Buyology: Truth and Lies About Why We Buy By Martin Lindstrom. Books In Hindi Summary Pdf

Buyology: Truth and Lies
About Why We Buy
By Martin Lindstrom
इंट्रोडक्शन

एक एलियन का रीज़ (Reese) चॉकलेट खाना, टॉम क्रूज़ का रे-बैन का सनग्लास पहनना, नाइकी का
सिग्नेचर स्वूश (swoosh) का सिंबल, यूनिलीवर का X9 फैक्टर और Apple का वो प्रोडक्ट जिसे स्टीव
जॉब्स ने डस्टबिन में फेंक दिया था. ये कुछ ऐसी कहानियाँ हैं जो आप इस समरी से जानेंगे. केलोग्स के ब्रेकफास्ट सीरियल और गिनीज़ बियर की बोतल के पीछे भी एक कहानी है. आप उन्हें एक-एक करके जानेंगे. प्रोडक्ट प्लेसमेंट लुमियर ब्रदर्स का नाम फिल्म मेकिंग के साथ साथ-साथ प्रोडक्ट प्लेसमेंट में भी सबसे आगे हैं. लीवर कंपनी के सनलाइट साबुन के बार, अक्सर उनकी शार्ट फिल्म में दिखाई देते थे. ऐसा इसलिए था क्योंकि उनका एक प्रोडक्शन स्टाफ लीवर ब्रदर्स कंपनी के लिए एक पब्लिसिस्ट का पार्ट-टाइम काम करता था. इस कंपनी को अब यूनिलीवर के नाम से जाना जाता है.
1932 में, व्हाइट आउल सिगार (White owl Cigars) कंपनी ने ‘स्कारफेस’ (Scarface) फिल्म प्रोडक्शन को 250,000 डॉलर दिए, ताकि फिल्म का हीरो, एक्टर, पॉल मुनि स्क्रीन पर सिगार स्मोक करें.

1940 के दशक में, वार्नर ब्रदर्स की फिल्में हमेशा जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा स्पांसर किया जाता था. उनकी
फिल्मों में हमेशा बैकग्राउंड पर जनरल इलेक्ट्रिक रेफ्रिजरेटर होते हैं. उधर, हर रोमांटिक मूवी के लिए,
वार्नर ब्रदर्स ने भी डी-बीयर्स कंपनी के डायमंड रिंग्स का इस्तेमाल किया. क्या आपने स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ई.टी एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल देखि है? ये एलियट नाम के एक लड़के की कहानी है जिसे अपने घर के पीछे के जंगल में एक एलियन मिलता हैं. फिल्म में, एलियन को बाहर आने के लिए मनाने के लिए एलियट ने चॉकलेट के टुकड़े जमीन पर रखे थे. ये चॉकलेट, Hershey कंपनी के रीज़ (Reese) चॉकलेट के टुकड़े थे जिसे फिल्म में साफ़-साफ़ देखा जा सकता है. फिल्म बनाने के दौरान, डायरेक्टर स्पीलबर्ग ने पहले
M&M कंपनी से कांटेक्ट किया था, और। कि क्या वे फिल्म में अपनी चॉकलेट प्रमोट करना
चाहते हैं. लेकिन M&M ने इस प्रपोजल को ठुकरा दिया था. Hershey कंपनी को इसके बारे में पता
चला और अपने प्रोडक्ट रीज़ पीसेस को प्रमोट करने का ऑफर दिया. स्पीलबर्ग फ़ौरन मान गए.
ये एक अच्छा फैसला था क्योंकि ई.टी एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल मूवी के रिलीज़ होने के बाद, उस चॉकलेट
पूछा था

