Dare to Lead: Brave Work. Tough Conversations. W… Brene Brown. Books In Hindi Summary Pdf

Dare to Lead: Brave Work. Tough Conversations. W… Brene Brown इंट्रोडक्शन (Introduction) अगर मैं आपको एक ग्रेट लीडर के बारे में इमेजिन करने के लिए कहूं तो आपको मन में पहला थॉट क्या आएगा ? क्या आपके मन में एक ऐसे आदमी की तस्वीर बनेगी जिसका कद लंबा है और जो सूट पहने सर उठाकर बड़े कांफिडेंस के साथ चलता है ? अगर हाँ तो ये तस्वीर लीडर्स का बड़ा ही ओल्ड सा version है. अब एक महान लीडर की डेफिनिशन बदल गई है. ये बुक आपको बताएगी कि आज के मॉडर्न युग में लीडर की पर्सनालिटी में क्या बदलाव हुआ है, इसके साथ ही ये एक महान लीडर के बारे में आपके नज़रिए को भी बदल देगी. इस बुक के ज़रिए हम आपको सिखाएँगे कि एक लीडर के रूप में ख़ुद को कैसे डेवलप किया जा सकता है. आप जानेंगे कि अब सिर्फ दिमाग की सुनकर ऊपर-ऊपर से लीड करना और उसमें भावनाओं को शामिल ना करना, काम नहीं करता और आपको इसे बदलने की ज़रुरत है. इस बदलाव को हासिल करने के लिए ये बुक आपको वल्नरेबल होने के प्रिंसिपल्स के बारे में बताएगी.आप सीखेंगे कि वल्नेरेबिलिटी आपको ज़्यादा भरोसेमंद और विश्वासपात्र लीडर बनाती है. आप सीखेंगे कि कैसे सा TITOR पालाrarATTTTON 707 – और विश्वासपात्र लीडर बनाती है. आप सीखेंगे कि कैसे दूसरों के साथ सहानुभूति के साथ पेश आकर, उनकी बात ध्यान से सुनकर एक ऐसा बिज़नेस चलाया जा सकता है जहां हर कोई एक ही गोल और सेम वैल्यूज के लिए काम करते हुए एक साथ जुड़े हुए हो सकते हैं. क्योंकि आप एक महान लीडर बनना चाहते हैं, आपको ये भी सीखने की ज़रुरत है कि अपनी टीम को कैसे मैनेज किया जाए ताकि वो हाई परफॉरमेंस लेवल अचीव कर सकें. एक लीडर बनने के लिए आपको ये साबित करने की ज़रुरत है कि आप कॉफिडेंट, डेरिंग और हमेशा कुछ नया जानने की इच्छा रखने वाले शख्स हैं. इस बुक में वो सभी टूल्स मौजूद हैं जो आपको एक ओल्ड-fashioned लीडर के कैरेक्टर से निकालकर एक ब्रैड न्यू version ऑफ़ लीडर में अपग्रेड कर देगा और एक ऐसा लीडर बना देगा जिसे सब पसंद करते हैं और जिसका सब सम्मान करते हैं. इससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात, आप अपनी टीम के साथ बेहतर रिजल्ट अचीव कर पाएँगे. तो आइए जानते हैं कि एक कमाल का लीडर कैसे बना जा सकता है. The Moment and the Myths इस दुनिया में दो तरह के लोग हैं : पहले वो जो निडर और बहादुर होते हैं, ये वो लोग हैं जो बहादुरी से हमेशा रिस्क लेते हैं भले ही वो जानते हों कि वो फेल हो सकते हैं. दूसरे वो लोग हैं जो रिस्क सिर्फ तभी लेते हैं जब फेल होने का चांस कम से कम होता है. 6. दूसर वा लागह जा रिस्क सिफ़ तमा लत ह जब फेल होने का चांस कम से कम होता है. एक डेयरिंग लीडर होने का मतलब है बेबाकी से आगे बढ़ना, ये जानते हुए भी कि आप फेल हो सकते हैं. डेयरिंग का मतलब होता है वल्नरेबल होना. हम सब की कोई ना कोई कमज़ोरी होती है.वल्नेरेबिलिटी वो इमोशन है जो हमें तब महसूस होती हैं जब हम कोई रिस्क उठाते हैं या अपनी किसी कमज़ोरी का सामना करते हैं.ज़्यादातर लोगों का मानना है कि वल्नेरेबिलिटी एक कमज़ोरी है जिसे हमें छोड़ देना चाहिए.लेकिन बुक की ऑथर ब्रेने का मानना है कि वल्नेरेबिलिटी को अपनाना बहुत ज़रूरी है. जब आप अपनी कमजोरियों और डर को खुल कर गले लगाएँगे सिर्फ तभी आप सही मायनों में खुद कोdaring कह सकते हैं. वो ऐसा इसलिए कहती हैं क्योंकि जब हम वल्नरेबल होते हैं तब हम ज़्यादा स्ट्रोंग होते हैं क्योंकि हमारे इमोशंस हमारे कंट्रोल में हैं, हम दूसरों से कनेक्ट करते हैं और उनसे विश्वास का कनेक्शन जोड़ते हैं और ये कोई आसान काम नहीं है.आइए इसे एक कहानी से समझते हैं. एलेन3rd स्टैण्डर्ड में थी. एक दिन, वो स्कूल से रोती रोती घर आई. उसकी मम्मी को चिंता भी हो रही थी और वो गुस्से में भी थी.