BUSINESS @ SPEED OF THOUGHT Bill Gates Books In Hindi Summary Pdf

BUSINESS @ SPEED OF THOUGHT Bill Gates इंट्रोडक्शन आज की इस डिजिटल दुनिया में हरकंपनी को बड़ी आसानी और तेज़ी से इनफार्मेशन मिल जाती है. तो ऐसा क्यों होता है कि बस कुछ ही कंपनियां सक्सेसफुल हो पाती हैं और बाकी इस competetive मार्केट में स्ट्रगल करते रह जाते हैं? Efficient प्रोसेस, स्मार्ट एम्प्लाइज, ज़बरदस्त प्रोडक्ट – क्या आपकी कंपनी के पास ये सब हैं? लेकिन फिर भी आप मार्केट में कुछ अलग नहीं कर पा रहे? वो कौन सी चीज़ है जो आपको अलग और हटके बनाने में मदद कर सकती है? बिल गेट्स के अनुसार इसका जवाब टेक्नोलॉजी पर हो रहे ख़र्च और उससे जेनरेट होने वाले आउटपुट के बीच के फ़र्क में छुपा है. आमतौर पर कंपनी अपने फंड्स का 80% टेक्नोलॉजी पर ख़र्च करती है फ़िर भी उन्हें उसकी पोटेंशियल का सिर्फ 20% आउटपुट ही मिलता है. क्या आप अपनी टेक्नोलॉजी का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं? अगर आपका जवाब हाँ है तो ये बुक आपको possibility और reality के बीच के गैप को भरने में मदद करेगी. MANAGE WITH THE FORCE OF MANAGE WITH THE FORCE OF FACTS बिज़नेस चलाने का सबसे इम्पोर्टेन्ट हिस्सा होता है इनफार्मेशन. आपको इनफार्मेशन को इकट्ठा करने, उसे मैनेज और यूज़ करने के लिए एक efficient तरीका इस्तेमाल करने की ज़रुरत है.ज़्यादातर काम की इनफार्मेशन पहले से ही सिस्टम में मौजूद है लेकिन कम्पनीज इसके लिए एक्शन लेने में फेल हो जाती हैं. आइए पहले समझते हैं कि काम की या मीनिंगफुल इनफार्मेशन का मतलब क्या होता है. कस्टमर्स आपके प्रोडक्ट के बारे में क्या सोचते हैं? उन्हें प्रोडक्ट से क्या-क्या उम्मीदें हैं? क्या distributors को किसी प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है? क्या आपके competitors आपके बिज़नेस में आपसे आगे हैं? ये ऐसे सवाल हैं जिनका आपको जवाब देना होगा. आपको इनफार्मेशन इकट्ठा करने की ज़रुरत है और फ़िर ये पता लगाना होगा कि इसका अच्छे से इस्तेमाल कैसे किया जाए.आइए एक एग्ज़ाम्पल से इसे समझते हैं. अल्फ्रेड स्लोएन 1920 से 1950 तक जेनरल मोटर्स के सीईओ थे. अपने समय के दौरान उन्होंने कंपनी को एक बड़े आर्गेनाइजेशन के रूप में ग्रो करने में मदद की. अल्फ्रेड जानते थे कि लोगों का नॉलेज सक्सेस पाने का एक बहुत इम्पोर्टेन्ट हिस्सा है. अल्फ्रेड टेक्निकल और बिज़नेस स्टाफ से अक्सर ख़ुद मिला करते थे. उसके कारण उन सभी के साथ उनकी अल्फ्रेड टेक्निकल और बिज़नेस स्टाफ से अक्सर खुद मिला करते थे. उसके कारण उन सभी के साथ उनकी एक अच्छी understanding हो गई थी. वो देश भर के डीलर्स के पास जाया करते, इससे उन्हें जानने में मदद मिलती थी कि कौनसा प्रोडक्ट ज़्यादा बिक रहा है. सेल्स के बारे में इस अपडेटेड इनफार्मेशन ने अल्फ्रेड को ये एहसास कराया कि 1920 के अंत तक बिज़नेस बदलने वाला था.अब used कार के बजाय मिडिल क्लास के लोग नई कार लेना पसंद कर रहे थे. जिसका मतलब था कि डीलर्स के साथ अब कंपनी का रिलेशन भी बदलना चाहिए था. अल्फ्रेड के लेटेस्ट इनफार्मेशन के कारण जेनरल मोटर्स बदलते हुए मार्केट के लिए तैयार था. अल्फ्रेड ने डीलर्स की एक काउंसिल बनाई. उन्होंने डीलर्स के साथ एक मज़बूत पार्टनरशिप डेवलप की.उन्होंने नए डीलरशिप के लिए इफेक्टिव जगहों को खोजनेकीरिसर्च की. सेल्स की इनफार्मेशन के बिना, अल्फ्रेड कस्टमर्स की पसंद के ट्रेंड में बदलाव या सेल्स में कमी कोभांप नहीं पाते. कमाल की बात तो ये थी कि जो इनफार्मेशन अल्फ्रेड इस्तेमाल कर रहे थे वो उस वक़्त डिजिटल नहीं था. लेकिन फिर भी वो जानते थे कि वो कितना इम्पोर्टेन्ट था. जेनरल मोटर्स इसलिए सक्सेसफुल हुई क्योंकि वहाँ इनफार्मेशन को इफेक्टिव ढंग से इकट्ठा, मैनेज और इस्तेमाल किया गया था. BUSINESS @ SPEED OF THOUGHT Bill Gates CAN YOUR DIGITAL NERVOUS SYSTEM DO THIS? ब्रेन में नयूरोंस की तरह, हर आर्गेनाइजेशन के बैकग्राउंड में आपस में जुड़े हुए कई प्रोसेस होते हैं. बिल गेट्स इसे कंपनी का नर्वस सिस्टम कहते हैं और उनका मानना है कि ये बिलकुल इंसानों के नर्वस सिस्टम जैसा है. ये बैकग्राउंड प्रोसेस सिर्फ एक डिपार्टमेंट में नहीं होते. इसके बजाय ये अलग-अलग डिपार्टमेंट को एक साथ जोड़ते हैं. कंपनी के मार्केट में बने रहने के लिए ये डिजिटल नर्वस सिस्टम बहुत ज़रूरी होता है.एग्ज़ाम्पल के लिए, किसी भी कंपनी की मार्केटिंग टीम को अपनी स्ट्रेटेजी में सुधार करने के लिए प्रोडक्ट की सेल्स के बारे में पता होना चाहिए.एक बड़े आर्डर को फाइनल करने से पहले, सेल्स डिपार्टमेंट को पहले से इन्वेंटरी के स्टेटस के बारे में पता होना चाहिए. हर डिपार्टमेंट का एक इम्पोर्टेन्ट योगदान होता है. इसीलिये उन सभी को एक दूसरे के साथ इनफार्मेशन शेयर करनी चाहिए और मिलकर एक टीम की तरह काम करना चाहिए.ह्यूमन बॉडी के अलग-अलग पार्ट्स नर्वस सिस्टम का इस्तेमाल कर कम्यूनिकेट करते हैं. इसी तरह, departments को भी अपने डिजिटल नर्तम मिा का टम्नेमाल करके नागार्मेशन को इसी तरह, departments को भी अपने डिजिटल नर्वस सिस्टम का इस्तेमाल कर के इनफार्मेशन को कम्यूनिकेट करना चाहिए. टेक्नोलॉजी एक कंपनी के डिजिटल सिस्टम को ज़्यादा आर्गनाइज्ड और भरोसेमंद बना सकती है.