Franchising Your Business: An Owner’s Gu… Donald D. Boroian and L. Patrick Callaway. Books In Hindi Summary Pdf

Franchising Your
Business: An Owner’s Gu…
Donald D. Boroian and L. Patrick
Callaway
इंट्रोडक्शन

क्या आपके बचपन की यादों में फ़ास्ट फूड और जंक फूड खाना शामिल था? क्या आप कभी ये सोचकर
हैरान हुए कि क्यों हमे करीब-करीब हर शहर में एक McDonald’s तो जरूर मिल जाता है ? बिजनेस फ्रेंचाईज़ी इस सेंचुरी का सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है और हो भी क्यों ना, ये convenient है और आपके बिज़नेस को ग्रो करने के लिए बहुत सी अपोर्चुनिटी देता है. लेकिन यहाँ हम आपसे एक चीज़ कहना चाहेंगे, किसी भी तरह के फ्रेंचाईज़ी बिज़नेस को खोलने से पहले आपको बहुत सारे फैक्टर भी चेक करने होंगे.
ये समरी आपको बताएगी कि आप फ्रैंचाईज़ी बिज़नेस खोलने के लिए फिट हो या नहीं और आपका
बिज़नेस आईडिया फ्रैंचाईज़ेबल है भी या नहीं ? क्या मैंचाईजिंग वाकई में इतना आसान होता है जहाँ हम
पहले से जमे जमाए बिज़नेस के नाम का फायदा उठा सके ? तो आइए इस समरी के साथ आगे बढ़ते हैं, जो आपको एक सक्सेसफुल फँचाईज़ी चलाने के बेसिक रूल्स और ट्रिक्स सिखाएगी.

The Rules Have Changed
इंसान ने सिविलाईजेशन के दौरान बड़ा लंबा सफ़र तय किया है, गुफ़ाओं में रहने से लेकर आज के
लेटेस्ट टेक्नोलोजी वाले दौर तक इंसान ने काफी कुछ देखा और सीखा है. सच तो ये है कि जब से दुनिया बनी है, इसमें लगातार बदलाव आते रहे है और आगे भी आते रहेंगे और ये बदलाव खासतौर पर बिज़नेस की
दुनिया के लिए काफी इम्पोर्टेट है. आपको याद होगा, एक वक़्त था जब डिपार्टमेंट स्टोर काफी हिट हुए थे,
फिर उनके बाद आए शॉपिंग मॉल जहाँ आज ज्यादातर लोग शॉपिंग करना पसंद करते है क्योंकि सारी
चीज़े उन्हें एक ही छत के नीचे मिल जाती है. पहले अलग-अलग तरह के रेस्टोरेंट हुआ करते थे पर आज
मल्टीपल फ़ास्ट फूड चेंस का जमाना है. रेस्टोरेंट फ्रैंचाईजिंग इस सेंचुरी के सबसे बेस्ट फ्रेंड में गिनी जा सकती है. ये उन लोगों के लिए एक आईडियल सेटअप है जो खुद का बिज़नेस करना चाहते है. साथ ही ये काफी convenient भी है. जैसे मान लो आपको किसी पोपुलर रेस्टोरेंट की फैंचाईज़ी लेनी है तो आपको किसी कंपनी स्ट्रक्चर की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि ये पोपुलर रेस्टोरेंट पहले से ही एस्टेबिलिश्ड यानी जमा जमाया है. आपको बस उनका सिस्टम, प्रोसीजर, ड्रेस कोड और एम्प्लोई मैनुअल फॉलो करना है.
लेकिन प्रॉब्लम तब आती है जब आपको ये चूज़ ये करना पड़े कि फ्रेंचाईज़ी के लिए कौन सा बिज़नेस
सही रहेगा. कोई बिजनेस सक्सेसफल है तो इसका ये मतबल नहीं है कि इसकी फ्रेंचाईज़ी लेना भी उतना ही स्कसेसफुल होगा. यही वजह है कि इस बुक के दोनों ऑथर, जो लोग फ्रेंचाईजर बनना चाहते हैं, उन्हें मार्केट और ट्रेंड को observe करने के लिए कहते हैं.

अगर आप फ्रेंचाईजर बनने की सोच रहे हो तो ऐसे लोगों की केस स्टडी पढ़ो जो सक्सेसफुल फ्रैंचाइज़ी
बिज़नेस चला रहे है. आप देखोगे कि सिर्फ गिने-चुने लोग ही इस टाइप के बिज़नेस में सक्सेसफुल होते है.
आपको ये देखना होगा कि क्या चीज़ उनके फेवर में है और क्या नहीं ? अपनी फ्रेंचाईज़ी को आगे बढ़ाने के
लिए इन लोगों ने क्या-क्या कदम उठाए थे ? वैसे अगर देखा जाए तो ये सब पता करना बेहद मुश्किल काम है क्योंकि हो सकता है पहले के वक़्त में जो चीज़े चलती थी, वो आज ना चले. हो सकता है जो पहले फ्रेंचाईजिंग में नहीं चलता था, वो आज की डेट में हिट फ़ॉर्मूला हो क्योंकि इस तरह के बदलाव तो अनप्रेडिक्टेबल है. टाइम और सिचुएशन के हिसाब से बिज़नेस के रूल्स भी चेंज हो जाते है. खैर, इसके
बावजूद ‘3 साइकल्स ऑफ़ बिज़नेस’ की नॉलेज आपको ये समझने में हेल्प करेगी कि फ्रेंचाईजिंग
आपके लिए बनी है या नहीं. थ्री साइकल्स वो है जो किसी भी फ्रेंचाईज़ी ऑपरेशन की सक्सेस को अफेक्ट करती है. पहला है expansion cycle. ये फ्रेंचाईज़ी बिज़नेस को स्टार्ट करने के लिए आईडियल टाइम है क्योंकि जब इकोनॉमी सही चल रही होती है तो कंटी की ओवरआल वेल्थ भी इनक्रीज होती है. पर दुःख की बात ये है कि इसके ठीक बाद आता है दूसरा साइकल जो है

