ASIAN PAINTS CASE STUDY IN HINDI 2022

ASIAN PAINTS GIGL TEAM इंट्रोडक्शन एशियन पेंट्स लिमिटेड , मुंबई में बेस्ड एक पॉपुलर पेंट कंपनी हैं. यह मल्टिनैशनल कंपनी, पेंट, घर की सजावट, बाथ फिटिंग्स और इनसे जुड़ी चीज़ों की मैन्युफैक्चरिंग करती हैं, वो इन्हें डिस्ट्रीब्यूट और बेचती भी है. एशियन पेंट्स भारत की सबसे बड़ी पेंट कॉर्पोरेशन हैं और एशिया की तीसरी बड़ी पेंट कंपनी भी. 2019-2020 में, एशियन पेंट्स की रेवेन्यू 17,194.1 crore की रही जिसमें ₹ 2654 crore रुपए की प्रॉफिट थी. कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन दुनिया भर के 15 देशों में फैले हुए हैं जिसमें से भारत के अलावा मिडल-ईस्ट के देश शामिल हैं. हिस्ट्री कंपनी की शुरुआत फरवरी 1945 में, चार दोस्तों चंपकलाल चोकसी, सूर्यकांत दानी, चिमनलाल चोकसी और अरविंद वकील ने गिरगाम , मुंबई के एक गैरेज में की. एशियन पेंट्स के चारों फाउंडर्स जैन थे. वर्ल्ड वॉर-2 और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, देश में पेंट का इम्पोर्ट कुछ वक्त के लिए रुक गया था जिसकी वजह से कुछ विदेशी कंपनियों और शालीमार पेंट्स ने पूरे मार्केट के पेंट के डिमांड को गया था जिसका वजह से कुछ विदशा कपानया आर शालीमार पेंट्स ने पूरे मार्केट के पेंट के डिमांड को संभाला. उन शुरू के दिनों में, चंपकलाल और कुछ और लोग 75 रुपये हर महीने का किराया देकर एक गैरेज में काम करते थे. उन दिनों एशियन पेंट्स को ‘द एशियन ऑयल एंड पेंट कंपनी’ के नाम से बुलाया जाता था. 1945 में, INR 3.5 लाख का एनुअल टर्नओवर हासिल करने के बाद, यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई . एशियन पेंट्स का बिज़नस इस तरह से बढ़ा कि 1952 में इसका टर्नओवर 23 करोड़ हो गया था. 1957 साल एक बहुत ज़रूरी साल था जब एशियन पेंट्स कंपनी के R&D department ने इंटरनेशनल क्वालिटी के फेनोलीक और मैलिक एसिड रेज़िन्स बनाने का तरीका निकाला जिसे एक साधारण से कोयला भट्ठी में हाथों से काम करके बनाया जाता था. उसी साल कंपनी ने मुंबई के भांडुप में, एक और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खड़ी की ताकि शहरों में पेंट की बढ़ती हुए डिमांड को पूरा किया जा सके. 1967 तक, एशियन पेंट्स भारत की टॉप पेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बन गई थी. शुरु में, चारों फॉउंडर्स के फैमिली मेंबर्स के पास कंपनी के ज्यादातर शेयर्स थे. लेकिन 1990 के सालों में, जब कंपनी देश के बाहर फ़ैलने लगी, तो इसके ग्लोबल राइट्स को लेकर विवाद छिड़ गया. इसकी वजह से, चोकसी फैमिली ने अपने 13.7% शेयर बेचे और 1997 में कंपनी से बाहर हो गए. जुलाई 1997 वजह स, चाफसाफामला न अपन ।5./70 रायरषच और 1997 में कंपनी से बाहर हो गए. जुलाई 1997 में , चंपकलाल की मौत हो गई जिसके बाद उनके बेटे अतुल ने उनका कंपनी का हिस्सा हासिल किया. एशियन पेंट्स की ब्रिटिश कंपनी इम्पीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज के साथ जुड़ने की कई बार कोशिशें हुई जो नाकाम रही. चोकसी के शेयर को यूनिट ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया और बाकी के तीन फॉउंडर्स की फैमिली ने मिलकर खरीदा. 2008 तक, चोकसी, दानी और वकील फैमिली के पास मिलाकर कंपनी के 47.81% शेयर थे. 1942 में कंपनी की मामूली सी शुरुआत को देखते हुए, यह कहा जा सकता हैं एशियन पेंट्स ने एक लंबा सफर तय किया हैं. शुरू में , कंपनी को चार दोस्तों ने मिलकर एक पार्टनरशिप फर्म के तौर पर शुरु किया था, जिनके पास भारतीय बाज़ारों पर राज करने वाले उस दौर के बड़े और पॉपुलर पेंट कंपनियों से टक्कर लेने का हौसला और नज़रिया था. 