Blue Ocean Strategy W. Chan Kimand Renée Mauborgne Books In Hindi Summary

Blue Ocean Strategy W. Chan Kimand Renée Mauborgne इंट्रोडक्शन (Introduction) ब्लू ओशन एक इफेक्टिव मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है जिसे ख़ास तरह से डिज़ाइन किया गया है औरइसे फॉलो करने से सक्सेस मिलने की guarantee होतीहै. येआज के मॉडर्न मार्केट में बहुत मददगार साबित होगी ख़ासकर जहां इतना ज़बरदस्त competition है. इस बुक में आप ब्लू ओशन स्ट्रेटेजी बनाने के 4 प्रिसिप्लस के बारे में जानेंगे. आप ऐसे टूल्स और फ्रेमवर्क के बारे में सीखेंगे जिनका इस्तेमाल कर आप मार्केट को जज करने के बाद अपना अगला स्टेप डिसाइड कर सकते हैं. चाहे आप माने या ना मानें लेकिन ग्रोथ और प्रॉफिट के लिए मार्केट में अनलिमिटेड मौके मौजूद हैं. एक तरीका है जिससे आप हर competition को बेअसर कर सकते हैं. अगर आप किसी बिज़नेस में नए भी हैं तो भी आप एक कमाल का और बेहद सक्सेसफुल प्रोडक्ट बना सकते हैं और नंबर 1 बन सकते हैं. आपको बस एक ब्लू ओशन की ज़रुरत होगी. तो आइए बिना देर किए इसके बारे में जानते हैं. क्रिएटिंग ब्लू ओशन (Creating Blue Ocean) रेड ओशन ट्रेडिशनल मार्केटिंग के बारे में बताता है.यहाँ हर कंपनी एक दूसरे को बीट करने की कोशिश करती है वो कम दाम बेहतर पोडक्ट फीचर और है.यहाँ हर कंपनी एक दूसरे को बीट करने की कोशिश करती है. वो कम दाम, बेहतर प्रोडक्ट फीचर और attractive मार्केटिंग की मदद से एक दूसरे से मुकाबला करते हैं. हर कंपनी मार्केट का एक बड़ा हिस्सा और ज़्यादा से ज़्यादा कस्टमर्स को अपनी ओर attract करने की कोशिश में लगी रहती है.तो इससे होता ये है कि मार्केट में बहुत ज़्यादा भीड़ हो जाती है और ग्रोथ और प्रॉफिट की opportunity कम होती चली जाती है. competition को बीट करने की कोशिश में कई कंपनी वो प्रोडक्ट बनाने लगती है जो पहले से ही मार्केट में मौजूद है और जिनसे कस्टमर ऊब चुके हैं. यहाँ एक दूसरे से आगे निकलने की इतनी होड़ लगी हुई है कि इसे रेड ओशन कहा जाता है. अब ब्लू ओशन एक बिलकुल नई तरह की मार्केटिंग है. ये वो स्ट्रेटेजी है जिसे ज़्यादा लोगों ने आज़माया नहीं है.इसमें भरपूर ग्रोथ और प्रॉफिट की opportunity मौजूद है. अगर कोई कंपनी ब्लू ओशन क्रिएट करती है तो वहाँ कोई competition नहीं होगा और प्रोडक्ट के डिमांड की कोई लिमिट नहीं होगी. competition से जीतने का या उससे ऊपर उठने का एक ही तरीका है कि हमें ट्राय करना बंद करना होगा. ब्लू ओशन इसी लॉजिक पर काम करता है.इसके लिए कंपनी को ज़रुरत है कि वो एक बिलकुल नया ऑफर क्रिएट करे जिसकी लोगों को सच में ज़रुरत है और जिसे वो लंबे समय से खोज रहे हैं. ब्लू ओशन का एक बेहतरीन एक्जाम्पल हैCirque du Soleil. और जिसे वो लंबे समय से खोज रहे हैं. ब्लू ओशन का एक बेहतरीन एक्जाम्पल हैCirque du Soleil. एक समय था जब सर्कस इंडस्ट्री दिन-ब-दिन छोटी होती जा रही थी. Barnum & Barley और Ringling Bros. जैसे मशहूर नाम अब अतीत की बात हो गए थे.उनका टारगेट मार्केट बच्चे थे, यही कारण थे कि उनका मेन अट्रैक्शन जानवर हुआ करते थे.लेकिन आजकल के बच्चे सर्कस देखना नहीं बल्कि ऑनलाइन गेम्स खेलना पसंद करते हैं. इसलिएCirque du Soleil ने बड़ों और कॉर्पोरेट क्लाइंट्स की पसंद और ज़रुरत के हिसाब से एक नया मार्केट स्पेस बनाया. ये सर्कस के कांसेप्ट को बदलाव के साथ सामने लेकर आए. जहां बाकि सर्कस ज़्यादा मजाकिया और फेमस जोकर को शो में लाकर मुकाबला कर रहे थे वहीँ Cirque du Soleil को इन सब की परवाह नहीं थी. उन्होंने बिलकुल यूनिक और फ्रेश कांसेप्ट से शो को रीडिज़ाइन किया. उन्होंने सर्कस और थिएटर को एक दूसरे से जोड़कर अपना शो प्रेजेंट किया. इसमें सर्कस का मज़ा और एडवेंचर भी था और थिएटर का आर्ट भी. उनके हर शो का एक थीम या कहानी होती थी. इसके साथ ही उनका ओरिजिनल म्यूजिक कम्पोजीशन उनके एक्ट की लाइटिंग और परफॉरमेंस में चार चाँद लगा देता था.