Blink: The Power of Thinking Without Thinki… Malcolm Gladwell. Books Summary In Hindi Pdf

Blink: The Power of Thinking Without Thinki… Malcolm Gladwell इंट्रोडक्शन (Introduction) आप अपनी इंस्टिंक्ट सुनते हो? क्या कभी सोच के देखा है कि अगर आप अपनी इंस्टिंक्ट सुनने लगोगे तो क्या होगा? अगर हम हर चीज़ को साइंटिफिक डेटा और स्टेटिसस्टिक के बेस पर मेजर करना छोड़ दे तो क्या होगा? शायद आप रोज़मर्रा की लाइफ में डिसीजन लेते वक्त अपने इंस्टिंक्ट की सुनते होगे. लेकिन बात जब पैसे, रिलेशनशिप, बिजनेस या आपकी लाइफ के किसी कोम्प्लिकेटेड और इम्पोर्टेट टॉपिक पर हो, तो हम सिर्फ अपने इंस्टिंक्ट के भरोसे नहीं बैठ जाते. तब हमे स्ट्रेट फॉरवर्ड इन्फोर्मेशन चाहिए होती है ताकि हम कोई सॉलिड डिसीजन ले सके. और उस वक्त अक्सर हम अपने इंस्टिंक्ट को इग्नोर करना ही ठीक समझते है. इस बुक में आप ये सीखेंगे कि अपने इंस्टिंक्ट के बेस पर लिए गए डिसीजन उतने ही राईट होते है जितने कि कलेक्टिव डेटा और इन्फोर्मेशन पर बेस्ड डिसीजन माने जाते है. ऐसा नहीं है कि जल्दबाज़ी में लिए गए डिसीजन हमेशा गलत हो. कई बार तुंरत किये गए फैसले भी उन फैसलों के मुकाबले काफी बेहतर साबित होते है जो हम काफी रीसर्च और सोच विचार के बाद लेते है. मगर ये भी एक सच है कि कई बार हमारे इंस्टिंक्ट ही हमे धोखा दे देते है. कई बार ऐसा भी होता AAM 27 A –

लत ह. मगर य भा एक सच ह कि कई बार हमार इंस्टिंक्ट ही हमे धोखा दे देते है. कई बार ऐसा भी होता है कि कोई चीज़ पहली नजर में तो बड़ी अच्छी और इम्प्रेसिव लगती है लेकिन बाद में हमे पछताना पड़ता है. इस बुक समरी में हम आपको यही चीज़ सिखाने वाले है कि आपको कब अपने इंस्टिंक्ट पर भरोसा करना चाहिए और कब नहीं. और आप इस बुक में ये भी सीखेंगे कि अपने स्नैप जजमेंट यानी जल्दबाज़ी में लिए गए डिसीजंस को कैसे एड्रेस और कण्ट्रोल करे. स्नैप जजमेंट या फर्स्ट इम्प्रेशन हमेशा सही हो ये ज़रूरी नहीं होता. हम कभी-कभी फर्स्ट इम्प्रेशन में कुछ बात बोल जाते है और फिर बाद में हमे अपनी मिस्टेक रिएलाइज होती है. इस बुक में आप कुछ ऐसे खास प्रोफेशनल्स से मिलेंगे जो स्नेप जजमेंट करने में ट्रेंड है. यकीन करना मुश्किल है मगर ये सच है कि आप भी अपने इंस्टिंकट्स को कण्ट्रोल कर सकते है. हमे अपने इंस्टिंक्ट को सिरियसली क्यों लेना चाहिए, हमे कब इस पर ट्रस्ट करना चाहिए और कब नहीं और हम अपनी इंस्टिंक्ट को कैसे ट्रेन कर सकते है, इन सब सवालों के जवाब आपको इस बुक में मिलेंगे. इस बुक को पढने के बाद आप अपने आस-पास की चीजों को लेकर आपका पर्सपेक्टिव चेंज हो जायेगा. आप ये सीखेंगे कि बेस्ट डिसीजन कैसे लेने है और कैसे अपना टाइम और एफोर्ट सेव करते हुए लाइफ के इम्पोर्टेट डिसीजन लिए जाए. तो क्या आप अपनी लाइफ में चेंज लाने के लिए रेडी है? तो चलो इस बुक सालमा के इम्पोर्टेट डिसीजन लिए जाए. तो क्या आप अपनी लाइफ में चेंज लाने के लिए रेडी है? तो चलो इस बुक समरी से स्टार्ट करते है. द थ्योरी ऑफ़ थिन स्लाइसेस: हाउ अ लिटल बिट ऑफ़ नॉलेज गोज़ अ लॉन्ग वे थिन स्लाइसेस थ्योरी: कैसे थोड़ी बहुत नॉलेज हमारी लाइफ में काफी काम आती है. (The Theory of Thin Slices: How a Little Bit of Knowledge Goes a Long Way) थिन स्लाईसिंग है क्या ? असल में हमारे अनकांशस माइंड की जो काबिलियत होती है कि वो पैटर्न बना सके और कनक्ल्यूजन यानी निष्कर्ष पर पहुँच सके, उसे ही हम थिन स्लाईसिंग बोलते है. आपको सुनने में ये थोडा साइंटिफिक लगेगा. मगर मेरा यकीन करो, असल में ये है नहीं. ये आपकी नैचुरल पॉवर है. जब हम लोगो को ओब्ज़ेर्व करते है, उनके बिहेवियर पैटर्न को करीब से देखने के बाद ही किसी सोल्यूशन में पहुँचते है तो असल में उस वक्त हम थिन स्लाईसिंग कर रहे होते है. और ये काफी ईजी है. अब आप सोचोगे कि सिर्फ कुछ सेकंड में ही किसी इंसान या सिचुएशन के बारे में कैसे जाना जा सकता है? लेकिन हम आपको बता दे कि थिन स्लाईसिंग एक ऑटोमेटेड प्रोसेस है. हमारा माइंड वो सारी इन्फोर्मेशन कलेक्ट कर सकता है जो अवलेबल होती है और फिर उसमे से इररेलेवेंट यानी बेकार की चीजों को निकाल कर हमे वही इन्फोर्मेशन प्रोवाइड करता है जिसकी हमे ज़रूरत जा। पापा पाना ।।