अगर कंपनी के अलग-अलग डिपार्टमेंट के बीच इनफार्मेशन बिना किसी रुकावट के कम्यूनिकेट किया जाए तो कंपनी बेहतर रूप से काम कर पाएगी. आइए एक एग्ज़ाम्पल से समझते हैं कि आप मार्केट एनालिसिस में सुधार करने के लिए अपनी मौजूदा टेक्नोलॉजी को कैसे यूज़ कर सकते हैं. 1990 के ख़त्म होते-होते माइक्रोसॉफ्ट ज़्यादा से ज़्यादा रिटेल और होलसेल कस्टमर्स तक पहुँचने की कोशिश कर रहा था. यह जानने के लिए कि कौन से मार्केट को एप्रोच करना है,ऑपरेशन मैनेजर पैट्रिक हेज़ और उनकी टीम ने माइक्रोसॉफ्ट के सिस्टम से sales की इनफार्मेशन निकालना शुरू कर दिया. इन्टरनेट को यूज़ कर उन्होंने अलग-अलग शहरों में per कैपिटा इनकम, कस्टमर डिटेल जैसी कई इनफार्मेशन इकट्ठा की.ईमेल के ज़रिए उन्होंने हर शहर में कंपनी के सेल्स पार्टनर के बारे में भी इनफार्मेशन निकाली. इस डेटा को ध्यान से देखने के बाद पैट्रिक और उनकी टीम ने करीब 80 शहरों को शोर्टलिस्ट किया जिसमें माइक्रोसॉफ्ट की कोई भी मार्केटिंग एक्टिविटी नहीं थी.इन शहरों को मार्केटिंग के साथ टारगेट किया जा सकता था ताकि सेल्स बढ़ाया जा सके. टारगेट किया जा सकता था ताकि सेल्स बढ़ाया जा सके. पैट्रिक ने सेल्स के वाईस प्रेसिडेंट जेफ़ राईक्स को ये डेटा दिखाया.जेफ़ को ये आईडिया बहुत पसंद आया और उन्होंने इस मार्केटिंग स्ट्रेटेजी को आगे बढ़ाने के लिए सिग्नल दे दिया. ये एक बड़ाइवेंट था जो सभी 80 शहरों में organize किया जाने वाला था.ये स्ट्रेटेजी बहुत इफेक्टिव साबित हुई.टार्गेटेड मार्केटिंग ने माइक्रोसॉफ्ट के सेल्स पार्टनर्स की सेल्स को बढ़ा दिया था.सिर्फ तीन quarter में उनकी इनकम 57% बढ़ गई थी. ये सब बिना रुकावट के इनफार्मेशन को कम्यूनिकेट करने के कारण पॉसिबल हुआ. पैट्रिक और उनकी टीम ज़रूरी इनफार्मेशन इकट्ठा करने में कामयाब हुए थे. उन्होंने पहले से मौजूद सिस्टम और टूल्स की मदद से उसे analyse किया. इस तरह, माइक्रोसॉफ्ट ने एक इफेक्टिव मार्केटिंग स्ट्रेटेजी की खोज की. THE INTERNET CHANGES EVERYTHING 1990 के अंत तक हर चीज़ डिजिटल होने लगी थी.इन्टरनेट अपनी सस्ती और quick सर्विस के कारण popular होने लगा और मिडिल मैन का रोल निभाने लगा जैसे कि ट्रेवल एजेंट्स जिनका काम टिकेट बुक करना है वो तो शायद कुछ समय बाद गायब हो जाएँगे.उसी तरह, पहले ब्रोकरेज फर्म अपने कस्टमर को डेटा देती थी जो अब ज़्यादातर इन्टरनेट पर फ्री में डा जाएग.उसा तरह, पहल ब्राकरण म जपन कस्टमर को डेटा देती थी जो अब ज़्यादातर इन्टरनेट पर फ्री में मिल जाता है. मेरिल लिंच ट्रेडिशनल फाइनेंसियल सर्विस में लंबे समय से लीडर थीं.1992 से 1997 के बीच इन्टरनेट बेस्ड बिज़नेस ट्रेडिंग तेज़ी से बढ़ने लगा. इसलिए कंपनी ने अपनी स्ट्रेटेजी में बदलाव करने का फैसला किया. सीनियर managers समझ गए थे कि उनका मौजूदा एप्रोच अब टिक नहीं सकता. कंपनी की सबसे बड़ी चिंता थी कंपनी सबसे कीमती एसेट की एफिशिएंसी में सुधार की ज़रुरत थी, जो फाइनेंसियल कंसलटेंट या ऍफ़सी(FC) थे. एफसी स्टॉक, प्रोडक्ट और कस्टमर्स के बारे में डेटा को ट्रैक करने में बहुत समय बिता रहे थे. मेरिल लिंच ने अपने इनफार्मेशन सिस्टम को फिर से बनाने का फैसला किया. Managers ने बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स से लगभग एक बिलियन डॉलर टेक्नोलॉजी पर इंवेस्ट करने के लिए कहा. मार्केट में कंपनी की टॉप पोजीशन को बनाए रखने के लिए ये इंवेस्टमेंट ज़रूरी था. बोर्ड ने माना कि कम्पटीशन में बने रहने के लिए सबसे अच्छा तरीका है फाइनेंसियल कंसल्टेंट्स को सही टूल देना. इसलिए बोर्ड पांच सालों के लिए 825 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट के लिए तैयार हो गया.एक साल के अंदर, आईटी टीम ने एक यूनिवर्सल पीसी “शेल” बनाया जो एम्प्लाइज के लिए एक आम यूजर इंटरफेस था.इस सिस्टम ने कंपनी के डेटा और पुराने सिस्टम को पाक टी ताट IT IT याश ला टिगा शा जाएग.उसा तरह, पहल ब्राकरण म जपन कस्टमर को डेटा देती थी जो अब ज़्यादातर इन्टरनेट पर फ्री में मिल जाता है. मेरिल लिंच ट्रेडिशनल फाइनेंसियल सर्विस में लंबे समय से लीडर थीं.1992 से 1997 के बीच इन्टरनेट बेस्ड बिज़नेस ट्रेडिंग तेज़ी से बढ़ने लगा. इसलिए कंपनी ने अपनी स्ट्रेटेजी में बदलाव करने का फैसला किया. सीनियर managers समझ गए थे कि उनका मौजूदा एप्रोच अब टिक नहीं सकता. कंपनी की सबसे बड़ी चिंता थी कंपनी सबसे कीमती एसेट की एफिशिएंसी में सुधार की ज़रुरत थी, जो फाइनेंसियल कंसलटेंट या ऍफ़सी(FC) थे. एफसी स्टॉक, प्रोडक्ट और कस्टमर्स के बारे में डेटा को ट्रैक करने में बहुत समय बिता रहे थे. मेरिल लिंच ने अपने इनफार्मेशन सिस्टम को फिर से बनाने का फैसला किया. Managers ने बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स से लगभग एक बिलियन डॉलर टेक्नोलॉजी पर इंवेस्ट करने के लिए कहा. मार्केट में कंपनी की टॉप पोजीशन को बनाए रखने के लिए ये इंवेस्टमेंट ज़रूरी था. बोर्ड ने माना कि कम्पटीशन में बने रहने के लिए सबसे अच्छा तरीका है फाइनेंसियल कंसल्टेंट्स को सही टूल देना. इसलिए बोर्ड पांच सालों के लिए 825 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट के लिए तैयार हो गया.