recession cycle.
रिसेशन साइकल कब आ जाए कोई नहीं जानता. ये अनप्रेडिक्टेबल है क्योंकि इकॉनमी में उतार-चढाव
आते रहते है. ये नॉर्मल सी बात है, जिसकी वजह से फिर अनएम्प्लोईमेंट, बिज़नेस का ठप हो जाना और
बजट में कटौती करना जैसी चीज़े होती है. तीसरा साइकल है recovery cycle. ये साईकल धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ता है जहां एक बार फिर से एक्सपेंशन साइकल की शुरुआअत हो जाती है. एक तरह से ये एक्सपेंशन और रिसेशन साइकल के बीच की चीज़ है. आपके अंदर observe करने की पॉवर तो होनी
चाहिए साथ ही एक और क्वालिटी भी जरूरी है. एक फ्रेंचाईजी ओनर बनना उतना ईज़ी भी नहीं है जितना
कि लगता है. आपको हर वक्त फ्लेक्सीबल रहना होगा. एक सिस्टम पहले से चल रहा है तो इसका ये मतलब नहीं है कि हमेशा ऐसा ही चलेगा. इसलिए आपको मॉनिटर, ईवैल्यूएट, ऐनालाईज़, चेंज और एडाप्ट करना सीखना होगा. ये दुनिया कभी एक जैसी नहीं रहती तो आपको भी कदम से कदम मिलाकर चलना सीखना होगा. तो लगातार चेक करते रहो कि इकॉनमी कैसी चल रही है, लेटेस्ट ट्रेंड पर नजर रखो और जिस इंडस्ट्री में आप हो, उसके बारे में अपडेटेड रहो और सबसे इम्पोर्टेट चीज़, अपने बिज़नेस को कभी कॉम्पटीशन में पीछे मत रहने दो. इसका क्या मतलब है? यानि अपने कॉम्पटीटर्स जैसे मत बनो, क्योंकि बॉस्टन चिकन ने भी यही किया था.

बॉस्टन चिकन अपने रोस्टेड चिकन के लिए फेमस है. वो लोग इसे कॉर्न, बेक्ड बीन्स और salad के
साथ सर्व करते है. उनका मेन्यू बेहद सिंपल है इसलिए उन्हें ज्यादा एम्प्लोईज़ की जरूरत भी नहीं पडती.
उनका बिजेनस अच्छा चल रहा था. बात अगर लेबर और खाना तैयार करने की हो तो बॉस्टन चिकन
काफी सस्ता है. सब ठीक चल रहा था कि तभी McDonald’s एक बिल्कुल अलग बिज़नेस के साथ
मार्केट में उतरा और बॉस्टन चिकन का राइवल नंबर वन बन बैठा, McDonald’s का साइड बिज़नेस Hearth Express, भी बॉस्टन चिकन जैसा ही सेम प्रोडक्ट ऑफर करता था. Hearth Express एक्सप्रेस भी रोस्टेड चिकन बेच रहा था पर साथ में मीट लोफ और बेक्ड हैम भी देता था. इससे बॉस्टन चिकन टेंशन में
आ गया. उन्होंने भी कॉम्पटीशन के चक्कर में अपने मेन्यू में मीट लोफ और बेक्ड हैम एड कर दिए लेकिन
ये एक बहुत बड़ी गलती साबित हुई. उनका नया मेन्यू लोगों को पसंद नहीं आया. बॉस्टन चिकन की
पोपुलेरीटी कम होती चली गई और प्रॉफिट इतना कम होने लगा था कि जरूरी खर्चे निकालना भी मुश्किल
हो गया . ऊपर से बॉस्टन चिकन को इस कॉम्पटीशन के चक्कर में मिलियन डॉलर का अलग से नुकसान उठाना पड़ा.

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The Way to Get Left Behind

बिजनेस ओनर्स फ्रेंचाईजिंग को आगे बढ़ने और ग्रो करने के लिए एक अपोयूँनिटी की तरह देखते है.
अगर बिज़नेस में अच्छा प्रॉफिट हो रहा हो तो क्यों ना उसे आगे बढाया जाए ? बेशक ये बड़ा डिसीजन लेने से
पहले इस पर गहराई से सोचने की भी उतनी ही जरूरत है, क्योंकि एक फ्रेंचाईज़ी बिज़नेस उसके ओनर के लिए किसी ज़िम्मेदारी से कम नहीं होता है. इसलिए इसके हर फैक्टर पर गौर करना जरूरी हो जाता है.
सबसे पहला सवाल तो ये है कि क्या फ्रेंचाईजिंग का आईडिया सही है या नहीं ? क्या होगा अगर कोई
और भी इस बारे में पहले से सोच रहा हो और उसका बिज़नेस आपके जैसा ही हो? क्या आपके पास इतना
पैसा है कि आप एक फ्रेंचाईज़ी लॉन्च कर सके ? ऑथर कहते है कि जब आपने इस समरी को
पढना स्टार्ट किया था, तभी आपने फैसला कर लिया था. इसलिए कोंग्रेचुलेशन, आप एक फ्रेंचाईज़ी
बिज़नेस करने की शुरुवात करने जा रहे हो. लेकिन आप फ्रेंचाईजिंग कैसे करोगे ये डिपेंड करता है कि
आप कौन हो, आपकी एबिलिटी क्या है और आपके एक्सपीरिएंस क्या है? दस बक के ऑथर डोनाल्ड और पैटिक फेंचाईजिंग बिज़नेस पर सेमीनार करते रहते है. लेकिन वो भी इसी नतीजे पर पहुंचे है कि कोई भी दो बिज़नेस सेम नहीं हो सकते क्योंकि हर ओनर् का एक अलग बैकग्राउंड होता है. किसी के पास फ्रेंचाईज़ी खोलने के लिए पैसा होगा तो किसी के पास नहीं होगा, हो सकता है कोई बिज़नेस में जल्द से जल्द ग्रो करना चाहता हो तो कोई धीरे-धीरे.

