EXECUTION -The Discipline of Getting Thi… Larry Bossidy And Ram Charan Books In Hindi Summary

EXECUTION -The
Discipline of Getting Thi…
Larry Bossidy And Ram Charan
इंट्रोडक्शन
क्या आप अपना बिज़नस बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन आपको मालूम नहीं कैसे? इस समरी में, लैरी बॉसिडी ने एक सक्सेसफुल बिज़नस चलाने के लिए सभी ज़रूरी स्टेप्स बताए हैं. इसमें आप अपने सोचने के तरीके को बदलना सीखेंगे और एक लीडर की तरह सोचने की मेंटालिटी बना पाएंगे. इस मेंटालिटी से आप अपने एम्पलॉईस पर भरोसा करना और उनके वर्कफ्लो में इम्प्रूवमेंट लाना सीखेंगे. आप अपने रिसोर्सेस को मैनेज करना और सही स्ट्रेटेजिक प्लान्स बनाना भी सीखेंगे. आप यह भी जानेंगे कि कैसे इन प्लान्स को एक्ज़िक्युट करने के लिए लोगों को चुने. यह समरी आपको एक सक्सेसफुल बिज़नस के लिए
सही कल्चर लाना और इसे अपनी कंपनी के सिस्टम में शामिल करना सिखाएगी.

Building Block One: The Leader’s Seven Essential Behaviors

क्या आप अपनी बिज़नस के बॉस हैं लेकिन हैंड्स-ऑन-माइक्रोमैनेजर बनने से डरते हैं? माइक्रोमैनेजर वह होता है जो अपने एम्पलॉईस को काम सौंपता है और उनके आसपास घूमकर उनसे काम करवाता हैं. तो, क्या आपको लगता हैं कि आप अपने एम्पलॉईस की क्रिएटिविटी को ब्लॉक कर रहे हैं? अगर आपको कन्फ्यूज़न हैं कि एक एग्जेक्यूशन लीडर आखिर करता क्या हैं, तो अब हम बात करेंगे उन सात आदतों के बारे में जिन्हें आपको अपनाना चाहिए.

पहला, आपको अपने एम्पलॉईस के कांटेक्ट रहने की ज़रूरत हैं. आपके एम्पलॉईस के पास आपके
बिज़नस के बारे में सभी इनफार्मेशन होती हैं. आप हर जगह मौजूद नहीं हो सकते इसलिए आप तक सिर्फ
वही डेटा पहुंचते हैं, जिन्हें आपके एम्पलॉईस अपने नज़रिए से फ़िल्टर और पास कर आपको भेजते हैं.
एक लीडर के तौर पर, आपका main काम हैं अपने बिज़नस के बारे में हर डिटेल को जानना और आपको
जो भी डेटा दिखाई देता हैं, उसके हिसाब से सही फैसला लेना.

दूसरा, एक सक्सेसफुल बिज़नस को चलाने के लिए आपको रीयलिस्टिक होना चाहिए. ज्यादातर लोग अपने आसपास हो रही बातों से दूर रहते हैं. वे क्या कर रहे हैं नहीं जानते, इस सच्चाई को कबूल करने के बजाय वे गलतियों को छुपाना और हकीकत को अनदेखा करना पसंद करते हैं लेकिन आपको अपनी कंपनी में जो गलतियां को छुपाना और हकीकत को अनदेखा करना पसंद करते हैं. लेकिन, आपको अपनी कंपनी में जो कुछ चल रहा हैं, उसे खुद देखना चाहिए.

तीसरा, सक्सेसफुल लीडर्स को उन चुने हुए क्लियर गोल्स पर फोकस रखना चाहिए जिन्हें हर कोई
समझ सकें. तीन या चार main गोल्स पर फोकस करने से आपके पास जो भी रेसोर्सेस हैं, उनसे आप
हाई क्वालिटी रिजल्ट हासिल कर सकते हैं. आपके ऑर्गनाइज़ेशन के एम्पलॉईस को कम लेकिन ऐसे टास्क के बारे में क्लियर instruction मिलनी चाहिए जो सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट हैं ताकि वे आसानी से उन्हें
फॉलो कर पाएं और ज़्यादा ज़िम्मेदारियों के बोझ के नीचे खो न जाएँ. एक कामयाब लीडर सिंपलिसिटी
ढूंढ़ते हैं और साफ़-साफ़ बात करते हैं ताकि हर कोई उसे समझ सके.

चौथा, अगर आपके एम्पलॉईस आपके गोल्स को सीरियसली नहीं लेते हैं, तो वे बेकार हैं. प्लान को सही
तरिके से फॉलो न करना, और उन्हें एक्ज़िक्युट न करना बिज़नस को fail कर देता हैं.