एक साल के अंदर, आईटी टीम ने एक यूनिवर्सल पीसी “शेल” बनाया जो एम्प्लाइज के लिए एक आम यूजर इंटरफेस था.इस सिस्टम ने कंपनी के डेटा और पुराने सिस्टम को पाक टी ताट IT IT याश ला टिगा शा पर इंवेस्ट करने के लिए कहा. मार्केट में कंपनी की टॉप पोजीशन को बनाए रखने के लिए ये इंवेस्टमेंट ज़रूरी था. बोर्ड ने माना कि कम्पटीशन में बने रहने के लिए सबसे अच्छा तरीका है फाइनेंसियल कंसल्टेंट्स को सही टूल देना. इसलिए बोर्ड पांच सालों के लिए 825 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट के लिए तैयार हो गया.एक साल के अंदर, आईटी टीम ने एक यूनिवर्सल पीसी “शेल” बनाया जो एम्प्लाइज के लिए एक आम यूजर इंटरफेस था.इस सिस्टम ने कंपनी के डेटा और पुराने सिस्टम को एक ही जगह पर एक साथ ला दिया था. मेरिल लिंच ने अपने ऑफिस को अपग्रेड करना शुरू कर दिया. उन्होंने हर हफ्ते दस ऑफिस में नए पीसी इंस्टाल करने का प्लान बनाया. सभी एम्प्लाइज को इस नई टेक्नोलॉजी को यूज़ करने की ट्रेनिंग दी गई. अब ऍफ़सी कुछ ही सेकंड में अपने स्क्रीन पर कोई भी इनफार्मेशन ढूंढ सकते थे.वो सिस्टम के ग्राफ़ औरचार्ट के कारण मिनटों में किसी भी डेटाको एनालाइज कर सकते थे. सिर्फ एक क्लिक करने की ज़रुरत थी और ऍफ़सी के पास हर कस्टमर की सारी इनफार्मेशन सामने आ जाती थी. इससे एफसी को कस्टमर्स के साथ मजबूत रिलेशन बनाने के लिए ज़्यादा समय और इनफार्मेशन मिली. इंटरनेट ने लोगों को हटाकर उनकी जगह नहीं ली, इसके बजाय, इसने लोगों कोज़्यादा efficient बनाया. पर इंवेस्ट करने के लिए कहा. मार्केट में कंपनी की टॉप पोजीशन को बनाए रखने के लिए ये इंवेस्टमेंट ज़रूरी था. बोर्ड ने माना कि कम्पटीशन में बने रहने के लिए सबसे अच्छा तरीका है फाइनेंसियल कंसल्टेंट्स को सही टूल देना. इसलिए बोर्ड पांच सालों के लिए 825 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट के लिए तैयार हो गया.एक साल के अंदर, आईटी टीम ने एक यूनिवर्सल पीसी “शेल” बनाया जो एम्प्लाइज के लिए एक आम यूजर इंटरफेस था.इस सिस्टम ने कंपनी के डेटा और पुराने सिस्टम को एक ही जगह पर एक साथ ला दिया था. मेरिल लिंच ने अपने ऑफिस को अपग्रेड करना शुरू कर दिया. उन्होंने हर हफ्ते दस ऑफिस में नए पीसी इंस्टाल करने का प्लान बनाया. सभी एम्प्लाइज को इस नई टेक्नोलॉजी को यूज़ करने की ट्रेनिंग दी गई. अब ऍफ़सी कुछ ही सेकंड में अपने स्क्रीन पर कोई भी इनफार्मेशन ढूंढ सकते थे.वो सिस्टम के ग्राफ़ औरचार्ट के कारण मिनटों में किसी भी डेटाको एनालाइज कर सकते थे. सिर्फ एक क्लिक करने की ज़रुरत थी और ऍफ़सी के पास हर कस्टमर की सारी इनफार्मेशन सामने आ जाती थी. इससे एफसी को कस्टमर्स के साथ मजबूत रिलेशन बनाने के लिए ज़्यादा समय और इनफार्मेशन मिली. इंटरनेट ने लोगों को हटाकर उनकी जगह नहीं ली, इसके बजाय, इसने लोगों कोज़्यादा efficient बनाया. BUSINESS @ SPEED OF THOUGHT Bill Gates TOUCH YOUR CUSTOMERS किसी भी बिज़नेस को बेहतर बनाने के लिए रेगुलर कस्टमर्स से जुड़े रहना या बातचीत करना बेहद ज़रूरी होताहै. इन्टरनेट ने कस्टमर और producer के बीच के रिलेशनशिप को पूरी तरह बदल कर रख दिया है.अब हम मिनटों में दुनिया के किसी भी कोने में बिज़नेस कर सकते हैं.अब कम्पनीज को कस्टमर्स को बेहतर ऑनलाइन एक्सपीरियंस देने पर ध्यान फोकस करना चाहिए.आप कस्टमर्स को सस्ती और quick इनफार्मेशन देकर इन्टरनेट का फ़ायदा उठा सकते हैं.कस्टमर्स अलग-अलग डीलरों द्वारा ऑनलाइन दी गई हर प्रोडक्ट और उसकी कीमत की तुलना आसानी से कर सकते हैं. इस ज़माने में कम्पटीशन इतना ज़बरदस्त और तगड़ा हो गया है कि हर कंपनी कम प्राइस की स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर सक्सेसफुल नहीं हो सकती.इस डिजिटल युग में एक इंटरैक्टिव एक्सपीरियंस और बेहतरीन सर्विस देना ही सक्सेस का सीक्रेट बन गया है.आइए एक एग्ज़ाम्पल से समझते हैं. डेलनेकस्टमर एक्सपीरियंस मेंसुधारकरकेअपनेप्रॉफिटकोहर हफ़्ते 1 मिलियन सेटर टिन 1 मिलियन निकतटा टिगा शा तानी उपासना ५पतपरिपत मेंसुधारकरकेअपनेप्रॉफिटकोहर हफ़्ते 1 मिलियन $सेहर दिन 1 मिलियन $तक बढ़ा दिया था. कंपनी के फाउंडर, माइकल डेल का पूरा फोकस डायरेक्ट सेलिंग और ई-कॉमर्स पर था. जब इन्टरनेट ने रफ़्तार पकड़नी शुरू की तो उनकी इसमें दिलचस्पी भी बढ़ने लगी. वो जानते थे कि इंटरनेट कस्टमर्स के साथ डेल के डायरेक्ट रिलेशन को बढ़ाकर और इम्प्रूव कर सकता है. कॉलेज ख़त्म करने के एक साल के अंदर माइकल डेल ने डायरेक्ट सेल्स के प्रिंसिप्ल पर काम करने वाली एक कंपनी बनाई. शुरुआत में इसमें फ़ोन के द्वारा आर्डर लेने का सिस्टम रखा गया था. 