Contagious Books Summary In Hindi

Contagious
Jonah Berger
इंट्रोडक्शन

इमेजिन कीजिये कि आप एक dandelion के फूल की पंखुडीयों को हवा में धीरे से उड़ा रहे है. अब ये
सोचिये कि आप फनी कैट विडियो को सोशल मीडिया में शेयर करते है. सोचिए कोई नया प्रोडक्ट मार्किट
में आया जिसके बारे में आप अपने दोस्तों को बताने से खुद को रोक नहीं पा रहे है. ये सब कंटेजियस के
एक्जाम्पल है. ऐसे सिक्स प्रिंसिपल्स है जो किसी आईडिया को इतना वायरल या ट्रेंडिंग बना देते है कि लोग उसके बारे में बात करने से खुद को रोक नहीं पाते. जोनाह बर्जर इन्हें सिक्स स्टेप्स बोलते है, और इस बुक में हम एक-एक करके इनके बारे में पढ़ेंगे. इनमें से फर्स्ट स्टेप है सोशल करंसी. सेकंड स्टेप है ट्रिगर और थर्ड स्टेप है इमोशन. फोर्थ स्टेप है पब्लिक, और फिफ्थ स्टेप है प्रैक्टिकल वैल्यू और सिक्स्थ स्टेप है स्टोरीज.
इस बुक के खत्म होते-होते आप ये सीख चुके होंगे कि क्यों कुछ आईडिया फटाफट वायरल हो जाते है और
आप ये भी सीखेंगे कि कैसे नेक्स्ट ट्रेंड क्रिएट किया जाए. कुल मिलाकर ये बुक आपको कंटेजियस बनना
सीखा देगी.

Social Currency
चलिए, अब कंटेजियस के पहले स्टेप की बात कर लेते है. सोशल करंसी का क्या मतलब है? कोई आईडिया
हो सकता है, स्टोरी या कोई नया प्रोडक्ट, या एक थॉट या फिर कोई एक्सपिरिएंस जो कोई इंसान दूसरों से
शेयर करना चाहता है. आदमी सोशल एनिमल होता है और जो चीज़ उसे पसंद आती है, उसे दूसरों से शेयर
करना चाहता है. हम लोग आपस में एक जुड़ाव, एक कनेक्शन महसूस करना चाहते है. और यही वजह है
कि हम सोशल करंसी यूज़ करते है. मान लो आपने ओनलाइन नए शूज़ खरीदे. आपको जूते पसंद आते है, फिटिंग भी बढिया है. आप जूते पहन का रूम के अंदर चलकर देखते है. आपको जूते बड़े आरामदायक लगते है तो आप उसके बारे में अपने दोस्तों को भी बताते है, यानी आप अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते है. जो आपको अच्छा लगा, आप चाहते है कि दुसरे भी उसका फायदा उठाये. इसी को सोशल करंसी बोलते है.
बेशक, ऑनलाइन हो या ऑफलाइन आप दूसरों की नजरों में सक्सेसफुल, इंट्रेस्टिंग, स्मार्ट और कूल बनना
चाहते हो. ऑफलाइन आप माउथ पब्लिसिटी करते हो. आप अपनी जान-पहचान वालो के साथ पोजिटिव
एक्स्पिर्येसेस शेयर करते हो. ऑनलाइन आप सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म यूज़ करते हो. आप अपनी बेस्ट
फ़ोटोज़ और वीडियोज शेयर करते हो. इसे कुछ इस तरह से सोचो, हर एक स्टोरी या आईडिया आर्केड के एक टोकन या कॉइन की तरह है. अगर लोगों को आपकी स्टोरी अच्छी लगती है तो आप जीत गये और आपका सोशल स्टेटस भी इम्प्रूव हो जाता है. तो आपके और ज्यादा सोशल करंसी कैसे पा सकते इसके तीन तरीके है. पहला है इनर remarkability.