पांचवां, अगर आप चाहते हैं कि आपके एम्पलॉईस ज़्यादा प्रोडक्टिव हो, तो आपको उन्हें लगातार रिवॉर्ड
देते रहना चाहिए. कई ऑर्गनाइज़ेशन ऐसा नहीं करते हैं. वे अच्छा काम करने वाले और न करने वालों के
बीच कोई फ़र्क नहीं करते. इस बात को नज़रअंदाज़ करने पर यह एम्पलॉईस के काम करने के पैशन को
कम कर देती हैं.   

छठा, एक लीडर के तौर पर आप जहाँ तक पहुंचे हैं, वहां पहुंचने के लिए आपने बहुत नॉलेज और एक्सपीरियंस हासिल किया हैं. अपने ऑर्गनाइज़ेशन में आपकी एक ज़िम्मेदारी इन एक्सपीरियंस को अपने एम्पलॉईस के साथ बांटना भी हैं. इस तरह आप अपने बिज़नस के अंदर के हरेक शख्स के एक्सपीरियंस को फैला सकते हैं और, इससे आप पूरे ऑर्गनाइज़ेशन की काबिलियत को डेवलप कर पाएँगे. आखिर में, सबको लगता हैं कि एक ऑर्गनाइज़ेशन का लीडर बनने के लिए आपको एक कड़क पर्सनालिटी रखने की ज़रूरत पड़ती हैं. लेकिन असलियत में, एक लीडर को काफी इमोशनल इंटेलिजेंस की ज़रूरत होती हैं. बस, उन्हें खुद के साथ और अपने एम्पलॉईस के साथ ईमानदार होना चाहिए. एक सक्सेसफुल लीडर बनने के लिए, आपको इमोशनली स्टेबल होने की ज़रूरत हैं ताकि आप अपने एम्पलॉईस के अलग-अलग नज़रिए और पर्सनल बैकग्राउंड को सह सकें.

हमेशा याद रखिए कि एक लीडर का बर्ताव पूरे ऑर्गनाइज़ेशन का बर्ताव माना जाता हैं. इसलिए, अपने
ईगो, अपने घमंड को कंट्रोल करना सीखना चाहिए और अपने बिज़नेस प्रॉब्लम की हकीकत को कबूल करना चाहिए. साथ ही, आपको यह भी मानना चाहिए कि आपको सब कुछ नहीं आता हैं.
और, आपको यह भी मानना होगा कि कोई भी इंसान अपना काम बिना कोई गलती के नहीं कर सकता है.

बिज़नस के अंदर के हरेक शख्स के एक्सपीरियंस को फैला सकते हैं और, इससे आप पूरे ऑर्गनाइज़ेशन की
काबिलियत को डेवलप कर पाएँगे. आखिर में, सबको लगता हैं कि एक ऑर्गनाइज़ेशन का लीडर बनने के लिए आपको एक कड़क पर्सनालिटी रखने की ज़रूरत पड़ती हैं. लेकिन असलियत में, एक लीडर को काफी इमोशनल इंटेलिजेंस की ज़रूरत होती हैं. बस, उन्हें खुद के साथ और अपने एम्पलॉईस के साथ ईमानदार होना चाहिए. एक सक्सेसफुल लीडर बनने के लिए, आपको इमोशनली स्टेबल होने की ज़रूरत हैं ताकि आप अपने एम्पलॉईस के अलग-अलग नज़रिए और पर्सनल बैकग्राउंड को सह सकें.

हमेशा याद रखिए कि एक लीडर का बर्ताव पूरे ऑर्गनाइज़ेशन का बर्ताव माना जाता हैं. इसलिए, अपने
ईगो, अपने घमंड को कंट्रोल करना सीखना चाहिए और अपने बिज़नेस प्रॉब्लम की हकीकत को कबूल करना चाहिए. साथ ही, आपको यह भी मानना चाहिए कि आपको सब कुछ नहीं आता हैं. और, आपको यह भी मानना होगा कि कोई भी अपना काम बिना कोई गलती के नहीं कर सकता है. गलतियाँ करना सीखने का एक ज़रूरी हिस्सा हैं. यहां, खुद को डेवेलप करने की आपकी इच्छा सबसे ज़रूरी बात हैं.