गा पाए । इन्फोर्मेशन प्रोवाइड करता है जिसकी हमे ज़रूरत होती है. थिन स्लाईसिंग की थ्योरी को अच्छे से समझना हो तो हम साइकोलोजिस्ट सैमुएल गोसलिंग के एक्सपेरिमेंट से समझ सकते है. उन्होंने 80 कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ एक एक्सपेरिमेंट किया. गोसलिंग ने इसके लिए “बिग फाइव इन्वेंटरी” यूज़ की. इसमें कुछ सवाल होते है जो लोगो को 5 पैरामीटर्स पर मापते है. और ये 5 पैरामीटर्स है एक्स्ट्रावर्शन, एग्रीएबलनेस, कोंसेशिय्सनस, इमोशनल स्टेबिलिटी और लास्ट है न्यू एक्सपेरिमेंट्स को लेकर ओपननेस. (The five parameters are extraversion, agreeableness, conscientiousness, emotional stability and the last one was openness to new experiences.) गोसलिंग ने सबसे पहले उन 80 स्टूडेंट्स के क्लोज फ्रेंड्स को चूज़ किया कि वो इन सवालों के जवाब दे. उसके बाद उन्होंने एकदम अजनबी लोगो से उन सवालों के जवाब पूछे. ये अजनबी लोग उन 80 स्टूडेंट्स से कभी नहीं मिले थे. फिर इन्हें बोला गया कि वो सिर्फ 15 मिनट के लिए इन स्टूडेंट्स के रूम एक्सप्लोर कर सकते है. उसके बाद रिजल्ट्स को कम्प्येर किया गया. अब, कोई ये सोचेगा कि उन 80 स्टूडेंट्स के जो क्लोज फ्रेंड्स थे, वो उनके बारे में अजनबी लोगो से बैटर जानते होंगे. लेकिन जो रिजल्ट आया वो इसके एकदम उल्टा था. पहले दो पैरामीटर्स पर तो फ्रेंड्स ने बैटर जवाब दिए थे और ये पैरामीटर थे, एक्स्ट्रावर्शन और एग्रीएबलनेस आया वा इसक एकदम उल्टा था. पहले दो पैरामीटर्स पर तो फ्रेंड्स ने बैटर जवाब दिए थे और ये पैरामीटर थे, एक्स्ट्रावर्शन और एग्रीएबलनेस (extraversion and agreeableness ) लेकिन बाकि की तीन कैटेगरी में अजनबियों ने ज्यादा अच्छा परफॉर्म किया था. और ये तीन कैटगरीज़ थी, कोंसेशिय्सनस(conscientiousness), स्टेबिलिटी और ओपननेस टू न्यू थिंग्स यानी नई चीजों को एक्सप्लोर करना. यानि कि इस एक्सपेरिमेंट में अजनबीयों ने फ्रेंड्स से अच्छा परफॉर्म किया. और ये बात प्रूव हो गयी कि किसी के साथ एक लंबा टाइम गुज़ारने का ये मतलब नहीं कि आप उन्हें अच्छे से जानते होंगे. कई सालो साथ रहने के बावजूद हम किसी को पूरी तरह समझ पाए, ये ज़रूरी नहीं है. जबकि किसी को कुछ मिनट्स के लिए ओब्ज़ेर्व करने से ही आप उसके बारे में काफी कुछ बता सकते है. क्योंकि हो सकता है कि वो इन्सान आज तक आपसे अपनी असलियत छुपाता आया हो या फिर उसे खुद के बारे में ही ज्यादा ना पता हो. उन अजनबी लोगो ने उन 80 स्टूडेंट्स के रूम चेक किये थे तो इसका मतलब है कि आपकी पर्सनल चीज़े भी आपके बारे में जितना बताती है उतना तो खुद आपको भी पता नहीं होता. यही है थिन स्लाईसिंग. आपका अनकांशस माइंड चीजों को ओब्ज़ेर्व करता है, उसमे से अनवांटेड यानी फालतू निकाल के काम की इन्फोर्मेशन रख लेता है. Blink: The Power of Thinking Without Thinki… Malcolm Gladwell द लोक्ड डोर: द सीक्रेट लाइफ ऑफ़ स्नैप डिसीजंस The Locked Door: The Secret Life of Snap Decisions अब जब आप थिन स्लाईसिंग के बारे जान ही चुके है तो अब ज़रा इसकी इम्पोर्टेस के बारे में बात कर लेते है. दो मिनट के अंदर लिए गए