25 साल बाद, एशियन पेंट्स एक मजबूत कॉर्पोरेट फ़ोर्स और भारत की लीडिंग पेंट कंपनी बन गई थी. अपनी मजबूत कंस्यूमर फोकस और इनोवेशन की वजह से, 1967 से, एशियन पेंट्स मार्केट लीडर कहलाया जाता हैं. यह कंपनी डेकोरेशन और इंडस्ट्रीस के लिए अनगिनत तरह के पेंट मैनुफैक्चर करती हैं और साथ ही दीवारों के लिए वॉल कवरिंग, चिपकाने वाले ऐडहेसिव्स, और घर की सजावट के लिए सर्विसेस, ये सब भी मुहैया करवाती हैं. पाठी ने थाने का कोलार टयों टो। टानोंट , सब भी मुहैया करवाती हैं. कंपनी ने अपने काम को फैलाकर इसमें होम इम्प्रूवमेंट, डेकॉर सर्विसेस, बाथ और किचन प्रोडक्ट्स को भी शामिल किया. जैसे-जैसे कंपनी बढ़ती गई, लाइटिंग, फर्निशिंग, और फर्नीचर भी उनके प्रोडक्ट्स के पोर्टफोलियो में जुड़ते गए. एशियन पेंट्स के हेल्थ एंड हाइजीन सेगमेंट अलग-अलग तरह के सैनिटाइज़र और सरफेस disinfectant बेचते हैं. अपने प्रोफेशनलिज़्म, स्टेडी ग्रोथ और शेयरहोल्डर इक्विटी की वजह से एशियन पेंट्स का बिज़नस की दुनिया में काफी बड़ा नाम है. यह 14 देशों में ऑपरेट करते हैं और दुनिया भर में इसकी 26 पेंट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी हैं, और इनके प्रोडक्ट्स 60 से ज़्यादा देशों में बिकते हैं. यह ग्रुप पूरी दुनिया में फैली हुई हैं, न सिर्फ एशियन पेंट्स के तौर पर, बल्कि सब्सिडियरी कंपनियों- एप्को कोटिंग्स, एशियन पेंट्स बर्जर, स्कीब पेंट्स, एशियन पेंट्स कॉजवे, टॉबमैन्स और कैडीस्को एशियन पेंट्स के नामों से भी कामयाबी हासिल की हैं. एशियन पेंट्स चार तरह के डेकोरेटिव पेंट्स में मौजूद हैं, जिसमें इंटीरियर वॉल फ़िनिश, एक्सटीरियर वॉल फ़िनिश, इनेमल और वुड फ़िनिश शामिल हैं. कंपनी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेस में वॉटरप्रूफिंग, वॉल कवरिंग और एडहेसिव शामिल हैं. एशियन पेंट्स दुनिया के बड़े ऑटोमोटिव कोटिंग प्रोड्यूसर्स में से एक, PPG Inc, USA के साथ दो 50:50 पार्टनरशिप में, इंडस्ट्रियल कोटिंग इंडस्ट्री में हैं, जिसमें इंटीरियर वॉल फ़िनिश, एक्सटीरियर वॉल फ़िनिश, इनेमल और वुड फ़िनिश शामिल हैं. कंपनी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेस में वॉटरप्रूफिंग, वॉल कवरिंग और एडहेसिव शामिल हैं. एशियन पेंट्स दुनिया के बड़े ऑटोमोटिव कोटिंग प्रोड्यूसर्स में से एक, PPG Inc, USA के साथ दो 50:50 पार्टनरशिप में, इंडस्ट्रियल कोटिंग इंडस्ट्री में काम करते हैं. उनकी पहली पार्टनरशिप, पीपीजी एशियन पेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, भारत की बढ़ती ऑटोमोबाइल कोटिंग की जरूरत को पूरा करती हैं. उनकी दूसरी पार्टनरशिप ‘एशियन पेंट्स पीपीजी प्राइवेट लिमिटेड’ प्रोटेक्टिव कोटिंग, इंडस्ट्रियल पाउडर, इंडस्ट्रियल पैकेजिंग और हल्के लाइट इंडस्ट्रियल कोटिंग में इंडियन मार्केट की डिमांड को संभालती हैं. वर्टीकल इंटीग्रेशन की वजह से, एशियन पेंट्स ने Phthalic Anhydride और Pentaerythritol जैसे केमिकल प्रोडक्ट्स को भी बनाना शुरू किया, जिनका इस्तेमाल पेंट के प्रोडक्शन में किया जाता है. हालंकि, जुलाई 2017 के आखिर से फर्म ने Phthalic Anhydride का प्रोडक्शन बंद कर दिया. यह फर्म Sleek और Ess Ess brands के तहत होम इम्प्रूवमेंट और डेकोर केटेगरी में, किचन और बाथ फिटिंग के बिज़नस में भी शामिल