकर रोने लगी।
जबकि मेरा रिएक्शन उल्टा था, मैं दिल खोलकर हँसा
कि उसके मन में मेरा बोया गया बीज एक आकार ले
चुका है। उसकी माँ सोच रही थी कि उसका बेटा ढंग से
सुन नहीं सकता, कहीं पैसा कमाने के चक्कर में रास्ते
में बेटे के साथ कोई दुर्घटना हो जाती तो? मैंने उसके
अंदर एक बहादुर, कुछ बनने की इच्छा रखने वाला,
इंडिपेंडेंट बिजनेसमैन को देखा, जिसे अपने ऊपर पूरा
विश्वास है। उसने कदम उठाया और वह जीत गया।
उसके काम ने मुझे बहुत ख़ुशी दे दी क्योंकि मुझे पता
लग गया था कि जो मैंने उसके मन में बोया है, वह
उसके साथ पूरी जिंदगी रहने वाला है।
बाद में उसने इसे सही भी साबित किया। पहले जब
उसे अपने बड़े भाई से कुछ चाहिए होता था तो वह
जमीन पर लेट जाता, पैर मारने लगता, रोने लगता
और उस चीज़ को हासिल कर लेता। अब “उस हलके
बहरे बच्चे को कुछ चाहिए होता तो पहले वह पैसा
कमाता और उससे वह चीज़ ख़रीदता। आज भी उसकी
यही आदत है। मेरे बच्चे ने मुझे यह सबक सिखाया
कि एक अपाहिज इंसान अपने सामने पड़े पत्थरों को

यही आदत है। मेरे बच्चे ने मुझे यह सबक सिखाया
कि एक अपाहिज इंसान अपने सामने पड़े पत्थरों को
एक रुकावट के रूप में न लेकर उनसे सीढियाँ बनाकर
अपनी मंज़िल तक पहुँच सकता है।
वह छोटा बहरा बच्चा हाई स्कूल और ग्रेजुएशन तक
पहुँच गया, जबकि उसे तब तक सुनाई नहीं देता था,
जब तक उसके टीचर उसके पास आकर जोर से न
बोले। हमने उसे गूंगे बहरो के स्कूल नहीं भेज। हम नहीं
चाहते थे कि वह sign लैंग्वेज सीखे। हम चाहते थे कि
वह एक नार्मल इंसान की तरह अपनी जिंदगी गुजारे
और इसके लिए हमने पक्का मन बना लिया था। यह
इतनी आसानी से नहीं हुआ बल्कि हमें स्कूल के लोगो
से इस मामले में काफी बहस भी करनी पड़ी।
जब वह क्लास 10 में था, तब उसने एक कान में ठीक
से सुनाई देने के लिए एक मशीन लगाई पर उसका कोई
फायदा नहीं हुआ क्योंकि जब वह छह साल का था तो
शिकागो के रहने वाले डॉ. जे जॉर्डन विल्सन ने बच्चे के
एक सर के एक हिस्से का आपरेशन किया था। उन्होंने
पाया कि उसके कान में ऐसा कोई भी नेचुरल organ
नहीं है जिससे सुना जा सके।
अपने कॉलेज के अंतिम दिनों में (आपरेशन के 18
सालों बाद) कुछ ऐसा हुआ जो उसकी जिंदगी का
टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उसे एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक
मशीन मिल गई, जिससे सुनाई देने में आसानी हो, जो
पा
-01
Tron—

मशीन मिल गई, जिससे सुनाई देने में आसानी हो, जो
उसने ट्रायल के लिए मंगाई थी। उसे उस मशीन का
इस्तेमाल करने में उतनी दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि
उसने पहले भी ऐसे एक मशीन का इस्तेमाल करने की
कोशिश की थी पर कामयाब नहीं हो पाया था। अंत में
उसने उस डिवाइस को उठाया और यूँ ही कान में लगा
लिया और ये क्या! सामने वाले इंसान की तरह आवाज
सुनने की उसकी इच्छा सच हो गई। उसने पहली बार
इस तरह से आवाज सुनी थी जिस तरह से कोई भी
नार्मल इंसान सुनता है।
भगवान अपने अजूबे बड़े चमत्कारी ढंग से करता है।
वह आज बहुत खुश था, उस मशीन ने उसकी दुनिया
ही बदल दी थी। वह अपनी मम्मी का फोन उठाने के
लिए तुरंत दौड़ पड़ा और बड़े आराम से उसने पहली
बार ठीक से अपनी मम्मी की आवाज सुनी। अगले दिन
उसने पहली बार अपने प्रोफेसरों की ढंग से आवाज
सुनी। पहली बार रेडियो सुना और पहली बार फ़िल्म के
डायलाग भी सुने। जिंदगी में पहली बार वो लोगो की
नार्मल आवाज़ में बातें सुन सकता था, लोगों को जोर से
नहीं बोलना पड़ रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह
दूसरी दुनिया में आ गया हो। हमने नेचर की गलती को
अपने मज़बूत विल पॉवर की वजह से रिजेक्ट कर दिया
था। इस दुनिया में मौजूद इकलौते उपाय से हमने नेचर
को उसकी गलती सुधारने के लिए मजबूर कर दिया
था।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
उन्होंने कई बारइस बात को स्वीकार किया है कि अपने
इस काम के पहलेसाल में वह कामयाबनहीं हो पाई थी
और इस काम कोछोड़ देना चाहती थी। पर उनकी सोच
तब बदली, जब उन्होंने स्टैनले सेल्स के सेमीनार में
हिस्सा लिया।
उन्होंने बताया उस साल कंपनी के कांटेस्ट में खूबसूरत,
लंबी और कामयाबऔरत को रानी के टाइटल सेनवाजा
जाना था और उस साल उस औरत को वह टाइटल
मिला, जिसकी किसी ने उम्मीद ही नहीं की थी।
मैंनेफ़ैसला लिया कि मैं स्टेज पर जाऊँगी और प्रेसिडेंट
से बात करूँगी और उन्हें अगले साल रानी का यह
टाइटल जीतनेका अपनाइरादा बताऊँगी।
मिस्टर बेवरिज मुझ पर हँसे नहीं, बल्कि उन्होंने मेरी
आँखों की तरफ देखा और कहा–“मुझेभीलगताहैकितुम
जीत सकती हो।’ इन शब्दो ने मेरी जिंदगी में जान डाल
दी और अगले साल मुझे रानी का टाइटलसच में मिला।
मैरी के ने इस बात को बताया कि सक्सेस हासिल करने
का पहले कदम यह है कि आप खुद पर विश्वास रखेकि
आप काबिल है और आप उस सक्सेस के असली
हकदार है। उन्होंने अपने एक आर्टिकल में कामयाबी
हासिल करनेके लिए कुछ स्टेप्सको प्रैक्टिस करने के
लिए बताया है। वे चार स्टेप्स है–
नम ने गाना – सा- 10 पाना

लिए बताया है। वे चार स्टेप्स है-
खुद को सक्सेसफुल इंसान के रूप में महसूस
कीजिए–हमेशा खुद को सक्सेसफुल इंसान के रूप
में देखे। उसइंसान को सोचे, जिसके जैसे आप बनना
चाहते है। हर दिन कुछ वक्त अकेले बिताइए। आराम
से रिलैक्स होकरबैठ जाइए। अपनी आँखे बंद कर
लीजिए और अपनी इच्छा और गोल पर ध्यान दीजिए।
अपने आपको एक नए माहौल में देखिए, जिसे आप
इमेजिनकरते है, खुद को काबिल समझिए और खुद को
कांफिडेंस से भर लीजिए।
पिछली सक्सेस को याद कीजिए—हर कामयाबी,
चाहे वह छोटी हो या बड़ी, वह यह साबित करती हैकि
आप काबिल है और सक्सेसफुल हो सकते है। पिछली
सक्सेस को सेलिब्रेट कीजिए और जब भी आप निराश
हो तोउस कामयाबी को याद कीजिए।
गोल सेट करें–साफतौर पर यह तय कर ले कि आपको
क्या चाहिए। इस बात से हमेशा चैकन्ना रहिएऔर अपने
गोल से कभी भटकिए मत।
जिंदगी के लिए पॉजिटिवनज़रीया रखे–खुद का
पॉजिटिवपिक्चरबनाएं। आपकी जिंदगी, एक्शन
औरफ़ैसलेसभी में विश्वास रखे और पॉजिटिव बने रहे।
विल पॉवर से नेचर के रूल्सपर भी जीत हासिल की जा
सकती है
अब मैं आपको एक ऐसे आदमी की अनोखी कहानी
बताने जा रहा हूँ, जिससे ज़्यादाचमत्कारी आदमी मैंने
1
.

अब मैं आपको एक ऐसे आदमी की अनोखी कहानी
बताने जा रहा हूँ, जिससे ज़्यादाचमत्कारी आदमी मैंने
आज तक देखाही नहीं। जिसे मैंने जन्म लेने के कुछ
मिनट बाद देखा था, उसके कान नहीं थे। पहले तो
डॉक्टरों ने कुछ भी बतानेसे मना किया पर जब उनपर
दबाव डाला गया तो उन्होंने बताया कि शायद यह बच्चा
कभी बोल और सुन नहीं पाएगा।
मैं डॉक्टर के विचार से सहमत नहीं था और मैं ऐसा
कर सकता हूँ क्योंकि मैं उस बच्चे का पिता हूँ। मैंने मन
हीमन डॉक्टर के विचार को चुनौती दे दी और खुद एक
फ़ैसला ले बैठा कि भगवान् बिना कान के मेरे बच्चे को
इसदुनिया में भेज सकता है पर वह उसेपूरी जिंदगी
इस तरह तकलीफ़ में जीने के लिए मजबूर नहीं कर
सकता। मैंने यहसोच लिया था कि मेरा बेटा सुनेगा भी
और बोलेगा भी। मुझे नहीं पता था कि यह सब कैसे
होगा पर मैं इसबात पर जरूर विश्वास करता था कि
जहाँ चाह है वहाँ राह है।
मुझे महान एमर्सन की बात ध्यान आई, दुनिया कि हर
चीज़ सिर्फ एक ही बात सिखाती है वह है विश्वास।
हमेंसिर्फ विश्वास करके नेचर के रूल्सको फॉलो करना
है। यह हम सभी पर समान रूप से लागू होती है।
कभीआँख बंद करके आवाज सुनिए, नेचर आपको
रास्ता जरूर दिखाएगी।
वह रास्ता सिर्फ एक ही था—विल पॉवर ! मैंने अपने
अंदर यह विल पॉवर जगा ली थी कि मेरा बेटा
सारीजिंदगी गूंगा और बहरा तो नहीं रह सकता। मैंने
इस विल पॉवर को कभी अपने मन से जाने नहीं दिया.

इस विल पॉवर को कभी अपने मन से जाने नहीं दिया,
यहाँ तककि एक पल के लिए भी नहीं। कुछ सालों
पहले मैंने लिखा भी था, हमारी सबसे बड़ी रुकावट
हमारे मन में पड़ेविचार ही है। अगले ही पल मैंने बिस्तर
पर लेटे हुए अपने छोटे से बच्चे को देखा और यह सोचा
कि अगर यहसब सही है तो तो मेरा बेटा बिना कानो के
भी सुन सकता है। मैंने ठानलिया कि अपने बच्चे के मन
में कभीयह बात आने नहीं दूंगा कि वह सुन और बोल
नहीं सकता। इसके लिए चाहे मुझे जो भी करना पड़े।
मैंने कसम खा ली कि अपने बेटे के मन में बोलने और
सुनने की अपनी मजबूत इच्छा के बीज बो दूंगा और
वहजरूर एक दिन बिना किसी मशीन के सुनने और
बोलने लगेगा।
जब बच्चा थोड़ा सा बड़ा हुआ कि वह मेरे साथ
सहयोग कर सके तो मैं अपनी मजबूत विल पॉवर को
उसके अंदर जगाने की कोशिश करने लगा ताकि ये
इच्छा सच में हमारे सामने आ सके। मैं हर रोज उसके
कानके पास यह सब बोलता ताकि मेरे बेटे का मन ज़रा
भी यह स्वीकार न कर सके कि वह सुन नहीं सकता।
जैसे ही वह थोड़ा और बड़ा हुआ, वह आस-पास की
चीज़ों पर ध्यान देने लगा। हमने यह महसूस किया
किबेशक बहुत कम ही सहीपर बच्चे को हल्का सा
सुनाई तो देता था। जिस उम्र में बच्चे बोलने लगते है,
वह बोल तो नहींपाता था पर वह कुछ आवाजो को
सुन जरूर लेता था। बस हमें यही चाहिए था, मुझे यह
विश्वास हो गया था किमेरा यह तरीका काम कर रहा है।
तभी कुछ ऐसा हुआ, जिसने मुझे excited कर दिया,

विश्वास हा गया था ।कमरा यह तराका काम कर रहा हा
तभी कुछ ऐसा हुआ, जिसने मुझे excited कर दिया,
आश्चर्यचकित कर दिया और आशा से भर दिया। ऐसा
कुछ उससाधनसे हुआ, जिससे हमने कभी उम्मीद नहीं
की थी–हम एक टेप रिकॉर्डर लाए थे। जब उस बच्चे ने
एकगाना सुना तो वह excited हो गया और गाने को
सुनकर रियेक्ट करने लगा। वह कुछ तरह के गानों में
दिलचस्पी दिखाने लगा था। एक बार तो वह एक गाना
चलाकर दो घंटे तक खड़े-खड़े सुनतारहा। हमें तब तक
इस बात का पता नहीं चला कि ऐसा क्यों हो रहा है,
जब तक हमें आवाज के’ bone conduction |
प्रिंसिप्ल के बारे में जानकारी नहीं थी।
जब वह टेप-रिकॉर्ड पर रियेक्ट करने लगा था, मुझे
यह मालूम पड़ा कि जब मैं उसके कान के पास या
फिरदिमाग के पास जाकर कुछ बोलता हूँ तो उसेसमझ
में आता है। मैं अपनी मजबूत विल पॉवर को इसी
ज़रिए उसके अंदर जगाता था पर अभी तक जो
रिजल्टआयाथा वह, इतना ख़ुश करनेवाला नहीं था।
फिर भीमेरी विल पॉवर ने मेरे विश्वास का साथ दिया
और ऐसी किसी भी नेगेटिव बात को मन में आने से
पहले हीनिकाल फेंका।
मेरे पक्के इरादेका नतीजा यह हुआ कि मेरा बच्चा मेरी
आवाज को ठीक-ठीक सुनने लगा था, मैं उसके मन
में यहभरने से कभी नहीं चूकता था कि वह बोल और
सुन सकता है। मैंने यह एक्सपीरियंस किया हैकि बच्चो
को दादी नानी कीकहानी सुनना अच्छा लगता है। मैं
ऑफिस जाता, वहाँ पर उसके लिए कहानी लिखता
और यात रोगनाना गाडीगाागने – गट

का दादा नाना काकहाना सुनना अच्छा लगता हा म
ऑफिस जाता, वहाँ पर उसके लिए कहानी लिखता
और रात कोउसेसुनाता, साथ हीसाथ उसके मन में यह
भी भरता कि वह बिल्कुल ठीक है और सुन और बोल
सकता है।
एक कहानी, जब मैं सुनाता हूँ तो उसको हर बार
एक अलग तरीके से सुनाता, उसेअलग रंगों से भर
देता।इसकामकसद उसके मन में यह भरना था कि
उसके शरीर का ये दोष कोई कमी नहीं है बल्कि यह
उसकेजीवन की एक बड़ी एसेट यानी गुण और ताकत
बनेगी।
गीता में भी लिखा है ‘कुछ दुःख अच्छे के लिए होते है।’
और मैंने ऐसी फिलोसोफी को आजमाया भी है औरमुझे
ठीक तरह से पता है कि हर कमी अपने साथ उतनी ही
अच्छाइयाँ भी लेकर आती है। मुझे थोड़ा सा अंदाजा
था किइस कमी को किस तरह से उसकी ताकत में
बदलना है और मैं हर रोज उसेकहानियों में पिरोकर
उसकेमन में यह भरने की कोशिश करता कि उसकी
यह डिसेबिलिटीदुनिया के बड़े काम आ सकती है।
मुझे यह बताया गया था कि उसके कानो में ऐसी कोई
चीज नहीं है, जिससे सुना जा सके। इससे पहले कि
मैंनिराश होता मेरी विल पॉवर ने मेरे विश्वास को
डगमगाने नहीं दिया।
मैंने अपने बेटे के अंदर भी यह विश्वास जगा दिया था।
सबसे खास बात उसकी अब यह थी कि वह मुझसे
सवाल नहीं करता था और हर बात को मान लेता
था। मैंने हर तरह से उसके मन में यह बात भर दी थी
नियोमा माटो गाटा गरिन ।

था। मैंने हर तरह से उसके मन में यह बात भर दी थी
कि उसेअपने भाईसे ज़्यादा अच्छे रिजल्ट मिलेंगे।
एग्ज़ाम्पल के तौर पर यह बच्चा सभी टीचर्स के लिए
ख़ास था, इसलिए उसपर ज़्यादा ध्यान देना लाजमी
था। उसकी माँ ने उन टीचर्स से मिलकर यह समझा
दिया था कि उस पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए। जब वह
इतना बड़ा हो गया कि न्यूज़पेपर की डिलीवरी कर सके
तो मैंने उसे यह समझाना शुरूकर दिया कि वह अपने
भाई (उसका बड़ा भाई मार्केट में न्यूज़पेपर बेचता था)
से ज़्यादा पैसे कमा सकता है क्योंकि वह अपने भाई से
ज़्यादा बुद्धिमान और मेहनती है।
हमने यह गौर किया किजैसे-जैसे वह बड़ा हो रहा
था, उसकी सुनने की क्षमता बढ़ रही थी। दूसरी तरफ
उसके मन में अपनी कमी के बारे में सोचने की आदत
बिलकुलनहीं थी। जब वह सात साल का हुआ, तब
उसनेपहली बारहमारी मेहनत को कामयाबसाबित
किया। कुछ महीने तक उसनेअपनी माँ से बाहर मार्केट
में न्यूज़पेपर बेचने की परमिशन माँगी पर उसकी माँ
उसके बहरेपन की वजह से डरी हुई थी। एक माँ की
तरह उसकी भी चिंता वाजिब थीकि कहीं उसेकुछ
सुनाई न दे और कोई दुर्घटना हो जाए तो? फिर एक
दिन अचानक वह मौका देखकर रसोई कीखिड़की से
कूदकर मार्केट भाग गया। वहाँ एक मोची से उसने
सेंट लिए और उससे न्यूज़पेपर खरीदे फिरबेच दिया।
एक बार जब वह न्यूज़पेपर बेच चुका तो उसनेदोबारा
पेपर खरीदा और बेचा। यह उसनेतब तक कियाजब
तक कि शाम नहीं हो गई। फिर उसनेवापस आते

पेपर खरीदा और बेचा। यह उसनेतब तक कियाजब
तक कि शाम नहीं हो गई। फिर उसनेवापस आते
समय मोची को उसके 6 सेंट वापस कर दिए। अंत
मेंउसनेदेखाकि आज उसने कितनेसेंट कमाए थे। जब
हम लोग घर पहुंचे तो वह अपने कमरे में बिस्तर पर
सो रहा था। उसनेअपनी मुट्ठी में सारे पैसे दबा रखे थे।
उसकी माँ ने मुट्ठी खोली तो सिक्के एकदम से गिर पड़े,
वह अपने बेटे कीपहली कमाई पर भावुक होकर रोने
लगी। जबकि मेरा रिएक्शन उल्टा था, मैं दिल खोलकर
हँसा कि उसके मनमें मेरा बोयागया बीज एक आकार
चुका है। उसकी माँ सोच रही थी कि उसका बेटा
ढंग से सुन नहीं सकता,कहीं पैसा कमाने के चक्कर
में रास्ते में बेटे के साथ कोई दुर्घटना हो जाती तो? मैंने
उसके अंदर एक बहादुर, कुछ बनने की इच्छा रखने
वाला, इंडिपेंडेंटबिजनेसमैन को देखा, जिसे अपने
ऊपर पूरा विश्वास है। उसनेकदम उठाया और वह जीत
गया। उसके काम ने मुझे बहुत ख़ुशी दे दी क्योंकि मुझे
पता लग गया था किजो मैंने उसके मन में बोया है, वह
उसकेसाथ पूरी जिंदगी रहनेवाला है।
बाद में उसनेइसे सही भी साबित किया। पहलेजब
उसे अपने बड़े भाई से कुछ चाहिए होता था तो वह
जमीन पर लेटजाता, पैर मारने लगता, रोने लगता और
उस चीज़ को हासिल कर लेता। अब उसहलके बहरे
बच्चे’ को कुछचाहिए होता तो पहले वह पैसा कमाता
और उससे वह चीज़ ख़रीदता। आज भी उसकी यही
आदत है। मेरे बच्चे नेमुझे यह सबक सिखाया कि
एक अपाहिजइंसान अपने सामने पड़े पत्थरों को एक

आदत हा मर बच्च नमुझ यह सबक सिखाया कि
एक अपाहिजइंसान अपने सामने पड़े पत्थरों को एक
रुकावट के रूप में न लेकर उनसेसीढियाँ बनाकर
अपनी मंज़िलतक पहुँच सकता है।
वह छोटा बहरा बच्चा हाई स्कूल और ग्रेजुएशन तक
पहुँच गया, जबकि उसेतब तक सुनाई नहीं देता था,
जबतकउसके टीचर उसके पास आकर जोर से न
बोले। हमने उसे गूंगे बहरो के स्कूल नहीं भेज। हम नहीं
चाहते थे कि वह sign लैंग्वेज सीखे। हम चाहते थे
कि वह एक नार्मलइंसान की तरह अपनी जिंदगी गुजारे
और इसके लिए हमने पक्का मन बना लिया था। यह
इतनीआसानी से नहीं हुआ बल्कि हमें स्कूल के लोगो से
इस मामले में काफीबहस भी करनी पड़ी।
जब वह क्लास 10 में था, तब उसने एक कान में
ठीकसे सुनाई देने के लिए एक मशीन लगाई पर
उसकाकोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि जब वह छह
साल का था तो शिकागो के रहने वाले डॉ. जे जॉर्डन
विल्सन ने बच्चेके एक सर के एक हिस्से का आपरेशन
किया था। उन्होंने पाया कि उसके कान में ऐसा कोई भी
नेचुरल organ नहीं है जिससे सुना जा सके।
अपने कॉलेज के अंतिम दिनों में (आपरेशन के 18सालों
बाद) कुछ ऐसा हुआ जो उसकी जिंदगी का टर्निंगपॉइंट
साबित हुआ। उसेएक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन मिल
गई, जिससे सुनाई देने में आसानी हो, जो उसनेट्रायल
के लिएमंगाई थी। उसेउस मशीन काइस्तेमाल करने
में उतनी दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि उसनेपहले भी
ऐसे एक मशीन का इस्तेमालकरने की कोशिश की
मी मान उठीं तो TEI OT a योग

में उतनी दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि उसनेपहले भी
ऐसे एक मशीन का इस्तेमालकरने की कोशिश की
थी पर कामयाब नहीं हो पाया था। अंत में उसने उस
डिवाइस को उठाया और यूँ ही कान में लगालिया और
ये क्या! सामने वालेइंसान की तरह आवाज सुनने की
उसकीइच्छा सच हो गई। उसने पहली बार इस तरह
सेआवाज सुनी थी जिस तरह से कोई भी नार्मल इंसान
सुनता है।
भगवान अपने अजूबे बड़े चमत्कारी ढंग से करता है।
वह आज बहुत खुश था, उस मशीन ने उसकी दुनिया
हीबदल दी थी। वह अपनी मम्मी का फोन उठाने के
लिए तुरंत दौड़ पड़ा और बड़े आराम से उसनेपहली
बार ठीक से अपनी मम्मी की आवाज सुनी। अगले
दिन उसनेपहली बार अपने प्रोफेसरों की ढंगसे आवाज
सुनी। पहली बार रेडियो सुना और पहली बार फ़िल्म
के डायलाग भी सुने। जिंदगी मेंपहली बार वो लोगो की
नार्मल आवाज़ में बातें सुन सकता था, लोगोंको जोर से
नहीं बोलना पड़ रहा था। उसेऐसा लग रहा था जैसेवह
दूसरी दुनिया में आगया हो। हमने नेचर की गलती
को अपने मज़बूतविल पॉवर की वजह से रिजेक्ट कर
दियाथा। इस दुनिया में मौजूद इकलौते उपायसे हमने
नेचर को उसकी गलती सुधारने के लिए मजबूर कर
दियाथा।
विल पॉवर ने अपना काम कर दिया पर यह काम अभी
पूरानहीं हुआ था। अभी भी लड़के को इस डिसेबिलिटी
को एक ताकत में बदलना बाकी था।

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यह चमत्कार उसके लिए बस इतनी ही बड़ी बात थी
कि उसकी आवाज की दुनिया बदल गई थी। वह इसी
में खुश था। एक दिन उसने इस मशीन को बनाने वाले
को एक चिट्ठी लिखी। जिसमे उसने अपने एक्सपीरियंस
शेयर किए थे।
इस कारण उसे न्यू यॉर्क के उस कंपनी से बुलावा भी
आ गया। जब वह उस कंपनी के चीफ इंजिनियर से
अपनी बदली हुई दुनिया के बारे में बातें कर रहा था तो
उसके दिमाग में एक थॉट, एक इंस्पिरेशन -आप जो
भी नाम देना चाहे दे दे, उभर कर आई जिसने उसकी
कमजोरी को एक ताकत में बदल दिया, जिस वजह से
उसे पैसे भी मिलने लगे और खुशियाँ भी आ गई।
इस थॉट का पूरा सार यह था कि उसने उन लाखों बहरे
लोगो की मदद करने की ठानी, जो पूरी जिंदगी बहरे
बनकर ही काट देते है और इन मशीनों के इस्तेमाल
के बारे में जानते नहीं है। उसने सोचा अगर उन्हें इन
मशीनों के बारे में पता चल जाए तो उनकी जिंदगी
भी बदल सकती है। उसने अपनी बदली हुई जिंदगी के
बारे में बताने की ठानी। वह तभी इस फैसले पर पहुँच
गया था कि अब वह पूरी जिंदगी उन लोगों की मदद
करने के लिए समर्पित कर देगा। उसने तरंत कंपनी

गया था कि अब वह पूरी जिंदगी उन लोगों की मदद
करने के लिए समर्पित कर देगा। उसने तुरंत कंपनी
के मार्केटिंग सिस्टम की जानकारी ली, और फिर यह
खोजने की कोशिश की कि किस तरह से ऊँचा सुनने
वाले लोगों से बात की जाए और उन तक इन नए खोजे
गए तरीकों द्वारा पहुँचा जाए।
जब उसने अपना प्लान बना लिया तो उसे प्रेजेंटेशन
देने के लिए कंपनी में बुलाया गया। प्रेजेंटेशन देते वक्त
ही उसे दो साल तक अपने एंबिशन को आगे बढ़ाने के
लिए कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया। जब वह ऑफिस जा रहा
था तो उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव झलक रहे थे,
झलके भी क्यों न? वह उन हजारो लोगो की जिंदगी
सवारने जा रहा था और थोड़ा बहुत अपना सपना पूरा
करने भी।
जैसे ही वह उस हियरिंग ऐड बनाने वाली कंपनी से
जुड़ा, उसके तुरंत बाद ही उसने मुझे उस कंपनी में गूंगे
और बहरे लोगो के लिए दिए जाने लेक्चर को सुनने के
लिए बुलाया। इस लेक्चर का मकसद यह था कि गूंगे
और बहरो लोगों को सिखाया जा सके कि कैसे आसानी
से बोला व सुना जा सकता है।
इससे अहले मैंने इस तरह की एजुकेशन के बारे में
कभी सुना नहीं था, फिर भी कुछ डाउट और इस बात
की उम्मीद करता हुआ मैं वहाँ पहुँच गया कि मेरा वक्त
बर्बाद नहीं होगा। मैंने वहाँ पहुँचकर पाया कि जो इच्छा

बर्बाद नहीं होगा। मैंने वहाँ पहुँचकर पाया कि जो इच्छा
मैंने अपने बेटे के पैदा होने पर की थी उसकी वजह
से उसके अंदर उन बहरे लोगो के लिए बहुत कुछ कर
गुजरने का ज़ज्बा था। मैंने वहाँ पर यह पाया कि जिस
प्रिंसिप्ल का मैं पिछले बीस सालों से इस्तेमाल कर रहा
था, उसी के ज़रिए वहाँ, गूंगे और बहरे लोगो को उनके
जीवन से आगे निकलने की सलाह दी जा रही थी।
अपनी जिंदगी के बदलने के बाद से ही मेरा बेटा ब्लेयर
और मैं दोनों उन गूंगे बहरो के लिए काम पर लग पड़े।
इसमें ज़रा भी डाउट नही है कि अगर ब्लेयर की माँ
और मैंने उसके दिमाग को आकर देने की कोशिश न
की होती तो वह जीवन भर गूंगा और बाहर बना रहता।
जब ब्लेयर बड़ा हो गया तब डॉ. इरविन वूरहीस, जो
इन सब मामलो के बहुत बड़े एक्सपर्ट थे, वे मेरे बेटे को
अच्छे से चेक करने के बाद इस बात से बहुत चकित
हुए कि वह कैसे
सुन और बोल सकता है? जबकि
साइंटिफिक रूप से उसे सुनाई देना ही नहीं चाहिए।
एक्स रे फ़ोटो में भी ऐसा कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा
था, जिससे आवाज ब्रेन तक पहुँच सके। वे इस बात से
चकित थे कि वह सुन कैसे पा रहा है?
जब मैंने अपने बेटे में विल पॉवर के बीज बोए थे कि
वह बोल और सुन सकता है, अपनी जिंदगी एक नार्मल
इनसान की तरह जी सकता है तब नेचर ने कुछ ऐसा
किया, जिससे बाहरी दुनिया और उसके ब्रेन के बीच

बर्बाद नहीं होगा। मैंने वहाँ पहुँचकर पाया कि जो इच्छा
मैंने अपने बेटे के पैदा होने पर की थी उसकी वजह
से उसके अंदर उन बहरे लोगो के लिए बहुत कुछ कर
गुजरने का ज़ज्बा था। मैंने वहाँ पर यह पाया कि जिस
प्रिंसिप्ल का मैं पिछले बीस सालों से इस्तेमाल कर रहा
था, उसी के ज़रिए वहाँ, गूंगे और बहरे लोगो को उनके
जीवन से आगे निकलने की सलाह दी जा रही थी।
अपनी जिंदगी के बदलने के बाद से ही मेरा बेटा ब्लेयर
और मैं दोनों उन गूंगे बहरो के लिए काम पर लग पड़े।
इसमें ज़रा भी डाउट नही है कि अगर ब्लेयर की माँ
और मैंने उसके दिमाग को आकर देने की कोशिश न
की होती तो वह जीवन भर गूंगा और बाहर बना रहता।
जब ब्लेयर बड़ा हो गया तब डॉ. इरविन वूरहीस, जो
इन सब मामलो के बहुत बड़े एक्सपर्ट थे, वे मेरे बेटे को
अच्छे से चेक करने के बाद इस बात से बहुत चकित
हुए कि वह कैसे
सुन और बोल सकता है? जबकि
साइंटिफिक रूप से उसे सुनाई देना ही नहीं चाहिए।
एक्स रे फ़ोटो में भी ऐसा कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा
था, जिससे आवाज ब्रेन तक पहुँच सके। वे इस बात से
चकित थे कि वह सुन कैसे पा रहा है?
जब मैंने अपने बेटे में विल पॉवर के बीज बोए थे कि
वह बोल और सुन सकता है, अपनी जिंदगी एक नार्मल
इनसान की तरह जी सकता है तब नेचर ने कुछ ऐसा
किया, जिससे बाहरी दुनिया और उसके ब्रेन के बीच

किया, जिससे बाहरी दुनिया और उसके ब्रेन के बीच
एक पुल बन जाए और वह सुनने के काबिल बन सके।
उस बात का पता बड़े-बड़े एक्सपर्ट डॉक्टर भी नहीं
लगा पा रहे थे। यह मेरे लिए भी भगवान के किसी
चमत्कार से कम नहीं था। मैं अगर इस बात को पूरी
दुनिया के साथ शेयर ना करता तो शायद मैं कभी खुद
को माफ नहीं कर पाता। इस एक्सपीरियंस को आप
सभी से शेयर करके मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मान
रहा हूँ। यह सब कुछ ऐसे नहीं हुआ, मुझे इस बात का
विश्वास था क्योंकि इसका भी एक कारण था कि मुझे
पता था कि अगर आपके अंदर कोई इच्छा हो और
आपको उसमे पूरा विश्वास हो जाए तो यह विल पॉवर
आपको कुछ भी हासिल करा सकती है।
मुझे इस बात में कोई डाउट नहीं था कि एक मजबूत
विल पॉवर से आप किसी भी चीज को हकीकत में
बदल सकते है। ब्लेयर ने खुद को एक आम इनसान की
तरह आवाज़ सुनते हुए का सपना देखा और उसने वह
हासिल कर लिया।
उसका जन्म एक अपंग बच्चे की तरह हुआ था, जो
बिना किसी इच्छा के सडको पर पेन या कप बेचता
नजर आ सकता था। अब वही अपाहिज बच्चा उन
लाखो लोगो की मदद कर रहा था, जिन्हें ऊँचा सुनाई
देता है। यह सिर्फ मदद करना ही नहीं था बल्कि उसको
जॉब भी मिल गई थी, जिस वजह से वह आसम से
पूरी जिंदगी बिता सकता था। जो सफेद जूठ मैं बचपन

पूरी जिंदगी बिता सकता था। जो सफेद जूठ मैं बचपन
से उसके ब्रेन में भरने की कोशिश कर रहा था कि वह
अपनी कमजोरी को अपनी ताकत में बदल सकता है,
उसने इस बात को सच साबित कर दिया था। दुनिया में
ऐसा कुछ भी सही या गलत नहीं है, जिसे मजबूत विल
पॉवर और विश्वास के ज़रिए हकीकत में बदला ना जा
सके। ये हर किसी पर समान रूप से लागू होता है।
यह मेरा सौभाग्य था कि मैंने विल पॉवर को अपने बेटे
की कमी को सुधारने के लिए इस्तेमाल किया। इससे
अच्छा शायद ही किसी को इतने करीब से इस प्रिंसिप्ल
का इस्तेमाल करने का मौका मिले। अगर नेचर इस
विल पॉवर के सामने झुक सकती है तो किसी इंसान
या इनसान की क्या औकात है कि वह इस विल पॉवर
के सामने ना झुके। यही ब्रेन के पॉवर की ख़ासियत
है। हमें यह नहीं पता कि यह कैसे काम करता है, हर
इंसान, हर जगह और हर चीज़ के लिए यह प्रिंसिप्ल
बिल्कुल अलग तरह से काम करता है। शायद इस बात
को साइंस साबित कर सके। मैंने अपने बच्चे के मन में
वह बीज बोए, जिससे वह सुन और बोल सके, और यह
हकीकत में उसने साबित कर दिया। मैंने अपने बेटे के
मन में यह थॉट दिया कि कैसे वह अपनी इस कमजोरी
को अपनी ताकत बना सकता है और उसने भी ऐसा
कर दिखाया।
ऐसे रिजल्ट किस तरह से आए, इसका मेथड बताना
कोई मुश्किल काम नहीं है। इस मेथड में तीन बाते है।

ऐसे रिजल्ट किस तरह से आए, इसका मेथड बताना
कोई मुश्किल काम नहीं है। इस मेथड में तीन बाते है।
पहली कि मैंने विश्वास किया अपनी उस इच्छा पर कि
वह नार्मल रूप से सुन सकता है, जो मैंने अपने बेटे को
बताई थी। दूसरा मैंने हर उस मौजूद तरीके से अपनी
बात को पक्के इरादे से लगातार कोशिश कर उस तक
पहुँचाई थी। तीसरी सबसे ज़रूरी बात ,उसने मुझ पर
विश्वास किया।
कई सालों बाद, मेरे साथ काम करने वाले एक सहयोगी
बीमार पड़ गए थे। उनकी हालत दिन ब दिन बदतर
होती जा रही थी। अंत में उन्हें अस्पताल में आपरेशन
करने के लिए भर्ती कराया गया। जब वे आपरेशन
थिएटर की तरफ पहियों वाले पलंग पर लेते हुए जा रहे
थे। तब मैंने उनकी ओर देखा और इस सोच में डूब गया
कि इतने दुबले पतले और कमजोर इंसान का आपरेशन
कैसे हो सकता है? क्या यह आपरेशन सक्सेसफुल हो
भी पाएगा या नहीं? डॉक्टर ने भी हमें यह चेतावनी
दे दी थी कि उनके बचकर वापस आने की बहुत कम
उम्मीद है। पर यह डॉक्टर की राय थी। यह पेशेंट की
सोच बिलकुल नहीं थी। फर्क इससे नहीं पड़ता कि
डॉक्टर क्या सोच रहा है, यहाँ पर फर्क इससे पड़ेगा कि
पेशेंट क्या सोच रहा है। उन्होंने जाते हुए मुझसे कहा,
“दोस्त, चिंता मत करो। मैं जल्द ही वापस आऊँगा और
आपके साथ काम पर लगूंगा” |
नर्स ने मेरी तरफ दया भरी नजरों से देखा। लेकिन वह

3. विश्वास
इच्छा को हासिल करने के लिए इमेजिन करना
और उस पर विश्वास करना
अमीर बनने की ओर दूसरा कदम
विश्वास मन का मेन केमिकल होता है। जब थॉट
की फ्रीक्वेंसी विश्वास के साथ जुड़ती है तो हमारा
सब कॉन्शियस (sub conscious) माइंड उन
विचारों की फ्रीक्वेंसी को स्पिरिचुअल शक्ति के रूप
में अनलिमिटेड पॉवर के पास भेज देता है, जो उसे
हकीकत के रूप में आकार दे सके।
सभी पॉजिटिव भावनाओ में सबसे ताकतवर भाव होते
है विश्वास, प्यार और सेक्स के। जब ये तीनो मिलते है
तो, इनमे इतनी अपार शक्ति होती है, जो विचारों में नई
एनर्जी भरके तुरंत हमारे सब कॉन्शियस में पहुँच जाती
है जहाँ ये स्पिरिचुअल शक्ति के रूप में बदल जाती है।
स्पिरिचुअल शक्ति वह ज़रिया है, जो असीम शक्ति से
हकीकत की दुनिया में विचारों को साकार करने का
जवाब लेकर आती है।
प्यार और विश्वास का मन से रिश्ता होता है, जो
ज़्यादातर स्पिरिचुअल हिस्से से जुड़े हुए है। जबकि
सेक्स पूरी तरह बायोलॉजी से जुड़ा हुआ है, यह सिर्फ
शरीर से जुड़ा हुआ हिस्सा है। इन तीनो इमोशंस का
मिक्सचर फिक्स्ड, thoughful माइंड और असीम
पॉवर के बीच कम्यनिकेशन का एक सीधा रास्ता

रारार स जुड़ा हुआ हस्सा ह। इन ताना इमारास का
मिक्सचर फिक्स्ड, thoughful माइंड और असीम
पॉवर के बीच कम्युनिकेशन का एक सीधा रास्ता
बनाता है।
विश्वास या ट्रस्ट कैसे डेवलप किया जाए
विश्वास एक ऐसी स्टेट ऑफ़ माइंड है, जिसे ऑटो
suggestion प्रिंसिप्ल के ज़रिए सब कॉन्शियस
माइंड में बार-बार रिपीट करने से डेवलप किया जा
सकता है। विश्वास ऐसी एबिलिटी है, जो इच्छा की
शक्ति को फिजिकल रूप में साकार कर सकता है।
अगले चैप्टर में ऑटो suggestion के बारे में
इंस्ट्रक्शन बताए गए है, उन्हें पढ़कर आपको पता
चलेगा कि आप जो चाहते हैं, उसके बारे में अगर
आपके सब कॉन्शियस माइंड को विश्वास दिला दिया
जाए तो उसे वह जरूर मिलता है। आपके गोल को
अचीव करने के लिए आपका सब कॉन्शियस माइंड
आपके विश्वास के आधार पर काम करेगा।
अगर किसी इंसान के पास विश्वास का नामोनिशान ही
नहीं है तो उसे यह बताना बहुत मुश्किल है कि विश्वास
किस तरह डेवलप किया जा सकता है। यह ठीक उतना
ही मुश्किल है, जितना किसी अंधे इंसान को लाल
रंग के बारे में बताना। विश्वास एक स्टेट ऑफ़ माइंड
है, जिसका डेवलपमेंट इस बुक में दिए गए इन तेरह
प्रिंसिपल्स को सीखने के बाद किया जा सकता है।

रारार स जुड़ा हुआ हस्सा ह। इन ताना इमारास का
मिक्सचर फिक्स्ड, thoughful माइंड और असीम
पॉवर के बीच कम्युनिकेशन का एक सीधा रास्ता
बनाता है।
विश्वास या ट्रस्ट कैसे डेवलप किया जाए
विश्वास एक ऐसी स्टेट ऑफ़ माइंड है, जिसे ऑटो
suggestion प्रिंसिप्ल के ज़रिए सब कॉन्शियस
माइंड में बार-बार रिपीट करने से डेवलप किया जा
सकता है। विश्वास ऐसी एबिलिटी है, जो इच्छा की
शक्ति को फिजिकल रूप में साकार कर सकता है।
अगले चैप्टर में ऑटो suggestion के बारे में
इंस्ट्रक्शन बताए गए है, उन्हें पढ़कर आपको पता
चलेगा कि आप जो चाहते हैं, उसके बारे में अगर
आपके सब कॉन्शियस माइंड को विश्वास दिला दिया
जाए तो उसे वह जरूर मिलता है। आपके गोल को
अचीव करने के लिए आपका सब कॉन्शियस माइंड
आपके विश्वास के आधार पर काम करेगा।
अगर किसी इंसान के पास विश्वास का नामोनिशान ही
नहीं है तो उसे यह बताना बहुत मुश्किल है कि विश्वास
किस तरह डेवलप किया जा सकता है। यह ठीक उतना
ही मुश्किल है, जितना किसी अंधे इंसान को लाल
रंग के बारे में बताना। विश्वास एक स्टेट ऑफ़ माइंड
है, जिसका डेवलपमेंट इस बुक में दिए गए इन तेरह
प्रिंसिपल्स को सीखने के बाद किया जा सकता है।

बार-बार अपने मन में थॉट डालना ही खुद से भावनाएं
डेवलप करने का इकलौता जरिया है। जो थॉट आप
मन में डालते हैं वही बन जाते हैं, यहाँ तक कि अपराधी
भी। एक क्रिमिनल लोगिस्टिक में कहा गया है कि जब
लोग पहली बार अपराध या अपराधियों के कांटेक्ट में
आते है तो उनसे घृणा करते है, अगर फिर भी वे किसी
तरह कुछ दिनों तक अपराध के कांटेक्ट में बने रहे तो
उन्हें उसकी आदत होने लगती है और वो उसे सहन
करना सीख जाते है और जब वे काफी लंबे समय तक
उसके कांटेक्ट में रहते है तो अपराध के इन्फ्लुएंस में
आकर उसमे शामिल हो जाते है।
अगर इस बात को इस तरह कहे कि अगर आप पैशन
या इमोशन के साथ किसी थॉट को लगातार सोचते है
तो आपका सब कॉन्शियस माइंड उसे स्वीकार कर
लेता है और इस पर काम करने लगता है। आपका सब
कॉन्शियस माइंड उसे सच करने के लिए कोई-न-कोई
प्रैक्टिकल प्रोसेस मौजूद करा देता है। वो सभी थॉट,
जिनसे भावनाएँ जुड़ जाती है और उनमे विश्वास भर
जाता है तो वे थॉट खुद को हकीकत में बदल लेते है।
ऐसे लाखो लोग है, जो यह मानते है कि वे गरीबी और
भुखमरी में जीने के लिए इसलिए मजबूर है क्योंकि
कोई रहस्यमयी ताकत उनके खिलाफ काम कर रही
है, जिस पर उनका कोई कंट्रोल नहीं है। इस नेगेटिव
थिंकिंग या विश्वास के कारण वे अपने दुर्भाग्य को ख़ुद
बनाते है क्योंकि उनका सब कॉन्शियस माइंड उनके इस

थिंकिंग या विश्वास के कारण वे अपने दुर्भाग्य को खुद
बनाते है क्योंकि उनका सब कॉन्शियस माइंड उनके इस
नेगेटिव विश्वास को पकड़ लेता है और इसे हकीकत में
बदल देता है।
एक बार फिर यह बताना सही होगा कि अगर आप
अपनी इच्छा को हकीकत में बदलना चाहते है तो आप
उसे अपने सब कॉन्शियस माइंड तक पहुँचा दीजिए।
लेकिन इसके लिए यह जरुरी है कि आपकी इच्छा
मजबूत और पॉजिटिव हो। अगर ऐसा है तो आप उसे
फिजिकल रूप में बदल सकते है। आपका विश्वास
ही वह भाव है, जो आपके सब कॉन्शियस माइंड के
एक्शन को डिसाइड करता है। ऑटो सजेशन के द्वारा
अपने सब कॉन्शियस माइंड को धोखा देने से आपको
कोई नहीं रोक रहा है, जिस तरह से मैंने अपने बेटे के
सब कॉन्शियस माइंड को धोखा दिया था।
इस धोखे को हकीकत बनाने के लिए इस तरह बर्ताव
करे जैसे आपके पास वह चीज़ पहले से ही मौजूद है
जिसकी आप इच्छा कर रहे है। यह भाव आपमें उस
समय होना चाहिए, जब आप अपने सब कॉन्शियस
माइंड को आर्डर दे रहे हो।
सब कॉन्शियस माइंड विश्वास और भरोसे के सिचुएशन
में दिए गए किसी भी आर्डर को, जिसके बारे में आपको
विश्वास है कि वह हकीकत में बदल जाएगा, सबसे सीधे
और प्रैक्टिकल तरीके से फिजिकल रूप में बदल देगा।

अपने सब कॉन्शियस माइंड को धोखा देने से आपको
कोई नहीं रोक रहा है, जिस तरह से मैंने अपने बेटे के
सब कॉन्शियस माइंड को धोखा दिया था।
इस धोखे को हकीकत बनाने के लिए इस तरह बर्ताव
करे जैसे आपके पास वह चीज़ पहले से ही मौजूद है
जिसकी आप इच्छा कर रहे है। यह भाव आपमें उस
समय होना चाहिए, जब आप अपने सब कॉन्शियस
माइंड को आर्डर दे रहे हो।
सब कॉन्शियस माइंड विश्वास और भरोसे के सिचुएशन
में दिए गए किसी भी आर्डर को, जिसके बारे में आपको
विश्वास है कि वह हकीकत में बदल जाएगा, सबसे सीधे
और प्रैक्टिकल तरीके से फिजिकल रूप में बदल देगा।
आपके लिए यह ज़रूरी है कि आप पॉजिटिव
भावनाओं को अपने मन के स्ट्रोंग पॉवर के रूप में
encourage करे और नेगेटिव भावनाओ को
कमज़ोर करके उन्हें अपने मन से निकाल दे।
जिस मन में पॉजिटिव भावाएं भरी होती है वो उस स्टेट
ऑफ़ माइंड की मनपसंद जगह बन जाती है। ऐसा मन
इच्छा के अनुसार सब कॉन्शियस माइंड को इंस्ट्रक्शन
देता है, जिसे यह स्वीकार करता है और इस पर तुरंत
एक्शन लेकर काम करना शुरू कर देता है।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
काफी लंबे समय से धार्मिक लोग स्ट्रगल कर रहे इंसानों
को यह मैसेज देते रहे है कि उन्हें इस या उस धर्म की
बातों पर विश्वास करना चाहिए, लेकिन वे लोगों को यह
बताने में फेल हो गए कि विश्वास को किस तरह से पैदा
किया जाए। उन्होंने यह नहीं बताया कि विश्वास एक
मेंटल स्टेट है, जिसे ऑटो सजेशन द्वारा डेवलप किया
जा सकता है।
ऐसी भाषा में जिसे एक आम आदमी समझ सके
हम वह प्रिंसिप्ल बताएँगे, जिसके द्वारा विश्वास वहाँ
भी डेवलप किया जा सकता है, जहाँ पर इसका
नामोनिशान नहीं है।
अपने आप पर और भगवान् पर विश्वास रखे।
विश्वास ही वो शक्ति है जो विचार को जीवन, ताकत
और एक्शन प्रदान करता है.
हम आपको यहाँ कुछ बातें बताने जा रहे हैं, जिन्हें
अगर आप ज़ोर से पढ़ेंगे तो ज़्यादा अच्छा होगा.
विश्वास पैसा कमाने का शुरुआती पॉइंट है।
विश्वास उन सभी चमत्कारों और सभी रहस्यो का
base है, जिन्हें साइंस के नियमो के आधार पर
साफ़-साफ़ नहीं समझाया जा सकता।

Dase 6, जिन्ह साइस कानयमाक आधार पर
साफ़-साफ़ नहीं समझाया जा सकता।
विश्वास कामयाबी का इकलौता इलाज है।
विश्वास वह केमिकल है, जिसे जब प्रार्थना के साथ
मिलाया जाता है तो इनसान अनलिमिटेड पॉवर के साथ
सीधे बातचीत करता है।
विश्वास वह केमिकल है, जो इनसान के सीमित मन
द्वारा क्रिएट की गई आईडिया के साधारण वाइब्रेशन को
स्पिरिचुअल वाइब्रेशन में बदल देता है ।
यह फैक्ट तो सभी जानते है कि आदमी अपने आपसे
जो बार-बार दोहराता है, वह आखिरकार उस बात पर
विश्वास करने लगता है, चाहे वह बात सही हो या गलत।
अगर कोई आदमी बार बार किसी झूठ को दोहराता रहे
तो अंत में वह उस झूठ को सच के रूप में स्वीकार कर
लेगा। यही नहीं, वह विश्वास करने लगेगा कि यही सच
है।
इनसान वही बन जाता है, जिस तरह के विचारों को
वह अपने मन में राज करने देता है। जिन विचारों
को इनसान अपने मन में जगह देता है, जिन्हें वह
सहानुभूति के साथ encourage करता है और
जिन्हें वह अपनी भावना के साथ जोड़ता है, वो मोटीवेट
करने वाली पॉवर बन जाते है, जो उसके हर एक्टिविटी,
हर काम और हर एक्शन को कंट्रोल और डायरेक्ट
करती है।

आइए, अब एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट सच्चे स्टेटमेंट के
बारे में जानते हैं
जब थॉट इमोशंस के साथ जुड़ जाते है तो वे एक
मैग्नेटिक पावर बन जाते है, जो अपने जैसे या अपने से
जुड़े दूसरे विचारों को attract करते है।
भावना के साथ जुड़ जाने पर इस तरह से चुंबक की
से
तरह हो जाते हैं कि थॉट की तुलना हम उस बीज से
कर सकते है, जिसे उपजाऊ (fertile) जमीन में बोए
जाने पर वह उगने लगता है, बढ़ता है और कई गुना
बड़ा हो जाता है, जब तक कि यह छोटा सा एक बीज
अपने ही जैसा लाखो अनगिनत बीज नहीं बना देता।
ह्यूमन माइंड ऐसे वाइब्रेशन को लगातार attract
करता है, जो मन में रह रहे विचारों के जैसे हों। इनसान
के मन में जो विचार, प्लान या गोल ज़्यादा चलते रहते
हैं वो अपने रिश्तेदारों को attract करने लगता है और
इन रिश्तेदारों से जुड़ने के बाद वह ज़्यादा पावरफुल बन
जाता है और उसकी पॉवर तब तक बढ़ती रहती है, जब
तक कि वह उस इंसान के ऊपर हावी नहीं हो जाता
जिसके मन में वह रहता है।
अब हम शुरुआती पॉइंट पर फिर से चलते हैं और यह
जानते हैं कि किस तरह किसी विचार, प्लान या गोल
का बीज मन में बोया जा सकता है। यह जानकारी
आसानी से दी जा सकती है–किसी भी विचार, प्लान

आइए, अब एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट सच्चे स्टेटमेंट के
बारे में जानते हैं
जब थॉट इमोशंस के साथ जुड़ जाते है तो वे एक
मैग्नेटिक पावर बन जाते है, जो अपने जैसे या अपने से
जुड़े दूसरे विचारों को attract करते है।
भावना के साथ जुड़ जाने पर इस तरह से चुंबक की
से
तरह हो जाते हैं कि थॉट की तुलना हम उस बीज से
कर सकते है, जिसे उपजाऊ (fertile) जमीन में बोए
जाने पर वह उगने लगता है, बढ़ता है और कई गुना
बड़ा हो जाता है, जब तक कि यह छोटा सा एक बीज
अपने ही जैसा लाखो अनगिनत बीज नहीं बना देता।
ह्यूमन माइंड ऐसे वाइब्रेशन को लगातार attract
करता है, जो मन में रह रहे विचारों के जैसे हों। इनसान
के मन में जो विचार, प्लान या गोल ज़्यादा चलते रहते
हैं वो अपने रिश्तेदारों को attract करने लगता है और
इन रिश्तेदारों से जुड़ने के बाद वह ज़्यादा पावरफुल बन
जाता है और उसकी पॉवर तब तक बढ़ती रहती है, जब
तक कि वह उस इंसान के ऊपर हावी नहीं हो जाता
जिसके मन में वह रहता है।
अब हम शुरुआती पॉइंट पर फिर से चलते हैं और यह
जानते हैं कि किस तरह किसी विचार, प्लान या गोल
का बीज मन में बोया जा सकता है। यह जानकारी
आसानी से दी जा सकती है–किसी भी विचार, प्लान

पा बाण मन में पाया जा सकता। यह जानकार।
आसानी से दी जा सकती है–किसी भी विचार, प्लान
या गोल को बार-बार दोहराए जाने पर इसे मन में रखा
जा सकता है। इसलिए आपसे यह कहा गया है कि
आप अपने main गोल को लिख ले, इसे याद कर ले
और इसे जोर से हर दिन पढ़े जब तक कि इस साउंड
के वाइब्रेशन आपके सब कॉन्शियस माइंड तक न पहुँच
जाए।
ख़राब माहौल के असर को हटाने की कसम खाएं और
अपने जीवन को सही पटरी पर ले आए। अपनी मन की
ताकत और जिम्मेदारियों का हिसाब लगाएँ और आप
पाएँगे कि आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है कांफिडेंस
की कमी। आप ऑटो सजेशन के प्रिंसिप्ल की मदद से
इस कमी को दूर कर सकते है और अपने डाउट को
हिम्मत में बदल सकते है। इस प्रिंसिप्ल का इस्तेमाल
कुछ पॉजिटिव विचारों के आसान इस्तेमाल द्वारा किया
जा सकता है। आपको सिर्फ इतना करना है कि आप
इन पॉजिटिव विचारों को लिख ले, याद कर ले और
बार-बार पढ़े, जब तक कि ये आपके सब कॉन्शियस
माइंड के एक्टिव डिवाइस का हिस्सा न बन जाए।
कांफिडेंस का फार्मूला
पहला : मैं जानता हूँ कि मुझमे जीवन के क्लियर गोल
को हासिल करने की काबिलियत है और इसलिए मैं
खुद से यह उम्मीद रखता हूँ कि मैं इसे हासिल करने के
लिए लगातार लगन से काम करूंगा।

खुद से यह उम्मीद रखता हूँ कि मैं इसे हासिल करने के
लिए लगातार लगन से काम करूंगा।
दूसरा : मुझे एहसास है कि मेरे मन के स्ट्रोंग विचार
अंत में अपने आपको बाहरी एक्शन में बदल लेंगे और
धीरे-धीरे अपने आपको फिजिकल रूप में बदल लेंगे।
इसलिए मैं अपने विचारों को हर दिन तीस मिनट तक
इस बात पर concentrate करूँगा कि मैं उस
इनसान की तरह बनने के बारे में सोच रहा हूँ ताकि मेरे
मन में इसकी एक क्लियर तसवीर बन सके।
तीसरा : मैं जानता हूँ कि ऑटो सजेशन के प्रिंसिप्ल
के इस्तेमाल के द्वारा मैं जिस भी इच्छा को अपने मन
में लगातार बनाए रखूगा वह अंत में किसी प्रैक्टिकल
तरीके द्वारा अपने आपको फिजिकल रूप में बदल लेगी
और मुझे वह चीज़ हासिल हो जाएगी, जिसका मैंने
गोल बनाया है। इसलिए मैं हर दिन दस मिनट इस काम
में दूंगा ताकि मैं कांफिडेंस को डेवलप करूं।
चौथा : मैंने साफ़-साफ़ जीवन में अपने main गोल
का डिस्क्रिप्शन लिख दिया है और मैं कोशिश करना
कभी नहीं छोडूंगा, जब तक कि मुझमे इसे हासिल
करने का अच्छा ख़ासा कांफिडेंस डेवलप न हो जाए।
पाँचवाँ : मुझे पूरी तरह एहसास है कि कोई भी प्रॉपर्टी
या पोजीशन तब तक लंबे समय तक नहीं बनी रह
सकती, जब तक कि वो सच और न्याय के फाउंडेशन
पर ना बनी हो। इसलिए मैं ऐसा कोई भी काम नहीं

पर ना बनी हो। इसलिए मैं ऐसा कोई भी काम नहीं
करूंगा ,जिससे इसका असर पड़ने वाले सभी लोगो
को फ़ायदा ना हो। मैं इसी शक्तियों को अपनी तरफ
अट्रैक्ट करके कामयाबी पाऊँगा, जिनका मैं इस्तेमाल
करना चाहता हूँ और मैं दूसरे लोगों के सहयोग के द्वारा
कामयाबी पाऊँगा।
मैं लोगों को इंस्पायर करूंगा कि वो दूसरों की सेवा करें
क्योंकि मैं हमेशा दूसरों की सेवा करने की इच्छा रखता
हूँ. मैं पूरी मानव जाति के प्रति प्यार डेवलप करूँगा
और घृणा, ईर्ष्या, स्वार्थ और दोष देखने की आदत को
अपने मन से दूर करूँगा क्योंकि मैं जानता हूँ कि दूसरो
के प्रति नेगेटिव नजरिया रखने से मुझे कभी कामयाबी
नहीं मिल सकती। मैं ऐसे काम करूँगा, जिससे दूसरों
को मुझ पर विश्वास हो क्योंकि मैं उनमे और अपने
आपमें विश्वास रखूगा। मैं इस फॉर्मूले पर अपने साइन
करूँगा और इसे याद कर लूँगा और इसे हर दिन
जोर-जोर से पढूंगा।
ऐसा करते समय मुझे पूरा विश्वास होगा कि यह मेरे
विचारों और एक्शन पर धीरे-धीरे असर करेगा ताकि मैं
एक इंडिपेंडेंट और सक्सेसफुल इंसान बन सकूँ।
इस फॉर्मूले के पीछे नेचर का एक रूल है, जिसे अब
तक कोई आदमी साफ़-साफ़ बता नहीं पाया है। इस
रूल को आप किस नाम से पुकारते है, यह इम्पोर्टेन्ट
नहीं है। इसके बारे में इम्पोर्टेन्ट फैक्ट यह है कि यह

टैलेंट को जगा सकते है, जो आपके मन में कहीं दबी
पड़ी है। इसके ज़रिए से आप अपने आपको ऊपर की
तरफ ले जा सकते है और जिस गोल को हासिल करना
चाहे उस गोल को अचीव कर सकते है।
चालीस साल की उम्र तक अब्राहम लिंकन ने जिस
काम में हाथ डाला, वे उसमे फेल हुए। वे किसी गुमनाम
जगह से आए हुए गुमनाम आदमी थे, जब तक कि
उनके जीवन में एक महान एक्सपीरियंस नहीं आया
और उस एक्सपीरियंस के उनके दिलोदिमाग में सोई
हुए, उनके टैलेंट को नहीं जगाया। तब जाकर वे दुनिया
के महान लोगो में से एक बन सके। यह एक्सपीरियंस
दुःख और प्यार की भावना से जुड़ा हुआ था। यह
एक्सपीरियंस ऐन रूटलेज के ज़रिए से आया, जो
इकलौती औरत थी, जिसे लिंकन ने प्यार किया था।
यह एक जाना माना सच है कि प्यार की भावना विश्वास
के मेंटल स्टेट से बहुत करीबी रूप से जुड़ी हुई है।
इसका कारण यह है कि प्यार हमारे विचार के वाइब्रेशन
को उनके स्पिरिचुअल फॉर्म में बदलने के सबसे करीब
होता है। अपने रिसर्च के दौरान ऑथर ने पाया कि
सैकड़ो कामयाब लोगो की जिंदगी और अचीवमेंट के
एनालिसिस से यह पता चलता है कि उनमे से लगभग
सभी की कामयाबी के पीछे किसी-न-किसी औरत की
सलाह का असर साफ़-साफ़ था।

(Full Book) Think and
Grow Rich
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अगर आप विश्वास की शक्ति का सबूत चाहते है तो
आप उन आदमियों और औरतों के अचीवमेंट्स को
स्टडी कीजिए, जिन्होंने इसका इस्तेमाल किया है। लिस्ट
में सबसे ऊपर नजारेन का नाम आता है। ईसाई धर्म का
आधार है विश्वास–चाहे कितने ही लोगो ने इस महान
शक्ति का गलत मतलब निकाला हो और उसे तोडा
मरोड़ा हो।
ईसामसीह की एजुकेशन और अचीवमेंट्स का सार,
जिसे चमत्कार कहा जाता है, विश्वास या faith ही है।
अगर चमत्कार जैसी कोई चीज होती है तो यह सिर्फ़
उस मेंटल स्टेट के द्वारा हो सकती है, जिसे विश्वास कहा
जा सकता है।
आइए अब हम उस आदमी के जीवन में विश्वास की
शक्ति देखे, जिसे पूरी मानव जाति बहुत अच्छी तरह से
जानती है। उस आदमी का नाम है–महात्मा गांधी। इस
आदमी में विश्वास की संभावनाओ (possibility) का
सबसे चमत्कारी एग्ज़ाम्पल देखने को मिलेगा। अपने
समय में गांधीजी के पास जितनी शक्ति थी, उतनी
किसी भी जीवित इंसान के पास नहीं थी और इसके
बावजूद उनके पास शक्ति के कोई हथियार नहीं थे जैसे
कि पैसा जंग के

समय में गांधीजी के पास जितनी शक्ति थी, उतनी
किसी भी जीवित इंसान के पास नहीं थी और इसके
बावजूद उनके पास शक्ति के कोई हथियार नहीं थे जैसे
कि पैसा, जंग के
जहाज, सिपाही या हथियार। गांधीजी के पास पैसा
नहीं था, घर नहीं था, उनके पास एक सूट भी नहीं था।
लेकिन उनके पास शक्ति थी। उनके पास यह शक्ति कैसे
आई?
उन्होंने इसे विश्वास के प्रिंसिप्ल की समझ के द्वारा
डेवलप किया और उनमे यह काबिलियत थी कि वे
अपने विश्वास को बीस करोड़ लोगो के दिमाग में बो
सके।
गांधीजी ने बीस करोड़ मन को एक दिमाग की तरह
एक साथ जुड़ने और एक-साथ चलने के लिए इंस्पायर
किया, जो एक महान काम था।
विश्वास के सिवा और कौन सी शक्ति इतना कुछ कर
सकती थी?
बीसवीं सदी के बीच में, मार्टिन लूथर किंग को ह्यूमन
राइट्स और सभी लोगो के गौरव की रक्षा के लिए
उनके मन में गहरा विश्वास था। जिसकी वजह से हर
जाति, कम्युनिटी में जिन लोगों को उन पर विश्वास
था वो आदमी और औरतें उनके समाज में समान
अधिकारों के लिए एक संघर्ष से जुड़े। उनका सपना था
कि किसी को उसके रंग से नहीं बल्कि उसके कैरेक्टर

समय में गांधीजी के पास जितनी शक्ति थी, उतनी
किसी भी जीवित इंसान के पास नहीं थी और इसके
बावजूद उनके पास शक्ति के कोई हथियार नहीं थे जैसे
कि पैसा, जंग के
जहाज, सिपाही या हथियार। गांधीजी के पास पैसा
नहीं था, घर नहीं था, उनके पास एक सूट भी नहीं था।
लेकिन उनके पास शक्ति थी। उनके पास यह शक्ति कैसे
आई?
उन्होंने इसे विश्वास के प्रिंसिप्ल की समझ के द्वारा
डेवलप किया और उनमे यह काबिलियत थी कि वे
अपने विश्वास को बीस करोड़ लोगो के दिमाग में बो
सके।
गांधीजी ने बीस करोड़ मन को एक दिमाग की तरह
एक साथ जुड़ने और एक-साथ चलने के लिए इंस्पायर
किया, जो एक महान काम था।
विश्वास के सिवा और कौन सी शक्ति इतना कुछ कर
सकती थी?
बीसवीं सदी के बीच में, मार्टिन लूथर किंग को ह्यूमन
राइट्स और सभी लोगो के गौरव की रक्षा के लिए
उनके मन में गहरा विश्वास था। जिसकी वजह से हर
जाति, कम्युनिटी में जिन लोगों को उन पर विश्वास
था वो आदमी और औरतें उनके समाज में समान
अधिकारों के लिए एक संघर्ष से जुड़े। उनका सपना था
कि किसी को उसके रंग से नहीं बल्कि उसके कैरेक्टर

था वा आदमा आर आरत उनक समाज म समान
अधिकारों के लिए एक संघर्ष से जुड़े। उनका सपना था
कि किसी को उसके रंग से नहीं बल्कि उसके कैरेक्टर
से पहचाना जाना चाहिए। उनका यह सपना पूरी तरह
से तो पूरा नहीं हो सका, लेकिन उनके काम और मृत्यु
ने पूरी दुनिया को जैसे एक नया जनम देने का काम
किया था और लोगो को लगातार इससे जुड़ने के लिए
इंस्पायर करता रहा।
बिज़नेस और इंडस्ट्री चलने में विश्वास और सहयोग
की जरुरत होती है। ऐसे में यह दिलचस्प भी है और
फ़ायदेमंद भी कि हम एक घटना को एनालाइज करे,
जो हमें बहुत अच्छे ढंग से वह तरीका समझाती है,
जिसके ज़रिए industrialist और बिजनेसमैन ने
बहुत बड़ी दौलत कमाई और उन्होंने “लेने से पहले देने”
के तरीके से ऐसा कर दिखाया।
यह घटना 1900 की है, जब यूनाइटेड स्टेट्स स्टील
कारपोरेशन बन रहा था। जब आप कहानी पढ़े तो
इन बेसिक फैक्ट्स को अपने दिमाग में रखे और आप
समझ पाएँगे कि किस तरह विचार बड़े खजानो में
बदलते है।
अगर आप उन लोगो में से है, जो अक्सर आश्चर्य करते
है कि किस तरह ढेर सारी दौलत कमाई जाती है तो
यूनाइटेड स्टेट्स स्टील कारपोरेशन के बनने की यह
कहानी आपको काफी कुछ सिखा देगी। अगर आपको
इस बारे में जरा सा भी डाउट है कि इनसान विचारों के

यूनाइटेड स्टेट्स स्टील कारपोरेशन के बनने की यह
कहानी आपको काफी कुछ सिखा देगी। अगर आपको
इस बारे में जरा सा भी डाउट है कि इनसान विचारों के
ज़रिए अमीर बन सकता है तो यह कहानी आपके मन
से डाउट को भगा देगी, क्योंकि आप यूनाइटेड स्टेट्स
स्टील की कहानी में इस बुक में बताए गए प्रिंसिपल्स
का इस्तेमाल देखेंगे।
1
उस बिलियन डॉलर के स्पीच के काफी दिन बाद
12 दिसंबर, 1900 की शाम को देश के लगभग अस्सी
अमीर दिग्गज 5th एबेन्यू के यूनिवर्सिटी क्लब के
सेरेमनी हॉल में इकट्ठे हुए। इवेंट था वेस्ट से आए हुए
एक लड़के का सम्मान करना। लेकिन आधा दर्जन से
ज़्यादा मेहमानों को इस बात का एहसास नहीं था कि वे
लोग अमेरिकन industrial हिस्ट्री के सबसे इम्पोर्टेन्ट
घटना को देखने जा रहे थे।
जे. एडवर्ड सिमंस और चार्ल्स स्टीवर्ट स्मिथ के दिल
आभार और धन्यवाद से भरे थे क्योंकि जब वे हाल
ही में सबर्ग गए थे तो चार्ल्स एम् शवाब ने बहुत
शानदार मेहमाननवाजी की थी और उनका ज़बरदस्त
स्वागत किया था।
सिमंस और स्मिथ ने अड़तालीस साल के शवाब का
ईस्टर्न बैंकिंग सोसाइटी से जान पहचान करवाने के
लिए इस डिनर को organize किया था। लेकिन उन्हें
.