जब उसने एलेन से पूछा कि वो क्यों रो रही थी तो एलेन ने बताया कि उसने स्कूल में बहुत ही शर्मनाक हरकत की थी और उसके दोस्तों ने वादा किया था कि वो किसी को उस बारे में नहीं बताएँगे.लेकिन जब एलेन क्लास में गई तो उसे पता चाला कि ग ल य Ambarrccinोंट बताएँगे.लेकिन जब एलेन क्लास में गई तो उसे पता चला कि पूरा स्कूल उस embarassing मोमेंट के बारे में जानता था. वो सब एक दूसरे के कान में फुसफुसा रहे थे और उस पर हंस रहे थे. इतना कह कर एलेन बस रोए जा रही थी.उसने अपनी मम्मी से कहा कि वो फ़िर कभी किसी पर भरोसा नहीं करेगी. उसकी मम्मी चिंतित थी लेकिन उसने अपनी बेटी को एक लेसन सिखाने के बारे में सोचा.उसने एलेन को एक bottle लाने के लिए कहा. अब उसने एलेन को समझाया कि जब भी उसका कोई दोस्त उसके लिए कोई अच्छा काम करे तो उसे bottle में एक मार्बल बॉल डालना होगा यानी हर एक दोस्त के लिए एक अलग bottle होनी चाहिए. फ़िर उसने एलेन को अपने सभी दोस्तों के बारे में सोचने के लिए कहा और पूछा कि उसकी कौन सी दोस्त के bottle में ज़्यादा मार्बल होना चाहिए? एलेन ने ध्यान से सोचा और कुछ दोस्तों के नाम लेने लगी. तो देखा आपने, अभी एलेन जिन दोस्तों से नाराज़ थी, वो उन्हीं में से कुछ के नाम भी ले रही थी. असल में होता ये है कि हम ऐसे लोगों पर भरोसा करते हैं जिनके bottle में ज़्यादा मार्बल बॉल्स होते हैं इसका मतलब है कि वो इंसान एक अच्छा दोस्त है. लेकिन भरोसा तभी बनता है जब हम वल्नरेबल होते हैं और कनेक्शन बनाते हैं.इसी तरह एक महान लीडर बनने के लिए अपने followers के विश्वास की ज़रुरत होती है. इमोशंस को दिखाना कमज़ोरी नहीं है बल्कि ये अच्छे रिश्ते बनाने और अपने आस पास के को एक bottle लाने के लिए कहा. अब उसने एलेन को समझाया कि जब भी उसका कोई दोस्त उसके लिए कोई अच्छा काम करे तो उसे bottle में एक मार्बल बॉल डालना होगा यानी हर एक दोस्त के लिए एक अलग bottle होनी चाहिए. फ़िर उसने एलेन को अपने सभी दोस्तों के बारे में सोचने के लिए कहा और पूछा कि उसकी कौन सी दोस्त के bottle में ज़्यादा मार्बल होना चाहिए? एलेन ने ध्यान से सोचा और कुछ दोस्तों के नाम लेने लगी. तो देखा आपने, अभी एलेन जिन दोस्तों से नाराज़ थी, वो उन्हीं में से कुछ के नाम भी ले रही थी. असल में होता ये है कि हम ऐसे लोगों पर भरोसा करते हैं जिनके bottle में ज़्यादा मार्बल बॉल्स होते हैं इसका मतलब है कि वो इंसान एक अच्छा दोस्त है. लेकिन भरोसा तभी बनता है जब हम वल्नरेबल होते हैं और कनेक्शन बनाते हैं.इसी तरह एक महान लीडर बनने के लिए अपने followers के विश्वास की ज़रुरत होती है. इमोशंस को दिखाना कमज़ोरी नहीं है बल्कि ये अच्छे रिश्ते बनाने और अपने आस पास के लोगों का सपोर्ट पाने का तरीका है.जिंदगी के सफ़र में समय के साथ आप भी कई लोगों के bottle को मार्बल बॉल्स से भरेंगे और कई लोग आपके bottle को भरेंगे, इसी की नाम जिंदगी है – एक दूसरे को समझकर मदद करना और साथ चलना. Dare to Lead: Brave Work. Tough Conversations. W… Brene Brown The Call to Courage कभी-कभी हमें ऐसी सिचुएशन का सामना करना पड़ता है जिससे हमें uncomfortable महसूस होता है.कभी-कभी एक लीडर को किसी को ऐसी बात कहनी पड़ सकती है जिससे वो इंसान हर्ट हो सकता है. आमतौर पर ऐसी सिचुएशन में हम सोचते हैं कि सच बोलने से ज़्यादा अच्छा झूठ बोलना होता है. हमें लगता है कि किसी से कुछ छुपाकर हम अच्छा और नेक काम कर रहे हैं. लेकिन हम ये नहीं समझते कि हम खुलकर और सच बोलकर ही सच्ची काइंडनेस दिखा सकते हैं. अगर आप जो कहना चाहते हैं वो कोई कड़वी बात है तो सामने वाले को अपने शब्दों के बारे में सोचने का थोड़ा समय देने की कोशिश करें. क्योंकि महान लीडर्स को ऑनेस्ट और supportive होना चाहिए, आइए कर्नल डीडी की कहानी पर एक नज़र डालते हैं.