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Building Block Two: Creating the
Framework for The Cultural Change

जब ऑर्गनाइज़ेशन अच्छा नहीं कर रहे होते हैं, तो उनके लीडर सोचते हैं कि उन्हें अपना स्ट्रक्चर बदलना
होगा. लेकिन ज्यादातर स्ट्रक्चर को बदलने के बजाय ऑर्गनाइज़ेशन के एम्पलॉईस के कल्चर और वैल्यू
को बदलने की जरूरत पड़ती हैं. आखिर एक सही सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर हार्डवेयर बेकार होता हैं.
अगर आप अपने ऑर्गनाइज़ेशन का कल्चर बदलना चाहते हैं, तो आपको सबसे ज़रूरी बातों को बदलना
शुरू कर देना चाहिए, जो हैं एम्पलॉईस के वैल्यू. आपके एम्पलॉई आपके बिज़नस का फाउंडेशन हैं.
इसका मतलब यह हैं कि आपके बिज़नस का कल्चर सीधे एम्प्लॉईस के वैल्यू और बर्ताव से जुड़ा होता है.
जब भी स्टाफ का कोई भी मेंबर किसी भी वैल्यू को तोड़ता हैं, तो आपको उस वैल्यू को अप्लाई करने के
लिए आगे आना चाहिए. नहीं तो आपको इमोशनली कमज़ोर माना जाएगा. 

आपको अच्छे परफॉरमेंस के लिए employees को रिवार्ड देना चाहिए. एम्पलॉईस के बर्ताव को बदलने के लिए रिवार्ड और पनिशमेंट यानी सज़ा दोनों रखना चाहिए. इससे सही वैल्यू को बढ़ावा मिलेगा और एम्पलॉईस को उन्हें तोड़ने से रोकने में हेल्प करेगा. रिवार्ड सिस्टम से आप अपने एम्पलॉईस को यह बता पाएंगे कि आप अपनी कंपनी में कैसा कल्चर चाहते हैं, और यह आपको एक सक्सेसफुल लीडर के तौर पर दिखाएगा. बार-बार बातचीत करते रहने से आप अपने एम्पलॉईस को बेहतर बना पाएंगे और उन्हें दिखा पाएंगे कि आप उनकी परवाह करते हैं. इसलिए, आपको अपने ऑर्गनाइज़ेशन के कल्चर का ज़रूरी हिस्सा बनाना चाहिए.

आइए एक एग्ज़ाम्पल लेते हैं जिसमें आप कल्चर को बदलने के बारे में बातचीत कैसे कर सकते हैं, वह
सीख सकते हैं. एक मीटिंग में जिसका कोई नतीजा नहीं निकला था, सीईओ ने अपनी टीम को छह ग्रुप में
बांटा और पूछा कि अपने परफॉरमेंस को बेहतर करने के लिए उन्हें अपने कल्चर के बारे में क्या बदलना
चाहिए. सभी ग्रुप ने कुछ शब्द लिखे जो क्लियर नहीं थे जैसे: नॉन-एक्टिंग से एक्टिंग तक, फिक्सड से मूविंग तक, लोकल से ग्लोबल तक. सीईओ ने टीम से अपने जवाब को साफ़-साफ़ लिखने के लिए कहा. सभी टीम को यह मुश्किल लगा.

इसलिए, उन्होंने सभी टीम को अभी के कल्चर के बारे में पूछा कि वह कैसा हैं और उसे असल में कैसा होना
चाहिए. टीम ने माना की कि हरेक एम्प्लॉई को अपने काम की पूरी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए जिससे कल्चर में इम्प्रूवमेंट आएगी. उसके बाद लीडर ने उनसे पूछा कि उस बदलाव को कहां से शुरू होना चाहिए? उन्होंने जवाब दिया ‘इस रूम’ से. फिर लीडर ने उनसे पूछा कि क्या वे अपने जॉब की पूरी ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं और अगर उनसे कुछ भी गलती हो जाती हैं तो क्या वो सारा दोष खुद पर ले पाएंगे? इस पर उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया.
तो, लीडर ने उनसे पूछा, कि क्या ऑर्गनाइज़ेशन में कोई भी नए कल्चर को मानेगा अगर कोई लीडिंग टीम
इन्हें खुद नहीं मानता हो तो? टीम को समझ नहीं आया कि इसका क्या जवाब दें. जब लीडिंग टीम ने नए कल्चर को प्रैक्टिस करना शुरू किया, तो उन्होंने उनसे पूछा कि वे इस कल्चर को पूरी कंपनी में कैसे फैलाएंगे?
ह्यूमन रिसर्च के हेड ने जवाब दिया: सीईओ को लीडिंग टीम की ज़िम्मेदारी देकर और उस टीम के हरेक मेंबर
को अपने साथ काम कर रहे एम्पलॉईस की ज़िम्मेदारी देकर. फिर हर एम्प्लॉई को अपनी खुद की ज़िम्मेदारी देकर.
अपने काम को सही ढंग से करने वालों को रिवार्ड देने पर बाकी के सभी लोग खुद ही नए कल्चर को अपना कहां से शुरू होना चाहिए? उन्होंने जवाब दिया ‘इस रूम’ से. फिर लीडर ने उनसे पूछा कि क्या वे अपने जॉब की पूरी ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं और अगर उनसे कुछ भी गलती हो जाती हैं तो क्या वो सारा दोष खुद पर ले पाएंगे? इस पर उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया.