हैं. ASIAN PAINTS GIGL TEAM एशियन पेंट्स – विज़न एशियन पेंट्स की ऑफिसियल वेबसाइट में उनका विज़न कहता है : “हम एक इनोवेटिव, चुस्त और ज़िम्मेदार वर्ल्ड-क्लास रिसर्च और टेक्नोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन हैं जो कस्टमर्स के फ्यूचर की ज़रूरतों के लिए काम करते हैं और कंपनी के ग्रोथ को हाल की और फ्यूचर की ज़रूरतों को देखते हुए आगे बढ़ाते हैं.” एशियन पेंट्स का बिजनस मॉडल और सप्लाई चैन एशियन पेंट्स उन फर्मों में से हैं, जिन्होंने प्रोडक्ट्स के कंसम्पशन यानि खपत के ट्रेंड और पैटर्न को जल्दी पहचान लिया और सबसे अलग और असरदार स्ट्रेटेजी बनाईं. एशियन पेंट्स का मार्केट कैपिटल 2,54,125.07 करोड़ रुपये का हैं जिसे हासिल करना नामुमकिन होता अगर कंपनी हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स न लाती और सही डेमोग्राफी यानी age ग्रुप को टारगेट न कर पाती. साथ ही, किसी भी कामयाब बिज़नस की बैकबोन होती हैं असरदार मार्केटिंग. एशियन पेंट्स का बिज़नस B2C बिज़नस फॉर्मेट पर बेस्ड हैं, जिसमें कंपनी कस्टमर्स के लिए प्रोडक्ट बनाती हैं और डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स के हाथों सीधे उन्हें बेचती हैं. इसमें कोई शक नहीं कि एशियन पेंट्स ने शानदार एडवर्टाइजमेंट स्टेजी की वजह से कई मार्केटिंग जीत A उन्ह बचता ह. इसमें कोई शक नहीं कि एशियन पेंट्स ने शानदार एडवर्टाइजमेंट स्ट्रेटेजी की वजह से कई मार्केटिंग जीत हासिल की. 1954 के शुरूवात में, कंपनी ने गटू नाम के एक शरारती बच्चे को अपनी कंपनी का मैस्कॉट बनाया. इस मैस्कॉट को भारतीय कंस्यूमर्स ने जल्द ही अपना लिया था, ख़ासकर मिडल क्लास ने. इसके अलावा, फर्म ने मेनफ्रेम कंप्यूटर खरीदने के लिए लगभग 8 करोड़ रुपये इन्वेस्ट किए. ऐसा करने वाला एशियन पेंट्स पहला प्राइवेट कॉर्पोरेशन बन गया जो भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट को देखते हुए एक रिस्की कदम था. इस कंप्यूटर का इस्तेमाल डेटा एनालिसिस के लिए किया गया था जो कंपनी के लिए डिमांड्स की प्रेडिक्शन करने और सर्विस के स्टैंडर्ड को इम्प्रूव में हेल्प करता था. वहीं दूसरी ओर, दूसरे बिज़नस कम्पनियाँ सिर्फ पेरोल और एडमिंस्ट्रेशन कामों के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करते थे. एशियन पेंट्स अपनी सप्लाई चैन की एफिशिएंसी को बढ़ाने के लिए समझदारी से इन्वेस्टमेंट करता गया. वे मार्केट के कम्पीटिशन से एक कदम आगे रहना पसंद करते हैं और इसमें सालों से कामयाब भी रहे हैं. 1982 में कंपनी पब्लिक हुई और इसकी कमाई का इस्तेमाल अपने ऑपरेशन को आगे बढ़ाने में और कई नए प्रोडक्ट्स को लाने में किया. एशियन पेंट्स ने सप्लाई चैन का जो तरीका अपनाया, वह भारतीय पेंट बिज़नस में हमेशा बेजोड़ रहा है. एशियन पेंट्स अपने इनोवेशन पर पैनी नज़र के लिए जाना जाता है कि नट 07 निना …II II नासा मेर पट बिज़नस में हमेशा बेजोड़ रहा है. एशियन पेट्स अपने इनोवेशन पर पैनी नज़र के लिए जाना जाता है, जिसमें वह पेंट बिज़नस के कंस्यूमर पर ख़ास जोर देते हैं. इसने कंपनी को अल्टिमा, रोयाल जैसे दूसरे सब-ब्रांड बनाने में हेल्प की. यह सब ब्रांड्स अपने आप में कामयाब रहे हैं. मॉडर्न इक्विपमेंट और स्मार्ट IT में इन्वेस्ट कर, एशियन पेंट्स ने अपने बिज़नस को न सिर्फ आगे बढ़ाया बल्कि अपने फैक्टरी की काबिलयत भी बढ़ाई. पेंट्स मार्केट में सबसे पॉपुलर और बड़ा नाम होने के साथ-साथ, एशियन पेंट्स ने किचन और बाथ फिटिंग्स