डीडी Air force Global Strike Command के लिए काम करती थी. वो इनोवेशन, लीडरशिप डेवलपमेंट और एनालिसिस की डायरेक्टर थी और 33,000 ऑफिसर्स को मैनेज करती थी.इस पोजीशन को संभालने से पहले, डीडी ने लूसियाना में 2nd मिशन सपोर्ट ग्रुप के कमांडर के रूप में काम किया था.उस समय के दौरान, उन पर 1,800 एयरमैन निराश on पाजारान का समालन सपहल, डाडा नलूसियाना म 2nd मिशन सपोर्ट ग्रुप के कमांडर के रूप में काम किया था.उस समय के दौरान, उन पर ],800 एयरमैन की ज़िम्मेदारी थी. एक लीडर के रूप में डीडी का मानना था कि चाहे कोई भी प्रॉब्लम क्यों ना हो, उसे सोल्व करना उनकी ज़िम्मेदारी थी फ़िर चाहे उसके लिए उन्हें वल्नरेबल ही क्यों ना होना पड़े.मुद्दा सिर्फ इतना था कि किसी ट्रेनिंग ने उन्हें इसके लिए तैयार नहीं किया था, जहां इमोशंस शामिल हो वहाँ सही शब्दों का इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी होता है. कमांड के पहले साल के दौरान, डीडी कुछ एयरमैन को अवार्ड दे रही थी. अपनी स्पीच के दौरान, उन्होंने सभी से पूछा,”क्या आप लोग कुछ पूछना चाहते हैं?” एक एयरमैन ने हाथ ऊपर किया और पूछा, “क्या मैनेजमेंट कुछ काम कम करने की प्लानिंग कर रही है क्योंकि हम सभी बहुत थक चुके हैं”? डीडी ने ये समझाते हुए जवाब दिया कि हर कोई थका हुआ था और ना सिर्फ़ उस कमांड में बल्कि सभी इलाकों में यही मुद्दा था.फ़िर उन्होंने पूछा कि जो लोग थक गए हैं वो अपने हाथ ऊँचें करें. वो देख कर चकित रह गई कि लगभग सभी ने हाथ उठा लिया था. अब इस सिचुएशन में डीडी के पास कहने के लिए कुछ नहीं था, वो बिलकुल चुप खड़ी थी.उन्हें वो आर्टिकल याद आया जो उन्होंने सालों पहले पढ़ा था.उन्होंने वल्नरेबल होकर अपनी चिंताओं को शेयर करने का फ़ैसला किया. रस्टों कमा पास किया कि तो शतकात के बारे में नये याद आया जा उन्हान साला पहल पढ़ा था.उन्हान वल्नरेबल होकर अपनी चिंताओं को शेयर करने का फ़ैसला किया. उन्होंने कहना शुरू किया कि वो थकान के बारे में उनसे बातें करना चाहती थीं और उन सब को उस आर्टिकल के बारे में बताया. उस आर्टिकल में एक रिसर्च के बारे में बताया गया था, रिसर्च में ये बात सामने आई थी कि जब लोग थके हुए होते हैं, ख़ासकर बिज़नेस सेटिंग में,तो वो असल में अकेलापन महसूस करते हैं.जो थकान वो महसूस कर रहे थे वो सिर्फ फिजिकल नहीं था बल्कि वो ज़्यादा इमोशनल था. फ़िर डीडी ने उन सब से पूछा, “कौन कौन अकेला महसूस कर रहा है?”लगभग 15 लोगों ने हाथ ऊपर किया. इस नज़ारे ने डीडी को हैरान कर दिया था क्योंकि उनका मानना था कि अकेलापन लगने के बाद भी लड़के इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं दिखाते. डीडी को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे क्योंकि वो कोई थेरपिस्ट नहीं थी और ना ही उन्हें किसी ट्रेनिंग में ऐसी सिचुएशन को हैंडल करना सिखाया गया था.अब उन्हें सिर्फ और सिर्फ इंसानियत दिखाने की बात समझ में आ रही थी.उन्होंने उनके इमोशंस को समझने और महसूस करने की कोशिश की,उनसे बातचीत कर उनके दर्द को बांटने और किसी भी तकलीफ़ का हल निकालने के लिए उनसे खुलकर बात करने का फ़ैसला किया. एक लंबी चर्चा के बाद, डीडी और उसका ग्रुप इस नतीजे पर पहुंचें कि उन्हें कुछ बदलाव करने की ज़रुरत 14 +11TTOT डीडी को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे क्योंकि वो कोई थेरपिस्ट नहीं थी और ना ही उन्हें किसी ट्रेनिंग में ऐसी सिचुएशन को हैंडल करना सिखाया गया था.अब उन्हें सिर्फ और सिर्फ इंसानियत दिखाने की बात समझ में आ रही थी.