ये एक अच्छा फैसला था क्योंकि ई.टी एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल मूवी के रिलीज़ होने के बाद, उस चॉकलेट
के की सेल्स तीन गुना बढ़ गई. मूवी प्रीमियर के दो महीने बाद भी, अमेरिका के मूवी थिएटर में रीज़ पीसेस रखे जाते थे. लोगों का फिर भी इस चॉकलेट से दिल नहीं भरता था. अब प्रोडक्ट प्लेसमेंट के दूसरे सक्सेस की कहानियाँ सुनते हैं. 1980 के दशक में, सनग्लास बनाने वाली कंपनी रे-बैन को अपने बिज़नस में मुश्किलें आ रही थी. उनके सेल्स ठप्प थे. लेकिन ये प्रॉब्लम तब तक ही रहा था जब तक उनका ‘रिस्की बिज़नस’ फिल्म के डायरेक्टर पॉल ब्रिकमैन के साथ एक डील नहीं हुआ था. डील ये था कि फिल्म के हीरो टॉम क्रूज़ फिल्म में रे-बैन की रेट्रो-लुक सनग्लास का यूज़ करेंगे. फिल्म ब्लॉकबस्टर हुई और रे-बैन की सेल्स 50% बढ़ गई. कुछ साल बाद, टॉम क्रूज़ ने ‘टॉप गन’ फिल्म में भी  एक्टिंग की. एक सीन था जहां उन्होंने फाइटर जेट की सवारी की और उन्होंने एविएटर रे-बैंस पहनी थी. कंपनी की सेल्स एक बार फिर 40% बढ़ गई. आपको ‘मेन इन ब्लैक’ में विल स्मिथ के सनग्लास शायद याद ही होंगे. वो भी रे-बैन ही था. फिल्मों में दिखाए जाने के बाद से ये बँड पॉपुलर हो गया. प्रोडक्ट प्लेसमेंट को एक असरदार एडवर्टाइज़िंग कैंपेन माना जाता है. बैंड अपने प्रोडक्ट्स को फिल्मों और टी वी शो में दिखाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.
क्या आप जानते हैं कि जेम्स बॉन्ड की फिल्म ‘डाई अनादर डे’ में पूरी फिल्म में 23 अलग-अलग ब्रैंड दिखाए गए थे? और, सिल्वेस्टर स्टेलोन की फिल्म ‘ड्रिवेन’ में 103 प्रोडक्ट्स को 117 रोलिंग मिनट के अंदर दिखाया गया था ?

जेम्स बॉन्ड की फिल्म ‘कैसीनो रोयाल’ में कई सारे ब्रैंड शामिल थे. उनमें से कुछ थे FedEx, Ford, Louis
Vuitton, Sony, और कार्स में जैगुआर, लैंड रोवर और लिंकन. लेकिन जो प्रोडक्ट आपको सबसे ज्यादा
याद होगा वो है जेम्स बॉन्ड की सिग्नेचर कार एस्टन मार्टिन, मार्केटर और फिल्म मेकर्स अपने फिल्म में कितने भी प्रोडक्ट्स डाल सकते हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या ऑडियंस उन्हें याद रखेंगे और प्रोडक्ट्स खरीदेंगे ? ई.टी. में रीज़ चॉकलेट यादगार क्यों है? क्योंकि ये चॉकलेट कहानी का एक इम्पोर्टेन्ट हिस्सा हैं. अगर आप मार्केटिंग या एडवर्टाइजिंग के स्टूडेंट हैं, तो ध्यान रखिए कि आपके प्रोडक्ट को स्क्रीन पर दिखाना ही काफी नहीं है. इसे कहानी में इस तरह शामिल करना चाहिए कि ये कहानी का हिस्सा लगे और ऑडियंस के साथ इसका इमोशनल कनेक्शन बन जाए.