ऐसे तीन बड़े कारण है जो लोग अपना बिज़नेस बढ़ाने और फ्रेंचाईज़ी सेट करने के बारे में सोचते है.
पहला है पैसे की कमी, दूसरा है क्वालिफाइड लोगों की कमी और तीसरा है जल्द से जल्द सक्सेसफुल
बनने की चाहत. हालाँकि जब आपके पास पैसे और क्वालीफाईड लोग, दोनों की कमी हो तो क्यों
एक्सपैंड करना? लेकिन ऑथर सोचते है कि आप फ्रेंचाईजिंग के ज़रिए इस प्रॉब्लम को बड़ी आसानी से
सोल्व कर सकते हो. फ्रेंचाईज़ी के लिए पैसा इकठ्ठा करने के दो तरीके है- पहला है इंटरनली कैपिटल जेनरेट करना. ये वो प्रॉफिट है जो आपको अपने बिज़नेस से मिलता है. लेकिन ये प्रॉफिट शायद आपके बैंक में नज़र ही ना आये, आप जानते है क्यों? क्योंकि आप इसे लगातार अपना बिज़नेस इम्प्रूव करने में लगा रहे है. जब आपके पास एक्स्ट्रा पैसे होते है तो आप उसे और ज्यादा एम्प्लोईज़ हायर करने के लिए या मशीन
वगैरह अपडेट करने के लिए यूज़ करते है. ये कोई बुरा आईडिया नहीं है लेकिन अगर आप फेंचाईजिंग प्लान कर रहे है तब ये बुरा आईडिया होगा. अपना प्रॉफिट खर्च करने के बजाए आपको इसे एक्सपेंशन कैपिटल के लिए सेव करना चाहिए.

दूसरा है फ्रेंचाईजिंग, जी हाँ आपने सही सुना. आप अपने फ्रेंचाईज़ी के लिए कैपिटल रेज़ करने के लिए
दूसरों को अपना बिज़नेस फ्रेंचाईज़ी के तौर पर यूज़ करने दो क्योंकि लोग आपको फ्रेंचाईज़ी फी के तौर पर
आपका नाम और बिज़नेस यूज़ करने के लिए काफी बड़ी रकम देंगे. साथ ही ये आपको सेल्स के लिए
रॉयल्टी भी दे सकते है, यानि दूसरे शब्दों में कहें तो आप उनके प्रॉफिट में अपना हिस्सा कमाने के लिए
उनसे डील करते हो. तो इन फ्रेंचाईज़ीज़ को अपने कॉम्पटीटर्स के तौर पर मत देखो. आप एग्रीमेंट कर सकते हो कि कौन सा एरिया किसका होगा. ज्यादा मैटर ये करता है कि आपके पास खुद का फ्रेंचाईज़ी शुरू करने के लिए कैपिटल होना चाहिए. सोचिये इसके बारे में. आमतौर पर फ्रेंचाईज़ी फी $35,000 होती है. अगर आपको 10 लोग भी मिलते है जो आपका बिज़नेस फ्रेंचाईज़ करना चाहते है तो आपको $350,000 का प्रॉफिट हुआ और जो फ्रेंचाईज़ करेंगे वो ज़मीन या जगह लेंगे, बिल्डिंग बनायेंगे और मशीन वगैरह खरीदेंगे. वो ये सब कुछ करेंगे और बदले में आपको एक पैसा नहीं देना होगा.

दूसरों को अपना बिज़नेस फ्रेंचाईज़ी के तौर पर यूज़ करने दो क्योंकि लोग आपको फ्रेंचाईज़ी फी के तौर पर
आपका नाम और बिज़नेस यूज़ करने के लिए काफी बड़ी रकम देंगे. साथ ही ये आपको सेल्स के लिए
रॉयल्टी भी दे सकते है, यानि दूसरे शब्दों में कहें तो आप उनके प्रॉफिट में अपना हिस्सा कमाने के लिए
उनसे डील करते हो. तो इन फ्रेंचाईज़ीज़ को अपने कॉम्पटीटर्स के तौर पर मत देखो. आप एग्रीमेंट कर सकते हो कि कौन सा एरिया किसका होगा. ज्यादा मैटर ये करता है कि आपके पास खुद का फ्रेंचाईजी शुरू करने के लिए कैपिटल होना चाहिए. जरा सोचिये इसके बारे में. आमतौर पर फ्रेंचाईज़ी फी $35,000 होती है. अगर आपको 10 लोग भी मिलते है जो आपका बिज़नेस फ्रेंचाईज़ करना चाहते है तो आपको $350,000 का प्रॉफिट हुआ और जो फ्रेंचाईज़ करेंगे वो ज़मीन या जगह लेंगे, बिल्डिंग बनायेंगे और मशीन वगैरह खरीदेंगे. वो ये सब कुछ करेंगे और बदले में आपको एक पैसा नहीं देना होगा. बेशक, ये आप खुद डिसाइड करोगे कि कौन आपके बिज़नेस का फ्रेंचाईज़ी लेगा. लेकिन आपको उन्हें अच्छे से ट्रेन करना होगा ताकि वो आपके बिज़नेस की क्वालिटी और स्टैण्डर्ड को सही तरीके से मेंटेन कर सके.