फैसले या स्नैप जजमेंट थिन स्लाईसिंग पर बेस्ड होते है. हमारा अनकांशस माइंड स्नैप डिसीजंस लेता है. और कई बार तो आप सोचते रह जाते है कि आपने ये डिसीजन ले कैसे लिया था. क्योंकि स्नैप डिसीजन एक लोक्ड डोर के पीछे डिसाइड किये जाते है जिनका कोई रीजन समझ नहीं आता. आमतौर पर लोग स्नैप डिसीजंस इग्नोर कर देते है. क्योंकि ये यकीन करना मुश्किल है कि हमारे माइंड में कोई लोक्ड डोर भी हो सकता है. और ये डोर हमारे कांशस माइंड को अनकांशस माइंड से अलग करता है. हम अपने स्नैप डीसीजंस के पीछे कोई लोजिक ढूँढ़ते है पर हम कभी भी अपनी इग्नोरेंस यानी अपनी नादानी एक्सेप्ट नहीं करते. यहाँ हम लोक्ड डोर का कांसेप्ट समझने के लिए एक एक्जाम्पल लेते है. नार्मन आर, एफ. मैएर (Norman R. E. Maier) ने एक एक्सपेरिमेंट किया, उन्होंने एक रूम की छत से दो रस्सियाँ लटका टी रूम डिफरेंट टादप की चीजे और एक्सपेरिमेंट किया, उन्होंने एक रूम की छत से दो रस्सियाँ लटका दी. रूम डिफरेंट टाइप की चीजे और फर्नीचर से भरा हुआ था. रस्सियाँ एक दुसरे से इतनी दूर रखी गयी थी कि एक रस्सी पकड़ने पर दूसरी हाथ नहीं आती थी. इस रूम में कई लोगो को भेजा गया और उनसे बोला गया कि आप कितने तरीको से एक ही टाइम में दोनों रस्सियों को पकड़ सकते हो. सही जवाब था चार तरीको से. पहला तरीका था: दोनों में से एक रस्सी को जितना हो सके उतने जोर से खींच कर दूसरी रस्सी के पास ले जाओ और फिर इस पर कोई चीज़ बाँध दो ताकि ये अपनी जगह से ना हिले. उसके बाद दूसरी रस्सी को पकड़ो, सेकंड तरीका: एक एक्स्टेशन कोर्ड लो और इसके दोनों सिरों को रस्सियों से बांध दो. थर्ड तरीका: पहली रस्सी एक हाथ में पकड़ो और किसी लंबे डंडे से दूसरी रस्सी को अपनी तरफ खींचने की कोशिश करो. फोर्थ तरीका है: एक रस्सी को पेंडूलम की तरह घुमाओ और फिर दूसरी रस्सी को पकड लो. ज्यादातर लोगो को पहले वाले तीन तरीके समझ आये मगर चौथा तरीके का आईडिया बहुत कम लोगो को आया था. मैएर(Maier) ने फिर लोगो को 10 मिनट रूम में ऐसे ही बिठा कर रखा और उनमे से एक रस्सी को घुमाया. तब जाकर बाकियों को भी चौथा तरीका समझ आया. तो जब इन लोगो से पुछा गया कि उनके माइंड में ये सोल्यूशन्स आया तो सब बहाने बनाने लगे. किसी ने बोला” हमे तो पहले से पता था, तो किसी ने कहा” उन्होंने ब न्दर को पेड़ से झूलते हुए इमेजिन किया. एन ।। ५4I, KI Iपासा पाहा उन्होंने ब न्दर को पेड़ से झूलते हुए इमेजिन किया. सबने कोई ना कोई बहाना बनाया लेकिन किसी ने भी ये बात एडमिट नही की कि उन्हें जब हिंट मिला तब जाकर उन्हें फोर्थ सोल्यूशन समझ आया. दरअसल कांशस माइंड इस हिंट को आसानी से नोटिस नहीं कर पाया. ये अनकांशस माइंड ने अपने आप ही सोच लिया था. और इसकी वजह क्या है, ये बताना भी मुश्किल था क्योंकि ये माइंड के लोक्ड डोर के पीछे था. ज्यादातर लोग ये बताने में शर्म महसूस कर रहे थे कि उन्हें फोर्थ आईडिया कैसे समझ आया. दरअसल उन्हें अपने अनकांशस माइंड से समझ आया था. द वारेन हार्डिंग एरर: व्हाई वी फॉल फॉर टाल डार्क एंड हैण्डसम मेन The Warren Harding Error: Why We Fall For Tall, Dark, and Handsome Men इस चैप्टर में हमे स्नैप जजमेंट के डार्क साइड को जानने का मौका मिलता है. थिन स्लाईसिंग कई सालो की ओब्ज़ेर्विंग के बाद आती है. पर स्नैप जजमेंट सिर्फ फर्स्ट इम्प्रेशन्स पर बेस्ड होते है. स्नैप जजमेंट अक्सर बिना ज्यादा खोजबीन के लिए जाते है और इसीलिए कई बार इसका गलत रिजल्ट भी मिलता है. फर्स्ट इम्प्रेशन हमारे पहले के एक्स्पिरियेश पर बेस्ड होते है. अगर किसी चीज़ को लेकर आपका पास्ट में अच्छा अनुभव रहा है तो आपका अनकांशस माइंड उसी तरफ जाएगा. फर्स्ट इम्प्रेशंस अनकांशस माइंड में हारा.. ‘गर पाता पापा पार जा५५॥ पारस अच्छा अनुभव रहा है तो आपका अनकांशस माइंड उसी तरफ जाएगा. फर्स्ट इम्प्रेशंस अनकांशस माइंड में बनते है और आपको पता भी नहीं चलता. लेकिन फर्स्ट इम्प्रेशंस को कण्ट्रोल किया जा सकता है. जो एक्स्पिरियेश फर्स्ट इम्प्रेशन्स के लिए रिस्पोंसिबल होते है उन्हें चेंज करके हम इन्हें कण्ट्रोल कर सकते है. इस चैप्टर में हम दो एक्जाम्पल देखेंगे. वारेन हार्डिंग एक छोटे से टाउन में एक न्यूजपेपर के एडिटर थे. उनकी एज 35 साल थी, देखने वो एक टाल डार्क और हैण्डसम मेन थे. लेकिन वो इतने इंटेलिजेंट नही थे. उनकी मुलाकात दौघेर्टी (Daugherty) से हुई जो एक लॉयर और लोबीईस्ट थे. वो वारेन के गुड लुक्स से बड़े इम्प्रेस्ड हुए. उन्हें लगता था कि वारेन एक ग्रेट प्रेजिडेंट बन सकते है. उन्होंने वारेन को इस बात के लिए कन्विंस कर लिया था, और फिर दौघेर्टी (Daugherty) की दुआ से वारेन यू.एस. के प्रेजिडेंट बन गए. मगर बहुत से हिस्टोरियंस को लगता था कि वारेन अमेरिका के सबसे बुरे प्रेजिडेंट थे. यहाँ थिन स्लाईसिंग के कांसेप्ट फेल हुआ है. दौघेर्टी (Daugherty’) का फर्स्ट इम्प्रेशन एकतरफ़ा था. उन्होंने वारेन को एक प्रेजिडेंट की क्वालिटी से नहीं देखा था बल्कि उन्होंने सिर्फ उनके गुड लुक्स पर धयान दिया था. एक टेस्ट है आईएटी (IAT) या इम्प्लिसिट एसोशिएशन टूल ( Implicit Association Tool ) जो इंसान के बिलीफ और बिहेवियर के बीच कनेक्शन चेक करने के लिए डिजाईन किया गया है ये टेस्ट कॉलेज स्टडेंटस । III IIILIL ASSOLIaLIUII IOUI ) || २सा पा बिलीफ और बिहेवियर के बीच कनेक्शन चेक करने के लिए डिजाईन किया गया है. ये टेस्ट कॉलेज स्टूडेंट्स पर किया गया. उन्हें नामो की एक लिस्ट देकर पुछा गया कि इनमे कौन मेल है और कौन फीमेल. ये टेस्ट काफी सिम्पल और क्विक था. फिर टेस्ट को रीपीट किया गया लेकिन इस बार नाम और कैटेगरीज चेंज कर दी गयी. इस टाइम स्टूडेंट्स को बोला गया कि वो नामो को दो कैटेगरीज़ में डिवाइड करे: मेल या फेमिली और फिमेल या करियर. ये टेस्ट पहले वाले से थोडा मुश्किल था इसलिए रिएक्शन टाइम भी बढ़ा दिया गया. क्योंकि कुछ लोगो के लिए मेल को फेमिली के साथ और फिमेल को करियर के साथ रिलेट करना मुश्किल था. दरअसल ये लोग अपने एक्सपीरिएंस की वजह से एकतरफा सोच रखते थे. फिर सेम यही टेस्ट दो डिफरेंट कैटेगरीज़ के साथ रीपीट किया गया. ये कैटेगरीज़ थी: योरोपियन या बुरे लोग और अफ्रीकन अमेरिकन या अच्छे लोग. इस लिस्ट में कुछ ऑब्जेक्टिव भी रखे गए थे जैसे कि हर्ट, ईविल, ग्लोरियस और वंडरफुल. ये वाला टेस्ट स्टूडेंट्स के लिए कुछ ज्यादा ही मुश्किल था और इसलिए उनसे ये टेस्ट हो नहीं पाया. एक बार फिर टेस्ट रीपीट किया गया. इस बार लिस्ट ऑफ़ आइटम्स सेम थे मगर चेंज्ड कैटेगरीज़ के साथ. जैसे अफ्रीकन अमेरिकन या बुरे लोग और योरोपियन अमेरिकन या अच्छे लोग. इस बार टेस्ट सिम्पल था. वो इसलिए क्योंकि स्टूडेंट्स को अफ्रीकन अमेरिकंस को अच्छी चीजों से रिलेट करना मुश्किल लग रहा था क्योंकि उनके मादंट में फीस को कुछ ज्यादा ही मुश्किल था और इसलिए उनसे ये टेस्ट हो नहीं पाया. एक बार फिर टेस्ट रीपीट किया गया. इस बार लिस्ट ऑफ़ आइटम्स सेम थे मगर चेंज्ड कैटेगरीज़ के साथ. जैसे अफ्रीकन अमेरिकन या बुरे लोग और योरोपियन अमेरिकन या अच्छे लोग. इस बार टेस्ट सिम्पल था. वो इसलिए क्योंकि स्टूडेंट्स को अफ्रीकन अमेरिकंस को अच्छी चीजों से रिलेट करना मुश्किल लग रहा था. क्योंकि उनके माइंड में अफ्रीकंस को लेकर एक नेगेटिव इमेज थी. वो उन्हें अच्छा समझ ही नहीं सकते थे. एक स्टूडेंट को बोला गया कि वो अपने माइंड से बाएस्ड सोच हटाने के लिए रोज़ ये टेस्ट करे. लेकिन