ईस्टर्न बैंकिंग सोसाइटी से जान पहचान करवाने के
लिए इस डिनर को organize किया था। लेकिन उन्हें
आशा नहीं थी कि वे इस फंक्शन में हंगामा खड़ा कर
देंगे। उन्होंने उन्हें चेतावनी दी थी कि न्यूयॉर्क लोग
स्पीच की कला को पसंद नहीं करेंगे और उनसे इम्प्रेस
नहीं होंगे और अगर वे स्टीलमैन, Harriman और
वोल्डरबिट जैसे सुनने वालों को बोर नहीं करना चाहते
तो बेहतर होगा कि वे अपने स्पीच को पंद्रह या बीस
मिनट तक सीमित रखे और फिर अपनी बात ख़त्म कर
दे।
जॉन पियरपोंट मॉर्गन अपने ऊँचे पद के कारण
श्वाब(Schwab) के राईट साइड पर बैठे हुए थे। वे
भी इस सेरेमनी में सिर्फ कुछ देर तक ही ठहरने वाले
थे और जहाँ तक प्रेस और जनता का सवाल था, पूरा
मामला इतना मामूली था कि अगले दिन इस सेरेमनी
का जिक्र किसी भी न्यूज़पेपर में नहीं छपा।
दोनों host और इम्पोर्टेन्ट मेहमानों ने अच्छी तरह से
डिनर किया। बीच में बहुत कम चर्चा हुई और जितनी
भी हुई वह भी टेंशन के माहौल में हुई। बहुत कम
बैंकर और ब्रोकर शवाब से मिले थे, जिसका करियर
मनोंगैहेला के किनारे पर टॉप पर पहुंचा था और उन्हें
कोई भी मेहमान ठीक से नहीं जानता था। लेकिन शाम
खत्म होने से पहले उन सभी और मास्टर मॉर्गन के
पैरों तले जमीन खिसक गई और बिलियन डॉलर के
यूनाइटेड स्टेट्स स्टील कारपोरेशन का बीज बोया गया।

पैरों तले जमीन खिसक गई और बिलियन डॉलर के
यूनाइटेड स्टेट्स स्टील कारपोरेशन का बीज बोया गया।
इतिहास के लिहाज से शायद यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि
उस डिनर में चार्ल्स शवाब के दिए हुए स्पीच का कोई
रिकॉर्ड नहीं है।
शायद यह एक घरेलु स्पीच होगा, जिसमे grammer
की कई गलतियाँ होंगी (क्योंकि शवाब भाषा की
शुद्धता पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे ) और उस स्पीच में
कहावत और चुटकुले भी होंगे। लेकिन इनके अलावा
उसमे एक स्ट्रोंग पॉवर थी, जिसका उन पाँच बिलियन
डॉलर के लगभग की प्रॉपर्टी वाले लोगों पर कुछ ऐसा
असर हुआ जिसे भुलाया नहीं जा सकता। जब यह 90
मिनट की स्पीच ख़त्म हुई और जब उसे सुनने वाले
इसके जादू के कारण अब भी मंत्रमुग्ध थे तो मॉर्गन
वक्त को एक खिड़की के पास अलग ले गए जहाँ
चौखट पर बैठकर और पैरो को नीचे लटकाकर उन्होंने
एक घंटे तक चर्चा की।
शवाब की पर्सनालिटी का जादू पूरी पॉवर से काम
कर रहा था लेकिन इससे भी ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट और
ज़्यादा अमिट वह पूरा प्रोग्राम था, जो उन्होंने स्टील के
एक्सपेंशन के लिए प्रेजेंट किया था। कई और लोगो
ने मॉर्गन की रूचि जगाने की कोशिश की थी कि वे
स्टील के लिए भी उसी तरह का ट्रस्ट बनाए, जिस तरह
बिस्किट, वायर और हूप, शकर, रबर, व्हिस्की, तेल

ने मॉर्गन की रूचि जगाने की कोशिश की थी कि वे
स्टील के लिए भी उसी तरह का ट्रस्ट बनाए, जिस तरह
बिस्किट, वायर और हूप, शकर, रबर, व्हिस्की, तेल
या च्युइंगम के लिए बना रखा था। जॉन डब्लू गेट्स
नाम के गैंबलर ने भी इसका प्रपोजल रखा था, लेकिन
मॉर्गन को उस पर भरोसा नहीं था। बिल और जिम मूर,
जो शिकागो में स्टॉक जोबेर्थे और जो एक मैच ट्रस्ट
और क्रैकर कारपोरेशन बना चुके थे, उन्होंने भी इसका
ऑफर रखा था लेकिन वे भी कामयाब नहीं हुए थे।
देहात के वकील अल्बर्ट एच गैरी भी यही चाहते थे,
लेकिन वे इतने बड़े नहीं थे कि उनकी बातो का असर
पड़े। सिर्फ शवाब के बात करने की कला ही जे.पी.
मॉर्गन को उन ऊँचाइयों तक ले जा सकी जहाँ से वे यह
देख पाए कि इस रोमांचक इकनोमिक एक्टिविटी के
कितने जबरदस्त रिजल्ट निकलेंगे, हालाँकि आसानी
से पैसे कमाने वाले लोगों की नजर में यह विचार एक
पागलपन भरा सपना ही था।
Economic अट्रैक्शन एक generation पहले
शुरू हुई थी और इसने स्टील जगत में हजारो छोटी और
कई मामलो में inefficient तरीके से चलाई जा रही
कंपनियों को बड़े और कम्पटीशन से धराशायी हो चुके
कॉर्पोरेशनों में बदल दिया था और यह हँसमुख उसिनीस
पाइरेट जॉन डब्लू गेट्स के द्वारा खोजी गई टेक्निक्स
से मुमकिन हुआ था। छोटी कंपनियों से गट्स पहले ही
अमेरिकन स्टील एंड वायर कंपनी बना चुके थे और
मॉर्गन के साथ मिलकर उन्होंने फेडरल स्टील कंपनी

 

 

Ruchi Kumari:
से मुमकिन हुआ था। छोटी कंपनियों से गट्स पहले ही
अमेरिकन स्टील एंड वायर कंपनी बना चुके थे और
मॉर्गन के साथ मिलकर उन्होंने फेडरल स्टील कंपनी
बना ली थी।
लेकिन अगर इनकी तुलना Andrew Carnegie
के बड़े ट्रस्ट से की जाए जिसके वो ओनर और मैनेजर
थे, तो यह सारी कंपनियों और कारपोरेशन उनके सामने
बौने थे। चाहे वे कितनी ही एकता दिखा दे, लेकिन
वे सब मिलकर भी कानेंगी एम्पायर में सेंध नहीं लगा
सकते थे और मॉर्गन यह बात जानते थे।
कारनेगी भी यह बात जानते थे। इसकीबो कैसल की
शानदार ऊँचाइयों से उन्होंने पहले तो दिलचस्पी से और
बाद में चिढ़कर देखा कि मॉर्गन की छोटी कंपनियाँ
उनके बिजनस में किस तरह घुस रही है। जब यह
कोशिश बढ़ने लगी तो कारनेगी आगबबूला हो गए और
उन्होंने बदला लेना शुरू कर दिया। उन्होंने यह फैसला
किया कि वे अपने competitors की हर मिल का
एक डुप्लीकेट बनाएँगे। अब तक उन्होंने वायर, पाइप,
हूप या शीट में कोई रूचि नहीं दिखाई थी। इसके बजाय
वो इतने में ही संतुष्ट थे और उन्हें अपने मनचाहे आकार
में ढालने देते थे। लेकिन अब अपने चीफ और काबिल
लेफ्टिनेंट शवाब के सहयोग से वे अपने दुश्मनों को
बर्बाद करने का प्लान बना रहे थे।
चार्ल्स एम् शवाब के स्पीच में मॉर्गन को एक की

वे सब मिलकर भी कानेंगी एम्पायर में सेंध नहीं लगा
सकते थे और मॉर्गन यह बात जानते थे।
कारनेगी भी यह बात जानते थे। इसकीबो कैसल की
शानदार ऊँचाइयों से उन्होंने पहले तो दिलचस्पी से और
बाद में चिढ़कर देखा कि मॉर्गन की छोटी कंपनियाँ
उनके बिजनस में किस तरह घुस रही है। जब यह
कोशिश बढ़ने लगी तो कारनेगी आगबबूला हो गए और
उन्होंने बदला लेना शुरू कर दिया। उन्होंने यह फैसला
किया कि वे अपने competitors की हर मिल का
एक डुप्लीकेट बनाएँगे। अब तक उन्होंने वायर, पाइप,
हूप या शीट में कोई रूचि नहीं दिखाई थी। इसके बजाय
वो इतने में ही संतुष्ट थे और उन्हें अपने मनचाहे आकार
में ढालने देते थे। लेकिन अब अपने चीफ और काबिल
लेफ्टिनेंट शवाब के सहयोग से वे अपने दुश्मनों को
बर्बाद करने का प्लान बना रहे थे।

चार्ल्स एम् शवाब के स्पीच में मॉर्गन को एक की
प्रॉब्लम का जवाब मिला। कार्नेगी के बिना बना
कोई ट्रस्ट – जिसके पास सबसे बड़ी स्टील कंपनी थी
–दरअसल ट्रस्ट कहा ही नहीं जा सकता। जैसा एक
ऑथर ने कहा कि यह ऐसा नींबू का शरबत होगा,
जिसमे नींबू ही नहीं होगा।

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Napoleon Hill
12 दिसंबर, 1990 की रात को श्वाब के स्पीच में ये
साफ़-साफ़ हिंट था , हालाँकि इस बात का कोई दावा
या वादा नहीं किया गया था कि बड़े कार्नेजी एम्पायर
मॉर्गन के टेंट में लाया जा सकता है। शवाब ने स्टील के
भविष्य के बारे में चर्चा की और एक ऐसा सिस्टम बनाने
पर जोर दिया जिसमे capability हो, expertise
हो, फेल हो चुके मीलों पर ताला लगा दिया जाए और
कामयाब सामान पर एफर्ट को कंसन्ट्रेट किया जाए,
मिनरल्स के आवागमन में बचत हो, ओवरहेड और
एडमिनिस्ट्रेटिव आइटम में बचत हो और foreign
मार्केट में सक्सेसफुल एंट्री हो।
यही नहीं, उन्होंने इन लोगो को यह भी बताया कि
उनकी ट्रेडिशनल policy में गलतियाँ कहाँ हो रही
है। उन्होंने ऐसा संकेत किया कि उनके बिजनस का
करंट गोल मोनोपोली बनाना, कीमत बढ़ाना और
इस पूरे प्रोसेस में खुद को मीठे-मीठे डिविडेंड देना
था। श्वाब ने दिलचस्प अंदाज में इस सिस्टम की बुराई
की। उन्होंने अपने ऑडियंस को यह बताया कि इस
तरह की policy में लंबे समय के लिए विज़न नहीं
है और इसका कारण यह है कि यह मार्केट को एक
ऐसे युग में सीमित और छोटा कर रही थी, जिसमे हर
तगारातयोंशन का तोलताला शा। उन्होंने गट टाता

ऐसे युग में सीमित और छोटा कर रही थी, जिसमे हर
तरफ एक्सपेंशन का बोलबाला था। उन्होंने यह दावा
किया कि स्टील की कीमत कम करने से मार्केट का
एक्सपेंशन होगा, स्टील के ज़्यादा इस्तेमाल खोजे
जाएँगे और दुनिया के बिज़नेस का एक बड़ा हिस्सा
उनकी झोली में आ जाएगा। हालाँकि श्वाब को यह बात
पता नहीं थी, लेकिन श्वाब मॉडर्न mass प्रोडक्शन के
मसीहा थे।
यूनिवर्सिटी क्लब का डिनर ख़त्म हुआ। मॉर्गन अपने
घर लौट गए और श्वाब की सुनहरे भविष्यवाणी के बारे
में सोचते रहे । श्वाब वापस पिट्सबर्ग लौट गए जहाँ वे
एंडू कार्नेगी का स्टील बिजनस चला रहे थे। गैरी और
बाकी लोग अपने स्टॉक टिकेरस के पास वापस लौट
गए, जहाँ वे अगले कदम का इंतजार करने लगे।
इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगा। श्वाब ने उनके सामने
लॉजिक का जो खाना रखा था, उसे पचाने में मॉर्गन
को एक हफ़्ता लगा। उन्होंने अपने आपको पूरी तरह
से विश्वास दिला दिया था कि इसका रिजल्ट इकनोमिक
बदहज़मी नहीं होगा। उन्होंने श्वाब को बुलवाया और
पाया कि वह लड़का जरा शर्मीला था। श्वाब ने कहा
कि कारनेगी इस बात को पसंद नहीं करेंगे कि उनकी
कंपनी का भरोसेमंद प्रेजिडेंट वॉल स्ट्रीट के सम्राट के
साथ मुलाकात कर रहा है, जबकि कार्नेगी ने यह कसम

खाई थी कि वे वॉल स्ट्रीट पर कभी कदम नहीं रखेंगे।
फिर जॉन डब्लू गेट्स नाम के middleman ने यह
ने

फिर जॉन डब्लू गेट्स नाम के middleman ने यह
ने
सुझाव दिया कि अगर श्वाब फिलेडेल्फिया में बेलेव्यू
होटल में जा रहे हैं तो जे पी मॉर्गन भी उसी समय
उस होटल में रहेंगे। जब श्वाब आए तो मॉर्गन दुर्भाग्य
से न्यूयॉर्क के अपने घर में बीमार थे और इसलिए
उनके बहुत विनती करने पर श्वाब न्यूयॉर्क गए और
उस इकनोमिक दिग्गज की लाइब्रेरी में उन दोनों की
मुलाकात हुई।
कुछ इकनोमिक हिस्टोरियंस की माने तो इस ड्रामा के
शुरुआत से लेकर अंत तक स्टेज के डायरेक्टर एंडू
कारनेगी थे। वे यह मानते है कि श्वाब के डिनर से लेकर
उनका फ़ेमस स्पीच, श्वाब और मॉर्गन की संडे रात की
मुलाकात तक की सारी घटनाएँ बुद्धिमान Scot कार्नेगी
के दिमाग की उपज थी। लेकिन सच्चाई इससे ठीक
अलग थी। जब श्वाब को इस डील को फाइनल करने
के लिए बुलाया गया तो वे यह भी नहीं जानते थे कि
‘लिटिल बॉस’ एंडू कारनेगी इसे मानेंगे भी या नहीं। वे
बेचने के ऑफर के बारे में सोचेंगे भी या नहीं, खासकर
उन लोगो को जिनसे वे बुरी तरह चिढ़ते थे। लेकिन श्वाब
उस मुलाकात में अपने साथ अपनी ही हैंडराइटिंग में
कॉपर प्लेट के आंकड़ों की छह शीट लेकर गए, जिनमे
यह लिखा हुआ था कि इस नए ट्रस्ट की हर स्टील
कंपनी का इकनोमिक वैल्यू और उसकी पोटेंशियल
इकनोमिक earning की एबिलिटी क्या थी?
चार लोग उन आंकड़ों को एनालाइज करने के लिए पूरी

चार लोग उन आंकड़ों को एनालाइज करने के लिए पूरी
रात बैठे रहे। जाहिर है कि इनमे सबसे ख़ास आदमी
मॉर्गन थे। उनके साथ उनके अमीर पार्टनर रोबर्ट बेकेन
थे, जो एक पढ़े लिखे और सभ्य इंसान थे। तीसरे थे
जॉन डब्ल्यू गेट्स, जिसे मॉर्गन एक गैंबलर होने के
कारण छोटा समझते थे और उन्हें एक हथियार की
तरह इस्तेमाल करते थे। चौथे खुद श्वाब थे, जो स्टील
बनाने और बेचने के प्रोसेस के बारे में उस समय किसी
भी इंसान से ज़्यादा जानते थे। पूरी चर्चा में पिट्सबर्ग
के इस आदमी के आंकड़ों के बारे में कोई सवाल नहीं
किया गया। अगर उन्होंने कह दिया कि किसी कंपनी
का वैल्यू इतना था तो उस कंपनी का वैल्यू उतना ही
था, न उससे ज़्यादा न उससे कम। उन्होंने इस बात
पर जोर दिया कि इस ट्रस्ट में सिर्फ़ वही कंपनियाँ
रहे, जिनका नाम उन्होंने लिखा था। उन्होंने एक ऐसे
कारपोरेशन की रचना की थी, जिसमे कोई डुप्लीकेशन
नहीं होगा और उन दोस्तों के लालच की संतुष्टि भी नहीं
होगी जो अपनी कंपनियों के बोझ को मॉर्गन के मज़बूत
कंधो पर उतारना चाहते होंगे।
जब सुबह मॉर्गन उठे और उन्होंने अपनी कमर सीधी
की तब सिर्फ एक ही सवाल रह गया था।
* क्या आपको लगता है कि आप एंडू कार्नेगी को बेचने
के लिए राजी कर सकते है? ‘ उन्होंने पूछा.
श्वाब ने जवाब दिया ‘मैं कोशिश करूँगा।’
*अगर आप उन्हें बेचने के लिए राजी कर ले तो मैं

वाष न पा ५4 1 पाराशपा”|||
*अगर आप उन्हें बेचने के लिए राजी कर ले तो मैं
खरीद लूँगा’ मॉर्गन ने जवाब दिया.
श्वाब ने जवाब दिया ‘मैं कोशिश करूँगा।’
यहाँ तक सब कुछ ठीक था। लेकिन क्या कारनेगी
बेचेंगें? और अगर बेचेंगे तो वे बदले में कितनी कीमत
मांगेंगे?
(श्वाब का अनुमान था लगभग 320,000,000
डॉलर और वे यह रकम किस रूप में चाहेंगे? कॉमन
या preferred स्टॉक के रूप में? बांड के रूप में
पैसा, कोई भी एक बिलियन डॉलर का एक percent
cash में नहीं दे सकता था।
जनवरी में वेस्टचेस्टर में सेंट एंड्रयूज लिंक्स में गोल्फ
का गेम चल रहा था और एंडू ठंड से बचने के लिए
स्वेटर पहने हुए थे और चार्ली लगातार बोल रहे थे,
ताकि कारनेगी का हौसला बुलंद रहे। बुलंद रहे ताकि
बिजनस के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला जाए जब
तक कि वे दोनों कार्नेगी कॉटेज की आरामदेह गर्मी में
नहीं बैठ गए। फिर उसी कमाल के बोलने की स्किल
के साथ, जिससे उन्होंने यूनिवर्सिटी क्लब के अस्सी
करोड़पतियों को मंत्रमुग्ध किया था, श्वाब ने आराम से
रिटायर होने के सुनहरे सपने बताए और बूढ़े आदमी की
सोशल इच्छाओ को संतुष्ट करने के करोड़ो अरबो का
जिक्र किया। कार्नेगी ने जवाब में कागज के एक टुकड़े
पर एक रकम लिखकर श्वाब को थमा दिया और कहा ‘
ठीक है, हम इतने में बेच देंगे”.

Figure लगभग 400,000,000 डॉलर था
और अगर श्वाब के द्वारा अनुमान लगाया गया
320,000,000 डॉलर के figure को बेसिक डेटा
माना जाए तो इसमें पिछले दो सालो में कैपिटल वैल्यू में
हुई ग्रोथ के रूप में 80,000,000 जोड़ दिए गए थे।
बाद में, ट्रॉस अटलांटिक लाइनर के डेक पर खड़े होकर
कारनेगी ने मॉर्गन से अफसोस से कहा “काश मैंने
आपसे 100,000,000 डॉलर ज़्यादा मांगे होते
“अगर आपने मांगे होते तो आपको वह भी मिल गए
होते ‘ मॉर्गन ने खुश होकर बताया।
इस बात से काफी सनसनी फैली। एक ब्रिटिश रिपोर्टर
ने टेलीग्राम किया कि foreign स्टील इंडस्ट्री इस बड़े
ट्रस्ट के कारण रुक गया है। एल के प्रेजिडेंट हैडली
ने घोषणा की कि अगर देश में ट्रस्ट बनाने के संबंध
में रूल नहीं बनाए गए तो अगले पच्चीस सालो में
वाशिंगटन में एक सम्राट शासन करेगा। लेकिन काबिल
स्टॉक एक्सपर्ट कीं ने नए स्टॉक को जनता को इतनी
काबिलियत से बेचा कि सारा का सारा पानी, कई लोगो
का अनुमान था 600,000,000 डॉलर, पलक
झपकते ही सोख लिया गया। कार्नेगी के पास करोड़ो
डॉलर थे और मॉर्गन सिंडिकेट के पास रिस्क उठाने के
बदले में 62,000,000 और गेट्स से लेकर गैरी तक
सभी के पास करोड़ो डॉलर थे।
अड़तालीस साल के श्वाब को भी अपना इनाम मिला।
सेट ना नि ना TIT औ7 1070

अड़तालीस साल के श्वाब को भी अपना इनाम मिला।
वे इस नए कारपोरेशन के प्रेजिडेंट बन गए और 1930
तक इस पर कंट्रोल करते रहे।
अब एक दूसरा एग्ज़ाम्पल बताते हैं कि किस तरह
अपने एक विचार पर विश्वास रखने मात्र से एक इंसान
ने अपने लिए करोड़ो डॉलर इकट्ठा कर लिए और कई
अनगिनत लोगो को अमीर बनने में मदद की।
सर जॉन टेंपलटन ऐसे ही इंसान है, जिन्हें पैसा इंवेस्ट
करने के अपने टैलेंट पर पूरा भरोसा था।
टेंपलटन आम लोगो की तुलना में पैसा इंवेस्ट करने में
काफी समझदार थे क्योंकि ज़्यादातर लोग भावनाओ में
बहकर,
नासमझी में या फिर कॉमन सेंस को नज़रंदाज़
कर पैसा इंवेस्ट कर देते है। उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि
पैसा इंवेस्ट करने के अपने टैलेंट से वे अपने लिए काफी
पैसा कमा सकते है पर उन छोटे इंवेस्टर्स की मदद नहीं
कर सकते, जिनकी वह मदद करना चाहते थे।
अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने
म्यूच्यूअल फंड्स की शुरुआत की, जिसमे छोटे इंवेस्टर
पैसे लगा सकते थे।
यह उस समय एक बेहतरीन प्रोजेक्ट की तरह उभरकर
आया क्योंकि यह उस वक्त के हिसाब से बहुत नई सोच
थी। टेंपलटन ने उस कांसेप्ट की शुरुआत की, जो आज

जाया क्याकि यह उस वक्त काहसाब स बहुत नइ साय
थी। टेंपलटन ने उस कांसेप्ट की शुरुआत की, जो आज
के समय में म्यूच्यूअल फंड्स के नाम से चल रहा है।
टेंपलटन ग्रोथ फंड्स के पार्ट-टाइम एम्प्लॉई और ग्रीन
होल्डर जॉन टेंपलटन याद करते हुए बताते है कि जब
उन्होंने पहली बार अपनी कंपनी की मीटिंग की थी तो
उनके साथ एक छोटे से कमरे में कुछ साधारण खाने
का सामान बेचने वाले ऑफिसर थे।
आज के समय में टेंपलटन फंड के अंदर 6000 से
ज़्यादा एम्प्लॉई काम करते है और उनकी वैल्यू $36
बिलियन से ज़्यादा पहुँच चुकी है। इस ग्रोथ की स्पीड ने
ही टेंप्लेटन ग्रुप को आज सबसे टॉप फंड ग्रुप बनाया है।
उसका एक एग्ज़ाम्पल यह है कि आज से तीन साल
पहले जिस किसी ने भी अपने दस हजार डॉलर
टेंपलटन फंड में लगाए थे आज उनकी कीमत मिलियन
डॉलर है।
1992 में जब उन्होंने अपनी कंपनी टेंपलटन फंड्स
ऑफ इंटरेस्ट को 400 मिलियन डॉलर में बेचा था, तब
तक उनके मन में संतोष हो गया था कि वो अमीर बनने
में काफी लोगो की मदद कर चुके है।

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4.ऑटो सजेशन
सब कॉन्शियस माइंड को इन्फ्लुएंस करने का एक
ज़रिया
अमीर बनने की ओर तीसरा कदम
हमारे पाँचो सेंसेस के द्वारा मन में जो सेंसेशन पहुंचतें
हैं, जिनके द्वारा हम खुद को मैनेज या कंट्रोल करते
है, वह ऑटो सजेशन कहलाता है। दूसरे शब्दो में यह
भी कह सकते है कि ऑटो सजेशन खुद को सुझाव
देना होता है। यह हमारे सब कॉन्शियस माइंड और
कॉन्शियस माइंड, जिसे लॉजिकल माइंड भी कहते हैं,
उसके बीच कम्युनिकेशन एजेंसी का काम करता है।
ऑटो सजेशन प्रिंसिप्ल के द्वारा हम जिन स्ट्रोंग विचारों
को कॉन्शियस माइंड में ठहरने की परमिशन देते है
(भले ही वे विचार नेगेटिव हो या फिर पॉजिटिव ), वे
विचार सब कॉन्शियस माइंड में पहुँच जाते है।
कोई भी विचार (भले ही वह पॉजिटिव हो या फिर
नेगेटिव) सब कॉन्शियस माइंड में ऑटो सजेशन के
प्रिंसिप्ल की मदद के बिना नहीं पहुँच सकता। यूनिवर्स
से कोई भी विचार, जो पाँचो सेंस organs
के
द्वार
आपके कॉन्शियस माइंड (जो विचार कर सकता है)
में पहुँचता है। वह अपने एक्सपीरियंस द्वारा उन्हें रोक

समा३ मा पपार, जापाचा ससlydII पवार
आपके कॉन्शियस माइंड (जो विचार कर सकता है)
में पहुंचता है। वह अपने एक्सपीरियंस द्वारा उन्हें रोक
सकता है या फिर सब कॉन्शियस माइंड में पास कर
सकता है। कॉन्शियस माइंड, सब कॉन्शियस माइंड में
विचारों को पहुँचाते समय बाहर बैठे गार्ड की भूमिका
निभाता है।
नेचर ने हमें ऐसा बनाया है कि हमारा अपने विचारों
पर पूरा कंट्रोल होता है। हम जिस विचार को चाहे सब
कॉन्शियस माइंड में पहुँचने दे या फिर चाहे तो रोक ले।
इसका यह मतलब नहीं कि हम लोग हमेशा इस पॉवर
का इस्तेमाल करते है। ज़्यादातर हम इसका इस्तेमाल
नहीं करते, यही कारण है कि ज़्यादातर लोग गरीबी में
अपना जीवन काट देते है।
जैसा कि पहले भी बताया गया है कि सब कॉन्शियस
माइंड उस बागीचे की तरह है, जिसमे जैसे बीज बोए
जाएँगे वैसे ही पेड़ उगेंगे। ऑटो सजेशन वह कंट्रोल
एजेंसी है, जिसके द्वारा आप इस फल देने वाले सब
कॉन्शियस माइंड में क्रिएटिव या फिर ख़तरनाक विचारों
को पहुँचा सकते है।
जैसा कि दूसरे चैप्टर में उन छह स्टेप्स में से अंतिम
स्टेप में बताया गया है कि उस लाइन को दिन में दो
बार पढ़े, जिसमे आपकी पैसा कमाने की इच्छा के
बारे में लिखा गया है। सिर्फ पढ़े ही नहीं बल्कि महसूस
करे कि वह पैसा आपको मिल चुका है। ऐसा करने

बारे में लिखा गया है। सिर्फ पढ़े ही नहीं बल्कि महसूस
करे कि वह पैसा आपको मिल चुका है। ऐसा करने
से आप गहरी विश्वास से भरपूर अपनी इच्छा को सब
कॉन्शियस माइंड में पहुँचाते है। लगातार ऐसा करने से
सब कॉन्शियस माइंड आपको उस पोजीशन में ले आता
है जहाँ से आप अपनी इच्छा को फिजिकल आकर दे
सकते है।
इससे पहले कि आप आगे बढ़े, फिर से चैप्टर दो में
जाइए और उन छह स्टेप्स को मन लगाकर फिर से
पढिए। फिर चैप्टर 7 में दिए उन चार इंस्ट्रक्शन्स को
पढ़े जिसमे ‘मास्टर माइंड’ ग्रुप के आर्गेनाइजेशन के
बारे में बताया गया है। इन दोनों तरह के इंस्ट्रक्शन्स
की तुलना करने पर आप पाएंगे कि कहीं-न-कहीं इन
सुझावों में ऑटो सजेशन के
प्रिंसिप्ल को अमल में लाने के लिए इंस्ट्रक्शन शामिल
है।
एक टर्म है जिसे money-consciousness
कहते है जिसका मतलब है पैसे के पीछे दीवाना
होना.यानी आपके मन में खूब पैसा कमाने की इच्छा
है.ये दिमाग की एक हालत है यानी स्टेट ऑफ़ माइंड
जहाँ आप खुद को पहले से ही अमीर समझने लगते है.
जब आप मनी-conscious बनते है तो पैसा कमाने
लगते है.
याद रखे, अपनी इच्छा के लाइन को

याद रखे, अपनी इच्छा के लाइन को
जोर-जोर से पढ़ने से (जिससे आप अपनी
money-consciousness’ डेवलप कर सके )
कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक उन शब्दो में भावनाओं
मिली हुई ना हो। अगर आप लाख बार भी इसे बिना
फील किए हुए पढ़ेंगे तब भी आपको रिजल्ट नहीं मिल
पाएँगे। आपका सब कॉन्शियस माइंड उन विचारों पर
काम करता है, जिनमें भावनाएँ मिल जाती है।
यह इतना इम्पोर्टेन्ट फैक्ट है कि इसको हर चैप्टर में
दोहराया जाना चाहिए। इस समझ की कमी के कारण
ही ज़्यादातर लोग, जो ऑटो सजेशन के प्रिंसिप्ल को
अप्लाई करने की कोशिश करते है उन्हें मन चाहा
रिजल्ट नहीं मिलता।
आम शब्द जिसमें इमोशन शामिल नहीं होते वो सब
कॉन्शियस माइंड में कोई असर नहीं करते है। आप तब
तक मन चाहा रिजल्ट हासिल नहीं कर सकते जब तक
विश्वास से भरे हुए भावनाओ के विचार या फिर शब्द
को सब कॉन्शियस माइंड में नहीं पहुंचाते है। पहली
बार ऐसा करने की कोशिश करे और उन विचारों में
भावनाओं को नहीं जोड़ पाए तो निराश ना हों।
याद रखें कि ऐसा कोई भी रूल नहीं है, जो बिना कोई
कीमत चुकाए, आपको कोई भी रिजल्ट दे सके। सब
कॉन्शियस माइंड को इन्फ्लुएंस करने की काबिलियत
हासिल करने के लिए आपको उसकी कीमत चकानी

कीमत चुकाए, आपको कोई भी रिजल्ट दे सके। सब
कॉन्शियस माइंड को इन्फ्लुएंस करने की काबिलियत
हासिल करने के लिए, आपको उसकी कीमत चुकानी
पड़ेगी। इस काबिलियत को हासिल करने की कीमत
है इन रूल्स को ढंग से अप्लाई करना। सिर्फ आप,
हाँ सिर्फ आप ही है, जो यह फ़ैसला ले सकते है कि
आप जो कोशिश करने की कीमत चुका रहे है, वह
money-consciousness हासिल करने के लिए
सही है या नहीं।
ऑटो सजेशन अमल में लाने की आपकी काबिलियत,
इस बात पर ज़्यादा डिपेंड करती है कि आप अपनी
इच्छा पर कितनी मजबूती से फोकस करते है। जब तक
आपकी इच्छा स्ट्रोंग इच्छा यानी burning desire
में ना बदल जाए | जब आप चैप्टर दो में दिए गए छह
रूल्स को अप्लाई करना शुरू करे तो यह ज़रूरी है कि
कंसंट्रेशन के प्रिंसिप्ल का इस्तेमाल करे।
यहाँ पर आपको कंसंट्रेशन को इस्तेमाल में लाने के
लिए एक सुझाव दिया जाता है। जब आप उन छह
रूल्स में से पहले रूल पर ‘ अपने मन में एक क्लियर
और फिक्स्ड अमाउंट सोच ले’ पर गौर करेंगे तो पाएँगे
कि इस रूल में किसी फिक्स्ड अमाउंट पर आपके
विचारों को फोकस करने के लिए इंस्ट्रक्शन दिया गया
है। आँखे बंद करके पूरे कंसंट्रेशन के साथ उस फिक्स्ड
अमाउंट पर कम-से-कम हर रोज तब तक ध्यान लगाना
है, जब तक वह अमाउंट फिजिकल रूप में आपके

नापानसमानणराप 4 MII II ||
है, जब तक वह अमाउंट फिजिकल रूप में आपके
पास न आ जाए। जब हर रोज विश्वास के साथ आप
इस प्रोसेस को दोहराएँगे जैसा कि ‘विश्वास’ चैप्टर
में बताया गया है तो आप खुद को पैसा कमाने की
पोजीशन में पाएँगे।
यहाँ पर एक इम्पोर्टेन्ट रूल बताया जा रहा है। सब
कॉन्शियस माइंड उन इंस्ट्रक्शन्स को स्वीकार करता है
और काम करता है, जो पूरे विश्वास के साथ दिए जाते
है। इन orders को बार-बार दोहराना पड़ता है, तभी
सब कॉन्शियस माइंड उन orders को फॉलो करता
है। आप इस स्टेटमेंट पर विश्वास करे कि आप अपने
सब कॉन्शियस माइंड के साथ बिलकुल सही धोखा
कर रहे है और आप उसे विश्वास दिला रहे है क्योंकि
आपको विश्वास है कि जिस दौलत को आप इमेजिन
कर रहे है, वह आपका इंतजार कर रही है। फिर यह
आपके सब कॉन्शियस माइंड का काम है कि वह
आपको उस दौलत को हासिल करने के लिए प्रैक्टिकल
रास्ते दिखाए।
किसी सटीक प्लान का इंतजार न करें, जिसके द्वारा
आप अपनी सर्विस या प्रोडक्ट के बदले में अपनी
इच्छा की दौलत हासिल करना चाहते है। बल्कि तुरंत
अपने आपको उस पैसे के मालिक के रूप में देखने
लगे और इस दौरान यह माँग करे और यह विश्वास रखे
कि आपका सब कॉन्शियस माइंड आपको वह प्लान
या रास्ता सुझाएगा, जिसकी आपको जरुरत है। इन

या रास्ता सुझाएगा, जिसकी आपको जरुरत है। इन
plans के बार में सतर्क रहे और जब वे आपके सामने
आएं तो उन पर तुरंत काम करना शुरू कर दे। जब
यह प्लान या ऑफर आएँगे तो शायद वे आपके मन में
सिक्स्थ सेंस के ज़रिए इंस्पिरेशन के रूप में आएंगे ।
इनका सम्मान करे और जैसे ही आपको यह हासिल हो
इन पर काम करना शुरू कर दे।
छह स्टेप्स में से चौथे स्टेप में आपको यह इंस्ट्रक्शन
दिया गया है कि आप ‘ अपनी इच्छा को हकीकत में
बदलने के लिए एक पक्का और क्लियर प्लान बनाए
और तुरंत इस प्लान को एक्शन में बदलना शुरू कर
दे।’ आपको उस इंस्ट्रक्शन को ऊपर के पैराग्राफ में
बताए हुए तरीके से फॉलो करना है। आप जब इच्छा के
ट्रांसफॉर्मेशन के द्वारा पैसा कमाने का प्लान बनाएं तो
अपने ‘लॉजिक’ पर विश्वास न करे। आपकी लॉजिकल
एबिलिटी सुस्त हो सकती है और अगर आप इस पर
पूरी तरह डिपेंड करते है तो यह आपको निराश कर
सकती है।
जब आप उस दौलत को सचमुच अपनी इमेजिनेशन
में देखें, जिसके आप मालिक बनना चाहते हैं, तो बंद
आँखों से ख़ुद को वह सर्विस या प्रोडक्ट देते हुए देखे,
जो आप इस पैसे के बदले में देना चाहते है। यह बेहद
ज़रूरी है।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
सब कॉन्शियस माइंड को इंस्पायर करने के स्टेप्स
आप इस बुक को पढ़ रहे है यह इस बात का संकेत
है कि आपमें नॉलेज हासिल करने की ललक है। यह
इस ओर भी इशारा कर रहा है कि आप इस टॉपिक
स्टूडेंट है। अगर आप सिर्फ स्टूडेंट है तो इस बात की
संभावना बहुत है कि आप बहुत कुछ सीख सकते है।
लेकिन उसके लिए आपको विनम्रता सीखनी पड़ेगी।
अगर आप किसी इंस्ट्रक्शन को फॉलो करते है और
किसी को नजरअंदाज कर देते है तो शायद आपको
संतोषजनक रिजल्ट हासिल न हो। आपको सभी
इंस्ट्रक्शन्स को विश्वास के साथ फॉलो करना पड़ेगा।
दूसरे चैप्टर में दिए गए छह स्टेप्स के संबंध में दिए गए
छह इंस्ट्रक्शन्स को अब शोर्ट में बताया जाएगा और इस
चैप्टर में दिए गए प्रिंसिपल्स के साथ जोड़कर बताया
जाएगा।
पहला : किसी शांत जगह पर जाएं (रात में बिस्तर पर
जाना सही समय होगा) जहाँ कोई डिस्टर्बेस न हो।
अपनी आँखे बंद कर ले और उस दौलत के बारे में
लिखे हुए लाइन को जोर से दोहराए (ताकि आपको
अपने शब्द सनाई दे जिसे आप इकट्रा करना चाहते है,

अपने शब्द सुनाई दे) जिसे आप इकट्ठा करना चाहते है,
वह डेट या डेडलाइन, जिसमे आप यह दौलत कमाना
चाहते है और उस सर्विस या प्रोडक्ट का डिस्क्रिप्शन,
जो आप उस पैसे के बदले में देना चाहते है। जब आप
इन इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो करेंगे तो आप देखेंगे कि आप
पहले से ही उतनी दौलत के मालिक है।
एग्ज़ाम्पल के तौर पे–मान लीजिए कि आप आज से
पाँच साल बाद जनवरी में 1,00,000 डॉलर कामना
चाहते है और आप इस पैसे के बदले सेल्समेन के रूप
में अपनी पर्सनल सर्विस देना चाहते है। आपके गोल
का लिखा हुआ स्टेटमेंट नीचे दिए हुए स्टेटमेंट की तरह
होना चाहिए।
*7 जनवरी, 20… तक मेरे पास 1,00,000 डॉलर
होंगे, जो इस दौरान मेरे पास समय-समय पर
अलग-अलग अमाउंट में आएँगे।’
“इस पैसे के बदले में मैं …(यहाँ पर उस सर्विस या
प्रोडक्ट का नाम लिख दें, जिसे आप बेचना चाहते है)
के सेल्समेन के रूप में अपनी बेस्ट एबिलिटी से सर्विस
दूंगा, ज़्यादा से ज़्यादा पॉसिबल quantity और बेस्ट
quality दूंगा।
“मुझे विश्वास है कि मेरे पास इतना पैसा होगा। मेरा
विश्वास इतना पक्का है कि मैं इस पैसे को अपनी आँखों
के सामने अभी देख सकता हूँ। मैं इसे अपने हाथो से
छू सकता हूँ। यह मेरा इंतजार कर रहा है कि यह मेरे

अपने शब्द सुनाई दे) जिसे आप इकट्ठा करना चाहते है,
वह डेट या डेडलाइन, जिसमे आप यह दौलत कमाना
चाहते है और उस सर्विस या प्रोडक्ट का डिस्क्रिप्शन,
जो आप उस पैसे के बदले में देना चाहते है। जब आप
इन इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो करेंगे तो आप देखेंगे कि आप
पहले से ही उतनी दौलत के मालिक है।
एग्ज़ाम्पल के तौर पे–मान लीजिए कि आप आज से
पाँच साल बाद जनवरी में 1,00,000 डॉलर कामना
चाहते है और आप इस पैसे के बदले सेल्समेन के रूप
में अपनी पर्सनल सर्विस देना चाहते है। आपके गोल
का लिखा हुआ स्टेटमेंट नीचे दिए हुए स्टेटमेंट की तरह
होना चाहिए।
*7 जनवरी, 20… तक मेरे पास 1,00,000 डॉलर
होंगे, जो इस दौरान मेरे पास समय-समय पर
अलग-अलग अमाउंट में आएँगे।’
“इस पैसे के बदले में मैं …(यहाँ पर उस सर्विस या
प्रोडक्ट का नाम लिख दें, जिसे आप बेचना चाहते है)
के सेल्समेन के रूप में अपनी बेस्ट एबिलिटी से सर्विस
दूंगा, ज़्यादा से ज़्यादा पॉसिबल quantity और बेस्ट
quality दूंगा।
“मुझे विश्वास है कि मेरे पास इतना पैसा होगा। मेरा
विश्वास इतना पक्का है कि मैं इस पैसे को अपनी आँखों
के सामने अभी देख सकता हूँ। मैं इसे अपने हाथो से
छू सकता हूँ। यह मेरा इंतजार कर रहा है कि यह मेरे

छू सकता हूँ। यह मेरा इंतजार कर रहा है कि यह मेरे
पास आए और उस ratio में आए, जिस ratio में मैं
अपनी सर्विस दूंगा। मैं उस प्लान का इंतजार कर रहा
हूँ, जिसके ज़रिए मैं इतना पैसा कमा सकू और जब
मुझे वह प्लान मिल जाएगा तो मैं उस पर एक्शन लेना
शुरू कर दूंगा।’
दूसरा : इस प्रोग्राम को सुबह और रात को दोहराएं जब
तक कि आप अपनी इमेजिनेशन में उस दौलत को न
देख ले, जिसे आप कमाना चाहते है।
तीसरा : अपने स्टेटमेंट की कॉपी को अपने बेड के पास
रखें और इसे सोने से ठीक पहले और उठने के ठीक
बाद पढ़े, जब तक कि यह आपको याद न हो जाए।
जब आप इन इंस्ट्रक्शन्स का फॉलो करे तो याद रखे
कि आप ऑटो सजेशन के प्रिंसिप्ल को फॉलो कर
रहे है और इसका गोल है आपके सब कॉन्शियस
माइंड को ऑर्डर देना। यह भी याद रखे कि आपका
सब कॉन्शियस माइंड सिर्फ उन्ही इंस्ट्रक्शन्स के
अनुसार काम करेगा जो ‘इमोशन’ के साथ इस तक
पहुँचाए जाएंगे। विश्वास सभी इमोशंस में सबसे स्ट्रोंग
और क्रिएटिव भावना है। विश्वास के चैप्टर में दिए गए
इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो करे।
पहले तो यह इंस्ट्रक्शन impractical या नामुमकिन
लग सकते है। इस बात से परेशान न हो। चाहे वे
शुरुआत में आपको कितने ही impractical या

पहले तो यह इंस्ट्रक्शन impractical या नामुमकिन
लग सकते है। इस बात से परेशान न हो। चाहे वे
शुरुआत में आपको कितने ही impractical या
अजीब लगें लेकिन आप इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो करते
रहे। अगर शब्दो से और एक्शन से आप इंस्ट्रक्शन्स को
फॉलो करते रहेंगे तो वह वक्त जल्दी ही आएगा, जब
आपके सामने पॉवर की एक नई दुनिया खुल जाएगी।
नए विचारों की तरफ़ डाउट रखना इनसान के स्वभाव
में है। लेकिन अगर आप इन इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो
करेंगे तो आपका डाउट विश्वास में बदल जाएगा और
जल्द ही यह विश्वास पूरे विश्वास में बदल जाएगा।
कई philosophers ने यह कहा है कि इनसान
इस धरती पर अपनी किस्मत ख़ुद बनाता है लेकिन
उनमे से ज़्यादातर यह कहना भूल गए कि वह अपनी
किस्मत का निर्माता क्यों है। इस चैप्टर में यह अच्छी
तरह से समझाया गया है कि इनसान अपनी किस्मत
को, खासकर फाइनेंसियल किस्मत को किस तरह से
बना सकता है। इनसान ख़ुद का और अपने आस-पास
के माहौल का क्रिएटर बन सकता है क्योंकि उसके पास
अपने सब कॉन्शियस माइंड को इन्फ्लुएंस करने की
काबिलियत है।
इच्छा को पैसा के रूप में बदलने की टेक्नोलॉजी में
ऑटो सजेशन का इस्तेमाल शामिल है, जिसके जरिए
नगान माने यत कॉन्शिगय पाटंट नकाटून सकता

काबिलियत है।
इच्छा को पैसा के रूप में बदलने की टेक्नोलॉजी में
में
ऑटो सजेशन का इस्तेमाल शामिल है, जिसके जरिए
इनसान अपने सब कॉन्शियस माइंड तक पहुँच सकता
है और उसे इन्फ्लुएंस कर सकता है। बाकी के प्रिंसिप्ल
सिर्फ साधन हैं जिनके द्वारा ऑटो सजेशन का इस्तेमाल
किया जाता है। इस विचार को अपने मन में रखे और
और आप हमेशा सतर्क रहेंगे कि ऑटो सजेशन आपकी
फिजिकल सक्सेस में कितना इम्पोर्टेन्ट योगदान देता है
और इस बुक में बताए गए तरीकों से ऑटो सजेशन की
मदद से आप अपने efforts से कितना ज़्यादा पैसा
कमा सकते है।
जब आप पूरी बुक पढ़ ले तो आप दोबारा इस चैप्टर
पर लौटे और भावना और एक्शन के नज़रिए से इस
इंस्ट्रक्शन को फॉलो करें।
पूरे चैप्टर को हर रात एक बार जोर से पढ़े, जब तक
कि आपको यह पूरी तरह से विश्वास न हो जाए कि
ऑटो सजेशन का प्रिंसिप्ल सच में दमदार है और यह
आपके लिए वह सब हासिल कर सकता है, जिसके बारे
में दावा किया गया है। जब आप पढ़े तो हर उस लाइन
को अंडरलाइन कर ले, जिसने आप पर कुछ ना कुछ
असर किया है।

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5. स्पेशलाइज्ड नॉलेज
पर्सनल एक्सपीरियंस या ऑब्जरवेशन
अमीर बनने की ओर चौथा कदम
नॉलेज दो तरह के होते है। पहला general नॉले
और दूसरा स्पेशलाइज्ड नॉलेज | general नॉलेज
चाहे जितना भी ज़्यादा हो, प्रॉपर्टी बढ़ाने के मामले में
यह बहुत ज़्यादा मदद नहीं करता है। इनसान के पास
general नॉलेज के जितने भी रूप हो सकते है,
सभी बड़े यूनिवर्सिटीज़ में ये पाए जाते है। ज़्यादातर
प्रोफेसरों के पास बहुत कम पैसा होता है। नॉलेज देना
उनकी ख़ासियत होती है, लेकिन वे इस नॉलेज को
organize कर उसे इस्तेमाल करने के एक्सपर्ट नहीं
होते।
नॉलेज पैसा को तब तक अट्रैक्ट नहीं करता है जब
तक कि पैसे को कमाने का गोल न बनाया जाए और
इस गोल को हासिल करने के लिए काम का एक
प्रैक्टिकल प्लान बनाकर इस नॉलेज को organize न
किया जाए और बुद्धिमानी से इसका इस्तेमाल न किया
जाए। इस फैक्ट की समझ की कमी ही वह सबसे बड़ा
कारण है, जिसकी वजह से ज़्यादातर लोग इस कांसेप्ट
में विश्वास रखते है कि “नॉलेज ही पॉवर है। लेकिन ऐसा

कारण है, जिसकी वजह से ज़्यादातर लोग इस कांसेप्ट
में विश्वास रखते है कि “नॉलेज ही पॉवर है। लेकिन ऐसा
कोई रूल नहीं है। नॉलेज शक्ति तभी बनती है, जब
इसे एक क्लियर प्लान बनाने के लिए organize
किया जाए और किसी गोल को हासिल करने के लिए
इसका इस्तेमाल किया जाए।
एजुकेशन के सभी सिस्टम में ‘मिसिंग लिंक’ यही है कि
एजुकेशनल institutions अपने स्टूडेंट्स को यह
सिखाने में फेल हो जाते हैं कि नॉलेज के हासिल हो
जाने के बाद वे अपने नॉलेज को organize कैसे करे
और उसका इस्तेमाल कैसे करे।
कई लोग यह मानने की गलती करते है कि क्योंकि
हेनरी फोर्ड बहुत कम समय के लिए स्कूल गए थे,
इसलिए उनके पास एजुकेशन कम थी। दरअसल ये
लोग एजुकेशन का सही मतलब नहीं समझ पाए है।
“एज्युकेशन ‘ शब्द लैटिन शब्द ‘एज्युको’ से बना है,
जिसका मतलब होता है बाहर लाना या अंदर से डेवलप
करना।
यह जरूरी नहीं है कि वही इंसान पढ़ा लिखा हो,
जिसके पास अच्छी ख़ासी general या स्पेशलाइज्ड
नॉलेज हो। पढ़ा लिखा आदमी वह होता है, जिसने
अपने मन को इस तरह से डेवलप कर लिया है कि
वह जो चाहता है, उसे हासिल कर सकता है और इस
गोरोगों वट गगे तो उतना ही जाता है। गाठी

वह जो चाहता है, उसे हासिल कर सकता है और इस
प्रोसेस में वह दूसरो को नुक्सान नहीं पहुंचाता है। यानी
वह इस बात का ध्यान रखता है कि उसकी आज़ादी
वहाँ से ख़त्म होती है, जहाँ से अगले की नाक शुरू
होती है।
वर्ल्ड वॉर | के दौरान शिकागो के एक न्यूज़पेपर ने
कुछ आर्टिकल छपे, जिसमे दूसरी बातो के अलावा
इस बात का जिक्र भी था कि हेनरी फोर्ड एक बेवकूफ़
अमन पसंद करने वाले इंसान हैं। फोर्ड ने इस स्टेटमेंट
पर आपत्ति जताई और उस न्यूज़पेपर के खिलाफ
मुकदमा दायर कर दिया। जब मुकदमा कोर्ट में चला
तो न्यूज़पेपर के वकीलो ने अपनी बात को सही साबित
करने के लिए फोर्ड को गवाही के लिए बुलाया ताकि
जूरी के सामने यह साबित किया जा सके कि फोर्ड कम
पढ़े लिखे मूर्ख आदमी है। वकीलो ने फोर्ड से बहुत
सवाल किए, जिनसे यह साबित हो सके। हालाँकि
उनके पास कार बनाने का स्पेशलाइज्ड नॉलेज तो था,
लेकिन बाकी सभी मामलो में उन्हें बिलकुल भी नॉलेज
नहीं थी।
फोर्ड पर कुछ इस तरह के सवाल दागे गए, जिससे उन्हें
नीचा दिखाया जा सके–“बेनेडिक्ट अर्नाल्ड कौन थे?”
और 1776 के विद्रोह से मुक़ाबला करने के लिए ब्रिटेन
ने कितने सैनिको को अमेरिका भेजा था? सारे सवालों
को सुनने के बाद अंतिम सवाल का फोर्ड ने कुछ इस
तरह जवाब दिया ‘मुझे ब्रिटेन द्वारा भेजे गए सैनिको

साखा जार खुद का बजनस शुरू करन का दिशा म
कदम रखा। अपने काम की शुरुआत उसने उसी ग्रोसर
से की, जिसके लिए वह पहले काम करता था । इसके
बाद उसने 100 से ज़्यादा traders से कॉन्ट्रैक्ट
किया कि वह उनका हिसाब-किताब देखेगा और बदले
में मामूली मंथली फ़ीस लेगा। उसका विचार इतना
प्रैक्टिकल था कि जल्दी ही उसे एक छोटे डिलवेरी ट्रक
में एक पोर्टेबल ऑफिस बनाना पड़ा, जिसमे मॉडर्न
बुककीपिंग vehicles का एक दस्ता और सहयोगियों
का एक बड़ा स्टाफ था, जिनके द्वारा वह छोटे
traders को बहुत कम दाम में बहुत ज्यादा और उम्दा
एकाउंटिंग सर्विस देता था।
स्पेशलाइज्ड नॉलेज और इमेजिनेशन वो elements
थे, जिनके कारण यह कमाल का सक्सेसफुल बिजनस
बन पाया। पिछले साल इस बिजनस के मालिक ने
जितना इनकम टैक्स चुकाया, वह उस आदमी से दस
गुना ज़्यादा था जब वह ग्रॉसरी की दुकान में सेल्समेन
हुआ करता था।
इस सक्सेसफुल बिजनस की शुरुआत सिर्फ एक विचार
से हुई। बेरोजगार सैल्समैनों को यह विचार देने के बाद,
मैं अब एक और विचार देना चाहता हूँ, जिसमे इससे भी
ज्यादा कमाई की संभावना है।
यह विचार उस सेल्समेन द्वारा सुझाया गया था, जो
सामान बेचना छोड़कर होलसेल लेवल पर बुककीपिंग
के बिजनस में चला गया था। जब उसकी बेरोजगारी की

सामान बेचना छोड़कर होलसेल लेवल पर बुककीपिंग
के बिजनस में चला गया था। जब उसकी बेरोजगारी की
समस्या के लिए यह प्लान सुझाया गया तो उसने तुरंत
कहा –‘ मुझे आईडिया पसंद आया, लेकिन मैं नहीं
जनता कि इसे cash में कैसे बदला जाए।’ दूसरे शब्दों
में उसने शिकायत की कि बुकीपिंग का नॉलेज हासिल
करने के बाद उसे यह मालूम नहीं था कि उसकी
मार्केटिंग कैसे की जाए।
इसलिए एक और समस्या थी जिसे सुलझाया जाना था।
एक यंग टाइपिस्ट औरत की मदद से इसने पूरी कहानी
लिखी और बहुत दिलचस्प बुक तैयार की, जिसमे
बुककीपिंग के नए सिस्टम के फ़ायदों के बारे में बताया
गया था। हर पेज को सुंदरता से टाइप किया गया और
एक आर्डिनरी स्क्रैपबुक में लगा दिया गया, जिसमे नए
बिजनस की कहानी इतने इफेक्टिव ढंग से कही गई थी
कि इसके मालिक के पास इतने ज्यादा अकाउंट आ गए
कि उन्हें संभालने में उन्हें बड़ी मेहनत करनी पड़ी।
देश भर में ऐसे हजारो लोग है, जिन्हें ऐसे मार्केटिंग
एक्सपर्ट की सर्विस की जरुरत है, जो उनकी पर्सनल
सर्विस की मार्केटिंग कर सके और उनके लिए एक
attractive बायोडाटा तैयार कर सके।
यहाँ पर जो विचार दिया जा रहा है, वह ज़रुरत की
उपज था, emergency सिचुएशन में उठाया गया
कदम था, लेकिन इससे एक से ज़्यादा लोगो का भला
.

पण य जार पूरा जानकारी दी गइ था। इस प्लान बुक
में यह भी बताया गया था कि उसके बेटे को किस तरह
का पोस्ट चाहिए। इसके अलावा इसमें यह भी क्लियर
रूप से बताया गया था कि वह उस पोस्ट पर किस तरह
काम करेगा।
प्लान बुक की तैयारी में कई हफ़्तों की मेहनत लगी,
जिस दौरान उस औरत ने अपने बेटे को हर दिन
पब्लिक लाइब्रेरी भेजा जहाँ से वह अपनी जॉब से
जुडी हुई बेस्ट किताबो से डेटा लेकर आता था। उसने
अपने बेटे को उसके पोटेंशियल employer के
सभी competitors के पास भी भेजा और यह
इम्पोर्टेन्ट जानकारी हासिल करवाई कि उनके लिए
बिजनस का कौन सा मेथड इम्पोर्टेन्ट है। प्लान बनाने
में यह जानकारी बहुत इम्पोर्टेन्ट साबित हुई क्योंकि
इसके द्वारा यह जाना गया कि वह अपने expected
पोस्ट पर किस तरह काम करेगा। जब प्लान बनकर
तैयार हो गया तो इसमें आधा दर्जन से ज़्यादा
बेस्ट suggestion थे, जिनके द्वारा पोटेंशियल
employer को फ़ायदा हो सकता था और उसका
बिजनस बेहतर बन सकता था।
आपकी इच्छा हो सकती है कि आप पूछे जॉब हासिल
करने के लिए इतनी मेहनत करने की क्या जरुरत है?
इसका जवाब यह है कि किसी काम को अच्छी तरह
से करने में थोड़ी मेहनत हो भी जाती है तो इसमें कोई
बुराई नहीं है।

में प्रोग्राम अटेंड करने गए। कई शहरो में वे हाई
स्कूल पास journalist से मिले और बच्चों को
ज्यादा-से-ज
-ज़्यादा एजुकेशन हासिल करने के लिए
इंस्पायर किया। पर उन्होंने बताया कि ये हाई स्कूल
पास journalist बड़े चालाक होते है। वे अकसर
मुझसे पूछते थे, “जब आप यह कहते हैं कि एजुकेशन
बहुत जरुरी है, फिर आपने अपनी पढ़ाई बीच में ही क्यों
छोड़ दी? आपकी करनी और कथनी में इतना फर्क
क्यों है?”
“सच बताऊँ मेरे पास कोई जवाब नहीं होता था।
इसलिए मैंने फैसला लिया कि मैं हाई स्कूल का
डिप्लोमा लेकर ही दम लूँगा।”
अब उनका मकसद उन लोगो को एजुकेशन जारी रखने
के लिए बढ़ावा देना है, जिन्होंने किसी वजह से बीच में
ही पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि एजुकेशन हासिल करने के
लिए कभी देर नहीं होती।
‘मैं लोगो को बताता हूँ कि उतनी पढ़ाई कर ले, जितनी
आप कर सकते है। मैंने पढ़ाई छोड़ने के पैतालीस
सालों के बाद डिप्लोमा हासिल किया। सच ही तो है,
एजुकेशन हासिल करने के लिए कभी देर नहीं होती।’
थॉमस ने आगे जोड़ा ‘ अब तक मेरी जिंदगी में हासिल
अचीवमेंट्स में यह सबसे बड़ी अचीवमेंट है।’

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यह जानना जरूरी है कि नॉलेज को कैसे खरीदा
जाए
सबसे पहली बात तो यह है कि आप यह जान ले कि
आपको किस स्पेशलाइज्ड नॉलेज की जरुरत है। साथ
ही आपको यह भी पता होना चाहिए कि आप उस
नॉलेज से कौन सा गोल हासिल करना चाहते है। बहुत
हद तक जीवन में आपका main गोल, वह गोल है,
जिसके लिए आप काम कर रहे है, यह तय करेगा कि
आपको किस नॉलेज की ज़रुरत है। इस सवाल का
जवाब मिल जाने के बाद आपका अगला कदम यह
होगा कि आप वह सही जानकारी हासिल कर ले और
इस नॉलेज के लिए भरोसेमंद sources को खोजें।
इनमे से ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट है।
1. आपका एक्सपीरियंस और एजुकेशन
2. दूसरो के सहयोग (मास्टर माइंड सहयोग) के द्वारा
मौजूद एक्सपीरियंस एजुकेशन
3. कॉलेज और यूनिवर्सिटी
4. पब्लिक लाइब्रेरी (इनसान ने अब तक जितना
नॉलेज हासिल किया है, वह सारा नॉलेज बुक्स
और
पीरियोडिकल्स के द्वारा हासिल किया जा सकता है।)

5. स्पेशल ट्रेनिंग कोर्स (खास तौर पर नाईट स्कूल
और होम स्टडी स्कूल्स) जब नॉलेज हासिल किया
जाए तो उसके बाद अपने गोल के लिए प्लान बनाकर
इसे इस्तेमाल में लाना चाहिए। फिर यह जाने कि वह
स्पेशलाइज्ड नॉलेज आपको किस भरोसेमंद source
से मिल सकता है।
हर फील्ड में सक्सेसफुल लोग अपने main गोल,
बिजनस या प्रोफेसन से रिलेटेड स्पेशलाइज्ड नॉलेज
हासिल करते ही रहते है। यह सिलसिला कभी खत्म
नहीं होता। जो लोग सक्सेसफुल नहीं है वे आम तौर पर
इस गलतफहमी के शिकार होते है कि स्कूल की पढ़ाई
खत्म होने के बाद सीखने का दौर ख़त्म हो जाता है।
सच्चाई तो यह है कि स्कूल की पढ़ाई तो सिर्फ स्टूडेंट
को वह रास्ता दिखाता है, जिसके द्वारा प्रैक्टिकल
नॉलेज हासिल किया जा सकता है।
आज का युग स्पेशलिटी का युग है। कोलंबिया
यूनिवर्सिटी के प्लेसमेंट डायरेक्टर रोबर्ट पी. मूर ने इस
सच्चाई को एक न्यूज़पेपर में लिखा था।
कई सालों बाद, जॉब देने वाली कंपनी के कंसल्टेंट्स
ने बताया कि employer, जो कैंपस में जॉब के
लिए स्टूडेंट्स को हायर करने जाते है, वे किसी स्पेशल
फील्ड जैसे बिजनस मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस,
मैथमेटिक्स, केमेस्ट्री जैसे सब्जेक्ट की पढ़ाई किए होते
है, उन्हें तवज्जो देते है। क्योंकि ऐसे लोगों को बड़ी

है, उन्हें तवज्जो देते है। क्योंकि ऐसे लोगों को बड़ी
जल्द ही प्रोडक्शन में लगाया जा सकता है, बजाय उन
स्टूडेंट्स के जिन्होंने आर्ट्स की डिटेल में पढ़ाई की है
लेकिन प्रोडक्शन के लिहाज से वो कोई काम के नहीं
हैं।
कई ऐसे स्टूडेंट भी होते है, जिनमे बहुत
काबिलियत
होती है पर 8 से 20 साल की उम्र में वो sure नहीं
होते, जिस वजह से वे किसी स्पेशलाइज्ड कोर्स को
चुन नहीं पाते, जिससे उनका करियर बन सके। लोग
ग्रेजुएशन में कई तरह की पढ़ाई करने के बावजूद पोस्ट
ग्रेजुएशन में करियर-में मदद करने वाली एजुकेशन
हासिल कर सकते है। इस बुक के यंग रीडर्स को किसी
करियर-उपयोगी कोर्स के लिए तब तक नहीं भागना
चाहिए, जब तक वे इसके मिलने वाले मौकों और
नुकसान की पूरी जानकारी हासिल नहीं कर लेते है।
कई यूनिवर्सिटी और कॉलेज इन सभी के बारे में
स्टूडेंट्स को गाइड करती हैं, जिससे स्टूडेंट अपने
लिए सही फ़ैसला ले सके। अगर ऐसी कोई भी सुविधा
मौजूद नहीं है तो स्टूडेंट्स को इन फ़ील्ड्स के बारे में
ज़्यादा-से- ज़्यादा पढ़ना चाहिए और उन लोगो से बात
करनी चाहिए, जो इस तरह के फील्ड में काम करते हैं।
हर करियर में यूनिवर्सिटी की डिग्री की जरुरत नहीं
होती। आज के दौर में कुछ अलग तरह के ट्रेनिंग कोर्स
भी मौजूद है। कई यूनिवर्सिटी ने उन लोगो के लिए

होती। आज के दौर में कुछ अलग तरह के ट्रेनिंग कोर्स
भी मौजूद है। कई यूनिवर्सिटी ने उन लोगो के लिए
एजुकेशन प्रोग्राम शुरू किए है, जिन्हें करियर में मदद
करने वाली नॉलेज की जरुरत है। कुछ सर्टिफिकेट
प्रोग्राम भी उन लोगो के लिए चलती है, जिन्हें अपनी
स्किल को ज़्यादा इम्प्रूव करना होता है। ये कोर्स अक्सर
शाम को या फिर weekend में दिए जाते है, जिससे
जॉब करने वाला इंसान भी इसमें शामिल हो सके।
होम स्टडी प्रोग्राम को डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम के नाम
से जाना जाता है। जो correspondence या
फिर इंटरनेट के ज़रिए किया जाता है। इस तरह की
एजुकेशन का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि
आपके पास जब भी वक्त हो तब आप पढ़ सकते है।
अगर इस तरह के कोर्स सावधानी से चुने जाएं तो ये
आपको clarity और ज़्यादा जानकारी के लिए मेल में
वैल्युएबल और काम की एजुकेशन देते हैं ।
अगर आप में डिसिप्लिन है तो आप ऐसे प्रोग्राम से वह
स्पेशलाइज्ड नॉलेज हासिल कर उस बर्बाद हुए मौकों
की भरपाई कर सकते है, जो स्कूलिंग के समय मुफ्त
में मौजूद थी। होम स्टडी प्रोग्राम खासकर उन लोगो
के लिए है, जो फिर स्कूल जाकर नहीं पढ़ सकते और
जॉब करते हुए एक्स्ट्रा स्पेशलाइज्ड नॉलेज हासिल
करना चाहते है।
आजकल लगातार बदल रही इकॉनमी के कारण यह

आजकल लगातार बदल रही इकॉनमी के कारण यह
हजारो लोगो के लिए बहुत जरुरी हो गया है कि उनके
पास पैसे कमाने का और साधन भी होने चाहिए। ना
जाने ऐसा कब समय आ जाए कि उन्हें जॉब से हाथ
गवाना पड़े और उन्हें नई जॉब की तलाश करनी पड़
जाए। कभी-कभी कोई सामान नहीं बिक रहा होता है
तो अच्छा बिजनेसमैन उस सामान को उस दूसरे प्रोडक्ट
के साथ बेच देता है, जिसकी ज़्यादा डिमांड होती है।
अगर उनकी सर्विस उम्मीद के जितना रिजल्ट नहीं दे पा
रही है तो उन्हें अपने प्लान में बदलाव करने की जरुरत
होती है, जहाँ से उन्हें बेहतर रिजल्ट हासिल हो सके।
जिन लोगो ने स्कूलिंग के बाद सीखना छोड़ दिया, वे
लोग पूरी जिंदगी मिडिल क्लास के रहन सहन में ही
गुज़ार देते है।
सक्सेस का दरवाज़ा लगातार सीखने के रास्ते से खुलता
है। आइए एक ख़ास एग्ज़ाम्पल लेते है।
ग्रॉसरी स्टोर के एक सेल्समेन ने अचानक अपने
आपको बेरोजगार पाया। क्योंकि उसके पास
बुककीपिंग का कुछ एक्सपीरियंस था इसलिए उसने
एकाउंटिंग का कोर्स किया, लेटेस्ट बुककीपिंग सिस्टम
और ऑफिस के मॉडर्न मशीनों का इस्तेमाल करना
सीखा और खुद का बिजनस शुरू करने की दिशा में
कदम रखा। अपने काम की शुरुआत उसने उसी ग्रोसर
से की, जिसके लिए वह पहले काम करता था । इसके
बाट रसने 100 से ज्यादा traders से कॉन्टैक्ट

साखा जार खुद का बजनस शुरू करन का दिशा म
कदम रखा। अपने काम की शुरुआत उसने उसी ग्रोसर
से की, जिसके लिए वह पहले काम करता था । इसके
बाद उसने 100 से ज़्यादा traders से कॉन्ट्रैक्ट
किया कि वह उनका हिसाब-किताब देखेगा और बदले
में मामूली मंथली फ़ीस लेगा। उसका विचार इतना
प्रैक्टिकल था कि जल्दी ही उसे एक छोटे डिलवेरी ट्रक
में एक पोर्टेबल ऑफिस बनाना पड़ा, जिसमे मॉडर्न
बुककीपिंग vehicles का एक दस्ता और सहयोगियों
का एक बड़ा स्टाफ था, जिनके द्वारा वह छोटे
traders को बहुत कम दाम में बहुत ज्यादा और उम्दा
एकाउंटिंग सर्विस देता था।
स्पेशलाइज्ड नॉलेज और इमेजिनेशन वो elements
थे, जिनके कारण यह कमाल का सक्सेसफुल बिजनस
बन पाया। पिछले साल इस बिजनस के मालिक ने
जितना इनकम टैक्स चुकाया, वह उस आदमी से दस
गुना ज़्यादा था जब वह ग्रॉसरी की दुकान में सेल्समेन
हुआ करता था।
इस सक्सेसफुल बिजनस की शुरुआत सिर्फ एक विचार
से हुई। बेरोजगार सैल्समैनों को यह विचार देने के बाद,
मैं अब एक और विचार देना चाहता हूँ, जिसमे इससे भी
ज्यादा कमाई की संभावना है।
यह विचार उस सेल्समेन द्वारा सुझाया गया था, जो
सामान बेचना छोड़कर होलसेल लेवल पर बुककीपिंग
के बिजनस में चला गया था। जब उसकी बेरोजगारी की

सामान बेचना छोड़कर होलसेल लेवल पर बुककीपिंग
के बिजनस में चला गया था। जब उसकी बेरोजगारी की
समस्या के लिए यह प्लान सुझाया गया तो उसने तुरंत
कहा –‘ मुझे आईडिया पसंद आया, लेकिन मैं नहीं
जनता कि इसे cash में कैसे बदला जाए।’ दूसरे शब्दों
में उसने शिकायत की कि बुकीपिंग का नॉलेज हासिल
करने के बाद उसे यह मालूम नहीं था कि उसकी
मार्केटिंग कैसे की जाए।
इसलिए एक और समस्या थी जिसे सुलझाया जाना था।
एक यंग टाइपिस्ट औरत की मदद से इसने पूरी कहानी
लिखी और बहुत दिलचस्प बुक तैयार की, जिसमे
बुककीपिंग के नए सिस्टम के फ़ायदों के बारे में बताया
गया था। हर पेज को सुंदरता से टाइप किया गया और
एक आर्डिनरी स्क्रैपबुक में लगा दिया गया, जिसमे नए
बिजनस की कहानी इतने इफेक्टिव ढंग से कही गई थी
कि इसके मालिक के पास इतने ज्यादा अकाउंट आ गए
कि उन्हें संभालने में उन्हें बड़ी मेहनत करनी पड़ी।
देश भर में ऐसे हजारो लोग है, जिन्हें ऐसे मार्केटिंग
एक्सपर्ट की सर्विस की जरुरत है, जो उनकी पर्सनल
सर्विस की मार्केटिंग कर सके और उनके लिए एक
attractive बायोडाटा तैयार कर सके।
यहाँ पर जो विचार दिया जा रहा है, वह ज़रुरत की
उपज था, emergency सिचुएशन में उठाया गया
कदम था, लेकिन इससे एक से ज़्यादा लोगो का भला
.