दूसरा है गेम मैकेनिक्स और तीसरा तरीका है लोगों को इनसाइडर की तरह फील कराना. इनर remarkability का रूट वर्ल्ड है remarkable. कोई भी प्रोडक्ट, स्टोरी या आईडिया जो कुछ हटकर हो, कंटेजियस बन जाता है. 2002 में एक बेवरेज कंपनी Snapple ने एक remarkable मार्केटिंग कैंपेन निकाला. कंपनी ने हर Snapple बोटल की कैप के अंदर फन फैक्ट्स लिखने शुरू किये. तो जब भी आप
Snapple की बोटल खरीदते थे तो आपको एक फन फैक्ट मिलता था. हालाँकि ये रैंडम फैक्ट्स होते थे पर
ये बड़े इंट्रेस्टिंग ट्रिविया होते थे जो आप दोस्तों के साथ शेयर कर सकते थे. एक एक्जाम्पल है फैक्ट#12 कंगारूज़ बैकवर्ड यानी पीछे की तरफ नहीं चल सकते. एक और इंट्रेस्टिंग फैक्ट #37 एक एवरेज इंसान अपनी लाइफ के दो हफ़्ते ट्रेफिक लाईट के चेंज होने का इंतज़ार करने में बिता देता है. लोग इन remarkable आईडियाज़ या स्टोरीज़ को उन लोगों से शेयर करना चाहते थे जो उनके करीबी होते थे क्योंकि वो अपनी सोशल करंसी बढ़ाना चाहते थे. एक और तरीका है ज्यादा सोशल करंसी हासिल वो है गेम मैकेनिक्स. हर साल दिसम्बर में स्टारबक्स एक प्रोमो रीलीज़ करता है जिसमे कस्टमर को क्रिसमस सीजन ड्रिंक्स के 12 डिफरेंट वैरराईटीज़ खरीदनी होती है. अगर आपने स्क्रैच कार्ड में सारे ड्रिंक्स कम्प्लीट कर दिए तो मतलब आप खुद का स्टारबक्स प्लानर जीत गए. पर आप इसे कैश के लिए नहीं खरीद सकते थे. आपको गेम मैकेनिक्स फॉलो करना होता था ताकि आपको एक्सक्ल्यूसिव स्टारबक्स प्लानर मिल सके.

तो ये है गेम मैकेनिक्स. और ये इसलिए कंटेजियस है क्योंकि इंसान को हमें शा से ही गेम्स बहुत अट्रेक्ट
करते है. चाहे ईनाम छोटा सा ही क्यों ना हो पर जीतने वाले को बड़ी ख़ुशी मिलती है. ज़रा याद कीजिये वो रीवार्ड्स जो आपको ग्रोसरी स्टोर या गैस स्टेशन पर मिलते है? और आपकी फेवरेट एयरलाइन या फिटनेस जिम में आपको मिलने वाले मेंबरशिप रिवार्ड्स या पर्क्स ? सोशल करंसी बढाने का जो लास्ट तरीका है वो है लोगों को इनसाइडर फील कराना. क्या आपने कभी किसी रेस्ट्रोरेन्ट में सीक्रेट डोर के बारे में सुना है? वहां ऐसा कोई साईन या पोस्टर नहीं दिखेगा जिससे लोगों को पता चले कि अंदर कोई रेस्टोरेंट है, पर जो अक्सर वहां साते है रन्हें मालम होता है कि किस तरफ से दरवाजा खोलकर अंदर जाना है.

एक्जाम्पल के लिए’ प्लीज़ डोंट टेल” नाम से न्यू यॉर्क में एक सीक्रेट एंट्रेस वाला बार है. इस बार के मालिक
है ब्रायन शबाइरो और क्रिस एंटिस्टा. “प्लीज़ डोंट टेल” का एंट्रेस दरवाजा एक फोन बूथ के अंदर से खुलता है.
ठीक वैसा ही जैसा सुपरमेन यूज़ किया करता था. ये फोन बूथ एक हॉट डॉग रेस्टोरेंट’ क्रिफ डॉग्स’ के
अंदर है, जो ब्रायन और क्रिस का ही है. जब आप फोन बूथ के अंदर दाखिल होते हो और नंबर डायल करते हो
तो आपसे पुछा जायेगा” क्या आपने टेबल बुक कराई है’ क्यों? क्योंकि “पलीज़ डोंट टेल’ हमें शा पूरी तरह से
बुक रहता है. तो देखा आपने ये है लोगों को इनसाइडर फील कराने का कमाल.