1996 के बीच में जब ज़्यादातर कंपनियां ऐसा करने के बारे में प्लान बना रही थी, डेल ने अपने प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया. उनका शुरूआती वेबसाइट सिंपल बनाया गया था जिसमें प्रोडक्ट के बारे में इनफार्मेशन, ऑनलाइन आर्डर एक्सेप्ट करने का सिस्टम और कस्टमर का फीडबैक लेने की सर्विस दी गई थी. डेल ने वेबसाइट से आए कस्टमर्स के सुझावों से बहुत कुछ सीखा. फीडबैक के आधार पर उन्होंने वेबसाइट में कई बदलाव किए. समय के साथ, उनकी वेबसाइट कस्टमर्स के यूज़ के लिए काफ़ी आसान होने के साथ-साथ बहुत इंटरैक्टिव हो गई थी. डेल ने दो बातों का ध्यान रखा. पहला, नई वेबसाइट फ़ोन पर आर्डर करने वाले सिस्टम जितनी ही सिंपल और दत्जी होना चाहिशा टसरा सेल्समैन को अपने ! उपासना ५पतपरिपत मेंसुधारकरकेअपनेप्रॉफिटकोहर हफ़्ते 1 मिलियन $सेहर दिन 1 मिलियन $तक बढ़ा दिया था. कंपनी के फाउंडर, माइकल डेल का पूरा फोकस डायरेक्ट सेलिंग और ई-कॉमर्स पर था. जब इन्टरनेट ने रफ़्तार पकड़नी शुरू की तो उनकी इसमें दिलचस्पी भी बढ़ने लगी. वो जानते थे कि इंटरनेट कस्टमर्स के साथ डेल के डायरेक्ट रिलेशन को बढ़ाकर और इम्प्रूव कर सकता है. कॉलेज ख़त्म करने के एक साल के अंदर माइकल डेल ने डायरेक्ट सेल्स के प्रिंसिप्ल पर काम करने वाली एक कंपनी बनाई. शुरुआत में इसमें फ़ोन के द्वारा आर्डर लेने का सिस्टम रखा गया था. 1996 के बीच में जब ज़्यादातर कंपनियां ऐसा करने के बारे में प्लान बना रही थी, डेल ने अपने प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया. उनका शुरूआती वेबसाइट सिंपल बनाया गया था जिसमें प्रोडक्ट के बारे में इनफार्मेशन, ऑनलाइन आर्डर एक्सेप्ट करने का सिस्टम और कस्टमर का फीडबैक लेने की सर्विस दी गई थी. डेल ने वेबसाइट से आए कस्टमर्स के सुझावों से बहुत कुछ सीखा. फीडबैक के आधार पर उन्होंने वेबसाइट में कई बदलाव किए. समय के साथ, उनकी वेबसाइट कस्टमर्स के यूज़ के लिए काफ़ी आसान होने के साथ-साथ बहुत इंटरैक्टिव हो गई थी. डेल ने दो बातों का ध्यान रखा. पहला, नई वेबसाइट फ़ोन पर आर्डर करने वाले सिस्टम जितनी ही सिंपल और दत्जी होना चाहिशा टसरा सेल्समैन को अपने ! फ़ोन पर आर्डर करने वाले सिस्टम जितनी ही सिंपल और इजी होना चाहिए. दूसरा, सेल्समैन को अपने बिज़नेस करने के तरीके को बदलना होगा. इस इंटरैक्टिव customization ने डेल को बहुत सारे पीसी बेचने में मदद की और उनका ऑनलाइन बिज़नेस तेज़ी से बढ़ने लगा. CHANGE THE BOUNDARIES OF BUSINESS इनफार्मेशन के डिजिटल फ्लो ने कॉमर्स और ट्रेड की बाउंड्री को बदल दिया है. अब आर्गेनाइजेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर लोगों को काम पर रखने के सिस्टम में बदलाव करने लगे हैं.इन्टरनेट को यूज़ कर के कम्पनीज अपने इम्पोर्टेन्ट स्किल्स पर फोकस कर सकते हैं और दूसरे काम के लिए लोगों को आउटसोर्स कर सकते हैं. बिज़नेस managers बिज़नेसकी unpredictable डिमांड को डील करने के लिए ऑनलाइन फ्रीलांसर को हायर कर सकते हैं. इससे उनका कॉस्ट भी कम हो जाता है. मिडिल और छोटे साइज़ की कम्पनीज ज़्यादा परमानेंट एम्प्लाइज को रखे बिना अब ऑनलाइन लोगों से अपना काम करवा सकती हैं. इससे वर्कर्स को भी बहुत फ़ायदा होता है क्योंकि वो अब एक ही जगह तक सीमित नहीं हैं. अगर आप ऐसी जगह रहते हैं या रहना चाहते हैं जहां आपकी फील्ड में जॉब मिलना थोड़ा मुश्किल है तो इन्टरनेट ने आपकी इस प्रॉब्लम को सोल्व कर दिया है. जा ITI पातामा ॥ २VIC ।। इस प्रॉब्लम को सोल्व कर दिया है. ऑनलाइन लोगों को काम पर रखने या हायर करने में भी कम्पटीशन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. कम्पनीज अब अपने टैलेंट को आउटसोर्स कर सकती हैं. आउटसोरसिंग का मतलब है जब कोई कंपनी अपना काम करवाने के लिए किसी बाहर की पार्टी को हायर करती है और वो उनके परमानेंट एम्प्लोई नहीं होते. माइक्रोसॉफ्ट में main स्किल्स हैं बड़े वॉल्यूम में सॉफ्टवेर प्रोडक्ट बनाना, दूसरे सॉफ्टवेर कम्पनीज के साथ काम करना और कस्टमर्स को सपोर्ट और सर्विस ऑफर करना. कंपनी इन स्किल्स के अलावा दूसरी सर्विसेज को आउटसोर्स करती है. एग्ज़ाम्पल के लिए, कुछ साल पहले एक फ्रीलांस राइटर ने नोटिस किया कि माइक्रोसॉफ्ट असाइनमेंट लिखने के लिए लोगों को आउटसोर्स कर रही है. उसने तुरंत इस मौके को आज़माने का फ़ैसला किया. बाद में, उस आदमी ने एक दर्जन फ्रीलंसर्स को मैनेज कर के अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया. राइटिंग के लिए लोगों को आउटसोर्स करने से माइक्रोसॉफ्ट के एम्प्लाइज का बहुत समय बच गया था. अब वो अपने अपने जॉब पर ज़्यादा फोकस कर पा रहे थे. इसके अलावा,एक एक्सपर्ट को काम पर रखने से माइक्रोसॉफ्ट राइटिंग के फील्ड में दूसरों के मुकाबले आगे निकल गया था. इसी तरह, हॉलीवुड स्टूडियो को फाइनेंस, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन संभालने के लिए फुल-टाइम एम्प्लादज की जरुरत होती है लेकिन उनके पास जा ITI पातामा ॥ २VIC ।। इस प्रॉब्लम को सोल्व कर दिया है. ऑनलाइन लोगों को काम पर रखने या हायर करने में भी कम्पटीशन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. कम्पनीज अब अपने टैलेंट को आउटसोर्स कर सकती हैं. आउटसोरसिंग का मतलब है जब कोई कंपनी अपना काम करवाने के लिए किसी बाहर की पार्टी को हायर करती है और वो उनके परमानेंट एम्प्लोई नहीं होते. माइक्रोसॉफ्ट में main स्किल्स हैं बड़े वॉल्यूम में सॉफ्टवेर प्रोडक्ट बनाना, दूसरे सॉफ्टवेर कम्पनीज के साथ काम करना और कस्टमर्स को सपोर्ट और सर्विस ऑफर करना. कंपनी इन स्किल्स के अलावा दूसरी सर्विसेज को आउटसोर्स करती है. एग्ज़ाम्पल के लिए, कुछ साल पहले एक फ्रीलांस राइटर ने नोटिस किया कि माइक्रोसॉफ्ट असाइनमेंट लिखने के लिए लोगों को आउटसोर्स कर रही है. उसने तुरंत इस मौके को आज़माने का फ़ैसला किया. बाद में, उस आदमी ने एक दर्जन फ्रीलंसर्स को मैनेज कर के अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया. राइटिंग के लिए लोगों को आउटसोर्स करने से माइक्रोसॉफ्ट के एम्प्लाइज का बहुत समय बच गया था. अब वो अपने अपने जॉब पर ज़्यादा फोकस कर पा रहे थे. इसके अलावा,एक एक्सपर्ट को काम पर रखने से माइक्रोसॉफ्ट राइटिंग के फील्ड में दूसरों के मुकाबले आगे निकल गया था. इसी तरह, हॉलीवुड स्टूडियो को फाइनेंस, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन संभालने के लिए फुल-टाइम एम्प्लादज की जरुरत होती है लेकिन उनके पास A . जा ITI पातामा ॥ २VIC ।। इस प्रॉब्लम को सोल्व कर दिया है. ऑनलाइन लोगों को काम पर रखने या हायर करने में भी कम्पटीशन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. कम्पनीज अब अपने टैलेंट को आउटसोर्स कर सकती हैं. आउटसोरसिंग का मतलब है जब कोई कंपनी अपना काम करवाने के लिए किसी बाहर की पार्टी को हायर करती है और वो उनके परमानेंट एम्प्लोई नहीं होते. माइक्रोसॉफ्ट में main स्किल्स हैं बड़े वॉल्यूम में सॉफ्टवेर प्रोडक्ट बनाना, दूसरे सॉफ्टवेर कम्पनीज के साथ काम करना और कस्टमर्स को सपोर्ट और सर्विस ऑफर करना. कंपनी इन स्किल्स के अलावा दूसरी सर्विसेज को आउटसोर्स करती है. एग्ज़ाम्पल के लिए, कुछ साल पहले एक फ्रीलांस राइटर ने नोटिस किया कि माइक्रोसॉफ्ट असाइनमेंट लिखने के लिए लोगों को आउटसोर्स कर रही है. उसने तुरंत इस मौके को आज़माने का फ़ैसला किया. बाद में, उस आदमी ने एक दर्जन फ्रीलंसर्स को मैनेज कर के अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया. राइटिंग के लिए लोगों को आउटसोर्स करने से माइक्रोसॉफ्ट के एम्प्लाइज का बहुत समय बच गया था. अब वो अपने अपने जॉब पर ज़्यादा फोकस कर पा रहे थे. इसके अलावा,एक एक्सपर्ट को काम पर रखने से माइक्रोसॉफ्ट राइटिंग के फील्ड में दूसरों के मुकाबले आगे निकल गया था. इसी तरह, हॉलीवुड स्टूडियो को फाइनेंस, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन संभालने के लिए फुल-टाइम एम्प्लादज की जरुरत होती है लेकिन उनके पास ऑफर करना. कंपनी इन स्किल्स के अलावा दूसरी सर्विसेज को आउटसोर्स करती है. एग्ज़ाम्पल के लिए, कुछ साल पहले एक फ्रीलांस राइटर ने नोटिस किया कि माइक्रोसॉफ्ट असाइनमेंट लिखने के लिए लोगों को आउटसोर्स कर रही है. उसने तुरंत इस मौके को आज़माने का फ़ैसला किया. बाद में, उस आदमी ने एक दर्जन फ्रीलंसर्स को मैनेज कर के अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया. राइटिंग के लिए लोगों को आउटसोर्स करने से माइक्रोसॉफ्ट के एम्प्लाइज का बहुत समय बच गया था. अब वो अपने अपने जॉब पर ज़्यादा फोकस कर पा रहे थे. इसके अलावा,एक एक्सपर्ट को काम पर रखने से माइक्रोसॉफ्ट राइटिंग के फील्ड में दूसरों के मुकाबले आगे निकल गया था. इसी तरह, हॉलीवुड स्टूडियो को फाइनेंस, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन संभालने के लिए फुल-टाइम एम्प्लाइज की ज़रुरत होती है. लेकिन उनके पास ज़्यादा फुल-टाइम स्टाफ़ नहीं हैं. डायरेक्टर सिर्फ़ फ़िल्म प्रोडक्शन के लिए ज़्यादा एम्प्लाइज काम पर रखता है.फ़िल्म पूरी हो जाने के बाद वो अपनी-अपनी पसंद केकिसी दूसरे प्रोजेक्ट के काम में लग जाते हैं. आज हम सिर्फ इन्टरनेट की बदौलत इस क्रिएटिव एप्रोच को अब किसी भी फील्ड में लोगों को हायर करने के लिए कर सकते हैं. ऑफर करना. कंपनी इन स्किल्स के अलावा दूसरी सर्विसेज को आउटसोर्स करती है. एग्ज़ाम्पल के लिए, कुछ साल पहले एक फ्रीलांस राइटर ने नोटिस किया कि माइक्रोसॉफ्ट असाइनमेंट लिखने के लिए लोगों को आउटसोर्स कर रही है. उसने तुरंत इस मौके को आज़माने का फ़ैसला किया. बाद में, उस आदमी ने एक दर्जन फ्रीलंसर्स को मैनेज कर के अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया. राइटिंग के लिए लोगों को आउटसोर्स करने से माइक्रोसॉफ्ट के एम्प्लाइज का बहुत समय बच गया था. अब वो अपने अपने जॉब पर ज़्यादा फोकस कर पा रहे थे. इसके अलावा,एक एक्सपर्ट को काम पर रखने से माइक्रोसॉफ्ट राइटिंग के फील्ड में दूसरों के मुकाबले आगे निकल गया था. इसी तरह, हॉलीवुड स्टूडियो को फाइनेंस, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन संभालने के लिए फुल-टाइम एम्प्लाइज की ज़रुरत होती है. लेकिन उनके पास ज़्यादा फुल-टाइम स्टाफ़ नहीं हैं. डायरेक्टर सिर्फ़ फ़िल्म प्रोडक्शन के लिए ज़्यादा एम्प्लाइज काम पर रखता है.फ़िल्म पूरी हो जाने के बाद वो अपनी-अपनी पसंद केकिसी दूसरे प्रोजेक्ट के काम में लग जाते हैं. आज हम सिर्फ इन्टरनेट की बदौलत इस क्रिएटिव एप्रोच को अब किसी भी फील्ड में लोगों को हायर करने के लिए कर सकते हैं. BUSINESS @ SPEED OF THOUGHT Bill Gates GET TO MARKET FIRST कस्टमर्स तक जितनी जल्दी हो सके पहुंचना किसी भी मार्केट में जीतने के लिए बहुत ज़रूरी होताहै. अगर आप टाइम पर प्रोडक्ट डिलीवर करने में फेल हो गए तो आपका competitor बाज़ी मार लेगा.