यहाँ पर जो विचार दिया जा रहा है, वह ज़रुरत की
उपज था, emergency सिचुएशन में उठाया गया
कदम था, लेकिन इससे एक से ज़्यादा लोगो का भला
हुआ। वह औरत जिसके दिमाग में यह विचार आया,
उसकी इमेजिनेशन बहुत तेज़ थी। उसने तुरंत समझ
लिया कि इस आईडिया में एक नए प्रोफेशन को शुरू
करने की ताकत थी जिसके द्वारा उन हजारों लोगो
को सर्विस दी जा सकती थी, जिन्हें पर्सनल सर्विस की
मार्केटिंग के लिए प्रैक्टिकल गाइडेंस की जरुरत थी।
जब इस औरत को पर्सनल services की मार्केटिंग
करने के अपने पहले प्लान में तुरंत सक्सेस मिली तो
उसे इंस्पिरेशन भी मिली। इसके बाद उस जोश और
एनर्जी से भरी औरत ने अपने बच्चे की इसी तरह की
प्रॉब्लम का solution खोजा।
उसका बेटा अभी-अभी कॉलेज से निकला था, लेकिन
उसे जॉब नहीं मिल पा रही थी। उस औरत ने अपने
बेटे के लिए जो मार्केटिंग प्लान बनाया, वह पर्सनल
services को बेचने का मेरे द्वारा लिखा गया बेस्ट
एग्ज़ाम्पल है।
जब प्लान बुक पूरी हुई तो इसमें टाइप किए हुए पचास
पेज थे और पूरी जानकारी दी गई थी। इस प्लान बुक
में
यह भी बताया गया था कि उसके बेटे को किस तरह
का पोस्ट चाहिए। इसके अलावा इसमें यह भी क्लियर

पण य जार पूरा जानकारी दी गइ था। इस प्लान बुक
में यह भी बताया गया था कि उसके बेटे को किस तरह
का पोस्ट चाहिए। इसके अलावा इसमें यह भी क्लियर
रूप से बताया गया था कि वह उस पोस्ट पर किस तरह
काम करेगा।
प्लान बुक की तैयारी में कई हफ़्तों की मेहनत लगी,
जिस दौरान उस औरत ने अपने बेटे को हर दिन
पब्लिक लाइब्रेरी भेजा जहाँ से वह अपनी जॉब से
जुडी हुई बेस्ट किताबो से डेटा लेकर आता था। उसने
अपने बेटे को उसके पोटेंशियल employer के
सभी competitors के पास भी भेजा और यह
इम्पोर्टेन्ट जानकारी हासिल करवाई कि उनके लिए
बिजनस का कौन सा मेथड इम्पोर्टेन्ट है। प्लान बनाने
में यह जानकारी बहुत इम्पोर्टेन्ट साबित हुई क्योंकि
इसके द्वारा यह जाना गया कि वह अपने expected
पोस्ट पर किस तरह काम करेगा। जब प्लान बनकर
तैयार हो गया तो इसमें आधा दर्जन से ज़्यादा
बेस्ट suggestion थे, जिनके द्वारा पोटेंशियल
employer को फ़ायदा हो सकता था और उसका
बिजनस बेहतर बन सकता था।
आपकी इच्छा हो सकती है कि आप पूछे जॉब हासिल
करने के लिए इतनी मेहनत करने की क्या जरुरत है?
इसका जवाब यह है कि किसी काम को अच्छी तरह
से करने में थोड़ी मेहनत हो भी जाती है तो इसमें कोई
बुराई नहीं है।

बिजनस का कौन सा मेथड इम्पोर्टेन्ट है। प्लान बनाने
में यह जानकारी बहुत इम्पोर्टेन्ट साबित हुई क्योंकि
इसके द्वारा यह जाना गया कि वह अपने expected
पोस्ट पर किस तरह काम करेगा। जब प्लान बनकर
तैयार हो गया तो इसमें आधा दर्जन से ज़्यादा
बेस्ट suggestion थे, जिनके द्वारा पोटेंशियल
employer को फ़ायदा हो सकता था और उसका
बिजनस बेहतर बन सकता था।
आपकी इच्छा हो सकती है कि आप पूछे जॉब हासिल
करने के लिए इतनी मेहनत करने की क्या जरुरत है?
इसका जवाब यह है कि किसी काम को अच्छी तरह
से करने में थोड़ी मेहनत हो भी जाती है तो इसमें कोई
बुराई नहीं है।
उस औरत ने अपने बेटे के हित को ध्यान में रखते हुए,
जो प्लान बनाया उससे उसे पहले ही इंटरव्यू में वह
जॉब मिल गई, जिसके लिए उसने एप्लीकेशन दिया था
और उसे उतनी ही सैलरी दी गई, जो उसने मांगी थी।’
यही नहीं, इससे भी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट बात यह है कि
उसे नीचे के लेवल से शुरुआत नहीं करनी पड़ी। उसने
जूनियर एग्जीक्यूटिव के पोस्ट पर एग्जीक्यूटिव की
सैलरी पर अपना कैरियर शुरू किया।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
लेकिन इतनी मेहनत क्यों करना?
इसलिए क्योंकि अगर इस लड़के ने नीचे से शुरुआत
की होती और उसने लगातार तरक्की की होती तो उसे
इतने ऊपर उठने में कम-से-कम दस साल का समय
लगता, जबकि well planned प्रेजेंटेशन की वजह
से उसे एक ही झटके में वह जॉब मिल गई।
नीचे से जॉब शुरू करना और ऊपर के पोस्ट पर
लगातार तरक्की करने का विचार हालाँकि दमदार
नजर आता है लेकिन इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह
है कि –ज्यादातर लोग नीचे से शुरुआत करते है
और वे अपने सर को इतना ऊपर नहीं उठा पाते कि
opportunity उन्हें देख पाए और इसलिए वे हमेशा
नीचे ही बने रहते है। हमें यह भी याद रखना चाहिए
कि नीचे से जो नज़ारा दिखता है, वह इतना सुंदर
नहीं होता। इसमें हमारे एम्बिशन का गला घुटने की
tendency होती है।
हम इसे रूटीन में फंसना भी कह सकते है, जिसका
मतलब यह है कि हमें इसकी आदत पड़ जाती है।
इसलिए हम अपनी तकदीर को स्वीकार कर लेते है
और डेली रूटीन की आदत डाल लेते है। यह आदत

और डेली रूटीन की आदत डाल लेते है। यह आदत
अंत में इतनी स्ट्रोंग हो जाती है कि हम इससे बाहर
निकलने की कोशिश करना ही छोड़ देते है। यह एक
और कारण है, जिसकी वजह से हमें सबसे नीचे
के स्टेप से एक या दो स्टेप ऊपर से शुरुआत करनी
चाहिए। ऐसा करने से आदमी यह आदत डाल लेता है
ताकि वह अपने चारों तरफ देख सके कि लोग किस
तरह आगे बढ़ रहे है। फिर वह अवसरों को पहचान
सके और उन्हें गले लगाकर बिना झिझके आगे बढ़
सके।
डैन हैल्पिन एक बहुत अच्छा एग्ज़ाम्पल है।
अपने कॉलेज के दिनों में वे फ़ेमस 1930 नेशनल
चैंपियनशिप नोट्रे डेम फुटबॉल टीम के मैनेजर थे, जब
यह स्वर्गीय न्यूट रोकने (Knute Rockne) के
under में थी।
हैल्पिन ने बड़े ही निराशजनक समय में अपना कॉलेज
पूरा किया क्योंकि उस वक्त मंदी के कारण जॉब कम
हो गई थी। इसलिए इंवेस्टमेंट बैंकिंग और मोशन
पिक्चर्स में हाथ पाँव मारने के बाद उन्होंने अपने फ्यूचर
की संभावना का पहला कदम पहचाना–कमिशन
बेसिस पर बिजली के हियरिंग एड्स बेचना।
लगभग दो सालो तक उन्होंने यह काम लगातार किया
हालाँकि वह इस काम को बिलकुल पसंद नहीं करते
थे और वह कभी ऊपर नहीं उठ पाए होते अगर उन्होंने
ܒܫܗܒ
P17।।+पा

एलए राग १५ सियास
थे और वह कभी ऊपर नहीं उठ पाए होते अगर उन्होंने
अपने असंतोष को दूर न किया होता। उन्होंने सबसे
पहले तो वह गोल बनाया कि वह अपनी कंपनी के
असिस्टेंट सेल्स मैनेजर बनेंगे और उन्हें यह जॉब मिल
गई। ऊपर की तरफ उठाए गए इस कदम ने उन्हें भीड़
के इतना ऊपर उठा दिया, जिससे वह ज़्यादा बड़े मौके
को देख पाए। इसके अलावा उन्होंने अपने आपको
इतना ऊपर उठा लिया था, जहाँ मौके ख़ुद उन्हें देख
सके।
उन्होंने हियरिंग ऐड बेचने में इतना शानदार रिकॉर्ड
बनाया था कि उनकी competitor कंपनी
डिक्टोग्राफ प्रोडक्ट्स कंपनी के चेयरमैन ए. ऍम.
एंड्रयूज ने यह जानना चाहा कि आखिर डैन हैल्पिन
नाम का यह आदमी कौन है, जो लंबे समय से काम
कर रही डिक्टोग्राफ कंपनी की सेल इतनी कम करवा
रहा है। उन्होंने हैल्पिन को मिलने के लिए बुलाया। जब
इंटरव्यू ख़त्म हुआ तो हैल्पिन नए सेल्स मेनेजर बन
गए, जिन्हें एकाउंटिंग डिवीजन का चार्ज दे दिया गया
था।
फिर यह देखने के लिए कि जवान हैल्पिन किस मिट्टी
के बने हैं, मिस्टर एंड्रयूज तीन महीने के लिए फ्लोरिडा
चले गए और हैल्पिन को उनके हाल पर छोड़ दिया
चाहे वह डूबे या मरे। लेकिन वो डूबे नहीं। न्यूट की
भावना “सारी दुनिया उगते हुए सूरज को सलाम करती
है, डूबते हुए सूरज को कोई देखता भी नहीं” ने उन्हें

भावना “सारी दुनिया उगते हुए सूरज को सलाम करती
है, डूबते हुए सूरज को कोई देखता भी नहीं” ने उन्हें
इंस्पायर किया। उन्होंने अपने काम को इतने बढ़िया ढंग
से किया कि वह अपनी कंपनी के वाईस- प्रेजिडेंट चुन
लिए गए। यह एक ऐसा पोस्ट था, जिसे
दस साल की वफ़ादारी और मेहनत के बाद हासिल
करके गर्व महसूस करते थे। हैल्पिन को यह पोस्ट छह
महीने से भी कम समय में मिल गया था।
ज़्यादातर लोग
इस पूरी फिलॉस्फी में मैं इस पॉइंट पर जोर देने की
कोशिश कर रहा हूँ कि अगर हम चाहे तो हम उन
सिचुएशन्स को कंट्रोल करने के काबिल है, जिनके द्वारा
हम ऊँचे पोस्ट पर पहुँचते है या नीचे ही बने रहते है।
मैं इस बात पर जोर देने की कोशिश कर रहा हूँ कि
सक्सेस और फेलियर दोनों ही बहुत हद तक आदत
का रिजल्ट है। मुझे जरा भी डाउट नहीं है कि अमेरिका
के महान फुटबाल कोच के साथ करीबी रूप से जुड़े
रहने के कारण डैन हैल्पिन के मन में बेस्ट बनने की
स्ट्रोंग इच्छा थी, जिसने नोट्रे डेम फुटबॉल टीम को वर्ल्ड
फ़ेमस बनाया। यह सच है कि हीरो को फॉलो करना
एक बहुत अच्छा विचार है बशर्ते आप विनर को फॉलो
करें।
फेलियर और सक्सेस दोनों ही सिचुएशन में बिजनस
पार्टनर इम्पोर्टेन्ट होते है, इस प्रिंसिप्ल में मेरा विश्वास
तब सही साबित हुआ, जब मेरा बेटे ब्लेयर डैन हैल्पिन

पालपर जार सपतत पाना है। पुएरान मानत
पार्टनर इम्पोर्टेन्ट होते है, इस प्रिंसिप्ल में मेरा विश्वास
तब सही साबित हुआ, जब मेरा बेटे ब्लेयर डैन हैल्पिन
के साथ एक जॉब पोजीशन के बारे में चर्चा कर रहा
था। Competitor कंपनी उन्हें जितनी सैलरी देती,
मिस्टर हैल्पिन ने उसके सामने शुरू में उससे आधी
सैलरी का ऑफर रखा। मैंने अपने बेटे पर पिता की
हैसियत से इमोशनल प्रेशर डाला और उसे राजी कर
लिया कि वह मिस्टर हैल्पिन के साथ काम करे। मैंने
ऐसा इसलिए किया क्योंकि मेरा श्वास है कि ऐसे
आदमी के साथ करीबी संबंध बनाना एक अनमोल
एक्सपीरियंस है, जो परिस्थितियों के साथ कभी
समझौता नहीं करता। इस फ़ायदे को पैसे से नहीं तौला
जा सकता है।
अपने स्किल को बढ़ाकर ऊँचाईयों तक पहुँचना सिर्फ
बिज़नेस करने वाले लोगो तक ही सीमित नहीं है।
माइकल जोर्डन ने हर कदम बहुत मेहनत की जिसकी
वजह से वे अपने युग के सबसे महान एथलीट्स में
से एक बने। उनमें जीतने का पक्का इरादा था और
खुद को शेप में रखने और अपना बेस्ट खेलने के लिए
बेशुमार विल पॉवर थी। वह हर दिन अपने स्टैण्डर्ड को
ऊँचा करने और अपने रिकॉर्ड को सुधारने के लिए जैम
कर प्रैक्टिस करने में लगे हुए थे।
जोर्डन ने बचपन में ही यह फैक्ट सीख लिया था। हाई
स्कूल में उन्हें टीम से निकाल दिया गया था, पर उनकी
टीम में वापस लौटने की dedication ने उन्हें ज़्यादा

स्कूल
में उन्हें टीम से निकाल दिया गया था, पर उनकी
टीम में वापस लौटने की dedication ने उन्हें ज़्यादा
प्रैक्टिस करने के लिए इंस्पायर किया जो वे आज भी
फॉलो करते है। वे हर कदम को चुनौती की तरह लेते
है और हर नए साल का उम्मीदों के साथ स्वागत करते
है।
गेम से कुछ साल दूर रहने के बाद जब उन्होंने बास्केट
बॉल में वापसी की तो उनके क्रिटिक्स ने कहना शुरू
कर दिया कि उनका शिखर का वक्त जा चुका है, अब
वे धीले पड़ गए है और कोई भी चैंपियनशिप जीत नहीं
सकते। उन्होंने इस बात को चुनौती की तरह लिया।
वे और ज़्यादा मेहनत करने लगे, हमेशा से भी ज़्यादा।
उन्होंने पर्सनल ट्रेनर के साथ एक साल का ट्रेनिंग
प्रोग्राम प्लान किया। अपने जिम में ज़्यादा मेहनत करने
लगे। उन्होंने देखा कि आप जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं
वैसे-वैसे बॉडी के symptom आपको बताने लगते
है कि बॉडी को किस तरह शेप में लाया जा सकता है,
जिससे चैंपियनशिप लेवल पर लगातार खेला जा सके।
इसके रिजल्ट बहुत बढ़िया निकले। जॉर्डन ने अपनी
टीम को 1996 और 1997 के चैंपियनशिप में जीत
दिलाई और खुद दोनों ही साल मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर
का अवार्ड भी ले गए।
माइकल जॉर्डन की लगन और ज़िद हमें यह सिखाती
है कि इसी तरह समर्पित होकर अपने उम्र और अपने

माइकल जॉर्डन की लगन और ज़िद हमें यह सिखाती
है कि इसी तरह समर्पित होकर अपने उम्र और अपने
क्रिटिक्स से आगे बढ़ा जा सकता है। कमिटमेंट सिर्फ
पहला कदम है, इसके बाद हार्ड वर्क, फिजिकल और
मेंटल एक्सरसाइज भी बहुत जरुरी है, जो आपको
शिखर पर पहुँचा सकता है।
नीचे से शुरू करना ठीक नहीं है। किसी भी आदमी के
लिए नीचे की जगह बोरिंग, डरावनी और बिना प्रॉफिट
की जगह होती है। इसलिए मैंने इस बारे में इतने डिटेल
से बताया है कि अगर सही प्लान बनाया जाए तो नीचे
से शुरुआत करने से किस तरह रोका जा सकता है।
जिस औरत ने अपने बेटे के लिए पर्सनल सर्विस
सेल्स प्लान बनाया था, उन्हें देश भर से लोगो के यह
request मिले कि वह उनके लिए भी इसी तरह के
प्लान बना दे। ये सभी लोग उनकी मदद चाहते थे ताकि
उन्हें अपनी पर्सनल जॉब के बदले ज़्यादा पैसा हासिल
हो सके।
हमें यह नहीं मान लेना चाहिए कि उस औरत का प्लान
सिर्फ चतुराई भरी सेल्समैनशिप थी, जिसके द्वारा वह
उन लोगो को उन्ही के सर्विस के बदले में ज़्यादा पैसा
दिलवाती थी, जिन्हें वे पहले कम दामो में बेच रहे थे।
वह पर्सनल सर्विस के सेलर के अलावा उनके कस्टमर
का भी ध्यान रखती थी और इसलिए वह इस तरह का
प्लान बनाती थी, जिससे employer को उस एक्स्ट्रा

पालपर जार सपतत पाना है। पुएरान मानत
पार्टनर इम्पोर्टेन्ट होते है, इस प्रिंसिप्ल में मेरा विश्वास
तब सही साबित हुआ, जब मेरा बेटे ब्लेयर डैन हैल्पिन
के साथ एक जॉब पोजीशन के बारे में चर्चा कर रहा
था। Competitor कंपनी उन्हें जितनी सैलरी देती,
मिस्टर हैल्पिन ने उसके सामने शुरू में उससे आधी
सैलरी का ऑफर रखा। मैंने अपने बेटे पर पिता की
हैसियत से इमोशनल प्रेशर डाला और उसे राजी कर
लिया कि वह मिस्टर हैल्पिन के साथ काम करे। मैंने
ऐसा इसलिए किया क्योंकि मेरा श्वास है कि ऐसे
आदमी के साथ करीबी संबंध बनाना एक अनमोल
एक्सपीरियंस है, जो परिस्थितियों के साथ कभी
समझौता नहीं करता। इस फ़ायदे को पैसे से नहीं तौला
जा सकता है।
अपने स्किल को बढ़ाकर ऊँचाईयों तक पहुँचना सिर्फ
बिज़नेस करने वाले लोगो तक ही सीमित नहीं है।
माइकल जोर्डन ने हर कदम बहुत मेहनत की जिसकी
वजह से वे अपने युग के सबसे महान एथलीट्स में
से एक बने। उनमें जीतने का पक्का इरादा था और
खुद को शेप में रखने और अपना बेस्ट खेलने के लिए
बेशुमार विल पॉवर थी। वह हर दिन अपने स्टैण्डर्ड को
ऊँचा करने और अपने रिकॉर्ड को सुधारने के लिए जैम
कर प्रैक्टिस करने में लगे हुए थे।
जोर्डन ने बचपन में ही यह फैक्ट सीख लिया था। हाई
स्कूल में उन्हें टीम से निकाल दिया गया था, पर उनकी
टीम में वापस लौटने की dedication ने उन्हें ज़्यादा

II ला जाना 04 LIN
का भी ध्यान रखती थी और इसलिए वह इस तरह का
प्लान बनाती थी, जिससे employer को उस एक्स्ट्रा
पैसे के बदले में पूरी वैल्यू मिले।
अगर आपके पास इमेजिनेशन है और अगर आप
अपनी पर्सनल service के बदले में ज़्यादा फ़ायदे
का option खोज रहे है तो यह सुझाव आपके लिए
inspiring साबित हो सकता है। इस विचार से इतनी
ज़्यादा इनकम होना संभव है, जो एवरेज डॉक्टर,
वकील या इंजीनियर को भी नहीं होती है।
दमदार विचारों की कोई exact कीमत नहीं होती।
सारे विचारों के पीछे एक्सपर्ट नॉलेज होती है। दुर्भाग्य
से, जिन लोगो के पास ज़्यादा पैसा नहीं होता, उनके
लिए विचारों की तुलना में स्पेशलाइज्ड नॉलेज का
महत्त्व ज़्यादा होता है और ज़्यादा आसानी से हासिल
किया जा सकता है। इस सच्चाई के कारण उस
आदमी की हमेशा डिमांड रहती है और उस आदमी
के सामने अथाह मौके होते है। एबिलिटी का मतलब
है इमेजिनेशन, वह गुण जो स्पेशलाइज्ड नॉलेज को
विचारों से जोड़ता है, एक ऐसे सिस्टेमेटिक प्लान के
रूप में जिसका गोल होता है, ज़्यादा पैसा देना।
अगर आपमें इमेजिनेशन है तो यह चैप्टर आपको एक
आईडिया दे सकता है, जिससे आपको वह दौलत
मिलनी शुरू हो जाएगी, जिसकी आप इच्छा रखते है।

ii। पाण०॥ पर पुराना INS
inspiring साबित हो सकता है। इस विचार से इतनी
ज़्यादा इनकम होना संभव है, जो एवरेज डॉक्टर,
वकील या इंजीनियर को भी नहीं होती है।
दमदार विचारों की कोई exact कीमत नहीं होती।
सारे विचारों के पीछे एक्सपर्ट नॉलेज होती है। दुर्भाग्य
से, जिन लोगो के पास ज़्यादा पैसा नहीं होता, उनके
लिए विचारों की तुलना में स्पेशलाइज्ड नॉलेज का
महत्त्व ज़्यादा होता है और ज़्यादा आसानी से हासिल
किया जा सकता है। इस सच्चाई के कारण उस
आदमी की हमेशा डिमांड रहती है और उस आदमी
के सामने अथाह मौके होते है। एबिलिटी का मतलब
है इमेजिनेशन, वह गुण जो स्पेशलाइज्ड नॉलेज को
विचारों से जोड़ता है, एक ऐसे सिस्टेमेटिक प्लान के
रूप में जिसका गोल होता है, ज़्यादा पैसा देना।
अगर आपमें इमेजिनेशन है तो यह चैप्टर आपको एक
आईडिया दे सकता है, जिससे आपको वह दौलत
मिलनी शुरू हो जाएगी, जिसकी आप इच्छा रखते है।
याद रखे, विचार बहुत ही इम्पोर्टेन्ट है। स्पेशलाइज्ड
नॉलेज आपको कहीं पर भी मिल सकती है यानी किसी
भी चौराहे या गली में।

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6. इमेजिनेशन
मन का वर्कशॉप
अमीर बनने की ओर पाँचवा कदम
इमेजिनेशन असल में वह वर्कशॉप है, जहाँ इनसान
द्वारा बनाए गए सभी प्लान सही आकार में ढलते है।
यहाँ मन की इमेजिनेशन पॉवर द्वारा इमोशन या इच्छा
को आकार, रूप और फंक्शन दिया जाता है।
यह कहा गया है कि इनसान जिस चीज की इमेजिनेशन
कर सकता है, उसे हकीकत का रूप भी दे सकता है।
अपनी इमेजिनेशन की मदद से इनसान ने पिछले
पचास सालों के दौरान नेचर की शक्तियों को जितना
खोजा है और उनका जितना इस्तेमाल किया है उतना
इससे पहले मानव जाति के पूरे इतिहास में नहीं हुआ।
उन्होंने हवा को पूरी तरह से जीत लिया और उड़ने
के मामले में पक्षियों को भी पीछे छोड़ दिया। उन्होंने
करोड़ो किलोमीटर दूर सूरज का भार मालूम कर लिया
और इमेजिनेशन की मदद से यह पता कर लिया कि वो
किन elements की मदद से बना है। उन्होंने गाड़ियों
की स्पीड बढ़ा ली और अब वह छह सौ मील per
hour से भी ज्यादा की स्पीड से यात्रा कर सकता है।

की स्पीड बढ़ा ली और अब वह छह सौ मील per
hour से भी ज़्यादा की स्पीड से यात्रा कर सकता है।
लॉजिक के पॉइंट से इनसान की इकलौती सीमा उसकी
इमेजिनेशन के ग्रोथ और इस्तेमाल को लेकर है। वह
अपनी इमेजिनेशन की पॉवर को इस्तेमाल करने के
शिखर पर अब भी नहीं पहुंचा है। उसने तो सिर्फ यह
खोज की है कि उनके पास इमेजिनेशन है और उसने
बहुत ही ओरिजिनल तरीके से इसका इस्तेमाल करना
शुरू कर दिया है।
इमेजिनेशन के दो रूप
इमेजिनेशन दो तरीके से काम करती है। एक तरीका
है ‘सिंथेटिक इमेजिनेशन ‘ और दूसरा है ‘क्रिएटिव
इमेजिनेशन’
सिंथेटिक इमेजिनेशन : सिंथेटिक इमेजिनेशन की पॉवर
के द्वारा इनसान पुराने कांसेप्ट, आईडिया और plans
को नए कॉम्बिनेशन में organize कर सकता है।
इस शक्ति से कुछ नहीं रचा जाता बल्कि यह सिर्फ
एक्सपीरियंस, एजुकेशन और ऑब्जरवेशन की चीज़
के हिसाब से काम करती है। इन्वेंशन करने वाले लोग
ज़्यादातर इसी शक्ति का इस्तेमाल करते है। अगर कोई
सिंथेटिक इमेजिनेशन द्वारा अपनी समस्या को नहीं
सुलझा पाता तो वह क्रिएटिव इमेजिनेशन की पॉवर का
सहारा लेता है।

क्रिएटिव इमेजिनेशन : क्रिएटिव इमेजिनेशन के द्वारा
इनसान का सीमित मन अनलिमिटेड पॉवर से सीधे
कांटेक्ट करता है। यह वह शक्ति है, जिसके द्वारा
इंस्पिरेशन और आभास हासिल किए जाते है। इस
शक्ति के द्वारा सभी बेसिक या नए विचार इनसान को
दिए जाते है। इसी शक्ति के द्वारा कोई इनसान दूसरे
इनसानो के सब कॉन्शियस माइंड के साथ बातचीत कर
सकता है।
क्रिएटिव इमेजिनेशन अपने आप काम करती है,
यह शक्ति तभी काम करती है, जब लॉजिकल यानी
conscious माइंड बहुत स्पीड से काम कर रहा हो,
एग्ज़ाम्पल के तौर पर conscious माइंड स्ट्रोंग इच्छा
के भाव के द्वारा इंस्पायर होता है।
क्रिएटिव इमेजिनेशन को इस्तेमाल के द्वारा जितना
डेवलप किया जाता है, यह उतनी ही attentive
रहती है।
बिजनस, इंडस्ट्री, फाइनेंस के महान लीडर और महान
कलाकार, म्यूजिशियन, कवि और ऑथर महान
इसलिए बनते है क्योंकि उन्होंने क्रिएटिव इमेजिनेशन
की एबिलिटी को डेवलप कर लिया है।
इमेजिनेशन की सिंथेटिक और क्रिएटिव शक्तियाँ
इस्तेमाल के द्वारा ज़्यादा पावरफुल बन जाती है, ठीक
उसी तरह जिस तरह बॉडी का कोईmuscle या
ऑर्गन इस्तेमाल के द्वारा ज़्यादा स्ट्रोंग बन जाता है।

उसी तरह जिस तरह बॉडी का कोई muscle या
ऑर्गन इस्तेमाल के द्वारा ज़्यादा स्ट्रोंग बन जाता है।
इच्छा सिर्फ एक विचार है, एक इमोशन है। यह धुंधली
और टेम्पररी है। यह ख़याल और impractical है
और इसलिए इसका तब तक कोई वैल्यू नहीं है, जब
तक कि इसे फिजिकल रूप में नहीं बदल दिया जाता।
क्योंकि इच्छा के इमोशन को पैसा में बदलने के प्रोसेस
में सिंथेटिक इमेजिनेशन का इस्तेमाल ज़्यादातर किया
जाएगा इसलिए आपको इस फैक्ट को अपने दिमाग
में रखना चाहिए कि आपको ऐसी सिचुएशन का
सामना करना पड़ सकता है, जिनमे आपको क्रिएटिव
इमेजिनेशन के इस्तेमाल की भी ज़रुरत हो।
हो सकता है कि इस्तेमाल की कमी के कारण आपकी
इमेजिनेशन पॉवर थोड़ी कमजोर हो गई हो। इसे
इस्तेमाल के द्वारा फिर से जगाया जा सकता है और
पावरफुल बनाया जा सकता है। यह शक्ति कभी
नहीं मरती, हालाँकि यह संभव है कि इस्तेमाल की
कमी के कारण यह सोई हुई हो। फिलहाल सिंथेटिक
इमेजिनेशन के डेवलपमेंट पर अपना ध्यान फोकस करे
क्योंकि यही वह शक्ति है, जिसके इस्तेमाल के द्वारा
आप अपनी इच्छा को पैसों में बदल पाएँगे।
इसके लिए आपको प्लान बनाना होगा। यह प्लान
इमेजिनेशन की मदद से बनाई जानी चाहिए और
ख़ासकर सिंथेटिक इमेजिनेशन के ज़रिए ऐसा किया

इसके लिए आपको प्लान बनाना होगा। यह प्लान
इमेजिनेशन की मदद से बनाई जानी चाहिए और
ख़ासकर सिंथेटिक इमेजिनेशन के ज़रिए ऐसा किया
जाना चाहिए।
पूरी बुक को पढ़ लीजिए और फिर इस चैप्टर पर आएँ
और तुरंत अपनी इमेजिनेशन को प्लान बनाने के काम
पर लगा दे, जिसके द्वारा आपकी इच्छा पैसा में बदल
सके। इन सब के लिए इंस्ट्रक्शन दिया गया है. जो भी
इंस्ट्रक्शन आपकी ज़रुरत के हिसाब से बेस्ट लगे
उसे फॉलो करे और अगर आपने पहले से ही ऐसा न
किया हो तो आप अपने प्लान को लिख ले। पिछले
लाइन को एक बार और पढ़े। इसे जोर से पढ़े, धीरे धीरे
से और जब आप ऐसा करे तो याद रखे कि जिस पल
आप अपनी इच्छा के स्टेटमेंट या उसे हासिल करने के
प्लान को लिख लेते है, उसी वक्त आप दरअसल पहला
कदम उठा लेते है, जिसकी मदद से आप अंत में अपने
विचार को इसके फिजिकल रूप में बदल पाएँगे।
धरती जहाँ आप रहते है, आप और हर फिजिकल
चीज़ डेवलपमेंट या evolution से आए बदलाव
का रिजल्ट है, जिसके द्वारा matter के छोटे या
माइक्रोस्कोपिक पार्टिकल्स एक सिस्टेमेटिक रूप में
organize किए गए है। यह धरती, आपके शरीर
के कई बिलियन सेल्स का हर मॉलिक्यूल एनर्जी के
आईडिया से शरू हआ था, जिसका कोई फिजिकल

के कई बिलियन सेल्स का हर मॉलिक्यूल एनर्जी के
आईडिया से शुरू हुआ था, जिसका कोई फिजिकल
फॉर्म नहीं होता।
इच्छा एक थॉट इम्पल्स है। इम्पल्स यानी एक फ़ोर्स
या पुश. थॉट इम्पल्स एनर्जी का रूप है। जब आप
पैसा कमाने के थॉट इम्पल्स “इच्छा” से शुरू करते है
तो आप अपनी सर्विस में उन्ही शक्तियों का इस्तेमाल
करते है, जिनके द्वारा नेचर ने इस धरती की रचना की
है और इस यूनिवर्स के हर substance और शेप की
रचना की थी, जिसमे वह शरीर और ब्रेन भी शामिल है,
जिसमे थॉट्स इम्पल्स काम करते है।
आप उन रूल्स की मदद से अमीर बन सकते है,
जो कभी बदलते नहीं है। लेकिन पहले आपको इन
रूल्स को जानना होगा और उनका इस्तेमाल करना
सीखना चाहिए। ऑथर की यह उम्मीद है कि अगर
इन प्रिंसिपल्स को बार-बार दोहराया जाए और इनका
हर संभव एंगल से describe किया जाए तो शायद
आपके सामने वह रहस्य खुल जाएगा, जिसके द्वारा ढेर
सारी दौलत इकट्ठी की जाती है.
पूरी यूनिवर्स में दो elements हैं – matter और
एनर्जी. नेचर इसी धरती पर इसे दिखाती है, जिसमे हम
रहते है। हमारी धरती, सितारे, प्लैनेट्स, हमारे ऊपर
और चारो तरफ मौजूद एलेमेंट्स, घास का हर तिनका
और हमारी आँखों को दिखाई देने वाला हर जीवित

रहते है। हमारी धरती, सितारे, प्लैनेट्स, हमारे ऊपर
और चारो तरफ मौजूद एलेमेंट्स, घास का हर तिनका
और हमारी आँखों को दिखाई देने वाला हर जीवित
जीव इस रहस्य को उजागर करते है।
आगे आने वाले प्रिंसिप्ल इमेजिनेशन की समझ का
रास्ता खोल देंगे।
विचार अमीरी का शुरुआती पॉइंट है। विचार
इमेजिनेशन द्वारा पैदा होते है। आइए हम कुछ जाने
माने आइडियाज को टेस्ट करे, जिनसे बहुत सारी दौलत
कमाई गई है। ऐसी उम्मीद है कि इन examples से
आपको उस तरीके के बारे में क्लियर जानकारी मिल
जाएगी, जिसके द्वारा इमेजिनेशन का इस्तेमाल अमीर
बनने में किया जा सकता है।
काफी साल पहले एक बूढ़े देहाती डॉक्टर शहर आए,
उन्होंने अपना घोडा बाँधा और धीरे से एक दवाई की
दुकान में पिछले दरवाजे से घुस गए और नौजवान
क्लर्क से बातें करने लगे।
एक घंटे तक बूढ़े डॉक्टर और क्लर्क धीरे-धीरे बाते
करते रहे। फिर डॉक्टर बाहर गए। वह अपनी बग्घी के
पास पहुंचे और उन्होंने उसमे से एक बड़ी सी पुरानी
केतली, एक बड़ा लकड़ी का पैडल निकाला (जिसका
इस्तेमाल केतली के सामान को हिलाने में किया जाता
था) और उन्होंने इन चीजों को स्टोर के पिछवाड़े में रख

इस्तेमाल केतली के सामान को हिलाने में किया जाता
था) और उन्होंने इन चीजों को स्टोर के पिछवाड़े में रख
दिया।
क्लर्क ने केतली की जाँच की, अपनी अंदर की जेब
में हाथ डालकर नोट निकाले और डॉक्टर को दे दिए।
क्लर्क ने डॉक्टर को कुल 500 डॉलर दिए थे, जो
उसकी पूरी saving थी।
डॉक्टर ने क्लर्क को एक छोटा सा कागज का टुकड़ा
दिया, जिस पर एक सीक्रेट फार्मूला लिखा हुआ था।
उस छोटे से कागज पर लिखे हुए शब्द किसी राजा के
खजाने के बराबर कीमती थे। यह जादुई शब्द केतली
के उबलना शुरू करने के लिए ज़रूरी थे, लेकिन न तो
डॉक्टर और न ही क्लर्क यह जानते थे कि इस केतली
से कितना ज़्यादा पैसा बरसेगा।
बूढ़ा डॉक्टर केतली को पाँच सौ डॉलर में बेचकर बहुत
खुश था। क्लर्क अपने पूरे जीवन की बचत को एक
कागज के टुकड़े और एक पुरानी केतली के लिए दाँव
पर लगाकर बहुत रिस्क ले रहा था! उसने सपने में
भी नहीं सोचा था कि उसके इन्वेस्टमेंट से केतली जब
उबलेगी तो उसमे से पिघला हुआ सोना बहेगा, जो एक
दिन अलादीन के चिराग के चमत्कार को भी पीछे छोड़
देगा।
क्लर्क ने दरअसल जो खरीदा था वह एक आईडिया
था।

क्लर्क ने दरअसल जो खरीदा था वह एक आईडिया
था।
पुरानी केतली, लकड़ी का पैडल और कागज पर लिखा
हुआ एक सीक्रेट मैसेज तो साथ में मिले थे।
केतली का चमत्कार तब होना शुरू हुआ, जब इसके
नए मालिक ने सीक्रेट इंस्ट्रक्शन्स के साथ एक ऐसा
element मिलाया, जिसके बारे में डॉक्टर कुछ नहीं
जानता था।
सोचकर देखिए क्या आप बता सकते है कि वह क्या
था, जो उस लड़के ने सीक्रेट मैसेज के साथ मिलाया
था, जिसकी वजह से केतली से सोना बरसने लगा?
यहाँ पर आपको एक ऐसी सच्ची कहानी बताई जा
रही है, जो कल्पना से भी ज़्यादा हैरान करने वाली है,
facts की कहानी, जो एक आईडिया के रूप में शुरू
हुई थी।
आइए हम सोने के उस बड़े से ढेर की तरफ देखे,
जो इस आईडिया से पैदा हुआ था। इसने बहुत पैसा
कमाया है और आज भी यह दुनिया भर में उन लोगो
को बहुत पैसा कमाकर दे रही है, जो केतली के सामान
को करोड़ो लोगो तक पहुँचा रहे है।
पुरानी केतली आज दुनिया में चीनी के सबसे बड़े
consumers में से एक है और इस वजह से हजारो
लोगो को गन्ना उगाने का, चीनी बनाने का और बेचने

consumers में से एक है और इस वजह से हजारो
लोगो को गन्ना उगाने का, चीनी बनाने का और बेचने
का काम दे रही है।
पुरानी केतली हर साल करोड़ो काँच की बोलतो को
काम में लेती है, जिससे काँच का काम करने वाले बहुत
से लोगो को रोजगार मिलता है।
पुरानी केतली पूरे देश में क्लर्क, स्टेनोग्राफर्स,
कॉपीराइटर्स और एडवरटाइजिंग specialist की
फौज को रोजगार देती है। इसने उन दर्जनों कलाकारों
को दौलत और शोहरत दिलाई है, जिन्होंने इस प्रोडक्ट
का advertisement करते हुए बेहतरीन पिक्चर
बनाई है।
पुरानी केतली ने एक छोटे से साउथ के शहर को
साउथ का बिजनस कैपिटल बना दिया है, जहाँ यह
डायरेक्टली या indirect तरीके से शहर के हर
बिजनस और हर नागरिक को फ़ायदा पहुँचाती है।
इस आईडिया का इफ़ेक्ट अब दुनिया के हर देश को
फ़ायदा पहुंचाता है और इसे छूने वाले हर आदमी को
सोने की बहती हुई धारा में से हिस्सा मिलता है।
केतली से बरसते सोने ने साउथ के एक फ़ेमस कॉलेज
को बनाया, जहाँ हजारों लड़के और लडकियां सक्सेस
के लिए कंपल्सरी ट्रेनिंग हासिल करते है।
शारीतल की रागनी केतली तोल सके तो राट

पुरानी केतली पूरे देश में क्लर्क, स्टेनोग्राफर्स,
कॉपीराइटर्स और एडवरटाइजिंग specialist की
फौज को रोजगार देती है। इसने उन दर्जनों कलाकारों
को दौलत और शोहरत दिलाई है, जिन्होंने इस प्रोडक्ट
का advertisement करते हुए बेहतरीन पिक्चर
बनाई है।
पुरानी केतली ने एक छोटे से साउथ के शहर को
साउथ का बिजनस कैपिटल बना दिया है, जहाँ यह
डायरेक्टली या indirect तरीके से शहर के हर
बिजनस और हर नागरिक को फ़ायदा पहुँचाती है।
इस आईडिया का इफ़ेक्ट अब दुनिया के हर देश को
फ़ायदा पहुंचाता है और इसे छूने वाले हर आदमी को
सोने की बहती हुई धारा में से हिस्सा मिलता है।
केतली से बरसते सोने ने साउथ के एक फ़ेमस कॉलेज
को बनाया, जहाँ हजारों लड़के और लडकियां सक्सेस
के लिए कंपल्सरी ट्रेनिंग हासिल करते है।
अगर पीतल की यह पुरानी केतली बोल सके तो यह
हर भाषा में romance की रोमांचक कहानियाँ
सुनाएगी-:
-:प्यार का romance, बिजनस का
romance,
प्रोफेशनल लड़के और लड़कियों का
romance, जो इसके द्वारा हर रोज़ इंस्पायर होते है।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
ऑथर कम-से-कम एक ऐसे romanc के बारे में पूरे
यकीन से कह सकते हैं क्योंकि वह इसका एक हिस्सा
रहा है और यह उस जगह से ज्यादा दूर शुरू नहीं हुआ
था जहाँ से क्लर्क ने पुरानी केतली खरीदी थी। यहाँ पर
ऑथर अपनी पत्नी से मिले थे और उन्होंने ही ऑथर
को इस जादुई केतली के बारे में पहली बार बताया था।
उस समय भी वे इस केतली में उबलने वाला ड्रिंक पी
रहे थे, जब ऑथर ने उनसे पूछा था, ‘क्या तुम मुझसे
शादी करोगी!
अब जब आप जानते हैं कि उस बोतल के अंदर
एक वर्ल्ड फेमस ड्रिंक था, वो ड्रिंक उसके लिए एक
stimulus का कर रहा था जो उसे नशे के बिना थॉट
की stimulation दे रहा था और इस तरह यह मन
को रिफ्रेश करने का काम कर रहा था, जो एक ऑथर
के लिए अपना बेस्ट काम करने के लिए बहुत ज़रूरी
होता है।
आप कोई भी हो, आप कहीं भी रहते हो, आप कोई
भी काम करते हो, फ्यूचर में इतना याद रखे कि जब
आप कोका कोला शब्द सुने तो आप यह याद कर
लें कि दौलत और इन्फ्लुएंस का यह empire
एक आईडिया से शरू हआ था और क्लर्क-Asa

लें कि दौलत और इन्फ्लुएंस का यह empire
एक आईडिया से शुरू हुआ था और क्लर्क-Asa
Candler ने उस सीक्रेट फॉर्मूले के साथ, जो सीक्रेट
एलिमेंट मिलाया था वह था—“इमेजिनेशन”।
ठहरिए और इसके बारे में एक पल सोचिए।
यह भी याद रखे कि अमीरी के जो स्टेप्स इस बुक में
बताए गए है उन्हीं के सहारे कोका कोला का इन्फ्लुएंस
दुनिया के हर शहर, कस्बे, गाँव और चौराहों पर फैला
है और आपके ब्रेन में पैदा होने वाला हर विचार, जो
कोकाकोला की तरह दमदार और promising
हो, दुनिया भर की प्यास बुझाने वाले इस रिकॉर्ड की
बराबरी कर सकता है।
अगर मुझे दस लाख डॉलर मिल जाए तो मैं क्या
करूँगा –
यह कहानी उस पुरानी कहावत की सच्चाई साबित
करती है “जहाँ चाह वहाँ राह।’ यह मुझे प्रिय
educationist और धर्म गुरु स्वर्गीय फ्रैंक डब्ल्यू
गुंसालस (Frank W.cunsaulus) ने सुनाई थी,
जिन्होंने साउथ शिकागो के स्टॉकयार्ड एरिया में धर्म गुरु
का अपना करियर शुरू किया था।
जब गुंसालस कॉलेज में पढ़ते थे, तो उन्हें हमारे
एजुकेशन सिस्टम में कई दोष नजर आए। उन्हें विश्वास
था कि अगर वह कॉलेज के हेड बन गए तो वह इन
कमियों को दूर कर सकते है।

उन्होंने अपने मन में यह ठान लिया कि वह एक
नया कॉलेज बनाएंगे, जिसमें वह अपने विचारों को
आज़माएंगे और एजुकेशन के ट्रेडिशनल तरीके से
हटकर कुछ करेंगे।
उन्हें अपने इस प्रोजेक्ट के लिए दस लाख डॉलर की
जरुरत थी। वह इतनी बड़ी रकम कहाँ से जुटा पाएँगे?
यही सवाल उस ambitious नौजवान धर्म गुरु के
विचार में हर पल कौंधता रहता था।
लेकिन वह इस दिशा में कोई प्रोग्रेस नहीं कर पा रहे थे।
हर रात वह अपने बिस्तर पर इस विचार के साथ सोते
और हर सुबह इसी विचार के साथ नींद से जागते। वह
जहाँ भी जाते, यह विचार उसके साथ-साथ जाता था।
वह इसे लगातार अपने दिमाग में बैठाते रहे , जब तक
कि यह विचार एक जुनून में नहीं बदल गया।
,
फिलोसोफर और धर्म गुरु होने के कारण डॉ. गुंसालस
यह बात समझते थे, जो जीवन में कामयाब होने वाले
सभी लोग समझते है कि एक पक्का गोल और उसकी
clarity ही वह शुरुआती पॉइंट है जहाँ से इनसान को
शरुआत करनी चाहिए। वे यह भी जानते थे कि गोल
decide हो जाने के बाद वे जिंदा हो जाते है, उनमे
जीवन और शक्ति का मूवमेंट होना शुरू हो जाता है।
खासकर तब जब उनके पीछे इस गोल को इसके
फिजिकल रूप में बदलने की एक धधकती हुई इच्छा

खासकर तब जब उनके पीछे इस गोल को इसके
फिजिकल रूप में बदलने की एक धधकती हुई इच्छा
हो।
वे इन सारी महान सच्चाईयों को जानते थे, लेकिन वे
यह नहीं जानते थे कि उनके पास दस लाख डॉलर
कहाँ से आएँगे। आम तौर पर यही होता कि वे हार मान
लेते और यह कहकर कोशिश करना छोड़ देते ‘ मेरा
विचार तो अच्छा है, लेकिन मैं इस बारे में कुछ नहीं कर
सकता क्योंकि मैं इसके लिए दस लाख डॉलर नहीं जुटा
सकता। ज़्यादातर लोगो ने बिल्कुल यही कहा होता है
लेकिन डॉ. गुंसालस ने ऐसा नहीं कहा।
उन्होंने जो कहा और उन्होंने जो किया वह इतना ख़ास
है कि मैं अब उन्हें खुद ही अपनी बात कहने देता हूँ।
“saturday की एक दोपहर मैं अपने कमरे में बैठा
सोच रहा था कि अपने प्लान को कामयाब बनाने के
लिए मैं किस तरीके से दौलत जुटाऊँगा। लगभग दो
सालो तक मैं सोचता रहा लेकिन मैंने सोचने के अलावा
कुछ नहीं किया था।’
“अब कर्म करने का समय आ चुका था!
“मैंने तभी अपना मन बना लिया कि मैं एक हफ्ते में
दस लाख डॉलर की रकम जुटा लूँगा। कैसे? मैं यह
रकम decide किए हुए डेडलाइन में जुटाऊँगा, मुझे
विश्वास दिलाने वाली एक अजीब सी राहत महसूस हुई,
.A. २

दस लाख डॉलर की रकम जुटा लूँगा। कैसे? मैं यह
रकम decide किए हुए डेडलाइन में जुटाऊँगा, मुझे
विश्वास दिलाने वाली एक अजीब सी राहत महसूस हुई,
जो मुझे इससे पहले कभी महसूस नहीं हुई थी। मेरे
अंदर जैसे कोई कह रहा था’ तुम इस फैसले पर बहुत
पहले क्यों नहीं पहुँचे? यह दौलत लंबे समय से तुम्हारा
इंतजार कर रही है।
“घटनाएँ तेजी से हुई। मैंने न्यूज़पपेर वालों को बुलाया
और कहा कि मैं अगली सुबह एक लेक्चर दूँगा जिसका
टाइटल होगा’, अगर मेरे पास दस लाख डॉलर हो तो मैं
क्या करूँगा?
.
मैं तुरंत लेक्चर तैयार करने में जुट गया, लेकिन मैं
आपको सच बताऊँ यह काम मुश्किल नहीं था क्योंकि
मैं इस लेक्चर को लगभग दो साल से तैयार कर रहा
था।
“आधी रात के काफी पहले मैंने लेक्चर लिखना ख़त्म
कर लिया फ़िर मैं बिस्तर पर गया और कांफिडेंस की
फीलिंग के साथ सोया क्योंकि मैं देख सकता था कि मेरे
पास दस लाख डॉलर मौजूद थे और मैं उसका मालिक
था।
‘अगली सुबह मैं जल्दी उठा, बाथरूम में गया, लेक्चर
को पढ़ा और अपने घुटने टेके और पूछा कि “क्या मेरा
लेक्चर किसी ऐसे आदमी का ध्यान अट्रैक्ट कर सकता
है जो जरूरत के पैसे मो दे सके।

‘अगली सुबह मैं जल्दी उठा, बाथरूम में गया, लेक्चर
को पढ़ा और अपने घुटने टेके और पूछा कि क्या मेरा
लेक्चर किसी ऐसे आदमी का ध्यान अट्रैक्ट कर सकता
है, जो ज़रुरत के पैसे मुझे दे सके।’
“जब मैं प्रार्थना कर रहा था तो मुझे वही विश्वास देने
वाली फीलिंग एक बार फिर हुई कि दौलत आने ही
वाली है। मैं इतना excited था कि मैं लेक्चर को साथ
ले जाना भूल गया और मुझे यह बात तब तक पता नहीं
चली जब तक कि मैं ऑडियंस के सामने खड़ा होकर
लेक्चर शुरू करने के लिए तैयार नहीं हो गया।’
“अब अपने नोट्स लाने का वक्त नहीं था और उन्हें घर
पर भूल आना मेरे लिए वरदान साबित हुआ। नोट्स के
बजाय मेरे सब कॉन्शियस माइंड ने मुझे मेरी जरुरत
की सारी बातें याद दिला दी। जब मैं अपना लेक्चर शुरू
करने के लिए खड़ा हुआ
मैंने अपनी आँखे बंद कर
ली और अपने सपनो के बारे में अपने दिल और आत्मा
से बोला। मैंने भगवान से भी बात की। मैंने बताया कि
अगर यह दौलत मेरे हाथो में रख दी जाए तो मैं दस
लाख डॉलर से क्या कर सकता था। मैंने वह प्लान
डिटेल से बताई, जो मेरे मन में थी। मैंने बताया कि मैं
किस तरह की महान एजुकेशनल institution बनाने
जा रहा हूँ, जहाँ जवान लोग प्रैक्टिकल चीजे करना
सीखेंगे और साथ ही उनके ब्रेन का डेवलपमेंट भी
होगा।’

जब मैंने स्पीच ख़त्म कर लिया और मैं बैठ गया तो
पीछे की तीसरी लाइन से एक आदमी धीमे से अपनी
कुरसी से उठा और मेरी तरफ आगे बढ़। मैं हैरान था
कि वह क्या करने के लिए मेरे पास आ रहा है। वह
स्टेज पर आया, उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया और कहा’
मुझे आपका स्पीच पसंद आया। मुझे विश्वास है कि
आपने जो कहा है वह आप सचमुच कर सकते है,
बशर्ते आपके पास दस लाख डॉलर हो। यह साबित
करने के लिए आपमें और आपके लेक्चर में मुझे
विश्वास है, मैं आपको दस लाख डॉलर दे सकता हूँ
अगर आप कल सुबह मेरे ऑफिस में आ जाए।
मेरा नाम फिलिप डी. आर्मर है।
गुंसालस मिस्टर आर्मर के ऑफिस पहुंचे और उन्हें दस
लाख डॉलर मिल गए। उस दौलत से उन्होंने आर्मर
इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की नींव डाली, जिसे अब
इलिनॉय इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के नाम से जाना
जाता है।
यह दस लाख डॉलर, उनके पास एक विचार के रिजल्ट
के रूप में आए। इस विचार के पीछे एक इच्छा थी
जिसे गुंसालस अपने दिमाग में लगभग दो सालो से
पाल रहे थे।
इस इम्पोर्टेन्ट फैक्ट की तरफ ध्यान दीजिए—जब वह
अपने मन में पक्के फैसले पर पहुँच गए और उन्होंने
इसे हासिल करने की एक क्लियर प्लान पर अमल
—–
47

इस इम्पोर्टेन्ट फैक्ट की तरफ ध्यान दीजिए—जब वह
अपने मन में पक्के फैसले पर पहुंच गए और उन्होंने
इसे हासिल करने की एक क्लियर प्लान पर अमल
करने का फैसला किया, उसके छत्तीस घंटे बाद ही उन्हें
यह दौलत मिल गई।
दस लाख डॉलर के बारे में गुंसालस के unsure
थॉट प्रोसेस और धुंधली उम्मीद के बारे में कुछ नया
या अद्भुत नहीं है। उसके पहले और उसके बाद भी
बहुत से लोगो के मन में इसी तरह के विचार आए
थे। लेकिन उस यादगार शनिवार को जब वह अपने
फ़ैसले पर पहुंचे तो उस फ़ैसले में कुछ अलग और
एक्स्ट्राऑर्डिनरी था, जब उन्होंने डाउट को अलग हटा
दिया और पक्के विश्वास से कहा–‘ मैं एक हफ़्ते में यह
दौलत जुटा लूंगा।’
इससे भी बड़ी बात यह है कि जिस प्रिंसिप्ल ने डॉ.
गुंसालस को दस लाख डॉलर दिलाए थे, वह प्रिंसिप्ल
आज भी जिंदा है। यह प्रिंसिप्ल आपके लिए भी काम
कर सकता है। यह अमिट और अनंत रूल आज भी
उतने ही काम का है, जितना कि यह पहले उस धर्म
गुरु के काम का था, जिसे अपने इरादों में जबरदस्त
कामयाबी मिली थी।
यह सोचे कि आसा कैलेंडर और डॉ. फ्रैंक के बीच में
एक बात समान थी। दोनों ही इस सच को जानते थे कि
परके मकसट और लान की शक्ति के टारा तितारों को

पास’I २|
दस लाख डॉलर के बारे में गुंसालस के unsure
थॉट प्रोसेस और धुंधली उम्मीद के बारे में कुछ नया
या अद्भुत नहीं है। उसके पहले और उसके बाद भी
बहुत से लोगो के मन में इसी तरह के विचार आए
थे। लेकिन उस यादगार शनिवार को जब वह अपने
फ़ैसले पर पहुंचे तो उस फ़ैसले में कुछ अलग और
एक्स्ट्राऑर्डिनरी था, जब उन्होंने डाउट को अलग हटा
दिया और पक्के विश्वास से कहा–‘ मैं एक हफ्ते में यह
दौलत जुटा लूंगा।’
इससे भी बड़ी बात यह है कि जिस प्रिंसिप्ल ने डॉ.
गुंसालस को दस लाख डॉलर दिलाए थे, वह प्रिंसिप्ल
आज भी जिंदा है। यह प्रिंसिप्ल आपके लिए भी काम
कर सकता है। यह अमिट और अनंत रूल आज भी
उतने ही काम का है, जितना कि यह पहले उस धर्म
गुरु के काम का था, जिसे अपने इरादों में जबरदस्त
के
कामयाबी मिली थी।
यह सोचे कि आसा कैलेंडर और डॉ. फ्रैंक के बीच में
एक बात समान थी। दोनों ही इस सच को जानते थे कि
पक्के मकसद और प्लान की शक्ति के द्वारा विचारों को
पैसे में बदला जा सकता है।

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अगर आप उन लोगो में से हैं, जो यह विश्वास करते है
कि सिर्फ कड़ी मेहनत और ईमानदारी से ही अमीरी आ
जाएगी तो इस विचार को अपने दिमाग से निकाल दे!
यह सच नहीं है! अमीरी जब भी छप्पड़ फाड़ कर आती
है, तो यह सिर्फ कड़ी मेहनत की बदौलत नहीं आती!
अमीरी एक फिक्स्ड डिमांड के रिजल्ट के रूप में आती
है और यह कुछ प्रिंसिपल्स के इस्तेमाल पर टिका हुआ
है। इसका किस्मत या भाग्य से कोई लेना देना नहीं
है। आम तौर पर विचार ही इमेजिनेशन के सहारे कर्म
को इंस्पायर करता है। सभी मास्टर सेल्समेन कि जहाँ
सामान नहीं बिक सकता, वहाँ विचार बिक सकते है।
एवरेज सेल्समेन इस बात को नहीं जानते-इसलिए वे ‘
एवरेज’ सेल्समेन होते है।
कम दाम की किताबों के एक पब्लिशर ने एक खोज
की, जो आमतौर पर सभी publishers के लिए
इम्पोर्टेन्ट साबित हो सकती है। उन्होंने सीखा कि कई
लोग बुक के अंदर के शब्दो को नहीं खरीदते है, बल्कि
वे टाइटल खरीदते है। उनकी एक बुक बिक नहीं रही
थी। जब उन्होंने इस बुक का टाइटल बदल दिया तो इस
बुक की सेल दस लाख कॉपी से ज़्यादा हो गई। ध्यान
दे,
बुक
के अंदर का कंटेंट जरा भी बदला नहीं गया था।
न्टोंने निर्यातक का कतर माट टिगा शा लिया तट

उ.
दे,
बुक
के अंदर का कंटेंट जरा भी बदला नहीं गया था।
उन्होंने सिर्फ बुक का कवर फाड़ दिया था जिस पर वह
टाइटल लिखा था, जो नहीं बिक रहा था और उन्होंने
उसकी जगह एक नया कवर लगा दिया था, जिस पर
एक ऐसा टाइटल था, जो बॉक्स ऑफिस के हिसाब से
attractive था।
हालाँकि यह बहुत आसान लगता है, लेकिन यह विचार
तो विचार तो ही है!! यह इमेजिनेशन थी।
विचारों की कोई एवरेज या फिक्स्ड प्राइस नहीं होती।
विचारों का क्रिएटर अपनी खुद की कीमत तय करता
है और अगर वह स्मार्ट होता है तो उसे वह कीमत मिल
जाती है।
प्रैक्टिकल नज़रिए से हर अमीरी की कहानी उस दिन से
शुरू होती है, जब विचारों का एक क्रिएटर और विचारों
का एक सेलर इकट्ठे होते है और मिलकर काम करते
है। कार्नेगी ने अपने आस-पास ऐसे लगो को इकट्ठा कर
लिया था, जो वह सब कर सकते थे, जो कार्नेगी नहीं
कर सकते थे, लोग जो विचारों को जन्म देते थे, लोग
जो उन विचारों को एक्शन में बदल सकते थे और उन्हें
और दूसरो को बेहद अमीर बनाते थे।
करोड़ो लोग जिंदगी भर ब्रेक की तलाश करते है।
हो सकता है उनकी खुशकिस्मती से उन्हें कोई मौका
मिल भी जाए लेकिन सबसे सुरक्षित प्लान यही है कि
किस्मत के भरोसे हाथ पर हाथ रखकर न बैठा जाए।

किस्मत के भरोसे हाथ पर हाथ रखकर न बैठा जाए।
मुझे एक सुनहरा ब्रेक मिला जिससे, मुझे मेरे जीवन का
सबसे बड़ा मौक़ा मिला लेकिन पच्चीस साल के लगन
भरे एफर्ट के बाद ही यह मौक़ा मेरी पूँजी बन पाया।
यह ब्रेक था कि मैं एंडू कार्नेगी से खुशकिस्मती से मिला
और मुझे उनका सहयोग मिला। उस मौके पर कार्नेगी
ने मेरे मन में एक विचार का बीज बोया। वह बीज यह
था कि मैं अचीवमेंट के प्रिंसिपल्स को सक्सेस की
फिलॉसफी के रूप में organize करूं। इन पच्चीस
सालो में हुए रिसर्च में जो खोजे हुई है, उनसे हजारों
लोगो ने फ़ायदा उठाया है और कई लोग इस फिलॉसफी
को अपनाकर अमीर बन चुके है। शुरुआत आसान थी।
यह एक विचार था, जिसे कोई भी डेवलप कर सकता
था।
मुझे मदद करने वाला ब्रेक कार्नेगी से मिला था, लेकिन
लगन, फिक्स्ड गोल, गोल को हासिल करने की इच्छा
और पच्चीस साल की लगन का क्या कोई मतलब नहीं
है? यह कोई मामूली इच्छा नहीं थी, जो इतनी निराशा,
लोगों द्वारा discourage किए जाने, टेम्पररी
फेलियर, क्रिटिसिज्म और समय की बर्बादी के बावजूद
भी बनी रही। यह एक स्ट्रोंग इच्छा थी। एक दीवानापन
था।
जब मेरे मन में यह विचार कार्नेगी ने बोया तो उसे
जिंदा बनाए रखने के लिए मनाया गया, इसकी

या।
जब मेरे मन में यह विचार कार्नेगी ने बोया तो उसे
जिंदा बनाए रखने के लिए मनाया गया, इसकी
देखभाल की गई और इसे अट्रैक्ट किया गया। धीरे-धीरे
यह विचार अपनी ही शक्ति से इतना शक्तिशाली हो गया
कि इसने बाद में मुझे मनाया, मेरी देखभाल की और
गाइडेंस देते है, फिर वे ख़ुद-ब-ख़ुद शक्तिशाली बन जाते
है और अपने रास्ते के हर मुश्किल को हटा देते है।
विचार abstract पॉवर है, लेकिन उनमे फिजिकल
ब्रेन से ज़्यादा शक्ति होती है, जिनसे वे पैदा होते है।
उनमे जिंदा बने रहने की शक्ति है, और यह शक्ति तब
भी बनी रहती है, जबकि उन्हें जन्म देने वाला ब्रेन धूल
में मिल चुका होता है।
एंडू कारनेगी की तरह साउथवेस्ट एयरलाइन के फाउंडर
में से एक हर्ब केल्हेर ‘आईडिया बेचने वाला’ के एक
बेहतरीन एग्ज़ाम्पल है। उस वक्त वह सैंट एंटोनियो,
टेक्सास में एक वकील के रूप में काम कर रहे थे, जब
उस अनमोल आईडिया के क्रिएटर रोलर किंग ने अपनी
नई एयरलाइन की शुरुआत करने के लिए उनसे मदद
मांगी।
रोलिंग किंग एक इन्वेस्टमेंट कंसलटेंट थे। साथ ही साथ
वे एक बिना प्रॉफिट वाली एक हवाई चार्टर सर्विस
चलाते थे, जो टेक्सास के छोटे शहरो में चलती थी।
उस समय अमेरिका में जो लोग हवाई यात्रा करते थे, वे

उस समय अमेरिका में जो लोग हवाई यात्रा करते थे, वे
बिज़नेस ऑफिसर हुआ करते थे या फिर अमीर लोग।
किंग तब निराश हो जाया करते थे, जब उन्हें टेक्सास
में एक जगह से दूसरे जगह हवाई यात्रा करनी होती थी
और उन्हें सीट नहीं हासिल होती थी। इसके अलावा
उस समय हवाई यात्रा के दाम बहुत ज़्यादा थे।
उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि टेक्सास के तीन बड़े शहरों
में एक एयरलाइन की शुरुआत करने की सख्त जरुरत
है।
किंग को यह बात अच्छी तरह से पता थी कि उनकी
यह छोटी एयरलाइन इस काम को ढंग से पूरा करने
के लायक नहीं है, इसलिए उन्हें एक नई एयरलाइंस
की जरुरत है। उन्होंने अच्छे से इन सबका स्टडी किया
और एक बिजनस प्लान बनाया। उन्होंने 10,000
डॉलर लिया और अपने वकील हर्ब केल्हेर के पास
एयर साउथवेस्ट के लिए जरूरी कागजी काम कराने के
लिए पहुंच गए। एयर साउथवेस्ट जिसका बाद में नाम
बदलकर साउथवेस्ट एयरलाइंस हुआ।
पहले तो केल्हेर उलझन में पड़ गए, फिर उन्होंने
किंग के साथ और ज़्यादा पैसा जुटाने के लिए और
पोलिटिकल सपोर्ट हासिल करने के लिए काम
किया। 20 फरवरी, 1968 को टेक्सास एरोनॉटिक्स
कमिशन ने तीन शहरो में उड़ान भरने की साउथवेस्ट
की पेटिशन को मंजूरी दे दी। हालांकि 21 फरवरी