Contagious
Jonah Berger
Triggers

आपको क्या लगता है कौन से आईडियाज़ ज्यादा वाइरल होते है? इंट्रेस्टिंग या बोरिंग? तो जवाब है दोनों. एक ट्रिगर, एक साईट, एक स्मेल, एक शब्द यानी कोई भी चीज़ हमें एक आईडिया से दुसरे आईडिया की याद दिला सकती है. अब ये जरूरी नहीं कि आईडिया इंट्रेस्टिंग हो, पोजिटिव हो या नेगेटिव हो. कोई भी चीज़ वर्ड ऑफ़ माउथ यानी बात को फ़ैलाने में एक ट्रिगर का रोल प्ले कर सकती है. और एडवेरटाईजर्स इन्ही ट्रिगर्स का फायदा उठाते है. अब जैसे किटकैट कैंपेन को ही ले लो, जहाँ किटकैट को कॉफ़ी से जोड़ दिया गया है यानी किटकैट खाने से कॉफ़ी पीने जैसी एनर्जी मिलती है. क्योंकि लोग ज्यादा कॉफ़ी पीते है इसलिए किटकैट के एडवरटाईजर्स को यकीन है कि कॉफ़ी देखते ही लोगों को किटकैट की याद आ जायेगी. 2007 की बात है, किटकैट का बिजनेस Hershey के पास जा रहा था. Hershey के पास कस्टमर्स को लुभाने के लिए हर प्रोडक्ट था, रीज़ से लेकर किसेस तक सब कुछ. ऐसे में किटकैट को मार्किट में अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए जल्द से जल्द कोई तरीका ढूंढना था. तब कॉलीन चोरक को हायर किया गया. किटकैट को फिर से जिंदा करने के लिए और तब” गिव मी अ ब्रेक” कैम्पेन पास किया गया जिसके लिए उन्हें नए आईडियाज की जरूरत थी.

कॉलीन को एक ऐसा आईडिया आया जिससे लोगों को ज्यादा से ज्यादा किटकैट की याद आये. पर उनका
ये आईडिया 80 के दशक का कोई कैची सोंग नहीं था. कॉलीन ने किटकैट को कॉफ़ी के साथ जोड़
दिया. एड में कॉफ़ी और किटकैट टेबल में साथ-साथ दिखाए जाते है. इसमें दिखाया गया है कि जब भी
आपको ब्रेक की जरूरत महसूस हो आप कॉफ़ी और किटकैट ले सकते है. जैसे दोनों बेस्ट फ्रेंड्स हो.
ये कैंपेन काफी हिट रहा. किटकैट ब्रांड का प्रॉफिट $300 मिलियन से बढ़कर $500 तक पहुँच गया था.
अचानक से किटकैट बहुत ज्यादा बिकने लगी. और ये सब इसलिए हुआ क्योंकि कॉफ़ी ने किटकैट के लिए
एक ट्रिगर की तरह काम किया. तो कोई भी चीज़ माउथ पब्लिसिटी से हिट हो सकती है. जो भी चीज़ लोगों को शेयर करने लायक लगे, लोग उसे दूसरों से शेयर करना पसंद करते है. चाहे कोई स्टोरी इंट्रेस्टिंग हो या बोरिंग चाहे कोई एक्स्पिरिएन्स पोजिटिव हो या नेगेटिव, लोग उसे शेयर जरूर करते है. तो आखिर वो कौन से ट्रिगर होते है जो एक आईडिया को कन्टेजियस बनाते है? तो जवाब है कि ट्रिगर कुछ भी हो सकता है. वो आईडिया टॉप ऑफ़ द माइंड में होना चाहिए. ऐसी कोई भी चीज़ जो उस वक्त आपको किसी चीज़ की याद दिलाये. यानी ट्रिगर कोई भी चीज़ हो सकती है जो आपके माइंड में उस वक्त आये और आपको एक्शन लेने पर मजबूर करे.

चलिए अब एक और चॉकलेट ब्रांड की बात करते है. इस नटी कैरेमल चॉकलेट बार का नाम है Mars.
1997 में नासा ने पाथफाइंडर मिशन लांच किया था. इसका गोल था एक ऐसा लैंडर लांच करना जो Mars
की जमीन से, क्लाइमेट और उसके atmosphere से सैंपल कलेक्ट कर सके. इस मिशन में कई मिलियन
डॉलर खर्च किये गए थे और मिशन सक्सेसफुल रहा था. पाथफाइंडर अपना टास्क पूरा करने के बाद
सलामत धरती पर लौट आया. अब Mars चॉकलेट बार का नासा के इस मिशन से कोई लेना देना नहीं था. बल्कि ये चॉकलेट तो फ्रैंकलिन Mars के नाम पर रखी गई थी जोकि कंपनी के फाउंडर थे. लेकिन जैसा कि आप जानते है Mars नाम उन दिनों कंटेजियस हो गया था, और इसिलए Mars की चॉकलेट की सेल्स भी रातो-रात आसमान पर पहुँच गई. हालाँकि कंपनी ने अपनी तरफ से सेल्स इनक्रीज करने की कोई कोशिश नहीं की थी. ये सिर्फ एक इत्तेफाक था कि एक ही नाम की वजह से लोगों ने Mars को चॉकलेट से जोड़ लिया था. उस वक्त Mars ने किसी भी तरह की एडवरटाईजिंग या मार्केटिंग में इन्वेस्ट नहीं किया था. कंपनी का कोई कैम्पेन भी नहीं चल रहा था. पर Mars नाम सुनकर ही लोगों को Mars मिशन की याद आ जाती थी और लोग Mars चॉकलेट बार खरीदने के लिए टेम्पटेड हो जाते थे.