तो, लीडर ने उनसे पूछा, कि क्या ऑर्गनाइज़ेशन में कोई भी नए कल्चर को मानेगा अगर कोई लीडिंग टीम
इन्हें खुद नहीं मानता हो तो? टीम को समझ नहीं आया कि इसका क्या जवाब दें. जब लीडिंग टीम ने नए कल्चर को प्रैक्टिस करना शुरू किया, तो उन्होंने उनसे पूछा कि वे इस कल्चर को पूरी कंपनी में कैसे फैलाएंगे?
ह्यूमन रिसर्च के हेड ने जवाब दिया: सीईओ को लीडिंग टीम की ज़िम्मेदारी देकर और उस टीम के हरेक मेंबर
को अपने साथ काम कर रहे एम्पलॉईस की ज़िम्मेदारी देकर. फिर हर एम्प्लॉई को अपनी खुद की ज़िम्मेदारी देकर. अपने काम को सही ढंग से करने वालों को रिवार्ड देने पर बाकी के सभी लोग खुद ही नए कल्चर को अपना लेंगे. याद रखिए कि कंपनी का कल्चर उसके लीडर के बर्ताव में दिखता हैं और, अपने एम्पलॉईस को इस कल्चर को फॉलो करने के लिए एनकरेज करने का सिर्फ एक ही तरीका हैं कि आप भी इसे फॉलो करें.

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Building Block Three: Having the
Right People in the Right Place

अक्सर हम देखते हैं कि एक लीडर छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. इसके बजाय वे अपने
ऑर्गनाइज़ेशन के फ्यूचर को कंट्रोल करके और जिन चीज़ों को बदला नहीं जा सकता, उन्हें बदलने की
कोशिश करके, अपने ऑर्गनाइज़ेशन को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं. वे उन चीजों को अनदेखा करते
हैं जिन्हें वे असलियत में बदल सकते हैं जैसे कि एम्पलॉईस की क्वालिटी और सही लोगों को सही जगह
पर रखना.
लॉजिक हमें कहता हैं जो लोग जिस काम को कर पाते हैं, उन्हें ही वह काम करना चाहिए. लेकिन, ज्यादातर
हमें इसके बिलकुल उल्टा ही देखने को मिलता हैं. लोग वो काम कर नहीं पाते हैं जो उन्हें सूट करता हैं, क्योंकि लीडर अक्सर अपने एम्पलॉईस से अलग-थलग रहते हैं. उन्हें अपने एम्पलॉईस के बारे में कुछ भी पता नहीं होता हैं. इस वजह से लीडर ऐसे लोगों को चुनते हैं जिनके साथ वे कम्फ़र्टेबल होते हैं न कि उनके स्किल की वजह से. कई लीडर्स देखते हैं कि लोग गलत जॉब कर रहे हैं. लेकिन सोशल लिंक न होने और इमोशनल ताकत की कमी की वजह से वे इसके बारे में कुछ नहीं करते हैं. एक कामयाब ऑर्गनाइज़ेशन के पीछे जिन बातों का हाथ होता हैं, वह हैं एम्पलॉईस के काम करने का तरीका, नए स्किल को सीखना, और एक-दूसरे के साथ बातचीत करके बेहतर बनने के लिए एनकरेज करना.

साथ ही, एक कामयाब बिज़नस चलाने के लिए आपको फाइनेंसियल पहलू की तरह ही ह्यूमन रिसोर्स पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए. नवंबर 2007 में, इस समरी के ऑथर लैरी बॉसिडी एक दूसरे कंपनी के सीईओ के साथ एक मीटिंग कर रहे थे. इस कंपनी को भारी नुक्सान हो रहा था. उस मीटिंग में,
लैरी ने प्रॉब्लम की जड़ को पहचान लिया था और, वह था एक कमजोर मार्केटिंग लीडर.
कंपनी को 2002 में एक काबिल मार्केटिंग हेड की ज़रूरत थी नहीं तो पूरी कंपनी दिवालिया होने वाली
थी. सीईओ ने कहा कि इस पोस्ट के लिए उनकी नज़र में एक अच्छा शख्स हैं जिसकी सिफारिश उनके एक
अच्छे दोस्त ने की थी. जब लैरी ने उनसे पूछा कि वह शख्स किस तरह इस पोजीशन के लिए सही हैं, तो वह
जवाब नहीं दे पाए और उनका चेहरा लाल हो गया. लैरी ने तब सीईओ से उन तीन स्किल्स के बारे में पूछा
जो जॉब के लिए ज़रूरी हैं. कुछ वक्त बाद, सीईओ ने स्किल्स के नाम दिए. उन्होंने कहा कि वे उन लोगों को जॉब पर रखते हैं, जो लायक हैं, एडवर्टाइजिंग में अच्छे हैं, और सही प्रोडक्ट बनाते हैं.