जैसे दूसरे इंडस्ट्रीस में भी अपने पैर जमाए. कंपनी वाटरप्रूफिंग, कलर कंसल्टेंसी सर्विसेस और इंटीरियर डिजाइन जैसे कई तरह की सर्विसेस भी देती हैं. एशियन पेंट्स की बनाई हुई सप्लाई chain का तरीका पेंट बिज़नस में हमेशा आगे रहा हैं. डिस्ट्रीब्यूटर्स, रीटेलर और wholesalers, एशियन पेंट्स के अलग-अलग प्रोडक्ट्स और सर्विसेस को आगे मार्केट में बांटते हैं. कंपनी हाल में 14 से ज़्यादा देशों में अपना ऑपरेशन चलाती हैं और इसने 26 पेंट प्रोडक्शन यूनिट बनाए हैं जो 60 से ज़्यादा देशों में अपने कस्टमर्स तक अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेस पहुँचाती हैं. एशियन पेंट्स की कुछ इंटरनेशनल सब्सिडियरी कंपनियां हैं जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम करती हैं, उनमें बर्जर इंटरनेशनल लिमिटेड, टाबमैन्स, SCIB पेंट्स, कैडिस्को और एप्को कोटिंग्स शामिल हैं. वाटरप्रूफिंग, कलर कंसल्टेंसी सर्विसेस और इंटीरियर डिजाइन जैसे कई तरह की सर्विसेस भी देती हैं. एशियन पेंट्स की बनाई हुई सप्लाई chain का तरीका पेंट बिज़नस में हमेशा आगे रहा हैं. डिस्ट्रीब्यूटर्स, रीटेलर और wholesalers, एशियन पेंट्स के अलग-अलग प्रोडक्ट्स और सर्विसेस को आगे मार्केट में बांटते हैं. कंपनी हाल में 14 से ज़्यादा देशों में अपना ऑपरेशन चलाती हैं और इसने 26 पेंट प्रोडक्शन यूनिट बनाए हैं जो 60 से ज़्यादा देशों में अपने कस्टमर्स तक अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेस पहुँचाती हैं. एशियन पेंट्स की कुछ इंटरनेशनल सब्सिडियरी कंपनियां हैं जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम करती हैं, उनमें बर्जर इंटरनेशनल लिमिटेड, टाबमैन्स, SCIB पेंट्स, कैडिस्को और एप्को कोटिंग्स शामिल हैं. एशियन पेंट्स का टारगेट मार्केट एशियन पेंट्स कई तरह के क्लाइंट्स देखते हैं जैसे कि होम ओनर, बिज़नस ओनर, ऑटोमेटिव मैन्युफैक्चरर, डिस्ट्रीब्यूटर और wholesaler. एशियन पेंट्स के रिटेल कस्टमर्स ज्यादातर 20 साल की उम्र से ज़्यादा के, मीडियम, अप्पर मिडल और हाई क्लास केटेगरी के लोग हैं. कंपनी के बिज़नस क्लाइंट्स में प्राइवेट बिज़नस, गवर्नमेंट एजेंसियां और दूसरे ऑर्गनाइज़ेशन शामिल हैं. ASIAN PAINTS GIGL TEAM एशियन पेंट्स की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी दूसरे पेंट कंपनियों से अलग, जो ख़ासतौर पर बड़े शहरों पर ध्यान देते हैं, एशियन पेंट्स 13,000 डीलरों के फैले नेटवर्क से पूरे देश में डिस्ट्रीब्यूशन करता हैं. भारत भर के डीलरों को अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेस की डिस्ट्रीब्यूशन में मदद करने के लिए, कंपनी ने कई लोकल ब्रांच, कंपनी डिपो, और सेल्समेन रखे हैं. एशियन पेंट्स का फोकस अपने मार्केटिंग और ब्रांडिंग स्ट्रेटेजी पर भी रहता हैं ताकि इससे कंस्यूमर का भरोसा ज़िंदा रखा जा सके. कंपनी ने एशियन पेंट्स की पॉजिटिव पब्लिक इमेज बनाने के इरादे से एक नया एडवर्टाइज़िंग कैम्पेन बनाने का फैसला किया जिसके लिए कंपनी ने साल 2000 में बैंगलोर के ई-कॉमर्स फर्म “Momentum” को हायर किया. एशियन पेंट्स ने सालों तक कई सक्सेसफुल कैम्पेन चलाए. “Don’t lose your temper; use Tractor Distemper.” इस टैगलाइन का इस्तेमाल एशियन पेंट्स ने अपने पहले एडवर्टाइजिंग कैम्पेन में किया था. इस कमर्शियल में फेमस कैरेक्टर ‘गटू’ को पेंट की बाल्टी पकड़े हुए दिखाया गया. ब्रैड मैस्कॉट गटू, 1954 में कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण का बनाया हुआ एक कार्टून था जो 40 से ज़्यादा सालों तक एक पॉपुलर और जाना माना कैरेक्टर बना रहा. कंपनी के ज्यादातर कमर्शियल फैमिली को दमोशनली र IT ”लगा.. ५’पापा हुआ एक कार्टून था जो 40 से ज़्यादा सालों तक एक पॉपुलर और जाना माना कैरेक्टर बना रहा. कंपनी के ज़्यादातर कमर्शियल फैमिली को इमोशनली जोड़ने के बारे में हैं. कई पॉपुलर चेहरे और पब्लिक फिगर एशियन पेंट्स के ब्रैंड एंबेसडर रहे हैं, जिनमें रणबीर कपूर, अक्षय खन्ना, सैफ अली खान और सोहा अली खान की भाई-बहन की जोड़ी और दीपिका पादुकोण शामिल हैं. अपनी सेल्स को बेहतर बनाने के लिए, एशियन पेंट्स का एक और प्रमोशनल टूल है जो है अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को इंसेंटिव देना. वक्त के साथ कंपनी के मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में बदलाव किया गया. अब, कंपनी के प्रमोशन का एक ज़रूरी हिस्सा उसका सोशल मीडिया पूरा करता हैं. एशियन पेंट्स की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी ने इस धीमी इंडस्ट्री में जान डाल दी थी. आइए उनके कुछ सबसे कामयाब मार्केटिंग कैम्पैन के बारे में जानते हैं. -गटू की कामयाबी के बाद, एशियन पेंट्स ने Ogilvy & Mather की मदद से परंपराओं और त्योहारों पर फोकस रखकर एक नया मार्केटिंग कैम्पेन शुरू किया. उनका सबसे अलग स्लोगन,”हर घर कुछ कहता है”, दिवाली, पोंगल और शादी जैसे मौकों को दिखाता हैं. कस्टमर्स के दिलों को छूने के लिए, कंपनी ने इस बात को कहने पर जोर दिया कि ख़ास मौकों पर घर को पेंट करना और सजाना चाहिए. कंपनी हर त्योहार में ख़ास डेकोरेशन की मार्केटिंग ज़ोरों शोरों से करती हैं ताकि कस्टमर्स को दन्हें खरीदने के लिए उकसा सकें पट करना आर सजाना चाहिए. कपना हर त्याहार म ख़ास डेकोरेशन की मार्केटिंग ज़ोरों शोरों से करती हैं ताकि कस्टमर्स को इन्हें खरीदने के लिए उकसा सकें. साथ ही, ये कस्टमर्स को, कंपनी के ब्रैड का हैशटैग शेयर करने के लिए कहकर अपने ब्रैंड को प्रमोट करती -“वाह सुनील बाबू वाह” स्लोगन वाला Ad बहुत वायरल हुआ था, और ऑडियंस अभी भी इसे याद करते हैं और इसे एशियन पेंट्स के साथ जोड़कर देखते हैं. इसके पीछे का आईडिया था कि उनका पेंट कभी फीका नहीं पड़ता, फिर चाहे घर में रहने वाले लोग बदलते क्यों ना रहें. -बदलते वक्त के साथ, ज़्यादा से ज़्यादा कस्टमर्स का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए फेमस ब्रैंड एम्बेसडर बनाए जिनमें दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर जैसे एक्टर्स शामिल थे. पहले की तरह लोगों को हंसाने वाले कमर्शियल के बदले, बैंड अब sophisticated और innovative तरिके से अपनी बात कंज़्यूमर तक पहुंचाते हैं. इसलिए वो अलग-अलग पब्लिक फिगर के साथ काम करते हैं जो शोबिज़ इंडस्ट्री में उभरते हैं, जिनमें राधिका आप्टे और राणा दगुबत्ती शामिल हैं. – “Where The Heart Is.” यह एक और कैम्पेन हैं जो एशियन पेंट्स के लिए बहुत कामयाब साबित हुआ था. इन सेंटीमेंटल Ads में राधिका आप्टे, सुशांत सिंह राजपूत, मंदिरा बेदी, सौरभ गांगुली, और दूसरे बहुत से सेलिब्रिटीज़ को शामिल किया गया जिन्होंने अपनी लाइफ में एशियन पेंट्स की ज़रूरत के बारे में बाल समिनि-+ सताने लगा साथ काम करते हैं जो शोबिज़ इंडस्ट्री में उभरते हैं, जिनमें राधिका आप्टे और राणा दगुबत्ती शामिल हैं. – “Where The Heart Is.” यह एक और कैम्पेन हैं जो एशियन पेंट्स के लिए बहुत कामयाब