कमिशन ने तीन शहरो में उड़ान भरने की साउथवेस्ट
की पेटिशन को मंजूरी दे दी। हालांकि 21 फरवरी
को competitor एयरलाइन Brainiff Trans
Texas and Continental ने इस ऑर्डर पर
temporary रोक लगा दी।
था,
केल्हेर का एयरलाइन के लिए excitement ही
जिसके द्वारा उन्होंने अपने लॉ की स्किल से उस
मुकदमे में जीत हासिल की। विरोधी इस बात को लेकर
मुकदमा लड़ रहे थे कि टेक्सास को कोई नई कंपनी की
जरुरत नहीं है। इसके लिए साउथवेस्ट को साढ़े तीन
साल का इंतजार करना पड़ा। इसमें उन्हें तीन कोर्ट के
चक्कर लगाने पड़े तब जाकर वे विरोधियो को गलत
साबित कर पाए और एयरलाइन की शुरुआत करने के
लिए जरुरी परमिशन ले पाए।
अलबत्ता उन्होंने एक अच्छी शुरुआत की, पर यह
काफ़ी नहीं था। कंपनी को पहले साल 37 लाख डॉलर
का नुकसान हुआ और यह नुकसान अगले साल
और उसके बाद अगली छ महीने तक चलता रहा।
साउथवेस्ट अपना दाम भी रखना चाहता था और अपने
ओरिजिनल गोल के साथ समझौता किए बिना अपने
कस्टमर्स को अट्रैक्ट करना चाहता था।
उनका एक इनोवेशन था पीक और ऑफ पीक
एयरलाइन के दाम रखना था और दूसरा 10 मिनट
टर्नअराउंड था। एयरलाइन के लैंड होने के बाद हर
2
A.A4-

टर्नअराउंड था। एयरलाइन के लैंड होने के बाद हर
प्लेन गेट के सामने खड़ा हो जाता, सिक्यूरिटी गार्ड्स
द्वारा जाँचा जाता, पैसेंजर उतरते, और फिर नए
पैसेंजर बैठ जाते और एयरलाइन सिर्फ 10 मिनट में
गेट छोड़ देता। इस काम में पहले बहुत ज़्यादा समय
लगता था। इस दस मिनट टर्नअराउंड ने तीन प्लेन
की इस एयरलाइन को बिजी रखने और अपना टाइम
परफॉरमेंस सुधारने में मदद की।
बहुत कम बजट होने के कारण, वे इसे general
मीडिया के ज़रिए प्रमोट से नहीं कर पा रहे थे। इसलिए
उन्होंने एयरलाइन को प्रमोट करने के लिए एक इंसान
से दूसरे इंसान का फैसला किया। इसको जारी रखने के
लिए कंपनी ने अपनी हटके इमेज बनाई।
कस्टमर उनका भगवान है, उन्होंने इस थॉट पर काम
किया। फ्लाइट के एम्प्लाइज को सिखाया गया कि
किस तरह कस्टमर्स का ध्यान रखना है। कंपनी का
सलोगन रखा गया ‘अब कोई और भी है, जो आपसे
मोहब्बत करता है।’
साथ ही साथ, केल्हेर ने उस तकलीफ़ देने वाले और
समय बर्बाद करने वाले बोर्डिंग पास की जगह ओपन
सीटिंग अरेंजमेंट की शुरुआत कर दी। कोई सीट का
रिजर्वेशन नहीं चहिए था और passengers को
बोडिंग कार्ड नंबर फ्लाइट के गेट पर ही दिए जाते थे।
ܪܕ

पैसेंजर satisfaction उनका main मकसद होने
के कारण, केल्हेर और उनकी टीम ने एक लॉयल
फोल्लोविंग बना ली थी और उनकी passengers के
बीच एक बेहतरीन इमेज भी बन गई थी।
साउथवेस्ट धीरे-धीरे सक्सेस की ऊँचाईयाँ चढ़ने लगी
थी।
1978 तक, यह देश की सबसे ज़्यादा कमाई करने
वाली एयरलाइन बन गई। 2000 की शुरुआत में
जब कई एयरलाइन बेहद नुकसान से गुज़रे, कुछ तो
दीवालिया हो गए और कई ने अपना बिज़नेस ही बंद
कर दिया, साउथवेस्ट ना सिर्फ टिका रहा बल्कि अपने
बिज़नेस में तरक्की भी की।
हर्ब केल्हेर सक्सेस पाने की इच्छा रखने वाले लोगों को
सलाह देते है-
अपने विचारों पर डटे रहिए। इसके बावजूद
कि
competitor कमापनियों के विरोध की वजह से
ताकि साउथवेस्ट को इस बिज़नेस में उतरने से रोका जा
सके, उन्होंने अपने पॉजिटिव स्वभाव के कारण साढ़े
तीन साल कोर्ट के चक्कर लगाए और केस लड़ा।
हमेशा कस्टमर के बारे में सोचिए, वे क्या चाहते है?
और उन्हें वही दीजिए।
अपनी मुश्किल की घड़ियों में पॉजिटिव कदम उठाकर

1978 तक, यह दशका सबस ज़्यादा कमाई करन
वाली एयरलाइन बन गई। 2000 की शुरुआत में
जब कई एयरलाइन बेहद नुकसान से गुज़रे, कुछ तो
दीवालिया हो गए और कई ने अपना बिज़नेस ही बंद
कर दिया, साउथवेस्ट ना सिर्फ टिका रहा बल्कि अपने
बिज़नेस में तरक्की भी की।
हर्ब केल्हेर सक्सेस पाने की इच्छा रखने वाले लोगों को
सलाह देते है-
अपने विचारों पर डटे रहिए। इसके बावजूद कि
competitor कमापनियों के विरोध की वजह से
ताकि साउथवेस्ट को इस बिज़नेस में उतरने से रोका जा
सके, उन्होंने अपने पॉजिटिव स्वभाव के कारण साढ़े
तीन साल कोर्ट के चक्कर लगाए और केस लड़ा।
हमेशा कस्टमर के बारे में सोचिए, वे क्या चाहते है?
और उन्हें वही दीजिए।
अपनी मुश्किल की घड़ियों में पॉजिटिव कदम उठाकर
उससे उबरिए।
हमेशा नए विचारों के लिए अपना मन खुला रखिए।
और जैसे ही मौका मिले, उन्हें पकड़ लीजिए।

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7. सिस्टेमेटिक या आर्गनाइज्ड प्लानिंग
इच्छा को कर्म में साकार करना
अमीर बनने की ओर छठा स्टेप
पने सीखा है कि इनसान, जो भी क्रिएट करता है या
अचीव करता है, वह इच्छा के रूप में शुरू होता है।
इच्छा ही हमें यात्रा के पहले दौर में ले जाती है,
आईडिया से हकीकत की ओर ले जाती है, इमेजिनेशन
की वर्कशॉप में ले जाती है, जहाँ इस बदलाव का प्लान
बनाया जाता है और इसे organize किया जाता है।
चैप्टर दो में आपको छह प्रैक्टिकल स्टेप्स लेने के
इंस्ट्रक्शन दिए गए है ताकि आप पैसे की इच्छा को
इसके फिजिकल रूप में बदलने की दिशा में आगे बढ़
सके। इनमे से एक स्टेप है क्लियर और प्रैक्टिकल
प्लान बनाना जिनके द्वारा बदलाव किया जा सकता है।
अब आपको इंस्ट्रक्शन दिए जाएँगे कि आप किस तरह
प्रैक्टिकल प्लान बना सकते है–
1. पैसा कमाने के आपके प्लान के बनने और पूरे
होने में आपको जितने लोगो के ग्रुप की ज़रुरत हो
उतने लोगो से जुड़े–बाद के चैप्टर में बताए गए तरीके

अब आपको इंस्ट्रक्शन दिए जाएंगे कि आप किस तरह
प्रैक्टिकल प्लान बना सकते है–
1. पैसा कमाने के आपके प्लान के बनने और पूरे
होने में आपको जितने लोगो के ग्रुप की ज़रुरत हो
उतने लोगो से जुड़े-बाद के चैप्टर में बताए गए तरीके
से “मास्टर माइंड’ प्रिंसिप्ल का इस्तेमाल करे (इस
इंस्ट्रक्शन को फॉलो करना बिल्कुल ज़रूरी है। इसे
नजरअंदाज न करे।)
2. अपना मास्टर माइंड ग्रुप बनाने से पहले यह फैसला
करे कि आप अपने ग्रुप के मेंबर्स को उनके सहयोग
के बदले में क्या फ़ायदा दे सकते है। कोई भी इंसान
बदले में कोई चीज़ लिए बिना लंबे समय तक काम नहीं
करेगा।
कोई भी समझदार इंसान बदले में बिना कुछ दिए दूसरे
इंसान से काम करने की विनती या उम्मीद नहीं करेगा,
हालाँकि हो सकता है कि यह हमेशा पैसे के रूप में न
हो।
3. हफ़्ते में कम-से-कम दो बार और जितना ज़्यादा
संभव हो अपने मास्टर माइंड ग्रुप के मेंबर्स से मिले,
जब तक कि आप मिलकर पैसा कमाने के लिए ज़रूरी
प्लान, पूरी तरह से न बना ले।
4. अपने मास्टर माइंड ग्रुप के हर मेंबर के साथ
आपका रिश्ता अच्छा होना चाहिए। अगर आप इस

4. अपने मास्टर माइंड ग्रुप के हर मेंबर के साथ
आपका रिश्ता अच्छा होना चाहिए। अगर आप इस
इंस्ट्रक्शन को पूरी तरह फॉलो नहीं करेंगे तो आप फेल
हो सकते है। मास्टर माइंड प्रिंसिप्ल वहाँ पर कामयाब
नहीं हो सकता जहाँ पूरा तालमेल न हो।
इन बातों को अपने दिमाग में रखे
पहला : आप अपने लिए एक बेहद इम्पोर्टेन्ट काम में
लगे हुए हैं। सक्सेस पक्का करने के लिए आपके पास
फूलप्रूफ़ प्लान होना चाहिए।
दूसरा : आपको दूसरो के एक्सपीरियंस, एजुकेशन,
नेचुरल एबिलिटी और इमेजिनेशन का फ़ायदा हासिल
करना चाहिए। यह उन तरीको से मिलता जुलता है,
जिनको फॉलो करके हर अमीर आदमी ने दौलत कमाई
है।
दूसरे लोगो के सहयोग के बिना किसी इंसान में इतना
एक्सपीरियंस, पैदाइशी काबिलियत और नॉलेज नहीं
होता कि ढेर सारी दौलत कमाना पक्का हो जाए।
दौलत कमाने के अपने एफर्ट में आप जिस भी प्लान
को अमल में लाएँ, वह प्लान आपके और आपके
“मास्टर माइंड’ ग्रुप के हर मेंबर का जॉइंट क्रिएशन
होना चाहिए। आप अपने मन से निकले प्लान को
थोड़ा या पूरा बना सकते है, लेकिन यह जरुरी है कि
इस प्लानिंग को आपके मास्टर माइंड ग्रुप के मेंबर्स को
A

मास्टर माइ5 ग्रुप कहर मबर का जाइ८ क्रएशन
होना चाहिए। आप अपने मन से निकले प्लान को
थोड़ा या पूरा बना सकते है, लेकिन यह जरुरी है कि
इस प्लानिंग को आपके मास्टर माइंड ग्रुप के मेंबर्स को
दिखाकर उनकी भी स्वीकृति ली जाए।
अगर आपके द्वारा बनाया गया पहला प्लान
successfully काम न करे तो इसकी जगह एक
नया प्लान बनाएं। अगर यह नया प्लान भी काम न करे
तो इसके बदले में एक और नया प्लान बनाएं और ऐसा
तब तक करते रहे, जब तक कि आपको ऐसा प्लान न
मिल जाए, जो काम करे। इसी पॉइंट पर ज़्यादातर लोग
फेल होते है क्योंकि उनमे बुरे plan की जगह नए
प्लान बनाने की लगन की कमी होती है।
दुनिया का सबसे बुद्धिमान आदमी भी पैसा कमाने या
किसी और काम में तब तक कामयाब नहीं हो सकता,
जब तक कि उसकी प्लानिंग प्रैक्टिकल दुनिया में करने
के लायक न हो। इस फैक्ट को अपने मन में रखे और
जब तक आपकी प्लानिंग फेल हों तो यह भी याद रखे
कि कुछ पलों की हार सिर्फ कुछ समय की देर है।
इसका यह मतलब हो सकता है कि आप जिस प्लान
पर काम कर रहे थे, वह दमदार या error फ्री नहीं था।
दूसरा प्लान बनाए। एक बार फिर से शुरू करे।
थॉमस अल्वा एडिशन 10,000 बार फेल हुए थे, इससे
पहले कि वह इलेक्ट्रिक बल्ब का इन्वेंशन कर पाते।
इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि एडिशन को

थॉमस अल्वा एडिशन 10,000 बार फेल हुए थे, इससे
पहले कि वह इलेक्ट्रिक बल्ब का इन्वेंशन कर पाते।
इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि एडिशन को
सक्सेस मिलने से पहले 10,000 बार टेम्पररी फेलियर
का सामना करना पड़ा।
टेम्पररी हार का एक ही मतलब होना चाहिए और वह
यह कि आपके प्लान में किसी खास किस्म के नॉलेज
की कमी थी। लाखो करोड़ो लोग गरीबी और दुःख भरा
जीवन बिताते हैं क्योंकि उनके पास कोई दमदार प्लान
नहीं होता, जिसके द्वारा पैसा कमा सके। आपकी
प्लानिंग जितनी दमदार होगी, आपकी अचीवमेंट उतनी
ही ज़्यादा होगी। कोई भी आदमी तब तक नहीं हारता,
जब तक कि वह मैदान न छोड़ दे। यानी जब तक कि
वह हिम्मत न हार जाए।
जेम्स जे हिल ने जब पहली बार ईस्ट से वेस्ट तक
रेलरोड बनाने के लिए पैसे इकट्ठा करने की कोशिश की
तो उन्हें टेम्पररी हार का सामना करना पड़ा। लेकिन
उन्होंने नई प्लानिंग के द्वारा अपनी हार को जीत में
बदल दिया।
हेनरी फोर्ड को भी टेम्पररी हार का सामना करना पड़ा।
और ऐसा न सिर्फ उनके ऑटोमोबाइल कैरियर की
शुरुआत में हुआ बल्कि तब भी हुआ, जब वे अपने
कैरियर की ऊँचाई पर पहुँच गए थे। उन्होंने नए प्लान
बनाए और फाइनेंसियल जीत की और एक लंबी छलांग

दुनिया में दो तरह के लोग होते है। एक तरह के लोगो
को लीडर्स के रूप में जाना जाता है और दूसरे तरह
के लोगो को followers के रूप में। शुरुआत में
ही यह फैसला कर ले कि क्या आप अपने चुने हुए
बिज़नेस या फील्ड का लीडर बनना चाहते है या सिर्फ
follower ही बने रहना चाहते है। बदले में जो मिलता
है, उसमें बड़ा भारी फ़र्क है। लॉजिकल नज़रिए से
कोई follower उस मुआवजे की उम्मीद नहीं कर
सकता, जो लीडर को मिल सकता है, हालाँकि कई
followers उतने ही पैसे की उम्मीद करने की गलती
करते है।
follower होने में कोई बुराई नहीं है। दूसरी ओर
follower बने रहना भी कोई तारीफ की बात नहीं
है। ज़्यादातर महान लीडर्स ने follower के रूप में
शुरुआत की थी। वे महान लीडर इसलिए बने क्योंकि
वे समझदार follower थे। जो आदमी समझदारी
से किसी लीडर को फॉलो नहीं कर सकता, वह कभी
सक्सेसफुल लीडर नहीं बन सकता।
इसके exception बहुत कम होते है। वह आदमी जो
किसी लीडर को successfully फॉलो कर सकता
है, आमतौर पर वही बड़ी तेज़ी से लीडर बनने की
दिशा में खुद को डेवलप कर रहा होता है। बुद्धिमान
follower को कई फ़ायदे होते है और उनमे से एक
फ़ायदा है अपने लीडर से नॉलेज हासिल करने का
मौका।

पाारारापारना छाड़ दतता जाप मगाड़हा
भगोड़े लोग कभी नहीं जीतते और जीतने वाले कभी
नहीं भागते, इस बात को गाँठ बाँध ले और कैपिटल
letter में कागज के एक टुकड़े पर लिख ले और इसे
ऐसी जगह पर रखे जहाँ आप इसे हर रात सोने से पहले
और हर सुबह उठने के बाद देख सके।
जब आप अपने मास्टर माइंड ग्रुप के मेंबर्स को चुनना
शुरू करे तो उन लोगो को चुनने की कोशिश करे जो
हार को सीरियसली नहीं लेते।
कुछ लोग मूर्खता के कारण यह विश्वास करते है कि
सिर्फ़ पैसे से ही पैसा कमाया जा सकता है। यह सच
नहीं है!
स्ट्रोंग इच्छा ही वह ज़रिया है, जिसके द्वारा पैसा बनाया
जाता है। और आप इस स्ट्रोंग इच्छा को यहाँ बताएँ
गए प्रिंसिपल्स की मदद से इसके फिजिकल रूप में
बदल सकते है। पैसा अपने आपमें कुछ नहीं है, यह
सिर्फ एक बेजान चीज़ है। यह न चल सकता है, न सोच
सकता है, न बोल सकता है, लेकिन यह सुन सकता है
और जब कोई आदमी इसकी स्ट्रोंग इच्छा करता है तो
यह उसके इनविटेशन पर दौड़ा चला आता है।

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सेल्स सर्विस का सेल्स प्लान
बचे हुए चैप्टर में मार्केटिंग सर्विसेज के साधन और
रास्तो पर डिटेल में बताया गया है। यहाँ पर जो भी
जानकारी दी जाएँगी वह प्रैक्टिकल होगी और जिससे
ये मार्केट में कोई भी सर्विस देने के लिए हर इंसान की
मदद कर सके। खासकर उन लोगो के लिए यह अमृत
की तरह होगी, जिन्हें अपनी जिंदगी एक लीडर के रूप
में गुजारनी है।
अमीर बनने की दिशा में किए गए किसी भी काम की
सक्सेस के लिए बुद्धिमानी से प्लान बनाना ज़रूरी है।
यहाँ पर आपको ऐसे डिटेल में इंस्ट्रक्शन मिलेंगे, जिनके
द्वारा आप पर्सनल सर्विसेज को बेचकर अमीर बनना
शुरू कर सकते है।
यह जानना दिलचस्प है कि जितने भी लोगो ने बहुत
ज़्यादा पैसा कमाया है, उनकी शुरुआत पर्सनल
सर्विसेज के मुआवजे के रूप में या विचारों की सेल से
हुई थी। जिसके पास जायदाद न हो वह अमीर बनने के
लिए आईडिया और पर्सनल सर्विसेज के अलावा और
क्या दे सकता है?

दुनिया में दो तरह के लोग होते है। एक तरह के लोगो
को लीडर्स के रूप में जाना जाता है और दूसरे तरह
के लोगो को followers के रूप में। शुरुआत में
ही यह फैसला कर ले कि क्या आप अपने चुने हुए
बिज़नेस या फील्ड का लीडर बनना चाहते है या सिर्फ
follower ही बने रहना चाहते है। बदले में जो मिलता
है, उसमें बड़ा भारी फ़र्क है। लॉजिकल नज़रिए से
कोई follower उस मुआवजे की उम्मीद नहीं कर
सकता, जो लीडर को मिल सकता है, हालाँकि कई
followers उतने ही पैसे की उम्मीद करने की गलती
करते है।
follower होने में कोई बुराई नहीं है। दूसरी ओर
follower बने रहना भी कोई तारीफ की बात नहीं
है। ज़्यादातर महान लीडर्स ने follower के रूप में
शुरुआत की थी। वे महान लीडर इसलिए बने क्योंकि
वे समझदार follower थे। जो आदमी समझदारी
से किसी लीडर को फॉलो नहीं कर सकता, वह कभी
सक्सेसफुल लीडर नहीं बन सकता।
इसके exception बहुत कम होते है। वह आदमी जो
किसी लीडर को successfully फॉलो कर सकता
है, आमतौर पर वही बड़ी तेज़ी से लीडर बनने की
दिशा में खुद को डेवलप कर रहा होता है। बुद्धिमान
follower को कई फ़ायदे होते है और उनमे से एक
फ़ायदा है अपने लीडर से नॉलेज हासिल करने का
मौका।

लीडरशिप की ख़ास क्वालिटी
लीडरशिप के इम्पोर्टेन्ट गुण नीचे दिए गए है–
1. अटल साहस : यह साहस ख़ुद के नॉलेज और
अपने बिज़नेस के नॉलेज पर बेस्ड होता है। कोई
भी follower नहीं चाहता कि उसके लीडर में
कांफिडेंस और साहस की कमी हो। कोई भी बुद्धिमान
follower ऐसे लीडर को लंबे समय तक नहीं झेल
सकता।
2. सेल्फ़-कंट्रोल : वह आदमी जो खुद को कंट्रोल नहीं
कर सकता, दूसरो को कभी कंट्रोल नहीं कर सकता।
follower के सामने सेल्फ कंट्रोल एक शक्तिशाली
मिसाल बन जाता है, जिसे वह follower सीख लेता
है, जो ज़्यादा बुद्धिमान होता है।
3. न्यायपूर्ण व्यवहार : न्यायपूर्ण व्यवहार के बिना कोई
लीडर अपने followers का सम्मान न तो हासिल कर
सकता है, न ही उन्हें लंबे समय तक बनाए रख सकता
है।
4. फ़ैसले लेने का कांफिडेंस : जो आदमी ढुलमुल
फैसला लेता है वह बताता है कि उसे खुद पर विश्वास
नहीं है और ऐसा आदमी दूसरो को अच्छे से लीड नहीं
कर सकता।
5. प्लानिंग का कांफिडेंस : सक्सेसफुल लीडर अपने
काम का प्लान बनाता है और प्लान पर काम करता

5. प्लानिंग का कांफिडेंस : सक्सेसफुल लीडर अपने
काम का प्लान बनाता है और प्लान पर काम करता
है। जो लीडर प्रैक्टिकल और क्लियर प्लानिंग के बिना
सिर्फ़ अंदाजे से काम करता है वह उस जहाज की तरह
होता है, जिसमें रडर न हो। देर सवेर वह चट्टानों से
टकराकर बर्बाद हो जाता है ।
6. जितना मिले उससे ज्यादा देने की आदत :
लीडरशिप की क्वालिटी में से एक बात यह है कि लीडर
अपने followers से जितने की उम्मीद रखता है,
उन्हें अपनी मर्जी से उससे ज़्यादा देने के लिए भी तैयार
रहना चाहिए।
7. pleasing पर्सनालिटी : कोई भी बेतरतीब या
लापरवाह आदमी सक्सेसफुल लीडर नहीं बन सकता।
लीडरशिप के लिए सम्मान चाहिए। follower ऐसे
लीडर का सम्मान नहीं करेंगे, जिसे अच्छी पर्सनालिटी
के सभी गुणों में अच्छे पॉइंट्स न मिले।
8. सहानुभूति और समझ : सक्सेसफुल लीडर को
अपने supporters के प्रति सहानुभूति रखनी
चाहिए। यही नहीं, उसे उन्हें और उनकी समस्याओ को
भी समझना चाहिए।
9, डिटेल बताने की efficiency : सक्सेसफुल
लीडरशिप के लिए यह भी जरुरी है कि वह लीडर की
पोजीशन के डिटेल को समयने में माहिर हो।

9, डिटेल बताने की efficiency : सक्सेसफुल
लीडरशिप के लिए यह भी जरुरी है कि वह लीडर की
पोजीशन के डिटेल को समझने में माहिर हो।
10. पूरी जिम्मेदारी लेने की इच्छा : सक्सेसफुल लीडर
को अपने supporters की गलतियों और कमियों
की पूरी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहना चाहिए।
अगर वह इस जिम्मेदारी को दूसरे पर थोप देता है
तो वह लीडर नहीं बन पाएगा। अगर उसका कोई
supporter कोई गलती करता है और अपने आपको
नालायक साबित करता है तो लीडर को यह मानना
चाहिए कि गलती उसकी है और वही फेल हुआ है।
17. सहयोग : सक्सेसफुल लीडर को साथ मिलकर
कोशिश करने के प्रिंसिप्ल को समझना चाहिए और
उस पर अमल करना चाहिए और अपने followers
को भी ऐसा ही करने के लिए इंस्पायर करना चाहिए।
लीडरशिप के लिए पॉवर या अथॉरिटी की ज़रुरत होती
है और शक्ति के लिए सहयोग की।
लीडरशिप के दो रूप है। पहला और ज़्यादा असरदार
रूप है, supporters और followers की सहमति
और सहानुभूति का साथ। दूसरा है शक्ति के साथ,
जिसमें supporters की सहमति या सहानुभूति न
हो।
इतिहास ऐसे example से भरा पड़ा है, जो बताते है

इतिहास ऐसे example से भरा पड़ा है, जो बताते है
कि पॉवर के साथ हासिल की गई लीडरशिप ज़्यादा देर
नहीं टिक सकती। तानशाहों और राजाओं के पतन और
गुमनामी ये दिखाती है कि लोग थोपी हुई लीडरशिप को
लंबे समय तक नहीं झेल पाते और उनको फॉलो नहीं
करते।
नेपोलियन, मुसोलिनी, हिटलर पॉवर और अथॉरिटी के
द्वारा हासिल की गई लीडरशिप के एग्ज़ाम्पल हैं। उनकी
लीडरशिप खत्म हो गई। supporters की सहमति
द्वारा लीडरशिप ही लीडरशिप का वह इकलौता रूप
है, जो लंबे समय तक बनी रहती है।
लोग पॉवर के आधार पर थोपी हुई लीडरशिप को कुछ
समय के लिए फॉलो करते है, लेकिन वे ऐसा इच्छा से
या मर्जी से नहीं करते।
लीडरशिप की नई ब्रांड में कुछ दूसरे गुणों के अलावा
लीडरशिप के यह ग्यारह गुण शामिल होंगे, जिनके बारे
में इस चैप्टर में बताया गया है। जो इंसान इन्हें अपनी
लीडरशिप का बेस बनाता है, उन्हें जीवन के किसी भी
फील्ड में लीडर बनने के भरपूर मौके मिलेंगे।
लीडरशिप में फेल होने के दस main कारण
अब हम लीडर्स की main गलतियों को बताते है, यह
जानने की कोशिश करते है कि लीडर फेल क्यों होते है।

लीडरशिप में फेल होने के दस main कारण
अब हम लीडर्स की main गलतियों को बताते है, यह
जानने की कोशिश करते है कि लीडर फेल क्यों होते है।
यह जानना भी उतना ही इम्पोर्टेन्ट है कि लीडर क्या न
करे, जितना की यह जानना कि लीडर क्या करे।
1. डिटेल्स को organize करने की काबिलियत ना
होना : इफेक्टिव लीडरशिप के लिए ज़रूरी है कि
आपमें डिटेल्स को organize करने और उनमे
मास्टर होने की काबिलियत हो. कोई भी असली
लीडर इतना बिजी नहीं होता कि उसके पास वह
काम करने का समय न हो, जो उसे लीडर के रूप
में करनी चाहिए। जब कोई आदमी, चाहे वह लीडर
हो या follower , यह कहता है कि वह अपनी
प्लानिंग बदलने या किसी emergency सिचुएशन
का सामना नहीं कर सकता क्योंकि वह बहुत ज़्यादा
बिजी है तो वह अपनी अयोग्यता साबित कर रहा है।
सक्सेसफुल लीडर अपने पोजीशन से संबंधित सारे
डिटेल्स में मास्टर होता है। इसका मतलब यह है कि
उसे यह आदत डाल लेनी चाहिए कि वह डिटेल्स को
अपने काबिल मेंबर्स के हवाले कर दे।
2. विनम्र सर्विस देने की इच्छा ना होना : जब समय की
मांग होती है तो असली और महान लीडर्स ऐसा काम
करने के लिए खुशी-खुशी तैयार रहते है, जो वे दूसरे से

2. विनम्र सर्विस देने की इच्छा ना होना : जब समय की
मांग होती है तो असली और महान लीडर्स ऐसा काम
करने के लिए खुशी-खुशी तैयार रहते है, जो वे दूसरे से
करने के लिए कहते है। ‘तुममे से सबसे महान इंसान
सबका सेवक होगा’ एक ऐसी सच्चाई है, जिसको सभी
काबिल लीडर फॉलो और सम्मान करते है।
3. दुनिया लोगो को कभी उनके नॉलेज के लिए पैसा
नहीं देती। आप अपने नॉलेज का क्या करते हैं या दूसरो
को किस तरह इंस्पायर करते है, पैसे इसी के लिए दिए
जाते हैं।
4. supporters से competition का डर :
वह लीडर जिसे इस बात का डर हो कि उसका कोई
supporter उसकी पोजीशन को हथिया लेगा, देर
सबेर यह पक्का कर लेता है कि ऐसा ही हो। काबिल
लीडर अपने नीचे काम कर रहे लोगो को ट्रेन करता है
ताकि वह अपनी पोजीशन के डिटेल्स उन्हें सौंप सके।
सिर्फ इस तरह लीडर अपने आपको कई गुना कर
सकता है और अपने आपको कई जगहों पर एक साथ
रख सकता है और एक ही समय में कईचीजों का ध्यान
रख सकता है। यह एक अनंत सच है कि लोगों को
अपने कोशिशों से जितनी कमाई हो सकती है, उससे
ज़्यादा कमाई उन्हें इस बात से होती है कि उनमे दूसरों
से परफॉर्म करवाने के जादू से एक इफेक्टिव लीडर
टसरो के काम करने के मोटेंशियल को बरत त्याटा

रख सकता। यह एक जना सपापला का
अपने कोशिशों से जितनी कमाई हो सकती है, उससे
ज़्यादा कमाई उन्हें इस बात से होती है कि उनमे दूसरों
से परफॉर्म करवाने के जादू से एक इफेक्टिव लीडर
दूसरो के काम करने के पोटेंशियल को बहुत ज़्यादा
बढ़ा सकता है और उन्हें ज़्यादा और बेहतर सर्विस देने
के लिए इंस्पायर कर सकता है, जो उसकी मदद के
बिना वे लोग नहीं दे पाते।
5. इमेजिनेशन की कमी : इमेजिनेशन के बिना लीडर
emergency सिचुएशन का सामना करने के
काबिल नहीं रहता है और ऐसा प्लान नहीं बना पाता,
जिनके द्वारा वह अपने supporters को इफेक्टिव
तरीके से गाइड कर सके।
6. स्वार्थ : उस लीडर से सभी लोग चिढ़ते है, जो अपने
supporters के काम का सारा क्रेडिट खुद ले लेता
है।
असली और महान लीडर कभी क्रेडिट लेने का दावा
नहीं करता। वह सारा सम्मान और क्रेडिट अपने
supporters के पास जाने देता है क्योंकि वह
जानता है कि ज़्यादातर लोग तारीफ़ और प्रेस्टीज के
लिए ज़्यादा हार्ड वर्क करेंगे, जबकि सिर्फ पैसों के लिए
वो इतना हार्ड वर्क नहीं करेंगे।
7. पेशेंस की कमी : followers ऐसे लीडर का
सम्मान नहीं करते जिनमें पेशेंस की कमी होती है।

7. पेशेंस की कमी : followers ऐसे लीडर का
सम्मान नहीं करते जिनमें पेशेंस की कमी होती है।
यही नहीं, बेसब्री किसी भी रूप में उस आदमी की
tolerate करने की पॉवर और sharpness को
बर्बाद कर देता है, जो बेसब्र होता हैं।
8, वफ़ादारी की कमी : शायद इसे लिस्ट में सबसे
पहले नंबर पर आना चाहिए था। वह लीडर जो अपने
साथियों, अपने सीनियर्स, अपने जूनियर्स और अपने
काम के प्रति वफादार नहीं होता, वह लंबे समय तक
लीडर नहीं बना रह सकता। इमानदारी की कमी किसी
भी आदमी को बहुत नीचे ले जाती है। वह जमीन की
धूल से भी नीचे हो जाता है और उसे अपमान झेलना
पड़ता है, जिसके वह बिलकुल लायक है, वफादारी की
कमी जीवन के हर फील्ड में फेलियर का एक बहुत
बड़ा कारण है।
9, लीडरशिप की शक्ति पर जोर : इफेक्टिव लीडर
encouragement द्वारा लीड करता है और अपने
supporters के दिल में डर पैदा करने की कोशिश
नहीं करता है। जो लीडर अपने supporters को
अपनी अथॉरिटी या पॉवर का डर दिखाकर इन्फ्लुएंस
करता है, वह शक्ति द्वारा लीडरशिपवाली category
में आता है। अगर कोई लीडर सच्चा लीडर होता है
तो उसे अपने व्यवहार अपनी सहानुभबूती, समझ,
न्यायप्रियता और एफिशिएंसी के अलावा किसी दूसरे
तरीके से इस फैक्ट को जताने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

10. रैंक पर जोर : काबिल लीडर को अपने
:
supporters का सम्मान हासिल करने के लिए
किसी रैंक या पोजीशन की जरुरत नहीं होती, वह
आदमी जो रैंक को महत्व देता है दरअसल उसके पास
आम तौर पर महत्व देने के लिए और कुछ नहीं होता।
असली लीडर के ऑफिस के दरवाजे उन सभी लोगो के
लिए खुले रहते है, जो अंदर जाना चाहते है और उसके
काम करने की जगह फॉर्मेलिटी और दिखावे से आज़ाद
होता है।
यह लीडरशिप की फेलियर के सबसे आम कारण है।
इनमें से कोई भी गलती आपको फेल कराने के लिए
काफ़ी है। अगर आप लीडर बनना चाहते हैं और यह
पक्का करना चाहते हैं कि आप यह गलतियाँ न करें तो
इस लिस्ट को ध्यान से स्टडी करें।
कुछ प्रोडक्टिव फील्ड जिनमें नई लीडरशिप की
जरूरत होगी।
इस चैप्टर को खत्म करने से पहले आपका ध्यान
उन कुछ प्रोडक्टिव फ़ील्ड्स की तरफ अट्रैक्ट किया
जाएगा, जिनमे लीडरशिप का पतन हो रहा है और
जिनमें नए तरह के लीडर्स को बहुत मौके मिल सकते
हैं।
पहला : पॉलिटिक्स के फील्ड में नए लीडर की काफी
डिमांड है, एक ऐसी डिमांड जो emergency
मिनाशन से किसी भी तरह का नहीं है।

पहला : पॉलिटिक्स के फील्ड में नए लीडर की काफी
डिमांड है, एक ऐसी डिमांड जो emergency
सिचुएशन से किसी भी तरह कम नहीं है।
दूसरा : बैंकिंग बिजनस भी सुधार के दौर से गुजर रहा
है।
तीसरा : इंडस्ट्री में नए लीडर्स की जरुरत है। इस
फील्ड में फ्यूचर लीडर को ख़ुद को एक आधा पब्लिक
ऑफिसर मान लेना चाहिए, जिसकी ये ड्यूटी है कि वह
अपने ट्रस्ट को इस तरह से मैनेज करे कि वह किसी
इंसान या लोगों के लिए परेशानी पैदा न करे।
चौथा : फ्यूचर में धार्मिक लीडर प्रेजेंट फाइनेंसियल
और पर्सनल probelms को सुलझाते हुए अपने
followers की मटेरियल ज़रूरतों की तरफ पूरा ध्यान
देने के लिए मजबूर हो जाएगा। उन्हें बीते हुए अतीत
और आने वाले फ्यूचर की तरफ कम ध्यान देना होगा।
पाँचवाँ : लॉ, डॉक्टरी और एजुकेशन के बिज़नेस में
नए किस्म की लीडरशिप और कुछ हद तक नए लीडर्स
की ज़रुरत होगी। यह एजुकेशन के फील्ड में खासतौर
पर सही है। इस फील्ड में फ्यूचर में लीडर को लोगो
की पढ़ाने करने के इस नए तरह के तरीके खोजने होंगे
कि वे स्कूल या कॉलेज में हासिल किए हुए नॉलेज को
जीवन में किस तरह इस्तेमाल करे। उन्हें प्रिंसिपल्स पर
कम और प्रैक्टिकल यूज़ पर ज़्यादा ध्यान देना होगा।

अपने
ट्रस्ट
को इस तरह से मैनेज करे कि वह किसी
इंसान या लोगों के लिए परेशानी पैदा न करे।
चौथा : फ्यूचर में धार्मिक लीडर प्रेजेंट फाइनेंसियल
और पर्सनल probelms को सुलझाते हुए अपने
followers की मटेरियल ज़रूरतों की तरफ पूरा ध्यान
देने के लिए मजबूर हो जाएगा। उन्हें बीते हुए अतीत
और आने वाले फ्यूचर की तरफ कम ध्यान देना होगा।
पाँचवाँ : लॉ, डॉक्टरी और एजुकेशन के बिज़नेस में
नए किस्म की लीडरशिप और कुछ हद तक नए लीडर्स
की ज़रुरत होगी। यह एजुकेशन के फील्ड में खासतौर
पर सही है। इस फील्ड में फ्यूचर में लीडर को लोगो
की पढ़ाने करने के इस नए तरह के तरीके खोजने होंगे
कि वे स्कूल या कॉलेज में हासिल किए हुए नॉलेज को
जीवन में किस तरह इस्तेमाल करे। उन्हें प्रिंसिपल्स पर
कम और प्रैक्टिकल यूज़ पर ज़्यादा ध्यान देना होगा।
छठवाँ : जर्नलिज्म के फील्ड में नए लीडर्स की ज़रुरत
होगी।
यह उन कफ़ील्ड्स में थोड़े से फील्ड है जहाँ नए लीडर्स
या नई किस्म की लीडरशिप की ज़रुरत है। दुनिया बहुत
तेजी से बदल रही है। इसका मतलब यह है कि इनसान
की आदतों को भी इसी बदलाव के अनुरूप बदलना
होगा।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
किसी पोस्ट के लिए कब और कैसे अप्लाई करें
यहाँ पर जो बताया जा रहा है, वह कई सालों
के एक्सपीरियंस का रस है। इसमें सर्विसेज को
इफेक्टिव ढंग से में हजारो लोगो ने मदद की है।
एक्सपीरियंस यह साबित करता है कि नीचे दिए गए
तरीके सबसे सीधे और इफेक्टिव तरीके है,
जो पर्सनल सर्विसेज के buyer और सेलर दोनों को
जोड़ते है।
1. रोजगार/employment ब्यूरो : सावधानी से
किसी reputed ब्यूरो का चुनाव करना चाहिए,
जिसकी अचीवमेंट के satisfactory रिजल्ट हो और
जिसने काफ़ी लोगो को अच्छी जॉब दिलवाई हो। ऐसे
ब्यूरो अक्सर कम होते है।
2. न्यूज़पेपर, बिजनस जर्नल्स, मैगजींस में
advertisement : आमतौर पर क्लासिफाइड ad
उन मामलो में संतोषजनक रिजल्ट देते है जहाँ क्लर्क
या सैलरी वाले आम पोजीशन के लिए अप्लाई किया
जाता है। उन लोगो के लिए डिस्प्ले एडवरटाइजिंग
ज़रूरी है, जो एग्जीक्यूटिव पोजीशन चाहते है। यह
ad न्यूजपेपर के ऐसे सेक्शन में छापना चाहिए

 

 

Ruchi Kumari:
जाता हा उन लागा क लए डस्प्ल एडवरटाइजिग
ज़रूरी है, जो एग्जीक्यूटिव पोजीशन चाहते है। यह
ad न्यूज़पेपर के ऐसे सेक्शन में छापना चाहिए
जहाँ employer का ध्यान इसकी तरफ एकदम चला
जाए। यह ad किसी एक्सपर्ट द्वारा तैयार किया जाना
चाहिए, जो अच्छी तरह से जानता है कि किस तरह से
selling qualities chulsche PRCT Gig anlah
पॉजिटिव जवाब हासिल हो सके।
3. एप्लीकेशन के पर्सनल लैटर, जो सीधे उन फर्स या
लोगों को लिखे जाए, जहाँ ऐसी सर्विसेज की ज़रुरत
हो : इन लेटर्स को अच्छी तरह से साफ टाइप करवाया
जाए और इन पर हाथ से साइन किए जाए।
लैटर के साथ applicant की क्वालिफिकेशन
का पूरा डिटेल होना चाहिए। एप्लीकेशन लैटर और
एक्सपीरियंस या क्वालिफिकेशन डिटेल्स दोनों ही
किसी एक्सपर्ट द्वारा तैयार किया जाना चाहिए।
4. पर्सनल जान पहचान के द्वारा एप्लीकेशन : जहाँ
तक संभव हो, एप्लिकेंट को किसी जान पहचान के
इंसान के ज़रिए से पोटेंशियल employer के पास
एप्लीकेशन भेजना चाहिए। इस तरीके से उन लोगो को
खास फ़ायदा होता है, जो एग्जीक्यूटिव कनेक्शन चाहते
है और अपनी तारीफ खुद नहीं करना चाहते है।
5. ख़ुद एप्लीकेशन देना : कई मामलो में यह ज़्यादा

5. ख़ुद एप्लीकेशन देना : कई मामलो में यह ज़्यादा
इफेक्टिव होता है कि applicant खुद ही पोटेंशियल
employer को पर्सनल रूप से अपनी सर्विसेज
दे। जिस सिचुएशन में उस पोजीशन के लिए ज़रूरी
क्वालिफिकेशन का पूरा डिटेल दिया जाना चाहिए
क्योंकि employer अकसर पोटेंशियल एम्प्लाइज के
रिकॉर्ड के बारे में अपने साथियों से चर्चा करना पसंद
करते है।
written ब्रीफ में क्या इनफार्मेशन दी जाए
ब्रीफ उतनी ही सावधानी से तैयार किया जाना चाहिए,
जितनी सावधानी से वकील कोर्ट में चल रहे अपने केस
का ब्रीफ तैयार करता है। जब तक कि applicant
को इस तरह के ब्रीफ तैयार करने का एक्सपीरियंस
न हो। एक्सपर्ट की राय ली जानी चाहिए और इसके
लिए उसकी सर्विस ली जानी चाहिए। सक्सेसफुल
बिजनेसमैन ऐसे लोगो को जॉब पर रखते है, जो अपने
प्रोडक्ट की खासियत को advertise करने का आर्ट
और माइंडसेट को समझते है। जिसे अपनी पर्सनल
सर्विसेज बेचनी हो, उन्हें भी यही करना चाहिए ब्रीफ में
नीचे बताई गई जानकारी होनी चाहिए।
1. एजुकेशन : शोर्ट में लेकिन क्लियर रूप से लिखे कि
आपकी एजुकेशन कहाँ तक है, आपने कॉलेज मे किन
सब्जेक्ट्स में स्पेशलाइजेशन हासिल की है और उस
स्पेशलाइजेशन के पीछे के कारण भी बताएँ।

1. एजुकेशन : शोर्ट में लेकिन क्लियर रूप से लिखे कि
आपकी एजुकेशन कहाँ तक है, आपने कॉलेज मे किन
सब्जेक्ट्स में स्पेशलाइजेशन हासिल की है और उस
स्पेशलाइजेशन के पीछे के कारण भी बताएँ।
2. एक्सपीरियंस : अगर आपको उस तरह की जॉब
का कोई एक्सपीरियंस है, जिसके लिए आप अप्लाई
कर रहे है तो पूरी तरह से उसके बारे में बताएं और
अपने पहले के employers के नाम और एड्रेस भी
लिखे। यह पक्का लिखें कि आपको उस पोजीशन पर
किस तरह के काम का स्पेशल एक्सपीरियंस है, जिस
वजह से आप उस पोजीशन के लिए ज़्यादा काबिल है,
जिसके लिए आप अप्लाई कर रहे है।
3. Reference : लगभग हर बिजनस फर्म उन
पोटेंशियल एम्प्लाइज के पिछले रिकॉर्ड के बारे में सब
कुछ जानना चाहती है, जो जिम्मेदारी के पोजीशन के
लिए अप्लाई करते है। अपने ब्रीफ के साथ इन लोगो के
पन्नो की xerox कॉपी लगा दे।
(अ) पुराने employeri
(ब) वे टीचर्स जिनसे आपने पढ़ा है।
(स) जाने माने लोग जिनकी बात पर भरोसा किया जा
सकता है।
4. किसी exact पोस्ट के लिए एप्लीकेशन दे :
अप्लाई करते समय यह बताना न भूले कि आप उस
मोनी निाराजीने ते है। नि.सी भी

4. किसी exact पोस्ट के लिए एप्लीकेशन दे :
अप्लाई करते समय यह बताना न भूले कि आप उस
पोजीशन के लिए एप्लीकेशन दे रहे है। ‘किसी भी
पोजीशन’ के लिए अप्लाई न करें। इससे यह समझा
जाएगा कि आपमें स्पेशलाइज्ड क्वालिफिकेशन की
कमी है।
5. जिस पोजीशन के लिए आप एप्लीकेशन दे रहे है,
उसके लिए अपनी क्वालिफिकेशन के बारे में बताएं :
पूरी डिटेल दें कि आपको यह विश्वास है कि आप उस
पोजीशन के लिए पूरी तरह काबिल है। यह आपके
एप्लीकेशन का सबसे इम्पोर्टेन्ट डिस्क्रिप्शन है। किसी
भी दूसरी जानकारी की तुलना में यह जानकारी
डिसाइड करेगी कि आपको चुना जाएगा या नहीं।
6. ट्रायल या टेस्ट पीरियड पर काम करने का ऑफर
रखें:
: यह एक रेवोल्युशनरी सुझाव लग सकता है,
लेकिन एक्सपीरियंस ने यह साबित किया है कि इससे
कम से कम एक मौका ज़रूर मिलता है। अगर आपको
अपनी क्वालिफिकेशन पर विश्वास है तो आपको
सिर्फ एक मौके की ही तो जरुरत है। साथ ही इस
तरह के ऑफर से यह पता चलता है कि आपको उस
पोजीशन पर काम करने की अपनी काबिलियत पर
विश्वास है, जिसके लिए आप अप्लाई कर रहे है। इससे
employer को सबसे ज़्यादा विश्वास होता है। इस
फैक्ट कोक्लियर करें कि आपका ऑफर इन बातों पर
बेस्ड है।

employer को सबसे ज़्यादा विश्वास होता है। इस
फैक्ट कोक्लियर करें कि आपका ऑफर इन बातों पर
बेस्ड है।
(अ) आपको उस पोजीशन के लिए अपनी काबिलियत
पर विश्वास है।
(ब) आपको अपने पोटेंशियल employer के फैसले
पर भी विश्वास है कि वह आपको ट्रायल पीरियड का
मौका देने के बाद जॉब देगा।
7. अपने पोटेंशियल employer के बिजनस
का नॉलेज : किसी भी जॉब के लिए अप्लाई करते
समय उस बिजनस के बारे में पूरी रिसर्च कर ले और
जानकारी हासिल कर ले। अपने ब्रीफ में यह बताएं
कि आपने उस फील्ड में क्या नॉलेज हासिल किया है।
इससे बहुत फर्क पड़ेगा क्योंकि इससे यह पता चलता
है कि आपमें इमेजिनेशन है और उस पोजीशन को
हासिल करने में आपका सच में इंटरेस्ट है।
एक बार आपने अपना ब्रीफ तैयार कर लिया तो फिर
इसे एक अच्छे कागज पर प्रिंट करा लीजिए। एक बार
ध्यान से grammer देख ले, स्पेलिंग मिस्टेक चेक
कर ले। ऊपर दिए गए सुझावों का अपनी बुद्धि द्वारा
जहाँ भी ज़रूरी लगे, फॉलो करे।
सक्सेसफुल सेल्समेन अपने पहनावे पर ध्यान देते है।
वे जानते है कि पहला इम्प्रैशन हमेशा बना रहता है।

सक्सेसफुल सेल्समेन अपने पहनावे पर ध्यान देते है।
वे जानते है कि पहला इम्प्रैशन हमेशा बना रहता है।
आपका ब्रीफ आपका सेल्समेन है। इसे अच्छा सा सूट
पहनाएँ ताकि यह दूसरो से अलग दिख सके, ताकि
आपका पोटेंशियल employer कहे कि उन्होंने
आज तक इस तरह का ब्रीफ नहीं देखा, जो किसी
पोजीशन के लिए एप्लीकेशन के साथ आया है। अगर
आप जिस पोजीशन के लिए कोशिश कर रहे हैं वह
इम्पोर्टेन्ट है तो उसके लिए सावधानी से तैयारी करना
भी इम्पोर्टेन्ट है। इससे भी बड़ी बात यह कि अगर आप
अपने employer को खुद को इस तरीके से बेचते
हैं कि वह आपसे इम्प्रेस हो जाता है तो आपको शायद
शुरुआत में ही उससे ज़्यादा मिलने लगे जिसकी आपने
उम्मीद की है।
अगर आप एडवरटाइजिंग एजेंसी या एम्प्लॉयमेंट
एजेंसी के ज़रिए से जॉब ढूँढ रहे हैं तो अपने एजेंट से
अपने ब्रीफ की कॉपी इस्तेमाल करने को कहें ताकि
आपकी सर्विसेज की बेहतर मार्केटिंग हो सके। इससे
एजेंट और पोटेंशियल employer दोनों ही आपको
प्रायोरिटी देने लगेंगे।
वही पोजीशन कैसे पाए जो आप चाहते है
हर आदमी उस तरह का काम करना पसंद करता है
जिसके लिए वह सबसे ज़्यादा फ़िट होता है . पेंटर रंगों
से काम करना पसंद करता है. आर्टिस्ट हाथो से काम

हर आदमी उस तरह का काम करना पसंद करता है
जिसके लिए वह सबसे ज़्यादा फ़िट होता है . पेंटर रंगों
से काम करना पसंद करता है, आर्टिस्ट हाथो से काम
करना पसंद करता है और ऑथर लिखना पसंद करता
है। जिनके पास काम की क्लियर quality होती है वे
बिजनस और इंडस्ट्री के किसी सेक्टर को प्रायोरिटी देते
है। अगर अमेरिका में कोई बहुत बढिया चीज है तो वह
यह है कि यहाँ पर बिज़नेस, प्रोडक्शन, मार्केटिंग और
प्रोफेशन की पूरी सीरीज़ मौजूद है।
1. यह तय कर लें कि आप किस तरह की जॉब चाहते
है। अगर वह जॉब या पोजीशन रियलिटी में मौजूद नहीं
है तो शायद आप उन्हें मौजूदगी में ला सकते हैं।
2. उस कंपनी या आदमी को चुन लें, जिसके लिए आप
काम करना चाहते हैं।
3. अपने पोटेंशियल employer का और साथ
ही उस कंपनी की policy, स्टाफ और ग्रोथ की
opportunity के बारे में स्टडी करें।
4. ख़ुद का, ख़ुद के गुणों और एबिलिटी के बारे में
बताएं और यह जाने कि आप क्या दे सकते हैं। उन
फ़ायदों, सर्विसेज, डेवलपमेंट, आइडियाज को देने के
तरीके खोजें जिनके बारे में आपको विश्वास है कि आप
उन्हें successfully दे सकते हैं।

5. जॉब के बारे में भूल जाएँ। भूल जाएँ कि वहाँ पर
कोई संभावना है या नहीं। ‘क्या आपके पास मेरे लिए
कोई जॉब है? ‘ के आम रूटीन को भूल जाएँ। इस बात
पर ध्यान फोकस करें कि आप क्या दे सकते है।
6. एक बार आप अपने दिमाग में प्लान बना लें तो
किसी एक्सपीरियंस्ड ऑथर से कागज पर साफ तरीके
से और पूरे डिटेल से लिखवा लें।
7. इसे सही पोजीशन पर बैठे इंसान के सामने प्रेजेंट
करें और बाकी का काम वह कर देगा। हर कंपनी ऐसे
लोगो की तलाश में है, जो उनके लिए कुछ इम्पोर्टेन्ट
काम कर सके, चाहे वह काम आईडिया के संबंध में
हो या या फिर सर्विसेज या कनेक्शन के संबंध में हो।
हर कंपनी में ऐसे आदमी के लिए हमेशा जगह होती है,
जिसके पास एक फिक्स्ड वर्क प्लान हो, जिससे उस
कंपनी को फ़ायदा पहुँच सके।
जब आप इस तरह से काम करेंगे तो हो सकता है कि
इसमें कुछ दिन या कुछ हफ़्तों का एक्स्ट्रा समय लग
जाए, लेकिन इसकी वजह से आपकी इनकम, ग्रोथ
और reputation में जो फ़र्क होगा, वह कम सैलरी
पर कड़ी मेहनत के आपके कई साल बचा देगा। इसके
कई फायदे हैं, जिनमें सबसे इम्पोर्टेन्ट है कि इससे
अकसर आपके चुने हुए गोल तक पहुँचने में आपका
एक साल से लेकर पाँच साल तक का समय बच जाता
है।

राजा ISINITI
7. इसे सही पोजीशन पर बैठे इंसान के सामने प्रेजेंट
करें और बाकी का काम वह कर देगा। हर कंपनी ऐसे
लोगो की तलाश में है, जो उनके लिए कुछ इम्पोर्टेन्ट
काम कर सके, चाहे वह काम आईडिया के संबंध में
हो या या फिर सर्विसेज या कनेक्शन के संबंध में हो।
हर कंपनी में ऐसे आदमी के लिए हमेशा जगह होती है,
जिसके पास एक फिक्स्ड वर्क प्लान हो, जिससे उस
कंपनी को फ़ायदा पहुँच सके।
जब आप इस तरह से काम करेंगे तो हो सकता है कि
इसमें कुछ दिन या कुछ हफ़्तों का एक्स्ट्रा समय लग
जाए, लेकिन इसकी वजह से आपकी इनकम, ग्रोथ
और reputation में जो फ़र्क होगा, वह कम सैलरी
पर कड़ी मेहनत के आपके कई साल बचा देगा। इसके
कई फायदे हैं, जिनमें सबसे इम्पोर्टेन्ट है कि इससे
अकसर आपके चुने हुए गोल तक पहुँचने में आपका
एक साल से लेकर पाँच साल तक का समय बच जाता
है।
जो इंसान प्रोग्रेस की सीढ़ी पर आधी ऊँचाई से शुरुआत
करता है, वह सावधानी से बनाए गए प्लान के द्वारा
ऐसा करता है।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
सर्विसेज की मार्केटिंग का नया तरीका
जो लोग फ्यूचर में अपनी सर्विसेज की मार्केटिंग बेहतर
तरीके से करना चाहते है, उन्हें यह समझ लेना चाहिए
कि employer और एम्प्लॉई के रिश्ते अब पहले
जैसे नहीं रहे, बल्कि बदल चुके हैं।
employers और उनके एम्प्लाइज के बीच फ्यूचर
रिलेशनशिप एक पार्टनरशिप के रूप में होंगे-
1. employer
2. एम्प्लोई
3. पब्लिक जिसे वे सर्विस देते हैं।
पर्सनल सर्विसेज की मार्केटिंग के नए तरीके को
कई कारणों से नया कहा जाता है। पहला कारण यह
कि फ्यूचर में employer और एम्प्लॉई दोनों ही,
colleagues या साथ काम करने वाले समझे जाएँगे,
जिनका बिजनस है पब्लिक को बेहतर सर्विस देना।
पुराने जमाने में employer और एम्प्लॉई आपस में
ही सौदेबाजी कर लिया करते थे ताकि उन्हें एक दूसरे
से ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा हो सके और वे इस बात
पर विचार नहीं करते थे कि फाइनल एनालिसिस में वे

पर विचार नहीं करते थे कि फाइनल एनालिसिस में वे
दरअसल ऐसा तीसरी पार्टी की कीमत पर कर रहे थे,
यानी कि पब्लिक जिन्हें वो सर्व कर रहे थे।
तहज़ीब या etiquette और सर्विस आज बिज़नेस के
popular शब्द है और वे उस आदमी पर ज़्यादा लागू
होते हैं, जो पर्सनल सर्विसेज की मार्केटिंग कर रहा है
बजाय उस employer के जिसकी वह सर्विस कर
रहा है। इसका कारण यह है कि फाइनल एनालिसिस
में employer और उसका एम्प्लॉई दोनों ही पब्लिक
द्वारा काम पर रखे गए हैं, जिसकी वे सेवा कर रहे है।
अगर वे अच्छी सर्विस देने में सक्सेसफुल नहीं होते तो
उन्हें सर्विस करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
आपकी QQS रेटिंग क्या है
सर्विसेज की इफेक्टिव मार्केटिंग में सक्सेस के कारण
क्लियर रूप से और डिटेल से बता दिए गए है। जब
तक इन कारणों को स्टडी और एनालाइज नहीं किया
जाता और जब तक उन्हें समझा नहीं जाता तब तक
कोई भी आदमी अपनी सर्विसेज को इफेक्टिव ढंग से
और परमानेंट रूप से नहीं बेच सकता। हर आदमी को
अपनी पर्सनल सर्विसेज का सेल्समेन होना चाहिए।
सर्विस की क्वालिटी, क्वांटिटी और भावना काफी
हद तक सैलरी और जॉब के समय को तय करती है।
पर्सनल सर्विसेज की इफेक्टिव मार्केटिंग के लिए
(जिसका मतलब है परमानेंट मार्किट, satisfactory

दाम,
(जिसका मतलब है परमानेंट मार्किट, satisfactory
हैप्पी सिचुएशन) आपको QQS फार्मूला
अपनाना चाहिए और उसको फॉलो करना चाहिए,
जिसका मतलब है
क्वालिटी + क्वांटिटी + सहयोग की सही भावना >
सर्विस की आदर्श सेल्समैनशिप। QQS फॉर्मूले को
याद रखे या इससे भी ज़्यादा करे, इसकी आदत डाल
लें।
आइए हम इस फॉर्मूले का एनालाइज करें ताकि हमें
यकीन हो सके कि हम इसका मतलब ठीक ठीक समझ
गए है।
१. क्वालिटी : सर्विस की क्वालिटी का मतलब है
पोजीशन से रिलेटेड हर डिटेल में सबसे इफेक्टिव और
efficient तरीके से परफॉर्म करना और मन में हमेशा
ज़्यादा efficiency का aim रखना.
2. क्वांटिटी : सर्विस की क्वांटिटी का मतलब है, हमेशा
अपनी एबिलिटी के हिसाब से पूरी सर्विस देना। आपका
गोल होना चाहिए सर्विस की क्वांटिटी को बढ़ाना।
प्रैक्टिस और एक्सपीरियंस के द्वारा आप अपनी
एबिलिटी और स्किल्स को डेवलप कर सकते है। एक
बार फिर आदत शब्द पर जोर दिया जा रहा है।
3. स्पिरिट : सर्विस की स्पिरिट या भावना का मतलब है

3. स्पिरिट : सर्विस की स्पिरिट या भावना का मतलब है
खुशनुमा, तालमेल का व्यवहार जिससे साथ काम करने
वालों का सहयोग हासिल हो सके।
आपकी सर्विस की क्वालिटी और क्वांटिटी ही आपकी
सर्विस के लिए परमानेंट मार्केट बनाए रखने के लिए
काफ़ी नहीं है। आप अपनी सर्विस किस भावना से
करते है या सर्विस करते समय आपका व्यवहार कैसा है
यह एक बहुत इम्पोर्टेन्ट फैक्टर है। इससे न सिर्फ सर्विस
के बदले में मिलने वाले पेमेंट पर असर होता है, बल्कि
जॉब के duration पर भी असर होता है।
एंड कार्नेगी ने इस point पर बहुत जोर दिया था।
उनका कहना था कि पर्सनल सर्विस की मार्केटिंग
में सक्सेस की तरफ ले जानेवा ले फैक्टर्स में बाकी
फैक्टर्स की तुलना में यह सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट फैक्टर
है। उन्होंने तालमेल के व्यवहार की ज़रुरत पर बार बार
जोर दिया। उन्होंने इस फैक्ट पर जोर दिया कि उन्होंने
ऐसे किसी आदमी को कभी जॉब पर नहीं रखा, जो
तालमेल और सहयोग की भावना से काम न कर सकता
हो, चाहे उसके काम की क्वालिटी कितनी ही इफेक्टिव
हो और चाहे उसके काम की क्वांटिटी कितनी ही
ज़्यादा क्यों न हो।
कार्नेगी ने लोगो के खुशनुमा होने पर जोर दिया। यह
गुण कितना इम्पोर्टेन्ट है यह साबित करने के लिए
उन्होंने कई ऐसे लोगो की, जो उनके स्टैण्डर्ड पर खरे

कानगा न लागा के खुशनुमा हान पर जार दिया। यह
गुण कितना इम्पोर्टेन्ट है यह साबित करने के लिए
उन्होंने कई ऐसे लोगो की, जो उनके स्टैण्डर्ड पर खरे
उतारते थे, बहुत अमीर बनने में मदद की। जो लोग खरे
नहीं उतर पाए उन्हें अपनी जगह दूसरो के लिए खाली
करनी पड़ी।
विनम्र पर्सनालिटी के इम्पोर्टेस को इसलिए अंडरलाइन
किया गया है क्योंकि इसी फैक्टर के कारण आप सही
भावना से सर्विस कर पाते है। अगर आपकी पर्सनालिटी
ऐसी है, जो pleasing है और सर्विस को नेकनीयत
की भावना से देता है तो इस गुण के कारण सर्विस की
क्वालिटी और क्वांटिटी में कमी की अकसर भरपाई हो
जाती है। कोई भी चीज सुखद व्यवहार की जगह नहीं
ले सकती।
आपकी सर्विसेज की कैपिटल वैल्यू
वह इंसान जिसकी इनकम पूरी तरह पर्सनल सर्विस
की सेल से हासिल होती है वह बिजनेसमैन की तरह
है जो सामान बेचता है। साथ में यह जोड़ना भी सही
होगा कि उस इंसान पर भी व्यवहार के वही रूल लागू
होंगे, जो रूल सामान बेचनेम वाले बिजनेसमैन पर लागू
होंगे।
इस बात पर जोर इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि जो
लोग पर्सनल सर्विस को बेचकर पैसा कमाते है, उनमे
से ज़्यादातर अकसर यह मानने की गलती करते है कि

लोग पर्सनल सर्विस को बेचकर पैसा कमाते है, उनमे
से ज़्यादातर अकसर यह मानने की गलती करते है कि
उन पर सामान की मार्केटिंग करने वाले बिजनेसमैन की
तरह व्यवहार के रूल लागू नहीं होते।
अब सिर्फ लीजिये (Co-getter) के दिन गुजर गए
है। अब ‘दीजिए! (Go-Giver) के दिन आ गए है।
आपके मन की रियल कैपिटल वैल्यू क्या है, यह आप
उस दिन इनकम की अमाउंट द्वारा तय कर सकते
हैं, जो आप अपनी सर्विसेज की मार्केटिंग द्वारा कमाते
है। आपकी सर्विसेज की कैपिटल वैल्यू का सही
अनुमान इस तरह से लगाया जा सकता है कि आप
अपनी yearly इनकम को 6.66 से गुना कर दे।
यह अनुमान लगाना सही होगा कि आपकी yearly
इनकम आपकी कैपिटल बैल्यू की 6 परसेंट है। पैसा
पर 6 परसेंट हर साल इंटरेस्ट मिलता है। पैसा मन
से ज़्यादा कीमती नहीं है। अक्सर मन पैसा से ज़्यादा
कीमती होता है।
इफेक्टिव माइंड की अगर इफेक्टिव ढंग से मार्केटिंग
की जाए तो यह कैपिटल का ज़्यादा इफेक्टिव रूप
दिखाता है, जिसकी सामान बेचने के बिजनस में जरुरत
होती है। मन कैपिटल का एक ऐसा रूप है, जो मंदी के
दौर में परमानेंट रूप से डेप्रिसिएशन का शिकार नहीं
होता, न ही कैपिटल के रूप की चोरी की जा सकती है,
न ही इसे खर्च किया जा सकता है। यही नहीं, जो पैसा
बिजनस करने के लिए ज़रूरी है वह तक धूल के कण

बिजनस करने के लिए ज़रूरी है वह तक धूल के कण
की तरह बेकार है, जब तक कि इसे काबिल मन के
साथ न जोड़ा जाए।
फेलियर के तीस main कारण इनमे से कितने
आपको पीछे धकेल रहे है?
जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बहुत से लोग
सच में कोशिश करते है और फेल होते है।
विडंबना यह है कि ज्यादातर लोग फेल होते है और
बहुत कम लोग ही सक्सेसफुल हो पाते है।
मुझे एक बार हजारों लड़के-लड़कियों को एनालाइज
का मौका मिला और उनमे से 99% लोग फेल लोगो
की category में थे।
मेरे एनालिसिस ने यह साबित किया कि फेलियर के
पीछे 30 main कारण होते है। एनालिसिस से वे 43
main प्रिंसिप्ल भी सामने आए, जिनके द्वारा लोग
दौलत इकट्ठी कर सकते है।
1. नुक्सान पहुंचाने वाले जेनेटिक बैकग्राउंड : ऐसे
लोगो का कुछ नहीं किया जा सकता, जिनके मन की
शक्ति कमजोर हो। यह फिलॉसफी इस कमजोरी को दूर
करने का सिर्फ एक ही तरीका सुझा सकती है–मास्टर
माइंड की मदद। बहरहाल इस बात का फ़ायदा उठाएँ
कि यह फेलियर के 30 कारणों में से इकलौता कारण
है निगेगा दाग भागानी गे हीं गाना गाना।

माइंड की मदद। बहरहाल इस बात का फ़ायदा उठाएँ
कि यह फेलियर के 30 कारणों में से इकलौता कारण
है, जिसे इंसान द्वारा आसानी से नहीं सुधार जा सकता।
2. जीवन में पूरी तरह से क्लियर गोल की कमी :
ऐसे आदमी के लिए सक्सेस की कोई आशा नहीं है,
जिसका कोई main गोल या फिक्स्ड गोल नहीं
होता, जिस पर वह निशाना साधे। मैंने जिन लोगो का
एनालिसिस किया, उनमें से 98 परसेंट के पास ऐसा
कोई गोल नहीं था। शायद यही उनके फेलियर का
main कारण था।
:
3, एवरेज दर्जे से ऊपर उठने की एम्बिशन की कमी :
हम ऐसे आदमी को कोई उम्मीद नहीं दे सकते, जो
निराश है और जीवन में आगे नहीं बढ़ना चाहता और
जिसमे कीमत चुकाने की इच्छा भी नहीं है।
4. अधूरी एजुकेशन : यह एक ऐसी कमी है, जिसे और
किसी चीज़ की तुलना में आसानी से पूरा किया जा
सकता है। एक्सपीरियंस से साबित हुआ है कि बेस्ट
educated लोग अकसर वे होते हैं, जो सेल्फ़-मेड
या सेल्फ़-educated होते हैं। educated इंसान
बनने के लिए सिर्फ कॉलेज की डिग्री ही काफी नहीं
होती। पढ़ा लिखा इंसान वह होता है, जिसने वह चीज
पाना सीख लिया, जो वह जीवन में पाना चाहता है और
इस प्रोसेस में वह दूसरो के अधिकारों को नुक्सान नहीं
पहुंचाता। एजुकेशन में सिर्फ नॉलेज ही शामिल नहीं है।