Emotion
क्या आपने कभी सोचा है क्यों कुछ आर्टिकल या ब्लॉग बाकियों से ज्यादा शेयर किये जाते है? तो इसका जवाब है क्योकि वो लोगों में ईमोशंस जगा देते है. कोई भी कंटेंट जिससे लोगों को ख़ुशी मिले, गुस्सा आये, डर लगे या उदास कर जाए, ऐसे कंटेट को ज्यादा से ज्यादा व्यूज़ मिलते है. अगर आप कंटेजियस होना चाहते हो तो आपको लोगों को ये फील कराना होगा कि आप उनकी केयर कर रहे हो. चाहे आप कोई फिल्म स्क्रिप्ट लिख रहे हो या कोई कमर्शियल बना रहे हो या कोई ब्लॉग या बुक लिख रहे हो, जब तक आप
लोगों के इमोशंस नहीं जगाओगे आप पोपुलर नहीं हो सकते. तो आप कंटेजियस होने के लिए क्या करोगे? आप अभी चाहे जो भी जॉब कर रहे हो, चाहे जिस भी प्रोडक्ट या टॉपिक को पोपुलर बनाना चाहते हो,
आपको लोगों की फीलिंग्स पर फोकस करना होगा. आप चाहे अपनी प्रेजेटेशन में कितने ही फिगर्स या
फैक्ट्स शेयर करे किसी को फर्क नहीं पड़ता पर जहाँ आपने उनके ईमोशंस जगा दिए लोग ध्यान से आपकी बात सुनने लगते है. आपने देखा होगा सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चे, किटन्स या पपीज काफी हिट टॉपिक होते है. इनके वीडियोज़ लोगों में इतने पोपुलर इसलिए होते है क्योंकि ये लोगों का दिल छू लेते है और लोगों को बड़े क्यूट लगते है. यहाँ हम आपको एक टिप देते है. अगर कभी आपको कोई टेक्निकल सब्जेक्ट, बैंकिंग या इन्वेस्टमेंट जैसे टॉपिक पर भी बात करनी हो तो भी आप अपनी स्पीच को कंटेजियस बना सकते है.

आपका फोकस हमें शा लोगों के ईमोशंस पर होना चाहिए. अपने कमर्शियल एड, प्रेजेटेशन, ब्लॉग,
आर्टिकल, स्पीच वगैरह में इमोशंस लाने की कोशिश करो जिसे देखकर या सुनकर आपकी ऑडियंस को
कुछ फील होना चाहिए. ईमोशंस से कही हुई बातो को लोग ज्यादा वक्त तक याद रखते है और दूसरों से शेयर भी करते है. Anthony Cafaro गूगल की क्रिएटिव लैब टीम का मेंबर है. उसे गूगल के ग्राफ़िक डिजाईन इम्प्रूव करने के लिए हायर किया गया था. उन दिनों क्रिएटिव लैब एकदम नया कांसेप्ट था. तब गूगल भी अपने शुरुवाती दौर में था. इसलिए उन दिनों गूगल का मेन फोकस सिर्फ एनालिटिक्स पर होता था, उस वक्त ईमोशंस जैसा कोई कांसेप्ट उनके दिमाग में आया नहीं था. क्रिएटिव लैब के ज्यादातर आईडिया हायर पोजीशन में बैठे लोग रिजेक्ट कर दिया करते थे. फिर एक दिन टीम को एक ऐसा कंटेंट क्रिएट करने का काम मिला जो गूगल के नए सर्च इंटरफेस को हाईलाईट करे. क्रिएटिव लैब के एक टीम मेंबर ने सुझाव दिया कि इस पर एक टूटोरियल वीडियो बनाया जाए” कि कैसे बैटर सर्च किया जाए”. एक दुसरे मेंबर ने ऑनलाइन ट्रिविया गेम डेवलप करने का आईडिया दिया.