इसके बाद, लैरी ने सीईओ से पूछा कि क्या उनके दोस्त ने जिसकी सिफारिश की हैं, उसमें ये स्किल्स
हैं? सीईओ एक मिनट के लिए चुप रहे और कहा- “अभी-अभी, मुझे एहसास हुआ हैं कि मैं असल में उसे
जानता तक नहीं.” उस कंपनी में किसी ने भी सही सवाल नहीं पूछा था. यहां तक कि सीईओ भी सबसे ईज़ी ऑप्शन के साथ जाते थे. वे कैंडिडेट को जानने की कोशिश भी नहीं करते थे, जबकि अगर वह कैंडिडेट इस काम के लायक नहीं होता तो सारा बिज़नस डूब सकता था. एक अच्छा लीडर बनने के लिए, अपने बिज़नस का फ्यूचर बनाने के लिए आपको आगे आना चाहिए. आपको इमोशनली स्ट्रॉन्ग और मुश्किल फैसले लेने के काबिल होना चाहिए. आपको अपने ऑर्गनाइज़ेशन में ऐसे लोगों को रखना चाहिए जो किसी भी सिचुएशन में काम पूरा कर सके. आपको वैसे लोग नहीं चाहिए जो सिर्फ बात करते हैं. आपको काम करने वालों की जरूरत हैं.

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The People Process: Making the Link
with Strategy and Operations

आपकी कंपनी के स्ट्रेटेजी और रिसोर्सेस से ज़्यादा ह्यूमन एलिमेंट ज़रूरी हैं क्योंकि आखिर में आपके
एम्पलॉईस ही प्लान बना और तय करते हैं कि आपका बिज़नस कैसा चल रहा हैं. यानि कि अगर आप ह्यूमन एलिमेंट को सही नहीं रखते हैं, तो आप कभी भी अपने बिज़नस को वैसा नहीं बना पाएंगे जैसा आप चाहते हैं. एक पावरफुल ह्यूमन एलिमेंट आपके ऑर्गनाइज़ेशन के लिए एक स्ट्रॉन्ग फाउंडेशन बनाने और आपको अच्छे फ्यूचर के लिए फैसले लेने में हेल्प करता हैं. आपके बिज़नस के लिए एक पावरफुल ह्यूमन
फ्रेमवर्क बनाने के लिए कोई क्लियर प्लान नहीं होता. लेकिन, अगर आप प्रोग्रेस करना चाहते हैं, तो आपको कुछ ख़ास रूल्स फॉलो करने होंगे. आपको अपनी कंपनी को चलाने के लिए मजबूत moral प्रिंसिपल, ट्रांस्पेरेन्सी, ईमानदारी और सबसे ज़रूरी- एम्प्लॉईस के बीच रिस्पेक्ट को लाना चाहिए.

आखिर, आपके एम्पलॉईस इंसान हैं, और वे किसी और इंसान की तरह ही रूल्स को मानते हैं और काम करते हैं. ऐसा फाउंडेशन न बनाकर आपकी कम्पनी को लाखों खर्चने होंगे. इसका एक एग्जाम्पल हैं एक 5 अरब डॉलर की कंपनी का सीईओ जिसने थाईलैंड में ब्रांच बनाने के लिए 250 मिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया था. यह प्लान अमेरिका के हाई टैक्स रेट और स्लो मार्केट से बचने के लिए बनाया गया था. सीईओ ने उस प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी अपने brazilian प्लांट मैनेजर को दी थी.
उसके बाद सीईओ ने ऑथर लैरी से मुलाकात की और अपने इन्वेस्टमेंट के बारे में बताया. उन्होंने लैरी को
थाईलैंड जाने के और वहाँ के प्लांट देखभाल करने के लिए कहा. लैरी ने वहां पहुंचकर देखा तो पता चला कि उस प्लांट की हालत बहुत ही खराब थी. ब्राजील के मैनेजर को समझ नहीं आया था कि उस
इन्वेस्टमेंट को कैसे ऑपरेट किया जाए और, जब प्रोडक्ट तैयार हुआ, तो उसे यह भी नहीं पता था कि
उसे कैसे बेचना हैं.