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What Franchising Is and What It’s Not

सबसे पहले तो आपको ये पता होना जरूरी है कि क्या फ्रेंचाईजिंग का पार्ट होता है और क्या नहीं . आपको ये तो पहले से पता है कि ये एक्सपेंशन कैपिटल का एक सोर्स हो सकता है और आप ये भी जानते है कि ये आपके बिज़नेस को आगे बढ़ने में मदद कर सकता है. लेकिन ऐसा और क्या है जिससे कि आप ये कहें, “ये एक फ्रेंचाईज़ी है?” तो हम आपको बताते है. कोई बिज़नेस तब फ्रेंचाईज़ी होता है जब उसमे नीचे दिए तीनो एलिमेंट देखने को मिलते है: पहला, जब आप किसी को अपना नाम और बैंड यूज़ करने दे.
दूसरा, आप उन्हें अपना सिस्टम या प्रोगाम यूज़ करने दे और
तीसरा, जब आप बदले में फीस या रॉयल्टी लेते है. ये तीनो एलिमेंट प्रेजेंट होने चाहिए तभी आप उसे
फ्रेंचाईजी बोल सकते है. अगर एक भी एलिमेंट एब्सेंट है तो वो फ्रेंचाईज़ी नहीं हो सकता. वो सिर्फ एक
लाईसेंसर होता है. जैसे कि कोका-कोला एक बडी और फेमस कंपनी है. अब कोका कोला किसी और कंपनी को टी-शर्ट या किसी और चीज़ पर अपना लोगो प्रिंट करने का लाईसेन्स दे सकता है और कंपनी या कोई शख्स कोका कोला को इसके बदले में पे करेगा. इसे हम फ्रेंचाईज़ी नहीं बोल सकते क्योंकि इसमें एक एलिमेंट मिसिंग है. क्योंकि ना तो कोका-कोला ने उन्हें अपना नाम यूज़ करने का राईट दिया है, ना ही उन्हें कोला बनाने का सीक्रेट इंग्रीडीएंट बताया है और ना ही अपना सिस्टम ऑफ़ ऑपरेशन शेयर किया है.

फ्रेंचाईजिंग में कई सारे रेगुलेशन और requirement होते हैं. यही वजह है कि लोग अक्सर लाईसेंसिंग चूज़ करते है. लेकिन अपने बिज़नेस को फ्रेंचाईज़ करने के बहुत से फायदे भी है. इससे आप एक फेमस ब्रैड बन जाते हो और फ्रेंचाईज़ी ये भी श्योर करती है कि क्वालिटी कण्ट्रोल ठीक से हो रहा हो. लास्ट में फ्रेंचाईज़ आपके लिए इनकम का एक अच्छा और लॉन्ग टर्म जरिया बन सकता है. फ्रेंचाईजिंग की दो कैटेगरी होती है: start-up और conversion स्टार्ट-अप फ्रेंचाईज़ी उन्हें कहते है जब किसी एस्टेबिलिश्ड यानी जमे जमाए बिज़नेस को आगे बढाने के लिए किसी दूसरे लोकेशन और बिल्डिंग में एक नया स्टार्ट-अप खोला जाता है. कई सारे स्टार्ट-अप फ्रेंचाईजी बिज़नेस होते है, और ज़्यादातर फ्रेंचाईज़र यानि बिज़नेस ओनर नए फ्रेंचाईज़ी को ट्रेनिंग देता है यानि उन्हें जो फ्रेंचाईज़ी बिज़नेस कर रहे है. फ्रेंचाईज़ी और उनके एम्प्लोई को बिज़नेस चलाने की ट्रेनिंग देनी पडती है. ये बेहद इम्पोर्टेट है ताकि क्वालिटी कण्ट्रोल की गारंटी बनी रहे.

conversion फ्रेंचाईज़ी वो होता है जब एक बिज़नेस दूसरे बिज़नेस को खरीदता है. फ्रेंचाईज़ी बेसिकली
बिज़नेस को absorb कर लेता है और खुद का नाम यूज़ करता है. जैसे कि कई सारे हार्डवेयर स्टोर्स अपना
खुद का साईंन हटाकर किसी फेमस ब्रैड का साईंन लगा लेते है. खुद उनका ब्रैंड नेम कहीं पर छोटे से फॉण्ट में लिखा होता है. स्टार्ट-अप और conversion दोनों में ही तीन तरह के फ्रेंचाईज़ी होते है- सबसे पहले तो इंडीविजुअल फ्रेंचाईज़ी है. इसका मतलब है कि फ्रेंचाईज़ी सिर्फ एक ही इंडीविजुअल यानी शख्स को बेचा गया है. सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि ये इस शर्त पर बेचा जाता है कि फ्रेंचाईजी सिर्फ एक लोकेशन और जगह तक सीमित रहेगा. जैसे कि मान लो आप किसी रेस्टोरेंट की फ्रेंचाईज़ी ले रहे हो तो आपको इसे एक स्पेशिफिक लोकेशन पर ही ऑपरेट करना होगा. पहले ये श्योर कर लो कि बिज़नेस के लिए वो फिक्स्ड
लोकेशन अच्छी हो यानि अपने पोटेंशियल कस्टमर्स की उम्र पर गौर करो, क्या आप ऐसी जगह टॉय स्टोर
खोलने की सोच सकते हो जहाँ सीनियर सिटीजन ज्यादा रहते हो?