इस कांसेप्ट को मिरर न्यूरॉन्स कहा जाता है. जब हम कुछ भी काम करते हैं तो जो हलचल होता हैं, वही
हलचल दूसरों को वही काम करते हुए देखने पर भी होता हैं. जैसे हम खुद ही वो काम कर रहे हैं. हां, बंदरों
और इंसानों में यही होता है. fMR| स्कैन से मिरर न्यूरॉन्स को कई बार प्रूव किया गया है. जब आप बेसबॉल गेम देख रहे होते हैं और आपकी फेवरेट टीम गोल करती है, तो आपके मिरर न्यूरॉन्स एक्टिव हो जाते हैं. जब आप कोई फिल्म देखते हैं और हीरोइन रोती है तो आपके आंखों में भी आंसू आ जाते हैं. जब आप कोई थ्रिलर फिल्म देखते हैं तो आपको ऐसा लगता है जैसे कोई सीरियल किलर आपका पीछा कर रहा है. मिरर न्यूरॉन्स ही वो वजह है जिससे जब एक बच्चा रोता है तो दूसरा बच्चा भी रोने लगता है. यही वजह है कि जब आपके साइड में बैठे, आपका कोई कलीग जम्हाई लेता है तो आप भी जम्हाई लेते हैं. यही कारण है कि हम उन प्रोडक्ट को खरीदते हैं जो हमारे दोस्त खरीदते हैं. इमेजिन कीजिए कि आप शॉपिंग मॉल में हैं और आप
‘गैप’- कपड़े के बैंड की खिड़की से गुजरते हैं. वहां मैनिक्विन ने स्किनी जींस, वाइट ब्लाउज और रेड
स्कार्फ पहना हैं. आप रुकते हैं और देखते हैं. मैनिक्विन स्लिम और कॉफिडेंट दिख रही हैं. मन में आप सोचते
हैं, ” अगर मैंने भी वही कपड़े पहने तो, मैं भी ऐसी ही दिलूँगी, मैं भी अट्रैक्टिव दिलूंगी.” आपके मिरर
न्यूरॉन्स आपको स्टोर में जाने और जल्दी से वही कपड़े खरीदने के लिए मजबूर करते हैं.

17 साल के निक बेली की कहानी लेते हैं. नवंबर 2006 में, निन्टेंडो ने Wii गेमिंग सिस्टम रिलीज़
किया. ये वो गेम है जो प्लेयर्स को टेनिस सर्व या बैट के स्विंग को सिमुलेट करवा सकता था. निक दूसरे लोगों की ही तरह लाइन में लग गया. उसने अपने बँड – न्यू निन्टेंडो Wii को खरीदने के लिए टॉयज-आर-अस स्टोर में 17 घंटे तक इंतजार किया. घर पर, निक ने अपने नए गैजेट को खोलने और उसके साथ खेलने के बजाय एक अनबॉक्सिंग वीडियो किया. उसके फोल्लोवेर्स निनटेंडो Wii का मज़ा ले पाते हैं, हालांकि उन्होंने इसे अभी तक नहीं खरीदा नहीं था. अनबॉक्सिंग वीडियो उसके फॉलोवर्स के लिए एक अच्छी बात थी क्योकिं वे खुद इस प्रोडक्ट को वे नहीं खरीद सकते थे. इमेजिन कीजिए कि फॉलोवर्स के मिरर न्यूरॉन्स जल उठते हैं क्योंकि उन्होंने इस अनबॉक्सिंग वीडियो को देखा. उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे वो खुद उस प्रोडक्ट को छू रहे है.
रिरुअल (Ritual)
ऐकापुल्को (Acapulco) में, समुंदर के किनारे एक बार में दो शख्स बैठे थे. उन्होंने दो नींबू के टुकड़े के
साथ कोरोना बीयर की दो ठंडी बॉटल मंगवाई. पीने से पहले, उन्होंने नींबू निचोड़ कर बोतल में डाला और
नींबू के टुकड़े को बोतल के ही अंदर डाल दिया. उन्होंने बोतलों को उल्टा कर दिया और जब तक बबल्स गायब नहीं हुए तब तक उल्टा ही रखा. और तभी उन दोनों ने बियर का एक सिप लिया. चीयर्स!!!