उनके शो में अब भी जोकर परफॉर्म करते थे लेकिन वो ज़्यादा हंसी मज़ाक या बेफ़िजूल की कॉमेडी के बजाय आर्ट पर ध्यान देने लगे. उनके यहाँ acrobats भी परफॉर्म करते लेकिन उनके स्टंट्स में थे लेकिन वो ज़्यादा हंसी मज़ाक या बेफ़िजूल की कॉमेडी के बजाय आर्ट पर ध्यान देने लगे. उनके यहाँ acrobats भी परफॉर्म करते लेकिन उनके स्टंट्स में सुंदरता और ग्रेस शामिल था जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता था. Cirque du Soleil ने जानवरों का इस्तेमाल करना पूरी तरह बंद कर दिया था. एनिमल ग्रुप्स के विरोध के अलावा, जानवरों की देखभाल, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, उनकी दवाइयां, उनकी ट्रेनिंग एक बहुत बड़ा चिंता का कारण था. इसके साथ ही उन्होंने फेमस स्टार पेफोर्मेर्स के एक्ट को भी पूरी तरह बंद कर दिया था. अब वहाँ कोई स्टार परफ़ॉर्मर नहीं था. शो की कहानी को उन्होंने क्रिएटिविटी से एंटरटेनिंग बना दिया था. वो अपने वेन्यू को इस तरह बनाते कि लोगों को लगता था कि वो किसी जादुई दुनिया में जा रहे हैं जहां कोई भी चमत्कार हो सकता था. सर्कस और थिएटर को जोड़कर उन्होंने एक नए तरह का लाइव एंटरटेनमेंट लोगों को दिया था. उन्होंने सर्कस के महंगे एक्ट्स पर कम खर्च कर क्रिएटिविटी में ज़्यादा पैसा इन्वेस्ट किया. इस तरह उन्होंने एक ब्लू ओशन क्रिएट कर लोगों को ऐसा एक्सक्लूसिव एक्सपीरियंस दिया जिसके लिए दुनिया भर के एडल्ट पैसा खर्च कर उनका शो देखने के लिए तैयार हैं. Blue Ocean Strategy W. Chan Kimand Renée Mauborgne एनालिटिकल टूल्स एंड फ्रेमवर्क (Analytical Tools and Framework) इस चैप्टर में आप 4 इम्पोर्टेन्ट स्ट्रेटेजी के बारे में जानेंगे. ये टूल्स आपको मार्केट को स्टडी करने में मदद करेंगे ताकि आप डिसाइड कर सकें कि आगे क्या एक्शन लेना चाहिए. इसे अच्छे से समझने के लिए, आइए अमेरिका की वाइन इंडस्ट्री के बारे में बात करते हैं. ये इंडस्ट्री भी एक रेड ओशन है. कैलिफ़ोर्निया wines का स्पेन, फ्रांस और इटली से इम्पोर्ट की जाने वाली वाइन से ज़बरदस्त competition है. टॉप आठ कंपनियां कामार्केट के 75% पर कब्ज़ा है जिसमें वो एक दूसरे से आगे निकलने की रेस में लगे रहते हैं जबकि 25% के लिए 1600 छोटी कम्पनीज का एक दूसरे से मुकाबला है. ये स्ट्रेटेजी कुछ इस तरह है. ये एक ग्राफ है जो आपको उन फैक्टर्स को दिखाता है जिसमें brands इन्वेस्ट कर रहे हैं और कितना इन्वेस्ट कर रहे हैं. अमेरिका की वाइन इंडस्ट्री में 7 main फैक्टर्स होते हैं. पहला है, price per bottle यानी एक bottle की कीमत. दूसरा है, वाइन बनाने के टर्न्स लिखी हुई हाई क्लास पैकेजिंग. तीसरा है, हाई क्लास मार्केटिंग. चौथा है, वाइन की एजिंग क्वालिटी. पांचवा है, vineyard की प्रेस्टीज. छठा है, वाइन का taste. सांतवा है, वाइन की वैरायटी. है, vineyard की प्रेस्टीज. छठा है, वाइन का taste. सांतवा है, वाइन की वैरायटी. प्रीमियम क्वालिटी की वाइन के लिए सभी टॉप कम्पनीज इन सातों फैक्टर्स में लगभग equally इन्वेस्ट करती है. कम दाम की वाइन या बजट वाइन के लिए, छोटी कम्पनीज उसकी प्राइस कम रखती हैं, उसकी पैकेजिंग में ज़्यादा खर्च करती है और बचे हुए फैक्टर्स में equally इन्वेस्ट करती है. अगर आप भी इन कम्पनीज में से एक हैं तो चाहे आप जिस तरह भी फैक्टर्स को एडजस्ट करने की कोशिश करें, आप सक्सेसफुल नहीं हो सकते. जब तक आप उन घिसे पिटे रूल्स को अपनाकर अपने competitors को बीट करने की कोशिश करेंगे तब तक आप मार्केट पर कब्ज़ा नहीं कर पाएँगे. आइए ऑस्ट्रेलिया के Casella Wines पर एक नज़र डालते हैं और कैसे उनके ब्रैड [yellow tail] ने ब्लू ओशन क्रिएट किया. yellow tail] 2003 में मार्केट में छा गए थे जब उन्होंने एक मज़ेदार,अलग और इजी-टू-ड्रिंक वाइन बनाई जिसे बीयर और कॉकटेल लवर्स भी पीना पसंद करते थे.वो अमेरिका के मार्केट में आए और नंबर वन बन गए. यहाँ तक कि उन्होंने फ्रांस और इटली से इम्पोर्ट की जाने वाली प्रीमियम वाइन को भी पीछे छोड़ दिया था. 2003 में, उनकी annual सेल 4.5 मिलियन case थी. 750 ml की रेड वाइन की bottle बेस्ट सेलर बन गई थी. ये एक सोशल डिंक थी जिसके स्वाद की वजह से उसे bottle बेस्ट सेलर बन गई थी. ये एक सोशल ड्रिंक थी जिसके स्वाद की वजह से उसे हर कोई पीना पसंद करता था. इसका सॉफ्ट, मीठा फूटी taste सबको पसंद आया था. सिर्फ इतना ही नहीं, इसकी bottle और पैकेजिंग भी दूसरों से अलग और यूनिक थी. बाकि सभी brands की वाइन दिखने में एक जैसी थी लेकिन [yellow tail] की वाइन neon colours के साथ काले रंग की थी. ये सिंपल तो था लेकिन सबका ध्यान अपनी ओर खींचने वाला था, उसकी इमेज के बीच में सिर्फ एक kangaroo बना हुआ था. [yellow tail] के कारण रिटेल स्टोर्स में सेल्स क्लर्क को दूसरे वाइन बेचने में मुश्किल होने लगी. जब [yellow tail] को मार्केट में लाया गया तब उसमें दो तरह