दूसरा है मल्टीपल यूनिट फ्रेंचाईज़ी. इसे हम मल्टी-यूनिट फ्रेंचाईज़ी भी कहते है. इस तरह की फ्रेंचाईज़ी को एक स्पेशिफिक एरिया दिया जाता है और आप कितने यूनिट ओपन कर सकते हो ये बताया जाता
है. ये फ्रेंचाईजर के लिए अच्छी डील साबित होती है. जैसे मान लो आप $35,000 फ्रेंचाईज़ी फीस लेते
हो. क्योंकि फ्रेंचाईज़ी मल्टीपल फ्रेंचाईज़ी ले रहा है तो फ्रेंचाईज़र उसे पहले स्टोर के लिए डिसकाउंट देगा
और इसके लिए फ्रेंचाईज़ी को सिर्फ $30,000 खर्च करने होंगे. मान लो फ्रेंचाईज़र 10 यूनिट लेता है तो
बिज़नेस ओनर को $300,000 की अर्निंग होगी. थर्ड है sub फ्रेंचाईजिंग. ये तब होता है जब फ्रेंचाईज़र
अपने मल्टीपल फ्रेंचाईज़ी अलग-अलग लोगों या ग्रुप को बेचता है. जैसे मान लो, सेंचुरी 21, एक रियल एस्टेट कंपनी है. ये लोग अपनी कुछ टेरीटोरी अलग-अलग रियल एस्टेट एजेंट को बेचते है. बदले में ये रियल एस्टेट एजेंट सेंचुरी 21 के फ्रेंचाईज़ी का पार्ट बन जाते हैं. ये एजेंट फ्रेंचाईज़ी फी को फ्रेंचाईजर के साथ बाँट लेते है. साथ ही उन्हें रॉयल्टी भी पे करनी पड़ती है.

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Creating a Franchiseable Business

क्या आपका बिज़नेस इस लायक है कि फ्रेंचाईज़ी ऑफर कर सके? आपके बिज़नेस में फ्रेंचाईज़ेबल
बनने के लिए कौन-कौन सी क्वालिटी होनी चाहिए ? ऑथर की माने तो एक बिज़नेस को फ्रेंचाईज़ेबल बनने के लिए उसके अंदर ये तीन फैक्टर होने चाहिए- पहला फैक्टर है, बिज़नेस कॉन्सेप्ट और स्ट्रक्चर.
हर बिज़नेस ओनर यही चाहता है कि उसका बिज़नेस सबसे हटकर हो, सबसे यूनीक हो. आखिर कौन नहीं
चाहेगा ? क्योंकि प्रॉफिट तो इसी में है, जब आप सबसे अलग होंगे तभी तो लोग आपकी तरफ अट्रेक्ट
होंगे. लेकिन एक चीज़ का ध्यान रखना: हर कोई कुछ हटकर करने के लिए जी-जान से कोशिश कर रहा
है और इस प्रोसेस में अक्सर लोग एक ordinary बिजेनस बनकर रह जाते है. अब जैसे फेमस फ्रेंचाईज़ी बिजनेस को ही ले लो. जैसे McDonald’s, Subway और KFC. इन सबके कॉन्सेप्ट यूनीक और ओरिजिनल तो बिल्कुल भी नहीं है पर इसके बाद भी इनके अनलिमिटेड फ्रेंचाईज़ी चल रहे है, यानि हर शहर हर स्टेट में आपको इनके आउटलेट मिल जायेंगे. तो फिर आखिर ये कैसे इतने सक्सेसफुल फ्रेंचाईज़ी बन गए? आखिर इनका सीक्रेट है क्या ?

तो जवाब छुपा है इनके ऑपरेटिंग सिस्टम में. McDonald’s का ऑपरेटिंग सिस्टम बेस्ट माना
जाता है. इनके पास हमेशा अच्छे लोकेशन और लेआउट होते है जहां आसानी से पहुंचा जा सके और
इनकी प्रोडक्ट क्वालिटी कंसिस्टेंट रहती है. साथ ही ये हमेशा फ़ास्ट सर्विस देते हैं और इनके एडवरटीजमेंट
का तो कहना ही क्या, वो हमेशा आई कैचिंग होते है. बेसिकली McDonald’s को चलाने का जो तरीका
है, वही तरीका उसे एक सक्सेसफुल फ्रेंचाईज़ी बनाता है. तो अगर आप भी अपने बिज़नेस को फ्रेंचाईज़ी
बनाना चाहते हो तो सिर्फ उसके ऑपरेटिंग सिस्टम पर फोकस करो नाकि कांसेप्ट और स्ट्रक्चर को यूनीक
बनाने पर. सेकंड फैक्टर है, बिज़नेस की मार्केटेबिलिटी. ज्यादातर फ्रेंचाईज़ेबल बिजनेस की शुरुवात बेहद छोटी होती है. अक्सर बिज़नेस नया होता है और उसकी एक ही यूनिट होती है. लेकिन छोटे बिजनेस को बड़े
बिजनेस जैसे McDonald’s से डरने की जरूरत नहीं है. हां, बड़ी फ्रेंचाईज़ी के पास अच्छी-खासी रीसोर्स और ताकत होती है. लेकिन एक छोटे से, एक यूनिट वाले बिज़नेस को भी सक्सेसफुल बनाया जा सकता है. इसके लिए बिज़नेस ओनर में इतना पैशन और डिटरमिनेशन होना चाहिए कि वो अपने बिजनेस को फ्रेंचाईज़ेबल बना सके.