उन्होंने उनके इमोशंस को समझने और महसूस करने की कोशिश की,उनसे बातचीत कर उनके दर्द को बांटने और किसी भी तकलीफ़ का हल निकालने के लिए उनसे खुलकर बात करने का फ़ैसला किया. एक लंबी चर्चा के बाद, डीडी और उसका ग्रुप इस नतीजे पर पहुंचें कि उन्हें कुछ बदलाव करने की ज़रुरत थी जहां फ़ोर्स के लोग एक दूसरे के साथ ज़्यादा मेल जोल बढ़ा सकें, खुलकर बातचीत कर इंसानी की बुनियादी ज़रुरत को पूरा कर सकें. यहाँ डीडी एक लीडर की तरह पेश आई जिसके सामने एक परेशानी थी लेकिन उससे भागने के बजाय उसने डट कर उसका सामना किया और जिन लोगों की ज़िम्मेदारी उस पर थी उससे इमानदारी से खुलकर बात कर उनकी मदद की. इमानदारी से बात करना कभी भी आसान नहीं होता लेकिन एक महान लीडर होने का मतलब है मुश्किल बातचीत करने के लिए तैयार रहना. हम बस ध्यान से सुनकर सामने वाले की वल्नेरेबिलिटी को शेयर कर सकते हैं. Dare to Lead: Brave Work. Tough Conversations. W… Brene Brown The Armory हमारे इमोशंस दिल से जन्म लेते हैं.जब दिल की बात हो तो लीडर्स दो अलग-अलग तरीकों से लीड करनापसंद करते हैं. कुछ लोग दिल की ना सुनकर दिमाग की सुनना पसंद करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि जब फीलिंग्स किसी चीज़ में शामिल हो जाती है तो लोग कम प्रोडक्टिव और कम फोकस्ड हो जाते हैं. दूसरी ओर ऐसे लीडर्स भी हैं जो दिल की सुनना पसंद करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि असली पॉवर दिल में होती है और इसके बिना कोई बहादुरी और क्रिएटिविटी नहीं आ सकती.आइए इसे समझने के लिए सारा की कहानी सुनते हैं. सारा एक महान लीडर थी. वो एक प्रोफेशनल एनालिस्ट ग्रुप को मैनेज करती थी. इस ग्रुप में दुनिया के अलग-अलग देशों के लोग शामिल थे इसलिए सभी अलग उम्र, जेंडर और देश के लोग थे. सारा अपने काम में माहिर थी लेकिन अपने एम्प्लाइज को समझने के लिए उसे काफ़ी स्ट्रगल करना पड़ता था क्योंकि सब अलग-अलग जगह से आए थे तो कम्युनिकेशन एक बड़ी समस्या थी. एक बार सारा ने गौर किया कि हांगकांग का एक एनालिस्ट का ग्रुप विडियो कांफ्रेंस में कभी हिस्सा नहीं 1 नो 2TTTT श्रीगे hd As पता नपा. एक बार सारा ने गौर किया कि हांगकांग का एक एनालिस्ट का ग्रुप विडियो कांफ्रेंस में कभी हिस्सा नहीं लेता था, वो इसका कारण जानना चाहती थी. ये लोग टीम के लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट थे लेकिन एक दूसरे से ठीक से बातचीत ही नहीं कर पाते थे. सारा ने अलग से हांगकांग टीम से बात की और मामले की तह तक जाने की कोशिश की. उसने उनसे कहा कि वो भी औरों की तरह टीम के लिए ख़ास थे और उनका participate ना करना टीमवर्क को नुक्सान पहुंचा रहा था. उस समय वो सब बिलकुल चुपचाप बैठे रहे फ़िर एक ने सारा को सब सच सच बताया. उस एम्प्लोई ने बताया कि उनके ग्रुप ने इस मुद्दे के लिए कई बार मैनेजमेंट तक पहुँचने की कोशिश की थी. प्रॉब्लम ये थी कि उन्हें मीटिंग शुरू होने के सिर्फ़ 10 मिनट पहले इन्फॉर्म किया जाता था. हांगकांग टीम को ये बात अपमानजनक लगी क्योंकि कोई भी सिर्फ 10 मिनट में किसी मीटिंग के लिए तैयार नहीं हो सकता. उनकी टीम को लगने लगा था कि उनकी वहाँ कोई ज़रुरत नहीं थी इसलिए उन्होंने हिस्सा नहीं लिया और एक सहनशील attitude बनाए रखा. अब एक टिपिकल सिचुएशन में ऐसे टॉपिक पर बातचीत करना काफ़ी challenging हो सकता है. लेकिन सारा को इस तरह की बातचीत मैनेज करने की आदत थी.वो एक ऐसे ग्रुप को मैनेज कर रही थी जो काफ़ी बड़ा भी था और जिसमें अलग-अलग कल्चर के लोग भरे हुए थे एक ऐसे ग्रुप को मैनेज कर रही थी जो काफ़ी बड़ा भी था और जिसमें अलग-अलग कल्चर के लोग भरे हुए थे. सारा ने मैनेजमेंट टीम से बात की और उनसे हांगकांग टीम को समय से पहले इन्फॉर्म करने के लिए कहा ताकि वो मीटिंग के लिए तैयार हो सकें और अपना योगदान दे सकें.