उस स्टूडेंट की सोच नहीं बदली. फिर एक दिन उसे बोला गया कि वो मार्टिन लूथर किंग, कोलिन पोवेल या नेल्सन मंडेला जैसे लीडर्स की बुक्स पढ़े. फाइनली इस स्टूडेंट की सोच चेंज हुई और उसका आईएटी स्कोर भी चेंज हुआ. क्योंकि अब उस स्टूडेंट का आईएटी स्कोर (IAT score ) इम्प्रूव हो गया था तो उसने ब्लैक लोगो को पोजिटिव लाईट में देखना शुरू कर दिया था. ग्रेट ब्लैक लीडर्स की बुक्स पढने से उसकी ट्रेडिशनल थिंकिंग अब चेंज हो गयी थी. तो इसका मतलब है कि हम अपने एन्वायर्नमेंट और एक्सपीरिएंस चेंज करके किसी भी चीज़ को लेकर अपने फर्स्ट इम्प्रेशन को चेंज कर सकते है. Blink: The Power of Thinking Without Thinki… Malcolm Gladwell पॉल वैन रिपर’स बिग विक्ट्री: क्रिएटिंग स्ट्रक्चर फॉर स्पोंटेनिटी ( पॉल वैन रिपर की बिग विक्ट्री: स्पोंटेनिटी के लिए स्ट्रक्चर क्रिएट करना. Paul Van Riper’s Big Victory: Creating Structure for Spontaneity) पहले के चैप्टर्स में हमने थिन स्लाईसिंग के डार्क साइड के बारे में पढ़ा. लेकिन ऐसा नहीं है कि स्नैप जजमेंट हमेशा गलत होते है. कई बार तो ये रेशनल डिसीजंस से बैटर निकलते है. ज्यादा इन्फोर्मेशन हेमशा सही होगी ऐसा नहीं है. कई बार ये हमारे डिसीजन मेकिंग प्रोसेस ये को हार्म भी करती है. और हम डिसीजन लेने में टाइम लगाते है. टाइम बड़ा कीमती है और लाइफ थ्रेटनिंग सिचुएशंस में आप टाइम वेस्ट बिलकुल नहीं कर सकते. बेस्ट डिसीजन मेकिंग प्रोसेस में दो की एलिमेंट्स होते है. और ये है रेश्न्लिज्म और इंट्यूशन. यहाँ हम इसे समझने के लिए एक एक्जाम्पल लेते है. पॉल वैन रिपर एक ओल्ड आर्मी मेन था. वियतनाम की लड़ाई में उसे मरीन कमांडर लीडर की ड्यूटी मिली थी. रिपर एक रिस्पोंसिबल लीडर था जो हमेशा अपने सोल्जेर्स की हेल्प के लिए रेडी रहता था. 2000 में एक बड़ा कॉस्टली”वॉर गेम” या”मिलेनियम चेलेंज” किण्ट किया गया था जिसका मकसद था A . 2000 में एक बड़ा कॉस्टली”वॉर गेम” या”मिलेनियम चेलेंज” क्रिएट किया गया था जिसका मकसद था अमेरिकन ट्रूप्स को वॉर सिस्टम के लिय रेडी करना और वार के न्यू स्पेक्यूलेश्न्स को टेस्ट करना. वार गेम में दो टीम्स थी, ब्ल्यू टीम और रेड टीम. ब्ल्यू टीम ने ये चेलेज जीतने के लिए”ऑपरेशन नेट एस्सेस्स्मेंट” नाम से एक टूल क्रिएट किया. ये एक बेसिक लीडरशिप सिस्टम था जिसमे हर मिलिट्री चॉइस को डिफरेंट कंपोनेंट्स जैसे मोनेटरी, पोलिटिकल और सोशल कंपोनेंट्स में बांटा गया था. दूसरी तरफ रेड टीम ने इस चेलेंज में कुछ अलग टाइप की स्ट्रेटेजीज़ यूज़ की. वैन रिपर रेड टीम के कमांडर थे. वो अपनी टीम को स्नैप डिसीजन्स के बेस पर लीड कर रहे थे. उनके हिसाब से बेसिक लीडरशिप टेक्नीक्स बेकार में ही ढीली-ढाली होती है और वॉर में इतना सोचने का टाइम नही मिलता. जब वार गेम स्टार्ट हुई तो ब्ल्यू टीम ने रेड टीम को सरेंडर करने को बोला. रेड टीम ने मना किया तो दुश्मन टीम ने उन पर बोम्ब गिराने शुरू कर दिए. ब्ल्यू टीम को लगा कि ये रेड टीम के खिलाफ हैंड्स डाउन जीत होगी क्योंकि उनके पास ज्यादा इन्फोर्मेशन है. लेकिन ब्ल्यू टीम तब हैरान रह गयी कि जब रेड टीम आपस में बात करने के लिए कॉम्प्लीकेटेड कोड्स यूज़ कर रहे थे. और ब्ल्यू टीम ये कोड्स समझ नहीं पा रही थी. ये लोग अपनी जीत को लेकर कॉंफिडेंट थे मगर जल्दी ही उन्हें अपनी गलती समझ आ गयी थी. वैन रिपर ने सिचुएशन का भरपूर फायदा उठाया और ब्ल्य टीम पर अटैक कर दिया. सब हैरान कोड्स यूज़ कर रहे थे. और ब्ल्यू टीम ये कोड्स समझ नहीं पा रही थी. ये लोग अपनी जीत को लेकर कॉफिडेंट थे मगर जल्दी ही उन्हें अपनी गलती समझ आ गयी थी. वैन रिपर ने सिचुएशन का भरपूर फायदा उठाया और ब्ल्यू टीम पर अटैक कर