के वाइन थे,रेड वाइन और white वाइन. Casella Winesने consumer और रिटेलर्स दोनों के लिए प्रोडक्ट को सिलेक्ट करना बहुत आसान बना दिया था. तो आप competition को ब्रेक करने के लिए और नए रूल्स सेट करने के लिए क्या करेंगे? आप सारे फैक्टर्स को एक नए लेवल पर कैसे ले जा सकते हैं जैसे [yellow tail] ले कर गया? इसका जवाब है फोर एक्शन फ्रेमवर्क के ज़रिए. वो चार एक्शन हैं eliminate, reduce, raise it create. पहले ये जानना ज़रूरी है कि किन फैक्टर्स को eliminate यानी हटाया जा सकता है. ये फैक्टर कस्टमर के लिए इम्पोर्टेन्ट नहीं होते. दसरा. ये देखना पहले ये जानना ज़रूरी है कि किन फैक्टर्स को eliminate यानी हटाया जा सकता है. ये फैक्टर कस्टमर के लिए इम्पोर्टेन्ट नहीं होते. दूसरा, ये देखना कि किन फैक्टर्स को कम किया जा सकता है यानी reduce. ये ऐसे फैक्टर्स हैं जिन पर दूसरी कम्पनीज बहुत ज़्यादा इन्वेस्ट करती हैं. तीसरा, ये जानना कि किन फैक्टर्स को बढ़ाना चाहिए यानी raise. ये वो फैक्टर्स हैं जिन पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रुरत है.चौथा, ये जानना कि कौन से फैक्टर्स को बनाया जाना चाहिए यानी क्रिएट. ये ऐसे फैक्टर हैं जिन्हें बाकि कम्पनीज ने कभी ऑफर नहीं किया है या जिसके बारे में कभी सोचा तक नहीं है. yellow tail] के केस में उन्होंने हाई क्लास पैकेजिंग, वाइन बनाने के टर्न्स, वाइन की एजिंग क्वालिटी और हाई क्लास मार्केटिंग को eliminate कर दिया था. उन्होंने vineyard की प्रेस्टीज, वाइन की वैरायटी और उसके taste के फैक्टर्स को reduce कर दिया था. उन्होंने रिटेल स्टोर में इन्वोल्वेमेंट और प्राइस versus बजट वाइन को raise किया और नए फैक्टर्स जैसे fun, एडवेंचर, इजी ड्रिंकिंग और सिंपल सिलेक्शन को क्रिएट किया था. कुछ फैक्टर्स को eliminate और reduce कर Casella Wines ने प्रोडक्शन कॉस्ट में लगने वाले काफ़ी पैसे बचाए थे. कहा जाता है कि वाइन जितनी पुरानी होती है उसकी क्वालिटी उतनी अच्छी होती जाती है. लेकिनCasella Wines को अपने वाइन . पैकेजिंग, वाइन बनाने के टर्न्स, वाइन की एजिंग क्वालिटी और हाई क्लास मार्केटिंग को eliminate कर दिया था. उन्होंने vineyard की प्रेस्टीज, वाइन की वैरायटी और उसके taste के फैक्टर्स को reduce कर दिया था. उन्होंने रिटेल स्टोर में इन्वोल्वेमेंट और प्राइस versus बजट वाइन को raise किया और नए फैक्टर्स जैसे fun, एडवेंचर, इजी ड्रिंकिंग और सिंपल सिलेक्शन को क्रिएट किया था. कुछ फैक्टर्स को eliminate और reduce कर Casella Wines ने प्रोडक्शन कॉस्ट में लगने वाले काफ़ी पैसे बचाए थे. कहा जाता है कि वाइन जितनी पुरानी होती है उसकी क्वालिटी उतनी अच्छी होती जाती है. लेकिनCasella Wines को अपने वाइन की अच्छी क्वालिटी के लिए सालों इंतज़ार नहीं करना पड़ा क्योंकि नए फैक्टर्स क्रिएट कर उन्होंने मार्केट को जीत लिया था. yellow tail] ने अपने बेहतरीन, मज़ेदार, फ्रेश और टेस्टी वाइन के द्वारा नॉन-ड्रिंकर्स को भी उनकी वाइन पीने पर मजबूर कर दिया था. और सबसे बड़ी बात, Casella Wines ने मार्केटिंग पर ज़्यादा इन्वेस्ट नहीं किया इसके बावजूद उनका प्रोडक्ट एक क्रेज़ बन गया क्योंकि वो इतना यूनिक था कि उसने ख़ुद कस्टमर्स को अपनी ओर attract कर लिया था. प्रोडक्ट या सर्विस के स्कोप को सीमित ना करें. अगर हर कोई फंक्शनल एप्रोच का इस्तेमाल कर रहा है तो आप इमोशनल एप्रोच को यूज़ करें. अंत में, same टाइम पीरियड पर फोकस ना करें. मार्केट ट्रेंड में लोंग टर्म को देखें. अगर आप ब्लू ओशन बनाना चाहते हैं और एक्स्ट्राऑर्डिनरी सक्सेस अचीव करना चाहते हैं तो आपको मार्केट की बाउंड्री से परे जाना होगा. कुछ आउट ऑफ़ द बॉक्स, कुछ हट के सोचना होगा. आपको इंडस्ट्री, buyer ग्रुप, फंक्शनल इमोशनल एप्रोच यहाँ तक कि टाइम से ऊपर उठ कर चीज़ों को देखना होगा. आइए ब्लू ओशन के कुछ एक्जाम्पल देखते हैं कि उन्होंने कैसे मार्केट के बाउंड्री को फ़िर से बनाया. मार्केट की बाउंड्री से हट कर देखने का एक रास्ता है alternative इंडस्ट्री के पार देखना. कॉर्पोरेट executives को हमेशा ट्रेवल करने की ज़रुरत होती है. किसी भी कंपनी के लिए एक प्राइवेट जेट को खरीदना और उसे मेन्टेन करना बहुत महँगा होता है. लेकिन कमर्शियल फ्लाइट का इस्तेमाल करना भी आसान नहीं है. लंबी चेक इन लाइन में खड़े रहना, भीड़भाड़वाले एअरपोर्ट, फ्लाइट बदलना इन सब में समय भी लगता है और थकान भी होती है. तो एयरलाइन कंपनी NetJets इसका एक असरदार हल लेकर आया. उन्होंने प्राइवेट जेट के आराम को कमर्शियल फ्लाइट के चीप प्राइस के साथ जोड़ दिया. ऐसा उन्होंने कम्पनीज को प्राइवेट जेट में पार्टनर बनाकर किया. इसमें एक कंपनी प्राइवेट जेट की बनाकर किया. इसमें एक कंपनी प्राइवेट जेट की 1/16th ओनर बन सकती थी.