इसी बीच Anthony Cafaro ने देखा कि गूगल में सब कुछ है सिवाए ईमोशंस के. गूगल के पास एक अमेजिंग इंटरफेस था जो लोगों को काफी हेल्पफुल सर्च रीज्ल्ट देता था. लेकिन ये अपने यूजर्स के ईमोशंस के साथ जुड़ा हुआ नहीं था. तो Anthony ने सोचा क्यों ना एक स्टोरी वीडियो बनाई जाए जिसे उसने “Parisian Love” नाम दिया. इसमें एक लव स्टोरी थी जो गूगल पर सर्च क्वेरीज़ के जरिये बताई जा रही थी. इस वीडियो क्लिप में कोई एक्टर या वौइस् कुछ भी नहीं था. सिर्फ म्यूजिक था और वर्ड्स जो सर्च बार में टाइप होते थे. वीडियो कुछ ऐसे शुरू होता था” एक लड़का “study abroad Paris France” सर्च कर रहा है. और उसे रिजल्ट्स मिलते है. फिर वो “cafes near Louvre museum” टाइप करता है और रिजल्ट्स
पढ़ता है. इसके बाद लड़का जब ये टाइप करता है “translate tu es tres mignon” तो उसे दूर कहीं से किसी लड़की एक हंसने की आवाज़ आती है क्योंकि इस फ्रेंच में इस सेंटेस का मतलब होता है “you are very cute”. वीडियो चलती रहती है, फिर लड़का सर्च करता है “how to impress a French girl”
फिर वो लड़का लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप एडवाइज, जॉब्स अवलेबल इन पेरिस, प्लेन की लैंडिंग टाइम और ब्यूटीफुल पेरिस चर्च वगैरह सर्च करता है.

एक ऑडियंस एक तौर पर आप गूगल सर्च के श्रू डेटिंग से लेकर शादी होने तक ये पूरी स्टोरी देख लेते
हो. और फिर जब लड़का सर्च करता है “how to assemble a crib” तो ये स्टोरी एक हैप्पी एंडिंग
के साथ खत्म हो जाती है. और व्यूवर्स एक लडके की एक प्यारी फ्रेंच लड़की के साथ डेटिंग से लेकर शादी
और बच्चा होने तक की पूरी कहानी से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते है. पूरी क्रिएटिव लैब ने मिलकर ये वीडियो प्रेजेंट किया. ये वीडियो गूगल सर्च मार्केटिंग टीम को बहुत पसंद आया. इस वीडियो को देखकर टीम मेंबर बड़े ईमोशनल और इंस्पायर्ड हुए. सीईओ की वाइफ तक इस वीडियो से बड़ी प्रभावित हुई. ये वीडियो तुरंत गूगल पर कंटेजियस हो गया और तब गूगल ने फैसला लिया कि वो इस वीडियो को पब्लिक
में रीलीज करेंगे. गूगल टीम के साथ-साथ ये वीडियो पब्लिक को भी उतना ही पसंद आया, इस तरह से
गूगल का ये वीडियो वाइरल हिट हो गया.

Public
ये इस चैप्टर का लेसन है. जो सब कर रहे है वहीं कंटेजियस बन जाता है. जब लोगों को समझ नहीं
आता कि उन्हें क्या करना चाहिए तो वो कॉपी करने लगते है या जो उनके साथ वाला कर रहा होता है, वही
करने लग जाते है. इसीलिए तो बारटेंडर्स या बरिस्तास टिप ज़ार में अपनी जेब से सिक्के निकाल कर डालते
है ताकि उन्हें देखकर कस्टमर्स भी अपनी टिप जार में डाल दे. आपने गौर किया होगा जब कभी रेस्ट्रोरेन्ट
वगैरह में एक दोस्त टिप दे रहा होता है तो दूसरा दोस्त भी टिप जरूर देता है. मान लो आप किसी नये शहर में आये हो, आप वहां किसी को नहीं जानते इसलिए आपको ये भी नहीं पता कि शहर में अच्छा खाना कहाँ मिलेगा. तो आप अपने फ्लैट से बाहर निकल कर आते है और इधर-उधर घूमने लगते है. आप सोच रहे है कि अब खाने के लिए कहाँ जाए ? आपको रेस्टोरेंट, स्टाल, डाईनर, हर जगह कस्टमर्स की भीड़ दिखाई देती है, तभी आपको एक लंबी लाईन नजर आती है जहाँ लोग खाने का ऑर्डर देने के लिए खड़े है, आप भी लोगों की देखा-देखी उर लाईन में लग जाते है. यानी आप वही कर रहे हो जो हर कोई कर रहा है. आपको लगता है यहाँ का खाना जरूर अच्छा होगा, तभी तो वहां इतनी भीड़ लगी है. इसी तरह अगर आप चाहते है कि आपका प्रोडक्ट बिके, तो उसे ज्यादा से ज्यादा पब्लिक की नजर में लेकर आओ. सेम यही चीज़ आपके आईडिया के साथ भी है, इसे जितना हो सकते पब्लिक कर दो. कंटेजियस बनने का सीक्रेट है पब्लिक विजिबिलिटी.