वह मैनेजर अपने देश में पूरी काबिलियत से काम कर पाता था, लेकिन, नए माहौल में, वह चीज़ों को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. वह नहीं जानता था कि नए माहौल में बिज़नस कैसे होता हैं और वहां प्रोडक्ट्स का डिस्ट्रीब्यूशन कैसे करना हैं. यह सीईओ की गलती थी जो उन्होंने उस देश के लोकल आदमी को काम पर नहीं रखा था. उन्हें ऐसे लोगों को काम पर रखना चाहिए था जो वहां के मार्केट, गवर्नमेंट के रूल्स और कस्टमर्स को समझ सके.

हरेक लीडर के पास टैलेंट रिव्यु करने की काबिलियत होनी चाहिए. यह वह काबिलियत हैं जिससे आप
आपके सामने बैठे शख्स की काबिलियत जान सकते हैं. एक लीडर के तौर पर आपको पता होना चाहिए कि
अपने ह्यूमन रिसोर्स को कहाँ इस्तेमाल करना हैं. टैलेंट रिव्यु से आप उन एम्पलॉईस को भी पहचान पाएंगे जो अच्छा परफॉरमेंस नहीं दे पा रहे हैं. इससे आपको यह जानने में हेल्प मिलती हैं कि क्या एक्शन लेना हैं.
टैलेंट रिव्यु से सभी ज़रूरी इनफार्मेशन जमा करने के बाद, आपको अपनी कंपनी के एम्पलॉईस के बारे में
मालूम पड़ेगा. आप उनके साथ इंटरैक्ट कर पाएंगे, और यह जान पाएंगे कि क्या उन्होंने अपने गोल्स को हासिल किया या नहीं. जब आपके पास यह सारी इनफार्मेशन होगी, तभी आप सही लोगों को सही काम पर लगा पाएंगे.

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The Strategy Process: Making the
Link with people and Operations

किसी भी बिज़नेस का main गोल होता हैं अपने कस्टमर्स का दिल जीतना, एक लम्बा चलने वाला
इनकम बनाना, और किसी भी तरह के कॉम्पिटिशन के खिलाफ़ अपना एक एडवांटेज पैदा करना. इन गोल्स को हासिल करने की काबिलियत ही एक ऐसा फैक्टर हैं जो आपकी कंपनी के फ्यूचर का फैसला करता हैं और यह तय करता हैं कि आपकी कम्पनी किस डायरेक्शन में आगे बढ़ेगी. यह एक सिम्पल गोल लगता हैं, फिर भी कई लीडर्स इसे हासिल नहीं कर पाते हैं. सिर्फ कुछ लीडर्स ही समझ पाते हैं कि एक मजबूत स्ट्रेटेजी बनाने के लिए, आपको सबसे पहले अपनी कंपनी के एक्शन का हिस्सा होना चाहिए. आपको इसके बारे में हर छोटी-छोटी डिटेल मालूम होनी चाहिए. ये डिटेल उन लोगों से आनी चाहिए जो इस
एक्शन का हिस्सा हैं. यह लोग वही हैं जो मार्केट और रिसोर्सेस को समझते हैं और उन्हें पता होता हैं कि वे
क्या कर सकते हैं और क्या नहीं. किसी भी लीडर को यह जानने के लिए कि क्या उनकी बिज़नस स्ट्रेटेजी अच्छी हैं या नहीं, उसे इसके बिल्डिंग ब्लॉक की पहचान करनी चाहिए. अगर बिल्डिंग लॉन्स को दिफादन किया जाता हैं तो लीटर्स को अपने ऑर्गनाइज़ेशन में चल रहे प्रॉब्लम के बारे में पता चलता हैं और वो इन्हें सुलझाने का तरीका भी निकाल लेते हैं. वह यह भी डिसाइड कर पाते हैं कि कोई स्ट्रेटेजी ठीक हैं या नहीं.

माइकल आर्मस्ट्रांग 1997 में AT&T कंपनी के सीईओ बने. कंपनी अच्छा परफॉरमेंस दे रही थी. लेकिन,
माहौल बदल रहा था. लंबी दूरी की वॉयस कॉल, जो AT&T के लिए प्रॉफिट का main सोर्स थी, सस्ती हो
रही थी. उनके बहुत से कॉम्पिटिटर इस बिज़नेस में आ रहे थे. इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट इंटरनेट और केबल
कंपनियों को ज़्यादा इम्पोर्टेस दे रहा था. आर्मस्ट्रांग ने टॉप पर बने रहने के लिए एक स्ट्रेटेजी बनाई. इस स्ट्रेटेजी के चार पॉइंट हैं. पहला, कस्टमर्स तक सीधे पहुंचने के लिए केबल कंपनियां खरीदना .दूसरा, कस्टमर्स को फोन और इंटरनेट से लंबी दूरी की और लोकल वॉयस कॉल की बंडल सर्विस देना.
तीसरा, रेवेन्यू पैदा करने के लिए फ़ौरन स्ट्रेटेजी को शुरू करना. और चौथा, 1996 के टेलीकम्यूनिकेशन एक्ट के शुरू होने पर भरोसा करना, जो लोकल टेलीकॉम कंपनियों को लंबी दूरी की कॉल की फैसिलिटी देने से रोकता. आर्मस्ट्रांग और उनकी टीम को उम्मीद थी कि यह स्ट्रेटेजी काम करेगी. वे इसमें कामयाब होंगे. लेकिन, वे आखिर में नाकाम रहे थे. 2007 में. ATAT को केबल कंपनियों को बेचना पड़ा. कंपनी के शेयर प्राइस गिरकर 18 डॉलर पहुंच गए थे.