अगर सारा ऐसी बातचीत को नज़रंदाज़ कर पुराने तरीके से चीज़ों को हैंडल करती तो एम्प्लाइज की फीलिंग्स छुपी रह जाती और वो हर दिन इसी फीलिंग के साथ काम करने के लिए मजबूर हो जाते कि उनकी insult की जा रही है. ऐसा होने से काम की क्वालिटी खराब होने लगती है. अगर आपके टीम मेंबर्स कम्फ़र्टेबल या वेलकम फील नहीं करेंगे तो उनकी क्रिएटिविटी पर इसका सीधा असर होगा और वो कभी इम्प्रूव करने के माइंडसेट को नहीं अपना पाएँगे. कोई भी इंसान अकेला काम नहीं कर सकता, उसे एक टीम की ज़रुरत होती है. आपको उन्हें अपना बेस्ट परफॉर्म करने के लिए मोटीवेट करना होगा और ये सिर्फ तभी मुमकिन है जब आप उन्हें सपोर्ट करेंगे, उनकी बात ध्यान से सुनेंगे. उन्हें ये एहसास होना चाहिए कि वो भी कंपनी का एक इम्पोर्टेन्ट हिस्सा हैं. किसी भी स्ट्रेसफुल सिचुएशन से भागने की कोशिश ना करें क्योंकि ऐसा करने से और भी बड़ी बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी. आपके एम्प्लाइज इंसान हैं जो हर इमोशन को महसूस करते हैं इसलिए उन्हें रोबोट की तरह ट्रीट ना करें. Dare to Lead: Brave Work. Tough Conversations. W… Brene Brown Shame and Empathy शर्म वो भावना है जो हम तब महसूस करते हैं जब हम दूसरों की तुलना में ख़ुद को कम समझते हैं या जब हमें लगता है कि हम दूसरों के सम्मान, प्यार और साथ के लायक नहीं हैं. क्योंकि हम अकेलेपन की भावना से डरते हैं इसलिए जब हम शर्म महसूस करते हैं तो स्ट्रेस में आ जाते हैं. अब अकेले होने का opposite होता है दूसरों के साथ जुड़े होना. ये तभी हो सकता है जब हम एक दूसरे के साथ सहानुभूति और हमदर्दी से पेश आएं. हमें ये समझने की ज़रुरत नहीं है कि दूसरों की जिंदगी में क्या चल रहा है, हमें उस समय बस उसके इमोशंस से जुड़ने की ज़रुरत है. हमदर्दी वो भावना है जिसकी आज दुनिया में सबसे ज़्यादा ज़रुरत है. हमें बिना किसी को जज किए, बिना कोई partiality या तरफ़दारी किए एक दूसरे को समझने की कोशिश करनी होगी. इसके साथ साथ हमें ख़ुद के साथ भी हमदर्दी रखनी चाहिए. 2017 में इस बुक की ऑथर ब्रेने अपनी एक नई बुक रिलीज़ करने वाली थी और प्री-बुक टूर बूट कैंप की तैयारी कर रही थी.क्योंकि उन्होंने कई सारी बुक्स पब्लिश की थी इसलिए वो कई बुक टूर भी कर रही A7ना ना IT: निT ATT निता TroA तयारी कर रहा था.क्याकि उन्हान का सारा बुक्स पब्लिश की थी इसलिए वो कई बुक टूर भी कर रही थी.ये उनके काम का एक हिस्सा था जिससे उन्हें ख़ुशी भी मिलती थी और थकान भी महसूस होती थी. पिछली बुक टूर की वजह से ब्रेने काफ़ी परेशान हो गई थीं इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वो दोबारा कभी भी फिजिकली, इमोशनली और मेंटली तैयार हुए बिना बुक टूर नहीं करेंगी. ब्रेने को टूर के दौरान अपने ऑडियंस से बातें करना, उनसे कनेक्ट करना बेहद पसंद है लेकिन एक होटल से दूसरे होटल जाना और travelling उन्हें बहुत थका देता था और उन्हें घर की याद आने लगती थी. पहले तो वो काफ़ी एक्टिव थी लेकिन समय के साथ वो मायूस और अलग थलग महसूस करने लगी. वो अक्सर ख़ुद को रूम में लॉक कर लिया करती थीं. उन्होंने इसका सारा दोष अपने शर्मीले स्वभाव पर डाल दिया.अब ब्रेने को टूर पर जाना और इतने लोगों के आस पास रहना थकाने लगा था. जब वो वापस घर लौटकर अपना डाइट, एक्सरसाइज और प्रार्थना करने की रूटीन को फॉलो करती तब कहीं जाकर उन्हें नार्मल महसूस होता. हर बार की तरह, बुक टूर से लौटने के बाद ब्रेने अपना ऑडियो बुक रिकॉर्ड करने में जुट गई. एक दिन जब वो रिकॉर्डिंग कर रहे थे तब producer ने ब्रेने को उनके झुमके उतारने के लिए कहा क्योंकि वो बहुत शोर कर रहे थे. ब्रेनेको बहुत शर्मीदगी महसूस हुई और वो सर झुकाए अपने पर्स की ओर जाने लगी. वो बड़ी तेज़ी से चल रही श्री यौर शनारामा लाग की टीना रन्ग ब्रेनेको बहुत शर्मीदगी महसूस हुई और वो सर झुकाए अपने पर्स की ओर जाने लगी. वो बड़ी तेज़ी से चल रही थी और अचानक उनका सर ग्लास की दीवार से टकरा गया.