पहुंचाता। एजुकेशन में सिर्फ नॉलेज ही शामिल नहीं है।
लोगो को सिर्फ उनके नॉलेज के लिए पैसे नहीं मिलते,
बल्कि इस बात के लिए पैसे मिलते हैं कि वे अपने
नॉलेज का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
5. सेल्फ़-डिसिप्लिन की कमी : डिसिप्लिन ख़ुद पर
कंट्रोल करने से आता है। इसका मतलब यह है कि
इनसान को सभी नेगेटिव गुणों को कंट्रोल में रखना
चाहिए। सिचुएशन को कंट्रोल करने से पहले आपको
सबसे पहले खुद पर कंट्रोल रखना होगा। खुद को
डिसिप्लिन करना सबसे मुश्किल काम है। अगर आप
को नहीं जीत सकते, तो आप खुद से हार जाएँगे,
शीशे के सामने खड़े होने पर आपको अपना सबसे
अच्छा दोस्त और अपना सबसे बड़ा दुश्मन एक साथ
खड़ा नजर आएगा।
खुद
6. ख़राब हेल्थ : कोई भी इंसान अच्छी हेल्थ के बिना
एक्स्ट्राऑर्डिनरी सक्सेस का सुख नहीं भोग सकता।
ख़राब हेल्थ के कई कारणों पर काबू पाया जा सकता
है। इनमे main है-
(अ) हेल्थ के लिए हानिकारक खाना ज़्यादा क्वांटिटी
में खाना
(ब) विचार की बुरी आदतें : नेगेटिव बाते बोलना।
(स) हद से ज़्यादा सेक्स या उसका गलत इस्तेमाल
करना
(द) सही फिजिकल एक्सरसाइज की कमी

करना
(द) सही फिजिकल एक्सरसाइज की कमी
(इ) गलत तरीके से साँस लेने के कारण साफ़ हवा की
कमी
7. बचपन में बुरे माहौल का असर : जिस तरह
से पौधे को मोड़ा जाता है, उसी तरह पेड़ उगेगा।
क्रिमिनल tendency वाले ज़्यादातर लोगो की ऐसी
मानसिकता बुरे माहौल और बचपन की बुरी संगती का
रिजल्ट होता है।
8, टालमटोल : यह फेलियर के सबसे आम कारणों में
से एक है। टालमटोल करने वाला आदमी हर इनसान
की छाया में खड़ा रहता है और इंतजार करता है कि
कब उन्हें सक्सेस के मौक़ा को बिगाड़ने का मौका
मिले। हममें से ज़्यादातर लोग जीवन भर फेल होते
रहते है क्योंकि हम किसी इम्पोर्टेन्ट काम को करने
से पहले सही समय का इंतजार करते है। इंतजार मत
कीजिए। समय कभी पूरी तरह सही नहीं होगा। जहाँ
आप खड़े है वहाँ पर शुरू कर दीजिए और आपके पास
जो टूल्स हैं, उन्ही से काम करना शुरू कर दीजिए। जब
आप आगे बढ़ेंगे तो बेहतर टूल्स आपको अपने आप
मिल जाएँगे।
शुरू
9, लगन की कमी :: हममें से ज़्यादातर लोग शुरुआत
करने में तो अच्छे होते हैं लेकिन अपने शुरू किए गए
कामो को पूरा करने में बहुत कमजोर होते हैं। यही नहीं,
लोगो की राह आदत होती है कि ते हार की संभावना

9, लगन की कमी :; हममें से ज़्यादातर लोग शुरुआत
करने में तो अच्छे होते हैं लेकिन अपने शुरू किए गए
कामो को पूरा करने में बहुत कमजोर होते हैं। यही नहीं,
लोगो की यह आदत होती है कि वे हार की संभावना
नजर आते ही हिम्मत हार जाते है। लगन का कोई
आप्शन नहीं होता। वह इंसान जो लगन को अपना मंत्र
बनाता है यह देखता है कि फेलियर आखिरकार थक
चुकी है और उसके जीवन से हमेशा-हमेशा के लिए
दूर जा चुकी है। फेलियर लगन का मुकाबला नहीं कर
सकती।
10. नेगेटिव पर्सनालिटी : ऐसे आदमी के लिए सक्सेस
की कोई आशा नहीं है, जो नकारत्मक पर्सनालिटी
के कारण लोगो को अपने से दूर कर देता है। सक्सेस
शक्ति के इस्तेमाल के द्वारा आती है और शक्ति दूसरे
लोगो के
सहयोग और सपोर्ट के एफर्ट द्वारा हासिल की जाती
है। नेगेटिव पर्सनालिटी से सहयोग नहीं मिलता।
11. सेक्सुअल urge पर कंट्रोल का भाव : सेक्स की
एनर्जी उन सभी excite करने वाली energies
में सबसे पावरफुल है, जिनसे लोग काम के लिए
तैयार होते है। क्योंकि यह सबसे पावरफुल इमोशन
है इसलिए इसे कंट्रोल किया जाना चाहिए और
ट्रांसफॉर्मेशन के द्वारा दूसरे चैनलो में बदलना चाहिए।
12. कुछ दिए बिना के बदले बहुत कुछ पाने की

12. कुछ दिए बिना के बदले बहुत कुछ पाने की
uncontrolled इच्छा : जुए की लत लाखों लोगो
को एक फेलियर बना देती है। इसका सबूत 1929 के
वॉल स्ट्रीट क्रैश के स्टडी में पाया जा सकता है, जिस
दौरान लाखो लोगो ने स्टॉक पर gambling कर के
पैसा बनाने की कोशिश की थी।
13. सही फैसला लेने की शक्ति की कमी : जो लोग
सक्सेसफुल होते हैं, वे तुरंत फैसले पर पहुँचते है और
अगर वे उन decisions को बदलते है तो बहुत देर
से बदलते हैं। जो लोग फेल होते है, वे या तो फ़ैसला ही
नहीं ले पाते या फिर बहुत देर से फ़ैसला लेते है लेकिन
वे अकसर अपने फ़ैसला बदल लेते हैं और पल भर में
बदल लेते हैं।
झिझक और टालमटोल जुड़वाँ भाई है। जहाँ एक
मिलेगा, आम तौर पर दूसरा भी वहीं पर मिलेगा। इन
जुड़वाँ भाइयों को मार डालें, इससे पहले कि वे आपको
फेलियर के खूटे से बाँध दे।
14., छह बेसिक डरो में से एक या इससे ज़्यादा :
अंतिम चैप्टर में इन डरो को एनालाइज किया गया है।
अपनी सर्विसेज की इफेक्टिव मार्केटिंग करने से पहले
आपको इन डरो को जीतना होगा।
15. शादी में गलत जीवन साथी का चुनाव : यह
फेलियर का सबसे आम कारण है। शादी का रिश्ता

15. शादी में गलत जीवन साथी का चुनाव : यह
फेलियर का सबसे आम कारण है। शादी का रिश्ता
लोगो को बेहद करीब लाता है। जब तक यह रिश्ता
सुखी तालमेल का न हो, फेलियर यकीनन आपका
पीछा करेगी। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह
फेलियर का एक ऐसा रूप होगा, जिसमे दुःख और दर्द
है जो एम्बिशन के सभी गुणों को बर्बाद कर देंगे।
16. अति सावधानी : वह इंसान जो जरा भी रिस्क नहीं
लेता आमतौर पर उन्हें वही मिलता है, जो बचा रहता है
क्योंकि दूसरे लोग, जिन्होंने रिस्क लिया, अच्छी चीजे
चुनकर ले जा चुके हैं। अति सावधानी भी उतनी ही
बुरी है जितनी कि कम सावधानी। दोनों तरह की अति
से बचें। यह न भूले कि जीवन में रिस्क फैक्टर हमेशा
रहता है।
17. बिजनस में सहयोगियों का गलत चुनाव : यह
बिजनस में फेलियर के सबसे आम काएणों में से
एक है। पर्सनल सर्विस की मार्केटिंग में आपको ऐसा
employer चुनने में बहुत सावधानी बरतनी होगी,
जो आपको इंस्पिरेशन दे और जो ख़ुद बुद्धिमान
और सक्सेसफुल हो। हम उन लोगो को फॉलो करते
है, जिनके साथ हम करीबी कांटेक्ट में रहते है। ऐसा
employer चुने जो फॉलो करने लायक हो।

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18. अंधविश्वास और पहले ही कोई राय बना लेना :
अंधविश्वास डर का एक रूप है। यह नॉलेज की कमी
की निशानी भी है। जो लोग सक्सेसफुल होते हैं, वे
अपने मन में दिमाग खुले रखते हैं और किसी चीज से
नहीं डरते हैं।
19. बिज़नेस का गलत चुनाव : कोई आदमी किसी ऐसी
लाइन में सक्सेसफुल नहीं हो सकता, जिसे वह पसंद
न करता हो। पर्सनल सर्विस की मार्केटिंग में सबसे
इम्पोर्टेन्ट कदम है, एक ऐसा बिज़नेस चुनना जिसमें
आप अपने आपको पूरे excitement से झोंक सके।
20. एफर्ट में कंसंट्रेशन की कमी : सभी बिज़नेस की
थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाला इंसान किसी भी
बिज़नेस में एक्सपर्ट नहीं होता। अपने सभी efforts
को एक फिक्स्ड main गोल पर फोकस करें।
21. फिजूलखर्ची की आदत : फिजूलखर्च करने वाला
आदमी कभी सक्सेसफुल नहीं हो सकता और इसका
main कारण यह है कि वह हमेशा गरीबी के डर
में जीता है। अपनी इनकम में से एक फिक्स्ड परसेंट
हिस्सा अलग रखकर planned savings की
आदत डेवलप करें। जब आप पर्सनल सर्विसेज की सेल

मारप’NI III
में जीता है। अपनी इनकम में से एक फिक्स्ड परसेंट
हिस्सा अलग रखकर planned savings की
आदत डेवलप करें। जब आप पर्सनल सर्विसेज की सेल
में सौदेबाजी करेंगे तो बैंक में रखा पैसा आपके हिम्मत
की सुरक्षित फाउंडेशन स्टोन जैसा होगा। पैसे के बिना
आपको वह लेना होगा, जो आपको दिया जा रहा है
और आपको वह पाकर खुशी होगी।
22. जोश की कमी : जोश के बिना कोई भी विश्वास
नहीं जगा सकता। यही नहीं, जोश बड़ी तेज़ी से फैलता
है और जिसमें यह controlled स्टेट में होता है, उस
इंसान का आम तौर पर सभी लोग स्वागत करते है।
23, intolerance : intolerance का मतलब
यह है ऐसा इंसान जिसने नॉलेज हासिल करना बंद
कर दिया है। intolerance के सबसे ख़तरनाक रूप
धर्म, प्रजाति और पोलिटिकल विचारों में मतभेद से
संबंधित हैं।
24. सेल्फ़-कंट्रोल की कमी : सेल्फ़-कंट्रोल की कमी
के सबसे नुक्सान पहुंचाने वाले रूप खाना, शराब और
सेक्स की एक्टिविटीज से संबंधित है। इसमें से किसी में
भी अति सक्सेस के लिए खतरनाक होती है।
25, दूसरों के साथ सहयोग करने की कमी : ज्यादातर
लोग जीवन में अपने पोजीशन और बड़े मौक़ा इस
गलती के कारण गा देते हैं। इस कारण जितने लोग

फेल होते है, उतने बाकी सभी कारणो को मिला देने
पर भी नहीं होते। यह एक ऐसी गलती है, जो कोई भी
समझदार बिजनस का लीडर सहन नहीं करेगा।
26. शक्ति जिसे आपने अपने एफर्ट से हासिल न किया
हो : (अमीर लोगो के बेटे-बेटियाँ और बाकी लोग,
जिन्होंने पैसा विरासत में हासिल किया है और जिसे न
उन्होंने खुद कमाया है न ही वे उसके काबिल है। ) ऐसे
आदमी के हाथ में पॉवर, जिसे उन्होंने खुद धीरे-धीरे
हासिल न किया हो, सक्सेस के लिए खतरनाक होती
है। तुरंत और आसानी से बहुत पैसा मिल जाना, गरीबी
से भी ज़्यादा खतरनाक होती है।
27. जान बूझकर की गई बेईमानी : ईमानदारी कोई
चीज़ नहीं है जिसकी जगह कोई ले सके। सिचुएशन
के दबाव के कारण, जिन पर इनसान का कोई कंट्रोल
नहीं होता, कोई भी एक पल के लिए बेईमानी कर
सकता है और इससे कोई परमानेंट नुक्सान नही होगा।
लेकिन ऐसे आदमी के लिए कोई आशा नहीं है, जो
जान बूझकर बेईमानी का रास्ता चुनता है। देर सवेर
उन्हें अपने कर्मों का फल मिलेगा और इसका रिजल्ट
यह हो सकता है कि उसकी इज्ज़त मिट्टी में मिल जाए
या वह अपनी आज़ादी गवाँ बैठे।

बिजनस करने के लिए ज़रूरी है वह तक धूल के कण
की तरह बेकार है, जब तक कि इसे काबिल मन के
साथ न जोड़ा जाए।
फेलियर के तीस main कारण इनमे से कितने
आपको पीछे धकेल रहे है?
जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बहुत से लोग
सच में कोशिश करते है और फेल होते है।
विडंबना यह है कि ज्यादातर लोग फेल होते है और
बहुत कम लोग ही सक्सेसफुल हो पाते है।
मुझे एक बार हजारों लड़के-लड़कियों को एनालाइज
का मौका मिला और उनमे से 99% लोग फेल लोगो
की category में थे।
मेरे एनालिसिस ने यह साबित किया कि फेलियर के
पीछे 30 main कारण होते है। एनालिसिस से वे 43
main प्रिंसिप्ल भी सामने आए, जिनके द्वारा लोग
दौलत इकट्ठी कर सकते है।
1. नुक्सान पहुंचाने वाले जेनेटिक बैकग्राउंड : ऐसे
लोगो का कुछ नहीं किया जा सकता, जिनके मन की
शक्ति कमजोर हो। यह फिलॉसफी इस कमजोरी को दूर
करने का सिर्फ एक ही तरीका सुझा सकती है–मास्टर
माइंड की मदद। बहरहाल इस बात का फ़ायदा उठाएँ
कि यह फेलियर के 30 कारणों में से इकलौता कारण
है निगेगा दाग भागानी गे हीं गाना गाना।

फेलियर के 30 main कारणों में जीवन की विडंबना
का डिस्क्रिप्शन मिलता है, जो लगभग हर उस आदमी
के बारे में सही है, जिसने कोशिश की है और जो फेल
हुआ है। यह मददगार होगा. अगर आप किसी ऐसे
इंसान को इंस्पायर कर सके, जो आपको अच्छी तरह
से जानता हो कि वह आपके साथ इस लिस्ट को पढ़े
और फेलियर के 30 कारणों के context में आपका
एनालिसिस करे। अगर आप इसे अकेले आजमाना
चाहते हैं तो भी कोई हर्ज नहीं है। लेकिन ज्यादातर
लोग अपने आपको उस तरह से नहीं देख पाते, जिस
तरह से दूसरे लोग उन्हें देखते हैं। हो सकता है कि आप
भी उनमें से हो, जो ऐसा नहीं कर पाते।
सबसे पुरानी सलाह है ‘इनसान, अपने आपको
जानो!!” अगर आप प्रोडक्ट को successfully
बेचना चाहते हैं तो आपको प्रोडक्ट की नॉलेज होनी
चाहिए। यह पर्सनल सर्विसेज की मार्केटिंग के बारे में
भी उतना ही सही है। आपको अपनी सारी कमजोरियाँ
पता होनी चाहिए ताकि या तो आप उन पर पुल बना
सके या उन्हें पूरी तरह दूर कर सके।
आपको अपनी ताकत भी मालूम होनी चाहिए ताकि
आप अपनी सर्विस बेचते समय उनकी तरफ सामनेवाले
का ध्यान अट्रैक्ट कर सके। आप अपने आपको सिर्फ
सटीक एनालिसिस के द्वारा ही जान सकते है।
अपने बारे में अज्ञान की मूर्खता एक लड़के ने दिखाई,
——–

अपने बारे में अज्ञान की मूर्खता एक लड़के ने दिखाई,
जब उसने एक पोस्ट के लिए एक फ़ेमस बिजनस
मेनेजर के पास एप्लीकेशन दिया। उसने तब तक तो
अच्छा इम्प्रैशन जमाया जब तक उससे यह नहीं पूछा
गया कि वह कितनी सैलरी की उम्मीद करता है। उसने
जवाब दिया कि उसने अपने दिमाग में कोई फिक्स्ड
अमाउंट नहीं सोची थी (फिक्स्ड गोल की कमी), मेनेजर
ने इस पर कहा ‘हम आपको उतनी सैलरी देंगे जितना
हम सोचते है, लेकिन इसके पहले हम एक हफ्ते तक
आपका काम देखेंगे।’
‘मैं यह नहीं स्वीकार करूँगा।’ उस लड़के ने जवाब दिया
“जहाँ मैं काम कर रहा हूँ वहाँ पर मुझे उससे ज्यादा
मिलते है।’
इससे पहले कि आप अपने करंट जॉब की सैलरी को
बढाने के बारे में सौदेबाजी करें या कहीं और जॉब की
तलाश करें यह पक्का कर लें कि आपको अभी जितना
मिलता है, आपकी वैल्यू उससे ज़्यादा है।
पैसा चाहना बात अलग है, हर आदमी ज्यादा पैसा
चाहता है। लेकिन यह पूरी तरह से अलग बात है कि
आपकी वैल्यू ज़्यादा हो! कई लोग अपनी इच्छाओ
को अपनी सही सैलरी मानने की गलती कर बैठते है।
आपकी फाइनेंसियल ज़रूरतों या इच्छाओ का आपके
वैल्यू से कोई लेना देना नहीं है। आपकी वैल्यू इस बात
पर पूरी तरह से डिपेंड करती है कि आप काम की
सर्विस देने में कितने काबिल है या आपमें दूसरो को इस

पर पूरी तरह से डिपेंड करती है कि आप काम की
सर्विस देने में कितने काबिल है या आपमें दूसरो को इस
तरह से सर्विस देने के लिए इंस्पायर करने की कितनी
काबिलियत है।
अपने आप की एक लिस्ट बनाए 28 सवाल जिनका
आपको जवाब देना चाहिए
Annual सेल्फ़-एनालिसिस पर्सनल सर्विसेज की
इफेक्टिव मार्केटिंग के लिए भी उतना ही ज़रूरी है,
जितना की प्रोडक्ट का yearly लिस्ट बनाना। इससे
भी बड़ी बात यह है कि annual एनालिसिस में
आपकी गलतियों में कमी और आपके गुणों में ग्रोथ
होनी चाहिए। जीवन में आदमी या तो आगे बढ़ता है,
या उसी जगह पर खड़ा रहता है या फिर पीछे रह जाता
है। इनसान का गोल हमेशा आगे बढ़ना होना चाहिए।
annual सेल्फ़-एनालिसिस बताएगा कि प्रोग्रेस हुई
है या नहीं और अगर हुई है तो कितनी हुई है। इससे यह
भी पता चलेगा कि आपने कहीं कोई कदम पीछे की
तरफ तो नहीं उठाया है। पर्सनल सर्विस की इफेक्टिव
मार्केटिंग के लिए आगे की तरफ बढ़ना ज़रूरी है चाहे
प्रोग्रेस की रफ्तार धीमी ही क्यों न हो।
आपका annual सेल्फ़-एनालिसिस हर साल के अंत
में किया जाना चाहिए ताकि आप इसमें किए जानेवाले
किसी भी सुधार को नए साल के डिसिशन में शामिल
कर सके। यह सुधार आपको एनालिसिस के बाद समझ

किसी भी सुधार को नए साल के डिसिशन में शामिल
कर सके। यह सुधार आपको एनालिसिस के बाद समझ
में आएंगे।
अपने आप की लिस्ट बनाते समय खुद से नीचे दिए गए
सवाल पूछे और अपने जवाबो को चेक करते समय
किसी ऐसे आदमी की मदद ले, जो आपको इस बारे में
खुद को धोखा न देने दे।
पर्सनल लिस्ट के लिए सेल्फ़-एनालिसिस
questionnaire
1. क्या मैंने वह गोल हासिल कर लिया है, जो मैंने
इस साल बनाया था? (आपको हर साल एक फिक्स्ड
annual गोल बनाना चाहिए, जो आपके जीवन के
main गोल का एक हिस्सा हो |
2. क्या मैंने बेस्ट क्वालिटी की वह सर्विस दी है, जिसे
देने में मैं काबिल हूँ या क्या मैंने इस सर्विस के किसी
हिस्से में सुधार किया है?
3. क्या मैंने सर्विस में वह बेस्ट पॉसिबल क्वांटिटी दी
है, जो मैं दे सकता हूँ?
4. क्या मेरे का भाव हमेशा तालमेल और सहयोग का
रहा है?
5. क्या मैंने टलमटोल की आदत को अपनी
efficiency में कमी करने की इजाजत दी है और
ܒܪܗܕܤܗܟ

5. क्या मैंने टलमटोल की आदत को अपनी
efficiency में कमी करने की इजाजत दी है और
अगर ऐसा है तो किस हद तक?
6. क्या मैंने अपने पर्सनालिटी में सुधार किया है और
अगर हाँ तो किन तरीको से?
7. कया मैंने अपनी प्लानिंग को लगन से अंत तक
successfully पूरा किया है?
8. क्या मैंने हमेशा तुरंत और सही फैसला लिए है?
9. क्या मैंने छह बेसिक डरो में से एक या इससे ज़्यादा
को अपनी एफिशिएंसी में कमी करने की इजाजत दी
है?
10. क्या मैं कभी अति सावधान या कम सावधान रहा
17. क्या काम की जगह पर मेरे सहयोगियों के साथ मेरे
संबंध अच्छे हैं या बुरे? अगर यह बुरे हैं तो क्या गलती
थोड़ी या पूरी तरह से मेरी है?
12. क्या मैंने एफर्ट में कंसंट्रेशन की कमी की वजह से
अपनी एनर्जी को यूहीं गवाँया है?
13. क्या मैं सभी टॉपिक में खुले दिमाग का और
tolerant रहा हूँ?
14. मैंने सर्विस देने की अपनी काबिलियत में किस
तरह सुधार किया है?
15. क्या मैंने अपनी किसी आदत में intolerance
का परिचय दिया है?

16. क्या मैंने किसी भी रूप में या तो खुलकर या सीक्रेट
रूप से अहंकार दिखाया है?
17. क्या अपने सहयोगियों के प्रति मेरा व्यवहार ऐसा है,
जिससे वे मेरा सम्मान करने के लिए इंस्पायर हो?
18. क्या मेरे विचार और फ़ैसला अंदाजे पर बेस्ड है या
फिर एनालिसिस और सटीक विचारों पर बेस्ड है?
19. क्या मैंने अपने समय, अपने खर्च और अपनी
इनकम का बजट बनाने की आदत को फॉलो किया है
और क्या मैं इन बजटों में conservative रहा
हूँ?
20. मैंने कितना समय बेकार की कोशिशों में लगाया है,
जिसका मैं बेहतर फ़ायदा उठा सकता था?
21. मैं अपने समय का किस तरह से नया बजट बना
सकता हूँ और अपनी आदतों को किस तरह से बदल
सकता हूँ ताकि मैं अगले साल में ज़्यादा इफेक्टिव बन
जाऊँ?
22. क्या मैं ऐसा कोई व्यवहार करने का दोषी हूँ, जिसे
मेरी अंतरात्मा (conscience) कचोटती हो?
23. किस तरह से मैं उससे ज़्यादा और बेहतर सर्विस दे
सकता हूँ, जिसके लिए मुझे पैसा मिल रहा है?
24. क्या मैंने किसी के प्रति अन्याय किया है और अगर
हाँ तो किस तरह?
25, अगर मैं साल भर के लिए अपनी खुद की
सर्विसेज को खरीदूं तो क्या मैं इस खरीद से संतुष्ट
रहूँगा?

26. क्या मैं सही बिज़नेस में हूँ और अगर नहीं तो
क्यों?
27. क्या मेरी सर्विसेज का खरीददार मेरे द्वारा दी गई
सर्विस संतुष्ट है और अगर नहीं तो क्यों?
28. सक्सेस के बेसिक प्रिंसिपल्स पर मेरी करंट रेटिंग
क्या है? (इस रेटिंग को ईमानदारी और क्लियर तरीके
से बनाएँ और इसे किसी ऐसे इंसान से चेक करवा लें,
जिसमें इतना साहस हो कि वह सटीक जाँच करे।)
इस चैप्टर में दी गई जानकारी पढ़ने और दिमाग में
उतारने के बाद अब आप तैयार हैं कि आप अपनी
पर्सनल सर्विसेज की मार्केटिंग के लिए प्रैक्टिकल
प्लान बना सके। इस चैप्टर में पर्सनल सर्विसेज की
सेल का प्लान बनाने के लिए ज़रूरी हर प्रिंसिप्ल का
पूरा डिटेल मिलेगा। इसमें लीडरशिप की main
क्वालिटी, लीडरशिप में फेलियर के सबसे आम
कारण, लीडरशिप के मौक़ा व बाले फ़ील्ड्स की डिटेल,
जीवन के सभी फ़ील्ड्स में फेलियर के main कारण
और सेल्फ़-एनालिसिस में यूज़ किए जानेवाले सवाल
शामिल है।
सटीक जानकारी को डिटेल में दिया गया है क्योंकि
इसकी उन सभी लोगो को जरुरत होगी, जो पर्सनल
सर्विसेज की मार्केटिंग करके अमीर बनने की तरफ
कदम बढ़ाना शुरू करेंगे। जिन्होंने अपनी दौलत गवाँ दी
है या जो पैसा कमाना अभी शुरू ही कर रहे है, उनके

शामिल है।
सटीक जानकारी को डिटेल में दिया गया है क्योंकि
इसकी उन सभी लोगो को जरुरत होगी, जो पर्सनल
सर्विसेज की मार्केटिंग करके अमीर बनने की तरफ
कदम बढ़ाना शुरू करेंगे। जिन्होंने अपनी दौलत गवाँ दी
है या जो पैसा कमाना अभी शुरू ही कर रहे है, उनके
पास अमीरी के बदले में देने के लिए पर्सनल सर्विसेज
के अलावा कुछ भी नहीं होता। इसलिए यह ज़रूरी है
कि उनके पास वह सारी प्रैक्टिकल जानकारी मौजूद
हो जिसके द्वारा वे अपनी सर्विसेज की प्रॉफिटेबल
मार्केटिंग कर सके।
यहाँ पर दी जा रही जानकारी को अच्छी तरह से
समझना और पूरी तरह अपने में उतार लेना ख़ुद
की सर्विसेज की मार्केटिंग में मददगार होगा। इसके
अलावा, इससे आपमें वह एबिलिटी भी डेवलप होगी,
जिसके द्वारा आप दूसरे लोगो को बेहतर एनालाइज
कर सके और उनके बारे में बेहतर फ़ैसला ले सके। यह
जानकारी पर्सनल डायरेक्टर्स, एंप्लॉयमेंट मैनेजर्स और
दूसरे एग्जीक्यूटिव के भी काम जो इफेक्टिव
आर्गेनाइजेशन के लिए एम्प्लाइज का चुनाव करते है।
अगर आपको इस बारे में डाउट हो तो इसकी पॉवर को
चेक करने के लिए सेल्फ़-एनालिसिस के 28 सवालों
के जवाब लिखना शुरू कर दे।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
अमीर बनने के मौक़ा कहाँ और केसे मिल सकते
है
अब हमने उन प्रिंसिपल्स का एनालिसिस कर लिया है,
जिनके द्वारा अमीर बना जा सकता है। नैचुरली अब
हम पूछेगे, ‘हमें इन प्रिंसिपल्स पर अमल करने के लिए
अच्छे मौके कहाँ मिल सकते है? ।
आइए अपने गुणों की लिस्ट निकाल लीजिए और
देखिए कि वेस्टर्न सोसाइटी आपको कितना अमीर बना
सकता है, चाहे आपका गोल नार्मल अमीर बनना हो या
बेहद अमीर बनना हो?
शुरुआत में, हम सभी को यह याद रखना चाहिए कि
हम एक सोसाइटी में रहते हैं, जहाँ कानून का पालन
करने वाले हर नागरिक को विचार और काम की
आज़ादी है, जो दुनिया के किसी दूसरे देश की तुलना
में ज़्यादा है। हममें से ज़्यादातर ने इस आज़ादी के
फ़ायदों की लिस्ट नहीं बनाई है। हमने कभी अपनी
अनलिमिटेड आज़ादी की तुलना दूसरे देशो की
लिमिटेड आज़ादी से नहीं की है।
यहाँ पर विचार की आजादी है, राजनीति में आज़ादी

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
अमीर बनने के मौक़ा कहाँ और केसे मिल सकते
है
अब हमने उन प्रिंसिपल्स का एनालिसिस कर लिया है,
जिनके द्वारा अमीर बना जा सकता है। नैचुरली अब
हम पूछेगे, ‘हमें इन प्रिंसिपल्स पर अमल करने के लिए
अच्छे मौके कहाँ मिल सकते है? ।
आइए अपने गुणों की लिस्ट निकाल लीजिए और
देखिए कि वेस्टर्न सोसाइटी आपको कितना अमीर बना
सकता है, चाहे आपका गोल नार्मल अमीर बनना हो या
बेहद अमीर बनना हो?
शुरुआत में, हम सभी को यह याद रखना चाहिए कि
हम एक सोसाइटी में रहते हैं, जहाँ कानून का पालन
करने वाले हर नागरिक को विचार और काम की
आज़ादी है, जो दुनिया के किसी दूसरे देश की तुलना
में ज़्यादा है। हममें से ज़्यादातर ने इस आज़ादी के
फ़ायदों की लिस्ट नहीं बनाई है। हमने कभी अपनी
अनलिमिटेड आज़ादी की तुलना दूसरे देशो की
लिमिटेड आज़ादी से नहीं की है।
यहाँ पर विचार की आजादी है, राजनीति में आज़ादी

यहाँ पर विचार की आज़ादी है, राजनीति में आज़ादी
है, बिजनस, प्रोफेशन या जॉब चुनने की आज़ादी
है, दूसरों को नुकसान पहुँचाए बिना अपनी मनचाही
प्रॉपर्टी या जायदाद बनाने की आज़ादी है, अपने घर
का लोकेशन चुनने की आज़ादी है, शादी में आज़ादी
है, सभी प्रजातियों के लिए समान मौक़ा की आज़ादी
है, एक स्टेट से दूसरे स्टेट में यात्रा करने की आज़ादी
है, अपने पसंद की चीज़ खाने की आज़ादी है और यह
आज़ादी भी है कि हम जीवन में किसी भी पोजीशन के
लिए गोल बना सकते हैं, जिसके लिए हमने तैयारी की
है, चाहे वह अमेरिका के प्रेसिडेंट की पोजीशन ही क्यों
न हो।
हमारे पास दूसरी आज़ादी भी हैं लेकिन यह लिस्ट
सबसे ख़ास आज़ादी के बारे में बता रही है, जिसमे
अनगिनत मौके है। आज़ादी का फ़ायदा ज़्यादा क्लियर
तब नजर आता है, जब हम यह देखते है कि अमेरिका
ही ऐसा एक इकलौता देश है, जो अपने हर नागरिक
को, चाहे वह वहाँ का नेटिव निवासी हो या उन्होंने बाद
में यहाँ की सिटीजनशिप ली हो, इतनी ज़्यादा और
अलग-अलग आज़ादी देता है।
आइए अब उन वरदानो को गिने, जो इस विराट
आज़ादी ने हमें दी है। एग्ज़ाम्पल के लिए एवरेज
अमेरिकी परिवार को ले लें। (जिसका मतलब एवरेज
इनकम वाले परिवार को) और उन फ़ायदों को गिने,
ܕܫܡܦܗܒ
में 117

यहाँ पर विचार की आज़ादी है, राजनीति में आज़ादी
है, बिजनस, प्रोफेशन या जॉब चुनने की आज़ादी
है, दूसरों को नुकसान पहुँचाए बिना अपनी मनचाही
प्रॉपर्टी या जायदाद बनाने की आज़ादी है, अपने घर
का लोकेशन चुनने की आज़ादी है, शादी में आज़ादी
है, सभी प्रजातियों के लिए समान मौक़ा की आज़ादी
है, एक स्टेट से दूसरे स्टेट में यात्रा करने की आज़ादी
है, अपने पसंद की चीज़ खाने की आज़ादी है और यह
आज़ादी भी है कि हम जीवन में किसी भी पोजीशन के
लिए गोल बना सकते हैं, जिसके लिए हमने तैयारी की
है, चाहे वह अमेरिका के प्रेसिडेंट की पोजीशन ही क्यों
न हो।
हमारे पास दूसरी आज़ादी भी हैं लेकिन यह लिस्ट
सबसे ख़ास आज़ादी के बारे में बता रही है, जिसमे
अनगिनत मौके है। आज़ादी का फ़ायदा ज़्यादा क्लियर
तब नजर आता है, जब हम यह देखते है कि अमेरिका
ही ऐसा एक इकलौता देश है, जो अपने हर नागरिक
को, चाहे वह वहाँ का नेटिव निवासी हो या उन्होंने बाद
में यहाँ की सिटीजनशिप ली हो, इतनी ज़्यादा और
अलग-अलग आज़ादी देता है।
आइए अब उन वरदानो को गिने, जो इस विराट
आज़ादी ने हमें दी है। एग्ज़ाम्पल के लिए एवरेज
अमेरिकी परिवार को ले लें। (जिसका मतलब एवरेज
इनकम वाले परिवार को) और उन फ़ायदों को गिने,
ܕܫܡܦܗܒ
में 117

जमारपा पारपार पा लला जिसका मतलब एपरण
इनकम वाले परिवार को) और उन फ़ायदों को गिने,
जो परिवार के हर मेंबर के लिए मौकों और इस भरे
पुरे देश में मौजूद है। विचार व काम की आज़ादी के
बाद खाना, कपड़े और घर आते हैं, जो जीवन की तीन
बुनियादी ज़रूरतें हैं।
1. खाना : क्योंकि वेस्टर्न कल्चर के परिवार के पास
अनलिमिटेड आज़ादी उसके दरवाजे पर मौजूद है
इसलिए यह दुनिया में कहीं भी मिलने वाले खाने का
चुनाव कर सकता है, जिसकी कीमत उसके पहुँच में
हो।
2, घर : यह परिवार एक आरामदायक अपार्टमेंट में
रहता है, जो भाप से गरम होता है, जहाँ बिजली की
रोशनी है और जहाँ गैस द्वारा खाना पकाया जाता है।
ब्रेकफास्ट में वे जो टोस्ट खाते हैं वह इलेक्ट्रिक टोस्टर
में सेंका गया है, जिसकी कीमत सिर्फ कुछ डॉलर है।
अपार्टमेंट की सफाई बैक्यूम क्लीनर से होती है, जो
बिजली से चलता है। किचन और बाथरूम में हर समय
गर्म और ठंडा पानी मौजूद रहता है। खाने को ठंडा
रखने के लिए फ्रिज है, जो इलेक्ट्रिसिटी से चलता है।
बीवी अपने बाल बनाती है, कपडे धोती है और प्रेस
करती है और इसके लिए वह इलेक्ट्रिसिटी से चलने
वाले मशीनों का इस्तेमाल करती है, जो दीवार में लगे
एक प्लग में तार लगाते ही अपना काम शुरू कर देते
है। पति अपनी दाढ़ी इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाले शेवर
से बनाता है और उन्हें दनिया भर से चौबीस घंटे मफ्त

उ.
है। पति अपनी दाढ़ी इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाले शेवर
से बनाता है और उन्हें दुनिया भर से चौबीस घंटे मुफ्त
एंटरटेनमेंट मिलता है, जो टीवी का स्विच दबाते ही शुरू
हो जाता है।
3. कपड़े : वेस्टर्न कल्चर में हर जगह पर एवरेज कपड़े
पहनने वाले लोग मिल जाते है।
खाना, कपड़ा और घर की सिर्फ तीन बेसिक ज़रूरतों
का जिक्र किया गया है। एवरेज वेस्टर्न सोसाइटी के
नागरिक को कई दूसरे फ़ायदे और अधिकार भी
मौजूद हैं, जो उन्हें कम कोशिश में हासिल हो सकते
है, जबकि उसे इसके लिए आठ घंटे हर दिन से ज़्यादा
मेहनत ना करनी पड़े।
वह चमत्कार जिसने ये वरदान दिए
जब वो वोट मांगते थे तो हम अकसर लीडर्स को
आज़ादी की बाते करते हुए सुनते हैं। लेकिन शायद
ही कभी वे इस आज़ादी की शुरुआत या इसकी नेचर
के पूरे एनालिसिस के लिए मुनासिब एफर्ट करते हैं या
इसके लिए इतना समय निकालते है।
मुझे इस इनविजिबल पॉवर के सोर्स और नेचर के
एनालिसिस का अधिकार है क्योंकि मैं जानता हूँ और
मैं पचास सालों से भी ज़्यादा समय में ऐसे लोगो को
जानता हूँ, जिन्होंने इस पॉवर को organize किया
और जिनमें से कई आज भी इसे बनाए रखने के लिए

जानता हूँ, जिन्होंने इस पॉवर को organize किया
और जिनमें से कई आज भी इसे बनाए रखने के लिए
जिम्मेदार हैं।
इंसानियत के इस रहस्यमयी हितकारी/प्रोटेक्टर का नाम
capital है।
कैपिटल में न सिर्फ पैसा आता है, बल्कि ज़्यादा क्लियर
रूप से इसमें ज़्यादा आर्गनाइज्ड बुद्धिमान लोगो के
ग्रुप्स आते हैं, जो पब्लिक के हित में और खुद को
फ़ायदा पहुंचाने के लिए पैसा का बेहतर इस्तेमाल करने
के तरीको की प्लानिंग करते हैं।
इन ग्रुप्स में साइंटिस्ट, academic से समंबधित
लोग, केमिस्ट, innovator, बिजनस एनालिस्ट,
पब्लिसिटीमैन, ट्रैफिक एक्सपर्ट, अकाउंटेंट, वकील,
डॉक्टर और इंडस्ट्री बिज़नस के सभी फ़ील्ड्स में
एक्सपर्ट नॉलेज रखने वाले लोग आते हैं। ये लोग हर
फील्ड में efforts को लीड करते हैं, इस्तेमाल करते
हैं और निशान छोड़ जाते हैं। वे कॉलेज, हॉस्पिटल,
पब्लिकस्कूल को सपोर्ट करते हैं, अच्छी सड़के बनाते
हैं, न्यूज़पेपर छापते हैं, गवर्नमेंट का ज़्यादातर खर्च
उठाते हैं और काफ़ी सारे डिटेल्स का ध्यान रखते हैं,
जो इंसानों के प्रोग्रेस के लिए ज़रूरी है। शोर्ट में कहा
जाए तो कैपिटलिस्ट हमारे सिविलाइज़ेशन के ब्रेन हैं
क्योंकि वे उस पूरे सिस्टम को पूरा करते हैं, जिनमे सारी
एजुकेशन, नॉलेज और इंसानों की प्रोग्रेस मिली हुई है।

ब्रेन के बिना पैसा हमेशा खतरनाक होता है। लेकिन
जब इसका सही इस्तेमाल किया जाता है तो यह
सभ्यता के लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट ज़रूरी एलिमेंट बन
जाता है।
अगर कैपिटल की मदद न हो तो एक परिवार को अपने
लिए साधारण नाश्ता जुटाने के लिए कितनी मेहनत
करनी पड़ेगी, इस बात को इमेजिन करने से आपको
यह समझ में आ जाएगा कि आर्गनाइज्ड कैपिटल का
कितना इम्पोर्टेस होता है।
चाय के लिए आपको चाइना या भारत की यात्रा करनी
होगी, जो अमेरिका से बहुत दूर है। जब तक कि आप
बहुत अच्छे swimmer न हो, आप लौटते समय की
यात्रा में थक जाएँगे। फिर एक और प्रॉब्लम आपके
सामने आएगी। अगर आपके पास समुद्र पार करने
और तैरने की हिम्मत हो भी, तो आप किस करेंसी का
इस्तेमाल करेंगे?
चीनी के लिए आपको क्यूबा की एक और समुद्री
यात्रा पर जाना होगा या फिर ऊटा के शुगर बीत खंड
की लंबी पैदल यात्रा पर जाना होगा। लेकिन फिर भी
हो सकता है कि आपको चीनी के प्रोडक्शन के लिए
ज़रूरी है। हम इस बारे में तो कुछ कह ही नहीं रहे है
कि अमेरिका में कहीं भी ब्रेकफास्ट टेबल पर पहुँचने
के लिए चीनी को रिफाइन करने, ट्रांसपोर्ट करने और
डिलीवर करने के लिए कितने तामझाम की जरुरत

के लिए चीनी को रिफाइन करने, ट्रांसपोर्ट करने और
डिलीवर करने के लिए कितने तामझाम की जरुरत
होती है।
अंडे आप अपने करीबी फॉर्म से ले जा सकते है, लेकिन
अगर आप ग्रेपफ्रूट चाहते हैं तो आपको फ्लोरिडा की
लंबी पैदल यात्रा करनी होगी।
ड्राई सीरियल को तो आपको अपने मेनू से हटाना ही
होगा, क्योंकि इसके प्रोडक्शन के लिए आदमियों के
trained आर्गेनाइजेशनल labor और सही मशीनरी
की जरुरत होती है, जिन सभी के लिए कैपिटल की
जरुरत होती है।
आराम करते समय आप साउथ अमेरिका की दिशा में
तैर सकते हैं जहाँ आप दो चार केले ले सकते है और
आप लौटते समय नजदीकी फार्म से, जहाँ डेरी भी हो,
बटर और क्रीम भी, पैदल चलकर ला सकते है। इतना
सब करने के बाद आपका परिवार आराम से बैठकर
नाश्ते का आनंद लेने के लिए तैयार हो जाएगा।
यह सुनने में कितना बेतुका लगता है न? लेकिन अगर
हमारे पास कैपिटलिस्ट सिस्टम न हो तो इन कॉमन
खाने के सामान को अपने नाश्ते में शामिल करने का
यही इकलौता पॉसिबल तरीका होगा।
नार्मल नाश्ते के आईटम की तुलना में जब हम रेलवे
और IA
– जाने और मजे. जे.निगा

नार्मल नाश्ते के आईटम की तुलना में जब हम रेलवे
और समुद्री जहाज बनाने और उनके मेंटेनेंस के लिए
ज़रूरी पैसे के बारे में सोचते है तो हम दहल जाते है
क्योंकि यह अमाउंट हमारी इमेजिनेशन से परे है। यह
अरबो खरबों डॉलर है, जबकि इसमें जहाजो और रेल
के trained कैपिटलिस्ट अमेरिका में मॉडर्न कल्चर
की ज़रूरतों का सिर्फ एक हिस्सा है। ट्रांसपोर्टेशन के
लिए पहले यह जरुरी है कि जमीन से कुछ उगाया जाए
या मार्किट के लिए produce किया जाए। इसके
इक्विपमेंट, मशीनरी, पैकिंग, मार्केटिंग और करोड़ों
लोगो के लिए करोड़ों डॉलर और लगेंगे।
समुद्री जहाज और रेलगाड़ी धरती से अपने आप नहीं
उग आते और अपने आप काम नहीं करने लगते। वे
सिविलाइज़ेशन की पुकार सुनकर आते हैं और वे उन
लोगों के मेहनत, स्किल और आर्गेनाइजेशन पॉवर के
द्वारा आते हैं, जिनमे इमेजिनेशन है, विश्वास है, जोश
है, फ़ैसला करने की शक्ति है और लगन है! इन लोगो
को कैपिटलिस्ट के नाम से जाना जाता है। ये देने की
इच्छा से, फ़ायदा कमाने और अमीर बनने की इच्छा से
इंस्पायर होते है। और क्योंकि वे ऐसी सर्विस । हैं,
जिसके बिना सिविलाइज़ेशन का कोई अस्तित्व नहीं
होता इसलिए वे बहुत अमीर बन जाते हैं।
वे
रिकॉर्ड को साफ और समझ में आने लायक इजी
बनाते हुए मैं यह जोड़ना चाहूँगा कि यह कैपिटलिस्ट
वही लोग है, जिनके बारे में हममें से ज़्यादातर लोगो ने

बनाते हुए मैं यह जोड़ना चाहूँगा कि यह कैपिटलिस्ट
वही लोग है, जिनके बारे में हममें से ज़्यादातर लोगो ने
सोप-बॉक्स के स्पीकर्स को बोलते सुना है। यह वही है
जिन्हें रेवोल्युशनरी, रैकिटियर्स, बेईमान राजलीडर और
भ्रष्ट labor लीडर अत्याचारी और inhuman या
वॉल स्ट्रीट कहते है।
मैं यहाँ पर किसी ग्रुप या इकोनॉमिक्स के किसी सिस्टम
की वकालत या विरोध नहीं कर रहा हूँ।
इस बुक का गोल है। एक ऐसा गोल जिसके लिए मैं
आधी सदी से ज़्यादा तक पूरी इमानदारी से समर्पित हूँ।
उन सभी को यह नॉलेज देना, उन सभी के सामने वह
सबसे भरोसेमंद फिलॉसफी प्रेजेंट करना, जिसके जरिए
से लोग अमीर बन सके और जितनी दौलत वे कमाना
चाहते हैं उतनी दौलत कमा सके।
मैंने दो चीजे बताने के लिए यहाँ पर कैपिटलिस्ट सिस्टम
के इकनोमिक फ़ायदे का एनालिसिस किया है।
1. इसीलिए ताकि अमीर बनना चाहते है, वे उस सिस्टम
को पहचान लें और खुद को उसके अनुरूप ढाल लें,
जो अमीरी के सारे रास्ते को कंट्रोल करता है, चाहे आप
कम अमीर बनना चाहते हो या बेहद अमीर।
2. इसलिए ताकि आपको तसवीर का दूसरा पहलू दिख
जाए, जो पॉलिटिशियन और स्पीकर द्वारा आमतौर पर
टिम्वा तान्नदाना पाटे को पारोट करते हैं और

2. इसलिए ताकि आपको तसवीर का दूसरा पहलू दिख
जाए, जो पॉलिटिशियन और स्पीकर द्वारा आमतौर पर
दिखाए जानबूझकर मुद्दे को मरोड़कर पेश करते हैं और
आर्गनाइज्ड कैपिटल के बारे में ऐसे बात करते हैं जैसे
यह कोई जहरीला कोबरा हो।
यह एक कैपिटलिस्ट देश है। यह कैपिटल के इस्तेमाल
द्वारा डेवलप हुआ है। और हम जो आज़ादी और मौक़ा
के वरदानो को लेने के अधिकार का दावा करते है, हम
जो अमीर बनना चाहते है यह बात जान ले कि अगर
आर्गनाइज्ड कैपिटल ने इन फ़ायदों को मौजूद न
कराया होता तो आज हमारे पास अमीरी और मौके नहीं
होते।
अगर आप ऐसा सोचते है कि अमीर लोग कम काम
के बदले ज़्यादा पैसा की माँग करते है। या फिर आप
यह सोच सकते है कि आपके पास पैसे का अंबार
बिना काम किए लग जाएगा। यह एक आज़ाद दुनिया
है, आप कुछ भी सोच सकते हैं। कुछ लोग काम किए
बिना भी रहते हैं और कुछ लोग थोड़ा बहुत ही काम
करते है।
आपको इस आज़ादी को समझने की जरुरत है, कुछ
लोगो को गलतफहमी है इस बारे में, बस कुछ ही लोग
इस बात को ढंग से समझते हैं कि जहाँ तक अमीर
लोगो का सवाल है, वे लोग बिना कोशिश के अमीर
नहीं बने है।

आपको इस आज़ादी को समझने की जरुरत है, कुछ
लोगो को गलतफहमी है इस बारे में, बस कुछ ही लोग
इस बात को ढंग से समझते हैं कि जहाँ तक अमीर
लोगो का सवाल है, वे लोग बिना कोशिश के अमीर
नहीं बने है।
कानूनी रूप से अमीर बनने और अमीर बने रहने का
सिर्फ एक ही भरोसेमंद तरीका है, वह है काम की
सर्विस देना। ऐसा कोई सिस्टम नहीं बना है, जिसके
द्वारा लोग सिर्फ नंबर के पॉवर द्वारा कानूनी रूप से
अमीर बन सके या बदले में किसी रूप में कीमत चुकाए
बिना अमीर बन सके।
एक रूल है, जिसे प्रिंसिप्ल ऑफ़ इकोनॉमिक्स कहते
हैं। यह सिर्फ एक प्रिंसिप्ल ही नहीं है। बल्कि पत्थर की
लकीर की तरह है, जिसे कोई नहीं काट सकता।
इस नाम को मार्क कर ले और याद रखे कि यह कई
पोलिटिकल लीडर्स या पोलिटिकल मशीन से कहीं
पावरफुल है। यह हर labor आर्गेनाइजेशन के कंट्रोल
से बाहर की चीज है। इसे किसी भी धूर्त, घूसखोर या
फिर किसी ऐसे गैर पोलिटिकल द्वारा इन्फ्लुएंस नहीं
किया जा सकता है। बिज़नेस में शामिल हर इंसान के
अकाउंट पर नजर रखी जाती है और हर रिकॉर्ड को
नोट किया जाता है।
यह याद रखें कि यह मौजूद जरूरतों का पैसा जमा

यह याद रखें कि यह मौजूद जरूरतों का पैसा जमा
करने की बस शुरुआत है। बहुत कम लक्ज़री आइटम
और गैर जरूरी चीजों के बारे में बताया गया है।
यह भी याद रखें की यह तो अमीर बनने के sources
की सिर्फ शुरुआत है। लेकिन याद रखे कि बिज़नेस के
इन थोड़े से सामानों के प्रोडक्शन, ट्रांसपोर्टेशन और
मार्केटिंग के बिज़नेस की वजह से लाखो करोड़ो आदमी
और औरतों को काम मिलता है, जो अपनी सर्विसेज के
बदले में हर महीने करोड़ो डॉलर हासिल करते है और
महेंगे और ज़रुरत के सामान पर खुले हाथों से इसे खर्च
करते है।
खास तौर पर यह याद रखे कि बिज़नेस और पर्सनल
सर्विसेज के इस एक्सचेंज के पीछे अमीर बनने के
अनगिनत मौके मौजूद है। यहाँ आज़ादी आपकी मदद
करती है। इन businesses को करने के लिए जितने
भी कोशिश जरुरी है उन्हें करने से आपको कोई नहीं
रोक सकता। अगर आपमें काबिलियत है, ट्रेनिंग है,
एक्सपीरियंस है तो आप बहुत बड़ी दौलत कमा सकते
हैं। जो लोग बेहद अमीर बनने लायक लकी नहीं है वे
कम अमीर तो बन ही सकते हैं। कोई भी कम मेहनत के
बदले में कमा कर जिंदगी गुज़ार सकता है।
तो अब सिचुएशन आपके सामने है।
opportunity ने आपके सामने अपना खजाना
खोलकर रख दिया है। सामने से आए वह चने जो

तो अब सिचुएशन आपके सामने है।
opportunity ने आपके सामने अपना खजाना
खोलकर रख दिया है। सामने से आए, वह चुने जो
आप चाहते है, अपन प्लान बनाए प्लान के हिसाब से
काम करें और लगन से उसको फॉलो करे। कैपिटलिस्ट
सोसाइटी बाकी का काम कर देगा। आप सिर्फ़ इस
बात पर भरोसा रखे। कैपिटलिस्ट सोसाइटी हर इनसान
को काम की सर्विस देने और उस सर्विस के वैल्यू के
proportion में अमीर बनने का मौका देता है।
सिस्टम किसी से भी यह अधिकार नहीं छीनता, लेकिन
यह ऐसा कोई guarantee नहीं देता कि बिना कुछ
किए ही आपको कुछ हासिल हो जाएगा क्योंकि यह
सिस्टम ख़ुद इकोनॉमिक्स के रूल द्वारा कंट्रोल होता
है, जो बिना कुछ दिए हासिल करने के प्रिंसिप्ल को न
तो पहचानता है, न ही इसे लंबे समय तक सहन करता
है।
इकोनॉमिक्स का प्रिंसिप्ल नेचर ने बनाया है। वहाँ कोई
भी ऐसा कोर्ट नहीं है जहाँ इसे तोड़ने वाले रिक्वेस्ट
कर सके। इस प्रिंसिप्ल के दो साइड हैं, इसे तोड़ने पर
नुकसान भी होता है और ढंग से पालन करने पर इनाम
भी मिलता है। इस प्रिंसिप्ल को खारिज नहीं किया जा
सकता है। यह उतना ही बड़ा सच है, जितना आसमान
में टिमटिमाते हुए तारे। और उसी नेचर का हिस्सा है,
जो तारो को कंट्रोल करता है।

ह, जाबिना कुछ दिएहसिल करत प्रासप्लान
तो पहचानता है, न ही इसे लंबे समय तक सहन करता
है।
इकोनॉमिक्स का प्रिंसिप्ल नेचर ने बनाया है। वहाँ कोई
भी ऐसा कोर्ट नहीं है जहाँ इसे तोड़ने वाले रिक्वेस्ट
कर सके। इस प्रिंसिप्ल के दो साइड हैं, इसे तोड़ने पर
नुकसान भी होता है और ढंग से पालन करने पर इनाम
भी मिलता है। इस प्रिंसिप्ल को खारिज नहीं किया जा
सकता है। यह उतना ही बड़ा सच है, जितना आसमान
में टिमटिमाते हुए तारे। और उसी नेचर का हिस्सा है,
जो तारो को कंट्रोल करता है।
आपके अंदर यह सवाल आ सकता है–कोई हो सकता
है, जो इस रूल को फॉलो करने से मना कर दे?
बेशक हम एक आज़ाद समाज में रहते हैं, जहाँ
आपको समान अधिकार मिलते हैं। किसी भी रूल को
नजरअंदाज कर सकते हैं। तब क्या होगा? तब तक
कोई असर नहीं पड़ेगा, जब तक ज़्यादा लोग एक साथ
इस प्रिंसिप्ल को नजरअंदाज न करें।
ये प्रिंसिप्ल सिर्फ कुछ समय के एक्सपीरियंस से ही नहीं
निकले है पर इनमे सालों की कड़ी मेहनत लगी है।

बदलनमजल्दबाजी नहा करत था जा लागदालत
कमाने में नाकामयाब थे, उनमें से हर एक ने या तो
फ़ैसला लिया ही नहीं था और अगर लिया भी था तो
उसमें बहुत देर लगाया था, लेकिन वह लिए गए फैसले
अकसर बदल लेते थे और इसमें जल्दबाजी करते थे।
हेनरी फोर्ड के कई एक्स्ट्राऑर्डिनरी गुणों में से एक था:
फ़ैसले पर तुरंत और क्लियर रूप से पहुँचने की आदत
और उस फ़ैसले को बदलने में देर लगाना। यह गुण
मिस्टर फोर्ड में इतना ज़्यादा था कि इससे उनकी इमेज
जिद्दी इंसान की बन गई थी। यही गुण था, जिसकी
वजह से मिस्टर फोर्ड ने अपना फेमस मॉडल टी
(दुनिया की सबसे बदसूरत कार) को बनाना जारी रखा
जबकि उनके सभी consultants और कार के कई
खरीददार भी इसे बदलने के लिए उनसे रिक्वेस्ट कर
चुके थे।
शायद मिस्टर फोर्ड ने इस बदलाव को करने में बहुत
देर लगा दी, लेकिन कहानी का दूसरा पहलू यह है कि
फोर्ड के पक्के फ़ैसले की वजह से ही वे बेहद अमीर
बने, इसके पहले कि मॉडल में बदलाव करना ज़रूरी
हो गया। इसमें कोई डाउट नहीं है कि फोर्ड की क्लियर
फ़ैसले पर पहुँचने की आदत को उनकी जिद माना
गया लेकिन यह गुण फ़ैसले पर देर से पहुँचने और उन्हें
जल्दी बदलने से फिर भी बेहतर है।
ज़्यादातर लोग जो अपनी ज़रूरतों के हिसाब से पैसा
कमाने में फेल हो जाते हैं, आम तौर पर दूसरो के

ज़्यादातर लोग जो अपनी ज़रूरतों के हिसाब से पैसा
कमाने में फेल हो जाते हैं, आम तौर पर दूसरो के
विचारों से आसानी से इन्फ्लुएंस हो जाते हैं। वे अपने
लिए सोचने का काम न्यूज़पेपर और गपशप करनेम
वाली अपने पड़ोसियों पर छोड़ देते हैं। राय दुनिया की
सबसे सस्ती चीज़ है। यह हर एक के पास मौजूद होती
है। जो उस इंसान पर थोप दी जाती है, जी उन्हें स्वीकार
करता है। अगर आप फ़ैसले पर पहुँचते समय दूसरों
की राय से इन्फ्लुएंस होते हैं, तो आप अपनी इच्छा को
पैसा में बदलने की बात छोड़ ही दे, किसी भी काम में
सक्सेसफुल नहीं होंगे।
अगर आप दूसरो की राय से ही इन्फ्लुएंस होते रहते हैं
तो आपकी अपनी कोई इच्छा नहीं होगी।
जब आप यहाँ पर बताए गए प्रिंसिपल्स को एक्शन
में बदलना शुरू करें तो अपने खुद के डिसिशन पर
पहुँचें और उनको फॉलो करके अपने कंसलटेंट ख़ुद
बने। अपने मास्टर माइंड ग्रुप के मेंबर्स के अलावा
किसी दूसरे को अपने विश्वास में न लें। अपने मास्टर
माइंड ग्रुप के बचने के बारे में बेहद सावधान रहे ताकि
आप सिर्फ उन्ही को चुने, जो आपके गोल के प्रति पूरी
सहानुभूति और excitement एक्सपीरियंस करते
हैं।
यह भी याद रखें कि जब भी आप किसी ऐसे आदमी के
सामने अपना मुँह खोलते हैं, जिसे बहुत नॉलेज है तो

यह भी याद रखें कि जब भी आप किसी ऐसे आदमी के
सामने अपना मुँह खोलते हैं, जिसे बहुत नॉलेज है तो
आप उस इंसान के सामने अपने नॉलेज के पूरे स्टॉक
या उसकी कमी को दिखाते हैं। असली नॉलेज आमतौर
पर विनम्रता और मौन के द्वारा झलकता है।
इस फैक्ट को भी दिमाग में रखे कि आप जिस भी
इंसान से जूझते हैं, वह भी आपकी ही तरह पैसे कमाने
के मौक़ा तलाश रहा है। अगर आप अपनी प्लानिंग
के बारे में ज़्यादा खुलकर बातें करेंगे तो आपको यह
जानकार आश्चर्य होगा कि सामने वाले आदमी ने आपसे
पहले ही आपके गोल को एक्शन में बदल लिया है,
जिसकी प्लानिंग के बारे में आपने मूर्खता के कारण
बड़बोलापन दिखाया था।
आपका सबसे पहला फ़ैसला यह होना चाहिए कि आप
अपना मुहँ बंद रखें और आपने कान और आँख खुले
रखें।
इस सलाह को फॉलो करने की याद दिलाने के लिए यह
मददगार होगा। अगर आप नीचे दिए गए फार्मूला को
कैपिटल लेटर्स में लिख लें और किसी ऐसी जगह रख दें
जहाँ आप इसे हर रोज देख सके “दुनिया को बताए कि
आप क्या करना चाहते है, पहले इसे करके दिखा दे।’
इसे दूसरे तरीके से कहा जाए तो ‘शब्द नहीं, बल्कि
एक्शन बड़ा होता है।’ एक फ़ैसले पर आज़ादी और

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यह भी याद रखें कि जब भी आप किसी ऐसे आदमी के
सामने अपना मुँह खोलते हैं, जिसे बहुत नॉलेज है तो
आप उस इंसान के सामने अपने नॉलेज के पूरे स्टॉक
या उसकी कमी को दिखाते हैं। असली नॉलेज आमतौर
पर विनम्रता और मौन के द्वारा झलकता है।
इस फैक्ट को भी दिमाग में रखे कि आप जिस भी
इंसान से जूझते हैं, वह भी आपकी ही तरह पैसे कमाने
के मौक़ा तलाश रहा है। अगर आप अपनी प्लानिंग
के बारे में ज़्यादा खुलकर बातें करेंगे तो आपको यह
जानकार आश्चर्य होगा कि सामने वाले आदमी ने आपसे
पहले ही आपके गोल को एक्शन में बदल लिया है,
जिसकी प्लानिंग के बारे में आपने मूर्खता के कारण
बड़बोलापन दिखाया था।
आपका सबसे पहला फ़ैसला यह होना चाहिए कि आप
अपना मुहँ बंद रखें और आपने कान और आँख खुले
रखें।
इस सलाह को फॉलो करने की याद दिलाने के लिए यह
मददगार होगा। अगर आप नीचे दिए गए फार्मूला को
कैपिटल लेटर्स में लिख लें और किसी ऐसी जगह रख दें
जहाँ आप इसे हर रोज देख सके “दुनिया को बताए कि
आप क्या करना चाहते है, पहले इसे करके दिखा दे।’
इसे दूसरे तरीके से कहा जाए तो ‘शब्द नहीं, बल्कि
एक्शन बड़ा होता है।’ एक फ़ैसले पर आज़ादी और

इसे दूसरे तरीके से कहा जाए तो ‘शब्द नहीं, बल्कि
एक्शन बड़ा होता है।’ एक फैसले पर आज़ादी और
मृत्यु डिपेंडेंट थी.
डिसिशन का इम्पोर्टेस उस साहस पर डिपेंड करता है,
जो उन्हें लेने के लिए जरुरी होता है। महान डिसिशन ,
जो आगे चलकर सोसाइटी के फाउंडेशन बने,
बहुत
जोखिम भरे फ़ैसले थे, जिसमे मौत का खतरा भी
शामिल था।
गुलामों को आज़ाद करने का लिंकन का फेमस
डिसिशन , जिसने अमेरिका के काले लोगों को आज़ादी
दी, यह जानते हुए लिया गया था कि इस काम के बाद
हजारो दोस्त और पोलिटिकल supporters उसके
दुश्मन बन जाएंगे।
अपने पर्सनल विश्वास के बारे में समझौता करने के
बजाय जहर भरा प्याला पीने की सुकरात का फैसला
एक साहसिक फ़ैसला था।
इससे उन्होंने समय के रूख को एक हजार साल बाद
की तरफ मोड़ दिया और उन लोगो के विचार और
शब्दों की आज़ादी का अधिकार दिलवाया, जो तब पैदा
भी नहीं हुए थे।
जब जनरल रोबर्ट ई. ली युनियन के साथ दोराहे पर
आए और उन्होंने साउथ को सपोर्ट करने का फैसला

जब जनरल रोबर्ट ई. ली युनियन के साथ दोराहे पर
आए और उन्होंने साउथ को सपोर्ट करने का फैसला
किया तो उनका फ़ैसला भी एक साहसिक फैसला था
क्योंकि वे अच्छी तरह जानते थे कि बहुत से लोगो की
जान जाएगी और इसमें उनकी जान भी जा सकती है।
एक फ़ैसले पर आज़ादी और मृत्यु डिपेंड कर रही थी.
अब तक का सबसे महान फ़ैसला फिलाडेल्फिया में 4
जुलाई, 1776 को लिया गया। जब छप्पन लोगो ने एक
डॉक्यूमेंट पर अपने नाम लिखकर साइन किए और वे
जानते थे कि इससे या तो सारे अमेरिकी लोग आज़ाद
हो जाएँगे या फिर ये सभी छप्पन लोग फाँसी के फंदों
पर लटक जाएँगे।
आपने इस फेमस डॉक्यूमेंट के बारे में सुना होगा,
लेकिन आप शायद इससे पर्सनल अचीवमेंट का महान
सबक सीखना भूल गए होंगे, जो यह इतने सीधे ढंग से
सिखाता है।
हम सभी को उस इम्पोर्टेन्ट फ़ैसले की तारीख याद है,
लेकिन हममे से बहुत कम लोगो को यह एहसास है कि
यह फैसला लेने में कितने साहस की जरुरत थी। हमें
अपना इतिहास याद है क्योंकि यह हमें पढ़ाया जाता है।
हमें तारीखे याद है, लड़ने वाले कई जंगों के नाम याद
है, हमें बैली फोर्ज और यॉर्क टाउन याद है, हमें जॉर्ज
वाशिंगटन और लार्ड कार्नवालिस याद है। लेकिन हमें

वाशिंगटन और लार्ड कार्नवालिस याद है। लेकिन हमें
इन नामो, डेट और जगहों के पीछे उस असली पॉवर
के बारे में बहुत कम पता है, जिसने हमारी आज़ादी
को पक्का किया और यह यॉर्क टाउन में वाशिंगटन की
सेनाओ के पहुंचने से काफी पहले ही हो गया था।
इसे ट्रेजेडी ही कहा जाना चाहिए कि इतिहास के
writers ने पूरी तरह से उस महान शक्ति के बारे
में नहीं बताया जिसने इस देश को जन्म दिया, इसे
आज़ादी दी और दुनिया के सभी देशो के सामने
आज़ादी के नए स्टैण्डर्ड सेट किए। मैं इसे ट्रेजेडी
मानता हूँ क्योंकि यही वह शक्ति है, जिसका इस्तेमाल
इंसान जीवन में मुश्किलों और बाधाओं को पार करने
में करता है और जीवन को मांगी गई कीमत चुकाने को
मजबूर करता है।
हम सनखसि में उन घटनाओ की ओर देखें, जिन्होंने
इस शक्ति को जन्म दिया। कहानी बॉस्टन में 5 मार्च,
1770 की घटना से शुरू होती है। ब्रिटेन के सिपाही
सड़कों पर पहरा दे रहे थे और अपनी मौजूदगी में
पब्लिक को खुलकर धमकी दे रहे थे। ब्रिटेन के अफ़सर
अपने बीच में मार्च कर रहे हैं हथियार लिए हुए सैनिको
से चिढ़ गए उन्होंने अपनी चिढ़ को खुलकर दिखाना
शुरू किया और पहरा लगा रहे सैनिकों पर पत्थर और
नारे बरसाए जब तक कि उनके लीडर ने यह ऑर्डर
नहीं दिया बंदूकें तान लो… हमला बोल दो।’

जंग शुरू हो गया। इसमें कई लोग मारे गए और
बहुत से लोग घायल हुए। इस घटना से इतना गुस्सा
फैला कि उस प्रोविंस की असेंबली (जिसमे जाने माने
कोलोनियल लोग थे) ने कड़े एक्शन लेने के मकसद से
एक मीटिंग बुलाई।
उस मीटिंग के दो मेंबर जॉन हैनकॉक और सैम्युअल
Edens थे। वे साहस के साथ बोले और उन्होंने यह
अनाउंसमेंट की कि बोस्टन से सभी ब्रिटिश सैनिको को
बाहर निकालने का प्रपोजल पास करना चाहिए।
याद रखिए इन दो लोगों के दिमाग, जो फैसला हुआ
उन्हें उस आज़ादी की शुरुआत कहा जा सकता है,
जिसको आज सभी मरीचि नागरिक यूज़ कर रहे हैं।
यह भी याद रखें कि इन दो लोगों को यह फैसला
लेने के लिए बहुत विश्वास और साहस की जरुरत थी
क्योंकि यह एक खतरनाक फैसला था।
मीटिंग के खत्म होने से पहले सैम्युअल एडंस को
appoint किया गया कि वह प्रांत हचिंसन मिलने
जाए और ब्रिटिश टुकडियों की वापसी की मांग करें।
उनके रिक्वेस्ट को मान लिया गया और टुकड़ियाँ
बॉस्टन से हट गई, लेकिन यह चैप्टर यही नहीं ख़त्म
हुआ। इसने एक ऐसी सिचुएशन खड़ी कर दी थी,
जिससे पूरे ह्यूमन सिविलाइज़ेशन का इतिहास बदल
गया।