पीने से पहले दोनों शख्स ने बीयर और नींबू का रिरुअल क्यों किया? क्या ये a) सिर्फ इसलिए कि
लैटिनो लोगों का मानना है कि नींबू बियर के स्वाद को बढ़ाता है? b) ये माना जाता है कि नींबू उन बैक्टीरिया का खत्मा करता है जो बीयर की पैकेजिंग और शिपिंग में जमा हो जाता है? या c) क्योंकि बहुत पहले, एक बारटेंडर ने अपने दोस्तों के साथ बेट लगाई थी कि अगर उसने अपनी कोरोना बियर बोतल में नींबू के टुकड़े डाले, तो बार के दूसरे लोग भी अपने नींबू को बोतलों में डालेंगे. सही जवाब है c . कोरोना बीयर और नींबू का रिरुअल एक बारटेंडर ने शुरू किया था. इसने कोरोना बियर को अमेरिकी मार्केट में हेनेकेन बियर पर जीत हासिल करने में मदद की. इस बीच, आयरलैंड में दो आदमियों ने गिनीज बीयर
की दो बोतलें ऑर्डर की. बारटेंडर ने बीयर को ग्लास में थ्री-क्वार्टर भरा. फिर वो फ़िज़्ज़ के हटने तक इंतजार करता है. कुछ मिनटों के बाद, बारटेंडर पूरी बोतल खाली कर देता है. यही गिनीज बीयर पीने का रिरुअल है. 1990 के दशक की शुरुआत में, गिनीज बीयर को ब्रिटिश आइल्स में सेल्स में परेशानी हो रही थी. कस्टमर अपनी बीयर पीने के लिए 10 मिनट तक इंतजार नहीं करना चाहते थे. इस प्रॉब्लम को सुलझाने के लिए कंपनी ने लोगों की सोच को बदलने के लिए एडवर्टाइजमेन्ट का इस्तेमाल किया.

गिनीज़ ने कमर्शियल रिलीज़ करते हुए कहा कि “इंतजार करने वालों को अच्छी चीजें मिलती हैं” या
“सही पाइंट डालने में 119.53 सेकंड लगते हैं”. उन्होंने गिनीज़ बीयर को पीने के सही तरीके के कमर्शियल
कैंपेन भी चलाए. इन कैंपेन की वजह से बीयर पीने के इस रिरुअल को बहुत से लोगों ने माना और पसंद भी किया. बैंड के लिए ऐसे रिरुअल अच्छे क्यों हैं? क्योंकि ये प्रोडक्ट के साथ हमारा इमोशनल बॉन्डिंग बनाता है. वे हमारे कंसम्पशन को और ज़्यादा यादगार बनाते हैं. आप ओरियो बिस्किट कैसे खाते हैं? क्या आप इसे दूध में डुबोकर उसे पूरा एक साथ खाते हैं? या आप पहले कुकी खोलते हैं और उसके बीच की क्रीम की फिलिंग खाते हैं ? ओरियो खाने के ये दो तरीके हम में से कई लोगों के लिए एक रिरुअल बन गया हैं.
यूनाइटेड किंगडम में, साइडर का एक बैंड , ‘मैग्नर्स’ (Magners), एक रिरुअल की वजह से पॉपुलर हो गया था. टिपरेरी नाम के एक छोटे से काउंटी में, रेफ्रिजरेटर की कमी हो गई, और इसलिए लोगों ने
बर्फ से भरे ग्लास पर मैगनर डालने की शुरुवात की. तब से, बारटेंडर बोतल से बर्फ से भरे ग्लास में डालकर मैग्नर्स को सर्व करते हैं. कस्टमर्स ने कहा कि मैग्नर्स ऑन आइस का टेस्ट बेहतर होता है. इस रिरुअल ने इस ब्रैड के लिए लोगों का प्यार बढ़ा दिया.

रिरुअल के दूसरे एग्जाम्पल है सबवे और बकार्डी. सबवे में सैंडविच बनाने के लिए वहां के स्टाफ एक
ही रिरुअल को फॉलो करते हैं. यहाँ कस्टमर्स अपने हिसाब से इंस्ट्रक्शन दे सकते हैं और बता सकते हैं कि
उन्हें अपने सैंडविच को कैसे बनवाना हैं. क्या आप क्यूबा लिबरे या बकार्डी, कोक और लाइम के पॉपुलर मिक्स को जानते हैं? इसे क्यूबा में स्पेनिश-अमेरिकन वार के दौरान बनाया गया था. बकार्डी कंपनी क्यूबा में थी. इस बीच, अमेरिकी आर्मी अपने साथ कोक लेकर आए और इस तरह नए मिक्स
का जन्म हुआ.