उन्हें काफ़ी तेज़ लगी थी और ब्रेने वहीँ बेहोश हो कर गिर पड़ीं. जब उन्हें होश आया तो वो रोने लगीं क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा था. उनके producer ने उन्हें घर जाने के लिए या एक बार डॉक्टर से मिलने के लिए कहा लेकिन ब्रेने ने इंकार कर दिया.उन्होंने कहा कि वो ठीक थीं और काम जारी रखना चाहती थी. आधा घंटा रिकॉर्डिंग करने के बाद ब्रेने फ़िर फूट-फूट कर रोने लगी.इसके बाद उन्हें घर लौटना पड़ा क्योंकि वो नार्मल फील नहीं कर रही थी और ना ही काम कर पा रही थी. एक दिन, अपनी टीम के साथ विडियो कॉल मीटिंग के दौरान ब्रेने ने सबको बीच में रोककर कहा कि उन्हें एक भी शब्द समझ नहीं आ रहा था. उनके साथी उनके लिए चिंतित थे लेकिन ब्रेने ने कहा कि वो ठीक थी और उन्हें ब्रेक लेने की कोई ज़रुरत नहीं थी.ऐसे ही सब चलता रहा और फ़िर अचानक ब्रेने गिर पड़ी. तब उनके साथियों को उनके पति को बुलाना पड़ा. वो भी ब्रेने को समझा समझा कर हार गए थे कि उन्हें एक बार डॉक्टर से मिलने की ज़रुरत थी. आखिर जब ब्रेने राज़ी हुईं, उनके कुछ टेस्ट करवाए गए और रिपोर्ट में आया कि उनके सर में चोट लगी थी. ये ज़ख्म तब लगा था जब उनका सर ग्लास की दीवार से टकराया था. डॉक्टर ने कहा कि उन्हें तब तक रेस्ट से टकराया था. डॉक्टर ने कहा कि उन्हें तब तक रेस्ट करने की और इंतज़ार करने की ज़रुरत थी जब तक उनका ब्रेन फ़िर से नार्मल नहीं हो जाता. ब्रेने के लिए बीमारी एक कमज़ोरी थी. उनके कई महीनों के इवेंट्स booked थे. वो काम बंद करने या कुछ भी कैंसिल करने के लिए तैयार नहीं थीं लेकिन उनकी टीम ने उनकी एक नहीं सुनी.जितना ज़्यादा ब्रेने ने खुद को काम करने के लिए मजबूर किया वो उतना ही ज़्यादा बीमार होती गईं. वो शर्मिंदा थी और खुद को कमज़ोर महसूस कर रही थी. ब्रेने इन नेगेटिव फीलिंग्स में डूबती जा रही थी कि एक दिन उनके एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी जिसने उनकी जिंदगी बदल दी.उनके दोस्त फुटबॉल प्लेयर थे और कुछ समय पहले उन्हें भी चक्कर आते थे जिस वजह से वो गिर जाते थे. उन्होंने ब्रेने से कहा कि ये एक ज़िद्दी बीमारी थी, आप इससे जितना ज़्यादा लड़ने की कोशिश करेंगे ये उतना ही आपसे चिपकता जाएगा. उन्होंने ब्रेने से कहा कि ठीक होने का बस एक ही तरीका था कि उसे पकड़ने की बजाय जाने दो, लेट गो करना सीखो. ख़ुद को काम करने के लिए मजबूर करने के बजाय उसे आराम करने की ज़रुरत थी. क्योंकि ब्रेने ने अपने दोस्त की बात मानी वो धीरे-धीरे बेहतर महसूस करने लगी. लेकिन ख़ुद को खोने का डर और दोबारा काम नहीं करने के डर ने उन्हें चिंतित कर दिया था.वो दोबारा डॉक्टर से मिलने गईं. डॉक्टर ने कहा कि उनकी चिंता नार्मल थी और उन्हें रिलैक्स करने की और अपने बॉडी के सिग्नल को ब्रेने इन नेगेटिव फीलिंग्स में डूबती जा रही थी कि एक दिन उनके एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी जिसने उनकी जिंदगी बदल दी.उनके दोस्त फुटबॉल प्लेयर थे और कुछ समय पहले उन्हें भी चक्कर आते थे जिस वजह से वो गिर जाते थे. उन्होंने ब्रेने से कहा कि ये एक ज़िद्दी बीमारी थी, आप इससे जितना ज़्यादा लड़ने की कोशिश करेंगे ये उतना ही आपसे चिपकता जाएगा. उन्होंने ब्रेने से कहा कि ठीक होने का बस एक ही तरीका था कि उसे पकड़ने की बजाय जाने दो, लेट गो करना सीखो. ख़ुद को काम करने के लिए मजबूर करने के बजाय उसे आराम करने की ज़रुरत थी. क्योंकि ब्रेने ने अपने दोस्त की बात मानी वो धीरे-धीरे बेहतर महसूस करने लगी. लेकिन ख़ुद को खोने का डर और दोबारा काम नहीं करने के डर ने उन्हें चिंतित कर दिया था.वो दोबारा डॉक्टर से मिलने गईं. डॉक्टर ने कहा कि उनकी चिंता नार्मल थी और उन्हें रिलैक्स करने की और अपने बॉडी के सिग्नल को समझने की ज़रुरत थी.