एक बार स्टीव जॉब्स पॉवरबुक जी4 का सही डिजाईन डिसाइड नहीं कर पा रहे थे. ये Apple का नया
प्रोडक्ट था और अब तक का सबसे पतला लैपटॉप था. इसकी मोटाई सिर्फ एक इंच रखी गई थी. जैसा कि
इससे पहले के प्रोडक्ट्स के साथ भी हुआ था, स्टीव जॉब्स इस लैपटॉप के डिजाईन, पैकेजिंग और कस्टमर
एक्सपिरिएंस को लेकर बड़े पैशनेट थे. लेकिन स्टीव जॉब्स कुछ डिसाइड क्यों नहीं कर पा रहे थे ? एक टाइम था जब Apple लोगों अपसाइड डाउन यानी उल्टा था. जब लैपटॉप बंद होता था तो Apple की बाईट वाली साइड यूजर की तरफ होती थी. ज़रा सोचिये, ये कैसा लगता होगा. जब आप इसे बैग से निकालोगे, अपनी टेबल पर रखोगे और खोलोगे तो Apple आपकी तरफ होगा. स्टीव जॉब्स ने इस बारे में काफी सोचा. अगर पॉवरबुक इसी तरह रहा तो जो लोग Apple यूज़ करते है, उनके लिए लोगों हमें शा उल्टा रहेगा. और ये
सिचुएशन कहीं भी आ सकती थी, कॉफी शॉप, लाइब्रेरी या रेस्टोरेंट में कहीं भी. तो स्टीव जॉब्स को कुछ ना कुछ डिसाइड करना था. ज़ाहिर है Apple का लोगों उनके लिए सबसे इम्पोर्टेट था. इसकी ओरिएंटेशन डिजाईन का जरूरी हिस्सा थी बेशक पॉवरबुक जी4 इसे यूज़ करे या ना करे.

तो कौन सा ज्यादा पब्लिक है? कौन सा ज्यादा कंटेजियस है? कौन ज्यादा इम्पैक्ट डाल सकता है?
Apple का लोगों जो यूजर्स के ठीक सामने होगा या जो लोगों को बाहर से दिखेगा? कौन सी साइड में
Apple का लोगों ज्यादा पॉवरफुल लगेगा ? अब तो आपको पता चल गया होगा, स्टीव जॉब्स ने
अपना डिसीजन ले लिया था. जब भी आप Apple का लैपटॉप ओपन करोगे, कॉफी शॉप या किसी भी
जगह, हर कोई उस लोगों को देख सकता है. लोगों को Apple उल्टा नजर नहीं आएगा. पब्लिक विजिबिलिटी के बारे में एक और कांसेप्ट आप सीख सकते है. ये इन गिफ्ट्स या चीजों के बारे में जो
आपको किसी इवेंट में पार्टीसिपेंट करने पर मिलते है जैसे Marathon , कोई कांफ्रेंस या जब आप
किसी शॉप से प्रोडक्ट्स खरीदने जाते हो. इसे हम” बिहेवियरल रेज़िड्यू” बोलते है. जब आप Marathon में पार्ट लेते हो, आप चाहे जीतो या ना जीतो, पर आपके पास Marathon की शर्ट होती है, नंबर होता है यहाँ तक कि रिस्टबैंड भी होता है जो सुबूत है कि आपने Marathon में भाग लिया था. लोग आपके पास ये चीज़े देखते ही समझ जाते है कि आपने Marathon में पार्ट लिया था. सेम यही चीज़ कांफ्रेंस, सेमिनार, वर्कशॉप के साथ
भी होती है जो आप अटेंड करते हो. आपके पास उन जगहों के pamphlet, पेन या टम्बलर्स हो सकते है
जिससे देखने वालो को पता चलता है कि आप वहां गये थे. तो ये गिफ्ट्स उन इवेंट्स की पब्लिक विजीबीलीटी है जिससे एक तरह से उन इवेंट्स की पब्लिसिटी होती है.