जिसमें वो उस प्राइवेट जेट को दूसरे 15 कम्पनीज के साथ शेयर करेंगे. उनमें से हर एक को हर साल 50 घंटे की फ्लाइट टाइम दी जाएगी. इसकी कीमत 3,75,000 $ से शुरू होती है जिसमें पायलट, जेट का मेंटेनेंस और बाकि के खर्चे शामिल हैं. ब्रैड न्यू प्राइवेट जेट खरीदने के लिए 6 मिलियन $ की तुलना में NetJets ने इस स्कीम के ज़रिए एक विन-विन सिचुएशन बना दी थी जिसमें हर एक का फ़ायदा था. इससे कम्पनीज अपने पैसे बचा सकती थी और NetJets को अपनी सीट भरने के लिए ज़्यादा एफर्ट भी नहीं करना पड़ेगा. उन्हें बड़े एयरक्राफ्ट को ऑपरेट करने की ज़रुरत नहीं थी क्योंकि उनके क्लाइंट्स के लिए छोटे जेट ही काफ़ी थे. एक और रास्ता है, इमोशनल या फंक्शनल एप्रोच के पार देखना. Quick Beauty House या QB जापान की एक बार्बर शॉप कंपनी है (नाइ की दुकान). उन्होंने 1996 में एक स्टोर से शुरुआत की थी. 2003 तक उन्होंने 200 स्टोर बना लिए थे. उनकी सक्सेस का राज़ था इमोशनल से फंक्शनल एप्रोच की तरफ़ बदलाव करना. QB से पहले जापानी आदमियों को बाल कटवाने में एक घंटे का समय लगता था. लेकिन ऐसा क्यों? क्योंकि हर कस्टमर को कंधे का masaage, एक कप चाय, शैम्पू, ब्लो ड्राई सब दिया जाता था, बाल कटवाना भी एक लंबा चौडा काम था. इसलिए दकान बनाकर किया. इसमें एक कंपनी प्राइवेट जेट की 1/16th ओनर बन सकती थी.जिसमें वो उस प्राइवेट जेट को दूसरे 15 कम्पनीज के साथ शेयर करेंगे. उनमें से हर एक को हर साल 50 घंटे की फ्लाइट टाइम दी जाएगी. इसकी कीमत 3,75,000 $ से शुरू होती है जिसमें पायलट, जेट का मेंटेनेंस और बाकि के खर्चे शामिल हैं. ब्रैड न्यू प्राइवेट जेट खरीदने के लिए 6 मिलियन $ की तुलना में NetJets ने इस स्कीम के ज़रिए एक विन-विन सिचुएशन बना दी थी जिसमें हर एक का फ़ायदा था. इससे कम्पनीज अपने पैसे बचा सकती थी और NetJets को अपनी सीट भरने के लिए ज़्यादा एफर्ट भी नहीं करना पड़ेगा. उन्हें बड़े एयरक्राफ्ट को ऑपरेट करने की ज़रुरत नहीं थी क्योंकि उनके क्लाइंट्स के लिए छोटे जेट ही काफ़ी थे. एक और रास्ता है, इमोशनल या फंक्शनल एप्रोच के पार देखना. Quick Beauty House या QB जापान की एक बार्बर शॉप कंपनी है (नाइ की दुकान). उन्होंने 1996 में एक स्टोर से शुरुआत की थी. 2003 तक उन्होंने 200 स्टोर बना लिए थे. उनकी सक्सेस का राज़ था इमोशनल से फंक्शनल एप्रोच की तरफ़ बदलाव करना. QB से पहले जापानी आदमियों को बाल कटवाने में एक घंटे का समय लगता था. लेकिन ऐसा क्यों? क्योंकि हर कस्टमर को कंधे का masaage, एक कप चाय, शैम्पू, ब्लो ड्राई सब दिया जाता था, बाल कटवाना भी एक लंबा चौडा काम था. इसलिए दकान अब buyer ग्रुप से परे देखने की बात करते हैं. 1985 से पहले, डायबिटीज पेशेंट्स के लिए इंसुलिन सिर्फ़ डॉक्टर्स को बेचा जाता था. पेशेंट्स को घर पर ख़ुद इसे इंजेक्ट करना मुश्किल लगता था इसलिए डॉक्टर ही इसके शॉट्स पेशेंट्स को लगाते थे.इसलिए फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के टारगेट ग्रुप डॉक्टर्स थे. लेकिन डेनमार्क की एक बायोटेक कंपनी Novo Nordisk ने ब्लू ओशन बना कर इस इंडस्ट्री का नक्शा ही बदल दिया. उन्होंने 1985 में मार्केट में NovoPen introduce किया. वो सबसे पहला यूजर फ्रेंडली इन्सुलिन शॉट था. NovoPen दिखने में एक सिंपलपेन जैसा है बस उसके अंदर इंक की जगह इन्सुलिन होता था. उसके एक ओर सुई लगी हुई थी और पेशेंटबस एक बटन दबाकर आराम से घर पर हर दिन इंसुलिन का शॉट ले सकता था. एक पेन एक हफ्ते चलता था. यहाँ तक कि जो पेशेंट्स देख नहीं सकते थे वो भी इसकी सिंपल technique की वजह से बड़ी आसानी से इसे यूज़ कर सकते थे. Novo Nordisk ने आउट ऑफ़ द बॉक्स सोचा और डॉक्टर्स, जिन्हें आप influencer कह सकते हैं, उनके बजाय यूजर यानी पेशेंट्स पर फोकस किया. इसे खरीदने का सबसे बड़ा फ़ायदा ये था कि पेशेंट्स को शॉट्स के लिए अब डॉक्टर के पास जाने की ज़रुरत नहीं थी. जिस वजह से Novo Nordisk का मार्केट शेयरयूरोप में 60% और जापान में 80% हो गया था. Blue Ocean Strategy W. Chan Kimand Renée Mauborgne फ़ोकसिंग ओन द बिग पिक्चर, नोट द नंबर्स (Focusing on the Big Picture, Not the Numbers) ब्लू ओशन को बनाने का ये दूसरा प्रिन्सिप्ल है. इसका मकसद होता है दूर की सोच कर एक स्ट्रेटेजिक प्लान बनाना और नंबर पर ध्यान नहीं देना. कंपनी के एग्जीक्यूटिव और एम्प्लाइज अक्सर बड़े बड़े नंबर के रिपोर्ट में खो जाते हैं और अंत में रेड ओशन का हिस्सा बन कर रह जाते हैं.