धीरे-धीरे ब्रेने healthy होने लगी. वो दोबारा काम पर जाने लगीं और सभी ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया. उनके साथी बड़े प्यार और हमदर्दी के साथ उनसे पेश आए. वो सब साथ काम करने लगे और ब्रेने अपनी बीमारी के बारे में भूल गई. इससे ब्रेने ने एक बहुत अनमोल सीख ली, उन्होंने सीखा कि कैसे अपने बॉडी की ज़रूरतों और सिग्नल को सुनना चाहिए और ख़ुद के साथ भी हमदर्दी से पेश आना चाहिए. Dare to Lead: Brave Work. Tough Conversations. W… Brene Brown Curiosity and Grounded Confidence हमने इस बुक में वल्नेरेबिलिटी के बारे में बहुत सारी बातें की हैं और इसका कारण ये है कि यही वल्नेरेबिलिटी आपको आगे बढ़ने का कांफिडेंस देती है. अगर आप वल्नरेबल नहीं होंगे तो आप कभी भी नई चीजें ट्राय करने कीऔर इस प्रोसेस में अपना कांफिडेंस बढ़ाने की हिम्मत नहीं करेंगे.रिसर्च ने साबित किया है कि क्रिएटिव, स्मार्टऔर कॉफिडेंट होने के लिए आपके मन में चीज़ों के बारे में जानने की इच्छा होना बहुत ज़रूरी है. आइए इसे एक कहानी से समझते हैं. लॉरेन एक प्रोफेशनल फुटबॉल प्लेयर थी. वो हमेशा लोगों से कहती कि फुटबॉल में सबसे इम्पोर्टेन्ट पार्ट होता है बॉल को कंट्रोल करना. जब वो छोटी थी तो उसके कोच उसे पैर के अलग-अलग हिस्सों से बॉल को बार-बार टच करने के लिए पुश करते रहते थे.यहाँ तक कि एक प्रोफेशनल प्लेयर बनने के बाद भी उसे अपनी टीम के दूसरे मेंबर्स के साथ बॉल कंट्रोल की प्रैक्टिस करनी पड़ती थी. लॉरेन के घर में एक छोटा सा बगीचा था जिसके चारों कापडसहाना चाहिए. Living into Our Values जब हम कुछ ऐसा अचीव करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं जो हमारे लिए बहुत मायने रखता है तो अक्सर हमें कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है. उनमें से एक है क्रिटिसिज्म यानी आलोचना. अगर हम अपने वैल्यूज के बारे में sure नहीं होंगे और उससे भटकने लगेंगे तो लोगों की बातें सुनकर हम अपने गोल के बारे में भूल जाएँगे.वैल्यूज में आनेस्टी, डिसिप्लिन,जस्टिस, काइंडनेस ये सब शामिल हैं. जब हम वल्नेरेबिलिटी के साथ आगे बढ़ते हैं तो हम अपने दिल को क्रिएटिविटी, हमदर्दी और कांफिडेंस के लिए खुला रखते हैं.अपना दिल खुला रखना हमें एक टारगेट भी बना सकता है. अगर हमें सही रास्ते पर ले जाने वाले वैल्यूज क्लियर नहीं होंगे तो हम वल्नरेबल होने के साथ साथ कभी स्ट्रोंग नहीं हो पाएँगे. आइए Miovision की कहानी से इसे समझते हैं. Miovision कंपनी ट्रैफिक को कम करने और रोड सेफ्टी में सुधार करनेके लिए क्रिएटिव solution लाने की कोशिश कर रही थी. Miovision काम की क्वालिटी को इम्प्रूव करने के लिए कई सालों से स्ट्रगल कर रहा था. वो विश्वास, वल्नेरेबिलिटी और पॉजिटिव इरादों को बढ़ावा देने के लिए अपने एम्प्लाइज के कर रहा था. वा विश्वास, वल्नराबालटा आर पााजाटव इरादों को बढ़ावा देने के लिए अपने एम्प्लाइज के overall परफॉरमेंस में सुधार करना चाहते थे. तो कंपनी ने एक प्रोग्राम लागू करने की कोशिश की जिसमें हर एम्प्लोई को हर स्किल के लिए रेटिंग दी जाएगी. उसके बाद उस शीट को देखा जाएगा और टीम लीडर के साथ चर्चा की जाएगी. इस प्रोग्राम का रिजल्ट पॉजिटिव नहीं था. इससे एम्प्लाइज के बीच में गुस्सा और नाराज़गी पैदा होने लगी क्योंकि वो लोग फीडबैक लेने के लिए तैयार नहीं थे. इस तरह के मामलों में एम्प्लाइज से बातचीत करना बहुतमुश्किल हो जाता और लीडर्स इस तरह की बातचीत करने के लिए तैयार नहीं थे जिसने सिचुएशन को और खराब कर दिया था. कई परफॉरमेंस मैनेजमेंट प्रोग्राम ट्राय करने के बाद Miovision एक नए नज़रिए के साथ सामने आया. उन्होंने सोचा कि एम्प्लाइज को अब ज़िम्मेदारी लेने की ज़रुरत थी. उन्हें ये समझने की ज़रुरत थी कि फ्रंटलाइन में खड़े होकर चीज़ों को संभालना क्या होता है इसलिए उन्होंने उन्हें ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया. अब