हुआ। इसने एक ऐसी सिचुएशन खड़ी कर दी थी,
जिससे पूरे ह्यूमन सिविलाइज़ेशन का इतिहास बदल
गया।
रिचर्ड हेनरी ली इस कहानी में एक इम्पोर्टेन्ट फैक्टर
इसलिए बनें क्योंकि उनमें और सैम्युअल एडंस में
अकसर कम्युनिकेशन होता रहता था, जिसमें वे अपने
प्रांत के लोगो की भलाई के बारे में आशा और डर को
खुलकर बताते थे।
इस आदत से एडंस के मन में यह विचार आया कि तेरह
कॉलोनियों के बीच लैटर के आपसी एक्सचेंज से उनके
efforts में बैलेंस आ जाएगा, जो प्रॉब्लम को सुलझाने
के संबंध में बहुत मददगार साबित होगा।
मार्च, 1772 में बॉस्टन में सैनिको के साथ हुई झड़प
के दो साल बाद एडंस ने इस विचार को मीटिंग के
सामने एक मोशन के रूप में रखा कि कॉलोनी में
कुछ
रिपोर्टर appoint किए जाए, जिसका गोल हो ब्रिटिश
अमेरिका की कॉलोनी की बेहतरी के लिए फ्रेंडली
कोऑपरेशन को बढ़ा देना।
यह उस आर्गेनाइजेशन की शुरुआत थी, जिसकी वजह
से आज हर अमेरिकी नागरिक आज़ाद है। मास्टर
माइंड पहले से ही आर्गनाइज्ड था। इसमें एडंस, ली
और हैनकॉक थे।

माइंड पहले से ही आर्गनाइज्ड था। इसमें एडंस, ली
और हैनकॉक थे।
कमिटी ऑफ कोरेसपोंडेंस को बनाया गया। बॉस्टन के
दंगे की तरह की घटनो के द्वारा कॉलोनी के नागरिक
ब्रिटिश सैनिकों के खिलाफ urorganized जंग
लड़ रहे थे, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हो रहा था।
उनकी पर्सनल शिकायते किसी एक मास्टर माइंड के
नीचे तब तक लोगो के किसी भी ग्रुप ने अपने दिल,
दिमाग, आत्मा और शरीर को इकट्ठे एक पक्के फ़ैसला
में नहीं लगाया ताकि ब्रिटेन के साथ उनका झगड़ा
हमेशा के लिए ख़त्म हो जाए।
इस दौरान ब्रिटैन भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा रहा।
ब्रिटेन के लोग भी अपन प्लान बना रहे थे और अपनी
तरफ से मास्टर माइंड की तैयारी कर रहे थे और उनके
साथ पैसा और आर्गनाइज्ड सेना को सपोर्ट कर रहे थे।
सिंहासन ने गेज को हचिंसन की जगह मैसाचुसेट्स
के गवर्नर के पोस्ट पर appoint किया। नए गवर्नर
के पहले कामो में से एक था सैमुएल्स एडंस के पास
मैसेज भेजना और उसका मकसद यह था कि डर
दिखाकर उसके विरोध को ख़त्म कर दिया जाए।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
उस समय की सिचुएशन को अच्छी तरह से समझाने के
लिए कर्नल फेंटन (वह आदमी जिसे मैसेज देकर गेज
ने भेजा था) और एडंस के बीच की चर्चा को यहाँ पर
डिस्कस करना चाहूँगा।
कर्नल फेंटन : मिस्टर एडंस, मुझे गवर्नर गेज ने
अधिकार दिया है ताकि मैं आपको यकीन दिला सकूँ
कि गवर्नर को यह पॉवर दी की गई हैं कि वे आपको
ऐसे फ़ायदा दिला सके, जिनसे आप संतुष्ट हो जाए
(रिश्वत देने का वादा करके एडंस को अपनी तरफ
मिलाने की कोशिश) इसके लिए सिर्फ एक शर्त है और
यह कि आप सरकार के फैसलो का विरोध करना बंद
कर दे। गवर्नर की आपको यही सलाह है कि आप
सरकार को आगे कभी नाराज़ न करे। आपका व्यवहार
इस तरह का है कि आपको हेनरी VIII के कानून द्वारा
सजा दी जा सकती है, जिसके द्वारा लोगो पर देशद्रोह
का मुकदमा इंग्लैंड में चल सकता है और इसका
फैसला किसी प्रांत का गवर्नर करता है। लेकिन अगर
आप अपनी पोलिटिकल दिशा बदल लेते हैं तो इससे
न सिर्फ आपको बहुत से पर्सनल फ़ायदे होंगे बल्कि
आपकी सम्राट से सुलह भी हो जाएगी।
सैमाएल्स एडंस को दो दिसिशन में से एक चनना था।

सैमुएल्स एडंस को दो डिसिशन में से एक चुनना था।
या तो वह अपना विरोध करना बंद कर सकता था
और पर्सनल रिश्वत ले सकता था या फिर वह विरोध
जारी रख सकता था और फाँसी पर चढ़ने का रिस्क ले
सकता था।
क्लियर रूप से वह समय आ चुका था, जब एडंस
तुरंत फैसला लेने के लिए मजबूर था। एक ऐसा
फ़ैसला जो उसकी जान भी ले सकता था। एडंस के
कर्नल फेंटन से यह वादा लिया कि कर्नल उसके जवाब
को गवर्नर को वैसा का वैसा ही सुनाएँगे।
एडंस का जवाब : ‘आप गवर्नर गेज को बता सकते हैं
कि मुझे विश्वास है कि मैंने सम्राट के साथ काफी पहले
सुलह कर ली है। कोई पर्सनल फ़ायदा मुझे इस बात
के लिए इंस्पायर नही कर सकता कि मैं अपने देश के
लिए सही काम करना छोड़ दूँ। गवर्नर गेज को यह भी
बताना कि सैमुएल एडंस ने उन्हें यह सलाह दी है कि
किसी गुस्सेल जनता की भावनाओ का वे अपमान न
करे।’
जब गवर्नर गेज को एडंस का यह तीखा जवाब मिला
तो वे गुस्से से भर गए और उन्होंने एक अनाउंसमेंट
जारी किया, “मैं यहाँ गवर्नर होने के नाते उन सभी लोगों
को माफ़ कर देने का प्रस्ताव रखता हूँ और उसका
वादा करता हूँ, जो तुरंत अपने हथियार डाल देंगे और

वादा करता हूँ, जो तुरंत अपने हथियार डाल देंगे और
शांतिपसंद जनता के ड्यूटी पर लौट जाएँगे, लेकिन
सैमुएल्स एडंस और जॉन हैनकॉक को इस माफ़ी का
फ़ायदा नहीं मिलेगा, जिनके अपराध इतने देशद्रोहि
नेचर के हैं कि उनके प्रति दंड के अलावा कोई और
कदम नहीं उठाया जा सकता।’
एडंस और हैनकॉक अब बुरी तरह फंस चुके थे।
आगबबूला हुए गवर्नर ने इन दोनों लोगों को एक और
फैसला लेने पर मजबूर कर दिया था, जो उतना ही
खतरनाक था। उन्होंने अपने स्ट्रोंग supporters की
एक सीक्रेट मीटिंग जल्दी बुलाई। मीटिंग में सब लोगों
के आ जाने के बाद एडंस ने दरवाजे पर ताला लगा
दिया और उसकी चाबी अपनी जेब में रख ली और
सभी मौजूद लोगों को यह जानकारी दी कि यह ज़रूरी
है कि कॉलोनीट्स की कांग्रेस बनाएं और कोई इंसान
तब तक कमरा न छोड़े जब तक कि कांग्रेस के बारे में
वे लोग किसी फैसले पर न पहुँच जाएं।
बहुत रोमांचक माहौल था। कुछ ने इस तरह के
रेवोल्युशनरी स्टेप के पॉसिबल रिजल्ट को तौला। कुछ
गवर्नर की बुराई करते हुए इतने कड़े फैसले पर पहुँचने
की समझदारी पर गंभीर डाउट जताया। उस कमरे में
दो लोग बंद थे जिन्हें डर छू भी नहीं गया था। वे लोग
फेलियर की संभावना के प्रति अंधे थे : हैनकॉक और
एडंस।

उनके मन के इन्फ्लुएंस से दूसरे लोग भी इस बात पर
सहमत हो गए कि कॉरेस्पोंडेंस कमिटी के द्वारा इस
तरह का अरेंजमेंट किया जाए कि पहली कॉन्टिनेंटल
की मीटिंग फिलाडेल्फिया में 5 सितंबर, 1774 को
organize किया जाए।
नई कांग्रेस की पहली मीटिंग के पहले एक और लीडर
देश के दूसरे हिस्से में ब्रिटिश अमेरिका के अधिकारों
पर “ब्रीफ विज़न” पब्लिश करने की कगार पर था।
यह इंसान था वर्जीनिया प्रांत का थॉमस जेफरल,
जिसके लार्ड डानमोर (वर्जीनिया में गवर्नमेंट के
representative) से संबंध उतने ही तनावपूर्ण थे,
जितने हैनकॉक और एडंस के अपने गवर्नर से थे।
उनके फेमस “rights brief” के पब्लिश होने के
कुछ ही समय बाद जेफरसन को यह जानकारी दी
गई कि उन पर सम्राट के विरोध में द्रोह करने के लिए
मुकदमा चलाया जा सकता है। इस धमकी से इंस्पायर
होकर जेफरसन के सहयोगी पैट्रिक हैनरी ने साहस के
साथ अपने दिल की बात कही और उन्होंने अपनी बात
को जिस लाइन से ख़त्म किया वह हमेशा याद रखा
जाएगा, “अगर यह देशद्रोह है तो फिर आपको जितने
आरोप लगाने हो लगा ले!
इस तरह के लोग कॉलोनियो के फ्यूचर पर गंभीर सोच
विचार करते हुए बैठे थे, जिनके पास न तो शक्ति थी, न
ही स्टेटस न ही मिलिटी की फोर्स और न ही पैसा। दन्हीं

इस तरह के लोग कॉलोनियो के फ्यूचर पर गंभीर सोच
विचार करते हुए बैठे थे, जिनके पास न तो शक्ति थी, न
ही स्टेटस, न ही मिलिट्री की फ़ोर्स और न ही पैसा। इन्हीं
लोगो के कारण पहली कांस्टेबल कांग्रेस शुरू हुई और
दो साल तक रुक रुककर चलती रही। फिर 7 जून,
1776 को रिचर्ड हेनरी ली उठे और उन्होंने स्पीकर को
एड्रेस करते हुए मीटिंग के सामने प्रस्ताव रखा।
“सर मैं यह प्रस्ताव रखना चाहता हूँ कि यूनाइटेड
कॉलोनियाँ आजाद राज्य है, जिसका उन्हें अधिकार है
और उन्हें ब्रिटिश एम्पायर से अपनी गुलामी के बंधन
तोड़ लेने चाहिए और ग्रेट ब्रिटेन से सारे पोलिटिकल
संबंध पूरी तरह से ख़त्म कर लेने चाहिए।’
आज़ादी लिए के सनसनीखेज प्रस्ताव पर गर्म हुई बहस
और यह इतनी लंबी चली कि उसका पेशेंस जवाब दे
गया। अंत में कई दिनों की बहस के बाद वह फिर से
फर्श पर आया और क्लियर और मज़बूत आवाज में
बोला ‘ मिस्टर प्रेसिडेंट, हम कई दिनों से इस टॉपिक
पर चर्चा कर रहे हैं। यही इकलौता रास्ता है जिस पर
हम चल सकते हैं। फिर हम और ज्यादा देर क्यों कर
रहे है? बहस में समय क्यों गवाँया जाए? इस ख़ुशी के
दिन अमेरिकन रिपब्लिक का जन्म हो जाने दे। उन्हें उठ
खड़ा होने दे और हमारा यह राज्य विनाश और जीत
पर बेस्ड नहीं होगा बल्कि इसके ज़रिए से तो शांति और
कानून के राज्य की दोबारा स्थापना होगी।’

इससे पहले कि उनके प्रस्ताव पर अंतिम वोटिंग हो, ली
को वर्जीनिया वापस लौटना पड़ा क्योंकि उनके परिवार
में गंभीर बीमारी हो गई थी, लेकिन जाने से पहले
उन्होंने इस काम का बीड़ा अपने मित्र जेफरसन के
हाथों में सौंपा, जिसने तब तक स्ट्रगल करने का वादा
किया जब तक कि पॉजिटिव एकशन नहीं लिया जाता।
उसके कुछ समय बाद कांग्रेस के प्रेजिडेंट (हैनकॉक) ने
जेफरसन को इंडिपेंडेंस का घोषणापत्र तैयार करनेवाली
कमेटी का चेयरमैन बना दिया।
कमेटी ने लंबे समय तक उस डॉक्यूमेंट को तैयार करने
में कड़ी मेहनत की जिसे कांग्रेस द्वारा स्वीकार कर
लिए जाने का मतलब यह था कि जो भी आदमी इस
पर साइन करेगा, वह एक तरह से अपने डैथ वारंट पर
साइन करेगा। अगर कॉलोनियां ग्रेट ब्रिटेन के विरोध में
जंग हार जाए और जंग तो तय था।
डॉक्यूमेंट तैयार हो गया और 28 जून को उसका
ओरिजिनल ड्राफ्ट कांग्रेस के सामने पढ़ा गया। कई
दिनों तक इस पर विचार हुआ, इसमें बदलाव हुए
और इसे unanimous रूप दिया गया। जुलाई को
थॉमस जेफरसन मीटिंग के सामने खड़े हुए और उन्होंने
नीडरता से कागज पर लिखा गया सबसे इम्पोर्टेन्ट
फ़ैसला पढ़ा।
“जब इंसानों के जीवन की यात्रा में यह ज़रूरी हो
जाता है कि एक देश दसरे देश के साथ पॉलिटिकल

जब इंसानों के जीवन की यात्रा में यह ज़रूरी हो
जाता है कि एक देश दूसरे देश के साथ पॉलिटिकल
बंधनो को ख़त्म कर ले और अपनी आज़ादी की
शक्तियों का आनंद लेते हुए अलग और समान दर्जा
हासिल कर ले, जिसे नेचर के नियमो और भगवान ने
बनाया है तो मानव जाति के विचारों के प्रति सम्मान की
यह मांग होती है कि वे उन कारणों के बारे में बताए,
जिनसे वे अलगाव के लिए इंस्पायर हुए…
.
जब जेफरसन ने पूरा घोषणापत्र पढ़ा तो उस पर वोटिंग
हुई, उसे स्वीकार किया गया और उस पर छप्पन लोगो
ने साइन किए, जिनमे से हर एक ने उस पर अपना नाम
लिखने के फैसले के साथ ही अपनी जिंदगी को दाँव पर
लगा दिया। उस फैसले से एक ऐसा देश अस्तित्व में
आया, जिसने फ्यूचर में मानव जाति को हमेशा के लिए
फ़ैसले लेने के अधिकार की सौगात दी।
उन घटनाओ का एनालिसिस करें, जिनकी बदौलत
इंडिपेंडेंस का घोषणापत्र तैयार हुआ और यह विश्वास
करे कि यह देश जो आज दुनिया के सभी देशो के बीच
सम्मान का पात्र है और जो इतना शक्तिशाली है, उसे
बनाने का फ़ैसला छप्पन लोगो के मास्टर माइंड ग्रुप
ने लिया था। इस फैक्ट को अच्छी तरह से जान ले कि
उनके फ़ैसले ने वाशिंगटन की सेनाओ की सक्सेस को
पक्का कर दिया था, क्योंकि उस फैसले का भाव हर
सैनिक के दिल में था जो जंग लड़ने गया था। जब इस
तरह की स्पिरिचुअल पॉवर आपके साथ होती है तो

DA A 5
तरह की स्पिरिचुअल पॉवर आपके साथ होती है तो
फेलियर आपके पास भी नही फटक सकती है।
यह भी समझ लें (पर्सनल फ़ायदे के नज़रिए से) कि
जिसने इस देश को आज़ादी दी यह वही शक्ति है,
जिसका इस्तेमाल हर उस इंसान को करना चाहिए, जो
खुद अपने फैसले लेता है। यह शक्ति इस बुक में बताए
गए प्रिंसिपल्स से आती है। इंडिपेंडेंस के घोषणापत्र में
इसे खोजना मुश्किल नहीं होगा, कम से कम छह तो
आपको मिल ही जाएंगे : इच्छा, डिसिशन , विश्वास,
लगन, मास्टरमाइंड और आर्गनाइज्ड प्लानिंग।
इस पूरी फिलॉसफी में यह सुझाव मिलेगा कि अगर
स्ट्रोंग इच्छा को विचार का सपोर्ट मिले तो इसमें अपने
आपको फिजिकल रूप में बदलने की tendency
होती है। आप इस तरीके का बेहतरीन एग्ज़ाम्पल इस
कहानी में खोज सकते है और यूनाइटेड स्टेट्स स्टील
कारपोरेशन के आर्गेनाइजेशन की कहानी भी इस बात
का सटीक एग्ज़ाम्पल है कि विचार किस तरह अनोखे
रूप से बदलते है।
इस तरीके के रहस्य की खोज में चमत्कार की तलाश
न करे क्योंकि आपको चमत्कार नहीं मिलेंगे। आपको
सिर्फ़ नेचर के अनंत रूल मिलेंगे. यहाँ रूल हर उस
आदमी के लिए मौजूद है, जिसमें इनका इस्तेमाल
करने का विश्वास और हिम्मत है। इनका इस्तेमाल देश
की आज़ादी हासिल करने के लिए भी किया जा सकता

करने का विश्वास और हिम्मत है। इनका इस्तेमाल देश
की आज़ादी हासिल करने के लिए भी किया जा सकता
है और अमीर बनने के लिए भी।
जो लोग तुरंत और क्लियर फ़ैसला पर पहुँचते है वे
जानते है कि वे क्या चाहते है और आम तौर पर यह
उन्हें मिल जाता है। जीवन के किसी भी फील्ड में
लीडर्स तुरंत और मजबूती से फ़ैसला लेते है। यही वह
सबसे main कारण है कि वे लीडर्स होते है। दुनिया
में उस इंसान को जगह देने की आदत होती है, जिसके
शब्दों और एक्शन से पता चलता है कि वह जानता है
कि वह कहाँ जा रहा है.
डिसिशन ना ले पाना एक ऐसी आदत है, जो बचपन
में शुरू होती है, जब बच्चा ग्रेड स्कूल, हाई स्कूल
और कॉलेज में आगे बढ़ता है तो यह आदत धीरे-धीरे
परमानेंट आदत बनती जाती है, जिसमें गोल की कोई
क्लैरिटी नहीं होती।
डिसिशन ना ले पाने की आदत स्टूडेंट के साथ उस
बिज़नेस में भी जाती है, जिसे वह चुनता है… अगर
वह सचमुच कोई बिज़नेस चुनें। आमतौर पर कॉलेज
से निकलने के बाद स्टूडेंट सिर्फ जॉब की तलाश करता
है, चाहे उसे जो भी जॉब मिले। वह मिलने वाली पहली
जॉब को करने लगता है क्योंकि उन्हें डिसिशन ना ले
पाने की आदत पड़ गई है। 96 परसेंट लोग आज
ऐसी पोजीशन पर सिर्फ सैलरी के लिए काम कर रहे हैं

पाने की आदत पड़ गई है। 96 परसेंट लोग आज
ऐसी पोजीशन पर सिर्फ सैलरी के लिए काम कर रहे हैं
क्योंकि उनमें किसी फिक्स्ड पोस्ट का प्लान बनाने के
लिए क्लियर फ़ैसला लेने की शक्ति की कमी थी और
उनमे यह नॉलेज भी नहीं था कि employer का
चुनाव कैसे किया जाए।
क्लियर फ़ैसला लेने में हमेशा साहस की ज़रुरत होती
है कई बार तो बहुत ज़्यादा साहस की। छप्पन लोगो ने
जब इंडिपेंडेंस के घोषणापत्र पर साइन किए तो उन्होंने
अपने इस फैसले पर अपने जीवन को दाँव पर लगा
दिया। जो इंसान किसी पोजीशन को हासिल करने
के लिए फिक्स्ड फ़ैसले पर पहुँचता है और जीवन में
अपनी सर्विसेज को वही केंट वसूल करता है, जो वह
चाहता है वह अपने इस फैसले पर अपने जीवन को तो
दाँव पर नहीं लगाता है। फाइनेंसियल आज़ादी, अमीरी,
एक्सपेक्टेड बिजनस और प्रोफेशनल पोजीशन उस
इंसान की पहुँच में नहीं है, जो इन चीजों की उम्मीद
करने, इनके प्लान बनाने और इनकी मांग करने को
नजरअंदाज करता है या इससे इनकार करता है।
वह इंसान यकीनन दौलत कमा सकता है, जो उस तरह
से अमीरी की इच्छा रखे, जिस तरह सैम्युअल एडंस ने
कॉलोनियों की आज़ादी की इच्छा की थी।
मॉडर्न वक्त का सबसे बढ़िया एग्ज़ाम्पल फेडरल
एक्सप्रेस (FEDEX) के फाउडंडर फ्रेड स्मिथ हैं,

मॉडर्न वक्त का सबसे बढ़िया एग्ज़ाम्पल फेडरल
एक्सप्रेस (FEDEX) के फाउडंडर फ्रेड स्मिथ हैं,
जिन्होंने फ़ैसला लेने की हिम्मत की।
जब वह येल यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की एजुकेशन
हासिल कर रहे थे, तब उनके प्रोफेसर ने बताया कि
आने वाले फ्यूचर में एयर freight (किराया) ही
एयरलाइंस का पैसा कमाने का main ज़रिया होगा।
स्मिथ ने एग्जाम में इसका बिल्कुल उलट लिखा।
उनका मानना था कि पैसेंजर के लिए जो रूट है, वह
सामान ले जाने के लिए सही नहीं है। उन्होंने पाया कि
सामान ज़्यादा होने के साथ उनका किराया कम नहीं
होगा।
एयर फ्रेट तभी फायदेमंद हो सकता है, जब पूरी रूप से
एक नया सिस्टम बनाया जाए, जो बड़े शहरों के साथ
छोटे शहरों तक भी पहुँच बना सके और किराया पैकेज
के हिसाब से हो न कि लोगों के लिए। प्रोफेसर को यह
बात ठीक नहीं लगी और उन्होंने स्मिथ को बहुत कम
मार्क्स दिए।
स्मिथ का प्रिंसिप्ल यह था कि सभी फ्रेट एयरलाइन
ज़्यादातर रात में उड़नी चाहिए, जब सभी एयरपोर्ट
इतना बिजी न हो। तब वे ज़्यादा ज़रूरी सामान को ले
जाएँगे, जिनके लिए डिलीवरी की स्पीड, किराया से
ज्यादा जरूरी हो। ये सभी सामान एक जगह पर इकट्ठा

जाएग, जनक लए डलावरा का स्पाड, किराया स
ज़्यादा जरूरी हो। ये सभी सामान एक जगह पर इकट्ठा
किए जाएँगे (उन्होंने अपना शहर मेंफिस चुना) जहाँ
से, कंप्यूटर द्वारा सारे सामान को अलग-अलग किया
जाएगा और उनकी मंजिल तक पहुँचने के लिए लोड
किए जाएंगे। छोटे शहरो को सामान भेजने का सिस्टम
मजबूत करने के बाद, ये जहाज पूरी देश और फिर पूरी
दुनिया के लिए उड़ान भरने लगेंगे।
स्मिथ को यह यह विश्वास था कि देश के वेंचर
कैपिटलिस्ट इस इनोवेटिव आईडिया पर excited
होंगे और इसे पसंद करेंगे। पर उनकी उम्मीद से उलटे
उन capitalists ने बहुत कम इंट्रेस्ट दिखाया।
पर यह सब स्मिथ को रोकने के लिए काफी नहीं थे।
इस प्रोजेक्ट के लिए उनका समर्पण और जूनून ही था,
जिसके द्वारा उन्होंने $91 मिलियन की कैपिटल इकट्ठा
कर ली।
उस वक्त उनकी competitor कंपनियों को यह
महसूस हुआ कि स्मिथ का विचार उनकी इंडस्ट्री के
लिए पोटेंशियल ख़तरा है। सभी एयरलाइंस ने सिविल
एयरोनॉटिकल बोर्ड में स्मिथ की जरुरी परमिशन न
मिलने के लिए भरपूर कोशिश की। स्मिथ की टीम
को वहाँ के constitution में एक कमी नजर आई,
जहाज पर लोड 7500 पौंड से कम है उन्हें CAB के
परमिशन की ज़रुरत नहीं है।

परामशन का ज़रुरत नहा ह।
स्मिथ आगे बढे और उन्होंने कई छोटे जेट बनवाए।
उन्होंने अपना main ऑफिस मेंफिस में रखा और
यह सर्विस देश के 75 शहरो के एयरपोर्ट में शुरू कर
दी। फेडेक्स देश के अलग-अलग हिस्सों से सामान
मेंफिस में पहुँचाता, जहाँ उन्हें अलग किया जाता
और तुरंत फिर से उनके मंजिल तक पहुँचाने के लिए
री-शिप किया जाता।
स्मिथ ने सभी सामान को पहुंचाने के लिए 24 घंटे का
अपना टारगेट सेट किया और यह गोल लगभग हर बार
पूरा किया।
कड़ी मेहनत और इतने efforts के बाद भी कंपनी को
पहले चार सालों में भारी नुकसान हुआ। यह नुकसान
लाखों डॉलर का था। इंवेस्टर्स को इस बात की ख़ास
चिंता होने लगी थी।
नुकसान के बावजूद–इंवेस्टर्स ने स्मिथ को जिम्मेदार
ठहराया–यहाँ तक कि उन्हें कंपनी से निकालने के बारे
में भी विचार किया। लेकिन स्मिथ का विश्वास नहीं
डगमगाया। उसका साहस कभी कमजोर नहीं पड़ा।
उन्होंने कई एक्सपर्ट्स को कंपनी में लिया और दिन रात
काम पर जुट गए। अगले साल फेडरल का revenue
75 मिलियन डॉलर कर दिया, यानी 3.6 मिलियन
डॉलर का प्रॉफिट।
फैक्स की कम्पटीशन की वजह से चिट्टियों और

नुकसान के बावजूद इंवेस्टर्स ने स्मिथ को जिम्मेदार
ठहराया–यहाँ तक कि उन्हें कंपनी से निकालने के बारे
में भी विचार किया। लेकिन स्मिथ का विश्वास नहीं
डगमगाया। उसका साहस कभी कमजोर नहीं पड़ा।
उन्होंने कई एक्सपर्ट्स को कंपनी में लिया और दिन रात
काम पर जुट गए। अगले साल फेडरल का revenue
75 मिलियन डॉलर कर दिया, यानी 3.6 मिलियन
डॉलर का प्रॉफिट।
फैक्स की कम्पटीशन की वजह से चिट्ठियों और
डॉक्युमेंट्स के लिए फेडेक्स का इस्तेमाल नहीं होता
था। इसके सिवाय एक और competitor था
पोस्टल सर्विसेज, जो एक रात और कम दाम में चिट्ठियाँ
भेजती थी। इन सब के बावजूद स्मिथ ने नयापन और
समर्पण जारी रखा, जिससे फेडरल सामान ले जाने के
लिए लगातार सुधार करता रहा।
चैप्टर सात वेल आर्गनाइज्ड प्लान में हर तरह की
सर्विस के बारे में बताया गया है। किस तरह आप मन
लायक employer और मनचाही सर्विस चुन सकते
है। ये सुझाव तब तक कारगर नहीं साबित होंगे, जब
ये
तक आप इस प्लानिंग को एक्शन प्लान में नहीं ढालते
है।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
9. लगन
विश्वास पैदा करने के लिए ज़रूरी कोशिश
अमीर बनने की ओर आठवाँ कदम
इच्छा को इसके फाइनेंसियल रूप में बदलने के प्रोसेस
में लगन एक ज़रूरी फैक्टर है। लगन का बेस विल
पॉवर है।
विल पॉवर और स्ट्रोंग इच्छा जब सही तरीके से मिल
जाते है तो एक ऐसा pair बन जाता है, जिसका कोई
तोड़ नहीं है। जो लोग बेहद अमीर बनते हैं उन्हें आम
तौर पर इमोशनलेस और कई बार निर्दयी भी समझा
जाता है। अक्सर उन्हें गलत समझ जाता है। उनमे
विल पॉवर होती है, जिसे वे लगन के साथ मिला देते हैं
और इस तरह वे अपने गोल्स को हासिल करना पक्का
कर लेते है।
हेनरी फोर्ड को भी बेरहम और निर्दयी समझा जाता रहा
है। यह गलतफहमी इसलिए हुई कि वे ऑफिस में अपने
प्लान के प्रति लगन से जुटे रहते और जुटे रहने के लिए
जोर देते थे।
ज्यादातर लोग पहली मुश्किल या पहली मुसीबत सामने

DA A <
ज्यादातर लोग पहली मुश्किल या पहली मुसीबत सामने
आते ही अपने गोल्स और इरादों को दूर फेंक देते है।
कुछ लोग सारे विरोध के बावजूद आगे बढ़ते हैं, जब
तक कि वे अपने गोल को हासिल नहीं का लेते।
लगन शब्द के पीछे कोई बहुत बड़ा मतलब नहीं छुपा
हुआ है लेकिन यह गुण इनसान के कैरेक्टर के लिए
उतना ही इम्पोर्टेन्ट है, जितना कि स्टील के लिए कॉर्बन।
दौलत कमाने में आमतौर पर इस फिलॉसफी के सभी
तेरह फैक्टर्स पर अमल करने की जरुरत होती है, जो
लोग अमीर बनना चाहते है उन्हें इन प्रिंसिपल्स को
समझना चाहिए और इनके साथ लगन को मिलाना
चाहिए।
अगर आप इस बुक को इस इरादे से पढ़ रहे है कि आप
इसके नॉलेज को अपने जीवन में उतारेंगे तो आपकी
लगन का पहला इम्तिहान तब होगा, जब आप चैप्टर दो
में दिए गए छह स्टेप्स को फॉलो करना शुरु करेंगे।
जब तक कि आप उन दो परसेंट लोगो में से न हों,
जिनका पहले से ही फिक्स्ड गोल हो जिसके तरफ
आगे बढ़ रहे हों और जिनके पास इस गोल को हासिल
करने के लिए कोई क्लियर प्लान है, तब तक आप
इंस्ट्रक्शन्स को पढ़ेंगे और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी
जीते रहेंगे और उन इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो नहीं करेंगे।
लगन की कमी फेलियर के सबसे बड़े कारणों में से

A 5
लगन की कमी फेलियर के सबसे बड़े कारणों में से
एक है। यही नहीं, हजारो लोगो के एक्सपीरियंस ने
यह साबित किया है कि लगन की कमी एक ऐसी
कमजोरी है, जिसे कोशिश से दूर किया जा सकता है।
आप कितनी ऐसे से लगन की कमी को जीत सकते हैं,
यह पूरी तरह इस बात पर डिपेंड करता है कि आपकी
इच्छा कितनी स्ट्रोंग है।
पूरे अचीवमेंट का स्टार्टिंग पॉइंट है इच्छा। इसे हमेशा
अपने दिमाग में रखें। कमजोर इच्छाओ के रिजल्ट भी
कमजोर होते हैं, जिस तरह कम आग से कम गर्मी
मिलती है। अगर आपको लगता है कि आपमें लगन
की कमी है तो इस कमजोरी का इलाज यह है कि आप
अपनी इच्छा की आग को स्ट्रोंग बना लें।
बुक को पूरा पढ़े और फिर चैप्टर दो पर लौट जाएँ और
तुरंत छह स्टेप्स के संबंध में दिए गए इंस्ट्रक्शन्स पर
अमल करना शुरू कर दें। आप जितने जोश से इन
इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो करेंगे, उससे यह क्लियर रूप से
साबित होगा कि आपमें पैसा कमाने की कितनी ज़्यादा
या कितनी कम इच्छा है। अगर आप पाते हैं कि आप
उदासीन हैं तो आप इस नतीजे पर पहुँच सकते है कि
आपमें अब भी मनी consciousness डेवलप नहीं
हो पाई है, जो पैसा कमाने के लिए जरुरी है, क्योंकि
अमीरी इसी consciousness के डेवलप होने के
बाद आती है।

दौलत उस आदमी की तरफ खिंची आती है, जिसका
मन उसे अट्रैक्ट करने के लिए तैयार है, ठीक उसी तरह
जिस तरह पानी समुद्र की तरफ खिंचा चला जाता
है। ठीक उसी तरह जिस तरह लोहा चुंबक की ओर
attract होता है।
अगर आपको लगे कि आपकी लगन कमजोर है तो
आप अपने ध्यान को मास्टर माइंड की पॉवर वाले
चैप्टर में दिए गए इंस्ट्रक्शन्स पर कंसन्ट्रेट कर लें,
अपने चारो तरफ मास्टर माइंड ग्रुप का घेरा बना लें
और इस ग्रुप के मेंबर्स के सपोर्ट और एफर्ट से आप
लगन को डेवलप कर सकते हैं। ऑटो सजेशन और
सब कॉन्शियस माइंड के चैप्टर में भी आप लगन को
डेवलप करने के लिए एक्स्ट्रा इंस्ट्रक्शन पाएँगे। इन
चैप्टर्स में बताए गए इंस्ट्रक्शन्स का पालन करें, जब
तक कि नेचर आपके सब कॉन्शियस माइंड में बनीं
तसवीर के अनुसार आपकी मनपसंद चीज़ आपको ना
दे दे।
उस पॉइंट के बाद आपकी राह में लगन की कमी के
कारण कोई रुकावट नहीं आएगी।
चाहे आप जाग रहे हों या सोए हुए हों आपका सब
कॉन्शियस माइंड हमेशा काम करता है।
कभी कभार या झटकों के साथ किए गए efforts
के साथ इन रूल्स का इस्तेमाल करने से आपको कोई

17

कभी कभार या झटकों के साथ किए गए efforts
के साथ इन रूल्स का इस्तेमाल करने से आपको कोई
फ़ायदा नहीं होगा। अगर आपको रिजल्ट चाहिए तो
आपको सभी रूल्स को फॉलो करना होगा, जब तक
कि उनको फॉलो करना आपकी आदत न बन जाए।
आप मनी Consciousness को आप दूसरे किसी
तरीके से डेवलप नहीं कर सकते।
गरीबी उस इंसान की तरफ अट्रैक्ट होती है, जिसका
मन इसके लिए favourable होता है। और पैसा
ऐसे व्यक्ति की तरफ अट्रैक्ट होता है, इसका मन इसे
अट्रैक्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और
इसमें यही रूल्स का सहारा लिया जाता है। जिस मन
में मनी Consciousness नहीं होती, गरीबी की
Consciousness उस मन को अपने आप जकड़
लेती है। गरीबी की Consciousness बिना कुछ
किए अपने आप आ जाती है, इसके लिए कुछ लागू
करने की या डेवलप करने की कोई जरूरत नहीं होती।
मनी Consciousness को organize करना
होता है, ताकि आपमें वह Consciousness न पैदा
हो जाए।
ऊपर पैराग्राफ में कही गई बातों के पूरे मतलब को
समझे और इसके बाद आप दौलत कमाने में लगन के
इम्पोर्टेस को अपने आप समझ जाएँगे। लगन के बिना
आप शुरू करने से पहले ही हार जाएँगे। जबकि लगन
ने IITTी-माजी ।

DA A 5
समझ आर इसक बाद आपदालत कमान म लगनक
इम्पोर्टेस को अपने आप समझ जाएँगे। लगन के बिना
आप शुरू करने से पहले ही हार जाएँगे। जबकि लगन
के साथ जीत आपकी ही होगी।
1
अगर आपने कभी कोई बुरा सपना देखा हो तो आपको
लगन के इम्पोर्टेस का एहसास होगा। आप बिस्तर पर
पड़े है, आधे जागे है और आपको ऐसा लग रहा है जैसे
आपको कुचल दिया गया है। आप करवट नहीं ले सकते
या एक muscle भी नहीं हिला सकते। आपको
एहसास होता है कि आपको अपने muscles पर
फिर से कंट्रोल करना चाहिए। विल पॉवर के लगन
भरे एफर्ट के द्वारा आप अंत में अपने एक हाथ की
उँगलियों को हिलाने में सक्सेसफुल होते हैं। अपनी
उँगलियों को हिलाना जारी रखते हुए आप अपने कंट्रोल
को अपने पूरी बॉडी तक ले जाते है, जब तक कि आप
उसे उठा ने ले। इसके बाद आप दूसरे हाथ के साथ भी
यही करते है। अंत में आप अपने एक पैर के muscle
पर कंट्रोल कर लेते हैं और यही दूसरे पैर के साथ भी
करते है। फिर इच्छा के बेस्ट एफर्ट के द्वारा आप अपने
मस्कुलर सिस्टम पर पूरा कंट्रोल हासिल कर सकते हैं
और अपने बुरे सपने से बाहर निकल आते है। इसमें
स्टेप-by-स्टेप चलना ही सीक्रेट है।
आप पाएंगे कि अपनी मानसिक जड़ता से बाहर
निकलने के लिए भी इसी technique की ज़रुरत
होगी।

पहले धीमी स्पीड से कोशिश करे, फिर अपनी स्पीड
बढ़ाकर कोशिश करते रहे, जब तक कि आपको अपनी
विल पॉवर पर पूरा कंट्रोल हासिल न हो जाए। लगे रहे
चाहे शुरुआत में आपकी स्पीड कितनी ही धीमी क्यों न
हो, लगन के साथ आपको सक्सेस भी मिलेगी।
अगर आप सावधानी से अपने मास्टर माइंड ग्रुप को
चुनते हैं तो इसमें आपको कम-से-कम एक आदमी
ऐसा मिलेगा, जो लगन के डेवलपमेंट में आपकी मदद
करेगा। कुछ लोगों ने बेहद अमीरी इसलिए हासिल की
क्योंकि सिचुएशन ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर
किया था और उन्हें मजबूरन लगनशील बनना पड़ा
जिन्होंने लगन की आदत डाली है। उन्होंने एक तरह
से फेलियर का insurance करा लिया है। चाहे वे
कितनी ही बार फेल हो जाएँ लेकिन वे आखिरकार
शिखर पर पहुँच ही जाते है। कई बार तो ऐसा लगता है
जैसे कोई छुपा हुआ गाइड कहीं पर है, जो आशाहीन
क्सपीरियंस द्वारा लोगों को परखता है। जो लोग हारने
के बाद अपने आप को उठा लेते हैं और कोशिश करना
जारी रखते हैं और अंत में सक्सेसफुल हो जाते है।
उनसे बाद में दुनिया कहती है ‘शाबाश हम जानते थे
कि तुम यह कर सकते हो।’ छुपा हुआ गाइड लगन के
इम्तिहान से गुजरे बिना किसी को भी महान अचीवमेंट
का आनंद नहीं लेने देता। जो लोग इम्तहान नहीं देते वे
इसमें पास नहीं होते।
जो लोग सहन करते है, उन्हें उनकी लगन का बड़ा

जो लोग सहन करते है, उन्हें उनकी लगन का बड़ा
इनाम भी मिलता है। बदले में उन्हें वह गोल हासिल
होता है, जिसका वे पीछा करते हैं। यही सब कुछ नहीं
है। उन्हें बहुत पैसे के अलावा भी बहुत कुछ हासिल
होता है
“यह नॉलेज हर फेलियर के साथ अपने ही बराबरी के
फ़ायदे का बीज लाती है।
इस रूल के एक्सेप्शन है। कुछ लोग एक्सपीरियंस
से लगन के इम्पोर्टस को जानते है। यह ऐसे लोग है,
जिन्होंने हार को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने इसे सिर्फ
कुछ पलों का एक्सपीरियंस माना। यह ऐसे लोग है,
जिनकी इच्छाएँ लगन से इतनी जुडी हुई है कि उनकी
हार आखिरकार जीत में बदल जाती है। हम जो जिंदगी
के कगार पर खड़े रहते हैं बड़े नंबर में उन लोगों को
देखते हैं, जो हारकर जमीन पर गिर चुके है, लेकिन
वे कभी उठकर खड़े नहीं होते। दूसरी ओर हम देखते
हैं कि कुछ लोग यह मानते है कि हार और कुछ नहीं,
बल्कि ज़्यादा कोशिश करने की इंस्पिरेशन है।
सौभाग्य से ये लोग जिंदगी के रिवर्स गियर को कभी
स्वीकार नहीं करते। लेकिन हम जिसे देख नहीं पाते,
और जिसके अस्तित्व के बारे में ज़्यादातर लोग
अनजान रहते है, वह ऐसी चुप्पी लेकिन स्ट्रोंग शक्ति है
जो न लोगो की मदद के लिए आगे आती है, जो निराशा

जो न लोगो की मदद के लिए आगे आती है, जो निराशा
के खिलाफ़ स्ट्रगल करते है। अगर हम इस शक्ति को
कोई नाम देना चाहे तो हमें इसे लगन कहना होगा। हम
सभी एक बात जानते है कि अगर किसी में लगन न
हो तो वह जिंदगी के किसी भी फील्ड में बड़ी सक्सेस
हासिल नहीं कर सकता।
लगन की शक्ति का एक बेहतरीन एग्ज़ाम्पल है
हॉलीवुड। दुनिया के हर कोने से लोग हॉलीवुड आते है
ताकि वे ताकत, पैसा, किस्मत, प्यार और शोहरत कमा
सके या फिर जो भी इनसान सक्सेस के रूप में देखता
है, वह सब हासिल कर सके। ऐसे ही एक बार एक
इंसान ने हॉलीवुड में कदम रखा और दुनिया ने देखा कि
एक और आदमी ने हॉलीवुड पर अपना कब्जा जमा
लिया। पर हॉलीवुड इतनी आसानी से किसी को जमने
नहीं देता। इसके लिए काबिलियत के साथ कभी हार न
मानने की आदत होनी चाहिए, तभी हॉलीवुड उस पर
पैसो की बारिश करता है। पूरा सीक्रेट सिर्फ एक शब्द में
है वह है–लगन!
एक्टर सने हमें एशिया के मार्शल आर्ट्स के लिए
जागरूक किया वह था ब्रूस ली। उन्हें जाने कब भुला
दिया गया होता अगर उनके पास लगन न होती!
ली चीन से अमेरिका सिर्फ सपना और अपने साथ
कड़ी मेहनत की ताकत लेकर पहुंचे। अपनी जवानी
में उन्होंने कुंगफू पर महारथ हासिल कर ली थी और

कड़ा महनत का ताकत लकर पहुचा अपना जवाना
में उन्होंने कुंगफू पर महारथ हासिल कर ली थी और
फिर वे कुंगफू के टीचर बन गए लेकिन उनका main
गोल एक्टर बनने का था। उन्होंने कुछ फिल्मो और
टीवी पर छोटे मोटे रोल किए, पर उन्हें ऐसा लगता
है, उनका सबसे बड़ा ब्रेक तब मिलने वाला था, जब
टीवी सीरियल के प्रोड्यूसर को एक कुंगफू सीरियल के
लिए एक ऐसा एक्टर चाहिए था, जिसे मार्टिल आर्ट्स
की नॉलेज हो। वे स्क्रीन टेस्ट में पास हो गए थे और
उस रोल को पाने के लिए उम्मीद जगने लगी थी। पर
दुर्भाग्य से वह रोल एक दूसरा एक्टर डेविड कार्डाइन
को दे दिया गया था।
निराश ली, एक्टिंग छोड़कर फिर से टीचर बनने जा
रहे थे। जब एशियाई लोगो को यह बात पता चली तो
उन्होंने उन्हें हार न मानने का और काम के प्रति लगन
से समर्पित रहने का सुझाव दिया। जल्दी ही यह बात
फिल्म इंडस्ट्री के हर तरह के लोगो के बीच फैल गई
और ली ने नए रोल के लिए कोशिश करना जारी रखा।
उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने कई फिल्मो में कई
रोल किए और उनकी इमेज एक ऐसे एक्टर के रूप
में हुई, जिन्होंने मार्शल आर्ट्स के प्रति पूरी दुनिया में
अवेयरनेस फैलाई। इस वजह से उनका एशियाई देशो
में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सम्मान किया जाता है।
यह दुख की बात थी कि उनके इस सक्सेसफुल जीवन
का अंत सिर्फ 32 साल की उम्र में हो गया। पर उनकी

यह दुख की बात थी कि उनके इस सक्सेसफुल जीवन
का अंत सिर्फ़ 32 साल की उम्र में हो गया। पर उनकी
popularity आज भी बनी हुई है। ब्रूस ली को सिर्फ
उनके चाहने वालों द्वारा ही नहीं याद किया जाता है
बल्कि उन लोगो के के द्वारा भी याद किया जाता है, जो
उस समय पैदा भी नही हुए थे, जब उनका जन्म हुआ
था। आज भी उनके टीवी शो और फिल्में पूरी दुनिया में
देखे जाते हैं।
बच्चन साहब की कविता भी इस बात पर सटीक बैठती
है–कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती।
लगन एक मेंटल स्टेट है इसलिए इसे डेवलप किया जा
सकता है। सभी मेंटल स्टेट्स की तरह ही लगन भी
फिक्स्ड कारणों पर बेस्ड है, जिनमें से कुछ नीचे दिए
गए है।
फिक्स्ड मकसद : आप क्या चाहते हैं यह जानना लगन
के डेवलपमेंट का पहला और शायद सबसे इम्पोर्टेन्ट
स्टेप है। एक पक्का मकसद इंसान को कई भाषाओ के
पार ले जाता है।
2. इच्छा : जब किसी चीज़ को हासिल करने की
आपकी स्ट्रोंग इच्छा हो तो लगन हासिल करना और
उसे बनाए रखना comparitively आसान हो जाता
है।
3. सेल्फ़-हेल्प : जब किसी प्लान को successfully
पूरा करने की अपनी काबिलियत में आपको विश्वास

3. सेल्फ़-हेल्प : जब किसी प्लान को successfully
पूरा करने की अपनी काबिलियत में आपको विश्वास
होता है तो आपको encouragement मिलता है
कि आप उस प्लान को लगन से पूरा करे। (सेल्फ़-हेल्प
उस प्रिंसिप्ल के इस्तेमाल द्वारा डेवलप की जा सकती
है, जिसका डिस्क्रिप्शन ऑटो सजेशन वाले चैप्टर में है)
4. plans की surety : आर्गनाइज्ड प्लानिंग, चाहे वे
कमजोर और पूरी तरह impractical हों, लगन को
encourage करती हैं।
5. सटीक नॉलेज : यह जानकारी कि आपके plan
दमदार हैं और एक्सपीरियंस या ऑब्जरवेशन पर बेस्ड
हैं लगन को encourage करती है। ‘जानने के
बजाय अनुमान लगाने ‘ से लगन बर्बाद हो जाती है।
6. सहयोग : सहानुभूति, अंडरस्टैंडिंग और दूसरों के
साथ सहयोग से लगन डेवलप होती है।
7. विल पॉवर : किसी फिक्स्ड गोल को हासिल करने
के plan बनाने पर अपने विचारों को फोकस
करने की आदत से लगन डेवलप होती है।
8. आदत : लगन आदत का सीधा रिजल्ट है। मन डेली
experiences का एक हिस्सा सोख लेता है और
वैसा ही बन जाता है जैसे इसे खुराक दी जाती है। डर
सबसे बुरा दुश्मन है और इसके इफेक्टिव इलाज के

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लगन की कमी के लक्षण
लगन के टॉपिक को छोड़ने से पहले अपनी लिस्ट बना
ले और खास तौर पर यह decide कर लें कि आपमें
कहीं इस ज़रूरी गुण की कमी तो नहीं है। हिम्मत के
साथ ख़ुद को चेक करें और पॉइंट by पॉइंट चेक करके
देखें कि लगन के आठ फैक्टर्स में से कितने फैक्टर
आपमें नहीं है। इस एनालिसिस से आप ऐसी चीजें
खोज पाएँगे, जिनसे आपकी खुद पर पकड़ मजबूत
होगी।
यहाँ पर आपको स्पिरिचुअल दुश्मन मिलेंगे, जो आपके
और बड़ी अचीवमेंट के बीच दीवार की तरह खड़े होंगे।
यहाँ पर आपको लगन की कमी दिखाने वाले लक्षण
ही नहीं मिलेंगे बल्कि इस कमजोरी के गहराई से बैठे
कारण भी मिलेंगे। इस लिस्ट को सावधानी से पढ़े और
अपने आपसे सीधे-सीधे पूंछे कि क्या आप सचमुच
जानना चाहते है कि आप कौन है और आप क्या करने
में एबिलिटी है। अगर आप अमीरी हासिल करना चाहते
हैं तो यह वे कमजोरियाँ हैं जिने आपको जीतना होगा।
1. आप क्या चाहते है, यह जानना या इसे ठीक ठीक
और क्लियर रूप से डिफाइन न कर पाना।

2. टालमटोल की आदत। (चाहे इसके पीछे कारण हो
या न हो। आमतौर पर इसके पीछे ढेर सारे बहाने पाए
जाते है।)
3. एक्सपर्ट नॉलेज हासिल करने में इंटेरेस्ट की कमी।
4. डाउट या झिझक के सिचुएशन का सामना करने के
बजाय हर मौके पर अपने हाथ से मामले को दूसरे के
साथ में देने की आदत। (इसमें भी बहाने बनाए जाते हैं)
5. प्रॉब्लम के solution के लिए क्लियर plans
बनने के बजाय बहनों पर भरोसा करने की आदत।
6. satisfaction| इस बीमारी का कोई इलाज नहीं
है और जिनको यह बीमारी है, उनके लिए कोई उम्मीद
नहीं है।
7. उदासीनता, जो आम तौर पर सभी मामलों में
समझौता करने की जल्दबाज़ी में झलकती है, बजाय
इसके कि opposite सिचुएशन का सामना किया
जाए और उनसे लड़ा जाए।
8. अपनी गलतियों के लिए दूसरो को दोष देने की
आदत और मुश्किल सिचुएशन से बचकर निकलने की
आदत।
9. इच्छा की कमजोरी। कर्म को इंस्पायर करने वाले
गोल्स के चुनाव में लापरवाही के कारण ऐसा होता है।

2. टालमटोल की आदत। (चाहे इसके पीछे कारण हो
या न हो। आमतौर पर इसके पीछे ढेर सारे बहाने पाए
जाते है।)
3. एक्सपर्ट नॉलेज हासिल करने में इंटेरेस्ट की कमी।
4. डाउट या झिझक के सिचुएशन का सामना करने के
बजाय हर मौके पर अपने हाथ से मामले को दूसरे के
साथ में देने की आदत। (इसमें भी बहाने बनाए जाते हैं)
5. प्रॉब्लम के solution के लिए क्लियर plans
बनने के बजाय बहनों पर भरोसा करने की आदत।
6. satisfaction| इस बीमारी का कोई इलाज नहीं
है और जिनको यह बीमारी है, उनके लिए कोई उम्मीद
नहीं है।
7. उदासीनता, जो आम तौर पर सभी मामलों में
समझौता करने की जल्दबाज़ी में झलकती है, बजाय
इसके कि opposite सिचुएशन का सामना किया
जाए और उनसे लड़ा जाए।
8. अपनी गलतियों के लिए दूसरो को दोष देने की
आदत और मुश्किल सिचुएशन से बचकर निकलने की
आदत।
9. इच्छा की कमजोरी। कर्म को इंस्पायर करने वाले
गोल्स के चुनाव में लापरवाही के कारण ऐसा होता है।

9. इच्छा की कमजोरी। कर्म को इंस्पायर करने वाले
गोल्स के चुनाव में लापरवाही के कारण ऐसा होता है।
में
10. हार की संभावना नजर आते ही मैदान छोड़ने की
आदत या जल्दबाज़ी। (छह बेसिक डरो में से एक या
इससे ज़्यादा पर बेस्ड)
1]. well-organized प्लानिंग की कमी जिन्हें
लिखा नहीं गया है और इसलिए उनका एनालिसिस नहीं
किया जा सकता।
12. विचारों के साथ आगे बढ़ने को नजरअंदाज करने
की आदत या मौका आने पर उसका फ़ायदा न उठाने
की आदत।
13. पक्का इरादा करने के बजाय सिर्फ इमेजिनेशन की
दुनिया में घूमना।
14. अमीरी के गोल के बजाय गरीबी के साथ समझौता
करने की आदत। कुछ बनने, कुछ करने और कुछ
हासिल करने की एम्बिशन की कमी।
15. अमीरी के शॉर्ट कट की खोज। बदले में बराबरी का
कीमत चुकाए बिना कुछ हासिल करने की कोशिश, जो
आमतौर पर जुए या ऐसी ही आदतों में झलकती है।
16. क्रिटिसिज्म का डर। कई लोग सिर्फ इसलिए plan
नहीं बना पाते या उन पर अमल नहीं कर पाते क्योंकि

16. क्रिटिसिज्म का डर। कई लोग सिर्फ इसलिए plan
नहीं बना पाते या उन पर अमल नहीं कर पाते क्योंकि
वे डरते हैं कि लोग क्या सोचेंगे, क्या करेंगे या क्या
कहेंगे। यह दुश्मन इस लिस्ट में सबसे बड़ा है क्योंकि
यह आमतौर पर सब कॉन्शियस माइंड में रहता है जहाँ
इसकी मौजूदगी दिखाई नहीं देती। (बाद वाले चैप्टर में
छह बेसिक डरो को देखिए
आइए हम क्रिटिसिज्म के डर के कुछ लक्षणों को
चेक करें। ज़्यादातर लोग अपने रिश्तेदार, दोस्तों और
पब्लिक को इस बात की परमिशन दे देते हैं कि वो उन्हें
इन्फ्लुएंस करें। वे अपने जीवन को अपने हिसाब से
नहीं जी पाते क्योंकि उन्हें क्रिटिसिज्म का डर सताता
रहता है।
अनगिनत लोग शादी करने में गलती करते है और उस
गलती को कभी नहीं सुधारते। नतीजा यह होता है कि
वे जीवन भर दुखी और परेशान रहते हैं क्योंकि उन्हें
यह डर होता है कि गलती को सुधारते समय लोग बुराई
करेंगे। (जो भी इस तरह के डर के सामने हार मानता है
वह जानता है कई उससे कितना बड़ा नुकसान होता है
क्योंकि इससे एम्बिशन ख़त्म होती है और हासिल करने
की भी इच्छा भी)
लाखों लोग कॉलेज छोड़ने के बाद हायर एजुकेशन
हासिल करने के लिए विचार को नजरअंदाज कर देते हैं
क्योंकि उन्हें क्रिटिसिज्म का डर होता है।

लाखों लोग कॉलेज छोड़ने के बाद हायर एजुकेशन
हासिल करने के लिए विचार को नजरअंदाज कर देते हैं
क्योंकि उन्हें क्रिटिसिज्म का डर होता है।
अनगिनत लड़के लडकियां, जवान और बूढ़े, अपने
रिश्तेदारों को यह परमिशन देते हैं कि वे ड्यूटी के
नाम पर उनकी जिंदगी तबाह कर दें और ऐसा सिर्फ
इसलिए होता है क्योंकि उन्हें क्रिटिसिज्म का डर होता
है। (ड्यूटी का यह मतलब नहीं होता कि कोई अपनी
पर्सनल इच्छाओं को ख़त्म कर ले और अपने जीवन
को अपने हिसाब से न जिए)
लोग बिजनेस में रिस्क उठाने से इनकार कर देते है
क्योंकि उन्हें उस ताने का डर होता है जो फेल होने के
बाद उन्हें सुनने को मिलेगी। इन मामलो में क्रिटिसिज्म
का डर सक्सेस की इच्छा से ज़्यादा स्ट्रोंग होता है।
बहुत सारे लोग खुद के लिए ऊँचे गोल बनाने से इनकार
कर देते हैं या करियर चुनने को भी नजरअंदाज कर देते
हैं क्योंकि उन्हें रिश्तेदारों और दोस्तों की क्रिटिसिज्म
का डर होता है, जो यह कह सकते है, ‘ज्यादा ऊँचे
गोल मत बनाओ, लोग सोचेंगे कि तुम्हारा दिमाग
खिसक गया है।’
जब एंडू कार्नेगी ने सुझाव दिया कि मैं बीस साल तक
पर्सनल अचीवमेंट की फिलॉसफी डेवलप करने में
मेहनत करु तो मेरी पहला रिएक्शन यही डर था कि
लोग क्या कहेंगे। इस सुझाव से मेरे सामने एक ऐसा

मेहनत करु तो मेरी पहला रिएक्शन यही डर था कि
लोग क्या कहेंगे। इस सुझाव से मेरे सामने एक ऐसा
गोल आ गया, जो मेरी इमेजिनेशन से भी ऊँचा था।
एक ही झटके में मेरा दिमाग बहाने बनाने लगा और
यह सभी बहाने क्रिटिसिज्म के इसी अंदरूनी डर की
वजह से बने थे। मेरे अंदर किसी ने कहा ‘तुम इसे नहीं
कर सकते–यह काम इतना बड़ा है और इसमें बहुत
समय लगेगा– तुम्हारे रिश्तेदार क्या सोचेंगे?” और
तुम अपना ख़र्चा कैसे चलाओगे? किसी ने भी अब
तक सक्सेस की कोई फिलॉसफी नहीं बनाई है। तुम्हे
यह विश्वास करने का क्या हक़ है कि तुम ऐसा कर
सकते हो?–वैसे भी तुम कौन हो जो इतने ऊँचे गोल
बनाओ? याद रखो कि तुम गरीब परिवार में जन्मे हो।
तुम फिलॉसफी के बारे में क्या जानते हो? लोग सोचेंगे
कि तुम्हारा दिमाग चल गया है। (और उन्होंने ऐसा सोचा
भी) आज से पहले किसी और ने यह काम क्यों नहीं
किया?
यही और इससे मिलते-जुलते कई और सवाल मेरे
दिमाग में कौंध गए और शोर मचने लगे। ऐसा लग रहा
था जैसे सारी दुनिया अचानक मेरी तरफ लगी थी और
मेरी हँसी उड़ाने पर तुली हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे
हर कोई यह चाहता हो कि मैं कार्नेगी के सुझाव को पूरा
करने से पहले ही हार मान लूँ।
मेरे पास एक अच्छा मौक़ा था कि मैं वहीं पर तुरंत
अपने एम्बिशन का गला घोंट दू, इससे पहले कि यह

मेरे पास एक अच्छा मौक़ा था कि मैं वहीं पर तुरंत
अपने एम्बिशन का गला घोंट दू, इससे पहले कि यह
मुझ पर हावी हो जाए। बाद में जब मैंने हजारों लोगो
का एनालिसिस किया तो मैंने पाया कि ज़्यादातर विचार
मुरदा पैदा होते है। तुरंत एक्शन का एक पक्का प्लान
बनाकर ही हम उनमें जीवन की साँस फूंकते है। विचार
को पालने का सही समय इसके जन्म का समय होता
है। इसके पैदा होने के बाद गुजरे हर मिनट इसके जिंदा
रहने को ज़्यादा पक्का करता है। ज़्यादातर विचारों
की मौत के पीछे क्रिटिसिज्म का डर होता है, जिसकी
वजह से वे प्लान और एक्शन के स्टेट तक नहीं पहुँच
पाते।
क्रिटिसिज्म से न घबराने वाला एक बेहतरीन
एग्ज़ाम्पल फ्रेड स्मिथ है, जिनके ऊपर क्रिटिसिज्म का
कोई असर नहीं पड़ा और वे पक्के इरादे से अपने सपने
को पूरा करने पर लगे रहे। फेडरल एक्सप्रेस की इसी
सक्सेस को पिछले चैप्टर में बताया गया है।
कई लोगों को यह विश्वास होता है कि फिजिकल
सक्सेस सौभाग्यशाली अवसरों का रिजल्ट होती है। इस
विश्वास के पीछे बेस है लेकिन जो लोग सिर्फ़ किस्मत
के भरोसे ही बैठे रहते है, वे लगभग हमेशा निराश
ही होते हैं क्योंकि वे एक और इम्पोर्टेन्ट एलिमेंट को
नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आप अपनी सक्सेस
पक्का करना चाहते हैं तो यह एलिमेंट आपमें मौजूद
होना चाहिए। यही वह नॉलेज है जिसकी मटट से आप

नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आप अपनी सक्सेस
पक्का करना चाहते हैं तो यह एलिमेंट आपमें मौजूद
होना चाहिए। यही वह नॉलेज है, जिसकी मदद से आप
अपनी इच्छा से सौभाग्यशाली मौक़ा बना सकते है।
टॉम मोनाघन को ही देख लीजिए, जिन्होंने डोमिनोज
पिज्जा को एक स्टोर से दुनिया भर में कई हजारो
होम डिलीवरी आउटलेट में बदल दिया। यह सब यूँ ही
नहीं हुआ, इसके लिए तीस साल का समय लग गया।
1989 में उन्होंने सोशल सर्विस करने के लिए अपनी
सक्सेसफुल कंपनी को बेचने का फ़ैसला ले लिया।
लेकिन उनका प्लान सक्सेसफुल नहीं हो सका।
जिस कंपनी ने डोमिनोज पिज्जा को खरीदा था, वह
दिवालिया होने के कगार पर पहुँच गई। जिस कारण
लगभग ढाई सालों के बाद मनोघम को फिर से वापस
आना पड़ा।
आर्गेनाइजेशन को फिर से खड़ा करने के लिए बहुत
ही कड़ी मेहनत और लगन की जरुरत पड़ी। मनोघम
ने यह समर्पण अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों में ही
सीख लिया था। बचपन में ही उन्होने नुकसान, गरीबी
और कुप्रथाओ से एक बिजनेसमैन के रूप में पहचान
बनाई थी। एक बार फिर से उन्होंने 6000 स्टोर
पहुँचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इन 6000 में
से 100 स्टोर यूनाइटेड स्टेट्स में ही थे।

एक बार फिर से चेन जब अपनी स्पीड से बढ़ने लगी तो
मनोघन ने पब्लिसिटी के लिए एक नया डिलीवरी रूल
लागू किया। इसने कस्टमर्स को उनके घर में 30 मिनट
में डोमिनोज पिज्जा पहुँचाने की सुविधा दी।
30 मिनट में पिज्जा पहुँचाने के चक्कर में डिलीवरी
करनेवाली गाड़ियों की स्पीड के कारण उन्हें कोर्ट के
चक्कर भी लगाने पड़े। एक औरत जिसका इसी वजह
से एक्सीडेंट हुआ था, उन्हें मनोघन को 30 लाख डॉलर
देने पड़े। अंत में एक और औरत को 780 लाख डॉलर
देने पड़े। इसके बाद उन्होंने इस 30 मिनट गारंटी नियम
को हटा लिया।
इस पैसे के भारी नुकसान के बावजूद मनोघन ने हार
नहीं मानी। उन्होंने ज़्यादा पैसा, ज़्यादा ताकत और
समय लगाया और उनकी कंपनी ने फिर से स्पीड पकड़
ली। उनके इस लगन और पॉजिटिव सोच ने उनके
टीम को encourage किया और यही कारण है कि
डोमिनोज अपनी इंडस्ट्री में सबसे सक्सेसफुल कंपनी
है।
आप जिन पहले सौ लोगों से मिले उनको टेस्ट करें।
उनसे पूछे कि वे जीवन में सबसे ज़्यादा क्या चाहते है
और उनमे से 98 लोग आपको यह नहीं बता पाएँगे।
अगर आप जवाब देने के लिए उन पर जोर डालेंगे तो
कुछ कहेंगे सिक्यूरिटी, कुछ कहेंगे दौलत, कुछ कहेंगे
सुख, बाकी कहेंगे शोहरत और पॉवर और बचे हुए

सुख, बाकी कहेंगे शोहरत और पॉवर और बचे हुए
लोग कहेंगे सोसाइटी में इज्ज़त, कम्फ़र्टेबल लाइफ,
गाने, नाचने या लिखने की स्किल लेकिन उनमे से कोई
भी इनको समझाने में सफल नहीं होगा या आपको
उस प्लान के बारे में हल्का सा हिंट भी नहीं दे पाएगा,
जिसके द्वारा वे अपनी unclear इच्छाओ को हासिल
करने की उम्मीद रखते हैं। अमीरी सिर्फ इमेजिनेशन
से नहीं आती। अमीरी क्लियर plans के जवाब के
रूप में आती है, जिनके पीछे फिक्स्ड इच्छाएँ हों और
लगातार लगन हो।
लगन केसे डेवलप करें
लगन की आदत डालने के चार इजी स्टेप्स है। इनके
लिए यह ज़रूरी नहीं है कि आपमें बहुत बुद्धि हो, या
आप हाइली educated हो या आपको इसमें बहुत
समय या एफर्ट देना पड़े। तो ज़रूरी स्टेप्स है-
2. एक
1. फिक्स्ड गोल जिसके बीच इसे अचीव करने की स्ट्रोंग
इच्छा हो।
प्लान जिस पर लगातार काम किया
जाए।
3. एक मन जो सभी नेगेटिव और निराश करने
वाले इन्फ्लुएंस की तरफ से कसकर बंद हो, जिनमे
रिश्तेदारो, दोस्तों और जान पहचान वालों के नेगेटिव
सुझाव भी शामिल है।
4. एक या एक से ज़्यादा ऐसे लोगों के साथ फ्रेंडली

सुझाव भी शामिल है।
4. एक या एक से ज़्यादा ऐसे लोगों के साथ फ्रेंडली
अग्रीमेंट, जो आपके प्लान और गोल को लेकर आपको
encourage करे।
यह चार स्टेप्स जीवन के सभी फील्ड में सक्सेस के
लिए ज़रूरी हैं। इस फिलॉसफी के तेरह प्रिंसिपल्स का
main मकसद यही है कि आप इन चारो स्टेप्स को
अपनी आदत बना लें।
यही वे स्टेप्स हैं, जिनके द्वारा इनसान अपने
फाइनेंसियल किस्मत को कंट्रोल कर सकता है।
यही वे स्टेप्स हैं, जो विचार की आज़ादी की ओर ले
जाते हैं।
यही वे स्टेप्स हैं, जो अमीरी की ओर ले जाते हैं।
यही आपको शक्ति, फ़ेम और सोसाइटी में मान सम्मान
का रास्ता दिखाते हैं।
यही वे चार स्टेप्स हैं, जो आपको प्रॉफिटेबल मौकों की
गारंटी देते हैं।
यही वे स्टेप्स हैं, जो सपनों को रियलिटी में बदलते हैं।
यही आपको डर, निराशा, उदासीनता पर जीत दिलवाते
हैं।
जो इन चार स्टेप्स को उठाना सीख जाते है उन सभी के
लिए एक शानदार तोहफ़ा है। यह तोहफ़ा है अपना खुद
का टिकेट लिखने का अधिकार और जीवन से अपनी
मूंहमांगी कीमत मांगने और पाने का रास्ता।

का टिकेट लिखने का अधिकार और जीवन से अपनी
मूंहमांगी कीमत मांगने और पाने का रास्ता।
लगनशील लोगों के पास वह कौन सी सीक्रेट पॉवर
होती है, जिसकी वजह से उनमें मुश्किलों पर जीत
हासिल करने की एबिलिटी होती है? क्या लगन का
गुण इनसान के मन में किसी तरह की स्पिरिचुअल,
मेंटल या केमिकल एक्टिविटी को पैदा करता है, जो
paraphysical पावर्स को उसके कांटेक्ट में ले
आती है? क्या अनलिमिटेड पॉवर उस इंसान के साइड
में हो जाती है, जो जंग हार जाने के बाद भी लड़ता
रहता है, जब सारी दुनिया उसके opposite कैंप में
हो?
यह और इसी तरह के कई सवाल मेरे मन में तब आए
जब मैंने हेनरी फोर्ड जैसे लोगो को ओब्सर्व किया
जिन्होंने कुछ नहीं से शुरुआत की और बाद में बड़ा
इंडस्ट्रियल एम्पायर खड़ा किया और शुरुआत में उनके
पास लगन के सिवाय कुछ भी न था। थॉमस अलावा
एडिसन को ले लें, जो सिर्फ तीन महीने स्कूल गए थे,
लेकिन वे दुनिया के महान इन्वेंटर बन गए और उन्होंने
लगन को टॉकिंग मशीन, मूविंग पिक्चर मशीन और
बिजली के बल्ब और पचास दूसरे काम के इन्वेंशन में
बदल दिया।
मुझे एडिसन और फोर्ड का एनालिसिस करने का
सुखद मौक़ा मिला है और मैंने कई सालों तक लगातार