साबित हुआ था. इन सेंटीमेंटल Ads में राधिका आप्टे, सुशांत सिंह राजपूत, मंदिरा बेदी, सौरभ गांगुली, और दूसरे बहुत से सेलिब्रिटीज़ को शामिल किया गया जिन्होंने अपनी लाइफ में एशियन पेंट्स की ज़रूरत के बारे में बात की. इन सेलिब्रिटीज़ ने अपने घरों को दिखाते हुए बताया कि कैसे एशियन पेंट्स ने हमेशा उनके घरों और पर्सनल स्पेस को सुंदर बनाया और सजाया हैं. -कंपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग की ज़रूरत को पहचानती हैं. वे छोटे-छोटे Ad बनाकर YouTube पर पोस्ट करते हैं जिससे ऑडियंस के मन में एशियन पेंट्स की पॉजिटिव इमेज को बढ़ावा मिलता हैं. ये Ad अलग-अलग शहरों पर फिल्माए जाते हैं, और उनमें पेंटिंग के सुझाव दिए जाते हैं. कंपनी ऑडियंस को खुद से जोड़े रखने के लिए कॉम्पिटिशन भी रखती हैं. -उनका एक टीवी कमर्शियल ‘बजट वाला पेंट’ ट्रैक्टर Sparc को एक सस्ता इमल्शन पेंट बताती हैं जो आपके घर के दीवारों को कम पैसों में स्मूथ और हाई क्वालिटी फिनिश देती हैं. इसके पीछे की सोच थी कि कंपनी का aim हैं सभी इनकम ग्रुप को अच्छी क्वालिटी पेंट मुहैया करवाना. ASIAN PAINTS GIGL TEAM एशियन पेंट्स डिजिटल मार्केटिंग स्ट्रेटेजी टीवी पर अपने कमर्शियल के लिए पॉपुलर होने के अलावा, एशियन पेंट्स सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहता हैं. हाल के सालों में, एशियन पेंट्स ने एक असरदार डिजिटल मार्केटिंग स्ट्रेटेजी अपनाई हैं. Ad फर्म ‘ Kinnect’ एशियन पेंट की डिजिटल मार्केटिंग संभालती है. आइए एक नजर डालते हैं कि उन्होंने कैसे डिजिटल मार्केटिंग को अपनाया और उनकी क्या स्ट्रेटेजी हैं. एशियन पेंट्स के 192k इंस्टाग्राम फॉलोअर्स, 194k ट्विटर फॉलोअर्स, 19 लाख फेसबुक लाइक्स और 976k यूट्यूब सब्सक्राइबर हैं. वे ख़ासतौर से इंस्टाग्राम पर एक्टिव हैं, जहां वे घर को सजाने के आइडिया और डिज़ाइन के आइडिया देते रहते हैं, जिसमें अपने फॉलोवर्स की सहूलियत के लिए हर प्रोडक्ट की डिटेल देते हैं. कंपनी डेकोरेशन की कॉम्पिटिशन भी रखती हैं, खासकर नवरात्रि, दिवाली, क्रिसमस जैसे त्योहारों पर. कस्टमर्स को अपने घर को सजाकर, कंपनी के साथ इंटरैक्ट करने के लिए एनकरेज किया जाता हैं जिससे वे सर्विस और गिफ्ट जीत सकें. वे इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में भी काफी अच्छा कर रहे हैं. वे फेमस इंस्टाग्राम पर्सनालिटी के साथ काम कर रहे हैं जो एशियन पेंटस की सर्विस का दस्तेमाल करते हैं ये T ५पपुरतानापाना पाया जा पार ०९. वे फेमस इंस्टाग्राम पर्सनालिटी के साथ काम कर रहे हैं जो एशियन पेंट्स की सर्विस का इस्तेमाल करते हैं. ये सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अपने घर का “होम टूर” करके अपने सोशल मीडिया पेज़ पर एशियन पेंट्स का प्रमोशन करते हैं, और अपने घर को सजाने में इस्तेमाल हुए एशियन पेंट्स के अलग-अलग प्रोडक्ट्स को शोकेस करते हैं. वे शॉर्ट फिल्म Ad और यूट्यूब tutorial बनाकर नए प्रोडक्ट्स को यूज़ करने का तरीका भी बताते हैं. ट्विटर और फेसबुक के ज़रिए नए प्रोडक्ट्स के रिलीज़ और प्रमोशन के बारे में बताया जाता हैं. एशियन पेंट्स अवेयरनेस पैदा करने के लिए सामाजिक मुद्दों पर भारत के अलग-अलग शहरों में दीवारों पर पिक्चर भी पेंट करते हैं. यह कंपनी के लिए गुडविल बनाता हैं और समाज में इस ब्रैंड की अच्छी इमेज को बढ़ावा देता हैं. एग्जाम्पल के लिए, हाल के कोरोना pandemic के दौरान, कंपनी ने फ्रंट लाइन वर्कर्स को उनकी सर्विस के लिए सम्मानित करने के लिए दीवारों पर पिक्चर बनाए. इस Ad कैम्पेन का टैगलाइन था ‘बैंक यू, हीरोस’. कंपनी की अलग-अलग मार्केटिंग स्ट्रेटेजी से क्लियर होता हैं कि ये सोशल इश्यूज़ और करंट अफेयर को अपने कैम्पेन में शामिल करते है ताकि ऐसे कैम्पेन तैयार किए जा सकें जिनसे कंस्यूमर्स खुद को इनसे जोड़ सके. नई केटेगरी हाल ही में एशियन पेंट्स ने एक नया प्रोडक्ट लॉन्च किया हैं ।