कस्टमर्स हमेशा हाई क्वालिटी वाले लेकिन किफ़ायती प्रोडक्ट चाहते हैं. अब हर बिज़नेस को क्वालिटी से समझौता किए बिना डिलीवरी के समय को कम करने के लिए नए तरीकों को खोजने की ज़रुरत है. इस प्रोसेस में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी ने बड़ा योगदान दिया है. इसने सर्विस देने के प्रोसेस को ज़्यादा आसान और efficient बना दिया है. जब इन्टरनेट तेज़ी से बढ़ रहा था, उस समय के दौरान फाइनेंसियल सर्विस देने वाली कंपनियों ने शिकायत की कि टेक्नोलॉजी ने नॉन-फाइनेंसियल sellers को उन्हें काट कर आगे आने का मौक़ा दिया है. लेकिन ब्राज़ील के सबसे बड़े बैंक में से एक बैंको ब्रैडेस्को का कुछ और ही मानना था. ब्रैडेस्को 1962 मेंकंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाली ब्राजील की पहली कंपनी थी. 1982 में, यह एटीएम और होम-बैंकिंग की पेशकश करने वाली पहली बैंक थी. ये कंपनी अपने competitors की तुलना में माना निसा निसारित ral ition थी. ये कंपनी अपने competitors की तुलना में अपने कस्टमर्स के लिए क्रिएटिव solution डेवलप करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती थी.ब्रैडेस्को छोटे डेवलपमेंट साईकल पर ध्यान फोकस करते थे – छह महीने से भी कम समय में मार्केट में नए आईडिया लाने के लिए. एक बार,ब्रैडेस्को ने छोटे बिज़नेस ओनर्स के लिए पैसापेमेंट और कलेक्शन को सपोर्ट करने के लिए कैश मैनेजमेंट सॉफ्टवेर लॉन्च किया.बाद में, कई और कंपनियों ने भी उस एप्लीकेशन को यूज़ करना शुरू कर दिया था. ब्रैडेस्को ने एक सैलरी कार्ड भी बनाया, जिसके जरिए एम्प्लाइज को सीधे एटीएम द्वारा पेमेंट किया जाता था फिर चाहे उनका बैंकअकाउंट हो या नाहो. दूसरी कंपनियों ने इस स्ट्रेटेजी को भी कॉपी करना शुरू कर दिया. 1998 में ब्रैडेस्को ब्राज़ील में इंटरनेट यूज़ करने वाली पहली बैंक बनी.जिन लोगों को आँखों की कोई भी समस्या के कारण दिखाई देने में दिक्कत होती थी उन्हें ऑनलाइन बैंकिंग की सर्विस देने वाली ब्रैडेस्को पहली बैंक थी.इन सब के अलावा, ब्रैडेस्को ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट सर्विस ऑफर करने वाली पहली कंपनी भी थी. ब्रैडेस्को ने टेक्नोलॉजी को खतरे के रूप में नहीं देखा बल्कि इसने कस्टमर्स के लिए अपनी सर्विस को ज़्यादा इफेक्टिव और आसान बनाने के लिए कंप्यूटर और बल्कि इसने कस्टमर्स के लिए अपनी सर्विस को ज़्यादा इफेक्टिव और आसान बनाने के लिए कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल किया. CONVERT BAD NEWS TO GOOD NEWS किसी भी आर्गेनाइजेशन में बहुतसी चीजें गलत हो सकती हैं. बिल गेट्स के अनुसार एक इफेक्टिव मैनेजर ये सुनने से पहले कि क्या सही हो रहा है, पहले इस बारे में जानना चाहता है कि क्यागलत हो रहा है. कंप्यूटर के आने से पहले, गलतियों का बहुत पहले ही पता लगाना ना के बराबर हुआ करता था.हर स्टेप में बहुत समय लगता था.लेकिन डिजिटल दुनिया में ये सबबदल गया. कंपनियों ने गलतियों का जल्दी पता लगाने और उसे तुरंत ठीक करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना सीखा. जिन चीज़ों ने आपके लिए काम नहीं किया उसके लिए निराश ना हों. याद रखें कि आपकी मेहनत और एफर्ट waste नहीं होंगे. किसी भी फेलियर से आप बहुत कुछ सीखते हैं. अपनी गलतियों से सीखना और लगातार इम्प्रूव करते रहना ही सक्सेस का सीक्रेट मंत्र है. माइक्रोसॉफ्ट ने वर्ल्ड-क्लास एप्लीकेशन्स और ऑपरेटिंग सिस्टम को लॉन्च करने से पहले कई failures का सामना किया है.1980 केसमय में, उनके स्प्रेडशीट प्रोडक्ट लोटस 1-2-3 के साथ मुक़ाबला नहीं कर पाए. माइक्रोसॉफ्ट 1980 के दशक A < मुक़ाबला नहीं कर पाए. माइक्रोसॉफ्ट 1980 के दशक में ओमेगा नाम के डेटाबेस पर काम करने में लगे रहे लेकिन आखिरकार उन्होंने 1990 में इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया. आईबीएम के साथ माइक्रोसॉफ्ट का लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट 1992 में ख़त्म हुआ.लाखों डॉलर लगाने और एक साथ काम करने के बाद भी उन्हें कोई रिजल्ट नहीं मिला. 1993 में कंपनी ने “Microsoft at Work” नाम के प्रोजेक्ट के तहत copier और फैक्स जैसी ऑफिस मशीनों मेरे वोल्यूशन लाने की कोशिश की. लेकिन अफ़सोस की बात यह है किये प्रोजेक्ट पूरी तरह से काम नहीं कर पाई. लेकिन इतने failures से उदास होने के बजाय, बिलगेट्स किसी भी चैलेंज के लिए हमेशा तैयार और excited रहते थे.वो किसी ना किसी प्रॉब्लम का सामना करने की तलाश में लगे रहते ताकि वो उसे सोल्व कर सकें. माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी गलतियों से बहुत कुछ सीखा.मल्टी-प्लान स्प्रेडशीट के फेलियर ने उन्हें माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल को डेवलप करने में मदद की, जिसे आज तक कोई बीट नहीं कर पाया है और जो लॉन्च होने के बाद से अब तक टॉप पर बना हुआ है. ओमेगा डेटाबेस प्रोजेक्ट की गलतियों से सीखते हुए, उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस डेवलप किया, जो सबसे popular डेस्कटॉप डेटा बेस बन गया.ऑफिस मशीनों के साथ unsuccessful एक्सपीरियंस ने माइक्रोसॉफ्ट को टेक्निकल ज़रूरतों को समझने में 1992 में ख़त्म हुआ.लाखों डॉलर लगाने और एक साथ काम करने के बाद भी उन्हें कोई रिजल्ट नहीं मिला. 1993 में कंपनी ने “Microsoft at Work” नाम के प्रोजेक्ट के तहत copier और फैक्स जैसी ऑफिस मशीनों मेरे वोल्यूशन लाने की कोशिश की. लेकिन अफ़सोस की बात यह है किये प्रोजेक्ट पूरी तरह से काम नहीं कर पाई. लेकिन इतने failures से उदास होने के बजाय, बिलगेट्स किसी भी चैलेंज के लिए हमेशा तैयार और excited रहते थे.