यह और इसी तरह के कई सवाल मेरे मन में तब आए
जब मैंने हेनरी फोर्ड जैसे लोगो को ओब्सर्व किया
जिन्होंने कुछ नहीं से शुरुआत की और बाद में बड़ा
इंडस्ट्रियल एम्पायर खड़ा किया और शुरुआत में उनके
पास लगन के सिवाय कुछ भी न था। थॉमस अलावा
एडिसन को ले लें, जो सिर्फ तीन महीने स्कूल गए थे,
लेकिन वे दुनिया के महान इन्वेंटर बन गए और उन्होंने
लगन को टॉकिंग मशीन, मूविंग पिक्चर मशीन और
बिजली के बल्ब और पचास दूसरे काम के इन्वेंशन में
बदल दिया।
मुझे एडिसन और फोर्ड का एनालिसिस करने का
सुखद मौक़ा मिला है और मैंने कई सालों तक लगातार
उनके करियर पर निगाह रखी है। ‘मैंने उनको करीब
से स्टडी किया है इसलिए मैं यह बात रियल नॉलेज के
आधार पर कह रहा हूँ कि मैंने उन दोनों ही में लगन के
अलावा और कोई गुण नहीं देखा, जिससे यह दूर दूर
तक आभास हो कि वह उनकी महान अचिवेमेंट का
सोर्स हो सकता है।’
अगर कोई इंसान सक्सेसफुल लोगो पर थोड़ी बहुत भी
जाँच पड़ताल करता है, तो वह इस नतीजे पर जरूर
पहुँच जाएगा कि उनकी सक्सेस के main सोर्स
अटलता (लगन), कोशिश और फिक्स्ड गोल थे।

Ruchi Kumari:
यह और इसी तरह के कई सवाल मेरे मन में तब आए
जब मैंने हेनरी फोर्ड जैसे लोगो को ओब्सर्व किया
जिन्होंने कुछ नहीं से शुरुआत की और बाद में बड़ा
इंडस्ट्रियल एम्पायर खड़ा किया और शुरुआत में उनके
पास लगन के सिवाय कुछ भी न था। थॉमस अलावा
एडिसन को ले लें, जो सिर्फ तीन महीने स्कूल गए थे,
लेकिन वे दुनिया के महान इन्वेंटर बन गए और उन्होंने
लगन को टॉकिंग मशीन, मूविंग पिक्चर मशीन और
बिजली के बल्ब और पचास दूसरे काम के इन्वेंशन में
बदल दिया।
मुझे एडिसन और फोर्ड का एनालिसिस करने का
सुखद मौक़ा मिला है और मैंने कई सालों तक लगातार
उनके करियर पर निगाह रखी है। ‘मैंने उनको करीब
से स्टडी किया है इसलिए मैं यह बात रियल नॉलेज के
आधार पर कह रहा हूँ कि मैंने उन दोनों ही में लगन के
अलावा और कोई गुण नहीं देखा, जिससे यह दूर दूर
तक आभास हो कि वह उनकी महान अचिवेमेंट का
सोर्स हो सकता है।’
अगर कोई इंसान सक्सेसफुल लोगो पर थोड़ी बहुत भी
जाँच पड़ताल करता है, तो वह इस नतीजे पर जरूर
पहुँच जाएगा कि उनकी सक्सेस के main सोर्स
अटलता (लगन), कोशिश और फिक्स्ड गोल थे।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
समर्पण और लगन का एक बेहतरीन एग्ज़ाम्पल
‘स्टारबक मैन’ होवार्ड शुल्ज है। किसी नए विचार के
सक्सेसफुल होने के लिए तीन एलेमेंट्स की जरुरत
होती है—पर्पस, पेशेंस और स्ट्रोंग विश्वास.
शूल्ज को सिएटल में एक छोटी सी कॉफी डिस्ट्रीब्यूटरर
(जिसके कुछ आउटलेट्स थे) में सेल्स और मार्केटिंग
को मैनेज करने के लिए जॉब मिली। उनकी उस समय
शादी हुई थी और उम्र सिर्फ़ 29 साल थी। उन्होंने और
उनकी पत्नी ने इस नई जॉब के लिए न्यू यॉर्क शहर का
अपना घर छोड़ दिया।
एक साल बाद शूल्ज एक बिज़नेस ट्रिप पर इटली गए
हुए थे। उन्होंने वहाँ पर देखा तो पाया कि इटालियन
कल्चर में कॉफी कितनी इम्पोर्टेन्ट है। असल में उनके
सुबह की शुरुआत बेहतरीन कॉफी बार में एक कप
कॉफी से होती है। काम के बाद दोस्त और साथ काम
करने वाले एक बार फिर से कॉफी बार में मिलते और
घर वापस जाने से पहली कॉफी की चुस्की का आनंद
लेते हैं। यह इटालियन जिंदगी का इम्पोर्टेन्ट हिस्सा है।
शूल्ज के मन में यह विचार कौंधा कि इसकी शुरुआत
अमेरिका में भी की जा सकती है। उन्हें ऐसा लगा कि
स्टारबॉक्स की शानदार काफी अमेरिका में नई शरुआत

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
समर्पण और लगन का एक बेहतरीन एग्ज़ाम्पल
‘स्टारबक मैन’ होवार्ड शुल्ज है। किसी नए विचार के
सक्सेसफुल होने के लिए तीन एलेमेंट्स की जरुरत
होती है—पर्पस, पेशेंस और स्ट्रोंग विश्वास.
शूल्ज को सिएटल में एक छोटी सी कॉफी डिस्ट्रीब्यूटरर
(जिसके कुछ आउटलेट्स थे) में सेल्स और मार्केटिंग
को मैनेज करने के लिए जॉब मिली। उनकी उस समय
शादी हुई थी और उम्र सिर्फ़ 29 साल थी। उन्होंने और
उनकी पत्नी ने इस नई जॉब के लिए न्यू यॉर्क शहर का
अपना घर छोड़ दिया।
एक साल बाद शूल्ज एक बिज़नेस ट्रिप पर इटली गए
हुए थे। उन्होंने वहाँ पर देखा तो पाया कि इटालियन
कल्चर में कॉफी कितनी इम्पोर्टेन्ट है। असल में उनके
सुबह की शुरुआत बेहतरीन कॉफी बार में एक कप
कॉफी से होती है। काम के बाद दोस्त और साथ काम
करने वाले एक बार फिर से कॉफी बार में मिलते और
घर वापस जाने से पहली कॉफी की चुस्की का आनंद
लेते हैं। यह इटालियन जिंदगी का इम्पोर्टेन्ट हिस्सा है।
शूल्ज के मन में यह विचार कौंधा कि इसकी शुरुआत
अमेरिका में भी की जा सकती है। उन्हें ऐसा लगा कि
स्टारबॉक्स की शानदार काफी अमेरिका में नई शरुआत

उ…।।
लेते हैं। यह इटालियन जिंदगी का इम्पोर्टेन्ट हिस्सा है।
शूल्ज के मन में यह विचार कौंधा कि इसकी शुरुआत
अमेरिका में भी की जा सकती है। उन्हें ऐसा लगा कि
स्टारबॉक्स की शानदार काफी अमेरिका में नई शुरुआत
कर सकती है।
इस चेन को बनाना शूल्ज का जूनून बन गया। उन्होंने
कॉफी बार की चेन बनाने की ठान ली । लेकिन
स्टारबॉक्स कॉफी के मालिक उनकी बात से सहमत
नहीं थे। वे कॉफी बिज़नेस के होलसेल बिजनेसमैन
थे और रेस्टेंट के लिए उनके पास सिर्फ एक छोटी सी
दुकान थी।
अपने गोल को लागू करने के लिए शूल्ज ने स्टारबक्स
की अपनी जॉब छोड़ दी। 1986 में सिएटल में उन्होंने
अपना पहला कॉफी बार खोला। यह एक इंस्टेंट सक्सेस
में बदल गया। फिर उन्होंने सिएटल में एक और बार
खोला और फिर बैंकूवर में खोल लिया। अगले ही साल
उन्होंने स्टारबक्स को खरीद लिया और उसी के नाम पर
अपनी कंपनी का नाम रख लिया।
शूल्ज को विश्वास था कि स्टारबक्स की शानदार
क्वालिटी वाली काफी एक दिन अमेरिकी लोगो के हर
दिन का हिस्सा बन जाएगी। उनकी यह सोच सच में
कारगर साबित हुई और 1988 तक उनकी कंपनी दिन
दूनी रात चौगुनी तरक्की करती रही।

स्टारबक्स ने अमेरिका में सैकड़ो कॉफी बार खोल दिए
जहाँ प्रोफेशनल लोग काम के बाद बैठकर बात करे
और काफी की चुस्की लेते हुए अपने काम के स्ट्रेस से
बाहर निकल सके। उनकी यह सोच यहाँ तक कारगर
साबित हुई कि नौजवान लोग अपनी डेट कॉकटेल पर
करने के बजाय एक कप कॉफी पर करने लगे। परिवार
रोजमर्रा की जिंदगी से ऊबने के बाद फिल्म देखने के
बाद यहाँ बैठा करते थे।
स्टारबक्स लगातार तीन साल नुकसान में रहा । सिर्फ
1989 में 40 लाख डॉलर से ज़्यादा का नुकसान हुआ
था। पर शूल्ज ने हार नहीं मानी। उन्हें पूरा यकीन था
कि इस कंपनी को मजबूत करने का यही रास्ता है, यह
नुकसान जल्द ही फ़ायदे में बदल जाएगा।
एक बार सिएटल के स्टोर को फ़ायदा होना शुरू हुआ,
शूल्ज ने धीरे-धीरे दूसरे शहरों में अपने विचार को
अमल किया–वैंकूवर, पोर्टलैंड, लॉस एंगेल्स, डेनवर,
शिकागो और फिर उसके बाद पूरी दुनिया में पहुँचाया।
स्टारबक्स आज पूरी दुनिया के घर-घर के लोगो की
जरुरत बन चुका है और अमेरिका के मार्केटिंग स्ट्रेटनी
का नमूना बन चुका है। इसने शूल्ज को अमेरिका के
सबसे अमीर लोगो में से एक बना दिया।
10. मास्टरमाइंड की पॉवर
अमीर बनने की ओर नवाँ कदम

10. मास्टरमाइंड की पॉवर
अमीर बनने की ओर नवाँ कदम
दौलत कमाने में सक्सेस हासिल करने के लिए शक्ति
ज़रूरी है।
प्लान तब तक बेजान और बेकार होते हैं, जब तक कि
उन्हें एक्शन में बदलने की पूरी पॉवर न हो।
यह चैप्टर वह तरीका बताएगा, जिसके द्वारा कोई
इंसान शक्ति हासिल कर सकता है।
पॉवर को आर्गनाइज्ड और बुद्धिमानी से गाइड की हुई
नॉलेज के रूप में डिफाइन किया जा सकता है। शक्ति
से हमारा मतलब है, वह आर्गनाइज्ड एफर्ट जो किसी
इंसान की इच्छा को इसके फिजिकल रूप में बदलने के
लिए काफ़ी है. आर्गनाइज्ड एफर्ट दो या इससे ज़्यादा
लोगो के मिले जुले एफर्ट का फल होता है, जो एक
फिक्स्ड गोल की ओर तालमेल की भावना के साथ
काम करते है।
पैसा कमाने के लिए पॉवर ज़रूरी है। पैसा कमाने के
बाद उन्हें बनाए रखने के लिए भी पॉवर ज़रूरी है।
आइए अब नॉलेज के सोर्स के बारे में जानें –
1. अनलिमिटेड पॉवर या अनलिमिटेड इंटेलिजेंस = :
नॉलेज के इस सोर्स से दूसरे किसी चैप्टर में बताए
तरीके से कांटेक्ट किया जा सकता है और इसमें
क्रिएटिव इमेजिनेशन की मदद ली जा सकती है।
मोनिता टासीरिया

2. स्टोर किए हुए एक्सपीरियंस : इनसान पहले के
एक्सपीरियंस (या उसके कोई हिस्सा जिसे organize
और रिकॉर्ड किया गया है) किसी भी अच्छी पब्लिक
लाइब्रेरी में मिल सकता है। इस स्टोर्ड एक्सपीरियंस
का एक इम्पोर्टेन्ट हिस्सा पब्लिक स्कूलों और कॉलेजो
में पढ़ाया जाता है जहाँ इसे केटेगरी में बांटकर और
organize किया गया है।
3. एक्सपेरिमेंट और रिसर्च : साइंस के फील्ड में और
जीवन के लगभग हर दूसरे फील्ड में लोग हर दिन
नए फैक्ट्स को इकट्ठा कर रहे हैं, केटेगरी में बाँट रहे
हैं और organize कर रहे हैं। जब नॉलेज स्टोर्ड
एक्सपीरियंस के ज़रिए से मौजूद न हो तो हमें इसी
सोर्स की तरफ मुड़ना होगा। यहाँ भी अकसर क्रिएटिव
इमेजिनेशन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
नॉलेज इनमे से किसी भी सोर्स से हासिल किया जा
सकता है। इसे क्लियर plans में organize करके
और इन plans को एक्शन में बदलकर शक्ति में
बदला जा सकता है।
नॉलेज के इन तीन main सोर्सेज के टेस्ट से हमें यह
पता चलता है कि अगर कोई अकेला इंसान नॉलेज
को इकट्ठा करने, उन्हें प्लान में बदलने और फिर उन्हें
एक्शन में बदलने के लिए सिर्फ अपने ही कोशिशों पर
डिपेंड करता है तो उन्हें बहुत मुश्किलें आती हैं। अगर
याशिलागि टिल्ट है गौर भगार बनानते है तो

एक्शन में बदलने के लिए सिर्फ अपने ही कोशिशों पर
डिपेंड करता है तो उन्हें बहुत मुश्किलें आती हैं। अगर
उसकी प्लानिंग डिटेल्ड है और अगर वे बहुत बड़े है तो
आमतौर पर उन्हें दूसरो को अपने साथ सहयोग करने
के लिए इंस्पायर करना चाहिए और तभी वह उनमे
शक्ति के ज़रूरी एलिमेंट भर पाएगा।
मास्टर माइंड के द्वारा शक्ति हासिल करना
मास्टर माइंड को इस तरह डिफाइन किया जा सकता
है–किसी फिक्स्ड गोल को हासिल करने के लिए दो
या दो से ज़्यादा लोगो का तालमेल की भावना के साथ
नॉलेज और एफर्ट का कॉम्बिनेशन।’
कोई भी अकेला इंसान बिना मास्टर माइंड की मदद
के बड़ी शक्ति हासिल नहीं कर सकता। पहले के एक
चैप्टर में इच्छा को इसके फिजिकल रूप में बदलने के
मकसद से प्लान बनाने के लिए इंस्ट्रक्शन दिए गए थे।
अगर आप लगन और बुद्धि से इन इंस्ट्रक्शन्स को
फॉलो करेंगे और अपने मास्टर माइंड ग्रुप के चुनाव में
सावधानी रखेंगे तो आप यह मान ले कि आपने आधा
सफर तय कर लिया है हालाँकि यह आपको उस समय
महसूस नहीं होगा।
आप शक्ति की उन intangible संभावनाओ को
बेहतर तरीके से समझ लें, जो सही रूप से चुने मास्टर
माईंड समूह के ज़रिए से आपके सामने मौजूद है,

आप शक्ति की उन intangible संभावनाओ को
बेहतर तरीके से समझ लें, जो सही रूप से चुने मास्टर
माईंड समूह के ज़रिए से आपके सामने मौजूद है,
इसलिए हम यहाँ पर मास्टर माइंड प्रिंसिप्ल के दो
लक्षण क्लियर करेंगे, जिनमे से एक फाइनेंसियल
पहलू क्लियर है। फाइनेंसियल फ़ायदा किसी भी इंसान
द्वारा हासिल है, जो अपने सहयोग से घेरे रखता है, जो
उसकी दिल से मदद करने की इच्छा रखते हैं और ऐसा
पूरे अंडरस्टैंडिंग की भावना से करते हैं।
सहयोग से भरे ऐसे रिश्ते लगभग हर बड़ी दौलत का
आधार रहा है। इस महान सच्चाई को समझ लेने से
यकीनन आपका फाइनेंसियल स्टेटस बदल सकता है।
मास्टर माइंड प्रिंसिप्ल के स्पिरिचुअल रूप (साइकिक
रूप) को समझना ज्यादा मुश्किल है क्योंकि इसमें
स्पिरिचुअल फ़ोर्स का ज़िक्र आता है जिसके बारे में
इंसानों को ज़्यादा जानकारी नहीं है.
ये याद रखें कि पूरे यूनिवर्स में सिर्फ दो element
हैं matter और एनर्जी. matter को को
molecule, atom electron के यूनिट में तोड़ा
जा सकता है. इसी तरह एनर्जी के भी यूनिट होते हैं.
इंसानी मन एनर्जी का एक रूप है और इसका एक
हिस्सा स्पिरिचुअल नेचर का होता है। जब दो लोगो के
मन एकता और तालमेल से जुड़े होते है तो दोनों की
एनर्जी के स्पिरिचअल गनिट एक नाता गा संबंध बना

हस्सा स्पिारचुजल नचर पाहाता 6। जब दा ला| फ
मन एकता और तालमेल से जुड़े होते है तो दोनों की
एनर्जी के स्पिरिचुअल यूनिट एक नाता या संबंध बना
लेते है, जो मास्टर माइंड के स्पिरिचुअल रूप को क्रिएट
करता है।
मास्टर माइंड प्रिंसिपल या इसके फिजिकल फॉर्म की
तरफ मेरा ध्यान पचास साल पहले एंडू कार्नेगी ने खींचा
था। इस प्रिंसिप्ल की खोज मेरे जीवन के काम के
चॉइस चुनने के लिए जिम्मेदार थी।
कार्नेगी का मास्टर माइंड ग्रुप लगभग पचास लोगो के
स्टाफ से मिलकर बना था, जिसे उन्होंने इकट्ठा किया था
और उनका फिक्स्ड गोल स्टील बनाना और उन्हें बेचना
था। उन्होंने अपनी पूरी दौलत का क्रेडिट उस शक्ति को
दिया, जो उन्होंने अपने मास्टर माइंड द्वारा हासिल की
थी।
किसी भी ऐसे इंसान के रिकॉर्ड के एनालिसिस करे
जिसने बेशुमार दौलत इकट्ठी की है और कई ऐसे लोगो
का भी एनालिसिस करे जिन्होंने थोड़ी कम दौलत
इकट्ठी की है और आप पाएँगे कि उन्होंने जाने या
अनजाने में मास्टर माइंड प्रिंसिप्ल का इस्तेमाल किया
है।
किसी भी दूसरे प्रिंसिप्ल के द्वारा ये महान शक्ति हासिल
नहीं की जा सकती।

किसी भी दूसरे प्रिंसिप्ल के द्वारा ये महान शक्ति हासिल
नहीं की जा सकती।
इनसान के मन की तुलना एक बिजली की बैटरी से की
जा सकती है। यह एक जाना माना सच है कि बिजली
की बैटरियों का ग्रुप एक अकेली बैटरी की तुलना में
ज़्यादा एनर्जी देती है। यह भी एक मानी हुई बात है कि
एक अकेली बैटरी उसी proportion में एनर्जी देगी
जितनी कि इसके सेल के संख्या और ताकत होगी।
मन भी इसी तरीके से काम करता है यही कारण है कि
कई मन दूसरे मन की तुलना में ज़्यादा इफेक्टिव होते
हैं और इससे हम इम्पोर्टेन्ट फैक्ट पर आते हैं। तालमेल
के भाव द्वारा मन का कंबाइंड ग्रुप एक अकेले मन से
ज़्यादा विचार एनर्जी तरह बिजली की बैटरियों का ग्रुप
एक अकेली बैटरी की तुलना में ज़्यादा एनर्जी पैदा
करता है।
इस तुलना से यह तुरंत क्लियर हो जाता है कि मास्टर
माइंड प्रिंसिप्लम में शक्ति का वह रहस्य है, जिसके
द्वारा उन लोगों को शक्ति हासिल होती है, जो दूसरे
लोगो के ब्रेन द्वारा खुद को घेरे रहते है।
इससे एक और विचार मिलता है, जो हमें मास्टर माइंड
प्रिंसिप्ल के स्पिरिचुअल फॉर्म की समझ के और ज़्यादा
करीब ले जाएगा। जब पर्सनल मन का ग्रुप तालमेल की
भावना से जुडता होता है और काम करता है तो इस

पापापासुन ९ ।। ८ पुष ।
ज़्यादा एनर्जी देती है। यह भी एक मानी हुई बात है कि
एक अकेली बैटरी उसी proportion में एनर्जी देगी
जितनी कि इसके सेल के संख्या और ताकत होगी।
मन भी इसी तरीके से काम करता है यही कारण है कि
कई मन दूसरे मन की तुलना में ज़्यादा इफेक्टिव होते
हैं और इससे हम इम्पोर्टेन्ट फैक्ट पर आते हैं। तालमेल
के भाव द्वारा मन का कंबाइंड ग्रुप एक अकेले मन से
ज़्यादा विचार एनर्जी तरह बिजली की बैटरियों का ग्रुप
एक अकेली बैटरी की तुलना में ज़्यादा एनर्जी पैदा
करता है।
इस तुलना से यह तुरंत क्लियर हो जाता है कि मास्टर
माइंड प्रिंसिप्लम में शक्ति का वह रहस्य है, जिसके
द्वारा उन लोगों को शक्ति हासिल होती है, जो दूसरे
लोगो के ब्रेन द्वारा खुद को घेरे रहते है।
इससे एक और विचार मिलता है, जो हमें मास्टर माइंड
प्रिंसिप्ल के स्पिरिचुअल फॉर्म की समझ के और ज़्यादा
करीब ले जाएगा। जब पर्सनल मन का ग्रुप तालमेल की
भावना से जुड़ता होता है और काम करता है तो इस
गठबंधन से बढ़ी हुई एनर्जी मिलती है, जो उस ग्रुप के
हर पर्सनल मन के लिए मौजूद होती है।

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यह एक जाना माना फैक्ट है कि हेनरी फोर्ड ने अपना
बिजनस, करियर, गरीबी, बिना पढ़ाई लिखाई और
बिना नॉलेज की बाधाओं के बीच शुरू किया। यह
भी एक उतनी ही जानी मानी बात है कि दस साल के
कम समय में फोर्ड ने इन तीनो बाधाओं को पार कर
लिया और पच्चीस सालों में अपने आपको अमेरिका
के सबसे अमीर लोगों में से एक बना लिया। इस फैक्ट
के साथ यह एक्स्ट्रा नॉलेज भी जोड़ दे कि फोर्ड के
सबसे तेज कदम उस समय नजर आए, जब वे थॉमस
अलावा एडिसन के करीबी दोस्त बन गए और आप
यह समझना शुरू कर देंगे कि एक मन का दूसरे पर
इन्फ्लुएंस क्या हासिल कर सकता है। एक कदम
आगे जाएँ और इस फैक्ट पर विचार करें कि फोर्ड की
सबसे इम्पोर्टेन्ट अचीवमेंट उस समय से शुरू हुई, जब
उनका परिचय हार्वे फायरस्टोन, जॉन बरोज, और लूथर
बरबैंक (जिसमें से हर एक में बहुत मन का पोटेंशियल
था) से हुआ और आपको इस बात का ज़्यादा सबूत
मिल जाएगा कि ताकत मन के फ्रेंडली मेलजोल से
मिलती है।
इनसान उन लोगो की नेचर और आदतें और विचार
की शक्ति लेता है, जिनके साथ वह साहनुभूति और
नालागेल की भावना के गाना टना है। दिगन

इनसान उन लोगो की नेचर और आदतें और विचार
की शक्ति लेता है, जिनके साथ वह साहनुभूति और
तालमेल की भावना के साथ उठता बैठता है। एडिसन,
बरबैंक, बरोज और फायरस्टोन के साथ अपने रिश्ते
के द्वारा फोर्ड ने अपनी खुद के माइंड पॉवर में इन चार
लोगो की बुद्धि, नॉलेज, एक्सपीरियंस और स्पिरिचुअल
शक्तियाँ भी जोड़ ली। यही नहीं, उन्होंने मास्टर माइंड
प्रिंसिप्ल का इस्तेमाल भी किया जिसका तरीका इस
बुक में बताया जा रहा है। यह प्रिंसिप्ल आपके लिए
मौजूद है।
प्रेसिडेंट फ्रेंक्लिन रूज़वेल्ट बेस्ट दिमाग वाले लोगों को
वाशिंगटन मास्टर माइंड ग्रुप बनाने के लिए लेकर आए।
उन्होंने इस ग्रुप का नाम “भरोसेमंद दिमाग” रखा। वर्ल्ड
वॉर || के बाद और दौरान इस ग्रुप को “विचार शक्ति’
के नाम से भी जाना जाने लगा और किसी भी मुश्किल
समस्या का हल निकालने के लिए ये लोग तुरंत बुलाए
जाते थे।
हमने पहले भी महात्मा गांधी का जिक्र किया है। शायद
ज़्यादातर लोग जिन्होंने उस अनोखे आदमी के बारे में
सुना है। उन्होंने बस इतना ही सुना होगा कि वह इंसान
जिसने बिना कोई फॉर्मल कपडे पहने ही अंग्रेजो को
हरा दिया।
असल में गांधीजी कोई अनोखे इंसान नहीं थे बल्कि
वे अपने समय के सबसे ज़्यादा पावरफुल आदमी थे।

असल में गांधीजी कोई अनोखे इंसान नहीं थे बल्कि
वे अपने समय के सबसे ज़्यादा पावरफुल आदमी थे।
(उनके followers का नंबर ही इतना ज़्यादा था) यह
कहना बढचढ कर बोलना नहीं होगा कि वह अब तक
जन्म लेने वाले सबसे ज़्यादा पावरफुल इंसान थे।
हम उस तरीके को स्टडी करें, जिसके द्वारा उन्होंने
अपनी ग्रेट पॉवर हासिल की। इसे कुछ ही शब्दो में
एक्सप्रेस किया जा सकता है। उन्हें शक्ति इस बात से
मिली कि उन्होंने बीस करोड़ लोगो को तन और मन से,
तालमेल की भावना से एक क्लियर गोल के लिए जोड़
दिया था।
शोर्ट में, गांधीजी ने एक चमत्कार कर दिया क्योंकि
बीस करोड़ लोगो को किसी बात के लिए मजबूर करने
के बजाय तालमेल की भावना के साथ सहयोग करने
के लिए इंस्पायर करना एक चमत्कार ही कहा जाएगा।
अगर आपको इसके चमत्कार होने में डाउट है तो आप
दो लोगो को तालमेल की भावना के साथ सहयोग करने
के लिए इंस्पायर करके देखें, चाहे इसका समय कितना
भी लंबी हो।
हर बिजनेसमैन जानता है कि एम्प्लाइज से
तालमेल से काम करवाना कितना मुश्किल होता है।
शक्ति किन सोर्सेज से हासिल की जा सकती है? इस
लिस्ट में आपने देखा है कि सबसे ऊपर अनलिमिटेड

हर बिजनेसमैन जानता है कि एम्प्लाइज से
तालमेल से काम करवाना कितना मुश्किल होता है।
शक्ति किन सोर्सेज से हासिल की जा सकती है? इस
लिस्ट में आपने देखा है कि सबसे ऊपर अनलिमिटेड
पॉवर आती है। जब दो या दो से ज़्यादा लोग तालमेल
की भावना से साथ आते हैं और किसी क्लियर गोल
की ओर काम करते हैं तो वे इस कॉम्बिनेशन द्वारा खुद
ऐसी पोजीशन में ले आते हैं जहाँ वे अनलिमिटेड
पॉवर के कभी ना ख़त्म होने वाले स्टोरहॉउस से सीधे
पॉवर हासिल कर सके। यह शक्ति के सभी सोर्सेज में
सबसे महान सोर्स है। यह वह सोर्स है, जिसकी तरफ
जीनियस और हर महान लीडर मुड़ता है। (चाहे वह इस
फैक्ट के बारे में जानते हों या नहीं)
दो और main सोर्स जिनसे वह नॉलेज हासिल
किया जा सकता है, जो शक्ति के हासिल करने के लिए
ज़रूरी है उतने भरोसेमंद है, जितनी कि इनसान की
पाँच सेंसेस। सेंसेस हमेशा भरोसेमंद नहीं होती।
यह बुक धर्म पर कोई कोर्स नहीं है। इस बुक में बताए
गए किसी भी बेसिक प्रिंसिप्ल का एनालिसिस इस
तरह नहीं किया जाना चाहिए जैसे यह डायरेक्टली या
indirectly किसी इनसान की धार्मिक आदतों में
टोका टाकी करने का इरादा रखता हो। इस बुक का
एक ही मकसद है और वह मकसद है, रीडर को यह
इंस्ट्रक्शन देना कि वह पैसा की अपनी इच्छा के क्लियर
गोल को किस तरह दसके फिजिकल रूप में बदले।

टोका टाकी करने का इरादा रखता हो। इस बुक का
एक ही मकसद है और वह मकसद है, रीडर को यह
इंस्ट्रक्शन देना कि वह पैसा की अपनी इच्छा के क्लियर
गोल को किस तरह इसके फिजिकल रूप में बदले।
पढ़े, सोचे और जब आप पढ़ें तो उस पर विचार करें।
जल्द ही, पूरा टॉपिक आपके सामने खुल जाएगा और
आप इसे सही पहलू से देख सकेंगे।
पैसा शर्मीला है और हिचकिचाता है। इसे उसी तरह
मनाना पड़ता है और इसका दिल जीतना पड़ता है।
जिस तरह से कोई अपनी धुन का पक्का प्रेमी अपनी
पसंद की लड़की का पीछा करता है। और मजेदार
इत्तेफ़ाक यह है कि पैसा का पीछा करने में जिस शक्ति
का इस्तेमाल होता है, उसी से मिलती-जुलती शक्ति
का इस्तेमाल किसी लड़की का पीछा करने में किया
जाता है। पैसे की तलाश में इस शक्ति का कामयाबी से
इस्तेमाल तब होता है, जब इसे विश्वास के साथ मिलाया
जाए। इसे इच्छा के साथ मिलाना चाहिए। इसे लगन के
साथ मिलना चाहिए। एक प्लान के द्वारा इस पर अमल
करना चाहिए और उस प्लान को एक्शन में बदलना
चाहिए।
अपना मास्टर माईंड ग्रुप बनाने वाला सबसे बेहतरीन
एग्ज़ाम्पल इंटेल कॉपोरेशन के सी.ई.ओ. एंडू ग्रोव
हैं। ग्रोव ऐसी टीम के साथ काम करते थे, जिसमें
टेक्निकल, मार्केटिंग, फाइनेंसियल और एडमिनिस्ट्रेशन
का काम देखने वाले आदमी और औरतें बिल्कल

III २८ माला पा.२.पा. एमाप
हैं। ग्रोव ऐसी टीम के साथ काम करते थे, जिसमें
टेक्निकल, मार्केटिंग, फाइनेंसियल और एडमिनिस्ट्रेशन
का काम देखने वाले आदमी और औरतें बिल्कुल
इनफॉर्मल तरीके से काम करते थे। सबसे खास बात
कोई प्राइवेट ऑफिस नहीं थे, न ही पार्किंग के लिए
जगह और ऑफिसर्स को कोई ख़ास अधिकार भी नहीं
थे। एम्प्लाइज को यह आप्शन दिया गया था कि अगर
कंपनी फायदे में होती है और स्टॉक उठता है तो वे
उसमे पैसा लगा सकते है।
यह टीम आपको आम दिख सकती है पर ग्रोव की
जरूरतें बड़ी सख्त हुआ करती थीं। जब 1976 में इंटेल
मुश्किल दौर से गुजर रही थी तो टीम ने खुद की इच्छा
से ज़्यादा कोशिश की, कई-कई घंटो तक ज़्यादा काम
किया और अपनी प्रॉब्लम का हल निकालने के लिए
भरपूर कोशिश की। ऐसे ही एक बार और इंटेल पेंटियम
चिप में थोड़ी सी कमी रह गई, जिससे कुछ ऑपरेशन
में दिक्कत पड़ने लगी ग्रोव ने 475 मिलियन डॉलर
खर्च करके उन चिप्स को वापस लेकर नई चिप से
रिप्लेस कर दिया।
ग्रोव ने अपने लोगो को छोटे ग्रुप्स में काम करने के
लिए इंस्पायर किया। हर किसी को अपने रोल ढंग से
पता थे, हर किसी ने अपने एक्सपीरियंस, नॉलेज और
क्रिएटिविटी के हिसाब से काम किया। टीम मेंबर इस
तरह से ट्रेन किए गए थे और इतने इंस्पायर थे कि वे
अपना सौ परसेंट देने के लिए बिल्कुल तैयार थे। जब

तरह से ट्रेन किए गए थे और इतने इंस्पायर थे कि वे
अपना सौ परसेंट देने के लिए बिल्कुल तैयार थे। जब
भी मुश्किल का दौर होता, टीम अपने मन से ज़्यादा
समय देती, ज़्यादा एनर्जी और ज़्यादा दिमाग लगाती,
जिससे वे प्रॉब्लम को हरा सके।

जब पैसा उस क्वांटिटी में आता है जिसे ‘छप्पर फाड़
दौलत ‘ कहा जाता है तो यह पैसा कमाने वाले इंसान
की तरफ उतनी ही आसानी से बहता है, जितनी
आसानी से पानी पहाड़ी से नीचे बहती है। शक्ति की
एक महान इनविजिबल धारा मौजूद है, जिसकी तुलना
एक नदी से की जा सकती है, सिवाय इसके कि इसका
एक हिस्सा एक दिशा में बहता है और जो लोग धारा
की उस दिशा से इसमें अंदर आते हैं यह धारा इन्हें
दौलत की तरफ ऊपर ले जाती है–जबकि इसकी उलटी
दिशा में बहने वाली धारा बाकी लोगों को नीचे की तरफ
गरीबी और दुःख में ले जाती है, जो इतने दुर्भाग्यशाली
होते हैं कि वे अपने आपको इस धारा से निकालकर
धारा के दूसरी तरफ नहीं ले जा सकते।
हर आदमी जिसने बहुत दौलत हासिल की है जीवन की
इस धारा के अस्तित्व को पहचानता है। यह इनसान के
सोचने के प्रोसेस से संबंधित है। विचार का पॉजिटिव
भाव धारा का यह पहलू है, जो इनसान को दौलत की
तरफ ले जाता है। नेगेटिव भाव धारा का वह पहलू है,
जो इनसान को गरीबी की तरफ नीचे ले जाता है।

यह उस इंसान के लिए एक बेहद इम्पोर्टेन्ट विचार है,
जो दौलत हासिल करने के मकसद से इस बुक को पढ़
रहा है।
अगर आप शक्ति की धारा के उस तरफ़ है, जो गरीबी
की तरफ ले जाती है, तो यह एक चप्पू का काम कर
सकता है, जिसके द्वारा आप अपने आपको धारा के
दूसरी तरफ धकेल सकते है। यह आपकी मदद सिर्फ़
तभी कर सकता है, जब आप इस पर अमल करे और
इसका इस्तेमाल करें। सिर्फ पढ़ने से और इसे अच्छा
बुरा बताने से आपको कोई फायदा नहीं होगा।
गरीबी और अमीरी अकसर जगह बदलते रहते है।
जब अमीरी गरीबी की जगह लेती है तो यह बदलाव
आमतौर पर अच्छी तरह से सोची गई और सावधानी से
अमल में लाई गई प्लान के द्वारा आता है। गरीबी को
प्लान की कोई जरुरत नहीं होती। इसे किसी की मदद
की जरुरत नहीं होती क्योंकि यह साहसी और निर्दयी
होती है। अमीरी हिचकिचाने वाली और शर्मीली होती
है। इसे अट्रैक्ट करना होता है।
हर कोई अमीर बनने की इच्छा कर सकता है, और
ज़्यादातर करते भी है, पर बहुत कम लोग अपनी इच्छा
को क्लियर प्लान और पैशन से भरकर अमीरी की ओर
अपना कदम बढ़ाते हैं।
रॉस पेरोट एक मजबूत मन वाले पक्का विल पॉवर
रखने वाले इंसान थे। यह खासियत सिर्फ उनकी ही

रॉस पेरोट एक मजबूत मन वाले पक्का विल पॉवर
रखने वाले इंसान थे। यह खासियत सिर्फ उनकी ही
नहीं थी बल्कि उनके आस-पास के मास्टर माइंड ग्रुप के
लोग भी ठीक वैसे ही थे। उनमें पैसा कमाने का जुनून
था और आखिरकार उन्होंने इसे हासिल ही कर लिया।
इससे पहले वे इलेक्ट्रॉनिक्स डाटा सिस्टम (EDS) की
नीवं रखते, वे IBM में एक सेल्समैन के रूप में काम
करते थे। उन्हें डर था कि कहीं |BM छोड़कर नई
कंपनी खोलने का उनका सपना एक गलती न साबित
हो जाए। पर इस डर से वो रुके नहीं। उन्हें अपना गोल
दिखाई दे रहा था। उनका सक्सेस का राज अटलता के
साथ अपने सपनो के साथ खड़ा रहना था, और उस
एनर्जी को अपने टीम के मास्टर माइंड ग्रुप के लोगो
तक पहुँचाना था, जो उन्हें सक्सेस और अमीरी के ओर
आगे बढ़ा सके।
पेरोट को यह बात पूरी तरह पता थी उनकी लगन
चमत्कार कर सकती है। EDS को मिले उस कॉन्ट्रैक्ट
ने उसे सही साबित किया, जो उस समय कंप्यूटर
इंडस्ट्री में सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट था। कम्पटीशन में दो
कंपनियाँ थी IBM और EDS, IBM बड़ी अमीर
कंपनी थी, और उनके पास बहुत बड़ा एक्सपीरियंस्ड
स्टाफ था जबकि EDS के पास छोटी और समर्पित
टीम थी।
पेरोट को याद है ‘ कम्पटीशन से करीब तीस दिन पहले

टीम थी।
पेरोट को याद है ‘ कम्पटीशन से करीब तीस दिन पहले
मैं अपने टीम के पास पहुंचा, जहाँ मेरी 15 मेंबर्स की
टीम थी। उन्होंने कहा शायद हम जीत न पाए पर यह
एक्सपीरियंस बड़ा जानदार होगा। मैं उन लोगों पर टूट
नहीं पड़ा और उन्हें कमरे से बाहर नहीं निकाल दिया।
बल्कि मैं ब्लैकबोर्ड के पास गया और वहाँ सक्सेस के
सात बेसिक मंत्र लिखे, जिनसे हमें जज किया जाना
था। तभी पीछे से एक धीरे से आवाज मेरे कानो में
सुनाई दी इस तरह तो हम उन्हें सात-ज़ीरो से हराने वाले
हैं। ‘यही वह दिन था, जब हम कम्पटीशन के पहले
जीत चुके थे।’
पेरोट बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट को हासिल करने के
बाद स्टॉक मार्किट में हमारी धमक सुनाई देने लगी,
हजारों नई जॉब निकालनी पड़ी, एम्प्लाइज को बोनस
देना पड़ा और इसके लिए उन्हें इनाम दिया गया। उन्हें
लगता है कि यह सब संतुष्टि का टॉपिक था, जिससे हर
किसी को लगने लगा कि यह डील हमारी मेहनत के दम
पर हासिल हुई है और हमने अपने इंडस्ट्री के सबसे बड़े
लोगो को हराया है। यही एक कंपनी को अलग बनाती
है–टीम की तरह काम करने से, मास्टर माइंड ग्रुप का
इस्तेमाल करके ही किसी भी बड़े-से-बड़े दुश्मन को
हराया जा सकता है।

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17.सेक्स ट्रांसम्यूटेशन का सीक्रेट
अमीर बनने की ओर दसवाँ कदम
ट्रांसम्यूटेशन उसे कहते है जब एनर्जी एक फॉर्म से दूसरे
फॉर्म में बदलती है.
सेक्स का इमोशन एक अलग तरह का मेंटल स्टेट लेकर
आता है।
इस टॉपिक में नॉलेज की कमी के कारण यह मेंटल
स्टेट आमतौर पर फिजिकल रूप से देखी जाती है।
ज़्यादातर लोगो को सेक्स का नॉलेज सही तरीके से
हासिल नहीं होता इसलिए इसके सिर्फ़ फिजिकल फॉर्म
की इमेज उनके मन में बैठी हुई है।
सेक्स के इमोशन के पीछे तीन क्रिएटिव संभावनाएँ है
1. बच्चों को जन्म देकर ह्यूमन रेस को बनाए रखना
2. हेल्थ की सुरक्षा करना
3. ट्रांसफॉर्मेशन के द्वारा एवरेज लेवल के इंसान को
जीनियस में बदलना सेक्स का ट्रांसम्यूटेशन का आसान
है और इसे आसानी से समझाया जा सकता है। इसका
मतलब है मन को सेक्स के फिजिकल एक्सप्रेशन के
थॉट से दूसरी नेचर के थॉट में बदलना।
सेक्स की इच्छा सभी इंसानी इच्छाओं में सबसे

सेक्स की इच्छा सभी इंसानी इच्छाओं में सबसे
पावरफुल इच्छा है। इस इच्छा के द्वारा इंस्पायर होने
पर इनसान शार्प इमेजिनेशन, हिम्मत, विल पॉवर ,
लगन और क्रिएटिव एबिलिटी डेवलप कर लेता है,
जो आमतौर पर किसी भी समय में उसके पास तक
नहीं फटकती। सेक्सुअल कांटेक्ट की इच्छा इतनी
शक्तिशाली होती है कि इसकी संतुष्टि के लिए लोग
जीवन और सम्मान गवाने का रिस्क तक उठा लेते
है। अगर इससे नतीजा निकाला जाए और इसे दूसरी
दिशाओ में मोड़कर देखा जाए तो यह इंस्पायरिंग पॉवर
अपने सभी एलेमेंट्स जैसे शार्प इमेजिनेशन, हिम्मत
वगैरह को बनाए रखती है। इन पावरफुल क्रिएटिव
शक्तियों का इस्तेमाल लिटरेचर, आर्ट या किसी भी दूसरे
बिज़नेस में किया जा सकता है। यहाँ तक कि इसके
ज़रिए से आप अमीर भी बन सकते है।
सेक्स एनर्जी के ट्रांसम्यूटेशन के लिए बेशक विल पॉवर
के इस्तेमाल की ज़रुरत होती है, लेकिन यह इनाम
इतना कीमती है कि इसके लिए कोशिश करनी ही
चाहिए। सेक्सुअल एक्सप्रेशन की इच्छा पैदायशी और
नेचुरल है। ये इच्छा नष्ट नहीं की जा सकती और इसे
दबाया नहीं जाना चाहिए। बल्कि इसे एक्सप्रेशन के उस
रूप में मोड़ा जाना चाहिए, जिनसे इनसान के शरीर,
मन और आत्मा अमीर होते हैं। अगर बदलाव के द्वारा
इसे इस तरह से न मोड़ा जाए, तो यह बाहर निकलने के
लिए सिर्फ शरीर के द्वारा एक्सप्रेशन की मांग करेगी।

नदी पर बाँध बनाया जा सकता है और कुछ समय के
लिए इसके पानी को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन
अंत में यह पानी बाहर निकलने का रास्ता बना ही लेता
है। यही सेक्स के इमोशन के बारे में सच है। इसे कुछ
समय के लिए दबाया या कंट्रोल किया जा सकता है,
लेकिन एक्सप्रेशन के लिए रास्ता खोजना इसकी नेचर
में है। अगर इसे किसी क्रिएटिव एफर्ट में बदला ना
जाए, तो यह कोई कम इम्पोर्टेन्ट रास्ता खोज लेगा।
वह इंसान भाग्यशाली है, जिसने यह खोज लिया है कि
सेक्स के भाव को क्रिएटिव एफर्ट में किस तरह मोड़ा
जाए। साइंटिफिक रिसर्च ने इन इम्पोर्टेन्ट फैक्ट्स के
बारे में बताया है।
1. महान अचीवमेंट पाने वाले लोगों में हाइली डेवलप्ड
सेक्स नेचर पाई जाती है। यह वे इंसान होते है, जिन्होंने
सेक्स ट्रांसम्यूटेशन की कला सीख ली है।
2. वे लोग जिन्होंने बहुत सारी दौलत कमाई है और
लिटरेचर, बिज़नेस, आर्किटेक्चर और कई दूसरे
प्रोफेशन में अद्भुत मान सम्मान पाया है, उन्हें किसी
औरत से इंस्पिरेशन मिली है।
सेक्स के भाव चंचल और पावरफुल शक्ति है, जिसके
खिलाफ कोई रेजिस्टेंस काम नहीं करता। इस भाव
द्वारा इंस्पायर होने पर लोगो में एक्शन की एक अद्भुत
शक्ति आ जाती है। इस सच को समझ ले और आप

सेक्स के भाव चंचल और पावरफुल शक्ति है, जिसके
खिलाफ कोई रेजिस्टेंस काम नहीं करता। इस भाव
द्वारा इंस्पायर होने पर लोगो में एक्शन की एक अद्भुत
शक्ति आ जाती है। इस सच को समझ ले और आप
इस स्टेटमेंट के मतलब को समझ लेंगे कि सेक्स
ट्रांसम्यूटेशन में क्रिएटिव एबिलिटी का सीक्रेट शामिल
है।
किसी भी आदमी या जानवर की सेक्स ग्लैंड को नष्ट
कर दे और आप उसके एक्शन के main सोर्स को
हटा देते हैं। इसके सबूत के लिए आप देखे कि उस
जानवर का क्या होता है। जब बैल के सेक्स ग्लैंड को
निकाल दिया जाता है, तो वह उतना ही पालतू हो जाता
है जितनी कि गाय। सेक्स ग्लैंड को हटाने का मतलब
है आदमी या जानवर के अंदर से लड़ने की इच्छा को
ख़त्म कर देना। औरत के साथ भी यही होता है।
मन के main दस stimulus
stimulus यानी जो चीज़ हमें उकसा दे या excite
कर दे उसे stimulus कहते हैं.
इंसानी दिमाग stimulus पर रियेक्ट करता है,
जिसके द्वारा यह वाइब्रेशन के हाई रेट पर पहुँचता
है जिन्हें excitement, क्रिएटिव इमेजिनेशन,
बर्निंग डिजायर वगैरह के नाम से जाना जाता है। वे
stimulus जिन पर मन ज़्यादा आज़ादी से रियेक्ट
करता है, यह है-

1. सेक्स को एक्सप्रेस करने की इच्छा
2.प्यार
3. शोहरत, शक्ति या फाइनेंसियल प्रॉफिट या पैसे पाने
की स्ट्रोंग इच्छा।
4. म्यूजिक
5. दोस्ती चाहे यह सेम जेंडर के बीच में हो या
opposite जेंडर के दो लोगो के बीच हो।
6. दो या दो से ज़्यादा लोगो के बीच तालमेल पर बेस्ड
मास्टर माइंड अग्रीमेंट, जो स्पिरिचुअल या दुनिया के
प्रोग्रेस के लिए साथ आकर एक हो जाते है।
7. साथ-साथ झेला गया दुःख, जैसे उन लोगो द्वारा
एक्सपीरियंस की गई तकलीफ़ जिन्हें टार्चर किया गया
हो।
8. ऑटो सजेशन
9.डर
10. नशा और शराब
सेक्स एक्सप्रेशन की इच्छा stimulus की लिस्ट में
टॉप पर आती है, जो सबसे इफेक्टिव ढंग से मन को
ऊँचा उठा देते है और फिजिकल एक्शन के पहियो को
चालू कर देते है। इन stimulus में से आठ नेचुरल
और क्रिएटिव है।
दो बर्बाद करने वाले भी है। इस स्टडी से आप यह देख
सकेंगे कि सेक्स का भाव बहुत बड़े फ़र्क से सबसे गहरा
और पावरफुल stimulus है।

जीनियस” सिक्स्थ सेंस द्वारा डेवलप होती है
सिक्स्थ सेंस का सच अब अच्छी तरह से साबित हो
चुका है। सिक्स्थ सेंस क्रिएटिव इमेजिनेशन है।
क्रिएटिव इमेजिनेशन की शक्ति का इस्तेमाल ज़्यादातर
लोग पूरे जीवन में कभी नहीं करते और अगर करते
भी है तो आमतौर पर ऐसा इत्तेफ़ाक से होता है। तुलना
की जाए तो बहुत कम लोग ही किसी मकसद से सोच
विचारकर क्रिएटिव इमेजिनेशन का इस्तेमाल करते है।
जो लोग अपनी मर्जी से और इसके फंक्शन की समझ
के साथ इसका इस्तेमाल करते हैं, वही जीनियस होते
हैं।
क्रिएटिव इमेजिनेशन की शक्ति इनसान के सीमित मन
और अनलिमिटेड पॉवर के बीच एक सीधी कड़ी है।
जब थॉट या कोई कांसेप्ट किसी के दिमाग में कौंधते हैं,
जिसे आम भाषा में hunch यानी आभास कहा जाता
है तो वे इनमे से किसी एक या एक से ज़्यादा सोर्स से
आते है।
1. अनलिमिटेड पॉवर या असीम शक्ति
2. सब कॉन्शियस माइंड, जहाँ पाँचो सेंसेस द्वारा मन
तक पहुँची सारी इमेज, थॉट और इमोशनल रिकॉर्ड है।
3. किसी दूसरे इंसान के मन से निकली कोई विचार या
साइंटिफिक थॉट के जरिए से हासिल विचार या कांसेप्ट

2. सब पान्रापस मा५७, जहा पापा सततद्वारा मन
तक पहुँची सारी इमेज, थॉट और इमोशनल रिकॉर्ड है।
3. किसी दूसरे इंसान के मन से निकली कोई विचार या
साइंटिफिक थॉट के ज़रिए से हासिल विचार या कांसेप्ट
की तसवीर।
4. किसी दूसरे इंसान के सब कॉन्शियस माइंड के स्टोर
हाउस से।
क्रिएटिव इमेजिनेशन सबसे बेस्ट तब काम करती है जब
मन बहुत हाई रेट पर vibrate करता है यानी जब मन
आर्डिनरी थॉट के वाइब्रेशन से ज़्यादा ऊँचे लेवल पर
फंक्शन कर रहा होता है.
जब मन के एक्शन को दस माइंड stimulus में से
एक या एक से ज़्यादा stimulus द्वारा इंस्पायर किया
जाता है तो इससे इंसान पर यह असर पड़ता है कि वह
आम विचार की बाउंड्री से ऊपर उठ जाता है। इससे
इंसान को वह दूरी, स्कोप और विचारों की वह क्वालिटी
की इमेजिनेशन हासिल हो जाती है, जो निचले लेवल
पर मौजूद नहीं थे।
जब आप मन के stimulus के द्वारा थॉट को
ज़्यादा ऊँचे लेवल तक उठा दिया जाता है तो आप
उसी पोजीशन में होते हैं जैसे आप हवाई जहाज में
इतनी ऊँचाई पर पहुँच गए हों जहाँ से आपको उस
बाउंड्री के पार भी दिखाई देता है, जो जमीन पर
रहते समय आपकी आँखों से दिखाई नहीं देता था।
यही नहीं, विचार के इस ज़्यादा ऊँचे लेवल पर इंसान

बाउंड्री के पार भी दिखाई देता है, जो जमीन पर
रहते समय आपकी आँखों से दिखाई नहीं देता था।
यही नहीं, विचार के इस ज़्यादा ऊँचे लेवल पर इंसान
किसी stimulus के द्वारा बाधा या बंधन महसूस
नहीं करता, जो उस समय महसूस होते हैं, जब वह
तीन बुनियादी ज़रूरतों जैसे रोटी, कपड़ा और मकान
को हासिल करने की प्रॉब्लम से जूझता रहता है।
वह थॉट के एक ऐसे संसार में पहुँच जाता है, जिसमे
साधारण रोजमर्रा के विचार हटा दिए गए हैं, जिस तरह
हवाईजहाज में ऊपर उठने पर पहाड़ और घाटियों की
सीमाएँ हट जाती हैं।
थॉट के इस highest लेवल पर मन की क्रिएटिव
शक्ति को काम की आज़ादी मिल जाती है। सिक्स्थ
सेंस के काम करने के लिए साफ हो जाता है। यह उन
विचारों को स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाता है,
जो इंसान तक किसी और ज़रिए से नहीं पहुँच सकते।
सिक्स्थ सेंस वह शक्ति है, जो एक जीनियस और एक
आर्डिनरी इंसान में फ़र्क को क्लियर करती है।
क्रिएटिव शक्ति का जितना ज़्यादा इस्तेमाल किया जाए
यह उतनी ही ज़्यादा डेवलप होती है, वह इंसान के
सब कॉन्शियस माइंड के बाहर से आ रहे एलेमेंट्स के
प्रति उतनी ही ज़्यादा अलर्ट और एक्सेप्ट करने के लिए
तैयार हो जाती है। इंसान इस पर जितना विश्वास करता
है और थॉट इम्पल्स के लिए इससे जितनी ज़्यादा मांग
करता है यह उतनी ही स्ट्रोंग होती जाती है। इस शक्ति
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-4

सिक्स्थ सेंस वह शक्ति है, जो एक जीनियस और एक
आर्डिनरी इंसान में फ़र्क को क्लियर करती है।
क्रिएटिव शक्ति का जितना ज़्यादा इस्तेमाल किया जाए
यह उतनी ही ज़्यादा डेवलप होती है, वह इंसान के
सब कॉन्शियस माइंड के बाहर से आ रहे एलेमेंट्स के
प्रति उतनी ही ज़्यादा अलर्ट और एक्सेप्ट करने के लिए
तैयार हो जाती है। इंसान इस पर जितना विश्वास करता
है और थॉट इम्पल्स के लिए इससे जितनी ज़्यादा मांग
करता है यह उतनी ही स्ट्रोंग होती जाती है। इस शक्ति
को सिर्फ इस्तेमाल के द्वारा ही डेवलप किया जा सकता
है।
जिसे हम अंतरात्मा कहते हैं यानी conscience वह
भी पूरी तरह से सिक्स्थ सेंस की शक्ति के द्वारा काम
करती है।
महान कलाकार, राइटर, म्यूजिशियन और कवि
महान इसलिए बने क्योंकि उन्होंने शांत अंतरात्मा की
आवाज पर भरोसा करने की आदत डाली। यह आवाज
क्रिएटिव इमेजिनेशन की शक्ति के द्वारा अंदर से बोलती
है। जिनमें बहुत इमेजिनेशन है वे लोग इस फैक्ट
को अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके बेस्ट थॉट इस
आभास के द्वारा आते हैं।

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Grow Rich
Napoleon Hill
एक महान स्पीकर थे जो तब तक महानता तक नहीं
पहुँच पाते थे जब तक वह अपनी आँखे बंद न करे और
क्रिएटिव इमेजिनेशन की शक्ति पर पूरी तरह डिपेंड न
करें। जब पूछा गया कि वह अपने स्पीच के अंत पर
पहुँचने से ठीक पहले अपनी आँखे क्यों बंद कर लेते
है तो उन्होंने जवाब दिया “मैं ऐसा इसलिए करता हूँ
क्योंकि तब मैं उन विचारों को एक्सप्रेस करता हूँ, जो
मेरे अंदर से आते है।’
अमेरिका के सबसे सक्सेसफुल और सबसे जाने माने
फाइनैंसरों में से एक की आदत थी कि वह फ़ैसला लेने
से पहले दो या तीन मिनट तक आँखे बंद कर लेता था।
जब उससे पूछा गया कि वह ऐसा क्यों करता था, तो
उसने जवाब दिया ‘आँखे बंद होने से मैं अनलिमिटेड
पॉवर के सोर्स से विचार हासिल करने के काबिल होता
मैरीलैंड, चेवी चेज के स्वर्गीय डॉ. एल्मर आर गेट्स ने
दो सौ से ज़्यादा काम को पेटेंट करवाए, जिनमें से कई
बेसिक थे और उन्होंने ऐसा क्रिएटिव शक्ति के इस्तेमाल
और डेवलपमेंट के प्रोसेस द्वारा किया। उनका तरीका
इम्पोर्टेन्ट भी है और इंटरेस्टिंग भी। यह हर उस इंसान
के काम का है जो जीनियस के लेवल तक उठने में

और डेवलपमेंट के प्रोसेस द्वारा किया। उनका तरीका
इम्पोर्टेन्ट भी है और इंटरेस्टिंग भी। यह हर उस इंसान
के काम का है, जो जीनियस के लेवल तक उठने में
रूचि रखता है, जिस केटेगरी में डॉ. गेट्स आते हैं। डॉ.
गेट्स सचमुच महान थे हालाँकि उनके बारे में ज़्यादा
पब्लिश नहीं किया गया।
उनकी लेबोरेटरी में एक चैम्बर था, जिसे वे अपना
“पर्सनल कम्युनिकेशन रूम” कहते थे। यह साउंडप्रूफ
था और इस तरह से बना था कि इसमें पूरा अँधेरा किया
जा सकता था। इसमें एक छोटी टेबल थी, जिस पर वे
अपना राइटिंग पैड रखते थे। इस टेबल के सामने दीवार
पर एक बिजली का पुश बटन था, जिससे बल्ब जलते
और बंद होते थे।
जब डॉ. गेट्स की इच्छा होती कि वे अपनी क्रिएटिव
शक्ति के द्वारा मौजूद शक्तियों से मदद ले तो वे इस
कमरे में जाकर टेबल के सामने बैठ जाते और बत्तियाँ
बुझाकर उस खोज के सभी एलेमेंट्स पर ध्यान फोकस
करते, जिस पर वो काम कर रहे थे। वे तब तक इसी
पोजीशन में बने रहते, जब तक कि कुछ विचार उनके
दिमाग में कौंध नहीं जाते थे। इस तरह से उस खोज के
अनजान एलिमेंट उनके दिमाग में आते थे।
एक बार विचार इतनी तेजी से आए कि उन्हें लगभग
तीन घंटे तक लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा।

एक बार विचार इतनी तेजी से आए कि उन्हें लगभग
तीन घंटे तक लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जब विचारों का आना ख़त्म हो गया और उन्होंने अपने
नोट्स देखे तो उन्होंने पाया कि उनमे उन प्रिंसिपल्स का
डिटेल से डिस्क्रिप्शन है, जिसके बारे में साइंटिफिक
दुनिया में मौजूद डेटा की कोई तुलना ही नहीं थी।
यही नहीं, नोट्स में उनकी प्रॉब्लम का जवाब बहुत
बुद्धिमानी और स्टेप by स्टेप प्रेजेंट किया गया था।
डॉ, गेट्स ने लोगों और कॉर्पोरेशंस के लिए ‘sitting
for ideas द्वारा अपनी कमाई की। अमेरिका के
सबसे बड़े कारपोरेशन उन्हें हर घंटे के हिसाब से भारी
फीस दिया करते थे ताकि वे “आईडिया के लिए बैठे।’
रीजनिंग शक्ति अकसर गड़बड़ होती है क्योंकि यह
काफी हद तक इंसान के stored एक्सपीरियंस से
गाइड की जाती है। एक्सपीरियंस के द्वारा जाना गया
सारा नॉलेज सही नहीं होता। क्रिएटिव शक्ति के द्वारा
हासिल किया गया विचार ज़्यादा भरोसेमंद होता है
क्योंकि वे ऐसे सोर्स से आते हैं, जो मन की रीजनिंग
शक्ति के मौजूद सोर्सेज से ज़्यादा भरोसेमंद होते हैं।
जीनियस और आर्डिनरी सनकी इन्वेंटर में सबसे बड़ा
फ़र्क यह है कि जीनियस अपनी क्रिएटिव इमेजिनेशन
के द्वारा काम करता है, जबकि आर्डिनरी इंसान इस
शक्ति के बारे में कुछ नहीं जानता। साइंटिफिक इन्वेंटर
-निनोनी-न-नि-

सब कान्शियसमाऽऽद्वारा पकड़नला जाए आर फिर
वह अपने दिमाग से सारे विचारों को साफ कर देता है
और अपने दिमाग में जवाब के flash होने का इंतज़ार
करता है।
कई बार रिजल्ट क्लियर और तुरंत मिल जाते है। बाकी
समय रिजल्ट नेगेटिव होते हैं, जो सिक्स्थ सेंस या
क्रिएटिव शक्ति के डेवलपमेंट के स्टेट पर डिपेंड करते
हैं।
एडिशन ने बिजली के बल्ब को बनाने के लिए अपनी
इमेजिनेशन की सिंथेटिक इमेजिनेशन के द्वारा दस
हजार से ज़्यादा विचार combine किए। फिर वे
क्रिएटिव शक्ति के द्वारा भरोसेमंद सोर्स से जुड़े और
उन्हें अपनी प्रॉब्लम का हल मिल गया जिससे वो बल्ब
बना पाए। फोनोग्राफ बनाते समय भी उनका यही
एक्सपीरियंस था।
काफी सबूत मौजूद है कि क्रिएटिव इमेजिनेशन की
शक्ति का अस्तित्व है। यह उन लोगो के
सटीक एनालिसिस से मौजूद हुए है, जो अलग-अलग
फ़ील्ड्स में लीडर रहे हैं हालाँकि उन्हें ज़्यादा एजुकेशन
का मौक़ा नहीं मिला। लिंकन महान लीडर के फेमस
एग्ज़ाम्पल है, जिन्होंने क्रिएटिव इमेजिनेशन की शक्ति
के इस्तेमाल द्वारा महानता हासिल की। उन्होंने इस
शक्ति को प्यार के stimulus के परिणामस्वरूप
खोजा, जिसका एक्सपीरियंस उन्हें ऐन रूटलेज से
मिलने के बाद हुआ। जीनियस के सोर्स के स्टडी के

खोजा, जिसका एक्सपीरियंस उन्हें ऐन रूटलेज से
मिलने के बाद हुआ। जीनियस के सोर्स के स्टडी के
संबंध में यह सबसे इम्पोर्टेन्ट स्टेटमेंट है।
उन महान लीडरों के रिकॉर्ड से इतिहास के पन्ने भरे
हुए हैं, जिनकी अचीवमेंट्स के पीछे किसी औरत का
हाथ था, जिन्होंने सेक्स की इच्छा के द्वारा उनके मन
में क्रिएटिव शक्ति को जगा दिया। नेपोलियन बोनापार्ट
इनमें से एक थे, जब उन्हें अपनी पहली पत्नी जोसेफ़ीन
से इंस्पिरेशन मिलती थी तब उन्हें कोई नहीं हरा सकता
था। जब उनके रीजनिंग या लॉजिकल पॉवर ने उन्हें
इंस्पायर किया कि वे जोसेफ़ीन से अलग हो जाएं तो
उनका पतन शुरू हो गया। उनकी हार और सेंट हेलन
उनसे ज्यादा दूर नहीं थे।
हम आसानी से अमेरिका के दर्जनों फ़ेमस लोगों का
एग्ज़ाम्पल दे सकते हैं जो अपनी पत्नियों के इंस्पायरिंग
इन्फ्लुएंस के ज़रिए से अचीवमेंट की महान ऊँचाइयों
तक पहुंचे, लेकिन जब पैसा और शक्ति का जूनून उनके
दिमाग पर चढ़ गया और जब वे अपनी पुरानी पत्नी की
जगह नई पत्नी ले आए तो उनके पतन का दौर शुरू
हो गया। नेपोलियन वह पहला आदमी नहीं था, जिसने
यह खोजा कि सही सोर्स से आने वाले सेक्स का असर
किसी दूसरे आप्शन से ज़्यादा पावरफुल होता है।
इंसान का मन stimulation पर रियेक्ट करता है।

इंसान का मन stimulation पर रियेक्ट करता है।
सारे stimulus में सबसे महान और सबसे पावरफुल
stimulus है सेक्स की इच्छा । जब इसका
इस्तेमाल किया जाए और इसे ट्रांसफॉर्म किया जाए तो
यह motivational पॉवर इनसानों को विचार के
ज़्यादा ऊँचें आकाश तक उठाने के काबिल है, जिसके
द्वारा वे चिंता और छुटपुट परेशानियों के सोर्स को दूर
करने के लायक हो जाते हैं, जो निचले लेवल पर उनकी
राह में रोड़े बने हुए थे।
सेक्स एनर्जी हर टैलेंटेड इंसान की क्रिएटिव एनर्जी है।
न तो कोई ऐसा महान लीडर, बिल्डर या कलाकार हुआ
है, न कभी होगा, जिसमें सेक्स की इन्स्पार्यिंग पॉवर की
कमी हो।
यकीनन कोई भी इन बातों का गलत मतलब नहीं
निकालेगा कि हाइली sexed नेचर का हर आदमी
टैलेंटेड होता है। इनसान टैलेंट के लेवल को तभी
हासिल कर पाता है, जब वह इमेजिनेशन की क्रिएटिव
शक्ति के द्वारा अपने मन को इंस्पायर करता है और
मौजूद शक्तियों का सहारा लेता है। वे stimulus
जो इंस्पिरेशन देते हैं, उनमें सबसे main है, सेक्स
की एनर्जी। इस एनर्जी की सिर्फ मौजूदगी ही टैलेंटेड
होने के लिए काफी नहीं है। इस एनर्जी को फिजिकल
कांटेक्ट की इच्छा से किसी दूसरे रूप में ट्रांसफॉर्म
करना होता है और तभी यह इंसान के टैलेंट के लेवल

हान क लए काफा नहा हा इस एनजा का फाजकल
कांटेक्ट की इच्छा से किसी दूसरे रूप में ट्रांसफॉर्म
करना होता है और तभी यह इंसान के टैलेंट के लेवल
को उठा सकती है।
स्ट्रोंग सेक्स की इच्छा के कारण टैलेंटेड बनने के बजाय
ज़्यादातर लोग अपने आपको नीचे गिरा लेते हैं और इस
महान शक्ति के गलत इस्तेमाल और इसकी गलत समझ
के कारण ख़ुद को जानवरों के लेवल पर ले जाते हैं।
चालीस साल से पहले लोग क्यों कम सक्सेसफुल होते
हैं?
मैंने पच्चीस हजार से ज़्यादा लोगो के एनालिसिस से
यह खोजा कि जो लोग बेहद सक्सेसफुल होते हैं वे
चालीस साल से कम उम्र में शायद ही कभी ऐसा कर
पाते हैं और अकसर वे तब तक अपनी सही स्पीड में
नहीं आते जब तक कि वे पचास से ज़्यादा की उम्र के
न हो जाए। यह फैक्ट इतना आश्चर्यचकति करने वाला
था कि मैं इसके कारणों को ज़्यादा सावधानी से स्टडी
करने के लिए इंस्पायर हुआ।
कारण,
इस स्टडी से यह फैक्ट सामने आया कि सबसे बड़ा
जिसकी वजह से ज़्यादातर लोग चालीस से
पचास साल की उम्र से पहले इतने सक्सेसफुल नहीं
हो पाते दरअसल यह tendency है कि वे सेक्स
के इमोशन को फिजिकली एक्सप्रेस करने में ज़्यादा
फंसें रहते है। ज़्यादातर लोग कभी यह नहीं सीख पाते
कि सेक्स की इच्छा की और संभावनाएँ भी है, जो