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By Martin Lindstrom
धर्म और बैंड

हर धर्म के दस कॉमन पिलर होते हैं जो इसे सालों तक मजबूत और असरदार बनाते हैं. संयोग की बात
हैं, पॉपुलर ब्रैड के भी दस कॉमन पिलर हैं. ये पिलर कौन से हैं ? दस कॉमन पिलर हैं- अपनेपन की भावना,
क्लियर विज़न, दुश्मनों पर जीत, सेंसरी अपील, कहानी सुनाना, शान, एवंजलिस्म (किसी मकसद को सपोर्ट करना), सिंबल, मिस्ट्री और रिरुअल . सबसे पहले, आइए अपनेपन की भावना के बारे में
बात करते हैं. जब आप किसी को जिम में आपके जैसे ही स्नीकर्स पहने हुए देखते हैं, तो क्या आप उसे
देखकर मुस्कुराते हैं? या, क्या आपने कभी हाईवे पर अपने बगल से जाने वाली आपके ही जैसे कार पर हॉर्न
बजाया है ? जब आप किसी को आपके ही बैंड के कपड़े पहने हुए देखते हैं, तो आप उस शख्स के साथ
अपनेपन की भावना महसूस करते हैं जैसे कि आप दोनों किसी स्पेशल क्लब के मेंबर हैं. दूसरा, धर्म और ब्रैड के क्लियर विज़न होते है. स्टीव जॉब्स ने एक बार कहा था, ” इंसान ही इस दुनिया में बदलाव के निर्माता है. उसे सिस्टम और स्ट्रक्चर से बढ़कर होना चाहिए, उनके नीचे नहीं होना चाहिए.” स्टीव जॉब्स के जाने के बाद भी, Apple ने इस क्लियर विज़न को जारी रखा.

तीसरा है, दुश्मनों पर जीत. एग्जाम्पल के लिए- Coke vs Pepsi, Visa vs Mastercard, AT&T vs
Verizon. हर्ट्ज़ (Hertz) कंपनी की एक बार ये टैगलाइन थी “वी आर हर्ट्ज़ एंड दे आर नॉट.” इस तरह
के कैंपेन ये बताते हैं कि कुछ बैंड अपने कॉम्पिटिटर से बेहतर क्यों है. ये “हम या वो” स्ट्रेटेजी से कंट्रोवर्सी भी
पैदा होते हैं और फैंस को अपनी वफादारी बतानी पड़ती हैं. धर्म और ब्रैड का चौथा कॉमन पिलर हैं सेंसरी अपील. जब आप किसी मंदिर, चर्च या मस्जिद में जाते हैं, तो आप फ़ौरन एक अलग माहौल और खुश्बू महसूस करते हैं. हो सकता है कि घंटी बज रही हो या मंत्र बोले जा रहे हों. आप जो देखते, सुनते और सूंघते हैं, वो आपको किसी अनदेखे ताकत के होने का एहसास कराते हैं. बैंड के साथ भी ऐसा ही है. वे चाहते हैं कि हम कुछ खास स्मेल, साउंड और साईट को सिर्फ उनके बैंड से जोड़कर देखें. इसके एग्जाम्पल हैं नोकिया रिंगटोन, बैंड न्यू मर्सिडीज-बेंज की लेदर की स्मेल, या हार्ले डेविडसन इंजन का साउंड. पांचवां कॉमन पिलर है कहानी सुनाना. भीड़ से अलग दिखने के लिए ब्रैड को मज़ेदार कहानियाँ सुनाने की जरूरत है. एग्जाम्पल के लिए, वर्जिन अटलांटिक ने नमक और काली मिर्च के अपने छोटे डिब्बों पर “वर्जिन अटलांटिक से निकला” लिखा. लोगों का इन डिब्बों को देखकर उन्हें घर ले जाने का मन करता था. एक और एग्जाम्पल है जब होल फूड्स ने अपने कंटेनरों पर “मैं प्लास्टिक बैग नहीं हूँ” शब्द लिखा था.