वो किसी ना किसी प्रॉब्लम का सामना करने की तलाश में लगे रहते ताकि वो उसे सोल्व कर सकें. माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी गलतियों से बहुत कुछ सीखा.मल्टी-प्लान स्प्रेडशीट के फेलियर ने उन्हें माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल को डेवलप करने में मदद की, जिसे आज तक कोई बीट नहीं कर पाया है और जो लॉन्च होने के बाद से अब तक टॉप पर बना हुआ है. ओमेगा डेटाबेस प्रोजेक्ट की गलतियों से सीखते हुए, उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस डेवलप किया, जो सबसे popular डेस्कटॉप डेटा बेस बन गया.ऑफिस मशीनों के साथ unsuccessful एक्सपीरियंस ने माइक्रोसॉफ्ट को टेक्निकल ज़रूरतों को समझने में मदद की, जो अब वो विंडोज सीई ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ इसकी सर्विस देते हैं. BUSINESS @ SPEED OF THOUGHT Bill Gates RAISE YOUR CORPORATE IQ मॉडर्न मार्केट में सक्सेसफुल होने के लिए हर कंपनी को कॉर्पोरेट IQ की ज़रुरत होती है.नॉलेज को मैनेज करके, आप अपनी कंपनी के कॉर्पोरेट IQ को बढ़ा सकते हैं.लेकिन नॉलेज को मैनेज करने से हमारा क्या मतलब है? इसका सीधा मतलब है इनफार्मेशन के फ्लो को मैनेज करना ताकि इम्पोर्टेन्ट इनफार्मेशन सही लोगों तक पहुंचे और वो समय पर काम कर सकें. कॉर्पोरेट |Q का मतलब इंस्टीट्यूशनल इंटेलिजेंस से भी है.यहाँ नॉलेज को छुपाया नहीं जाता बल्कि एक दूसरे से शेयर किया जाता है.काम की इनफार्मेशन सिर्फ हाई लेवल के एम्प्लाइज की पहुंच तक सीमित ना करें. एक सक्सेसफुल बिज़नेस के पीछे कोई अकेला आदमी नहीं होता बल्कि कई लोगसाथ जुड़कर एक टीम की तरह काम करते हैं.एक टीम में हर इंसान के आईडिया को सुना जाना चाहिए, फ़िर सबकी राय लेकर किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए. बिज़नेस managers का गोल ऐसी टीम बनाने का होना चाहिए जो बेस्ट आईडिया को डेवलप कर सके और उस पर साथ मिलकर एक साथ काम कर सके. सीनियर executives को नॉलेज शेयरिंग में विश्वास AA ਦਾ ਹੈ ਜਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਜੇ सीनियर executives को नॉलेज शेयरिंग में विश्वास करने की ज़रुरत है. अब लीडर्स को अपने एम्प्लाइज से जुड़ने की ज़रुरत है.आइए एक एग्ज़ाम्पल से समझते हैं. फ़ोर्ड के ऑपरेशंस प्रेसिडेंट,जैक नासर, हर फ्राइडे को दुनिया भर में अपने 89,000 एम्प्लाइज को ईमेल भेजते हैं. ईमेल के ज़रिए जैक पूरे हफ्ते की हर अच्छी और बुरी ख़बर उनके साथ शेयर करते हैं. यहाँ तक कि वो उन सैंकड़ों जवाबों को भी पढ़ते हैं जो उन्हें मिलती रहती हैं और उनमें से कईयों के जवाब भी देते हैं. बिल गेट्स अपने एम्प्लाइज से मिलने वाली हर ईमेल को पढ़ते हैं. उन्हें लगता है कि एम्प्लाइज के रवैये और उन पर असर करने वाले मुद्दों कोसमझने का सबसे आसान ज़रिया ईमेल है. कोका कोला इसका एक और एग्ज़ाम्पल है. कोका कोला दुनिया का सबसे ज़्यादा बिकने वाला ड्रिंक बनाते हैं. ये दुनिया भर में लगभग हर देश में अपना प्रोडक्ट बेचते हैं.ये ईमेल के ज़रिए दुनिया के हर कोने में कम्यूनिकेट करने वाली सबसे पहली कंपनी थी. जैसे-जैसे उनका बिज़नेस बढ़ता गया, कोका कोला को अपनी हर ब्रांच में इनफार्मेशन शेयर करने की ज़रुरत महसूस हुई.इसलिए इस मकसद को पूरा करने के लिए उन्होंने एक एप्लीकेशन डेवलप किया जिसका नाम Inform है.Inform डेटा को स्टडी करने के लिए एक एनालिटिकल टूल है. ये मार्केटिंग डेटा को रिसर्च डेटा के साथ एक कर देता है जैसे कस्टमर ग्रुप और उनके per कैपिटा इनकम को जोड़ देता है. उन पर असर करने वाले मुद्दों कोसमझने का सबसे आसान ज़रिया ईमेल है. कोका कोला इसका एक और एग्ज़ाम्पल है. कोका कोला दुनिया का सबसे ज़्यादा बिकने वाला ड्रिंक बनाते हैं. ये दुनिया भर में लगभग हर देश में अपना प्रोडक्ट बेचते हैं.ये ईमेल के ज़रिए दुनिया के हर कोने में कम्यूनिकेट करने वाली सबसे पहली कंपनी थी. जैसे-जैसे उनका बिज़नेस बढ़ता गया, कोका कोला को अपनी हर ब्रांच में इनफार्मेशन शेयर करने की ज़रुरत महसूस हुई.इसलिए इस मकसद को पूरा करने के लिए उन्होंने एक एप्लीकेशन डेवलप किया जिसका नाम Inform है.Inform डेटा को स्टडी करने के लिए एक एनालिटिकल टूल है. ये मार्केटिंग डेटा को रिसर्च डेटा के साथ एक कर देता है जैसे कस्टमर ग्रुप और उनके per कैपिटा इनकम को जोड़ देता है. इस टूल को यूज़ कर के एम्प्लाइज एडवरटाइजिंग के लिए बेहतर प्लान बना सकते हैं. वो लोगों के अलग-अलग ग्रुप के लिए टार्गेटेड प्रोडक्ट भी बना सकते हैं. Inform नए एम्प्लाइज के लिए भी बहुत हेल्पुल है. वो जल्दी सीखने और सब कुछ समझने के लिए इस एप्लीकेशन को यूज़ कर सकते हैं. ये पावरफुल [ नॉलेज शेयरिंग टूल कोका कोला की एफिशिएंसी और दुनिया भर में उनकीसक्सेस के लिए ज़िम्मेदार है. BUSINESS @ SPEED OF THOUGHT Bill Gates BIG WINS REQUIRE BIG RISKS कभी-कभी बड़ी सक्सेस के लिए हमें बड़ा रिस्क भी लेना पड़ता है. अगर आप अपने बिज़नेस में जल्दी रिस्क लेने से पीछे हट जाएँगे तो बाद में आपकी कंपनी मार्केट में पीछे रह जाएगी. बिज़नेस में पिछली घटनाओं और प्रेजेंट सिचुएशन को ही जानना काफ़ी नहीं है.