नाpuपापाता। मा।। रातारा
कि सेक्स की इच्छा की और संभावनाएँ भी है, जो
महत्त्व में इसके फिजिकल एक्सप्रेशन से बढ़कर होती
है। जो लोग यह खोज लेते हैं, उनमे से ज़्यादातर उस
वक़्त के कई साल बर्बाद कर लेते हैं, जब सेक्स एनर्जी
highest लेवल पर होती है यानी पैतालीस से पच्चास
साल की उम्र से पहले। बड़ी अचीवमेंट आमतौर पर
इसके बाद आती है।
कई लोग चालीस साल तक और उसके बाद भी एनर्जी
को लगातार waste करते रहते हैं, जिसे बेहतर रास्तों
पर use किया जा सकता था। उनके बेस्ट व ज़्यादा
पावरफुल एक्सप्रेशन को हवाओ में यूँ ही बिखरा दिए
जाते है।
सेक्सुअल एक्सप्रेशन की इच्छा सारे इमोशंस में सबसे
स्ट्रोंग और पावरफुल है और इसी कारण जब इस
इच्छा का इस्तेमाल किया जाता है और इसे फिजिकल
एक्सप्रेशन के बजाय दूसरे रास्तों पर इस्तेमाल किया
जाता है तो यह किसी को भी महान अचीवमेंट के लेवल
पर ले जा सकती है।
इतिहास में ऐसे लोगो के एग्ज़ाम्पल की कमी नहीं
है, जिन्होंने आर्टिफीसियल stimulus जैसे शराब
या नशे की चीज़ों के इस्तेमाल द्वारा रिजल्ट हासिल
किए। एडगर एलान पो ने ‘द रेवन’ शराब के नशे में
लिखी, ‘ऐसे सपने देखते हुए लिखी जो किसी इनसान
ने इससे पहले देखने की हिम्मत कभी नहीं की थी।’

लिखी, ‘ऐसे सपने देखते हुए लिखी जो किसी इनसान
ने इससे पहले देखने की हिम्मत कभी नहीं की थी।’
जेम्स व्हिटकॉम्ब राईले ने अपना बेस्ट राइटिंग शराब
के नशे में ही की थी। शायद इसीलिए उन्होंने देखा कि
“हकीकत और सपने में पूरा सीरियल कॉम्बिनेशन है,
नदी के ऊपर मिल और धारा के ऊपर कोहरा।’ रोबर्ट
बर्न्स ने भी नशे की हालत में अपना बेस्ट लिखा था।
लेकिन यह याद रखा जाना चाहिए कि ऐसे कई लोगो
ने अंत में खुद को बर्बाद कर लिया। नेचर ने ख़ुद की
ऐसी मोटिवेशनल दवा बनाई है, जिसके द्वारा इनसान
अपने मन को सुरक्षित रूप से इंस्पायर कर सकते है
और अच्छे और निराले विचार हासिल कर सकते है, जो
न जाने कहाँ से आते हैं। नेचर के motivators के
बदले में आज तक कोई और आप्शन नहीं खोजा गया
है।
साइकोलोजिस्ट जानते है कि सेक्स की इच्छा और
स्पिरिचुअल तमन्ना में एक बेमिसाल करीबी संबंध होता
है-वह फैक्ट जिससे उन लोगो का अजीब व्यवहार
साफ़ होता है, जो धार्मिक पागलपन में शामिल होते हैं,
जो ट्राइबल कल्चर में आम होते है।
संसार इंसान की भावनाओं द्वारा चलता है और
सिविलाइज़ेशन का भाग्य भी इसी से सेट होता है। लोग
अपने एक्शन में लॉजिक से उतना इन्फ्लुएंस नहीं होते
जितने कि ‘भावनाओ’ से। मन की क्रिएटिव शक्ति पूरी

41 एपसलका सपना पशुएस ना हात
जितने कि ‘भावनाओ’ से। मन की क्रिएटिव शक्ति पूरी
तरह भावनाओं द्वारा चलाए जाते है, न कि ठंडे लॉजिक
से। इंसान के सभी ज़ज्बातों में सबसे पावरफुल इमोशन
सेक्स का इमोशन है।
माइंड stimulant एक ऐसा इन्फ्लुएंस है, जो थॉट
की वाइब्रेशन को टेम्पररी या परमानेंट तौर पर बढ़ा
सकता है। जिन सोर्सेज के द्वारा इनसान असीम शक्ति
से कांटेक्ट कर सकता है या अपनी इच्छा से अपने या
किसी दूसरे इंसान के सब कॉन्शियस माइंड के स्टोर
हाउस में घुस सकता है।
यह एक जीनियस का तरीका होता है।
एक टीचर ने तीस हजार से ज़्यादा सेल्समैन को ट्रेन
और गाइड किया। उहोने यह
आश्चर्यजनक खोज की कि हाइ-सेक्स वाले लोग सबसे
ज़्यादा इफेक्टिव सेल्समैन होते हैं। इसके पीछे कारण
यह है कि पर्सनालिटी के जिस पहलू को “पर्सनल
magnetism’ कहा जाता है, वह सेक्स एनर्जी
से ज़्यादा अलग नहीं है, हाइली sexed लोगो में
हमेशा बहुत magnetic पॉवर होती है। समझ और
डेवलपमेंट के द्वारा इस इम्पोर्टेन्ट शक्ति का इस्तेमाल
लोगो के साथ संबंधों में बहुत फ़ायदा दिलवा सकता
है। यह एनर्जी दूसरो के साथ नीचे बताए गए तरीकों से
कम्यूनिकेट की जा सकती है-

पापा | सपा 0-
1. हाथ मिलाना : हाथ का स्पर्श तुरंत magnetic
पॉवर के होने या ना होने के बारे में बता देता है।
2. आवाज का टोन : magnetic पॉवर या सेक्स
एनर्जी वह एलिमेंट है, जिससे आवाज रंगीन या सुनने
में
खूबसूरत या आकर्षक बनती है।
3. पोस्चर और बॉडी लैंग्वेज : हाइली-sexed लोग
तेजी से, शालीनता और सहजता से चलते हैं।
4. थॉट की वाइब्रेशन : हाइली-sexed लोग सेक्स के
भाव को अपने विचारों में मिक्स कर लेते हैं या ऐसा
अपनी इच्छा के अनुसार कर सकते हैं और इस तरह से
वे अपने चारो तरफ के लोगों को इन्फ्लुएंस कर सकते
हैं।
5, ग्रूमिंग : जो लोग हाइली-sexed होते हैं, वे अपनी
पर्सनल इमेज के बारे में आमतौर पर बहुत ध्यान देते हैं।
वे आमतौर पर उस स्टाइल के कपडे चुनते हैं, जिनसे
उनकी पर्सनालिटी, बॉडी और रंग आकर्षक बने।
सेल्समैन को काम पर रखते समय एक काबिल सेल्स
मैनेजर सबसे पहले जिस गुण को देखता है वह है
पर्सनल magnetic पॉवर ,जो सेल्समैन की पहली
ज़रुरत है। जिन लोगो में सेक्स एनर्जी कम होती है वे
कभी excited नहीं हो पाएँगे या दूसरों को excite
नहीं कर पाएँगे और जोश सेल्समैनशिप की सबसे
इम्पोर्टेन्ट क्वालिटी में से एक हैं, चाहे इंसान कुछ
भी बेच रहा हो। जिस वकील या सेल्समैन में सेक्स
एनर्जी कम होती है, वह दूसरो को इम्प्रेस करने में

नाए ” ‘ ‘
भी बेच रहा हो। जिस वकील या सेल्समैन में सेक्स
एनर्जी कम होती है, वह दूसरो को इम्प्रेस करने में
फ्लॉप हो जाता है। इसे इस फैक्ट के साथ जोड़ दे कि
ज़्यादातर लोगो को उनकी भावनाओ को इन्फ्लुएंस
करके ही इम्प्रेस किया जा सकता है और आप समझ
जाएँगे कि सेल्समैन की काबिलियत के हिस्से के रूप
में सेक्स एनर्जी का महत्व कितना ज़्यादा है। मास्टर
सेल्समैन सेलिंग में महारत इसलिए हासिल कर लेते
है क्योंकि वे जाने-अनजाने में सेक्स एनर्जी को सेल्स
excitement या जोश में बदल लेते हैं।
जो सेल्समैन यह जानता है कि किस तरह अपने
दिमाग को सेक्स के टॉपिक से दूर हटाया जाए और
इसे सेल्स एफर्ट में लगाया जाए और इस काम को
उतने ही जोश और लगन से किया जाए जितना कि वह
इसके ओरिजिनल गोल में लगाता तो उस सेल्समैन ने
सेक्स ट्रांसफॉर्मेशन की कला में महारत हासिल कर ली
है, भले ही वह इस बात को जानता हो या न जानता
हो। ज़्यादातर सेल्समैन जो अपनी सेक्स एनर्जी को
ट्रांसफॉर्म करते हैं वे बिना यह जाने ऐसा करते है। उन्हें
यह पता ही नहीं होता कि वे क्या कर रहे हैं और कैसे
कर रहे हैं।
सेक्स एनर्जी के ट्रांसफॉर्मेशन के लिए ज़्यादा विल
पॉवर की जरुरत होती है और आम आदमी इस मकसद
के लिए इतनी विल पॉवर जुटाने की परवाह नहीं
करता। जिन लोगो को इस बदलाव के लिए ज़रूरी विल

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
सेक्स एक ऐसा टॉपिक है, जिसके बारे में ज़्यादातर
लोग ज़्यादा नहीं जानते। सेक्स की इच्छा को गलत
समझा गया है, दोषी ठहराया गया है और इसका
मज़ाक उड़ाया गया है। ऐसा अज्ञानी लोगो ने भी किया
है और बुरी मानसिकता वाले लोगो ने भी किया है।
जिन आदमियों और औरतों को हाइली सेक्सुअल
नेचर का वरदान मिला है–हाँ इसे वरदान ही कहेंगे,
उन्हें आमतौर पर ऐसे लोगों के रूप में देखा जाता है
जिन पर नजर रखी जानी चाहिए. उन्हें वरदान मिलने
के बजाए आमतौर पर ऐसा माना जाता है जैसे उन्हें
अभिशाप मिला हो।
इस युग में जहां इनफार्मेशन सबकी नॉलेज बढ़ा रही
है, आज भी करोड़ो लोग इस हीन भावना के शिकार
है क्योंकि उनका यह विश्वास गलत है कि हाइली
सेक्सुअल नेचर एक अभिशाप है। सेक्स एनर्जी के
गुणों के बारे में इन बातों से यह नहीं समझ लेना चाहिए
कि uncontrolled सेक्स की वकालत की जा रही
है। सेक्स की भावना तभी एक सद्गुण है, जब इसका
बुद्धिमानी और सावधानी से इस्तेमाल किया जाए।
इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है और अकसर
किया भी जाता है, उस हद तक कि शरीर और मन
टोनों को शागीर बनाने के वताय तो टन्हें नीचे गिती

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
सेक्स एक ऐसा टॉपिक है, जिसके बारे में ज़्यादातर
लोग ज़्यादा नहीं जानते। सेक्स की इच्छा को गलत
समझा गया है, दोषी ठहराया गया है और इसका
मज़ाक उड़ाया गया है। ऐसा अज्ञानी लोगो ने भी किया
है और बुरी मानसिकता वाले लोगो ने भी किया है।
जिन आदमियों और औरतों को हाइली सेक्सुअल
नेचर का वरदान मिला है–हाँ इसे वरदान ही कहेंगे,
उन्हें आमतौर पर ऐसे लोगों के रूप में देखा जाता है
जिन पर नजर रखी जानी चाहिए. उन्हें वरदान मिलने
के बजाए आमतौर पर ऐसा माना जाता है जैसे उन्हें
अभिशाप मिला हो।
इस युग में जहां इनफार्मेशन सबकी नॉलेज बढ़ा रही
है, आज भी करोड़ो लोग इस हीन भावना के शिकार
है क्योंकि उनका यह विश्वास गलत है कि हाइली
सेक्सुअल नेचर एक अभिशाप है। सेक्स एनर्जी के
गुणों के बारे में इन बातों से यह नहीं समझ लेना चाहिए
कि uncontrolled सेक्स की वकालत की जा रही
है। सेक्स की भावना तभी एक सद्गुण है, जब इसका
बुद्धिमानी और सावधानी से इस्तेमाल किया जाए।
इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है और अकसर
किया भी जाता है, उस हद तक कि शरीर और मन
टोनों को शागीर बनाने के वताय तो टन्हें नीचे गिती

इसका गलत इस्तमाल किया जा सकता ह आर अकसर
किया भी जाता है, उस हद तक कि शरीर और मन
दोनों को अमीर बनाने के बजाय वो इन्हें नीचे गिराती
है।
ऑथर को यह इम्पोर्टेन्ट लगा, जब उन्होंने पाया कि
हर महान लीडर की अचीवमेंट के पीछे किसी औरत
की इंस्पिरेशन थी। कई example में यह औरत
हिचकिचाने वाली खुद को नाकारने वाली पत्नी थी,
जिसके बारे में जनता ने बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं
सुना। कुछ example में इंस्पिरेशन का सोर्स दूसरी
औरत में पाया गया।
हर बुद्धिमान इंसान जानता है कि शराब या ड्रग्स के
कारण ज़रुरत से ज़्यादा excitement तबाही करने
वाला रूप है। हर इंसान यह नहीं जानता कि सेक्स को
ज़ाहिर करने की इच्छा में अति डूबे रहना एक ऐसी
आदत बन जाती है, जो क्रिएटिव एफर्ट के लिए उतनी
ही ख़तरनाक और घातक होती है, जितनी की शराब।
सेक्स के पीछे पगलाया आदमी नशे में पगलाए इंसान
से अलग नहीं होता। दोनों ही अपने लॉजिकल माइंड
और विल पॉवर पर कंट्रोल खो बैठते है। यह देखा
जा सकता है कि सेक्स कन्वर्शन के टॉपिक में अज्ञानी
इंसान पर एक तरफ तो बहुत ज़्यादा पेनल्टी थोक देता
है और दूसरी तरफ उन्हें उतनी ज़्यादा फ़ायदों से वंचित
रखता है।

सेक्स के टॉपिक में चारो तरफ फैली नॉलेज की कमी
इस फैक्ट के कारण है कि यह टॉपिक रहस्य और
सन्नाटे में घिरा हुआ है। इसका रिजल्ट यह होता है
कि लोगो की जानने की इच्छा बढ़ जाती है कि वे इस
टॉपिक के बारे में ज़्यादा नॉलेज हासिल करें। यह
क़ानून बनाने वालो और डॉक्टरों के लिए शर्म की बात
है कि टॉपिक में जानकारी आसानी से मौजूद नहीं है,
क्योंकि इन्ही लोगों को नौजवानों को इस टॉपिक के बारे
में बताना चाहिए।
बहुत कम ऐसा होता है कि कोई इंसान किसी भी फील्ड
में चालीस की उम्र के पहले किसी हाई क्रिएटिव काम
में दाखिल हो। एक एवरेज इंसान की सबसे महान
क्रिएटिव एबिलिटी की उम्र चालीस और पचास साल
के बीच होती है। यह स्टेटमेंट हजारों लड़के लड़कियों
के एनालिसिस पर बेस्ड है। यह उन लोगो के लिए
encouraging होना चाहिए, जो चालीस साल
से पहले सक्सेसफुल नहीं हो पाए हैं और उन लोगो
के लिए भी जो बुढ़ापे की शुरुआत को लेकर डरे हुए
हैं। यानी जो चालीस साल के पॉइंट के आसपास हैं।
चालीस और पचास साल के बीच के साल आमतौर पर
सबसे फ़ायदेमंद होते हैं। इनसान को इस उम्र पर आते
समय डर से कांपना नहीं चाहिए, बल्कि आशा और
excitement से इसका इंतज़ार करना चाहिए।
अगर आप सबूत चाहते हैं कि ज़्यादातर लोग अपने
बेस्ट काम को चालीस साल की उम्र से पहले शुरू

अगर आप सबूत चाहते हैं कि ज़्यादातर लोग अपने
बेस्ट काम को चालीस साल की उम्र से पहले शुरू
नहीं करते तो अमेरिका के सबसे सक्सेसफुल लोगो
के रिकॉर्ड उठाकर देख लें और आपको सबूत मिल
जाएगा। हेनरी फोर्ड तब तक सचमुच सक्सेसफुल नहीं
हुए थे, जब तक कि उन्होंने चालीस पार नहीं कर लिया
था। एंडू कार्नेगी चालीस से आगे निकल चुके थे, तब
उन्हें अपनी कोशिशों का फल मिला। जेम्स जे. हिल
चालीस साल की उम्र में अब भी टेलीग्राफ चला रहे थे।
उनकी बड़ी अचीवमेंट उस उम्र के बाद आई। अमेरिकी
इंडस्ट्रियलिस्ट और फाइनांसरों की बायोग्राफी इस सबूत
से भरी हुई हैं कि चालीस से साठ के बीच का वक़्त
इनसान का सबसे ज़्यादा प्रोडक्टिव पीरियड रहता है।
तीस और चालीस के बीच की उम्र में आदमी सेक्स
ट्रांसफॉर्मेशन की कला को समझना शुरू करता है। यह
खोज आमतौर पर इत्तेफ़ाक से होती है और आमतौर
पर जो आदमी इसे खोजता है, वह इसके बारे में पूरी
तरह से अनजान होता है। उसे दिख सकता है कि
उसकी अचिवेमेंट की पॉवर पैंतीस से चालीस साल
के आस-पास बढ़ती हैं, लेकिन तीस और चालीस के
बीच के उम्र में इंसान में प्यार और सेक्स के भाव को
जोड़ना शुरू कर देती हैं ताकि वह इन महान शक्तियों
से मदद हासिल कर सके और उन्हें इकट्ठे कर्म के लिए
इंस्पिरेशन के रूप में इस्तेमाल में ला सके।
अकेला सेक्स ही एक्शन लेने के लिए एक पावरफुल

अकेला सेक्स ही एक्शन लेने के लिए एक पावरफुल
इच्छा है, लेकिन इसकी शक्तियाँ किसी तूफान की तरह
होती है–अकसर उसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता।
जब प्यार का भाव सेक्स के भाव के साथ जुड़ जाता है
तो रिजल्ट होता है मकसद की शांति, बैलेंस और फ़ैसले
की सटीकता। चालीस की उम्र तक पहुंच चुका कौन सा
इंसान इतना दुर्भाग्यगशाली होगा कि वह इन स्टेटमेंट
को एनालाइज करने के काबिल ना हो और अपने खुद
के एक्सपीरियंस से इसका सपोर्ट न करे।
प्यार, रोमांस और सेक्स यह सभी भाव इनसान को
महान अचीवमेंट की ऊँचाइयों तक ले जाने के काबिल
हैं। प्यार वह भाव है, जो सेफ्टी वॉल्ब का काम करता
है और बैलेंस और क्रिएटिव एफर्ट को पक्का करता है।
जब यह तीनो भाव मिल जाते हैं तो इंसान टैलेंट की
ऊँचाइयों को छू लेता है।
भावनाएं मन का स्टेट होती हैं। नेचर ने इनसान को ‘मन
की एक केमस्ट्री’ दी है, जो उसी तरह से काम करती है,
जिस तरह कि matter की केमेस्ट्री के प्रिंसिप्ल। यह
एक जाना माना फैक्ट है कि matter की केमिस्ट्री
की मदद से कोई भी केमिस्ट कुछ elements को
मिलाकर जहर बना सकता है, जिनमे से एक भी
एलिमेंट सही मात्रा में नुकसानदायक न हो। भावनाएँ
भी इसी तरह से मिलकर जहर बनती है। सेक्स और
जलन जब आपस में मिलते हैं तो इनसान एक पागल
जानवर बन सकता है।

जानवर बन सकता है।
मन की केमिस्ट्री के द्वारा इंसानों के मन में एक या
ज़्यादा विनाशकारी भाव की मौजूदगी एक ऐसा जहर
पैदा कर देती है, जिससे इनसान के न्याय करने की
शक्ति बर्बाद हो सकती है।
टैलेंट की राह में सेक्स, प्यार और रोमांस का
डेवलपमेंट, कंट्रोल और इस्तेमाल शामिल है। शोर्ट में
यह प्रोसेस इस तरह बताया जा सकता है-
इन भावनाओ की मौजूदगी को अपने मन में स्ट्रोंग
विचारों के रूप में encourage करें और बाकी
सभी बुरी भावनाओं को कम करने की कोशिश करें।
मन आदत का गुलाम होता है। यह उन स्ट्रोंग विचारों
के अनुसार काम करता है, जो इसे दिए जाते है। विल
पॉवर के द्वारा इनसान किसी भावना की मौजूदगी
को discourage कर सकता है और किसी दूसरी
भावना की मौजूदगी को encourage कर सकता
है। विल पॉवर के द्वारा मन को कंट्रोल करना मुश्किल
नहीं है। कंट्रोल लगन और आदत से आती है। कंट्रोल
का राज़ ट्रांसफॉर्मेशन के प्रोसेस को समझने में छुपा
है।
जब कोई नेगेटिव भाव किसी के दिमाग में आता है तो
यह पॉजिटिव या क्रिएटिव भाव में बदला जा सकता है
और इसका आसान तारीक है अपने विचारों को बदल
लेना।

जब कोई नेगेटिव भाव किसी के दिमाग में आता है तो
यह पॉजिटिव या क्रिएटिव भाव में बदला जा सकता है
और इसका आसान तारीक है अपने विचारों को बदल
लेना।
ख़ुद के एफर्ट के अलावा टैलेंट के मंजिल तक पहुँचने
के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है। कोई इनसान सिर्फ
सेक्स एनर्जी की इंस्पायरिंग पॉवर के द्वारा इकनोमिक
या कमर्शियल अचीवमेंट की महान ऊँचाइयों को
हासिल कर सकता है, लेकिन इतिहास ऐसे सबूतों से
भरा पड़ा है कि वह अपने कैरेक्टर में ऐसे गुण भी
रखता है, जिससे या तो वह अपनी दौलत को बनाए
नहीं रख पाता या फिर उसका इस्तेमाल नहीं कर पाता।
इस नॉलेज की कमी हजारों लोगो को दुःखी बना देती
है, चाहे वे अमीर ही क्यों ना हो।
प्यार की यादे कभी खत्म नहीं होती। इंस्पिरेशन के
सोर्स के चले जाने के काफी समय बाद भी वे बनी
रहती है, इन्फ्लुएंस करती है और रास्ता दिखाती है।
इसमें कुछ भी नया नहीं है। हर इनसान, जिसने सच्चा
प्यार किया हो, यह बात जानता है कि यह इंसान के
दिल में एक कभी ना मिटने वाला निशान छोड़ देता
है। प्यार का असर परमानेंट होता है क्योंकि प्यार का
नेचर स्पिरिचुअल है। जिसे प्यार अचीवमेंट की महान
ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए इंस्पायर न कर सके वह
इंसान दुर्भाग्यशाली है–हालाँकि वह जिंदा लगता है,
लेकिन सच तो यह है कि वह मुरदा है।

लेकिन सच तो यह है कि वह मुरदा है।
अपने कल को याद कीजिए और अपने मन को बीते
हुए प्यार की सुंदर यादों से भरिए। यह आज की
चिन्ताओं के स्ट्रेस के असर को फ़ीका कर देगा। यह
आपको जीवन की कडवी हकीकत से आज़ादी का
सोर्स देगा और हो सकता है। कौन जाने? ख़्वाबों की
दुनिया में कुछ समय घूमने के दौरान आपका मन
आपको ऐसे आईडिया या प्लान के बारे में बता दे, जो
आपके जीवन के पूरे फाइनेंसियल या स्पिरिचुअल स्टेट
को बदल दे।
अगर आपको विश्वास है कि आप दुर्भाग्यशाली हैं
क्योंकि आपने प्यार किया है और आपका प्यार खो
गया है तो इस विचार को दूर भगाएँ। जिसने सच्चा प्यार
किया हो, वह कभी पूरी तरह से उन्हें नहीं गवाँ सकता।
प्यार थोड़ा सनकी और तुनकमिजाज होता है। यह
अपनी इच्छा से आता है और बिना चेतावनी दिए चला
जाता है। जब तक यह मौजूद है तब तक इसे स्वीकार
करे और इसका आनद ले, लेकिन इसके जाने के बाद
इसके बारे में चिंता करके समय बर्बाद न करे। आपके
चिंता करने से यह वापस नहीं आ जाएगा।
इस विचार को भी दिल से निकाल दे कि प्यार सिर्फ
एक ही बार आता है। प्यार अनंत बार आ सकता
है और जा सकता है, लेकिन कोई भी दो के प्यार
एक्सपीरियंस एक से नहीं होते। वे एक जैसे तरीके से

है और जा सकता है, लेकिन कोई भी दो के प्यार
एक्सपीरियंस एक से नहीं होते। वे एक जैसे तरीके से
आप पर असर नहीं डाल सकते।
ऐसा हो सकता है और ऐसा होता भी है कि एक प्यार
का एक्सपीरियंस दिल पर बाकी से ज़्यादा गहरे निशान
छोड़ जाए।
हालाँकि सभी प्यार का एक्सपीरियंस अच्छा होता है,
लेकिन उस इंसान के लिए नहीं जो प्यार के जाने के
बाद नफरत या अलग होने की आग में जलने लगे।
प्यार के मामले में निराश नहीं होना चाहिए और होगा
भी नहीं अगर लोग प्यार और सेक्स की भावनाओ के
बीच के फ़र्क को समझ ले। इम्पोर्टेन्ट फ़र्क यह होता है
कि प्यार स्पिरिचुअल है, जबकि सेक्स बायोलॉजिकल
है। कोई भी एक्सपीरियंस जो इंसान के दिल को
स्पिरिचुअल शक्ति से स्पर्श कराता है बुरा नहीं हो
सकता सिवाय इसके कि वह अज्ञान या जलन से
पीड़ित हो।
इसमें कोई डाउट नही है कि प्यार जीवन का सबसे
महान एक्सपीरियंस है। यह इंसान को अनलिमिटेड
पॉवर के संपर्क में लाता है जब वह रोमांस और सेक्स
के भाव में मिल जाता है तो यह इंसान को क्रिएटिव
एफर्ट की सीढ़ी पर बहुत ऊपर ले जा सकता है। प्यार,
सेक्स और रोमांस के भाव अचीवमेंट, क्रिएटर और
टैलेंट के कभी ना मिटने वाले triangle के पहलू हैं।

एसप१२ पापा । मा
सेक्स और रोमांस के भाव अचीवमेंट, क्रिएटर और
टैलेंट के कभी ना मिटने वाले triangle के पहलू हैं।
प्यार के भाव में कई पहलू, कई शेड और रंग होते
हैं। लेकिन प्यार के सभी प्रकारों में सबसे गहरा और
धधकता हुआ प्रकार वह है, जिसमें प्यार और सेक्स
की भावनाएँ आपस में मिल जाती हैं। जिन शादियों में
प्यार के भाव के साथ सेक्स का सही बैलेंस नहीं है वे
सुखी शादी नही कही जा सकती और शायद ही कभी
यह लंबे समय तक चलते हो। प्यार अकेला शादी से
सुख नहीं ला सकता, न ही सेक्स अकेला यह काम
कर सकता है। जब यह दोनों सुंदर भाव आपस में मिल
जाते हैं तो शादी एक ऐसी मेंटल स्टेट पैदा कर सकता
है, जो इस धरती पर महसूस की जा सकने वाली
स्पिरिचुअल स्टेट के क़रीब होती है।
जब रोमांस का भाव प्यार और सेक्स के साथ जुड़
जाता है तो इनसान के सीमित मन और अनलिमिटेड
पॉवर के बीच की बाधाएँ हट जाती हैं। तब एक
जीनियस पैदा होता है।
जैसा कि हम सभी को पता है कि प्यार का नेचर है कि
वह जब भाव रूप में होते हैं तो बदसूरत सी चीज़ में भी
अपनी कला से सुंदरता की मूरत खड़ा कर देता है। पर
वह भाव ज़्यादा स्ट्रोंग और इफेक्टिव साबित होता है,
जिसमे प्यार और सेक्स दोनों मिक्स हो जाए। कोई भी
शादी सिर्फ प्यार से ही सक्सेसफुल नहीं हो सकती न ही

जिसमे प्यार और सेक्स दोनों मिक्स हो जाए। कोई भी
शादी सिर्फ प्यार से ही सक्सेसफुल नहीं हो सकती न ही
सिर्फ सेक्स से। शादी के बाद खुशियाँ तब तक हासिल
नहीं होगी जब तक दोनों (प्यार और सेक्स) की मात्रा
बैलेंस्ड रूप से भावनाओं में घुलमिल न जाए। जब
शादी के बाद ये दोनों भाव मिक्स किए जाते है तो मन
उस स्टेट ऑफ़ माइंड में पहुँच जाता है, जो इससे पहले
आपने महसूस नहीं की होगी।
जब रोमांस का भाव सेक्स और प्यार के साथ जुड़ता
है तो सोने पे सुहागा जैसा है। तब लॉजिकल मन और
अनलिमिटेड पॉवर के बीच की हर सीमा खतम हो
जाती है।
लोगो की सेक्स के बारे में बहुत ही गलत सोच
हैं। लेकिन प्यार, रोमांस और सेक्स का भाव उस
अनलिमिटेड पॉवर के बीच के लिंक का काम करती है।
बहुत सी शादियों में स्ट्रेस और उथल पुथल का माहौल
होता है, लेकिन यहाँ जो कहा जा रहा है, उसे अगर
ठीक तरीके से समझ लिया जाए तो शांति का माहौल
बनाया जा सकता है। बार-बार टोकने या ताने कसने में
जो तकलीफ़ होती है, वह आमतौर पर सेक्स के टॉपिक
में नॉलेज की कमी की वजह से होती है। जहाँ प्यार,
रोमांस और सेक्स के भाव और काम की सही समझ
रहती है वहाँ शादीशुदा जोड़े में कोई स्ट्रेस नहीं होता।

(Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
12.सब कॉन्शियस माइंड
जोड़ने वाला लिंक
अमीर बनने की ओर ग्यारहवाँ कदम
सब कॉन्शियस माइंड consciousness का वह
हिस्सा है, जिसमें लॉजिकल या conscious माइंड
तक पाँचो सेंसेस में से किसी भी सेंस द्वारा पहुँचने वाले
विचार रिकॉर्ड होता है और जहाँ से विचार उसी तरह
दोबारा निकाले जा सकते हैं, जिस तरह फाइल को
फाइलिंग कैबिनेट में से निकाला जा सकता है।
यह इमेज या विचारों को रिसीव करता है और उन्हें
फाइल करता है चाहे उनकी नेचर कैसी भी हो। आप
अपने सब कॉन्शियस माइंड में किसी भी ऐसी प्लानिंग,
विचार या गोल को अपनी मर्जी से डाल सकते हैं, जिसे
आप इसके फिजिकल या फाइनेंसियल रूप में बदलना
चाहते हैं। subconscious mind सबसे पहले उन
स्ट्रोंग इच्छाओ पर काम करता है, जिनमें विश्वास जैसी
भावनाएं मिली हुई हो।
सब कॉन्शियस माइंड दिन रात काम करता है। इनसान
उस तरीके को नहीं जानता जिससे subconscious
mind असीम शक्ति की शक्तियों से ऐसी शक्ति
खींच लेता है जिसके द्वारा यह अपनी मर्जी से किसी

mind असीम शक्ति की शक्तियों से ऐसी शक्ति
खींच लेता है, जिसके द्वारा यह अपनी मर्जी से किसी
की इच्छा को उनके फिजिकल रूप में बदल देता है
और यह हमेशा इस गोल को हासिल करने के सबसे
प्रैक्टिकल और सबसे सीधे ज़रिए का इस्तेमाल करता
है।
आप अपने सब कॉन्शियस माइंड को पूरी तरह से
कंट्रोल नहीं कर सकते, लेकिन आप इसे अपनी इच्छा
के अनुसार कोई भी प्लान , इच्छा या गोल दे सकते हैं,
जिसे आप फिजिकल रूप में बदला हुआ देखना चाहते
है।
इस विश्वास को सही साबित करने के लिए काफ़ी सबूत
है कि सब कॉन्शियस माइंड इनसान के conscious
माइंड और असीम शक्ति के बीच जोड़ने वाला लिंक है।
यह वह ज़रिया है, जिसके द्वारा इनसान असीम शक्ति
की शक्तियों का सहयोग हासिल कर सकता है। यही
एकमात्र ज़रिया है, जिसके द्वारा प्रार्थना उस सोर्स में
बदल जाती है, जो प्रार्थना का जवाब देने के काबिल
होता है।
जब आप इस बात को सच के रूप में स्वीकार कर लेते
हैं कि सब कॉन्शियस माइंड का अस्तित्व है और आप
उस ज़रिए के रूप में इसकी संभावनों को समझ लेते
है, जिसके द्वारा आपकी इच्छाओ को उनके फिजिकल
रूप में बदला जा सकता है तो आप विल पॉवर वाले
चैप्टर में दिए गए इंस्ट्रक्शन्स के पूरे महत्व को समझ

रापारा 440 २ाणापा 14 पापा
रूप में बदला जा सकता है तो आप विल पॉवर वाले
चैप्टर में दिए गए इंस्ट्रक्शन्स के पूरे महत्व को समझ
जाएँगे। आप यह भी समझ जाएँगे कि आपको बार-बार
यह चेतावनी क्यों दी जा रही थी कि आप अपनी
इच्छाओ को क्लियर रखे या उन्हें लिख लें। आप यह
भी समझ जाएँगे कि इन इंस्ट्रक्शन्स पर अमल करते
समय लगन क्यों ज़रूरी है।
तेरह प्रिंसिप्ल वे इंस्पिरेशन हैं, जिनसे आप अपने सब
कॉन्शियस माइंड तक पहुँचने और उन्हें इन्फ्लुएंस
करने की काबिलियत हासिल कर सकते हैं। अगर
आप पहली कोशिश में ऐसा नहीं कर पाते तो हताश या
निराश न हो। याद रखे कि सब कॉन्शियस माइंड सिर्फ़
आदत के द्वारा अपनी मर्जी से डायरेक्ट किया जा
सकता है और इसके लिए विश्वास वाले चैप्टर में दिए
गए इंस्ट्रक्शन्स को फॉलो करना होगा.
याद रखे, आपका सब कॉन्शियस माइंड अपने आप
काम करता है चाहे आप इसे इन्फ्लुएंस करने की
कोशिश करे या न करे। इससे नैचुरली आपको यह पता
चल जाता है कि डर और गरीबी के विचार और सभी
नकारात्मक विचार आपके सब कॉन्शियस माइंड के
लिए इंस्पिरेशन का काम करते हैं, जब तक कि आप
इन पर जीत न पा ले और सब कॉन्शियस माइंड को
अच्छे विचार न दे दें, जिससे इसे पोषण मिल सके।
सब कॉन्शियस माइंड खाली नहीं बैठेगा। अगर आप

सब कॉन्शियस माइंड खाली नहीं बैठेगा। अगर आप
इच्छाओं को अपने सब कॉन्शियस माइंड में बोने में
फेल हो जाते हैं तो यह उन विचारों के अनुसार काम
करेगा, जो इस तक आपकी लापरवाही के नतीजे के
रूप में पहुँचते है। हमने पहले ही क्लियर कर दिया
है कि नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों ही तरह के विचार
लगातार सब कॉन्शियस माइंड तक पहुंच रहे है।
अभी के लिए इतना ही काफ़ी है कि आप यह याद रखे
कि आप हर दिन इस तरह जी रहे हैं कि आपको यह
पता ही नहीं है कि आपके सब कॉन्शियस माइंड तक
किस तरह के विचार पहुंच रहे हैं। इनमें से कुछ विचार
नेगेटिव हैं तो कुछ पॉजिटिव हैं। आपको नेगेटिव विचारों
के बहाव को रोकने की कोशिश करनी है ताकि आप
पॉजिटिव विचार की मदद से अपने सब कॉन्शियस
माइंड को प्रभावित कर सके।
जब आप ऐसा कर लेते हैं तो आपके पास वह चाबी
होगी, जो आपके सब कॉन्शियस माइंड का दरवाज़ा
खोल देगी। यही नहीं, आप उस दरवाज़े को पूरी तरह
कंट्रोल कर सकेंगे ताकि कोई अनचाहा विचार आपके
सब कॉन्शियस माइंड को प्रभावित न कर सके।
इनसान जो कुछ भी बनाता है, वह विचार के रूप में
शुरू होता है। इनसान कोई भी ऐसी चीज नहीं बना
सकता, जिसके बारे में उसने अपने विचार में कप्लना न
की हो। इमेजिनेशन की मदद के द्वारा विचार प्लान के

इनसान जो कुछ भी बनाता है, वह विचार के रूप में
शुरू होता है। इनसान कोई भी ऐसी चीज नहीं बना
सकता, जिसके बारे में उसने अपने विचार में कप्लना न
की हो। इमेजिनेशन की मदद के द्वारा विचार प्लान के
रूप में इकट्ठे होते हैं। कंट्रोल में रहने पर इमेजिनेशन
का इस्तेमाल प्लान या गोल बनाने के लिए किया जा
सकता है, जो किसी को अपने चुने हुए बिज़नेस या
काम में सक्सेस दिलाती है।
सभी विचार जिनका मकसद फिजिकल रूप में बदलना
हो और जिन्हें अपनी मर्जी से सब कॉन्शियस माइंड
में बोया जाए इमेजिनेशन के ज़रिए से गुजरने चाहिए
और उनमें विश्वास मिला हुआ होना चाहिए। प्लान या
मकसद में विश्वास का मिलना जो सब कॉन्शियस माइंड
के सामने पेश की गई हो, सिर्फ इमेजिनेशन के द्वारा
किया जा सकता है।
इन स्टेटमेंट्स से आपने समझ लिया होगा कि सब
कॉन्शियस माइंड के अपनी मर्जी से इस्तेमाल के लिए
सभी प्रिंसिपल्स के कॉम्बिनेशन तथा इस्तेमाल की
ज़रुरत होती है।
उनन्नीसवी और बीसवीं सदी के एक जाने माने
कवि और journalist एला व्हीलर इलेक्स ने सब
कॉन्शियस माइंड की शक्ति के बारे में लिखा है-
तुम्हे नहीं पता एक विचार क्या कुछ कर सकता है
तुमसे घृणा भी करा सकता है और मोहब्बत भी दिला

तुम्हे नहीं पता एक विचार क्या कुछ कर सकता है
तुमसे घृणा भी करा सकता है और मोहब्बत भी दिला
सकता है
विचार वह एलिमेंट है, जिसमे हवादार पंख है
और वे बड़े स्पीड से चलते हैं
वे यूनिवर्स के रूल को पूरी तरह फॉलो करते हैं
यह अपनी तरह का इकलौता एलिमेंट है
वह सब आपकी जिंदगी में वापस आता है
जो भी आपके मन से गुजरता है।
Mrs. विलकॉक्स को यह बात अच्छी तरह से पता थी
कि जो विचार इंसान के मन से होकर गुजरता है, अगर
वह सब कॉन्शियस माइंड में ठहर जाता है तो वह एक
चुंबक की तरह काम करने लगता है और वो विचार
फिजिकल रूप में जरूर बदलता है । विचार वो एलिमेंट
हैं, जिनकी एनर्जी को हम फिजिकल रूप में बदल
सकते हैं।
मन के conscious माइंड में मौजूद विचारों की
तुलना में सब कॉन्शियस माइंड उन विचारों से ज़्यादा
इन्फ्लुएंस होता है और उन्हें ज़्यादा अच्छी तरह स्वीकार
करता है, जिनमे भावना मिले हुए होते है। दरअसल इस
प्रिंसिप्ल के सपोर्ट में काफी सबूत है कि सिर्फ़ इमोशनल
थॉट सब कॉन्शियस माइंड पर एक्टिव असर डाल
पाते है। अगर यह सच है कि सब कॉन्शियस माइंड
भावनाओ से जुड़े विचारों से ज़्यादा जल्दी प्रभावित
होता है और उन पर ज़्यादा तेज़ी से रियेक्ट करता है तो

भावनाओ से जुड़े विचारों से ज़्यादा जल्दी प्रभावित
होता है और उन पर ज़्यादा तेज़ी से रियेक्ट करता है तो
ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट इमोशंस का पता होना ज़रूरी है। कुल
सात ख़ास पॉजिटिव भाव है और सात नेगेटिव भाव है।
नेगेटिव इमोशन अपने आप ही विचारों में चले जाते है
और सब कॉन्शियस माइंड में घुस जाते है।
पॉजिटिव भाव को ऑटो सजेशन के प्रिंसिप्ल के द्वारा
आपको अपने sub conscious mind में विचारों
के ज़रिए पहुँचना होता है।
यह इमोशन ब्रेड में खमीर (yeast) की तरह होते हैं
क्योंकि उनमे एक्शन का एलिमेंट होता है, जो विचारों
को passive से एक्टिव स्टेट में बदल देता है। इस
कारण हम यह समझ सकते है कि भावनाओ से जुड़े
विचार उन विचारों की तुलना में ज़्यादा शक्तिशाली क्यों
होते हैं, जो सिर्फ ठंडे लॉजिक से इंस्पायर होते हैं।
आप अपने सब कॉन्शियस माइंड को इन्फ्लुएंस और
कंट्रोल करने के लिए तैयार कर रहे हैं ताकि आप इसे
पैसा कमाने की इच्छा सौंप सकें, जिसे आप इसके
फाइनेंसियल रूप में बदलना चाहते है। इसलिए यह
ज़रूरी है कि आप उस तरीके को समझ ले, जिसके
द्वारा इस तक पहुँचा जाए। आपको इसकी भाषा
बोलनी होगी नहीं तो यह आपकी बातो पर ध्यान नहीं
देगा। इसे जो भाषा सबसे अच्छी तरह समझ में आती
है वह है भावनाओं की भाषा। इसलिए आइए हम यहाँ

बोलनी होगी नहीं तो यह आपकी बातो पर ध्यान नहीं
देगा। इसे जो भाषा सबसे अच्छी तरह समझ में आती
है वह है भावनाओं की भाषा। इसलिए आइए हम यहाँ
सात मेजर पॉजिटिव और सात नकारात्मक भावनाओं
को describe करें ताकि अपने सब कॉन्शियस माइंड
को इंस्ट्रक्शन देते समय आप पॉजिटिव भावनाओं का
ज़्यादा इस्तेमाल करें और नेगेटिव भाव से बच सकें।
सात मेजर पॉजिटिव भाव
इच्छा का भाव
विश्वास का भाव
प्यार का भाव
सेक्स का भाव
excitement का भाव
रोमांस का भाव
आशा का भाव
दूसरे और पॉजिटिव भाव भी है लेकिन सबसे स्ट्रोंग
सात भाव यही है और यही वे भाव हैं, जिनका
इस्तेमाल आमतौर पर क्रिएटिव प्रोसेस में किया जाता
है। इन सात भाव में महारत हासिल कर ले और
बाकी के पॉजिटिव भाव आपके इशारो पर चलेंगे,
जब आपको उनकी ज़रुरत होगी। इस संबंध में याद
रखें कि आप ऐसी बुक पढ़ रहे हैं, जिसका मकसद
आपके मन में पॉजिटिव भाव भरकर आप में पैसे की
conciousness को डेवलप करने में मदद करना
है।

रखें कि आप ऐसी बुक पढ़ रहे हैं, जिसका मकसद
आपके मन में पॉजिटिव भाव भरकर आप में पैसे की
conciousness को डेवलप करने में मदद करना
है।
सात मेजर नेगेटिव इमोशन
डर का भाव
जलन का भाव
घृणा का भाव
बदला लेने का भाव
अंधविश्वास का भाव
गुस्से का भाव
पॉजिटिव और नेगेटिव इमोशन ब्रेन में एक समय में
एक साथ नहीं रह सकते। या तो एक ज़्यादा स्ट्रोंग होगा
या फिर दूसरा। यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप
यह पक्का कर लें कि पॉजिटिव भाव आपके मन को
ज़्यादा स्ट्रोंग तरीके से एफेक्ट करे। यहाँ आदत का
रूल आपकी मदद करेगा। पॉजिटिव भावों को अमल
में लाने और उनका इस्तेमाल करने की आदत डाल
ले। अंत में वे आपके मन को पूरी तरह से भर देंगे और
नेगेटिव भाव को इसमें आने ही नहीं देंगे।
सिर्फ़ इन इंस्ट्रक्शन्स को पूरी तरह फॉलो करने से
ही आप अपने सब कॉन्शियस माइंड पर कंट्रोल पा
सकते हैं। आपके सब कॉन्शियस माइंड में एक भी
नेगेटिव भाव मौजूद हो तो यह सब कॉन्शियस माइंड से
क्रिएटिव मदद पाने के सभी मौकों को बर्बाद करने के

सकत हा पक सब कान्शयस माइडम एक भा
नेगेटिव भाव मौजूद हो तो यह सब कॉन्शियस माइंड से
क्रिएटिव मदद पाने के सभी मौकों को बर्बाद करने के
लिए काफ़ी है।
अगर आप observe करने वाले इंसान हैं तो आपने
देखा होगा कि ज़्यादातर लोग सिर्फ तभी प्रार्थना का
सहारा लेते हैं, जब बाकी हर चीज फेल हो जाती है।
या फिर वे बेमतलब के शब्दो के कर्मकांड द्वारा प्रार्थना
करते है और क्योंकि यह एक सच है कि ज़्यादातर
लोग सिर्फ तभी प्रार्थना करते है, जब उन्हें बाकी सभी
तरफ से फेलियर मिलती है तो प्रार्थना करते समय
उनके मन डर और डाउट से भरे होते हैं, जिन भाव के
अनुसार सब कॉन्शियस माइंड काम करता है और इन्हें
अनलिमिटेड पॉवर तक आगे भेज देता है। इसी तरह
यही वह भाव है, जो असीम शक्ति तक जाती है और
वह इस पर काम करती है।
अगर आप किसी चीज के लिए प्रार्थना करते हैं लेकिन
प्रार्थना करते समय आपके मन में यह डर होता है कि
आपको यह नहीं मिलेगी या फिर असीम शक्ति आपकी
प्रार्थना पर काम नहीं करेगी तो आपकी प्रार्थना सचमुच
बेकार हो जाएगी।
कई बार प्रार्थना का नतीजा यह होता है कि आपने
जिस चीज़ के लिए प्रार्थना की थी वह आपको मिल
जाती है। अगर आपको ऐसा एक्सपीरियंस हुआ है तो
याद करें कि प्रार्थना करते समय आपकी स्टेट ऑफ़
माइंड असल में कैसी थी और आपको यह विश्वास हो

जाता है। अगर आपका एसा एक्सपाारयस हुआ है तो
याद करें कि प्रार्थना करते समय आपकी स्टेट ऑफ़
माइंड असल में कैसी थी और आपको यह विश्वास हो
जाएगा कि यहाँ पर जो प्रिंसिप्ल बताया जा रहा है, वह
सिर्फ़ एक प्रिंसिप्ल से कहीं बढ़कर है।
वह वक्त आएगा जब स्कूल और एजुकेशनल इंस्टिट्यूट
‘prayer of science’ पढ़ी जाएगी। उस प्रर्थना
को साइंस ही कहा जाएगा। यह यूनिवर्सल माइंड तब
तक नहीं हासिल होगा, जब तक लोग डरे हुए रहेंगे।
यह तब हासिल होगा जब अज्ञान, अंधविश्वास और
गलत एजुकेशन ख़त्म हो जाएगी और हमारे बच्चे
असीम एनर्जी के नॉलेज को हासिल करने लगेंगे। उनमें
से कुछ भाग्यशाली अभी भी ये एजुकेशन हासिल करने
में लगे हैं।
लगभग दो सदी पहले यह समझा जाता था कि रौशनी
भगवान के कोप का रिजल्ट है और लोग रौशनी से डरा
करते थे। अब विश्वास की शक्ति को नमस्कार, जिसकी
वजह से हमने रौशनी के इस भ्रम को तोड़ दिया और
अब इलेक्ट्रिक बल्ब हर घर की जरुरत बन गया है।
अगर हाल ही की कुछ खोजे न हुई होती तो यह माना
जाता था कि प्लैनेट्स के बीच जो स्पेस है वह बिल्कुल
खाली है, वहाँ पर कुछ भी नहीं है, ज़ीरो है, ख़ाली है।
अब, एक बार फिर से विश्वास की शक्ति को प्रणाम,
अब हमें पता लग गया है कि प्लैनेट्स के बीच जो जगह
है. वह बिल्कल खाली नहीं है बल्कि वहाँ पर वाइब्रेशन.

AP
जा वाला,
अब हमें पता लग गया है कि प्लैनेट्स के बीच जो जगह
है, वह बिल्कुल ख़ाली नहीं है बल्कि वहाँ पर वाइब्रेशन,
एनर्जी, थॉट की वाइब्रेशन भरी हुई है जिसकी वजह
से एक इनसान का दिमाग दूसरे इनसान के दिमाग से
कनेक्ट कर लेता है।
अब सवाल यह आता है कि तो फिर ऐसी कौन सी
वजह है, जिससे यह एनर्जी, हर इंसान के मन को
असीम शक्ति या फिर असीम एनर्जी से कांटेक्ट नहीं
कराती?
इंसान के लॉजिकल माइंड और अनलिमिटेड पॉवर
के बीच ऐसा कोई भी दरवाज़ा नहीं है, जो दोनों को
आपस में कांटेक्ट करने से रोक सके। बस आपके पास
पेशेंस, विश्वास, अटलता और एक मजबूत इच्छा होनी
चाहिए, जो असीम शक्ति से कांटेक्ट बना सके। सिर्फ
हाथ जोड़कर प्रार्थना करने से कोई फायदा नहीं होने
वाला। उस लिमिटेड पॉवर का कोई मैनेजर नहीं है, जो
प्रार्थना की वजह से आपको उससे कांटेक्ट करने में
मदद करेगा. या तो आप खुद सीधे कांटेक्ट करें या फिर
ना करे।
आप प्रार्थना की ढेर सारी किताबें खरीदकर ला सकते
हैं और उन्हें कयामत तक पढ़ सकते हैं। पर कोई
फायदा नहीं होने वाला। वे विचार जिनसे आप असीम
शक्ति से कांटेक्ट करना चाहते हैं तो वे सब कॉन्शियस
माइंड के उसी प्रोसेस से होकर गुजरेंगे तभी असीम
शक्ति से कांटेक्ट हो सकता है।

शाक्त स काटक्ट करना चाहतहता व सब कान्शियस
माइंड के उसी प्रोसेस से होकर गुजरेंगे तभी असीम
शक्ति से कांटेक्ट हो सकता है।
असीम शक्ति से कांटेक्ट करने का बिल्कुल वही प्रोसेस
है, जिस प्रिंसिप्ल पर रेडियो, टीवी या फिर मोबाइल
काम करते है।
कोई ऑडियो या फिर विडियो तब तक नहीं सुनाई या
दिखाई दे सकता, जब तक वह बढ़कर या फिर घटकर
उस फ्रीक्वेंसी में नहीं पहुँच जाती, जिसे इनसान सुन
या देख सकता है। सिर्फ इसी फ्रीक्वेंसी में विडियो देख
या सुन सकते हैं। भेजने वाला स्टेशन फ्रीक्वेंसी को
पकड़ता है, और उसे कई गुना बढ़ा देता है, जिससे
वह भगवान् से कांटेक्ट कर सके। इस बदलाव के बाद
भगवान् उस फ्रीक्वेंसी को ‘रिसीविंग स्टेशन’ में भेज
देता है। रिसीविंग स्टेशन तुरंत उस फ्रीक्वेंसी को घटाकर
भेजता है, जिसमे इंसान की आँखे देख व कान सुन
सके।
ठीक वैसे ही सब कॉन्शियस माइंड विचारों को लेता
है और उन्हें असीम शक्ति के पास भेज देता है, ताकि
असीम शक्ति उस एनर्जी को उस फिजिकल रूप में
बदल सके जो इंसान को दिखाई दे सके और वह
महसूस कर सके।
आप इसे इस ढंग से समझे कि सिर्फ प्रार्थना आपको
सक्सेस की ओर नहीं ले जा सकती।

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मा गुरागापा CII III
पकड़ता है, और उसे कई गुना बढ़ा देता है, जिससे
वह भगवान् से कांटेक्ट कर सके। इस बदलाव के बाद
भगवान् उस फ्रीक्वेंसी को ‘रिसीविंग स्टेशन’ में भेज
देता है। रिसीविंग स्टेशन तुरंत उस फ्रीक्वेंसी को घटाकर
भेजता है, जिसमे इंसान की आँखे देख व कान सुन
सके।
ठीक वैसे ही सब कॉन्शियस माइंड विचारों को लेता
है और उन्हें असीम शक्ति के पास भेज देता है, ताकि
असीम शक्ति उस एनर्जी को उस फिजिकल रूप में
बदल सके जो इंसान को दिखाई दे सके और वह
महसूस कर सके।
आप इसे इस ढंग से समझे कि सिर्फ प्रार्थना आपको
सक्सेस की ओर नहीं ले जा सकती।
इससे पहले कि आपकी प्रार्थना असीम एनर्जी के पास
पहुँचे, आपका सब कॉन्शियस माइंड उस स्टेट ऑफ़
माइंड में होना चाहिए, जिससे वह असीम शक्ति से
कांटेक्ट कर सके। विश्वास ही एक ऐसी एजेंसी है, जो
मन को स्पिरिचुअल नेचर देती है। विश्वास और डर दोनों
एक दूसरे के दुश्मन है। अगर एक है तो दूसरा नहीं हो
सकता है।

Full Book) Think and
Grow Rich
Napoleon Hill
13.मन
विचारों को भेजने और रिसीव करने वाला स्टेशन
अमीर बनने की ओर बारहवाँ कदम
ऑथर स्वर्गीय डॉ. एलेग्जेंडर ग्राहम बेल और डॉ.
एल्मर आर, गेट्स के साथ काम कर रहे थे। उस समय
ऑथर ने यह विचार किया कि हर इंसान का मन थॉट
के वाइब्रेशन को भेजने और रिसीव करने वाला स्टेशन
होता है।
रेडियो ब्रॉडकास्ट प्रिंसिप्ल की तरह ही हर इनसान का
मन भी दूसरे मन द्वारा भेजे जा रहे थॉट की वाइब्रेशन
को पकड़ने के काबिल होता है।
क्रिएटिव इमेजिनेशन मन का ‘रिसीविंग सेट’ है, जिसके
द्वारा यह उन विचारों को रिसीव करता है जो दूसरे
इंसान के मन द्वारा भेजे जाते है। यह कम्युनिकेशन का
वह ज़रिया है, जो किसी इनसान के लॉजिकल माइंड
और उन चार सोर्सेज को जोड़ता है जहाँ से इनसान
विचार की इंस्पिरेशन हासिल कर सकता है।
जब इसे इंस्पायर किया जाए या जब वह वाइब्रेशन की
हाई लेवल पर काम कर रहा हो तो मन बाहरी सोर्स के
द्वारा इस तक पहुँचने वाले विचारों को रिसीव करने के

जब इसे इंस्पायर किया जाए या जब वह वाइब्रेशन की
हाई लेवल पर काम कर रहा हो तो मन बाहरी सोर्स के
द्वारा इस तक पहुँचने वाले विचारों को रिसीव करने के
प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है। वाइब्रेशन की हाई रेट
पॉजिटिव भावनाओ या नेगेटिव भावनाओ द्वारा कम
होती है। भावनाओ के द्वारा विचार के वाइब्रेशन को
बढ़ाया जा सकता है।
जहाँ तक गहराई व इंस्पायरिंग शक्ति का संबंध है,
सेक्स का भाव इंसान की भावनाओ की लिस्ट में सबसे
टॉप पर रहता है। वह मन जो सेक्स के भाव द्वारा
इंस्पायर होता है, बेहद तेज़ स्पीड से काम करता है,
जबकि इस इंस्पिरेशन की कमी में यह उतनी स्पीड से
काम नहीं कर पाता।
सेक्स ट्रांसफॉर्मेशन के नतीजे के कारण विचार के
लेवल इतने बढ़ जाते हैं कि क्रिएटिव इमेजिनेशन
विचारों के प्रति हाइली सेंसिटिव हो जाती है। दूसरी
ओर, जब मन तेज़ स्पीड पर काम कर रहा हो तो यह
न सिर्फ दूसरे मन द्वारा भेजे जा रहे विचारों को अट्रैक्ट
करता है बल्कि यह अपने खुद के विचारों को भी वह
भावना देता है।
सब कॉन्शियस माइंड, मन का “सेंडिंग स्टेशन’ है,
जिसके द्वारा विचार के वाइब्रेशन भेजे जाते है।
क्रिएटि इमेजिनेशन वह ‘रिसीविंग सेट ‘ है, जिसके द्वारा
विचार की एनर्जी पकड़ी जाती है।

सब कॉन्शियस माइंड, मन का “सेंडिंग स्टेशन’ है,
जिसके द्वारा विचार के वाइब्रेशन भेजे जाते है।
क्रिएटि इमेजिनेशन वह ‘रिसीविंग सेट ‘ है, जिसके द्वारा
विचार की एनर्जी पकड़ी जाती है।
सब कॉन्शियस माइंड के इम्पोर्टेन्ट एलेमेंट्स और
क्रिएटिव इमेजिनेशन के अलावा आइए अब हम ऑटो
सजेशन के प्रिंसिप्ल पर विचार करे, जिसके द्वारा आप
अपने sending स्टेशन को काम में ले सकते है।
आपके मन के ‘sending’ स्टेशन की प्रोसेस
तुलनात्मक रूप से आसान है। जब आप अपने
sending स्टेशन यानी सब कॉन्शियस माइंड,
क्रिएटिव इमेजिनेशन और ऑटो सजेशन का इस्तेमाल
करना चाहे तो आपको सिर्फ तीन प्रिंसिपल्स को ही
दिमाग में रखना है और लागू करना है।
जिन motivators के द्वारा आप इन तीन प्रिंसिपल्स
को एक्शन में बदल सकते हैं, उसे describe किया
जा चुका है और वह तरीका इच्छा से शुरू होता है।
सबसे महान शक्तियों को सिर्फ़ महसूस किया जा
सकता है, उसका कोई फिजिकल स्वरुप नहीं होता,
उसे छूआ नहीं जा सकता. इसे abstract या
intangible पॉवर कहा जाता है.
कई युगों से इनसान अपनी फिजिकल सेंसेस पर बहुत
ज़्यादा डिपेंडेंट रहा है और उन्होंने अपने नॉलेज को

कई युगों से इनसान अपनी फिजिकल सेंसेस पर बहुत
ज़्यादा डिपेंडेंट रहा है और उन्होंने अपने नॉलेज को
शारीरिक या फिजिकल वस्तुओं तक सीमित कर लिया
है, जिन्हें वह देख सकता है, छू सकता है और माप
सकता है।
हम एक ऐसे युग में जा रहे हैं जो हमें अपने चारो
तरफ के संसार में abstract पॉवर के बारे में कुछ
सिखाएगा। शायद इस युग से गुजरने पर हम सीख
जाएँगे कि दूसरा स्वरुप फिजिकल स्वरुप से ज़्यादा
शक्तिशाली होता है, जिसे हम हर दिन दर्पण में देखते
है।
कई बार लोग abstract चीज़ों के बारे में हल्के फुल्के
अंदाज में बात करते हैं। उन चीजों के बारे में जिन्हें वे
अपनी पाँच सेंसेस के ज़रिए से पहचान नहीं सकते।
लेकिन हमें यह पता होना चाहिए कि हम सभी उन
शक्तियों द्वारा कंट्रोल होते हैं, जो इनविजिबल और
abstract हैं।
पूरी मानव जाति में इतनी शक्ति नहीं है कि वह
समुद्र की लहरो में लिपटी हुई abstract शक्ति का
सामना करे या उसे कंट्रोल करे। इनसान में ग्रेविटी की
abstract पॉवर को कंट्रोल करने की शक्ति की बात
तो दूर, सहने की ताकत भी नहीं है, जो इस छोटी सी
धरती को यूनिवर्स में झुलाए हुए है और इनसान को
इससे गिरने से रोक रही है।

पूरी मानव जाति में इतनी शक्ति नहीं है कि वह
समुद्र की लहरो में लिपटी हुई abstract शक्ति का
सामना करे या उसे कंट्रोल करे। इनसान में ग्रेविटी की
abstract पॉवर को कंट्रोल करने की शक्ति की बात
तो दूर, सहने की ताकत भी नहीं है, जो इस छोटी सी
धरती को यूनिवर्स में झुलाए हुए है और इनसान को
इससे गिरने से रोक रही है।
इनसान पूरी तरह उस abstract शक्ति के सामने
असहाय है, जो तूफान के साथ आती है, जिस तरह वह
बिजली गिरने की abstract शक्ति की मौजूदगी में
असहाय होता है।
यह इनविजिबल और abstract चीज़ों के संबंध
में इनसान के अज्ञान का अंत नहीं है। वह धरती की
मिट्टी में लिपटी abstract पॉवर को नही समझ
पाता। वह शक्ति, जो उन्हें उसके द्वारा खाए जाने वाले
खाने का हर निवाला देती है, उसके द्वारा पहने जाने
वाला कपड़ा देती है, उसकी जेब में रखा हर डॉलर देती
है।
मन की dramatic कहानी
अंतिम लेकिन इम्पोर्टेन्ट बात इनसान अपनी डींग
हॉकने वाले कल्चर और एजुकेशन के बावजूद थॉट के
abstract पॉवर (जो abstract शक्तियों में सबसे
महान है) के बारे में बहुत कम या बिल्कुल नहीं समझ
पाता है। abstract पॉवर उसे कहते हैं जिसका कोई

मन की dramatic कहानी
अंतिम लेकिन इम्पोर्टेन्ट बात इनसान अपनी डींग
हॉकने वाले कल्चर और एजुकेशन के बावजूद थॉट के
abstract पॉवर (जो abstract शक्तियों में सबसे
महान है) के बारे में बहुत कम या बिल्कुल नहीं समझ
पाता है। abstract पॉवर उसे कहते हैं जिसका कोई
आकार नहीं होता, उसे छूआ नहीं जा सकता सिर्फ़
महसूस किया जा सकता है. वह फिजिकल माइंड
और इसकी complex मशीनरी के नेटवर्क के बारे
में बहुत कम जानता है, जिसके द्वारा विचार की शक्ति
को इसके फिजिकल रूप में बदला जाता है. लेकिन
अब वह एक ऐसे युग में जा रहा है, जिसमे इस टॉपिक
पर उन्हें ज्ञान मिल सकेगा। साइंटिस्ट्स का ध्यान अब
उस आश्चर्यजनक चीज़ के स्टडी की ओर गया है जिसे
मन कहा जाता है। हालाँकि अभी वे अपने स्टडी की
शुरूआती दौर में है, लेकिन उन्होंने यह जान लिया
है कि इंसान के मन का सेंट्रल स्विचबोर्ड, उन लाइनों
की संख्या जो मन के सेल्स को एक दूसरे से जोड़ती
है संख्या में उतनी हैं, जितनी एक बाद पंद्रह ज़ीरो को
जोड़ने के बाद आती है।
यह नंबर इतना अश्चर्यजनक और बड़ा है। शिकागो
यूनिवर्सिटी के डॉ. सी जुडूसन हेरिक कहते हैं, कि
लाइट year के सैकड़ो मिलियन नंबर भी तुलना के
रूप से मामूली हो जाते हैं। यह बताया गया है कि
इंसान के सेरिब्रल कोर्टेक्स में 10,000,000,000 से
लेकर 14,000,000,000 नर्व सेल्स होते हैं और हम

यह नंबर इतना अश्चर्यजनक और बड़ा है। शिकागो
यूनिवर्सिटी के डॉ. सी जुडूसन हेरिक कहते हैं, कि
लाइट year के सैकड़ो मिलियन नंबर भी तुलना के
रूप से मामूली हो जाते हैं। यह बताया गया है कि
इंसान के सेरिब्रल कोर्टेक्स में 10,000,000,000 से
लेकर 14,000,000,000 नर्व सेल्स होते हैं और हम
जानते हैं कि वे एक पैटर्न में बनाए हुए हैं। यह सिस्टम
random नहीं है। ये एक आर्डर की तरह सेट होती
है।
इलेक्ट्रो-फिजियॉलजी के हाल ही में डेवलप तरीके से
मिक्रोइलेक्ट्रोड से बेहद छोटे रूप से स्थित सेल्स या
फाइबर से एक्शन करंट निकाला जता है, उन्हें रेडियो
ट्यूब द्वारा expand किया जाता है और इसमें एक
वाल्ट के one millionth हिस्से के फ़र्क रिकॉर्ड हो
सकते हैं।
यह नामुमकिन लगता है कि इतनी complex
मशीनरी के इस तरह के नेटवर्क का इकलौता
मकसद सिर्फ शरीर के डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का
काम करना ही होगा। क्या यह संभव नहीं है कि जो
सिस्टम बिलियन ब्रेन के सेल्स को एक दूसरे के साथ
कम्यूनिकेट करने का ज़रिए बनता है, वही सिस्टम दूसरे
abstract पॉवर के साथ भी कम्युनिकेशन का ज़रिए
बन सकता है?
ट रागॉर्क टास ने एक आर्टिकल ग्लिश किया। इसमें

A C
द न्यूयॉर्क टाइंस ने एक आर्टिकल पब्लिश किया। इसमें
यह छपा था कि एक बड़े वर्ल्ड स्कूल में मेंटल फील्ड
के एक एक्सपर्ट researcher आर्गनाइज्ड रिसर्च
कर रहे हैं, जिनके नतीजे इस चैप्टर और इसके बाद
के चैप्टर में बताए गए विचारों के समान ही है। उस
आर्टिकल ने डॉ. राइन और ड्यूक यूनिवर्सिटी के उनके
साथियों के काम का शोर्ट में एनालिसिस किया।
टेलीपैथी क्या बला है?
एक महीने पहले हमने इस पेज पर ड्यूक यूनिवर्सिटी
के प्रोफेसर राइन और उनके साथियों के कुछ कमाल
के रिजल्ट के बारे में बताया था, जिन्होंने टेलीपैथी या
clairvoyance की मौजूदगी को परखने के लिए
एक लाख से भी ज़्यादा टेस्ट किए। यह रिजल्ट हार्पर्स
मैगजीन में पहले दो आर्टिकल में शोर्ट में दिए गए हैं,
दूसरे में, जो अभी पब्लिश हुआ है, ऑथर ई. के. राईट
ने साइकिक पॉवर के supernatural level के
नेचर के बारे में इस स्टडी के नतीजों को शोर्ट में देने की
कोशिश करते हैं।
राइन के एक्सपेरिमेंट का रिजल्ट है कि टेलीपैथी और
clairvoyance की असल में मौजूदगी अब कुछ
साइंटिस्ट्स को बेहद संभव लगती है। इसे महसूस करने
वाले कुछ लोगों से यह पूछा गया कि वे किसी पैक
में रखे गए कुछ पत्तो के नाम बिना उन्हें देखे बताएँ।
तकरीबन एक दर्जन आदमी और औरतों ने उन पत्तो
को सही सही बताया था, जबकि ‘इस बात की कई

राइन के एक्सपेरिमेंट का रिजल्ट है कि टेलीपैथी और
clairvoyance की असल में मौजूदगी अब कुछ
साइंटिस्ट्स को बेहद संभव लगती है। इसे महसूस करने
वाले कुछ लोगों से यह पूछा गया कि वे किसी पैक
में रखे गए कुछ पत्तो के नाम बिना उन्हें देखे बताएँ।
तकरीबन एक दर्जन आदमी और औरतों ने उन पत्तो
को सही सही बताया था, जबकि ‘इस बात की कई
मिलियन संभावनों में से एक भी संभावना नहीं थी कि
उन्होंने ऐसा किस्मत से या इत्तेफ़ाक से किया हो।’
लेकिन उन्होंने ऐसा किया कैसे? अगर हम यह मान
लें कि ऐसी शक्तियों मौजूद होती हैं, जो पाँचों सेंसेस
के द्वारा महसूस नहीं होत