इस स्ट्रेटेजी के चारों पॉइंट गलत अंदाज़ों पर बनाए गए थे. सबसे पहले, केबल कंपनियों को खरीदना बहुत
महंगा फैसला था. दूसरा, लंबी दूरी के कॉल की कीमत ज़्यादा सस्ती होती गई. तीसरा, कस्टमर्स को बंडल
सर्विस में उतनी दिलचस्पी नहीं थी जितनी आर्मस्ट्रांग ने उम्मीद की थी. चौथा, AT&T अपनी स्ट्रेटेजी को उतनी तेजी से शुरू नहीं कर पाया था जितनी उन्हें करनी चाहिए थी. और पांचवां, टेलीकम्यूनिकेशन एक्ट को सही तरिके से अप्लाई नहीं किया गया था. लोकल फोन कंपनियों ने लंबी दूरी की कॉल सर्विस देना शुरू कर दिया, और AT&T को पीछे छोड़ दिया था. आर्मस्ट्रांग की स्ट्रेटेजी पर अच्छी तरह से रिसर्च
नहीं किया गया था. कुछ गलत होने पर कोई दूसरा alternative प्लान नहीं बनाया गया था. उनके
अंदाज़े फैक्ट्स या सच्चाई पर बेस्ड नहीं थे. तेजी से बदलते मार्केट में AT&T तेजी से आगे बढ़ने में और
कॉम्पिटिटर्स के साथ कॉम्पिटिशन करने में नाकाम रहा. किसी भी स्ट्रेटेजी को कामयाब होने के लिए उसके सभी बिल्डिंग ब्लॉक्स को सक्सेसफुल होना चाहिए. आर्मस्ट्रांग ने हकीकत और रिसर्च पर अपनी स्ट्रेटेजी नहीं बनाई थी जो एक गलती साबित हुई. उन्होंने जो कुछ किया था वह सिर्फ गलत अंदाज़े पर किया था. एक सॉलिड स्टेटेजी बनाने के लिए सबसे जरूरी बात उम्मीद की थी. यह तय करना कि आप अपने गोल्स को सबसे असरदार और इफेक्टिव तरीके से कैसे हासिल कर सकते हैं. अगर आपकी स्ट्रेटेजी आपके सभी सवालों के जवाब नहीं देती, तो आपको अपनी स्ट्रेटेजी को और भी develop करनी चाहिए.

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The Operations Process: Making the
Link with Strategy and People

बहुत सी कम्पनियाँ ऑपरेशन लिस्ट में स्ट्रेटेजिक प्लान को रखती हैं. वे एक बार में एक ही मिशन को अपने
आगे रखकर चलते हैं, एक ख़ास बजट और शॉर्ट टर्म गोल लेकर आगे बढ़ते हैं. लेकिन, यह प्रोसेस इस सवाल का जवाब नहीं देती कि वे इस प्रोसेस से रिजल्ट कैसे हासिल कर पाएंगे, या फिर कर पाएंगे भी कि नहीं. ऐसा करने पर उनका प्लान उन्हें हकीकत से दूर कर देता हैं. इसके बजाय, कंपनियों को एक मजबूत प्लान बनाने की जरूरत हैं जो लोगों और स्ट्रेटेजी को एक साथ जोड़ते हैं, जिससे बेहतरीन रिजल्ट मिल सके. इस स्ट्रेटेजी से आप यह जान पाएंगे कि आपका बिज़नस कहाँ बढ़ रहा हैं, और ह्यूमन रिसोर्स से आप
तय कर पाएंगे कि कौन अपनी मंज़िल तक कम से कम वक्त में पहुँच सकता हैं. यह ऑपरेशन प्लान वह हैं जिसे आपके एम्पलॉईस को लम्बे वक्त तक फॉलो करना होता हैं.