तो आप ये कैसे तय करोगे कि आपका बिज़नेस मार्केटेबल है या नहीं? खुद से पूछो, जो प्रोडक्ट या
सर्विस आप दे रहे हो, लोगों को उसकी जरूरत है भी या नहीं ? बड़ी कंपनी जैसे McDonald’s टेस्ट
मार्केटिंग करते है और ग्रुप्स पर फ़ोकस करते है. वो लोगों से अपना पिज़्ज़ा या अपने बर्गर की
अलग-अलग वैरायटी को टेस्ट करने के लिए ऑफर करते हैं और लोगों से फीडबैक लेते है. अगर
लोगों को कोई नया फ्लेवर पसंद नहीं आता है तो McDonald’s उसे कभी लॉन्च नहीं करता है. अगर
लोगों को उनका नया प्रोडक्ट पसंद आता है तो ही उसे मेन्यू में एड किया जाता है. आप भी ये टेस्ट कुछ
लोगों पर कर सकते हो. जो प्रोडक्ट या सर्विस आप दे रहे हो, उस पर लोगों की राय पूछो. थर्ड फैक्टर है, फ्रेंचाईज़र या ओनर की एबिलिटी और कमिटमेंट. क्या आपको लगता है कि आप अच्छे बिज़नेस ओनर हो? आप शायद ऐसा सोचते होंगे. लेकिन जरूरी नहीं है कि आप अच्छे फ्रेंचाईज़र भी हो. हो सकता है कि आपने अकेले अपने दम पर एक बड़ा बिज़नेस खड़ा किया हो लेकिन सेम चीज़ फ्रेंचाईज़ी में नहीं कही जा सकती.
जैसा हमने पहले भी बताया है, एक फ्रेंचाईज़र बनने के लिए आपके अंदर कोचिंग स्किल्स होनी चाहिए.
आपको अपनी फ्रेंचाईज़ी को ट्रेन करना पड़ेगा ताकि वो फ्रेंचाईज़ी सही तरीके से चला सके क्योंकि उनकी सक्सेस काफी हद तक आपकी कोचिंग और ट्रेनिंग पर डिपेंड करती है.

साथी ही आपको अपने अंदर ऑर्गेनाईजेशन स्किल्स भी डेवलप करनी होगी. जी हाँ, फ्रेंचाईज़ी का
मतलब ही है ज्यादा पैसा. लेकिन साथ में ये आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप अपने फ्रेंचाईज़ी को पूरी
ट्रेनिंग और सपोर्ट दें. मान लो, दस लोग आपके पास आकर आपके बिज़नेस की फ्रेंचाईज़ी लेना चाहते है
और आप उन सबको हाँ कह देते हो. लेकिन तभी आपको एहसास होता है कि आपको उन्हें ट्रेन भी
करना होगा. आपको उन्हें अपना सारा ऑपरेटिंग सिस्टम समझाना पड़ेगा. उन्हें गाईड करना पड़ेगा कि वो अपनी मार्केटिंग के लिए लोकेशन डिसाइड कर सके. आपको उन्हें कई सारी चीज़े समझानी पड़ेगी क्योंकि वो अब आपके बिज़नेस का एक पार्ट है इसलिए अगर वो कुछ गलत करेंगे तो आपकी रेपुटेशन पर सीधा असर होगा. तो ऐसा ना हो इसलिए आपको अपने हर फ्रेंचाईज़ी को बिज़नेस की क्वालिटी बनाये रखने में उनकी हेल्प करनी होगी.

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Determining Your Franchise Structure

फ्रेंचाईजी स्ट्रक्चर अलग-अलग तरह के हो सकते है. जो आपके बिज़नेस के नेचर के हिसाब से डिपेंड
करता है. अब जैसे कि मान लो आपका बिज़नेस ऐसा है जो आसानी से कॉपी किया जा सकता है. मान लो
आप एक रेस्टोरेंट चलाते हो जिसमें अमेरिकन फूड serve किया जाता है. तो आपका बिज़नेस कम कॉस्ट
में फ्रेंचाईज़ी में बदल सकता है. साथ ही ये ऑपरेट करने में भी आसान होगा क्योंकि आपने सिंपल मेन्यू
रखा है. तो इस टाइप के फ्रेंचाईज़ी एक मल्टी यूनिट या एरिया डेवलपमेंट फ्रेंचाईजिंग बन सकते है.
जैसा कि हमने पहले भी बताया था, फ्रेंचाईज़ी तीन तरह के होते है. इंडीविजुअल, मल्टी यूनिट या एरिया
डेवलपमेंट और सब-फ्रेंचाईजिंग. ऑथर सजेस्ट करते है कि पहली टाइम फ्रेंचाईज़ी बिज़नेस करते वक्त
इंडीविजुअल फ्रेंचाईज़ी से स्टार्ट करना ज्यादा सेफ रहेगा. अगर आप नए है तो मल्टी यूनिट या एरिया
डेवलपमेंट फ्रेंचाईज़ी आपके लिए थोड़ा कॉम्प्लेक्स हो जाएगा क्योंकि कुछ ऐसे भी फ्रेंचाईज़ी होते है जो
आपसे कई सारे सवाल पूछेगे और साथ में लॉयर और एकाउंटेंट की परी फौज लेकर आयेंगे.