पब्लिक विजीबीलीटी का सबसे बेस्ट एक्जाम्पल है रीयूज़ेबल बैग. जैसे Victoria’s Secret, Tiffany’s, Bloomingdale’s या दूसरे ब्रांड जो अपने पेपर बैग या रीयूज़ेबल बैग डिजाईन करते है ताकि जब आप वो बैग लेकर कहीं जाए तो लोग उस ब्रांड के लोगों देखकर समझ जायेंगे कि आपने उस ब्रांड की शोपिंग की है. तो ये भी एक तरह से एडवरटीज़मेंट का तरीका है. ये एक पॉवरफुल पब्लिक विजीबीलीटी टैक्टिक है.
आपके फ्रेंड्स या कलीग्स आपसे उस प्रोडक्ट के बारे में पूछते है या उस बुटीक में आपके एक्सपिरियेंस के बारे में मालूम करना चाहते है. और फिर आपकी देखा-देखी वो भी सेम ब्रांड की चीज़े खरीद लेते है.

Practical Value
प्रैक्टिकल वैल्यू से हमें क्या समझना चाहिए? यानी प्रैक्टिकल टिप्स, हाउ टू वीडियोज़, यूजफुल इन्फोर्मेशन
जो हम सबके साथ शेयर करते है. ये सब कंटेजियस होते है, क्योंकि हम इन्हें शेयर करके दूसरों को भी
जानकारी प्रोवाइड कराना चाहते है. इससे हमारी सोशल बोन्डिंग भी मजबूत होती है. जरा अपने फेवरेट सोशल मिडिया इन्फ्लुएंसर के बारे में सोचो या अपने फेवरेट यूट्यूब चैनल के बारे में? आपने
अब तक शायद ढेर सारे हाउ टू वीडियोज़ देखे होंगे जैसे कि make-up tutorial, how to bake cookies, how to repair the bathroom sink, how to catch more fish, वगैरह- वगैरह. ये वीडियो इसलिए वायरल होते है क्योंकि ये लोगों को ऐसी काम की जानकारी देते है जो उन्हें चाहिएऔर हम इन वीडियोज़ को इसलिए शेयर करते है क्योंकि हम दूसरों की रियल में हेल्प करना चाहते है या उनकी लाइफ को बैटर बनाने में उनकी हेल्प करना चाहते है. इसे हम आलटूरिज्म बोलते है. इसका एक और एक्जाम्पल है जब राह चलते कोई अजनबी हमसे डायरेक्शन पूछता है या टाइम पूछता है तो हम बता देते है. आप प्रैक्टिकल वैल्यू को एक तरह से एडवाइज भी मान सकते है जो आप दूसरों को देते है, क्योंकि आप उनकी केयर करते हो. जैसे हम किसी को अपने अनुभव से बताते है कि बच्चो के लिए कौन सा डायपर ब्रांड बेस्ट रहेगा? या कौन सी वेजिटेरियन रेसिपी बहुत स्वादिष्ट होती है? कहाँ से आपको बेस्ट insurance plan मिलेगा?

अगर आप भी अपने आईडिया को कंटेजियस बनाना चाहते हो तो उसकी प्रैक्टिकल वैल्यू को हाईलाईट करो. अपने फॉलो वर्स के साथ टिप्स और एडवाइज शेयर करो. आप चाहे जो भी हो, एक एंटप्रेन्योर या मार्केटर, अपने प्रोडक्ट्स की प्रैक्टिकल वैल्यू पर ज़ोर’ दो और शेयर करो. क्या इससे लोगों की प्रोब्लम सोल्व होती है ? इसके स्टेप्स फॉलो करने कितने ईजी है? सोचो कि आप लोगों को लाइफ बैटर बनाने के लिए क्या कर सकते हो? आपका प्रोडक्ट कैसे उनकी लाइफ में इम्पेक्ट डाल सकता है? क्योंकि प्रैक्टिकल वैल्यू के जरिये ही आप कंटेजियस बन सकते हो.
Stories
अच्छी कहानियाँ सबको पसंद आती है. हर गाना, हर कमर्शियल एड, पिक्चर, ब्रांड एक स्टोरी ही तो है. क्या
आपको ऐसा नहीं लगता? एक बार कोई अगर कहानी शुरू कर दे तो हम पूरी सुने बिना नहीं रहते.
सिर्फ कोरी जानकारी लोगों को मजेदार नहीं लगती पर स्टोरीज़ लगती है. इसलिए अगर आप चाहते है कि  आपका कमशियल एड, ब्लॉग, अर्टिकल, प्रेजेंटेशन, स्पीच, वीडियो क्लिप कंटेजियस हो जाए तो उसकी शुरुवात आपको एक स्टोरी से करनी होगी. ये स्टोरी इस बात को प्रूव करती है. क्या आपने कभी Jared Fogle और उनकी सबवे डाइट के बारे में सुना है? जार्ड एक कॉलेज स्टूडेंट था जिसकी लाइफस्टाइल काफी अनहेल्दी थी. उसे जंक फूड खाने की बड़ी आदत थी और वो कभी एक्सरसाइज़ नहीं करता था. इस वजह से Jared का वजन 425 पाउंड तक पहुँच गया था.