दिया. सब हैरान रह गए थे कि रेड टीम मिलेनियम चेलेंज जीत गयी थी बावजूद इसके कि वो संख्या में कम थे. दरअसल ब्ल्यू टीम अपने डेटा में ज्यादा डिपेंड थे. वो हर बात पे काफी लंबी डिस्कस करते थे और काफी कोम्प्लीकेटेड डिसीजंस लेते थे. लम्बी-लम्बी मीटिंग्स रखना और लगातार बहस करना उनकी आदत थी. उनका ज्यादा टाइम तो कैलकुलेशन में निकल जाता था. दूसरी तरफ रेड टीम के वैन रिपर टीम को और बेहतर बनाने पर ज्यादा ध्यान देते थे. उनकी टीम मेंबर्स के सोचने का तरीका डिफरेंट था और ये लोग अपनी प्रोब्लम्स खुद रीज़ोल्व कर लेते थे. जैसे सीक्रेट कम्यूनिकेशन कोड्स यूज़ करना इस टीम की बेहतरी का एक नमूना थी. रिपर ने वार में जो कुछ सीखा और समझा था, यहाँ थिन स्लाईसिंग में यूज किया. वो अपनी टीम को तुरंत एक्शन लेने के लिए भी मोटिवेट करते थे. वार एक ऐसी सिचुएशन होती है जहाँ कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता इसलिए हमे ऐसे हालातो में सिचुएशन के हिसाब से डिसीजन लेने पड़ते .. Blink: The Power of Thinking Without Thinki… Malcolm Gladwell केन्ना’स डिलेमा: द राईट एंड रोंग वे टू आस्क पीपल व्हट दे वांट (Kenna’s Dilemma: The Right and Wrong Way to Ask People What They Want) ये चैप्टर रीसर्च मेथड्स के तौर पर टेस्टिंग और पोलिंग की वीकनेस के बारे में बताता है. कंपनीज आमतौर पर टेस्ट ओर पोल्स पर डिपेंड रहती है, ये जानने के लिए कि उनका कोई प्रोडक्ट सक्सेसफुल है या नहीं. लेकिन इस प्रोसेस रेटिंग में जो इन्वोल्व होते है, वो कॉमन लोग होते है ना कि एक्सपर्ट. ये लोग अपने व्यूज़ साफ़ तरीके से नहीं बता पाते है जिससे सही रिजल्ट का पता नहीं चलते. इसलिए मार्केटिंग टेस्ट और पोल्स कभी-कभी उतने काम के नहीं निकलते. केन्ना एक म्यूजिशियन था. वो टाल और हैण्डसम था और वेल एजुकेटेड फेमिली से था. एकदम रॉक स्टार वाले लुक्स होने के बावजूद वो काफी वेल बिहेव्ड था. केन्ना ने छोटी उम्र से गाने लिखने स्टार्ट कर दिए थे. रिकॉर्ड कंपनी के एक हेड हंटर ने केन्ना को डिस्कवर किया था और क्रैग कालमेन को उसका रेफरेंस दिया था. कालमेन (Kallman) एटलांटिक रिकार्ड्स का को-प्रेजिडेंट था. उसका काम था हज़ारो म्यूजिक सीडीज़ सुनकर उनमे से बेस्ट चूज़ करना. उसे केन्ना के सोंग्स पंसद आये और वो केन्ना को अपने म्यूजिक सीडीज़ सुनकर उनमे से बेस्ट चूज़ करना. उसे केन्ना के सोंग्स पंसद आये. और वो केन्ना को अपने साथ न्यू यॉर्क लेकर आ गए और इस तरह केन्ना की जर्नी स्टार्ट हुई. केन्ना कई प्रोड्यूसर्स से मिला और सबको उसके गाने पंसद आये. डैनी विम्मेर, लिम्पबिज़किट बैंड के लीड सिंगर केन्ना से एक रिकार्डिंग स्टूडियो में मिले और उसे साइन करने का फैसला किया. फिर पॉल मैकगिनीज़ (Paul McGuinness,) यू2 (U2) के मैनेजर ने केन्ना के सोंग्स सुने और उसे अपने साथ आयरलैंड ले आये. केन्ना ने फिर मोस्ट पोपुलर म्यूजिक चैनल एमटीवी के साथ एक म्यूजिक विडियो बनाया. ये वीडियो 475 बार प्ले किया गया. हर वो इंसान जिसे म्यूजिक की समझ थी, उसे केन्ना के गाने बड़े पंसद आते थे. लेकिन जब उसके म्यूजिक को मार्किट रीसर्च कंपनी में भेजा गया तो उन्होंने उसके म्यूजिक को फेल कर दिया. ये रीसर्च कंपनीज वेबसाईट पर सोंग्स का एक सैम्पल प्ले करती थी और सुनने वाले ऑडियो क्लिप को रेटिंग देते थे. ये काफी ओल्ड सिस्टम है ये बताने के लिए कि कोई सोंग हिट होगा या फ्लॉप होगा. हालाँकि म्यूजिक लवर्स को केन्ना के गाने हद से ज्यादा पसंद थे लेकिन रेटिंग एजेंसीज़ ने उसे एवरेज रेटिंग तक नही दी थी. पॉल मैकगिनीज़ को यकीन था कि केन्ना म्यूजिक की दुनिया बदल कर रख देगा. ये उसका स्नैप जजमेंट था. अटलांटिक रीकोर्ड्स