अगर आप किसी कंपनी को उनका स्ट्रेटेजिक प्लान कुछ स्लाइड्स में समझाने के लिए कहेंगे तो वो ऐसा नहीं कर पाएँगे. वो ना गोल के बारे में साफ़ साफ़ बता पाएँगे और ना ही ये बता पाएँगे कि competition को कैसे ख़त्म करना है. एक्जाम्पल के लिए, किसी एयरलाइन का कैटरिंग मैनेजर एयरलाइन की सर्विस में सिर्फ खाने पीने की तुलना ही कर सकता है क्योंकि वो जानता है कि उसके competitors अपने कस्टमर को खाने में क्या ऑफर करते हैं और उनकी एयरलाइन की कैटरिंग उनसे किस तरह अलग है. लेकिन प्रॉब्लम ये है कि कस्टमर पूरे पैकेज के बेसिस पर या कम्पलीट एक्सपीरियंस के बेसिस पर एयरलाइन्स को compare करते हैं सिर्फ खाने के बेसिस पर नहीं.कैटरिंग मैनेजर सिर्फ़ खाने के डिपार्टमेंट के बारे में सोचता है जिससे कस्टमर को कोई लेना देना नहीं है. का COITIpare करत सिफ़ खान क बासस पर नहीं.कैटरिंग मैनेजर सिर्फ़ खाने के डिपार्टमेंट के बारे में सोचता है जिससे कस्टमर को कोई लेना देना नहीं है. या एक CIO उर्फ़ Chief Information Officer के बारे में सोचिए जो कंपनी के सॉफ्टवेर की डेटा निकालने की कैपेसिटी पर गर्व महसूस करता है. लेकिन उन्हें ये एहसास नहीं होता कि कस्टमरको सिर्फ़ स्पीड और यूजर फ्रेंडली सॉफ्टवेर से मतलब होता है, उन्हें डेटा निकालने की कैपेसिटी जानने में इतनी दिलचस्पी नहीं होती. आप इन गलतियों को ना दोहराएं इसलिए ऐसे चार स्टेप्स बताए गए हैं जिन्हें फॉलो कर के आप अपनी कंपनी के लिए ये स्ट्रेटेजी बना सकते हैं.इसका पहला स्टेप है, visual awakening. इसके लिए एक स्ट्रेटेजी कैनवस बनाएं और देखें कि आपको किन फैक्टर्स को बदलने की ज़रुरत है. दूसरा स्टेप है, visual exploration. इसमें आपको फील्ड में जाकर देखना होगा कि आप मार्केट की बाउंड्री को कैसे तोड़ सकते हैं.इसके लिए फोर एक्शन का फ्रेमवर्क बनाएं. उसके बाद डिसाइड करें कि आपको किन फैक्टर्स को eliminate, reduce, raise और create करना है. तीसरा स्टेप है, visual strategy fair. आपने फील्ड में जो देखा और observe किया उसके बेसिस पर कैनवस पर अपनी नई स्ट्रेटेजी बनाएं. अपनी नई स्ट्रेटेजी के बारे में कस्टमर्स और नॉन-कस्टमर्स से फीडबैक लें. उनके फीडबैक का इस्तेमाल अपनी रेली को और तेटनर ननाने के लिगा करें raise और create करना है. तीसरा स्टेप है, visual strategy fair. आपने फील्ड में जो देखा और observe किया उसके बेसिस पर कैनवस पर अपनी नई स्ट्रेटेजी बनाएं. अपनी नई स्ट्रेटेजी के बारे में कस्टमर्स और नॉन-कस्टमर्स से फीडबैक लें. उनके फीडबैक का इस्तेमाल अपनी स्ट्रेटेजी को और बेहतर बनाने के लिए करें. चौथा स्टेप है visual communication. अपने पुराने और नए स्ट्रेटेजी को अलग अलग पेज पर प्रिंट करें.उसके बाद अपनी पूरी टीम को इसकी कॉपी दें. अब सिर्फ उन प्रोजेक्ट्स को करने का aim रखें जो आपकी नई स्ट्रेटेजी के मुताबिक़ हो.हमने पिछले चैप्टर में देखा था कि स्ट्रेटेजी कैनवस उन फैक्टर्स को दिखाता है जिसमें कंपनी इन्वेस्ट करती और कितना इन्वेस्ट करती है. अगर आप [yellow tail] और प्रीमियम wines के स्ट्रेटेजी कैनवस को देखेंगे तो ज़ाहिर सी बात है कि [yellow tail] का ग्राफ उनसे काफ़ी अलग होगा. अगर आप visualizing स्ट्रेटेजी के चार स्टेप्स को फॉलो करेंगे तो आप बड़े बड़े नंबरमें खोएंगे नहीं औरपूरी टीम साथ मिलकर ब्लू ओशन बनाने के लिए काम कर पाएगी. एग्जीक्यूटिव और एम्प्लोई दोनों को clearly पता होगा कि किन फैक्टर्स को eliminate करना है किसे क्रिएट करना है. Blue Ocean Strategy W. Chan Kimand Renée Mauborgne रीच बियॉन्ड एक्सिस्टिंगडिमांड (Reach Beyond Existing Demand) अब हम तीसरे प्रिन्सिप्ल की बात करेंगे. इसका मकसद है नॉन-कस्टमर्स को कस्टमर्स में बदल कर प्रेजेंट डिमांड को और बढ़ा देना. रेड ओशन मौजूदा कस्टमर्स पर ही फोकस करती है. इसका नतीजा ये होता है कि कंपनी किसी ख़ास ज़रुरत को पूरा करने के लिए ही प्रोडक्ट बनाती है. आउट ऑफ़ द बॉक्स सोचने के बजाय वो बॉक्स के अंदर ही सिमट कर रह जाते हैं. इस वजह से उनका मार्केट शेयर और भी कम हो जाता है क्योंकि मार्केट में ज़बरदस्त competition है. इसलिए रेड ओशन कम्पनीज बड़े मौकों से चूक जाते हैं. दूसरी ओर, ब्लू ओशन नॉन-कस्टमर्स को टारगेट करता है क्योंकि वहाँ ग्रोथ और प्रॉफिट के लिए अनलिमिटेड स्कोप होता है.