ऑपरेशन वह छोटे-छोटे स्टेप्स होते हैं जो कम्पनी के आखिरी गोल को हासिल करने के लिए होते हैं. जब
आप हरेक ऑपरेशन के गोल को हासिल करेंगे, तब आप फ्यूचर के प्रॉब्लम का सामना कर पाएंगे.
अक्सर, हम नई कंपनियों के सामने आने वाले कुछ बड़े प्रॉब्लम को देखते हैं, जैसे कि जब कम्पनी का
बजट गलत रिजल्ट के इर्द-गिर्द बनाया जाता हैं या जब ऑपरेशन-हेड साफ़-साफ़ स्ट्रेटेजिक प्लान नहीं बना पाता हैं. एक मजबूत ऑपरेशन प्रोसेस बनाने के बारे में, आइए एक एग्जाम्पल को देखते हैं कि एक अच्छा सीईओ बजट प्लान कैसे बनाता हैं. सबसे पहले, वह सभी एम्पलॉईस की बात को सुनेगा
क्योंकि इन्हीं लोगों को पता होता हैं कि काम खत्म करने के लिए उन्हें कौन से रिसोर्सेस की ज़रूरत पड़ती हैं. किसी भी सीईओ को सभी एम्पलॉईस और ऑपरेशन लीडर्स के साथ बात करने के लिए सिर्फ तीन दिन लगते हैं. सभी की बातें सुनने के बाद, सीईओ एक ग्रुप को सभी डेटा को कलेक्ट कर और main पॉइंट्स को हाईलाइट करने के लिए कहता हैं. अब, सीईओ का काम हैं इन पॉइंट्स को रिव्यु करना और तय करना कि ऑर्गनाइज़ेशन के फ्यूचर के लिए सबसे अच्छा क्या हैं. अपनी कंपनी से मिले सभी डेटा को रिव्यु करने के बाद, सीईओ कम्पनी से बाहर देखना शुरू कर देता हैं.

और, एक स्ट्रॉन्ग ऑपरेशन प्लान बनाने के प्रोसेस के आखिर में यह समझना होता हैं कि बिज़नस पर असर
डालने वाले एनवायरनमेंट के फैक्टर्स कौन से हैं, जैसे कि टारगेट कस्टमर कौन से हैं और कस्टमर्स के क्या इंटरेस्ट हैं. यह फैक्टर सभी कंपनियों के लिए अलग होते हैं. इसलिए, यह देखना सीईओ का काम हैं कि वह क्या रिजल्ट चाहता हैं. एक लीडर के तौर पर आपको ऑपरेशन के दौरान डेटा कलेक्ट करने की ज़रूरत पड़ती हैं. इसके आखिर में, यह देखना होता हैं कि आपने जिस गोल के लिए काम किया था, वह हासिल हो पाया या नहीं. इसके लिए अर्निंग्स यानी कमाई, सेल्स और कैश फ्लो को चेक करना होता हैं.

ऑपरेशन प्रोसेस में, यह आपकी ज़िम्मेदारी हैं कि आप अपने शॉर्ट -टर्म प्लान के हर छोटे डिटेल को देखें.
साथ ही, यह आपकी ही ज़िम्मेदारी हैं कि एम्पलॉईस और अपने लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी के बीच सही कनेक्शन
बनाएँ. 

कन्क्लूज़न

इस समरी में, आपने सीखा कि अपनी कंपनी के स्ट्रक्चर में एक्जेक्यूशन मेंटालिटी कैसे पैदा किया जाए. पहला, आपने एक सक्सेसफुल बिज़नस बनाने के लिए सात इम्पोर्टेन्ट blocks सीखे.

दूसरा, आपने सीखा कि ऑर्गनाइज़ेशन का कल्चर एक सॉलिड फाउंडेशन बनाने का सबसे ज़रूरी हिस्सा हैं.
आपको अपने एम्पलॉईस के कल्चर को बदलना होगा क्योंकि उनके वैल्यू और बर्ताव ही ऑर्गनाइज़ेशन के
कल्चर को बनाते हैं. तीसरा, आपने सही लोगों को चुनने का स्किल सीखा.

अपनी कंपनी के बिज़नस ग्रोथ को कंट्रोल करने के लिए आपको अपनी कम्पनी में लोगों को सही जगह
पर लगाना चाहिए. चौथा, आपने एक स्ट्रॉन्ग स्ट्रेटेजी के इम्पोर्टेस के बारे में सीखा और यह भी जाना कि एक बुरा प्लान आपके बिज़नस को कैसे बर्बाद कर सकता हैं. इससे पहले कि आप अपनी स्ट्रेटेजी को बनाना खत्म करें, आपको इसके बिल्डिंग ब्लॉक्स को समझना चाहिए. अपनी कंपनी में एक्जेक्यूशन कल्चर को अप्लाई करना हर लीडर का गोल होना चाहिए. इस समरी में आपने जो कुछ भी सीखा हैं , उन्हें फॉलो करके, आप एक सक्सेसफुल बिज़नस खड़ा करने में कामयाब होंगे..

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