आपको ये पहले से समझने की ज़रुरत है कि फ्यूचर में मार्केट कहाँ जा सकता है और उसके अनुसार एक्शन लेने की ज़रुरत है. कुछ इंडस्ट्रीज का नेचर बहुत काम्प्लेक्स होता है. फ्यूचर में किसी गारंटी के बिना इसमें बड़ा रिस्क लेना पड़ता है. उभरती हुई नई इंडस्ट्रीज में रिस्क उठाना एक नेचुरल प्रोसेसहै. जो इंडस्ट्री थोड़ी पुरानी और mature हो गई हैं उसमें छोटे रिस्क होते हैं. ये जानने के लिए कि रिस्कलेनावर्थ है या नहीं, आपको ज़्यादा इनफार्मेशन इकट्ठा करना होगा. अगर सही स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल किया जाए तो ये रिस्क आपको बहुत बड़ी सक्सेस दे सकती है. आपको लॉन्ग टर्म फ्यचर को सिक्योर करने के लिए बड़े रिस्क लेने जगर सा ट्रcणापा तिमाल किया जाए ता पारका आपको बहुत बड़ी सक्सेस दे सकती है. आपको लॉन्ग टर्म फ्यूचर को सिक्योर करने के लिए बड़े रिस्क लेने होंगे. हाई रिस्क इंडस्ट्री का एक अच्छा एग्जाम्पल है जेनेटिक रिसर्च. इसमें कंपनी बिना किसी सक्सेस की गारंटी के सालोंकिसी प्रोजेक्ट में रिसर्च करने में लगा देती है. एक बायोटेक कंपनी, ICOS, कैंसर का इलाज खोज रही थी. उन्होंने पता लगाया कि Atr नाम के जीन का ओवर एक्प्रेशन कैंसर के डेवलपमेंट में एक बड़ी भूमिका निभाता है. ICOS एक्स-रे द्वारा डिस्ट्रॉय करने के लिए कैंसर सेल्स को सेंसिटिव बनाने की कोशिश कर रहा था. ICOS ने ह्यूमन डीएनए में जीन Atr को खोजने के लिए इंटरनेट पर डीएनए डेटाबेस को खोज कर एनालाइज किया. जब ICOS नेअपना इंटरनेट रिसर्च पब्लिश किया, तो उन्होंने पाया कि Vollum Institute नाम की एक और कंपनी को भी यही रिजल्ट मिला था. Atr जीन ने कैंसर सेल्स को mature होने से रोक दिया था और उन्हें डिवाइड करने वाली स्टेट में रखा था. तब इन दोनों आर्गेनाइजेशन ने हाथ मिलाया.उन्होंने पाया कि प्रोस्टेट कैंसर, ब्रैस्टकैंसर और lungs के कैंसर में Atr की कई कॉपी मौजूद थीं.उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि Atr का ओवर प्रोडक्शन कैंसर का कारण कैंसर में Atr की कई कॉपी मौजूद थीं.उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि Atr का ओवर प्रोडक्शन कैंसर का कारण हो सकता है. लेकिन ये सिर्फ़ शुरूआती स्टेप था. सबसे इम्पोर्टेन्ट पार्ट ये जानना था कि Atr के ओवर प्रोडक्शन को कैसे कम किया जाए. ICOSको अब भी बहुत काम करना बाकी था. बायोटेक इंडस्ट्री में ये जानना कि किस प्रोजेक्ट में पैसा लगाना है ये बहुत इम्पोर्टेन्ट होता है.ये डिसिशन किसी भी कंपनी को बना या बिगाड़ सकता है. डिजिटल इनफार्मेशन बेकार के इनफार्मेशन को हटाने में बहुत समय बचाता है. ये कंपनी के डिसिशन लेने की एबिलिटी को बेहतर बनाता है. बायोटेक कम्पनीज को किसी भी प्रोडक्ट को मार्केट में लाने से पहले करोड़ों रूपए ख़र्च करने पड़ते हैं.लेकिन एक बार जब वो एक दवा की खोजकर लेते हैं और मार्केट में ब्रांड बना लेते हैं, तो वो कई सालों तक इससे फ़ायदा उठा सकते हैं. कन्क्लूज़न इस बुक में आपने बिज़नेस में इन्फोर्मांस के इम्पोर्टेस के बारे में सीखा.आपने सीखा कि एक सक्सेसफुल बिज़नेस चलाने के लिए आपको इनफार्मेशन इकट्ठा करने और मैनेज करने के लिए efficient तरीकों के कन्क्लूज़न इस बुक में आपने बिज़नेस में इन्फोर्मास के इम्पोर्टेस के बारे में सीखा.आपने सीखा कि एक सक्सेसफुल बिज़नेस चलाने के लिए आपको इनफार्मेशन इकट्ठा करने और मैनेज करने के लिए efficient तरीकों के बारे में जानने की ज़रुरत है. आपने ये भी समझा कि अगर आपकी कंपनी मार्केट में एक अच्छी पोजीशन पर आ गई है तब भी आपको बेफ़िक्र होकर नहीं बैठना चाहिए. आपको लगातार एनालिसिस और इम्प्रूवमेंट के साथ इस पोजीशन को मेन्टेन करना होगा. आपने ये भी जाना कि किसी भी बिज़नेस को खुद को इम्प्रूव करने के लिए कस्टमर्स को ध्यान में रखना चाहिए. किसीनएप्रोडक्ट को पहले मार्केट में लॉन्च करने का नजरिया अपनाएं. अगर आप कदम आगे नहीं बढ़ाएंगे तो आपके competitor आपसे आगे निकलने में हिचकिचाएंगे नहीं. फेल होने से डरो मत. अपने फेलियर से सीखना ही आपको सक्सेस के रास्ते पर आगे ले जाता है. आपने ये भी समझा कि आपको अपने एम्प्लाइज के साथ एक टीम के रूप में काम करना चाहिए. नए आईडिया को खुले दिमाग से वेलकम करें. इन्टरनेटने इनफार्मेशन इकट्ठा करने और उसे एक साथ लाने के बेफ़िक्र होकर नहीं बैठना चाहिए. आपको लगातार एनालिसिस और इम्प्रूवमेंट के साथ इस पोजीशन को मेन्टेन करना होगा. आपने ये भी जाना कि किसी भी बिज़नेस को ख़ुद को इम्प्रूव करने के लिए कस्टमर्स को ध्यान में रखना चाहिए. किसीनएप्रोडक्ट को पहले मार्केट में लॉन्च करने का नजरिया अपनाएं. अगर आप कदम आगे नहीं बढ़ाएंगे तो आपके competitor आपसे आगे निकलने में हिचकिचाएंगे नहीं. फेल होने से डरो मत. अपने फेलियर से सीखना ही आपको सक्सेस के रास्ते पर आगे ले जाता है. आपने ये भी समझा कि आपको अपने एम्प्लाइज के साथ एक टीम के रूप में काम करना चाहिए. नए आईडिया को खुले दिमाग से वेलकम करें. इन्टरनेटने इनफार्मेशन इकट्ठा करने और उसे एक साथ लाने के प्रोसेस को बहुत आसान बना दिया है. टेक्नोलॉजी rocket की स्पीड से बढ़ रहा है और इसमें लगातार नए-नए बदलाव होते रहेंगे इसलिए इससे डरो मत. बस इसका हाथ पकड़कर आगे बढ़ो और ये आपको टॉप पर ले जाएगा.

Leave a Reply