के को-प्रेजिडेंट को भी केन्ना के सोंग बड़े पसंद आये थे. बावजूद इसके केन्ना का करियर चल नहीं पाया, क्योंकि मार्किट रीसर्च कंपनी ने कोई सोंग हिट होगा या फ्लॉप होगा. हालाँकि म्यूजिक लवर्स को केन्ना के गाने हद से ज्यादा पसंद थे लेकिन रेटिंग एजेंसीज़ ने उसे एवरेज रेटिंग तक नही दी थी. पॉल मैकगिनीज़ को यकीन था कि केन्ना म्यूजिक की दुनिया बदल कर रख देगा. ये उसका स्नैप जजमेंट था. अटलांटिक रीकोर्ड्स के को-प्रेजिडेंट को भी केन्ना के सोंग बड़े पसंद आये थे. बावजूद इसके केन्ना का करियर चल नहीं पाया, क्योंकि मार्किट रीसर्च कंपनी ने उसकी रेटिंग काफी डाउन कर दी थी. म्यूजिक इंडस्ट्री में हिट होने के लिए वो कभी रेडियो तक पहुँच ही नहीं पाया जोकि काफी ज़रूरी था. फाइनली कोलंबिया रीकोर्ड्स ने केन्ना को साइन किया. लाइव परफोर्मेंस और कंसर्ट्स में केन्ना ने धूम मचा दी थी. लेकिन उसका करियर उस उंचाई तक कभी नहीं पहुंच पाया जो केन्ना डिज़र्व करता था, क्योंकि वो मार्किट फोकस ग्रुप को इम्प्रेस करने में फेल रहा. एक्चुअल में ये सब इसलिए हुआ क्योंकि प्रोफेशनल्स को तो अपने व्यूज़ वर्ड्स में एक्सप्रेस करना आता था मगर एवरेज ऑडियंस को नहीं. प्रोफेशनल्स ने केन्ना को अपने सामने परफॉर्म करते हुए देखा था, वो उसे पर्सन में भी देख चुके थे इसलिए उन्होंने थिन स्लाईस कर लिया कि केन्ना एक हिट सिंगर बनेगा. वही दूसरी तरफ फोकस ग्रुप ने सोंग का सिर्फ शोर्ट ऑडियो क्लिप सुना था. और उन्होंने भी बिना सोचे समझे थिन स्लाईस किया कि केन्ना के सोंग्स कोई खास अच्छे नहीं है. Blink: The Power of Thinking Without Thinki… Malcolm Gladwell सेवेन सेकंड्स इन द ब्रोंक्स: द डेलिकेट आर्ट ऑफ़ माइंड रीडिंग (Seven Seconds in the Bronx: The Delicate Art of Mind Reading) कोई क्रिटिकल डिसीजन लेना हो तो स्नैप जजमेंट इम्पोर्टेट है. प्रॉपर ट्रेनिंग और एक्स्पिरियेंश के साथ हम अपने थिन स्लाईस ऑफ़ एक्स्पिरियेश से काफी बड़े अमाउंट में काम की इन्फोर्मेशन निकाल सकते है. किसी इन्सान के चेहरे को पढने के लिए उसके फेशियल एक्सप्रेशन या बिहेवियर पर ध्यान देना चाहिए. आपकी ट्रेनिंग और एक्सपीरिएंस जितना ज्यादा होगा उतना ही आप अच्छा जज कर पाएंगे. अमदोऊ दिअल्लो (Amadou Diallo ) लोअर मेनहट्टन में एक पेडलर था. एक रात काम के बाद दिअल्लो (Diallo अपनी बिल्डिंग के बाहर रुक गया. कुछ देर बार कुछ पोलिसवाले वहां से गुज़र रहे थे. वो लोग प्लेन ड्रेस में थे. उन्होंने जब दिअल्लो (Diallo) के बाहर खड़ा देखा तो सोचा कि शायद वो कोई चोर है जो चोरी के लिए मौका ढूंढ रहा है. उन्हें ये भी लगा All Done? Finished के बाहर खड़ा देखा तो सोचा कि शायद वा काई चार है जो चोरी के लिए मौका ढूंढ रहा है. उन्हें ये भी लगा कि शायद वो कोई रेपिस्ट होगा जो एक साल पहले उसी एरिया में एक्टिव था. और दिअल्लो (Diallo’) के फेशियल फीचर्स भी रेपिस्ट से काफी मिलते थे. और दिअल्लो (Diallo ) इतना अजीब था कि वो लगातार बिल्डिंग को घूरे जा रहा था. फिर क्या था. पोलिस वालो ने गाडी रोकी और दिअल्लो से पूछताछ करने लगे. घबराहट में दिअल्लो कोई सही जवाब नहीं दे पाया. बोलते वक्त उसकी जबान लड़खड़ा रही थी. और उसे इंग्लिश भी ठीक से नहीं आती थी. उसे पोलिस वालो की बात ठीक से समझ नहीं आ रही थी. डर के मारे वो भागकर अपने फ़्लैट में चला गया. ऑफिस उसके पीछे से चिल्लाया मगर वो रुका नहीं. दिअल्लो ने अपनी पॉकेट से कुछ निकालने के लिए हाथ डाला. तो दो पोलिसवालो को लगा कि वो शायद गन निकाल रहा है. उन्होंने फिर से उसे वार्निंग दी कि तुम्हारे पास जो भी है, हमे दे दो. मगर दिअल्लो काफी नर्वस हो चूका था. और सिर्फ कुछ सेकंड्स बाद