जब एम्प्लाइज पर ज़िम्मेदारी आई तो वो वल्नरेबल महसूस करने लगे. उन्होंने सीखा कि फीडबैक लेकर उससे कैसे ग्रो किया जा सकता है. जब आप फ्रंटलाइन में होते हैं तब कल भी पर्सनल नहीं होता क्योंकि अब जब एम्प्लाइज पर ज़िम्मेदारी आई तो वो वल्नरेबल महसूस करने लगे. उन्होंने सीखा कि फीडबैक लेकर उससे कैसे ग्रो किया जा सकता है. जब आप फ्रंटलाइन में होते हैं तब कुछ भी पर्सनल नहीं होता क्योंकि आपके ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं. तब आप ऐसा महसूस नहीं करते कि कोई आपको जज कर रहा है या नहीं क्योंकि आपका फोकस सिर्फ़ आगे की प्रॉब्लम और उससे निकलने के solution पर होता है. जब लीडर्स और टीम managers को मुश्किल मुद्दों पर कैसे बातचीत करनी चाहिए इसकी ट्रेनिंग दी जाती है और जब वो फीडबैक को पॉजिटिव रूप में लेकर उससे डील करना सीख जाते हैं तब सक्सेस मिलना तय होता है. जब हर कोई अपनी शर्म को एक तरफ़ रख देता, दूसरों को सुनने की कोशिश करता है और जब सभी कंपनी के गोल्स और वैल्यूज पर फोकस कर अपनी एनर्जी उसमें लगा देते हैं तब बिज़नेस करने की जगह कम्फ़र्टेबल, क्रिएटिव और कांफिडेंस से भरा हुआ बन जाता है. हर कोई कनेक्टेड फील करता है क्योंकि तब किसी को भी नहीं लगता कि उसे नज़रंदाज़ किया जा रहा है.लीडर्स को ट्रेन करने की ज़रुरत है ताकि वो अच्छे listener बन सकें और एम्प्लाइज को ये जा रहा है.लोडसे का ट्रेन करने की ज़रुरत है ताकि वो अच्छे listener बन सकें और एम्प्लाइज को ये सीखने की ज़रुरत है कि फीडबैक कैसे दें और लें. कन्क्लूज़न (Conclusion) तो इस बुक ने हमें समझाया कि दो तरह के लीडर होते : एक वो जो एक कवच पहने हुए होते हैं और रिस्क लेने से घबराते हैं. दूसरे वो जो बहादुर होते हैं और बेबाकी से आगे बढ़ने का ज़ज्बा रखते हैं. इसने हमें ये भी समझाया कि बिना दिल की सुने लीड करने में और दिल की सुनकर लीड करने में क्या फ़र्क होता है. जैसा कि आपने जाना कि वल्नरेबल होने का मतलब कमज़ोर होना नहीं होता. दूसरी ओर हमने ये भी समझा कि अगर आप इमानदार हैं और अपनी टीम को हमदर्दी से सुनते हैं तो आप शानदार रिजल्ट अचीव करेंगे. इस बुक ने हमें ये भी सिखाया कि वल्नेरेबिलिटी से कांफिडेंस कैसे सीखा जा सकता है. येहमें हमारे अंदर की जर्नी पर ले जाती है. अगर आप ये नहीं समझते कि आप कौन हैं और आपके वैल्यूज क्या हैं तो आप कभी भी अपनी टीम को सक्सेस की ओर नहीं ले जा पाएँगे. एक ग्रेट लीडर के रूप में आपको हर दिन एक एग्ज़ाम्पल सेट कर लीड करने की ज़रुरत है. आपको मुश्किल बातों पर बातचीत करने के लिए और फीडबैक लेने के लिए भी तैयार रहना होगा. दियारात माश.माश थााने दिलती सनकर लीट दिल की सुनकर लीड करने में क्या फ़र्क होता है. जैसा कि आपने जाना कि वल्नरेबल होने का मतलब कमज़ोर होना नहीं होता. दूसरी ओर हमने ये भी समझा कि अगर आप इमानदार हैं और अपनी टीम को हमदर्दी से सुनते हैं तो आप शानदार रिजल्ट अचीव करेंगे. इस बुक ने हमें ये भी सिखाया कि वल्नेरेबिलिटी से कांफिडेंस कैसे सीखा जा सकता है. येहमें हमारे अंदर की जर्नी पर ले जाती है. अगर आप ये नहीं समझते कि आप कौन हैं और आपके वैल्यूज क्या हैं तो आप कभी भी अपनी टीम को सक्सेस की ओर नहीं ले जा पाएँगे. एक ग्रेट लीडर के रूप में आपको हर दिन एक एग्ज़ाम्पल सेट कर लीड करने की ज़रुरत है. आपको मुश्किल बातों पर बातचीत करने के लिए और फीडबैक लेने के लिए भी तैयार रहना होगा. दिमाग के साथ-साथ अपने दिल की सुनकर लीड करना कमज़ोरी की निशानी नहीं है बल्कि ये आपको बहुत मज़बूत बना देता है. इसलिए वल्नेरेबिलिटी को साथ लेकर बेख़ौफ़ होकर लीड करें और अपने एम्प्लाइज को मशीन की तरह नहीं बल्कि इंसानों की तरह ट्रीट करें क्योंकि वो रोबोट नहीं हैं, इस बात को कभी ना भूलें.

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