नॉन-कस्टमर्स के तीन लेवल होते हैं. पहले लेवल में होते हैं,”soon to be” नॉन-कस्टमर्स. ये वो लोग हैं जो जल्द ही आपके प्रोडक्ट के कस्टमर बन सकते हैं. वो बस आपके प्रोडक्ट का वेट कर रहे हैं. ये लोग सिर्फ अपनी ज़रुरत का सामान खरीदते हैं लेकिन अगर आप उन्हें अच्छा ऑफर देते हैं तो वो कस्टमर्स में बदल जाते हैं और ऐसे कस्टमर बन जाते हैं जो आपसे बार-बार और ज़्यादा सामान खरीदेंगे. दसरे लेवल पर हैं “refusina” नॉन-कस्टमर्स. ये hd As पास्मसमषल जातजार एसफरमर बन जाता जो आपसे बार-बार और ज़्यादा सामान खरीदेंगे. दूसरे लेवल पर हैं “refusing” नॉन-कस्टमर्स. ये आपके प्रोडक्ट को किसी प्रोडक्ट के बदले में देखते हैं लेकिन उन्हें अभी आपके प्रोडक्ट पर उतना यकीन नहीं है कि वो उसे खरीद लें. तीसरा लेवल है, “unexplored” नॉन-कस्टमर्स.ये लोग आपके मार्केट से बहुत दूर होते हैं. उन्हें आपके प्रोडक्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं होती. अगर आप इन तीनों लेवल की ज़रुरत पर ध्यान दें कि इनमें क्या चीज़ कॉमन है तब आप इन तीनों को अपना कस्टमर बना सकते हैं. इमेजिन कीजिये कि अगर आपने इन तीनों को अपना कस्टमर बना लिया तो आपकी कितनी ग्रोथ और प्रॉफिट होगी. आइए इसे एक एक्जाम्पल से समझते हैं. आप सीखेंगे कि नॉन-कस्टमर्सको कैसे attract किया जाता है. Pret A Manger UK की एक फ़ास्ट फूड चेन है. इन्होने पहले लेवल के नॉन-कस्टमर्स को कस्टमर में बदल कर ब्लू ओशन बनाया था. ये कस्टमर्स रेस्टोरेंट जाने वाले लोग थे जो फ़ास्ट फूड पसंद नहीं करते थे लेकिन ये क्विक सर्विस चाहते थे. यूरोप के बड़े-बड़े शहरों में प्रोफेशनल्स लंच के लिए हमेशा रेस्टोरेंट जाते हैं क्योंकि वहाँ की सेटिंग और खाने की क्वालिटी अच्छी होती है. लेकिन प्रोफेशनल्स के पास ज़्यादा वक़्त नहीं होता और वो हर रोज़ रेस्टोरेंट का महँगा खाना अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते.ज़्यादातर लोग खाना पैक करवाकर रास्ते में ही खाना चाहते थे. से कार्य टयाला का call ition चाटने से तैसे खाना अफ़्फाड नहा कर सकत.ज्यादातर लोग खाना पैक करवाकर रास्ते में ही खाना चाहते थे. ये कस्टमर्स इस प्रॉब्लम का solution चाहते थे. वैसे तो हर किसी की अपनी अपनी पसंद होती है लेकिन इन सबमें तीन बातें कॉमन थी- वो लंच फ़टाफ़ट चाहते थे, वो healthy और फ्रेश खाना चाहते थे जो और सस्ती कीमत पर चाहते थे.तो Pret चेन इसका एक परफेक्ट हल ढूंढ कर लाया.Pret स्टोर में आप अपनी पसंद का सैंडविच चुन सकते हैं और पैसे देकर रास्ते में खाते हुए जा सकते हैं. मेनू में जितनी भी वैरायटी की सैंडविच होती है उसे वहाँ के स्टाफ पहले से बनाकर तैयार रखते हैं ताकि इंतज़ार करने में किसी का टाइम waste ना हो.उसके बाद सैंडविच को salad, फ्रूट जूस, दही के साथ refrigerated शेल्फ़ में स्टोर किया जाता है. तो अब बस लोगों को मेनू देखकर बताना था कि उन्हें कौन सा सैंडविच चाहिए और उसके पैसे देकर वो तुरंत वहाँ से जा सकते थे. फ़ास्ट फूड सर्विस के मुकाबले जहां आपको आर्डर करके वेट करना पड़ता है, उसके बाद आप बिल चुका कर वहाँ से जा सकते हैं, Pret में सारा काम बस दो मिनट में पूरा हो जाता था. अब तक, UK में Pret A Mangerके 130 स्टोर खुल चुके हैं. उन्होंने हांगकांग और न्यू यॉर्क में भी अपने स्टोर खोले हैं. 2002 में Pret A Manger की annual सेल 160 मिलियन $ थी. यहाँ तक कि Mcdonalds ने भी Pret के पोटेंशियल को देख निगा सानिगालों nur+ 770/ो जीत थे, वो healthy और फ्रेश खाना चाहते थे जो और सस्ती कीमत पर चाहते थे.तो Pret चेन इसका एक परफेक्ट हल ढूंढ कर लाया.Pret स्टोर में आप अपनी पसंद का सैंडविच चुन सकते हैं और पैसे देकर रास्ते में खाते हुए जा सकते हैं. मेनू में जितनी भी वैरायटी की सैंडविच होती है उसे वहाँ के स्टाफ पहले से बनाकर तैयार रखते हैं ताकि इंतज़ार करने में किसी का टाइम waste ना हो.