\/ironrotek दस रेंज में द मैनिटाहत्तर A < जा सक नस कास्यूमत खुद का नस जाड सफ. नई केटेगरी हाल ही में एशियन पेंट्स ने एक नया प्रोडक्ट लॉन्च ‘ किया हैं ‘Viroprotek’. इस रेंज में हैंड सैनिटाइज़र, स्पेस एंड सरफेस सैनिटाइज़र और डिसइंफेक्टेंट शामिल हैं. ये अपने कस्टमर्स के लिए ‘सैन एश्योर’ सैनिटाइजिंग सर्विस और एक ‘सेफ पेंटिंग’ सर्विस भी देता हैं. एशियन पेंट ने निलया, अडोर, रोयाल ब्रैंड के तहत फर्नीचर लाइन, फर्निशिंग और लाइटिंग प्रोडक्ट लॉन्च किए. इस तरह ‘होम डेकोर’ डोमेन में एशियन पेंट्स ने अपने प्रोडक्ट और सर्विस को और भी फैलाया. एक और सर्विस जो हाल में ही लॉन्च की गई ‘ब्यूटीफुल होम्स सर्विस’ – जो एक कस्टमाइज़्ड एंड-टू-एंड सोल्यूशन देता हैं, जो कस्टमर्स को अपने सपनों का घर बनाने में प्रोफेशनल कंसल्टेशन की हेल्प से लेकर एक्सक्लूसिव इंटीरियर डिजाइन और डेकॉर सर्विस तक देता हैं. रिसर्च एंड डेवलपमेंट एशियन पेंट्स रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी सेंटर एक मॉडर्न इंस्टिट्यूट है जो साइंटिस्ट को लेटेस्ट इक्विपमेंट की फैसिलिटी देता हैं. साइंटिस्ट यहां कॉन्सेप्ट्स बना सकते हैं, डेवलॅप कर सकते हैं और मॉडर्न टेक्नोलॉजी, टूल्स और मशीन्स का इस्तेमाल कर कामयाब प्रोडक्ट्स बना सकते हैं. इस फैसिलिटी में हर डोमेन के लिए एक ख़ास लैब हैं, जैसे कि रेसिन दमल्शन और पेंट कामयाब स्टैंडर्ड सकते हैं. इस फैसिलिटी में हर डोमेन के लिए एक ख़ास लैब हैं, जैसे कि रेसिन, इमल्शन और पेंट. कामयाब स्टैंडर्ड और बिना रुके प्रोडक्शन के पायलट स्केल अप से लेकर स्केल अप आइडियास के लिए मॉडर्न हाई टेक इक्विपमेंट का इस्तेमाल होता हैं. इस फैसिलिटी में इंडस्ट्रियल कोटिंग और पाउडर कोटिंग के लिए Extrusion मशीनें भी हैं. इमल्शन और कलरेंट लैब में हाई थूपुट टेक्निक यूज़ होती हैं जो उन्हें जल्द से जल्द टेस्ट करने की फैसिलिटी देती हैं. रिसर्च सेंटर में हाई प्रेशर रिएक्टर के इस्तेमाल से नए रेज़िन और इमल्शन बनाए जाते हैं. सेंटर में एक्सपर्ट के पास माइक्रोबायोलॉजी, एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट्स और कलर केमिस्ट्री में काम करने और रिसर्च करने का मौका होता हैं. एक नया प्रोडक्ट लॉन्च करने से पहले , एप्लिकेशन लैब और एक्सपेरिमेंटल ज़ोन प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस लेने का मौका देते हैं. एशियन पेंट्स रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी का एक स्ट्रेटेजीक aim हैं एम्पलॉई की काबिलियत को बढ़ाना जिससे वे थ्योरी और प्रैक्टिकल, दोनों ही तरह की सीख ले सकें, जिसे करने के लिए सेंटर में behavioural और टेक्निकल प्रोग्राम्स रखे जाते हैं. ये प्रोग्राम हरेक शख्स की ज़रूरत के हिसाब से बनाए जाते हैं और आर्गनाईजेशन के विज़न पर बेस्ड होते हैं. क्लासरूम सेशंस सिर्फ ज़रूरी बातों के लिए रखी जाती हैं. . ASIAN PAINTS GIGL TEAM – अवार्ड और रेकग्निशन एशियन पेंट्स जब से शुरू हुआ हैं, तब से लेकर आज तक इसने काफी कामयाबी हासिल की हैं और कई अवार्ड्स जीते हैं. 