तो अगर आप अभी इन इस सबके लिए तैयार नहीं है तो शुरुआत छोटे लेवल से करे. एक स्ट्रोंग फ्रेंचाईज़ी
ऑर्गेनाईजेशन बिल्ड करे ताकि जब फ्रेंचाईज़ी आपसे पूछताछ करे तो आप कॉफिडेंटली उनके सारे सवालों
के जवाब दे सके. बिजनेस ओनर्स इंडीविजुअल फ्रेंचाईज़ी से ही स्टार्ट करते है. आप इसमें जो स्ट्रेटेज़ी यूज़ करोगे वो मार्केट saturation की स्ट्रेटेजी होगी. ये तब होता है जब आप एक सेप्शिफिक मार्केट या जगह के हिसाब से अपनी फ्रेंचाईजी को फोकस देते हो. जैसे मान लो, आपने अपने डाईनर फ्रेंचाईज़ी को अभी तक अपने शहर तक ही सीमित रखा है. फिर आप चार और यूनिट स्टार्ट करते हो और ये देखते हो कि वो चलेंगे यानहीं, यहाँ सेचुरेशन का यही मतलब है. यानि अपने बिज़नेस को शहर के बाकि एरिया में फ़ैलाना.
बेशक ये भी सच है कि हर फ्रेंचाईजी एक जैसी सक्सेसफुल नहीं होगी, ऐसे में आपको ये देखना है
कि किस यूनिट से सबसे ज्यादा इनकम जेनरेट हो रही है. बस आपको इसी पर सारा फ़ोकस करना है,
एक इंडीविजूअल फ्रेंचाईज़ी का स्ट्रक्चर इस बात पर डिपेंड करता है कि बिज़नेस ओनर किस हद तक
पैशनेट है यानि अगर वो बिज़नेस को लेकर कमिटेड है तो ही वो इसे सीरियसली लेगा और उसका बिज़नेस
ग्रो करेगा. हालाँकि ये सिर्फ स्टार्टिंग पॉइंट की बाते है. इंडीविजुअल फ्रेंचाईज़ी के पास लिमिटेड कैपिटल होती  है. फ्रेंचाईज़ी के लिए ज्यादा ट्रेनिंग और सपोर्ट की भी जरूरत होती है. इसलिए फ्रेंचाईज़ी में ग्रोथ काफी स्लो पेस में होती है.

अब बात आती है मल्टी यूनिट फ्रेंचाईज़ी की तो ये सिचुएशन तब आती है जब आपका बिज़नेस किसी
स्पेशिफिक लोकेशन में पहले से ही saturated यानि फैला हुआ हो. ये सिचुएशन तब भी होती है जब एक
बिज़नेस ओनर किसी ख़ास मार्केट में अपने बिज़नेस के कई branch खोल लेता है. अब जैसे एक्जाम्पल
के लिए, किसी बिज़नेस ओनर् के पास दस KFC हो सकते है, साथ ही ये भी हो सकता है कि वो पांच
Dairy Queen’s भी चलाता हो. तो ये आईडिया बुरा नहीं है क्योंकि उसके दोनों बिज़नेस सेम मार्केट
में नहीं है यानि हम ये कह सकते है कि ये बिज़नेस ओनर अपने कस्टमर्स की अलग-अलग डिमांड पूरी
करने की कोशिश कर रहा है. कई सारे बिज़नेस ओनर ज्यादा प्रॉफिट कमाने के लिए यही स्ट्रक्चर यूज़ करते है. असल में बोले तो इसके लिए एक अलग ग्रुप होता है जिसे मल्टी यूनिट फूड सर्विस ऑपरेटर्स या MUFSO कहते है. ये लोग annual मीटिंग करते है और अपने-अपने बिज़नेस से जुडी स्ट्रेटेजी और एक्सपीरिएंस को शेयर करते है. मल्टी यूनिट फ्रेंचाईज़ी का एक स्ट्रक्चर होता है जो बिज़नेस ओनर्स को सेचुरेशन और प्रॉफिट में जल्दी ग्रोथ अचीव करने में हेल्प करता है. साथ ही आप इसमें और भी सोफिस्टीकेटेड और एक्सपीरीएन्स्ड फ्रेंचाईज़ी को अपनी तरफ अट्रेक्ट कर सकते है. इसलिए यहाँ आपको ट्रेनिंग देने की भी जरूरत नहीं पडती.

हालाँकि इस तरह का स्ट्रक्चर डेवलप करने में वक्त लगता है और साथ ही आपके पास काफी पैसा और
कनेक्शन भी होने चाहिए. सब फ्रेंचाईजी उनके लिए है, जिनके पास पूरे स्टेट में मल्टीपल फ्रेंचाईज़ी होती है. अगर आपको याद हो तो सब फ्रेंचाईजिंग उसे कहते है जब आप अपनी फ्रेंचाईज़ी अलग-अलग लोगों या ग्रुप को बेचते हो. लेकिन ये अभी भी आपकी फ्रेंचाईज़ी ही रहेगी. आपका भेंड और नाम यूज़ करने के बदले ये बस आपको रॉयल्टी पे करते है और अपने प्रॉफिट में से हिस्सा देते है. ये उस सिचुएशन में सबसे अच्छा होता है जब टाइम की कमी के चलते या फिर दूर होने की वजह से हर एक यूनिट में जाना पॉसिबल नहीं होता. हालाँकि अब क्योंकि मल्टीपल फ्रेंचाईज़ी है तो ये आपके लिए प्रॉब्लम हो सकती है और हर एक यूनिट की क्वालिटी में भी फर्क होगा. हर फ्रेंचाईज़ी के लिए आपके सेट स्टैण्डर्ड को मैच करके रखना भी काफी मुश्किल होगा या हो सकता है इनमे से हर एक को मैनेज करने में ही आप बेहद बिज़ी हो जाए. खैर, जो भी है सब फ्रेंचाईजिंग फ़ास्ट ग्रोथ भी ऑफर करती है, इससे आपको और भी ज्यादा फ्रेंचाईज़ी के ऑफ़र मिलते है.