उसके बाद सैंडविच को salad, फ्रूट जूस, दही के साथ refrigerated शेल्फ़ में स्टोर किया जाता है. तो अब बस लोगों को मेनू देखकर बताना था कि उन्हें कौन सा सैंडविच चाहिए और उसके पैसे देकर वो तुरंत वहाँ से जा सकते थे. फ़ास्ट फूड सर्विस के मुकाबले जहां आपको आर्डर करके वेट करना पड़ता है, उसके बाद आप बिल चुका कर वहाँ से जा सकते हैं, Pret में सारा काम बस दो मिनट में पूरा हो जाता था. अब तक, UK में Pret A Mangerके 130 स्टोर खुल चुके हैं. उन्होंने हांगकांग और न्यू यॉर्क में भी अपने स्टोर खोले हैं. 2002 में Pret A Manger की annual सेल 160 मिलियन $ थी. यहाँ तक कि Mcdonalds ने भी Pret के पोटेंशियल को देख लिया था इसलिए उन्होंने Pret के 33% शेयर्स खरीद लिए. Blue Ocean Strategy W. Chan Kimand Renée Mauborgne गेट द स्ट्रेटेजिक सीक्वेंस राईट (Get the Strategic Sequence Right) ये ब्लू ओशन बनाने का चौथा प्रिन्सिप्ल है. इसका मकसद है एक स्ट्रोंग बिज़नेस मॉडल बनाना जो अच्छी ख़ासी प्रॉफिट को पक्का कर रिस्क कम कर देता है. आप इसे एक पेज पर फ्लो चार्ट के रूप में ड्रा कर सकते हैं. एक राईट स्ट्रेटेजी कुछ इस तरह बनाई जाती है. पहला है, buyer यूटिलिटी. ये दिखाता है कि आपका प्रोडक्ट कस्टमर्स को कितनी वैल्यू दे सकता है. क्या आपके प्रोडक्ट में कोई ऐसी दमदार बात है कि कस्टमर उसे खरीदने के लिए मजबूर हो जाए? क्या उन्हें सच में उस प्रोडक्ट की ज़रुरत है? क्या लोगों के एक बड़े ग्रुप को उसकी ज़रुरत होगी भले ही अभी वो उसके बारे में नहीं जानते हों? अगर आप sure नहीं हैं तो शायद आपको एक नया आईडिया सोचने की ज़रुरत है. लेकिन अगर आपको पक्का यकीन है और आपका जवाब हाँ है तब आप अगले स्टेप की ओर बढ़ सकते हैं. इस लिस्ट में दूसरी चीज़ है, प्राइस. आपका प्रोडक्ट All Done? Finished इस लिस्ट में दूसरी चीज़ है, प्राइस. आपका प्रोडक्ट जो वैल्यू दे रहा है क्या उसकी तुलना में उसकी प्राइस रिज़नेबल है? क्या आपके टारगेट कस्टमर्स उसे खरीदने के लिए वो कीमत चुकाना चाहेंगे? अगर नहीं, तो आपको फ़िर सोचने की ज़रुरत है. अगर हाँ, तब आप तीसरे स्टेप में जा सकते हैं जो है कॉस्ट के बारे में. क्या आप ऐसी कॉस्ट पर प्रोडक्शन कर सकते हैं जिससे आप अच्छा प्रॉफिट कमा सकें? क्या आप प्रोडक्ट का प्राइस सेट करने के बाद साफ़-साफ़ प्रॉफिट को देख सकते हैं? क्योंकि अगर आपका प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत ज़्यादा होगा तो आपका प्रॉफिट मार्जिन कम होगा जो की एक बिज़नेस के लिए बिलकुल अच्छा नहीं है. जिसका मतलब है कि आपका प्रोडक्ट प्रॉफिटेबल नहीं है. ब्लू ओशन buyer यूटिलिटी, अच्छी प्राइस और प्रॉफिटेबल प्रोडक्शन कॉस्ट का एक कॉम्बिनेशन है. ये तीनों फैक्टर्स मिलकर ब्लू ओशन की सक्सेस में सहयोग देते हैं. चौथा और आखरी स्टेप है adoption. ये वो बाधाएं हैं जिनका सामना आपको ब्लू ओशन बनाते वक़्त करना पड़ेगा. क्या आपके सप्लायर, रिटेलर, पार्टनर आपके आईडिया या प्रोडक्ट से सहमत होंगे? क्या उन्हें इसमें प्रॉफिट की गुंजाइश दिखती है? क्या वो All Done? Finished जापाजाराचा पालापानराहा: पपा उन्हें इसमें प्रॉफिट की गुंजाइश दिखती है? क्या वो एक नई स्ट्रेटेजी अपना पाएँगे? इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए आइए फेमस कार Ford ModelT के बारे में बात करते हैं. ये एक बेस्ट सेलिंग इनोवेटिव प्रोडक्ट है और अपने समय का बेहतरीन ब्लू ओशन का एक्जाम्पल. Model T से पहले, अमेरिका में कार बनाने वाले सिर्फ़ अमीर लोगों के लिए कस्टम-मेड लक्ज़री कार बनाते थे. प्रैक्टिकल होकर देखा जाए तो ये कार ऐसी थी कि आम लोग इसे इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसकी buyer यूटिलिटी दो कारणों की वजह से लिमिटेड थी.पहला,उस समय घोड़ों का इस्तेमाल करना बेहतर था क्योंकि 1900 की शुरुआत में सड़कें उबड़-खाबड़ और कीचड़ से भरी हुई हुआ करती थीं और पक्के रास्ते नहीं थे. यहाँ तक कि अमीर लोग भी main रोड पर हर रोज़ लक्ज़री कार को यूज़ नहीं कर सकते थे. दूसरा, क्योंकि ये कस्टमर की पसंद के हिसाब से कस्टम-मेड हुआ करते थे इसलिए उनमें अक्सर कोई ना कोई ख़राबी हो जाती थी. उसे रिपेयर करना बहुत महँगा था और सिर्फ़ एकस्किल्ड मैकेनिक ही उसे ठीक कर सकता था. Ford Model T ने मार्केट में कदम रखकर एक ही बार में सारी प्रोब्लम्स को हटा दिया था. ये आम लोगों All Done? Finished Ford Model T ने मार्केट में कदम रखकर एक ही बार में सारी प्रोब्लम्स को हटा दिया था. ये आम लोगों की कार बन गई थी. इसका बस एक कलर, ब्लैक, ही मार्केट में उतारा गया था. इसका एक स्टैण्डर्ड डिज़ाइन था जिसे अपनी पसंद से बदला नहीं जा सकता था.