2002 में, फोर्ब्स ग्लोबल मैगज़ीन, USA ने एशियन पेंट्स को 200th दुनिया की बेस्ट छोटी कंपनियों में जगह दी थी. अगले साल, एशियन पेंट्स को नामी-गिरामी ‘अर्स्ट एंड यंग एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर – मैन्युफैक्चरिंग अवार्ड’ दिया गया. जुलाई 2015 में, फोर्ब्स इंडिया ने एशियन पेंट्स को भारत की सुपर 50 कंपनियों में जगह दी. 2017 में, एशियन पेंट्स “फोर्ब्स मोस्ट इनोवेटिव कंपनी लिस्ट ” में टॉप रैंक वाली इंडियन कंपनी बनी, जो दुनिया में 8th रैंक पर थी. जुलाई 2019 में, एशियन पेंट्स को कोटिंग की टॉप पेंट कंपनियों की लिस्ट में 9th बेस्ट कंपनी बताया गया. इसी साल, इसे फ़ोर्स कवेट लिस्ट में दुनिया की बेस्ट कंपनियों में गिना गया है. कन्क्लूज़न अपने यूनिक कलर पैलेट, थीम और क्रिएटिव पैटर्न से, एशियन पेंट्स ने भारत के पेंट इंडस्ट्री में एक रेवोल्यूशन लाकर रख दिया था. इन्होने घर को सजाना, जिसे । अपने यूनिक कलर पैलेट, थीम और क्रिएटिव पैटर्न से, एशियन पेंट्स ने भारत के पेंट इंडस्ट्री में एक रेवोल्यूशन लाकर रख दिया था. इन्होने घर को सजाना, जिसे लक्ज़री माना जाता था, उसे भारत के मिडल क्लास के लिए अफोर्डेबल बनाया. इसका साल 2020 में 20,575.56 करोड़ रुपये का एनुअल टोटल सेल्स रहा. इस कंपनी में, हाल में 12 इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर और शेयरहोल्डर्स हैं जो Securities Exchange Commission (SEC) के मीडियम से इसमें इन्वेस्ट करते हैं. ब्रिज बिल्डर इंटरनेशनल इक्विटी फंड और टचस्टोन सैंड्स कैपिटल इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड- यह दो एशियन पेंट्स के main शेयरहोल्डर्स हैं. असरदार प्रोडक्ट सेगमेंट और उनके प्लेसमेंट की वजह से एशियन पेंट्स ने कंस्यूमर्स मार्केट के एक बड़े और ज़रूरी हिस्से पर अपना कब्जा बनाया. इसके मार्केटिंग करने के तरिके बहुत इफेक्टिव हैं, जो कस्टमर्स की जरूरतों को पूरा करते हैं. साथ ही, इसने इसे एक बेहतरीन कंपनी की ब्रैंड इमेज़ बरकरार रखने में कामयाबी दी हैं. ऑडियंस को जोड़े रखने में कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी काफी असरदार रही हैं. कंपनी Instagram से लाखों लोगों से जुडी हैं, और वे लेटेस्ट डिज़िटल मीडिया को इस्तेमाल कर अपटुडेट और शेयरहोल्डर्स हैं जो Securities Exchange Commission (SEC) के मीडियम से इसमें इन्वेस्ट करते हैं. ब्रिज बिल्डर इंटरनेशनल इक्विटी फंड और टचस्टोन सैंड्स कैपिटल इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड- यह दो एशियन पेंट्स के main शेयरहोल्डर्स हैं. असरदार प्रोडक्ट सेगमेंट और उनके प्लेसमेंट की वजह से एशियन पेंट्स ने कंस्यूमर्स मार्केट के एक बड़े और ज़रूरी हिस्से पर अपना कब्जा बनाया. इसके मार्केटिंग करने के तरिके बहुत इफेक्टिव हैं, जो कस्टमर्स की जरूरतों को पूरा करते हैं. साथ ही, इसने इसे एक बेहतरीन कंपनी की ब्रैंड इमेज़ बरकरार रखने में कामयाबी दी हैं. ऑडियंस को जोड़े रखने में कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी काफी असरदार रही हैं. कंपनी Instagram से लाखों लोगों से जुडी हैं, और वे लेटेस्ट डिज़िटल मीडिया को इस्तेमाल कर अपटुडेट रहते हैं. ओवरऑल, एशियन पेंट्स ने अपनी बैंड इमेज और प्रोडक्ट क्वालिटी को कामयाबी से बनाया हैं और सालों से इसे आज तक बरकरार रखने में बखूबी कामयाब भी रहे हैं.

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