Franchising Your
Business: An Owner’s Gu…
Donald D. Boroian and L. Patrick
Callaway
Conclusion

तो सबसे पहले आपने सीखा कि एक फ्रेंचाईज़ खोलना उतना भी आसान नहीं है जितना कि सुनने
में लगता है. फ्रेंचाईजिंग का मतलब ये नहीं है कि आपको बस एक एस्टेबिलिश्ड बिज़नेस का ऑपरेटिंग
सिस्टम फॉलो करना है बल्कि आपको पहले ये देखना होगा कि आपका बिज़नेस फ्रेंचाईजी बिज़नेस बनने
लायक है या नहीं. दूसरी चीज़, आपने उन कारणों के बारे में जाना कि क्यों लोग फ्रेंचाईज़ी बिज़नेस के बारे में सोचते है. वो इसलिए क्योंकि उनके पास कैपिटल और रीसोर्स कम होते है. साथ ही कई बार उनके पास इतने क्वालीफाईड लोग नहीं होते कि वो एक नया बिज़नेस स्टार्ट कर सके. यही वजह है कि लोग दूसरे के बिज़नेस कीफैंचाईज़ी लेना पसंद करते है. सबसे इम्पोर्टेन्ट तो ये है कि लोग ग्रो करना चाहते है, वो जल्द से जल्द तरक्की हासिल करना चाहते है क्योंकि अगर सही तरीके से किया जाए तो फ्रेंचाजिंग बिज़नेस से अच्छा-खासा प्रॉफिट कमाया जा सकता है.

तीसरी चीज़, आपने उन तीन element के बारे में पढ़ा जो किसी बिज़नेस को फ्रेंचाईज़ी बनाते है तो-
नंबर 1 जब आप किसी और को अपना नाम यूज़ करने देते हो.
नंबर 2 जब आप उन्हें अपना ऑपरेटिंग सिस्टम भी यूज़ करने देते हो और
नंबर 3 जब आप उनसे फ्रेंचाईजिंग फी या रॉयलटी लेते हो. तो अगर इनमे से एक भी एलिमेंट मिसिंग है तो ये फ्रेंचाईजिंग नहीं हो सकता. चौथी चीज़, आपने ये जाना कि फ्रैंचाजिंग बिज़नेस की भी दो कैटेगरी होती है. एक होता है स्टार्ट-अप और दूसरा होता है कन्वर्जन. स्टार्ट-अप तब होता है जब आप किसी एक्जिस्टिंग बिज़नेस के लिए कोई नया स्टोर खोलते है और कन्वर्जन तब होता है जब एक एक्जिस्टिंग बिज़नेस को फ्रेंचाईज़ी अब्ज़ोर्ब करती है यानि दोनों जब मर्ज़ होकर एक कंपनी बन जाते हैं. पांचवी चीज़, चाहे कोई फ्रेंचाईजी स्टार्ट-अप हो या कन्वर्जन, उसके भी तीन टाइप होते है- इंडिविजुअल, मल्टी यूनिट और सब फ्रेंचाईजिंग. टाइप चूज़ करते वक्त फ्रेंचाईजी स्ट्रक्चर को ध्यान में रखना बेस्ट होता है.

छठी चीज़, ये जानना बेहद जरूरी है कि आपका बिज़नेस फ्रेंचाईज़ी बन सकता है या नहीं इसे तभी
कंसीडर करो जब आपको लगे कि इसका ऑपरेटिंग सिस्टम अच्छा है और ये आसानी से कॉपी किया जा
सकता हो. अगली चीज़, ये देखो कि आपका बिज़नेस मार्केटेबल है या नहीं. जब आप अपने प्रोडक्ट के बारे
में डिसक्राइब करोगे तो क्या लोग फौरन खरीदने को तैयार हो जायेंगे ? और फाईनली ये कंसीडर करो कि
क्या आप एक कमिटेड फ्रेंचाईज़र हो या नहीं? क्या आप फ्यूचर फ्रेंचाईज़ी को ट्रेन और कोच करने के लिए
रेडी हो ? सांतवी चीज़, आपने फ्रेंचाईजी स्ट्रक्चर के बारे में पढ़ा. तो इंडीविजूअल फ्रेंचाईजी के साथ बिज़नेस स्टार्ट करना बेस्ट ऑप्शन है क्योंकि ये स्ट्रक्चर शुरुआत करने वालों के लिए है. हालाँकि इसमें आपको ज्यादा सपोर्ट और ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी पर फिर भी लिमिटेड कैपिटल के साथ इसे किया जा सकता है. यहाँ आप कुछ खोते है तो कुछ पाते भी है. मल्टी यूनिट फ्रेंचाईजी और सब-फ्रेंचाईज़ीइंग स्ट्रक्चर
ज्यादा कॉम्प्लेक्स होते है. आप ये ऑप्शन तब ले सकते है जब फ्रेंचाईजिंग बिज़नेस में आपको कई सालों का एक्सपीरिएंस हो जाए.

इस समरी में जितने भी लेसन आपने जाने है, वो ज्यादातर सक्सेसफुल और फेल्ड फ्रेंचाईज़ी को
observe करने के बाद ही एड किए गए है. इसलिए एक तरह से ये आपके लिए एक एडवांटेज की तरह है
कि आप उन गलतियों को दोहराने से बच जायेंगे जो पहले के फ्रेंचाईजर्स ने की थी. ये सारे लेसन एक गाईड
की तरह है, इन्हें अपने दिमाग में बैठा लीजिए. अपने बिज़नेस के साथ अपना माइंड भी ग्रो करना जरूरी है.
जब भी आपको कंसल्ट करने की जरूरत पड़े तो आप इस समरी को सुन सकते हो. इसमें आपको वो सारी
चीज़े मिलेंगी जो आपके फ्रेंचाईज़ी बिज़नेस को सक्सेस की ऊँचाईयों पर ले जा सकती है.

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