ये एक भरोसेमंद और टिकाऊ कार थी. इसे आसानी से डेली यूज़ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था. चाहे बारिश हो या बर्फ गिरे, ये आसानी से उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी चल सकती था. इसे ठीक करना बड़ा आसान था और लोग बड़ी जल्दी इसे चलाना सीख सकते थे. इस कार की प्राइस लक्ज़री कार की तुलना में काफ़ी कम थी. ऐसा इसलिए था क्योंकि Ford ने इस कार की कीमत की तुलना घोड़ों से चलने वाली गाड़ियों से की थी, जो उस वक़्त ज़्यादातर लोग इस्तेमाल करते थे. Ford उन नॉन-कस्टमर्स को कस्टमर्स में बदलना चाहते थे जो कार नहीं खरीदते थे. इसलिए उन्होंने इसकी कीमत कम से कम रखने की कोशिश की. अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को कम करने की वजह से वो इसके प्राइस को कम कर पाए.Model-T को कार एक्सपर्ट्स से नहीं बनवाया गया था. Ford ने असेंबली लाइन में एक लीडर की भूमिका निभाई और एक्सपर्ट्स की जगह आर्डिनरी फैक्ट्री वर्कर्स को काम पर की जगह आर्डिनरी फैक्ट्री वर्कर्स को काम पर रखा.एक वर्कर हर रोज़ एक ही काम करता था. इस प्रोसेस ने प्रोडक्शन टाइम को 60% कम कर दिया था और अच्छी क्वालिटी को बनाए रखा था. Model-T के एक कार के पार्ट्स को इकट्ठा कर जोड़ने में चार दिन लगते थे. कुल मिलाकर, Model-T ने हर स्टेज में इनोवेशन हासिल किया था इसलिए वो इतनी कमाल की और ज़बरदस्त कार बनकर सामने आई और इंस्टेंट हिट साबित हुई. Ford ने स्ट्रेटेजिक सीक्वेंस का बखूबी इस्तेमाल किया और उन्हें इसकेगज़ब के रिजल्ट मिले. checkedyta (Conclusion) तो आपने इस समरी के ज़रिए रेड ओशन और ब्लू ओशन के बीच के फ़र्क को समझा. रेड ओशन वो है जिसमें ज़बरदस्त competitionहोता है. इस competition को ब्रेक करने के लिए आप ब्लू ओशन क्रिएट कर सकते हैं जहां आपको ग्रोथ और प्रॉफिट के लिए अनलिमिटेड opportunity मिलेगी. इसके बाद आपने स्ट्रेटेजी कैनवस और फोर एक्शन फ्रेमवर्क के बारे में सीखा. स्ट्रेटेजी कैनवस आपको करंट मार्केट का एक क्लियर पिक्चर देता है. फॉर एक्शन फ्रेमवर्क आपको ये जानने में मदद करता है कि आपको किन फैक्टर्स को eliminate, reduce, raise और create करने की ज़रुरत है. आपने मार्केट बाउंड्री को फ़िर से बनाने के बारे में भी जाना. ज़रा हट कर सोचें, कुछ अलग और यूनिक प्रोडक्ट या सर्विस कस्टमर्स को ऑफर करें, आपने ये भी समझा कि सिर्फ़ नंबर पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि दूर के बारे में सोचना चाहिए. इस बात का ध्यान रखें कि आपकी पूरी टीम ब्लू ओशन के अनुसार ही काम रही है.आपने सीखा कि अपने करंट कस्टमर्स पर फोकस ना कर के कैसे नॉन-कस्टमर्स को टारगेट करना चाहिए क्योंकिवहीँ आपको बड़ी से बड़ी opportunity मिलेगी. इसके बाद आपने स्ट्रेटेजिक सीक्वेंस के बारे में जाना. आपके बिज़नेस मॉडल को buyer यूटिलिटी से शुरुआत कर प्राइस, फ़िर कॉस्ट और अंत में उन बाधाओं के बारे में सोचना चाहिए जो ब्लू ओशन के रास्ते में आपको मिलेंगी. अगर आपने इसे फॉलो कर लिया तो आपका ब्लू ओशन sure शॉट विनर होगा. आपके ब्लू ओशन के सक्सेस के साथ ये तो पक्का है कि इसे कॉपी करने वाले यानी imitators भी मार्केट मेंआएँगे. ये 10-15 साल तक नहीं होगा लेकिन आपको इसके लिए तैयार रहना होगा. रेड ओशन की कम्पनीज को आपको कॉपी करना मुश्किल होगा क्योंकि वो इसके लिए तैयार रहना होगा. रेड ओशन की कम्पनीज को आपको कॉपी करना मुश्किल होगा क्योंकि वो अपने करंट बिज़नेस मॉडल के साथ फंस गए हैं. एक बार जब imitators मार्केट में आ गए तब आपको अपने स्ट्रेटेजी कैनवस को मॉनिटर करना होगा क्योंकि आपको पता भी नहीं चलेगा कि कब competition शुरू हो गया और शायाद आपका मार्केट भी रेड ओशन बनने जा रहा है. अपने स्ट्रेटेजी कैनवस के ज़रिए ये जानने की कोशिश करें कि आपको एक और ब्लू ओशन बनाने की ज़रुरत है या आप अपने करंट ऑफर को बेहतर बना सकते हैं,उसे expand कर सकते हैं और ज़्यादा प्रॉफिट कमा सकते हैं. ब्लू ओशन की स्ट्रेटेजी बिज़नेस में ज़्यादा क्रिएटिविटी और इनोवेशन को बढ़ावा देती है. ये वो रास्ता है जो आपको एक्स्ट्राऑर्डिनरी सक्सेस की ओर ले जाता है. तो अब जब आपने सब कुछ समझ ही लिया है तो क्यों एक आर्डिनरी बिज़नेस के साथ रेड ओशन के competition में फंसना जब आप खुल कर एक गहरे ब्लू ओशन में खुल कर तैर सकते हैं?

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