हमारी लिस्ट में अगला है ग्रांडेयर. हम जानते हैं कि कैसे पूजा करने की जगह आमतौर पर बड़े और ग्रैंड
होते हैं. बैंकॉक के गोल्डन बुद्धा और वैटिकन के बारे में इमेजिन कीजिए. कंपनियां भी इन्हीं की नकल करती हैं, एग्जाम्पल के लिए लास वेगास में बेलाजियो होटल या दुबई में होटल बुर्ज-अल-अरब. पेरिस में लुई वुटॉन के फ्लैगशिप स्टोर और टोक्यो में प्राडा के फ्लैगशिप स्टोर को मत भूलिए. अगला कॉमन पिलर है एवंजलिस्म, जिसकी वजह से ही धर्म लोगों तक पहुंचते हैं, उन्हें सिखाते हैं और नए फॉलोवर्स बनाते हैं. क्या आप जानते हैं कि जब जीमेल को लॉन्च किया गया था, तो ये सिर्फ इनविटेशन से मिलता था ? जीमेल को पब्लिक के लिए तभी खोला गया जब ये 10 मिलियन यूजर्स तक पहुंच गया. अमेरिकन एक्सप्रेस ने अपने सेंचुरियन ब्लैक कार्ड के लिए सिर्फ इनविटेशन का यूज़ किया था. हमारा आठवां कॉमन पिलर है सिंबल या चिन्ह. अपने धर्म के चिन्ह के बारे में सोचिए. धर्म की तरह ही ब्रैंड में भी सिंबल या logo बहुत ज़रूरी होता हैं. एप्पल का अपना बहुत पॉपुलर logo है और मैकडॉनल्ड्स का भी अपना logo हैं. क्या आप जानते हैं कि नाइकी के logo को स्वूश कहा जाता है ? 

नाइकी ने logo बनाने के लिए एक कांट्रेक्टर को हायर किया. कांट्रेक्टर ने कस्टमर से पास में ही रखे बॉक्स को चेक करके कुछ logo पर वोट करने के लिए कहा. कस्टमर्स ने कोई भी logo को पसंद नहीं किया. स्वूश इस कंपनी का logo तब बना जब फाउंडर ने उस बॉक्स को चेक किया जिसमें कोई logo का ऑप्शन नहीं रखा गया था. इस तरह स्वूश नाइकी का logo बन गया. हमारा सबसे अच्छा एग्जाम्पल है कोका-कोला और यूनिलीवर. एक बार, एक एम्पलॉई था जिसने शैम्पू के लेबल पर “Contains the x9 Factor” लिखा था. इसे लाखों-करोड़ों बोतलों में छापा गया और दुकानों में बाँट दिया गया. यूनिलीवर को जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने फैसला किया कि इन बॉटल्स को वापस मंगाना बहुत महंगा था.
छह महीने बाद, ये सप्लाई खत्म हो गया था और यूनिलीवर ने उसी शैम्पू का एक नया बैच निकाला.
लेकिन इस बार, “Contains the X9 Factor” नहीं लिखा था. कोई नहीं जानता कि X9 Factor क्या था लेकिन कस्टमर खुश नहीं थे कि अब ये शैम्पू में लिखा नहीं था. कस्टमर ने कहा कि अब ये शैम्पू पिछले वाले की तरह उतना अच्छा नहीं था. उनके बाल उतने चमकदार और मुलायम नहीं हुए थे. उनका मानना था कि ये शैम्पू फ़ैल हो गया क्योंकि इसमें X9 फैक्टर नहीं था.

धर्मों और बैंड का दसवां और लास्ट पिलर हैं रिरुअल . 1990 के दशक में, मार्टिन लिंडस्ट्रॉम सैन फ्रांसिस्को में Apple मैक्रोमीडिया कांफ्रेंस में गए. वहां 10,000 लोग स्टीव जॉब्स का इंतजार कर रहे थे. स्टीव जॉब्स बाहर निकले और न्यूटन हैंडहेल्ड कंप्यूटर को हाथ में लिया. उन्होंने अनाउंस किया कि Apple
अब इसका मैनुफैक्चर बंद कर देगा. फिर, स्टीव जॉब्स ने न्यूटन को डस्टबिन में फेंक दिया और कहा कि इस प्रोडक्ट के दिन पुरे हो गए हैं. मार्टिन लिंडस्ट्रॉम के साइड में खड़े शख्स ने अपने न्यूटन को नीचे फेंक दिया और उसे कुचल दिया. एक और आदमी चिल्लाया. मार्टिन हैरान था क्योंकि ऐसा लग रहा था कि वो किसी धार्मिक सभा में है. Apple सालों से चल रहा एक धार्मिक पंथ यानि रिलीजियस कल्ट की तरह लग रहा था. Apple कंपनी के पास पूरे दस कॉमन पिलर हैं.