ही पोलिस वालो ने उस पर फायरिंग कर दी, दिअल्लो मारा गया. ट्रायल्स के दौरान ऑफिसर्स ने इस बात को माना कि दिअल्लो की बॉडी से कोई गन नहीं मिली थी. उन्होंने ये भी माना कि उन्हें शक था कि उसके पास गन टोगी All Done? Finished माना कादअल्ला का बाडा सकाइ गन नहा मिला था. उन्होंने ये भी माना कि उन्हें शक था कि उसके पास गन होगी. इसमें एक पॉसिबल थ्योरी ये थी कि पोलिसवाले दिअल्लो के फेशियल एक्सप्रेशन नहीं पढ़ पाए थे. उन्हें एक बार भी ये नहीं लगा कि दिअल्लो डरा हुआ है नाकि वो कोई डेंजरस क्रिमिनल है. और इसी गलतफहमी के चलते उन्होंने दिअल्लो पर गोली चला दी जिसमें वो मारा गया. एक और सिचुएशन लेते है. एक यंग लड़के के पीछे एक पोलिसवाला भाग रहा था. उस लड़के के हाथ में गन थी. ऑफिसर को गन दिख रही थी लेकिन उसने फिर भी उस पर गोली नहीं चलाई. हालाँकि वो गोली चला सकता था मगर वो उस लड़के के रिएक्शन का वेट कर रहा था. फाइनली लड़के ने अपनी गन ड्राप कर दी और ऑफिसर ने उसे अरेस्ट कर लिया. तो इन दोनों स्टोरीज़ में क्या डिफ़रेंस है? दिअल्लो के केस में ऑफिसर्स अनाड़ी थे. उन्हें इस तरह के एनकाउंटर का उन्हें पहले कोई एक्स्पिरियेश नहीं था. क्योंकि उन्हें फेशियल रीडिंग नही आती थी. मगर उस लडके के केस में ऑफिसर को इस तरह के हालात का आईडिया था. उसने देख लिया था कि लड़का डरा हुआ है इसलिए उसने वेट किया. अगर उसे ज़रा भी शक होता तो वो गोली चला देता और दस तरह रस पोलिस वाले की All Done? Finished उसने वेट किया. अगर उसे ज़रा भी शक होता तो वो गोली चला देता. और इस तरह उस पोलिस वाले की गुड स्नैप जजमेंट की वजह से उस लड़के की जान बच गयी. कनक्ल्यूजन (Conclusion) इस बुक में आपने अपने अनकांशस माइंड की इम्पोर्टेस के बारे में जाना. आपने सीखा कि कैसे अपने इंस्टिंक्ट पे भरोसा करके आप लाइफ चेंजिंग डिसीजन्स ले सकते है. आप वो देख सकते है जो बाकियों को नजर नहीं आया है. आप अपनी लाइफ को बैटर ढंग से मैनेज कर सकते है और अपने आस-पास की चीजों को ज्यादा ईज़ी बना कसते है.. आपने इस बुक में थिन स्लाईसिंग की इम्पोर्टेस सीखी जोकि हमे हमारे अनुभवो से मिलती है. आप अपने एक्स्पिरियेश चेंज करके लाइफ में चीजों को थिन स्लाइस करने के तरीको को भी चेंज कर सकते हो. आप दुनिया को लेकर अपना पर्सपेक्टिव चेंज कर सकते हो. इस बुक ने आपको डेली लाइफ में थिन स्लाईसिंग का यूज़ करना सिखाया है. इस तरह आप अपनी एनर्जी और टाइम भी सेव कर सकते हो जो अब तक आप कन्वेंशनल मेथड्स पर वेस्ट करते आये थे और जो हमेशा रिलाएबल भी नहीं होते थे. आपने सीखा कि कैसे थिन स्लाईसिंग आपको एक्स्पिरियेंश चेंज करके लाइफ में चीजों को थिन स्लाइस करने के तरीको को भी चेंज कर सकते हो. आप दुनिया को लेकर अपना पर्सपेक्टिव चेंज कर सकते हो. इस बुक ने आपको डेली लाइफ में थिन स्लाईसिंग का यूज़ करना सिखाया है. इस तरह आप अपनी एनर्जी और टाइम भी सेव कर सकते हो जो अब तक आप कन्वेंशनल मेथड्स पर वेस्ट करते आये थे और जो हमेशा रिलाएबल भी नहीं होते थे. आपने सीखा कि कैसे थिन स्लाईसिंग आपको लोगो को, या किसी कोम्प्लिकेटेड सिचुएशन को और चीजों को जज करने में हेल्प करती है. फिर चाहे ऐसे लोग या सिचुएशन आपको किसी बार में मिले, पोलिस एनकाउंटर हो या आपको अपने देश का प्रेजिडेंट चूज़ करना हो. एक्चुअल में थिन स्लाईसिंग कभी भी और कहीं भी यूज़ हो सकती है. अब जब अपने लॉक्ड डोर्स के पीछे का सीक्रेट जान लिया है तो अपने अनकांशस माइंड का मैक्सीमम यूज़ करने की कोशिश करो. थिन स्लाईसिंग के इस न्यू वर्ल्ड को एक्सप्लोर करके देखो और फिर इसका मैजिक खुद ब खुद आपके सामने आ जाएगा.

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