उसके रूममेट को उसकी बड़ी फ़िक्र रहती थी. Jared की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही थी और उसे
जल्द से जल्द इस बारे में कोई कदम उठाने की जरूरत थी. यही कारण था कि Jared ने डिसाइड किया कि
वो अब से एक सबवे डाइट स्टार्ट करेगा. लेकिन ये डाइट क्या थी? लंच में Jared सबवे से एक फूट लंबा वेजी सब लेता था और डिनर के लिए वो एक सिक्स इंच टर्की सब खाता था. कई महीनो तक Jared ने सिर्फ सबवे के सैंडविच ही खाए. तीन महीने तक यही डाईट फॉलो करने के बाद Jared का वेट 100 पाउंड कम हुआ. उसकी कमर 60 इंच से घट कर 34 इंच रह गई थी. ओवरआल Jared ने 245 पाउंड घटाए. यही नहीं वो सब-वे ने उसे अपनी एडवरटीज़मेंट का चेहरा भी बना लिया था. काफी अमेजिंग स्टोरी है ना? एक आदमी जिसने कई महीनो तक सिर्फ फास्ट फड खाया और कल नहीं असल में Jared की स्टोरी सबसे पोपुलर वेट loss स्टोरीज़ में से एक बन गई.

ये स्टोरी है तो काफी सिंपल पर इसमें चार पॉइंट है जो लोग इस स्टोरी से सीख सकते है. फर्स्ट पॉइंट, ये है कि सब-वे के पास हेल्दी ऑप्शन भी है, हालंकि उनके मेन्यू में ज्यादातर सैंडविच ही है. सेकंड पॉइंट: क्या कोई सिर्फ सब-वे का खाना खाकर वेट लूज कर सकता है? थर्ड पॉइंट; Jared ने सिर्फ एक-आध पाउंड्स नहीं घटाए बल्कि काफी वेट लूज़ किया था. और फ़ोर्थ पॉइंट: क्या सब-वे के सैंडविच इतने टेस्टी है कि कोई
आदमी उस महीनो तक लगातार खाता रहे. देखा आपने? ये होती है स्टोरी की पॉवर. अगर आप को इन्फोर्मेशन किसी स्टोरी के रूप में शेयर करते हो तो वो लोगों को ज्यादा वक्त तक याद रहती है. क्योंकि
स्टोरी का नरेटीव हमें बाँध लेता है, हमें सुनने पर मजबूर कर देता है, उस स्टोरी से हमारे ईमोशन जुड़
जाते है, और सबसे बड़ी बात तो ये है कि हम वो स्टोरी सच लगती है. अगर कोई आपको कोई अच्छी स्टोरी
सुनाए तो इस बात की 100% गारंटी है कि आप उसे दूसरों से शेयर किये बिना नहीं रह पायेंगे. तो आपकी
फेवरेट स्टोरी क्या है? क्या आपको याद है आपने इसे कितनी बार शेयर किया था?

Conclusion
चलिए जल्दी से एक रिकैप कर लेते है. कंटेजियस बनने के सिक्स प्रिंसिपल्स स्टेप्स कहलाते है यानी
सोशल करंसी, ट्रिगर्स, इमोशंस, पब्लिक, प्रैक्टिकल वैल्यू और स्टोरीज़. सोशल करंसी है एक्स्पिरियेस शेयर करना जो हमारा सोशल स्टेट्स बढाए और हमारा सोशल बांड स्ट्रोंग करे. आपने इस बुक में इनर रिमार्केबिलिटी, गेम मैकेनिक्स और लोगों को इनसाइडर की तरह फील कराने के बारे में सीखा. अब आप अपने फ्रेंड्स के साथ Snapple कैप फैक्ट्स, स्टारबक्स प्लानर्स और “प्लीज़ डोंट टेल बार” शेयर कर सकते हो. ट्रिगर से हमारा मतलब है वो आईडियाज़ जो लोगों को एक-दुसरे से कनेक्ट करते है. आपने ये सुना
होगा कि जब नासा ने Mars में पाथफाइंडर मिशन launch किया था तो चॉकलेट बार Mars के
प्राइस अचानक बढ़ गए थे. हालाँकि ये कोई मार्केटिंग कैंपेन नहीं बल्कि सिर्फ एक इत्तेफाक था.
इमोशंस हमें बहुत अटैच्ड फील कराते है. आपको पता होगा कि कई साल पहले गूगल सिर्फ एनालिटिक्स

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