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सेलिंग टू आवर सेंसेस

अपने दिमाग में टाइम्स स्क्वायर के पिक्चर को लाने की कोशिश कीजिए. आप जहाँ भी देखते हैं, वहाँ हर वो
प्रोडक्ट के बड़े-बड़े होर्डिंग होते हैं जिनके बारे में आप सोच सकते हैं. वहाँ परफ्यूम, टकीला, घड़ियाँ सब कुछ
हैं. उनमें से हरेक प्रोडक्ट का काम होता हैं आपका ध्यान खींचना और मेमोरी में जाना. हालांकि, रिसर्चर्स
ने साबित किया है कि विजुअल एडवर्टाइजिंग ज़्यादा फायदेमंद नहीं हैं. आँखों के सामने से गुज़रने वाले ऐसे
एड या तो याद ही नहीं रहते या फिर बस ज़रा सा याद रह जाते हैं. इनसे हमारी नज़रें ज़रूरत से ज़्यादा ही स्टिमुलेट हो जाती हैं और टाइम गुज़रने के साथ ये विजुअल एड और भी ज़्यादा नाकाम हो रहे हैं. अब ये प्रूव हो रहा है \ कि स्मेल यानि गंध और साउंड हमारे ध्यान को ज़्यादा खींचते हैं. स्मेल, साउंड, और साईट यानि दृश्य के साथ-साथ टच या स्पर्श को कंबाइन करके उसे यूज़ करने के कांसेप्ट को सेंसरी बैंडिंग कहते हैं.

डॉ. कैल्वर्ट एक ऐसे एक्सपर्ट हैं जिन्होंने बैंड पर एक्सपेरिमेंट किए. इसमें 20 पार्टिसिपेंट्स थे और उन्हें
कोक, डव सोप, जॉनसन एंड जॉनसन नो मोर टियर्स बेबी शैम्पू और एक फास्ट-फूड चेन रेस्तरां के स्मेल और इन बैंड के logo के सामने लाया गया. पार्टिसिपेंट्स के पास हैंड कंसोल थे जिस पर वे 1 से 9
तक की रेटिंग दे सकते थे. ये देखा गया कि जब किसी प्रोडक्ट का logo और स्मेल एक साथ सामने लाया
गया, तो पार्टिसिपेंट्स को बहुत पसंद आया. जॉनसन का बेबी शैम्पू और इसकी स्मेल एक साथ मिलाने पर
पार्टिसिपेंट्स को बहुत अपीलिंग लगे. हालांकि, जब कोई मिस मैच होता, जैसे कि डव साबुन की पिक्चर
और खाना पकाने के तेल की स्मेल, तो पार्टिसिपेंट्स इससे दूर भाग गए. डॉ कैल्वर्ट ने fMRI की मदद से ये भी देखा कि दिमाग का वो एरिया जो हमारे ख़ुशी से जुड़े होते हैं, वो जॉनसन बेबी पाउडर की पिक्चर और इसकी खुश्बू के सामने आते ही वो एरिया चमक गई. और, वनिला की खुश्बू और उसका प्रोडक्ट एक साथ आने पर, उसने पार्टिसिपेंट्स को अपनी ओर खिंचा . लेकिन, जब रूट बियर की स्मेल को जॉनसन बेबी शैम्पू की पिक्चर के साथ रखा गया तो पार्टिसिपेंट्स के दिमाग का वो एरिया चमका जिससे लोग किसी चीज़ से दूर भागते हैं.

दूसरी इंटरेस्टिंग बात जो पता चली वो ये है कि स्मेल यानि गंध हमारे दिमाग के उस भाग को एक्टिवेट करती है जो साइट यानि देखने से जुड़े होते हैं. एग्जाम्पल के लिए, अगर आप डोनट्स को सूंघते हैं, तो आप अपने दिमाग में क्रिस्पी क्रिम या डंकिन डोनट्स के logo के बारे में इमेजिन कर सकते हैं. अब, हम साउंड को डिसकस करते हैं. क्या आप जानते हैं कि जाने-माने सीरियल कंपनी केलॉग्स ने एक डेनिश लैब को हायर किया ताकि वे अपने सीरियल में उस ‘क्रंच’ साउंड को ला सके. ये वो साउंड था जो उनके सीरियल को खाते हुए पैदा होता हैं. यही ‘क्रंच’ साउंड इनके ब्रैड से जुड़ गया. जर्मन बैंड , बहलसेन ने भी अपने बिस्किट और पोटैटो चिप्स के लिए ऐसा ही किया. रिसर्चर्स ने इनको खाते और चबाते हुए आवाज़ को स्पीकर्स के हेल्प से एनालाइज़ किया ताकि वो एक परफेक्ट ‘क्रंच’ साउंड पा सकें. प्रिंगल्स पोटैटो चिप्स ने भी यही किया ताकि जब भी आप एक नया प्रिंगल्स का डब्बा खोले तो आपको वो साउंड सबसे अलग सुनाई दें. एप्पल ने भी यही किया जब उन्होंने आईपॉड व्हील को स्टार्ट कर गाने सेलेक्ट करने पर टिक-टिक-टिक की आवाज़ डाली गई थी. फोर्ड कंपनी ने अपने कार के मॉडल टॉरस के लिए भी ऐसा ही किया था. कार के बंद होने पर दरवाजे की कुंडी एक ख़ास साउंड निकालती हैं. ये सब हैरान करता है, है ना ? ब्रैड को सिर्फ विजुअल्स के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए क्योंकि जब हमारी मेमोरी या याददाश्त और ध्यान खींचने की बात आती है तो स्मेल और साउंड ज़्यादा पावरफुल होते हैं. जब साइट को स्मेल और साउंड के साथ जोड़ दिया जाता है, तो ये हमारे ब्रेन पर किसी भी बैंड को याद रखने और उसे ही अपना चॉइस बनाने में ज़्यादा इफेक्टिव होता हैं.

कन्क्लूज़न
आपने प्रोडक्ट प्लेसमेंट के बारे में जाना. फिल्मों में किसी भी प्रोडक्ट को दिखाना ही काफी नहीं है. ये
प्रोडक्ट फिल्म की कहानी का हिस्सा होना चाहिए, ताकि लोग इसे याद रख सकें. आपने मिरर न्यूरॉन्स के बारे में सीखा. इसकी वजह से ही हम अपने आसपास के लोगों दतों की नकल करने के लिए मजबूर होते हैं. ये मिरर न्यूरॉन्स हमारी शॉपिंग की आदतों पर भी बहुत गहरा असर डालते हैं. आपने रिचुवल्स के बारे में जाना, ये रिचुवल्स हमें हमारे मनपसंद बैंड के साथ और भी ज़्यादा जोड़ते हैं. हम जो भी बैंड इस्तेमाल करते हैं, ये रिचुवल्स इस इस्तेमाल करने के एक्सपीरियंस को यादगार बनाते हैं. आपने धर्म और बैंड के बारे में सीखा. आपने दस कॉमन पिलर के बारे में भी जाना. ब्रैड के फैंस, किसी धर्म के फॉलोवर्स की तरह ही होते है. कभी-कभी फैंस आखिर ऐसा क्यों बन जाते इसके पीछे भी वजह है. आखिर में, आपने सेंसरी ब्रैंडिंग के बारे में सीखा. ये बहुत इंटरेस्टिंग है कि कैसे बँड अपने प्रोडक्ट को सबसे अलग बनाने के लिए स्मेल और साउंड का इस्तेमाल करते हैं. स्मेल, साउंड, टच को साईट से जोड़ना एक पावरफुल मार्केटिंग आईडिया है. कंज़्यूमर्स को हर ब्रैड शॉपिंग करने और पैसा खर्च करने के लिए अपनी ओर खींचता है. आप अपने हिसाब से प्रोडक्ट को choose कर सकते हैं. ये आपका डिसीज़न हैं. अगर आप एक एंट्रेप्रेन्योर या मार्केटिंग के स्टूडेंट हैं, तो आप डिसकस किए गए एग्जाम्पल से सीख सकते हैं कि सिर्फ कमर्शियल एड काफी नहीं, आपको अपने कंज़्यूमर्स को कहानी सुनानी पडती हैं तभी एक बैंड कामयाब हो सकता है.

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